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[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 26 September 2022

विषयसूची

सामान्य अध्ययन-II

  1. UNSC शिखर सम्मेलन: भारत द्वारा प्रस्तावित सुधारित बहुपक्षवाद हेतु एक जमीनी योजना

सामान्य अध्ययन-IV

  1. खेल नैतिकता – मांकडिंग
  2. स्वच्छ टॉयकैथॉन

मुख्य परीक्षा संवर्धन हेतु पाठ्य सामग्री (नैतिकता/निबंध)

  1. समाज सेवा के प्रति समर्पण

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

  1. सित्तनवासल गुफाएँ
  2. रोश हशनाह
  3. ऑपरेशन मेघ चक्र
  4. मध्याह्न भोजन योजना का सोशल ऑडिट
  5. ABPM-JAY की चौथी और ABDM की पहली वर्षगाँठ
  6. सीएसआर नीति संशोधन नियम 2022
  7. ग्लोबल ओशन ऑब्जर्विंग सिस्टम
  8. संवहनीय विमानन ईंधन
  9. वाटर ट्रेडिंग
  10. एशियाई पाम तेल गठबंधन
  11. कॉफी रिंग इफ़ेक्ट
  12. कोयला गैसीकरण
  13. भारतीय ओलंपिक संघ
  14. मानचित्र (चर्चा में)

 


सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

UNSC शिखर सम्मेलन: भारत द्वारा प्रस्तावित सुधारित बहुपक्षवाद हेतु एक जमीनी योजना

संदर्भ: भारतीय विदेश मंत्री की ‘संयुक्त राष्ट्र महासभा’ की यात्रा ने भारत द्वारा द्विपक्षीय और बहुपक्षीय कूटनीति की एक विस्तृत श्रृंखला के लिए मंच तैयार कर दिया है।

77वीं महासभा (77th General Assembly) का विषय: “एक ऐतिहासिक पल: अंतर-गुथित चुनौतियों के लिए परिवर्तनकारी समाधान” (A watershed moment: Transformative Solutions to Interlocking Challenges) ।

UNSC पर भारत का रुख:

  • सुधारित बहुपक्षवाद (Reformed multilateralism): संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् (UNSC) के इस संरचनात्मक ओवरहाल के लिए भारत की मांग में संस्थागत जवाबदेही शामिल होनी चाहिए।
  • विकासशील देशों का व्यापक प्रतिनिधित्व: सुरक्षा परिषद में विकासशील देशों की बढ़ती हिस्सेदारी दुनिया भर में विश्वास और नेतृत्व को बढ़ावा दे सकती है।

संयुक्त राष्ट्र की खामियां:

  • युद्धों को रोकने में असमर्थता: संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व वाला बहुपक्षवाद युद्धों को रोकने के लिए मजबूत तंत्र प्रदान करने में असमर्थ रहा है।
  • चीन का उदय और इसकी हमलावर नीतियां: दक्षिण चीन सागर और हिंद-प्रशांत क्षेत्रों में चीन ने अपनी कार्रवाइयों के माध्यम से भी संयुक्त राष्ट्र-शैली के बहुपक्षवाद की सीमाओं को रेखांकित किया है।

संयुक्त राष्ट्र के कमजोर होने का प्रभाव:

  • चीन के बढ़ते प्रभुत्व ने, उसे आर्थिक और रणनीतिक रूप से पश्चिमी देशों को दरकिनार करते हुए अपनी बहुपक्षीय रणनीतियों को तराशने के लिए प्रेरित किया।
  • रूस और ईरान का विलगन: रूस और ईरान के अंतर्राष्ट्रीय पृथक्करण, और इसके साथ-साथ संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा ताइवान संबंधी मामलों में आगे कदमों को बढाया जाना।

संयुक्त राष्ट्र में सुधार के लिए भारत द्वारा उठाए गए कदम:

  • G4 समूह: G4 (ब्राजील, भारत, जर्मनी और जापान) की मंत्रिस्तरीय बैठक।
  • L69 समूह: L69 समूह के साथ भारतीय प्रतिनिधिमंडल की बैठक। L69 समूह की सदस्यता एशिया, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका, कैरिबियन और छोटे द्वीप विकासशील राज्यों तक विस्तारित है।

संयुक्त राष्ट्र से इतर भारत की भागीदारी:

  • क्वाड (Quad): बहुपक्षीय बैठकों में मंत्री की भागीदारी।
  • आईबीएसए (IBSA): भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका
  • ब्रिक्स (BRICS): (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका)
  • प्रेसीडेंसी प्रो टेम्पोर CELAC: लैटिन अमेरिकी और कैरेबियन राज्यों का समूह (Community of Latin American and the Caribbean States – CELAC)
  • भारत-कैरिकॉम (India-CARICOM): कैरेबियन देशों का समूह
  • भारत-फ्रांस-ऑस्ट्रेलिया
  • भारत-फ्रांस-संयुक्त अरब अमीरात
  • भारत-इंडोनेशिया-ऑस्ट्रेलिया

निष्कर्ष:

रूस-यूक्रेन युद्ध और महामारी-प्रेरित प्रतिबंधों के कारण, ‘संयुक्त राष्ट्र’ के सुधार की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक स्पष्ट रूप से महसूस होने की संभावना है। विश्व व्यवस्था के लिए इस चुनौतीपूर्ण समय में, भारत “कूटनीति और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता” के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पर दृढ़ है।

इंस्टा लिंक्स:

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद

संयुक्त राष्ट्र महासभा

मेंस लिंक:

कोविड-19 महामारी के दौरान वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करने में WHO की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (UPSC 2020)

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन-IV


 

खेल नैतिकता – मांकडिंग

संदर्भ: भारतीय ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा ने ब्रिटेन के लॉर्ड्स मैदान में चल रहे एक क्रिकेट मैच के दौरान नॉन-स्ट्राइकर एंड पर क्रीज के बाहर खड़ी इंग्लैंड की बल्लेबाज ‘चार्ली डीन’ को रन आउट कर दिया, और इसके साथ ही भारत ने एकदिवसीय श्रृंखला में 3-0 से जीत हासिल कर ली।

इस ‘रन आउट’ की घटना के बाद क्रिकेट में पारंपरिक रूप से जुडी “मांकडिंग” (Mankading) की घटनाओं पर क्रिकेट-जगत में ‘आक्रोश’ फ़ैल गया है।

‘मांकडिंग’ क्या है?

मांकडिंग (Mankading) क्रिकेट में ‘रन आउट’ की एक विधि होती है, जिसमे एक गेंदबाज, गैर-स्ट्राइकर बल्लेबाज को क्रीज से बाहर होने पर गेंदबाजी करने से पहले गिल्ली उड़ाकर आउट कर देता है।

  • हालांकि, खिलाड़ी को आउट करने के लिए कानूनी रूप से स्वीकार्य है, लेकिन इसे खेल की भावना के खिलाफ माना जाता है।
  • इस ‘पद्धति’ का नाम महान भारतीय गेंदबाज ‘वीनू मांकड़’ (Vinoo Mankad) के नाम पर रखा गया है।
  • 1947 में, जब भारत ऑस्ट्रेलिया में एक श्रृंखला खेल रहा था, भारतीय गेंदबाज ‘वीनू मांकड़’ ने गेंद को छोड़ने से पहले नॉन-स्ट्राइकर एंड पर विकेट की गिल्ली उड़ाकर विपक्षी बल्लेबाज ‘बिल ब्राउन’ को दो बार आउट किया था।

नैतिक – अनैतिक बहस:

नैतिक (Ethical)अनैतिक (Unethical)

 

क्रिकेट के नियमों में यह बिल्कुल स्पष्ट है, कि नॉन-स्ट्राइकर को अपनी क्रीज़ में तब तक रहना चाहिए जब तक कि गेंद नहीं फेंकी जाती।

 

अपनी क्रीज़ से बहुत दूर रहने या बहुत जल्दी बैक अप लेने का मतलब है, कि नॉन-स्ट्राइकर बहुत स्पष्ट रूप से अनुचित लाभ ले रहा है।

 

 

इसे कथित तौर पर “क्रिकेट की भावना” का उल्लंघन करने वाला कहा गया है।

मांकडिंग पर कानून:

  • क्रिकेट के नियमों के संरक्षक ‘मेरिलबोन क्रिकेट क्लब’ (Marylebone Cricket Club) द्वारा घोषित नए कानूनों में ‘मांकडिंग’ को नॉन-स्ट्राइकर को रन आउट करने को एक सामान्य तरीके के रूप में स्वीकार किया है, और इसे ‘नियम 41’ (अनफेयर प्ले) से हटाकर ‘नियम 38’ (रन आउट) के साथ जोड़ दिया है।
  • पुरुषों के टेस्ट मैचों और वनडे क्रिकेट में ‘मांकडिंग’ की ऐसी घटनाएँ कई बार हो चुकी हैं। सबसे चर्चित घटना 2019 आईपीएल के दौरान हुई जब रविचंद्रन अश्विन ने ‘किंग्स इलेवन पंजाब’ और ‘राजस्थान रॉयल्स’ के बीच होने वाले मैच में जोस बटलर को रन आउट किया था।

स्वच्छ टॉयकैथॉन

संदर्भ: आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA), खिलौनों के सृजन या विनिर्माण में कचरे के उपयोग के लिए समाधान की खोज करने के उद्देश्य से ‘स्वच्छ अमृत महोत्सव’ के तहत ‘स्वच्छ टॉयकैथॉन’ (Swachh Toycathon) नामक प्रतियोगिता का शुभारंभ करेगा।

  • स्वच्छ टॉयकैथॉन प्रतियोगिता, ‘राष्ट्रीय खिलौना कार्य योजना’ (NAPT) और ‘स्वच्छ भारत मिशन’ (SBM 2.0) के बीच एक संयोजन है।
  • ‘सेंटर फॉर क्रिएटिव लर्निंग’, आईआईटी गांधीनगर, स्वच्छ टॉयकैथॉन प्रतियोगिता के लिए नॉलेज पार्टनर है।
  • यह प्रतियोगिता MyGov के ‘इनोवेट इंडिया पोर्टल’ पर आयोजित की जाएगी।

राष्ट्रीय खिलौना कार्य योजना’ (NAPT) के बारे में:

  • भारत को वैश्विक खिलौना हब के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से पारंपरिक हस्तशिल्प और हस्तनिर्मित खिलौनों सहित भारतीय खिलौना उद्योग को बढ़ावा देने के लिए ‘राष्ट्रीय खिलौना कार्य योजना’ (एनएपीटी) 2020 (National Action Plan for Toys (NAPT) 2020) की शुरुआत की गई थी।
  • कार्यान्वयन: केन्‍द्रीय सरकार के 14 मंत्रालयों के साथ ‘उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग’ (DPIIT) वर्तमान में NAPT के विभिन्न पहलुओं को कार्यान्वित कर रहा है।

सम्बंधित तथ्य:

  • महिला और बाल विकास मंत्रालय (MoWCD) बच्चों और उनके परिवारों को स्वस्थ जीवन और अच्छे पोषण संबंधी प्रथाओं के बारे में शिक्षित करने के लिए आंगनवाड़ी केंद्रों में स्वदेशी खिलौनों और ‘इसे स्वयं करें’ (do it yourself DIY) खिलौनों का उपयोग कर रहा है।
  • देशी खिलौनों के उदाहरण हैं गुजरात (टेराकोटा खिलौना); आंध्र (कोंडापल्ली और एटिकोप्पाका खिलौना); कर्नाटक (चन्नापटना खिलौने); त्रिपुरा (बांस के खिलौने)।

 


मुख्य परीक्षा संवर्धन हेतु पाठ्य सामग्री (निबंध/नैतिकता)


समाज सेवा के प्रति समर्पण

  • नारायणी नाम की एक 65 वर्षीय शिक्षिका अपने क्षेत्र के बच्चों के लिए ट्यूशन पढ़ाने हेतु प्रतिदिन 25 किमी पैदल चलती है। वह प्रातः 4.30 बजे उठकर हर सुबह 6.30 बजे ट्यूशन पढ़ाने के लिए पहले घर पहुंच जाती है। इसके बाद वह अपने अन्य छात्रों के घर जाती है और दिन भर यही क्रम जारी रहता है, फिर रात को घर लौट जाती है।
  • नारायणी टीचर ने 1971 में 10वीं कक्षा से पास की थी और कभी कॉलेज नहीं गई। लेकिन वह अंग्रेजी, मलयालम, हिंदी और संस्कृत- चार भाषाएं जानती हैं। उन्होंने 15 साल की उम्र में पढ़ाना शुरू किया था, लेकिन वह कभी स्कूल की शिक्षिका नहीं बनी। पिछले 50 वर्षों में इस 65 वर्षीय शिक्षिका ने 100 से अधिक छात्रों को पढ़ाया है।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


सित्तनवासल गुफाएँ

संदर्भ: सित्तनवासल गुफाओं (Sittanavasal Caves) के अधिकांश चित्र क्षतिग्रस्त हों जाने या नष्ट कर दिए जाने के बाद, ‘भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण’ द्वारा इनके संरक्षण हेतु उपाय शुरू किए गए हैं तथा इन प्राचीन धरोहर तक लोगों की पहुंच को ट्रैक करने के लिए ‘डिजिटल नियंत्रण’ भी शुरू किए गए हैं।

‘सित्तनवासल’ के बारे में:

सित्तनवासल गुफाएँ (Sittanavasal Caves) या अरिवर कोइल (Arivar Koil) भारत के तमिलनाडु में पुदुकोट्टई ज़िले के ‘सित्तनवासल गाँव’ में स्थित एक द्वितीय शताब्दी में निर्मित एक तमिल ‘श्रमण परिसर’ है।

  • इतिहासकारों द्वारा इसे जिले के सबसे पुराने आबाद क्षेत्रों में से एक और जैन प्रभाव का एक प्रमुख केंद्र माना जाता है।
  • तमिलनाडु में यह एकमात्र स्थान है जहाँ पांड्य चित्रकला के चिह्न मिलते हैं।
  • गर्भगृह की छत और ‘अरिवर कोइल’ के अर्ध मंडपम पर उत्कीर्ण कलाकृतियां, चौथी से छठी शताब्दी के बाद के ‘अजंता गुफा चित्रों’ का एक प्रारंभिक उदाहरण है।
  • गर्भगृह की छत पर बने चित्रों में ‘भव्यास’ (Bhavyas) अर्थात ‘मोक्ष या आध्यात्मिक मुक्ति प्राप्त करने के लिए काम करने वाली श्रेष्ठ आत्माएं’, खिलते हुए कमल से भरे कुंड में आनंद लेते हुए दर्शायी गयी हैं; वर्तमान में इसका अधिकांश भाग खंडमय पलस्तर से अस्पष्ट हो गया है।
  • ‘अर्ध मंडपम’ के खंभों पर नाचती हुई लड़कियों की रूपरेखा अस्पष्ट और धुंधली हो चुकी है।

 

रोश हशनाह

संदर्भ: प्रधानमंत्री मोदी ने ‘रोश हशनाह’ (Rosh Hashanah) के अवसर पर इजराइल के प्रधानमंत्री यायर लैपिड, इजराइल के मैत्रीपूर्ण लोगों और दुनिया भर के यहूदी लोगों को हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं।

  • ‘रोश हशनाह’ यहूदी नव वर्ष (Jewish New Year) होता है, जिसका अर्थ है वर्ष का प्रमुख या वर्ष का पहला।
  • ‘रोश हशनाह’ ब्रह्मांड के उद्भव की स्मृति में मनाया जाता है, और यह ‘श्रद्धायुक्त भय के दिनों’ (Days of Awe) की शुरुआत का प्रतीक होता है। डेज ऑफ़ आव (Days of Awe), पश्चाताप करने के 10-दिन होते हैं, जिसका अंतिम दिन ‘योम किप्पुर’ (Yom Kippur) होता है। इस दिन को ‘प्रायश्चित का दिन’ (Atonement Day) भी कहा जाता है।
  • ‘रोश हशनाह’ के दौरान, लोग यह आशा करते हुए अच्छे कार्य करते हैं कि परमेश्वर उनके नाम ‘जीवन की पुस्तक’ में लिखेगा और उन्हें आने वाला एक आनंदमय और समृद्ध वर्ष प्रदान करेगा।
  • यहूदी धर्म में दो उच्च पवित्र दिन मनाए जाते हैं: रोश हशनाह और योम किप्पुर।

‘योम किप्पुर’ का मुख्य उद्देश्य क्या है?

‘योम किप्पुर’ (Yom Kippur) ‘प्रायश्चित का दिन’ होता है और यह यहूदियों के उच्च पवित्र दिनों के अंत का प्रतीक है। ‘योम किप्पुर’ लोगों को प्रार्थना, पश्चाताप और दान के माध्यम से अपने भाग्य को बदलने का अवसर प्रदान करता है।

 

 

ऑपरेशन मेघ चक्र

संदर्भ: केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने बाल यौन शोषण सामग्री (Child Sexual Abuse Material – CSAM) के प्रसार और साझा करने के खिलाफ अखिल भारतीय अभियान ‘ऑपरेशन मेघ चक्र’ के तहत 20 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में छापे मारे।

प्रमुख बिंदु:

  • ऑपरेशन मेघ चक्र: न्यूजीलैंड में अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के आधार पर, इंटरपोल की सिंगापुर विशेष इकाई से प्राप्त इनपुट के बाद “मेघ चक्र” (Megh Chakra) ऑपरेशन शुरू किया गया है।
  • ऑपरेशन कार्बन (Operation Carbon): यह भी ‘ऑपरेशन मेघ चक्र’ की भांति सीबीआई द्वारा शुरू की गयी कवायद है, जिसमें 13 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में संदिग्धों पर छापेमारी की गई।

 

मध्याह्न भोजन योजना का सोशल ऑडिट

संदर्भ: केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 30 नवंबर तक हर जिले में मध्याह्न भोजन योजना का सोशल ऑडिट कराने का निर्देश दिया है।

सामाजिक लेखा परीक्षा’ या ‘सामजिक संपरीक्षा’ या सोशल ऑडिट (Social Audit), किसी योजना के उद्देश्यों की तुलना में उसके सामाजिक और नैतिक प्रदर्शन को मापने, समझने, रिपोर्ट करने और अंततः सुधारने का एक तरीका होता है।

‘सामाजिक लेखा परीक्षा’ के मुद्दे:

  • कई मामलों में राज्यों ने ‘सामाजिक लेखा परीक्षा’ की अंतिम रिपोर्ट शिक्षा मंत्रालय के तहत स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग को प्रस्तुत नहीं की है। उदा हरण के लिए, मेघालय सरकार ने अभी तक वर्ष 2019-20 की अंतिम ऑडिट रिपोर्ट जमा नहीं की है।
  • कम से कम नौ राज्यों और चार केंद्र शासित प्रदेशों में, 2021-22 के लिए सोशल ऑडिट भी शुरू नहीं किया गया है।
  • 2021-22 के लिए सोशल ऑडिट: अरुणाचल प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल आदि जैसे कई राज्यों ने 2021-22 में सोशल ऑडिट नहीं किए जाने की सूचना दी।
  • रिकॉर्ड के अनुसार- अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, पुडुचेरी, लद्दाख और लक्षद्वीप के केंद्र शासित प्रदेशों में, सोशल ऑडिट कभी नहीं किया गया।

मध्याह्न भोजन योजना :

मध्याह्न भोजन योजना (Mid-Day meal scheme), सरकारी विद्यालयों, सहायता प्राप्त स्कूलों तथा ‘समग्र शिक्षा’ के अंतर्गत सहायता प्राप्त मदरसों में सभी बच्चों के लिए एक समय भोजन दिए जाने को सुनिश्चित करती है।

  • इस योजना के अंतर्गत, आठवीं कक्षा तक के छात्रों को एक वर्ष में कम से कम 200 दिन पका हुआ पौष्टिक भोजन प्रदान किया जाता है।
  • इस योजना का कार्यान्वयन मानव संसाधन विकास मंत्रालय के द्वारा किया जाता है।
  • इस योजना को एक केंद्रीय प्रायोजित योजना के रूप में 15 अगस्त, 1995 को पूरे देश में लागू किया गया था।
  • इसे प्राथमिक शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पोषण सहायता कार्यक्रम (National Programme of Nutritional Support to Primary Education: NP– NSPE) के रूप में शुरू किया गया था।
  • वर्ष 2004 में, इस कार्यक्रम को मिड डे मील योजना के रूप में फिर से शुरू किया गया था।
  • राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के अनुच्छेद 28 के तहत योजना का ‘सोशल ऑडिट’ अनिवार्य है।

 

ABPM-JAY की चौथी और ABDM की पहली वर्षगाँठ

संदर्भ: हाल ही में, ‘आयुष्मान भारत- प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना’ (ABPM-JAY) और ‘आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन’ (ABDM) ने अपने कार्यान्वयन के 1 साल पूरे किए हैं।

प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) की सफलता:

  • जेब से व्यय में कमी: अब तक 4 करोड़ से अधिक लोगों को अस्पताल में मुफ्त इलाज मिल चुका है।
  • अस्पतालों के नेटवर्क में वृद्धि: ‘प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना’ के अंतर्गत पैनल में 25000 से अधिक अस्पताल शामिल हैं।
  • लाभार्थियों की संख्या में वृद्धि: 37 मिलियन से अधिक।

डिजीटल इंफ्रास्ट्रक्चर:

  • कार्ड वितरण में सफलता: पिछले चार वर्षों में 19 करोड़ आयुष्मान कार्ड। प्रतिदिन 10 लाख ऐसे कार्ड वितरित किए जा रहे हैं।
  • अनौपचारिक सफाई कर्मचारियों के लिए PM-JAY का विस्तार।
  • प्रीमियम का भुगतान ‘नेशनल एक्शन फॉर मैकेनाइज्ड सेनिटेशन इकोसिस्टम’ (नमस्ते) के माध्यम से किया जाएगा।

 

सीएसआर नीति संशोधन नियम 2022

संदर्भ: वाणिज्य कार्य मंत्रालय (MCA) द्वारा ‘कंपनी (सीएसआर नीति) संशोधन नियम 2022’ जारी किए गए हैं।

नए नियम:

  • अव्ययित ‘कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व’ (CSR) राशि का 3 वर्षों के भीतर उपयोग किया जाना चाहिए।
  • CSR कार्यों को लागू करने के लिए ‘CSR समिति’ का गठन करना अनिवार्य होगा।
  • सामाजिक प्रभाव आकलन (Social Impact Assessment – SIA) के लिए खर्च की गई राशि कुल CSR के 2.5% या 50 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए।
  • 10 करोड़ रुपये या अधिक CSR बजट वाले व्यवसायों के लिए या 1 करोड़ रुपये या उससे अधिक के परिव्यय वाली परियोजनाओं के लिए ‘सामाजिक प्रभाव आकलन’ (SIA) अनिवार्य कर दिया गया है।
  • पारदर्शिता: कंपनियों को कंपनी की वेबसाइट पर CSR समिति की संरचना और CSR नीति का खुलासा करना अनिवार्य होगा।

कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के बारे में:

‘कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व’ (Corporate Social Responsibility  CSR) एक प्रबंधन अवधारणा है, जिसके तहत कंपनियाँ अपने व्यवसाय मॉडल और पद्धति में सामाजिक और पर्यावरण संबंधी लाभकारी कार्यक्रमों और प्रथाओं को उनके हितधारकों के साथ एकीकृत करती हैं।

  • CSR, पर्यावरण और सामाजिक कल्याण पर कंपनी के प्रभावों का आकलन करने और उनकी जिम्मेदारी लेने के लिए एक कॉर्पोरेट पहल है।
  • वर्ष 2014 में कंपनी अधिनियम, 2013 (कंपनी अधिनियम) में संशोधन किए जाने के पश्चात्, कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (CSR) गतिविधियों की पहचान करके एक रूपरेखा तैयार करने और कंपनियों के लिए CSR को अनिवार्य करने वाला भारत, दुनिया के पहले देशों में से एक है।

भारत में CSR का विनियमन:

कंपनी अधिनियम की धारा 135(1) में CSR समिति गठित करने हेतु कंपनियों को चिह्नित करने के लिए सीमा-रेखा निर्धारित की गयी है; जिसके अनुसार-

  1. जिन कंपनियों की ठीक पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष में, सकल परिसंपत्ति 500 करोड़ रुपये या उससे अधिक है; या
  2. जिन कंपनियों ने 1000 करोड़ रुपये या अधिक का कारोबार किया है; या
  3. 5 करोड़ रुपये या उससे अधिक का शुद्ध लाभ अर्जित किया है, उनके लिए CSR समिति का गठन करना आवश्यक होगा।

कंपनी (संशोधन) अधिनियम, 2019 के अनुसार, ‘कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी’, कंपनियों के तीन वित्तीय वर्ष के पूरे होने पर लागू होता है।

 

ग्लोबल ओशन ऑब्जर्विंग सिस्टम

संदर्भ: विश्व मौसम विज्ञान संगठन (World Meteorological Organisation – WMO) ने समुद्री और महासागर डेटा पर प्रकाश डालते हुए ‘ग्लोबल ओशन ऑब्जर्विंग सिस्टम’ (Global Ocean Observing System – GOOS) रिपोर्ट कार्ड, 2022 जारी किया है।

निष्कर्ष: प्रतिवर्ष वायुमंडल में उत्सर्जित 40 गीगाटन कार्बन का 26% हिस्सा महासागरों द्वारा अवशोषित किया जाता है।

सिफारिश:

  • खोज, पहुंच, अन्तरसंक्रियता और पुन: प्रयोज्य (Findability, Accessibility, Interoperability and Reusability – FAIR) डेटा तक पहुंच सुनिश्चित की जाए;
  • तटीय क्षेत्र के जोखिमों को कम करने के लिए एक पूर्व चेतावनी प्रणाली स्थापित की जाए।

 

 

संवहनीय विमानन ईंधन

संदर्भ: ‘सीएसआईआर- इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम’ ने ‘शुद्ध शून्य उत्सर्जन’ हासिल करने हेतु ‘संवहनीय विमानन ईंधन’ (Sustainable Aviation Fuel – SAF) के लिए एयर इंडिया, एयरएशिया और विस्तारा के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। ये सभी कंपनिया टाटा के स्वामित्व में हैं।

  • अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) ने 2050 तक विमानन क्षेत्र में शुद्ध शून्य का लक्ष्य रखा है।

‘संवहनीय विमानन ईंधन’ (SAF) क्या है?

  • ‘सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल’ संवहनीय संसाधनों, वानिकी और कृषि अपशिष्ट और इस्तेमाल किए गए खाना पकाने के तेल से निर्मित जैव ईंधन होता है, और इसे उत्सर्जन को कम करने के लिए जेट विमानों में प्रयुक्त होने वाले जीवाश्म ईंधन के साथ मिश्रित किया जा सकता है।
  • यह एक ‘ड्रॉप-इन’ ईंधन (drop-in’ fuel) है, जिसका अर्थ है कि इसे विमान में बिना किसी बदलाव किए हुए, इसके नियमित ईंधन में मिलाया जा सकता है।

2016 में, अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) द्वारा अंतर्राष्ट्रीय विमानन से CO2 उत्सर्जन को संबोधित करने के लिए एक वैश्विक बाजार-आधारित तंत्र, ‘कार्बन ऑफसेटिंग एंड रिडक्शन स्कीम फॉर इंटरनेशनल एविएशन’ (CORSIA) को अपनाया।

2027 से, लगभग सभी अंतरराष्ट्रीय उड़ानें ‘अनिवार्य ऑफ़सेटिंग शर्तों’ के अधीन परिचालित होंगी।

वाटर ट्रेडिंग

संदर्भ: नीति आयोग द्वारा भारत में कमोडिटी एक्सचेंज पर ‘जल के व्यापार’ / ‘वाटर ट्रेडिंग’ (Water Trading) करने के लिए सोने, चांदी और तेल के समान एक नीति लाएगा।

इसका उद्देश्य, पानी की बेहतर कीमत की खोज, कुशल उपयोग और जल संसाधनों में अधिक निवेश सुनिश्चित करना है।

 

‘वाटर ट्रेडिंग’ क्या है?

‘जल व्यापार’ या ‘वाटर ट्रेडिंग’, जल तक पहुंच के अधिकार खरीदने और बेचने की प्रक्रिया है, जिसे अक्सर ‘जल अधिकार’ भी कहा जाता है।

  • ‘वाटर ट्रेडिंग’, जल धारकों को यह तय करने की अनुमति देती है कि उन्हें किसी विशेष समय पर पानी खरीदने या बेचने की आवश्यकता है या नहीं।
  • पहला ‘व्यापार योग्य जल मूल्य वायदा सूचकांक’ (tradable water price futures index) वर्ष 2020 में ‘शिकागो स्टॉक एक्सचेंज’ में लॉन्च किया गया था।
  • यह ऑस्ट्रेलिया, चिली, अमेरिका आदि देशों में प्रचलित है।

 

एशियाई पाम तेल गठबंधन

संदर्भ: ताड़ के तेल आयात करने वाले 5 प्रमुख देशों – भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल के खाद्य तेल उद्योग संघों द्वारा ‘एशियाई पाम तेल गठबंधन’ (Asian Palm Oil Alliance) स्थापित किया गया है। इसका उद्देश्य सामूहिक सौदेबाजी की शक्ति हासिल करने और विभिन्न उद्देश्यों के लिए ‘ताड़ के तेल’ की नकारात्मक छवि को बदलना है।

‘ताड़ के तेल’ के बारे में:

  • ताड़ का तेल (Palm Oil), एक खाद्य वनस्पति तेल है जो ताड़ के तेल के फल के मेसोकार्प (लाल गूदे) से प्राप्त होता है।
  • यह विटामिन ए और ई से भरपूर होता है, और इसमें कोई ट्रांस फैटी एसिड नहीं होता है।
  • वैश्विक पाम आयल की मांग में एशिया की हिस्सेदारी 40% है। भारत इसका सबसे बड़ा आयातक है और यह दुनिया के 15% पाम आयल का आयात करता है।
  • भारत में: पाम तेल की खेती मुख्य रूप से आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में केंद्रित है।
  • उपयोग: इसका उपयोग खाना पकाने के तेल के रूप में, सौंदर्य प्रसाधन, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, केक, चॉकलेट, साबुन, स्प्रेड, शैम्पू और जैव ईंधन में किया जाता है। बायोडीजल बनाने में कच्चे पाम तेल के उपयोग को ‘ग्रीन डीजल’ के रूप में ब्रांडेड किया जा रहा है।

सरकार की पहलें: राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन – पाम तेल (भारत के घरेलू पाम तेल उत्पादन को 3 गुना (2025-26 तक) बढ़ाने के लिए); तिलहन के लिए खरीफ रणनीति 2021; पीली क्रांति; पाम ऑयल क्षेत्र का विस्तार (राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत); तिलहन फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाना।

 

कॉफी रिंग इफ़ेक्ट

संदर्भ: रक्त जैसे जैविक रूप से प्रासंगिक तरल पदार्थों के सुखाने के लिए प्रयुक्त होने वाले ‘कॉफी-रिंग इफ़ेक्ट’ (Coffee-Ring Effect) का अध्ययन रक्ताल्पता और हाइपरलिपिडेमिक स्थितियों का निदान करने में मदद कर सकता है।

‘कॉफी-रिंग इफ़ेक्ट क्या है?

  • जब स्पिल्ड कॉफी की एक बूंद सूख जाती है, और सूखी बूंद का सबसे बाहरी किनारा, इसके केंद्र की तुलना में थोड़ा गहरा होता है, जिससे एक गहरा ‘रिंग’ बनता है। इसका कारण केंद्र से निलंबित कॉफी कणों का बाहर की ओर बहाव होता है।
  • भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मद्रास के शोधकर्ताओं ने दिखाया है कि रिम तक पहुंचने के बाद, जैसे-जैसे बूंद सूखती है, कुछ कण अंदरूनी बहाव से भी गुजरते हैं। इस शोध का कृषि, फोरेंसिक विज्ञान और यहां तक ​​कि रोग निदान में भी अनुप्रयोग किया जा सकता है।

कोयला गैसीकरण

संदर्भ: कोल इंडिया द्वारा सतही कोयला गैसीकरण (surface coal gasification) मार्ग के माध्यम से रासायनिक परियोजनाओं को कोयला देने के लिए इंडियन ऑयल, भेल और गेल के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।

यह परियोजना 2030 तक कोयला मंत्रालय द्वारा निर्धारित 100 मिलियन टन कोयला गैसीकरण के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद करेगी।

‘कोयला गैसीकरण’ क्या है?

‘कोयला गैसीकरण’ (Coal Gasification)  को कोयला जलाने की तुलना में स्वच्छ विकल्प माना जाता है। कोयला गैसीकरण, कोयले को संश्लेषित गैस (Synthesis Gas)- सिनगैस (syngas)-  में परिवर्तित करने की प्रक्रिया है।

इस प्रक्रिया में कार्बन मोनोऑक्साइड (CO), हाइड्रोजन (H2), कार्बन डाइऑक्साइड (CO2), प्राकृतिक गैस (CH4), और जल वाष्प (H2O) के मिश्रण से सिनगैस का निर्माण लिया जाता है।

 

भारतीय ओलंपिक संघ

संदर्भ: हाल ही में, सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूर्व न्यायाधीश एल नागेश्वर राव को ‘भारतीय ओलंपिक संघ’ (Indian Olympic Association – IOA) के संविधान में संशोधन के लिए नियुक्त किया गया है। इससे पहले, अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक संघ द्वारा, भारतीय ओलंपिक संघ’ की, उसके मामलों में सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप का हवाला देते हुए, मान्यता रद्द कर दी गई थी।

IOA एक स्वायत्त निकाय (ओलंपिक चार्टर के तहत मान्यता प्राप्त) और सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के तहत एक गैर-लाभकारी संगठन है।

चित्र: न्यायाधीश एल नागेश्वर राव

 

मानचित्र (चर्चा में)