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[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 1st October 2022

विषयसूची

सामान्य अध्ययन-II

  1. भारत में औसत आयु में वृद्धि के साथ बुजुर्गों पर नजर रखने की आवश्यकता

सामान्य अध्ययन-III

  1. रासायनिक उर्वरकों को कम करके भूमि को स्वास्थ्य-लाभ देने की जरूरत

मुख्य परीक्षा संवर्धन हेतु पाठ्य सामग्री

  1. ग्राफ्टिंग – प्राचीन पेड़ों को पुनर्जीवित करने का एक चमत्कार

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

  1. यूनेस्को द्वारा 50 अनुप्रतीकात्मक भारतीय विरासत वस्त्रों की सूची जारी
  2. पंजाब विधानसभा द्वारा ‘राज्य सतर्कता आयोग’ को भंग करने संबंधी विधेयक पारित
  3. अमेरिका द्वारा भारतीय पेट्रोकेमिकल कंपनी के खिलाफ प्रतिबंध
  4. कुछ स्पष्ट जटिलताओं वाले कोविड रोगियों में मृत्यु दर अधिक
  5. कार्ड टोकनाइजेशन
  6. पंगेसियस इकारिया
  7. ब्लैक कोकीन
  8. नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश में AFSPA का समय-विस्तार
  9. मानचित्रण

 


सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: केन्द्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन; इन अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय।

 

भारत में औसत आयु में वृद्धि के साथ बुजुर्गों पर नजर रखने की आवश्यकता

संदर्भ:

स्वस्थ तरीके से आयु-वृद्धि की ओर ध्यान आकर्षित करने संबंधी ‘संयुक्त राष्ट्र संगठन’ के प्रयासों के तहत, संयुक्त राष्ट्र ने 1 अक्टूबर को ‘अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस’ (International Day for Older Persons) के रूप में चिह्नित किया है।

विश्व जनसंख्या संभावनाएं 2022 रिपोर्ट:

‘विश्व जनसंख्या संभावनाएं’ (World Population Prospects – WPP) रिपोर्ट, संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक मामले विभाग (UN Department of Economic and Social Affairs – UNDESA) द्वारा वर्ष 1951 से प्रति दो वर्ष में एक बार जारी की जाती हैं।

इस रिपोर्ट के अनुसार-

  • वर्ष 2050 तक विश्व की कुल जनसंख्या में 65 वर्ष से अधिक आयु के लोगों की आबादी 16% होने का अनुमान है।
  • सर्वाधिक आबादी वाला देश: रिपोर्ट में 2050 तक भारत की जनसंख्या 1.7 अरब होने का अनुमान है और इस समय तक भारत चीन को पीछे छोड़ते हुए दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश बन जाएगा।

संबंधित मुद्दे:

  • गैर-संचारी रोगों की व्यापकता: बुजुर्गों में मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय रोग आदि जैसे ‘गैर-संचारी रोग’ (non-communicable diseases) अधिक पाए जाते हैं।
  • सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली: जनसांख्यिकीय संरचना में बदलाव से सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों पर दबाव बढ़ेगा जोकि ‘सार्वभौमिक स्वास्थ्य देखभाल’ प्रदान करने के लिए तैयार नहीं हैं।
  • द हैदराबाद ऑक्युलर मॉर्बिडिटी इन द एल्डरली स्टडी (HOMES): हैदराबाद में बुजुर्गों में नेत्र-संबंधी रुग्णता (Ocular Morbidity) पर किए गए एक अध्ययन में शामिल 30% से अधिक बुजुर्गों की दूर की नजर कमजोर पायी गयी और 50% से अधिक बुजुर्गों की नजदीक की निगाह कमजोर थी और इनको पढ़ने के लिए चश्मे की आवश्यकता थी।
  • अध्ययन में, दृष्टि दोष और बुजुर्ग व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य और आत्मविश्वास के बीच कई संबंधों का भी पता लगाया गया।
  • दृष्टि दोष से ग्रसित लोगों को गिरने का अधिक डर और जोखिम होता है, जोकि बुजुर्गों में विकलांगता और अस्पताल में भर्ती होने का एक प्रमुख कारण है।

नेत्र-देखभाल को प्रमुखता:

  • अत्याधुनिक इमेजिंग तकनीकें और टेली-स्वास्थ्य: दूर तक यात्रा करने में असमर्थ लोगों को अभिगम्यता संबंधी मामलों के समाधान के लिए अत्याधुनिक इमेजिंग तकनीकों और टेली-स्वास्थ्य के माध्यम से पोर्टेबल डिवाइस और ऐप्पस उपलब्ध कराए जाने की जरूरत है।
  • क्रॉस-सब्सिडी मॉडल: भारत में नेत्र स्वास्थ्य संबंधी मामलों में व्यक्तियों पर वित्तीय बोझ को कम करने में सहायता हेतु कई ‘क्रॉस-सब्सिडी मॉडल’ मौजूद हैं।

आगे की राह:

  • ‘नेत्र देखभाल’ (Eye care), बुजुर्गों की देखभाल के संबंधी मॉडल को उत्प्रेरित कर सकती है। दृष्टि, श्रवण और चलने-फिरने में सहायक उपकरण, अवसाद या अन्य मानसिक स्वास्थ्य मुद्दों के लिए मनोरोग सहायता के लिए रेफरल आदि ‘हस्तक्षेपों के पैकेज’ में शामिल हैं।
  • प्राथमिक देखभाल की उपलब्धता: ‘बुजुर्गों की देखभाल’ का भविष्य दीर्घकालिक, व्यापक और एकीकृत होना चाहिए, और प्राथमिक देखभाल की ओर उन्मुख होना चाहिए।
  • वित्तीय स्थिति: सभी प्रकार की सामाजिक-आर्थिक वास्तविकताओं को ध्यान में रखते हुए यह सुनिश्चित करने के लिए कार्य किए जाएँ कि किसी भी बुजुर्ग व्यक्ति को उसकी वित्तीय स्थिति कुछ भी होने के बावजूद देखभाल से वंचित न किया जाए।

इंस्टा लिंक्स:

मेंस लिंक:

उच्च विकास के लगातार अनुभव के बावजूद, भारत अभी भी मानव विकास के संकेतकों में निचले स्थानों पर है। संतुलित और समावेशी विकास को दुश्कर बनाने वाले मुद्दों का परीक्षण कीजिए। (यूपीएससी 2021)

स्रोत: द हिंदू


सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कृषि सहायता तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य से संबंधित विषय; जन वितरण प्रणाली- उद्देश्य, कार्य, सीमाएँ, सुधार; बफर स्टॉक तथा खाद्य सुरक्षा संबंधी विषय; प्रौद्योगिकी मिशन; पशु पालन संबंधी अर्थशास्त्र।

रासायनिक उर्वरकों को कम करके भूमि को स्वास्थ्य-लाभ देने की जरूरत

संदर्भ: कीटों और रोगों द्वारा मौजूदा कीटनाशक अनुप्रयोगों के प्रति ‘प्रतिरोध’ विकसित कर लिए जाने के बाद, हर गुजरने वाले साल में अधिक विषाक्त अनुक्रियाओं की आवश्यकता होती है।

मानव शरीर पर आनुवंशिक परिवर्तनकारी प्रभाव और जैव विविधता के नुकसान को ध्यान में रखते हुए, ‘कीटनाशकों के उपयोग में कमी’ राष्ट्रीय प्राथमिकता होनी चाहिए।

कृषि रासायनिक इनपुट को कम करने के तरीके:

  • ‘कृषि रसायन इनपुट उद्योग’ (Farm Chemical Input Industry) के व्यवसाय मॉडल को ‘सेवा उद्योग’ में परिवर्तित करने की आवश्यकता: प्रत्येक विक्रेता की 10 प्रतिशत कृषि रासायनिक इनपुट बिक्री को ‘सेवाओं’ (खेतों पर स्प्रे) के रूप में परिवर्तित किया जा सकता है। प्रत्येक आगामी वर्ष में, विक्रेता द्वारा, व्यवसाय मॉडल को ‘कृषि रासायनिक इनपुट बिक्री’ की बजाय ‘अनुबंधित सेवाओं’ में पूर्णतयः परिवर्तित होने तक अनिवार्य रूप से सेवाओं में अतिरिक्त 10 प्रतिशत की वृद्धि की जानी चाहिए।
  • दुकानदारों को ‘वास्तविक समय’ (रियल टाइम) में कृषि रसायनों की प्रत्येक बिक्री की सूचना सरकार को देनी चाहिए।
  • प्रत्येक कृषि रासायनिक पैकेज पर अनिवार्य क्यूआर कोड: दुनिया की सबसे बड़ी बीज और कीटनाशक कंपनी, ‘बायर’ (Bayer) ने हर कीटनाशक पैकेज पर एक क्यूआर कोड प्रिंट करना शुरू कर दिया है।
  • एक स्वतंत्र नियामक: नियामक अनुमोदन दिए जाते समय, उद्योग द्वारा उत्पन्न सुरक्षा डेटा को व्यावहारिक रूप से अंकित मूल्य पर दर्ज किया जाता है। लेकिन ‘स्वैच्छिकता’, नियमन का कोई विकल्प नहीं है।

इंस्टा लिंक:

उर्वरक क्षेत्र में सुधार

प्रीलिम्स लिंक:

  • रासायनिक उर्वरकों को नियंत्रित करने से संबंधित समितियां।
  • हरित क्रांति

मेंस लिंक:

भारतीय कृषि में रासायनिक कीटनाशकों, कीटनाशकों और उर्वरकों के उपयोग और मानव स्वास्थ्य पर इसके प्रभाव का विवरण दें। (10 अंक)

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस


मुख्य परीक्षा संवर्धन हेतु पाठ्य सामग्री


 

ग्राफ्टिंग – प्राचीन पेड़ों को पुनर्जीवित करने का एक चमत्कार

संदर्भ: केरल राज्य जैव विविधता बोर्ड द्वारा वर्ष 2020 में दक्षिणी भारतीय राज्य केरल के ‘कन्नपुरम’ को “देशी आम विरासत क्षेत्र” (Indigenous Mango Heritage Area) घोषित किया गया था।

‘कन्नपुरम’ को यह सम्मान, ग्रामीणों द्वारा एक साथ मिलकर आसपास के कस्बों और गांवों से एकत्रित करके आम की 200 से अधिक स्वदेशी प्रजातियों को उगाने पर दिया गया था। ग्रामीणों ने अपने इस प्रयास में विलुप्त होने के कगार पर पहुँच चुकी ‘आम’ की विभिन्न किस्मों को संरक्षित करने का कार्य किया।

  • भारत में फलों के वृक्ष खतरे की स्थिति से गुजर रहे हैं, लेकिन बागवानों का एक समुदाय उन्हें बचाने और यहाँ तक जो वृक्ष मर चुके हैं, उन्हें वापस जीवित करने के लिए एक पुरानी पद्धति का उपयोग कर रहा है।
  • सदियों पुरानी इस पद्धति को ‘कलम बांधना’ या ‘ग्राफ्टिंग’ (Grafting) कहा जाता है।

‘ग्राफ्टिंग’ के बारे में:

‘ग्राफ्टिंग’ या ‘कलम बांधने’ में अक्सर एक ही प्रजाति के दो पौधों के कार्बनिक ऊतकों को जोड़कर एक नया पौधा तैयार किया जाता है। यद्यपि, इस पद्धति में एक अलग जीनस या विभिन्न प्रजातियों के पौधों को भी ‘ग्राफ्ट’ किया जा सकता है, लेकिन कई मामलों में, इसका परिणामी पौधा कमजोर होता है या जल्दी ही मर जाता और कभी-कभी नया पौधा तैयार ही नहीं हो पता है।

  • ‘ग्राफ्टिंग’ स्वाभाविक रूप से भी हो सकती है। पूर्वोत्तर भारत का एक राज्य ‘मेघालय’ अपने “जीवित जड़ों से निर्मित पुलों” (living root bridges) के लिए प्रसिद्ध है। इनमें कई पेड़ों की जड़ें आपस में जुड़ी होती हैं जो लोगों को ऊपर चलने के लिए पर्याप्त मजबूत हवाई पुल बनाती हैं, जिससे उन्हें खड़ी ढलानों पर आवागमन करने में मदद मिलती है।
  • ये जड़ें ‘सेल्फ़-ग्राफ्टिंग’ (self-grafting) की प्रक्रिया के माध्यम से खुद को फ्यूज और मरम्मत करती हैं जिसे ‘गुथन’ या ‘इनोसक्यूलेशन’ (Inosculation) कहा जाता है। इस प्रकिया में, वर्षों या दशकों के निकट संपर्क के बाद, विभिन्न पेड़ों की शाखाएं या जड़ें समय के साथ एक ही संरचना के रूप में बढ़ती हैं।
  • जनजातीय समुदाय के सदस्यों को, ग्राफ्टिंग के माध्यम से भी जड़ों को आपस में जोड़ने और मैन्युअल रूप से मरम्मत करने के लिए जाना जाता है।
  • ग्राफ्टिंग से भारत में कई अन्य फलों और सब्जियों के फैलाव, संरक्षण और मृदा-जनित रोगों के शमन में मदद मिली है।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


यूनेस्को द्वारा 50 अनुप्रतीकात्मक भारतीय विरासत वस्त्रों की सूची जारी

संदर्भ: यूनेस्को ने देश के 50 विशिष्ट और अनुप्रतीकात्मक विरासत वस्त्र शिल्पों (exclusive and iconic heritage textile crafts) की सूची जारी की है।

  • इस सूची में, तमिलनाडु से टोडा कढ़ाई और सुंगड़ी, हैदराबाद से हिमरू बुनाई (Himroo weaves) और ओडिशा के संबलपुर की ‘बंधन और रंजन शैली’ से निर्मित वस्त्र आदि शामिल किए गए हैं।
  • यूनेस्को के अनुसार, दक्षिण एशिया में ‘अमूर्त सांस्कृतिक विरासत’ की सुरक्षा के लिए प्रमुख चुनौतियों में, एक उचित सूची और प्रलेखन की कमी भी शामिल है।
  • इस सूची के प्रकाशन का उद्देश्य इस कमी को पाटना है, और इसमें 50 चयनित वस्त्रों पर वर्षों के शोध को एक साथ प्रकाशित किया गया है।

पंजाब विधानसभा द्वारा ‘राज्य सतर्कता आयोग’ को भंग करने संबंधी विधेयक पारित

संदर्भ:

हाल ही में, पंजाब विधानसभा ने ‘राज्य सतर्कता आयोग’ (State Vigilance Commission) को भंग करने के लिए एक विधेयक पारित किया है।

राज्य सतर्कता आयोग:

  • इस राज्य भ्रष्टाचार विरोधी निकाय की स्थापना ‘पंजाब राज्य सतर्कता आयोग अधिनियम,’ 2020 के तहत की गई थी।
  • ‘राज्य सतर्कता आयोग’ को राज्य के लोक सेवकों के बीच भ्रष्टाचार को रोकने के लिए गठित किया गया।
  • इस आयोग को, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत परिभाषित सभी लोक सेवकों के खिलाफ आरोपों की जांच करने का अधिकार दिया गया है।

केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) के बारे में:

केंद्रीय सतर्कता आयोग (Central Vigilance Commission – CVC) का गठन वर्ष 1964 में सरकार द्वारा ‘के. संथानम’ की अध्यक्षता वाली ‘भ्रष्टाचार निरोधक समिति’ की सिफारिशों के आधार पर एक शीर्षस्‍थ सतर्कता संस्‍थान के रूप में किया गया था।

  • केंद्रीय सतर्कता आयोग अधिनियम, 2003 के तहत केंद्रीय सतर्कता आयोग को वर्ष 2003 में सांविधिक दर्जा प्रदान किया गया।
  • CVC भारत के राष्ट्रपति को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करता है।
  • केंद्रीय सतर्कता आयोग, किसी भी मंत्रालय / विभाग के अधीन नही है। यह एक स्वतंत्र निकाय है जो केवल संसद के प्रति उत्तरदायी है।

संरचना: केंद्रीय सतर्कता आयोग में ‘केंद्रीय सतर्कता आयुक्त’ (Central Vigilance Commissioner) सहित दो अन्य सतर्कता आयुक्त होते हैं।

कार्य:

  • CVC भ्रष्टाचार या कार्यालय के दुरुपयोग पर शिकायतें प्राप्त करता है और उचित कार्रवाई की सिफारिश करता है।
  • ‘केंद्रीय सतर्कता आयोग’ (CVC), केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के माध्यम से या सरकारी कार्यालयों में नियुक्त ‘मुख्य सतर्कता अधिकारियों’ (chief vigilance officers – CVO) के माध्यम से जांच करवाता है।

नियुक्ति:

  • केंद्रीय सतर्कता आयुक्त तथा अन्य सतर्कता आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा एक समिति की सिफारिश पर की जाती है। इस समिति की अध्यक्षता प्रधानमंत्री द्वारा की जाती है और इसमें गृह मंत्री तथा लोकसभा में विपक्ष के नेता सदस्य के रूप में शामिल होते हैं।

कार्यकाल: इनका कार्यकाल पदभार ग्रहण करने की तिथि से चार वर्ष या 65 वर्ष की आयु, जो भी पहले हो, तक होता है।

पद-मुक्ति: केंद्रीय सतर्कता आयुक्त या किसी भी सतर्कता आयुक्त को केवल राष्ट्रपति के आदेश द्वारा पद से हटाया जा सकता है। राष्ट्रपति, केंद्रीय सतर्कता आयुक्त अथवा अन्य आयुक्तों को उनके दुराचरण व अक्षमता के आधार पर हटा सकते हैं, इस स्थिति में राष्टपति द्वारा इस विषय को उच्चत्तम न्यायालय के पास भेजा जाता है। यदि जांच के उपरान्त उच्चत्तम न्यायालय इन आरोपों को सही पाता है तो उसकी सलाह पर राष्ट्रपति इन्हें पद से हटा सकता है

अमेरिका द्वारा भारतीय पेट्रोकेमिकल कंपनी के खिलाफ प्रतिबंध

संदर्भ:

अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा ईरानी पेट्रोलियम उत्पादों को बेचने की आरोपी कई संस्थाओं के साथ-साथ मुंबई स्थित एक पेट्रोकेमिकल कंपनी के खिलाफ प्रतिबंधों की घोषणा की गयी है।

प्रमुख बिंदु: यह पेट्रोकेमिकल कंपनी 2018-19 में पारित एकतरफा प्रतिबंधों के तहत अमेरिकी हिदायत का सामना करने वाली पहली भारतीय इकाई है।

अमेरिकी प्रतिबंधों का तात्पर्य:

अमेरिका द्वारा ईरान की विभिन्न संस्थाओं के साथ वित्तीय लेनदेन पर व्यापार अवरोध, शुल्क और प्रतिबंध लगाए गए हैं।

ईरान के निम्नलिखित उद्योगों या संस्थाओं पर अमेरिका ने प्रतिबंध लगाए हैं:

  • बैंकिंग उद्योग
  • शिपिंग उद्योग
  • बीमा उद्योग
  • ऊर्जा/पेट्रोलियम उद्योग
  • परमाणु उद्योग
  • अंतर्राष्ट्रीय व्यापार
  • मिसाइल/हथियार उद्योग
  • इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स।

अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना कर रहे देश:

  • ईरान
  • क्यूबा
  • वेनेज़ुएला
  • सीरिया
  • उत्तर कोरिया
  • सूडान

कुछ स्पष्ट जटिलताओं वाले कोविड रोगियों में मृत्यु दर अधिक

संदर्भ:

हाल ही में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) द्वारा केंद्र सरकार की ‘राष्ट्रीय कोविड-19 नैदानिक ​​​​रजिस्ट्री’ (National Clinical Registry for COVID-19 – NCRC) जारी की गयी।

इसके अनुसार- देश में क्रोनिक किडनी और लीवर की बीमारी, घातक ट्यूमर की स्थिति (Malignancy) और तपेदिक से पीड़ित कोविड रोगियों में अस्पताल में मृत्यु दर अधिक थी।

प्रमुख बिंदु:

  • 12.9 प्रतिशत रोगी अस्पताल में भर्ती के समय ‘लक्षणहीन’ (asymptomatic) थे। इन रोगियों को कोविड-19 के अलावा अन्य स्थितियों के कारण भर्ती किया गया था और बाद में अस्पताल में भर्ती होने के दौरान इनका कोविड -19 के लिए निदान और उपचार किया गया था।
  • ऑक्सीजन सपोर्ट: भर्ती मरीजों में से आधे से अधिक (54%) को अपने अस्पताल के दौरान ऑक्सीजन सपोर्ट की आवश्यकता और 8 प्रतिशत मरीजों को मैकेनिकल वेंटिलेशन की आवश्यकता हुई।
  • उद्देश्य: इस अध्ययन का उद्देश्य जनसांख्यिकीय और नैदानिक ​​प्रोफ़ाइल का विवरण देना और भारत में अस्पताल में भर्ती कोविड -19 वयस्क रोगियों के बीच परिणाम के निर्धारकों का पता लगाना है।
  • टीकाकरण से जीवन-रक्षा: पुरानी बीमारियों और गंभीर कोविड -19 संक्रमण वाले रोगियों का वास्तविक समय का अध्ययन”, शीर्षक से इस अध्ययन में मृत्यु दर से बचाने में SARS-CoV-2 टीकाकरण के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया।

कार्ड टोकनाइजेशन

संदर्भ: भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा कार्ड आधारित भुगतानों के टोकनाइजेशन (Tokenization) के कार्यान्वयन की समय सीमा को 1 अक्टूबर से आगे नहीं बढाए जाने का संकेत दिया है।

  • केंद्रीय बैंक के नियमों के अनुसार सभी व्यापारियों को 1 अक्टूबर से पहले ग्राहक के डेबिट और क्रेडिट कार्ड के विवरण को हटाना होगा और ‘कार्ड से भुगतान’ को ‘अद्वितीय टोकन’ से बदलना होगा।
  • यह नियम, कार्ड जारीकर्ता और कार्ड नेटवर्क को छोड़कर सभी हितधारकों पर लागू होगा।
  • इन नियमों के तहत, केंद्रीय बैंक ने अधिकृत कार्ड भुगतान नेटवर्क को अनुरोध करने वाले उपभोक्ताओं को ‘कार्ड टोकन सेवा’ प्रदान करने की अनुमति दी है।

टोकनाइजेशन क्या है?

‘टोकनाइजेशन’ (Tokenisation / Tokenization) का तात्पर्य, एक वास्तविक कार्ड के संवेदनशील विवरण को एक यूनिक कोड वाले टोकन (token) में परिवर्तित करना है। ‘टोकनाइजेशन’ एक कार्ड, एवं ‘टोकन अनुरोधकर्ता’ और डिवाइस का अनोखा संयोजन होता है।

पंगेसियस इकारिया

मेट्टूर बांध के पास कावेरी नदी में कैटफ़िश की एक नई प्रजाति की खोज की गई है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने प्रजातियों की खोज के बाद खाद्य प्रजातियों का नाम ‘पंगेसियस इकेरिया’ (Pangasius icaria –  P. icaria) रखा गया है।

यह प्रजाति, पंगेसियस जीनस से संबंधित है।

ब्लैक कोकीन

संदर्भ: नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने मुंबई हवाई अड्डे से एक बोलीविया की एक महिला को कथित तौर पर ब्लैक कोकीन ले जाने के आरोप में गिरफ्तार किया है।

ब्लैक कोकीन (Black cocaine), सामान्य कोकीन और प्रशासित मात्रा में अन्य रसायनों का मिश्रण एक ‘दुर्लभ दवा’ होती है।

  • यह दवा कोकीन की गंध को बेअसर कर देती है, जिससे इसे जांच के दौरान आसानी से ले जाया जा सकता है।
  • ब्लैक कोकीन एक खतरनाक नशीला पदार्थ है. इसे सामान्य कोकीन और कई तरह के केमिकल को मिलाकर बनाया जाता है। इसे कोकीन हाइड्रोक्लोराइड या कोकीन बेस भी कहा जाता है। इसे कोयला, कोबाल्ट, एक्टिवेटेड कार्बन और आयरन सॉल्ट जैसी चीजें मिलाकर तैयार किया जाता है। ऐसा करने से इसका रंग पूरी तरह काला हो जाता है। ब्लैक कोकीन को दुर्लभ और अवैध ड्रग्स की कैटेगरी में रखा गया है।

नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश में AFSPA का समय-विस्तार

संदर्भ:

गृह मंत्रालय (MHA) ने अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड के कुछ हिस्सों में ‘‘सशस्त्र बल (विशेष अधिकार) अधिनियम’ (Armed Forces (Special Powers) Act, 1958 – AFSPA)  को छह महीने के लिए बढ़ा दिया है।

सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (AFSPA), 1958:

साधारण शब्दों में, सशस्त्र बल (विशेष अधिकार) अधिनियम (AFSPA) के तहत सशस्त्र बलों के पास ‘अशांत क्षेत्रों’ में सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की शक्ति होती है।

सशस्त्र बलों को प्राप्त शक्तियां:

  • इसके तहत सशस्त्र बलों को किसी क्षेत्र में पाँच या अधिक व्यक्तियों के जमावड़े को प्रतिबंधित करने अधिकार होता है, इसके अलावा, इन्हें किसी व्यक्ति द्वारा कानून का उल्लंघन करने संबंधी शंका होने पर उचित चेतावनी देने के बाद बल प्रयोग करने अथवा गोली चलाने की भी शक्ति प्राप्त होती है।
  • सशस्त्र बल (विशेष अधिकार) अधिनियम (AFSPA) की धारा 3 के तहत अधिसूचना द्वारा किसी क्षेत्र को ‘अशांत क्षेत्र’ (disturbed area) घोषित किया जाता है। विभिन्न धार्मिक, नस्लीय, भाषा या क्षेत्रीय समूहों या जातियों या समुदायों के बीच मतभेद या विवाद के कारण किसी क्षेत्र को अशांत घोषित किया जा सकता है।
  • केंद्र सरकार, या राज्य के राज्यपाल या केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासक राज्य या केंद्रशासित प्रदेश के पूरे या हिस्से को अशांत क्षेत्र घोषित कर सकते हैं।
  • 1972 में संशोधन: किसी क्षेत्र को “अशांत” घोषित करने की शक्तियां राज्यों के साथ-साथ केंद्र सरकार को भी प्रदान की गईं।
  • गृह मंत्रालय: वर्तमान में, केंद्रीय गृह मंत्रालय केवल नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश के लिए AFSPA का विस्तार करने के लिए समय-समय पर “अशांत क्षेत्र” अधिसूचना जारी करता है।
  • राज्य सरकार: मणिपुर और असम के लिए “अशांत क्षेत्र” अधिसूचना राज्य सरकारों द्वारा जारी की जाती है।

निरसित:

  • त्रिपुरा: 2015 में अधिनियम को निरस्त कर दिया गया।
  • मेघालय: 1 अप्रैल 2018 से गृह मंत्रालय द्वारा निरस्त कर दिया गया।

मानचित्रण