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[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 12th October 2022

 

विषयसूची

सामान्य अध्ययन-II

  1. भारत की शिक्षा प्रणाली के लिए आवश्यकताएं

सामान्य अध्ययन-III

  1. ‘गैर-निष्पादित आस्तियों’ का संबंध सिर्फ ‘बैंक गवर्नेंस’ से नहीं

मुख्य परीक्षा संवर्धन हेतु पाठ्य सामग्री (नैतिकता/निबंध)

  1. डिजिटल डिटॉक्स: लोगों को बात करने में मदद करने हेतु रोजाना ऑफलाइन होने वाला एक गांव

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

  1. बौद्ध धर्मांतरण दिवस
  2. विलंबित मानसून
  3. सूचना आयोगों में आरटीआई याचिकाओं का ढेर
  4. ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना में ‘गैर-पारंपरिक आजीविका’ शामिल
  5. वरिष्ठता का सिद्धांत और अगले भारत के मुख्य न्यायाधीश
  6. क्रिप्टो परिसंपत्तियों के लिए OECD का क्रॉस-बॉर्डर रिपोर्टिंग फ्रेमवर्क
  7. संयुक्त राष्ट्र विश्व भू-स्थानिक सूचना महासभा
  8. मानचित्रण

सामान्य अध्ययन-II


विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

भारत की शिक्षा प्रणाली के लिए आवश्यकताएं

संदर्भ: इस आर्टिकल में स्कूलों और कॉलेजों में भारतीय भाषाओं में अनुवाद और नैतिक शिक्षा में निवेश करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया है।

अनुवाद का महत्व:

  • ‘अनुवाद’ (Translation) का महत्व विज्ञान, दर्शन, चिकित्सा, समाजशास्त्र, धर्म और लिंग एवं जाति अध्ययन के समान है।
  • ‘अनूदित ग्रंथ’ (Translated texts) चुपचाप विभिन्न अनुभवों के द्वार खोलते हैं और पाठकों को अपने अनुभवों, भावनाओं और परिस्थितियों से पूरी तरह अलग तरीके से सुग्राही बनाते हैं।

शिक्षा में भाषा का महत्व:

  • भाषाएं अपने मूल क्षेत्र की संस्कृति और इतिहास से जुड़ी हुई होती हैं।
  • लोगों को बेहतर जीवन के लिए प्रेरित करने वाले उज्ज्वल विचार इस माध्यम से व्यक्त किए जाते हैं।
  • ‘पेचीदा नियम’, जीवन में जंजीरे डाल सकते है और उन्हें दूर से ही नियंत्रित कर सकते हैं, और ‘शब्द’ किसी गतिविधि या आंदोलन को सशक्त कर सकते है और इसे पीढियों तक जारी रख सकते है- ‘भाषा’ इन दोनों (पेचीदा नियमों और शब्दों) को सुगम बनाती है।

आवश्यक कदम:

  • मूल्य आधारित शिक्षा की आवश्यकता: राष्ट्रीय समझ विकसित करने के लिए ‘मूल्य आधारित शिक्षा’ की आवश्यकता है, क्योंकि स्थानीय स्तर पर लोगों को अपने और अपने देश के बारे में अज्ञानता विस्मयकारक (आश्चर्यजनक) है।
  • ‘स्वयं से भिन्न लोगों के प्रति उपेक्षा’ को दूर करने की जरूरत है। इस सोच को ‘शांति और समानता को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध शिक्षकों को अनूदित कार्यों के माध्यम से ‘नैतिकता शिक्षा कक्षाएं’ आयोजित करने के लिए प्रशिक्षित करके बदला जा सकता है।
  • ‘साहित्य’ हमारे जीवन के उन पहलुओं पर प्रकाश डाल सकता है जिन्हें राजनीति और अर्थशास्त्र द्वारा हल नहीं किया जाता है।
  • भारत को अपनी सॉफ्ट पावर – शांति की भाषा और हमारी बहुभाषा- पर ध्यान देना चाहिए।

संबंधित आर्टिकल:

विश्व विश्वविद्यालय रैंकिंग

संदर्भ: भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) बेंगलुरु ने ‘टाइम्स हायर एजुकेशन’ (THE) रैंकिंग-2023 में भारतीय संस्थानों में सर्वोच्च स्थान हासिल कर अपना शीर्ष स्थान बरकरार रखा है।

रैंकिंग के पैरामीटर:

  • शिक्षण (30%)
  • अनुसंधान (30%)
  • उद्धरण (30%)
  • अंतर्राष्ट्रीय अवेक्षण (International outlook) (7.5 %)
  • उद्योग परिणाम (2.5%)।

शिक्षण और अनुसंधान में, प्रत्येक के लिए 15% भारांक “प्रतिष्ठा संबंधी सर्वेक्षण” पर आधारित है।

प्रमुख बिंदु:

  • THE रैंकिंग में 104 देशों और क्षेत्रों के 1,799 विश्वविद्यालयों का मूल्यांकन 13 सावधानीपूर्वक अंशांकित संकेतकों के आधार पर किया गया था।
  • रैंकिंग के अनुसार, ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय, यूनाइटेड किंगडम दुनिया का शीर्ष विश्वविद्यालय है, इसके बाद दूसरे और तीसरे स्थान पर हार्वर्ड विश्वविद्यालय (यूएस) और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय (यूके) है।
  • ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय लगातार 7वीं बार रैंकिंग सूची में शीर्ष पर है।
  • रैंकिंग सूची में स्थान पाने वाले सर्वाधिक विश्वविद्यालय संयुक्त राज्य अमेरिका के हैं।

पारदर्शिता की चिंताओं को लेकर लगातार तीसरे वर्ष अधिकांश भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) द्वारा इस रैंकिंग का बहिष्कार किया गया है।

इंस्टा लिंक्स:

मेंस लिंक:

“राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 सतत विकास लक्ष्य-4 (2030) के अनुरूप है। इसका उद्देश्य भारत में शिक्षा प्रणाली का पुनर्गठन और पुन: उन्मुखीकरण करना है।“ इस कथन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (यूपीएससी 2020)

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस


सामान्य अध्ययन-III


विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।

 ‘गैर-निष्पादित आस्तियों’ का संबंध सिर्फ ‘बैंक गवर्नेंस’ से नहीं

संदर्भ: इस आर्टिकल का उपयोग ‘गैर-निष्पादित आस्तियों’ (Non- Performing Assets – NPAs) और बैंकों के संचालन के बीच संबंध को समझने के लिए किया जा सकता है।

‘गैर-निष्पादित आस्तियों’ की प्रवृत्ति:

  • 2000 के दशक के अंत तक, ‘गैर-निष्पादित आस्तियां’, सकल अग्रिम के प्रतिशत के रूप में घटकर 3.5 प्रतिशत से कम हो गयी थी।
  • हालांकि, गिरावट की प्रवृत्ति लंबे समय तक जारी नहीं रही, क्योंकि 2011 में ‘गैर-निष्पादित आस्तियों’ (NPAs) में वृद्धि शुरू हुई और 2018 में समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में 11.18 प्रतिशत पर पहुंच गई।
  • वर्तमान में (2022) ‘गैर-निष्पादित आस्तियां’ घटकर लगभग 6% हो गयी हैं।

2011-16 की अवधि के दौरान NPA में वृद्धि के कारण:

  • सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के सरकारी स्वामित्व से उत्पन्न खराब प्रबंधन और शासन संबंधी मुद्दे।
  • लौह एवं इस्पात और वस्त्र जैसे कमोडिटी-संवेदनशील बाजारों में उच्च जोखिम।
  • व्यवसाय मॉडल में अंतर: उदाहरणार्थ, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSB) को ग्रामीण और गरीब तबके का ध्यान भी रखना होता है।
  • अंतरराष्ट्रीय पण्य कीमतों में गिरावट: 2011 के बाद से ‘गैर-निष्पादित आस्तियों’ (NPAs) में वृद्धि, ‘अंतरराष्ट्रीय पण्य / कमोडिटी कीमतों’ (International Commodity Prices) में गिरावट के साथ मेल खाती है, जिससे कई भारतीय फर्मों के राजस्व में कमी आई है।

इस प्रकार, NPAs का एक बड़ा हिस्सा ‘बहिर्जात आघातों’ के कारण उत्पन्न हुआ, जिनका केवल सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में प्रबंधन और शासन के मुद्दों से कोई लेना-देना नहीं है।

‘गैर-निष्पादित आस्तियां’ क्या हैं:

एक ‘गैर-निष्पादित आस्तियां’ (Non- Performing Assets – NPAs), भारतीय बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों द्वारा दिए जाने वाले ऋण होते हैं, जिनके ब्याज और मूलधन काफी लंबे समय (90 दिन या 90 दिनों से अधिक) से बकाया स्थिति में होते हैं।

‘गैर-निष्पादित आस्तियों’ का वर्गीकारण:

बैंकों द्वारा ‘गैर-निष्पादित आस्तियों’ को अवमानक, संदेहास्पद और हानिपूर्ण आस्तियों में वर्गीकृत किया जाता है।

  • अवमानक आस्तियां (Substandard assets): 12 महीने या इससे कम अवधि तक ‘गैर-निष्पादित’ रहने वाली ‘आस्तियों’ को ‘अवमानक आस्तियों’ की श्रेणी में रखा जाता है।
  • संदेहास्पद आस्तियां (Doubtful assets): जो परिसंपत्तियां / आस्तियां 12 महीने से अधिक की अवधि के लिए ‘गैर-निष्पादित आस्तियां’ (NPAs) बनी हुई है, उन्हें ‘संदेहास्पद आस्तियों’ की श्रेणी में रखा जाता है। इसका मतलब है कि कोई भी NPA 12 महीने के बाद ‘अवमानक श्रेणी’ से ‘संदिग्ध / संदेहास्पद’ श्रेणी में स्थानांतरित हो जाएगा।
  • हानि आस्तियां (Loss assets): आरबीआई के अनुसार, “हानिपूर्ण परिसंपत्ति (Loss asset) को गैर-संग्रहणीय और इतने कम मूल्य का माना जाता है कि एक ‘बैंक योग्य संपत्ति’ के रूप में इसको बनाए रखना आवश्यक नहीं होता है, हालांकि इसकी कुछ बचाव या वसूली कीमत हो सकती है।”

इंस्टा लिंक:

गैर-निष्पादित आस्तियां

मेंस लिंक:

  1. भारत में ‘गैर-निष्पादित आस्तियों’ (NPAs) के समाधान में तेजी लाने और उसे सक्षम बनाने के लिए अब तक उठाए गए कदमों की गणना कीजिए। ‘गैर-निष्पादित आस्तियों’ (NPAs) के मुद्दे को संबोधित करने में “बैड बैंक” के रूप में ‘नेशनल एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड’ (NARCL) की क्षमता का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए।
  2. वित्तीय समावेशन भारत में बैंकों के उच्च स्तर के ‘गैर-निष्पादित आस्तियों’ को नियंत्रित करने में कहाँ तक मदद कर सकता है? दो उदाहरणों से अपने विचारों की पुष्टि कीजिए। (200 शब्द)

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस


मुख्य परीक्षा संवर्धन हेतु पाठ्य सामग्री (नैतिकता/निबंध)


डिजिटल डिटॉक्स: लोगों को बात करने में मदद करने हेतु रोजाना ऑफलाइन होने वाला एक गांव

संदर्भ: भारत के महाराष्ट्र राज्य के एक गांव ने दो आधुनिक व्यसनों – टेलीविजन और मोबाइल इंटरनेट –  से “स्वतंत्रता” की घोषणा की है। यह गांव हर दिन कम से कम दो घंटे के लिए ऑफलाइन हो जाता है।

  • महाराष्ट्र में सांगली जिले के वडगांव गांव में हर शाम 7 बजे एक सायरन बजता है, जो सभी निवासियों को अपने टीवी सेट और मोबाइल फोन बंद करने का संकेत देता है।
  • “व्यसन” के इन दो यंत्रों को ग्राम परिषद द्वारा रात 8.30 बजे फिर से सायरन बजाए जाने के बाद चालू किया जा है।

इसे उद्दरण को आधुनिक शहरी जीवन से पृथक होने का एक उदाहरण देते हुए ‘आगे की राह’ के रूप में लिखा जा सकता है।


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


बौद्ध धर्मांतरण दिवस

संदर्भ: भारत में हर साल ‘दशहरा’ को ‘बौद्ध धर्मांतरण दिवस’ (Buddhist Conversion day) के उपलक्ष्य में ‘अशोक विजयादशमी’ के रूप में भी मनाया जाता है।

विवरण:

  • 14 अक्टूबर, 1956 (दशहरा के अवसर पर) को डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने लगभग पचास लाख से अधिक अनुयायियों के साथ महाराष्ट्र के ‘नागपुर’ में बौद्ध धर्म ग्रहण किया था।
  • धर्मांतरण समारोह के दौरान उन्होंने 22 प्रतिज्ञाएँ की, जिसने हिंदू धर्म की जाति और सांस्कृतिक परतों से बाहर निकलने के लिए धर्मांतरित लोगों के एक क्रांतिकारी पलायन की शुरुआत की।

‘नवायना बौद्ध धर्म’ या ‘नवबौद्ध’ क्या है?

  • धर्मांतरण समारोह के दौरान 22 प्रतिज्ञाओं के बाद के विचार-विमर्श में, अम्बेडकर ने बौद्ध धर्म के अपने संस्करण को ‘नवयान बौद्ध धर्म’ (Navayana Buddhism) कहा, और इसे बौद्ध धर्म की ‘महायान’ और ‘वज्रयान’ परंपराओं से अलग किया।
  • ‘नवयान बौद्ध धर्म’ के अनुयायियों को ‘नव-बौद्ध’ (Neo-Buddhists) कहा जाता है।

भारत में नव-बौद्धों की जनसांख्यिकीय स्थिति:

  • बौद्ध आबादी केवल0. 70% है, जिसमें से 87% नव-बौद्ध हैं। इसके अलावा, इनकी एक बड़ी आबादी (लगभग 80%) महाराष्ट्र (कुल जनसंख्या का 5.8%) में रहती है।
  • हाल के वर्षों में भारत में बौद्धों की वृद्धि दर में गिरावट आई है।

विलंबित मानसून

संदर्भ: अक्टूबर में बार-बार होने वाली बारिश को देखते हुए ‘मानसून की परिभाषा’ में बदलाव किए जाने की आवश्यकता बताती है।

मानसून की परिभाषा में बदलाव की आवश्यकता का कारण:

मानसून गतिविधियों का बदलता प्रतिरूप: दिल्ली और उत्तर भारत तथा पश्चिमोत्तर भारत के कई अन्य हिस्सों में पिछले कुछ दिनों से लगातार बारिश हो रही है।

मानसून की अवधि में बदलाव: मानसून का मौसम, जो पहले चार महीने की जून-सितंबर की अवधि तक सीमित था, अब स्पष्ट रूप से अक्टूबर तक विस्तारित हो रहा है। इस वर्ष पूरे देश में 1-10 अक्टूबर के दौरान 67 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई।

मानसून वापसी की तारीखों में संशोधन: तीन साल पहले ‘भारत मौसम विज्ञान विभाग’ (India Meteorological Department IMD) ने देश के कई क्षेत्रों के लिए मानसून की शुरुआत और वापसी की संभावित तारीखों को संशोधित किया था।

  • इसके अनुसार- 30 सितंबर के बाद होने वाली वर्षा को मानसून के बाद की वर्षाके रूप में गिना जाता है, भले ही वर्षा मुख्य रूप से मानसून के मौसम के दौरान बनने वाली मौसम प्रणालियों के कारण हो रही हो।
  • इस तरह की वर्षा लगातार तीसरे साल यानी 2020, 2021 और 2022 से हो रही है।

क्या यह जलवायु परिवर्तन है?

  • हां, बारिश के प्रतिरूप (पैटर्न) में बदलाव और अनियमित वर्षा के लिए ‘जलवायु परिवर्तन’ जिम्मेदार है।
  • ग्लोबल वार्मिंग: वैश्विक उष्मन (ग्लोबल वार्मिंग) के कारण, पारंपरिक मानसून सत्र समाप्त होने के बाद भी ‘महासागर’ गर्म बने हुए हैं। और, गर्म महासागरीय धाराएँ मानसूनी हवाओं के निर्माण में मदद करती हैं।
  • गर्म वातावरण में पानी धारण करने की अधिक क्षमता होती है जिसके परिणामस्वरूप अपेक्षा से अधिक भारी बारिश होती है, या अत्यधिक वर्षा की घटनाओं में वृद्धि होती है।

इसके प्रभाव:

  • पूर्वानुमान चुनौतियां;
  • कृषि पर प्रभाव (बुवाई का मौसम और फसल पैटर्न) और पानी की उपलब्धता (पीने और बिजली उत्पादन);
  • बांध प्रबंधन के लिए निहितार्थ;
  • आपदा से संबंधित चुनौतियाँ।

सूचना आयोगों में आरटीआई याचिकाओं का ढेर

संदर्भ: पूरे भारत में 26 सूचना आयोगों के पास लगभग 3.15 लाख आरटीआई शिकायतें या अपीलें लंबित हैं।

प्रमुख बिंदु:

  • महाराष्ट्र में आरटीआई के सबसे ज्यादा मामले (99,722) लंबित हैं।
  • देश भर में 29 सूचना आयोग पूरी तरह से निष्क्रिय हैं। इनमे से चार राज्य सूचना आयोग इस समय अध्यक्ष-विहीन हैं।
  • झारखंड और त्रिपुरा क्रमशः 29 महीने और 15 महीने से पूरी तरह से निष्क्रिय हैं।
  • सूचना आयोगों में केवल 5% पदों पर महिलाओं की नियुक्ति है।
  • लगाए गए दंड का विश्लेषण: यह दर्शाता है कि आयोगों ने उन 95% मामलों में दंड नहीं लगाया जहां संभावित रूप से दंड लगाया जा सकता था।
  • पारदर्शिता की कमी: रिपोर्ट कई आयोगों में निपटान दरों और उनके कामकाज में पारदर्शिता की कमी के बारे में चिंता व्यक्त करती है।
  • डिजिटाइजेशन: 29 में से केवल 11 सूचना आयोग आरटीआई आवेदनों या अपीलों के लिए ई-फाइलिंग की सुविधा प्रदान करते हैं, लेकिन केवल पांच ही कार्यरत हैं।

ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल रिपोर्ट:

  • रिक्त पद : सूचना आयुक्त के एक चौथाई पद रिक्त हैं।
  • महिलाएं: देश में केवल 5% महिला सूचना आयुक्त हैं।
  • सूचना आयुक्त: सूचना आयुक्तों के कुल 165 पदों में से 42 रिक्त हैं, जिनमें दो मुख्य राज्य सूचना आयुक्त शामिल हैं।

अधिकतम संख्या में आरटीआई याचिका प्राप्त करने वाले सूचना आयोग:

  • केंद्र सरकार 1.19 करोड़
  • महाराष्ट्र 86.06 लाख
  • तमिलनाडु 36.99 लाख
  • केरल 32.82 लाख।

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओयोजना में ‘गैर-पारंपरिक आजीविका’ शामिल

संदर्भ: केंद्र सरकार ने ‘बेटी बचाओ बेटी पढाओ योजना’ में लड़कियों को कौशल-युक्त बनाने को गैर-पारंपरिक आजीविका (Non-Traditional Livelihood – NTL) विकल्पों में शामिल करने की घोषणा की।

  • गैर-पारंपरिक आजीविका: इसमें ऐसे क्षेत्र और नौकरियां शामिल हैं जहां महिलाओं की भागीदारी ऐतिहासिक रूप से कम या अनुपस्थित रही है। जैसेकि, माध्यमिक शिक्षा में लड़कियों के नामांकन में वृद्धि, विशेष रूप से विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, गणित (STEM) विषयों में।
  • गैर-पारंपरिक व्यवसाय: लड़कियों को गैर-पारंपरिक व्यवसायों में कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे वे महिलाओं के नेतृत्व वाले आत्मानिर्भर भारत की पथ प्रदर्शक बन सकेंगी।

योजना में नए उद्देश्य:

  • माध्यमिक स्तर पर नामांकन में 1% की वृद्धि सुनिश्चित करना।
  • हर साल लड़कियों और महिलाओं को कौशल-युक्त बनाना।
  • सुरक्षित मासिक धर्म स्वच्छता के बारे में जागरूकता बढ़ाना।
  • बाल विवाह को समाप्त करने की घोषणा।

वरिष्ठता का सिद्धांत और अगले भारत के मुख्य न्यायाधीश

संदर्भ: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने सरकार को अपने उत्तराधिकारी के पद पर सिफारिश करते हुए पत्र लिखा है, वरिष्ठता की परंपरा के अनुसार, न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ अगले CJI के रूप में पदभार संभालेंगे।

जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ का कार्यकाल:

जस्टिस चंद्रचूड़ अगले महीने 9 नवंबर को देश के 50वें मुख्य न्यायाधीश के तौर पर शपथ लेंगे। इनका कार्यकाल 2 साल 1 दिन का रहेगा। वह 2024 में 10 नवंबर को सेवानिवृत्त होंगे।

सुप्रीम कोर्ट के जज 65 वर्ष की आयु में और उच्च न्यायालय के न्यायाधीश 62 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होते हैं।

असामान्य कॉलेजियम: इसमें पांच सदस्यों के बजाय छह होंगे।

5+1 कॉलेजियम क्या है?

कॉलेजियम सिस्टम में CJI के अलावा 4 सबसे वरिष्ठ जज होते हैं। आम तौर पर, अगला CJI इन चार जजों में से होता है। हालांकि, इस बार चूंकि जस्टिस चंद्रचूड़ का कार्यकाल 2 साल का है, इसलिए अगले संभावित सीजेआई 4 वरिष्ठतम जजों में से नहीं हैं। इसलिए, कॉलेजियम में अगले CJI को समायोजित करने के लिए, कॉलेजियम का विस्तार 5+1 तक कर दिया गया है।

कॉलेजियम प्रणाली:

‘कॉलेजियम प्रणाली’ (Collegium System), न्यायाधीशों की नियुक्ति और स्थानांतरण संबंधी एक पद्धति है, जो संसद के किसी अधिनियम अथवा संविधान के किसी प्रावधान द्वारा गठित होने के बजाय उच्चतम न्यायालय के निर्णयों के माध्यम से विकसित हुई है।

  • उच्चतम न्यायालय कॉलेजियम की अध्यक्षता भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) द्वारा की जाती है, और इसमें न्यायालय के चार अन्य वरिष्ठतम न्यायाधीश शामिल होते हैं।
  • उच्च न्यायालय कॉलेजियम के अध्यक्ष संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश होते हैं और इसमें संबंधित अदालत के चार अन्य वरिष्ठतम न्यायाधीश शामिल होते हैं।

उच्च न्यायालय कॉलेजियम द्वारा नियुक्ति के लिए अनुशंसित नाम, भारत के मुख्य न्यायाधीश और उच्चतम न्यायालय कॉलेजियम द्वारा अनुमोदन के बाद ही सरकार तक पहुंचते हैं।

आम तौर पर, उच्चतम न्यायालय के चार सबसे वरिष्ठतम न्यायाधीशों में से एक भारत के मुख्य न्यायाधीश का स्थान लेता है।

यदि स्थिति ऐसी है कि भारत के मुख्य न्यायाधीश का उत्तराधिकारी न्यायाधीश, उच्चतम न्यायालय के चार सबसे वरिष्ठतम न्यायाधीशों में से एक नहीं है, तो उसे अनिवार्य रूप से कॉलेजियम का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।

कॉलेजियम प्रणाली का विकास:

  • प्रथम न्यायाधीश मामला (First Judges Case- 1981): इसमें निर्धारित किया गया कि, न्यायिक नियुक्तियों और तबादलों पर भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के सुझाव की “प्रधानता” को “अकाट्य तर्क” मौजूद होने पर अस्वीकार किया जा सकता है। इस निर्णय ने अगले 12 वर्षों के लिये न्यायिक नियुक्तियों में न्यायपालिका पर कार्यपालिका की प्रधानता स्थापित कर दी है।
  • दूसरा न्यायाधीश मामला (Second Judges Case-1993): सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट करते हुए कॉलेजियम प्रणाली की शुरुआत की, कि, ‘परामर्श’ शब्द का अर्थ वास्तव में “सहमति” है। इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने आगे कहा कि यह मुख्य न्यायाधीश (CJI) की व्यक्तिगत राय नहीं होगी, बल्कि सर्वोच्च न्यायालय के दो वरिष्ठतम न्यायाधीशों के परामर्श से ली गई एक संस्थागत राय होगी।
  • तीसरा न्यायाधीश मामला (Third Judges Case- 1998): वर्ष 1998 में राष्ट्रपति द्वारा जारी रेफरेंस (Reference) के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने पाँच सदस्यीय निकाय के रूप में कॉलेजियम का विस्तार किया, जिसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश और उनके चार वरिष्ठतम सहयोगी शामिल किए गए।

 

क्रिप्टो परिसंपत्तियों के लिए OECD का क्रॉस-बॉर्डर रिपोर्टिंग फ्रेमवर्क

संदर्भ– ‘आर्थिक सहयोग और विकास संगठन’ (Organisation for Economic Cooperation and Development –  OECD)  ने ‘क्रिप्टो-एसेट्स रिपोर्टिंग फ्रेमवर्क’ (Crypto-Assets Reporting Framework – CARF) को अंतिम रूप दिया है। यह सीमा-पार रिपोर्ट और क्रिप्टो परिसंपत्तियों के संबंध में सूचनाओं के आदान-प्रदान को सक्षम करेगा।

ऐसे ‘फ्रेमवर्क’ की आवश्यकता– ‘क्रिप्टो संपत्ति’ परिभाषा के अनुसार सीमाहीन है और इसके दुरुपयोग को रोकने और उन्हें ठीक से विनियमित करने के लिए सीमा पार सहयोग की आवश्यकता है।

संभावित लाभ:

  • क्रिप्टो संपत्ति में सेवाएं प्रदान करने वाली संस्थाओं या व्यक्तियों को CARF के तहत रिपोर्ट करने के लिए बाध्य किया जाएगा।
  • क्रिप्टो परिसंपत्तियों के उपयोग और निवेश के संबंध में देशों के बीच एक समान अवसर पैदा करेगा।

भारत पर प्रभाव: भारत ने 2022-23 के बजट में क्रिप्टोकरेंसी से होने वाले लाभ पर 30% कर की शुरुआत की है। अब CARF के साथ, भारत क्रिप्टो परिसंपत्तियों के लिए अपने व्यापक कराधान और नियामक ढांचे को तैयार कर सकता है।

OECD:

‘आर्थिक सहयोग और विकास संगठन’ (Organisation for Economic Cooperation and Development –  OECD)  की शुरुआत 1948 में ‘यूरोपीय आर्थिक सहयोग संगठन’ (OEEC) के रूप में हुई थी। 1961 में जब यूएसए और कनाडा इसमें शामिल हुए तो इसका नाम बदलकर OECD कर दिया गया।

  • वर्तमान में इसमें 36 सदस्य देश हैं।
  • भारत ओईसीडी का सदस्य नहीं है, लेकिन 1997 से एक सहयोग कार्यक्रम का भाग है।
  • इसका उद्देश्य आर्थिक विकास और सहयोग को बढ़ावा देना और आर्थिक स्थिरता को बढ़ावा देकर गरीबी से लड़ना है।

 

संयुक्त राष्ट्र विश्व भू-स्थानिक सूचना महासभा

संदर्भ: हैदराबाद में दूसरे संयुक्त राष्ट्र विश्व भू-स्थानिक सूचना कांग्रेस (United Nations World Geospatial Information Congress – UNWGIC) के उद्घाटन के अवसर पर, भारत के प्रधान मंत्री ने प्रौद्योगिकी को समावेशन का एक उपकरण बताया।

‘भू-स्थानिक तकनीक’ क्या है?

‘भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी’ (Geospatial technology), भौगोलिक मानचित्रण और विश्लेषण के लिए ‘ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम’ (GPS), भौगोलिक सूचना प्रणाली (Geographic Information System – GIS) और रिमोट सेंसिंग जैसे उपकरणों का उपयोग करती है।

‘भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी’ के उपयोग:

  • पीएम गतिशक्ति मास्टर प्लान भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी द्वारा संचालित किया जा रहा है, जो डिजिटल ओसन प्लेटफार्म के समान है।
  • इसका उपयोग SVAMITVA और आवास जैसी योजनाओं में भी किया जा रहा है।

प्रौद्योगिकी, समावेशन का एक उपकरण किस प्रकार है?

  • ‘दक्षिण एशिया उपग्रह’ भारत के पड़ोस में संपर्क और संचार की सुविधा प्रदान कर रहा है।
  • ड्रोन क्षेत्र और अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी संस्थाओं के लिए खोलना।
  • जैम ट्रिनिटी (JAM trinity) ने 80 करोड़ लोगों को निर्बाध रूप से कल्याणकारी लाभ दिए हैं।

भारत की भू-स्थानिक अर्थव्यवस्था क्षमता:

  • संभावित वृद्धि: भारत की भू-स्थानिक अर्थव्यवस्था के 2025 तक 12.8% की वृद्धि दर से ₹63,100 करोड़ को पार करने की उम्मीद है।
  • स्विगी और एमेजॉन जैसी कंपनियों के रूप में युवाओं के लिए रोजगार के अवसर अपने वितरण कार्यों को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए इसका उपयोग करते हैं।
  • मेक इन इंडिया: भारतीय कंपनियों को ऐप्स में NaVic का उपयोग करने की अनुमति देता है।
  • कोविड टीकाकरण और बाढ़ नियंत्रण जैसे संकट प्रबंधन।
  • भूमि अभिलेख प्रबंधन।

मानचित्रण