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[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 9 September 2022

विषयसूची

सामान्य अध्ययन-I

  1. सुभाष चंद्र बोस

 

सामान्य अध्ययन-III

  1. शहरी बाढ़

मुख्य परीक्षा संवर्धन हेतु पाठ्य सामग्री

  1. क्वीन एलिज़ाबेथ
  2. शहरी खोज-बचाव मिशन में मदद करने हेतु ‘साइबोर्ग कॉकरोच’

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

  1. मानव विकास सूचकांक 2021
  2. रंगदारी के मामले में नागालैंड और देशद्रोह के मामलों में असम का शीर्ष स्थान
  3. ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए नौकरियों के अवसर
  4. EWS कोटा
  5. आरक्षण एक जिम्मेदारी है, बोझ नहीं
  6. प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान
  7. नीति संतुलन: उच्च व्यापार और राजकोषीय घाटा से जोखिम की संभावना
  8. भारत द्वारा टूटे चावल के निर्यात पर प्रतिबंध
  9. लाल कान वाला स्लाइडर कछुआ
  10. नासा का सोनिफिकेशन प्रोजेक्ट
  11. भारत और यूके द्वारा 26 देशों के लिए काउंटर रैनसमवेयर अभ्यास का आयोजन
  12. मानचित्रण (चर्चा में)

 


सामान्य अध्ययनI


 

विषय: 18वीं सदी के लगभग मध्य से लेकर वर्तमान समय तक का आधुनिक भारतीय इतिहास- महत्त्वपूर्ण घटनाएँ, व्यक्तित्व, विषय।

सुभाष चंद्र बोस

संदर्भ: हाल ही में, प्रधानमंत्री द्वारा ‘इंडिया गेट’ पर ‘सुभाष चंद्र बोस’ (Subhas Chandra Bose) की एक प्रतिमा का अनावरण किया गया, इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने ‘कर्तव्य पथ’ (Kartavya Path) का भी उद्घाटन किया, जिसे पहले राजपथ के नाम से जाना जाता था।

‘सुभाष चंद्र बोस’ के बारे में:

  • सुभाष चंद्र बोस (Subhash Chandra Bose) का जन्म 23 जनवरी 1897 को तत्कालीन बंगाल प्रांत, की उड़ीसा डिवीजन के कटक शहर में हुआ था।
  • उनका जन्मदिन 23 जनवरी को ‘पराक्रम दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।
  • वर्ष 1919 में, उन्होंने भारतीय सिविल सेवा (ICS) परीक्षा उत्तीर्ण की थी, हालांकि बाद में बोस ने इस नौकरी से इस्तीफा दे दिया। क्योंकि उनका मानना ​​था कि वे अंग्रेजों का साथ नहीं दे सकते।
  • वे विवेकानंद की शिक्षाओं से अत्यधिक प्रभावित थे और उन्हें अपना आध्यात्मिक गुरु मानते थे। चित्तरंजन दास उनके राजनीतिक गुरु थे।
  • वे विवेकानंद की शिक्षाओं से अत्यधिक प्रभावित थे और उन्हें अपना आध्यात्मिक गुरु मानते थे। उनके राजनीतिक गुरु सी आर दास थे।
  • 1930 के दशक के मध्य में, बोस ने यूरोप की यात्रा की। उन्होंने शोध किया और अपनी पुस्तक ‘द इंडियन स्ट्रगल’ का पहला भाग लिखा।
  • सुभाष चंद्र बोस, दो बार हरिपुर अधिवेशन 1938 तथा त्रिपुरी अधिवेशन 1939 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गए थे।
  • उन्होंने 1939 में कांग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया और बंगाल में कांग्रेस के भीतर ‘अखिल भारतीय फॉरवर्ड ब्लॉक’ का गठन किया, जिसका उद्देश्य राजनीतिक वामपंथ को मजबूत करना था।

भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में योगदान:

  • भारतीय राष्ट्रीय सेना (INA): 1943 में सुभाष चंद्र बोस ने ‘आजाद हिंद फौज’ के नाम से प्रसिद्ध ‘भारतीय राष्ट्रीय सेना’ (INA) को पुनर्जीवित किया। शुरुआत में ‘आजाद हिंद फौज’ का गठन 1942 में रास बिहारी बोस द्वारा किया गया था।
  • ‘आजाद हिंद फौज’ द्वारा किए गए हमले एक महत्वपूर्ण कारक थे, जिनकी वजह से अंततः अंग्रेजों को भारत छोड़ना पड़ा।
  • आर्थिक योजना का विचार: सुभाष चंद्र बोस ने एक सुदृढ़ आर्थिक योजना को अपनाया और इसके लिए खुद रास्ता दिखाया।
  • महिला अधिकारिता: बोस ने ‘आजाद हिन्द फौज’ में कैप्टन लक्ष्मी की कमान में एक महिला रेजिमेंट का गठन किया। इसे ‘रानी झांसी रेजिमेंट’ कहा जाता था।
  • सशक्त नेतृत्व: ‘आजाद हिंद फौज’ भारत के लोगों के लिए एकता और वीरता का प्रतीक बन गई। बोस ने अपने उग्र भाषणों से सैनिकों को प्रेरित किया। “तुम मुझे खून दो, और मैं तुम्हें आजादी दूंगा” उनका प्रसिद्ध नारा था!

भारत के स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान को याद करने के लिए हर साल 23 जनवरी को सुभाष चंद्र बोस का जन्मदिन देश के विभिन्न हिस्सों में मनाया जाता है।

 

इंस्टा लिंक्स:

सुभाष चंद्र बोस

प्रीलिम्स लिंक:

  • ‘आजाद हिंद फौज’ का गठन
  • बोस और गांधी

मेंस लिंक:

आप किस हद तक भारतीय राष्ट्रीय सेना द्वारा निभाई गई भूमिका को भारत में ब्रिटिश शासन के अंत के लिए ताबूत में अंतिम कील मानते हैं? इस संबंध में सुभाष चंद्र बोस के योगदान पर प्रकाश डालिए।

 


सामान्य अध्ययनII


 

विषय: आपदा और आपदा प्रबंधन।

शहरी बाढ़

संदर्भ: भारत की प्रौद्योगिकी राजधानी के रूप में प्रसिद्ध ‘बेंगलुरु’ को हाल ही में अभूतपूर्व बाढ़ का सामना करना पड़ा।

  • ‘शहरी बाढ़’ (Urban Flooding), किसी निर्मित विन्यास या समायोजन, खासकर घनी आबादी वाले क्षेत्रों में ‘भूमि का जलप्लावन’ होती है।
  • इससे पहले पिछले कुछ वर्षों में, इस तरह की ‘बाढ़’ की घटनाएं कोच्चि, मुंबई, हैदराबाद और चेन्नई शहरों में घटित हो चुकी है।

कारण:

प्राकृतिक:

  • उच्च वर्षा: भारतीय मौसम विभाग के अनुसार, मानसून नियमित और अप्रत्याशित हो गया है।
  • तूफान की लहरें (तटीय शहरों में): उदाहरण के लिए, वर्ष 2020 में आए ‘चक्रवात अम्फान’ की वजह से कोलकाता की सड़कें बाढ़ में डूब गयीं। पूर्वी भारत में, इस तूफान ने 98 लोगों की जान ले ली और 13.8 बिलियन डॉलर के नुकसान का कारण बना।
  • भूजल स्तर: चेन्नई में, बारिश के बाद ‘भूजल स्तर’ में होने वाली वृद्धि, शहर भर में बेसमेंट वाली कई इमारतों के लिए एक चुनौती बन जाती है।

मानवजनित कारण:

  • अतिक्रमण: वर्षा जल को अवशोषित करने वाली अधिकांश आर्द्रभूमियां ‘अतिक्रमण’ (Encroachment) का शिकार हो गयी हैं। 1960 के दशक में बैंगलोर में 262 झीलें थीं; अब इनमे से मात्र 10 झीलों में ही पानी बचा है।
  • तीव्र और अनियोजित शहरीकरण: बेंगलुरू में, ‘तूफानी जल निकास नालियां’ शहर के जल निकायों से सीधे नहीं जुड़ी हैं। कुछ स्थानों पर अपवाह-जल, इसके बहाव को मोड़ने के लिए बनाई गयी नहरों (छोटे नालों) में प्रवाहित होता है। ‘नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक’ (CAG) के अनुसार, इससे अचानक बाढ़ आने की संभावना बढ़ जाती है।
  • मैंग्रोव का विनाश: 1995 और 2005 के बीच मुंबई के मैंग्रोव-क्षेत्र का लगभग 40% भाग नष्ट हो गया।
  • तूफानी जल निकासी का खराब प्रबंधन: पिछले वर्ष जारी की गयी CAG की रिपोर्ट में इस खराब प्रबंधन के लिए ‘बेंगलुरु नगरपालिका’ की आलोचना की गयी थी।
  • आंकड़ों की कमी: CAG के अनुसार- बेंगलुरू नगरपालिका द्वारा ‘जवाहर लाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीकरण योजना’ (JNNURM) के तहत आवंटित ‘तूफानी जल प्रबंधन निधि’ का उचित रिकॉर्ड नहीं रखा गया।
  • समन्वय की कमी: CAG की रिपोर्ट में जल निकासी से संबंधित मामलों पर नगर पालिका और बैंगलोर विकास प्राधिकरण के बीच समन्वय की कमी का भी उल्लेख किया गया है।

शहरी बाढ़ को कम करने के उपाय:

  • स्पंज सिटीज मिशन: स्पंज सिटी (Sponge City) का विचार, शहरों को अधिक पारगम्य (Permeable) बनाना है ताकि शहर में अधिक वर्षा होने पर वर्षा-जल को समायोजित करके उसका उपयोग किया जा सके।
  • अटल नवीकरण एवं शहरी परिवर्तन मिशन (Atal Mission for Rejuvenation and Urban Transformation – AMRUT) योजना।
  • तूफानी जल निपटान प्रणाली (Stormwater disposal system): बृहन्मुंबई तूफान जल निपटान प्रणाली (BRIMSTOWAD), मुंबई शहर की पुरानी ‘तूफानी जल निकासी प्रणाली’ को ओवरहाल करने की परियोजना है, जिसे 2005 में आई बाढ़ के बाद शुरू किया गया था।
  • जल-संवेदनशील शहरी डिजाइन (Water-sensitive urban design – WSUD): आस्ट्रेलिया की WSUD प्रणाली में शहरी तूफानी जल अपवाह, और अपशिष्ट जल को एक बाधा या दायित्व के बजाय एक ‘संसाधन’ के रूप में माना जाता है।
  • बायोसवेल्स या रेन गार्डन‘: न्यूयॉर्क में बायोसवेल्स (Bioswales) या ‘रेन गार्डन’ ऐसी भूदृश्यिक संरचनाएं है, जो प्रदूषित तूफानी जल अपवाह को एकत्रित करके इसे जमीन में अवशोषित करती हैं और प्रदूषण को फ़िल्टर करती हैं।

निष्कर्ष:

अतएव, शहरी ढांचे के भीतर सार्वजनिक खुले स्थानों को ‘तूफान प्रबंधन बुनियादी ढांचे’ के रूप में शामिल करने की आवश्यकता है, जिससे हमारे शहरों को जल-संवेदनशील शहरों में परिवर्तित होने में मदद मिलेगी।

इंस्टा लिंक:

शहरी बाढ़

मेंस लिंक:

अनियोजित विकास और प्राकृतिक जल निकायों की अवहेलना के कारण, किस प्रकार भारतीय शहरों को बार-बार बाढ़ का सामना करना पड़ता है। भारत में शहरी बाढ़ से निपटने के प्रयास में हम अन्य देशों से क्या सीख सकते हैं? (15 अंक)

 


मुख्य परीक्षा संवर्धन हेतु पाठ्य सामग्री (नैतिकता/मुख्य)


क्वीन एलिज़ाबेथ

(Queen Elizabeth)

 

 

शहरी खोज-बचाव मिशन में मदद करने हेतु ‘साइबोर्ग कॉकरोच’

संदर्भ: जापान के वैज्ञानिक संस्थान RIKEN के ‘क्लस्टर फॉर पायनियरिंग रिसर्च’ (CPR) विभाग  के नेतृत्व में शोधकर्ताओं की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने ‘साइबोर्ग कॉकरोच’ (cyborg cockroaches) का निर्माण करने में सक्षम एक प्रणाली तैयार की है। इस ‘साइबोर्ग कॉकरोच / तिलचट्टे’ का एक हिस्सा ‘कीट’ का और हिस्सा ‘मशीन’ होगा है।

  • शोधकर्ताओं का दावा है, कि ये कीट (कीड़े) शहरी खोज और बचाव (urban search and rescue), पर्यावरण निगरानी और मनुष्यों के लिए खतरनाक क्षेत्रों के निरीक्षण जैसी प्रक्रियाओं में निगरानी करने में सक्षम होंगे। इन ‘साइबोर्ग कॉकरोच’ की गतिविधियों को छोटे एकीकृत सर्किट द्वारा नियंत्रित किया जाएगा।
  • वैज्ञानिक पत्रिका ‘एनपीजे फ्लेक्सिबल इलेक्ट्रॉनिक्स’ में अपने निष्कर्ष प्रकाशित करने वाले शोधकर्ताओं का दावा है कि छोटे वायरलेस नियंत्रण मॉड्यूल के साथ ‘तिलचट्टे’ को लैस करके, हैंडलर लंबे समय तक ‘कीट’ के पैरों को दूर से नियंत्रित करने में सक्षम होंगे।

साइबोर्ग (Cyborg) के शरीर में जैविक और बायोमेक्ट्रोनिक- दोनों प्रकार के अंग होते हैं। यदि किसी व्यक्ति के शरीर में कृत्रिम हृदय वाल्व, कर्णावत प्रत्यारोपण (cochlear implants) या इंसुलिन पंप जैसे प्रत्यारोपित अंग लगे होते है, तो उसे एक ‘साइबोर्ग’ माना जा सकता है।


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


मानव विकास सूचकांक 2021

संदर्भ:

पिछले तीन दशकों में पहली बार लगातार दो वर्षों में अपने स्कोर में गिरावट दर्ज करने के बाद, भारत ‘मानव विकास सूचकांक, 2021′ (Human Development Index – HDI, 2021) में शामिल 191 देशों की सूची में 132वें स्थान पर है।

प्रमुख बिंदु:

2020 में वैश्विक गिरावट:

  • 70 प्रतिशत देशों में ‘जीवन प्रत्याशा’ में कमी दर्ज की गयी हैं।
  • 85 प्रतिशत देशों में ‘आय में गिरावट’ दर्ज की गयी हैं ।

‘मानव विकास सूचकांक’ (HDI) में कमी: 90 प्रतिशत देशों द्वारा 2020 या 2021 में अपने HDI मूल्य में कमी दर्ज की गयी है, जोकि ‘सतत विकास लक्ष्यों’ की दिशा में हुई प्रगति को वापस पीछे धकेल देती है।

2021 में HDI: भारत को 2021 के ‘मानव विकास सूचकांक’ में 0.633 अंक हासिल हुए, जोकि वैश्विक औसत 0.732 से कम है।

HDI में गिरावट के प्रमुख कारण:

  • कोविड-19
  • यूक्रेन युद्ध
  • पर्यावरणीय चुनौतियां

मध्यम मानव विकास श्रेणी: भारत का HDI स्कोर इसे “मध्यम” मानव विकास श्रेणी में रखता है।

लैंगिक असमानता सूचकांक:

इस सूचकांक के तहत, महिलाओं और पुरुषों के बीच उपलब्धि में असमानता को ‘तीन आयामों’ में मापा जाता है:

  • प्रजनन स्वास्थ्य;
  • अधिकारिता;
  • श्रम बाजार।

भारत: भारत ने अपने ‘लैंगिक असमानता सूचकांक’ (Gender Inequality Index) मूल्य में 2020 के सूचकांक (0.490) की तुलना में 2021 में 0.493 की तुलना में थोड़ा सुधार दिखाया है।

जन्म के समय जीवन प्रत्याशा:

  • दो-तिहाई देशों ने ‘जन्म के समय जीवन प्रत्याशा’ में कमी दर्ज की है।
  • भारत में जन्म के समय जीवन प्रत्याशा 2019 में 7 से घटकर 2021 में 67.2 हो गई है।

कोविड-19 के बाद से बिगड़ते मानसिक संकट की रिपोर्ट: ‘मानसिक संकट’ वह कारक है, जो मानव विकास को बाधित कर सकता है।

रिपोर्ट में उजागर किए गए मुद्दे:

  • रोकथाम के बहुत धीमे उपाय;
  • समन्वित वैश्विक नेतृत्व का अभाव;
  • आपातकालीन फंडिंग को अमल में लाने में बहुत अधिक समय लगा;
  • सामाजिक सुरक्षा प्रणालियों में बड़े छेद।

मानव विकास सूचकांक’ चार संकेतकों का एक संयुक्त सूचकांक है:

  1. जन्म के समय जीवन प्रत्याशा (सतत विकास लक्ष्य 3)
  2. स्कूली शिक्षा के अपेक्षित वर्ष (SDG 4)
  3. स्कूली शिक्षा के औसत वर्ष (SDG 4)
  4. प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय (GNI) (एसडीजी 8)।

 

रंगदारी के मामले में नागालैंड और देशद्रोह के मामलों में असम का शीर्ष स्थान

संदर्भ: राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, नागालैंड में 2014 के बाद से ‘जबरन वसूली (Extortion) और ब्लैकमेलिंग’ के तहत अपराधों की उच्चतम दर दर्ज की गई है, जबकि देशद्रोह (Sedition) के मामलों में ‘असम’ शीर्ष स्थान पर है।

देशद्रोह के मामलों में असम के बाद हरियाणा, झारखंड और कर्नाटक का स्थान है।

आईपीसी की धारा 124A:

भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता (IPC) की धारा 124A ‘देशद्रोह’ / ‘राजद्रोह’ (Sedition) को एक अपराध के रूप में परिभाषित करती है।

  • इसके अनुसार- “किसी भी व्यक्ति के द्वारा, शब्दों द्वारा, लिखित अथवा बोलने के माध्यम से, अथवा संकेतों द्वारा, या दृश्य- प्रदर्शन द्वारा, या किसी अन्य तरीके से, विधि द्वारा स्थापित सरकार के खिलाफ, घृणा या अवमानना दिखाने, उत्तेजित होने अथवा उत्तेजना भड़काने का प्रयास करने पर उसे, आजीवन कारावास और साथ में जुर्माना, या तीन साल तक की कैद और साथ में जुर्माना, या मात्र जुर्माने का दंड दिया जा सकता है।“
  • इस कानून के तहत ‘आरोपित व्यक्ति’ को सरकारी नौकरी से वंचित किया जा सकता है।

ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए नौकरियों के अवसर

संदर्भ: सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए, विशेष रूप से नागरिक उड्डयन उद्योग में, रोजगार हेतु नीतिगत ढांचा तैयार करने के लिए तीन महीने का समय दिया।

यह आदेश, तमिलनाडु के एक ट्रांसजेंडर व्यक्ति ‘शनवी पोन्नुसामी’ द्वारा दायर एक याचिका का परिणाम है। ‘शनवी पोन्नुसामी’ का स्वप्न एयरलाइन केबिन क्रू सदस्य के रूप में उड़ान भरने का था।

ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम 2019:

यह अधिनियम, ट्रांसजेंडर व्यक्तियों से भेदभाव पर प्रतिबंध लगाता है। जिसके तहत, कोई भी व्यक्ति या प्रतिष्ठान, चाहे वह सरकारी हो या निजी, भर्ती या पदोन्नति या किसी अन्य संबंधित क्षेत्रों में रोजगार के मामलों में एक ट्रांसजेंडर व्यक्ति के साथ भेदभाव नहीं कर सकता है।

LGBTIQ प्लस:

LGBTQ समलैंगिक, समलैंगिक, उभयलिंगी, ट्रांसजेंडर और क्वीर के लिए एक संक्षिप्त शब्द है। इन शब्दों का प्रयोग किसी व्यक्ति के यौन अभिविन्यास या लिंग पहचान का वर्णन करने के लिए किया जाता है।

सरकार द्वारा की गए पहले:

  • केरल, ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए ‘ट्रांसजेंडर नीति’ का लागू करने वाला पहला राज्य है, जिसमे सभी श्रेणियों के ट्रांसजेंडरों को शामिल किया गया है और यह नीति हाशिए पर सहने वाले समूहों के लिए एक न्यायपूर्ण समाज प्रदान करने पर जोर देती है।
  • स्वीकृति ओडिशा (SWEEKRUTI ODISHA): यह ओडिशा सरकार द्वारा ट्रांसजेंडर समानता और न्याय को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गयी एक योजना है।

EWS कोटा

संदर्भ: भारत के मुख्य न्यायाधीश के नेतृत्व में गठित एक संविधान पीठ ने यह जांचने के लिए तीन आधारभूत मुद्दों को अंतिम रूप दिया है, कि क्या 103वां संविधान संशोधन ‘संविधान के मूल ढांचे’ का उल्लंघन करता है।

तीन आधारभूत मुद्दे:

  1. आर्थिक मानदंड: क्या यह संविधान संशोधन, राज्य को आर्थिक मानदंडों के आधार पर आरक्षण सहित विशेष प्रावधान करने की अनुमति देकर ‘संविधान की मूल संरचना’ का उल्लंघन करता है।
  2. शैक्षणिक संस्थाओं में प्रवेश: क्या यह संविधान संशोधन, राज्य को निजी गैर-सहायता प्राप्त संस्थानों में प्रवेश के संबंध में विशेष प्रावधान करने की अनुमति देकर ‘संविधान की मूल संरचना’ का उल्लंघन करता है
  3. एससी/एसटी/ओबीसी को प्रावधानों से अलग करना: क्या इस संवैधानिक संशोधन द्वारा, सामाजिक और शैक्षणिक रुप से पिछड़े वर्ग (SEBC) /अन्य पिछड़े वर्ग /अनुसूचित जाति /अनुसूचित जनजाति समुदायों को ‘आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग’ (Economically Weaker Sections – EWS) कोटे के दायरे से बाहर करके ‘संविधान की मूल संरचना’ को कुचला गया है।

आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS):

  • 2019 में, 103 वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा, अनुच्छेद 15 और 16 में संशोधन करके आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (Economically Weaker Sections- EWS) को सरकारी नौकरियों और शिक्षा के क्षेत्र में 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है।
  • इस संविधान संशोधन के माध्यम से, संविधान में अनुच्छेद 15 (6) और अनुच्छेद 16 (6) को जोड़ा गया था।

 

 

संविधान की मूल संरचना:

केशवानंद भारती निर्णय (1973) ने ‘मूल संरचना के सिद्धांत’ (Basic Structure Doctrine) की शुरुआत की। इस सिद्धांत में धर्मनिरपेक्षता और संघवाद जैसे संविधान में निहित मूलभूत मूल्यों को प्रभावित करने वाले कठोर संशोधन करने संबंधी संसद की शक्ति को सीमित कर दिया गया है।

 

 

आरक्षण एक जिम्मेदारी है, बोझ नहीं

संदर्भ: हाल ही में केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा है कि ‘हाशिए पर रहने वाले समुदायों’ के लिए ‘सकारात्मक कार्यवाही’ (affirmation action) एक बोझ के बजाय देश की जिम्मेदारी है।

‘आरक्षण’ (Reservation) की शुरुआत यह सुनिश्चित करने के लिए की गयी थी, कि ऐतिहासिक रूप से वंचित समुदायों, जो आर्थिक प्रगति के बावजूद वे सामाजिक रूप से वंचित बने रहें, को संसाधनों तक समान पहुंच प्रदान की जाए।

संवैधानिक प्रावधान:

  • संविधान के अनुच्छेद 15(4) और 16(4) के तहत, राज्य और केंद्र सरकारों को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सदस्यों के लिए सरकारी सेवाओं में सीटें आरक्षित करने की शक्ति प्रदान की गयी है।
  • अनुच्छेद 16 (4B) में ‘रिक्त सीटों’ को आगे ले जाने का प्रावधान किया गया है।
  • अनुच्छेद 330 और 332 में क्रमशः संसद और राज्य विधानसभाओं में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए सीटों के आरक्षण का प्रावधान किया गया है।
  • अनुच्छेद 243D प्रत्येक पंचायत में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए सीटों के आरक्षण का प्रावधान करता है।
  • अनुच्छेद 233T प्रत्येक नगर पालिका में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए सीटों के आरक्षण का प्रावधान करता है।
  • संविधान का अनुच्छेद 335 कहता है कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के दावों को प्रशासन की प्रभावकारिता के रखरखाव के साथ लगातार ध्यान में रखा जाएगा।
  • इंद्रा साहनी बनाम भारत संघ (1992): इस फैसले में ‘क्रीमी लेयर’ की अवधारणा की शुरुआत की गयी और आरक्षण के लिए 50% से अधिकतम सीमा निर्धारित की गयी।

प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान

संदर्भ: 2025 तक तपेदिक (टीबी) को खत्म करने के लक्ष्य की दिशा में काम करते हुए, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा ‘प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान’ (Pradhan Mantri TB Mukt Bharat Abhiyan – PM TbMBA) का आरंभ किया जा रहा है।

  • ‘प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान’ (PM TbMBA) को औपचारिक रूप से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा लॉन्च किया जाएगा।
  • यद्यपि, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे कुछ राज्यों में ‘नि-क्षय मित्र’ (Ni-kshay Mitra) नामक पहल पहले से ही जारी रही है।

‘प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान’ के बारे में:

  • इस योजना के तहत, नागरिको, गैर सरकारी संगठन और कॉरपोरेट 1-3 साल के लिए सहयोग देकर टीबी रोगियों को “गोद” ले सकते हैं।
  • इसमें रोगियों के लिए सामुदायिक सहायता – उनके लिए पोषण और अतिरिक्त नैदानिक ​​सहायता, और उनके परिवारों के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण शामिल होंगे।
  • यह रोगी केंद्रित स्वास्थ्य प्रणाली की दिशा में सामुदायिक समर्थन जुटाने की दिशा में एक कदम है।

 

‘राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम’ के बारे में:

राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP), जिसे पहले संशोधित राष्ट्रीय क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम (RNTCP) के रूप में जाना जाता था, का लक्ष्य भारत में टीबी के बोझ को सतत विकास लक्ष्यों से पांच साल पहले 2025 तक रणनीतिक रूप से कम करना है।

  • भारत से 2025 तक टीबी उन्‍मूलन करने के भारत सरकार के उद्देश्य पर जोर देने के लिए 2020 में आरएनटीसीपी का नाम बदलकर राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) कर दिया गया।
  • यह कार्यक्रम 632 जिलों/रिपोर्टिंग इकाइयों में एक बिलियन से अधिक लोगों तक पहुंच बना चुका है और यह राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर टीबी उन्मूलन के लिए भारत सरकार की पंचवर्षीय राष्ट्रीय रणनीतिक योजनाओं को संचालित करने के लिए उत्‍तरदायी है।

 

नीति संतुलन: उच्च व्यापार और राजकोषीय घाटा से जोखिम की संभावना

संदर्भ: हाल के आंकड़ों से पता चलता है, कि भारत के निर्यात में गिरावट आई है और कम मूल्य वाले उत्पादों की मांग में बदलाव हुआ है। साथ ही भारत के आयात में वृद्धि हो रही है।

कम निर्यात के कारण:

  • वैश्विक अर्थव्यवस्था तेजी से धीमी होती जा रही है।
  • ईंधन की उच्च कीमतों की वजह से अन्य वस्तुओं की मांग को कम हो रही है।
  • उच्च ब्याज दरें और अमेरिकी फ़ेडरल रिज़र्व की सख्त मौद्रिक नीति।

उच्च आयात के कारण:

  • कच्चे तेल की ऊंची कीमतें।
  • बढ़ती भारतीय अर्थव्यवस्था में विदेशी वस्तुओं की मांग की वृद्धि।

प्रभाव:

  • चालू खाता घाटा (CAD) इस साल, पिछले साल 2% की तुलना में, जीडीपी के 4% तक बढ़ सकता है
  • उच्च जोखिम: चालू खाता घाटा के साथ उच्च राजकोषीय घाटा (“जुड़वां घाटे”) हमेशा बृहत स्थिरता के लिए एक जोखिम होता है। इससे CAD की फाइनेंसिंग और मुश्किल हो जाती है।

 

भारत द्वारा टूटे चावल के निर्यात पर प्रतिबंध

संदर्भ: भारत ने ‘टूटे चावल के निर्यात’ (broken rice export) पर प्रतिबंध लगा दिया है और गैर-बासमती चावल के विभिन्न ग्रेड के निर्यात पर 20 प्रतिशत शुल्क लगाया है।

विवरण:

  • भारत, विश्व में चावल का सबसे बड़ा निर्यातक है
  • प्रतिबंध का कारण: चालू खरीफ मौसम में धान के रकबे में 6 प्रतिशत से अधिक की कमी आई है और चावल की कीमतों में वृद्धि हुई है।
  • भारत सालाना 20-22 मिलियन टन चावल का निर्यात करता है जिसमें 4 मिलियन टन बासमती चावल शामिल है।
  • इससे पहले, मई में भारत ने गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था।

 

लाल कान वाला स्लाइडर कछुआ

संदर्भ: हाल के अध्ययन में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि तेज़ी से फैलने वाला दक्षिणी ‘लाल कान वाला स्लाइडर कछुआ’ (Red-eared slider turtle) भारतीय जैव विविधता के लिए खतरा है।

प्रजाति के बारे में:

  • लाल-कान वाला स्लाइडर कछुआ दक्षिण-पूर्वी संयुक्त राज्य अमेरिका और मैक्सिको का मूल निवासी है, लेकिन इसमें विदेशी जानवरों के व्यापार के माध्यम से भारत सहित दुनिया भर में अपना रास्ता खोज लिया है।
  • भारत में, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत देशी कछुओं को पालतू जानवर के रूप में रखना प्रतिबंधित है। लेकिन विदेशी नस्लें प्रतिबंधित नहीं हैं और पूरे भारत में कई परिवारों में पालतू जानवरों के रूप में रखी जाती हैं।
  • यह प्रजाति पहले से ही कई भारतीय राज्यों में फैली हुई है और अपनी तरह की सभी प्रजातियों के लिए खतरा बन गई है, जिसमें सॉफ्ट-शेल और हार्ड-शेल कछुए शामिल हैं।
  • इस प्रजाति को दुनिया की 100 सबसे खराब आक्रामक गैर-देशी प्रजातियों में से एक माना जाता है।

नासा का सोनिफिकेशन प्रोजेक्ट

संदर्भ: नासा द्वारा जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप से प्राप्त छवियों और डेटा का ध्वनि में परिवर्तित किया जा रहा है।

सोनिफिकेशन (Sonification): सूचना देने या डेटा को बोधात्मक बनाने के लिए ‘गैर-भाषण ऑडियो’ (non-speech audio) के उपयोग को ‘सोनिफिकेशन’ कहा जाता है। नासा द्वारा ‘कैरिना नेबुला’ (Carina Nebula) की कॉस्मिक क्लिफ्स के लिए ऐसा किया जा चुका है।

लाभ: नासा का मानना ​​है कि इस सोनिफिकेशन प्रोजेक्ट से दृष्टिबाधित लोगों को सबसे ज्यादा फायदा होगा।

ध्वनियों को कैसे पकड़ा गया?

जिस तरह लिखित विवरण, दृश्य छवियों के अद्वितीय अनुवाद होते हैं, उसी तरह सोनिफिकेशन भी दृश्य छवियों को एन्कोडिंग जानकारी, जैसे रंग, चमक, स्टार स्थान, या जल अवशोषण हस्ताक्षर, ध्वनियों के रूप में अनुवाद करता है।

‘कैरिना नेबुला’ के बारे में:

  • कैरिना नेबुला, बाहरी अंतरिक्ष में गैस और धूल का एक बादल है। गैस और धूल, तारों और ग्रहों के लिए निर्माण सामग्री होती है।
  • यह आकाशगंगा आकाशगंगा के ‘कैरिना-धनु शाखा’ में स्थित है। यह निहारिका (नेबुला) पृथ्वी से लगभग 8,500 प्रकाश वर्ष दूर है।

 

चित्र: कैरिना नेबुला

 

भारत और यूके द्वारा 26 देशों के लिए काउंटर रैनसमवेयर अभ्यास का आयोजन

संदर्भ: भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) और और ब्रिटिश सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक साइबर हमले से निपटने की तैयारी के लिए ‘बीएई सिस्टम्स’ के सहयोग से रैनसमवेयर से निपटने के लिए 26 देशों के लिए रैंसमवेयर ड्रिल का वर्चुअल तरीके से सफलतापूर्वक संचालन किया।

  • इस अभ्यास का विषय ऊर्जा क्षेत्र पर आधारित है जिसका उद्देश्य सीआरआई सहयोगी राष्ट्रों से संबंधित राष्ट्रीय साइबर संकट प्रबंधन टीमों को कई बिजली वितरण कंपनियों पर रैंसमवेयर हमले से निपटने में सक्षम बनाना है।
  • इस अभ्यास में कई बिजली वितरण कंपनियों पर रैंसमवेयर हमलों से निपटने वाले CRI भागीदार देशों की ‘राष्ट्रीय साइबर संकट प्रबंधन’ टीमें शामिल थीं।
  • ये कंपनियां घरेलू ग्राहकों को बिजली वितरण का उत्तरदायित्व संभालती हैं और सार्वजनिक आपूर्ति की अंतिम कड़ी हैं। इस अभ्यास के माध्यम से महत्वपूर्ण राष्ट्रीय बुनियादी ढांचे पर रैंसमवेयर की प्रतिक्रिया पर निर्णय लेने की जटिलता से पड़ताल करने का पता लगाया गया।