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[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 27 September 2022

 

सामान्य अध्ययनI

  1. हरिकेनों की तीव्रता में वृद्धि

सामान्य अध्ययनII

  1. इंडिया इंक के लिए एक ‘न्यूरोडाइवर्स कार्यस्थल’ की आवश्यकता
  2. समरकंद: एक उभरती हुई दुनिया का लघुचित्र

सामान्य अध्ययनIII

  1. सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए सहयोग

मुख्य परीक्षा संवर्धन हेतु पाठ्य सामग्री

  1. माँ रोबोट

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

  1. सुरजापुरी और बज्जिका बोलियाँ
  2. ब्रेकथ्रू प्राइज, 2023
  3. हरिजन सेवक संघ
  4. हिमस्खलन निगरानी रडार
  5. तामिरबरणी नदी
  6. 10 यूट्यूब चैनलों के 45 वीडियो ब्लॉक
  7. केंद्रीय सूची में नहीं आने वाले ओबीसी वर्गों को EWS के तहत आवेदन करने की अनुमति
  8. स्वच्छ वायु सर्वेक्षण
  9. युद्ध अपराध
  10. रक्षा निर्यात
  11. डिजिटल ट्रस्ट
  12. भारत की उपग्रह आधारित नेविगेशन प्रणाली, ‘नाविक’ (NavIC)
  13. फ्लेक्स ईंधन
  14. रॉटरडैम कन्वेंशन
  15. आयुर्स्वास्थ्य योजना
  16. मानचित्रण

   सामान्य अध्ययन-I


 

विषय:    भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखीय हलचल, चक्रवात आदि जैसी महत्त्वपूर्ण भू-भौतिकीय घटनाएँ, भौगोलिक विशेषताएँ और उनके स्थान- अति महत्त्वपूर्ण भौगोलिक विशेषताओं (जल-स्रोत और हिमावरण सहित) और वनस्पति एवं प्राणिजगत में परिवर्तन और इस प्रकार के परिवर्तनों के प्रभाव।

हरिकेनों की तीव्रता में वृद्धि

संदर्भ: मैक्सिको की खाड़ी के निकट उत्पन्न ‘हरिकेन इयान’ (Hurricane Ian) की तीव्रता बढ़ती जा रही है, और इसके क्यूबा और अमेरिका के फ्लोरिडा राज्य में तबाही मचाने की आशंका है।

जैसे-जैसे पृथ्वी की जलवायु गर्म होती जा रही है, वैसे-वैसे अधिक ‘तूफानों’ की तीव्रता बढ़ती जा रही है। अपेक्षाकृत कमजोर ‘उष्णकटिबंधीय तूफान’ कभी-कभी पूर्वानुमान लगाने वालों को आश्चर्यचकित करते हुए और निवासियों को तैयारी के लिए बहुत कम समय देते हुए तेजी से बढ़ कर 24 घंटों के भीतर श्रेणी 3 या इससे अधिक तीव्रता के ‘हरिकेन’ (चक्रवातीय तूफ़ान) में परिवर्तित हो जाते हैं।

उष्णकटिबंधीय तूफानों की तीव्रता पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव:

  • महासागरों के गर्म होने से तेज़ हवाएँ चलती हैं। पिछले 50 वर्षों में मानव-जनित ‘वैश्विक उष्मन’ (ग्लोबल वार्मिंग) से उत्पन्न 90% से अधिक ऊष्मा महासागरों द्वारा अवशोषित कर ली गई है।
  • तेज हवाओं की तीव्रता में शीघ्र वृद्धि: ‘नेशनल हरिकेन सेंटर’ के अनुसार, ‘तीव्रता में शीघ्र वृद्धि’ (Rapid intensification) का तकनीकी रूप से तात्पर्य, 24 घंटे की अवधि में लगातार बहने वाली हवाओं की गति में कम से कम 30 समुद्री मील (knots) या 35 मील प्रति घंटे की वृद्धि होती है।
  • समुद्र के तापमान के अलावा कई अन्य कारक भी ‘तूफानों’ को प्रभावित करते हैं। ‘ऊर्ध्वाधर वायु अपरूपण’ (Vertical Wind Shear) या वातावरण में ऊंचाई बढ़ने पर हवा की गति या दिशा में होने वाले परिवर्तन भी ‘तूफानों’ को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण कारक होता है।
  • एक सशक्त ‘ऊर्ध्वाधर वायु अपरूपण’, तूफान की संरचना को एक ओर झुकाकर और ठंडी, शुष्क वायु को इसके केंद्र में प्रवाहित करके ‘हरिकेन’ के विकास को रोक सकता है।

तेजी से और अप्रत्याशित रूप से तीव्र होने वाले ‘हरीकेनों’ की संख्या में वृद्धि पूर्वानुमानकर्ताओं के लिए एक कठिन समस्या प्रस्तुत करती है, और इनके आकलन के आधार पर समुदायों द्वारा की जा रही तैयारियां भी प्रभावित हो सकती हैं।

 

मौसम चेतावनी:

भारत में शीर्ष मौसम निकाय, ‘भारतीय मौसम विज्ञान विभाग’ (IMD) को प्रतिकूल मौसम की घटनाओं की पहचान करने और चेतावनी जारी करने का काम सौंपा गया है। IMD इसके लिए रंग-कूटबद्ध मौसम चेतावनी प्रणाली का इस्तेमाल करता है।

IMD के चार कलर कोड:

  1. हरा (चक्रवात के पहले का समय): इस कोड का अर्थ है कि “सब ठीक है”, मौसम से संबंधित किसी भी प्रतिकूल होने की कोई संभावना नहीं है और कोई सलाह जारी नहीं की गई है।
  2. पीला (चक्रवात के लिए सतर्क): पीला रंग कोड, अधिकारियों को “सतर्क” या ‘तैयार रहने’ के बारे में संकेत देता है, और कई दिनों तक गंभीर रूप से खराब मौसम की संभावना को बताता है। यह कोड इस बात को भी बताता है, कि मौसम और अधिक ख़राब हो सकता है जिससे दैनिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं ।
  3. नारंगी (चक्रवात की चेतावनी): इस कोड का मतलब है “तैयार रहें”। IMD बेहद खराब मौसम, बिजली बंद होने और सड़क और रेल बंद होने सहित संचार व्यवधान की संभावना होने पर चेतावनी के रूप में ‘ऑरेंज अलर्ट’ (Orange Alert) जारी करता है।
  4. लाल (भूस्खलन की संभावना): आईएमडी द्वारा उच्चतम स्तर की चेतावनी के रूप में ‘रेड अलर्ट’ जारी किया जाता है- यह दर्शाता है कि ‘खराब मौसम से यात्रा और विद्युत् के प्रभावित होने और जीवन के लिए एक महत्वपूर्ण जोखिम पैदा होने की गारंटी दिए जाने पर अधिकारियों को “कार्रवाई” करनी चाहिए। .

IMD द्वारा जारी ये चेतावनियां ‘घटनाओं की संभावना और ‘प्रभाव आकलन’ पर आधारित होती हैं।

इस प्रक्रिया का उद्देश्य अधिकारियों और प्रभावित होने वाले लोगों को कठोर या खतरनाक मौसम- जिसमें गंभीर क्षति, दैनिक जीवन को बाधित करने या जीवन के नुकसान का कारण बनने की क्षमता है – से निपटने के लिए तैयार रहने के लिए पर्याप्त पूर्वाभास देना है। ये चेतावनियाँ प्रतिदिन अपडेट की जाती हैं।

मेंस लिंक:

भारत के मौसम विभाग द्वारा चक्रवात की आशंका वाले क्षेत्रों के लिए रंग-कोडित मौसम चेतावनियों के अर्थ पर चर्चा कीजिए। (150 शब्द) (UPSC Mains 2022)

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस


सामान्य अध्ययनII


विषय: केन्द्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन; इन अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय।

इंडिया इंक के लिए एक ‘न्यूरोडाइवर्स कार्यस्थल’ की आवश्यकता

संदर्भ:

पिछले कुछ वर्षों से, “समावेशन” (Inclusion) और “विविधता” (Diversity) को अधिकांश संगठनों में काफी महत्व दिया जा रहा है।

‘समावेशी कार्यस्थल’ (Inclusive Workplace) पर किए गए प्रमुख अध्ययन:

  • 2019 का मैकिन्से अध्ययन: वर्ष 2019 में मैकिन्से’ (McKinsey) द्वारा किए गए के अध्ययन के अनुसार- जिन कंपनियों में ‘लैंगिक विविधता’ थी उनमे लाभप्रद होने की संभावना औसत से 25% अधिक थी।
  • भारत की विविधता, सहभागिता और समावेशन में सर्वश्रेष्ठ कार्यस्थल 2021 रिपोर्ट: इसमें कहा गया है कि विविधता युक्त टीमें बेहतर प्रदर्शन करती हैं, नेतृत्व की ईमानदारी, संगठन के प्रबंधन में विश्वास और राजस्व वृद्धि को बढ़ाती हैं।

‘न्यूरोडायवर्सिटी’ क्या है?

‘न्यूरोडायवर्सिटी’ (Neurodiversity) एक धारणा है कि प्रत्येक व्यक्ति, अपने परिवेश से अंत:क्रिया और व्यवहार अलग तरह से करता है।

इसमें, निम्नलिखित ‘न्यूरोडिवर्जेंट स्थितियों’ (neurodivergent conditions) वाले लोग शामिल होते हैं:

  • ध्यानाभाव विकार / अटेंशन डेफिसिट डिसऑर्डर (ADHD)
  • ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम डिसॉर्डर (autism spectrum disorder)
  • मानसिक विकार जिससे पढ़ने लिखने में कठिनाई हो / डिस्लेक्सिया (Dyslexia)
  • मूवमेंट और कोर्डिनेशन (Coordination) को प्रभावित करने वाला ‘डिस्प्रेक्सिया’ (Dyspraxia)
  • गणितीय अक्षमता / डिसकैलकुलिया (Dyscalculia)
  • एस्परगर सिंड्रोम (Asperger’s Syndrome)
  • Deloitte study: It estimates that nearly 20% of the world is neurodiverse.

स्नायविक और विकासात्मक विकार (neurological and developmental disorder) की स्थिति:

  • स्वलीन / ऑटिस्टिक (Autistic): भारत में लगभग 2 मिलियन लोग इस न्यूरोलॉजिकल और विकासात्मक विकार से पीड़ित हैं और इसलिए उनकी पहचान ऑटिस्टिक के रूप में की जाती है।
  • डेलॉइट अध्ययन (Deloitte study): इसके अनुसार- संपूर्ण विश्व में लगभग 20% आबादी के न्यूरोडाइवर्स होने का अनुमान है।

 

‘न्यूरोडायवर्सिटी’ को अपनाने के लाभ:

  • प्रतिस्पर्धात्मक लाभ: न्यूरोडायवर्सिटी को अपनाने वाले संगठन दक्षता, रचनात्मकता और संस्कृति जैसे कई क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा में बढ़त का लाभ उठाते हैं।
  • जेपी मॉर्गन चेस अध्ययन: यह दर्शाता है कि इसके ‘ऑटिज्म एट वर्क’ पहल में पेशेवरों ने कम त्रुटियां कीं, और वे न्यूरोटिपिकल (neurotypical) कर्मचारियों की तुलना में 90% से 140% अधिक उत्पादक रहे।
  • न्यूरोडिवर्जेंट और न्यूरोटिपिकल दोनों प्रकार के कर्मचारियों वाली टीमें, केवल न्यूरोटिपिकल कर्मचारियों वाली टीमों की तुलना में कहीं अधिक कुशल होती हैं।
  • न्यूरोडिवर्जेंट कर्मियों में, अपने न्यूरोटिपिकल साथियों की तुलना में ‘विवरणों’ पर ध्यान देने की उत्कृष्ट क्षमता होती है और वे जटिल तथा दोहराए जाने वाले कार्यों पर अधिक लंबी अवधि तक ध्यान केंद्रित करने की बेहतर क्षमता रखते हैं।
  • मॉन्ट्रियल विश्वविद्यालय का अध्ययन (एक दृश्य प्रतिरूप को पूरा करने के लिए परीक्षण): ऑटिज्म स्पेक्ट्रम से ग्रसित लोग, अपने काम को आम लोगों की तुलना में 40% तेजी से पूरा कर सकते हैं। ‘ऑटिज्म स्पेक्ट्रम’ मस्तिष्क में अंतर के कारण विकासात्मक विकलांगता होती है।
  • डिस्लेक्सिया से पीड़ित लोग वस्तुओं के बारे में ‘तीन आयामों में’ सोच सकते हैं और सीमित जानकारी के साथ भी ऐसी वस्तुओं का विश्लेषण कर सकते हैं।

 

आगे की राह:

  • सहकारी कार्यस्थल: मानव संसाधन और नेतृत्व टीमों को यह सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए कि कार्यस्थल ‘न्यूरोडाइवर्स व्यक्तियों’ के प्रति सहयोगात्मक रवैया रखे।
  • विशेष रूप से सक्षम व्यक्तियों (specially-abled individuals) को सहायता: एक समावेशी संस्कृति के निर्माण की प्रक्रिया में अनुकूलित साक्षात्कार, इन विशेष रूप से सक्षम व्यक्तियों के लिए दिन-प्रतिदिन की सहायता सुनिश्चित करना, उचित बुनियादी ढाँचा उपलब्ध कराना, आदि शामिल होते हैं।
  • प्रवाहकीय स्थितियां: संगठनों को न केवल ऐसे व्यक्तियों की प्रगति में बाधा डालने वाली बाधाओं को दूर करना चाहिए, बल्कि उनकी वास्तविक क्षमता को प्राप्त करने के लिए अनुकूल परिस्थितियों का निर्माण करना चाहिए।
  • साझा सामाजिक और संचार कौशल पर परामर्श कार्यक्रम और व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान किए जाने चाहिये।
  • उपयुक्त वातावरण: इसके लिए नियोक्ता की ओर से खुलेपन और परिवर्तन की इच्छा की आवश्यकता होती है।

 

इंस्टा लिंक्स:

 

मेंस लिंक:

क्या विकलांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 समाज में लक्षित लाभार्थियों के सशक्तिकरण और समावेशन के लिए प्रभावी तंत्र सुनिश्चित करता है? चर्चा कीजिए। (यूपीएससी 2017)

स्रोत: द हिंदू

विषय: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार।

समरकंद: एक उभरती हुई दुनिया का लघुचित्र

संदर्भ: ऐतिहासिक शहर समरकंद में, हाल ही में संपन्न ‘शंघाई सहयोग संगठन’ (Shanghai Cooperation Organization – SCO) शिखर सम्मेलन में एक ‘आदर्श विश्व व्यवस्था’ के बारे में बात की गई।

     

शिखर सम्मेलन के दौरान देशों की स्थिति:

  • रूस: शिखर सम्मेलन में यूक्रेन पर आक्रमण के लिए ‘रूस’ की स्पष्ट रूप की जांच की जा रही थी।
  • चीन: यूक्रेन के साथ युद्ध में रूस का समर्थन करने की प्रतिज्ञा के बदले में, ताइवान पर रूस के साथ हुए समझौते के कारण चीन आलोचनीय स्थिति में था।

वर्तमान स्थित पर अमेरिका का रुख:

  • केंद्रीय मंच: ऐसा प्रतीत होता है कि, अमेरिका ने केंद्रीय मंच पर लोकतांत्रिक देशों को चुना है।
  • पाकिस्तानी वायु सेना का आधुनिकीकरण: अमेरिका द्वारा पाकिस्तानी वायु सेना के आधुनिकीकरण का निर्णय, पाकिस्तान को चीन का करीबी सहयोगी बनने से रोकना हो सकता है।

भारत का रूख:

अब युद्ध का युग नहीं है: भारत ने रूस से दो टूक कहा कि यह युद्ध का समय नहीं है और युद्ध रुकना चाहिए।

कूटनीति और लोकतंत्र: भारत एकमात्र देश था जिसने सभी शत्रुताओं की समाप्त करने और कूटनीति तथा लोकतंत्र अपनाए जाने की मांग की।

भारत द्वारा उठाए गए अन्य मुद्दे:

  • तेल संकट
  • खाद्यन्न की आसन्न कमी
  • आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान
  • ट्रांजिट ट्रेड एक्सेस

पाकिस्तान के संदर्भ में: पाकिस्तान के लिए भारत को अफगानिस्तान और मध्य एशिया के लिए ‘स्थल मार्ग से ‘पारगमन व्यापार पहुंच’ प्रदान करनी चाहिए।

निष्कर्ष:

  • भारत के हितों की रक्षा: क्वाड एक ऐसा मंच हो सकता है जो भारत को इंडो-पैसिफिक में अपने हितों की रक्षा करने में सक्षम बनाएगा, और इसके लिए SCO एक ड्रेस रिहर्सल हो सकता है।
  • द्विपक्षीय संबंध: भारत को नई विश्व व्यवस्था में अपने लिए एक ध्रुव बनाने के लिए लोकतांत्रिक राष्ट्रों के साथ द्विपक्षीय संबंधों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
  • संयुक्त राष्ट्र महासभा में समरकंद की लहरें: अमेरिका और रूस दोनों ने पहली बार घोषणा की कि वे UNSC को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए इसके विस्तार का समर्थन करेंगे।

इंस्टा लिंक्स:

शंघाई सहयोग संगठन

एक अराजक दुनिया में भारत की स्थिति

UNSC सुधार

मेंस लिंक:

‘शंघाई सहयोग संगठन’ (SCO) के उद्देश्यों और उद्देश्यों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। भारत के लिए इसका क्या महत्व है? (यूपीएससी 2021)

स्रोत: द हिंदू 

 


सामान्य अध्ययनIII


विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए सहयोग

संदर्भ: भारत की 10 बिलियन डॉलर की ‘चिप निर्माण पहल’ (Chip-Making Initiative) को निवेशकों के लिए और अधिक आकर्षक बनाने हेतु, सरकार ने देश सेमीकंडक्टर के विकास और डिस्प्ले विनिर्माण इकोसिस्टम कार्यक्रम” में संशोधन को मंजूरी को मंजूरी दी है।

‘सेमीकंडक्टर क्या होते हैं?

अर्धचालक अर्थात सेमीकंडक्टर्स (Semiconductors) विशिष्ट विद्युत गुणों वाले ऐसे पदार्थ होते हैं जो इन्हें कंप्यूटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए ‘आधार’ के रूप में काम करने में सक्षम बनाते है।

महत्त्व:

  • सेमीकंडक्टर, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) में कनेक्टेड डिवाइस से लेकर स्मार्टफोन तक लगभग हर आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का ‘निर्माण खंड’ (building block) होते है।
  • ग्लोबल सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री का मूल्य वर्तमान में $500- $600 बिलियन है, और यह वर्तमान में लगभग 3 ट्रिलियन डॉलर मूल्य के ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री की आवश्यकताएं पूरी करता है।

 सेमीकंडक्टर चिप्स’ क्या हैं?

सेमीकंडक्टर (अर्धचालक) ऐसे पदार्थ होते हैं जिनकी चालकता ‘कंडक्टर’ और ‘इंसुलेटर’ के बीच होती है। सेमीकंडक्टर चिप्स- जिन्हें एकीकृत सर्किट (आईसी), या माइक्रोचिप्स के रूप में भी जाना जाता है – प्रायः सिलिकॉन या जर्मेनियम या गैलियम आर्सेनाइड जैसे यौगिक से निर्मित होते हैं।

सेमीकंडक्टर चिप्स का महत्व:

  • ‘सेमीकंडक्टर चिप्स’, सभी आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स और ‘सूचना और संचार प्रौद्योगिकी’ उपकरणों के ‘दिल और दिमाग’ के रूप में कार्य करने वाले बुनियादी ‘बिल्डिंग ब्लॉक्स’ होते हैं।
  • ये चिप्स अब समकालीन ऑटोमोबाइल, घरेलू गैजेट्स और ईसीजी मशीनों जैसे आवश्यक चिकित्सा उपकरणों का एक अभिन्न अंग बन चुके हैं।

सेमीकंडक्टर चिप के घटक:

  • सेमीकंडक्टर चिप का मूल घटक ‘सिलिकॉन’ होता है, जिसमे धारा के प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए अरबों सूक्ष्म ट्रांजिस्टर लगाए जाते हैं।
  • वर्तमान में उपलब्ध सर्वाधिक उन्नत सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकी नोड 3 नैनोमीटर (nm) और 5 नैनोमीटर वाले हैं। उच्च नैनोमीटर मान वाले अर्धचालकों का इस्तेमाल ऑटोमोबाइल, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स आदि में होता है, जबकि कम मान वाले अर्धचालकों का उपयोग स्मार्टफोन और लैपटॉप जैसे उपकरणों में किया जाता है।

सेमीकंडक्टर चिप-निर्माण उद्योग से जुडी समस्याएं:

  • चिप्स की कमी: महामारी के कारण फैक्ट्रियों के बंद होने, ताइवान में अमेरिका-चीन तनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने और बढ़ती मांग के कारण ‘सेमीकंडक्टर चिप्स’ में कमी हुई है।
  • चिप-निर्माण उद्योग का अत्यधिक केन्द्रीकरण: चिप-निर्माण उद्योग का अत्यधिक संकेंद्रित है। ताइवान सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी (TSMC) द्वारा ताइवान में 90% नैनोमीटर चिप्स का बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जाता है।
  • इसलिए, दुनिया भर की सरकारों द्वारा अपना घरेलू चिप-निर्माण उद्योग बनाने की कोशिश की जा रही है।

 

भारत सरकार द्वारा उठाए गए कदम:

  • 2021: देश में सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए 10 अरब डॉलर की ‘उत्पादन-संबद्ध प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना की शुरुआत।
  • डिजाइन सॉफ्टवेयर, आईपी अधिकारों आदि से संबंधित वैश्विक और घरेलू निवेश को बढ़ावा देने के लिए ‘डिजाइन-संबद्ध प्रोत्साहन (DLI) योजना के लिए वित्तीय सहायता।
  • भारत में सेमीकंडक्टर्स और डिस्प्ले विनिर्माण इकोसिस्टम के विकास के लिए कार्यक्रम में संशोधन: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सेमीकंडक्टर, डिस्प्ले और कंपाउंड सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन इकाइयों की स्थापना के लिए परियोजना लागत के 50 प्रतिशत की समानता के आधार पर वित्तीय सहायता प्रोत्साहन को मंजूरी दी है।
  • भारत सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम)” की स्थापना की जाएगी।
  • यौगिक अर्धचालक केंद्रों (Compound Semiconductors facilities) की स्थापना की योजना।
  • वेदांता और ताइवान की चिप निर्माता फॉक्सकॉन गुजरात में ₹1,54,000 करोड़ का सेमीकंडक्टर संयंत्र स्थापित करेगी।

चुनौतियां:

  1. उच्च निवेश की आवश्यकता: एक सेमीकंडक्टर फैब के लिए $3 से $7 बिलियन तक के निवेश की आवश्यकता होती है।
  2. सरकार की ओर से न्यूनतम वित्तीय सहायता।
  3. फैब क्षमताओं की कमी।
  4. पीएलआई योजना के तहत अपर्याप्त अनुदान।
  5. संसाधन अक्षम क्षेत्र।
  6. चिप उत्पादन एक संसाधन-गहन और महंगी प्रक्रिया है।
  7. चिप बनाने के लिए भी एक दिन में कई गैलन अति शुद्ध पानी की आवश्यकता होती है।

इंस्टा लिंक:

भारत का अर्धचालक स्वप्न

मेंस लिंक:

अपने वैज्ञानिक और रणनीतिक महत्व को देखते हुए, भारत को घरेलू सेमीकंडक्टर उद्योग को युद्ध स्तर पर बनाने में कहीं अधिक महत्वाकांक्षी होने की आवश्यकता है। चर्चा कीजिए। (250 शब्द)

स्रोत: द हिंदू

 

मुख्य परीक्षा संवर्धन हेतु पाठ्य सामग्री

 

माँ रोबोट

गोवा निवासी ‘बिपिन कदम’ ने एक ‘माँ रोबोट’  (Maa Robot) बनाया है। ‘बिपिन कदम’ को रोज कम पर जाना पड़ता है और उनकी पत्नी को ‘सिर के चक्कर’ (vertigo) आते रहते हैं। ऐसे में ‘माँ रोबोट’  उनकी विकलांग बेटी को खिला सकता है।

  • जो बात इस आविष्कार को और भी खास बनाती है वह यह है कि बिपिन की रोबोटिक्स में कोई पृष्ठभूमि नहीं है। 10वीं कक्षा तक पढ़ने के बाद पारिवारिक परिस्थितियों के कारण उन्हें काम करना शुरू करना पड़ा। उन्होंने एक विनिर्माण कंपनी में एक सहायक के रूप में शुरुआत की और एक CNC डिजाइनर और प्रोग्रामर बनने तक का सफ़र तय किया है।
  • काम पर अपनी 12 घंटे की शिफ्ट के बाद, बिपिन प्रतिदिन कम से कम दो घंटे रोबोट के निर्माण में लगाते थे।
  • ‘माँ रोबोट’ वॉयस सेंसर पर काम करता है। उनकी बेटी ‘प्राजक्ता’ जिस खाद्य पदार्थ के लिए कहती है, उसके आधार पर रोबोट, जिसमें चम्मच और कप लगे होते हैं, भोजन उठाता है और उसे खिलाता है।

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

सुरजापुरी और बज्जिका बोलियाँ

संदर्भ: बिहार राज्य शिक्षा विभाग ने हिंदी और उर्दू अकादमियों की तर्ज पर ‘सुरजापुरी’ (Surjapuri) और ‘बज्जिका’ (Bajjika) बोलियों को बढ़ावा देने के लिए अकादमियों की स्थापना की है।

‘सुरजापुरी’, मुख्य रूप से किशनगंज और पूर्वोत्तर बिहार के सीमांचल के अन्य हिस्सों में बोली जाती है, जिसमें कटिहार, पूर्णिया और अररिया जिले शामिल हैं। यह बोली पश्चिम बंगाल के निकटवर्ती भागों में भी बोली जाती है।

  • ‘सुरजापुरी’ नाम सुरजापुर परगना से आया है, जो अब मौजूद नहीं है। लेकिन, पूर्णिया और किशनगंज के बीच ‘सुरजापुर’ नामका एक टोल प्लाजा है।
  • बिहार में बोली जाने वाली पांच बोलियों में से एक ‘बज्जिका’ मुख्य रूप से वैशाली, मुजफ्फरपुर और सीतामढ़ी, शिवहर और समस्तीपुर के कुछ हिस्सों में बोली जाती है। बज्जिका, भोजपुरी और मैथिली जैसी अन्य बोलियों की तरह प्रसिद्ध नहीं है।

ब्रेकथ्रू प्राइज, 2023

हाल ही में, वैज्ञानिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले व्यक्तियों को ‘ब्रेकथ्रू प्राइज’ (Breakthrough Prize), 2023 प्रदान किए गए।

इस वर्ष तीन श्रेणियों में ‘ब्रेकथ्रू प्राइज’ प्रदान किए गए:

  • जीवन विज्ञान के लिए: प्रोटीन की संरचना और नार्कोलेप्सी के कारणों के अनुमान के लिए।
  • गणित: सैद्धांतिक कंप्यूटर विज्ञान के लिए।
  • भौतिकी: क्वांटम सूचना में कार्य के लिए।

ब्रेकथ्रू प्राइज’ के बारे में:

यह पुरस्कार 2010 में वैज्ञानिक खोजों/आविष्कारों को पुरस्कृत करने के लिए सिलिकॉन वैली (कैलिफ़ोर्निया, यूएस) के उद्यमियों के एक समूह – मार्क जकरबर्ग और उनकी पत्नी प्रिसिला चान और गूगल के सर्गेई ब्रिन द्वारा गठित किया गया था।

  • ‘ब्रेकथ्रू प्राइज’ को ‘ऑस्कर ऑफ़ साइंस’ के रूप में भी जाना जाता है।
  • इस पुरस्कार के विजेताओं में प्रत्येक को 3 मिलियन अमरीकी डालर की पुरस्कार राशि मिलती हैं, जो नोबेल पुरस्कार विजेताओं द्वारा प्राप्त 1 मिलियन अमरीकी डालर से अधिक है।

 

हरिजन सेवक संघ

संदर्भ: हरिजन सेवक संघ (HSS) का 90वां स्थापना दिवस

विवरण:

  • ‘हरिजन सेवक संघ’ को अखिल भारतीय अस्पृश्यता विरोधी लीग के रूप में भी जाना जाता है।
  • मोहनदास करमचंद गांधी (1932) द्वारा स्थापित।
  • उद्देश्य: हिंदू समाज में अस्पृश्यता का उन्मूलन।
  • संस्थापक अध्यक्ष: जीडी बिड़ला

गतिविधियां:

  • लड़कियों के लिए ‘कस्तूरबा बालिका विद्यालय’ संघ के एक परिसर में बनाया गया था।
  • संघ, हरिजन बच्चों के लिए 20 आश्रम स्कूल और छात्रावास चलाता है

हिमस्खलन निगरानी रडार

संदर्भ: भारतीय सेना और ‘रक्षा भू-सूचना विज्ञान और अनुसंधान संस्थान’ (DGRE) ने संयुक्त रूप से उत्तरी सिक्किम में भारत में अपनी तरह का पहला ‘हिमस्खलन निगरानी रडार’ (Avalanche Monitoring Radar) स्थापित किया है।

‘हिमस्खलन’ (Avalanche), किसी ढलान – जैसे कोई पहाड़ी या पहाड़- से हिम का नीचे की ओर तीव्र प्रवाह होता है। लगातार वर्षा में वृद्धि, पहाड़ या पहाडी की छोटी पर हिमाच्छादन का कमजोर होना या मनुष्यों एवं जानवरों जैसे वाह्य कारकों तथा भूकंपों की वजह से ‘हिमस्खलन’ की अनायास घटनाएँ हो सकती हैं।

हिमस्खलन निगरानी रडार के लाभ:

  • हिमस्खलन (ट्रिगर के 3 सेकंड के भीतर) और भूस्खलन का पता लगाना।
  • अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सैनिकों और नागरिकों के साथ-साथ वाहनों के मूल्यवान जीवन को बचाने में सहायता करना।

रक्षा भू-सूचना विज्ञान और अनुसंधान संस्थान’ (DGRE), रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन का विंग है जो हिमालयी क्षेत्र में भारतीय सेना द्वारा सामना किए जाने वाले हिमस्खलन के खतरों का पूर्वानुमान लगाने और उन्हें कम करने में शामिल है।

तामिरबरणी नदी

संदर्भ: तमिलनाडु में तिरुनेलवेली का जिला प्रशासन, बेंगलुरू स्थित गैर-लाभकारी ‘अत्री’ (ATREE) के साथ दक्षिण एशिया की सबसे पुरानी नदियों में से ‘तामिरबरणी नद (Thamirabarani River), जिसे ताम्रपर्णी नदी (Tamraparni River) भी कहा जाता है, का प्रत्यावर्तन (नवीनीकरण) करने के लिए एक ‘हाइपर लोकल’ दृष्टिकोण का उपयोग कर रहा है।

इस नवीनीकरण परियोजना को तामिरसेस (TamiraSES) कहा जा रहा है।

तामिरबरणी नदी के बारे में:

तामिरबरणी या ताम्रपर्णी, भारत के तमिल नाडु राज्य के तिरूनेलवेली और तूतुकुड़ी ज़िलों में बहने वाली एक बारहमासी नदी है।

  • यह पश्चिमी घाट में अगस्त्य मलय की पहाड़ियों में आरम्भ होती है। फिर पूर्वी दिशा में बहती हुई यह तिरूनेलवेली नगर को लांघती है और तूतुकुड़ी ज़िले में तिरुवैकुण्डम (श्रीवैकुण्ठम) के समीप मन्नार की खाड़ी में बह जाती है।
  • यह नदी नीलगिरि मार्टन, स्लेंडर लोरिस, शेर-पूंछ वाले मकाक, सफेद धब्बेदार झाड़ी मेंढक, आकाशगंगा मेंढक, श्रीलंकाई एटलस मोथ और ग्रेट हॉर्नबिल के लिए सहयोग प्रदान करती है।

 

10 यूट्यूब चैनलों के 45 वीडियो ब्लॉक

संदर्भ:

सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने 10 यूटयूब चैनलों के 45 वीडियो को ब्लॉक कर दिया है। इन वीडियोज़ में कथित तौर पर धार्मिक समुदायों के खिलाफ ‘हेट स्पीच’ भरी हुई थी और इनका उद्देश्य सांप्रदायिक विद्वेष फैलाना था।

प्रमुख बिंदु:

वीडियोज़ को ‘सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम’ 2021 के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत अवरुद्ध (ब्लॉक) किया गया है।

इन वीडियोज़ की सामग्री में शामिल हैं:

  • फेक न्यूज और मॉर्फ्ड वीडियो;
  • सरकार द्वारा कुछ समुदायों के धार्मिक अधिकार छीन लिए जाने जैसे झूठे दावे;
  • धार्मिक समुदायों के खिलाफ हिंसक धमकी;
  • भारत में गृहयुद्ध की घोषणा आदि।

‘हेट स्पीच’ या ‘द्वेषपूर्ण भाषण’ क्या है?

भारत के विधि आयोग की 267 वीं रिपोर्ट के अनुसार-  ‘हेट स्पीच’ (Hate speech) धार्मिक विश्वासों, यौन अभिविन्यास, लिंग आदि के आधार पर हाशिए पर स्थित व्यक्तियों के विशेष समूह के खिलाफ नफरत के लिए उकसाना है।

सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69 (A):

इसके तहत, केंद्र और राज्य सरकारों को “किसी भी कंप्यूटर संसाधन में उत्पन्न, प्रेषित, प्राप्त या संग्रहीत किसी भी जानकारी को इंटरसेप्ट, मॉनिटर या डिक्रिप्ट करने” के निर्देश जारी करने की शक्ति प्रदान की गयी है।

निम्नलिखित आधारों पर इन शक्तियों का प्रयोग किया जा सकता है:

  • भारत की संप्रभुता या अखंडता के हित में;
  • भारत की रक्षा;
  • राज्य की सुरक्षा;
  • विदेशी राज्यों से मैत्रीपूर्ण संबंध;
  • सार्वजनिक व्यवस्था;
  • इनसे संबंधित किसी भी संज्ञेय अपराध को करने के लिए उकसाने को रोकना।

सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थों और डिजिटल मीडिया आचार संहिता के लिए दिशानिर्देश) नियम, 2021 के बारे में पढ़ने के लिए:यहां क्लिक करें

 

केंद्रीय सूची में नहीं आने वाले ओबीसी वर्गों को EWS के तहत आवेदन करने की अनुमति

संदर्भ: कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) दके अनुसार- राज्य सूची में ‘अन्य पिछड़ा वर्ग’ (ओबीसी) समुदायों से संबंधित व्यक्ति, जो केंद्रीय सूची में शामिल नहीं है, EWS कोटा मानदंड के तहत भारत सरकार के पदों और सेवाओं के लिए आवेदन करने के पात्र होंगे।

अन्य प्रमुख बिंदु:

  • EWS कोटा के तहत, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति: अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के सदस्य केंद्र सरकार के पदों के लिए आवेदन करने के पात्र नहीं होंगे, चाहे वे कहीं भी रहते हों।
  • खाली रिक्तियां: किसी विशेष भर्ती वर्ष के लिए खाली EWS रिक्तियों को अगले वर्ष की भर्तियों में नहीं ले जाया जा सकता है।
  • आवासीय भूखंड: कार्यालय ज्ञापन में ‘आवासीय फ्लैट/प्लॉट’ की परिभाषा में वाणिज्यिक संपत्ति भी शामिल है। EWS भर्ती के लिए मूल कार्यालय ज्ञापन (ओएम) में ‘व्यावसायिक संपत्ति’ को छोड़ दिया गया था।
  • विभाजित क्षेत्र: ऐसे मामले, जहां एक उम्मीदवार के आवासीय भूखंड को अधिसूचित नगरपालिका में शामिल क्षेत्र और एक अधिसूचित नगरपालिका से बाहर के क्षेत्र के बीच विभाजित किया गया है, ‘अपवर्जन के मानदंड’ प्रत्येक क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से लागू होने चाहिए।
  • परिवार: योग्यता के लिए, EWS मानदंड में परिवार के रूप में दादा-दादी या कोई भाई-बहन या 18 वर्ष से अधिक उम्र के बच्चे शामिल नहीं होंगे।
  • परिवार की आय: आवेदन के वर्ष से पहले के वित्तीय वर्ष के लिए मासिक पेंशन भुगतान और वेतन, कृषि, व्यवसाय, पेशा आदि जैसे अन्य सभी स्रोतों को परिवार की आय के रूप में गिना जाएगा।

अनुच्छेद 342A:

  • इसे 102वें संशोधन के माध्यम से भारत के संविधान में शामिल किया गया था।
  • इसके तहत, राष्ट्रपति को किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के संबंध में सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों को निर्दिष्ट करने का अधिकार प्रदान किया गया है।
  • यह अनुच्छेद, समुदायों की पिछड़ी सूची से किसी समुदाय को जोड़ने या हटाने के लिए संसदीय अनुमोदन प्राप्त करना अनिवार्य बनाता है।

स्वच्छ वायु सर्वेक्षण

संदर्भ: ‘पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय’ (MoEFCC) द्वारा वायु प्रदूषण को कम करने के प्रयासों पर (वायु गुणवत्ता मापदंडों के माप पर नहीं) 131 शहरों की रैंकिंग की जाएगी।

  • इससे पहले, 2025-26 तक वायु प्रदूषण को 40% तक कम करने के लिए ‘राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम’, 2019 (NCAP, 2019) के हिस्से के रूप में ‘सिटी एक्शन प्लान’ तैयार किए गए थे।
  • ‘स्वच्छ वायु सर्वेक्षण’ प्रत्येक श्रेणी से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले तीन शहरों (जनसंख्या 10 लाख से अधिक, 3-10 लाख और 3 लाख से कम के बीच) का चयन करेगा और उन्हें नकद पुरस्कार दिए जाएंगे।
  • राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम’ (NCAP) का लक्ष्य पार्टिकुलेट मैटर (PM5 और PM10) की सांद्रता को 2024 तक (2017 को तुलना के लिए आधार वर्ष के रूप में) 20% तक कम करना है।

सम्बंधित खबर:

पेय जल सर्वेक्षण: आवास और शहरी कार्य मंत्रालय पीने के पानी की गुणवत्ता, जल उपयोगिता सेवाओं, सीवर कनेक्शन, प्रयुक्त जल उपयोगिता सेवाओं आदि पर शहरों (अमृत के तहत कवर) को रैंक करेगा।

 

युद्ध अपराध

संदर्भ: संयुक्त राष्ट्र के एक पैनल ने पाया है, कि रूसी सैनिकों ने मानवाधिकारों का उल्लंघन किया है जो ‘युद्ध अपराधों’ (War Crimes) के समान है।

किए गए अपराध:

  • यूक्रेन में रूसी सैनिकों ने महिलाओं और बच्चों के साथ बलात्कार और अत्याचार किया है।
  • विस्फोटक हथियारों से किए गए अंधाधुंध हमलों में साधारण नागरिक मारे गए और घायल भी हुए हैं।
  • यूक्रेन द्वारा पुनः कब्जा करने के बाद, बुचा (Bucha) में नागरिकों की हत्या और इज़ियम शहर के पास मिले सामूहिक दफन स्थल मिले हैं।

‘युद्ध अपराध’ क्या होते है?

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, ‘युद्ध अपराध’ (War Crime), अंतरराष्ट्रीय या घरेलू सशस्त्र संघर्ष के दौरान नागरिकों या ‘शत्रु लड़ाकों’ के खिलाफ किए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय कानूनों का गंभीर उल्लंघन होते है।

  • नरसंहार और मानवता के खिलाफ अपराधों के विपरीत, ‘युद्ध अपराध’ को सशस्त्र संघर्ष के संदर्भ में किए जाने वाले अपराधों को शामिल किया जाता है।

युद्ध अपराध’ युद्ध के नियमों का उल्लंघन होते है, जैसे

  • जानबूझकर नागरिक आबादी को निशाना बनाना, यातना देना;
  • बंधक बनाना, बलात्कार और अन्य यौन हिंसा;
  • बच्चों को सेना में भर्ती करना, और
  • धर्म, शिक्षा, कला और समाज के अन्य सांस्कृतिक पहलुओं को समर्पित इमारतों पर जानबूझकर हमले करना।

 

‘जिनेवा कन्वेंशन’

वर्ष 1949 में हस्ताक्षरित चार ‘जिनेवा कन्वेंशन’ (Geneva Conventions) में ‘युद्ध अपराधों’ (War Crimes) का अर्थ स्पष्ट किया गया था।

चौथे जेनेवा कन्वेंशन के अनुच्छेद 147 में युद्ध अपराधों को “जानबूझकर अत्यधिक पीड़ा पहुचाने अथवा शरीर या स्वास्थ्य पर गंभीर चोट पहुंचाने, गैरकानूनी रूप से निर्वासन या स्थानान्तरित करने, बंधक बनाने अथवा गैरकानूनी रूप से कैद करने, व्यापक स्तर पर विनाश करने और परिसम्पत्तियों पर कब्ज़ा करने सहित जानबूझकर हत्याएं, यातना देने, अन्य अमानवीय तरीकों और सैन्य-जरूरतों के तहत गैर-तर्कसंगत, जानबूझकर और निर्दयतापूर्वक किए जाने वाले कार्यो के रूप में परिभाषित किया गया है”।

 

रक्षा निर्यात

संदर्भ: पिछले 5 वर्षों में भारत के रक्षा निर्यात (Defence exports) में 334% की वृद्धि हुई है।

भारत के रक्षा निर्यात की स्थिति:

  • 2021-22 में 13000 करोड़ से अधिक का निर्यात किया गया, जिसमे निजी क्षेत्र का योगदान 70% था (पहले निजी क्षेत्र का योगदान 90% था)।
  • भारत का लक्ष्य: 2025 तक 5 अरब डॉलर के निर्यात के साथ रक्षा उत्पादन में 25 अरब डॉलर का कारोबार हासिल करना।
  • भारत अब 75 से अधिक देशों को अपने रक्षा उत्पादों का निर्यात कर रहा है।

रक्षा विनिर्माण निर्यात के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदम:

  • FDI की सीमा बढ़ाकर 74 प्रतिशत की गई।
  • यूपी और तमिलनाडु में रक्षा गलियारों की स्थापना।
  • रक्षा उत्कृष्टता के लिए नवाचार (iDEX) पहल आदि।
  • मिशन रक्षा ज्ञान शक्ति: यह रक्षा में बौद्धिक संपदा संस्कृति को बढ़ावा देगा।
  • रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (डीएपी) 2020: मेक इन इंडिया और रक्षा में आत्मा निर्भारत को बढ़ावा देना।
  • अनुबंध: भारत ने ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के जहाज-रोधी संस्करण की आपूर्ति के लिए फिलीपींस के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए
  • स्वदेशीकरण: स्वदेशी उन्नत हल्का हेलीकाप्टर एमके-III स्क्वाड्रन, विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत, नई पीढ़ी की परमाणु-सक्षम बैलिस्टिक मिसाइल ‘अग्नि पी’ को हाल ही में शामिल किया गया।

डिजिटल ट्रस्ट

संदर्भ: हाल ही में, सूचना प्रणाली लेखा परीक्षा और नियंत्रण संघ (ISACA) द्वारा ‘स्टेट ऑफ डिजिटल ट्रस्ट रिपोर्ट’ 2022 जारी की गई है।

  • डिजिटल ट्रस्ट (Digital trust), एक सुरक्षित डिजिटल दुनिया बनाने के लिए लोगों, प्रौद्योगिकी और प्रक्रियाओं की क्षमता में उपयोगकर्ताओं का यकीन होता है।
  • ‘डिजिटल ट्रस्ट’ उन कंपनियों को दिया जाता है जिन्होंने अपने उपयोगकर्ताओं को दिखाया है कि वे अपने ऑनलाइन कार्यक्रमों या उपकरणों के साथ सुरक्षा, गोपनीयता, सुरक्षा, विश्वसनीयता और डेटा नैतिकता प्रदान कर सकते हैं।

महत्त्व:

लगातार बढ़ती कनेक्टिविटी, डेटा उपयोग और नई नवीन तकनीकों पर निर्भर वैश्विक अर्थव्यवस्था में ‘डिजिटल ट्रस्ट’ एक अनिवार्य जरूरत बन चुका है। भरोसेमंद होने के लिए, प्रौद्योगिकी (कनेक्टेड सिस्टम की गोपनीयता, अखंडता और उपलब्धता सुनिश्चित करना) सुरक्षित होनी चाहिए साथ ही जिम्मेदारी से उपयोग की जानी चाहिए। इन दो पहलुओं के संबंध में आश्वासन की कमी ने डिजिटल ट्रस्ट की कमी को जन्म दिया है।

 

भारत की उपग्रह आधारित नेविगेशन प्रणाली, ‘नाविक’ (NavIC)

संदर्भ: भारत, स्मार्टफोन को अपने ‘नाविक’ (NavIC) नेविगेशन सिस्टम के साथ सुसंगत बनाने के लिए ‘तकनीकी दिग्गजों’ पर दबाव दे रहा है।

संबंधित मुद्दे:

  • कंपनियां चिंतित हैं कि इससे हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर की लागत बढ़ जाएगी।
  • अगले साल के लॉन्च के लिए अधिकांश मॉडल पहले ही डिजाइन और परीक्षण किए जा चुके हैं।

 

नाविक (NAVIC) क्या है?

नाविक- नैविगेशन विद इंडियन कौन्स्टेलेशन (NAVigation with Indian Constellation- NavIC), अमेरिका के ‘जीपीएस’ के समान, भारत की एक स्वतंत्र क्षेत्रीय नेविगेशन उपग्रह प्रणाली है।

इसे भारतीय क्षेत्र तथा भारतीय मुख्य भूमि के आसपास 1500 किमी की दूरी में अवस्थिति-जानकारी प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

यह प्रणाली IRNSS के आठ उपग्रहों से संचालित होती है, इनमे से एक उपग्रह संदेश सेवायें प्रदान करता है। इनमें से तीन उपग्रह हिंद महासागर के ऊपर भू-स्थिर(Geostationary) कक्षा में स्थित होंगे, अर्थात, ये उपग्रह इस क्षेत्र के ऊपर आसमान में स्थिर दिखाई देंगे, और चार उपग्रह भू-तुल्यकालिक (geosynchronous) कक्षा में स्थित होंगे तथा प्रतिदिन आकाश में एक ही समय पर एक ही बिंदु पर दिखाई देंगे।

अन्य देशों की नेविगेशन प्रणालियां:

  1. जीपीएस (GPS) अमेरिकी सरकार की नेविगेशन प्रणाली है तथा इसे अमेरिकी वायु सेना द्वारा संचालित किया जाता है।
  2. रूस के पास अपना नेविगेशन सिस्टम ग्लोनास (GLONASS) है।
  3. यूरोपीय संघ (EU) के नेविगेशन सिस्टम का नाम गैलीलियो (GALILEO) है।
  4. चीन ने अपने ‘बेइदोऊ नेवीगेशन सैटेलाइट सिस्टम’ (BeiDou navigation satellites system) जून 2020 में पूरा कर लिया था, और चीन में निर्मित 94% से अधिक स्मार्टफ़ोन में बेइदोऊ को सपोर्ट करते हैं।

फ्लेक्स ईंधन

संदर्भ: टोयोटा द्वारा भारत की पहली ‘फ्लेक्स फ्यूल’ कार लॉन्च की जा रही है।

‘फ्लेक्सिबल फ्यूल व्हीकल’ (FFVs) के बारे में:

FFV, वाहनों का एक संशोधित प्रारूप है, जो विभिन्न स्तर के इथेनॉल मिश्रण सहित गैसोलीन और मिश्रित पेट्रोल दोनों पर चल सकते हैं।

  • ‘फ्लेक्सिबल फ्यूल व्हीकल’, सभी प्रकार के मिश्रित ईधनों का उपयोग करने और बिना मिश्रित ईंधन, दोनों पर चलने में सक्षम होंगे।
  • FFV में 84 प्रतिशत से अधिक इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर चलने में सक्षम इंजन लगा होता है।
  • फ्लेक्स ईंधन (E85) एक गैसोलीन-इथेनॉल मिश्रण है जिसमें 51% से 83% इथेनॉल होता है
  • ऐसी कारें ब्राजील, अमेरिका और कनाडा में पहले से चल रही हैं।

 

लाभ: कम प्रदूषण, आयातित जीवाश्म ईंधन पर कम निर्भरता, किसानों की आय में वृद्धि।

संबंधित मुद्दे: वाहन की उच्च लागत, इथेनॉल से इंजन में जंग का जोखिम, इथेनॉल ईंधन दक्षता पेट्रोल की तुलना में कम है, इथेनॉल उत्पादन में बड़ी मात्रा में पानी की खपत होती है।

 

रॉटरडैम कन्वेंशन

संदर्भ: रॉटरडैम अभिसमय (Rotterdam Convention) के तहत “पूर्व सूचित सहमति” (prior informed consent – PIC) प्रक्रिया के लिए दो नए खतरनाक कीटनाशकों – आईप्रोडाईओन (Iprodione) और टरबुफ़ोस (Terbufos) – के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की सिफारिश की गई है।

  • ये दोनों रसायन मनुष्यों और जलीय जंतुओं के लिए खतरनाक हैं।

अभिसमय के बारे में:

रॉटरडैम कन्वेंशन (Rotterdam Convention) एक अंतरराष्ट्रीय संधि है जिसे खतरनाक रसायनों में व्यापार के संबंध में देशों द्वारा सूचित निर्णय लेने की सुविधा के लिए डिज़ाइन किया गया है।

  • इसका उद्देश्य निर्यात या आयात किए जाने वाले ‘संभावित खतरनाक रसायनों (कीटनाशकों और औद्योगिक रसायनों सहित) पर पक्षकारों के बीच जानकारी के आदान-प्रदान (पूर्व सूचित सहमति के माध्यम से) को बढ़ावा देना है।

‘टरबुफ़ोस’ के बारे में:

टरबुफ़ोस (Terbufos) एक मृदा कीटनाशक है जो आमतौर पर ज्वार, मक्का, चुकंदर और आलू पर प्रयोग किया जाता है। इसकी विषाक्तता के कारण जलीय जीवों के लिए भी यह खतरनाक पाया गया है।

भारत में, 2015 अनुपम वर्मा समिति की रिपोर्ट द्वारा इन रसायनों के उपयोग की अनुमति दी गई थी। भारत Terbufos के सबसे बड़े निर्यातकों में से एक है।

आईप्रोडाईओन (Iprodione), लताओं, फलों, पेड़ों और सब्जियों पर इस्तेमाल होने वाले कवकनाशी को, कैंसर-जनक और प्रजनन के लिए विषाक्त के रूप में वर्गीकृत किया गया है।

आयुर्स्वास्थ्य योजना

संदर्भ: आयुर्स्वास्थ्य योजना (Ayurwasthya Yojana), आयुष मंत्रालय के तहत सामुदायिक स्वास्थ्य देखभाल को बढ़ावा देने और आयुष चिकित्सा स्वास्थ्य इकाई की स्थापना के लिए प्रामाणिक शास्त्रीय आयुष हस्तक्षेप शुरू करने के लिए एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है।

  • ‘आयुष’ आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी के लिए एक संक्षिप्त शब्द है जोकि भारत और कुछ पड़ोसी एशियाई देशों में प्रचलित और प्रचलित छह भारतीय चिकित्सा पद्धतियां हैं।
  • आयुष मंत्रालय, भारत सरकार का एक मंत्रालय है, जो भारत में पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों की शिक्षा, अनुसंधान और प्रसार के विकास के लिए जिम्मेदार है।

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