[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 23 September 2022

विषयसूची

सामान्य अध्ययन-II

  1. सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग
  2. क्या निर्वाचन आयोग को राजनीतिक दलों के आंतरिक चुनावों पर जोर देना चाहिए?
  3. पिंजरे में बंद तोते को मुक्त किए जाने की आवश्यकता

 

सामान्य अध्ययन-IV

  1. विजुअल मीडिया के माध्यम से हेट स्पीच

 

मुख्य परीक्षा संवर्धन हेतु पाठ्य सामग्री (निबंध/नैतिकता)

  1. ‘पुस्तक संस्कृति’ को पुनर्जीवित किए जाने की आवश्यकता
  2. न्यूजीलैंड में ‘सरल भाषा विधेयक’ पर जोर
  3. सदन में महिला विधायकों की सराहना

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

  1. EWS कोटा के मूल उद्देश्य में विरोधाभास
  2. यूक्रेन संघर्ष एक ‘गंभीर चिंता’ का विषय
  3. हेल्थकेयर के लिए ‘हाई-टेक ‘हब-एंड-स्पोक’ सिस्टम
  4. भारतीय दूरसंचार विधेयक, 2022 मसौदा
  5. पीएम-केयर्स फंड
  6. राष्ट्रीय साधन-सह-मेधा छात्रवृत्ति योजना
  7. पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया
  8. महारत्न कंपनी का दर्जा
  9. सरकार की तीन प्रमुख योजनाओं का अभिसरण पोर्टल
  10. पहली ‘वार्षिक महत्वपूर्ण खोज एजेंडा’ रिपोर्ट, 2022
  11. गैर संचारी रोग
  12. टोमिस्टोमा मगरमच्छ
  13. सी बैंड
  14. नासा का DART मिशन
  15. मानचित्र (चर्चा में)

 


सामान्य अध्ययनII


 

विषय: कार्यपालिका और न्यायपालिका की संरचना, संगठन और कार्य- सरकार के मंत्रालय एवं विभाग, प्रभावक समूह और औपचारिक/अनौपचारिक संघ तथा शासन प्रणाली में उनकी भूमिका।

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई का सीधा प्रसारण

संदर्भ: सुप्रीम कोर्ट द्वारा, ई-कोर्ट परियोजनाओं के तीसरे चरण- न्यायपालिका में सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग-  के एक भाग के रूप में 27 सितंबर से संवैधानिक पीठ द्वारा की जाने वाली सुनवाई का ‘सीधा प्रसारण’ (Live Stream) किया जाएगा।

‘सीधा प्रसारण’ किए जाने का कारण:

  • सुप्रीम कोर्ट ने ‘2018 के स्वप्निल त्रिपाठी मामले’ में कहा था, कि अदालती कार्यवाही का सीधा प्रसारण ‘अनुच्छेद 21’ के तहत ‘न्याय तक पहुचने के अधिकार’ का हिस्सा है।
  • सुप्रीम कोर्ट की ‘ई-समिति’: इसके द्वारा भारत में अदालती कार्यवाही की लाइव-स्ट्रीमिंग और रिकॉर्डिंग के लिए ‘मॉडल नियम’ तैयार किए गए हैं।

‘लाइव-स्ट्रीमिंग’ करने वाले अन्य न्यायालय:

देश के छह उच्च न्यायालयों – गुजरात, उड़ीसा, कर्नाटक, झारखंड, बिहार और मध्य प्रदेश- में पहले से ही ‘यू टयूब’ (YouTube) पर अपनी कार्यवाही का ‘सीधा प्रसारण’ (लाइव स्ट्रीमिंग) की जा रही है।

‘संवैधानिक पीठ’ के बारे में:

संविधान के अनुच्छेद 145(3) के तहत, “जिस मामले में इस संविधान के निर्वचन के बारे में विधि का कोई सारवान्‌ प्रश्न अतंर्वलित है उसका विनिश्चय करने के प्रयोजन से कम से कम पांच न्यायाधीशों की पीठ गठित की जाएगी। ऐसी पीठ को ‘संवैधानिक पीठ’ (Constitution Bench) कहा जाता है।

लाइव स्ट्रीमिंग के लाभ:

  • यह पारदर्शिता और सार्वजनिक संवीक्षा सुनिश्चित करेगी;
  • अदालतों में भीड़भाड़ कम करने में सहायक होगी;
  • वादकारियों के लिए भौतिक पहुंच और न्यायपालिका में लोगों का विश्वास में सुधार;
  • कानूनी अनुसंधान और प्रशिक्षण में सहायक;
  • कानूनी जागरूकता को बढ़ावा देना।

संबंधित मुद्दे:

  • डिजिटल डिवाइड;
  • “सूचना और संचार प्रौद्योगिकी” (ICT) संबंधी बुनियादी ढांचे की कमी;
  • डिजिटल रूप से प्रशिक्षित अदालती अधिकारियों की कमी;
  • गोपनीयता भंग होने का जोखिम;
  • मामले के सनसनीखेज होने का खतरा।

 

सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिशानिर्देशों के एक सेट को मंजूरी प्रदान की गयी है, और शीर्ष अदालत को संवेदनशील मामलों, जैसे -वैवाहिक विवाद, किशोरों से जुड़े मामले, राष्ट्रीय सुरक्षा, बलात्कार के मामले आदि, में प्रसारण को रोकने की शक्ति है।

अंतर्राष्ट्रीय उदाहरण: अमेरिका में न्यायालय में ऑडियो रिकॉर्डिंग करने और मौखिक बहस के प्रतिलेखन की अनुमति है। यूनाइटेड किंगडम में, सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही की रिकॉर्डिंग की अनुमति है।

इंस्टा लिंक:

आभासी अदालतें और आगे की राह

मेंस लिंक:

ई-कोर्ट प्रणाली का विचार न्यायपालिका को विलंबित न्याय की समस्या से निपटने का अवसर प्रदान कर सकता है। चर्चा कीजिए। (250 शब्द)

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: संसद और राज्य विधायिका- संरचना, कार्य, कार्य-संचालन, शक्तियाँ एवं विशेषाधिकार और इनसे उत्पन्न होने वाले विषय।

क्या निर्वाचन आयोग को राजनीतिक दलों के आंतरिक चुनावों पर जोर देना चाहिए?

संदर्भ: कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष पद के लिए चुनाव हेतु तैयारियां पूरी हो चुकी हैं।

किस कानूनी आधार पर राजनीतिक दलों के भीतर चुनाव कराए जाने को अनिवार्य किया जा सकता है?

  • संविधान का अनुच्छेद 324, या लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29(A): अदालत ने कहा है, कि चुनाव आयोग वास्तव में पार्टी के आंतरिक ढांचे, संगठनों या चुनावों को विनियमित कर सकता है।
  • राजनीतिक दल का संविधान: चुनाव आयोग, राजनीतिक दलों से अपने संविधान का पालन करने की अपेक्षा करता है। इस संविधान की एक प्रति ‘राजनीतिक दलों’ के पंजीकृत होने पर आयोग को प्रस्तुत की जाती है।
  • राजनीतिक दलों में किसी पद पर, यदि किसी व्यक्ति को निर्विरोध चुना जाता है तो चुनाव आयोग इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं कर है या उसकी आलोचना नहीं कर सकता है।

आंतरिक चुनावों का महत्व:

  • विचारों का संघर्ष: आंतरिक चुनाव (Internal elections), राजनीतिक दल के भीतर बैठकों और विचारों के संघर्ष का कारण बनते हैं। उदाहरण के लिए: अमेरिकी चुनावों में, राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में ‘उम्मीदवार’ का चयन ‘बहस’ (वाद-विवाद) के माध्यम से किया जाता है।
  • ऊर्ध्वगामी गतिशीलता: आंतरिक चुनाव, ऊर्ध्वगामी गतिशीलता (Upward Mobility) के लिए महत्वपूर्ण हैं।

 

राजनीतिक दलों की ‘स्टेट फंडिंग’ की भूमिका:

  • राजनीतिक दलों का ‘राज्य द्वारा वित्तपोषण’ (State funding), पार्टियों को ‘कॉरपोरेट्स’ से धन-राशि लेने से रोकेगा।
  • राजनीतिक दलों को ‘डाले गए मतों की संख्या के अनुसार’ धन प्राप्त होगा।
  • विधि आयोग की रिपोर्ट, 1999 में, राजनीतिक दलों के ‘राज्य द्वारा वित्तपोषण’ हेतु एक तंत्र स्थापित किए जाने की पुरजोर सिफारिश की गयी थी।

 

क्या ‘संगठनात्मक चुनावों’ को अनिवार्य बनाने हेतु नए कानून बनने चाहिए?

  • मौजूदा कानूनों की फिर से व्याख्या करने के लिए ‘भारत के निर्वाचन आयोग’ (ECI) द्वारा इनकी नई व्याख्या और कुछ साहसिक कदम उठाए की आवश्यकता है, जैसे:
  • राजनीतिक दलों को नियमित रूप से संगठनात्मक चुनाव कराना अनिवार्य किया जाए।
  • पार्टियों को अपने पदाधिकारियों और पते में बदलाव के बारे में ECI को सूचित करना अनिवार्य होंना चाहिए।
  • राजनीतिक दलों को चुनाव के दौरान और गैर-चुनाव अवधि में किए गए खर्च का एक दस्तावेज जमा करना आवश्यक किया जाए।

इंस्टा लिंक्स:

भारत में राजनीतिक दल

पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल (RUPPs)

मेंस लिंक:

लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत, किस आधार पर किसी जनप्रतिनिधि को अयोग्य ठहराया जा सकता है? साथ ही ऐसे व्यक्ति को उसकी अयोग्यता के विरुद्ध उपलब्ध उपचारों का भी उल्लेख कीजिए। (यूपीएससी 2019)

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: सांविधिक, विनियामक और विभिन्न अर्द्ध-न्यायिक निकाय।

पिंजरे में बंद तोते को मुक्त किए जाने की आवश्यकता

संदर्भ:

सुप्रीम कोर्ट द्वारा ‘केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो’ (CBI) के अक्षम कामकाज के खिलाफ कई टिप्पणियों के बावजूद इसकी स्थिति में सुधार के लिए कुछ भी नहीं हुआ है।

सुप्रीम कोर्ट में ‘सीबीआई’ पर मामले:

  • जैन हवाला मामला (2014): आतंकवाद और भ्रष्टाचार से संबंधित मामले में सीबीआई की आपराधिक लापरवाही।
  • विनीत नारायण निर्णय (1997): केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) को वैधानिक दर्जा दिया जाए और इसे सीबीआई की दक्षता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के ‘काम की निगरानी’ करने की जिम्मेदारी सौंपी जानी चाहिए।

 

‘केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो’ और ‘केंद्रीय सतर्कता आयोग’ के कामकाज में सुधार के लिए सिफारिशें:

  • संशोधन: ‘केंद्रीय सतर्कता आयोग’ अधिनियम (CVC Act) में संशोधन किया जाना चाहिए, और इसके तहत पांच/सात सदस्यीय CVC का प्रावधान किया जाना चाहिए, जो मोटे तौर पर ‘लोकपाल’ के लिए कल्पित भूमिका को ग्रहण कर सके।
  • चयन में पक्षपात पर रोक: पक्षपात को रोकने या विवादास्पद व्यक्तियों को नियुक्त करने से रोकने के लिए चयन प्रक्रिया अधिक वैविध्यपूर्ण होनी चाहिए।
  • केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) के लिए एक ‘सलाहकार समिति’ का गठन करना चाहिए, जिसमे कम से कम 11 सदस्यों को अपराधियों और फोरेंसिक विज्ञान विशेषज्ञ शामिल हों। यह CVC के कामकाज में पेशेवर सहयोग करेगी।
  • विशेषज्ञ या पेशेवर सहायता: सीवीसी को शिकायतों की जांच में सहायता के लिए, किसी विशेषज्ञ या पेशेवर की मदद लेने की शक्ति दी जानी चाहिए।
  • सरकार से कोई अनुमति नहीं: वैविध्यपूर्ण ‘केंद्रीय सतर्कता आयोग’ द्वारा शिकायत का आकलन किए जाने के बाद, मामले की जाँच के लिए सरकार से पूर्व अनुमति लेने की कोई आवश्यकता नहीं होनी चाहिए।
  • ‘केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो’ (CBI) को कार्यात्मक और आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाया जाना चाहिए, और किसी भी सरकारी मंत्रालय/विभाग के नियंत्रण से मुक्त रखा जाना चाहिए। सीबीआई की जांच पर ‘पेशेवर पर्यवेक्षण’ का अधिकार केवल ‘केंद्रीय सतर्कता आयोग’ के पास होना चाहिए।
  • सीबीआई निदेशक की नियुक्ति का तरीका: यह ‘केंद्रीय सतर्कता आयोग’ के सदस्यों की भांति, वैविध्यपूर्ण होना चाहिए। सीबीआई में अन्य नियुक्तियों/नियुक्तियों को सीवीसी की व्यापक निगरानी में लाया जाना चाहिए।
  • भ्रष्टाचार विरोधी कानूनों और शिकायत निवारण के बीच बेहतर तालमेल स्थापित किया जाना चाहिए, और व्हिसलब्लोअर और शिकायत निवारण से संबंधित कानूनों को सीवीसी के अधिकार क्षेत्र में रखा जाना चाहिए।

निष्कर्ष:

  • उत्तरदायी शासन: जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार विरोधी कानूनों का प्रभावी प्रशासन, ‘उत्तरदायी शासन’ की कुंजी है।
  • सरकारी हस्तक्षेप: इसलिए, राज्य और उनकी भ्रष्टाचार-विरोधी एजेंसियों को, इसी तर्ज पर राज्य सरकार के हस्तक्षेप से अछूता रहने की आवश्यकता होगी।
  • जांच एजेंसियों को ब्लैकमेल और डराने-धमकाने के साधन के रूप में उपयोग नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि उन्हें पूरी निष्पक्षता के साथ और राष्ट्र हित में काम करना चाहिए।

इंस्टा लिंक्स:

मेंस लिंक:

एक विशेष राज्य के भीतर प्राथमिकी दर्ज करने और जांच करने के संबंध में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के अधिकार क्षेत्र पर विभिन्न राज्यों द्वारा सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, सीबीआई की सहमति को रोकने के लिए राज्यों को पूर्ण शक्ति प्राप्त नहीं है। भारत के संघीय स्वरूप के विशेष संदर्भ में स्पष्ट कीजिए। (यूपीएससी 2021)

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


सामान्य अध्ययनIV


 

विषय: लोक प्रशासन में लोक/सिविल सेवा मूल्य और नैतिकता: स्थिति और समस्याएं;

विजुअल मीडिया के माध्यम से हेट स्पीच

संदर्भ: टीवी चैनलों पर बहस के माध्यम से ‘घृणास्पद भाषणों’ / ‘हेट स्पीच’ (Hate speech) पर अपनी पीड़ा और नाराजगी व्यक्त करते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने “विजुअल मीडिया” को “घृणास्पद भाषण का मुख्य माध्यम” कहा और सरकार से सवाल किया कि, जब यह सब हो रहा है तो वह “एक मूक दर्शक के रूप में क्यों खड़ी है” और इसे “एक तुच्छ मामला” के क्यों मान रही है।

  • सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इस तथ्य को रेखांकित करते हुए कहा, कि “नफरत से टीआरपी बढ़ती है, और टीआरपी से लाभ होता है” (hate drives TRPs, drives profit), जोकि मुख्य रूप से ‘मीडिया नैतिकता’ के खिलाफ है।
  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि, अदालत इस विषय पर कुछ दिशानिर्देश बनाने पर विचार करेगी और ये दिशा-निर्देश विधायिका द्वारा इस मामले पर कानून बनाए जाने तक लागू रहेंगे।
  • जस्टिस के एम जोसेफ और हृषिकेश रॉय की न्यायिक पीठ यह इंगित करते हुए कहा कि “‘हेट स्पीच’ विभिन्न रूपों में हो सकती है … एक समुदाय का उपहास करना” और दृश्य मीडिया के माध्यम से इसके प्रसार का “विनाशकारी प्रभाव” हो सकता है, और केंद्र सरकार को यह बताना होगा कि क्या उसने इस विषय पर कोई कानून बनाए जाने का सोचा है।

सुप्रीम कोर्ट की यह पीठ, कुछ टीवी शो के माध्यम से कथित ‘हेट स्पीच’ पर दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से केंद्र को इस तरह के की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए कदम उठाने का निर्देश देने की मांग की है।

‘हेट स्पीच’ या ‘द्वेषपूर्ण भाषण’ क्या है?

‘हेट स्पीच’ (Hate speech) धार्मिक विश्वासों, यौन अभिविन्यास, लिंग आदि के आधार पर हाशिए पर स्थित व्यक्तियों के विशेष समूह के खिलाफ नफरत के लिए उकसाना है।

  • हेटस्पीचपर संयुक्त राष्ट्र की रणनीति और कार्य योजना के अंतर्गत- ‘हेट-स्पीच’ को, “धर्म, जातीयता, राष्ट्रीयता, नस्ल, रंग, वंश, लिंग या अन्य पहचान कारकों के आधार पर किसी व्यक्ति या समूह के संदर्भ में भाषण, लेखन या व्यवहार में किसी भी प्रकार के संचार के रूप में अपमानजनक या भेदभावपूर्ण भाषा के उपयोग” के रूप में परिभाषित किया गया है।
  • विधि आयोग द्वारा ‘हेट-स्पीच’ पर अपनी 267 वीं रिपोर्ट में कहा कि इस तरह के बयानों में व्यक्तियों और समाज को आतंकवाद, नरसंहार और जातीय हिंसा करने के लिए भड़काने की क्षमता होती है।

 

नैतिक पत्रकारिता के पांच प्रमुख सिद्धांत:

  • सत्य और यथार्थता: पत्रकार हमेशा ‘सत्य’ की गारंटी नहीं दे सकते, लेकिन तथ्यों को सही करना पत्रकारिता का मुख्य सिद्धांत है। पत्रकार द्वारा हमेशा ‘सटीकता’ के लिए प्रयास किया जाना चाहिए और उसके पास मौजूद सभी प्रासंगिक तथ्यों को दिया जाना चाहिए और साथ ही इस सभी तथ्यों की जाँच भी सुनिश्चित करना चाहिए।
  • स्वतंत्रता: पत्रकारों को स्वतंत्र आवाज होना चाहिए; इनको विशेष हितों- चाहे वह राजनीतिक, कॉर्पोरेट या सांस्कृतिक हो- की ओर से औपचारिक या अनौपचारिक रूप से कार्य नहीं करना चाहिए।
  • निष्पक्षता और निष्पक्षता: निष्पक्षता हमेशा संभव नहीं होती है, और हमेशा वांछनीय भी नहीं हो सकती है (उदाहरण के लिए- क्रूरता या अमानवीयता के मामलों में), लेकिन निष्पक्ष रिपोर्टिंग विश्वास और आत्मविश्वास का निर्माण करती है।
  • मानवता: पत्रकारों को कोई नुकसान नहीं करना चाहिए। जो प्रकाशित या प्रसारित होता है वह ‘हानिकारक’ हो सकता है, पत्रकारों को दूसरों के जीवन पर उनके शब्दों और चित्रों से पड़ने वाले प्रभाव के बारे में पता होना चाहिए।
  • जवाबदेही: व्यावसायिकता और जिम्मेदार पत्रकारिता का एक निश्चित संकेत, खुद को जवाबदेह ठहराने की क्षमता है।

 

उद्धरण: “सोशल मीडिया ‘नफरत’ के लिए एक ‘वैश्विक मेगाफोन’ प्रदान करता है।” एंटोनियो गुटेरेस, संयुक्त राष्ट्र महासचिव, 2021

मेंस लिंक:

‘हेट स्पीच’ नफरत फैलाने के साथ-साथ बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए जटिल चुनौतियां पेश करती हैं। क्या आपको लगता है कि कानून के माध्यम से दृश्य मीडिया में ‘हेट स्पीच’ पर अंकुश लगाना प्रभावी होगा? (10 अंक)

स्रोत: द हिंदू.

 


मुख्य परीक्षा संवर्धन हेटी पाठ्य सामग्री (निबंध/नैतिकता)


‘पुस्तक संस्कृति’ को पुनर्जीवित किए जाने की आवश्यकता

पुस्तकों का महत्व:

  • पुस्तकों में विस्तीर्ण ज्ञान छिपा होता है।
  • पुस्तकें हमारी आलोचनात्मक सोच को प्रोत्साहित करती है। पुस्तकें हमारे दिमाग के परागणक हैं, जो अंतरिक्ष और समय के माध्यम से स्वयं-प्रतिकृति विचारों को फैलाती हैं।
  • युवा पाठकों और छात्रों के लिए पुस्तकें कल्पना की दुनिया से परिचित कराता है, बाहरी दुनिया का ज्ञान प्रदान करती हैं उनके पढ़ने, लिखने और बोलने के कौशल में सुधार करती है और साथ ही स्मृति और बुद्धि को बढाती है।
  • शब्दों की जादुई शक्ति: जैसा कि स्टीफन किंग ने कहा किताबें “एक विशिष्ट पोर्टेबल जादू” होती हैं।
  • किताबें, सत्तावादी शासन के खिलाफ लोगों को आवाज देती है। किताबें ज्ञान का भंडार होती हैं, और ज्ञान शक्ति होती है। यही शक्ति पुस्तकों को, अधिकारियों – सरकारों और स्व-नियुक्त नेताओं के लिए समान रूप से खतरा उत्पन्न कर देती है।

संबंधित मुद्दे:

  • पूरे विश्व में पुस्तकों की सेंसरशिप बढ़ रही है। उदाहरण के लिए, चीन स्कूलों में उन पुस्तकों पर प्रतिबंध लगाया जा रहा है जो “समाजवादी मूल मूल्यों के उसके अपने स्वरूप के अनुरूप नहीं हैं”।
  • बोरिस पास्टर्नक द्वारा लिखित पुस्तक ‘डॉ ज़िवागो’ को सोवियत सरकार द्वारा प्रतिबंधित कर दिया गया था।
  • भारत में प्रतिबंधित पुस्तकें: तसलीमा की नसरीन द्वारा लिखित ‘लज्जा’ या ऑब्रे मेनन द्वारा लिखित ‘रामायण’ और सलमान रुश्दी की ‘द सैटेनिक वर्सेज’ जैसी कुछ पुस्तकें भारत में प्रतिबंधित हैं।

‘पुस्तक संस्कृति’ को किस प्रकार पुनर्जीवित किया जा सकता है?

  • बुक क्लबों का निर्माण एवं सहयोग;
  • सरकार को नीतियों के माध्यम से यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ‘किताबें’ सस्ती हों;
  • पुस्तकों के ऑनलाइन पठन और आभासी पुस्तकालयों के उपयोग को प्रोत्साहन;
  • छात्रों के लिए ‘ड्रॉप एवरीथिंग एंड रीड’ (DEAR) को शुरू करना चाहिए। इस पहल को अमेरिका में बच्चों के लेखक ‘बेवर्ली क्लियरली’ द्वारा शुरू किया गया था।

 

न्यूजीलैंड में ‘सरल भाषा विधेयक’ पर जोर

संदर्भ: न्यूजीलैंड की संसद में एक विधेयक पेश किया गया है, जो आधिकारिक संचार/सरकारी कानून में सरल और आसान भाषा के उपयोग पर प्रकाश डालता है।

  • इस क़ानून में सभी सरकारी संचार (Government Communications) को ‘स्पष्ट और संक्षिप्त’ होने को अनिवार्य किया गया है। इस विधेयक को प्रस्तुत करने का उद्देश्य यह हैं कि कोई भी व्यक्ति समझ सके कि सरकार क्या संवाद करने की कोशिश कर रही है और सरकार की नीतियां किस बारे में हैं। इसका एक निहितार्थ जवाबदेही और समावेशिता भी होगा।
  • अल्पसंख्यक और हाशिए पर रहने वाले समुदाय अक्सर शब्दजाल से भरी जटिल विक्टोरियन अंग्रेजी को समझने के लिए संघर्ष करते हैं।
  • जब सरकारें उन तरीकों से संवाद करती हैं जिन्हें लोग समझ नहीं पाते हैं, तो इससे लोग उनके लिए उपलब्ध उन सेवाओं में शामिल नहीं हो पाते हैं, सरकार में विश्वास खो देते हैं और समाज में पूरी तरह से भागीदारी करने में सक्षम नहीं हो पाते हैं। इससे सबसे अधिक प्रभावित वे लोग होते हैं जो विश्वविद्यालय नहीं गए हैं, विकलांग हैं, या बुजुर्ग है, या अंग्रेजी जिनकी दूसरी भाषा होती है।

सरल भाषा आंदोलन (Plain Language Movement) की शुरुआत 1920 के दशक में हुई थी, और यह यूके, यूएस और कनाडा में पहले ही फ़ैल चुका है।

‘सरल भाषा’ का अर्थ है छोटे वाक्य, सरल परिवर्णी शब्द (acronyms) आदि। भाषा, विचारों का एक वाहन है।

सदन में महिला विधायकों की सराहना

संदर्भ: उत्तर प्रदेश विधान सभा द्वारा अपनी तरह की पहली पहल में – महिला सदस्यों के लिए उनसे संबंधित मुद्दों पर बोलने के लिए एक दिन आरक्षित किया गया था।

यह विशेष सत्र, राजनीतिक दलों के लिए एक “आंख खोलने वाला” साबित हुआ, क्योंकि उन्होंने अपने बीच नए वक्ता मिले, जिन्होंने न केवल अपने मुद्दों को सामने रखा और उनके सामने आने वाली समस्याओं को आवाज दी, बल्कि अपने निर्वाचन क्षेत्र और अपनी पार्टी की विचारधारा के बारे में भी बात की।

  • कुछ महिला विधायकों ने उपाख्यानों का हवाला दिया, अन्य ने पूर्व अमेरिकी प्रथम महिला मिशेल ओबामा और फ्रांसीसी दार्शनिक अल्बर्ट कैमस को उद्धृत किया, जिससे उनके कई पुरुष समकक्ष बैठ गए और उन पर ध्यान दिया।
  • सत्र की शुरुआत में, विधान सभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा कि जब उन्होंने महिला विधायकों के बोलने के लिए एक दिन आरक्षित करने का विचार रखा, तो कई लोगों ने आश्चर्य व्यक्त किया कि क्या वे पूरे दिन लंबी बात कर पाएंगी।
  • विधान सभा अध्यक्ष ने कहा है, कि वे उन पुरुष सदस्यों की सूची बनाएंगे जो बोलने में झिझकते हैं और जिन्हें विधानसभा में बोलने का अवसर नहीं मिला है। मैं उन्हें भी बोलने का ऐसा ही मौका दूंगा।

 

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


EWS कोटा के मूल उद्देश्य में विरोधाभास

संदर्भ:

सुप्रीम कोर्ट ने ‘आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों’ (Economically Weaker Sections) के लिए आरक्षण के पीछे दिए जाने वाले तर्क पर सवाल उठाते हुए कहा है, कि EWS कोटा में सबसे ‘निर्धनतम आबादी’ को शामिल किए जाने का दावा किया जाता है, लेकिन इसमें सदियों से ‘अस्वीकृत’ होने की पीड़ा झेल रहे ‘वंचित समुदायों’ को शामिल नहीं किया गया है।

प्रमुख बिंदु:

  • अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति पर रोक: अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के सदस्य, ‘आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों’ (EWS) के तहत आवेदन नहीं कर सकते हैं।
  • पिछड़े वर्गों के लिए 50% आरक्षण: सरकार का तर्क है, कि ये समुदाय पहले से ही पिछड़े वर्गों के लिए 50% आरक्षण में शामिल हैं, अतः इनके लिए EWS कोटा के तहत आवेदन करने पर लगायी गयी रोक ठीक है।
  • कम प्रतिनिधित्व: अदालत के अनुसार- अनुसूचित जनजाति की 40 प्रतिशत आबादी, सबसे निर्धनतम (poorest of the poor) है। लेकिन उनका कुल आरक्षण सिर्फ 7.5 % है।
  • संविधान की मूल संरचना: सरकार ने कहा है, कि 103वें संशोधन के माध्यम से ‘निर्धनतम’ व्यक्ति को “आर्थिक न्याय” देकर संविधान के मूल ढांचे को मजबूत किया गया है।

संविधान की मूल संरचना:

केशवानंद भारती निर्णय (1973) ने ‘मूल संरचना के सिद्धांत’ (Basic Structure Doctrine) की शुरुआत की। इस सिद्धांत में धर्मनिरपेक्षता और संघवाद जैसे संविधान में निहित मूलभूत मूल्यों को प्रभावित करने वाले कठोर संशोधन करने संबंधी संसद की शक्ति को सीमित कर दिया गया है।

 

यूक्रेन संघर्ष एक ‘गंभीर चिंताका विषय

संदर्भ:

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत ने कहा है, कि यूक्रेन में संघर्ष वैश्विक समुदाय के लिए “गंभीर चिंता” का विषय है। कई अन्य देशों के प्रतिनिधियों के विपरीत, UNSC में भारत ने विशेष रूप से रूस का नाम नहीं लिया।

प्रमुख बिंदु:

  • वार्ता और कूटनीति: भारत ने सभी शत्रुताओं को तत्काल समाप्त करने और वार्ता और कूटनीति की वापसी की आवश्यकता को दृढ़ता से दोहराया है।
  • अब युद्ध का युग नहीं है: भारत ने ‘शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन’ में कहे गए प्रधान मंत्री के इस कथन को UNSC में दोहराया है।
  • बेहद खराब कृत्य: विदेश मंत्री ने कहा कि सुरक्षा परिषद को “बेहद खराब कृत्यों” (Egregious Acts) को बिना किसी सजा के छोड़ दिए जाने से भेजे जाने वाले संकेतों पर विचार करना चाहिए।
  • संयुक्त राष्ट्र महासचिव: धमकी या बल प्रयोग के परिणामस्वरूप किसी देश के क्षेत्र का किसी अन्य देश द्वारा कब्जा करना संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है।
  • ‘आतंकवादियों की सूची’ को अवरुद्ध करने के चीन के फैसले के संदर्भ में भारत ने कहा, कि “शांति और न्याय सुनिश्चित करने के प्रयास हेतु ‘बेहद खराब कृत्यों के लिए दण्ड-मुक्ति के खिलाफ लड़ाई’ महत्वपूर्ण है।“ सुरक्षा परिषद को इस संबंध में एक स्पष्ट और स्पष्ट संदेश भेजना चाहिए।

 

हेल्थकेयर के लिए ‘हाई-टेक ‘हब-एंड-स्पोक’ सिस्टम

संदर्भ: भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) और भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) द्वारा संयुक्त रूप से बेहतर स्वास्थ्य सेवा के लिए एक हाई-टेक ‘हब-एंड-स्पोक’ सिस्टम विकसित किया जाएगा। अनुसंधान की सुविधा के लिए यह सिस्टम देश भर के संस्थानों के माध्यम से डेटा को एकत्र और क्यूरेट करेगा।

  • इस पहल के लिए प्रौद्योगिकी विकास और कार्यक्रम प्रबंधन हेतु भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) द्वारा प्रवर्तित एक गैर-लाभकारी फाउंडेशन – AI & रोबोटिक्स टेक्नोलॉजी पार्क- भागीदार के रूप में काम करेगा।

 

भारतीय दूरसंचार विधेयक, 2022 मसौदा

संदर्भ: संचार मंत्रालय द्वारा ‘भारतीय दूरसंचार विधेयक, 2022’ का मसौदा (Draft Indian Telecommunication Bill, 2022) तैयार किया जा चुका है। यह विधेयक, भारतीय टेलीग्राफी अधिनियम, 1885, वायरलेस टेलीग्राफी अधिनियम, 1933 और टेलीग्राफी वायर (गैरकानूनी कब्जा) अधिनियम, 1950 को समेकित और प्रतिस्थापित करेगा।

आवश्यकता:

  • वर्तमान में डिजिटल प्रौद्योगिकियों में हुई प्रगति के साथ पहले का कानूनी ढांचा पुराना हो चुका है।
  • इससे पहले, CAG ने आलोचना करते हुए कहा था, कि भारत में स्पेक्ट्रम आवंटन तदर्थ आधार पर (2012-2021) किया जाता है; और सरकार को आवंटित स्पेक्ट्रम का इष्टतम उपयोग नहीं किया जाता है।
  • यह नया विधेयक अंतरराष्ट्रीय मानकों और सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप है।
  • नया विधेयक साइबर सुरक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक सुरक्षा चिंताओं का अधिक अनुपालन सुनिश्चित करेगा।

विधेयक के प्रमुख बिंदु:

  • दूरसंचार, सेवाओं और नेटवर्क की नई परिभाषाएं।
  • दूरसंचार लाइसेंस, बुनियादी ढांचे के पंजीकरण, वायरलेस उपकरणों के कब्जे और स्पेक्ट्रम के आवंटन पर केंद्र सरकार के विशेष विशेषाधिकार की मान्यता।
  • ‘राइट ऑफ वे’ (Right of Way – ROW) के लिए प्रभावी नीति।
  • सार्वभौमिक सेवा दायित्व कोष (USOF) के बजाय ‘दूरसंचार विकास कोष’ की स्थापना।
  • केंद्र को असाधारण परिस्थितियों में किसी भी लाइसेंसधारी को स्थगित करने, इक्विटी में बदलने, बट्टे खाते में डालने या राहत देने की शक्तियां दी गयी हैं।

सार्वभौमिक सेवा दायित्व निधि’ (USOF) क्या है?

‘यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन फंड’ / ‘सार्वभौमिक सेवा दायित्व निधि’ की स्थापना 2002 में की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य, सार्वभौमिक रूप से दूरसंचार सेवाएं प्रदान करना और तथा देश के ग्रामीण और दूरदराज़ के क्षेत्रों के लोगों के लिए समावेशी विकास का लाभ सुनिश्चित करना है।

  • ‘भारतीय टेलीग्राफ (संशोधन) अधिनियम,’ 2003 के अंतर्गत ‘यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन फंड’ (USOF) को वैधानिक दर्जा दिया गया है।
  • ‘सार्वभौमिक सेवा दायित्व निधि’ के प्रमुख, USOF प्रशासक होते है, जो दूरसंचार विभाग (DoT) के सचिव को रिपोर्ट करते है।

वित्तपोषण:

‘सार्वभौमिक सेवा दायित्व निधि’ (USOF) के अंतर्गत धनराशि, ‘यूनिवर्सल सर्विस लेवी’ (Universal Service Levy – USL) से जमा की जाती है। सभी दूरसंचार ऑपरेटरों से उनके ‘समायोजित सकल राजस्व’ (Adjusted Gross Revenue – AGR) पर ‘यूनिवर्सल सर्विस लेवी’ (USL)  वसूल की जाती है। इस राशि को भारत की संचित निधि में जमा किया जाता है, और इसके व्यय हेतु ‘संसद के पूर्व अनुमोदन’ की आवश्यकता होती है।

पीएम-केयर्स फंड

संदर्भ: रतन टाटा, केटी थॉमस (सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज) और करिया मुंडा (पूर्व डिप्टी स्पीकर) को ‘पीएम केयर्स फंड’ के ट्रस्टी के रूप में नियुक्त किया गया है।

‘पीएम केयर्स फंड’ के बारे में:

‘आपातकालीन स्थिति में प्रधान मंत्री नागरिक सहायता एवं राहत कोष’ (Prime Minister’s Citizen Assistance and Relief in Emergency Situations Fund : PM-CARES Fund) का गठन, कोविड-19  महामारी, और इसी प्रकार की अन्य आपात स्थितियों के दौरान, दान स्वीकार करने और राहत प्रदान करने के लिए किया गया था।

  • स्वैच्छिक योगदान (कोई बजटीय सहायता नहीं)।
  • पदेन अध्यक्ष: प्रधानमंत्री।
  • इसमें किया गया योगदान ‘कर लाभ’ के किए अर्हत होता है।
  • इसे किसी कानून या अधिसूचना द्वारा नहीं बनाया गया है।
  • इसके 10 रु. तक का न्यूनतम दान स्वीकार किया जा सकता है।

इसी प्रकार के अन्य फंड:

  • राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (NDRF): डीएम अधिनियम 2005 के तहत और सीएजी द्वारा लेखा परीक्षित।
  • आपदा प्रतिक्रिया कोष (राज्य और जिला स्तर पर) ।
  • प्रधान मंत्री राष्ट्रीय राहत कोष: यह पाकिस्तान से विस्थापित व्यक्तियों की सहायता के लिए सार्वजनिक योगदान के साथ स्थापित किया गया था। इसमें भारत के राष्ट्रपति और विपक्ष के नेता भी ट्रस्टी के रूप में शामिल होते हैं।

 

राष्ट्रीय साधन-सह-मेधा छात्रवृत्ति योजना

हाल ही में, राष्ट्रीय साधन-सह-मेधा छात्रवृत्ति योजना (National Means cum Merit Scholarship Scheme – NMMSS) के लिए राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल पर राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के साथ राष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला आयोजित की गई थी।

  • ‘राष्ट्रीय साधन-सह-मेधा छात्रवृत्ति’ आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मेधावी छात्रों को आठवीं कक्षा में ड्रॉप आउट को रोकने के लिए प्रदान की जाती है।
  • शिक्षा मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित।

 

पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया

संदर्भ: हाल ही में, ‘पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया’ (Popular Front of India – PFI) से जुड़े 100 से अधिक लोगों को आतंकवाद विरोधी गतिविधियों के सिलसिले में ‘राष्ट्रीय जांच एजेंसी’ द्वारा तलाशी के बाद गिरफ्तार किया गया है।

  • द पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) भारत में एक इस्लामिक गैर-लाभकारी संगठन है। इसका गठन 2007 में राष्ट्रीय विकास मोर्चा (NDF) के उत्तराधिकारी के रूप में किया गया था।
  • यह संगठन खुद को “नव-सामाजिक आंदोलन” के रूप में बताता है जो भारत के हाशिए के वर्गों के सशक्तिकरण के लिए प्रयास करता है। हालांकि, इसे हिंसा, कट्टरता और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों से जोड़ा गया है।

 

 

महारत्न कंपनी का दर्जा

संदर्भ: विद्युत क्षेत्र-केंद्रित गैर-बैंकिंग वित्त कंपनी (NBFC) ‘आरईसी लिमिटेड’ को ‘महारत्न’ केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम का दर्जा दिया गया है।

लाभ:

  • REC को ‘महारत्न’ का दर्जा दिए जाने से कंपनी के बोर्ड को वित्तीय निर्णय लेने के दौरान बढ़ी हुई शक्तियां हासिल होंगी।
  • इसे अधिक परिचालन और वित्तीय स्वायत्तता मिलेगी।
  • वित्तीय निर्णय लेते समय कंपनी के बोर्ड को बढ़ी हुई शक्तियां प्राप्त होगी।
  • REC वित्तीय संयुक्त उद्यम और पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनियों के लिए इक्विटी निवेश कर सकता है और भारत और विदेशों में विलय और अधिग्रहण कर सकता है।
  • प्रौद्योगिकी संयुक्त उद्यम या अन्य रणनीतिक गठबंधनों में भी प्रवेश कर सकता है।

REC के बारे में:

  • 1969 में निगमित, REC पूरे भारत में बिजली क्षेत्र के वित्तपोषण और विकास पर केंद्रित है।
  • यह राज्य बिजली बोर्डों, राज्य सरकारों, केंद्र/राज्य बिजली उपयोगिताओं, स्वतंत्र बिजली उत्पादकों, ग्रामीण विद्युत सहकारी समितियों और निजी क्षेत्र की उपयोगिताओं को वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
  • आरईसी ने डीडीयूजीजेवाई और सौभाग्य जैसी भारत सरकार की प्रमुख योजनाओं की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और देश में ग्रामीण एवं घरेलू विद्युतीकरण के लक्ष्य को हासिल करने में योगदान दिया है।

 

सरकार की तीन प्रमुख योजनाओं का अभिसरण पोर्टल

संदर्भ: कृषि अवसंरचना कोष (AIF), प्रधान मंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम (PMFME) योजना और प्रधान मंत्री किसान संपदा योजना (PMKSY) के लिए हाल ही में एक अभिसरण पोर्टल शुरू किया गया है।

लाभ:

  • यह पोर्टल इन योजनाओं के लाभार्थियों को परेशानी मुक्त सुविधाओं का लाभ उठाने का अवसर प्रदान करेगा।
  • इस योजना के अंतर्गत शामिल लाभों में 3% ब्याज अनुदान (सबवेंशन) और ऋण (क्रेडिट) गारंटी सहायता शामिल है।

इन योजनाओं के बारे में:

  • कृषि मंत्रालय द्वारा 2020 में शुरू किया गया ‘कृषि अवसंरचना कोष’ (AIF) का उद्देश्य क्रेडिट गारंटी सहायता और 3% ब्याज सबवेंशन के माध्यम से फसल-पश्चात प्रबंधन बुनियादी ढांचा तैयार करना है।
  • 2020 में आत्मानिर्भर भारत अभियान के हिस्से के रूप में शुरू की गयी ‘प्रधान मंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम योजना’ (PMFME) देश में सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों के उन्नयन के लिए वित्तीय, तकनीकी और व्यावसायिक सहायता प्रदान करती है।
  • प्रधान मंत्री किसान संपदा योजना (PMKSY) खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय की एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, जिसकी परिकल्पना एक व्यापक पैकेज के रूप में की गई है और जिसके परिणामस्वरूप खेतों से सीधे खुदरा विक्रय केंद्र (रिटेल आउटलेट तक कुशल आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन के साथ एक आधुनिक बुनियादी ढांचे का निर्माण होगा।

 

पहली ‘वार्षिक महत्वपूर्ण खोज एजेंडा’ रिपोर्ट, 2022

संदर्भ: हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA), अंतर्राष्ट्रीय अक्षय ऊर्जा एजेंसी (IRENA) और ‘संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन के उच्च-स्तरीय अभिकर्त्ताओं’ द्वारा पहली ‘वार्षिक महत्वपूर्ण खोज एजेंडा’ रिपोर्ट, 2022 (Annual Breakthrough Agenda Report 2022) जारी की गई है।

इस रिपोर्ट में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में तेज़ी से कमी लाने के लिये अंतर्राष्ट्रीय सहयोग पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

‘ब्रेकथ्रू एजेंडा’ के बारे में:

  • ब्रेकथ्रू एजेंडा (Breakthrough Agenda), वैश्विक तापमान को 1.5°C तक सीमित रखने में मदद करने के लिए एक अभूतपूर्व अंतरराष्ट्रीय स्वच्छ प्रौद्योगिकी योजना है। यह, देशों और व्यवसायों को हर साल अपने कार्यों में शामिल होने और मजबूत करने के लिए एक ढांचा प्रदान करता है।
  • इसे अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी, अंतर्राष्ट्रीय अक्षय ऊर्जा एजेंसी और ‘संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन उच्च स्तरीय अभिकर्त्ताओं’ द्वारा जारी किया गया है।

एजेंडा का पहला सेट (जिसे ग्लासगो ब्रेकथ्रू भी कहा जाता है) पिछले साल COP26 में निम्नलिखित क्षेत्रों के लिए जारी किया गया था:

  • बिजली: सभी देशों के लिए 2030 तक अपनी बिजली की जरूरतों को कुशलतापूर्वक पूरा करने के लिए स्वच्छ बिजली सबसे किफायती और विश्वसनीय विकल्प है।
  • सड़क:शून्य उत्सर्जन वाहन: 2030 तक सभी क्षेत्रों में नए सामान्य – सुलभ, किफायती और टिकाऊ।
  • स्टील: वैश्विक बाजारों में लगभग शून्य उत्सर्जन स्टील पसंदीदा विकल्प है।
  • हाइड्रोजन: 2030 तक सस्ती नवीकरणीय और कम कार्बन वाली हाइड्रोजन विश्व स्तर पर उपलब्ध है।
  • कृषि: 2030 तक जलवायु-स्मार्ट, टिकाऊ कृषि।

 

गैर संचारी रोग

संदर्भ: WHO की एक रिपोर्ट में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि दुनिया भर में होने वाली सभी मौतों में से 74% के लिए गैर-संचारी रोग’ (Noncommunicable diseases – NCDs) जिम्मेदार हैं, लेकिन स्वास्थ्य सहायता का केवल 5% NCD की रोकथाम के लिए आवंटित किया जाता है।

गैर संचारी रोग:   

गैर-संचारी रोग’ (Noncommunicable diseases – NCDs) आनुवंशिक, शारीरिक, पर्यावरणीय और व्यवहारिक कारकों के संयोजन का परिणाम स्वरूप होने वाली पुरानी एवं लंबी अवधि की बीमारियां हैं।

WHO द्वारा की गयी अनुशंसाएं:

  • गैर-संचारी रोगों’ (NCDs) के लिए वैश्विक कार्य योजना (2023-2030) के रोडमैप का कार्यान्वयन।
  • NCDs के लिए सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज।
  • प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल में NCD को शामिल करना।
  • अस्वास्थ्यकर उत्पादों पर कराधान।
  • अधिक से अधिक उपभोक्ता जागरूकता।

 

टोमिस्टोमा मगरमच्छ

संदर्भ: एक अध्ययन के अनुसार, टोमिस्टोमा (Tomistoma) मगरमच्छ द्वारा इंडोनेशिया में लोगों पर हमला करने की वजह, इसके प्राकृतिक आवास में- ताड़ के तेल के बागान, अवैध सोने के खनन और मानव घुसपैठ हो सकती है।

टॉमिस्टोमा (टॉमिस्टोमा स्क्लेगेली – Tomistoma schlegelii) मगरमच्छ की एक शर्मीली और समावेशी प्रजाति है जो आम तौर पर उच्च स्तर की मानव गतिविधि वाले क्षेत्रों से पीछे हट जाती है।

  • यह दक्षिण-पूर्व एशिया के मूल निवासी मगरमच्छ की मीठे पानी की प्रजाति है।
  • इसे ‘नकली घड़ियाल’ भी कहा जाता है।
  • IUCN स्थिति: संकटापन्न

 

 

सी बैंड

संदर्भ: भारत के विमानन सुरक्षा नियामक (DGCA) ने दूरसंचार विभाग को पत्र लिखकर विमान रेडियो अल्टीमीटर में 5जी सी-बैंड (C-Band) स्पेक्ट्रम के संभावित हस्तक्षेप पर चिंता व्यक्त की है।

 

एक रेडियो अल्टीमीटर (Radio Altimeter) विभिन्न विमान प्रणालियों को किसी इलाके के ऊपर सीधे ऊंचाई के के बारे में जानकारी प्रदान करने वाला उपकरण है। ये अल्टीमीटर और 5G दूरसंचार सेवाओं का एक हिस्सा ‘सी-बैंड’ में काम करता है, और इसलिए अल्टीमीटर की कार्यप्रणाली में हस्तक्षेप का जोखिम है।

सी-बैंड का लाभ:

  • दूरसंचार सेवा प्रदाताओं के लिए, ‘सी-बैंड’ 5जी सेवाओं को शुरू करने के लिए एक सर्वाधिक उपयुक्त स्थान प्रस्तुत करता है। यह बैंड कवरेज के साथ-साथ उच्च बैंडविड्थ सुनिश्चित करता है, जिसके परिणामस्वरूप तेज इंटरनेट गति होती है।
  • विमान संचालन के लिए, इस बैंड में अल्टीमीटर का उपयोग विमान की ऊंचाई के अत्यधिक सटीक माप को सुनिश्चित करता है।
  • हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि भारत ने 3.3 गीगाहर्ट्ज़ से लेकर 3.6 गीगाहर्ट्ज़ तक की आवृत्ति में सी-बैंड स्पेक्ट्रम की नीलामी की है। विमान रेडियो अल्टीमीटर मुख्य रूप से 4.2-4.4 गीगाहर्ट्ज़ की आवृत्तियों का उपयोग करते हैं। तो, इन दोनों फ़्रीक्वेंसी रेंज के बीच एक महत्वपूर्ण 500 मेगाहर्ट्ज का अंतर है।

 

नासा का DART मिशन

संदर्भ: अपनी तरह के पहले, सेव-द-वर्ल्ड प्रयोग में, नासा का डबल क्षुद्रग्रह पुनर्निर्देशन परीक्षण (Double Asteroid Redirection Test – DART) अंतरिक्ष यान ‘डिमॉर्फोस’ नामक एक छोटे से चंद्रमा से टकराएगा।

उद्देश्य:

टक्कर का प्रभाव, क्षुद्रग्रह को उसके सहयोगी अंतरिक्ष चट्टान के चारों ओर थोड़ी संकीर्ण कक्षा में इसकी दिशा-परिवर्तन करने के लिए पर्याप्त होना चाहिए। यह दर्शाता है कि यदि कोई हत्यारा क्षुद्रग्रह कभी हमारे रास्ते में आता है, तो हम इसकी दिशा-परिवर्तन करने के लिए प्रयास कर सकते हैं।

क्षुद्रग्रहों के लिए अन्य मिशन:

  • OSIRIS-Rex (NASA) 2020 में क्षुद्रग्रह बेन्नू से एकत्र किए गए नमूनों को वितरित करने के लिए पृथ्वी की ओर वापसी की राह पर है।
  • नासा का ‘लूसी अंतरिक्ष यान’ पिछले साल लॉन्च होने के बाद बृहस्पति के पास क्षुद्रग्रहों की ओर बढ़ रहा है।
  • नासा द्वारा नियर-अर्थ एस्टेरॉयड ‘स्काउट’ भेजा जाएगा।
  • 2026 में, नासा मुश्किल से खोजे जाने वाले क्षुद्रग्रहों की पहचान करने के लिए एक गणना लेने वाला टेलीस्कोप लॉन्च करेगा।
  • नासा का ‘साइके अंतरिक्ष यान’ (Psyche spacecraft) मंगल और बृहस्पति के बीच एक धातु-समृद्ध क्षुद्रग्रह के लिए एक नियोजित मिशन है।
  • हायाबुसा2 (जापान) एक क्षुद्रग्रह नमूना-वापसी मिशन है।
  • चीन 2025 में तियानवेन 2 क्षुद्रग्रह-नमूना मिशन शुरू करेगा

 

मानचित्र (चर्चा में)