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[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 22 September 2022

विषयसूची

सामान्य अध्ययन-I

  1. कार्य संस्कृति में नई प्रवृत्तियां

सामान्य अध्ययन-II

  1. जोखिम भरी नई यथास्थिति
  2. अपराधियों की शिनाख्त करने के नियम
  3. प्रवर्तन निदेशालय के लिए अधिक शक्तियां

सामान्य अध्ययन-III

  1. आयुर्वेद के वर्तमान उपागम के साथ समस्या
  2. शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसी: भारत में शिक्षा की स्थिति, 2022 रिपोर्ट

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

  1. निज़ाम की तलवार
  2. पोषण के लिए रेटिंग स्टार
  3. ‘प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा’
  4. कर्नाटक विधानसभा में धर्मांतरण-रोधी विधेयक पारित
  5. योग्यता के आधार पर प्रतिस्पर्धा करने वालों के हिस्से में EWS कोटा द्वारा कटौती
  6. भारतीय अर्थव्यवस्था की “इतनी युग्मित नहीं” प्रकृति
  7. सौर सेल निर्माण के लिए ‘पीएलआई’ योजना
  8. धर्मशाला घोषणा
  9. ग्रीन इवेंट टूल (GET)
  10. जैव अपघटक कैप्सूल
  11. हाइब्रिड प्रणोदन प्रणाली
  12. ई-सिम
  13. नक्सलवाद

 


सामान्य अध्ययनI


 

विषय: भारतीय समाज की मुख्य विशेषताएँ, भारत की विविधता।

कार्य संस्कृति में नई प्रवृत्तियां

संदर्भ: समकालीन दौर में, काम, नौकरी या श्रम ने नई शब्दावली, मुद्दों, चुनौतियों और कभी-कभी बहस को जन्म देते हुए अलग-अलग रूप ले लिए हैं।

‘कार्य संस्कृति’ क्या है?

किसी कार्यस्थल-परिवेश में ‘अभिवृत्‍ति या रवैया (Attitudes), धारणा या विश्वास (Beliefs) और व्यवहार (Behaviours)’ से निर्मित एक नियमित माहौल को हम सभी ‘कार्य संस्कृति’ (Work Culture) के रूप में जानते हैं।

पिछले कुछ महीनों में ‘चुपचाप काम छोड़ देना’ (Quiet quitting), ‘चुपचाप नौकरी से निकाल देना’ (Quiet firing), मूनलाइटिंग (Moonlighting), धक्का देने वाली संस्कृति (Hustle culture), अठारह घंटे के काम पर बहस और कार्य-जीवन संतुलन, जैसे मुद्दे प्रायः दिखाई देते रहे हैं।

क्वाइट क्विटिंग:

  • ‘क्वाइट क्विटिंग’ या ‘चुपचाप काम छोड़ देना’ (Quiet quitting) ट्रेंड के अनुसार जितनी सैलरी, उतना ही काम करना चाहिए। ताकि आपकी पर्सनल और प्रोफेशन लाइफ के बीच संतुलन बना रहे। इस ट्रेंड का मतलब ऑफिस में तय समय से ज्यादा नौकरी नहीं करनी चाहिए। काम कितना भी रहे लेकिन समय होने के बाद एक्ट्रा काम करने से बचना चाहिए।
  • ‘क्वाइट क्विटिंग’ का तात्पर्य कर्मचारियों द्वारा अपने लिए निर्धारित न्यूनतम आवश्यक कार्य करने से है।
  • उदाहरण के लिए, किसी की शिफ्ट पूरी होने के तुरंत बाद काम छोड़ देना, अतिरिक्त काम के लिए अतिरिक्त वेतन की मांग करना, और/या स्पष्ट कार्य-जीवन सीमा निर्धारित करना।

 

‘क्वाइट क्विटिंग’ के कारण:

  • कार्य संस्कृति में बदलाव: महामारी ने कई चुनौतियां पेश कीं है, जिसने नियोक्ताओं की मांग को बढ़ा दिया है, और उन्हें वैकल्पिक कार्य प्रणाली के बारे में फिर से सोचने का अवसर भी दिया है।
  • दूरस्थ कार्य का प्रभाव: कार्यस्थल से दूर रहकर काम करने वाले कर्मचारियों के कार्य-घंटों की संख्या में वृद्धि हुई है, जिसने ‘अत्यधिक और लंबे कार्य-तनाव की वजह से भावात्मक, शारीरिक और मानसिक थकान’ (बर्नआउट – Burnout) के बढ़े हुए स्तरों में योगदान किया है।
  • नियोक्ताओं का उदासीन रवैया: कर्मचारियों को लगता है, कि उनके मेनेजरों को कर्मचारी-कल्याण के लिए बहुत कम चिंता है, जिससे उनके बीच असंतोष फैलता है।

 

मूनलाइटिंग:

  • ‘मूनलाइटिंग’ (Moonlighting) का तात्पर्य कोई दूसरी नौकरी करने, या किसी अन्य प्रोजेक्ट पर काम करने, अस्थायी तौर पर कोई काम करने (Gigs) या अन्य नियोक्ताओं के लिए काम करने से है, जिसे कर्मचारी के नियमित काम के घंटों के बाहर आय के द्वितीयक स्रोत के रूप में गिना जाता है।
  • चूंकि ‘साइड जॉब’ ज्यादातर रात के समय या सप्ताहांत पर होती हैं, इसलिए इसे मूनलाइटिंग कहा जाता है।

मूनलाइटिंग के कारण:

  • मूनलाइटिंग, कर्मचारियों को अपने मुख्य रोजगार से समझौता किए बिना, अपनी शिफ्ट का समय समाप्त करने के बाद ‘साइड जॉब’ के लिए काम करने की अनुमति देती है।
  • इससे कर्मचारियों को अपने कौशल को सुधारने में मदद मिलती है, और अतिरिक्त लाभ भी प्राप्त होता है।
  • व्यक्तिगत पसंद: कंपनी की शिफ्ट के समय के बाद, यदि कोई व्यक्ति यदि कुछ भी करना चाहता है, तो वह अपने शौक से जुड़ी योजनाओं या ‘अतिरिक्त अस्थायी काम’ (गिग) के रूप में करने के लिए स्वतंत्र है।
  • अच्छी प्रोफ़ाइल: विदेशों में कई विश्वविद्यालय ऐसे ‘साइड प्रोजेक्ट्स’ को व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए महत्वपूर्ण मानते हैं।

नियोक्ताओं की अप्रसन्नता का कारण:

नियोक्ता अक्सर इस प्रथा पर संदेह करते हैं, क्योंकि इसका मतलब यह हो सकता है कि एक कर्मचारी अपनी कंपनी या संस्था को आवश्यक समय नहीं दे पाएगा, और इसके अलावा नियोक्ताओं का मानना है, एक कर्मचारी से अपेक्षा की जाती है कि वह अपना पूरा काम करने का समय, प्रयास और ऊर्जा नियोक्ता के हित में दे और वह किसी भी अन्य कंपनी या संस्था के लिए कोई अतिरिक्त समय नहीं दे सकता है।

 

’18 घंटे काम’ पर बहस और धक्का देने वाली संस्कृति:

धक्का देने वाली संस्कृति (Hustle culture) को कर्मचारियों को सामान्य कामकाजी घंटों से अधिक काम करने के लिए प्रोत्साहित करने वाली संस्कृति के रूप में परिभाषित किया गया है।

  • इस संस्कृति में नियोक्ताओं और कर्मचारियों के पास खाली समय होने पर या छुट्टियों में भी उनके दिमाग में ‘काम’ रहता है।
  • इस संस्कृति की प्रमुख आवश्यकता, किसी लक्ष्य पर कार्य को सामान्य से तेज गति से पूरा करना है।

एक कंपनी के सीईओ द्वारा एक लिंक्डइन पोस्ट में युवाओं को अपने करियर में शुरुआत में कम से कम चार से पांच साल के लिए दिन में 18 घंटे काम करने की सलाह दी गई। जिस पर उनको कई प्रतिक्रियाओं का सामना करना पड़ा और उनका उपहास किया गया।

लंबे कार्य-घंटों पर WHO अध्ययन के अनुसार-

  • 2016 में लंबे समय तक काम करने के कारण ‘स्ट्रोक’ और ‘हृदय रोग’ से 745,000 लोगों की मौत हुई।
  • प्रति सप्ताह 55 घंटे या उससे अधिक काम करना स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा है।
  • समय की सीमा तय करना नियोक्ताओं के लिए फायदेमंद होगा क्योंकि इससे कामगारों की उत्पादकता बढ़ती है।

‘वर्क-लाइफ बैलेंस’ होना क्यों जरूरी है?

’60 कीज़ टू सक्सेस विद एनएलपी’, ‘थैंक गॉड इट्स मंडे’ सहित 5 पुस्तकों के लेखक ‘सिद्धार्थ एस’ द्वारा दिए गए सुझावों के अनुसार-

  1. कार्य-जीवन संतुलन महत्वपूर्ण है।
  2. स्वास्थ्य को धन से अधिक महत्व दें।
  3. यदि आप चाहते हैं कि कर्मचारी अतिरिक्त घंटे काम करें तो एक प्रोत्साहन प्रणाली तैयार करें।
  4. अलग-अलग लोगों के लिए सफलता के अलग-अलग अर्थ होते हैं: आर्थिक सफलता मानव जीवन की सफलता को मापने का एकमात्र पैमाना नहीं है।
  5. उद्यमी और कर्मचारी मानसिकता अलग होती हैं: यदि किसी कर्मचारी को मूल वेतन के लिए 70+ घंटे काम करना पड़ता है, तो यह एक अच्छा विचार नहीं है। कर्मचारी, उद्यमिता का रास्ता भी अपना सकता है जहाँ कंपनी बनाने और मुनाफा कमाने का अवसर हो।

 

मेंस लिंक:

क्या आपको लगता है कि युवाओं द्वारा ‘धक्का देने वाली संस्कृति’ (Hustle culture) को खारिज करना या ‘मूनलाइटिंग’ को अपनाना भारतीय संस्कृति में निहित ‘कार्य ही पूजा है’ के विचार को खारिज करना है? चर्चा कीजिए। (10 अंक)

 


सामान्य अध्ययनII


 

विषय: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार।

जोखिम भरी नई यथास्थिति

संदर्भ:

भारत और चीन ने एक ‘विसैन्यीकृत बफर ज़ोन’ बनाने के ‘गश्ती बिंदु’ 15 / ‘पैट्रोलिंग पॉइंट’ 15 (PP15) से अपने-अपने सैनिकों को वापस बुला लिया है।

 

 

‘बफर जोन निर्माण’ से जुड़े मुद्दे:

  • पेट्रोलिंग: यह ‘बफर जोन’ (Buffer Zone) भारत को अपने ही क्षेत्र में गश्त करने के अधिकार से रोकता है।
  • गतिविधियों पर प्रतिबंध: यह ‘बफर जोन’ और ‘देपसांग की स्थिति’ ‘वास्तविक नियंत्रण रेखा’ (LAC) के समीप भारत की ‘सैन्य गतिविधियों’ को सीमित करती है।

 

भारत और चीन के बीच अभी भी जारी मुद्दे:

  • कोई वापसी नहीं: 2020 के बाद से प्रत्येक पक्ष द्वारा तैनात किए गए सैन्यबल अभी भी अपने-अपने गैरीसन में वापस नहीं आए हैं।
  • सैन्य अवसंरचनाएं: दोनों पक्षों के बीच सीमा के नजदीक ‘स्थायी सैन्य बुनियादी ढांचे’ के निर्माण के लिए होड़ लगी हुई है।
  • अरुणाचल प्रदेश पर दावा: चीन अभी भी अरुणाचल प्रदेश को अपना क्षेत्र मानता है।

 

भारत के लिए सामरिक निहितार्थ:

  • पुन: नियुक्ति: भारत ने, मूल रूप से पाकिस्तान मोर्चे पर तैनात तीन स्ट्राइक कोर’ (Strike Corps) में से एक को फिर से चीन के मोर्चे पर नियुक्ति कर दिया है।
  • नवीनतम तोपखाना और अन्य उपकरण: भारत ने, चीन की सीमा पर अपने नवीनतम तोपखाने, लड़ाकू जेट और ड्रोन तैनात कर दिए हैं।

 

निष्कर्ष:

  • एशियाई शक्ति संतुलन: महासागरों में सैन्य बल को तैनात करने की क्षमता, छोटे क्षेत्रीय राष्ट्रों की रक्षा करना या उन पर दबाव डालना और वहां एक स्थायी रणनीतिक मौजूदगी स्थापित करना, एशियाई शक्ति संतुलन को निर्धारित करेगा।
  • निरंतर सैन्य बलों को वापस बुलाना और तनाव कम करना: यह भारतीय योजनाकारों के लिए हिंद महासागर क्षेत्र में दीर्घकालिक सैन्य आधुनिकीकरण और राजनीतिक प्रभाव की दिशा में काम करने का एक सुनहरा अवसर हो सकता है।

इंस्टा लिंक्स:

भारत-चीन संबंध

मेंस लिंक:

चीन अपने आर्थिक संबंधों और सकारात्मक व्यापार अधिशेष का उपयोग एशिया में ताकतवर सैन्य शक्ति दर्जे को विकसित करने के लिए उपकरण के रूप में कर रहा है” इस कथन के आलोक में अपने पड़ोसी के रूप में भारत पर इसके प्रभाव की चर्चा कीजिए। (यूपीएससी 2017)

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

अपराधियों की पहचान के लिए नियम

संदर्भ:

हाल ही में, गृह मंत्रालय ने ‘आपराधिक प्रक्रिया (शिनाख्त) अधिनियम, 2022’ (Criminal Procedure (Identification) Act, 2022) को नियंत्रित करने वाले नियम अधिसूचित किए हैं, और इस क़ानून को संसद में भी पारित किया जा चुका है।

अधिनियम के प्रमुख बिंदु:

  • इस अधिनियम के माध्यम से ‘कैदियों की शिनाख्त अधिनियम’ 1920 (Identification of Prisoners Act 1920) को निरसित कर दिया गया।
  • मजिस्ट्रेट की शक्तियां: अधिनियम में मजिस्ट्रेट को, किसी व्यक्ति के लिए अपनी माप / पैमाइश (मेज़रमेंट्स) देने का निर्देश देने की शक्ति प्रदान की गयी है।
  • व्यक्ति की “माप” (Measurements) को भौतिक रूप में या गैर-मानक डिजिटल प्रारूप में एकत्रित किया जा सकता है। इस माप को मानक डिजिटल प्रारूप में परिवर्तित किया जाएगा और उसके बाद ‘मानक संचालन प्रक्रिया’ (Standard Operating Procedure) के अनुसार डेटाबेस में अपलोड किया जाएगा।
  • अधिकृत उपयोगकर्ता: केवल अधिकृत उपयोगकर्ता ही एन्क्रिप्टेड प्रारूप में माप को केंद्रीय डेटाबेस में अपलोड कर सकते हैं।

“माप” (Measurements) में निम्नलिखित चिह्नों को शामिल किया गया हैं:

  • उंगलियों के निशान
  • हथेली के निशान और पदचिह्न
  • तस्वीरें
  • आइरिस और रेटिना स्कैन
  • भौतिक, जैविक नमूने और उनका विश्लेषण (डीएनए प्रोफाइलिंग सहित)
  • हस्ताक्षर, लिखावट सहित व्यवहार संबंधी विशेषताएं
  • दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 53 या धारा 53ए में संदर्भित कोई अन्य परीक्षा।

 

अधिनियम से जुडी चिंताएं:

  • गोपनीयता संबंधी मुद्दे;
  • यह अधिनियम राजनीतिक बंदियों के भी नमूनों की रिकॉर्डिंग की अनुमति देता है।
  • नियमों में दोषी व्यक्तियों के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया का उल्लेख नहीं है।

 

डेटा का भंडारण:

  • माप के रिकॉर्ड को एकत्र करने, संग्रहीत करने और संरक्षित करने और रिकॉर्ड के साझाकरण, प्रसार, नष्ट करने और निपटान करने का कार्य गृह मंत्रालय के अधीन ‘राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो’ (NCRB) को दिया गया है।
  • राज्य सरकार भी डेटा स्टोर कर सकती है। लेकिन इनको NCRB के साथ माप या माप के रिकॉर्ड को साझा करने के लिए संगत एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस प्रदान करना होगा।

किसी संदिग्ध के बरी होने की स्थिति में रिकॉर्ड को नष्ट करने के प्रावधान:

  • इस बारे में ‘राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो’ द्वारा अभी तक कोई प्रावधान निर्दिष्ट नहीं किए गए है।
  • नोडल अधिकारी: अभिलेखों को नष्ट करने के लिए कोई भी अनुरोध, संबंधित राज्य सरकार द्वारा नामित नोडल अधिकारी को किया जाएगा।
  • यह नोडल अधिकारी, यह सत्यापित करने के बाद कि ‘माप का संबंधित रिकॉर्ड’ किसी अन्य आपराधिक मामले से जुड़ा नहीं है, इसको नष्ट करने की सिफारिश करेगा।

इंस्टा लिंक्स:

आपराधिक प्रक्रिया (पहचान) अधिनियम, 2022

मेंस लिंक:

विभिन्न प्रकार के साइबर अपराधों और खतरे से लड़ने के लिए आवश्यक उपायों पर चर्चा कीजिए। (यूपीएससी 2020)

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: सांविधिक, विनियामक और विभिन्न अर्द्ध-न्यायिक निकाय।

प्रवर्तन निदेशालय के लिए अधिक शक्तियां

संदर्भ:

वर्ष 2014 से, प्रवर्तन निदेशालय (Directorate of Enforcement – ED) द्वारा 121 प्रमुख राजनेताओं की जांच और 115 प्रमुख विपक्षी नेताओं के खिलाफ गिरफ्तार, पूछताछ, छापेमारी या प्राथमिकी दर्ज की गयी है।

प्रवर्तन निदेशालय की शक्तियों का विश्लेषण:

  • सीबीआई की तुलना में प्रवर्तन निदेशालय की शक्तियां: जांच एजेंसियों, विशेष रूप से सीबीआई के विपरीत, ‘धन शोधन निवारण अधिनियम’ (Prevention of Money Laundering Act – PMLA), ‘प्रवर्तन निदेशालय’ (ED) को राज्य सरकारों की सहमति से या उसके बगैर किसी भी अपराध का संज्ञान लेने की अनुमति देता है।
  • NIA की तुलना में प्रवर्तन निदेशालय की शक्तियां: ‘राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण’ (National Investigation Agency- NIA) को सीमित प्रकार के अपराधों की जांच करने की शक्ति प्राप्त है, जबकि ‘प्रवर्तन निदेशालय’ पूरे देश में विस्तृत श्रेणी के अपराधों की जांच कर सकता है।
  • व्यापक अधिकार-क्षेत्र: ‘प्रवर्तन निदेशालय’ का दायरा आतंकवाद जैसे गंभीर अपराधों से लेकर जंगली जानवरों के शिकार तक और कॉपीराइट के उल्लंघन से लेकर ‘नकली ट्रेडमार्क’ जैसे मामलों तक विस्तृत है।

‘धन शोधन निवारण अधिनियम’ (PMLA) के तहत अन्य शक्तियां:

  • यह अधिनियम ‘प्रवर्तन निदेशालय’ के जांचकर्ताओं को आरोपियों की संपत्तियों और संपत्तियों को गिरफ्तार करने और कुर्क करने की शक्ति देता है।
  • ज़मानत की कड़ी शर्तें लागू करने की शक्ति।
  • जांच अधिकारी के समक्ष दिए गए बयान को सबूत के तौर पर अदालत में पेश करने की शक्ति।

विभिन्न संशोधनों के माध्यम से दी गयी शक्तियां:

  • आईपीसी की धारा 120B के तहत आपराधिक साजिश: इसे कई अन्य अपराधों के बीच PMLA की अनुसूची में जोड़ा गया था।
  • शोधित धनराशि (laundered money) की निगरानी के लिए ‘अंतर्राष्ट्रीय क्षेत्राधिकार’।
  • 2015 और 2018 में संशोधन: ‘प्रवर्तन निदेशालय’ को भारत में धनशोधन के माध्यम से विदेशों में अर्जित संपत्तियों के बराबर संपत्तियों को कुर्क करने की अनुमति दी गई।
  • 2019 में PMLA का स्पष्टीकरण: सरकार ने ‘प्रवर्तन निदेशालय’ को कथित आपराधिक गतिविधि के माध्यम से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अर्जित संपत्तियों को कुर्क करने की अनुमति दी।

‘धन शोधन निवारण अधिनियम’ (PMLA) से जुड़े मुद्दे:

  • अधिनियम में ‘प्रवर्तन निदेशालय’ जांच अधिकारी के समक्ष दिए गए बयान को अदालत में सबूत के तौर पर मान्यता दी गयी है। यह देश में एकमात्र ऐसा क़ानून है, जिसके तहत जांच अधिकारी के समक्ष दर्ज बयान को अदालत में साक्ष्य के रूप में स्वीकार्य करने की अनुमति दी गयी है।
  • जमानत की कड़ी शर्तें: सुप्रीम कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में सख्त जमानत शर्तों सहित PMLA के सभी प्रावधानों की वैधता को बरकरार रखा है।

इंस्टा लिंक्स:

धन शोधन निवारण अधिनियम

प्रवर्तन निदेशालय

मेंस लिंक:

दुनिया के दो सबसे बड़े अवैध अफीम उत्पादक देशों से भारत की नजदीकी ने उसकी आंतरिक सुरक्षा संबंधी चिंताओं को बढ़ा दिया है। मादक पदार्थों की तस्करी और अन्य अवैध गतिविधियों जैसे मनी लॉन्ड्रिंग और मानव तस्करी के बीच संबंधों की व्याख्या कीजिए। इसे रोकने के लिए क्या प्रति-उपाय किए जाने चाहिए? (यूपीएससी 2018)

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


सामान्य अध्ययनIII


 

विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास।

आयुर्वेद के वर्तमान उपागम के साथ समस्या

संदर्भ: इस आर्टिकल में वर्तमान संदर्भ में ‘आयुर्वेद’ (Ayurveda) के समक्ष खडी कुछ चुनौतियों पर चर्चा की गयी है।

‘आयुर्वेद’ क्या है?

‘आयुर्वेद’ (Ayurveda) एक वैकल्पिक चिकित्सा प्रणाली है, जिसका ऐतिहासिक स्रोत भारतीय उपमहाद्वीप में पाया जाता है। ‘आयुर्वेद’ मुख्यतः यह इस विचार पर आधारित है कि व्यक्ति में कोई भी रोग, व्यक्ति की चेतना में असंतुलन या तनाव के कारण होता है।

भारत और नेपाल में आयुर्वेद का अत्यधिक प्रचलन है, और यहाँ लगभग 80% जनसंख्या इसका उपयोग करती है।

आयुर्वेद का महत्व:

  • प्राचीन विज्ञान और भारतीय विरासत
  • रोगों को देखने का एक वैकल्पिक तरीका: आयुर्वेद में, यह माना जाता है कि जीवित व्यक्ति- तीन रसों (वात, पित्त और कफ), सात मूल ऊतकों (रस, रक्त, मनसा, मेदा, अस्थि, मज्जा और शुक्र) तथा शरीर के अपशिष्ट उत्पाद यानी माल, मूत्र और स्वेद का समूह है।
  • समग्र दृष्टिकोण: आयुर्वेद प्रणाली में उपचार का दृष्टिकोण समग्र और व्यक्तिपरक होता है जिसमें निवारक, उपचारात्मक, शमन, स्वास्थ्यकर और पुनर्स्वस्थ संबंधी पहलू शामिल होते हैं।
  • इसमें निवारक उपायों पर अधिक ध्यान दिया जाता है।

चुनौतियां:

  • अप्रभावी उपचार: आपातकालीन मामलों में आयुर्वेद प्रणाली से उपचार प्रायः अप्रभावी रहता है।
  • एकरूपता का आभाव: एक ही रोग के उपचार के लिए विभिन्न क्षेत्रों में विभिन्न औषधीय पौधों का उपयोग किया जाता है।
  • वैश्विक स्तर पर आयुर्वेद में रुचि और प्रोत्साहन की कमी।
  • विशेष चिकित्सकों और अनुसंधान की कमी।
  • पुराने सिद्धांत: आयुर्वेद के प्राचीन ग्रंथों से आज के समय में अपनी संपूर्णता में प्रासंगिकता बनाए रखने की उम्मीद नहीं की जा सकती है। इसके सिद्धांतों में उपयोगी अंशों के साथ-साथ अप्रचलित अंश भी होते हैं।
  • एकांगी विवरण: उदाहरण के लिए, मूत्र निर्माण के बारे में, आयुर्वेद ग्रंथों में कहा गया है कि आंतों से छोटी नलिकाएं मूत्राशय को भरने के लिए मूत्र ले जाती हैं, जिसमें गुर्दे की कोई भूमिका नहीं होती है। यह विवरण पुराना हो चुका है।
  • गलत धारणा: आयुर्वेद के शिक्षाविदों के बीच व्यापक धारणा है कि प्राचीन ग्रंथो की रचना ऋषियों द्वारा गहरी योगिक अवस्थाओं में की गयी थी, जिसकी वजह से इन ग्रंथों की प्रासंगिकता कालातीत है।

 

आवश्यकता:

  • आयुर्वेद के विवेकपूर्ण व्यावहारिक उपयोग के लिए इसके प्राचीन ग्रंथो की सामग्री की निष्पक्ष छानबीन या परख करना पहली आवश्यकता है।
  • “रिवर्स फार्माकोलॉजी” (Reverse Pharmacology): “रिवर्स फार्माकोलॉजी” या ‘अधोमुखी औषध-विज्ञान’ में, आयुर्वेद में शोध के लिए ‘प्रलेखित नैदानिक ​​​​अनुभवों’ (Documented Clinical Experiences) का उपयोग किया जाता है।

सरकार द्वारा उठाए गए कदम:

  • वर्ष 2014 में आयुष मंत्रालय (आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी) की स्थापना।
  • न्यू मिलेनियम इंडियन टेक्नोलॉजी लीडरशिप इनिशिएटिव (NMITLI): ‘आयुर्वेद में अनुसंधान’ इस पहल का एक मुख्य हिस्सा है।
  • केरल में आम जनता में रोग प्रतिरोधक क्षमता में सुधार के लिए आयुर्वेद को बढ़ावा दिया जा रहा है।
  • डब्ल्यूएचओ का प्रस्तावित ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिन (जामनगर, गुजरात): यह दुनिया भर में पारंपरिक चिकित्सा के लिए पहला और एकमात्र वैश्विक आउटपोस्ट केंद्र होगा।

निष्कर्ष:

एक चिकित्सा प्रणाली के रूप में, आयुर्वेद अपने पर्यवेक्षण के लिए, केवल अपने सिद्धांतों के लिए आंशिक रूप से अत्यधिक मूल्यवान है। आधुनिक विज्ञान के अनुसार सिद्धांतों में जितनी जल्दी सुधार और अद्यतनीकरण होगा लोग उतना ही इससे बेहतर लाभान्वित होंगे।

 संबंधित तथ्य:

भारत में स्वास्थ्य की स्थिति और स्वास्थ्य संगठनों के संबंध में मौजूदा स्थिति का सर्वेक्षण करने के लिए ‘सर जोसेफ विलियम भोरे’ के तहत 1943 में भारत सरकार द्वारा ‘भोरे समिति’ की स्थापना की गई थी।

इंस्टा लिंक:

सर्जरी में आयुर्वेद

मेंस लिंक:

वर्तमान उपयोग के लिए आयुर्वेद का अनुकूलन अपनी चुनौतियों के साथ आता है जिसे स्वीकार करने और हल करने की आवश्यकता है। चर्चा कीजिए। (250 शब्द)

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास।

शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसी: भारत में शिक्षा की स्थिति, 2022 रिपोर्ट

संदर्भ: हाल ही में, यूनेस्को द्वारा “भारत में शिक्षा की स्थिति, 2022:शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसी” रिपोर्ट (State of education report for India 2022: Artificial Intelligence (AI) in education) रिपोर्ट जारी की गयी है।

प्रमुख निष्कर्ष:

  • भारत में ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता’ या ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसी (AI) निपुणता पैंठ दर’ (AI skill penetration rate) सापेक्षिक रूप से उच्चतम है। भारत में यह दर वैश्विक औसत से 3 गुना अधिक है।
  • ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसी’ साक्षरता बढ़ रही है और यह भारत के लिए महत्वपूर्ण भी है।
  • भारत में ‘सभी के लिए समान’ (one-size-fits-all) दृष्टिकोण अपनाया जाता है। व्यक्तिगत और बुद्धिमान एआई-आधारित शिक्षण का उपयोग करने से सीखने में विविधता लाने में मदद मिलेगी।

आवश्यकता:

  • ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसी’ की आचारनीति सिखाने पर विचार करना चाहिए।
  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसी’ में एल्गोरिथम पूर्वाग्रह और भेदभाव में सुधार किए जाने की आवश्यकता है।
  • एआई-आधारित उत्पादों को विकसित करने में निजी क्षेत्र और पीपीपी को शामिल करना चाहिए।
  • समानता, समरूपता, समावेशन और सीखने के बेहतर परिणामों के लिए AI का उपयोग किया जाना चाहिए।
  • भाषाई विविधता को शामिल करने के लिए AI का उपयोग किया जाना चाहिए।

संबंधित मुद्दे:

  • भारत में शिक्षा में ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसी’ के इस्तेमाल हेतु नीतियों का अभाव है।
  • डिजिटल बुनियादी ढांचे की कमी।
  • जालसाजी, धोखाधड़ी के लिए ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसी’ का बढ़ता उपयोग।
  • समीक्षात्मक सोच के बजाय ‘रटने पर आधारित शिक्षा’ पर ध्यान दिया जाता है।

सरकार द्वारा उठाए गए कदम:

  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में ‘उद्योग 4.0’ (Industry 4.0) की कौशल-आधारित मांगों को पूरा करने के लिए शिक्षा में डिजिटल उपकरणों (एआई सहित) के उपयोग पर जोर दिया गया है।
  • ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसी’ को सीबीएसई की नौवीं कक्षा के लिए ऐच्छिक विषय के रूप में शामिल किया गया है।
  • ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसी’ पर ‘राष्ट्रीय कार्यक्रम’ शुरू किया गया है।
  • ऐरावत अर्थात ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रिसर्च, एनालिटिक्स और नॉलेज एसिमिलेशन प्लेटफॉर्म’ (Artificial Intelligence Research, Analytics and Knowledge Assimilation Platform – AIRAWAT) लांच किया गया है।
  • ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसी’ के लिए राष्ट्रीय रणनीति।

निष्कर्ष:

सरकार को 5 ‘आई’  अर्थात ‘समावेशन, स्वदेशीकरण, नवाचार, बुनियादी ढांचे में निवेश और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग’ (Inclusiveness, Indigenization, Innovation, Investment in infrastructure & International cooperation – 5 ‘I’s) को धयान में रखते हुए ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसी’ पर विचार करना चाहिए।

रिपोर्ट के बारे में:

यह भारत में शिक्षा में ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसी’ के अनुप्रयोग को बढ़ाने के उद्देश्य से यूनेस्को की वार्षिक रिपोर्ट का चौथा संस्करण है।

यूनेस्को (UNESCO) के बारे में:

वर्ष 1945 में स्थापित ‘संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन’ (UNESCO) संयुक्त राष्ट्र की एक विशेष एजेंसी है जिसका उद्देश्य शिक्षा, कला, विज्ञान और संस्कृति में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से विश्व शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देना है। इसका मुख्यालय फ्रांस की राजधानी पेरिस में है।

इंस्टा लिंक:

एआई और रोबोटिक्स

मेंस लिंक:

चूंकि ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता’ जिस दुनिया में हम रहते हैं, उसे बदलती जा रही है, अतः अधिकांश तकनीकों की तरह, समाज पर इसका सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। परीक्षण कीजिए। (15 अंक)

स्रोत: यूनेस्को

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


निज़ाम की तलवार

संदर्भ: 20वीं सदी की शुरुआत में हैदराबाद में एक ब्रिटिश जनरल को बेची गई ‘औपचारिक समारोह में धारण की जाने वाली 14वीं सदी की एक तलवार’ (Ceremonial Sword) को वापस भारत लाए जाने की तैयारी पूरी हो चुकी है।

  • सांप के आकार की इस तलवार की धार दाँतेदार है और यह दमिश्क पैटर्न पर बनी हुई है, जिसमें हाथी और बाघ की सोने में नक्काशी की गयी है।
  • संग्रहालय के दस्तावेज के अनुसार, यह तलवार ” हैदराबाद के निजाम महबूब अली खान, आसफ जाह VI”, (1896-1911) द्वारा राजा एडवर्ड सप्तम और रानी एलेक्जेंड्रा के भारत के सम्राट और साम्राज्ञी के रूप में राज्याभिषेक के उपलक्ष्य में वर्ष 1903 आयोजित एक औपचारिक स्वागत समारोह- दिल्ली दरबार या इंपीरियल दरबार में प्रदर्शित की गई थी।

पोषण के लिए रेटिंग स्टार

संदर्भ: भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने उपभोक्ताओं को चीनी, नमक और वसा की उच्च मात्रा वाले पैक किए गए खाद्य सामग्री को खरीदने से हतोत्साहित करने के लिए ‘फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग’ के लिए एक मसौदा अधिसूचना जारी की है।

इसके तहत ‘खाद्य सामग्री’ पैक पर प्रदर्शित ‘ब्रांड’ नाम के आगे रेटिंग के रूप में -0 से 5 स्टार- एक ग्राफ़िक प्रारूप में प्रदर्शित किया जाना अनिवार्य होगा।

  • इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की ऊर्जा दक्षता के लिए ‘स्टार-रेटिंग सिस्टम’ की तरह, ‘इंडियन न्यूट्रिशन रेटिंग (INR)’ में अस्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों को 0-स्टार रेटिंग और स्वास्थ्यप्रद को 5-स्टार रेटिंग दी जाएगी।
  • उत्पाद के लिए स्टार-रेटिंग लोगो बनाने के लिए, खाद्य व्यवसायों को FSSAI के खाद्य सुरक्षा अनुपालन प्रणाली (FoSCoS) पोर्टल पर संबंधित उत्पादों के पोषण संबंधी प्रोफाइल प्रस्तुत करना होगा।

 

‘प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा’

संदर्भ: ‘सेंटर फॉर बजट एंड गवर्नेंस’ और ‘सेव द चिल्ड्रन’ की रिपोर्ट के अनुसार- प्रारंभिक बाल्यावस्था की शिक्षा पर जीडीपी का मात्र 0.1% सरकारी व्यय किया जाता है।

निष्कर्ष:

  • भारत में तीन साल से छह साल की उम्र के बच्चों के लिए ‘प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा’ (ECCE) पर सरकारी व्यय, जीडीपी का महज 0.1% है। जबकि अमेरिका में यह 0.33% और फिनलैंड में 0.71% है।
  • भारत में 3-6 वर्ष के आयु वर्ग की आबादी लगभग 99 मिलियन है।
  • ‘प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा’ सेवाओं (ECE services) का प्रति-बालक आवंटन, हिमाचल प्रदेश में सबसे अधिक और मेघालय में सबसे कम है।

ECCE का अर्थ:

  • भारतीय संदर्भ में ‘प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा’ (Early Childhood Care and Education- ECCE) को आम तौर पर जन्म से आठ साल तक के बच्चों की देखभाल और शिक्षा के रूप में परिभाषित किया जाता है। इसमें 0-3 साल के बच्चों के लिए ‘क्रेच/होम स्टिमुलेशन’ के जरिए ‘प्रारंभिक प्रोत्साहन प्रोग्राम’ शामिल होते हैं।

सरकार द्वारा उठाए गए कदम:

  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का लक्ष्य सतत विकास लक्ष्य 4 के अनुरूप 2030 तक ‘प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा’ (Early Childhood Education – ECE) को सार्वभौमिक बनाना है।
  • NCERT द्वारा शिक्षकों का मार्गदर्शन करने और ECE के लिए प्रशिक्षित कार्यबल तैयार करने की आवश्यकता पर बल देने के लिए ‘प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा हेतु एक राष्ट्रीय पाठ्यचर्या और शैक्षणिक ढांचा’ (National Curricular and Pedagogical Framework for ECCE – NCPFECCE) के लिए तैयार किया जाएगा।
  • सार्थक (SARTHAQ)- राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लिए कार्यान्वयन योजना ‘गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के माध्यम से ‘छात्रों’ और शिक्षकों की समग्र उन्नति’ (‘Students’ and Teachers’ Holistic Advancement through Quality Education – SARTHAQ) शुरू की गयी है।
  • समग्र शिक्षा अभियान, एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS) योजना और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन।

 

कर्नाटक विधानसभा में धर्मांतरण-रोधी विधेयक पारित

संदर्भ: कर्नाटक विधान सभा ने “कर्नाटक ‘धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार’ संरक्षण विधेयक, 2022” (Karnataka Protection of Right to Freedom of Religion Bill, 2022) को ध्वनि मत से पारित कर दिया है। इस विधेयक को आम भाषा में ‘धर्मांतरण रोधी विधेयक’ (anti-conversion Bill) कहा जाता है।

कर्नाटक ‘धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार’ संरक्षण विधेयक’ के प्रमुख बिंदु:

  • कारावास एवं दंड: किसी भी व्यक्ति को अवैध रूप से किसी अन्य व्यक्ति का धर्म-परिवर्तन करने का दोषी पाए जाने पर, उसे न्यूनतम तीन से पांच साल की जेल और 25,000 रुपये के जुर्माने का सामना करना पड़ेगा।
  • अवयस्क, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति और महिलाएं: विधेयक में, ‘गैरकानूनी रूप से धर्मांतरित व्यक्ति’ के नाबालिग या महिला होने पर, अथवा अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति से संबंधित होने पर अधिक सजा का प्रावधान किया गया है – इसके तहत दोषी व्यक्ति को न्यूनतम तीन साल और अधिकतम दस साल की कैद, और 50,000 रुपये का जुर्माना का दंड दिया जाएगा।
  • सामूहिक धर्मांतरण: ‘सामूहिक धर्मांतरण’ के मामलों में, आरोपी व्यक्ति को तीन से दस साल की जेल और 1 लाख रुपये के जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।
  • एक उपयुक्त अदालत, आरोपी व्यक्ति को “धर्मांतरण के शिकार” व्यक्ति को राशि 5 लाख रुपये तक के मुआवजे का भुगतान करने का आदेश दे सकती है, और आरोपी को कानून के तहत निर्धारित जुर्माने के अलावा, इस मुआवजे का भी भुगतान करना होगा।
  • फैमिली कोर्ट: विधेयक में स्वेच्छा से धर्मांतरण करने के लिए एक लंबी प्रक्रिया निर्धारित की गयी है, और यह प्रक्रिया अंतर-धार्मिक विवाहों पर भी लागू होगी। कोई भी विवाह जो एक धर्म के पुरुष द्वारा दूसरे धर्म की महिला के साथ ‘गैरकानूनी धर्मांतरण’ या ‘किसी अन्य उद्देश्य’ के लिए हुआ है, ‘परिवार न्यायालय’ द्वारा अमान्य और शून्य घोषित किया जाएगा।
  • धर्म परिवर्तन की घोषणा: जो व्यक्ति किसी अन्य धर्म में परिवर्तित होना चाहते हैं, उन्हें कम से कम 30 दिन पहले एक निर्धारित प्रारूप में जिला मजिस्ट्रेट या अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट को एक सूचना देनी होगी।

‘धर्मांतरण रोधी क़ानून’ पारित करने वाले अन्य राज्य:

  • हरियाणा
  • अरुणाचल प्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • गुजरात
  • हिमाचल प्रदेश
  • झारखंड
  • मध्य प्रदेश
  • उड़ीसा
  • उत्तर प्रदेश
  • उत्तराखंड

संवैधानिक संरक्षोपाय:

अनुच्छेद 25: के तहत सभी व्यक्तियों को अंतःकरण की स्वतंत्रता का और अपनी पसंद के धर्म को अबाध रूप से मानने, आचरण करने, प्रचार करने, और किसी भी धर्म का पालन न करने के अधिकार की गारंटी दी गयी है।

हालांकि, कोई भी व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति पर अपने धार्मिक विश्वासों को नहीं थोपेगा और परिणामस्वरूप, किसी भी व्यक्ति को उसकी इच्छा के विरुद्ध किसी भी धर्म का पालन करने के लिए विवश  नहीं किया जाएगा।

योग्यता के आधार पर प्रतिस्पर्धा करने वालों के हिस्से में EWS कोटा द्वारा कटौती

संदर्भ: EWS कोटा मामले पर सुनवाई कर रही सुप्रीम कोर्ट ने एक संवैधानिक पीठ ने केंद्र सरकार से पूछा है, कि, क्या सरकार ने सामान्य वर्ग से ‘आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों’ (EWS) के लिए 10% कोटा तय करके सरकारी संस्थानों में नौकरियों और सीटों के लिए प्रतिस्पर्धा करने वाले उम्मीदवारों के अवसरों को “कम” कर दिया है?

सुप्रीम कोर्ट द्वारा की गयी महत्वपूर्ण टिप्पणियां:

  • भारत के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में गठित पांच-न्यायाधीशों की संवैधानिक पीठ ने कहा है कि सामान्य श्रेणी में 50% शैक्षणिक सीटें और नौकरियां, अन्य पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अगड़े वर्गों की क्रीमी लेयर सहित ‘सभी के लिए खुली’ हैं।
  • संवैधानिक पीठ ने कहा है, कि सामान्य वर्ग के ‘गरीबी रेखा से नीचे’ रहने वालों की संख्या, कुल सामान्य आबादी का मात्र एक-छठवां हिस्सा है।

सरकार का उत्तर:

  • केंद्र सरकार ने जबाव देते हुए कहा है, कि EWS कोटा पिछड़े वर्गों के लिए पहले से उपलब्ध 50% जाति-आधारित कोटा में “अनुवृद्धि” नहीं है।
  • इसे “सामान्य, खुली या गैर-आरक्षित श्रेणी” में शेष 50% सीटों से काट दिया गया था।

 

भारतीय अर्थव्यवस्था की “इतनी युग्मित नहीं” प्रकृति

संदर्भ: वैश्विक रेटिंग एजेंसी ‘एस एंड पी’ (S&P) ने कहा कि भले ही ‘अमेरिका’ और ‘यूरोजोन’ मंदी की ओर बढ़ रहे हैं, भारत को वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ अपनी अर्थव्यवस्था की “कम-युग्मित” (not so coupled) प्रकृति को देखते हुए, मंदी के प्रभाव का सामना करने की संभावना नहीं है।

आंशिक पूंजी खाता परिवर्तनीयता, प्रबंधित मुद्रा दर और व्यापार प्रतिबंधों के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था विश्व अर्थव्यवस्था में पूरी तरह से एकीकृत नहीं है।

भारतीय अर्थव्यवस्था के लाभ:

  • बड़ी घरेलू मांग
  • पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार
  • स्वस्थ राजकोषीय तुलन पत्र

 

सौर सेल निर्माण के लिए ‘पीएलआई’ योजना

संदर्भ: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने, हाल ही में, चीन निर्मित पैनलों पर उद्योग की निर्भरता को कम करने के लिए ‘घरेलू सौर सेल मॉड्यूल’ के निर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए 19,500 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी है।

  • यह मंजूरी, राष्ट्रीय उच्च दक्षता-युक्त सौर पीवी मॉड्यूल कार्यक्रम’ के तहत दी गयी है।
  • इस उत्पादन-संबद्ध प्रोत्साहन (पीएलआई) का वितरण फर्मों द्वारा अपनी विनिर्माण इकाइयां स्थापित करने के बाद पांच वर्षों के लिए किया जाएगा।

नोडल निकाय: नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय

फ़ायदे:

  • लगभग 2 लाख प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होगा।
  • आयात पर बचत।
  • MSMEs को प्रोत्साहन।
  • अक्षय स्रोत के माध्यम से सुरक्षित ऊर्जा सुरक्षा।

‘उत्पादन-संबद्ध प्रोत्साहन योजना (PLI Scheme):

2020 में शुरू की गई।

  • PLI योजना के तहत, केंद्र सरकार द्वारा वृद्धिशील उत्पादन पर प्रोत्साहन देकर पात्र निर्माताओं को सब्सिडी प्रदान की जाएगी।
  • संयंत्र, मशीनरी, उपकरण और सिविल कार्यों में 300 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश करने वाली कंपनियों को अपने टर्नओवर का 15 प्रतिशत प्रोत्साहन मिलेगा। इस टर्नओवर को निवेश करने तीसरे वर्ष में 600 करोड़ रुपये होना चाहिए।
  • 100 करोड़ रुपये से 300 करोड़ रुपये के बीच निवेश करने वाली कंपनियां भी शुल्क वापसी और प्रोत्साहन (उनके कारोबार के 15 प्रतिशत से कम) प्राप्त करने की पात्र होंगी।

अब तक, सरकार ने ऑटो, इलेक्ट्रॉनिक्स, दूरसंचार, फार्मा, सौर, धातु और खनन, कपड़ा, सफेद सामान, ड्रोन और उन्नत रसायन सेल बैटरी सहित 14 क्षेत्रों के लिए पीएलआई योजनाओं की घोषणा की है।

सम्बंधित खबर:

भारत में सेमीकंडक्टर्स और डिस्प्ले मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम के विकास के लिए कार्यक्रम में संशोधन: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सेमीकंडक्टर, डिस्प्ले और कंपाउंड सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन इकाइयों की स्थापना के लिए परियोजना लागत के 50% के एक समान प्रोत्साहन को मंजूरी दी है।

 

 

धर्मशाला घोषणा

संदर्भ: राज्य पर्यटन मंत्रियों के राष्ट्रीय सम्मेलन में  “संधारणीय और जिम्मेदार पर्यटन” विकसित करने, और भारत को “2047 तक पर्यटन क्षेत्र में वैश्विक नेता” के रूप में स्थान दिलाने के लिए “धर्मशाला घोषणा” (Dharamshala Declaration) को अपनाया गया है।

वस्तुस्थिति:

  • विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum-WEF) के नवीनतम ‘यात्रा और पर्यटन विकास सूचकांक’ में भारत 117 देशों की सूची में 54वें स्थान पर है। वर्ष 2019 में इसका स्थान 46वां था।
  • ‘यात्रा और पर्यटन’ का वर्तमान योगदान भारतीय सकल घरेलू उत्पाद का 6.8% है।
  • यह क्षेत्र 39 मिलियन से अधिक नौकरियां पैदा करता है।

सरकार द्वारा उठाए गए कदम:

  • मसौदा राष्ट्रीय पर्यटन नीति: 2047 में इस क्षेत्र द्वारा 1 ट्रिलियन अमरीकी डालर प्राप्त करने का लक्ष्य।
  • पर्यटन मंत्रालय: स्थायी पर्यटन और जिम्मेदार यात्री अभियान के लिए राष्ट्रीय रणनीति।
  • योजनाएं: प्रसाद, निधि 2.0, स्वदेश दर्शन आदि।

ग्रीन इवेंट टूल (GET)

संदर्भ: UNFCC, UNEP और गल्फ ऑर्गनाइजेशन फॉर रिसर्च एंड डेवलपमेंट (GORD) ने जलवायु पर विभिन्न घटनाओं के नकारात्मक प्रभावों को कम करने के लिए कार्यों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से ग्रीन इवेंट टूल (GET) का अनावरण किया है।

  • ‘ग्रीन इवेंट टूल’ योजना के चरणों में ही किसी भी नियोजित घटना के लिए कार्बन पदचिह्न की गणना करने में मदद करेगा और पदचिह्न को कम करने के साथ-साथ अपरिहार्य लोगों के लिए कार्बन क्रेडिट का सुझाव देने के लिए समाधान की सिफारिश करेगा।
  • इसे COP26 (पिछले साल ग्लासगो) में पहला प्रस्तावित किया गया था

 

जैव अपघटक कैप्सूल

संदर्भ: दिल्ली सरकार द्वारा पराली जलाने पर अंकुश लगाने के लिए ‘जैव अपघटक कैप्सूल’ / ‘बायो-डीकंपोजर कैप्सूल’ (Bio-Decomposer Capsules) को छोड़ा जाएगा।

कैप्सूल के बारे में:

  • ‘बायो-डीकंपोजर कैप्सूल’ 15-20 दिनों में, पराली से खाद बनने में तीव्रता लाएगा।
  • इसमें वायवीय और अवायवीय स्थितियों के तहत अपघटन की प्रक्रिया को तेज करते हुए, फंगल बीजाणु के बैक्टीरिया और कोशिका द्रव्यमान को विघटित करने का एक निष्क्रिय रूप शामिल है।
  • यह कैप्सूल भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) द्वारा विकसित किए गए हैं।

‘पराली दहन’ या ‘पराली जलाना (stubble Burning) क्या है?

किसानों द्वारा नवंबर में गेहूं की बुवाई के लिए खेत तैयार करने के दौरान ‘पराली दहन’ या पराली जलाना, एक आम बात है, क्योंकि धान की कटाई और गेहूं की बुवाई के बीच बहुत कम समय बचता है।

प्रभाव: पराली जलाने से हानिकारक गैसों जैसे कार्बन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड के साथ-साथ पार्टिकुलेट मैटर का उत्सर्जन होता है।

पराली जलाने के फायदे:

  • इससे खेत, जल्दी साफ हो जाता है और यह सबसे सस्ता विकल्प है।
  • खरपतवार नाशकों सहित खरपतवारों को नष्ट हो जाते हैं।
  • सुंडिया और अन्य कीट मर जाते हैं।
  • नाइट्रोजन बंध दुर्बल हो जाते हैं।

पराली जलाने के प्रभाव:

  • प्रदूषण: खुले में पराली जलाने से वातावरण में बड़ी मात्रा में जहरीले प्रदूषक उत्सर्जित होते हैं जिनमें मीथेन (CH4), कार्बन मोनोऑक्साइड (CO), वाष्पशील कार्बनिक यौगिक (VOC) और कार्सिनोजेनिक पॉलीसाइक्लिक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन जैसी हानिकारक गैसें होती हैं। अंततः ये स्मॉग का कारण बन जाते हैं।
  • मृदा उर्वरता: पराली को खेत में जलाने से मिट्टी के पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं, जिससे यह कम उपजाऊ हो जाती है।
  • ऊष्मा का प्रवेश: पराली जलाने से उत्पन्न गर्मी मिट्टी में प्रवेश करती है, जिससे जमीन में नमी और लाभकारी जीवाणु नष्ट हो जाते हैं।

सरकार द्वारा उठाए गए कदम:

  • पराली जलाने को आईपीसी और वायु एवं प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम (1981) के तहत अपराध बनाया गया है।
  • फसल अवशेष प्रबंधन पर वर्ष 2014 की राष्ट्रीय नीति।
  • मशीनों को बढ़ावा देना- रोटावेटर, हैप्पी सीडर, पशु आहार में पराली का उपयोग और बायो-एथेनॉल।

हाइब्रिड प्रणोदन प्रणाली

संदर्भ: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने एक हाइब्रिड मोटर का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है, जो आगामी लॉन्च वाहनों के लिए एक नई प्रणोदन प्रणाली का मार्ग प्रशस्त करेगा।

‘सिस्टम’ के बारे में:

  • ठोस-ठोस या तरल-तरल संयोजनों के विपरीत, एक हाइब्रिड मोटर ठोस ईंधन और तरल ऑक्सीकारक का उपयोग करती है।
  • मोटर में हाइड्रॉक्सिल-टर्मिनेटेड पॉलीब्यूटाडाइन (HTPB) को ईंधन के रूप में और तरल ऑक्सीजन (LOX) को ऑक्सीडाइज़र के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
  • तरल पदार्थों का उपयोग थ्रॉटलिंग (ईंधन की विनियमित आपूर्ति) की सुविधा देता है, और LOX की प्रवाह दर पर नियंत्रण फिर से शुरू करने की क्षमता को सक्षम बनाता है।
  • यह स्केलेबल और स्टैकेबल है, संभावित रूप से आगामी लॉन्च वाहनों के लिए एक नई प्रणोदन प्रणाली का मार्ग प्रशस्त कर रहा है।
  • परीक्षण को इसरो के तरल प्रणोदन प्रणाली केंद्र (LPSC) द्वारा समर्थित किया गया था।

ई-सिम

संदर्भ: एप्पल का नया आईफोन 14 (iPhone 14) अमेरिका में पूरी तरह से ई-सिम (eSIM) पर निर्भर होगा। इसके बाद ‘ई-सिम’ फिर से चर्चा में आ गए हैं।

  • eSIM एक एम्बेडेड सिम होता है, जो मुख्य रूप से एक नियमित सिम कार्ड चिप के समान हार्डवेयर ही है, लेकिन अब एक घड़ी या स्मार्टफोन के मदरबोर्ड का स्थायी रूप से एम्बेडेड हिस्सा है।

 

  • eSIM, पहली बार एक दशक पहले 2012 में इंस्टाल किए गए थे, लेकिन इनके भविष्य के उपयोग के मामलों के बावजूद, अभी तक ‘भौतिक सिम’ को पूरी तरह से अप्रचलित नहीं बनाया गया है।

ई-सिम के फायदे:

  • मदरबोर्ड से जुड़ा होने से पुन: प्रोग्रामिंग की भी अनुमति मिलती है, जिससे उपयोगकर्ता भौतिक सिम कार्ड को बदले बिना ऑपरेटरों को स्विच कर सकते हैं।
  • सुविधा: आपके eSIM में कई सिम प्रोफाइल स्टोर करने की क्षमता का मतलब यह भी है कि आप प्रोफाइल के बीच आसानी से स्विच कर सकते हैं।
  • सुरक्षा: इसको डिवाइस से बाहर निकालने और किसी अन्य डिवाइस में उपयोग करने के लिए कोई भौतिक तत्व नहीं है।

ई-सिम के नुकसान:

  • आपात स्थिति: यदि आपका फोन काम करना बंद कर देता है, बैटरी खत्म हो जाती है या बस गिर जाती है और स्क्रीन फट जाती है, तो आपका संचार eSIM के साथ पूरी तरह से ठप हो जाता है।
  • बिना eSIM समर्थन वाले देशों में अनुपयोगी: आप उस देश में eSIM फोन का उपयोग नहीं कर सकते जहां दूरसंचार ऑपरेटर अभी तक तकनीक का समर्थन नहीं करते हैं।
  • यह केवल प्रीमियम फोन में उपलब्ध है: भारत में, eSIM समर्थन वर्तमान में Apple iPhones, और Google Pixel श्रृंखला जैसे अधिक महंगे उपकरणों पर उपलब्ध है।
  • दूरसंचार कंपनियों का अधिक नियंत्रण।

 

नक्सलवाद

संदर्भ: ऑपरेशन ऑक्टोपस, डबल बुल, थंडरस्टॉर्म और चक्रबंध का उपयोग करके बिहार राज्यों में वामपंथी उग्रवाद के केंद्र को साफ कर दिया गया है और झारखंड में बहुत कम कर दिया गया है।

‘नक्सलियों’ के बारे में:

नक्सली (Naxalites) कट्टरपंथी कम्युनिस्टों का एक समूह है, जो माओवादी राजनीतिक भावना और विचारधारा के समर्थक हैं। इसकी उत्पत्ति का स्रोत 1967 में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के विभाजन से लगाया जा सकता है। इस विभाजन के बाद भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) का गठन हुआ था।

वर्तमान स्थिति:

  • हिंसा से प्रभावित जिलों की संख्या 39 थी, वर्ष 2010 में यह संख्या 60 से थी।
  • ज्यादातर हिंसा से प्रभावित जिले छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में हैं।
  • हिंसा की घटनाएं, 2009 में 2,258 के उच्चतम स्तर से, घटकर 2021 में 509 हो गई हैं।
  • हिंसा के कारण मृत्यु दर में 85% की कमी आई है।

सरकारी नीति:

  • आतंकवाद और वामपंथी उग्रवाद के लिए “शून्य सहिष्णुता”।
  • माओवादियों को सफलतापूर्वक खदेड़कर पहली बार सुरक्षा बलों के स्थायी शिविर स्थापित किए गए हैं।
  • निधियों और नवीनतम उपकरणों के आवंटन में वृद्धि।
  • सॉफ्ट पुलिसिंग: हिंसा से बचने के लिए स्थानीय लोगों का विश्वास जीतना।