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[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 24 September 2022

विषयसूची

सामान्य अध्ययन-II

  1. बाल मृत्यु दर में कमी

 

सामान्य अध्ययन-III

  1. भारतीय कृषि तकनीक

 

मुख्य परीक्षा संवर्धन हेतु पाठ्य सामग्री (निबंध/नैतिकता)

  1. उत्पादकता व्यामोह
  2. विश्व नदी दिवस

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

  1. एडवांस्ड ड्वोरक तकनीक
  2. पोषण वाटिकाएं
  3. G4 देशों द्वारा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की ‘तत्काल आवश्यकता’ पर जोर
  4. क्वाड देशों के बीच एक समझौते पर हस्ताक्षर
  5. लैंसेट आयोग द्वारा ‘बहुत धीमी गति से’ काम करने के लिए WHO की आलोचना
  6. पूंजीगत निवेश हेतु राज्यों को विशेष सहायता योजना
  7. शैवाल जैव ईंधन
  8. रीयल-टाइम ट्रेन सूचना प्रणाली
  9. स्टार्ट-अप के लिए ‘झुंड ड्रोन प्रतियोगिता’
  10. मानचित्र (चर्चा में)

 


सामान्य अध्ययन-II


विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

बाल मृत्यु दर में कमी

संदर्भ: हाल ही में जारी ‘नमूना पंजीकरण प्रणाली (SRS) सांख्यिकीय रिपोर्ट’ 2020 के अनुसार, भारत में 2014 के बाद से ‘शिशु मृत्यु दर’ (Infant Mortality Rate – IMR), 5 वर्ष से कम बच्चों की मृत्यु दर (U5MR)  और नवजात मृत्यु दर (Neonatal Mortality Rate – NMR) में में कमी आई है और देश 2030 तक ‘सतत विकास लक्ष्य’ (एसडीजी) प्राप्त करने की दिशा में अग्रसर है।

‘नमूना पंजीकरण प्रणाली सांख्यिकीय रिपोर्ट’ (Sample Registration System (SRS) Statistical Report), भारत के महापंजीयक (RGI) द्वारा जारी की जाती है

 

 

 

रिपोर्ट के अन्य प्रमुख निष्कर्ष:

  • पहले ही ‘नवजात मृत्यु दर’ (NMR) (<=12 2030 तक) का SDG लक्ष्य हासिल कर चुके छह (6) राज्य/केंद्र शासित प्रदेश: केरल (4), दिल्ली (9), तमिलनाडु (9), महाराष्ट्र (11), जम्मू और कश्मीर (12) और पंजाब (12)
  • पहले ही 5 वर्ष से कम बच्चों की मृत्यु दर’ (U5MR) (<=25 तक 2030) का SDG लक्ष्य हासिल कर चुके ग्यारह (11) राज्य/केंद्र शासित प्रदेश: केरल (8), तमिलनाडु (13), दिल्ली (14), महाराष्ट्र (18), जम्मू-कश्मीर (17), कर्नाटक (21), पंजाब (22), पश्चिम बंगाल (22), तेलंगाना (23), गुजरात (24), और हिमाचल प्रदेश (24)
  • बालिकाओं के लिए U5MR, बालकों (31) की तुलना में अधिक (33) है।

 

मूलभूत शब्दावली:

  • अपरिष्कृत जन्म दर (Crude Birth Rate – CBR): इसे प्रति 1,000 जनसंख्या पर जन्म के रूप में व्यक्त किया जाता है।
  • कुल प्रजनन दर (Total Fertility Rate – TFR): एक महिला द्वारा अपनी प्रजनन आयु में पैदा होने वाले बच्चों की औसत संख्या है। 2022 में भारत की ‘वर्तमान प्रजनन दर प्रति महिला 2.159 जन्म है, जो 2021 से 0.92% कम है।
  • ‘नवजात मृत्यु दर’ (NMR): शिशु के जीवन के पहले 28 दिनों के भीतर मृत्यु।
  • 5 वर्ष से कम बच्चों की मृत्यु दर (U5MR): 5 साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर।
  • शिशु मृत्यु दर(IMR): प्रति 1000 जीवित जन्मों पर एक वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु की संख्या है।

नमूना पंजीकरण प्रणाली के बारे में:

‘नमूना पंजीकरण प्रणाली’ (Sample Registration System – SRS) राष्ट्रीय और उप-राष्ट्रीय स्तरों पर ‘शिशु मृत्यु दर’, ‘अपरिष्कृत जन्म दर’, ‘मृत्यु दर’ और ‘अन्य प्रजनन दरों’ के वार्षिक अनुमान प्रदान करने के लिए एक जनसांख्यिकीय सर्वेक्षण है। इसकी शुरुआत 1964-65 में भारत के महापंजीयक (RGI) द्वारा की गई थी।

भारत के महापंजीयक (RGI) के बारे में:

  • RGI की स्थापना 1961 में गृह मंत्रालय के अधीन भारत सरकार द्वारा की गई थी।
  • यह जनसांख्यिकीय सर्वेक्षणों (भारत की जनगणना और भारतीय भाषाई सर्वेक्षण सहित) के परिणामों का संचालन और विश्लेषण करता है।

 

‘सतत विकास लक्ष्य’- 3| उत्तम स्वास्थ्य औए खुशहाली:

2030 तक, नवजात शिशुओं और 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की रोकी जा सकने वाली मौतों को समाप्त करना।

इंस्टा लिंक्स:

‘सतत विकास रिपोर्ट- 2022’

बाल मृत्यु दर

मेंस लिंक:

कल्याणकारी राज्य की ‘नैतिक अनिवार्यता’ होने के अलावा, सतत विकास के लिए ‘प्राथमिक स्वास्थ्य संरचना’ एक आवश्यक पूर्व शर्त है। विश्लेषण कीजिए। (यूपीएससी 2021)

 स्रोत: पीआईबी

 


सामान्य अध्ययनIII


 

विषय: मुख्य फसलें- देश के विभिन्न भागों में फसलों का पैटर्न- सिंचाई के विभिन्न प्रकार एवं सिंचाई प्रणाली- कृषि उत्पाद का भंडारण, परिवहन तथा विपणन, संबंधित विषय और बाधाएँ; किसानों की सहायता के लिये ई-प्रौद्योगिकी।

भारतीय कृषि प्रौद्योगिकी

संदर्भ: हाल ही में, FSG नामक एक वैश्विक परामर्श फर्म द्वारा “भारतीय कृषि- प्रौद्योगिकी के लिए आगे क्या है” शीर्षक से ‘एग्रीटेक रिपोर्ट 2022’ (Agritech Report 2022) जारी की गयी है।

  • कृषि प्रौद्योगिकी, या कृषि तकनीक (Agri-Tech), कृषि विज्ञान, कृषि-शास्त्र और कृषि इंजीनियरिंग पर आधारित कृषि में प्रौद्योगिकी का उपयोग है।
  • इसका उद्देश्य कृषि कार्यों की उपज, दक्षता, लाभप्रदता और स्थिरता में सुधार करना है।

रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष:

  • महत्वपूर्ण निजी इक्विटी प्रवाह के साथ ‘एग्री-टेक स्टार्टअप’ भारत के कृषि-तकनीक नवाचारों और निवेश की कहानी को चला रहे हैं।
  • फोकस क्षेत्र: मार्केट लिंकेज, एग्री-फिनटेक, फार्म मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर, रिमोट सेंसिंग और एडवाइजरी, और फार्म ऑटोमेशन।
  • प्रौद्योगिकी ने पारंपरिक कृषि मूल्य श्रृंखला – किसान कैसे जानकारी और इनपुट तक पहुँचते हैं और कैसे वे अपनी उपज को बढ़ाते हैं और बेचते हैं – को अपरिवर्तनीय रूप से भंग कर दिया है।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार: एग्रीटेक स्टार्टअप ‘सरकार द्वारा नियंत्रित कृषि बाजारों’ से अधिक ‘मांग-संचालित डिजिटल बाजारों’ की ओर रुख कर सकते हैं।

  • वर्तमान में, यह अनुमान है कि भारत में लगभग 600 से 700 कृषि-तकनीकी स्टार्टअप कृषि-मूल्य श्रृंखला के विभिन्न स्तरों पर काम कर रहे हैं।
  • इनमे से कई कृषि-तकनीकी स्टार्टअप, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग (ML), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), आदि का उपयोग अधिक संसाधन उपयोग दक्षता, पारदर्शिता और समावेशिता के लिए बड़े डेटा की क्षमता को अनलॉक करने के लिए करते हैं। उदाहरण: निन्जाकार्ट, देहात और क्रॉफार्म (Otipy)

एग्री-टेक स्टार्टअप्स का प्रभाव:

  • निन्जाकार्ट (Ninjacart) ने मांग-संचालित फसल अनुसूची के माध्यम से पारंपरिक श्रृंखलाओं में 25 प्रतिशत तक की तुलना में अपव्यय को घटाकर 4 प्रतिशत कर दिया।
  • ‘देहात’ (Dehaat) ने इनपुट लागत में बचत, कृषि उत्पादकता में वृद्धि और बेहतर मूल्य की खोज के परिणामस्वरूप किसानों की आय में 50 प्रतिशत तक की वृद्धि को सक्षम बनाया है।

 

कृषि परिवर्तन में प्रौद्योगिकी की भूमिका:

कृषि में प्रौद्योगिकी के उपयोग के अन्य उदाहरण:

बीज की गुणवत्ता में वृद्धि: अधिक उपज देने वाली किस्मों और आनुवंशिक रूप से इंजीनियर बीज (बीटी कॉटन) से कीटनाशकों, पानी आदि का कुशल उपयोग होता है और पैदावार में वृद्धि हो सकती है।

कृषि आदानों (Inputs) में दक्षता:

  • पानी: ड्रिप सिंचाई तकनीक, नमी नियंत्रण के लिए सेंसर का उपयोग, सिंचाई के लिए स्प्रिंकलर।
  • उर्वरक और कीटनाशक: उर्वरक सेंसर, कीटनाशकों के छिड़काव के लिए ड्रोन
  • कुशल इनपुट डेटा: किसान सुविधा पोर्टल, एम-किसान
  • बिजली: सौर ऊर्जा से चलने वाले पानी के पंप।
  • श्रम: फसल के मशीनीकरण से श्रम उत्पादकता में सुधार हुआ।

फसल कटाई प्रबंधन:

  • पूसा बायोडीकंपोजर- पराली/फसल अवशेषों से निपटने के लिए।
  • कृषि अपशिष्ट का उपयोग जैव-एथेनोल उत्पादन के लिए इनपुट के रूप में किया जाता है।

इंस्टा लिंक:

किसानों की सहायता हेतु ई-प्रौद्योगिकी

मेंस लिंक:

भारत में कृषि परिवर्तन में प्रौद्योगिकी की भूमिका की चर्चा कीजिए। (10 अंक

 


मुख्य परीक्षा संवर्धन हेतु पाठ्य सामग्री (निबंध/नैतिकता)


उत्पादकता व्यामोह

माइक्रोसॉफ्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सत्य नडेला ने ‘उत्पादकता व्यामोह’ या ‘उत्पादकता पागलपन’ (Productivity Paranoia)  नामक एक नया शब्द गढ़ा है।

  • यह स्थिति तब उत्पन्न होती है, जब कंपनी या फर्म के नेता सोचते हैं कि उनके कर्मचारी उत्पादक नहीं हैं, जबकि कर्मचारी सोचते हैं कि वे पर्याप्त रूप से उत्पादक हैं और कई मामलों में काम की वजह से खुद को थका हुआ भी महसूस करते हैं।
  • ‘निष्क्रिय कामगारों’ (idle workers) के बारे में प्रबंधकों की आशंकाएँ इस अवस्था को पैदा करती है, जिसे माइक्रोसॉफ्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सत्य नडेला को “उत्पादकता व्यामोह” कहते हैं। इसके वजह से कर्मचारियों की जासूसी किए जाने जैसे अवांछनीय परिणाम होते हैं।

विश्व नदी दिवस

विश्व नदी दिवस (World River Day) हर साल सितंबर महीने के चौथे रविवार को मनाया जाता है। यह दिवस इस साल 25 सितंबर को मनाया गया।

  • इस दिवस की शुरुआत 2005 में हुई थी।
  • इसका उद्देश्य, नदियों के बारे में जन जागरुकता बढ़ाने और उनके संरक्षण को प्रोत्साहित करना है।
  • यह दिवस पृथ्वी के जलमार्गो का उत्सव मनाता है, जिसमें हर साल 60 से अधिक देश भाग लेते हैं।

केस स्टडी:

वडोदरा में बहने वाली एक छोटी नदी की सफाई करने वाली एक छात्रा ‘स्नेहा शाही’ ने नदियों की सफाई और उन्हें फिर से जीवंत करने के लिए एक ‘बॉटम-अप दृष्टिकोण’ के महत्व पर प्रकाश डाला है।

  • 2019 में, गुजरात के वडोदरा में महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय बड़ौदा में एक छात्र, स्नेहा शाही के नेतृत्व में छात्रों और स्वयंसेवकों की एक टीम ने ‘भूखी’ (Bhukhi) नामक एक छोटी नदी को साफ करने का अनुकरणीय कार्य किया। वडोदरा में बहने वाली यह प्राकृतिक धारा एक सीवर में बदल गई थी। इनके प्रयासों से मगरमच्छ, कछुए, मछली और पक्षियों जैसे वन्यजीव ‘भुखी’ में वापस लौट आए।
  • ‘स्नेहा शाही’ के अनुसार एक छोटे जल निकाय पर काम करना अधिक तार्किक और व्यवहार्य होगा, क्योंकि ये मुख्य नदी में प्रवाहित होते हैं।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


एडवांस्ड ड्वोरक तकनीक

संदर्भ: हाल ही में, अमेरिकी मौसम विज्ञानी ‘वर्नोन ड्वोरक’ (Vernon Dvorak) का 100 वर्ष की आयु में निधन हो गया। इन्हें 1970 के दशक में ‘उन्नत ड्वोरक तकनीक’ (Advanced Dvorak Technique – ADT) विकसित करने का श्रेय दिया जाता है।

ADT क्या है?

  • उन्नत ड्वोरक तकनीक (ADT) में उष्णकटिबंधीय चक्रवात (Tropical Cyclone) की तीव्रता का अनुमान लगाने के लिए अवरक्त दीर्घ तरंगों और ‘भूस्थैतिक उपग्रहों’ से प्राप्त तापमान माप का उपयोग किया जाता है।
  • इस तकनीक में, दिन के समय, दृश्य स्पेक्ट्रम में चित्रों का उपयोग किया जाता था जबकि रात के समय अवरक्त चित्रों का उपयोग करके समुद्र का पर्यवेक्षण किया जाता है।

महत्व:

‘ड्वोरक तकनीक’ को सबसे ‘महान मौसम विज्ञान नवाचारों’ में से एक कहा जाता है, और इसमें आरंभ से लेकर अब तक कई उन्नयन हो चुके हैं। वर्तमान में, उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के आकलन में इस्तेमाल की जाने वाली पद्धति इसी तकनीक पर आधारित है। इसने दुनिया भर में लाखों लोगों की जान बचाई है।

पोषण वाटिकाएं

संदर्भ: फल, सब्जियां, औषधीय पौधों और जड़ी-बूटियों तक आसान और सस्ती पहुंच प्रदान करने के लिए देश भर में ‘पोषण वाटिका’ या ‘पोषक उद्यान’ (Nutri-gardens) स्थापित किए जा रहे हैं।

  • महिला और बाल विकास मंत्रालय द्वारा आयुष मंत्रालय के साथ चलाए गए कार्यक्रमों के अंतर्गत 4.37 लाख आंगनवाड़ी केंद्रों ने पोषण वाटिकाओं की स्थापना की है।
  • इसके अतिरिक्त अब तक 6 राज्यों के कुछ चयनित जिलों में औषधीय पौधे लगाए गए हैं।

‘पोषण वाटिका’ क्या है?

‘पोषण वाटिका’ (न्यूट्री-गार्डन) किचन गार्डन का एक उन्नत रूप है जिसमें फल और सब्जियां भोजन और आय के स्रोत के रूप में उगाई जाती हैं।

पोषण अभियान के तहत सही प्रकार का पोषण प्रदान करने के लिए पोषण वाटिका या न्यूट्री-गार्डन स्थापित किए जा रहे हैं। यह महिलाओं और बच्चों को स्थानीय रूप से उत्पादित फलों, सब्जियों, औषधीय पौधों और जड़ी-बूटियों तक आसान और सस्ती पहुंच प्रदान करेगा।

लाभ:

  • पोषण वाटिकाएं स्थानीय फलों और सब्जियों के माध्यम से महत्वपूर्ण सूक्ष्म पोषक तत्व प्रदान करके पोषाहार विविधता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
  • यह स्थानीय रूप से उपलब्ध थोक उत्पाद को लाभ प्रदान करके के अतिरिक्त बाहरी निर्भरता पर कमी लाएंगी और पोषणाहार संबंधी सुरक्षा के लिए समुदायों को आत्मनिर्भर बनाएंगी।

पोषण अभियान

2018 में शुरू किए गए ‘पोषण अभियान’ (POSHAN Abhiyaan) का उद्देश्य बच्चों, किशोरों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए पोषाहार परिणामों में सुधार लाना है।

  • यह अभियान मिशन पोषण 2.0 का मुख्य घटक है जिसका उद्देश्य बच्चों, किशोरियों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं में कुपोषण की समस्याओं का समाधान पौष्टिक तत्वों में रणनीतिक परिवर्तन लाकर करना है।
  • यह मिशन पोषण 2.0 का हिस्सा है

पोषण माह:

पोषण माह (Poshan Maah), 2022 में सितंबर माह के दौरान मनाया गया। इसके अंतर्गत पूरे देश में बड़े पैमाने पर बैकयार्ड पोल्ट्री/मछली पालन इकाइयों के साथ मल्टी-गार्डेंस या रेट्रो फिटिंग पोषण वाटिकाएं स्थापित करने के लिए कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।

नोडल मंत्रालय: महिला एवं बाल विकास मंत्रालय

 

G4 देशों द्वारा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की तत्काल आवश्यकतापर जोर

संदर्भ: भारत के विदेश मंत्री ने ‘द ग्रुप ऑफ फोर’ (G4) बैनर के तहत जर्मनी, ब्राजील और जापान के अपने समकक्षों से मुलाकात की।

प्रमुख बिंदु:

  • एक दूसरे को समर्थन: G4 के सदस्यों ने ‘संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद’ (UNSC) के स्थायी सदस्य बनने संबंधी एक दूसरे के प्रयासों के लिए अपना समर्थन देने के प्रण को दोहराया।
  • अफ्रीकी राष्ट्रों के लिए समर्थन: G4 ने एक सुधारित सुरक्षा परिषद (reformed Council) में स्थायी और अस्थायी दर्जे के साथ अफ्रीकी देशों का प्रतिनिधित्व किए जाने के लिए अपना समर्थन भी दोहराया।
  • तत्काल सुधार: G4 समूह के एक संयुक्त प्रेस बयान में कहा गया है कि, संयुक्त राष्ट्र के निर्णय लेने वाले निकायों में तत्काल सुधार की आवश्यकता है क्योंकि वैश्विक मुद्दे उत्तरोत्तर जटिल होते जा रहे है और परस्पर जुड़े हुए है।
  • कोई सार्थक प्रगति नहीं: G4 समूह के मंत्रियों ने चिंता व्यक्त की कि संयुक्त राष्ट्र महासभा के 76वें सत्र में अंतर-सरकारी वार्ता (IGN) के संबंध में कोई “सार्थक प्रगति” नहीं हुई।
  • अध्यक्ष की सिफारिश: G4 समूह के मंत्रियों ने 76वीं महासभा के अध्यक्ष द्वारा ‘प्रक्रिया को धीरे-धीरे ‘पाठ-आधारित वार्ता’ की ओर ले जाए जाने की सिफारिश का स्वागत किया।

अंतर-सरकारी वार्ता:

अंतर-सरकारी वार्ता (Intergovernmental Negotiations – IGN) संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में और सुधार करने के लिए संयुक्त राष्ट्र के भीतर कार्य कर रहे राष्ट्र-देशों का एक समूह है।

‘आईजीएन’ कई अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय संगठनों से बना है, जैसेकि:

  • अफ्रीकी संघ
  • G4 राष्ट्र
  • यूनाइटिंग फॉर कन्सेन्सस ग्रुप (यूएफसी)
  • एल-69 विकासशील देशों का समूह
  • अरब लीग
  • कैरेबियन समुदाय (CARICOM)।

 

क्वाड देशों के बीच एक समझौते पर हस्ताक्षर

संदर्भ: ‘मानवीय सहायता और आपदा राहत (Humanitarian Assistance and Disaster Relief – HADR) साझेदारी’ पर हस्ताक्षर करने के लिए ‘क्वाड समूह’ (Quad group) में शामिल देशों के विदेश मंत्रियों ने ‘संयुक्त राष्ट्र महासभा’ (UNGA) के सत्र के दौरान मुलाकात की।

‘क्वाड समूह’ पहले घोषित किए जा चुके कार्यक्रम:

  • विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) फेलोशिप
  • अन्य भागीदारों के साथ आर्थिक ढांचा (इंडो पैसिफिक इकोनॉमिक फ्रेमवर्क)
  • समुद्री डोमेन जागरूकता पहल।

 

ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री के अनुसार: ‘क्वाड’ का उद्देश्य इस क्षेत्र के लिए वास्तविक लाभ लाने और क्षेत्र को “शांतिपूर्ण, स्थिर, समृद्ध बनाना और संप्रभुता का सम्मान” सुनिश्चित करना है।

जापान के विदेश मंत्री के अनुसार: वर्तमान में विश्व “शक्ति के द्वारा यथास्थिति को एकतरफा रूप से बदलने हेतु किए जा रहे प्रत्यक्ष प्रयासों ” को देख रहा है और विधि के शासन पर आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था खतरे में है।

चतुर्पक्षीय सुरक्षा वार्ता (QSD):

  • चतुर्पक्षीय सुरक्षा वार्ता (Quadrilateral Security Dialogue – QSD), जिसे आमतौर पर ‘क्वाड’ कहा जाता है, संयुक्त राज्य अमेरिका, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच एक रणनीतिक संवाद है।
  • इसकी शुरुआत 2007 में, दक्षिण चीन सागर में बढ़ती चीनी आक्रामकता के जवाब में की गई थी और इसमें आधुनिक युग के सबसे बड़े संयुक्त सैन्य अभ्यासों में से एक- मालाबार अभ्यास- भी शामिल है।

उद्देश्य: एक “मुक्त, खुला और समृद्ध” इंडो-पैसिफिक क्षेत्र सुनिश्चित करना और उसका समर्थन करना।

स्पिरिट ऑफ़ द क्वाड: 2021 में, क्वाड देशों ने एक स्वतंत्र, खुले नियमों की सीमा को बढ़ावा देने के लिए एक संयुक्त बयान जारी किया, जिसकी जड़ें भारत-प्रशांत और उससे आगे की सुरक्षा और खतरों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून में निहित हैं।

क्वाड की 3C रणनीति:

लैंसेट आयोग द्वारा बहुत धीमी गति सेकाम करने के लिए WHO की आलोचना की

संदर्भ: कोविड-19 महामारी से भविष्य के लिए सबक पर गठित ‘लैंसेट आयोग’ (Lancet Commission) ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) को कई महत्वपूर्ण मामलों पर “बहुत सावधानी से और बहुत धीरे” कार्य करने के लिए आलोचना की।

WHO की आलोचना से संबंधित मुद्दे:

  • वायरस के मानव संचरण के बारे में चेतावनी;
  • ‘अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल’ घोषित करने में देरी;
  • वायरस के प्रसार को धीमा करने के लिए डिज़ाइन किए गए ‘अंतर्राष्ट्रीय यात्रा प्रोटोकॉल’ का समर्थन;
  • सुरक्षा के रूप में फेस मास्क के सार्वजनिक उपयोग का समर्थन;
  • वायरस के हवाई संचरण को मान्यता।

 

कोविड19 पर गठित ‘लैंसेट आयोग’:

इस आयोग का गठन जुलाई 2020 में किया गया था।

आयोग में निम्नलिखित विषयों में वैश्विक विशेषज्ञों के 28 आयुक्त नियुक्त किए गए:

  • सार्वजनिक नीति
  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग
  • महामारी विज्ञान और वैक्सीनोलॉजी
  • अर्थशास्त्र और वित्तीय प्रणाली
  • संधारणीयता विज्ञान
  • मानसिक स्वास्थ्य।

लैंसेट (Lancet) एक साप्ताहिक पीयर-रिव्यू जनरल मेडिकल जर्नल है। यह दुनिया की सबसे अधिक प्रभाव-शील सामान्य चिकित्सा पत्रिका है, और सबसे पुरानी चिकित्सा पत्रिकाओं में से एक है। इसकी स्थापना 1823 में इंग्लैंड में हुई थी।

 

पूंजीगत निवेश हेतु राज्यों को विशेष सहायता योजना

संदर्भ: भारत सरकार ने ‘वर्ष 2022-23 में पूंजीगत निवेश के लिए राज्यों को विशेष सहायता’ नामक योजना शुरू की है।

इस योजना के तहत राज्य सरकारों को पूंजीगत निवेश परियोजनाओं के लिए 50 वर्षीय ब्याज मुक्त ऋणों के रूप में वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।

राज्य वित्त की स्थिति:

भारतीय रिज़र्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार-

  • 2020-21 में पंजाब, राजस्थान, केरल, पश्चिम बंगाल, बिहार, आंध्र प्रदेश आदि राज्यों पर सबसे अधिक कर्ज का बोझ था।
  • इन राज्यों का ‘राजस्व व्यय’ कुल व्यय का 80-90% है और इसलिए उनका पूंजीगत व्यय कम है।
  • आंध्र प्रदेश, बिहार, राजस्थान और पंजाब ने 15वें वित्त आयोग द्वारा निर्धारित 2020-21 के लिए ऋण और राजकोषीय घाटे के लक्ष्य दोनों को पार कर लिया है।

पूंजीगत निवेश (Capital investment), परिसंपत्ति निर्माण करने पर व्यय किया जाने वाली धनराशि होती है, जबकि ‘राजस्व व्यय’ (Revenue Expenditure) वेतन और पेंशन जैसे दैनिक संचालन व्यय को इंगित करता है।

शैवाल जैव ईंधन

संदर्भ: भारत की रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर एक लघु वीडियो जारी किया है जिसमें अत्याधुनिक ‘शैवाल-से-ईंधन तकनीक’ (algae-to-fuel technology) पर प्रकाश डाला गया है।

  • शैवाल (Algae) का उपयोग बड़ी मात्रा में तेल को संश्लेषित करने (प्रति एकड़ सरसों की तुलना में 20 गुना अधिक) के लिए किया जा सकता है। शैवाल तेजी से बढ़ता है (स्थलीय पौधों की तुलना में 10 गुना तेज) और कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) को कैप्चर करता है।

 

  • रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड, पिछले पांच वर्षों से जामनगर के पास स्थित अपने केंद्र में, सौर-प्रकाश, CO2 और समुद्री जल को जैव-तेल में परिवर्तित करने के उद्देश्य से बड़े ‘शैवाल रेसवे तालाबों’ (algae raceway ponds) को सफलतापूर्वक संचालन कर रही है।
  • रिलायंस ने शैवाल बायोमास को तेल में बदलने के लिए ‘उत्प्रेरक हाइड्रोथर्मल द्रवीकरण प्रौद्योगिकी के उपयोग’ को भी प्रदर्शित किया है। इस प्रक्रिया के तहत बायोमास से तेल निकालने के लिए उच्च तापमान और दबाव के तहत पानी का उपयोग विलायक के रूप में किया जाता है।
  • इस तकनीक का सबसे बड़ा लाभ यह है, कि इसमें बायोमास के हर कार्बनिक टुकड़े को सुखाने और तेल में बदलने की आवश्यकता के बिना ‘गीले बायोमास’ का सीधा उपयोग किया जाता है।

 

रीयल-टाइम ट्रेन सूचना प्रणाली

संदर्भ: अंतरिक्ष एजेंसी इसरो के सहयोग से, भारतीय रेलवे द्वारा ट्रेनों की ‘रीयल-टाइम ट्रैकिंग’ के लिए एक रीयल-टाइम ट्रेन सूचना प्रणाली (Real-Time Train Information System – RTIS) विकसित की जाएगी।

RTIS के बारे में

  • इसरो के सहयोग से विकसित, RTIS आगमन और प्रस्थान या ‘बिना-रुके गुजरने’ सहित स्टेशनों पर ट्रेनों की आवाजाही के समय के स्वत: अर्जन में मदद करेगी।
  • यह प्रणाली, रेल यात्रियों को ट्रेन की आवाजाही की जानकारी को ‘30 सेकंड’ के संभावित अंतराल से ट्रैक करने में मदद करेगी।

 

स्टार्ट-अप के लिए ‘झुंड ड्रोन प्रतियोगिता’

संदर्भ: रक्षा मंत्रालय ने वृद्धिशील स्वदेशी ड्रोन उद्योग को बढ़ावा देने के लिए “मेहर बाबा प्रतियोगिता- II” की शुरुआत की थी।

  • इस प्रतियोगिता का उद्देश्य “विमान परिचालन सतहों पर बाह्य वस्तुओं का पता लगाने के लिए झुंड ड्रोन आधारित प्रणाली” को लेकर प्रौद्योगिकी विकसित करना है।
  • इस प्रतियोगिता का नाम प्रसिद्ध एयर कमोडोर एमवीसी, डीएसओ मेहर सिंह के नाम पर रखा गया है- जिन्हें प्यार से मेहर बाबा कहा जाता है।
  • झुंड ड्रोन (Swarm drones) में एक ही स्टेशन से नियंत्रित होने वाले कई ड्रोन होते हैं और मिशन को पूरा करने के लिए एक दूसरे के साथ समन्वय करते हैं।
  • यह प्रतियोगिता, उन्हें विमान संचालन सतहों पर बाह्य वस्तुओं (यहां तक कि सेंटीमीटर से कम आकार की) का पता लगाने के लिए एक ‘झुंड ड्रोन-आधारित प्रणाली’ विकसित करने में मदद करेगी।
  • भारतीय सेना ने ‘स्वार्म ड्रोन’ को परिचालन उपयोग में शामिल किया है।

 

मानचित्र (चर्चा में)