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[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 30 September 2022

 

विषयसूची

सामान्य अध्ययन-II

  1. दूरसंचार विधेयक, 2022 का मसौदा
  2. भारत में पूर्ण बाल चिकित्सा हृदय-देखभाल सेवा का अभाव

सामान्य अध्ययन-III

  1. समय की मांग – समग्र जल प्रबंधन प्रणाली

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

  1. ओडिशा में जनजातियों का विश्वकोश
  2. चुनावी वाहक बांड योजना
  3. ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स 2022
  4. अविवाहित महिलाओं को गर्भपात का समान अधिकार
  5. रूस द्वारा यूक्रेन के क्षेत्र पर कब्जा करने की तैयारी
  6. दुनिया का पहला सीएनजी टर्मिनल
  7. राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण
  8. ऑपरेशन गरुड़
  9. मानचित्रण

सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: संसद और राज्य विधायिका- संरचना, कार्य, कार्य-संचालन, शक्तियाँ एवं विशेषाधिकार और इनसे उत्पन्न होने वाले विषय।

दूरसंचार विधेयक, 2022 का मसौदा

संदर्भ:

हाल ही में, संचार मंत्रालय द्वारा दूरसंचार में आधुनिक और भविष्य के संभावित तकाजों को देखते हुये कानूनी प्रारूप विकसित करने के लिये जन परमार्श प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है। इसी क्रम में मंत्रालय ने ‘भारतीय दूरसंचार विधेयक’, 2022 (Indian Telecommunication Bill, 2022) के मसौदे पर टिप्पणियां आमंत्रित की गयी थी।

विभिन्न हितधारकों और औद्योगिक संघों से टिप्पणियां प्राप्त हो गई हैं। उपरोक्त परामर्शों और चर्चाओं के आधार पर मंत्रालय ने अब ‘भारतीय दूरसंचार विधेयक, 2022’ का मसौदा तैयार किया है।

दूरसंचार क्षेत्र को नियंत्रित करने वाले तीन प्रमुख विधान:

  1. भारतीय तार अधिनियम, 1885 (Indian Telegraph Act, 1885)
  2. भारतीय बेतार तारयांत्रिकी अधिनियम, 1933 (Indian Wireless Telegraphy Act, 1933)
  3. तारयंत्र संबंधी तार (विधि-विरुद्ध कब्जा) अधिनियम, 1950 (Telegraph Wires (Unlawful Possession) Act, 1950)

भारतीय दूरसंचार विधेयक, 2022 का मसौदा: संक्षिप्त विवरण

  • भारतीय दूरसंचार विधेयक के मसौदे का उद्देश्य, इस क्षेत्र में हुई प्रगति और चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए ‘मौजूदा नियामक ढांचे’ को अद्यतन करना है।
  • निरसन विधान (Repeal legislations): इस मसौदा विधेयक में, दूरसंचार क्षेत्र को विनियमित करने वाले मौजूदा तीन विधानों को निरस्त करने और “कानूनी और नियामक ढांचे का पुनर्गठन” का प्रस्ताव किया गया है।
  • मसौदा विधेयक के माध्यम से सरकार को ‘इंटरनेट’ के निलंबन का आदेश देने की शक्ति प्रदान की गयी है। वर्तमान में, इंटरनेट सेवाओं के निलंबन का आदेश “दूरसंचार सेवाओं के अस्थायी निलंबन (सार्वजनिक आपातकाल और सार्वजनिक सुरक्षा) नियम, 2017” के तहत दिया जाता है।
  • विधेयक में, जब सरकार के कुछ कार्यों जैसे रक्षा या परिवहन के लिए स्पेक्ट्रम आवंटित किया जाता है, तब स्पेक्ट्रम आवंटन का मुख्य तरीका ‘नीलामी को निर्धारित किया गया है।
  • दूरसंचार सेवा प्रदाताओं को साझाकरण, व्यापार, पट्टे, आत्मसमर्पण या अप्रयुक्त स्पेक्ट्रम को वापस करने की सुविधा प्रदान करते हुए अपने स्पेक्ट्रम संसाधन का पूरी तरह से दोहन करने के लिए सक्षम बनाया गया है।
  • यह विधेयक पुनर्गठन, विलय या विलय से बाहर निकलने की प्रक्रिया को भी सरल करता है।
  • यह विधेयक अनिवार्य करता है, कि सार्वजनिक इकाई के स्वामित्व वाली भूमि, इनकार करने का कोई स्पष्ट आधार न होने तक, यथाशीघ्र उपलब्ध होनी चाहिए।
  • यह विधेयक ‘सार्वभौमिक सेवा दायित्व निधि’ (USOF) का शहरी क्षेत्रों की कनेक्टिविटी, अनुसंधान आदि जैसे अन्य उद्देश्यों के लिए उपयोग करने की अनुमति देता है।

ओवर-द-टॉप (OTT) संचार सेवाएं:

ओवर-द-टॉप (Over-the-top – OTT) वास्तविक समय में व्यक्ति-से-व्यक्ति दूरसंचार सेवाएं प्रदान करने वाली  सेवाओं को संदर्भित करता है। व्हाट्सएप, टेलीग्राम, सिग्नल, मैसेंजर, डुओ, गूगल मीट आदि जैसे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म OTT सेवाओं के कुछ उदाहरणों में शामिल हैं।

विधेयक का ‘ओवर-द-टॉप’ संचार सेवाओं पर प्रभाव:

  • दूरसंचार सेवा प्रदाता (Telecom Service Providers TSPs): ये ओटीटी को नेटवर्क बुनियादी ढांचा प्रदान करते हैं। इनका आरोप है, कि यह विधेयक उनके राजस्व स्रोतों (वॉयस कॉल्स, एसएमएस) में कटौती करेगा क्योंकि अभी तक उन्हें बुनियादी ढांचे और लाइसेंसिंग लागतों का सामना नहीं करना पड़ता था, जो अब अनिवार्य कर दिया गया है।
  • बिल का वर्तमान मसौदा ‘ओटीटी संचार सेवाओं’ को शामिल करने के लिए “दूरसंचार सेवाओं” की परिभाषा का विस्तार करता है। अब, ओटीटी दूरसंचार सेवाएं, ‘दूरसंचार सेवा प्रदाताओं’ के समान लाइसेंसिंग शर्तों के अधीन हो सकती हैं।

मसौदा विधेयक में उपभोक्ता संरक्षण हेतु उपाय:

  • दूरसंचार सेवाओं के माध्यम से संचार करने वाले व्यक्ति की पहचान, संचार प्राप्त करने वाले उपयोगकर्ता के लिए उपलब्ध होगी। कॉल आने पर फोन नंबर के साथ व्यक्ति का नाम भी प्रदर्शित किया जाएगा।
  • उपयोगकर्ता द्वारा सही विवरण प्रदान किए जाने को सुनिश्चित करने हेतु कई प्रावधान किए गए हैं, जिसमे, गलत पहचान विवरण प्रदान करने पर ₹50,000 का जुर्माना और विशिष्ट मोबाइल नंबर के संचालन को निलंबित करना या एक निश्चित अवधि के लिए व्यक्ति को दूरसंचार सेवा का उपयोग करने से रोकना, आदि शामिल हैं।
  • उपयोगकर्ताओं की सहमति: विज्ञापन और प्रचार प्रकृति के वाणिज्यिक संचार, केवल उपयोगकर्ता की पूर्व सहमति से ही किए जाएंगे।

मसौदा विधेयक, TRAI की स्थिति को किस प्रकार प्रभावित करता है?

  • मसौदा विधेयक में ‘भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण’ (Telecom Regulatory Authority of India- TRAI) की स्थिति को ‘नियामक निकाय’ से घटाकर केवल एक ‘अनुशंसात्मक निकाय’ के रूप में कर दी गयी है।
  • सरकार को अब लाइसेंस जारी करने से पहले TRAI से सिफारिश लेने की आवश्यकता नहीं होगी।
  • विधेयक में, TRAI द्वारा ऐसी सिफारिशें करने के लिए आवश्यक सरकारी सूचनाओं या दस्तावेजों की मांग करने की शक्ति को समाप्त कर दिया गया है।
  • दूरसंचार विभाग (DoT) को TRAI की सिफारिशों को अब पुनर्विचार के लिए वापस भेजने की आवश्यकता नहीं होगी।

इंस्टा लिंक्स:

मेंस लिंक:

साइबरडोम प्रोजेक्ट क्या है? यह भारत में इंटरनेट अपराधों को नियंत्रित करने में किस प्रकार उपयोगी हो सकता है, चर्चा कीजिए। (UPSC 2019)

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

भारत में पूर्ण बाल चिकित्सा हृदय-देखभाल सेवा का अभाव

संदर्भ: अमेरिका के ‘रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र’ (CDC) के अनुसार- ‘जन्मजात हृदय रोग’ (Congenital Heart Disease – CHD) सबसे आम जन्मजात विकार है।

  • यह विकार, सभी जन्मजात दोषों के 28% के लिए जिम्मेदार है, और भारत में सभी शिशु मृत्यु में से 6% -10% मौतें इसकी वजह से होती हैं।

भारत में इसकी व्यापकता दर:

पीडियाट्रिक कार्डिएक सोसाइटी ऑफ इंडिया (PCSI) के अनुसार, ‘प्रति 100 जीवित जन्मों में से एक’ में जन्मजात हृदय संबंधी विसंगतियाँ होती हैं।

बाल चिकित्सा हृदय-देखभाल (Pediatric cardiac-care) में लापरवाही के कारण:

  • आर्थिक रूप से अव्यावहारिक: एक ‘व्यापक बाल चिकित्सा कार्डियोलॉजी देखभाल सेवा’ का निर्माण करना आमतौर पर आर्थिक रूप से अव्यावहारिक माना जाता है
  • संसाधन गहन: इसके लिए बुनियादी ढांचे में निवेश की आवश्यकता होती है जिससे राजनेता और नीति निर्माता बचना चाहते हैं।

संबंधित मुद्दे:

  • बुनियादी ढांचे की समस्याएं: भारत में मात्र 22 अस्पताल और 50 से भी कम केंद्र हैं जहां शिशु और नवजात हृदय संबंधी सेवाएं उपलब्ध हैं।
  • केंद्रों की अवस्थिति: अधिकांश केंद्र उन क्षेत्रों में अवस्थित है, जहाँ ‘जन्मजात हृदय रोग’ (CHD) के मामले कम पाए जाते हैं।
  • उदाहरण के लिए, केरल में आठ ‘बाल चिकित्सा कार्डियोलॉजी देखभाल सेवा’ केंद्र हैं, जिनमे वार्षिक रूप से अनुमानित 4.5 लाख प्रसव के लिए नवजात कार्डियक सर्जरी की जाती हैं। जबकि अधिक आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश और बिहार में ‘नवजात कार्डियक सर्जरी’ करने में सक्षम केंद्र नहीं है।
  • गरीबी: जिन राज्यों में ‘नवजात कार्डियक केयर’ सुविधा उपलब्ध नहीं है या कम है, वहां से बीमार नवजात शिशुओं को सटीक निदान और उपचार के लिए दूर के केंद्रों में ले जाना माता-पिता पर आर्थिक रूप से बोझ डालता है।

उपकरणों की अनुपलब्धता: अजन्मे शिशुओं में हृदय रोगों के निदान के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण उपकरणों की अनुपलब्धता है।

जन्मजात हृदय रोग (CHD):        

  • ‘जन्मजात हृदय रोग’ ‘हृदय की संरचना’ में जन्म के समय मौजूद समस्याएं होती हैं।
  • ये रोग, हृदय से होकर गुजरने वाले रक्त के सामान्य प्रवाह को बदल सकते हैं।
  • जन्मजात हृदय दोष, जन्म दोष का सबसे आम प्रकार है।

              

आगे की राह:

नवजात देखभाल और प्रबंधन: बाल रोग विशेषज्ञों का कहना है कि नवजात की देखभाल और प्रबंधन के लिए जन्मजात विसंगतियों का प्रसव पूर्व पता लगाना महत्वपूर्ण है। इसलिए संबंधित बुनियादी ढांचे का विकास सही दिशा में एक कदम होगा है।

राज्यों से सीखना:

  • केरल का छोटे दिलों के लिए ‘हृदयम’ (Hridayam) कार्यक्रम। इसका उद्देश्य ‘जन्मजात हृदय रोग’ वाले बच्चों का जल्द पता लगाना, प्रबंधन और सहायता करना है।
  • तमिलनाडु के मुख्यमंत्री की ‘व्यापक स्वास्थ्य बीमा योजना’ मुफ्त विशेष सर्जरी प्रदान करती है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (आयुष्मान भारत):

  • यह गरीब परिवारों को आर्थिक सहायता प्रदान करती है। इस योजना को लागू करना, इस दिशा में आगे की ओर एक कदम होगा।
  • महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात और आंध्र प्रदेश पहले ही इस योजना को शुरू कर चुके हैं।

इंस्टा लिंक्स:

बाल मृत्यु दर

मेंस लिंक:

भारत में ‘सभी के लिए स्वास्थ्य’ हासिल करने के लिए उपयुक्त ‘स्थानीय समुदाय-स्तरीय स्वास्थ्य देखभाल हस्तक्षेप’ एक पूर्वापेक्षा है। समझाएं। (यूपीएससी 2018)

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

समय की मांग – समग्र जल प्रबंधन प्रणाली

संदर्भ: शहरों के तेजी से विकास के साथ, पानी की मांग में तेजी से वृद्धि हुई है। भले ही आकांक्षाएं लोगों को शहरी क्षेत्रों में पलायन करने का कारण बनती हैं, लेकिन निकट भविष्य में लोगों के समक्ष पानी की कमी और न्यूनता एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

अतः भविष्य में अधिकांश शहरी क्षेत्रों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ‘जल प्रबंधन’ को एक क्रांति से गुजरना होगा।

विश्वसनीय आपूर्ति के लिए ‘एकीकृत शहरी जल प्रबंधन प्रणाली’:

  • ‘एकीकृत शहरी जल प्रबंधन प्रणाली’ (Integrated urban water management system – IUWM) पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसे जल प्रबंधन, स्वच्छता और तूफानी जल प्रबंधन योजना, आर्थिक विकास और भूमि उपयोग के अनुरूप तैयार किया जा सकता है।
  • यह समग्र प्रक्रिया (Holistic Process), स्थानीय स्तर पर जल विभागों के बीच समन्वय को आसान बनाती है, साथ ही यह शहरों को जलवायु परिवर्तन के अनुकूल बनाने और पानी की आपूर्ति को अधिक कुशलता से प्रबंधित करने में भी मदद करती है।

सफल शहरी जल प्रबंधन के उपागम:

  • सहयोग-पूर्ण कार्रवाई: जब सभी हितधारकों के बीच स्पष्ट समन्वय होता है, तो प्राथमिकताओं को परिभाषित करना, कार्रवाई करना, परिवर्तन लागू करना और जवाबदेही लेना आसान होता है।
  • जल के प्रति धारणा में बदलाव: यह समझना जरूरी है कि आर्थिक विकास, शहर के बुनियादी ढांचे और भूमि उपयोग के संबंध में ‘जल’ एक अभिन्न अंग है।
  • जल को एक संसाधन के रूप में समझना: ‘जल’ विभिन्न अंतिम लक्ष्यों के लिए एक संसाधन है इसलिए कृषि, औद्योगिक और पर्यावरणीय उद्देश्यों के आधार पर विभिन्न प्रकार के ‘जल’ का उपचार करना आसान होगा।
  • विभिन्न शहरों के लिए अनुकूलित समाधान: ‘एकीकृत शहरी जल प्रबंधन प्रणाली’ (IUWM) विशिष्ट संदर्भों और स्थानीय आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करती है और यह ‘वन-साइज़-फिट-आल’ दृष्टिकोण की अपेक्षा ‘अधिकार-आधारित समाधान दृष्टिकोण’ को प्राथमिकता देती है।

सभी के लिए जल:

  • ‘एकीकृत नीतियां’ सतत विकास को सुरक्षित करने में मदद कर सकती हैं और यह सुनिश्चित कर सकती हैं कि हर स्तर पर नवाचार, दक्षता और स्थिरता हो।
  • IUWM एक सफल प्रक्रिया साबित हुई है, लेकिन बजट की कमी, अधिकारियों से अपर्याप्त मार्गदर्शन और जागरूकता की कमी ने इस समाधान के कार्यान्वयन को सीमित कर दिया है।
  • केंद्र सरकार द्वारा समावेशी स्वच्छता समाधानों के लिए ‘स्वच्छ भारत मिशन’ (SBM) और पाइप से जलापूर्ति सुनिश्चित करने के लिए ‘जल जीवन मिशन’ शुरू किया गया है।
  • सरकार ने ‘सर्कुलर इकोनॉमी सिद्धांतों’ के आधार पर ‘जल के पुन: उपयोग’ की भी अनुमति दी है।

 

इंस्टा लिंक्स: भारत में जल प्रबंधन

प्रारम्भिक लिंक:

  • एकीकृत शहरी जल प्रबंधन
  • जल संरक्षण
  • शहरी नियोजन

मेंस लिंक:

क्या आपको लगता है कि भारत में जल प्रबंधन के लिए क्रांति की तत्काल आवश्यकता है। अपने तर्कों की पुष्टि कीजिए। (10 अंक)

स्रोत: डाउन टू अर्थ

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


 

ओडिशा में जनजातियों का विश्वकोश

संदर्भ: आदिवासी समुदायों पर उनकी सदियों पुरानी और अनूठी परंपराओं का दस्तावेजीकरण करने के लिए एक ‘विश्वकोश’ (Encyclopedia) शुरू करने वाला ओडिशा देश का पहला राज्य बन गया।

  • ‘ओडिशा में जनजातियों का विश्वकोश’ का अनावरण मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने किया है, और इसके पांच संपादित संस्करणों में 13 ‘विशेष रूप से कमजोर समूहों’ (PVTG) सहित आदिवासियों पर 418 शोध लेख शामिल हैं।
  • यह विश्वकोश, ‘अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अनुसंधान और प्रशिक्षण संस्थान (SCSTRTI) और ओडिशा राज्य जनजातीय संग्रहालय द्वारा प्रकाशित किया गया है।
  • इस पुस्तक का उद्देश्य, राज्य में आदिवासी समुदायों की तेजी से बदलती सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करना है।
  • इसमें जनजातियों के नृवंशविज्ञान और विकास के बारे में प्रकाशित और अप्रकाशित दोनों डेटा को एक साथ संग्रहीत किया गया है, जिसमें उनके अतीत के साथ-साथ वर्तमान का विवरण भी शामिल है।

 

चुनावी वाहक बांड योजना

(Electoral Bearer Bond Scheme)

संदर्भ: हाल ही में, भारत सरकार ने ‘चुनावी बॉन्‍ड योजना’ 2018 (Electoral Bond Scheme 2018) को अधिसूचित किया है।

चुनावी बांड कौन खरीद सकता है?

  • योजना के प्रावधानों के अनुसार, भारत का नागरिक या भारत में निगमित या स्थापित कोई भी व्यक्ति चुनावी बॉन्‍ड खरीद सकता है।
  • पात्र व्यक्ति अकेले या अन्य व्यक्तियों के साथ संयुक्त रूप से चुनावी बॉन्‍ड खरीद सकता है।

पात्रता:

  • केवल वे राजनीतिक दल जो लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29ए के तहत पंजीकृत हैं और जिन्हें लोक सभा या राज्य विधान सभा के लिए पिछले आम चुनाव में कम से कम एक प्रतिशत मत मिले हैं, चुनावी बॉन्‍ड प्राप्त करने के लिए पात्र होंगे।
  • प्राधिकृत बैंक: चुनावी बॉन्‍ड एक पात्र राजनीतिक दल द्वारा अधिकृत बैंक के साथ एक बैंक खाते के माध्यम से ही भुनाया जाएगा।
  • भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) को चुनावी बॉन्‍ड जारी करने और भुनाने के लिए अधिकृत किया गया है।

How-an-Electoral-Bond-Works

 

ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स 2022

संदर्भ: विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (WIPO) द्वारा जारी रैंकिंग के अनुसार, भारत ‘ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स’ 2022 (Global Innovation Index 2022) की 132 देशों की सूची में 40वें स्थान पर पहुंच गया है, जो एक साल पहले की तुलना में छह स्थान ऊपर है।

  • कारण: सूचना और संचार प्रौद्योगिकियों (ICT) सेवाओं के निर्यात में सुधार, उद्यम पूंजी प्राप्तकर्ताओं के साथ-साथ स्टार्ट-अप के लिए वित्तीयन।
  • सूचकांक में स्विट्जरलैंड, अमेरिका, स्वीडन, यूके और नीदरलैंड दुनिया की सबसे इनोवैटिव अर्थव्यवस्थाएं के रूप में स्थान दिया गया हैं। चीन इस सूचकांक में शीर्ष 10 की दहलीज पर है।

अविवाहित महिलाओं को गर्भपात का समान अधिकार

संदर्भ:

एक ऐतिहासिक फैसले में, सुप्रीम कोर्ट ने 20 से 24 सप्ताह के बीच की गर्भावस्था वाली अविवाहित और अकेली महिलाओं को उनकी विवाहित समकक्षों के समान सुरक्षित और कानूनी ‘गर्भपात देखभाल’ की अनुमति दी है।

प्रमुख बिंदु:

  • अनुच्छेद 21 के तहत प्रजनन स्वायत्तता का अधिकार: अदालत ने कहा है कि यह अनुच्छेद अविवाहित महिला को यह चुनाव करने का अधिकार देता है कि वह एक विवाहित महिला के समान बच्चे को जन्म दे अथवा नहीं।
  • विवाहित महिलाओं को समान अवधि की गर्भावस्था की अनुमति देते हुए एकल या अविवाहित गर्भवती महिलाओं को प्रतिबंधित करना, कानून के समक्ष ‘समानता के अधिकार और समान सुरक्षा’ का उल्लंघन (अनुच्छेद 14) है।

डॉक्टरों को गर्भपात कराने वाले नाबालिगों की पहचान की रिपोर्ट करने की आवश्यकता नहीं:

  • उच्चतम न्यायालय में ‘पंजीकृत चिकित्सकों’ (Registered medical doctors – RMPs) को गर्भपात के लिए आए नाबालिगों की पहचान, केवल नाबालिग और नाबालिग के अभिभावक के अनुरोध पर पुलिस के सामने जाहिर करने से छूट है।
  • POCSO अधिनियम की धारा 19(1): इसके अनुसार- यदि कोई नाबालिग गर्भपात के लिए किसी पंजीकृत चिकित्सक (आरएमपी) के पास आता है, तो उसे इसकी जानकारी पुलिस को देना अनिवार्य है।

मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट, 2021

 

रूस द्वारा यूक्रेन के क्षेत्र पर कब्जा करने की तैयारी

संदर्भ:

रूस ने अपने में शामिल होने के लिए यूक्रेन के चार क्षेत्रों में भारी समर्थन दिखाते हुए वोटों की संख्या जारी की है।

चार क्षेत्र हैं:

  1. डोनेट्स्क
  2. लुहान्स्क
  3. ज़ापोरिज्जिया
  4. खेरसॉन

दुनिया का पहला सीएनजी टर्मिनल

संदर्भ: प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के भावनगर में “दुनिया के पहले सीएनजी (संपीड़ित प्राकृतिक गैस) टर्मिनल” की आधारशिला रखी।

भावनगर को चुने जाने का कारण:

  • भावनगर बंदरगाह, धोलेरा विशेष निवेश क्षेत्र (Special Investment Region SIR) के निकट स्थित है और इस क्षेत्र में आधार स्थापित करने वाले उद्योगों के लिए सेवा करने में सक्षम है।
  • यह पहले से ही एक रेलवे लाइन के माध्यम से उत्तरी भीतरी इलाकों से जुड़ा हुआ है जो बंदरगाह पर मौजूदा गोदी तक फैली हुई है।

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण

संदर्भ: राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (National Disaster Management Authority – NDMA) ने 28 सितंबर, 2022 को नई दिल्ली में अपना 18वां स्थापना दिवस मनाया।

  • इस वर्ष के स्थापना दिवस की थीम: “आपदा प्रबंधन में स्वैच्छिकता” थी।

NDMA के बारे में:

भारत के प्रधानमंत्री की अध्‍यक्षता में ‘राष्‍ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण’ (NDMA), भारत में आपदा प्रबंधन के लिए शीर्ष निकाय है।

  • आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के द्वारा राष्‍ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की स्‍थापना और राज्‍य और जिला स्‍तरों पर संस्‍थागत तंत्र के लिए एक सक्षम वातावरण का निर्माण अनिवार्य किया गया है।
  • अध्यक्ष के अलावा इसमें नौ अन्य सदस्य शामिल होते हैं। नौ सदस्यों में से एक को उपाध्यक्ष के रूप में नामित किया जाता है।
  • आपदा प्रबंधन की प्राथमिक जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकार की होती है। हालाँकि, आपदा प्रबंधन पर राष्ट्रीय नीति केंद्र, राज्य और जिले के लिए सभी के लिए एक सक्षम वातावरण बनाती है।
  • भारत,आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए सेंडाई फ्रेमवर्क’ (SFDRR) का भी एक हस्ताक्षरकर्ता है जो आपदा प्रबंधन के लिए लक्ष्य निर्धारित करता है।

ऑपरेशन गरुड़

संदर्भ: केंद्रीय जांच ब्यूरो ने अवैध मादक पदार्थों की तस्करी नेटवर्क के खिलाफ एक बहु-चरण ‘ऑपरेशन गरुड़’ शुरू किया है, जिसमें 127 नए मामले दर्ज किए गए हैं, 175 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और भारी मात्रा में मादक दवाओं को जब्त किया गया है।

  • सीबीआई द्वारा जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है, कि इस ऑपरेशन का उद्देश्य नशीली दवाओं की तस्करी पर आपराधिक खुफिया जानकारी के तेजी से आदान-प्रदान और इंटरपोल के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय अधिकार क्षेत्र में समन्वित कानून प्रवर्तन कार्रवाई के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय संबंधों के साथ दवा नेटवर्क को बाधित, नीचा और नष्ट करना है।
  • हिंद महासागर क्षेत्र पर विशेष ध्यान देने के साथ, अवैध दवाओं और मनोदैहिक पदार्थों की तस्करी का मुकाबला करने के लिए, इंटरपोल और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के निकट समन्वय में यह वैश्विक अभियान शुरू किया गया था।

मानचित्रण