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[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 22 August 2022

विषयसूची

सामान्य अध्ययन-II

  1. रोहिंग्या पर भारत की नीति
  2. जम्मू-कश्मीर में मतदाता सूची के संशोधन को लेकर विवाद
  3. जमानत को असंभव बनाना

सामान्य अध्ययन-III

  1. अमेरिकी रोजगार-मंदी विरोधाभास: व्याख्या
  2. दिल्ली पुलिस द्वारा मुखाकृति पहचान तकनीक का उपयोग

सामान्य अध्ययन-IV

भारतीय पुलिस के लिए राम नाथ कोविंद का संदेश

मुख्य परीक्षा संवर्धन के लिए पाठ्य सामग्री (नैतिकता / निबंध)

  1. अंतिम पंघाल
  2. 15 मिनट शहर
  3. उम्र कोई बाधा नहीं

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

  1. अक्कम्मा चेरियन
  2. वांचो समुदाय
  3. कपास की खरीद
  4. रैट-होल कोयला खनन
  5. एक लाख से अधिक गांव ‘ओडीएफ प्लस’ घोषित
  6. ग्रामीण उद्यमी परियोजना
  7. अकाउंट एग्रीगेटर फ्रेमवर्क सिस्टम
  8. उत्पत्ति का नियम
  9. चावल में जीन संवर्धन
  10. भारत की पहली हाइड्रोजन ईंधन सेल बस
  11. NFT के भविष्य पर ‘ओपन सी’ की कहानी

 


सामान्य अध्ययनI


 

विषय: भारत एवं इसके पड़ोसी- संबंध।

रोहिंग्याओं पर भारत की नीति

संदर्भ: हाल ही में, केंद्रीय आवास मंत्री द्वारा एक ट्वीट के माध्यम से जानकारी देते हुए कहा था, कि रोहिंग्या शरणार्थियों को आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (Economically Weaker Sections – EWS) के लिए बने फ्लैटों में स्थानांतरित किया जाएगा।

(हालांकि, बाद में गृह मंत्रालय द्वारा आवास मंत्री द्वारा दी गयी जानकारी का खंडन जारी किया है।)

आवास मंत्री ने कहा, “भारत, ‘संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी अभिसमय’ 1951 का सम्मान करता है और उसका पालन करता है और सभी को उनकी जाति, धर्म या पंथ की परवाह किए बिना शरण प्रदान करता है।

रोहिंग्या:

रोहिंग्या (Rohingya) एक नृजातीय समूह है, जिसकी ज्यादातर आबादी मुस्लिम है। ये समूह मूलतः पश्चिमी म्यांमार के रखाइन प्रांत में निवास करता है, और एक बंगाली बोली बोलता है।

  • म्यांमार में इन्हें “आवासी विदेशी” (resident foreigners) या “सहभागी नागरिक” (associate citizens) के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
  • इनके खिलाफ पहली बार 2012 में हिंसा शुरू थी, इसके बाद हिंसा के कई दौरों ने इनको बड़ी संख्या में म्यांमार छोड़ने के लिए मजबूर किया गया।
  • रोहिंग्या, पहली बार 2012 में दिल्ली आए थे।

निर्वासन (Deportation) की प्रक्रिया:

 

क्या किसी ‘रोहिंग्या’ को निर्वासित किया गया है?

ह्यूमन राइट्स वॉच (HRW) की रिपोर्ट: इसके अनुसार, अक्टूबर 2018 से, भारत द्वारा 12 रोहिंग्याओं को म्यांमार निर्वासित किया जा चुका है, जबकि सरकार का दावा है, कि वे स्वेच्छा से अपने देश वापस चले गए।

भारत में रोहिंग्या की स्थिति:

  • गृह राज्य मंत्री: तत्कालीन गृह राज्य मंत्री ने संसद को सूचित करते हुए बताया है, कि भारत में लगभग 40,000 रोहिंग्या हैं, जिनमें से लगभग 5,700 जम्मू और तेलंगाना, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और राजस्थान में बसे हुए हैं।
  • संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी: इनमें से केवल 16,000 रोहिंग्या संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी के साथ पंजीकृत बताए जाते हैं।
  • गृह मंत्रालय ने दावा किया कि इनकी सटीक संख्या ज्ञात नहीं है क्योंकि इनमे से कई रोहिंग्या गुप्त रूप से देश में प्रवेश कर जाते हैं।

शरणार्थियों’ पर भारत का दृष्टिकोण:

भारत, शरणार्थियों की स्थिति से संबंधित 1951 के संयुक्त राष्ट्र अभिसमय और 1967 के प्रोटोकॉल का हस्ताक्षरकर्ता नहीं है।

देश में सभी विदेशी गैर-दस्तावेजी नागरिक निम्नानुसार शासित होते हैं:

  • विदेशी अधिनियम, 1946
  • विदेशियों का पंजीकरण अधिनियम, 1939
  • पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) अधिनियम, 1920
  • नागरिकता अधिनियम, 1955।

अवैध प्रवासी:

वैध यात्रा दस्तावेजों के बिना देश में प्रवेश करने वाले विदेशी नागरिकों को अवैध प्रवासी (Illegal Migrants) माना जाता है।

शरणार्थी:

शरणार्थियों की स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र अभिसमय, 1951 (1951 UN Convention on the Status of Refugees) और उसके बाद के ‘1967 के प्रोटोकॉल’ (1967 Protocol) के तहत, अपने मूल देश से बाहर होने वाला तथा नस्लीय, धार्मिक, राष्ट्रीयता, किसी विशेष सामाजिक समूह की सदस्यता या राजनीतिक विचारों के कारण ‘उत्पीड़न’ किए जाने के भय से अपने मूल वतन में जाने में असमर्थ या अनिच्छुक व्यक्ति ‘शरणार्थी’ (Refugee) होता है।

इंस्टा लिंक्स:

रोहिंग्या

विदेशी अधिनियम, 1946

मेंस लिंक:

इस मुद्दे को मानवाधिकार बनाम राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित बहस तथा शरणार्थियों के अधिकारों और इससे संबंधित संवैधानिक प्रावधानों से जोड़ा जा सकता है। साथ ही देश में ‘नागरिकता कानून’ को लेकर विवाद महत्वपूर्ण है।

प्रश्न: नियंत्रण रेखा (एलओसी) सहित म्यांमार, बांग्लादेश और पाकिस्तान की सीमाओं पर आंतरिक सुरक्षा खतरों और सीमापार अपराधों का विश्लेषण कीजिए। इसके अलावा, इस संबंध में विभिन्न सुरक्षा बलों द्वारा निभाई गई भूमिका पर चर्चा कीजिए। (यूपीएससी 2020)

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: वैधानिक, नियामक और विभिन्न अर्ध-न्यायिक निकाय।

जम्मू-कश्मीर में मतदाता सूची संशोधन पर विवाद

संदर्भ:

जम्मू-कश्मीर के ‘मुख्य चुनाव अधिकारी’ द्वारा हाल ही में एक घोषणा की गयी, जिसके अनुसार “कोई भी व्यक्ति जो जम्मू-कश्मीर में सामान्य रूप से रह रहा है, ‘लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम’ के प्रावधानों के अनुसार केंद्र शासित प्रदेश में मतदाता के रूप में सूचीबद्ध होने के अवसर का लाभ उठा सकता है”।

जम्मू-कश्मीर में मतदान के लिए और कौन पात्र होगा?

  • सशस्त्र बलों के लिए मतदान का अधिकार: जम्मू-कश्मीर में तैनात सशस्त्र बल मतदाता के रूप में पंजीकरण करा सकते हैं और संभवत: देश के सबसे युवा केंद्र शासित प्रदेश (Union Territory) में पहली बार होने वाले विधानसभा चुनाव में भाग ले सकते हैं।
  • परिसीमित विधानसभाएं: ‘मुख्य चुनाव अधिकारी’ ने कहा है, कि मौजूदा मतदाता सूची को 20 मई, 2022 से केंद्रीय विधि मंत्रालय द्वारा लागू किए गए ‘परिसीमन आयोग ‘के अंतिम आदेश के अनुसार नए सीमांकित विधानसभा क्षेत्रों में तैयार किया जा रहा है।

मतदाता सूची को संशोधित किए जाने का कारण:

  • परिसीमन आयोग: इस साल की शुरुआत में ‘जम्मू-कश्मीर परिसीमन आयोग’ (J&K Delimitation Commission) द्वारा ‘जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम’, 2019 के तहत जम्मू-कश्मीर में सात नए विधानसभा क्षेत्र- छह जम्मू संभाग में और एक कश्मीर में – निर्धारित किए जाने के बाद चुनाव आयोग जम्मू-कश्मीर में नए मतदाता सूची पर काम कर रहा है।
  • अब, जम्मू में विधानसभा सीटों की संख्या 43 तथा कश्मीर में 47 हैं।
  • चुनाव आयोग द्वारा 1 अक्टूबर, 2022 को या उससे पहले 18 वर्ष की आयु प्राप्त करने वाले किसी भी व्यक्ति को नई मतदाता सूची में शामिल किए जाने का निर्णय किया गया है।

‘मुख्य चुनाव अधिकारी’ (CEO) द्वारा की गयी घोषणा:

  • अधिवास की कोई आवश्यकता नहीं: मतदाता बनने के लिए किसी व्यक्ति के पास जम्मू-कश्मीर का ‘अधिवास प्रमाण पत्र’ (Domicile Certificate) होना आवश्यक नहीं है।
  • सामन्यतः जम्मू-कश्मीर में रहने वाला कोई भी कर्मचारी, छात्र, मजदूर या बाहर का कोई भी व्यक्ति अपना नाम मतदान सूची में दर्ज कर सकता है।
  • सशस्त्र बलों के लिए विकल्प: ‘मुख्य चुनाव अधिकारी’ ने कहा है, कि देश के विभिन्न हिस्सों से सशस्त्र बलों के पास “विकल्प है कि यदि वे ‘पीस स्टेशन’ में तैनात हैं तो वे खुद को मतदाता के रूप में सूचीबद्ध कर सकते हैं।
  • नए मतदाता: जम्मू-कश्मीर में लगभग 25 लाख नए मतदाताओं के नामांकित होने की उम्मीद है। जम्मू-कश्मीर की सूची में 76 लाख मतदाता हैं।
  • जम्मू-कश्मीर की अनुमानित 18 वर्ष से अधिक आयु वर्ग की आबादी लगभग 98 लाख है।
  • जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और 1951: अनुच्छेद 370 के विशेष प्रावधानों को निरस्त करने के बाद, जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और 1951 जम्मू-कश्मीर में लागू होता है।

इंस्टा लिंक्स:

भारत का निर्वाचन आयोग

मेंस लिंक:

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के उपयोग को लेकर हाल के विवाद के आलोक में, भारत में चुनावों की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए भारत के चुनाव आयोग के सामने क्या चुनौतियाँ हैं? (यूपीएससी 2018)

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: कार्यपालिका और न्यायपालिका की संरचना, संगठन और कार्य- सरकार के मंत्रालय एवं विभाग, प्रभावक समूह और औपचारिक/अनौपचारिक संघ तथा शासन प्रणाली में उनकी भूमिका।

जमानत को असंभव बनाना

संबंधित विषय:

पुट्टास्वामी मामले (2017) में सुप्रीम कोर्ट के नौ न्यायाधीशों की पीठ ने ‘एडीएम जबलपुर बनाम शिवकांत शुक्ला’ (1976) मामले के फैसले को पलटते हुए ‘निजता के अधिकार’ को बरकरार रखा था।

  • ‘एडीएम जबलपुर बनाम शिवकांत शुक्ला’ एक ऐतिहासिक और विवादास्पद मामला था जिसमें जस्टिस पी एन भगवती सहित पांच न्यायाधीशों की पीठ ने फैसला सुनाया कि “किसी व्यक्ति के गैरकानूनी रूप से हिरासत में नहीं रखे जाने के अधिकार (यानी बंदी प्रत्यक्षीकरण) को निलंबित किया जा सकता है”।
  • जस्टिस भगवती ने बाद में 2011 में प्रचलित राय से सहमति व्यक्त करते हुए अपने इस फैसले को अदूरदर्शी बताया और क्षमा माँगी थी।
  • हालांकि, विजय मदनलाल चौधरी बनाम भारत संघ मामले में, सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले ने ‘धन शोधन निवारण अधिनियम’ (PMLA) की संवैधानिकता को बरकरार रखा, जोकि “जेल नहीं जमानत” (bail and not jail) के सिद्धांत के खिलाफ है।

PMLA में जमानत के लिए कठोर पूर्व-शर्तें:

  • आरोपी पर दायित्व: जमानत के लिए पात्र होने के लिए, गिरफ्तार व्यक्ति को अदालत को यह समझाना होगा कि वह प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा लाए गए ‘मनी लॉन्ड्रिंग अपराधों’ के लिए दोषी नहीं है।
  • गिरफ्तारी के लिए आधार: गिरफ्तारी के आधार के रूप में क्या अहर्ता है और इस तरह के आधारों को कितना विस्तृत करने की आवश्यकता है, इसकी कोई परिभाषा नहीं दी गयी है।
  • इकबालिया बयान: सुप्रीम कोर्ट का फैसला, इकबालिया बयान (confessional statement) को स्वीकार्य सबूत मानता है, ऐसे सबूत जमानत की सुनवाई के दौरान भी जज के सामने पेश किए जा सकते हैं।
  • NIA बनाम जहूर वटाली (2019): UAPA के तहत जमानत पर विचार करने के लिए, अदालत को केवल यह देखना होता है, कि क्या आरोपी के खिलाफ प्रथम दृष्टया कोई मामला बनता है।

‘विजय मदनलाल चौधरी बनाम भारत संघ’ मामले के फैसले से जुड़े विवाद:

  • मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध को ‘गंभीर अपराध’ की श्रेणी: शीर्ष अदालत ने ‘निकेश ताराचंद शाह बनाम भारत संघ (2017) में दिए गए अपने फैसले को पलट दिया। इस फैसले में अदालत ने ‘मनी लॉन्ड्रिंग’ के अपराध को कम जघन्य मानने का निर्देश दिया गया था, और इसे ‘आतंकवादी और विघटनकारी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम’ / टाडा अधिनियम’ के तहत ‘आतंकवाद’ के अपराध से अलग माना गया था।
  • मनी लॉन्ड्रिंग में अन्य अपराध शामिल: अदालत ने इस तथ्य की अनदेखी की कि PMLA के तहत, मनी लॉन्ड्रिंग में कॉपीराइट और ट्रेडमार्क, कला और पुरावशेष, प्रतिभूतियों, सूचना प्रौद्योगिकी, कंपनियों और वायु और जल प्रदूषण के उल्लंघन से संबंधित अपराधों से संबंधित धन भी शामिल है।
  • प्रवर्तन मामले की सूचना रिपोर्ट (ECIR): अदालत ने यह भी घोषित किया कि ईडी को प्रवर्तन मामले की सूचना रिपोर्ट (ECIR) को आरोपी के साथ साझा करने की आवश्यकता नहीं है।
  • ‘निजता की समान धारणा’ पुलिस और केंद्रीय जांच ब्यूरो जैसी एजेंसियों के समकक्ष दस्तावेजों (FIRs) पर लागू नहीं होती है।

‘जमानत’ क्या है:

‘जमानत’ (Bail) एक प्रतिवादी की सशर्त रिहाई होती है, जिसमें प्रतिवादी द्वारा आवश्यकता पड़ने पर अदालत में पेश होने का वादा किया जाता है।

  • आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC) में जमानत शब्द को परिभाषित नहीं किया गया है, लेकिन केवल ‘भारतीय दंड संहिता’ (IPC), अपराधों को ‘जमानती’ (Bailable) और ‘गैर-जमानती’ (Non-Bailable) के रूप में वर्गीकृत करता है।
  • आपराधिक प्रक्रिया संहिता द्वारा मजिस्ट्रेटों को अधिकार के रूप में ‘जमानती अपराधों’ के लिए जमानत देने का अधिकार प्रदान किया गया है।
  • इसमें ‘प्रतिभूति जमानत’ (security) के बगैर या इसके साथ ‘जमानत बांड’ (Bail Bond) प्रस्तुत करने पर रिहाई शामिल होती है।
  • गैर-जमानती अपराधों के मामले में, एक मजिस्ट्रेट यह निर्धारित करेगा कि आरोपी जमानत पर रिहा होने के योग्य है या नहीं।

इंस्टा लिंक्स:

‘धन शोधन निवारण अधिनियम’ (PMLA)

मेंस लिंक:

दुनिया के दो सबसे बड़े अवैध अफीम उत्पादक देशों से भारत की नजदीकी ने उसकी आंतरिक सुरक्षा संबंधी चिंताओं को बढ़ा दिया है। मादक पदार्थों की तस्करी और अन्य अवैध गतिविधियों जैसे बंदूक चलाना, मनी लॉन्ड्रिंग और मानव तस्करी के बीच संबंधों की व्याख्या कीजिए। इसे रोकने के लिए क्या उपाय किए जाने चाहिए? (यूपीएससी 2018)

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययनIII


 

विषय: उदारीकरण का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव, औद्योगिक नीति में परिवर्तन तथा औद्योगिक विकास पर इनका प्रभाव।

अमेरिकी रोजगार-मंदी विरोधाभास: व्याख्या

संदर्भ: आम तौर पर जब अमेरिकी फ़ेडरल रिज़र्व (सेंट्रल बैंक) मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए अपनी ब्याज दर बढ़ाता है, तो इससे ‘मंदी’ का भय उत्पन्न होता है क्योंकि ब्याज दर में वृद्धि होने से खपत और मांग में कमी (लोगों के पास पैसा कम होने की वजह से) होने लगती है और इसलिए बेरोजगारी बढ़ जाती है।

हालांकि, इस बार फ़ेडरल रिज़र्व दरों में बढ़ोतरी किए जाने के बाद भी अमेरिकी अर्थव्यवस्था रोजगार सृजन कर रही है।

हालिया प्रवृत्ति:

  • संयुक्त राज्य अमेरिका में आर्थिक उत्पादन, फ़ेडरल रिज़र्व द्वारा दरों को कड़ा करने के अनुरूप संकुचित हो रहा है। लेकिन कंपनियां अभी भी बड़ी संख्या में भर्तियाँ कर रही हैं।
  • पिछले छह महीनों में, अमेरिका में लगभग आधा मिलियन प्रति माह की दर से रोजगार सृजित हुए हैं।
  • सबसे कम बेरोजगारी: वर्तमान में अमेरिका में बेरोजगारी दर 5% है, जोकि 1970 के बाद से बेरोजगारी की सबसे कम दर है।

इस श्रम बाजार विरोधाभास का कारण:

पिछले संकटों के विपरीत, महामारी से प्रेरित 2020 मंदी, 2007-08 का वित्तीय संकट और 2000-01 का डॉट-कॉम बस्ट जैसे सभी संकट आवास और इंटरनेट के बुनियादी ढांचे में अत्यधिक ऋण-संबंधी विनिर्मानों के कारण हुए हैं और अर्थव्यवस्था को इन्हें अवशोषित करने के लिए लगभग एक दशक का समय लगा है।

इसके विपरीत, अतिरिक्त चलनिधि (ऋण नहीं) आज मंदी की प्रवृत्ति के लिए सबसे संभावित उत्प्रेरक है। और इसलिए अर्थव्यवस्था, अधिक रोजगार सृजन के साथ वापस गतिमान होने में सक्षम है।

फ़ेडरल रिज़र्व द्वारा दरों में वृद्धि का प्रभाव:

अमेरिका में दरों में उम्मीद से ज्यादा तीव्र वृद्धि के परिणामस्वरूप:

  • विदेशी निवेशक भारत जैसे उभरते बाजारों को छोड़कर अमेरिका में (अधिक ब्याज दर की वजह से) अधिक निवेश कर रहे हैं।
  • मुद्रा बाजार पर प्रभाव, धन के बहिर्वाह से उत्पन्न रुपये का मूल्यह्रास।

 

मंदी’ (Recession) क्या है?

यह एक व्यापक अर्थशास्त्रीय शब्द है, तथा यह दीर्घ काल के लिए आर्थिक गतिविधियों में गिरावट अथवा बड़े पैमाने पर कमी को व्यक्त करता है। अथवा यह कहा जा सकता है कि जब मंदी वाहक या कारकों का दौर लंबी अवधि तक जारी रहता है, तो इसे मंदी कहा जाता है। आमतौर पर, मंदी कुछ तिमाहियों तक ही रहती है।

महामंदी / अवसाद अथवा डिप्रेशन:

यह नकारात्मक आर्थिक विकास का गहरा और दीर्घ काल तक जारी रहने वाला समय होता है। इस दौर में कम से कम बारह महीनों तक उत्पादन में कमी होती है तथा जीडीपी में दस फीसदी से अधिक की गिरावट होती है। दूसरे शब्दों में, जब ‘मंदी’ (Recession) की अवधि एक वर्ष या उससे अधिक हो जाती है तो इसे अवसाद अथवा महामंदी (Depression) कहा जाता है।

इंस्टा लिंक:

बढ़ती खाद्य कीमतों और केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने के बीच संबंध

मेंस लिंक:

भारतीय अर्थव्यवस्था पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा हाल ही में ब्याज दरों में वृद्धि के प्रभाव का विश्लेषण कीजिए। (250 शब्द)

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: आंतरिक सुरक्षा के लिये चुनौती उत्पन्न करने वाले शासन विरोधी तत्त्वों की भूमिका।

दिल्ली पुलिस द्वारा ‘मुखाकृति पहचान तकनीक’ का उपयोग

संदर्भ: दिल्ली पुलिस द्वारा ‘मुखाकृति पहचान तकनीक’ (Facial recognition technology – FRT) का उपयोग किया जा रहा है।

  • ‘मुखाकृति पहचान तकनीक’ (FRT) एक बायोमेट्रिक तकनीक है, जिसमे किसी व्यक्ति की पहचान करने और उसे भीड़ में चिह्नित करने के लिए चेहरे की विशिष्टताओं का उपयोग किया जाता है।
  • स्वचालित ‘मुखाकृति पहचान’ प्रणाली (Automated Facial Recognition System- AFRS), व्यक्तियों के चेहरों की छवियों और वीडियो के व्यापक डेटाबेस के आधार पर कार्य करती है। किसी अज्ञात व्यक्ति की एक नई छवि – जिसे सामन्यतः किसी सीसीटीवी फुटेज से प्राप्त किया जाता है – की तुलना मौजूदा डेटाबेस में उपलब्ध छवियों से करके उस व्यक्ति की पहचान की जाती है।
  • हाल ही में कई भारतीय हवाई अड्डों पर ‘डिजीयात्रा’ (मुखाकृति पहचान तकनीक) को शुरू किया गया है।

 

कानून प्रवर्तन के विभिन्न पहलुओं में इस तकनीक के संभावित लाभ:

यह तकनीक, लापता लोगों को खोजने और अपराधियों की पहचान करने में सहायक हो सकती है।

गुमशुदा बच्चों की पहचान: अप्रैल 2018 में, दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा शुरू की गयी ‘मुखाकृति पहचान प्रणाली’ के दिल्ली पुलिस द्वारा किए गए परीक्षण ने लगभग 3000 लापता बच्चों की सही पहचान करने में मदद की।

आपराधिक पहचान और सत्यापन के क्षेत्र में परिणामों में सुधार।

उत्तर प्रदेश में ‘पहचान सिटीजन ऐप’: यह ऐप, उपयोगकर्ताओं को अखिल भारतीय आपराधिक डेटाबेस में संग्रहीत डेटा से एक ‘चेहरा’ का परीक्षण कर एक ही व्यक्ति के दो चेहरे होने की संभावना का ‘विश्वास स्कोर’ प्रदान करती है।

बैंकों और हवाई अड्डों में बेहतर सुरक्षा उपाय।

  • सरकार की डिजी-यात्रा नीति का उद्देश्य, भारत में प्रत्येक हवाई यात्री को निर्बाध, परेशानी मुक्त और कागज रहित यात्रा का अनुभव प्रदान करना है।
  • जरूरत पड़ने पर ‘मुखाकृति पहचान तकनीक’ (FRT) नागरिक सत्यापन में मदद करती है और फर्जी आईडी को कम करने में भी सहायक होती है।
  • स्पर्श बिंदुओं में कमी: मुखाकृति पहचान के लिए अन्य प्रकार के सुरक्षा उपायों, जैसे फ़िंगरप्रिंटिंग की तुलना में कम मानव संसाधनों की आवश्यकता होती है।
  • अंतर्राष्ट्रीय उपयोग: कई देश, जैसेकि चीन, पहले से ही आंतरिक सुरक्षा में आसानी के लिए और अपनी आपराधिक न्याय प्रणाली में बड़े पैमाने पर FRT का उपयोग कर रहे हैं।

‘मुखाकृति पहचान तकनीक’ के उपयोग से जुड़े मुद्दे:

  • नस्ल और लिंग के आधार पर सटीकता दर में कमी: इसका परिणाम ‘गलत सकारात्मक’ (False Positive) अर्थात किसी व्यक्ति की किसी और के रूप में गलत पहचान की जाती है, या एक ‘गलत नकारात्मक’ (False Negative) अर्थात किसी व्यक्ति को स्वयं के रूप में सत्यापित नहीं किया जाता है, हो सकता है।
  • आरटीआई प्रतिक्रिया के अनुसार- दिल्ली पुलिस अपनी ‘मुखाकृति पहचान तकनीक’ प्रणाली द्वारा उत्पन्न 80% से अधिक समानता वाले मिलानों को सकारात्मक परिणाम मानती है।
  • विशिष्ट कानूनों या दिशानिर्देशों की अनुपस्थिति, निजता तथा वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता संबंधी मूल अधिकारों के लिए एक बड़ा खतरा है। यह उच्चतम न्यायालय द्वारा ‘न्यायमूर्ति के.एस. पुट्टस्वामी बनाम भारत संघ’ मामले में दिए गए निजता संबंधी ऐतिहासिक फैसले में निर्धारित मानदंडो पर खरा नहीं उतरता है।
  • कई संस्थानों द्वारा चेहरे की पहचान प्रणाली / फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम (FRS) की शुरू करने पहले ‘निजता प्रभाव मूल्यांकन’ (Privacy Impact Assessment) नहीं किया गया है।
  • कार्यात्मक विसर्पण (Function creep): जब किसी व्यक्ति द्वारा मूल निर्दिष्ट उद्देश्य के अतिरिक्त जानकारी का उपयोग किया जाता है, तो इसे कार्यात्मक विसर्पण (Function creep) कहा जाता है। जैसे कि, पुलिस ने दिल्ली उच्च न्यायालय से लापता बच्चों को ट्रैक करने के लिए फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम (FRS) का उपयोग करने की अनुमति ली थी, किंतु पुलिस इसका उपयोग सुरक्षा और निगरानी और जांच करने के लिए कर रही है ।
  • इससे एक अत्यधिक-पुलिसिंग जैसी समस्या भी उत्पन्न हो सकती है, जैसे कि कुछ अल्पसंख्यक समुदायों की बिना किसी कानूनी प्रावधान के अथवा बिना किसी ज़िम्मेदारी के निगरानी की जाती है। इसके अलावा, ‘सामूहिक निगरानी’ के रूप में एक और समस्या उत्पन्न हो सकती है, जिसमें विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस द्वारा FRT प्रणाली का उपयोग किया जाता है।
  • सामूहिक निगरानी (Mass surveillance): यदि कोई व्यक्ति सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने जाता है, और पुलिस उस व्यक्ति की पहचान करने में सक्षम होती है और व्यक्ति को इसके दुष्परिणाम भुगतने पद सकते हैं।
  • फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम (FRS) को वर्ष 2009 में केंद्रीय मंत्रिमडल द्वारा जारी एक नोट के आधार पर लागू किया जाता है। लेकिन कैबिनेट नोट का कोई वैधानिक महत्व नहीं होता है, यह मात्र एक प्रक्रियात्मक नोट होता है।

सरकारी उपाय:

  • राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) द्वारा राष्ट्रीय ‘स्वचालित मुखाकृति पहचान प्रणाली’ (Automated Facial Recognition System – AFRS) का प्रस्ताव: इस प्रणाली का उपयोग तस्वीरों का एक राष्ट्रीय डेटाबेस बनाने के लिए किया जाएगा जो पासपोर्ट, CCTNS, ICJS और जेल, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के खोयापाया आदि, जैसे विभिन्न डेटाबेसों में मौजूदा डेटा एकत्र करके अपराधियों की तेजी से पहचान करने में मदद करेगा।
  • राज्यों की पहल: तेलंगाना में TSCOP + CCTNS, पंजाब में पंजाब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम (PAIS), दिल्ली में AFRS, महाराष्ट्र में ऑटोमेटेड मल्टीमॉडल बायोमेट्रिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AMBIS), तमिलनाडु में फेसटैग (FaceTag)।
  • राष्ट्रीय खुफिया ग्रिड (NATGRID) – एक व्यापक और खोज योग्य डेटाबेस बनाने की परियोजना।

आलोचना:

वैध अवरोधन और निगरानी परियोजना (Lawful Intercept and Monitoring project – LIM), अपराध और आपराधिक ट्रैकिंग नेटवर्क और सिस्टम (CCTNS), और नेटवर्क यातायात विश्लेषण प्रणाली (NETRA) की बड़े पैमाने पर निगरानी को सुविधाजनक बनाने, अपारदर्शी होने और स्पष्ट कानूनी समर्थन या निगरानी तंत्र के बगैर लागू किए जाने के लिए आलोचना की जाती है।

निष्कर्ष:

सही विनियमन और सुरक्षा के साथ, ‘मुखाकृति पहचान तकनीक’ (FRT) तकनीक दुनिया को अधिक सुरक्षित, अधिक सुविधाजनक और स्मार्ट बना सकती है।

इंस्टा लिंक:

मुखाकृति पहचान तकनीक

मेंस लिंक:

क्या आपको लगता है कि आपराधिक पहचान और सत्यापन के क्षेत्र में परिणामों में सुधार के लिए हाल ही में प्रस्तावित ‘स्वचालित मुखाकृति पहचान प्रणाली’ के अपारदर्शी, अस्पष्ट और दुरुपयोग की संभावना है? समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। (250 शब्द)

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययनIV


 

भारतीय पुलिस के लिए ‘राम नाथ कोविंद’ का संदेश: एक आदर्श पुलिस प्रणाली कैसी होनी चाहिए?

आदर्श पुलिस प्रणाली ऐसी होनी चाहिए, जिसमे:

  • नागरिक बिना पुलिस थाने जाए अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
  • नागरिकों को पुलिस थाने जाने की आवश्यकता के बिना पुलिस से उचित सेवा मिलती हो।
  • प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जाता है, क्योंकि तकनीक, नागरिकों को अपने घर और कंप्यूटर या मोबाइल फोन से पुलिस बल के साथ वार्ता करने और यहां तक ​​कि शिकायत दर्ज करने की सुविधा प्रदान करती है।

भारतीय पुलिस सेवा एक महत्वपूर्ण सेवा है; क्योकि-

  • भारतीय पुलिस सेवा (IPS) राष्ट्रीय प्रशासनिक व्यवस्था के स्तंभों में से एक है।
  • एक अखिल भारतीय सेवा के सदस्य के रूप में, आईपीएस अलग-अलग राज्यों में सेवा करते है, लेकिन एक राष्ट्रीय विचार का प्रतिनिधित्व करते हैं।

भारतीय पुलिस सेवा का अधिदेश:

  • भारतीय पुलिस सेवा का अधिदेश, कानून के शासन और लोकतांत्रिक राजनीति की एक सामान्य अवधारणा को बनाए रखना है, और इस अर्थ में भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी न केवल सार्वजनिक व्यवस्था और ईमानदार आचरण के, बल्कि कानून की महिमा के संरक्षक होते हैं।
  • बिना किसी डर या पक्षपात के, और बिना देर किए अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना।
  • भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों को राजनीतिक कार्यपालिका को ईमानदार और निष्पक्ष सलाह देने से डरना नहीं चाहिए।
  • ‘भारतीय संविधान’ उनका पवित्र ग्रंथ और निरंतर मार्गदर्शक होना चाहिए।

 


मुख्य परीक्षा संवर्धन हेतु पाठ्य सामग्री (नैतिकता/निबंध)


अंतिम पंघाल

हरियाणा के हिसार जिले के ‘भघाना’ गाँव का एक परिवार किसी और बच्ची को जन्म देना नहीं चाहता था, इसलिए उन्होंने बालिकाओं के साथ भेदभाव करने वाले गांव की प्रचलित प्रथा के अनुसार, अपनी चौथी लड़की का नाम ‘अंतिम’ रखा, अर्थात वह उनकी आखिरी लड़की होगी।

लेकिन पितृसत्ता के लिए एक झटका देते हुए, 18 वर्षीय ‘अंतिम पंघाल’ ने कुश्ती में भारत की पहली U20 महिला विश्व चैंपियन का खिताब हासिल किया है।

इस उदाहरण का उल्लेख महिला अधिकारिता, पितृसत्ता आदि में किया जा सकता है

 

15 मिनट शहर

15 मिनट शहर (15 minute Cities) एक अवधारणा है, जिसमे सभी नागरिक पैदल या साइकिल के माध्यम से 15 मिनट के भीतर अपनी जरूरतों को पूरा करने में सक्षम होते हैं। वर्तमान में, तकनीक (जैसे वर्क फॉर होम) लोगों को घर और आस-पड़ोस में अधिक समय बिताने के लिए मजबूर कर रही है।

इस अवधारणा को पेरिस, बोगोटा आदि शहरों द्वारा अपनाया जा रहा है।

यह तीन सिद्धांतों पर आधारित है:

  1. शहर की लय को लोगों का अनुसरण करना चाहिए न कि कारों का।
  2. प्रत्येक वर्ग मीटर को कई अलग-अलग उद्देश्यों की पूर्ति करनी चाहिए।
  3. हमें आवागमन की आवश्यकता के बिना जीने, काम करने और फलने-फूलने में सक्षम होना चाहिए।

यह अवधारणा शहरों को खुद को हरा-भरा बनाने में मदद कर सकती है और लोगों को सड़क पर अन्य लोगों से मिलना-जुलना आसान होगा।

इस उदाहरण का उल्लेख ‘सतत विकास’ प्राप्त करने के लिए एक अभिनव पहल के रूप में किया जा सकता है।

 

 

 

उम्र कोई बाधा नहीं

युगांडा से शरणार्थी के रूप में ब्रिटेन आई 85 वर्षीय भारतीय मूल की महिला मंजुला पटेल अब सबसे पुराने शेफ और रेस्तरां मालिको में से एक हैं।

  • वह ब्राइटन के समुद्र तटीय शहर में एक लोकप्रिय रेस्तरां ‘मंजू’ की मालिक है और चलाती है, जो पश्चिमी भारतीय राज्य गुजरात के पारंपरिक शाकाहारी व्यंजन परोसती है।
  • यूके में प्रवास करने के बाद, उन्हें लंदन में एक स्थानीय कारखाने में एक मशीन ऑपरेटर के रूप में काम मिला, जिसने बिजली के प्लग सॉकेट बनाए और 65 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होने तक वहां काम किया।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


अक्कम्मा चेरियन

दक्षिण भारतीय राज्य केरल की एक स्वतंत्रता सेनानी, अक्कम्मा चेरियन (Accamma Cherian), 1938 में एक व्यापक विरोध रैली के दौरान प्रदर्शित की गई वीरता के लिए जानी जाती हैं। भारत के स्वतंत्रता नेता महात्मा गांधी ने बाद में इस घटना के बारे में सुना और उन्हें ‘त्रावणकोर की “झांसी की रानी” (Jhansi Ki Rani (Queen) of Travancore) की उपाधि दी।

  • 1938 में, महात्मा गांधी से प्रेरित होकर, उन्होंने त्रावणकोर राज्य कांग्रेस (गांधी की भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की राज्य इकाई) में शामिल होने और भारत की स्वतंत्रता की लड़ाई के लिए अपनी नौकरी छोड़ दी।
  • आजादी के बाद, उन्होंने भारत में संसदीय चुनावों के लिए टिकट नहीं दिए जाने के बाद कांग्रेस पार्टी छोड़ दी। राज्य कांग्रेस कमेटी के तत्कालीन अध्यक्ष ने कहा कि त्रावणकोर में महिलाएं पहले से ही “घर की साम्राज्ञी” है, और राजनीति उनकी जगह नहीं है।
  • चेरियन ने अपनी आत्मकथा में लिखा है कि उनके जैसी महिलाएं जो स्वतंत्रता संग्राम में सबसे आगे रहीं, बाद में पार्टी में किनारे कर दी गईं।

 

वांचो समुदाय

संदर्भ: अरुणाचल का ‘वांचो समुदाय’ (Wancho community) प्राचीन लोककथाओं को डिजिटाइज़ करने के की शुरुआत कर रहा है।

  • वांचो समुदाय में मौखिक कहानियों, यादों और गीतों की एक समृद्ध परंपरा है। पटकाई पहाड़ियों के इस अल्पज्ञात क्षेत्र में सदियों से पीढ़ियों का जो ज्ञान पीढ़ियों से जमा हुआ है, वह जीवन का एक रिकॉर्ड दस्तावेज़ है।
  • जीवन का पैटर्न तेजी से बदल रहा है, क्योंकि जिला-क्षेत्र अधिक एकीकृत और बाहरी दुनिया के लिए सुलभ हो गए हैं। युवा लोग शिक्षा और रोजगार के लिए नई प्राथमिकताएं प्राप्त कर रहे हैं, और उनके पास अपने माता-पिता और दादा-दादी की यादें सुनने के लिए पहले की तुलना में बहुत कम समय है।

 

कपास की खरीद

संदर्भ: कपास के उत्पादन में कमी होने के कारण, कपास की कीमत (Cotton prices) अधिक बनी हुई है और इसके परिणामस्वरूप सरकारी खरीद (MSP के तहत) भी धीमी रही है।

उच्च कीमत के कारण:

  • कपास के सबसे बड़े उत्पादक देशों में से एक, अमेरिका द्वारा अपने कपास उत्पादन में कमी का पूर्वानुमान व्यक्त किए जाने के बाद वैश्विक स्तर पर कपास की कीमतों में उछाल आया है।
  • कीटों और भारी बारिश की वजह से, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख राज्यों में कपास उत्पादन प्रभावित हुआ है।
  • भारत में कपास की उत्पादकता कम है। यहाँ प्रति हेक्टेयर 450 किग्रा से 500 किग्रा कपास उत्पादन होता है, जबकि इसका वैश्विक औसत 877 किग्रा/हेक्टेयर है।
  • भारत के नौ कपास उगाने वाले राज्यों में से, प्रत्येक में उगाए जाने वाले कपास का कम से कम 80% बीटी कपास होता है।

 

 

 

राठौल कोयला खनन

संदर्भ: मेघालय कोयला खदान में हालिया दुर्घटना। यह दुर्घटना पश्चिमी खासी हिल्स जिले के शालंग इलाके में हुई है।

रैट-होल कोयला खनन

रैट-होल खनन (Rathole Coal Mining) एक खतरनाक तकनीक है जिसमें कोयला निकालने के लिए पृथ्वी में संकरी खड़ी सुरंगों को खोदा जाता है। चूंकि इनमें से अधिकांश सुरंगें बिना दिशा-निर्देशों का पालन किए खोदी जाती है, इसलिए श्रमिकों के लिए काफी खतरनाक होती हैं।

मेघालय में रैट-होल खनन:

मेघालय में पाए जाने वाली कोयले की पतली परतों के कारण यहाँ रैट-होल खनन आम है।

विधिक प्रावधान:

राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने 2014 में रैट-होल खनन पर प्रतिबंध लगा दिया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट (2019) ने इसके खारिज करते हुए कहा कि ‘खान और खनिज अधिनियम’ के उचित नियमों और प्रावधानों के तहत किया गया खनन ‘वैध’ होगा।

 

एक लाख से अधिक गांव ‘ओडीएफ प्लस’ घोषित

संदर्भ: सरकार के अनुसार, 1 लाख से अधिक गांवों ने खुद को ओडीएफ प्लस घोषित किया है।

ये गांव अपनी ओडीएफ स्थिति को बनाए हुए हैं और ठोस और/या तरल कचरे के प्रबंधन के लिए प्रणाली मौजूद हैं और वे अपनी स्वच्छता यात्रा जारी रखेंगे क्योंकि वे अपने गांवों को स्वच्छ, हरा-भरा और स्वस्थ बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं।

पृष्ठभूमि:

  • स्वच्छ भारत मिशन (SBM -ग्रामीण) (2014-2019) के चरण 1 के तहत, अक्टूबर 2019 तक 100% गांवों को ओडीएफ घोषित किया गया था।
  • स्वच्छ भारत मिशन (2020-2025) के दूसरे चरण के तहत सभी गांवों को ओडीएफ+ का दर्जा दिलाने का लक्ष्य है।

नोडल मंत्रालय: पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय

 

 

 

ग्रामीण उद्यमी परियोजना

संदर्भ: राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (National Skill Development Council – NSDC) द्वारा जनजातीय समुदायों में उनके समावेशी और सतत विकास के लिए कौशल प्रशिक्षण बढ़ाने के लिए ‘ग्रामीण उद्यमी परियोजना’ (Grameen Udyami Project) के दूसरे चरण का शुभारंभ किया गया।

‘ग्रामीण उद्यमी परियोजना’ के बारे में:

  • ग्रामीण उद्यमी एक अनूठी बहु-कौशल परियोजना है, जिसे राष्ट्रीय कौशल विकास निगम- NSDC द्वारा वित्त पोषित किया गया है।
  • जिसका उद्देश्य मध्य प्रदेश और झारखंड में 450 जनजातीय विद्यार्थियों को प्रशिक्षित करना है।
  • यह परियोजना छह राज्यों- महाराष्ट्र, राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, झारखंड और गुजरात में लागू की जा रही है।
  • इस अवधारणा को सांसद परिषद योजना के तहत कार्यान्वित किया गया था।

लाभ:

  • ग्रामीण उद्यमी योजना, जनजातीय युवाओं में कौशल प्रशिक्षण में वृद्धि करेगी और जनजातीय समुदायों के समावेशी और सतत विकास को सुनिश्चित करेगी।
  • यह उन्हें आजीविका को सक्षम बनाने के लिए कार्यात्मक कौशल प्रदान करेगी।
  • ग्रामीण/स्थानीय अर्थव्यवस्था में वृद्धि।
  • रोजगार के अवसरों में वृद्धि।
  • स्थानीय अवसरों की कमी के कारण जबरन प्रवास को कम करना।
  • प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण।

अकाउंट एग्रीगेटर फ्रेमवर्क सिस्टम

संदर्भ: सेबी (SEBI) हाल ही में, आरबीआई के ‘अकाउंट एग्रीगेटर फ्रेमवर्क’ (Account Aggregator (AA) Framework) में शामिल हुआ है।

फ़ायदे:

  • अकाउंट एग्रीगेटर फ्रेमवर्क, उपयोगकर्ता के सभी बैंक खातों को एक ही स्थान पर डैशबोर्ड में समेकित करने की अनुमति देता है, इस प्रकार एक वित्तीय संस्थान से दूसरे वित्तीय संस्थान में जानकारी और साख साझा करने की सुविधा प्रदान करता है।
  • फ्रेमवर्क, ग्राहकों को अपने म्यूचुअल फंड और स्टॉक होल्डिंग्स के बारे में वित्तीय सेवा प्रदाताओं के साथ जानकारी साझा करने की अनुमति देगा।
  • यह ऋण और क्रेडिट में धोखाधड़ी को रोकने में भी मदद करेगा।

‘अकाउंट एग्रीगेटर’ के बारे में:

यह आरबीआई द्वारा विनियमित वित्तीय डेटा साझाकरण प्रणाली का एक हिस्सा है।

  • अकाउंट एग्रीगेटर (Account Aggregator – AA), किसी अनुबंध के तहत, अपने ग्राहक से संबंधित वित्तीय जानकारी हासिल करने या एकत्र करने की सेवा प्रदान करने के व्यवसाय में लगी ‘गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी’ (Non-Banking Financial Company – NBFC) होती है।
  • यह, इस प्रकार की जानकारी को समेकित और व्यवस्थित करने तथा बैंक द्वारा निर्दिष्ट किसी ग्राहक या किसी अन्य ‘वित्तीय जानकारी उपयोगकर्ता’ को यह जानकारी उपलब्ध कराने का कार्य भी करते है।

 

उत्पत्ति का नियम

संदर्भ: केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) के अनुसार, सीमा शुल्क नियम, 2020 (CAROTAR) और ‘उत्पत्ति के नियमों’ (मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के तहत) के बीच संघर्ष के मामले में, ‘उत्पत्ति के नियम’ (Rules of Origin – ROO) पर FTA का प्रावधान मान्य होगा।

मुक्त व्यापार समझौते (FTA) प्रावधान CAROTAR के तहत दिए गए प्रावधानों की तुलना में बहुत अधिक उदार हैं।

ROO के बारे में:

‘उत्पत्ति के नियम’ (Rules of Origin – ROO), किसी उत्पाद के राष्ट्रीय स्रोत को निर्धारित करने के लिए आवश्यक मानदंड हैं। उनका महत्व इस तथ्य में है, कि कई मामलों में ‘शुल्क’ और ‘प्रतिबंध’ आयातित वस्तु के स्रोत पर निर्भर करते हैं।

उदाहरण:

यदि किसी वस्तु का उत्पादन संयुक्त अरब अमीरात में हुआ था और उसे भारत में आयात किया गया था; तो इस पर शून्य या रियायती आयात शुल्क लगेगा।

  • यदि किसी वस्तु का उत्पादन चीन में हुआ है, तो इस पर पर्याप्त शुल्क लगाया जा सकता है
  • इसलिए एक आयातक चीन से माल आयात नहीं कर सकता है और उन्हें ‘मेड इन यूएई’ के रूप में लेबल कर सकता है, और फिर सीमा शुल्क से बचने के लिए उन्हें भारत में निर्यात कर सकता है।
  • CAROTAR इस प्रकार के दुरुपयोग पर रोक लगाता है।

CAROTAR: इसका उद्देश्य FTA के तहत शुल्क चोरी को रोकना है। इसके तहत आयातकों को FTA के तहत शुल्क रियायत का दावा करने के लिए मूल देश से माल में 35% मूल्यवर्धन का प्रमाण दिखाना होगा।

  • हमारे उदाहरण में, FTAs के तहत रियायत आयात शुल्क का लाभ लेने के लिए यूएई में न्यूनतम 35% मूल्यवर्धन किया जाना चाहिए।
  • भारत का कई देशों (जैसे संयुक्त अरब अमीरात, मॉरीशस, जापान, सिंगापुर आदि) के साथ ‘मुक्त व्यापार समझौता (FTA) है।

 

चावल में जीन संवर्धन

संदर्भ: हाल के अध्ययनों में, यह पाया गया है कि, अपने खुद के जीन में से एक दूसरी प्रति जोड़ने से चीनी चावल की किस्म की उपज में 40% तक की वृद्धि हुई है।

यह, जीन संशोधन अनाज की पैदावार को बढ़ाता है और चावल की वृद्धि अवधि को कम करता है

अध्ययन:

जब चावल में एकल जीन (जिसे OsDREB1C कहा जाता है) की दूसरी प्रति प्रविष्ट कराई जाती है, तो इससे प्रकाश संश्लेषण और नाइट्रोजन के उपयोग में सुधार होता है, वृद्धि की गति में तेजी आती है और नाइट्रोजन को अधिक कुशलता से अवशोषण होता है- परिणामस्वरूप अधिक प्रचुर मात्रा में अनाज उत्पादित होता है।

जीन मॉडुलन क्या है?

जीन मॉडुलन (Gene Modulation), अंतर्निहित सेलुलर डीएनए में आनुवंशिक परिवर्तन किए बिना अस्थायी रूप से जीन अभिव्यक्ति के स्तर को बदलने की प्रक्रिया को संदर्भित करता है।

इस पद्दति को अपनाने में भारत के लिए लाभ:

  • इस प्रक्रिया में एक ही जीन की पुनः प्रवष्टि की जाती है, इस प्रकार यह जीएम या ट्रांसजेनिक फसलों से संबंधित जोखिम को कम करता है।
  • उदाहरण के लिए, बीटी कॉटन में बैसिलस थुरिजिएंसिस (बीटी) नामक जीवाणु से जीन को सामान्य कपास में स्थानांतरित किया जाता है।
  • जीन संशोधन पर कोई विनियमन नहीं: भारत ने सभी आनुवंशिक रूप से संशोधित फसलों के व्यावसायीकरण पर पहले से लगाए गए नियमों से कुछ प्रकार के आनुवंशिक संशोधनों वाली फसलों को छूट दी है।
  • ‘हरित क्रांति’ के नकारात्मक प्रभाव को कम करना।

चावल का निर्यात:

भारत चावल का दुनिया का सबसे बड़ा निर्यातक है। वर्ष 2021-22 के दौरान 150 से अधिक देशों को लगभग 18.75 मिलियन मीट्रिक टन चावल का निर्यात किया गया था।

 

भारत की पहली हाइड्रोजन ईंधन सेल बस

संदर्भ: भारत की पहली स्वदेशी रूप से विकसित हाइड्रोजन ईंधन सेल बस KPIT-CSIR द्वारा विकसित की गई थी।

हरित हाइड्रोजन / ग्रीन हाइड्रोजन क्या है?

नवीकरणीय / अक्षय ऊर्जा का उपयोग करके ‘विद्युत अपघटन’ (Electrolysis) द्वारा उत्पादित हाइड्रोजन को ‘हरित हाइड्रोजन’ (Green Hydrogen) के रूप में जाना जाता है। इसमें कार्बन का कोई अंश नहीं होता है।

ग्रीन हाइड्रोजन का महत्व:

  • भारत के लिए अपने ‘राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान’ (Nationally Determined Contribution- INDC) लक्ष्यों को पूरा करने तथा क्षेत्रीय और राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा, पहुंच और उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु ‘ग्रीन हाइड्रोजन’ ऊर्जा काफी महत्वपूर्ण है।
  • ग्रीन हाइड्रोजन, ऊर्जा भंडारण विकल्प के रूप में कार्य कर सकता है, जो भविष्य में नवीकरणीय ऊर्जा के अंतराल को पूरा करने के लिए महत्वपूर्ण होगा।
  • परिवहन के संदर्भ में, शहरों के भीतर या राज्यों के मध्य लंबी दूरी की यात्रा या माल ढुलाई के लिए, रेलवे, बड़े जहाजों, बसों या ट्रकों आदि में ग्रीन हाइड्रोजन का उपयोग किया जा सकता है।

ग्रीन हाइड्रोजन के अनुप्रयोग:

  1. अमोनिया और मेथनॉल जैसे हरित रसायनों का उपयोग सीधे ही उर्वरक, परिवहन, बिजली, रसायन, शिपिंग आदि, जैसी मौजूदा ज़रूरतों में किया जा सकता है।
  2. व्यापक स्तर पर अपनाए जाने के लिए CGD नेटवर्क में 10 प्रतिशत तक ग्रीन हाइड्रोजन मिश्रण को लागू जा सकता है।

CSIR के बारे में:

वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर), जो विविध विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में अपने अत्याधुनिक अनुसंधान एवं विकास ज्ञान आधार के लिए जाना जाता है, एक समकालीन अनुसंधान एवं विकास संगठन है।

  • यह 1942 (मुख्यालय: नई दिल्ली) में स्थापित भारत में सबसे बड़ा अनुसंधान और विकास (आर एंड डी) संगठन है।
  • यह विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा वित्त पोषित है, लेकिन सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के माध्यम से एक स्वायत्त निकाय के रूप में कार्य करता है।

 

NFT के भविष्य पर ‘ओपन सी’ की कहानी

संदर्भ: एनएफटी (NFTs) डिजिटल परिसंपत्तियां होती हैं जिनके स्वामित्व को ब्लॉकचेन पर संग्रहीत लेनदेन रिकॉर्ड के माध्यम से सत्यापित किया जाता है। कलाकृति, डिजिटल अवतार और एक्सेसराइज्ड बंदर कुछ सबसे अधिक कारोबार वाले एनएफटी हैं।

ड्रॉइंग, फोटो, वीडियो, जीआईएफ, संगीत, इन-गेम आइटम, सेल्फी और यहां तक ​​कि एक ट्वीट से सब कुछ एक एनएफटी में बदल दिया जा सकता है, जिसे क्रिप्टोकरेंसी का उपयोग करके ऑनलाइन कारोबार किया जा सकता है।

‘ओपन सी’ के बारे में:

‘ओपन सी’ (OpenSea) को अस्तित्व में सबसे बड़े NFT मार्केटप्लेस में से एक कहा जाता है।

  • इस साल की शुरुआत में, उद्यम पूंजी में लगभग $300 मिलियन जुटाने के बाद इस प्लेटफ़ॉर्म का मूल्य $13 बिलियन से अधिक था।
  • अगस्त 2022 तक, Ethereum ब्लॉकचेन डेटा के आधार पर, OpenSea का उपयोग दो मिलियन व्यापारियों द्वारा किया गया था, जिन्होंने नेटवर्क पर कम से कम एक बार लेनदेन किया था।
  • OpenSea को NFT का व्यापार करने के लिए एथेरियम ब्लॉकचेन पर बनाया गया था।

एनएफटी एवं क्रिप्टोक्यूरेंसी में भिन्नता:

  • क्रिप्टोकरेंसी एक मुद्रा है और प्रतिमोच्य (fungible) है, जिसका अर्थ है कि इसका ‘विनिमेय’ किया जा सकता है।
  • एनएफटी ‘गैर- प्रतिमोच्य’ (non-fungible) हैं, जिसका अर्थ है कि एक एनएफटी का मूल्य दूसरे के बराबर नहीं होता है।