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[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 8 September 2022

विषयसूची

सामान्य अध्ययन-II

  1. गैर सरकारी संगठनों की सीएसआर फंडिंग

सामान्य अध्ययन-III

  1. अंतरराष्ट्रीय व्यापार को ‘रुपये’ में किए जाने पर सरकार का जोर: क्यों और कैसे

मुख्य परीक्षा संवर्धन हेतु पाठ्य सामग्री (निबंध/नैतिकता)

  1. वरिष्ठ नागरिकों को साहचर्य प्रदान करने वाला एक स्टार्ट-अप-‘गुडफेलो’
  2. साहचर्य की बढ़ती आवश्यकता
  3. रोजगार-योग्य कौशल पर संशोधित पाठ्यक्रम

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

  1. यूनेस्को का ग्लोबल लर्निंग सिटीज नेटवर्क
  2. विकिपीडिया पर सामग्री अनुशोधन
  3. आईटी अधिनियम की धारा 66A
  4. केंद्र सरकार – इंटरनेट शटडाउन जारी करने के लिए एकमात्र शासी प्राधिकरण
  5. मूलभूत शिक्षण अध्ययन सर्वेक्षण
  6. सहकारी समितियों पर राष्ट्रीय राजनीति
  7. WEST पहल
  8. आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना
  9. थर्मल पावर प्लांट का विस्तार
  10. उत्कृष्टता केंद्र- उपग्रह और मानव रहित रिमोट व्हीकल पहल
  11. चीन का पूरी तरह से सौर ऊर्जा-चालित ‘सेमी-सैटेलाइट ड्रोन’
  12. रेलवे भूमि के उपयोग के लिए मानदंडों में ढील
  13. राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र
  14. ‘गैर-संचारी रोगों’ की रोकथाम और नियंत्रण
  15. NSCN (K) के साथ युद्धविराम समझौता
  16. मानचित्रण (चर्चा में)

 


सामान्य अध्ययनII


 

विषय: विकास प्रक्रिया तथा विकास उद्योग- गैर-सरकारी संगठनों, स्वयं सहायता समूहों, विभिन्न समूहों और संघों, दानकर्ताओं, लोकोपकारी संस्थाओं, संस्थागत एवं अन्य पक्षों की भूमिका।

NGO के लिए CSR फंडिंग

संदर्भ:

किसी भी सामाजिक प्रयास में, भारत में होने वाले किसी भी कार्यक्रम में विशेष रूप से ‘कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व’ (Corporate Social Responsibility – CSR) पहलों द्वारा बड़ी मात्रा में व्यय किया जाता है।

गैर-सरकारी संगठनों (NGO) द्वारा किया जाने वाला व्यय:

  • विशेष परिणामों को हासिल करने हेतु कार्य: उदाहरण के लिए, शिक्षा पर काम करने वाले गैर सरकारी संगठन किताबों, अन्य ऑनलाइन संसाधनों, शिक्षक प्रशिक्षण, पाठ्यक्रम डिजाइन आदि के लिए धन-राशि प्राप्त करते हैं।
  • प्रशासनिक एवं सहायक व्यय: जैसेकि, किराया, बिजली, प्रौद्योगिकी और मानव संसाधन लागत।

‘कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व’ (CSR) से जुड़े मुद्दे:

  • छोटी, गैर-सूचीबद्ध कंपनियां: ‘कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व संशोधन कानून’, 2021 (CSR amendment law, 2021) के तहत कॉर्पोरेट द्वारा CSR संबंधी निर्धारित नियमों का अनुपालन नहीं करने पर महत्वपूर्ण वित्तीय दंड का प्रावधान किया गया है।
  • मोटे तौर पर ‘कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व’ वित्त पोषण करने वालों (CSR funders) में से 90% अपेक्षाकृत छोटी, गैर-सूचीबद्ध कंपनियां हैं।
  • CSR समिति: कानून के अनुसार, ‘कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व’ (CSR) पर सालाना 50 लाख रुपये से कम व्यय करने वाली कंपनियों के लिए ‘सीएसआर समिति’ का गठन करना आवश्यक नहीं है।
  • ऐसी कंपनियों के लिए CSR के संबंध में निर्णय लेने और कार्य योजनाओं के निर्माण का दायित्व ‘कंपनी बोर्डों’ पर छोड़ा गया है, जिनको ‘सामाजिक प्रभाव’ के बारे में बहुत कम या कोई अनुभव नहीं होता है।
  • मानव संसाधन प्रबंधन के लिए CSR दायित्व: कई बड़ी कंपनियों द्वारा सामाजिक क्षेत्र में अनुभवी पेशेवर व्यक्तियों को काम पर रखने के बजाय, CSR संबंधी दायित्व अपने ‘मानव संसाधन’ (HR) या ‘प्रशासन’ या ‘संचार प्रमुख’ की जिम्मेदारियों में जोड़ दिया जाता है।
  • सीएसआर नियमों के बारे में जागरूकता: हर कंपनी को सीएसआर संबधी जिन नियमों का उसे अनुपालन करना है, वह उनके सभी पहलुओं से अवगत नहीं है।
  • उदाहरण के लिए, प्रशासनिक उपरिव्यय लागतों पर 5% की सीमा केवल व्यवसाय की ‘आंतरिक CSR संचालन लागत’ पर लागू होती है, अनुदानग्राही की प्रशासनिक लागतों पर नहीं।
  • CSR दाताओं द्वारा सुरक्षा में त्रुटियाँ: ‘कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व’ प्रदाता, गैर सरकारी संगठन को बिना भुगतान किए हुए छोड़ देता है या इससे भी बदतर स्थिति में, गैर सरकारी संगठनों को इन आवश्यक लागतों का भुगतान करने के लिए ‘अन्य दाताओं’ द्वारा किए जाने वाले दुर्लभ मूल वित्तपोषण पर निर्भर होना पड़ता है।

गैर सरकारी संगठनों की सीएसआर फंडिंग को किस प्रकार बेहतर बनाया जा सकता है?

  • अन्य मिशन-संरेखित सीएसआर या सामाजिक क्षेत्र के हितधारकों के साथ कंपनियों द्वारा संसाधनों की पूलिंग की जा सकती है। इससे उनकी ‘सामूहिक प्रभाव क्षमता’ में वृद्धि होगी, और गैर सरकारी संगठनों के साथ काम करने के अनुभव वाले पेशेवरों को भी काम पर रखा जाएगा या उनका लाभ लिया जाएगा।
  • सीएसआर दाताओं को ‘संगठनात्मक विकास और अप्रत्यक्ष लागत को अलग तरह से देखने वाले’ अपने समकक्षों से सीखना चाहिए।
  • उदाहरण के लिए, ASK फाउंडेशन (ASK ग्रुप की सीएसआर शाखा) ग्रामीण समुदायों को बेहतर आजीविका हासिल करने में सक्षम बनाने के लिए काम कर रहा है।
  • अप्रत्यक्ष लागत और संगठनात्मक विकास लागत को कवर किया जाना चाहिए। यह वित्तीय दबाव को दूर करने और संगठनों को अधिक लचीला बनाने में मदद कर सकते हैं।

‘कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व’ (CSR) क्या है?

कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (CSR) को एक प्रबंधन अवधारणा है, जिसके तहत कंपनियाँ अपने व्यवसाय मॉडल और पद्धति में सामाजिक और पर्यावरण संबंधी लाभकारी कार्यक्रमों और प्रथाओं को उनके हितधारकों के साथ एकीकृत करती हैं।

  • यह किसी कंपनी के पर्यावरण और सामाजिक कल्याण पर प्रभाव का आकलन करने और जिम्मेदारी लेने के लिए एक कॉर्पोरेट पहल है।
  • ‘कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व’, कंपनी अधिनियम, 2013 के अनुच्छेद 135 द्वारा शासित है।
  • कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (CSR) गतिविधियों की पहचान करके एक रूपरेखा तैयार करने और कंपनियों के लिए CSR को अनिवार्य करने वाला भारत, दुनिया के पहले देशों में से एक है।

अधिनियम के प्रावधान: कंपनी अधिनियम की धारा 135(1) में CSR समिति गठित करने हेतु कंपनियों को चिह्नित करने के लिए सीमा-रेखा निर्धारित की गयी है; जिसके अनुसार-

  1. जिन कंपनियों की ठीक पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष में, सकल परिसंपत्ति 500 करोड़ रुपये या उससे अधिक है; या
  2. जिन कंपनियों ने 1000 करोड़ रुपये या अधिक का कारोबार किया है; या
  3. 5 करोड़ रुपये या उससे अधिक का शुद्ध लाभ अर्जित किया है, उनके लिए CSR समिति का गठन करना आवश्यक होगा।

कंपनी (संशोधन) अधिनियम, 2019 के अनुसार, ‘कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी’, कंपनियों के तीन वित्तीय वर्ष के पूरे होने पर लागू होता है।

व्यय की जाने वाली राशि:

  • कंपनियों को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में, तत्काल पूर्ववर्ती तीन वित्तीय वर्षों के दौरान अर्जित अपने औसत शुद्ध लाभ का कम से कम 2% ‘कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी’ के रूप में व्यय करना अनिवार्य है।
  • जिन कंपनियों ने 3 वित्तीय वर्ष पूरे नहीं किए हैं, उनके लिए पिछले वित्तीय वर्षों में अर्जित औसत शुद्ध लाभ पर CSR की गणना की जाएगी।

इंस्टा लिंक्स:

कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व

मेंस लिंक:

पर्यावरण संरक्षण से संबंधित विकास कार्यों के लिए भारत में गैर सरकारी संगठनों की भूमिका को किस प्रकार मजबूत किया जा सकता है? प्रमुख बाधाओं पर प्रकाश डालते हुए विवेचना कीजिए। (यूपीएससी 2015)

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययनIII


 

विषय: उदारीकरण का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव, औद्योगिक नीति में परिवर्तन तथा औद्योगिक विकास पर इनका प्रभाव।

अंतरराष्ट्रीय व्यापार को ‘रुपये’ में किए जाने पर सरकार का जोर: क्यों और कैसे

सदर्भ: इस आर्टिकल में ‘सरकार द्वारा अंतर्राष्ट्रीय व्यापार ‘रुपये’ में किए जाने पर जोर दिए जाने’ के बारे में महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर चर्चा की गयी है।

वर्तमान व्यवस्था: वर्तमान में अधिकांश व्यापार अमेरिकी डॉलर में किया जाता है, जिसमें किसी आयातक को भारत से वस्तुओं का आयात करने पर अमेरिकी डॉलर में भुगतान करना पड़ता है और जिससे निर्यातक को कठिनाई होता है, क्योंकि उसे डॉलर को भारत में उपयोग के लिए ‘भारतीय रुपये’ में परिवर्तित करना पड़ता है। .

‘भारतीय रुपए में भुगतान प्रणाली’ पर किया जा रहा कार्य:

  • किसी भी देश के साथ व्यापार लेनदेन का निपटान करने के लिए, भारत में स्थित बैंकों द्वारा ‘व्यापार के लिए’ भागीदार देश के अभिकर्ता बैंक/बैंकों में ‘वोस्ट्रो खाते’ (Vostro accounts) खोले जाएंगे।
  • भारतीय आयातक, इन खातों में अपने आयात के लिए ‘भारतीय रुपए’ (INR) में भुगतान कर सकते हैं। आयात से अर्जित होने वाली आय का उपयोग, भारतीय निर्यातकों को ‘भारतीय रुपये में भुगतान करने के लिए’ किया जा सकता है।

‘वोस्ट्रो खाता’ (Vostro account), किसी अभिकर्ता बैंक (correspondent bank) द्वारा किसी अन्य बैंक की ओर से रखा जाने वाला ‘खाता’ होता है – उदाहरण के लिए, HSBC वोस्त्रो खाता भारत में एसबीआई द्वारा प्रबंधित किया जाता है।

 

रुपये में कारोबार किए जाने (ट्रेडिंग) के फायदे:

  • इससे ‘रूस’ के साथ व्यापार करने में आसानी होगी;
  • डॉलर के बहिर्वाह पर नियंत्रण;
  • रुपये के अवमूल्यन में कमी;
  • भारत से निर्यात पर जोर देते हुए वैश्विक व्यापार के विकास को बढ़ावा; और
  • भारतीय रुपये में वैश्विक व्यापारिक समुदाय की बढ़ती रुचि का समर्थन करना।

सरकारी उपाय:

भारतीय रिजर्व बैंक ने चालान (invoicing), भुगतान और निर्यात/आयात का भारतीय रुपए’ (INR) में निपटान करने हेतु एक अतिरिक्त व्यवस्था की है।

सीमाएं:

  • इस व्यवस्था से ‘रुपये के अवमूल्यन’ को किसी भी हद तक रोकने में मदद की उम्मीद नहीं है।
  • चूंकि, ‘रुपये’ की विश्वसनीयता ‘अमेरिकी डॉलर’ से कम है अतः सभी देश ‘रुपये’ में व्यापार करने के लिए सहमत नहीं हो सकते।

इंस्टा लिंक:

आरबीआई द्वारा ‘रुपये’ में वैश्विक व्यापार निपटान की अनुमति

मेंस लिंक:

यद्यपि, भारत और रूस नए संबंधो की तलाश में लगे हैं, तब भी वे एक-दूसरे के सदाबहार दोस्त बने हुए हैं। टिप्पणी कीजिए। (10 अंक)

स्रोत: द हिंदू

 


मुख्य परीक्षा संवर्धन हेतु पाठ्य सामग्री (नैतिकता/मुख्य)


वरिष्ठ नागरिकों को साहचर्य प्रदान करने वाला एक स्टार्ट-अप-‘गुडफेलो’

वरिष्ठ नागरिकों को ‘साहचर्य’ (Companionship) प्रदान करने वाले एक स्टार्टअप ‘गुडफेलो’ (Goodfellows) के संस्थापक शांतनु नायडू का विश्वास है कि ‘पीढ़ियां’ एक-दूसरे से कितना कुछ सीख सकती हैं।

 

  • गुडफेलो की टैगलाइन “एवरीथिंग ग्रैंडकिड्स डू” (Everything grandkids do) है, और ठीक इसी तरह यह संस्था काम करती है।
  • इस मंच की सदस्यता लेने वाले वरिष्ठ नागरिकों को 18 से 30 आयु वर्ग के स्नातकों के साथ जोड़ दिया जाता है, जो समय के साथ इन बुजुर्गों साथ एक सार्थक बंधन बनाते हैं।
  • इस स्टार्टअप में निवेश करने वाले ‘रतन टाटा’ ने अपनी आशा व्यक्त की है, कि इस निवेश से ‘युवा गुडफेलो टीम’ को विकसित होने में मदद मिलेगी।

वस्तुस्थिति:

  • सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में 15 मिलियन वृद्ध लोग- अपने साथी को खो देने या उनके परिवारों को अपरिहार्य रोजगार दायित्वों के कारण दूर जाने की वजह से अकेले रह रहे हैं।
  • अकेलेपन या साहचर्य की कमी की समस्या, वरिष्ठ वयस्कों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में गिरावट में योगदान देने वाला मुख्य कारक है। इस समस्या को ‘गुडफेलो’ द्वारा संबोधित किया जा रहा है।

साहचर्य की बढ़ती आवश्यकता

शोजी मोरिमोटो (Shoji Morimoto) नामक एक जापानी व्यक्ति, अपने ग्राहकों का बस एक साथी के रूप में ‘साहचर्य’ (Companionship) देने के लिए प्रति बुकिंग 10,000 येन ($71) चार्ज करता है।

  • ‘मोरिमोटो’ के काम की विचित्र प्रकृति सोचने पर मजबूर करती है, और एक ऐसे समाज पर सवाल उठाती है, जो उत्पादकता को महत्व देता है और बेकारता का उपहास करता है।
  • एक ऐसी दुनिया में जहाँ लोग कई माध्यमों से परस्पर जुड़े रहते है, एक सामान्य से ‘साहचर्य’- जोकि मुक्त रूप से उपलब्ध होना चाहिए- के लिए इतने सारे लोग भुगतान करने को तैयार हैं। यह ‘अकेलेपन’ की गंभीर रुग्णता की बात करता है।

रोजगार-योग्य कौशल पर संशोधित पाठ्यक्रम

हाल ही में, कौशल विकास मंत्रालय द्वारा ‘फ्यूचर राइट स्किल्स नेटवर्क’ (क्वेस्ट एलायंस, एक्सेंचर, सिस्को आदि के सहयोग) से भारत के युवाओं को कौशल प्रदान करने के लिए ‘रोजगार-योग्य कौशल पर संशोधित पाठ्यक्रम’ लॉन्च किया गया है।

15,600 से अधिक सरकारी और निजी ‘औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों’ (आईटीआई) के 2.5 मिलियन से अधिक छात्र इस कार्यक्रम से लाभान्वित होंगे, जिसमें हिंदी और अंग्रेजी में एक नया और विस्तारित 120 घंटे का पाठ्यक्रम शामिल है।

‘फ्यूचर राइट स्किल्स नेटवर्क’ के बारे में:

  • फ्यूचर राइट स्किल्स नेटवर्क भारत के युवाओं को भविष्य के लिए तैयार करने के उद्देश्य से एक व्यापक मिशन के साथ एक्सेंचर, सिस्को और जेपी मॉर्गन द्वारा एक सामूहिक प्रयास है।
  • नेटवर्क को कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के तहत प्रशिक्षण महानिदेशालय के साथ साझेदारी में नागरिक समाज के संगठनों और राज्य सरकारों द्वारा समर्थित किया जाता है।

‘क्वेस्ट एलायंस’ के बारे में:

क्वेस्ट एलायंस एक गैर-लाभकारी ट्रस्ट है, जो 21वीं सदी के युवाओं को अपने-आप शिक्षण के क्रम में सक्षम करके कौशल से लैस करता है।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


यूनेस्को का ग्लोबल लर्निंग सिटीज नेटवर्क

संदर्भ:

भारतीय शहरों में केरल के ‘निलम्बूर’ (Nilambur) और त्रिशूर (Thrissur) शहर यूनेस्को से मान्यता-प्राप्त शहर बन गए हैं।

  • तेलंगाना के दूसरे सबसे बड़े शहर ‘वारंगल’ सहित यह दोनों शहर ‘यूनेस्को के ग्लोबल लर्निंग सिटीज नेटवर्क’ (UNESCO Global Network of Learning Cities) में शामिल होने वाले देश के पहले शहर हैं।
  • यूनेस्को की वेबसाइट के अनुसार, ‘ग्लोबल लर्निंग सिटीज नेटवर्क’ एक वैश्विक नीति-उन्मुख नेटवर्क है, जो “प्रेरणा, जानकारी और सर्वोत्तम पद्धतियाँ” प्रदान करता है।

लर्निंग सिटी (learning city) को परिभाषित करने वाली छह विशेषताएं:

  1. समावेशी शिक्षा (inclusive learning) की बढ़ावा देने हेतु हर क्षेत्र में अपने संसाधनों का प्रभावी ढंग से इस्तेमाल।
  2. परिवारों और समुदायों में ‘शिक्षा’ को पुनर्जीवित करना।
  3. कार्यस्थलों पर और उनके लिए ‘सीखने’ की सुविधा प्रदान करना।
  4. आधुनिक शिक्षण तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देना।
  5. सीखने की गुणवत्ता और उत्कृष्टता में वृद्धि।
  6. जीवन भर सीखने की संस्कृति को बढ़ावा देना।

विकिपीडिया पर सामग्री अनुशोधन

हाल ही में, क्रिकेटर अर्शदीप सिंह के विकिपीडिया पृष्ठ को संपादित (अनुशोधन) करके ‘भ्रामक जानकारी’ दिए जाने पर, भारत ने विकिपीडिया के अधिकारियों को तलब किया है। विकिपीडिया के संशोधित पेज पर अर्शदीप सिंह को “खालिस्तानी” बताया गया था।

विकिपीडिया’ के बारे में:

  • ‘विकिपीडिया’ (Wikipedia), मुक्त सहयोग और एक विकी-आधारित संपादन प्रणाली के माध्यम से स्वयंसेवियों के एक समुदाय द्वारा लिखित और अनुरक्षित ‘बहुभाषी मुफ्त ऑनलाइन विश्वकोश’ है।
  • पारंपरिक विश्वकोशों (Encyclopedias) के विपरीत, जिनमें पहले से स्थापित लेखकों की प्रविष्टियां होती हैं, ‘विकिपीडिया’ की सभी विश्वकोश सामग्री, उपयोगकर्ताओं द्वारा तैयार की जाती है।

विकिपीडिया’ के लाभ:

  • यह ज्ञान के ‘लोकतंत्रीकरण’ की अनुमति देती है।
  • संपादित करने के लिए निर्बाध पहुंच प्रदान करती है।

हानि:

  • संपादित करने के लिए निर्बाध पहुंच के परिणामस्वरूप, इसके द्वारा ‘होस्ट’ की जाने वाली जानकारी की विश्वसनीयता से संबंधित चिंताएं उत्पन्न हुई हैं।

संबंधित भारतीय कानून:

  • सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 79: अधिनियम और उसके नियमों के तहत सम्यक तत्परता से ‘शर्तों’ का पालन करना चाहिए।
  • सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021: सूचना की कुछ श्रेणियां हैं जिन्हें एक मध्यस्थ को अपने प्लेटफॉर्म पर होस्ट या अपलोड करने की अनुमति नहीं देनी चाहिए।
  • आईटी नियम, 2021: आपत्तिजनक सामग्री के बारे में वास्तविक जानकारी तब होती है जब किसी मध्यस्थ को न्यायालय के आदेश द्वारा या आपत्तिजनक सामग्री को हटाने की मांग करने वाली उपयुक्त एजेंसी के आदेश के माध्यम से अधिसूचित किया गया हो।

 

आईटी अधिनियम की धारा 66A

संदर्भ: सुप्रीम कोर्ट ने 2015 में अदालत द्वारा इसे असंवैधानिक ठहराए जाने के बावजूद अपराधों के लिए ‘सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66A’ (Section 66A of the Information Technology Act) के तहत राज्यों द्वारा प्राथमिकी दर्ज करना जारी रखने पर “गंभीर चिंता” व्यक्त की है।

सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69 (A):

 आईटी अधिनियम, 2000 (IT Act, 2000) की धारा 69 (A) के अंतर्गत केंद्र सरकार के लिए ‘सोशल मीडिया मध्यस्थों’ को ब्लॉकिंग आदेश जारी करने की अनुमति प्रदान की गयी है।

  • धारा 66A (Section 66A), कंप्यूटर या किसी अन्य संचार उपकरण जैसे मोबाइल फोन या टैबलेट के माध्यम से “आपत्तिजनक” संदेश भेजने पर सजा को परिभाषित करती है।
  • इसके तहत दोषी को अधिकतम तीन साल की जेल और जुर्माना हो सकता है।

24 मार्च, 2015 को ‘श्रेया सिंघल बनाम भारत संघ’ मामले में, सर्वोच्च न्यायालय ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66ए को पूरी तरह से रद्द कर दिया और फैसला सुनाया कि यह अनुच्छेद 19(1) (a) का उल्लंघन है।

धारा 66A को निरसित किए जाने के कारण:

सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, धारा 66A संविधान के अनुच्छेद 19(1) (a) के तहत, मनमाने ढंग से, अतिशय पूर्वक और असमान रूप से ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार’ पर हमला करती है, और इन अधिकारों और इन पर लगाए जाने वाले उचित प्रतिबंधों के बीच संतुलन को बिगाड़ती है। इसके अलावा, प्रावधान के तहत अपराधों की परिभाषा, व्याख्या के लिए ‘खुली हुई’ (open-ended) और अपरिभाषित है।

 

केंद्र सरकार – इंटरनेट शटडाउन जारी करने के लिए एकमात्र शासी प्राधिकरण

संदर्भ: इंटरनेट शटडाउन (Internet shutdown) आदेश जारी करने हेतु एकमात्र शासी प्राधिकरण ‘केंद्र सरकार’ होना चाहिए, और राज्य सरकारों को केवल दूरसंचार विभाग (DoT) द्वारा निर्धारित दिशानिर्देशों के आधार पर ऐसे आदेश जारी करने चाहिए।

प्रमुख बिंदु:

  • ‘इंटरनेट शटडाउन’ संबंधी आदेश ‘दूरसंचार सेवाओं के अस्थायी निलंबन (सार्वजनिक आपातकाल या सार्वजनिक सुरक्षा) नियम, 2017’ (Temporary Suspension of Telecom Services (Public Emergency or Public Safety) Rules, 2017) के तहत नियंत्रित होते हैं।
  • अस्थायी निलंबन “सार्वजनिक आपातकाल या सार्वजनिक सुरक्षा के कारण” हो सकता है, और दूरसंचार विभाग द्वारा बनाए गए नियम- केंद्रीय और राज्य स्तर पर गृह मंत्रालय के वरिष्ठ नौकरशाहों को शटडाउन का आदेश देने की शक्ति प्रदान करते हैं।

इंटरनेट शटडाउन की आवृत्ति:

  • नागरिक समाज का अनुमान: भारत ने पिछले चार वर्षों में सबसे अधिक इंटरनेट शटडाउन किए गए है।
  • वैश्विक डिजिटल अधिकार समूह एक्सेस: भारत में पिछले साल 106 बार इंटरनेट शटडाउन किया गया।
  • भारत, घरेलू इंटरनेट शटडाउन की कुल अवधि के मामले में म्यांमार और नाइजीरिया के बाद तीसरे स्थान पर है।

 

मूलभूत शिक्षण अध्ययन सर्वेक्षण

संदर्भ: शिक्षा मंत्रालय और NCERT द्वारा कराए गए ‘मूलभूत शिक्षण अध्ययन’ (Foundational Learning Study – FLS) सर्वेक्षण से पता चला है, कि कक्षा 3 के 11% छात्रों में बुनियादी गणित कौशल की कमी है और लगभग 37% में गणित में बुनियादी कौशल की कमी है।

इस सर्वेक्षण में तमिलनाडु ने खराब प्रदर्शन किया है।

मूल बातें:

‘मूलभूत शिक्षण’ (Foundational Learning ) भविष्य की सभी शिक्षाओं का आधार बनता है, और इसके दो मुख्य स्तंभ होते हैं – आधारभूत साक्षरता (foundational literacy) और आधारभूत अंकगणित (foundational numeracy), जिनको किसी बच्चे द्वारा ग्रेड 3 तक हासिल करने की अपेक्षा की जाती है।

  • ‘आधारभूत साक्षरता’ का अर्थ है ग्रेड के अनुसार समझ के साथ पढ़ने में सक्षम होना।
  • आधारभूत अंकगणित: गणित की बुनियादी समस्याओं (जैसे जोड़ और घटाव) को हल करने की बच्चे की क्षमता।
  • मूलभूत साक्षरता और संख्यात्मकता (Foundational Literacy and Numeracy – FLN) राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 के प्रमुख विषयों में से एक है।

संबंधित अवधारणाएं:

  • लर्निंग पॉवर्टी (Learning Poverty): विश्व बैंक द्वारा ‘अध्ययन के पिछड़ेपन’/लर्निंग पॉवर्टी को “10 साल की उम्र तक एक साधारण पाठ को पढ़ने और समझने में असमर्थता” के रूप में परिभाषित किया गया है।
  • जब कोई बच्चा पढ़ नहीं पाता है, तो यह अक्षमता, स्कूल और उसके बाद उस छात्र के सफल होने की क्षमता को और बाधित करता है।

मूलभूत साक्षरता और संख्यात्मकता (FLN)  के लिए पहल: ‘निपुण भारत’। इस पहल का उद्देश्य, यह सुनिश्चित करना है कि ग्रेड 3 के अंत तक सभी बच्चे वर्ष 2026-27 तक बुनियादी रूप से सीखने के मानकों को हासिल करें।

‘मूलभूत शिक्षण अध्ययन’ (FLS) सर्वेक्षण के बारे में:

इस सर्वेक्षण में, प्रत्येक बच्चे के साथ निजी तौर पर साक्षात्कार लिया जाता है और फिर उनके सीखने के कौशल का आकलन किया जाता है। यह ‘राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण’ से भिन्न है, जिसमें बहु-विकल्पीय सवालों का उपयोग करके कक्षा 3, 5,8 और 10 के छात्रों के लिए सीखने के परिणामों का परीक्षण किया जाता है।

 

सहकारी समितियों पर राष्ट्रीय राजनीति

संदर्भ: सरकार द्वारा एक ‘राष्ट्रीय सहकारी नीति’ (National cooperation Policy – NCP) लागू किए जाने पर विचार किया जा रहा है, और सहकारिता आंदोलन को मजबूत करने के उद्देश्य से NCP का मसौदा तैयार करने के लिए एक राष्ट्रीय स्तर की समिति का गठन किया गया है।

‘सहकारी समितियां’ (Cooperative Societies) क्या होती हैं?

  • सहकारी समिति, संयुक्त-स्वामित्व और लोकतांत्रिक रूप से नियंत्रण के माध्यम से, अपने सामूहिक आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक आवश्यकताओं और आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए, स्वेच्छा से एकजुट हुए व्यक्तियों का एक स्वायत्त संघ होती है।
  • इन समितियों में, लाभकारिता की आवश्यकता, समिति के सदस्यों की आवश्यकताओं और समुदाय के व्यापक हितों से संतुलित होती है।

भारत में विभिन्न श्रेणियों- कृषि-प्रसंस्करण, डेयरी, मत्स्य पालन, आदि के तहत लगभग 8.5 लाख सहकारी समितियां (लगभग 29 करोड़ सदस्य) कार्यरत हैं।

 

WEST पहल

संदर्भ: भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (पीएसए) के कार्यालय द्वारा, विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं को योगदान करने में सक्षम बनाने के लिए “इंजीनियरिंग, विज्ञान और प्रौद्योगिकी में महिलाएं (Women in Engineering, Science and Technology Initiative – WEST)” नाम की एक पहल का शुभारंभ किया गया है।

  • WEST, एक नई ‘भारतीय विज्ञान प्रौद्योगिकी और इंजीनियरिंग सुविधाओं का खाका’ /आई-स्टेम (Indian Science Technology and Engineering facilities MapI-STEM) पहल है, जिसमे अनुसंधान और विकास में सहयोग को बढ़ावा देने और साझा करने के लिए एक वेब पोर्टल का उपयोग किया जाएगा।
  • I-STEM,प्रधान मंत्री विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार सलाहकार परिषद’ (PM-STIAC) मिशन के अंतर्गत आता है, जो मंत्रालयों, संस्थानों और उद्योग में वैज्ञानिक क्रॉस-सेक्टरल तालमेल में मदद करता है।

अन्य योजनाएं:

  • किरण (महिला वैज्ञानिकों को प्रोत्साहित करने के लिए);
  • क्यूरी (महिला विश्वविद्यालयों में बुनियादी ढांचे का विकास करने के लिए);
  • विज्ञान ज्योति (उच्च शिक्षा में लड़कियों को STEM का अनुसरण करने के लिए)

चित्र: PM-STIAC मिशन के घटक

आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना

संदर्भ: सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र में जारी संकट के संकेतों के बीच,  मई 2020 में कोविड -19 राहत पैकेज के हिस्से के रूप में शुरू की गई ‘आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना’ (ECLGS) के तहत वितरित प्रत्येक छह ऋणों में से एक ऋण ‘खराब’ हो गया है।

ECLGS के बारे में:

आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (ECLGS) को मई 2020 में आत्मनिर्भर भारत अभियान पैकेज के एक भाग के रूप में शुरू किया गया था।

  • इसका उद्देश्य कोरोनोवायरस के कारण लगाए गए लॉकडाउन से उत्पन्न संकट को कम करने के लिए, विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को क्रेडिट प्रदान करना था।
  • इसके तहत, MSME, व्यावसायिक उद्यमों, MUDRA उधारकर्ताओं और व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए निजी ऋणों को 29 फरवरी 2020 तक उनके बकाया ऋण के 20% की सीमा तक पूरी तरह से गारंटीकृत और संपार्श्विक-मुक्त अतिरिक्त ऋण प्रदान करता है।

 

थर्मल पावर प्लांट का विस्तार

संदर्भ: ‘पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय’ (MoEFCC) ने सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) मानदंडों पर ‘थर्मल पावर प्लांट’ की सभी श्रेणियों को दो साल का विस्तार दिया है, हालांकि, पार्टिकुलेट मैटर (PM) और नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) मानदंडों को पूरा करने के लिए पुरानी ‘समय सीमा’ बरकरार रखी है।

सल्फर डाइऑक्साइड प्रदूषण के 50% से अधिक के लिए ‘कोयला बिजली संयंत्र’ जिम्मेदार हैं।

पृष्ठभूमि:

MoEFCC ने 2015 में PM, SO2, NOx, मरकरी और कोयला आधारित थर्मल पावर प्लांट के लिए जल के उपयोग हेतु पर्यावरणीय मानदंड 2017 तक पूरा करना निर्धारित किया था, लेकिन बाद में इसे 2022 तक बढ़ा दिया गया।

  • इन मानदंडों में ‘रिट्रोफिटिंग’ और ‘फ्लू गैस डिसल्फराइजेशन’ (SO2 को हटाने के लिए), सेलेक्टिव कैटेलिटिक रिडक्शन (SCR) तकनीक (NOx को हटाने के लिए) का उपयोग करना अनिवार्य किया गया है।
  • सेलेक्टिव कैटेलिटिक रिडक्शन (SCR) प्रणाली में एक जलीय यूरिया समाधान का उपयोग किया जाता है, जिसे ‘एड ब्लू’ (AdBlue) के नाम से जाना जाता है, जिसे ‘SCR उत्प्रेरक कनवर्टर’ में एक विशिष्ट तरीके से इंजेक्ट करने पर अमोनिया में परिवर्तित किया जाता है।
  • ‘फ़्लू गैसें’ किसी संयत्र की चिमनी से निकलने वाली गैसें होती हैं।

 

उत्कृष्टता केंद्र – उपग्रह और मानव रहित रिमोट व्हीकल पहल

संदर्भ: ड्रोन का उपयोग कर भूमि सर्वेक्षण पर दुनिया का पहला मानक स्थापित करते हुए, रक्षा मंत्रालय के ‘उत्कृष्टता केंद्र – उपग्रह और मानव रहित रिमोट व्हीकल इनिशिएटिव’ (Centre of Excellence – Satellite and Unmanned Remote Vehicle Initiative : CoE – SURVEI) ने तकनीकी मापदंडों को निर्धारित करते हुए एक ड्राफ्ट अवधारणा पत्र प्रकाशित किया है जो इमेजेज़ का अनुमान लगाने के लिए ड्रोन सर्वेक्षण उत्पादन की गुणवत्ता के एक संदर्भ मानक के रूप में काम कर सकता है।

ड्राफ्ट मानकों में ड्रोन आउटपुट की गुणवत्ता का मूल्यांकन करने के लिए 19 पैरामीटर और इमेज गुणवत्ता का अनुमान लगाने के लिए 8 एक्सटेंशन मैट्रिक्स / तकनीकें निर्धारित की गई हैं, इसके अलावा नमूना बेंचमार्किंग का संकेत दिया गया है।

चीन का पूरी तरह से सौर ऊर्जा-चालित ‘सेमी-सैटेलाइट ड्रोन’

संदर्भ: चीन के पहले पूरी तरह से सौर ऊर्जा से चलने वाले मानव रहित हवाई वाहन ने अपनी पहली परीक्षण उड़ान सफलतापूर्वक पूरी कर ली है, जिसमें सभी ऑनबोर्ड सिस्टम बेहतर तरीके से काम कर रहे हैं।

विशेषताएँ:

164-फीट के पंखों के साथ, ड्रोन एक बड़ी मशीन है जो पूरी तरह से सौर पैनलों द्वारा संचालित होती है। Qimingxing-50, या Morning Star-50 नाम का यह ड्रोन 20 किमी की ऊंचाई से ऊपर उड़ता है जहां बादलों के बिना स्थिर वायु प्रवाह होता है।

  • यह पंख, इन ड्रोनों को विस्तारित अवधि के लिए क्रियाशील रहने के लिए, सौर उपकरणों का अधिकतम उपयोग करने में मदद करते हैं।
  • ड्रोन, निकट-अंतरिक्ष में – पृथ्वी की सतह से 20 किमी से 100 किमी ऊपर कार्य कर सकते हैं – जिससे ये ड्रोन, उपग्रह की भांति कार्यों को करने में सक्षम हो जाते हैं।

रेलवे भूमि के उपयोग के लिए मानदंडों में ढील

संदर्भ: सरकार ने विभिन्न संस्थाओं के लिए लंबी अवधि के पट्टे पर रेलवे की जमीन पर ‘बुनियादी ढांचे’ की एक श्रृंखला स्थापित करना आसान और सस्ता बना दिया है।

रेलवे की जमीन का इस्तेमाल, अब 35 साल के लिए 1 रुपये प्रति वर्ग मीटर प्रति वर्ष की दर से सौर संयंत्र, सीवेज और जल उपचार सुविधाएं स्थापित करने के लिए किया जा सकता है और ‘निजी-सार्वजनिक भागीदारी के माध्यम से अस्पतालों और केंद्रीय विद्यालय संगठन के साथ स्कूलों को 1 रुपये प्रति वर्ग मीटर प्रति वर्ष 60 वर्षों तक के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन:

  • ‘राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन’ (National Monetisation pipeline – NMP) का उद्देश्य निजी क्षेत्र को शामिल करके ‘ब्राउनफील्ड परियोजनाओं’ में मूल्य को अनलॉक करना, परियोजनाओं में स्वामित्व अधिकार नहीं देते हुए उन्हें राजस्व अधिकार हस्तांतरित करना, और इस तरह से अर्जित धन-राशि का उपयोग पूरे देश में बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए करना है।

पीएम गतिशक्ति:

  • 2020 में लॉन्च किया गया, यह एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो सड़क और राजमार्ग, रेलवे, शिपिंग, पेट्रोलियम और गैस, बिजली, दूरसंचार, शिपिंग और विमानन सहित 16 मंत्रालयों को जोड़ता है।
  • इसका उद्देश्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की समग्र योजना और निष्पादन सुनिश्चित करना है।

राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र

संदर्भ: स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने ‘संचारी रोगों’ के नियंत्रण हेतु रोग निगरानी के लिए ‘राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (National Centre for Disease Control NCDC) की 6 नई शाखाएं शुरू की हैं।

  • NCDC की स्थापना जुलाई 1963 में महामारी विज्ञान में अनुसंधान और संचारी रोगों के नियंत्रण और भारतीय मलेरिया संस्थान की गतिविधियों को पुनर्गठित करने के लिए की गई थी।
  • यह, प्रशिक्षित स्वास्थ्य देखभाल जनशक्ति भी प्रदान करता है, अनुसंधान और विश्लेषण करता है और बीमारियों के प्रकोप की जांच करता है।

 

 

‘गैर-संचारी रोगों’ की रोकथाम और नियंत्रण

संदर्भ: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र के सदस्य देशों ने 2022-2030 तक दक्षिण-पूर्व एशिया में ‘गैर-संचारी रोगों’ (Noncommunicable diseases – NCDs) की रोकथाम और नियंत्रण के लिए कार्यान्वयन रोडमैप का समर्थन किया है।

दो कार्य योजनाएं:

  • 2022–2030 तक दक्षिण-पूर्व एशिया में ‘मुखीय स्वास्थ्य’ (Oral health)
  • दक्षिण-पूर्व एशिया 2022-2030 में ‘एकीकृत जन-केंद्रित नेत्र देखभाल’ के लिए कार्य योजना।

गैर संचारी रोग:   

गैर-संचारी रोग’ (Noncommunicable diseases – NCDs) आनुवंशिक, शारीरिक, पर्यावरणीय और व्यवहारिक कारकों के संयोजन का परिणाम स्वरूप होने वाली पुरानी एवं लंबी अवधि की बीमारियां हैं।

 

NSCN (K) के साथ युद्धविराम समझौता

संदर्भ:

गृह मंत्रालय ने ‘नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड’ के निकी सूमी गुट के साथ संघर्ष विराम समझौते को आगे बढ़ा दिया है।

भारत सरकार ने 2015 में प्रमुख नागा समूह NSCN-IM के साथ एक रूपरेखा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।

पृष्ठभूमि:

  • ‘नागा विद्रोह’ की शुरुआत ‘स्वतंत्रता की मांग’ से उत्पन्न हुई थी।
  • हालांकि स्वतंत्रता की मांग काफी हद तक कम हो गई है, फिर भी ग्रेटर नागालैंडया नागालिमकी मांग सहित अंतिम राजनीतिक समझौते का लंबित मुद्दा बना हुआ है।

पूर्वोत्तर के विद्रोही समूहों के साथ शांति समझौते:

 


मानचित्रण (चर्चा में)