विषयसूची
सामान्य अध्ययन-II
- सिविल सेवक और उनके द्वारा विधि एवं शासन पर विचारों को अभिव्यक्ति पर सवाल
- यूजीसी द्वारा कॉलेजों को समूहबद्ध करने का प्रस्ताव
सामान्य अध्ययन-III
- सिंगल यूज प्लास्टिक
सामान्य अध्ययन-IV
- प्रतिनिधि विज्ञापन
मुख्य परीक्षा संवर्धन हेतु पाठ्य सामग्री (निबंध/नैतिकता)
- सुप्रीम कोर्ट में ‘मैरी रॉय’ का ऐतिहासिक मामला
- जापानी नर्सिंग होम में ‘बेबी वर्कर’
प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य
- राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के अनुसार ‘भारत में अपराध’
- खरीद प्रबंधक सूचकांक
- सीमा-पारीय संरक्षित क्षेत्र
- 2021 में ग्रीनहाउस गैस और समुद्र का स्तर रिकॉर्ड ऊंचाई पर
- मंगल ग्रह पर ऑक्सीजन: MOXIE
- प्रोटीन का जलयोजन
- सर्वावैक वैक्सीन
- NDPS अधिनियम
- वोस्तोक-2022
सामान्य अध्ययन– II
विषय: शासन व्यवस्था, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्त्वपूर्ण पक्ष, ई-गवर्नेंस- अनुप्रयोग, मॉडल, सफलताएँ, सीमाएँ और संभावनाएँ; नागरिक चार्टर, पारदर्शिता एवं जवाबदेही और संस्थागत तथा अन्य उपाय।
सिविल सेवक और उनके द्वारा विधि एवं शासन पर विचारों को अभिव्यक्ति पर सवाल
संदर्भ:
हाल ही में, तेलंगाना की एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी ‘स्मिता सभरवाल’ ने बिलकिस बानो के समर्थन में अपने व्यक्तिगत ट्विटर अकाउंट से ट्वीट किया और गुजरात सरकार के फैसले पर सवाल उठाया। इसके बाद यह विवाद उत्पन्न हो गया, कि क्या उन्होंने 1964 के ‘केंद्रीय सिविल सेवा (आचरण) नियमावली’ का उल्लंघन किया है।
एक नौकरशाह के रूप में ‘स्मिता सभरवाल’ द्वारा ट्वीट करने पर प्रतिक्रियाएं:
क्या उनका यह ट्वीट करना गलत था?
हाँ, उनका यह ट्वीट करना गलत था।
- अनुशासनात्मक नियम: केंद्रीय सिविल सेवा (आचरण) नियम’, किसी सरकारी कर्मचारी को किसी राजनीतिक संगठन, या इस तरह के किसी भी संगठन का सदस्य बनने से रोकते हैं, या देश के शासन से संबंधित किसी भी चीज के संबंध में स्वतंत्र रूप से अपने विचार अभिव्यक्त करने से रोकते हैं।
- इसके अलावा, ‘स्मिता सभरवाल’ निर्णय लेने की प्रक्रिया में कोई ‘हितधारक’ नहीं थी।
नहीं, उनका यह ट्वीट करना सही था।
- विधायिका द्वारा निर्मित कानून: विधायिका द्वारा बनाए गए वैध कानून को छोड़कर, किसी के मौलिक अधिकार को कम नहीं किया जा सकता है।
- लिपिका पॉल बनाम त्रिपुरा राज्य: इस मामले में अदालत ने अपने निर्णय में कहा था, कि एक सरकारी कर्मचारी (याचिकाकर्ता) अपनी ‘अभिवयक्ति की स्वतंत्रता’ के अधिकार से रहित नहीं होता है। उसके इस मौलिक अधिकार को केवल एक वैध कानून द्वारा परिमित या कम किया जा सकता है। हालांकि, सरकारी कर्मचारी का यह अधिकार, त्रिपुरा में लागू ‘आचरण नियमों’ में निर्धारित सीमाओं को के अधीन होगा।
- केरल उच्च न्यायालय: केवल एक सरकारी कर्मचारी होने के कारण किसी को भी अपने विचार व्यक्त करने से नहीं रोका जा सकता है।
- संवैधानिक सिद्धांत और कानून का शासन: सिविल सेवक का धर्म, संवैधानिक सिद्धांतों को अक्षरशः भाषा और भाव की दृष्टि से पालन करना तथा विधि के शासन को बनाए रखना होता है।, जबकि इस मामले में संविधान की भावना और विधि के शासन, दोनों, को विकृत किया जा रहा था।
क्या ‘केंद्रीय सिविल सेवा (आचरण) नियमावली’ का नियम 9 (Rule 9 of Central Civil Services (Conduct) Rules), संविधान के अनुच्छेद 19 का उल्लंघन है?
- नियम 9: यह नियम, किसी सरकारी कर्मचारी को ऐसी राय या तथ्य- लिखित, टेलीकास्ट या प्रसारण रूप में देने से प्रतिबंधित करता है जिसका केंद्र सरकार या राज्य सरकार की किसी भी मौजूदा या हालिया नीति या कार्रवाई पर आलोचनात्मक प्रभाव पड़ता हो।
- आचरण नियम (Conduct Rules): संविधान में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता दी गई है, लेकिन इन ‘आचरण नियमों’ को इसलिए लगाया जाता है क्योंकि संगठन के कार्य करने के लिए किसी संगठन में कुछ अनुशासन होना चाहिए।
जब सरकारी फैसलों पर टिप्पणी करने की बात आती है, तो क्या यह सिविल सेवकों को ‘प्रतिबंध-मुक्त’ करने का सही समय होता है?
- सोशल मीडिया के माध्यम से नीतियों के बारे में अधिक पारदर्शिता बनाना एक सरकारी अधिकारी का कर्तव्य है।
- इस पर प्रत्येक मामले के अनुसार फैसला लिया जा सकता है।
इंस्टा लिंक्स:
केंद्रीय सिविल सेवा (आचरण) नियम
मेंस लिंक:
प्रारंभ में भारत में सिविल सेवाओं को तटस्थता और प्रभावशीलता के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए डिज़ाइन किया गया था, जिसकी वर्तमान संदर्भ में कमी प्रतीत होती है। क्या आप इस विचार से सहमत हैं कि सिविल सेवा में व्यापक सुधारों की आवश्यकता है? टिप्पणी कीजिए। (यूपीएससी 2017)
स्रोत: द हिंदू
विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।
यूजीसी द्वारा कॉलेजों को समूहबद्ध करने का प्रस्ताव
संदर्भ: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को ‘बहु-विषयक संस्थानों’ (Multidisciplinary Institutions) में बदलने के लिए दिशानिर्देशों को अंतिम रूप दे दिया है।
पृष्ठभूमि:
- ‘बहु-विषयक संस्थानों’ को बढ़ावा देना ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020’ की एक प्रमुख सिफारिश थी।
- उच्च शिक्षण संस्थानों को बहुविषयक संस्थानों में परिवर्तित करने हेतु दिशानिर्देश: इनका उद्देश्य राज्य सरकारों और विश्वविद्यालयों को उपयुक्त नियम और नीतियां बनाने में मदद करना है।
महत्वपूर्ण बिंदु:
क्लस्टर्स (Clusters) के माध्यम से अकादमिक सहयोग: UGC ने ऑनलाइन और ऑफलाइन मोड में बहु-विषयक शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए ‘उच्च शैक्षणिक संस्थानों’ (Higher Education Institutions – HEIs) के “क्लस्टर” (समूहन) के माध्यम से संस्थानों के बीच अकादमिक सहयोग का सुझाव दिया है।
क्लस्टर सिस्टम का महत्व: क्लस्टर सिस्टम (Cluster System) कम नामांकन वाले एकल-विषयक (सिंगल-स्ट्रीम) संस्थानों की मदद करेगा। इस तरह के केंद्र, ‘राष्ट्रीय मूल्यांकन और प्रत्यायन परिषद’ (NAAC) के प्रत्यायन में अपनी ग्रेड में सुधार करेंगे।
प्रारंभिक चरण के दौरान संबद्ध कॉलेज:
- एक क्लस्टर में शामिल सदस्य कॉलेज, प्रारंभिक चरण में विश्वविद्यालय के तहत संबद्ध कॉलेजों के रूप में कार्य करना जारी रखेंगे। प्रारंभिक वर्षों के बाद, संबद्ध विश्वविद्यालय कॉलेजों के समूह को एक इकाई के रूप में संबद्ध कर सकता है।
- एकल-विषयक (सिंगल-स्ट्रीम) संस्थानों का अन्य बहु-विषयक संस्थानों के साथ, समान अथवा भिन्न प्रबंधन के तहत, विलय।
- भाषा, साहित्य, संगीत, भारत-विद्या / इंडोलॉजी (Indology), खेल आदि जैसे नए विषयों को जोड़कर किसी कॉलेज या विश्वविद्यालय में विभागों की संख्या का विस्तार करना।
क्रेडिट मोबिलिटी: सहयोग और विलय के परिणामस्वरूप शुरू किए गए पाठ्यक्रमों को चुनने वाले छात्र भी भागीदार संस्थानों के बीच ‘क्रेडिट मोबिलिटी’ (Credit Mobility) का लाभ उठा सकते हैं।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस डिवीजन द्वारा ‘एबीसी प्लेटफॉर्म’ (ABC platform) विकसित किया गया है: जिसके तहत-
- छात्रों को एक ‘अकादमिक खाता’ खोलने;
- अपनी पसंद के ‘उच्च शैक्षणिक संस्थानों’ (HEIs) से जुड़ने;
- डिग्री और डिप्लोमा प्राप्त करने के लिए छात्रों द्वारा अर्जित क्रेडिट्स को स्टोर करने, की सुविधा प्रदान की जाती है।
छात्र अनुकूलन कार्यक्रम: दिशानिर्देश, छात्र अनुकूलन कार्यक्रमों (Student Orientation Programmes) को छात्रों के लिए उपलब्ध नए विकल्पों से परिचित कराने के लिए एक महत्वपूर्ण तत्व के रूप में भी चिह्नित करते हैं।
संकायों के लिए क्षमता निर्माण: दिशानिर्देश, संकाय (faculty) के लिए क्षमता निर्माण का सुझाव देते हैं, ताकि वे ‘शिक्षण में वार्षिक पुनश्चर्या कार्यक्रम’ (Annual Refresher Programme in Teaching – ARPIT) जैसे बहु-विषयक शैक्षणिक कार्यक्रमों में शिक्षण, प्रशिक्षण और अनुसंधान कर सकें और साथ ही सीखने के मूल्यांकन उपकरणों में निवेश कर सकें।
विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शिक्षा विभाग की स्थापना: विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शिक्षा विभाग, भविष्य के शिक्षकों को पाठ्यक्रम डिजाइन, शिक्षाशास्त्र, संचार और लेखन सिखाएंगे।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020:
- बहु-विषयक संस्थान: राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (National Education Policy 2020) की परिकल्पना के अनुसार, वर्ष 2040 तक सभी ‘उच्च शिक्षा संस्थानों’ को हजारों की संख्या में छात्रों के नामांकन के साथ ‘बहु-विषयक’ बनने का लक्ष्य रखना चाहिए।
- सीमित सेवा लाभ वाले क्षेत्र: इसमें यह भी कहा गया है कि समानता और समावेशन सुनिश्चित करने के लिए ‘कम सेवा वाले क्षेत्रों’ (Underserved regions) में अधिक उच्च शिक्षा संस्थानों की स्थापना और विकास किया जाएगा।
- नए संस्थानों का निर्माण: 2030 तक हर जिले में या उसके आस-पास एक बड़ा बहु-विषयक उच्च शिक्षा संस्थान होना चाहिए। इस लक्ष्य को मौजूदा उच्च शिक्षा संस्थानों को समेकित, विस्तार और सुधार करने के अलावा नए संस्थान बनाकर हासिल किया जाए।
संबंधित आर्टिकल:
स्कूलों में नामांकन में गिरावट 2025 तक जारी रहेगी: NCERT
- प्राथमिक चरण में नामांकन: राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (NCERT) द्वारा तैयार “प्रोजेक्शन एंड ट्रेंड्स” रिपोर्ट के अनुसार- भारत में प्राथमिक कक्षाओं (ग्रेड I-V) में स्कूल नामांकन में 2011 में गिरावट शुरू हुई थी और इस प्रवृत्ति के वर्ष 2025 तक जारी रहने की संभावना है।
- विकास दर में गिरावट: परिषद ने नामांकन में इस गिरावट के लिए भारत की बाल जनसंख्या की वृद्धि दर में गिरावट को जिम्मेदार ठहराया है।
- उच्च प्राथमिक और माध्यमिक चरणों में गिरावट: उच्च प्राथमिक (कक्षा VI-VIII) और माध्यमिक चरणों (IX-X) में क्रमशः 2016 और 2019 में नामांकन में गिरावट देखी गई है।
- छात्राओं में वृद्धि: छात्राओं की हिस्सेदारी में 1,000 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई।
- अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति: अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के बच्चों के नामांकन में गिरावट का पैटर्न, भारत के नामांकन (कुल) पैटर्न के समान है।
इस रिपोर्ट के उपयोग:
- नीतियां और कार्यक्रम: यह नीति निर्माताओं को उपयुक्त नीतियां और कार्यक्रम तैयार करने में मदद करेगी।
- नए स्कूल: खोले या अपग्रेड किए जाने वाले नए स्कूलों की संख्या के बारे में जानकारी।
- नए शिक्षक: आवश्यक शिक्षकों की संख्या, प्रणाली में संभावित रूप से नामांकित होने वाले बच्चों की संख्या के आधार पर तय की जाती है।
इंस्टा लिंक्स:
मेंस लिंक:
भारत में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए बड़े सुधार की आवश्यकता है। क्या आपको लगता है कि विदेशी शिक्षण संस्थानों के प्रवेश से देश में तकनीकी और उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करने में मदद मिलेगी? चर्चा कीजिए। (यूपीएससी 2015)
प्रीलिम्स लिंक:
- NEP
- ARPIT
- ABC platform
- NAAC
- UGC
स्रोत: द हिंदू, इंडियन एक्सप्रेस
सामान्य अध्ययन– III
विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।
सिंगल यूज प्लास्टिक
संदर्भ: पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा 12 अगस्त, 2021 को ‘प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन संशोधन नियम, 2021’ (Plastic Waste Management Amendment Rules, 2021) अधिसूचित किए गए हैं।
- भारत ने, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण सभा (United Nations Environment Assembly – UNEA) के तहत एक समझौते को तैयार करने संबंधी एक प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए हैं।
- यह समझौता, हस्ताक्षरकर्ताओं के लिए प्लास्टिक के पूरे जीवन चक्र ‘उत्पादन से लेकर निपटान तक’ को संबोधित करने के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी होगा।
सिंगल-यूज़ प्लास्टिक’ क्या है?
जैसा कि नाम से पता चलता है, ‘एकल उपयोग प्लास्टिक’ / ‘सिंगल यूज़ प्लास्टिक’ (Single-Use Plastic), निपटान-योग्य (Disposable) प्लास्टिक का एक रूप होती है, जिसे केवल एक बार इस्तेमाल करके फेंक दिया जाता है, और जिसे किराने की थैलियों, खाद्य पैकेजिंग, बोतलों और स्ट्रॉ आदि की तरह पुनर्चक्रित किया जा सकता है।
वस्तुस्थिति:
- मिंडेरू फाउंडेशन (Minderoo Foundation) की रिपोर्ट (2021) के अनुसार: एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक का, प्लास्टिक के कुल वैश्विक उत्पादन में एक तिहाई हिस्सा होता है, जिसमें से 98% प्लास्टिक जीवाश्म ईंधन से निर्मित होती है।
- भारत, ‘एकल-उपयोग प्लास्टिक अपशिष्ट उत्पादन’ करने वाले शीर्ष 100 देशों में शामिल है। इस सूची में भारत 94वे स्थान पर है, जबकि शीर्ष तीन देश सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया और ओमान हैं।
- भारत में ‘सिंगल यूज़ प्लास्टिक’ (Single-Use Plastic – SUP) का घरेलू उत्पादन सालाना 8 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) है, और सालाना इसका 2.9 MMT आयात किया जाता है।
- भारत में प्रति व्यक्ति ‘एकल-उपयोग प्लास्टिक अपशिष्ट उत्पादन’ 4 किलो है।
- ‘एकल-उपयोग प्लास्टिक’ का सर्वाधिक उपयोग ‘पैकेजिंग’ में किया जाता है। 95% ‘सिंगल यूज़ प्लास्टिक’ टूथपेस्ट से लेकर शेविंग क्रीम से लेकर जमे हुए खाद्य पदार्थों तक ‘पैकेजिंग’ से संबंधित कार्यों में किया जाता है।
‘सिंगल यूज़ प्लास्टिक’: चिंता का कारण
- पर्यावरण को नुकसान: 2019 में दुनिया भर में फेंकी गयी प्लास्टिक – 130 मिलियन मीट्रिक टन – का अधिकाँश ‘सिंगल-यूज प्लास्टिक’ होती है। जिसमे से सभी प्लास्टिक को जला दिया जाता है, लैंडफिल में दबा दिया जाता है या सीधे पर्यावरण में फेंक दिया जाता है।
- ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन: उत्पादन के वर्तमान प्रक्षेपवक्र पर, यह अनुमान लगाया गया है कि 2050 तक ‘एकल-उपयोग प्लास्टिक’ 5-10% तक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के लिए उत्तरदायी हो सकती है।
प्रतिबंधित वस्तुएं:
- केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने ईयरबड्स; गुब्बारे की छड़ें; कैंडी और आइसक्रीम की छड़ें; प्लेट, कप, गिलास, कांटे, चम्मच, चाकू, ट्रे सहित कटलरी आइटम; मीठे बक्से; निमंत्रण कार्ड; सिगरेट पैक; 100 माइक्रोन से कम के पीवीसी बैनर; और सजावट के लिए पॉलीस्टाइनिन पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है।
- पॉलीथिन बैग: मंत्रालय ने सितंबर 2021 में 75 माइक्रोन से कम के पॉलीथिन बैग पर पहले ही प्रतिबंध लगा दिया था। दिसंबर 2022 से 120 माइक्रोन से कम के पॉलीथिन बैग पर प्रतिबंध लगाया जाएगा
- पाउच: प्लास्टिक कचरा प्रबंधन नियम, 2016 के अनुसार, गुटखा, तंबाकू और पान मसाला के भंडारण, पैकिंग या बिक्री के लिए प्लास्टिक सामग्री का उपयोग करने वाले पाउच पर भी पूर्ण प्रतिबंध है।
इन वस्तुओं पर प्रतिबंध लगाए जाने का कारण:
मंत्रालय के अनुसार: प्रतिबंध के लिए ‘एकल-उपयोग वाली प्लास्टिक’ से निर्मित वस्तुओं के पहले सेट का चुनाव “संग्रह और पुनर्चक्रण कठिना” पर आधारित था।
प्रतिबंधो का कार्यान्वयन:
- CPCB द्वारा निगरानी: केंद्र स्तर पर ‘केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड’ (CPCB) और राज्य स्तर पर ‘राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड’ (SPCBs) द्वारा प्रतिबंध की निगरानी की जाएगी, SPCB नियमित रूप से केंद्र को रिपोर्ट करेंगे।
- कच्चे माल की आपूर्ति पर रोक: उदाहरण के लिए, सभी पेट्रोकेमिकल उद्योगों को – प्रतिबंधित वस्तुओं का उपयोग करने वाले उद्योगों को कच्चे माल की आपूर्ति नहीं करने के लिए कहा गया है।
- उद्योगों को निर्देश: ‘राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड’ (SPCBs) और प्रदूषण नियंत्रण समितियों द्वारा, एकल-उपयोग वाली प्लास्टिक वस्तुओं के निर्माण में लगे उद्योगों के लिए ‘वायु/जल अधिनियम’ के तहत जारी किए गए संचालन के लिए सहमति को संशोधित या रद्द कर दिया जाएगा।
- नए लाइसेंस की आवश्यकता: स्थानीय अधिकारियों को, उद्योगों के लिए इस शर्त के साथ नए वाणिज्यिक लाइसेंस जारी करने का निर्देश दिया गया है कि उनके परिसर में ‘सिंगल यूज़ प्लास्टिक’ (SUP) आइटम नहीं बेचे जाएंगे, और यदि वे इन वस्तुओं को बेचते पाए जाते हैं तो उनके मौजूदा वाणिज्यिक लाइसेंस रद्द कर दिए जाएंगे।
- कम्पोस्टेबल प्लास्टिक को प्रोत्साहित करना: CPCB ने कम्पोस्टेबल प्लास्टिक के 200 निर्माताओं को एकमुश्त प्रमाण पत्र जारी किया है और ‘भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक के लिए मानकों को पारित किया है।
- जुर्माना: प्रतिबंध का उल्लंघन करने वालों को ‘पर्यावरण संरक्षण अधिनियम’ 1986 के तहत दंडित किया जा सकता है, जिसके तहत 5 साल तक की कैद, या 1 लाख रुपये तक का जुर्माना, या दोनों का प्रावधान किया गया है।
- उल्लंघनकर्ताओं को ‘राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड’ द्वारा पर्यावरणीय क्षति मुआवजे का भुगतान करने के लिए भी कहा जा सकता है।
चुनौतियां:
लगभग 25 भारतीय राज्यों द्वारा पहले राज्य स्तर पर प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाया गया था। हालांकि, इन वस्तुओं के व्यापक उपयोग के कारण इन प्रतिबंधों का वास्तविकता में बहुत सीमित प्रभाव था।
आवश्यकता:
- जागरूकता: उपभोक्ताओं को विज्ञापनों, समाचार पत्रों या टीवी विज्ञापनों या सोशल मीडिया पर प्रतिबंध के बारे में जागरूक करने की आवश्यकता है।
- प्लास्टिक के स्थायी विकल्प की खोज: कंपनियों को ‘अनुसंधान और विकास’ में निवेश करने की आवश्यकता है।
अन्य देश ‘सिंगल यूज़ प्लास्टिक’ से कैसे निपट रहे हैं?
संयुक्त राष्ट्र में ‘सिंगल यूज़ प्लास्टिक’ पर सहमति: इस वर्ष, भारत सहित संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण सभा (UNEA) के 124 सदस्य देशों ने सिंगल यूज़ प्लास्टिक’ को लेकर एक समझौते को तैयार करने संबंधी एक प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता, हस्ताक्षरकर्ताओं के लिए प्लास्टिक के पूरे जीवन चक्र ‘उत्पादन से लेकर निपटान तक’ को संबोधित करने के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी होगा।
68 देशों में अलग-अलग स्तर के प्रवर्तन के साथ ‘प्लास्टिक बैग’ पर प्रतिबंध है।
- बांग्लादेश: बांग्लादेश 2002 में प्लास्टिक की पतली थैलियों पर प्रतिबंध लगाने वाला पहला देश बना।
- चीन: चीन ने 2020 में चरणबद्ध कार्यान्वयन के साथ प्लास्टिक की थैलियों पर प्रतिबंध जारी किया।
- यूरोपीय संघ: यूरोपीय संघ में कुछ एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक – जिसके लिए विकल्प उपलब्ध हैं- पर प्रतिबंध है।
निष्कर्ष:
हालांकि, प्लास्टिक के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध एक अच्छा विचार लगता है, इस समय इसकी व्यवहार्यता, खासकर व्यावहारिक विकल्पों के अभाव में मुश्किल लगती है, ।
इंस्टा लिंक्स:
प्रकृति और आप- एकल उपयोग प्लास्टिक
मेंस लिंक:
सिंगल यूज प्लास्टिक क्या है और इससे जुड़ी चिंताएं क्या हैं? इसे देश में सफलतापूर्वक कैसे समाप्त किया जा सकता है? (15 अंक)
स्रोत: द हिंदू
सामान्य अध्ययन– IV
विषय: नैतिकता का अनुप्रयोग- मीडिया
प्रतिनिधि विज्ञापन
संदर्भ: केंद्र सरकार ने विज्ञापन एजेंसियों को ‘प्रतिनिधि (सरोगेट) विज्ञापनों’ (Surrogate Advertisements) पर दिशानिर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
केंद्र सरकार की टिप्पणी: यह देखा गया है, कि संगीत-सीडी, क्लब सोडा और पैकेज्ड पेयजल की आड़ में कई मादक द्रव्यों और पेय पदार्थों का विज्ञापन किया जा रहा है, जबकि चबाने वाले तंबाकू और गुटखा को सौंफ और इलायची के नाम से बेचा जा रहा है।
सरोगेट विज्ञापन:
- ‘प्रतिनिधि विज्ञापन’ या ‘सरोगेट विज्ञापन’ (Surrogate Advertisement), विज्ञापन का एक रूप होता है जिसका इस्तेमाल किसी अन्य उत्पाद के भेष में सिगरेट और शराब जैसे नियंत्रित उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए किया जाता है।
- भारत में, ‘सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम’, 2003 जैसे कानूनों के तहत, तंबाकू उत्पादों और शराब का खुले तौर पर विज्ञापन नहीं किया जा सकता है। यह क़ानून जो तंबाकू उत्पादों के सभी प्रकार के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगाता है। इन प्रतिबंधों को दरकिनार करने के लिए ‘सरोगेट विज्ञापन’ किए जाते हैं।
‘केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण’ (CCPA) द्वारा ‘भ्रामक विज्ञापनों की रोकथाम और भ्रामक विज्ञापनों के लिए अनुमोदन’, 2022 के लिए दिशानिर्देश जारी किए गए हैं।
- इन दिशानिर्देशों ने ‘सरोगेट विज्ञापनों’ को भी प्रतिबंधित किया गया है।
- जुर्माना: इसके तहत, पहले अपराध के लिए 10 लाख रुपये की मौद्रिक दंड निर्धारित किया गया है, जो बाद के अपराधों के लिए 50 लाख रुपये तक हो सकता है, और अधिनियम की धारा 89 के तहत दो साल तक की कैद हो सकती है।
सरोगेट विज्ञापन का नकारात्मक प्रभाव: सरोगेट विज्ञापन, ‘सूचित किए जाने के अधिकार’ (नकारात्मक प्रभावों) और ‘संभावित असुरक्षित उत्पादों के खिलाफ सुरक्षा के अधिकार’ का उल्लंघन करते हैं।
केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण:
केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (Central Consumer Protection Authority – CCPA), उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के प्रावधानों के आधार पर 2020 में स्थापित एक नियामक निकाय है, और ‘उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय’ के अधीन काम करता है।
मेंस लिंक:
आज हम पाते हैं कि आचार संहिता निर्धारित करने, सतर्कता प्रकोष्ठों/आयोगों की स्थापना, आरटीआई, सक्रिय मीडिया और कानूनी तंत्र को मजबूत करने जैसे विभिन्न उपायों के बावजूद- भ्रष्ट आचरण नियंत्रण में नहीं आ रहे हैं। इन उपायों के औचित्य तथा इनकी प्रभावशीलता का मूल्यांकन कीजिए। इस खतरे से निपटने के लिए और अधिक प्रभावी रणनीतियों का सुझाव दीजिए। (यूपीएससी 2015)
मुख्य परीक्षा संवर्धन हेतु पाठ्य सामग्री (नैतिकता/निबंध)
सुप्रीम कोर्ट में ‘मैरी रॉय’ का ऐतिहासिक मामला
संदर्भ: हाल ही में, लेखक-कार्यकर्ता अरुंधति रॉय की मां ‘मैरी रॉय’ का 89 वर्ष की आयु में निधन हो गया।
शिक्षक और महिला अधिकार कार्यकर्ता मैरी रॉय को “मैरी रॉय मामले” (Mary Roy case) के लिए सबसे अच्छी तरह से जाना जाता है। उन्होंने इस मामले में, लंबी कानूनी लड़ाई जिसने केरल के सीरियाई ईसाई परिवारों की महिलाओं के लिए समान संपत्ति अधिकार सुनिश्चित किया।
- अपने पति से तलाक होने के बाद, जब मैरी रॉय अपने दो बच्चों के साथ ‘ऊटी’ में स्थित अपने पिता के कॉटेज में लौटी, तो उन्हें उस घर से निकल जाने को कहा गया था। इसके बाद उन्होंने इस ‘कानून’ को ‘कानूनी चुनौती’ दी।
- अपने मृत पिता की संपत्ति में समान अधिकारों से वंचित, मैरी रॉय ने अपने भाई ‘जॉर्ज इसाक’ पर मुकदमा दायर कर दिया। इस मामले को भारत में लैंगिक न्याय सुनिश्चित करने में एक ‘मील के पत्थर’ के रूप में देखा जाता है।
- सुप्रीम कोर्ट ने अपने 1986 के फैसले में ‘भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925’ की सर्वोच्चता को बरकरार रखा। भारत के मुख्य न्यायाधीश पीएन भगवती और न्यायमूर्ति आरएस पाठक की एक पीठ ने फैसला सुनाया कि यदि मृतक माता-पिता ने वसीयत नहीं छोड़ी है, तो उत्तराधिकार का फैसला भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 के अनुसार किया जाएगा। और यह फैसला पूर्ववर्ती त्रावणकोर राज्य में रहने वाले भारतीय ईसाई समुदाय पर भी लागू होगा।
जापानी नर्सिंग होम में ‘बेबी वर्कर’
संदर्भ: दक्षिणी जापान में एक नर्सिंग होम एक बहुत ही महत्वपूर्ण काम – अपने यहाँ भर्ती बुजुर्गो को साथ देने और मुस्कुराहट देने- के लिए बच्चों को “पारिश्रमिक पर” रख रहा है।
‘इचोअन नर्सिंग होम’ नामक यह नर्सिंग होम ‘फुकुओका प्रान्त’ में 940,000 आबादी वाले शहर किताक्यूशु में स्थित है, जो जापान के बाकी हिस्सों की तरह वृद्ध और सिकुड़ रहा है। जैसे-जैसे परिवार छोटे होते जा रहे है, वृद्ध लोग अधिक अलग-थलग पड़ते जा रहे हैं। ऐसे में इस नर्सिंग होम के ‘शिशु कार्यकर्ता कार्यक्रम’ ने लोगों को पीढ़ियों से जुड़ने में मदद कर रहा है।
प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के अनुसार ‘भारत में अपराध’
साइबर अपराध:
बढ़ती प्रवृत्ति: भारत में 2021 में 50,000 से अधिक मामले सामने आए। जोकि 2020 में लगभग 6% की वृद्धि है। अधिकतम मामले तेलंगाना, उत्तरप्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र में दर्ज किए गए हैं।
रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु:
- भारत में कुल अपराधों में 7.6% की वृद्धि हुई है।
- 2021 में हिंसक अपराधों और आत्महत्याओं में वृद्धि, महामारी के अप्रत्यक्ष परिणामों की ओर इशारा करती है।
- 2021 में आत्महत्या के कारण होने वाले मौतें – प्रति एक लाख व्यक्तियों पर 12 मौतें – पिछले पांच वर्षों में सबसे अधिक थी।
- बच्चों के खिलाफ अपराध, महामारी से पूर्व स्तर (2021 रिपोर्ट किए गए 1.49 लाख मामले) से अधिक हो चुके हैं।
- सड़क हादसों में होने वाली मौतों में 14.3% की वृद्धि हुई है।
चर्चा का कारण:
2020 में लॉन्च किया गया क्रि-मैक (Cri-MAC) केंद्र सरकार का ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है, जो मानव तस्करी सहित गंभीर आपराधिक घटनाओं पर कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच सूचना साझा करने और कार्रवाई का समन्वय करने का कार्य करता है।
- संबंधित विवाद: कई राज्यों ने अभी तक कोई अद्यतन नहीं किया है, और ‘क्रि-मैक’ पर शून्य अलर्ट की सूचना दी है।
- क्रि-मैक का परिचालन NCRB द्वारा किया जाता है।
खरीद प्रबंधक सूचकांक
संदर्भ: IHS मार्किट इंडिया मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) के सर्वेक्षण के अनुसार- भारत के विनिर्माण क्षेत्र में नवंबर में नौ महीनों में सबसे सशक्त उत्पादन विस्तार दर्ज किया गया।
खरीद प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) क्या होता है?
- खरीद प्रबंधक सूचकांक (Manufacturing Purchasing Managers’ Index – PMI), एक सर्वेक्षण-आधारित उपाय है, जिसमे उत्तरदाताओं से पिछले महीने की तुलना में ‘प्रमुख व्यावसायिक परिवर्ती कारक’ के बारे में उनकी धारणा में बदलाव के बारे में पूछा जाता है।
- नवीनतम PMI प्रिंट, लगभग 400 विनिर्माण फर्मों के क्रय प्रबंधकों से 12 से 24 नवंबर के बीच एकत्र किए गए सर्वेक्षण प्रतिक्रियाओं पर आधारित था।
महत्व: यह विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों में आर्थिक प्रवृत्तियों की जारी दिशा के बारे में जानकारी देता है।
सीमा-पारीय संरक्षित क्षेत्र
संदर्भ: भारत और नेपाल, ज्ञान और सर्वोत्तम पद्धतियों को साझा करने; गलियारों और इंटरलिंकिंग क्षेत्रों की बहाली के माध्यम से- जैव विविधता संरक्षण के लिए सहमत हुए है।
एक सीमा-पारीय (ट्रांसबाउंड्री) संरक्षित क्षेत्र (Transboundary Protected Area – TPA), एक से अधिक देश या उप-राष्ट्रीय इकाई की सीमाओं तक विस्तारित एक पारिस्थितिक संरक्षित क्षेत्र होता है।
उदाहरण: भारत और नेपाल के बीच निम्नलिखित ‘सीमा-पारीय संरक्षित क्षेत्र’ (TPA) हैं:
- कंचनजंगा संरक्षण क्षेत्र
- तराई आर्क लैंडस्केप
- पवित्र हिमालयी परिदृश्य (नेपाल, सिक्किम, भूटान)
2021 में ग्रीनहाउस गैस और समुद्र का स्तर रिकॉर्ड ऊंचाई पर
संदर्भ: राष्ट्रीय समुद्री और वायुमंडलीय प्रशासन (National Oceanic and Atmospheric Administration – NOAA) रिपोर्ट के अनुसार, 2021 में वातावरण में ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा 414.7 भाग प्रति मिलियन थी, जो 2020 की तुलना में 2.3 भाग प्रति मिलियन अधिक है।
रिपोर्ट के अन्य निष्कर्ष:
समुद्र के स्तर में लगातार दसवें वर्ष भी वृद्धि हुई है। और यह 1993 के औसत से 3.8 इंच के एक नए रिकॉर्ड पर पहुंच गया है।
- पृथ्वी के गर्म होने के साथ ही उष्णकटिबंधीय तूफानों की संख्या बढ़ जाती है, इन तूफानों की सख्या में 2021 में सामान्य से अधिक वृद्धि हुई है। दिसंबर में आये सुपर टाइफून ‘राइ’ (Rai) ने फिलीपींस में लगभग 400 लोगों की जान ले ली थी।
- जापान के क्योटो में 1409 के बाद पहली बार ‘चेरी’ के पेड़ समय से पहले खिल गए।
- जंगल की आग की घटनाओं में वृद्धि हुई है।
कारण: पिछले साल वैश्विक अर्थव्यवस्था का अधिकांश हिस्सा कोविड–19 महामारी के कारण तेजी से धीमा हो गया, जिसकी वजह से जीवाश्म ईंधन उत्सर्जन में कमी हुई और ग्रीनहाउस गैस के स्तर में वृद्धि हुई है।
यूनाइटेड स्टेट्स नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) के बारे में:
NOAA एक अमेरिकी वैज्ञानिक और नियामक एजेंसी है। NOAA जलवायु, मौसम, महासागर और समुद्री तटों में होने वाले परिवर्तन की भविष्यवाणी करती है, उस ज्ञान और जानकारी को दूसरों के साथ साझा करती है, और तटीय और समुद्री पारिस्थितिक तंत्र और संसाधनों का संरक्षण और प्रबंधन करता है।
मंगल ग्रह पर ऑक्सीजन: MOXIE
संदर्भ: मार्स ऑक्सीजन इन-सीटू रिसोर्स यूटिलाइजेशन एक्सपेरिमेंट (MOXIE) ने मानव की जरूरतों को पूरा करने के लिए किसी ग्रह के वातावरण में संसाधनों के उपयोग का पहला ‘उदाहरण’ तैयार किया है।
MOXIE के बारे में:
नासा द्वारा ‘परसिवरेंस’ रोवर पर भेजा गया ‘मार्स ऑक्सीजन इन-सीटू रिसोर्स यूटिलाइजेशन एक्सपेरिमेंट’ (MOXIE) और ‘मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी’ (एमआईटी) द्वारा बनाया गया है।
पृथ्वी पर एक वृक्ष की भांति, MOXIE का कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण करती है और ऑक्सीजन का उत्सर्जन करता है।
- ऑक्सीजन का उत्पादन करने के लिए, MOXIE कार्बन डाइऑक्साइड अणुओं से ऑक्सीजन परमाणुओं को पृथक करता है। यह प्रक्रिया, लगभग 800 डिग्री सेल्सियस तापमान पर ऊष्मा का उपयोग करके पूरी की गई।
- एक तकनीकी प्रदर्शक, MOXIE प्रति घंटे 10 ग्राम ऑक्सीजन उत्पन्न करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, और इसे परसिवरेंस रोवर के भीतर लगाया जाता है।
- यह एक कार की बैटरी का आकार है, और इसका वजन पृथ्वी पर 37.7 पाउंड (17.1 किलोग्राम) तथा मंगल ग्रह पर मात्र 14.14 पाउंड (6.41 किलोग्राम) है।
- अगले दो वर्षों में, MOXIE द्वारा नौ बार ऑक्सीजन निष्कर्षण किए जाने की उम्मीद है।
- कार्यविधि: MOXIE के अंदर, मंगल की हवा को पहले फ़िल्टर किया जाता है और दबाव डाला जाता है। फिर इसे ‘सॉलिड ऑक्साइड इलेक्ट्रोलाइज़र’ (SOXE) से होकर प्रवाहित किया जाता है, जो कार्बन डाइऑक्साइड युक्त हवा को ऑक्सीजन आयनों और कार्बन मोनोऑक्साइड में विद्युत रूप से विभाजित करता है।
- इस प्रक्रिया में, ऑक्सीजन आयनों को अलग किया जाता है और सांस लेने योग्य, आणविक ऑक्सीजन (O2) बनाने के लिए पुन: संयोजित किया जाता है।
महत्व: मंगल ग्रह पर भेजे जाने वाले चालक-दल सहित अभियानों के लिए ऑक्सीजन की आपूर्ति अति महत्वपूर्ण है। ऑक्सीजन, अंतरिक्ष यात्रियों द्वारा सांस लेने के साथ-साथ, पृथ्वी पर वापस आने के लिए प्रयुक्त राकेट में ईंधन के रूप में उपयोग हेतु आवश्यक होगी।
प्रोटीन का जलयोजन
संदर्भ: तंत्रिका-अपक्षयी रोगों (न्यूरो-डीजेनेरेटिव डिजीजेज) का शीघ्र पता लगाने के लिए विभिन्न प्रोटीनों का जलयोजन (हाइड्रेशन) एक संभावित मार्कर के रूप में कार्य कर सकता है
- जलयोजन या हाइड्रेशन (Hydration) को शुष्क प्रोटीन में पानी को तब तक मिलाए जाने प्रक्रिया के रूप में माना जा सकता है, जब तक कि यह जलयोजन के उस स्तर तक नहीं पहुंच जाता है, जिसके आगे पानी के मिलाए जाने पर प्रोटीन में कोई अतिरिक्त परिवर्तन नहीं होता है, और केवल प्रोटीन को पतला होने लगता है।
- जलयोजन का महत्व: पानी में ‘प्रोटीन’ की घुलनशीलता के लिए उसका जलयोजन आवश्यक है। यदि अमोनियम सल्फेट जैसे नमक की मौजूदगी में पानी में घुले प्रोटीन का जलयोजन कम हो जाता है, तो प्रोटीन घुलनशील नहीं रहता है और यह लवणीय या अवक्षेपित हो जाता है।
न्यूरोडीजेनेरेटिव (तंत्रिका-अपक्षयी) रोग:
‘अपक्षयी तंत्रिका रोग’ आपके शरीर की कई गतिविधियों को प्रभावित करते हैं, जैसे संतुलन, गति, बात करना, सांस लेना और हृदय का कार्य। इनमें से कई बीमारियां अनुवांशिक होती हैं।
जैसेकि: पार्किंसंस, अल्जाइमर, हंटिंगटन रोग।
सर्वावैक वैक्सीन
केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए भारत के पहले स्वदेशी रूप से विकसित ‘क्वाड्रिवेलेंट ह्यूमन पेपिलोमावायरस’ (qHPV) वैक्सीन ‘सर्वावैक’ (Cervavac) के वैज्ञानिक समापन की घोषणा की।
- भारत में 83 फीसदी और पूरे विश्व में 70 फीसदी मामलों के लिए, इनवेसिव (हमलावर) सर्वाइकल कैंसर एचपीवी 16 या 18 जिम्मेदार है।
- मौजूदा अनुमानों के अनुसार- हर साल लगभग 1.25 लाख महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर पाया जाता है और इस रोग से भारत में 75 हजार से अधिक मृत्यु हो जाती है।
NDPS अधिनियम
संदर्भ: कर्नाटक उच्च न्यायालय ने हाल ही में भांग और गांजा के लिए गिरफ्तार एक व्यक्ति को जमानत दे दी है, और तर्क दिया कि NDPS अधिनियम में कहीं भी इसे प्रतिबंधित पेय / दवा के रूप में उल्लेख नहीं किया गया है।
साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में NDPS अधिनियम के तहत ‘ड्रग्स के व्यक्तिगत उपभोग को अपराध की श्रेणी से बाहर करने’ की एक याचिका को खारिज कर दिया था।
‘भांग’ के बारे में:
भांग (Bhang), भांग (Cannabis) के पौधे की पत्तियों से बनाई जाने वाली खाद्य सामाग्री होती है, जिसे अक्सर विभिन्न खाद्य पदार्थों के साथ ठंडाई और लस्सी जैसे पेय में मिलाया जाता है।
‘स्वापक ओषधि और मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम’ / एनडीपीएस अधिनियम:
‘एनडीपीएस अधिनियम’ (NDPS Act) के तहत, किसी व्यक्ति को, किसी भी ‘स्वापक औषधि’ (narcotic Drug) या ‘मनःप्रभावी पदार्थ’ (Psychotropic Substance) के उत्पादन, रखने, बेचने, खरीदने, परिवहन करने, भंडारण करने और/या उपभोग करने से प्रतिबंधित किया गया है।
- NDPS एक्ट, 1985 में अब तक तीन बार- वर्ष 1988, 2001 और 2014 में संशोधन किए जा चुके हैं।
- यह अधिनियम पूरे भारत में लागू है, और यह भारत के बाहर के सभी भारतीय नागरिकों तथा भारत में पंजीकृत जहाजों और विमानों पर सवार सभी व्यक्तियों पर भी लागू होता है।
छूट: अधिनियम में कहा गया है कि सरकार केवल रेशे या बीज प्राप्त करने या बागवानी उद्देश्यों के लिए औद्योगिक उद्देश्यों के लिए किसी भी भांग के पौधे की खेती की अनुमति दे सकती है।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार, 2019 से 2020 तक व्यक्तिगत रूप से नशीली दवाओं के सेवन से संबंधित अपराधों में 27% से अधिक की कमी आई है।
वोस्तोक-2022
भारतीय सैन्य दल, रूस के पूर्वी सैन्य जिले सर्गेवेस्की में युद्धाभ्यास वोस्तोक-2022 में भाग ले रहा है।
इस युद्धाभ्यास में चीनी सेना भी भाग ले रही है।
उद्देश्य: युद्धाभ्यास का उद्देश्य प्रतिभागी सैन्य दलों तथा पर्यवेक्षकों के बीच आदान-प्रदान और समन्वय स्थापित करना है।
प्रतिभागी सैन्य दलों में निम्नलिखित संगठनों के पर्यवेक्षक शामिल हैं:
- सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन
- शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) और अन्य भागीदार देश

















