[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 29 August 2022

विषयसूची

सामान्य अध्ययन-II

  1. आधार-वोटर आईडी लिंकेज से संबंधित चिंताएं
  2. परिहार्य युद्ध

सामान्य अध्ययन-III

  1. मोबाइल बैंकिंग के लिए साइबर खतरा
  2. यूपीआई भुगतान शुल्क

सामान्य अध्ययन-IV

  1. भ्रष्टाचार- नैतिकता एवं मूल्यों के संकट को दर्शाता है।
  2. व्हिसलब्लोइंग
  3. सचिन तेंदुलकर के परिवार और कोच ने उनकी सफलता को आकार दिया

मुख्य परीक्षा संवर्धन हेतु पाठ्य सामग्री (नैतिकता / निबंध)

  1. एक-एक ईंट
  2. ‘चैंपियन से मिलिए’ पहल

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

  1. स्मृति वन स्मारक
  2. यूनेस्को का फेलिक्स हौफौएट-बोग्नी शांति पुरस्कार
  3. पीएमएवाई-जी के तहत उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 13 लाख और घरों की मांग
  4. मुस्लिम महिलाएं एवं उनका ‘तत्काल तलाक’ का अधिकार ‘खुला’
  5. ‘मा-ऑन’ चक्रवात
  6. डिजाइन आधारित प्रोत्साहन योजना
  7. वनों का निर्धारण
  8. भारत का INDC लक्ष्य
  9. ओजोन परत की रिकवरी
  10. ‘पेन-प्लस’ रणनीति

 


सामान्य अध्ययनII


 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

आधार-वोटर आईडी लिंकेज से संबंधित चिंताएं

संदर्भ: हाल ही में, ऐसे कई उदाहरण सामने आए हैं जहां ब्लॉक स्तर के अधिकारियों ने व्यक्तियों से अपने आधार-कार्ड को अपने वोटर आईडी से जोड़ने के लिए कहा जा रहा है और ऐसा न करने पर उनकी वोटर आईडी रद्द की जा सकती है।

आधार को मतदाता पहचान पत्र से जोड़ने की आवश्यकता:

  • चुनाव आयोग की प्रक्रिया। निर्वाचन आयोग द्वारा ‘मतदाता मूल’ (voter base) का अद्यतन और सटीक रिकॉर्ड।
  • मतदाताओं की द्विरावृत्ति या प्रतिरूपण को खत्म करना। जैसेकि प्रवासी श्रमिक,जिन्होंने अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूची में एक से अधिक बार पंजीकरण कराया हो अथवा एक ही निर्वाचन क्षेत्र में कई बार पंजीकृत व्यक्तियों को चिह्नित करना और मतदाता सूची को दुरस्त करना।

क्या आधार-कार्ड को वोटर आईडी से लिंक करना अनिवार्य है?

निर्वाचन कानून (संशोधन) अधिनियम, 2021:

  • संशोधित ‘लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम’, 1950 और एक नए उपबंध 23(4) को शामिल किया गया।
  • इसमें कहा गया है, कि निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी “पहले से पंजीकृत किसी भी व्यक्ति की पहचान या सत्यापन करने के उद्देश्य से उसके ‘आधार नंबर’ की मांग कर सकता है”।

निर्वाचक पंजीकरण नियम, 1960 (नियम 26B): प्रत्येक व्यक्ति जिसका नाम सूची में दर्ज है, पंजीकरण अधिकारी को अपना ‘आधार संख्या’ बता सकता है।

फॉर्म 6B: यह मतदाता को अपनी ‘आधार संख्या’ या कोई अन्य सूचीबद्ध दस्तावेज जमा करने की सुविधा प्रदान करता है।

आधार से जुड़े फायदे:

  • यूनिवर्सल: 2021 के अंत में, 99.7% वयस्क भारतीय आबादी के पास किसी अन्य आधिकारिक रूप से वैध दस्तावेज़ के रूप में ड्राइविंग लाइसेंस, राशन कार्ड, पैन कार्ड आदि से ज्यादा ‘आधार कार्ड’ था, जिसका ज्यादातर विशिष्ट उद्देश्यों में इस्तेमाल होता है।
  • अधिक विश्वसनीय: अन्य आईडी की तुलना में आधार-आधारित प्रमाणीकरण और सत्यापन को अधिक विश्वसनीय, तेज और लागत प्रभावी माना जाता है।

लिंक करने में समस्या:

  • पुट्टस्वामी निर्णय (2017): न्यायालय ने कहा, कि किसी व्यक्ति को- उसके आधार-कार्ड को लिंक नहीं होने पर- ‘निजता के अधिकार’ से वंचित करना अनुरूपता की कसौटी पर खरा नहीं उतरता है।
  • लाल बाबू हुसैन (1995): सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, ‘मतदान के अधिकार’ को केवल ‘पहचान के चार प्रमाणों’ पर जोर देकर खारिज नहीं किया जा सकता है – मतदाता, पहचान के किसी अन्य प्रमाण को प्रस्तुत करके ‘वोट का अधिकार’ प्राप्त कर सकते हैं।

आधार के साथ परिचालन संबंधी कठिनाइयाँ:

मतदाताओं का निर्धारण करने के लिए ‘आधार’ को प्राथमिकता देना पेचीदा है, क्योंकि आधार केवल ‘निवास का प्रमाण’ (Proof of Residence) है और यह ‘नागरिकता का प्रमाण’ (Proof of Citizenship) नहीं है।

  • बायोमेट्रिक्स में त्रुटियां: बायोमेट्रिक-आधारित प्रमाणीकरण में त्रुटि दर का अनुमान व्यापक रूप से भिन्न होता है। 2018 में UIDAI के अनुसार, आधार-आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण में 12% त्रुटि दर थी।
  • निजता के अधिकार का उल्लंघन और राज्य द्वारा निगरानी: मतदाता सूची और आधार के दो डेटाबेस को जोड़ने से ‘आधार’ की “जनसांख्यिकीय” जानकारी को मतदाता पहचान पत्र की जानकारी के साथ जोड़ा जा सकता है।

आगे की राह:

  • फॉर्म 6B: यह महत्वपूर्ण है, कि सरकार फॉर्म 6B में सुधार के माध्यम से स्पष्ट करे कि आधार की मतदाता कार्ड से लिंकिंग अनिवार्य नहीं है।
  • डेटा संरक्षण कानून: डेटा संरक्षण कानून को अधिनियमित किया जाए। यह क़ानून सरकार द्वारा संग्रहीत व्यक्तिगत डेटा के अनधिकृत संसाधन की चिंताओं को दूर करेगा।

इंस्टा लिंक्स:

आधार की सुरक्षा

मेंस लिंक:

निजता के अधिकार पर सर्वोच्च न्यायालय के नवीनतम निर्णय के आलोक में मौलिक अधिकारों के दायरे का परीक्षण कीजिए। (यूपीएससी 2017)

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारत एवं इसके पड़ोसी- संबंध।

परिहार्य युद्ध

संदर्भ:

पूर्व ऑस्ट्रेलियाई प्रधान मंत्री और चीन पर नजर रखने वाले ‘केविन रुड’ का कहना है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीन की कार्रवाइयों और ताइवान पर चीन और अमेरिका के बीच तनाव के बीच में काफी समानताएं हैं।

पुस्तक: “द अवॉइडेबल वॉर: द डेंजर्स ऑफ ए कैटास्ट्रॉफिक कॉन्फ्लिक्ट बिटवीन द यू.एस. एंड शी जिनपिंग्स चाइना” (The Avoidable War: The Dangers of a Catastrophic Conflict between the U.S. and Xi Jinping’s China)।

चीन के लिए ‘शी जिनपिंग’ की महत्वाकांक्षाएं:

राष्ट्रीय कायाकल्प (National rejuvenation): ‘शी जिनपिंग’ द्वारा परिकल्पित ‘राष्ट्रीय कायाकल्प’ को ताइवान को शामिल किए बगैर पूरा नहीं किया जा सकता है और इस कार्यक्रम को वर्ष 2049 तक पूरा करने के लिए लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

सैन्य सुधार: 2035 से 2037 तक चीन का सैन्य सुधार और आधुनिकीकरण कार्यक्रम।

शी जिनपिंग के 10 संकेंद्रित दिलचस्पी वृत्त:

  • पहले चार या पांच ‘संकेंद्रित दिलचस्पी वृत्त’ (concentric circles of interest) बड़े पैमाने पर देशीय हैं। और ये राजनीति और अर्थशास्त्र तथा सत्ता-संबंधी सुरक्षा तंत्र के बारे में हैं।
  • आठवां संकेंद्रित वृत्त (Concentric Circle Eight): यह वृत्त, विशाल यूरेशियन महाद्वीप में चीन के समग्र आर्थिक और इसके राजनीतिक प्रभाव का विस्तार करने के लिए ‘बेल्ट एंड रोड पहल’ के उपयोग से संबंधित है। इसमें भारत का भी उल्लेख है।

क्या भारत के पास पड़ोस में चीन के प्रभाव का मुकाबला करने का कोई तरीका है?

  • विभिन्न समूहों के बीच संतुलन: भारत को ऑस्ट्रेलिया, जापान और संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ ‘क्वाड एलायंस’ को मजबूत करना चाहिए और रूस और चीन के साथ SCO और ब्रिक्स के सदस्य के रूप में वर्तमान संतुलन बनाए रखना चाहिए।
  • अंतर्राष्ट्रीय नियम-आधारित व्यवस्था: चीनी सामरिक शक्ति की वास्तविकता को देखते हुए, मौजूदा अंतर्राष्ट्रीय नियम-आधारित व्यवस्था में अपनी आवाज शामिल करना कई मायनों में उतना ही महत्वपूर्ण है।

इंस्टा लिंक्स:

भारत-चीन संबंध

मेंस लिंक:

चीन अपने आर्थिक संबंधों और सकारात्मक व्यापार अधिशेष को, एशिया में ताकतवर सैन्य शक्ति के दर्जे को विकसित करने के लिए उपकरण के रूप में उपयोग कर रहा है। इस कथन के आलोक में भारत पर उसके पड़ोसी देश के रूप में इसके प्रभाव की चर्चा कीजिए। (यूपीएससी 2017)

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययनIII


 

विषय: आंतरिक सुरक्षा के लिये चुनौती उत्पन्न करने वाले शासन विरोधी तत्त्वों की भूमिका।

मोबाइल बैंकिंग के लिए साइबर खतरा

संदर्भ: वैश्विक साइबर सुरक्षा फर्म ‘कास्परस्की’ (Kaspersky) ने एशिया-प्रशांत (Asia Pacific – APAC) क्षेत्र में एंड्रॉइड और आईओएस उपकरणों पर साइबर हमलों में वृद्धि होने की चेतावनी दी है।

भारत में मोबाइल बैंकिंग की स्थिति:

  • 26% भारतीय वयस्कों के पास डिजिटल बैंक खाता है और यह आंकड़ा 2023 तक 39% और वर्ष 2027 तक 46% तक पहुंचने की उम्मीद है।
  • भारत के 25 राज्यों में किए गए 2020 के ‘स्टेटिस्टा सर्वेक्षण’ के अनुसार, दो-तिहाई उत्तरदाताओं के पास स्मार्टफोन था।

मूल बातें:

मोबाइल बैंकिंग ट्रोजन (Mobile banking Trojans) खतरनाक मैलवेयर होते हैं, जो दुर्भावनापूर्ण एप्लिकेशन को ‘वैध ऐप’ के रूप में दिखाकर लोगों को मैलवेयर इंस्टॉल करने को लुभाते है, और बाद में इन ‘ऐप्स’ के माध्यम से मोबाइल उपयोगकर्ताओं के बैंक खातों से पैसे चुरा सकते हैं।

  • ट्रोजन (Trojan) एक दुर्भावनापूर्ण कोड (Malicious Code) या सॉफ़्टवेयर होता है जो देखने में वैध लगता है, लेकिन स्मार्टफ़ोन सहित आपके डिवाइस को नियंत्रित कर सकता है।
  • अपराधी ‘गूगल प्ले स्टोर’ पर वैध दिखने वाले और उच्च-रैंकिंग वाले ‘दुर्भावनापूर्ण ऐप्स’ तथा एसएमएस के माध्यम से भेजे गए ‘फ़िशिंग संदेश’ या एसएमसिंग (smishing) के माध्यम से डिवाइस को संक्रमित करते हैं।

खतरों के उदाहरण:

  • अनुबिस (Anubis) मोबाइल बैंकिंग ट्रोजन वायरस: यह 2017 से एंड्रॉइड उपयोगकर्ताओं को लक्षित कर रहा है।
  • रोमिंग मेंटिस (Roaming Mantis) मोबाइल बैंकिंग उपयोगकर्ताओं को लक्षित करने वाला एक अन्य सफल मैलवेयर है।
  • बियानलियन मालवेयर (BianLian Malware)

विनियमन में समस्याएं:

  • पर्याप्त साइबर सुरक्षा का अभाव और बैंकिंग में प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, डेटा और सुरक्षा विशेषज्ञ प्रतिभा की कमी, संभावित रूप से उपयोगकर्ता उपकरणों पर साइबर हमले में और वृद्धि कर सकती है।
  • अन्तरसंक्रियता संबंधी समस्याएं: देश एक प्लेटफॉर्म से दूसरे इंटरऑपरेबल प्लेटफॉर्म में भुगतान करने की कोशिश कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, चीन ने अपनी इंटरनेट कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म पर अपनी प्रतिद्वंद्वी फर्मों के लिंक और भुगतान सेवाओं को ऑफर करने का आदेश दिया है।
  • भारत में एक नए कानून की शर्त के अनुसार, सभी लाइसेंस प्राप्त मोबाइल भुगतान प्लेटफॉर्म ‘वॉलेट (wallets) के बीच अंतर-संचालन प्रदान करने में सक्षम होने चाहिए।

 

निष्कर्ष और आगे की राह:

यह भुगतान करने के लिए मोबाइल डिवाइस का उपयोग करते समय सावधान और अत्यधिक सतर्क रहने में मदद करता है। फोन को अप-टू-डेट रखने और नियमित रूप से रीबूट करने जैसी सामान्य डिजिटल स्वच्छता प्रक्रियाओं के अलावा, उपभोक्ता यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि वे अपने फोन का उपयोग बैंकिंग के लिए तभी करें जब डिवाइस एक सुरक्षित वीपीएन से जुड़ा हो।

आईओएस 16 उपयोगकर्ता लॉकडाउन मोड को चालू कर सकते हैं क्योंकि यह डिवाइस की कार्यक्षमता को सीमित करता है और इसे किसी भी संभावित मैलवेयर से बचाता है।

 

इंस्टा लिंक:

साइबर सुरक्षा

मेंस लिंक:

साइबर सुरक्षा, मुख्य परीक्षा के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण विषय है। इससे संबंधित विभिन्न पहलुओं, मुद्दों और समाधानों पर एक तैयार नोट तैयार करें।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।

यूपीआई भुगतान शुल्क

संदर्भ: हाल ही में भारतीय रिज़र्व बैंक ने एक ‘परिचर्चा पत्र’ (discussion paper) जारी किया है, जिसमें भुगतान प्रणालियों में शुल्क लगाए जाने पर हितधारकों के विचार मांगे गए हैं।

‘शून्य शुल्क ढांचा’ (Zero charge framework): डिजिटल खुदरा भुगतान के अधिकांश तरीकों में लेनदेन पर शुल्क लगता है। किंतु, सरकार द्वारा वर्ष 2020 से ‘यूपीआई लेनदेन’ (UPI transactions) के लिए “शून्य-शुल्क ढांचा” (Zero-Charge Framework) अनिवार्य कर दिया गया है, जिसका अर्थ है कि उपयोगकर्ताओं के साथ-साथ व्यापारियों (मर्चेंट डिस्काउंट रेट- MDR पर) के लिए UPI पर कोई शुल्क नहीं देना होगा।

सरकार का विचार:

UPI सेवाओं को “डिजिटल पब्लिक वस्तु” बताते हुए, वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ‘यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस’ (Unified Payments Interface – UPI) सेवाओं के लिए कोई शुल्क लगाने पर सरकार का “कोई विचार नहीं” है।

आरबीआई की राय:

  • इसका विचार है कि डिजिटल भुगतान में वृद्धि होने से इन भुगतानों पर दी जाने वाली सब्सिडी का बोझ बढ़ जाता है। अतः यह सब्सिडी वापस लेनी पड़ सकती है।
  • आरबीआई ने हितधारकों से पूछा है, कि क्या ‘व्यापारी छूट दर’ (merchant discount rate – MDR) को यूपीआई लेनदेन में वापस लाया जाना चाहिए। MDR- वह शुल्क है, जो कार्ड से भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारी बैंक को चुकाते हैं।
  • यूपीआई लेनदेन पर, मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करना ‘भुगतान उद्योग’ की लंबे समय से मांग रही है।
  • हाल ही में, आरबीआई ने UPI को क्रेडिट कार्डों के साथ-साथ NPCI के ‘रुपे कार्ड’ के साथ भी शुरू करने की अनुमति दी है।

UPI और MDR पर शुल्क के लाभ:

  • इसमें अधिक संख्या में निजी निवेशकों के शामिल होने की संभावना है, जिससे भुगतान प्रणाली को बढ़ावा मिलेगा।
  • सब्सिडी पर सरकारी वित्त में बचत: सरकार ने रुपे डेबिट कार्ड और यूपीआई लेनदेन के शुल्क की प्रतिपूर्ति के लिए 200 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।
  • 2021-22 में इसके लिए 1,500 करोड़ रुपये का बजट रखा था।

खामियां:

  • यह नागरिकों द्वारा तेजी से बढ़ रहे UPI लेनदेन को हतोत्साहित करेगा।
  • यह UPI/MDR पर आधारित डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र को कमजोर कर देगा।

UPI क्या है?

‘एकीकृत भुगतान इंटरफेस’ या ‘यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस’ (UPI) एक त्वरित रियल-टाइम भुगतान प्रणाली है। यह प्रणाली, उपयोगकर्त्ताओं को अपने बैंक खाते का विवरण दूसरे पक्ष को बताए बिना कई बैंक खातों में रियल-टाइम आधार पर धन-अंतरण करने की अनुमति देती है।

  • वर्तमान में ‘यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस’ (UPI), नेशनल ऑटोमेटेड क्लियरिंग हाउस (NACH), तत्काल भुगतान सेवा (IMPS), आधार सक्षम भुगतान प्रणाली (AePS), भारत बिल भुगतान प्रणाली (BBPS), रुपे (RuPay) आदि सहित ‘भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम’ (NPCI) द्वारा संचालित सभी प्रणालियों में सबसे बड़ी प्रणाली है।
  • शीर्ष UPI ऐप में, फ़ोनपे (PhonePe), पेटीएम (Paytm), गूगल पे (Google Pay), अमेज़न पे (Amazon Pay) और सरकार द्वारा संचालित भीम (BHIM) एप्लीकेशन शामिल हैं।

इंस्टा लिंक:

‘यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस’ (UPI)

मेंस लिंक:

भुगतान प्रणाली में भारत की प्रगति एक अत्याधुनिक केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (CBDC) बनाने के लिए एक उपयोगी आधार प्रदान करेगी, लेकिन इसमें चुनौतियां बनी हुई हैं। विचार-विमर्श कीजिए। (250 शब्द)

स्रोत: आरबीआई

 


सामान्य अध्ययनIV


 

विषय: शासन में ईमानदारी

भ्रष्टाचार- नैतिकता एवं  मूल्यों के संकट को दर्शाता है।

संदर्भ: प्रधान मंत्री के स्वतंत्रता दिवस के भाषण में भ्रष्टाचार को कम करने के लिए सार्वजनिक जीवन में अधिक पारदर्शिता और ईमानदारी के लिए उनके जोशीले अभियान का भी जिक्र किया गया था।

आजादी के 75 साल बाद भी, हमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक ‘भ्रष्ट राष्ट्र’ के रूप में ब्रांडेड किया जाना जारी है।

समस्याग्रस्त क्षेत्र:

  • उच्च और निचले स्तर पर सरकारी अधिकारियों की बेईमानी। यह बुराई राज्य और केंद्र प्रशासन के कुछ नौकरशाही क्षेत्रों दोनों में व्याप्त है।
  • संपत्ति खरीदने और बेचने से संबंधित दस्तावेजों के पंजीकरण और नए भवन बनाने के लिए योजना अनुमति की मंजूरी जैसे क्षेत्रों में ‘रियल एस्टेट भ्रष्टाचार’ असहनीय बना हुआ है।
  • राजनीतिक मुद्दे: सरकार के गठन के दौरान एक ‘प्लम पोर्टफोलियो’ (Plum Portfolio) की मांग का संदर्भ स्तब्ध कर देने वाला है और इसके कई निराशाजनक अर्थ हैं।
  • कानून प्रवर्तन में भ्रष्टाचार: पूरे देश में पुलिस विभाग अपनी बेईमानी के लिए कुख्यात हैं। देश के 10,000 या अधिक पुलिस थानों में से शायद ही कोई ऐसा हो जो यह दावा कर सके कि वे इस बीमारी से मुक्त हैं।

दिए गए सुझाव:

  • जनभागीदारी: भ्रष्टाचार से निपटने को सरकार और जनता के बीच एक संयुक्त प्रयास माना जाता है। दिमाग और प्रयास के मिलन के बगैर, हमारी नैतिक विश्वसनीयता को बढ़ाने के लिए बहुत कम हासिल किया जा सकता है। रिश्वत लेने वाला रिश्वत देने वाले के बिना नहीं पनप सकता।
  • नैतिकता में शिक्षा: जब तक हमारी आने वाली पीढ़ियों को अपने करियर में ईमानदारी के पक्ष में नहीं सिखाया जाता है, तब तक इनसे बहुत कम अपेक्षा है।

स्रोत: बिजनेसलाइन

 

व्हिसलब्लोइंग

संदर्भ: सीएनएन और द वाशिंगटन पोस्ट अखबार ने बताया कि ट्विटर पर सुरक्षा के पूर्व प्रमुख पीटर ‘मुडगे’ ज़टको (Peiter ‘Mudge’ Zatko) द्वारा ‘अमेरिकी प्रतिभूति और विनिमय आयोग’ के समक्ष एक व्हिसलब्लोअर शिकायत दर्ज की गयी है, जिसमें अन्य बातों के अलावा आरोप लगाया गया है- कि भारत सरकार ने सोशल मीडिया नेटवर्क को अपने एजेंट को काम पर रखने के लिए मजबूर किया था। तब, इन एजेंट्स के पास संवेदनशील उपयोगकर्ता डेटा तक पहुंच प्राप्त थी।

सोशल मीडिया की भूमिका:

मध्यस्थ: मध्यस्थ होने के नाते, लोगों की गोपनीयता को सुरक्षित रखना सोशल मीडिया का कर्तव्य है। निजता से समझौता करने से जनता के विश्वास की हानि होती है।

नैतिक कर्तव्य: सोशल मीडिया प्लेटफार्मों को नियुक्त करने और विनियमित करने के संबंध में सोशल मीडिया में एक सख्त आचार संहिता होनी चाहिए।

व्हिसलब्लोइंग के बारे में विस्तार से जानने के लिए पढ़िए।

 

विषय: “मूल्यों को विकसित करने में पारिवारिक समाज और शैक्षिक संस्थानों की भूमिका।”

सचिन तेंदुलकर के परिवार और कोच ने उनकी सफलता को आकार दिया

संदर्भ: सचिन तेंदुलकर के सेवानिवृत्ति के दौरान भावनात्मक विदाई भाषण ने इस बात पर प्रकाश डाला है, कि एक सफल करियर की यात्रा में परिवार, दोस्तों और शिक्षकों की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है।

परिवार के किसी करीबी सदस्य के संदेश, बच्चे के जीवन में मार्गदर्शक के रूप में कार्य करते हैं।

  • सचिन ने उल्लेख किया, कि कैसे उनके परिवार के प्रत्येक सदस्य ने उन्हें किसी न किसी तरह से प्रोत्साहित किया था जिसके कारण वह क्रिकेट में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सके।
  • उन्हें एक ऐसे क्रिकेटर के रूप में जाना जाता है, जिनका कभी कोई प्रतिद्वंदी नहीं था और न ही उन्होंने नैतिक और खेल भावना के साथ किसी को गाली दी थी।
  • उनकी सेवानिवृत्ति के बाद भी, उनके सभी सार्वजनिक कार्यक्रम बहुत सावधानी से चुने गए थे। उन्होंने कई शराब और सिगरेट ब्रांडों के विज्ञापन से इनकार किया था।

इसी वजह से उन्हें क्रिकेट का भगवान कहा जाता था। (मैंने भगवान को देखा है। वह भारत के लिए चौथे नंबर पर बल्लेबाजी करते हैं – मैथ्यू हेडन)।

 


मुख्य परीक्षा संवर्धन हेतु पाठ्य सामग्री (नैतिकता / निबंध)


एक-एक ईंट

संदर्भ: तमिलनाडु का तिरुवल्लूर जिला लंबे समय से बंधुआ मजदूरी के प्रचलन के लिए कुख्यात रहा है। यहाँ पर काम करने वाले मजदूर मुख्य रूप से इरुला समुदाय के सदस्य हैं जो अनुसूचित जनजाति श्रेणी के अंतर्गत आता है।

  • जिला कलेक्टर डॉ एल्बी जॉन वर्गीज ने सबसे पहले इन श्रमिकों और एक ईंट भट्टे के मालिक के समक्ष संयुक्त रूप से स्वामित्व और संचालन के साथ एक ‘स्वयं सहायता समूह’ की परियोजना का प्रस्ताव रखा।
  • इस परियोजना के तहत हुए कुल उत्पादन का लगभग आधा, प्रधान मंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) योजना के तहत परियोजनाओं को बेचा गया था।

राज्य सरकार के तमिलनाडु महिला विकास निगम लिमिटेड द्वारा महिलाओं के लिए एक सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण कार्यक्रम ‘महलिर थिट्टम’ (Mahalir Thittam) लागू किया जा रहा है। आईजेएम, अपने परिचालन पहलुओं में ईंट भट्ठा परियोजना का समर्थन और सलाह भी दे रहा है।

नैतिकता संबंधी सवालों – जैसेकि अल्पसंख्यकों के मुद्दों को सुधारने के लिए सिविल सेवकों द्वारा की गई अच्छी पहल-  के उत्तर में इस पहल का उल्लेख किया जा सकता है।

 

‘चैंपियन से मिलिए’ पहल

संदर्भ: युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय द्वारा 29 अगस्त को राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर, देश भर के 26 स्कूलों में ‘चैंपियन से मिलिए’ (Meet the Champion) पहल का आयोजन किया जाएगा।

विवरण:

  • ‘चैंपियन से मिलिए’ स्कूल की यात्रा करने का एक अनूठा अभियान है, जिसकी शुरुआत ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता नीरज चोपड़ा द्वारा पिछले साल दिसंबर में की गई थी। यह अभियान पिछले कुछ महीनों में देश के विभिन्न हिस्सों में पहुंचा है।
  • स्कूल की यात्रा के दौरान, चैंपियन एथलीट अपने अनुभव, जीवन के सबक तथा सही आहार से संबंधित टिप्स साझा करते हैं और स्कूली बच्चों को समग्र रूप से प्रेरणादायक तरीके से प्रोत्साहित भी करते हैं।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


स्मृति वन स्मारक

संदर्भ: प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के भुज जिले में स्मृति वन स्मारक (Smriti Van memorial)  का उद्घाटन किया।

  • भुज में स्मृति वन स्मारक और अंजार में वीर बाल स्मारक गुजरात के कच्छ जिले और पूरे देश के साझा दर्द के प्रतीक हैं।
  • इसे 2001 के भूकंप के दौरान अपनी जान गंवाने वाले लगभग 13,000 लोगों की मौत के बाद लोगों द्वारा दिखाई गई लचीलेपन की भावना का जश्न मनाने के लिए लगभग 470 एकड़ के क्षेत्र में बनाया गया है। इस भूकंप का केन्‍द्र भुज में था।
  • स्मारक के आसपास के जंगल को मियावाकी पद्धति के तहत विकसित किया गया है। इस पद्धति में प्रति वर्ग मीटर दो से चार पेड़ लगाए जाते है। मियावाकी के जंगल दो से तीन साल में बढ़ते हैं और आत्मनिर्भर होते हैं।

 

यूनेस्को का फेलिक्स हौफौएट-बोग्नी शांति पुरस्कार

संदर्भ: पूर्व जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल को ‘शरणार्थियों का स्वागत और सुरक्षा’  करने संबंधी प्रयासों के लिए यूनेस्को का फेलिक्स हौफौएट- बोगनी शांति पुरस्कार 2022 (UNESCO Felix Houphouet- Boigny Peace Prize 2022) प्रदान किया जाएगा।

पुरस्कार के बारे में:

  • पुरुस्कार की स्थापना: वर्ष 1989
  • यूनेस्को के चार्टर के अनुसार, यह पुरस्कार शांति बनाए रखने और सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण योगदान करने वाले जीवित व्यक्तियों को दिया जाता है।

 

पीएमएवाई-जी के तहत उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 13 लाख और घरों की मांग

संदर्भ: केंद्र ने प्रधान मंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के तहत 13 लाख अतिरिक्त “पात्र लाभार्थियों” के लिए घरों की मंजूरी के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के अनुरोध को ठुकरा दिया है।

प्रधानमंत्री आवास योजना- ग्रामीण (PMAY-G) के बारे में:

  • कार्यान्वयन मंत्रालय: ग्रामीण विकास मंत्रालय।
  • प्रधान मंत्री आवास योजना ग्रामीण (PMAY-G) को पहले इंदिरा आवास योजना कहा जाता था। मार्च 2016 में इसका नाम बदल कर योजना को पुनर्गठित किया गया है।
  • PMAY-G का उद्देश्य वर्ष 2022 तक सभी आवासहीन गृहस्वामियों तथा कच्चे और जीर्ण-शीर्ण घर में रहने वाले लोगों को बुनियादी सुविधाओं सहित एक पक्का घर प्रदान करना है।

लक्ष्य:

  • इसके तहत वर्ष 2022 तक सभी बुनियादी सुविधाओं सहित 2.95 करोड़ घरों के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

लागत वितरण:

  • इस योजना के अंतर्गत, प्रत्येक इकाई के निर्माण में सहायता राशि को केंद्र और राज्य सरकारों के मध्य, मैदानी क्षेत्रों में 60:40 तथा पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों के लिए 90: 10 के अनुपात में साझा किया जाता है।
  • इस योजना में ग्रामीण राजमिस्त्री के प्रशिक्षण प्रदान करने, तथा साथ ही साथ मकानों के निर्माण और गुणवत्ता में सुधार लाने के उद्देश्य से, कुशल कारीगरों को रोजगार प्रदान करने की परिकल्पना की गई है।

लाभार्थियों का चयन:

  • PMAY-G के लाभार्थियों की पहचान सामाजिक-आर्थिक और जाति जनगणना (Socio-Economic and Caste Census- SECC) से उपलब्ध डेटा के अनुसार की जाएगी, तथा लाभार्थियों का चयन, निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पात्र होने और ग्राम सभा सत्यापन के बाद, 13 बिंदु अपवर्जन मानदंडों के अधीन किया जायेगा।

 

मुस्लिम महिलाएं एवं उनका तत्काल तलाकका अधिकार ‘खुला’

संदर्भ:

ज्यादातर मुस्लिम महिलाएं विवाह की समाप्ति के लिए ‘खुला’ (khhula) का विकल्प चुन रही हैं। ‘खुला’ महिला को ‘तत्काल तलाक’ (instant divorce) का अविच्छेद्य अधिकार होता है, हालाँकि इसे ‘तत्काल ट्रिपल तलाक’ (instant triple talaq) की तरह व्यापक रूप से इस्तेमाल नहीं किया जाता है।

विदित हो कि, पुरुषों द्वारा दिए जाने वाले ‘ट्रिपल तलाक’ तथा ‘तलाक-ए-हसन’ (talaq-e-Hassan) को 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने अमान्य घोषित कर दिया था।

‘खुला’:

  • ‘खुला’ (khhula) में तलाक की पहल महिला द्वारा की जाती है, और इस तरह के तलाक के समय वह अपना मेहर (शादी के समय महिला को हस्तांतरित या वादा किया गया धन) को लौटा देती है।
  • खुला को मौखिक रूप से या ‘खुलनामा’ (Khhulnama) नामक दस्तावेज़ के माध्यम से शुरू किया जा सकता है।
  • यह प्रभाव में ‘तत्काल तलाक’ के समान होता है।

‘तत्काल ट्रिपल तलाक’ क्या है?

‘तीन तलाक’ वह प्रथा है जिसके तहत एक मुस्लिम पुरुष अपनी पत्नी को केवल तीन बार “तलाक” बोलकर विवाह-विच्छेद कर सकता है।

  • 2017 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले (केस शायरा बानो बनाम भारत संघ) द्वारा इसे प्रतिबंधित कर दिया गया था।
  • तलाक का तरीका भारत के मुस्लिम समुदाय में प्रचलित है, जिनमें से अधिकांश ‘हनफ़ी इस्लामिक स्कूल ऑफ़ लॉ’ का पालन करते हैं।

 

मा-ऑनचक्रवात

संदर्भ: ‘मा-ऑन’ चक्रवात (‘Ma-on’ Cyclone) उत्तरी फिलीपींस में हाल ही में आने वाला उष्णकटिबंधीय तूफान है, जिसमें कम से कम तीन लोग घायल हो गए और हजारों लोग विस्थापित हो चुके हैं।

उष्णकटिबंधीय चक्रवात (Tropical Cyclone) एक तेजी से घूमने वाला तूफान-प्रणाली होती है। निम्न वायुदाब केंद्र, तेज हवाएं, बंद निम्न-स्तरीय वायुमंडलीय परिसंचरण और भारी बारिश पैदा करने वाले गरजदार सर्पिल झंझावात आदि उष्णकटिबंधीय चक्रवातों की कुछ प्रमुख विशेषताएं होती हैं।

 

डिजाइन आधारित प्रोत्साहन योजना

संदर्भ: संचार मंत्रालय द्वारा पहले उत्पादन संबद्ध प्रोत्साहन योजना (PLI) के एक हिस्से के रूप में डिजाइन आधारित प्रोत्साहन योजना (Design-led Incentive (DLI) Scheme) के तहत आवेदन आमंत्रित किए गए थे।

डीएलआई और पीएलआई के बीच अंतर:

  • दूरसंचार निर्माण में संपूर्ण मूल्य-श्रृंखला को बढ़ावा देने के लिए, ‘डिज़ाइन आधारित पीएलआई योजना’ को जून, 2022 में लॉन्च किया गया था।
  • दूरसंचार क्षेत्र में उत्पादन संबद्ध प्रोत्साहन योजना (PLI) 2021 में शुरू की गई थी।
  • ‘डिज़ाइन आधारित पीएलआई योजना’ के तहत भारत में डिज़ाइन किए गए उत्पादों के लिए मौजूदा प्रोत्साहनों के अलावा 1 प्रतिशत का अतिरिक्त प्रोत्साहन प्रदान किया।
  • कम से कम 50% मेड इन इंडिया घटकों का उपयोग करने वाले टेलीकॉम उपकरण निर्माता, इस योजना के लिए लाभ के पात्र होंगे।

‘उत्पादन-संबद्ध प्रोत्साहन योजना (PLI Scheme):

2020 में शुरू की गई।

  • PLI योजना के तहत, केंद्र सरकार द्वारा वृद्धिशील उत्पादन पर प्रोत्साहन देकर पात्र निर्माताओं को सब्सिडी प्रदान की जाएगी।
  • संयंत्र, मशीनरी, उपकरण और सिविल कार्यों में 300 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश करने वाली कंपनियों को अपने टर्नओवर का 15 प्रतिशत प्रोत्साहन मिलेगा। इस टर्नओवर को निवेश करने तीसरे वर्ष में 600 करोड़ रुपये होना चाहिए।
  • 100 करोड़ रुपये से 300 करोड़ रुपये के बीच निवेश करने वाली कंपनियां भी शुल्क वापसी और प्रोत्साहन (उनके कारोबार के 15 प्रतिशत से कम) प्राप्त करने की पात्र होंगी।

अब तक, सरकार ने ऑटो, इलेक्ट्रॉनिक्स, दूरसंचार, फार्मा, सौर, धातु और खनन, कपड़ा, सफेद सामान, ड्रोन और उन्नत रसायन सेल बैटरी सहित 14 क्षेत्रों के लिए पीएलआई योजनाओं की घोषणा की है।

 

वनों का निर्धारण

संदर्भ: हाल ही में ‘पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय’ (MoEFCC) और छत्तीसगढ़ सरकार के बीच, जंगल की भूमि को राजस्व विभाग के लिए हस्तांतरित किए जाने को लेकर विवाद हुआ था।

वाद और प्रतिवाद

  • केंद्र का तर्क: वन संरक्षण अधिनियम 1980 (FCA) के तहत एक गैर-सीमांकित संरक्षित वन का उपयोग केंद्र सरकार की सहमति के बिना गैर-वन उद्देश्यों के लिए नहीं किया जा सकता है।
  • राज्य का तर्क: हस्तांतरित की गयी भूमि, वन भूमि नहीं थी।

कानूनी प्रावधान:

  • गोडावर्मन मामले (1996) में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार, राज्य द्वारा केंद्र या राज्य के रिकॉर्ड के तहत पहले से वर्गीकृत नहीं की गयी भूमि को ‘वन के रूप में’ परिभाषित किया जा सकता है।
  • वन संविधान की ‘समवर्ती सूची’ के अंतर्गत एक विषय है।

वनों पर अधिकार क्षेत्र:

  • आरक्षित वन (निर्दिष्ट किए जाने तक कुछ भी अनुमति नहीं है) और संरक्षित वन (जब तक निर्दिष्ट नहीं है तब तक सब कुछ अनुमत है) पर राज्य के वन विभाग का अधिकार क्षेत्र होता है।
  • गांव और नगरपालिका वन, राज्य के राजस्व विभाग के अधीन आते हैं।

 

भारत का INDC लक्ष्य

संदर्भ: भारत ने औपचारिक रूप से ‘संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क कन्वेंशन’ (UNFCCC) को एक अद्यतन ‘राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान’ (Nationally Determined Contribution- INDC) लक्ष्य प्रस्तुत किया है।

भारत का आईएनडीसी लक्ष्य:

भारत ने अपने ‘राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान’ (INDC) लक्ष्य को मुख्य रूप से 2030 तक हासिल करने की घोषणा की है।

  • मूल लक्ष्य: बिजली के लिए स्थापित क्षमता का कुल 40% भाग, गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से उत्पादित होगा।
  • नया लक्ष्य: 2030 तक ,अंतर्राष्ट्रीय वित्त (वैश्विक जलवायु कोष) और प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण की मदद से, गैर-जीवाश्म ईंधन-आधारित ऊर्जा संसाधनों से लगभग 50 प्रतिशत संचयी विद्युत शक्ति की स्थापित क्षमता प्राप्त करने के लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
  • भारत ने वर्ष 2030 तक अतिरिक्त वन और वृक्ष आवरण के माध्यम से 2.5 से 3 बिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड के बराबर अतिरिक्त कार्बन सिंक निर्मित करने का भी वादा किया है।

COP26 पर नए लक्ष्य: भारत ने 2070 तक नेट-जीरो तक पहुंचने के लक्ष्य की घोषणा की (पंचामृत योजना) है।

हाल की रिपोर्ट के अनुसार, इन लक्ष्यों को प्राप्त करने से भारत के सकल घरेलू उत्पाद में 4.7% (2036) तक की वृद्धि होगी और लाखों नए रोजगार सृजित होंगे।

आईएनडीसी: ‘राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान’ (INDC) सरकारों के लिए अपने देशों में जलवायु परिवर्तन को संबोधित करने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सूचित करने के लिए प्राथमिक साधन हैं। ये कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं हैं।

 

ओजोन परत की रिकवरी

संदर्भ: अमेरिका के ‘नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन’ (NOAA) के अनुसार, मध्य-अक्षांश में ओजोन-क्षयकारी पदार्थ की सांद्रता में काफी कमी आई है और यह 1980 के स्तर तक पहुँच गयी है।

ओजोन के बारे में:

  • ओजोन (Ozone) एक प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला, अत्यधिक प्रतिक्रियाशील अणु है जो तीन ऑक्सीजन परमाणुओं से बना होता है। इसे ‘डॉबसन इकाई’ का उपयोग करके मापा जाता है।
  • वायुमंडल में लगभग 90% ओजोन पृथ्वी की सतह (समताप मंडलीय ओजोन) से 15 से 30 किलोमीटर के बीच केंद्रित है।
  • यह जमीनी स्तर पर कम सांद्रता (क्षोभमंडलीय ओजोन) में भी पाया जाता है। यहां ओजोन एक प्रदूषक का कार्य करती है जो शहरों में धुंध का एक प्रमुख अवयव होती है।

ओजोन-क्षयकारी पदार्थ:

  • क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs) और अन्य हैलोजनयुक्त ओजोन-क्षयकारी पदार्थ (ozone-depleting substances – ODS) मुख्य रूप से मानव निर्मित रासायनिक ‘ओजोन रिक्तीकरण’ के लिए जिम्मेदार हैं।
  • इनका उपयोग मुख्य रूप से रेफ्रिजरेटर, एयर कंडीशनर, अग्निशामक और फोम में किया जाता है।

ODS नियमों के लिए संधि:

  1. ओज़ोन परत के संरक्षण के लिए वियना कन्वेंशन (1985);
  2. मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल (ओडीएस, 1987 का विनियमित उत्पादन और खपत);
  3. किगाली संशोधन (हाइड्रोफ्लोरोकार्बन (एचएफसी) के उत्पादन और खपत को चरणबद्ध तरीके से कम करना)।

 

पेन-प्लसरणनीति

संदर्भ: अफ्रीकी स्वास्थ्य मंत्रियों द्वारा गैर-संचारी रोगों (non-communicable diseases- NCDs) के खिलाफ ‘पेन-प्लस रणनीति’ (PEN-PLUS strategy) अपनाई जा रही है।

  • ‘पेन-प्लस’ मूल रूप से प्रथम स्तर की रेफरल स्वास्थ्य सुविधाओं पर गंभीर गैर-संचारी रोगों को संबोधित करने के लिए एक क्षेत्रीय रणनीति है। इस रणनीति का उद्देश्य पुराने और गंभीर NCD वाले रोगियों के उपचार और देखभाल में पहुंच के अंतर को पाटना है।
  • अफ्रीका में मरीजों के जेब से खर्च में सबसे ज्यादा खर्च ‘गैर-संचारी रोगों’ (NCDs) पर होता है।
  • प्राथमिक और जिला स्वास्थ्य सुविधाओं पर उपलब्ध सेवाओं के पैकेज के रूप में एनसीडी देखभाल की पेशकश करके, रोगियों को अपने खर्च में कमी होगी।