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[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 14 September 2022

विषयसूची

सामान्य अध्ययन-I

  1. आधुनिक दासता

 

सामान्य अध्ययन-II

  1. एक बेहतर किंतु विवादास्पद विधेयक

 

सामान्य अध्ययन-III

  1. CRISPR तकनीक

 

मुख्य परीक्षा संवर्धन हेतु पाठ्य सामग्री (नैतिकता/निबंध)

  1. केस स्टडी: कम्युनिटी वर्चुअल क्लास लर्निंग

 

प्रारंभिक परीक्षा हेतु तथ्य

  1. अरत्तुपुझा वेलायुधा पाणिक्कर
  2. जेल सांख्यिकी रिपोर्ट, 2021
  3. राष्ट्रीय स्वास्थ्य लेखा अनुमान (2018-19) जारी
  4. पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को सूची से बाहर
  5. ग्रामीण रोजगार योजना सामाजिक अंकेक्षण
  6. जीएसटी एक नवोदित संस्था, किंतु एक जीवंत मंच
  7. राज्यों में नीति आयोग जैसी संस्थाओं की परिकल्पना
  8. विंडफॉल टैक्स
  9. फिनटेक प्रोत्साहन योजना, 2022
  10. ईरान द्वारा भारत से तेल आयात फिर से शुरू करने हेतु आग्रह किए जाने की संभावना
  11. रबड़: केरल में विरोध प्रदर्शन
  12. विस्तारित वास्तविकता
  13. क्वांटम नेटवर्क
  14. सैन्य अभ्यास
  15. मानचित्र (चर्चा में)

 


सामान्य अध्ययनI


 

विषय: भारतीय समाज की मुख्य विशेषताएँ, भारत की विविधता।

आधुनिक दासता

संदर्भ: ‘द ग्लोबल एस्टीमेट्स ऑफ मॉडर्न स्लेवरी’ (The Global Estimates of Modern Slavery) शीर्षक से प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार- वर्ष 2021 में 50 मिलियन लोग ‘आधुनिक दासता / गुलामी’ (Modern slavery) में जी रहे थे।

यह रिपोर्ट ‘इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइजेशन’ (ILO), ‘इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर माइग्रेशन’ (IOM) और एक इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स ग्रुप ‘वॉक फ्री’ (Walk Free) द्वारा प्रकाशित की गयी है।

‘आधुनिक दासता’ के बारे में:

आधुनिक दासता (Modern slavery) दो प्रमुख घटकों से मिलकर बनती है – बलात् श्रम या बेगारी (Forced Labour) और बलात् विवाह (Forced Marriage)।

ये दोनों घटक, शोषण की उन स्थितियों को संदर्भित करते हैं जिसमे कोई व्यक्ति धमकियों, हिंसा, धोखा या धूर्तता, ताकत के दुरुपयोग या अन्य प्रकार की जबरदस्ती की वजह से किसी भी काम के लिए मना नहीं कर सकता है और न ही छोड़ सकता है।

बलात् श्रम या जबरन मज़दूरी कराना:

  • बलात् श्रम (Forced Labour) में, सभी कार्य या सेवा किसी व्यक्ति सजा का भय दिखाकर या डरा-धमाका कर करवाई जाती है। और यदि कोई व्यक्ति किसी भी कार्य या सेवा के लिए स्वेच्छा से नहीं करता है तो उसे भी ‘बलात् श्रम’ के तहत माना जाता है।
  • हाल के वर्षों में ‘जबरन श्रम’ में वृद्धि हुई है। बलात् श्रम में लोगों की संख्या में वृद्धि, पूरी तरह से निजी अर्थव्यवस्था में ‘बलात् श्रम’ – ‘बलात् व्यावसायिक यौन शोषण’ तथा अन्य क्षेत्रों में ‘जबरन श्रम’- दोनों से प्रेरित थी।
  • दुनिया का कोई भी क्षेत्र ‘बेगार’ (जबरन मजदूरी) से मुक्त नहीं है। वैश्विक रूप से ‘बेगार’ में लगे कुल व्यक्तियों अर्थात 1 मिलियन के आधे से अधिक व्यक्ति एशिया और प्रशांत क्षेत्र में पाए जाते हैं।
  • किसी भी देश की समृद्धि के बावजूद ‘जबरन श्रम’ एक चिंता का विषय है। आधे से अधिक ‘जबरन मजदूरी’ उच्च-मध्यम आय अथवा उच्च-आय वाले देशों में होती है।
  • यदि जनसंख्या को ध्यान में रखा जाए तो ‘कम आय वाले देशों’ में ‘जबरन श्रम’ सबसे अधिक होता है।
  • अधिकांश ‘जबरन श्रम’ निजी अर्थव्यवस्था में होता है।

बलात् विवाह:

  • जबरन विवाह या ज़बरदस्ती की शादी (Forced Marriage) एक जटिल और अत्यधिक लैंगिक भेदभाव वाली प्रथा है। हालांकि, कई बार पुरुषों और लड़कों को भी शादी करने के लिए मजबूर किया जाता है, लेकिन यह प्रथा मुख्यतः महिलाओं और लड़कियों को अधिक प्रभावित करती है। ‘जबरन विवाह’ दुनिया के हर क्षेत्र और हर जातीय, सांस्कृतिक और धार्मिक व्यवस्थाओं में में होते हैं।
  • अधिकाँश ‘जबरन विवाह’ की घटनाओं के लिए ‘परिवार के सदस्य’ ही जिम्मेदार होते हैं। जबरन विवाह की परिस्थितियों के बारे में रिपोर्ट करने वाले अधिकांश व्यक्तियों को उनके माता-पिता द्वारा शादी के लिए मजबूर किया गया था।

आधुनिक दासता को समाप्त करने हेतु सिफारिशें:

 

बलात् श्रम को समाप्त करने हेतु:

  • सामाजिक-आर्थिक भेद्यता या अरक्षितता (vulnerability)- जो कि काफी हद तक बलात श्रम का आधार होती है – को कम करने के लिए और श्रमिकों को बुनियादी आय सुरक्षा प्रदान करने हेतु प्रत्येक स्तर पर सभी कामगारों और उनके परिवारों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जानी चाहिए।
  • भर्ती और नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान कर्मचारियों को अपमानजनक और कपटपूर्ण प्रक्रियों से बचाने के लिए निष्पक्ष और नैतिक भर्ती को बढ़ावा देना चाहिए।
  • ‘जबरन श्रम’ के लिए प्रवासियों की भेद्यता और ‘जबरन श्रम’ के लिए तस्करी का समाधान करने की आवश्यकता है।
  • जबरन मजदूरी में फंसे बच्चों का समाधान किया जाए।
  • राज्य द्वारा आरोपित ‘जबरन श्रम’ को समाप्त किया जाए, यह बंधुआ मजदूरी के कुल मामलों में प्रति सात में से एक मामले के लिए जिम्मेदार है।
  • साझेदारी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग।

जबरन विवाह को समाप्त करने हेतु:

विधायी और नीतिगत प्रतिक्रियाओं में लिंग-संवेदनशील कानून, नीतियां, कार्यक्रम तथा लिंग-प्रतिक्रियाशील सामाजिक सुरक्षा तंत्र सहित बजट के साथ-साथ एक लिंग आधारित नजरिया होना चाहिए।

  • राष्ट्रीय कानूनों में पर्याप्त नागरिक और आपराधिक सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
  • जबरन विवाह में योगदान करने वाले अंतर्निहित सामाजिक-सांस्कृतिक मानदंडों और संरचनाओं को संबोधित किया जाए।
  • महिलाओं और लड़कियों को शिक्षा पूरी करने, आजीविका कमाने और विरासत में मिली संपत्ति का अवसर और क्षमता सुनिश्चित की जानी चाहिए, यह जबरन विवाह की भेद्यता को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • प्रवासियों, विशेषकर बच्चों की भेद्यता (अरक्षितता) को संबोधित किया जाए।
  • जबरन विवाह के जोखिम वाले प्रवासियों के लिए कानूनी पहचान पंजीकरण प्रक्रियाओं तक पहुंच उपलब्ध कराया जाना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

स्रोत: डाउन टू अर्थ, इंडियन एक्सप्रेस

 


सामान्य अध्ययनII


 

विषय: संसद और राज्य विधायिका- संरचना, कार्य, कार्य-संचालन, शक्तियाँ एवं विशेषाधिकार और इनसे उत्पन्न होने वाले विषय।

एक बेहतर किंतु विवादास्पद विधेयक

संदर्भ: केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय द्वारा ‘भारतीय बंदरगाह विधेयक 2022’ (Indian Ports Bill 2022) के मसौदे पर चार दौर का परामर्श किया जा रहा है। यह विधेयक ‘भारतीय बंदरगाह कानून, 1908’ को प्रतिस्थापित करेगा।

पृष्ठभूमि:

  • प्रमुख बंदरगाह (Major Ports): भारत के प्रमुख पत्तन या बंदरगाह संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत ‘संघ सूची’ में शामिक हैं और केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।
  • गैर-प्रमुख बंदरगाह (Non-Major Ports): ये ‘समवर्ती सूची’ में शामिल हैं और संबंधित राज्य सरकारों के अंतर्गत आते हैं, लेकिन केंद्र के पास अध्यारोही विधायी और कार्यकारी शक्तियां हैं।

2021 का मसौदा विधेयक:

  • ‘समुद्री राज्य विकास परिषद’ को सशक्त बनाना: विधेयक में प्रमुख और गैर-प्रमुख बंदरगाहों के विकास के लिए एक राष्ट्रीय योजना तैयार करने हेतु ‘समुद्री राज्य विकास परिषद’ (Maritime State Development Council – MSDC) को सशक्त बनाने का प्रस्ताव किया गया है।
  • जांच: यदि कोई बंदरगाह राष्ट्रीय योजना का उल्लंघन करता है तो इसके लिए उचित जांच का आदेश किए जाने का प्रावधान।
  • अधिकार प्राप्त केंद्र सरकार: राष्ट्रीय योजना के अनुरूप नहीं होने पर बंदरगाह को ‘गैर-परिचालन’ बनाने के लिए केंद्र सरकार को शक्ति दी गयी है।
  • दंड: विधेयक में बंदरगाह अधिकारियों, बंदरगाह अधिकारियों और अन्य व्यक्तियों द्वारा MSDC के निर्देशों का पालन न करने पर कारावास सहित दंड निर्धारित किया गया है।
  • निगरानी का प्रावधान।

2021 के मसौदा विधेयक से जुडी समस्याएं:

  • समुद्री राज्य विकास परिषद (MSDC): यह प्रमुख बंदरगाहों और गैर-प्रमुख बंदरगाहों के समन्वित विकास के लिए एक शीर्ष सलाहकार निकाय के रूप में कार्य करती है। पिछले 25 वर्षों में इसकी केवल 18 बैठकें हुई हैं।
  • MSDC को वैधानिक दर्जा: विधेयक के अध्याय II और अध्याय III में MSDC को वैधानिक दर्जा दिए जाने का प्रस्ताव किया गया है। MSDC जैसा निकाय आवश्यक है, लेकिन इसके कार्य की प्रकृति और परिमाण के लिए वैधानिक दर्जा देने या स्थायी निकाय बनाए जाने की आवश्यकता नहीं है।
  • समुद्री राज्य: आशंका है कि एक ‘वैधानिक-सह-स्थायी समुद्री राज्य विकास परिषद’ का वास्तविक उद्देश्य गैर-प्रमुख बंदरगाहों के विकास और प्रबंधन के लिए राज्यों की शक्तियों को कम करना है।
  • केंद्रीय योजना और निरीक्षक राज: 2021 के मसौदे में कई प्रावधान शामिल थे, जोकि केंद्रीय योजना और इंस्पेक्टर राज के समाजवादी-युग की गलतियों की पुनरावृत्ति थे।

2022 मसौदा विधेयक से जुड़े मुद्दे:

  • सांविधिक निकाय: इसमें समुद्री राज्य विकास परिषद (MSDC) को एक ‘वैधानिक-सह-स्थायी निकाय’ (statutory-cum-permanent body) के रूप में बरकरार रखा है।
  • विधेयक की धारा 10(c):: इसमें केंद्र सरकार को MSDC को कोई भी प्रशासनिक और वित्तीय कार्य सौंपने के लिए अधिकृत किया गया है।
  • केंद्र सरकार के पक्ष में: मसौदा विधेयक में MSDC की संरचना केंद्र सरकार के पक्ष में सुनिश्चित करने के लिए, परिषद् में भारत सरकार के पांच सचिव और एक संयुक्त सचिव और सदस्य के रूप में तटीय केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासकों को शामिल किए जाने का प्रस्ताव किया गया है।

आवश्यकता:

  • MSDC से संबंधित मसौदा विधेयक के अध्याय II और अध्याय III को समाप्त कर दिया जाए और MSDC एक ‘शीर्ष सलाहकार निकाय’ बना रहे।
  • बंदरगाह सुधार रणनीतियाँ: दुनिया भर में बंदरगाह सुधार रणनीतियों को ध्यान में रखते हुए, केंद्र को अधिक विकेंद्रीकरण, विनियमन, निगमीकरण और निजी क्षेत्र की भागीदारी की दिशा में काम करना चाहिए।
  • समुद्री राज्यों के लिए इक्विटी हिस्सेदारी: केंद्र सरकार को संबंधित समुद्री राज्यों और नगर नगर निगमों को निगमीकृत प्रमुख बंदरगाहों में पर्याप्त इक्विटी हिस्सेदारी देनी चाहिए।
  • उच्च कार्य: केंद्र सरकार को सीमा नियंत्रण, प्रतिस्पर्धा नीति, बंदरगाह सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और आंतरिक संपर्क के केवल ‘उच्च कार्यों’ की देखरेख तक ही सीमित रखना चाहिए।

भारतीय बंदरगाहों की स्थिति:

  • भारतीय बंदरगाह पहले ही अपनी क्षमता के चरम पर पहुंच चुके हैं और अब भारत को अन्य नए बंदरगाहों की जरूरत है।
  • 1993-94 और 2021-22 के बीच गैर-प्रमुख बंदरगाहों के कुल कार्गो का हिस्सा 8% से बढ़कर 45% हो गया।
  • सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP): समुद्री राज्यों द्वारा लगभग पूरी तरह से सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) के आधार पर गैर-प्रमुख बंदरगाहों का विकास किया गया है। उदाहरण के लिए गुजरात के ‘पीपावाव’ में भारत का पहला निजी बंदरगाह।
  • विश्व बैंक की रिपोर्ट (2011): ‘भारतीय बंदरगाह क्षेत्र विनियमन’ के अनुसार, गैर-प्रमुख बंदरगाहों को “अधिक व्यवसाय-उन्मुख, ग्राहक अनुकूल, सस्ता और सामान्य रूप से अधिक कुशल” माना जाता है। केंद्र सरकार द्वारा पोर्ट ट्रस्टों, निजी टर्मिनल ऑपरेटरों और निवेशकों पर अनावश्यक नियामक और वित्तीय बोझ लगाया जाता है।

इंस्टा लिंक्स:

ड्राफ्ट इंडियन पोर्ट बिल 2022

सागरमाला परियोजना

मेंस लिंक:

लंबे समय तक चलने वाली बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में निजी सार्वजनिक भागीदारी व्यवस्था, भविष्य में अस्थिर देनदारियों को कैसे स्थानांतरित कर सकती है। यह सुनिश्चित करने के लिए क्या व्यवस्था करने की आवश्यकता है कि आने वाली पीढ़ियों की क्षमताओं से समझौता न हो? चर्चा कीजिए। (यूपीएससी 2014)

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययनIII


 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

CRISPR तकनीक

संदर्भ: पिछले तीन वर्षों में, लगभग असीमित क्षमता वाली जीन-संपादन तकनीक ने नैदानिक ​​परीक्षणों में निर्दोष परिणाम दिए हैं। भारत सरकार द्वारा ने ‘सिकल सेल एनीमिया’ अर्थात ‘लाल रुधिर कोशिका रक्ताल्पता’ (sickle cell anemia) को ठीक करने के लिए CRISPR पद्धति विकसित करने के लिए 5 साल की परियोजना को मंजूरी दी गयी है।

जीनोम एडिटिंग (जिसे जीन एडिटिंग (Genome Editing) भी कहा जाता है) प्रौद्योगिकियां, आनुवंशिक सामग्री को जीनोम में विशेष स्थानों पर जोड़ने, हटाने या बदलने की अनुमति देती हैं। जीनोम एडिटिंग के लिए कई पद्धतियाँ विकसित की गयी हैं।

CRISPR पर किए जा रहे कार्य:

CRISPR जीन एडिटिंग, एक जेनेटिक इंजीनियरिंग तकनीक है जिसके द्वारा जीवित जीवों के जीनोम को संशोधित किया जा सकता है।

  • इस पद्धति की तुलना अक्सर सामान्य कंप्यूटर प्रोग्रामों में ‘कट-कॉपी-पेस्ट’, या ‘ढूंढें-बदलें’ (find-replace) प्रकार्यों से की जाती है।
  • CRISPR जीन एडिटिंग में, डीएनए अनुक्रम में एक खराब भाग, जो बीमारी या विकार का कारण होता है, उसे दूंढ कर काट दिया दिया जाता है और उसे हटाकर एक ‘सही’ अनुक्रम के साथ बदल दिया जाता है।

 

जीनोम एडिटिंग प्रौद्योगिकियों के संभावित अनुप्रयोग:

रोगों की बेहतर समझ: जीनोम एडिटिंग के अधिकांश उपयोग वैज्ञानिक अनुसंधान, जैसेकि, मानव रोग के मॉडलों की जांच के लिए किए गए हैं।

  • थैलेसीमिया या ‘सिकल सेल एनीमिया’ जैसी बीमारियों के लिए CRISPR का उपयोग करने वाले कई ‘चिकित्सीय उपायों’ का ‘नैदानिक ​​परीक्षण’ (clinical trials) किया जा रहा है।
  • इससे गरीब देशों में कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की वजह से होने वाली अधिकांश परिहार्य मौतों से बच जा सकेगा।

खतरों की पहचान करना:

  • जीनोम संपादन (Genome Editing) का उपयोग ऐसे उपकरणों का एक समूह विकसित करने के लिए किया गया है, वैज्ञानिकों द्वारा जिनका उपयोग नए और मौजूदा रोगजनकों को बेहतर ढंग से समझने के लिए किया जा सकता है।
  • इससे बीमारियों के इलाज को विकसित करने में और गरीब देशों को बीमारियों के आने वाले खतरों के लिए तैयार रहने में मदद मिल सकती है।

नए उपचार विकसित करना:

  • नए उपचारों के विकास और उपयोग को प्रभावित करने के लिए जीनोम एडिटिंग की क्षमता जबरदस्त है।
  • जीनोम-संपादन तकनीकों का पारंपरिक दवाओं की तुलना में एक बड़ा फायदा यह है कि इसमें रोग के आनुवंशिक आधार को लक्षित किया जा सकता है। यह तकनीक जानलेवा बीमारियों के इलाज की लागत को काफी कम कर सकती है।

आनुवंशिक रोगों का उपचार:

  • आनुवंशिक रोगों (genetic diseases) के क्षेत्र में ‘जीनोम एडिटिंग’ के लिए अपार संभावनाएं हैं।
  • नाइजीरिया, सूडान जैसे गरीब देशों और भारत के आदिवासियों में ‘सिकल सेल एनीमिया’, थैलेसीमिया आदि बीमारियों के मामलों में वृद्धि देखी गई है।

अन्य संभावित उपयोग: जीनोम-संपादन प्रौद्योगिकियों के, मानव शरीर के बाहर वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए कई प्रासंगिक अनुप्रयोग भी किए जा सकते हैं।

  • ‘जीन ड्राइव’ में रोगवाहकों को नियंत्रित करने और कुछ प्रकोपों ​​​​की संभावना को कम करने की क्षमता होती है, जिसका प्रभाव गरीब देशों द्वारा अधिक महसूस किया जाता है। यह या तो वेक्टर को पूरी तरह से समाप्त करके या किसी विशेष एजेंट को ले जाने की क्षमता को समाप्त करने हेतु वेक्टर के जीनोम को संपादित करके मदद कर सकता है।

Current Affairs 

सरकार द्वारा उठाए गए कदम:

2021 में भारत ने ‘सिकल सेल एनीमिया’ को ठीक करने के लिए इस तकनीक को विकसित करने के लिए पांच साल की परियोजना को मंजूरी दी थी। यह बीमारी मुख्य रूप से देश की आदिवासी आबादी को प्रभावित करती है।

नैतिक दुविधा:

  • डिज़ाइनर बेबी: 2018 में, एक चीनी शोधकर्ता ने खुलासा किया कि उसने एचआईवी के संक्रमण को रोकने के लिए एक मानव भ्रूण के जीन में परिवर्तन किया है। यह ‘डिजाइनर बेबी’ (Designer Baby) बनाने का पहला प्रलेखित मामला था, और इसने वैज्ञानिक समुदाय में व्यापक चिंता पैदा की।
  • भ्रूण में किए गए परिवर्तन आगामी कई पीढ़ियों तक बने रहते हैं। इस प्रकार, यह तकनीक अतिमानवों (superhumans) का एक समुदाय बना सकती है। चिकित्सीय हस्तक्षेप के मामले में, आनुवंशिक अनुक्रम में परिवर्तन, केवल व्यक्ति के शरीर में ही रहता है और संतान को पारित नहीं किया जाता है।

इंस्टा लिंक:

CRISPR-Cas9 क्या है?

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


मुख्य परीक्षा संवर्धन हेतु पाठ्य सामग्री (नैतिकता/मुख्य)


केस स्टडी: कम्युनिटी वर्चुअल क्लास लर्निंग

भारत के सबसे बड़े बाल-केंद्रित मानवीय संगठन ‘वर्ल्ड विजन इंडिया’ ने ‘ग्लोबल इंडियन इंटरनेशनल स्कूल’ (GIIS), सिंगापुर के साथ मिलकर एक कार्यक्रम शुरू किया है। जिसके तहत, प्रायोगिक तौर पर आगरा तथा चेन्नई के दो स्कूलों से कक्षा 4 और 5 के 8-13 वर्ष की आयु के 20 छात्रों के लिए ‘सामुदायिक वर्चुअल कक्षा अध्ययन’ (Community Virtual Class Learning – CVCL) को संचालित किया जा रहा है।

  • ज़ूम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से और उचित सामाजिक दूरी और सरकार द्वारा लागू कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन करते हुए, लैपटॉप और प्रोजेक्टर का उपयोग करके स्कूल प्रबंधन के सहयोग से कक्षाएं शुरू की गईं है।
  • ‘ग्लोबल इंडियन इंटरनेशनल स्कूल’ में पढ़ने वाले कक्षा 11 और 12 के छात्रों ने CVCL को आसान बनाया और छात्रों के लिए अंग्रेजी और गणित विषयों को पढ़ाया।
  • इस कार्यक्रम की शुरुआत के तीन महीने के बाद के परिणाम और प्रभाव काफी प्रगतिशील थे। परिणामों में अंग्रेजी भाषा को पढ़ और समझ सकने वाले छात्रों में 70 प्रतिशत की वृद्धि का प्रदर्शन किया। इनमे से लगभग 35 प्रतिशत छात्र अखबार पढ़ने में सक्षम थे और 70 प्रतिशत ने साधारण अंकगणित में अपनी दक्षता में सुधार किया।

इस केस स्टडी का उपयोग निबंध/शासन में यह दिखाने के लिए किया जा सकता है कि कैसे प्रौद्योगिकी को छात्रों की आवश्यकताओं के अनुसार अनुकूलित किया जा सकता है।

 

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


अरत्तुपुझा वेलायुधा पाणिक्कर

 

संदर्भ: हाल ही में रिलीज़ हुई मलयालम फिल्म ‘पथोनपथम नूटंडु’ (‘उन्नीसवीं सदी’), 19वीं शताब्दी के केरल में एझावा समुदाय के एक समाज सुधारक ‘अरत्तुपुझा वेलायुधा पाणिक्कर’ (Arattupuzha Velayudha Panicker) के जीवन पर आधारित है।

 

‘अरत्तुपुझा वेलायुधा पाणिक्कर’ के बारे में:

पाणिक्कर, केरल राज्य में ‘समाज सुधार आंदोलन’ की सबसे प्रभावशाली शख्सियतों में से एक थे। उन्होंने उच्च जातियों या ‘सवर्णों’ के वर्चस्व को चुनौती दी और पुरुषों और महिलाओं दोनों के जीवन में बदलाव लामे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उनका योगदान:

  • अचिप्पुडव समरम हमला (Achippudava Samaram strike) – उत्पीड़ित समूहों से संबंधित महिलाओं को घुटनों से नीचे तक फैला हुआ निचला वस्त्र पहनने का अधिकार अर्जित करने के लिए।
  • एतप्पु समरम (Ethappu Samaram) – पिछड़ी जातियों की महिलाओं द्वारा शरीर के ऊपरी भाग के कपड़े पहनने के अधिकार के लिए संघर्ष।
  • मुक्कुथी समरम (Mukkuthi Samaram) – निचली जाति की महिलाओं को ‘मुक्कुथी’ या नाक की अंगूठी, और अन्य सोने के आभूषण पहनने के अधिकार के लिए।

इन संघर्षों ने सामाजिक व्यवस्था को चुनौती देने और सार्वजनिक जीवन में समाज के निचले तबके की महिलाओं की गरिमा को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

 

अन्य योगदान:

  • ‘अरत्तुपुझा वेलायुधा पाणिक्कर’ ने 1861 में एझावा समुदाय के लिए पहला कथकली योगम (शास्त्रीय नृत्य रूप कथकली के लिए क्षेत्र-आधारित स्कूल) भी स्थापित किया, जिसके कारण एझावा और अन्य पिछड़े समुदायों द्वारा कथकली प्रदर्शन किया गया।
  • उन्हें 1869 में त्रावणकोर के तत्कालीन राजा द्वारा ‘पाणिक्कर’ की उपाधि दी गई थी।
  • 2005 में, केरल सरकार ने तिरुवनंतपुरम में ‘अरत्तुपुझा वेलायुधा पाणिक्कर रिसर्च फाउंडेशन और सांस्कृतिक केंद्र’ का उद्घाटन किया।

 

इस फिल्म में अन्य समाज सुधारक:

नांगेली (Nangeli) एक एझावा महिला थी जिसके बारे में कहा जाता है कि वह 19वीं शताब्दी में अलाप्पुझा में रहती थी। उसने कथित तौर पर निचली जातियों की महिलाओं पर त्रावणकोर साम्राज्य द्वारा लगाए गए ‘स्तन कर’  (Breast Tax) का विरोध करने के लिए अपने स्तन काट दिए।

जेल सांख्यिकी रिपोर्ट, 2021

संदर्भ: हाल ही में, ‘राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो’ (NCRB) द्वारा ‘भारत में जेल सांख्यिकी रिपोर्ट, 2021’ (Prison Statistics in India Report, 2021) जारी की गयी।

रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष:

  • भीड़भाड़ वाली जेलें: 130% से अधिक कैदी
  • विचाराधीन कैदी: 77%
  • अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/ओबीसी: 67% से अधिक कैदी इन समुदायों से संबंधित हैं।
  • सबसे अधिक संख्या में विचाराधीन कैदी: उत्तर प्रदेश> बिहार> महाराष्ट्र
  • ट्रांसजेंडर: इनके लिए दिल्ली सहित अधिकांश जेलों में अलग से सुविधाएं नहीं हैं।

 

राष्ट्रीय स्वास्थ्य लेखा अनुमान (2018-19) जारी

संदर्भ: हाल ही में, ‘स्वास्थ्य लेखा प्रणाली’ 2011 (डब्ल्यूएचओ द्वारा) के आधार पर, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) द्वारा छठे राष्ट्रीय स्वास्थ्य लेखा अनुमान (2018-19) जारी किए गए।

कुछ महत्वपूर्ण निष्कर्ष:

 

  • कुल स्वास्थ्य व्यय (सरकारी +निजी)/जीडीपी: सकल घरेलू उत्पाद का 3.16%। 2013-14 के बाद से सरकार द्वारा किया जाने वाला प्रति व्यक्ति स्वास्थ्य खर्च 74 फीसदी बढ़ा।
  • सरकारी व्यय: कुल स्वास्थ्य व्यय का 40.6%। कुल स्वास्थ्य खर्च में सरकार की हिस्सेदारी 28.6 फीसदी (2013-14) से बढ़कर 40.6 फीसदी (2018-19) हुई।
  • जेब से खर्च 48.2%: कुल स्वास्थ्य खर्च की तुलना में प्रति व्यक्ति “आउट ऑफ पॉकेट” खर्च (ओओपीई) में 16 प्रतिशत बिन्दु तक गिरावट आई।
  • सरकार द्वारा प्रायोजित स्वास्थ्य बीमा खर्च 2013-14 से 167 फीसदी बढ़ा।

 

पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को सूची से बाहर

संदर्भ: हाल ही में, निर्वाचन आयोग ने 86 ‘पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों’ (Registered Unrecognized Political Parties – RUPPs) को “गैर-मौजूद” पाया और 253 अन्य को “निष्क्रिय” घोषित करने का आदेश दिया।

महत्वपूर्ण बिंदु:

गैर-मौजूदगी (Non-existence): चुनाव आयोग के अनुसार- जिन पार्टियों को पंजीकृत पार्टियों की सूची से हटा दिया गया था, वे संबंधित ‘मुख्य कार्यकारी अधिकारियों’ द्वारा भौतिक जांच के बाद, या आयोग द्वारा भेजे गए किसी पत्र अथवा नोटिस को स्वीकार नहीं किए जाने की रिपोर्ट के आधार पर ‘गैर-मौजूद’ पायी गयी थी।

‘निर्वाचन प्रतीक (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968 (Election Symbols (Reservation and Allotment) Order, 1968) के अनुसार: निष्क्रिय घोषित किए गए दल, चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968 के तहत लाभ प्राप्त करने के पात्र नहीं होंगे। इस आदेश के द्वारा पार्टियों को अपने उम्मीदवारों के लिए एक सामूहिक प्रतीक के लिए आवेदन करने की अनुमति दी गयी है।

पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल:

  • ‘पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल’ ( RUPPs), नए पंजीकृत दल होते है, या वे दल होते हैं जिनको एक राज्य पार्टी बनने के लिए विधानसभा या आम चुनावों में ‘पर्याप्त प्रतिशत वोट’ हासिल नहीं किए हैं। या
  • जिन दलों ने पंजीकृत होने के बाद से कभी चुनाव नहीं लड़ा है उन्हें गैर-मान्यता प्राप्त दल माना जाता है।
  • इन दलों को ‘मान्यता प्राप्त पार्टियों’ को दी जाने वाली सभी सुविधाओं का लाभ नहीं मिलता है।

 

ग्रामीण रोजगार योजना सामाजिक अंकेक्षण

संदर्भ: केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय (MoRD) ने राज्यों से कहा है कि मनरेगा का ‘सामाजिक अंकेक्षण’ (social audit) करने में विफल रहने पर धनराशि पर रोक सहित कार्रवाई की जा सकती है।

वस्तुस्थिति:

  • ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार, इस वित्तीय वर्ष में नियोजित अंकेक्षण (ऑडिट) का केवल 14.29% पूरा किया गया है।
  • ‘मनरेगा अधिनियम’ सामाजिक अंकेक्षण (MGNREG Act Social audit): प्रत्येक सामाजिक लेखा परीक्षा इकाई, पिछले वर्ष में राज्य द्वारा किए गए मनरेगा व्यय के 0.5% के बराबर धनराशि की हकदार है।
  • इस ऑडिट में बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता जांच, मजदूरी में वित्तीय हेराफेरी और किसी भी प्रक्रियात्मक विचलन की जांच शामिल होती है।

संबंधित मुद्दे:

  • लेखापरीक्षक को भुगतान करने में असमर्थ: लेखा परीक्षा विभाग द्वारा केंद्र से कई बार मांग किए जाने के बाद राशि जमा की जाती है, जिसकी वजह से विभाग अपने लेखा परीक्षक को एक वर्ष से अधिक तक भुगतान करने में असमर्थ रहता है। उदाहरण: हिमाचल प्रदेश।
  • पूरी राशि का भुगतान नहीं: निधि आने पर भी, केंद्र सरकार द्वारा शायद ही कभी पूरी राशि का भुगतान किया जाता है।
  • बिहार: ‘बिहार सोशल ऑडिट यूनिट’ को अप्रैल 2020 से- दो साल से अधिक समय से- कोई धनराशि नहीं मिली है।
  • संबंधित सरकारों से ऋण: झारखंड, नागालैंड, तमिलनाडु, तेलंगाना और कर्नाटक में सामाजिक लेखा परीक्षा इकाइयों को अपने संचालन को बनाए रखने के लिए अपनी संबंधित राज्य सरकारों से ऋण लेने के लिए मजबूर किया गया था।

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम’ (MGNREGA) के बारे में:

  • मनरेगा (MGNREGA) को भारत सरकार द्वारा वर्ष 2005 में एक सामाजिक उपाय के रूप में प्रस्तुत किया गया था। जिसके अंतर्गत ‘काम करने के अधिकार’ (Right to Work) की गारंटी प्रदान की जाती है।
  • इस सामाजिक उपाय और श्रम कानून का मुख्य सिद्धांत यह है, कि स्थानीय सरकार को ग्रामीण भारत में न्यूनतम 100 दिनों का वैतनिक रोजगार प्रदान करना होगा ताकि ग्रामीण श्रमिकों के जीवन स्तर में वृद्धि की जा सके।

पात्रता:

  1. मनरेगा योजना का लाभ लेने के लिए भारत का नागरिक होना चाहिए।
  2. कार्य हेतु आवेदन करने के लिए व्यक्ति की आयु 18 वर्ष अथवा इससे अधिक होनी चाहिए।
  3. आवेदक के लिए किसी स्थानीय परिवार का हिस्सा होना चाहिए (अर्थात, आवेदन स्थानीय ग्राम पंचायत के माध्यम से किया जाना चाहिए)।
  4. आवेदक को स्वेच्छा से अकुशल श्रम के लिए तैयार होना चाहिए।

जीएसटी एक नवोदित संस्था, किंतु एक जीवंत मंच

संदर्भ: वित्त मंत्री के अनुसार, ‘वस्तु एवं सेवा कर परिषद’ (Goods and Services Tax Council) अभी भी एक नवोदित संस्था है अर्थात एक ऐसा संगठन है जो अपरिपक्व, अनुभवहीन या अविकसित है, लेकिन केंद्र और राज्यों के बीच गहन-अंतः क्रियाओं के लिए एक जीवंत मंच के रूप में कार्य करता है।

कार्य:

  • अनुच्छेद 279: ‘वस्तु एवं सेवा कर’(Goods and Services Tax – GST) से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्र और राज्यों को सिफारिशें करना, जैसे कि जीएसटी के अधीन या छूट दी जा सकने वाली वस्तुओं और सेवाओं, मॉडल जीएसटी कानून आदि।
  • यह जीएसटी के विभिन्न दर स्लैब पर भी निर्णय लेता है।

राज्यों में नीति आयोग जैसी संस्थाओं की परिकल्पना

संदर्भ: 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के ‘राष्ट्रीय दृष्टिकोण’ से राज्यों में नीति आयोग जैसी संस्थाएं बनाई जाएंगी।

उद्देश्य:

  • ‘व्यापार करने में सुगमता’ में सुधार
  • भूमि सुधार
  • बुनियादी ढांचे का विकास
  • ऋण प्रवाह और शहरीकरण।

वस्तुस्थिति:

  • कुछ राज्य जैसेकि कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और असम ने इस संबंध में पहले ही काम शुरू कर दिया है, जबकि महाराष्ट्र, गुजरात आदि राज्यों में जल्द ही काम शुरू होने की संभावना है।
  • स्टेट इंस्टीट्यूशन फॉर ट्रांसफॉर्मेशन (SIT) की अवधारणा: उच्च गुणवत्ता वाले विश्लेषणात्मक कार्य और नीति सिफारिशों को शुरू करने के लिए ‘एसआईटी’ में पेशेवरों के ‘पार्श्व प्रवेश’ (Lateral entry) को प्रोत्साहित किया जाएगा।

नीति आयोग:

नीति आयोग (राष्ट्रीय भारत परिवर्तन संस्था) सरकार के ‘थिंक टैंक’ के रूप में कार्य करता है। यह केन्द्रीय और राज्य स्तर पर सरकारों को नीति के प्रमुख तत्वों पर आधारित प्रासंगिक एवं तकनीकी सलाह प्रदान करता है।

वर्ष 2015 में ‘योजना आयोग’ के स्थान पर नीति आयोग (NITI Aayog) की स्थापना की गयी थी, जिसमें ‘बॉटम-अप’ दृष्टिकोण पर जोर दिया गया था। इसके माध्यम से ‘सहकारी संघवाद’ की भावना को प्रतिध्वनित करते हुए ‘अधिकतम शासन, न्यूनतम सरकार’ के दृष्टिकोण की परिकल्पना की गयी थी।

नीति आयोग की संरचना:

  • अध्यक्ष: प्रधानमंत्री
  • उपाध्यक्ष: प्रधानमंत्री द्वारा नियुक्त
  • संचालन परिषद: सभी राज्यों के मुख्यमंत्री और केंद्रशासित प्रदेशों के उपराज्यपाल।
  • क्षेत्रीय परिषद: विशिष्ट क्षेत्रीय मुद्दों को संबोधित करने के लिये प्रधानमंत्री या उसके द्वारा नामित व्यक्ति मुख्यमंत्रियों और उपराज्यपालों की बैठक की अध्यक्षता करता है।
  • तदर्थ सदस्यता: अग्रणी अनुसंधान संस्थानों से बारी-बारी से 2 पदेन सदस्य।
  • पदेन सदस्यता: प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय मंत्रिपरिषद के अधिकतम चार सदस्य।
  • मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO): भारत सरकार का सचिव जिसे प्रधानमंत्री द्वारा एक निश्चित कार्यकाल के लिए नियुक्त किया जाता है।
  • विशेष आमंत्रित सदस्य: प्रधानमंत्री द्वारा नामित विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ।

नीति आयोग के कार्य:

विंडफॉल टैक्स

संदर्भ: सरकार ने कुछ ‘तेल रिफाइनरों’ द्वारा कमाए गए “अभूतपूर्व लाभ” पर लगाम लगाने के तरीके के रूप में 1 जुलाई से लागू ‘अप्रत्याशित लाभ कर’ (windfall tax) का बचाव किया है। इन ‘तेल रिफाइनरों’ ने घरेलू आपूर्ति को प्रभावित करते हुए वैश्विक कीमतों में आसमान छूती कीमतों का लाभ उठाने के लिए ‘ईंधन का निर्यात’ करने का विकल्प चुना था।

विंडफॉल टैक्स’ क्या है?

विंडफॉल टैक्स (windfall tax), किसी विशेष कंपनी या उद्योग पर लगाए गए अचानक बड़े मुनाफे पर एक उच्च कर दर है।

यूनाइटेड स्टेट्स कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस (CRS) द्वारा ‘अप्रत्याशित लाभ’ (windfall) को “बिना किसी अतिरिक्त प्रयास या व्यय के, आय में अनार्जित, अप्रत्याशित लाभ” के रूप में परिभाषित किया गया है।

  • घरेलू उत्पादक घरेलू रिफाइनरियों को अंतरराष्ट्रीय समता कीमतों पर कच्चा तेल बेचते हैं, जिससे अप्रत्याशित लाभ होता है।
  • उदाहरण: ओएनजीसी ने मार्च तिमाही में बंपर मुनाफा दर्ज किया (जब अंतरराष्ट्रीय कीमतें 14 साल के उच्च स्तर 139 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गईं)।

विंडफॉल टैक्स लागू करने वाले अन्य देश: भारत के अलावा, यूनाइटेड किंगडम, इटली और जर्मनी या तो पहले ही ‘अप्रत्याशित लाभ कर’ लगा चुके हैं या ऐसा करने पर विचार कर रहे हैं।

वर्तमान में विभिन्न देशों द्वारा विंडफॉल टैक्स लगाए जाने का कारण:

तेल, गैस और कोयले की कीमतों में तेज वृद्धि देखी गई है। बढ़ती कीमतों का मतलब, ऊर्जा कंपनियों के लिए भारी और रिकॉर्ड मुनाफा है, जिसके परिणामस्वरूप बड़ी और छोटी अर्थव्यवस्थाओं में गैस और बिजली लिए भारी कीमतें चुकानी पड़ रही हैं।

 

फिनटेक प्रोत्साहन योजना, 2022

संदर्भ: अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण (IFSCA) ने फिनटेक गतिविधियों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए ‘फिनटेक प्रोत्साहन योजना, 2022’ (FINTECH incentive Scheme (FIS) 2022) योजना शुरू की है।

योजना के बारे में:

  • उद्देश्य: गिफ्ट सिटी (गुजरात) में विश्व स्तरीय फिनटेक केंद्रों की स्थापना को बढ़ावा देना।
  • प्रोत्साहन: स्टार्ट-अप के लिए अनुदान, अवधारणा का प्रमाण (proof of concept), सैंडबॉक्स, ग्रीन फिनटेक, एक्सेलेरेटर आदि।

फिनटेक:

फिनटेक, या वित्तीय प्रौद्योगिकी (Financial Technology – FinTech), वित्तीय सेवाओं के उपयोग और वितरण को बेहतर बनाने और स्वचालित करने के उद्देश्य हेतु कार्य करने वाली किसी भी नई तकनीक का वर्णन करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द है।

IFSC क्या है?

  • अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (IFSC) ,घरेलू अर्थव्यवस्था के अधिकार क्षेत्र से बाहर के ग्राहकों को सेवा प्रदान करता है।
  • यह केंद्र, देश की सीमाओं के पार वित्त, वित्तीय उत्पादों और सेवाओं के प्रवाह से निपटते हैं।
  • वर्तमान में, गिफ्ट-आईएफएससी भारत में पहला ‘अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र’ है।

 

ईरान द्वारा भारत से तेल आयात फिर से शुरू करने हेतु आग्रह किए जाने की संभावना

संदर्भ: समरकंद में आयोजित ‘शंघाई सहयोग संगठन’ (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान भारत के प्रधान मंत्री और ईरानी राष्ट्रपति के बीच एक बैठक के दौरान, ईरान ‘रियायती ईरानी स्वीट क्रूड’ की खरीद को पुनर्जीवित करने की दिशा में भारत को प्रेरित करेगा।

वार्ता के लिए प्रमुख मुद्दे:

  • ईरान से भारतीय तेल आयात की बहाली।
  • चाबहार बंदरगाह के भारत द्वारा संचालित ‘शहीद बेहेश्ती टर्मिनल’ के विकास में अगला कदम।
  • चाबहार बंदरगाह को अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे से जोड़ने की संभावना।
  • चाबहार टर्मिनल के प्रबंधन पर दीर्घकालिक समझौता।

चाबहार बंदरगाह:

  • चाबहार बंदरगाह (Chabahar Port) ओमान की खाड़ी में दक्षिणपूर्वी ईरान में स्थित है।
  • यह एकमात्र ईरानी बंदरगाह है जिसकी समुद्र तक सीधी पहुंच है।
  • यह ‘सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत’ में ऊर्जा संपन्न ईरान के दक्षिणी तट पर स्थित है।
  • चाबहार बंदरगाह को मध्य एशियाई देशों के साथ भारत, ईरान और अफगानिस्तान द्वारा व्यापार के सुनहरे अवसरों का प्रवेश द्वार माना जाता है।

रबड़: केरल में विरोध प्रदर्शन

संदर्भ: भारतीय बाजार में ‘प्राकृतिक रबर’ (natural rubber) की कीमत 16 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गई है। इससे केरल के रबर उत्पादकों में व्यापक असंतोष फैला हुआ है।

कीमतों में तेज गिरावट की वजह:

  • शून्य कोविड रणनीति के कारण चीन द्वारा मांग में कमी। चीन विश्व रबर उत्पादन का 42% खपत करता है।
  • रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण यूरोपीय ऊर्जा संकट।
  • उच्च मुद्रास्फीति।
  • उच्च घरेलू उत्पादन।
  • उच्च आयात: आइवरी कोस्ट से ‘ब्लॉक रबर’ और सुदूर पूर्व से मिश्रित रबर (compounded rubber) का उच्च आयात ।

वस्तुस्थिति:

  • भारत, वर्तमान में प्राकृतिक रबर का दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा उत्पादक है, जबकि यह विश्व स्तर पर इसका दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता भी बना हुआ है।
  • भारत की कुल प्राकृतिक रबर खपत का लगभग 40% वर्तमान में आयात के माध्यम से पूरा किया जाता है।
  • भारत के कुल प्राकृतिक रबर उत्पादन का लगभग 75% हिस्सा केरल में उत्पादित होता है।

प्राकृतिक रबर किसानों की मांगें:

  • आयात शुल्क में वृद्धि
  • केरल में पुनर्रोपण सब्सिडी में वृद्धि

 

 

विस्तारित वास्तविकता

संदर्भ: इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (MeitY) ने भारत में ‘विस्तारित वास्तविकता’ (Extended Reality – XR) प्रौद्योगिकी या XR प्रौद्योगिकी स्टार्ट-अप में तेजी लाने के लिए ‘मेटा’ (फेसबुक की मूल कंपनी) के साथ ‘सहयोग’ किया है।

XR क्या है?

विस्तारित वास्तविकता’ (Extended Reality ) या XR एक ‘अम्ब्रेला शब्द’ है जो सभी वास्तविक और आभासी संयुक्त वातावरण और कंप्यूटर प्रौद्योगिकी तथा धारणीय वस्तुओं द्वारा उत्पन्न ‘मानव-मशीन इंटरैक्शन’ का जिक्र करता है।

अनुप्रयोग:

  • प्रशिक्षण: सैनिकों, ड्राइविंग, सर्जनों आदि के लिए
  • परीक्षण: कॉर्पोरेट्स के लिए
  • पर्यटन: आभासी पर्यटन

संबंधित मुद्दे:

  • अभी तक कोई ठोस ‘डेटा गोपनीयता कानून’ नहीं है।
  • आम आदमी के लिए उपकरणों की कीमत बहुत अधिक होती है।
  • डिजिटल साक्षरता का अभाव।

क्वांटम नेटवर्क

संदर्भ: आईआईटी मद्रास, IBM क्वांटम नेटवर्क में शामिल होने वाला भारत का पहला संस्थान बन गया है।

  • आईबीएम के क्वांटम नेटवर्क का लक्ष्य, भारत में क्वांटम कंप्यूटिंग कौशल और अनुसंधान को आगे बढ़ाना है।
  • क्वांटम कंप्यूटिंग (Quantum computing) एक तेजी से उभरती हुई तकनीक है, जो समस्याएं परंपरागत कंप्यूटरों के लिए बहुत जटिल होती है, उनको हल करने के लिए ‘क्वांटम यांत्रिकी’ के नियमों का उपयोग करती है।

सैन्य अभ्यास

एक्सरसाइज पिच ब्लैक:

  • ऑस्ट्रेलिया में एक्सरसाइज पिच ब्लैक 2022 का समापन।
  • यह रॉयल ऑस्ट्रेलियन एयर फ़ोर्स (RAAF) द्वारा आयोजित एक द्विवार्षिक तीन-सप्ताह का बहुपक्षीय (भारत सहित) हवाई युद्ध प्रशिक्षण अभ्यास है।

नौसेना अभ्यास काकाडू:

  • भारतीय नौसेना, रॉयल ऑस्ट्रेलियन नेवी द्वारा आयोजित बहुराष्ट्रीय युद्धाभ्यास काकाडू – 2022 में भाग ले रही है।
  • 1993 में शुरू हुआ ‘युद्धाभ्यास काकाडू’ (Exercise KAKADU) रॉयल ऑस्ट्रेलियन नेवी द्वारा आयोजित एक बहुपक्षीय क्षेत्रीय समुद्री जुड़ाव अभ्यास है।

जिमेक्स 2022:

  • भारतीय नौसेना द्वारा आयोजित ‘जापान इंडिया मैरीटाइम एक्सरसाइज’ 2022 (JIMEX 2022) का छठा संस्करण को बंगाल की खाड़ी में शुरू हुआ।
  • यह संस्करण जिमेक्स की 10वीं वर्षगांठ का प्रतीक है, जो 2012 में जापान में शुरू हुआ था।
  • यह भारतीय नौसेना और जापानी समुद्री आत्मरक्षा बल (JMSDF) के बीच द्विवार्षिक रूप से आयोजित किया जाता है।

 

मानचित्र (चर्चा में)