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[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 23 August 2022

विषयसूची

सामान्य अध्ययन-II

  1. महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना
  2. दिल्ली आबकारी नीति
  3. एकीकृत बाल विकास योजना एवं आंगनवाड़ी

 

सामान्य अध्ययन-III

  1. सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का निजीकरण किस प्रकार किया जाना चाहिए?: व्याख्या
  2. विज्ञान में महिलाएं

सामान्य अध्ययन-IV

  • परोपकार की नैतिकता

मुख्य परीक्षा संवर्धन हेतु पाठ्य सामग्री (नैतिकता/निबंध)

  1. वेध परियोजना

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

  1. पांडुरंग खानखोजे
  2. बादल फटने की घटनाएं और पूरे भारत में इनकी बढ़ती आवृत्ति
  3. कानूनी सहायता रक्षा परामर्श प्रणाली
  4. भारत और ईरान के बीच समुद्र से यात्रा करने वालों के संबंध में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर
  5. ‘व्यापार करने में सुगमता’ हेतु नए मानदंड
  6. भूतापीय उर्जा
  7. फॉरएवर केमिकल्स
  8. प्रशांत महासागरीय ब्लूफिन टूना
  9. टमाटर फ्लू
  10. खगोल विज्ञान और खगोल भौतिकी पर अंतर्राष्ट्रीय ओलंपियाड में भारत को तीसरा स्थान

 


सामान्य अध्ययनI


 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना

संदर्भ: ग्रामीण विकास और पंचायती राज पर संसदीय स्थायी समिति ने ‘महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम’ (MGNREGA) पर एक कार्रवाई रिपोर्ट जारी की है। सरकार ने समिति द्वारा की गयी 33 सिफारिशों में से 26 को स्वीकार कर लिया है।

पैनल द्वारा सुझाव और की गई कार्रवाई:

  • कार्य दिवसों की संख्या मौजूदा 100 दिनों से बढ़ाकर 150 दिन की जाए। हालांकि, इसे केवल सूखा/आपदा प्रभावित क्षेत्रों (50 अतिरिक्त दिन प्रदान करके) और कुछ राज्यों, जैसे उत्तराखंड (150) में अपने स्वयं के फंड का उपयोग करके लागू किया गया है।
  • महिला केंद्रित कार्य को बढ़ावा देना: अधिक महिलाओं को शामिल करने के प्रयासों के बावजूद, पिछले 5 वर्षों में महिलाओं की भागीदारी लगभग 50% पर स्थिर रही है।
  • मजदूरी में वृद्धि की जानी चाहिए और मजदूरी को मुद्रास्फीति से जोड़ा जाना चाहिए। वर्तमान में, श्रमिकों की मजदूरी ‘उपभोक्ता मूल्य सूचकांक – कृषि’ (CPI- Agriculture) से जुड़ा हुई है।
  • समय पर भुगतान: वर्तमान में, (एक अध्ययन के अनुसार) 71 प्रतिशत वेतन भुगतान में अनिवार्य सात दिनों से अधिक की देरी होती है।
  • MGNREGA के साथ विभिन्न ग्रामीण विकास योजनाओं का अभिसरण किया जाना चाहिए, इससे ग्रामीण गरीबी को दूर करने में मदद मिलेगी।
  • समिति द्वारा जॉब कार्डधारकों के लिए घर-घर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की सिफारिश की गई है।
  • जाति-आधारित मजदूरी की व्यवस्था को वापस लिया जाना चाहिए, जिसके तहत राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम’ (नरेगा) श्रमिकों को इस आधार पर भुगतान किया जाता है कि वे अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य से संबंधित हैं। इससे पहले मजदूरी भुगतान के लिए ‘एकल निधि अंतरण व्यवस्था’ (Single Fund Transfer Order) लागू थी।

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम’ (MGNREGA) के बारे में:

  • मनरेगा (MGNREGA) को भारत सरकार द्वारा वर्ष 2005 में एक सामाजिक उपाय के रूप में प्रस्तुत किया गया था। जिसके अंतर्गत ‘काम करने के अधिकार’ (Right to Work) की गारंटी प्रदान की जाती है।
  • इस सामाजिक उपाय और श्रम कानून का मुख्य सिद्धांत यह है, कि स्थानीय सरकार को ग्रामीण भारत में न्यूनतम 100 दिनों का वैतनिक रोजगार प्रदान करना होगा ताकि ग्रामीण श्रमिकों के जीवन स्तर में वृद्धि की जा सके।

क्रियान्वयनः इस योजना का कार्यान्वयन ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा राज्य सरकारों के सहयोग से किया जाता है। यह एक केंद्र प्रायोजित योजना है।

  1. आवेदन जमा करने के 15 दिनों के भीतर या जिस दिन से काम की मांग होती है, उस दिन से आवेदक को वैतनिक रोजगार प्रदान किया जाएगा।
  2. रोजगार उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में, आवेदन जमा करने के पंद्रह दिनों के भीतर या काम की मांग करने की तिथि से बेरोजगारी भत्ता पाने का अधिकार होगा।
  3. मनरेगा के कार्यों का सामाजिक लेखा-परीक्षण (Social Audit) अनिवार्य है, जिससे कार्यक्रम में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित होती है।
  4. मजदूरी की मांग करने हेतु अपनी आवाज उठाने और शिकायतें दर्ज कराने के लिए ‘ग्राम सभा’ इसका प्रमुख मंच है।
  5. मनरेगा के तहत कराए जाने वाले कार्यों को मंजूरी देने और उनकी प्राथमिकता तय करने का दायित्व ‘ग्राम सभा’ और ‘ग्राम पंचायत’ का होता है।

इंस्टा लिंक:

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना

मेंस लिंक:

‘महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम’ (MGNREGA) की प्रमुख विशेषताओं और महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: फैक्टली

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

दिल्ली आबकारी नीति को लेकर विवाद

संदर्भ: दिल्ली आबकारी नीति (Delhi Excise Policy) पर हाल ही में काफी विवाद होने पर इसे अब वापस ले लिए गया है।

संबंधित विवाद के बारे में: पिछले वर्ष दिल्ली सरकार द्वारा एक नई “नई दिल्ली आबकारी नीति 2021-22” (New Delhi Excise Policy 2021-22) लागू की गयी थी। इसका मुख्य उद्देश्य सरकार को शराब के कारोबार से पूरी तरह से अलग करना और निजी क्षेत्र को लाइसेंस सौंपने को सुनिश्चित करना था।

  • इस नीति के लागू होने से पहले, शराब व्यवसाय एक राज्य-नियंत्रित इकाई था जिसमें कोई निजी कारोबारी शामिल नहीं था।
  • शुरुआत में, इस नीति ने सरकार को राजस्व 27 प्रतिशत बढ़ाकर 8,900 करोड़ रुपये करने, और शराब माफिया के प्रभुत्व को हटाने में मदद की थी।

नीति से जुड़े विवाद:

  • नई दुकानों का स्कूलों और धार्मिक स्थल के पास आवंटन।
  • गैर-अनुरूप क्षेत्रों, जहां कुछ व्यवसायों जैसे कि शराब की खुदरा बिक्री की अनुमति नहीं होती है, से संबंधित उल्लंघन।
  • छूट और योजनाओं से संबंधित मुद्दे जैसे शराब की एक बोतल के साथ एक बोतल मुफ्त।
  • लाइसेंसों की वापसी: लगभग 850 शराब की दुकानों में से केवल 468 दुकाने ही वास्तव में खुल सकीं।

श्री सिसोदिया से जुड़ा विवाद: दिल्ली सरकार के मंत्री मनीष सिसोदिया पास सरकार के ‘आबकारी विभाग’ का प्रभार है, और वे कथित तौर पर शराब लाइसेंसधारियों को “अनुचित वित्तीय लाभ” प्रदान करने के लिए जांच के घेरे में है।

इंस्टा लिंक:

‘आबकारी शुल्क’ क्या है?

  • उत्पाद कर या आबकारी शुल्क (Excise Tax / Excise Duty) देश के भीतर उत्पादित वस्तुओं पर लगाया जाने वाला एक प्रकार का ‘कर’ होता है। यह सीमा शुल्क (Customs Duties) के विपरीत होता है, जिसे देश के बाहर से उत्पादित माल पर लगाया जाता है।
  • ‘उत्पाद शुल्क’ किसी वस्तु के उत्पादन या बिक्री पर लगाया जाने वाला ‘कर’ होता है।

मेंस लिंक:

नई दिल्ली आबकारी नीति 2021-22 में राज्य सरकार के लिए अधिकतम राजस्व सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है। समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए।

स्रोत: द हिंदू, द न्यू इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

एकीकृत बाल विकास योजना एवं आंगनवाड़ी

संदर्भ: समन्वित / एकीकृत बाल विकास योजना (Integrated Child Development Scheme ICDS) के एक भाग के रूप में ‘आंगनवाड़ी प्रणाली’ (Anganwadi system), देश भर में स्थापित 1.3 मिलियन केंद्रों में 3-6 आयु वर्ग के 30 मिलियन से अधिक बच्चों की सेवा करती है।

एकीकृत बाल विकास योजना (ICDS) के साथ समस्याएं:

उपस्थिति के संदर्भ में:

  • ‘एकीकृत बाल विकास योजना’ (Integrated Child Development Scheme – ICDS) के तहत 0 से 6 वर्ष के आयु वर्ग के सभी बच्चों को उनके स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा की जरूरतों को पूरा करने के लिए डिज़ाइन की गई है।
  • भारत में 70% से अधिक बच्चे आंगनबाड़ियों में नामांकित हैं, लेकिन ICDS बच्चों की कम उपस्थिति से ग्रस्त है।

माता-पिता की भूमिका:

  • आईसीडीएस रिपोर्ट में, माता-पिता को नियमित रूप से “लाभार्थी” – राशन, टीकाकरण शिविर और हाल ही में शिक्षा के निष्क्रिय प्राप्तकर्ता – के रूप में संबोधित किया जाता है।
  • अंग्रेजी भाषा और गणित कौशल पर ध्यान देने की आवश्यकता: अधिकांश माता-पिता महसूस करते हैं कि शिक्षा के माध्यम से सामाजिक गतिशीलता हेतु उनके बच्चों के लिए सबसे अच्छा मार्ग अंग्रेजी (बोलना और लिखना) और गणित कौशल सीखना है।

समाधान:

  • ECCE पाठ्यक्रम: ‘प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा’ (Early Childhood Care and Education- ECCE) पाठ्यक्रम, स्थानीय भाषा-संचालित, खेल-आधारित शिक्षाशास्त्र, और गतिविधि-आधारित शिक्षा पर केंद्रित है, जिसे एक कुशल शिक्षक द्वारा संचालित किया जाता है।
  • प्रारंभिक भाषा, प्रारंभिक संख्यात्मकता, सामाजिक-भावनात्मक, कार्यकारी कार्य और संचालन कौशल विकसित करने के लिए बच्चों के भौतिक वातावरण का अन्वेषण और इसका कुशलतापूर्वक उपयोग करना।
  • बच्चों में संज्ञानात्मक, साक्षरता और संख्यात्मक कौशल विकसित करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
  • नियमित रूप से ‘अभिभावक-शिक्षक बैठकें’ जैसेकि शिक्षा चौपाल (अभिभावक-शिक्षक बैठक) आयोजित की जानी चाहिए।
  • माता-पिता के साथ जुड़ाव: माता-पिता के साथ नियमित संदेश साझा किए जा सकते हैं ताकि उन्हें अपने बच्चों से अपेक्षित जुड़ाव की प्रकृति से अवगत किया जा सके।

निष्कर्ष:

माता-पिता हितधारकों के रूप में: आयु-उपयुक्त ‘प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा’ के बारे में जागरूकता के लिए एक जन अभियान, जिसके माता-पिता को हितधारकों के रूप में शामिल किया जाता है, अगले पांच वर्षों में महत्वपूर्ण है।

अभिभावक-भागीदारी’ (माता-पिता की भागीदारी): ईसीसीई पारिस्थितिकी तंत्र में, हमें आंगनवाड़ी 2.0 को सक्रिय करने के लिए ‘अभिभावक-भागीदारी’ (माता-पिता की भागीदारी) की शक्ति को अपनाने की जरूरत है।

इंस्टा लिंक्स:

समेकित बाल विकास योजना

मेंस लिंक:

मध्याह्न भोजन (MDM) योजना की अवधारणा भारत में लगभग एक सदी पुरानी है, जिसकी शुरुआत स्वतंत्र भारत में मद्रास प्रेसीडेंसी में हुई थी। पिछले दो दशकों में अधिकांश राज्यों में इस योजना को फिर से गति दी गई है। इसके दोहरे उद्देश्यों, नवीनतम अधिदेशों और सफलता का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (यूपीएससी 2013)

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययनIII


 

विषय: उदारीकरण का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव, औद्योगिक नीति में परिवर्तन तथा औद्योगिक विकास पर इनका प्रभाव।

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का निजीकरण किस प्रकार किया जाना चाहिए?: व्याख्या

संदर्भ: केंद्रीय बजट 2021-22 में, सरकार द्वारा दो सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण किए जाने के अपने निर्णय की घोषणा की गयी थी।

‘राष्ट्रीय प्रायौगिक आर्थिक अनुसंधान परिषद’ (National Council of Applied Economic Research – NCAER)  की पूनम गुप्ता और अरविंद पनगढ़िया के एक हालिया शोधपत्र में तर्क दिया गया है कि “सरकार को राजनीतिक रूप से जितना भी संभव हो सके, तेजी से आगे बढ़ना चाहिए”। मतलब, भारतीय स्टेट बैंक को छोड़कर सभी का निजीकरण करना।

अध्ययन के अनुसार, निजीकरण क्यों?

  • निजी क्षेत्र के बैंक, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की तुलना में कहीं अधिक कुशल, कहीं अधिक उत्पादक और बहुत कम भ्रष्ट हैं।
  • ऋण देने में निजी बैंकों का अधिक योगदान है। बचतकर्ताओं से जमा राशि प्राप्त करने में उनका योगदान का प्रतिशत भी अधिक है।
  • निजी बैंकों द्वारा नयी शाखाएं खोली गयीं और नए रोजगार सृजित किए गए, जबकि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में दोनों ही मामलों में गिरावट देखी गई।
  • अधिकतर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, धोखाधड़ी के असंगति रूप से दोषी रहे हैं।

‘निजीकरण’ (Privatization) क्यों नहीं किया जाना चाहिए?

  • आरबीआई द्वारा “सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का निजीकरण: एक वैकल्पिक परिप्रेक्ष्य” शीर्षक से प्रकाशित पेपर के अनुसार “इन (सार्वजनिक क्षेत्र या सरकारी स्वामित्व वाले) बैंकों के धमाकेदार निजीकरण का दृष्टिकोण, फ़ायदे से ज्यादा नुकसान कर सकता है”।
  • ग्रामीण पहुंच: महानगरीय क्षेत्रों में निजी बैंकों का दबदबा है, किंतु ग्रामीण भारत में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक की शाखाएं संचालित करते हैं।
  • सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, ग्रामीण भारत में अधिक एटीएम सेवाएं प्रदान करते हैं।
  • सामाजिक प्रासंगिकता: उदाहरण के लिए, निजी क्षेत्र के बैंकों का हिस्सा ‘प्रधानमंत्री जन धन योजना’ के लगभग 46 करोड़ लाभार्थियों में से सिर्फ 1.3 करोड़ था।
  • वित्तीय समावेशन: साक्ष्य बताते हैं कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक पूरी तरह से केवल ‘लाभ अधिकतम करने के लक्ष्य’ द्वारा निर्देशित नहीं होते है, और उन्होंने निजी क्षेत्र के बैंकों के विपरीत, वांछनीय वित्तीय समावेशन लक्ष्यों को अपने कार्य उद्देश्यों में एकीकृत किया है।
  • अवसंरचना वित्त: अवसंरचना वित्त से संबंधित ऋणों में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का बड़ा हिस्सा है।
  • सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक ऋणों की प्रतिचक्रीय भूमिका (Countercyclical role of PSB lending): हाल के वर्षों में, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने बाजार का अधिक विश्वास हासिल किया है।

निष्कर्ष:

केवल ‘निजी स्वामित्व’ विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में स्वतः ही आर्थिक लाभ उत्पन्न नहीं करता है, और निजीकरण के अधिक सतर्क और सूक्ष्म मूल्यांकन की आवश्यकता है।

इंस्टा लिंक:

बैंकों का राष्ट्रीयकरण

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास।

विज्ञान में महिलाएं

संदर्भ: विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो दशकों में महिला वैज्ञानिकों की संख्या में वृद्धि हुई है।

महत्वपूर्ण बिंदु:

  • शोधकर्ताओं में महिलाओं की संख्या 13.9% (2015) से बढ़कर 18.7% (2018) हो गयी है।
  • स्नातकोत्तर स्तर तक महिलाओं की अच्छी संख्या में भागीदारी दर्ज की गयी है, और फिर पोस्ट-डॉक्टरेट स्तर पर इनकी संख्या में कमी आई है।

इंजीनियरिंग में महिलाएं (14.5%) <प्राकृतिक विज्ञान में महिलाएं (22.5%) < स्वास्थ्य में महिलाएं (24.5%)

संबंधित मुद्दे:

  • ‘ग्लोबल जेंडर गैप रिपोर्ट’, 2018 के अनुसार, 149 देशों की सूची में भारत 108वें स्थान पर है।
  • उच्च शिक्षा पर 2019 का अखिल भारतीय सर्वेक्षण, आंशिक रूप से विवाह और परिवार नियोजन के दबाव के कारण, डॉक्टरेट स्तर पर महिला भागीदारी में एक महत्वपूर्ण अंतराल को दर्शाता है।
  • अन्य मुद्दे: पुरुष-प्रधान क्षेत्र में एक बाहरी होने का अकेलापन, पूर्वाग्रह, एक निरंतर संघर्ष, ग्लास-सीलिग इफ़ेक्ट।
  • महिला वैज्ञानिकों को अक्सर अपने पुरुष समकक्षों की तुलना में अकादमिक हाउसकीपिंग का अधिक बोझ उठाना पड़ता है।

विज्ञान के क्षेत्र में कुछ प्रसिद्ध महिलाएं: टेसी थॉमस, सौम्या स्वामीनाथन, गगनदीप कांग, एन कलाइसेल्वी और अन्नपूर्णी सुब्रमण्यम।

सरकारी उपाय:

  • विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार नीति 2020 का लक्ष्य, 2030 तक पोस्ट-डॉक्टरेट स्तर पर 30 प्रतिशत महिलाओं को शामिल करना है।
  • विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) द्वारा, संस्थानों के लिए, महिलाओं के नामांकन और उनके करियर को प्रोत्साहन देने पर आधारित एक ग्रेडिंग प्रणाली ‘GATI’ शुरू की गयी है। यह प्रणाली यूनाइटेड किंगडम के एथेना स्वान चार्टर पर आधारित है।
  • ‘एथेना स्वान चार्टर’ (Athena Swan Charter) एक फ्रेमवर्क है जिसका उपयोग, उच्च शिक्षा (Higher Education) और अनुसंधान क्षेत्र के भीतर लैंगिक समानता का समर्थन करने और परिवर्तन करने के लिए दुनिया भर में किया जाता है।
  • महिला वैज्ञानिकों को प्रोत्साहित करने के लिए ‘शिक्षण के माध्यम से अनुसंधान प्रगति में ज्ञान-भागीदारी’ अर्थात ‘किरण’ (Knowledge Involvement in Research Advancement through nurturing – KIRAN) योजना।
  • क्यूरी (CURIE): महिला विश्वविद्यालयों में बुनियादी ढांचे के लिए।
  • विज्ञान ज्योति योजना: हाई स्कूल में लड़कियों को STEM करने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु।
  • STEMM (STEM और मेडिसिन) में महिलाओं के लिए इंडो-यूएस फेलोशिप।

निष्कर्ष:

हालांकि, नीतियां और नेतृत्व की भूमिकाएं ‘उत्कृष्ट प्रोत्साहन मॉडल’ के रूप में हैं, किंतु आगे का लाभ, खासकर उन लोगों के लिए जो एक अंतराल के बाद कार्यबल में वापस आना चाहते हैं, ‘परामर्श देने (mentoring) और धन की उपलब्धता’ प्रणाली से आ सकता है।

मेंस लिंक:

विज्ञान और प्रायौगिक प्रौद्योगिकियों में महिलाओं की अधिक संख्या, समाज की प्रगति के लिए गंभीर रूप आवश्यक है। विचार-विमर्श कीजिए। (15 अंक)

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


सामान्य अध्ययनIV


 

परोपकार की नैतिकता

“हमें समय और स्थान, और प्राप्तकर्ता के चरित्र पर विचार करना चाहिए, जोकि मापक में ‘वजन’ के तुल्य होता है और जो हमारे उपहारों को अच्छा या खराब बनाता है।” सेनेका (Seneca)

‘परोपकार’ या ‘लोकोपकार’ (Philanthropy) को मानवीय उद्देश्यों के लिए किए जाने वाले कार्य या दिए जाने वाले उपहार के रूप में परिभाषित किया जा सकता है।

भारत में परोपकार:

स्वतंत्रता पूर्व भारत में, महात्मा गांधी ने व्यापारियों को समाज की बेहतरी के लिए अपने धन का योगदान करने के लिए प्रोत्साहित किया था। जमनालाल बजाज और जीडी बिड़ला जैसे उद्योगपतियों ने अपने स्वयं के परोपकारी हितों का अनुसरण करते हुए स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी की पहल का समर्थन किया।

पश्चिम में परोपकार:

अमेरिका: परोपकार का ‘कार्नेगी-रॉकफेलर युग’ (Carnegie-Rockefeller era)।

  • एंड्रयू कार्नेगी ने कार्नेगी लाइब्रेरी और कार्नेगी मेलॉन यूनिवर्सिटी जैसे प्रभावशाली संस्थानों का निर्माण किया, और उन्होंने ऐसे कार्यो के लिए अमीरों को प्रेरित भी किया; उनकी किताब की आखिरी पंक्ति में लिखा है: ” अमीर के रूप में मरने वाला आदमी, कलंकित मरता है” (The man who dies rich, dies disgraced)।
  • ‘रॉकफेलर फाउंडेशन’ ने भी पीले बुखार को मिटाने के लिए टीका विकसित किया।
  • ‘कार्नेगी’ और ‘रॉकफेलर’ दोनों ही, समाज को बेहतर बनाने में अपनी दौलत लगा देने के लिए आने वाली पीढ़ियों प्रेरणा देने के लिए आदर्श बन गए।

परोपकार से जुडी समस्याएं:

  • दान की संकुचित प्रकृति, जिसमे कुछ सबसे गरीब क्षेत्रों की उपेक्षा किए जाने की आशंका रहती है।
  • कार्यक्रमात्म्क दान (Programmatic giving), जिसका कोई लाभ नहीं होता है, जैसेकि कई ‘फाउंडेशन’ और ‘गैर सरकारी संगठन’ स्कूली शिक्षा पर काम कर रहे हैं, फिर भी सीखने के परिणामों में सुधार नहीं हुआ है।
  • दान प्राप्तकर्ता, भावना के स्तर पर या विधिक तौर पर ‘दानकर्ता’ के इरादे का उल्लंघन कर सकता है।
  • ‘दानकर्ता’ की गतिविधियों को संस्था के मिशन के कार्यों के साथ असंगत माना जा सकता है।
  • प्राप्तकर्ता को ‘दानकर्ता’ की अनैतिक गतिविधियों के साथ मिलीभगत या इनसे अनजान के रूप में माना जा सकता है, इस प्रकार अपने स्वयं के अच्छे नाम को कलंकित करता है।
  • ‘दानकर्ता’ को दान के सभी या किसी हिस्से के लिए एक ‘तरजीही’ लाभ प्राप्त हो सकता है।

भारत में परोपकार के लिए आगे की राह:

संस्थाओं का निर्माण: दानकर्ता, ‘थिंक-टैंक’ का वित्तपोषण फंड कर सकते हैं और क्षेत्र-विशिष्ट जैसेकि, ऊर्जा संक्रमण या भूगोल-विशिष्ट जैसे पूर्वी उत्तर प्रदेश, के लिए संस्थानों का निर्माण कर सकते हैं।

  • उदाहरण के लिए: टाटा परिवार ने बेंगलुरु में भारतीय विज्ञान संस्थान, ऊर्जा और संसाधन संस्थान (TERI), टाटा मेमोरियल अस्पताल, आदि का निर्माण किया।
  • सरकार के लिए जोखिमपूर्ण ‘अनुसंधान एवं विकास’ के लिए वित्त पोषण: उदाहरण के लिए, नंदन नीलेकणी ने ‘आधार’, यूपीआई और ‘ईकेवाईसी’ जैसे एक नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण किया।

वितरण में सुधार के लिए सरकारों का सहयोग: एक परोपकारी संस्था के रूप में सरकार के साथ साझेदारी एक मापनीय और टिकाऊ प्रभाव बनाने का सबसे प्रभावी तरीका है।

  • उदाहरण के लिए: पिरामल फाउंडेशन, ‘एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट्स संगठन’ का सहयोग कर रहा है।
  • वेदिस फाउंडेशन (Veddis Foundation), सरकारों के ‘साक्ष्य आधार’ और ‘परिणाम उन्मुखीकरण’ में सुधार के लिए पहल कर रहा है।

स्रोत: लाइव मिंट

 


मुख्य परीक्षा संवर्धन हेतु पाठ्य सामग्री (नैतिकता/निबंध)


वेध परियोजना

संदर्भ: एक पायलट परियोजना के हिस्से के रूप में, महाराष्ट्र के नंदुरबार तालुका में आदिवासी विकास परियोजना कार्यालय के अंतर्गत आने वाले आवासीय विद्यालय, ‘आश्रमशालाएं’ शिक्षण के एक अनोखे तरीके के साथ प्रयोग कर रही हैं।

  • इस पायलट परियोजना को ‘वेध प्रोजेक्ट’ (Vedh Project) का नाम दिया गया है, और यह छात्र-केंद्रित निर्देशात्मक रणनीति, ह्यूटागोजी (Heutagogy) की नवीन अवधारणा पर आधारित है।
  • इन आश्रमशालाओं में शिक्षक ऐसे सहायक के रूप में होते हैं, जो कक्षा में आमने-सामने होने और अध्यापन के निश्चित पैटर्न का पालन करने के बजाय, छात्रों के लिए चुनौतियां निर्धारित करते हैं और समूह गतिविधियों के रूप में, अपने दम पर नवीन तरीकों को विकसित करके अपने पाठ्यक्रम को सीखने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


पांडुरंग खानखोजे

संदर्भ: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला अपनी मैक्सिको यात्रा के दौरान स्वतंत्रता सेनानी और कृषि वैज्ञानिक ‘पांडुरंग खानखोजे’ (Pandurang Khankhoje) की एक प्रतिमा का अनावरण करेंगे।

विवरण:

पांडुरंग खानखोजे (1883-1967) महाराष्ट्र में जन्मे स्वतंत्रता सेनानी और कृषिविद थे।

  • खानखोजे, ग़दर पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक थे। ग़दर पार्टी की स्थापना 1914 में विदेशों में रहने वाले ज्यादातर पंजाब से जुड़े भारतीयों द्वारा की गई थी।
  • पांडुरंग खानखोजे, मेक्सिको सिटी के निकट ‘चैपिंगो’ नामक शहर के ‘नेशनल स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर’ में प्रोफेसर थे। उन्होंने मकई, गेहूं, दालों और रबड़ पर शोध किया, ठंढ और सूखा प्रतिरोधी किस्मों का विकास किया, और मेक्सिको में हरित क्रांति लाने के प्रयासों का हिस्सा थे।
  • बाद में, अमेरिकी कृषि विज्ञानी डॉ नॉर्मन बोरलॉग, जिन्हें भारत में हरित क्रांति का जनक कहा जाता है, पंजाब में मैक्सिकन गेहूं की किस्म लेकर आये थे।

बादल फटने की घटनाएं और पूरे भारत में इनकी बढ़ती आवृत्ति

संदर्भ: हाल ही में हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के विभिन्न हिस्सों में बादल फटने और अचानक आई बाढ़ से हुई तबाही में 20 से अधिक लोग मारे गए हैं।

 

‘मेघ विस्फोट’ या ‘बादल फटने’ (Cloudburst) का अर्थ है- कम अवधि में अत्यधिक मात्रा में बारिश होना, जिसमे कभी कभी-कभी ओलों और गरज के साथ मूसलाधार बारिश होती है।

  • बादल फटना (Cloudburst) एक स्थानीय, किंतु तीव्र वर्षा की घटना होती है। एक छोटे से भौगोलिक क्षेत्र में छोटी अवधि की बहुत भारी वर्षा व्यापक विनाश का कारण बन सकती है, खासकर पहाड़ी क्षेत्रों में जहां यह घटना सबसे आम है।
  • ‘भारत मौसम विज्ञान विभाग’ (India Meteorological Department – IMD) द्वारा ‘बादल फटने’ को “लगभग 20 से 30 वर्ग किमी के भौगोलिक क्षेत्र में प्रति घंटे 100 मिमी (या 10 सेमी) से अधिक अप्रत्याशित वर्षा” के रूप में परिभाषित किया गया है।
  • ‘बादल फटना’, खासकर मानसून के महीनों के दौरान, कोई असामान्य घटना नहीं है । इनमें से अधिकांश घटनाएँ हिमालयी राज्यों में होती हैं जहां स्थानीय उच्चावच, पवन प्रणाली और निचले और ऊपरी वातावरण के बीच तापमान प्रवणता, आदि इन घटनाओं को आसान बनाती है।

क्या बादल फटने की भविष्यवाणी की जा सकती है?

बादल फटने की विशिष्ट घटनाओं का पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सकता है। कोई भी पूर्वानुमान कभी भी बादल फटने की संभावना का उल्लेख नहीं करता है। लेकिन भारी से बहुत भारी वर्षा की चेतावनी दी जाती है।

बादल फटने की आवृत्ति:

हालाँकि, भारत में वर्षा की कुल मात्रा में पर्याप्त परिवर्तन नहीं हुआ है, लेकिन कम समय में वर्षा का अनुपात बढ़ता जा रहा है। जलवायु परिवर्तन के लिए जिम्मेदार, इस तरह के पैटर्न से पता चलता है कि बादल फटने की घटनाएं भी बढ़ सकती हैं।

 

कानूनी सहायता रक्षा परामर्श प्रणाली

संदर्भ: नालसा (NALSA) द्वारा पूरे भारत में 365 जिला कानूनी सेवा प्राधिकरणों में पूर्णकालिक कानूनी सहायता वकीलों के साथ ‘कानूनी सहायता रक्षा परामर्श प्रणाली’ (Legal Aid Defense Counsel System – LADCS) का आरंभ किया गया है।

LADCS क्या है?

‘कानूनी सहायता रक्षा परामर्श प्रणाली’ (LADCS) एक नालसा द्वारा वित्त पोषित परियोजना है, जो अभियुक्त व्यक्तियों को आपराधिक मुकदमों में अपना बचाव करने के लिए मुफ्त कानूनी सहायता (सार्वजनिक रक्षक प्रणाली के अनुरूप) प्रदान करती है।

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण’ (NALSA) के बारे में:

  • समाज के दुर्बल वर्गों को नि:शुल्क कानूनी सेवाएँ प्रदान करने और विवादों के सौहार्दपूर्ण समाधान हेतु ‘विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम’, 1987 के अंतर्गत ‘राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण’ / ‘नालसा’ (National Legal Services Authority – NALSA) का गठन किया गया है।
  • इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है, कि आर्थिक या अन्य अक्षमताओं के कारण किसी भी नागरिक को न्याय हासिल करने के अवसरों से वंचित नहीं किया जाए।
  • नालसा द्वारा न्याय दीप’ (Nyaya Deep) शीर्षक से आधिकारिक सूचना-पत्र का प्रकाशन किया जाता है।
  • ‘राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण’ द्वारा विवादों के सौहार्दपूर्ण समाधान हेतु ‘लोक अदालतों’ का आयोजन किया जाता है।

संरचना:

  • ‘विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम’ की धारा 3(2) के अनुसार, भारत के मुख्य न्यायाधीश ‘राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण’ (NALSA) के प्रधान- संरक्षक होंगे।
  • सर्वोच्च न्यायालय के दूसरे वरिष्ठतम न्यायाधीश, इसके कार्यकारी-अध्यक्ष होते हैं।

NALSA की उपलब्धियां:

  • आउटरीच कार्यक्रम: कानूनी सेवा प्राधिकरण को प्रभावी रूप से गांवों तक पहुंचने और समय पर कानूनी सहायता प्रदान करने में सक्षम किया गया है।
  • लोक अदालतों द्वारा हल किए गए मामलों की संख्या 1 करोड़ के आंकड़े को पार कर गई है।
  • शेष मुद्दे: विशेष रूप से आपराधिक पक्ष के मामलों की संख्या नालसा के साथ केवल 10-12% है, जबकि हाशिए पर रहने वाली शेष आबादी द्वारा अत्यधिक लागत पर निजी परामर्श किया गया।

 

भारत और ईरान के बीच समुद्र से यात्रा करने वालों के संबंध में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर

संदर्भ: भारत और ईरान ने समुद्र से यात्रा के लिए प्रशिक्षण, प्रमाणन और निगरानी मानकों पर अंतर्राष्ट्रीय अभिसमय (1978) के प्रावधानों के अनुसार दोनों देशों के समुद्र से यात्रा करने वालों की मदद के लिए असीमित यात्राओं के योग्यता प्रमाण पत्र की मान्यता पर एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।

जहाजियों की यात्रा (seafarer voyage) का मतलब, जहाजी / नाविक अपने निर्धारित कर्तव्यों को पूरा करने या जहाज पर बोर्ड पर सौंपा गया काम करने की निर्बाध अवधि होता है।

समुद्र से यात्रा के लिए प्रशिक्षण, प्रमाणन और निगरानी मानकों पर अंतर्राष्ट्रीय अभिसमय (1978):

समुद्र से यात्रा के लिए प्रशिक्षण, प्रमाणन और निगरानी मानकों पर अंतर्राष्ट्रीय अभिसमय (1978) अर्थात (International Convention on Standards of Training, Certification and Watchkeeping for Seafarers(STCW) 1978 convention – STCW), समुद्र में जाने वाले व्यापारिक जहाजों पर मालिकों, अधिकारियों और निगरानी कर्मियों के लिए अहर्ता मानक निर्धारित करता है।

  • STCW को 1978 में लंदन में अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) में एक अभिसमय द्वारा अपनाया गया था और 1984 में लागू हुआ था।
  • 1978 का STCW कन्वेंशन, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाविकों के लिए प्रशिक्षण, प्रमाणन और निगरानी के लिए बुनियादी आवश्यकताओं को निर्धारित करने वाला पहला अभिसमय था।

 

‘व्यापार करने में सुगमता’ हेतु नए मानदंड

संदर्भ: जांच के तहत ऋण चूककर्ताओं और इकाइयों को विदेशों में निवेश करने के लिए ‘अनापत्ति प्रमाणत्र’ (NOC) लेना अनिवार्य होगा।

उद्देश्य: भारतीय निवेशकों के लिए नए मानदंडों का उद्देश्य, घरेलू कॉरपोरेट्स के लिए विदेशों में निवेश करना आसान बनाना है। जबकि, ऋण चूककर्ताओं और अन्य इकाइयों के लिए जांच एजेंसियों और नियामकों द्वारा देश से बाहर धन स्थानांतरित करने के लिए जांच की जा रही है।

नए मानदंड:

  • विदेशी निवेश पर सभी मानदंडों को समाहित करना: विदेशी निवेश नियमों और विनियमों के तहत नए मानदंड, विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम के तहत अधिसूचित किए गए हैं और ये आरबीआई द्वारा प्रशासित होंगे।
  • नो-गो सेक्टर‘: भारतीय निवासियों को, रियल एस्टेट गतिविधि, या किसी भी रूप में जुए में संलग्न विदेशी संस्थाओं में निवेश करने की अनुमति नहीं होगी।
  • अनापत्ति प्रमाण पत्र: बैंक चूककर्ताओं और इकाइयों के लिए विदेश में संपत्ति अर्जित करने के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र लेना आवश्यक होगा।
  • ’60-दिन की समय-सीमा’: यदि प्राधिकरण/बैंक आवेदन प्राप्त करने के 60 दिनों के भीतर अनापत्ति प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने में विफल रहते हैं, तो यह माना जा सकता है कि उन्हें प्रस्तावित लेनदेन पर कोई आपत्ति नहीं है।

भूतापीय उर्जा

संदर्भ: ओएनजीसी ने डीजल से चलने वाले जनरेटर पर लद्दाख की निर्भरता को कम करने के लिए भू-तापीय ऊर्जा (Geothermal Power) का उपयोग करके बिजली उत्पन्न करने के लिए ‘पुगा’ (लद्दाख) में अपना पहला कुआं खोदने की बात कही है।

पुगा (Puga) के बारे में:

सिंधु सिवनी क्षेत्र के साथ भारतीय और तिब्बती प्लेटों के जंक्शन पर स्थित ‘पुगा हॉट स्प्रिंग क्षेत्र’ (Puga Hot Spring Area) में भारतीय उपमहाद्वीप में भू-तापीय ऊर्जा के निकट-भविष्य में विकास की सबसे बड़ी क्षमता है।

भूतापीय विद्युत् क्षमता:

  • भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार, भारत में लगभग 340 भूतापीय गर्म झरने हैं, जैसे कि, चुम्मथांग (लद्दाख), खंबे (गुजरात), खम्मम (तेलंगाना), तत्तापानी (छत्तीसगढ़) और रत्नागिरी (महाराष्ट्र) ।
  • हालांकि भारत 1970 के दशक में भू-तापीय परियोजनाओं को शुरू करने वाले शुरुआती देशों में से एक रहा है, लेकिन वर्तमान में, भारत में कोई भी भू-तापीय संयंत्र चालू नहीं हैं।
  • भूतापीय बिजली उत्पादन के मामले में शीर्ष पांच देश अमेरिका, फिलीपींस, इंडोनेशिया, मैक्सिको और न्यूजीलैंड हैं

फॉरएवर केमिकल्स

संदर्भ: पर्यावरण विज्ञान और प्रौद्योगिकी में हाल ही में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया है कि दुनिया भर में कई स्थानों से वर्षा जल “पर – और पॉलीफ्लूरोआकाइल पदार्थ” (Per- And Polyfluoroalkyl Substances: PFAs) से दूषित होता है। PFAs को ‘फॉरएवर केमिकल्स’ (Forever Chemicals) कहा जाता है क्योंकि वे लंबे समय तक वातावरण, वर्षा जल और मिट्टी में चारों ओर चिपके रहते हैं।

अमेरिकन सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के अनुसार, PFAs ​​मानव निर्मित रसायन होते हैं जिनका उपयोग नॉनस्टिक कुकवेयर, पानी से बचाने वाले कपड़े, दाग-प्रतिरोधी कपड़े, सौंदर्य प्रसाधन, अग्निशामक रूपों और कई अन्य उत्पादों को बनाने के लिए किया जाता है।

 

प्रशांत महासागरीय ब्लूफिन टूना

संदर्भ: संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान, कोरिया, ताइवान और मैक्सिको जैसे देशों द्वारा ओवरफिशिंग को रोकने के लिए दशकों से किए गए प्रयासों के परिणाम सामने आए हैं। प्रशांत महासागरीय ब्लूफिन टूना (Pacific Bluefin Tuna) के जैवभार में वृद्धि हुई है और यह वृद्धि रिकॉर्ड किए गए इतिहास में दूसरे स्थान पर है।

प्रशांत महासागरीय ब्लूफिन टूना (थुन्नस ओरिएंटलिस) उत्तरी प्रशांत महासागर में व्यापक रूप से पाए जाने वाले ‘ट्यूना’ की एक शिकारी प्रजाति है। लेकिन यह प्रवासी प्रजाती है और इसे दक्षिण प्रशांत में प्रवासी के रूप में भी दर्ज किया गया है।

टमाटर फ्लू

संदर्भ: ‘लैंसेट रेस्पिरेटरी जर्नल’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में ज्यादातर पांच साल से कम उम्र के बच्चों में टमाटर फ्लू, या टमाटर बुखार (Tomato Flu) नामक एक नए संक्रमण का पता चला है।

टमाटर फ्लू के बारे में:

टमाटर फ्लू (Tomato Flu), ‘कॉक्ससेकी वायरस ए 16’ (Coxsackie virus A 16) के कारण होता है। यह एंटरोवायरस परिवार (Enterovirus family) से संबंधित है।

  • फ्लू (वायरल) का नाम, इससे संक्रमित व्यक्तियों की त्वचा पर ‘लाल छालों’ के कारण पड़ा है।
  • फ्लू पांच साल से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित करता है।
  • लक्षणों में चकत्ते, तेज बुखार, जोड़ों में दर्द, त्वचा में जलन और निर्जलीकरण (चिकनगुनिया, डेंगू के साथ-साथ हाथ, पैर और मुंह की बीमारी के समान) शामिल हैं।
  • यह फ्लू अपने आप में सीमित है और इसके लिए कोई विशिष्ट दवा नहीं है। इसका मतलब यह है कि यदि सहायक देखभाल दी जाती है तो लक्षण समय के साथ अपने आप ठीक हो जाएंगे।
  • फ्लू के अन्य मामलों की तरह, टमाटर बुखार भी संक्रामक है। “अगर कोई इस फ्लू से संक्रमित है, तो उन्हें अलग-थलग रखने की जरूरत है क्योंकि यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में तेजी से फैल सकता है।

 

खगोल विज्ञान और खगोल भौतिकी  पर अंतर्राष्ट्रीय ओलंपियाड में भारत को तीसरा स्थान

खगोल विज्ञान और खगोल भौतिकी  पर अंतर्राष्ट्रीय ओलंपियाड (International Olympiad on Astronomy and Astrophysics – IOAA) में ईरान की आधिकारिक टीम (5 स्वर्ण) और अतिथि टीम (4 स्वर्ण, 1 रजत) के बाद भारत को सिंगापुर के साथ संयुक्त रूप से तीसरे स्थान पर रखा गया है।

  • इस वर्ष के IOAA में 37 मुख्य और 06 अतिथि टीमों के 209 छात्रों ने भाग लिया।
  • इस साल की प्रतियोगिता मूल रूप से कीव, यूक्रेन में आयोजित होने वाली थी; इसे यूक्रेन में युद्ध के कारण मार्च 2022 में जॉर्जिया के कुटैसी में स्थानांतरित कर दिया गया था।