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[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 31 August 2022

विषयसूची

सामान्य अध्ययन-II

  1. श्रीलंका की मदद करने के तरीके
  2. विशेष विवाह अधिनियम, 1954 को चुनौती

सामान्य अध्ययन-III

  1. डेटा संरक्षण कानून के अभाव में सरकारी एजेंसियों द्वारा डेटा एकत्र करना जारी

मुख्य परीक्षा संवर्धन हेतु पाठ्य सामग्री (नैतिकता/निबंध)

  1. पंजाब में ‘सरपंच-प्रतिनिधि’ (सरपंच पति) पर प्रतिबंध
  2. एक हत्या में मामले को सुलझाने में ‘पॉडकास्ट’ द्वारा की गयी मदद
  3. भारत, कोविड महामारी के दौरान कई चीजें ठीक करने में कामयाब रहा: विश्व बैंक

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

  1. भारतीय नौसेना की पताका
  2. 1950 के बाद से छठी बार ‘ला नीनो’ की स्थिति का तीसरे वर्ष में प्रवेश
  3. क्लाउड सीडिंग
  4. ज़ोंबी बर्फ
  5. भारत में सर्पदंश
  6. फोरेंसिक साक्ष्य एकत्र करना अनिवार्य
  7. परख
  8. SEED स्कीम
  9. जिनेवा कन्वेंशन
  10. अभिजीत सेन
  11. चर्चित मानचित्र

 


सामान्य अध्ययनII


 

विषय: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार।

श्रीलंका की मदद करने के कई तरीके

संदर्भ: भारत ने श्रीलंका को लगभग 4 बिलियन डॉलर की सहायता की है।

श्रीलंका में हालिया संकट और पड़ोसी देशों में भारत की भूमिका इस साल की मुख्य घटनाओं में महत्वपूर्ण है।

भारत श्रीलंका की किस प्रकार सहायता कर सकता है?

  • उदार ऋण प्रदान करके
  • तकनीकी विशेषज्ञता या ज्ञान साझा करने के माध्यम से।
  • श्रीलंका को आर्थिक गतिविधि के विभिन्न क्षेत्रों में कौशल उन्नयन में सहायता के माध्यम से।

कार्य-अनुबंध के क्षेत्र:

  • कृषि एवं संबद्ध गतिविधियाँ: भारत, श्रीलंका को उसके डेयरी क्षेत्र के विकास में मदद कर सकता है। श्रीलंका, भारत से काफी मात्रा में मिल्क पाउडर और सालाना 315 मिलियन डॉलर के डेयरी उत्पादों का आयात करता है।
  • मुर्गीपालन क्षेत्र: भारत, श्रीलंका के साथ गेहूँ की उत्पादकता संबंधी अपने ज्ञान को साझा कर सकता है, जिसका बड़े पैमाने पर ‘घरेलू पोल्ट्री फीड’ में प्राथमिक घटक के रूप में उपयोग किया जाता है।
  • ऊर्जा परियोजनाएं: श्रीलंका के उत्तरी प्रांत में, अडानी समूह की $500 मिलियन से अधिक की पवन ऊर्जा परियोजनाओं के लिए अनंतिम अनुमोदन दिए जाने पर वार्ता जारी है।
  • ‘सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम’ क्षेत्र: ‘डिजिटल MSME’ और ‘MSME प्रदर्शन को बढ़ाना और तेज करना’ (Raising and Accelerating MSME Performance – RAMP) कार्यक्रम ‘सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम’ (MSME) क्षेत्र को लीड प्रदान कर सकते हैं।
  • स्कूली शिक्षा: भारत, श्रीलंकाई समाज के सबसे वंचित वर्ग, पर्वतीय प्रदेश में रहने वाले तमिलों के बच्चों को पढ़ाने वाले उन सभी संस्थानों को कवर करने के लिए स्मार्ट क्लासरूम और आधुनिक कंप्यूटर लैब स्थापित करने की अपनी योजना का विस्तार कर सकता है।
  • उच्च शिक्षा: भारतीय विश्वविद्यालय, श्रीलंका में अपने शाखा परिसर स्थापित करने पर विचार कर सकते हैं।
  • सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों को प्रशिक्षण: सार्वजनिक क्षेत्र के दूसरे और तीसरे पायदान के कर्मचारियों के प्रशिक्षण के लिए एक ‘सहयोगी परियोजना’ की कल्पना की जा सकती है।
  • सांस्कृतिक क्षेत्र: भारत, अधिक संख्या में बौद्ध भिक्षुओं को धार्मिक स्थलों पर जाने की व्यवस्था कर सकता है।

आगे की राह:

  • भारत के लिए अपने दक्षिणी पड़ोसी देश श्रीलंका, जो एशिया की अधिकांश अन्य अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में बेहतर प्रदर्शन के लिए जाना जाता है, के साथ रचनात्मक तरीके से जुड़ने की बहुत गुंजाइश है।
  • भारत यह सुनिश्चित कर सकता है कि प्रस्तावित विकास कार्यक्रमों को ‘कवरेज’ में समान रूप से वितरित किया जाए।
  • उत्तरी और पूर्वी प्रांत, जहां तमिल और मुस्लिम जातीय अल्पसंख्यक रहते हैं, पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए क्योंकि श्रीलंका के सकल घरेलू उत्पाद में उनका योगदान मुश्किल से 10% है।
  • स्थिरता: राजनीतिक और आर्थिक रूप से स्थिर श्रीलंका, भारत के हित में होगा।

इंस्टा लिंक्स:

भारत-श्रीलंका संबंध

मेंस लिंक:

“उत्पीड़ित और हाशिए पर स्थित राष्ट्रों के नेता के रूप में भारत की लंबे समय से चली आ रही छवि उभरती वैश्विक व्यवस्था में अपनी नई भूमिका के कारण गायब हो गई है” चर्चा कीजिए। (यूपीएससी 2019)

प्रीलिम्स लिंक:

  • हंबनटोटा बंदरगाह
  • श्रीलंका के महत्वपूर्ण क्षेत्रों का मानचित्रण
  • पाक की खाड़ी

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

विशेष विवाह अधिनियम, 1954 को चुनौती

संदर्भ: हाल ही में, सुप्रीम कोर्ट ने ‘विशेष विवाह अधिनियम, 1954’ (Special Marriage Act (SMA), 1954) के प्रावधानों को चुनौती देने वाली एक रिट याचिका को खारिज कर दिया है।

याचिका में, इस अधिनियम के तहत “विवाह के इच्छुक युग्म को अपने विवाह से 30 दिन पहले, विवाह करने के अपने इरादे की घोषणा करने के बारे में एक नोटिस देने की अनिवार्यता” संबंधी प्रावधान को चुनौती दी गयी थी।

याचिका में की गयी मांगे:

  • अधिनियम का यह प्रावधान, अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त पक्षकारों के ‘निजता के अधिकार’ का उल्लंघन करता है।
  • यह प्रावधान, संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत ‘समानता के अधिकार’ का उल्लंघन करता है, क्योंकि कोई अन्य कानून ऐसी ‘आवश्यकता’ निर्धारित नहीं करता है।

किन प्रावधानों को चुनौती दी गई है?

  • विशेष विवाह अधिनियम (SMA) की धारा 5: इस प्रावधान के तहत विवाह करने वाले जोड़ों को, शादी की तारीख से 30 दिन पहले विवाह अधिकारी को नोटिस देना आवश्यक है।
  • धारा 6: इस धारा के तहत, इस नोटिस को ‘विवाह अधिकारी’ द्वारा अनुरक्षित ‘विवाह सूचना पुस्तिका’ में दर्ज करने को अनिवार्य किया गया है, जिसका निरीक्षण “किसी भी व्यक्ति द्वारा किया जा सकता है जो उसका निरीक्षण करना चाहता है।
  • धारा 7: इस धारा के तहत ‘आपत्ति करने की प्रक्रिया’ का निर्धारण किया गया है।
  • धारा 8: इसमें आपत्ति प्रस्तुत करने के बाद की जाने वाली ‘जांच प्रक्रिया’ को निर्दिष्ट किया गया है।

अदालत का निर्णय:

सुप्रीम कोर्ट ने इस आधार पर रिट याचिका को खारिज कर दिया, कि याचिकाकर्ता (35 वर्षीय अथिरा सुजाता) अब इस मामले में एक पीड़ित पक्ष नहीं है, क्योंकि वह पहले ही SMA के तहत अपनी शादी कर चुकी है।

विभिन्न राज्यों में इस मामले से संबंधित नियम और कानून:

  • हरियाणा: हरियाणा सरकार ने 16 आवश्यक शर्तें निर्धारित की हैं, जिनमे विवाह के इच्छुक युग्म को एक समाचार पत्र में नोटिस जारी करने का निर्देश दिया गया है। और, इस तरह के नोटिस इच्छुक युग्म के माता-पिता को भेजे जाते हैं।
  • अनापत्ति प्रमाण पत्र: कुछ राज्यों में, विवाह के इच्छुक युग्म को अपने माता-पिता से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना होता है।
  • महाराष्ट्र: महाराष्ट्र पंजीकरण और टिकट विभाग, ‘विशेष विवाह अधिनियम’ (SMA) के तहत शादी करने वाले जोड़ों का विवरण, अपनी वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से साझा करता है।
  • लव जिहाद कानून: उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश सहित 11 राज्यों में ‘धर्मांतरण-रोधी कानून’ पारित किए गए हैं।

इन प्रावधानों से विवाह के इच्छुक युग्म को असुरक्षा:

  • असामाजिक तत्वों द्वारा उत्पीड़न: असामाजिक तत्वों द्वारा शादी करने वाले जोड़ों को परेशान करने के लिए सार्वजनिक नोटिस का इस्तेमाल किया जाता है।
  • अधिकारियों की अक्षमता: ऐसे कई उदाहरण हैं, जहां विवाह अधिकारियों ने कानून से परे जाकर जोड़े के माता-पिता को इस तरह के नोटिस भेजे हैं। उदाहरण: दिल्ली में मुस्लिम महिला को उसके माता-पिता ने इस प्रकार का नोटिस मिलने के बाद मार्च 2020 में अपने घर में कैद कर लिया।

‘विशेष विवाह अधिनियम’, 1954:

‘विशेष विवाह अधिनियम’ (Special Marriage Act – SMA) एक ऐसा कानून है, जो बिना किसी धार्मिक रीति-रिवाजों या परम्पराओं के विवाह करने की अनुमति देता है।

  • विभिन्न जातियों या धर्मों अथवा राज्यों के लोग विशेष विवाह अधिनियम के तहत विवाह करते हैं, तथा इसमें पंजीकरण के माध्यम से विवाह किया जाता है।
  • इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य अंतर-धार्मिक विवाह संपन्न करना तथा सभी धार्मिक औपचारिकताओं को अलग करते हुए विवाह को एक धर्मनिरपेक्ष संस्थान के रूप स्थापित करना है, जिसमे विवाह हेतु मात्र पंजीकरण की आवश्यकता होती है।

इंस्टा लिंक्स:

विशेष विवाह अधिनियम 1954

मेंस लिंक:

विशेष विवाह अधिनियम 1954 के प्रावधानों का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए।

प्रीलिम्स लिंक:

  • विशेष विवाह अधिनियम
  • अनुच्छेद 14 और 21

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययनIII


 

विषय: आंतरिक सुरक्षा के लिये चुनौती उत्पन्न करने वाले शासन विरोधी तत्त्वों की भूमिका।

डेटा संरक्षण कानून के अभाव में सरकारी एजेंसियों द्वारा डेटा एकत्र करना जारी

संदर्भ: विशेषज्ञों ने बुनियादी डेटा संरक्षण व्यवस्था के अभाव में, सरकार द्वारा डेटा संग्रह और इसका मुद्रीकरण करने के प्रयासों को बढ़ाने की प्रवृत्ति के बारे में चिंता जताई है।

डेटा संग्रह में वृद्धि किए जाने के उदाहरण:

सीमा शुल्क विभाग द्वारा एयरलाइनों को अंतरराष्ट्रीय यात्रियों का व्यक्तिगत विवरण साझा करना अनिवार्य कर दिया गया है।

  • नागर विमानन मंत्रालय द्वारा मुखाकृति पहचान प्रणाली ‘डिजीयात्रा’ (DigiYatra) का आरंभ।
  • सरकार द्वारा एकत्र किए गए गैर-व्यक्तिगत डेटा को स्टार्ट-अप और शोधकर्ताओं के साथ साझा करने के लिए ‘इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय’ (MeitY) का प्रस्ताव।
  • सीईआरटी-इन (CERT-In) द्वारा ‘वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क’ (VPN) सेवा प्रदाताओं को अपने उपयोगकर्ताओं का डेटा स्टोर करने के लिए निर्देश।
  • दूरसंचार विभाग (DoT) के वर्ष 2021 में जारी निर्देशों में, दूरसंचार ऑपरेटरों और इंटरनेट सेवा प्रदाताओं को वाणिज्यिक और कॉल विवरण रिकॉर्ड को कम से कम दो साल (वर्तमान में 1 वर्ष के बजाय) तक बनाए रखने के लिए कहा गया है।
  • कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग ऐप ‘आरोग्य सेतु’—इस एप के द्वारा उपयोगकर्ताओं के नाम, फोन नंबर और स्थान जैसे डेटा एकत्र किए गए।
  • कर्नाटक उच्च न्यायालय ने अक्टूबर 2020 में आदेश दिया कि ऐप को अनिवार्य नहीं बनाया जा सकता।

डेटा मुद्रीकरण (Data Monetisation) के लिए बढ़ते प्रयासों के उदाहरण:

  1. आईआरसीटीसी (IRCTC) ने सरकारी और निजी संस्थाओं के साथ व्यापार करने के लिए अपने ‘बैंक ऑफ पैसेंजर डेटा’ (मोबाइल नंबर, ईमेल और पासवर्ड जैसे संवेदनशील डेटा सहित) का मुद्रीकरण करने की अपनी योजनाओं का विवरण देते हुए एक निविदा जारी की गयी थी, जिसे भारी विरोध के बाद वापस ले लिया गया।
  2. इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय’ ने भारत ‘डेटा एक्सेसिबिलिटी और उपयोग नीति’ का मसौदा तैयार किया था, जिसमें प्रस्तावित किया गया था कि केंद्र द्वारा एकत्र किए गए डेटा जिसमें “मूल्य वर्धन किया गया है” को खुले बाजार में “उचित मूल्य” पर बेचा जा सकता है। इसे भी अब भारी विरोध के बाद वापस ले लिया गया है।
  3. सड़क परिवहन मंत्रालय (2020): थोक में डेटा शेयरिंग पॉलिसी (Bulk Data Sharing Policy) जारी की गयी, जिसके तहत मंत्रालय द्वारा निजी और सार्वजनिक संस्थाओं को ‘वाहन पंजीकरण डेटा’ (वाहन) और ‘ड्राइविंग लाइसेंस डेटा’ (सारथी) की बिक्री की जाती थी। इसे भी अब रद्द कर दिया गया है।

इससे पहले, सरकार ने डेटा संरक्षण विधेयक, 2021 को यह कहते हुए वापस ले लिया था कि सरकार शीघ्र ही ऑनलाइन पारितंत्र के लिए एक “व्यापक कानूनी ढांचा” लेकर आएगी।

डेटा संरक्षण विधेयक में, डेटा एकत्र करने से पहले ‘सहमति से संबंधित तंत्र’ के लिए एक रूपरेखा निर्धारित की गयी थी और व्यक्तिगत डेटा को विभिन्न संस्थाओं द्वारा कैसे संभाला जाना चाहिए और किसी व्यक्ति के डेटा से छेड़छाड़ की स्थिति में एक उपाय तंत्र का प्रावधान किया गया था।

नागरिकों के डेटा को “धन संसाधन” के रूप में मानने में मूलभूत समस्या:

  • 2018-2019 के भारतीय आर्थिक सर्वेक्षण ने डेटा को ‘सार्वजनिक भलाई’ (public good) के रूप में संदर्भित किया था। परिभाषा के अनुसार, इसका मतलब है कि ‘डेटा’ को ‘गैर-बहिष्कृत और गैर-प्रतिद्वंद्वी सार्वजनिक भलाई’ के रूप में माना जाना चाहिए और इसका किसी ‘वस्तु’ के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
  • डेटा एक ‘संप्रभु धन संसाधन’ नहीं है: डेटा को एक ‘संप्रभु धन संसाधन’ की तरह से मानने से ‘डेटा संरक्षण कानून’ के बिना बड़ी मात्रा में डेटा को संचित करने और बाद में मुद्रीकृत करने का प्रयास किया जाएगा।
  • सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन (पुट्टास्वामी जजमेंट 2017): मौलिक अधिकार के रूप में ‘गोपनीयता का अधिकार’।

निष्कर्ष:

सरकार की प्राथमिक चिंता सेवा वितरण और नागरिकों से एकत्र की जाने वाली जानकारी की सुरक्षा करना होनी चाहिए। इसका मुख्य उद्देश्य लाभ के लिए इस डेटा का मुद्रीकरण करना नहीं होना चाहिए।

इंस्टा लिंक:

डेटा संरक्षण विधेयक

मेंस लिंक:

साइबरडोम प्रोजेक्ट (CyberDome Project) क्या है? यह भारत में इंटरनेट अपराधों को नियंत्रित करने में कैसे उपयोगी हो सकता है। (यूपीएससी 2019)

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


मुख्य परीक्षा संवर्धन हेतु पाठ्य सामग्री (नैतिकता/निबंध)


पंजाब  में ‘सरपंच-प्रतिनिधि’ (सरपंच पति) पर प्रतिबंध

नोट: यह एक बहुत ही सकारात्मक कदम है। आप मुख्य परीक्षा में शासन/महिला सशक्तिकरण से संबंधित प्रश्नों के केस स्टडी के लिए इसका उपयोग कर सकते हैं।

संदर्भ: पंजाब सरकार के आदेश के अनुसार महिलाओं के पुरुष परिजन, पंचायत की बैठकों में शामिल नहीं हो सकते हैं।

सरपंच पति’: निर्वाचित महिलाओं के स्थान पर, उनके पुरुष रिश्तेदार (ज्यादातर पति), उनके पद का कार्यभार सँभालते हैं। (हाल ही में वेब सीरीज पंचायत में भी दिखाया गया है।)

पंचायत पति’ से जुड़े मुद्दे:

  • अधिकांश महिला सरपंच जिला/ब्लॉक/गांव में होने वाली बैठकों में शामिल नहीं होती हैं।
  • यह, पंचायत में महिलाओं के लिए आरक्षण के उद्देश्य को विफल करता है।
  • एक अध्ययन के अनुसार, 80 प्रतिशत से अधिक महिला सरपंच, आज भी मात्र दिखावे की सरपंच हैं।
  • पंजाब में, पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण लागू है।

पंचायत में महिला आरक्षण का लाभ: नेशनल काउंसिल फॉर एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (NCAER) द्वारा आयोजित ‘इंडिया पॉलिसी फोरम’ में प्रकाशित 2010 के एक अध्ययन में कहा गया है कि “महिला नेताओं वाले गांवों में, महिला भागीदारी और महिला नीति संबंधी चिंताओं के प्रति प्रतिक्रिया में वृद्धि हुई है।”

सम्बंधित प्रसंग:

इससे पहले, मध्य प्रदेश के पंचायत राज विभाग ने निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों के रिश्तेदारों के खिलाफ, निर्वाचित महिलाओं की ओर से आधिकारिक शपथ लेने पर, कार्रवाई करने को कहा था।

 

 

एक हत्या में मामले को सुलझाने में ‘पॉडकास्ट’ द्वारा की गयी मदद

निर्देश: इसका उपयोग आपराधिक न्याय पर मीडिया/पत्रकारिता के सकारात्मक प्रभाव को स्पष्ट करने के लिए किया जा सकता है।

संदर्भ: एक पॉडकास्ट (Podcast) की वजह से ऑस्ट्रेलियाई व्यक्ति को उसकी पत्नी की हत्या के आरोप में दोषी ठहराया गया। इस व्यक्ति की पत्नी वर्ष 1982 में ‘गायब’ हो गई थी।

  • “द टीचर्स’ पेट” (The Teacher’s Pet) पॉडकास्ट के 2018 के बाद से 60 मिलियन श्रोता हैं। इस पॉडकास्ट के माध्यम से पत्रकार हेडली थॉमस ने एक ‘परिस्थितिजन्य मामला’ स्थापित किया कि ‘डॉसन’ ने अपनी पत्नी ‘लिनेट’ की हत्या कर दी थी। इसके बाद से इस मामले में न्याय की मांग फिर से तेज हो गयी।
  • बाद में, जांच किए पर ‘न्यायाधीश’ ने इसे सच पाया और क्रिस डॉसन को कोर्ट ने दोषी करार दिया।

 

भारत, कोविड महामारी के दौरान कई चीजें ठीक करने में कामयाब रहा: विश्व बैंक

संदर्भ: विश्व बैंक की रिपोर्ट में कहा गया है, कि भारत महामारी के प्रबंधन में कई चीजें हासिल करने में कामयाब रहा, जिसमें एक केंद्रीय खरीद एजेंसी की स्थापना करना भी शामिल है।

भारत द्वारा महामारी का सफल प्रबंधन:

  • कोविड-19 आपातकालीन प्रतिक्रिया और स्वास्थ्य प्रणाली सुदृढ़ीकरण परियोजना: विश्व बैंक (WB) और एशियन इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (AIIB) द्वारा संयुक्त रूप से वित्त पोषित।
  • विशेषज्ञ पैनल: ऊपरी पोशाक, चश्मे और N95 मास्क के लिए विनिर्देशों को विकसित करने के लिए एक विशेषज्ञ पैनल भी गठित किया गया था, जिसने स्वास्थ्य मंत्रालय के दीर्घकालिक बाजार विकास और भारत में ‘आपातकालीन चिकित्सा उपकरण’ (Emergency Medical Equipment) के उत्पादन में सहयोग किया।
  • छलपूर्ण व्यावसायिक प्रथाओं पर रोक: भारतीय एजेंसियों ने, 2021 में भारत में लाखों घटिया चीनी KN95 मास्क भेजने की कोशिश कर रही एक कंपनी को सिंगापुर से पकड़ा। यह कंपनी एक तृतीय-पक्ष निरीक्षण प्रमाण पत्र तैयार करती थी।
  • अधिकार प्राप्त अंतर-मंत्रालयी समूह: भारत ने देश भर में चिकित्सा आपूर्ति के कुशल वितरण का प्रबंधन किया और शुरुआती प्रतिबंध लागू किए।
  • परीक्षण प्रयोगशालाएं: भारत चार महीनों के भीतर 18 से 2,500 से अधिक परीक्षण प्रयोगशालाओं को तेजी से विकसित करने में कामयाब रहा और भविष्य की महामारियों और स्वास्थ्य आपात स्थितियों का सामना करने के लिए तैयार हो गया।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


भारतीय नौसेना की पताका

संदर्भ: प्रधानमंत्री, कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड में भारत के पहले स्वदेशी विमानवाहक पोत ‘आईएनएस विक्रांत’ के क्रियाशील होने के मौके पर कोच्चि में भारतीय नौसेना के लिए नए नौसेना ध्वज (Ensign) का अनावरण करेंगे।

‘सेंट जॉर्ज क्रॉस’ क्या है?

एक सफेद पृष्ठभूमि पर लाल रंग के क्रॉस को सेंट जॉर्ज क्रॉस के रूप में जाना जाता है, और इसका नाम एक ईसाई योद्धा संत के नाम पर रखा गया है। सेंट जॉर्ज के बारे में माना जाता है कि वह तीसरे धर्मयुद्ध के दौरान एक योद्धा था। यह क्रॉस, इंग्लैंड के ध्वज के रूप में भी कार्य करता है।

पृष्ठभूमि: स्वतंत्रता के बाद, 15 अगस्त, 1947 को, भारतीय रक्षा बलों ने ब्रिटिश औपनिवेशिक झंडे और बैज को बनाए रखा था, और इसे 26 जनवरी, 1950 को भारतीयकृत पैटर्न में बदला गया था। हालांकि, नौसेना के ‘ध्वज’ यूनियन जैक को ‘तिरंगे’ से बदल दिया गया था, लेकिन जॉर्ज क्रॉस को बरकरार रखा गया था।

2014 में, देवनागरी लिपि में अशोक चिन्ह के नीचे ध्वज पर ‘सत्यमेव जयते’ शब्द शामिल किया गया था।

चित्र: भारतीय नौसेना का पताका वर्तमान में (बाएं) और भारतीय नौसेना का पताका 26 जनवरी, 1950 (दाएं)

1950 के बाद से छठी बार ‘ला नीनो’ की स्थिति का तीसरे वर्ष में प्रवेश

एक असामान्य घटना में, सितंबर 2020 से भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर पर व्यापत ‘ला नीना (La Niña) की स्थिति तीसरे वर्ष में प्रवेश कर गई है।

  • ‘ला नीना’ की स्थिति, मध्य और भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में सतह का तापमान (sea surface temperatures – SSTs) सामान्य से अधिक ठंडा होने पर विकसित होती है। यह स्थिति भारतीय ग्रीष्मकालीन मानसून के लिए उपयुक्त होती है।
  • हालांकि, ‘ला नीना वर्ष’ अटलांटिक महासागर और बंगाल की खाड़ी में लगातार और तीव्र तूफान और चक्रवातों के लिए भी कुख्यात हैं।

 

इसके विपरीत ‘अल नीनो’ के दौरान इन क्षेत्रों में महासागरीय सतह का तापमान सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है।

 

क्लाउड सीडिंग

संदर्भ: मध्य-पूर्व और उत्तरी अफ्रीका के देश, बादल से बारिश कराने हेतु ‘रसायन’ विकसित करने के लिए प्रयास कर रहे हैं।

क्लाउड सीडिंग (Cloud seeding) एक प्रकार का मौसम के किया जाने वाला संशोधन होता है, जिसका उद्देश्य, सिल्वर आयोडाइड, पोटेशियम आयोडाइड, सूखी बर्फ (ठोस कार्बन डाइऑक्साइड) और तरल प्रोपेन जैसे पदार्थों को हवा में बिखराकर बादलों से गिरने वाली वर्षा की मात्रा या प्रकार को बदलना होता है। यह पदार्थ बादल संघनन या बर्फ के नाभिक के रूप में कार्य करते हैं।

  • लाभ: क्लाउड सीडिंग, बादल की बारिश या बर्फ निर्माण करने की क्षमता में सुधार करता है, बारिश के पानी की आपूर्ति को पूरक करता है और कुछ प्रकार के अर्ध-जमे हुए बादलों में छोटे बर्फ के नाभिक को प्रविष्ट करके वातावरण को साफ करता है। ये नाभिक बर्फ के टुकड़ों के निर्माण के लिए एक आधार प्रदान करते हैं।
  • खतरे: अभी तक, विशेषज्ञों ने सिल्वर आयोडाइड के साथ क्लाउड सीडिंग का पर्यावरण पर कोई हानिकारक प्रभाव नहीं पाया है। लेकिन सिल्वर आयोडाइड जलीय जीवन के लिए विषैला हो सकता है।
  • भारत: भारत में, गंभीर सूखे के कारण तमिलनाडु सरकार द्वारा वर्ष 1983, 1984-87,1993-94 के दौरान क्लाउड सीडिंग ऑपरेशन किए गए थे। 2003 और 2004 के वर्षों में कर्नाटक सरकार ने क्लाउड सीडिंग की शुरुआत की।

 

ज़ोंबी बर्फ

संदर्भ: ग्रीनलैंड की ‘ज़ोंबी बर्फ’ (Zombie ice) से समुद्र के स्तर में 10 इंच की वृद्धि हो सकती है।

  • ज़ोंबी आइस, मरणासन्न बर्फ (Doomed Ice) है, जो अभी भी हिम के मोटे क्षेत्रों से जुड़ी हुई है, किंतु इसे मूल हिमनदों से मिलने वाली बर्फ कम होती जा रही है।
  • पुनःपूर्ति के बगैर, यह मरणासन्न बर्फ जलवायु परिवर्तन की बजह से पिघलती जा रही है और इसके परिणामस्वरूप समुद्र-स्तर में वृद्धि होगी।

प्रभाव: इस अपरिहार्य दस इंच की वृद्धि, वैज्ञानिकों द्वारा ग्रीनलैंड की बर्फ की चादर के पिघलने से समुद्र-स्तर वृद्धि के पहले अनुमान से दोगुने से अधिक वृद्धि है।

 

भारत में सर्पदंश

संदर्भ: विषैले सांपों के काटने से होने वाली सभी वैश्विक मौतों में से, आधी भारत में होती हैं।

सर्पदंश (Snakebites) को ‘उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग’ (Neglected Tropical Disease – NTD) के रूप में वर्गीकृत किया गया है।

भारत में सांप:

  • 300 से अधिक प्रजातियां पायी जाती हैं, जिनमे से 60 विषैली प्रजातियाँ हैं।
  • भारत ने 2000 से 2019 में बीच सर्पदंश से होने वाली मौतों की अनुमानित संख्या 1.2 मिलियन (12 लाख) है, जो प्रति वर्ष औसतन 58,000 है।

 

फोरेंसिक साक्ष्य एकत्र करना अनिवार्य

संदर्भ: दिल्ली पुलिस छह साल से अधिक की सजा वाले अपराधों में ‘फोरेंसिक साक्ष्य’ (Forensic Evidence) के एकत्रण को अनिवार्य बनाने वाली देश की पहली ‘पुलिस बल’ बन गई है।

  • फोरेंसिक मोबाइल वैन: जब भी कोई आवश्यकता होगी, मौके पर वैज्ञानिक और फोरेंसिक सहायता प्रदान करने के लिए प्रत्येक जिले को एक फोरेंसिक मोबाइल वैन आवंटित की जायेगी।
  • ये फोरेंसिक मोबाइल वैन, पुलिस के प्रशासनिक नियंत्रण के बजाय ‘कानून की अदालत’ के प्रति जिम्मेदार एक स्वतंत्र इकाई होंगी।
  • हाल ही में जारी NCRB की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ अपराधों में 40% की वृद्धि हुई है, जो देश के सभी महानगरीय शहरों में सबसे अधिक है।

फोरेंसिक साक्ष्य:

  • कोई भी सबूत, जो जांचकर्ताओं को अपराधी की पहचान आसानी से कर सकता है, फोरेंसिक साक्ष्य की श्रेणी में आता है ।
  • डीएनए, उंगलियों के निशान और रक्त के धब्बों का पैटर्न विश्लेषण- फोरेंसिक साक्ष्य की कुछ प्रमुख श्रेणियां हैं।
  • फोरेंसिक साक्ष्य, सबसे हिंसक और क्रूर मामलों के साथ-साथ धोखाधड़ी और हैकिंग जैसे अपराधों से संबंधित मामलों को सुलझाने में मदद करने में उपयोगी होते है।

 

परख

संदर्भ: सरकार द्वारा सभी बोर्ड परीक्षाओं में ‘एकरूपता’  लाने के लिए एक नए नियामक ‘परख’ (PARAKH) का प्रस्ताव किया गया है।

‘परख’, एनसीईआरटी की एक घटक इकाई होगी।

समग्र विकास के लिए ज्ञान का प्रदर्शन मूल्यांकन, समीक्षा और विश्लेषण अर्थात ‘परख’ (Performance Assessment, Review and Analysis of Knowledge for Holistic Development PARAKH) के उद्देश्य:

  • राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण (National Achievement Survey) और ‘राज्य उपलब्धि सर्वेक्षण’ जैसे आवधिक शिक्षण परिणाम परीक्षण आयोजित करना।
  • भारत में सभी मान्यता प्राप्त स्कूल बोर्डों के लिए छात्र मूल्यांकन, और मूल्यांकन के लिए मानदंड, मानक और दिशानिर्देश निर्धारित करना।
  • 21वीं सदी की कौशल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अपने मूल्यांकन पैटर्न को बदलने के लिए स्कूल बोर्डों को प्रोत्साहित करें और उनकी मदद करना।
  • सीबीएसई स्कूलों के अपने समकक्षों की तुलना में कुछ राज्य बोर्डों के छात्रों को कॉलेज में प्रवेश के दौरान नुकसान होने की समस्या से निपटना।
  • स्कूली शिक्षा के सभी स्तरों पर परीक्षणों के “डिजाइन, संचालन, विश्लेषण और रिपोर्टिंग के लिए तकनीकी मानकों” का विकास और कार्यान्वयन करना।

प्रस्तावित कार्यान्वयन एजेंसी ‘परख’ (PARAKH), NEP 2020 प्रस्ताव का एक हिस्सा है। यह विश्व बैंक द्वारा प्रायोजित STARS परियोजना (भारतीय राज्यों में स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता और शासन में सुधार के लिए) के घटकों में से एक है।

वर्तमान में, विभिन्न राज्य और केंद्रीय बोर्ड मूल्यांकन के विभिन्न मानकों का पालन करते हैं, जिससे अंकों में व्यापक असमानता होती है और प्रवेश मानदंड निर्धारित करने के लिए विश्वविद्यालयों में भ्रम की स्थिति पैदा होती है।

 

SEED स्कीम

संदर्भ: विमुक्त, घुमंतू और अर्ध घुमंतू समुदाय के कल्याण हेतु ‘विमुक्त, घुमंतू और अर्ध घुमंतू समुदाय आर्थिक सशक्तिकरण’ (scheme for Economic Empowerment of DNTs – SEED) योजना, जनजाति वर्गीकरण कार्य के कारण विलंबित हो गई है।

  • डीएनटी (DNTs) का तात्पर्य विमुक्त (De-notified), घुमंतू (Nomadic), अर्द्ध-घुमंतू (Semi Nomadic) समुदायों से है।
  • SEED योजना ‘सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय’ (MoSJ&E) की एक अम्ब्रेला योजना है।
  • विमुक्त, खानाबदोश और अर्ध-घुमंतू जनजातियों के बारे में:
  • ‘विमुक्त, खानाबदोश और अर्ध-घुमंतू जनजातियां’ (De-Notified, Nomadic And Semi-Nomadic Tribes) ऐसे समुदाय हैं, जिन्हें ब्रिटिश शासन के दौरान ‘आपराधिक जनजाति अधिनियम, 1871’ (Criminal Tribes Act of 1871) तथा इसके बाद लागू किए जाने वाले कानूनों की एक श्रृंखला के तहत ‘जन्मजात अपराधी’ के रूप में ‘अधिसूचित’ किया गया था।
  • वर्तमान में भी ये सबसे असुरक्षित और वंचित समुदाय हैं।

इन समुदायों की आबादी:

  • ‘रेनके आयोग’ ने 2001 की जनगणना के आधार पर उनकी आबादी लगभग 74 करोड़ होने का अनुमान लगाया था।
  • इस आयोग द्वारा 1,262 समुदायों को विमुक्त, खानाबदोश और अर्ध-घुमंतू के रूप में चिह्नित किया गया है।

SEED योजना के बारे में:

  • इस योजना को एक ऑनलाइन पोर्टल (2021 से 2026 तक) के माध्यम से लागू किया जा रहा है, और प्रत्येक आवेदक को एक विशिष्ट आईडी जारी की जाएगी। लेकिन 1262 जनजातियों के वर्गीकरण में देरी से योजना के क्रियान्वयन में देरी हो रही है।
  • सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय सशक्तिकरण द्वारा इस अम्ब्रेला योजना को लागू किया जा रहा है, और इसके तहत शैक्षिक जैसे मुफ्त कोचिंग; स्वास्थ्य जैसे बीमा; आवास जैसे पीएमएवाई और आय सृजन गतिविधियां शामिल की गयी हैं।

 

जिनेवा कन्वेंशन

संदर्भ: 1949 के अंतर्राष्ट्रीय सड़क यातायात सम्मेलन (जिनेवा सम्मेलन) के अनुपालन में, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने ‘अंतर्राष्ट्रीय ड्राइविंग परमिट’ (International Driving Permit – IDP) जारी करने की प्रक्रिया के मानकीकरण को अधिसूचित किया है।

भारत इस अभिसमय पर एक हस्ताक्षरकर्ता है और उसे आईडीपी जारी करना आवश्यक है।

‘जिनेवा कन्वेंशन’ के बारे में

‘जिनेवा कन्वेंशन’ (Geneva Convention) वर्ष 1949 में हस्ताक्षरित ‘लोक अंतर्राष्ट्रीय कानूनों’ (Public International Law) का एक समूह है, जिसे ‘सशस्त्र संघर्षों के मानवीय कानून’ (Humanitarian Law of Armed Conflicts) के रूप में भी जाना जाता है। यह संधि अंतर्राष्ट्रीय सड़क यातायात के विकास और सुरक्षा का सहयोग करने में मदद करती है।

  • कृपया ध्यान रखें: जिनेवा कन्वेंशन में युद्ध के कैदियों के लिए नियम, युद्ध के दौरान नागरिकों के लिए सुरक्षा (गृह युद्ध सहित) और युद्ध की बर्बरता को सीमित करने सहित कई अंतरराष्ट्रीय समझौते शामिल थे।
  • इनका उद्देश्य सशस्त्र संघर्षों का शिकार होने वाले व्यक्तियों के लिए न्यूनतम सुरक्षा, मानवीय उपचार के मानकों और सम्मान की मौलिक गारंटी प्रदान करना है।

 

अभिजीत सेन

संदर्भ: भारत के सबसे प्रतिष्ठित विकास अर्थशास्त्री, शिक्षक और नीति निर्माता अभिजीत सेन (Abhijit Sen) का निधन हो गया।

विवरण:

अभिजीत सेन एक प्रसिद्ध कृषि अर्थशास्त्री और योजना आयोग के पूर्व सदस्य थे।

वह कृषि लागत और मूल्य आयोग (CACP) के अध्यक्ष भी थे, और उन्होंने दीर्घकालिक अनाज नीति (2000) पर उच्च स्तरीय समिति की रिपोर्ट लिखी।

सुझाए गए सुधार:

  • बड़ी संख्या में फसलों और क्षेत्रों को शामिल करने के लिए सार्वजनिक खरीद का अधिक विविधीकरण और विकेन्द्रीकरण।
  • निजी व्यापार पर कानूनी शर्तों को सरल बनाना।
  • उन्होंने CACP को एक सशक्त वैधानिक निकाय बनाए जाने की अनुसंशा की।
  • अभिजीत सेन ने न्यूनतम समर्थन मूल्य का निर्धारण, उत्पादन की ‘सी 2’ लागत के आधार पर किए जाने की सिफारिश की।
  • इस सिफारिश ने कृषि में ‘स्वामीनाथन फॉर्मूला’ (2006) का मार्ग प्रशस्त किया।
  • विकेन्द्रीकृत शासन के एक पैरोकार: अभिजीत सहायकता के सिद्धांत में एक महान विश्वास रखते थे, कि समस्याओं का समाधान सबसे अच्छी तरह से पाया जाता है जहां वे उत्पन्न होते हैं।
  • वह जीवन की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में राज्य की स्थायी भूमिका के एक महान प्रस्तावक थे।