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[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 20th October 2022

विषयसूची

सामान्य अध्ययन-II

  1. मदरसा सर्वेक्षण की राजनीति
  2. मतदाताओं का नाम लेने और उन्हें शर्मसार करने की निर्वाचन आयोग की रणनीति
  3. स्वास्थ्य संयुक्त कार्य योजना (2022-2026)

सामान्य अध्ययन-III

  1. वन हेल्थ संयुक्त कार्य योजना (2022-2026)

मुख्य परीक्षा संवर्धन हेतु पाठ्य सामग्री

  1. भयानक “सोमवार”

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

  1. लोथल: ‘दुनिया की सबसे पुराना गोदी’
  2. निहोन्शु
  3. स्वदेश दर्शन 2.0
  4. मिशन स्कूल्स ऑफ एक्सीलेंस
  5. विविधता बनाम हेट स्पीच
  6. आतंकवादी इकाईयों की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 सूची
  7. नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क
  8. अवैध कोयला खनन पर हाईकोर्ट का कड़ा रुख
  9. विज्ञान और इंजीनियरिंग अनुसंधान में महिलाओं की भागीदारी- वाईजर
  10. तमिलनाडु में गंभीर रूप से लुप्तप्राय गिद्धों को बचाने के लिए मिशन
  11. मानचित्रण

सामान्य अध्ययन-II


विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

मदरसा सर्वेक्षण की राजनीति

संदर्भ: उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों का सर्वेक्षण कराए जाने संबंधी निर्णय ने इन संस्थानों के भविष्य को चिंताजनक बना दिया है।

सर्वेक्षण कराए जाने का कारण:

  • राज्य सरकार ने इन मदरसों का सर्वेक्षण कराए जाने का कारण, छात्रों के लिए मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता की जांच करना बताया है।
  • उत्तर प्रदेश में 16,513 मान्यता प्राप्त मदरसे हैं। राज्य सरकार 560 इस्लामिक मदरसों को वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है। हालांकि, अभी तक उत्तर प्रदेश सरकार के पास गैर मान्यता प्राप्त मदरसों का कोई रिकॉर्ड नहीं है।

आम जनता में मदरसों के बारे में विचार:

  • अधिकतर मुसलमान मदरसों में पढाई करते हैं, इसीलिए ये आर्थिक रूप से पिछड़े हैं।
  • कभी-कभी, मदरसे कट्टरपंथी इस्लाम की नर्सरी होते हैं।
  • 9/11 के बाद इस तर्क के आधार पर आतंकवाद के खिलाफ युद्ध छेड़ा गया था

सच्चर समिति की रिपोर्ट (2006):

  • राष्ट्रीय स्तर पर, स्कूल जाने की उम्र के केवल 3% मुस्लिम बच्चे मदरसों में जाते हैं।
  • रिपोर्ट में ‘मदरसा’ (Madrasa) और मकतब (Maktab) के बीच अंतर स्पष्ट किया गया है; ‘मकतब’ पड़ोस में स्थित स्कूल होते हैं, जो अक्सर मस्जिदों से जुड़े होते हैं।
  • रिपोर्ट के अनुसार, मदरसों और मकतबों में पढाई करने लेने वाले मुसलमानों का हिस्सा 6 .3 प्रतिशत से अधिक नहीं है।
  • ‘मुसलमान आकांक्षापूर्ण (Aspirational) हैं’, यह सच्चर समिति की रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण अवलोकन है।
  • मुस्लिम माता-पिता अपने बच्चों को आधुनिक शिक्षा संस्थानों में नामांकित देखने के लिए उत्सुक हैं, लेकिन वित्तीय स्थिति खराब होने होने की वजह से वे इसमें असफल रह जाते हैं।

रिपोर्ट में की गयी सिफारिश:

मुस्लिम छात्रों को छात्रवृत्ति दी जानी चाहिए ताकि उन्हें स्कूल छोड़ना न पड़े।

मदरसों का इतिहास:

  • ‘मदरसे’ मुख्यतः बढ़ते औपनिवेशिक हस्तक्षेपों के सामने ‘मुस्लिम पहचान’ को बचाने के लिए उभरे। इनको संदेह था कि मुसलमानों पर ईसाई मूल्यों को थोपा जा सकता है।
  • मदरसों ने ‘विभाजन’ का विरोध किया था। ‘देवबंद’ के प्रसिद्ध मदरसे ने राजनीतिक रुख अपनाया और विभाजन का जमकर विरोध किया।

आगे की राह:

हालांकि, मदरसों और आधुनिकता से संबंधित कुछ मुद्दे मौजूद हैं। सच्चर समिति द्वारा मुसलमानों में पितृसत्ता और बाल अधिकारों से संबंधित उठाए गए थे। इस्लामोफोबिक (Islamophobic) विचारों से प्रेरित होकर, राज्य के किसी भी हस्तक्षेप से केवल ‘बहुसंख्यकवाद’ को प्रगाढ़ होने में मदद मिलेगी।

मुसलमानों को प्राप्त संवैधानिक अधिकार:

  • संविधान का अनुच्छेद 25 कहता है, “सभी व्यक्तियों को अंतःकरण की स्वतंत्रता और सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य के अधीन रहते हुए धर्म को स्वतंत्र रूप से मानने, आचरण करने और प्रचार करने का समान अधिकार है।”
  • अनुच्छेद 26 कहता है कि सभी संप्रदाय धर्म के मामलों में अपने मामलों का प्रबंधन स्वयं कर सकते हैं।
  • मदरसों की स्थापना संविधान के अनुच्छेद 30 के तहत की गई है, इस अनुच्छेद के तहत अल्पसंख्यकों को अपने शैक्षणिक संस्थान स्थापित करने और चलाने का अधिकार दिया गया है।

इंस्टा लिंक्स:

सच्चर समिति की रिपोर्ट की सिफारिशों के क्रियान्वयन की समीक्षा।

मेंस लिंक:

धर्मनिरपेक्षता के नाम पर हमारी सांस्कृतिक प्रथाओं के समक्ष क्या-क्या चुनौतियां हैं? (यूपीएससी 2019)

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: विभिन्न संवैधानिक पदों पर नियुक्ति और विभिन्न संवैधानिक निकायों की शक्तियाँ, कार्य और उत्तरदायित्व।

मतदाताओं का नाम लेने और उन्हें शर्मसार करने की निर्वाचन आयोग की रणनीति

संदर्भ: मतदाताओं का नाम लेने और उन्हें शर्मसार करने (Name and Shame) की रणनीति के तहत निर्वाचन आयोग ने 1,000 से अधिक कॉरपोरेट घरानों के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए है।

ये कॉरपोरेट घराने “अपने कार्यबल (कर्मियों) की चुनावों में भागीदारी” पर निगरानी करेंगे और मतदान नहीं करने वाले ‘कर्मियों के नाम अपनी वेबसाइटों और नोटिस बोर्ड पर प्रकाशित करेंगे।

चिंता का कारण:

ये घटनाक्रम मतदाताओं के अधिकारों, अनिवार्य मतदान, मतदान की गोपनीयता, और निजता तथा जबरदस्ती पर बहस, से जुड़े गंभीर मुद्दों को उठाते हैं।

कम मतदान के संभावित कारण:

  • प्रवासी कामगार (Migrant Workers) अपने कार्यस्थल पर मतदाता के रूप में पंजीकृत नहीं होते हैं।
  • चुनावों ने विश्वास नहीं करने या वैचारिक कारणों से कुछ लोग मतदान नहीं करते हैं।
  • और, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है, कि लाखों मतदाता दैनिक वेतन भोगी श्रमिक होते हैं, और कई बेघर और बीमार होते हैं।

उपरोक्त घटनाक्रम एवं देश के कानून का उल्लंघन:

  • लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 79 D में “निर्वाचक अधिकार” (Electoral Right) को परिभाषित किया गया है, जिसका अर्थ है किसी व्यक्ति को चुनाव में वोट देने या मतदान में भाग नहीं लेने का अधिकार” है। यह कानून मतदाता को मतदान के लिए पूरी तरह से सक्षम बनाता है, लेकिन नागरिकों को मतदान करने के लिए बाध्य नहीं करता है।
  • लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 135B के तहत- किसी भी व्यवसाय, व्यापार, औद्योगिक उपक्रम या किसी अन्य प्रतिष्ठान में कार्यरत प्रत्येक व्यक्ति को एक सवैतनिक अवकाश प्रदान किए जाने का प्रावधान किया गया है। नियोक्ता, ज्यादा से ज्यादा उन लोगों के वेतन में कटौती कर सकते हैं जो छुट्टी लेते हैं लेकिन मतदान करने नहीं जाते हैं।
  • अनुच्छेद 14: निर्वाचक की पहचान की सुरक्षा और गोपनीयता प्रदान करना स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव का अभिन्न अंग है, और वोट डालने वाले मतदाता और वोट नहीं डालने वाले मतदाता के बीच मनमाने ढंग से अंतर करना अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है।
  • सुप्रीम कोर्ट के फैसले: PUCL बनाम भारत संघ, 2013, (NOTA फैसले) मामले में सुप्रीम कोर्ट ने माना है, कि ‘मतदान में भाग नहीं लेना’ और ‘नकारात्मक मतदान’ अनुच्छेद 19 के तहत एक मौलिक अधिकार- ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ के रूप में संरक्षित है।

मतदाता भागीदारी में वृद्धि करने के उपाय:

  • व्यवस्थित मतदाता शिक्षा: 2010 के बाद से सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के चुनावों में चुनाव आयोग द्वारा व्यापक रूप से ‘व्यवस्थित मतदाता शिक्षा’ का प्रदर्शन किया गया। इसके लिए एक ‘मतदाता शिक्षा प्रभाग’ की स्थापना भी की गई है। बाद में इसे चुनाव आयोग द्वारा ‘सुव्यवस्थित मतदाता शिक्षा एवं निर्वाचक सहभागिता’ (Systematic Voters’ Education and Electoral Participation – SVEEP) कार्यक्रम में विकसित कर दिया गया।
  • 2019 के लोकसभा चुनाव में हुए 67.3 फीसदी मतदान ने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए। कई राज्यों में करीब 90 फीसदी या इससे अधिक मतदान हुआ था।
  • ‘बाध्यता’ के बजाय ‘प्रेरणा और सुविधा’ कम मतदान संबंधी मुद्दे को हल करने के लिए सबसे अच्छा तरीका है। जिसे निर्वाचन आयोग ने इसे स्पष्ट रूप से सही ठहराया है।
  • संस्थागत भागीदारी: वोटर क्लब, कैंपस एंबेसडर और यूथ आइकॉन के माध्यम से, तथा नए आवेदनों के लिए कॉलेजों में ड्रॉप बॉक्स लगाकर, स्कूल और कॉलेज पंजीकरण सुविधा को घर-घर पहुंचा सकते हैं।
  • नियोक्ताओं को भी अपने कार्यालयों में इसी तरह की सुविधाएं सृजित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है।
  • कानून को सख्ती से प्रवर्तन: नियोक्ता, मतदान के दिन अपने प्रतिष्ठानों को बंद करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य हैं, लेकिन इसे शायद ही कभी लागू किया जाता है। इसके बजाय, नियोक्ताओं को कर्मचारियों को जाने और मतदान करने में सक्षम बनाने के लिए कुछ घंटों की छुट्टी देने के लिए कह दिया जाता है।

मेंस लिंक:

  1. आदर्श आचार संहिता के विकास के आलोक में भारत के चुनाव आयोग की भूमिका की चर्चा कीजिए। (यूपीएससी 2022)
  2. भारत के चुनाव आयोग की SVEEP पहल क्या है? स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए ‘चुनाव आयोग’ की अन्य कौन सी पहलें हैं? चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

वन हेल्थ संयुक्त कार्य योजना (2022-2026)

संदर्भ:

खाद्य और कृषि संगठन (FAO), संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP), विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और ‘वर्ल्ड ऑर्गनाइजेशन फॉर एनिमल हेल्थ’ ने मिलकर मानव, पौधों और पर्यावरण के लिए स्वास्थ्य संबंधी खतरों को दूर करने के लिए ‘वन हेल्थ संयुक्त कार्य योजना’ (One Health Joint Plan of Action) लॉन्च किया है।

‘वन हेल्थ’ के बारे में:

वन हेल्थ इनिशिएटिव टास्क फोर्स’ द्वारा दी गई परिभाषा के अनुसार, ‘वन हेल्थ’ (One Health) एक दृष्टिकोण है, जिसके तहत मनुष्यों, जानवरों और हमारे पर्यावरण के लिए ‘सर्वोत्कृष्ट स्वास्थ्य’ हासिल करने हेतु स्थानीय, राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर काम कर रही विभिन्न संस्थाओं से एक साथ मिलकर कार्य करने का आह्नान किया जाता है।

‘वन हेल्थ मॉडल’, रोग नियंत्रण करने हेतु बहुविषयक दृष्टिकोण को सरल बनाता है ताकि उभरते और मौजूदा जूनोटिक खतरों को नियंत्रित किया जा सके।

कार्य योजना:

  • स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने के लिए क्षमताओं में वृद्धि करना;
  • जूनोटिक महामारियों और महामारियों से जोखिम को कम करना;
  • जूनोटिक, उपेक्षित उष्णकटिबंधीय और वेक्टर जनित रोगों को नियंत्रित और समाप्त करना;
  • खाद्य सुरक्षा जोखिमों का प्रभावी ढंग से आकलन, प्रबंधन और संचार करना;
  • रोगाणुरोधी प्रतिरोध (जिसे ‘मौन महामारी’ कहा जाता है) पर अंकुश लगाना;
  • पर्यावरण और स्वास्थ्य नीतियों का ‘वन हेल्थ’ के साथ समन्वय करना।

वन हेल्थकी आवश्यकता:

  • मानव स्वास्थ्य को अलग-थलग नहीं माना जा सकता है- यह उस वातावरण की गुणवत्ता पर अत्यधिक निर्भर करता है जिसमें लोग रहते हैं: लोगों को स्वस्थ रहने के लिए, उन्हें स्वस्थ वातावरण की आवश्यकता होती है।
  • वैश्विक तापमान में वृद्धि ‘रोगवाहकों’ के लिए सीमा विस्तार करने में सहायक हो रही है, जिसके परिणामस्वरूप मनुष्यों और जानवरों में वेक्टर जनित रोगों के फैलने की संभावना बढ़ जाती है।
  • केवल तापमान से संबंधित मृत्यु दर, मोटापे और आहार से संबंधित बीमारी से होने वाली मौतों के मौजूदा स्तरों तक बढ़ने की उम्मीद है।
  • COVID-19 और जलवायु-स्वास्थ्य संकट।
  • जल और खाद्य असुरक्षा में वृद्धि और सुरक्षा खतरे।

आवश्यकता:

  • जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता एजेंडा में ‘स्वास्थ्य को मुख्यधारा में लाना’ और संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क अभिसमय (UNFCCC) के अंतर्गत स्वास्थ्य कार्यक्रमों को निधि देना।
  • सभी विकास परियोजना मूल्यांकनों में ‘स्वास्थ्य प्रभाव आकलन’ को एकीकृत करना।
  • प्रस्तावित पर्यावरणीय निवेश (जैसे REDD+) के स्वास्थ्य सह-लाभों का आकलन और मात्रा निर्धारित करना।
  • मानव और पशु स्वास्थ्य के लिए मौजूदा जलवायु और स्वास्थ्य पूर्वानुमान उपकरणों और प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों के अनुप्रयोग में वृद्धि करना।

निष्कर्ष:

हेल्थकेयर के लिए पारिस्थितिकी तंत्र-आधारित दृष्टिकोण- मनुष्यों, जानवरों और पारिस्थितिक तंत्र के स्वास्थ्य के बीच इंटरफेस में मौजूद है, और सभी प्रजातियों और उनके पर्यावरण के स्वास्थ्य के बीच अटूट संबंधों को चिह्नित करता है। मूल सिद्धांत यह है, कि ‘स्वास्थ्य और कल्याण’ को संसाधन-रहित, प्रदूषित और सामाजिक रूप से अस्थिर ग्रह पर कायम नहीं रखा जा सकता है।

इंस्टा लिंक्स:

वन हेल्थ

मेंस लिंक:

वन हेल्थ दृष्टिकोण’ से आप क्या समझते हैं? विभिन्न संक्रमणों के प्रकोप को रोकने में इसकी भूमिका का परीक्षण कीजिए। (250 शब्द)

स्रोत: डाउन टू अर्थ


सामान्य अध्ययनIII


विषय:  संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

जलवायु कार्रवाई हेतु ‘लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट’ के लिए नया अवसर

संदर्भ: संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ‘एंटोनियो गुटेरेस’ भारत की तीन दिवसीय यात्रा पर हैं, इस दौरान वह प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के साथ ‘मिशन LiFE’ (Lifestyle for the Environment) अर्थात ‘पर्यावरण के लिए जीवनशैली’ मिशन से संबंधित एक कार्यक्रम में भाग लेंगे।

वर्तमान में विश्व के समक्ष मौजूद संकट:

  • ‘जलवायु परिवर्तन’, ‘प्रदूषण’ एवं ‘जैव विविधता क्षति’ का तिहरा ग्रह संकट;
  • ग्लोबल वार्मिंग; पिछले एक दशक में ही नौ सबसे गर्म वर्ष रिकॉर्ड किए गए हैं। इस साल की रिकॉर्ड-तोड़ ग्रीष्म लहरें, बाढ़, सूखा और मौसम के अन्य चरम रूपों ने हमें तेजी से इन विनाशकारी प्रभावों का सामना करने के लिए मजबूर किया है।
  • ‘जलवायु परिवर्तन’ पहले से ही अस्त-व्यस्त दुनिया में एक विदारण गुणक के रूप में कम कर रहा है, और इसकी वजह से ‘वैश्विक सतत विकास लक्ष्यों’ में अब तक हुई प्रगति वापस होती जा रही है।
  • यूक्रेन युद्ध ऊर्जा, भोजन और जीवन-यापन के विनाशकारी संकट को बढ़ावा दे रहा है।

इन संकटों से निपटने के लिए उठाए गए कदम:

  • पेरिस समझौता और ग्लासगो में आयोजित COP26 शिखर सम्मेलन विभिन्न देशों द्वारा उत्सर्जन को तत्काल सीमित करने के लिए उठाए जा रहे कदमो का सामूहिक प्रतिनिधित्व करते हैं। हमारी मौजूदा प्रतिबद्धताएं तापमान को 1.5°C तक सीमित रखने के लक्ष्य को हासिल करने की हैं, जो हमें तबाही से बचने का सबसे अच्छा मौका देती है।
  • उपभोक्‍ता भागीदारी का अभाव: सरकारें और उद्योग, जलवायु संकट से निपटने के लिए बड़ी जिम्‍मेदारी निभाते हैं, जबकि हम उपभोक्‍ता के रूप में गैर-सतत् उत्‍पादन विधियों को जारी रखने में बड़ी भूमिका निभाते हैं।

लाइफ़ (LiFE) मिशन:

लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट (LiFE) अभियान को प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2021 में ग्लासगो में आयोजित COP26 में लॉन्च किया गया था।

  • प्रधान मंत्री ने वैश्विक नेताओं से पर्यावरण के अनुकूल जीवन शैली अपनाकर पर्यावरण की सुरक्षा के लिए इस आंदोलन में शामिल होने का आह्वान किया।
  • LiFE (Lifestyle for the Environment) अवधारणा यह मानती है, कि छोटी-छोटी व्यक्तिगत क्रियाएं ग्रह के पक्ष में संतुलन बना सकती हैं। लेकिन इसके लिए हमें मार्गदर्शक ढांचे, सूचना साझाकरण और वैश्विक स्तर पर एक आंदोलन की आवश्यकता है।
  • LiFE अवधारणा का मानना है, कि जवाबदेही, योगदान के सापेक्ष होती है। दुनिया की सबसे गरीब आधी आबादी द्वारा उत्सर्जन की मात्रा, अभी भी 1% सबसे धनी लोगों द्वारा किए जाने वाले उत्सर्जन से भी कम है।

विभेदित दृष्टिकोण (Differentiated approaches): प्रत्येक ‘प्रो प्लैनेट’ हितधारक को विभेदित दृष्टिकोणों के अनुसार प्रेरित किया जा सकता है।

LiFE मिशन द्वारा तैयार किए गए ‘सचेत विकल्प’, घर पर ऊर्जा की बचत; साइकिल चलाना और ड्राइविंग आदि के बजाय सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करना जैसी क्रियाओं, और ग्राहकों और कर्मचारियों के रूप में जलवायु के अनुकूल विकल्पों की मांग करने के लिए हमारी स्थिति का लाभ उठाने की भावना को जीवित करते हैं।

प्रेरित करना: LiFE अवधारणा के कई लक्ष्यों को, सकारात्मक व्यवहार को प्रोत्साहित करने के लिए ‘उकसाने’ या ‘विनम्र निवेदन’ जैसी तकनीकों को लागू करके प्राप्त किया जा सकता है।

  • संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP), कैफेटेरिया में छोटी प्लेटों की शुरुआत करके खाद्य अपशिष्ट को हतोत्साहित करने, तथा कूड़ेदान के ढक्कनों को आकर्षक बनाकर रीसाइक्लिंग को प्रोत्साहित करने जैसी सिद्ध ‘प्रेरक तकनीकों’ को नियोजित करता है।
  • UNEP के अनुसार, घरेलू खपत और जीवन शैली के लिए, दो-तिहाई से अधिक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है – इस प्रकार इसके लिए हरित उपभोग की आदतों को व्यापक रूप से अपनाने की आवश्यकता है।

भारत का ट्रैक रिकॉर्ड:

भारत के पास, राष्ट्रीय मिशनों की आकांक्षाओं को पूरे समाज के प्रयासों में बदलने का एक प्रमाणित ट्रैक रिकॉर्ड मौजूद है।

  • उदाहरण के लिए, स्वच्छ भारत मिशन की सफलता। इस मिशन ने सामाजिक-आर्थिक स्तर के व्यक्तियों और समुदायों को सामूहिक अच्छे स्वास्थ्य और स्वच्छता के चालक बनने के लिए प्रेरित किया।
  • COP26 में मोदी द्वारा घोषित ‘पंचामृत लक्ष्य’, अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन का समर्थन, आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढांचे के लिए गठबंधन और दक्षिण-दक्षिण सहयोग मंच आदि, भारत के उत्कृष्ट ‘ट्रैक रिकॉर्ड’ के उदहारण हैं।

विकसित दुनिया का दायित्व:

  • एक उच्च आय वाले देश में एक व्यक्ति का औसत कार्बन फुटप्रिंट कम से कम विकसित देश के एक व्यक्ति की तुलना में 80 गुना अधिक है।
  • विकसित दुनिया से इस संक्रमण के आनुपातिक हिस्से का दायित्व उठाने की मांग करना सर्वथा उचित है।
  • महात्मा गांधी के शब्दों में, “दुनिया, हर किसी की जरूरत के लिए ‘पर्याप्त’ है, लेकिन हर किसी के लालच के लिए पर्याप्त नहीं है।”

निष्कर्ष:

भारत, जलवायु-संकट से निपटने की शुरूआत करने के लिए एक बेहतरीन जगह है। 1.3 बिलियन से अधिक आबादी के साथ, यदि हम यहां एक सच्चा जन आंदोलन शुरू करते हैं, तो इसका प्रभाव बहुत अधिक होगा। जैसे-जैसे भारत आगे बढेगा, हम दुनिया को तेजी से अनुसरण करते हुए देखेंगे।

इंस्टा लिंक:

प्रीलिम्स लिंक:

  1. पेरिस समझौता
  2. CoP 26
  3. भारत के पंचामृत लक्ष्य
  4. अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन
  5. CDRI

मेंस लिंक:

LiFE मिशन पर एक टिप्पणी लिखिए और यह मिशन वैश्विक कार्बन उत्सर्जन को कम करने में कैसे मदद करेगा। चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू


मुख्य परीक्षा संवर्धन हेतु पाठ्य सामग्री


भयानक “सोमवार”

संदर्भ: गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने एक ट्वीट के माध्यम से आधिकारिक तौर पर ‘सोमवार’ (Monday) को सप्ताह के सबसे खराब दिन (worst day of the week) – ‘भयानक सोमवार’ (dreaded Monday) – के रूप में नामित किया है।

यदि आप ‘नौ से पांच’ नौकरी करते है, तो खासकर एक मजेदार सप्ताहांत के बाद ‘सोमवार’ से नफरत करने की संभावना बहुत अधिक है। अधिकांश लोग छुट्टी के मूड में होते हैं और रविवार को कोई ‘समय सीमा’ नहीं होती है, ऐसे में उनके लिए अगले दिन ठीक 9 बजे काम के मोड में वापस आना मुश्किल होता है।


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


लोथल: दुनिया की सबसे पुराना गोदी

संदर्भ: प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से गुजरात के लोथल में ‘राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर’ (National Maritime Heritage Complex NMHC) स्थल के निर्माण की समीक्षा की।

‘लोथल’ के बारे में:

लोथल (Lothal) सिंधु घाटी सभ्यता के सबसे दक्षिणी स्थलों में से एक था, जो अब गुजरात राज्य के ‘भाल क्षेत्र’ में स्थित है। माना जाता है कि ‘बंदरगाह शहर’ 2,200 ईसा पूर्व में बनाया गया था। लोथल, प्राचीन काल में एक संपन्न व्यापार केंद्र था। यहाँ से मोतियों, रत्नों और गहनों का व्यापार पश्चिम एशिया और अफ्रीका तक होता था।

  • गोवा में स्थित ‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशनोग्राफी’ ने इस पुरातात्विक स्थल पर समुद्री माइक्रोफॉसिल और नमक, जिप्सम क्रिस्टल की खोज की है, जो यह दर्शाता है कि इस स्थल पर समुद्री जल भरा हुआ था, और यह निश्चित रूप से एक डॉकयार्ड था।
  • लोथल को अप्रैल 2014 में यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल के रूप में नामित किया गया था, और इसका आवेदन यूनेस्को की अस्थायी सूची में लंबित है।

राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर (NMHC):

  • राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर (NMHC) परियोजना की शुरुआत मार्च 2022 में हुई थी। इस परिसर में लोथल की लघु-प्रतिकृति जैसी कई नवीन विशेषताएं होंगी, जिसमे इमर्सिव तकनीक के माध्यम से हड़प्पा वास्तुकला और जीवन शैली को फिर से दर्शाया जाएगा; इसके अलावा चार थीम पार्क – मेमोरियल थीम पार्क, मैरीटाइम एंड नेवी थीम पार्क, क्लाइमेट थीम पार्क और एडवेंचर एंड एम्यूजमेंट थीम पार्क होंगे।
  • इसमें दुनिया का सबसे ऊंचा लाइटहाउस संग्रहालय बनाया जाएगा, जिसमे हड़प्पा काल से लेकर आज तक भारत की समुद्री विरासत को उजागर करने वाली 14 दीर्घाएं होगी, और साथ ही भारतीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विविध समुद्री विरासत को प्रदर्शित करने वाला एक अपतटीय राज्य मंडप भी होगा।

निहोन्शु

संदर्भ: जापानी दूतावास ने चावल से बनने वाला एक मादक पेय ‘निहोन्शु’ (Nihonshu) को ‘जीआई टैग’ दिए जाने के लिए आवेदन किया है।

  • ‘जीआई टैग’ (GI tag), विश्व व्यापार संगठन के TRIPS और पेरिस अभिसमय का हिस्सा है।
  • भारत ने वस्तुओं के ‘भौगोलिक संकेतक (पंजीकरण और संरक्षण) अधिनियम, 1999’ को अधिनियमित किया है।

चित्र: निहोन्शु के प्रकार

 

स्वदेश दर्शन 2.0

संदर्भ: केंद्र सरकार 15 राज्यों के चुने हुए स्थलों सहित स्वदेश दर्शन योजना 2.0 (Swadesh darshan scheme 2.0) शुरू करने की योजना बना रही है।

‘स्वदेश दर्शन योजना’ के बारे में:

स्वदेश दर्शन योजना (Swadesh Darshan Scheme) को पर्यटन मंत्रालय द्वारा वर्ष 2014-15 में देश में ‘विषय आधारित पर्यटन परिपथ’ विकसित करने के लिए शुरू किया गया था।

  • यह परियोजना घटकों के लिए 100% केंद्र द्वारा वित्त पोषित योजना है।
  • इसमें केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और कॉर्पोरेट क्षेत्र की ‘कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व’ (CSR) पहल के तहत ‘स्वैच्छिक वित्त पोषण’ का लाभ उठाने का भी प्रावधान है।
  • अलग-अलग परियोजनाओं की फंडिंग अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग होगी और ‘कार्यक्रम प्रबंधन सलाहकार’ (पीएमसी) द्वारा तैयार की गई विस्तृत परियोजना रिपोर्ट के आधार पर इसे अंतिम रूप दिया जाएगा।

पर्यटन क्षेत्र की स्थिति:

  • जीडीपी में योगदान के मामले में विश्व यात्रा और पर्यटन परिषद की 2019 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत का पर्यटन 10वें स्थान पर है। इसने भारत के सकल घरेलू उत्पाद में 6.8% और सृजित कुल रोजगार का 8% योगदान दिया।
  • भारत में विश्व धरोहर सूची में सूचीबद्ध 40 स्थल – 32 सांस्कृतिक, 7 प्राकृतिक और 1 मिश्रित स्थल- शामिल हैं।

भारत द्वारा, हाल ही में हरित और डिजिटल पर्यटन पर ध्यान केंद्रित करते हुए मसौदा राष्ट्रीय पर्यटन नीति पेश की गयी है। इसके मुख्य बिंदु थे-

  • पर्यटन क्षेत्र को उद्योग का दर्जा प्रदान किया जाएगा।
  • MSMEs से संबंधित हरित, डिजिटल, गंतव्य प्रबंधन, कौशल और पर्यटन से संबंधित सहायता पर ध्यान दिया जाएगा।

स्वदेश दर्शन योजना 2.0: दिसंबर से नई योजना शुरू की जाएगी।

उद्देश्य :

  • देश में थीम आधारित पर्यटन सर्किट विकसित करना।
  • स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं में पर्यटन के योगदान को बढ़ाने का प्रयास करना।
  • पर्यटन और आतिथ्य में निजी क्षेत्र के निवेश को बढ़ाना।

क्या आप जानते हैं?

  • पर्यटन मंत्रालय के अनुसार, 2021 में घरेलू पर्यटकों का दौरा लगभग 677 मिलियन और 2022 में (आज तक उपलब्ध डेटा) 572 मिलियन था।
  • स्वदेश दर्शन योजना 1.0 के तहत स्वीकृत 76 परियोजनाओं में से 52 को पूरा किया जा चुका है।
  • तीसरे टूरिज्म सैटेलाइट विवरण के अनुसार, देश के रोजगार में पर्यटन का योगदान लगभग 15% है।
  • पर्यटन द्वारा सृजित कुल रोजगार लगभग 80 मिलियन (8 करोड़) हैं।

मिशन स्कूल्स ऑफ एक्सीलेंस

संदर्भ: प्रधान मंत्री ने गुजरात के अडालज के त्रिमंदिर में ‘मिशन स्कूल ऑफ एक्सीलेंस’ (Mission Schools of Excellence) का शुभारंभ किया।

प्रमुख बिंदु:

मिशन गुजरात में शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में मदद करेगा:

  • नए कक्षा-भवन
  • स्मार्ट क्लासरूम
  • कंप्यूटर लैब
  • स्कूलों के बुनियादी ढांचे का समग्र उन्नयन।

इसेक तहत, एक लाख से अधिक स्मार्ट क्लासरूम के साथ 50 हजार नए क्लासरूम बनने जा रहे हैं।

5G इंटरनेट: यह दूरस्थ क्षेत्रों सहित सभी के लिए सर्वोत्तम सामग्री, शिक्षाशास्त्र और शिक्षक उपलब्ध कराने में मदद करेगा।

 

गुणोत्सव:

यह शिक्षा की गुणवत्ता पर केंद्रित त्योहार है।

  • इस योग्यता में, छात्रों के कौशल व क्षमताओं का मूल्यांकन किया गया और उचित समाधान सुझाए गए।
  • उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि गुजरात में विद्या समीक्षा केन्‍द्र में गुणोत्सवका अधिक उन्नत प्रौद्योगिकी आधारित संस्करण काम कर रहा है।

विविधता बनाम हेट स्पीच

संदर्भ: संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने भारतीयों से ‘हेट स्पीच’ की निंदा करने और भारत में मानवाधिकारों और बहुलवाद (Pluralism) के संरक्षण के लिए मजबूती से आवाज उठाने का आग्रह किया।

प्रमुख बिंदु:

  • संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरस ने कहा कि ”जब भारत अपने घर में समावेशी व्यवस्था और मानवाधिकारों को लेकर मज़बूती से प्रतिबद्धता दिखाएगा, तभी उसकी आवाज़ को वैश्विक मंच पर भी गंभीरता से लिया जाएगा।
  • मानवाधिकार आयोग का सदस्य होने के नाते वैश्विक मानवाधिकारों को आकार देना और अल्पसंख्यक वर्ग समेत सभी लोगों के अधिकारों की रक्षा करना भारत की जिम्मेदारी है।

भारतीय विविधता को समृद्ध करने हेतु उपाय:

  • गांधी के मूल्यों का अभ्यास करना;
  • सभी लोगों, विशेष रूप से सबसे कमजोर लोगों के अधिकारों और सम्मान को सुरक्षित और बनाए रखना;
  • समावेशन के लिए ठोस कार्रवाई करना;
  • बहुसंस्कृतिवाद: बहुसांस्कृतिक, बहु-धार्मिक और बहु-जातीय समाजों के महत्व और योगदान को पहचानना;
  • हेट स्पीच: नफरती भाषण (Hate speech) की स्पष्ट रूप से निंदा करना।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव द्वारा भारत के लिए सुझाव:

  • शांति: भारत को शांति के लिए बोलना जारी रखना चाहिए;
  • नेतृत्व: अपने वैश्विक नेतृत्व का विस्तार करना चाहिए;
  • सतत विकास लक्ष्य: अपने विकास और विदेश नीति को ‘सतत विकास लक्ष्यों’ और ‘पेरिस समझौते’ के साथ संरेखित करना चाहिए;
  • वैश्विक संकट: आज के वैश्विक संकटों के लिए अभिनव समाधान खोजने चाहिए।

विविधता (Diversity): इसका अर्थ है सामूहिक विभिन्नता, यानी ऐसे विभिन्नताएं जो लोगों के एक समूह को दूसरे से अलग करती हैं।

  • ये विभिन्नताएं जैविक, धार्मिक, भाषाई आदि किसी भी प्रकार की हो सकती हैं।
  • ‘विविधता’ का अर्थ विभिन्न प्रकार की नस्लों, धर्मों, भाषाओं, जातियों और संस्कृतियों से है।

नफरती भाषण (Hate speech): ‘हेट स्पीच’ का शाब्दिक अर्थ, धार्मिक विश्वासों, यौन अभिविन्यास, लिंग आदि के आधार पर हाशिए पर स्थित व्यक्तियों के विशेष समूह के खिलाफ नफरत के लिए उकसाना है।

हेट स्पीच से संबंधित दंडात्मक प्रावधान:

  1. भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code– IPC) की धारा 153A में ‘धर्म, जाति, जन्म स्थान, निवास, भाषा, आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देने और सद्भाव बनाए रखने के लिए प्रतिकूल कार्य करने’ को दंडित करने का प्रावधान है।
  2. आईपीसी की धारा 153B के तहत दो समूहों के बीच दुश्मनी और नफरत फैलाने वाले कृत्यों को दंडित करने का प्रावधान है।
  3. आईपीसी की धारा 295A, जानबूझकर या दुर्भावनापूर्ण इरादे से किसी वर्ग की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के लिए दंडित करने से संबंधित है।
  4. आईपीसी की धारा 298 में ‘किसी भी व्यक्ति की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से बोलने, शब्द आदि करने’ को दंडित करने का प्रावधान है।
  5. आईपीसी की धारा 505 में विभिन्न समूहों के बीच द्वेष या घृणा उत्पन्न करने वाली सामग्री के प्रकाशन और प्रसार को अपराध माना गया है।
  6. जनप्रतिनिधित्व अधिनियम (RPA), 1951 का भाग VII अभद्र भाषा को चुनाव के दौरान किए गए अपराध के रूप में दो श्रेणियों -भ्रष्ट आचरण और चुनावी अपराध- में वर्गीकृत करता है, तथा धारा 8 के तहत, वाक् स्वतंत्रता का अवैध उपयोग करने वाले किसी व्यक्ति को चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित किया गया है।

आतंकवादी इकाईयों की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 सूची

संदर्भ: चीन ने पाकिस्तान आधारित घोषित आतंकवादी को ‘आतंकवादी इकाईयों की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 सूची’ (UNSC 1267) में शामिल करने (Listing) हेतु भारत और अमेरिका द्वारा संयुक्त रूप से पेश किए गए प्रस्ताव पर रोक लगा दी है।

प्रमुख बिंदु:

  • भारत और अमेरिका ने संयुक्त रूप से, लश्कर ए तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद के बेटे तल्हा सईद और शाहिद महमूद की लिस्टिंग के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव पेश किया था।
  • तल्हा सईद और शाहिद महमूद, दोनों, भारत के गृह मंत्रालय की ” UAPA” आतंकवादी सूची और अमेरिकी ट्रेजरी सूची में नामित आतंकवादी हैं।
  • आतंकवाद रोधी समिति: भारत अगले सप्ताह मुंबई में चीन सहित UNSC की आतंकवाद-रोधी समिति (Counter-Terrorism Committee – CTC) के सभी सदस्यों की मेजबानी करेगा।

चीन द्वारा ‘रोक लगाए जाने दिया गया कारण:

  • अपर्याप्त जानकारी।
  • इन विशिष्ट मामलों का अध्ययन करने के लिए कुछ समय चाहिए।

भारत के पास विकल्प:

  • सीमा पार आतंकवाद पर अंतरराष्ट्रीय सहमति बनाना: UNSC आतंकवादी सूचीकरण ऐसा ही एक मार्ग रहा है।
  • विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संगठनों के मंच का उपयोग करना: जैसा कि भारत ने ‘फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स’ का किया है, जिसमे पाकिस्तान को “ग्रे लिस्ट” में रखा गया है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 समिति:

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 समिति (UNSC 1267 committee) में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के सभी स्थायी और अस्थायी सदस्य शामिल हैं।

  • ‘आतंकवादियों की 1267 सूची’ एक वैश्विक सूची है, जिसमें UNSC द्वारा घोषित आंतकवादी शामिल होते हैं।
  • यह समिति आतंकवादियों की आवाजाही को सीमित करने, विशेष रूप से यात्रा प्रतिबंधों से संबंधित, संपत्ति की जब्ती और आतंकवाद के लिए हथियारों पर प्रतिबंध के लिए संयुक्त राष्ट्र के प्रयासों पर चर्चा करती है।

लिस्टिंग प्रक्रिया:

  • कोई भी सदस्य देश किसी व्यक्ति, समूह या संस्था को ‘आतंकवादियों की 1267 सूची’ में सूचीबद्ध करने का प्रस्ताव प्रस्तुत कर सकता है।
  • इस प्रस्ताव में ऐसे कार्य या गतिविधियां शामिल होनी चाहिए जो यह दर्शाती हों कि प्रस्तावित व्यक्ति/समूह/इकाई ने “आईएसआईएल, अल-कायदा या किसी भी सेल, सहयोगी, समूह या उसके व्युत्पन्न इकाई” में शामिल रहा हो।
  • आम सहमति: लिस्टिंग और डीलिस्टिंग पर निर्णय सर्वसम्मति से किए जाते हैं।
  • तकनीकी रोक: समिति का कोई भी सदस्य प्रस्ताव पर “तकनीकी रोक” लगा सकता है और प्रस्तावित सदस्य देश से प्रस्ताव के बारे में अधिक जानकारी मांग सकता है।

 

नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क

संदर्भ: हाल ही में केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने सार्वजनिक परामर्श के लिए ‘नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क’ (National Credit Framework – NCrF) का मसौदा जारी किया है।

‘नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क’ के बारे में:

नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क (NCrF) शैक्षिक व कौशल संस्थानों और कार्यबल के कौशल प्रशिक्षण, पुन: कौशल, अप-स्किलिंग, मान्यता और मूल्यांकन के लिए एक अंब्रैला फ्रेमवर्क है।

  • ‘नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क’ राष्ट्रीय उच्च शिक्षा योग्यता फ्रेमवर्क (NHEQF), राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क (NSQF) और राष्ट्रीय स्कूल शिक्षा योग्यता फ्रेमवर्क (NSEQF) को शामिल करके स्कूली शिक्षा, उच्च शिक्षा और व्यावसायिक और कौशल शिक्षा के माध्यम से अर्जित क्रेडिट्स को निर्बाध रूप से एकीकृत करेगा।
  • यह उन छात्र-छात्राओं के लिए शिक्षा में तेजी को समर्थन देता है जिनके पास सीखने की अनूठी प्रतिभा है।
  • ‘नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क’ पारंपरिक पारिवारिक विरासत, काम के अनुभव या अन्य तरीकों से अनौपचारिक रूप से ज्ञान और कौशल हासिल कर चुके कार्यबल के पहले से सीखे होने को मान्यता देता है।

प्रस्तावित लाभ:

 

 

अवैध कोयला खनन पर हाईकोर्ट का कड़ा रुख

संदर्भ:

मेघालय के उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि “अवैध रूप से खनन किए गए कोयले का एक कण भी” ट्रकों या अन्य वाहनों में ले जाने की अनुमति नहीं दी जाए।

अवैध रूप से कोयला खनन पर, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल, 2014  और सुप्रीम कोर्ट के आदेश 2016 से लागू हैं।

पूर्वोत्तर भारत में कोयला खनन:

  • छठी अनुसूची: मेघालय एक आदिवासी राज्य है जहां छठी अनुसूची लागू है, सभी भूमि निजी स्वामित्व में है, और इसलिए निजी पार्टियों द्वारा कोयला खनन किया जाता है।
  • हालाँकि, इस अनुसूची में खनन का स्पष्ट रूप से उल्लेख नहीं है।
  • कोयला निक्षेप: राज्य में बड़े पैमाने पर कोयले के भंडार, ज्यादातर जयंतिया पहाड़ियों में, क्षैतिज परतों में पाए जाते हैं, ये परतें केवल कुछ फीट ऊंची हैं और पहाड़ियों से होकर गुजरती हैं, यही कारण है कि यहाँ ‘ओपन कास्ट खनन’ के बजाय ‘रैट-होल खनन’ का अभ्यास किया जाता है।
  • सस्ता श्रम: अधिकांश श्रमिक (बच्चों सहित) नेपाल, असम के गरीब क्षेत्रों और बांग्लादेश से आते हैं।

रैट-होल कोयला खनन

रैट-होल खनन (Rathole Coal Mining) एक खतरनाक तकनीक है जिसमें कोयला निकालने के लिए पृथ्वी में संकरी खड़ी सुरंगों को खोदा जाता है। चूंकि इनमें से अधिकांश सुरंगें बिना दिशा-निर्देशों का पालन किए खोदी जाती है, इसलिए श्रमिकों (अधिकांश बच्चे) के लिए काफी खतरनाक होती हैं।

प्रतिबंध का कारण:

  • नदी प्रदूषण: रैट-होल खनन ने जयंतिया पहाड़ियों में तीन नदियों – मिंटू, चंद्र और लुखा-को जहरीला कर दिया है।
  • जल प्रदूषण: परित्यक्त खानों से अम्लीय जल निकासी, जल प्रदूषण का एक प्रमुख कारण था।
  • बाल श्रम और तस्करी: ‘रैट-होल’ खनन में शामिल अधिकांश श्रमिक बच्चे हैं क्योंकि उनकी छोटी शारीरिक रचना जो छोटी खदान सुरंगों में फिट होती है।
  • स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं: स्थानीय लोगों के साथ-साथ श्रमिकों में फाइब्रोसिस, न्यूमोकोनियोसिस और सिलिकोसिस जैसी विभिन्न बीमारियों का कारण बनता है।
  • पर्यावरण संबंधी चिंताएं: जैव विविधता और कृषि कृषि भूमि का नुकसान।

विज्ञान और इंजीनियरिंग अनुसंधान में महिलाओं की भागीदारी- वाईजर

 

संदर्भ:हाल ही में, शोधकर्ताओं को भारत-जर्मन विज्ञान और प्रौद्योगिकी केंद्र (IGSTC) के तहत शुरू किए गए ‘विज्ञान और इंजीनियरिंग अनुसंधान में महिला भागीदारी’ (Women Involvement in Science and Engineering Research – WISER) कार्यक्रम के तहत सम्मानित किया गया।

उद्देश्य: इसका उद्देश्य वैज्ञानिक क्षमता का निर्माण करना और अनुसंधान एवं विकास और उद्योग परियोजनाओं के लिए भारत और जर्मनी में महिला शोधकर्ताओं का सहयोग करना है।

यह कार्यक्रम STEM के सभी क्षेत्रों के लिए खुला है।

 

तमिलनाडु में गंभीर रूप से लुप्तप्राय गिद्धों को बचाने के लिए मिशन

 

संदर्भ: गिद्धों के लिए केंद्र की राष्ट्रीय संरक्षण योजना 2020-25 पर कार्य करते हुए, तमिलनाडु सरकार ने गिद्धों (Vultures) के प्रभावी संरक्षण के लिए एक संस्थागत ढांचा स्थापित करने के लिए एक राज्य स्तरीय समिति का गठन किया।

गिद्ध:

  • गिद्धों (Vultures) के मरने की जानकारी, पहले इस प्रजाति के ‘डिक्लोफेनाक’ दवा के संपर्क में आने के बाद दी गई थी।
  • गिद्ध, पर्यावरण को साफ रखने के लिए प्रकृति के मैला ढोने वालों के रूप में एक अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  • गिद्ध, हड्डियाँ भी खाते हैं। यहां तक ​​कि अगर यह एंथ्रेक्स [दूषित] शव का सेवन करता है, तो भी यह प्रभावित नहीं होते हैं।

भारत में पाए जाने वाले गिद्ध:

भारत में गिद्धों की नौ प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें से चार IUCN की गंभीर रूप से संकटग्रस्त सूची में हैं।

 मानचित्रण