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[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 11 August 2022

विषयसूची

सामान्य अध्ययन-II

  1. पेसा अधिनियम 1996
  2. जलवायु कार्रवाई पर नया यू.एस. विधेयक

सामान्य अध्ययन-III

  1. विद्युत् (संशोधन) विधेयक 2022

मुख्य परीक्षा संवर्धन हेतु पाठ्य सामग्री (नैतिकता/निबंध)

  1. नल्लाथम्बी कलाइसेल्वी
  2. शतरंज ओलंपियाड 2022
  3. सतत विकास के लिए ‘जापान’ से सीखे जाने वाले सबक
  4. तकनीकी-राष्ट्रवाद

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

  1. केंद्र सरकार द्वारा राज्यों के लिए ₹ 16 लाख करोड़ जारी
  2. जिला स्तर पर अल्पसंख्यकों की शिनाख़्त
  3. नियम 267
  4. एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय
  5. भारत निर्वाचन आयोग द्वारा समावेशी चुनावों पर ‘वर्चुअल रीजनल फोरम’ की बैठक का आयोजन
  6. शहरी आवास योजना को 2024 तक जारी रखने की मंजूरी
  7. सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) पर सहकारी समितियां
  8. संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध शासन व्यवस्था
  9. प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्र
  10. डिजिटल कॉमर्स के लिए ओपन नेटवर्क
  11. ‘ब्लू बॉन्ड’
  12. ईकोस्ट्रेस
  13. विश्व शेर दिवस
  14. बटरफ्लाई माइंस
  15. लंपी त्वचा रोग के लिए स्वदेशी टीका

 


सामान्य अध्ययनII


 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

पेसा अधिनियम 1996

संदर्भ: छत्तीसगढ़ सरकार द्बारा ‘पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम’ (Panchayats (Extension to Scheduled Areas) Act – PESA Act) या ‘पेसा अधिनियम’ के तहत ‘PESA नियमावली’, 2022 (PESA Rules 2022) को लागू किया गया है। इसके अलावा, हाल ही में एक राजनीतिक दल ने आदिवासियों के लिए छह सूत्री “गारंटी” का अनावरण किया, जिसमें ‘पेसा अधिनियम’ का “सख्त कार्यान्वयन” करना शामिल है।

(नोट: पेसा अधिनियम पर अलग से नोट बना लें, यह प्रीलिम्स और मेन्स दोनों के लिए महत्वपूर्ण टॉपिक है।)

PESA नियमावली’ 2022 के बारे में:

छत्तीसगढ़ के PESA नियमों में कहा गया है, कि ग्राम सभा के 50% सदस्य आदिवासी समुदायों से होंगे, जिनमें से 25% सदस्य महिलाएं होंगी।

  • ‘पेसा अधिनियम’ के लागू होने के लिए, राज्यों द्वारा नियम बनाया जाना आवश्यक होता है।
  • वस्तुस्थिति: 5वीं अनुसूची क्षेत्रों को अधिसूचित करने वाले 10 राज्यों (आंध्र, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा और राजस्थान) में से, केवल 7 राज्यों (छत्तीसगढ़ और गुजरात सहित) ने ‘PESA अधिनियम’ लागू करने के लिए नियम अधिसूचित किए हैं।
  • छठी अनुसूची में शामिल राज्य हैं: ‘असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम’ (इनको ‘AMTM’ के रूप में याद रखा जा सकता है।)

‘पेसा अधिनियम, 1996 के बारे में:

‘पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम, 1996’ या ‘पेसा अधिनियम’ भारत के अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाली आबादी के लिए, पारंपरिक ग्राम सभाओं के माध्यम से, स्वशासन सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार द्वारा अधिनियमित एक कानून है।

  • यह क़ानून 1996 में संसद द्वारा अधिनियमित किया गया था और 24 दिसंबर 1996 को लागू हुआ था।
  • ‘पेसा अधिनियम’ को भारत में आदिवासी कानून की रीढ़ माना जाता है।
  • इस क़ानून के तहत, निर्णय लेने की प्रक्रिया की पारंपरिक प्रणाली को मान्यता दी गयी है और और लोगों की स्वशासन की भागीदारी सुनिश्चित की गयी है।

पृष्ठभूमि:

ग्रामीण भारत में स्थानीय स्वशासन को बढ़ावा देने हेतु, वर्ष 1992 में 73वां संविधान संशोधन किया गया। इस संशोधन के माध्यम से त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्था को एक कानून बनाया गया।

  • हालांकि, अनुच्छेद 243 (M) के तहत अनुसूचित और आदिवासी क्षेत्रों में इस कानून को लागू करना प्रतिबंधित था।
  • वर्ष 1995 में ‘भूरिया समिति’ की सिफारिशों के बाद, भारत के अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाली आबादी के लिये स्व-शासन सुनिश्चित करने हेतु ‘पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम,1996 लागू किया गया।
  • 1995 में भूरिया समिति की सिफारिशों के बाद, भारत के अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए आदिवासी स्व-शासन सुनिश्चित करने के लिए अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायत विस्तार (पेसा) अधिनियम 1996 अस्तित्व में आया।
  • PESA क़ानून के तहत, ग्राम सभा को पूर्ण शक्तियाँ प्रदान की गयी है, जबकि राज्य विधायिका को पंचायतों और ग्राम सभाओं के समुचित कार्य को सुनिश्चित करने के लिए एक सलाहकार की भूमिका दी गई है।
  • ग्राम सभा को प्रत्यायोजित शक्तियों में, किसी उच्च स्तर की संस्था के द्वारा कटौती नहीं की जा सकती है, और इन्हें अपने निर्धारित कार्य करने की पूरी स्वतंत्रता रहेगी।

ग्राम सभाओं को दी गई शक्तियाँ और कार्य:

  1. भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और विस्थापित व्यक्तियों के पुनर्वास में अनिवार्य परामर्श का अधिकार;
  2. पारंपरिक आस्था और आदिवासी समुदायों की संस्कृति का संरक्षण;
  3. लघु वन उत्पादों पर स्वामित्व;
  4. स्थानीय विवादों का समाधान;
  5. भूमि अलगाव की रोकथाम;
  6. ग्रामीण बाजारों का प्रबंधन;
  7. शराब के उत्पादन, आसवन और निषेध को नियंत्रित करने का अधिकार;
  8. साहूकारों पर नियंत्रण का अधिकार;
  9. अनुसूचित जनजातियों से संबंधित अन्य अधिकार;

लघु वनोपज: लघु वनोपज को ‘वन अधिकार अधिनियम’, 2006 के तहत परिभाषित किया गया है, इसमें बांस, ब्रशवुड, स्टंप, बेंत, तुसर आदि सहित पादप-उत्पत्ति के सभी गैर-इमारती वन उत्पाद शामिल हैं।

PESA क़ानून से संबंधित मुद्दे:

राज्य सरकारों से अपेक्षा की जाती है, कि वे ‘पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम, एक राष्ट्रीय कानून, के अनुरूप अपने अनुसूचित क्षेत्रों के लिये राज्य स्तर पर कानून बनाएँ। इसके परिणामस्वरूप राज्यों में PESA क़ानून का आंशिक रूप से कार्यान्वयन हुआ है।

  • इस आंशिक कार्यान्वयन की वजह से आदिवासी क्षेत्रों में, जैसे- झारखंड में, स्वशासन व्यवस्था खराब हुई है।
  • कई विशेषज्ञों का दावा है, कि ‘स्पष्टता की कमी, कानूनी दुर्बलता, नौकरशाही की उदासीनता, राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी, सत्ता के पदानुक्रम में परिवर्तन के प्रतिरोध आदि के कारण, PESA क़ानून सफल नहीं हो सका है।
  • राज्य भर में किये गए सोशल ऑडिट से पता चला है, कि विभिन्न विकास योजनाओं को ग्राम सभा द्वारा केवल कागज़ पर अनुमोदित किया जा रहा था और वास्तव में चर्चा और निर्णय लेने के लिये कोई बैठक नहीं हुई थी।

इंस्टा लिंक:

पेसा अधिनियम

मेंस लिंक:

पेसा अधिनियम को भारत में ‘आदिवासी कानूनों’ की रीढ़ माना जाता है, इस पृष्ठभूमि में क्या आपको लगता है कि इसका उचित कार्यान्वयन देश के आदिवासी इलाकों में स्वशासन को फिर से जीवंत कर सकता है? विश्लेषण कीजिए। (15 अंक)

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस, टाइम्स ऑफ इंडिया

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

जलवायु कार्रवाई पर संयुक्त राज्य अमेरिका में नया विधेयक

संदर्भ:

हाल ही में, अमेरिकी सीनेट ने मुद्रास्फीति को कम करने के लिए जलवायु, स्वास्थ्य देखभाल और कर प्रावधानों पर ध्यान देने के साथ ‘मुद्रास्फीति न्यूनीकरण अधिनियम’, 2022 (Inflation Reduction Act, 2022 – IRA, 2022) नामक एक विधेयक को मंजूरी दी है।

यह विधेयक, राष्ट्रपति बिडेन के ‘बिल्ड बैक बेटर एक्ट’ (Build Back Better Act – BBBA) का एक लघु संस्करण है। BBB एक्ट, सीनेट से अनुमोदन प्राप्त करने में विफल रहा था।

(नोट: बस एक बार इसे पढ़ लीजिए। उदाहरण के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इतना महत्वपूर्ण नहीं है।)

जलवायु परिवर्तन प्रावधान:

स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण हेतु पैकेज: यह विधेयक, अमेरिका को स्वच्छ ऊर्जा में अग्रणी बनाने के उद्देश्य से किए जाने वाले सबसे बड़े अमेरिकी निवेश को चिह्नित करता है।

  • इसमें ‘स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण’ (clean energy transition) के लिए $369 बिलियन के पैकेज शामिल हैं।
  • यह विधेयक, पवन और सौर ऊर्जा परियोजनाओं और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए भारी टैक्स क्रेडिट के माध्यम से अक्षय ऊर्जा में महत्वपूर्ण निवेश किए जाने का प्रावधान करता है।

निम्न और मध्यम आय वाले परिवारों के लिए ‘करों में कटौती’:

  • विधेयक में ‘निम्न और मध्यम आय वाले परिवारों’ को ‘इलेक्ट्रिक उपकरणों का इस्तेमाल’ करने पर ‘कर कटौती’ का प्रावधान करता है और इसमें अमेरिकी परिवारों के विद्युत् बिलों को कम करने का प्रयास किया गया है।

घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना:

  • इसका उद्देश्य ‘उष्मा पंपों’ और महत्वपूर्ण खनिजों के घरेलू उत्पादन को बढ़ाना भी है।
  • ‘हरित निवेश’ को पूरा करने के लिए बड़ी और लाभदायक कंपनियों पर कर आरोपित करना।

मीथेन शुल्क:

  • विधेयक में तेल और गैस ड्रिलिंग से होने वाले ‘मीथेन रिसाव’ पर भी शुल्क लगाया गया है। साथ ही, विधेयक का उद्देश्य, जीवाश्म ईंधन में अधिक निवेश करना भी है।

तेल और गैस ड्रिलिंग का विस्तार:

  • विधेयक का उद्देश्य, तेल और गैस ड्रिलिंग का विस्तार करना है, संघीय सरकार द्वारा इकाई द्वारा अक्षय ऊर्जा विकसित किए जाने की शर्त के साथ तटवर्ती और अपतटीय ड्रिलिंग के लिए की पेशकश करती है।
  • इस प्रकार, यह विधेयक, अक्षय ऊर्जा विकास के साथ-साथ तेल और गैस के विस्तार को संयुक्त करता है।

विधेयक से जुडी समस्याएं:

  • जीवाश्म उद्योग संबधी मुद्दे: जीवाश्म ईंधन समर्थक, इस बिल की आलोचना कर रहे हैं, क्योंकि इसमें अपनी आय के लिए जीवाश्म ईंधन उद्योग पर निर्भर समुदायों को ध्यान में नहीं रखा गया है।
  • कोयला संयंत्रों के श्रमिक: वेस्ट वर्जीनिया राज्य में एक कोयला संयंत्र के श्रमिकों का विरोध, उनके अपने सीनेटर ‘जो मैनचिन’ द्वारा इस बिल का समर्थन करने के लिए सहमत होने के बाद, दर्ज किया गया था।
  • जीवाश्म ईंधन के प्रावधान: जलवायु समर्थक, तेल और गैस ड्रिलिंग के लिए भूमि पट्टे के साथ ‘अक्षय ऊर्जा के विकास’ को जोड़ने के लिए ‘बिल’ की आलोचना करते हैं।
  • विधेयक में अभी भी ‘जीवाश्म ईंधन क्षेत्र’ के लिए नरमी बरती गयी है।

यह बिल, अमेरिका को अपने जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने में किस प्रकार मदद करता है?

 

अन्य देशों द्वारा घोषित ‘समान जलवायु पैकेज’:

  • जापान द्वारा किसिडा में निवेश: मई 2022 में, जापान द्वारा अपनी ‘किसिडा में निवेश’ (Invest in Kisida) योजना की घोषणा की, जिसका उद्देश्य जापानी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए $1.1 ट्रिलियन का निवेश करना है।
  • योजना के हिस्से के रूप में, देश का लक्ष्य स्वच्छ ऊर्जा की ओर संक्रमण करना, और 2030 तक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में 46 प्रतिशत की कमी लाना है।
  • यूरोपीय संघ द्वारा ‘फिट फॉर 55’: जून 2021 में, यूरोपीय संघ ने 2030 तक उत्सर्जन को 55% तक कम करने के लिए इसी तरह की ‘फिट फॉर 55’ योजना का प्रस्ताव रखा है।
  • इस योजना के जल्द ही ‘कानून’ में परिवर्तित होने की उम्मीद है।

निष्कर्ष:

  • वैश्विक जलवायु कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण मोड़: चूंकि, अमेरिका विश्व स्तर पर ग्रीनहाउस गैसों के सबसे बड़े उत्सर्जक में से एक है, अतः यह विधेयक ‘वैश्विक जलवायु कार्रवाई’ के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।
  • हालांकि, यह विधेयक, वैश्विक जलवायु कार्रवाई के लिए एक प्रमुख बाधा के रूप में प्रत्यक्ष खड़े ‘वैश्विक जलवायु वित्त संबंधी किसी भी मुद्दे’ को संबोधित नहीं करता है।
  • पेरिस समझौते को प्राप्त करना: यह विधेयक, पेरिस समझौते में सहमत जलवायु लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक मात्र कदम है, जिसके अनुच्छेद 2 में कहा गया है कि वैश्विक तापमान 2 डिग्री सेल्सियस से नीचे होना चाहिए।
  • अन्य उत्सर्जकों के लिए बेंचमार्क: भले ही यह विधेयक जलवायु संकट को दूर करने के लिए पर्याप्त नहीं है, किंतु, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में वैश्विक नेताओं द्वारा इस तरह की ऐतिहासिक पहल, अन्य बड़े उत्सर्जकों के लिए अपने जलवायु कार्रवाई कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने के लिए एक बेंचमार्क हो सकती है।

इंस्टा लिंक:

UNFCCC तथा पेरिस समझौते के तहत वित्तीय और तकनीकी प्रतिबद्धताएँ

मेंस लिंक:

संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क कन्वेंशन (UNFCCC) के पार्टियों के सम्मेलन (COP) के 26वें सत्र के प्रमुख परिणामों का वर्णन कीजिए। इस सम्मेलन में भारत द्वारा की गई प्रतिबद्धताएं क्या हैं? (यूपीएससी 2021)

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययनIII


 

विषय: बुनियादी ढाँचाः ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि।

विद्युत संशोधन विधेयक, 2022

संदर्भ: हाल ही में, केंद्र सरकार द्वारा लोकसभा में ‘विद्युत (संशोधन) विधेयक’ 2022 (Electricity (Amendment) Bill 2022) पेश किया गया था, जिसे बाद में व्यापक परामर्श के लिए ‘ऊर्जा संबंधी विषयों पर गठित संसदीय स्थायी समिति’ के पास भेज दिया गया है।

(नोट: बस एक बार पढ़ लीजिए। अभी नोट्स बनाने की जरूरत नहीं है क्योंकि इसमें कई बदलाव होंगे।)

विद्युत संशोधन विधेयक, 2022 में पूर्ववर्ती ‘विद्युत अधिनियम’ 2003 (Electricity Act of 2003) में संशोधन करने का प्रस्ताव किया गया है।

  • विद्युत अधिनियम, 2003 भारत में बिजली क्षेत्र को विनियमित एवं नियंत्रित करता है।
  • इस अधिनियम के तहत, अंतरराज्यीय और राज्यों के भीतर के मामलों को विनियमित करने के लिए क्रमशः केंद्रीय और राज्य विद्युत नियामक आयोगों (CERC और SERCs) के गठन का प्रावधान है।

विधेयक के प्रमुख प्रावधान

उपभोक्ताओं के लिए लाभ:

एक क्षेत्र में कई DISCOMs: एक्ट में प्रावधान है कि एक ही क्षेत्र में आपूर्ति के लिए कई वितरण लाइसेंसी (डिस्कॉम्स) होंगे। इसमें यह जोड़ा गया है, कि एक ही क्षेत्र में कई डिस्कॉम को अनुमति देता है: एक क्षेत्र में एक से अधिक बिजली वितरक काम कर सकते हैं।

  • इसका उद्देश्य प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना और उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प देना है। नया आपूर्तिकर्ता मौजूदा आपूर्ति लाइनों का उपयोग कर सकता है।
  • नियामक को 90 दिनों में निर्णय लेना होगा, अन्यथा ‘आवेदन’ को अनुमोदित माना जाएगा।
  • यह प्रावधान, वितरण एकाधिकार को समाप्त करेगा और व्यवसाय की व्यवहार्यता में सुधार करेगा।

DISCOMs के लिए लाभ:

  • टैरिफ का निर्धारण: बिजली वितरण कंपनियों द्वारा हिंसक मूल्य निर्धारण से बचने और उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए, “उपयुक्त आयोग” द्वारा न्यूनतम और अधिकतम टैरिफ सीमा का “अनिवार्य” निर्धारण किया जाएगा।
  • इसका उद्देश्य श्रेणीबद्ध और समय पर टैरिफ संशोधन सुनिश्चित करना है।

दूरदराज के क्षेत्रों और किसानों के लिए लाभ:

  • क्रॉस-सबसिडी बैलेंसिंग फंड: क्रॉस-सबसिडी का अर्थ एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें उपभोक्ताओं की एक श्रेणी, उपभोक्ताओं की दूसरी श्रेणी की खपत को सबसिडाइज करती है। उदाहरण: वाणिज्यिक उपभोक्ताओं द्वारा निवासियों या किसानों को सब्सिडी दिया जाना।
  • एक ही क्षेत्र के लिए कई वितरण लाइसेंस प्रदान किए जाने की स्थिति में, राज्य सरकार क्रॉस-सबसिडी बैलेंसिंग फंड बनाएगी।
  • Benefit for Environment:

पर्यावरण के लिए लाभ:

  • अक्षय ऊर्जा खरीद बाध्यता: विद्युत अधिनियम, 2003 ‘राज्य विद्युत नियामक आयोगों’ (SERCs) को यह अधिकार देता है कि वे डिस्कॉम्स के लिए ‘अक्षय ऊर्जा खरीद बाध्याएं’ (Renewable purchase obligation – RPO) निर्दिष्ट कर सकते हैं।
  • ‘अक्षय ऊर्जा खरीद बाध्यता’ (RPO) का अर्थ यह होता है कि बिजली का एक निश्चित प्रतिशत, अक्षय ऊर्जा स्रोतों से खरीदना अनिवार्य होगा।
  • विधेयक के अनुसार, यह ‘अक्षय ऊर्जा खरीद बाध्यता’ केंद्र सरकार द्वारा निर्दिष्ट न्यूनतम प्रतिशत से कम नहीं होना चाहिए। RPO का पालन न करने की स्थिति में DISCOMS को जुर्माना चुकाना होगा।
  • हरित ऊर्जा को बढ़ावा।
  • बेहतर विनियमन: विधेयक में, भुगतान सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने और नियामकों को अधिक अधिकार देने का प्रयास किया गया है।

विधेयक से जुड़े मुद्दे:

  • संघीय सिद्धांतों का उल्लंघन: ‘विद्युत’ राज्य का विषय है और इस पर कोई भी कानून राज्य सरकार के परामर्श से होना चाहिए। हालांकि, विधेयक पेश करने से पहले कोई सलाह-मशविरा नहीं किया गया।
  • असमानता: प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करने के प्रावधान से अधिक संस्थाएं आकर्षक और शहरी क्षेत्रों में प्रवेश कर सकती हैं, जबकि घाटे में चल रहे क्षेत्रों को कम सेवा दी जा सकती है।
  • किसानों को सब्सिडी समाप्त होने का डर।

मेंस लिंक:

विद्युत क्षेत्र को किन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है? क्या हाल ही में प्रस्तावित ‘विद्युत (संशोधन) विधेयक’ 2022 इन मुद्दों को दूर करने में मदद करेगा? विस्तारपूर्वक मूल्यांकन कीजिए। (15अंक)

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


मुख्य परीक्षा संवर्धन हेतु पाठ्य सामग्री (नैतिकता/निबंध)


महिला सशक्तिकरण संबंधी विषय पर लिखने में उपयोग करने हेतु उदाहरण

नल्लाथम्बी कलाइसेल्वी

वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) की पहली महिला अध्यक्ष, डॉ नल्लाथम्बी कलाइसेल्वी (Nallathamby Kalaiselvi) को लिथियम-आयन बैटरी में इलेक्ट्रोड के रूप में उपयोग किए जाने वाले नए पदार्थ को विकसित करने का श्रेय दिया जाता है। यह पदार्थ लिथियम-आयन बैटरी की भंडारण क्षमता में सुधार करते हैं।

शतरंज ओलंपियाड 2022

कोनेरू हम्पी, हरिका द्रोणवल्ली, तानिया सचदेव, आर वैशाली और भक्ति कुलकर्णी – लंबे समय तक मोल्ड-ब्रेकर और युवा विलक्षणताओं का एक रमणीय मिश्रण – शतरंज ओलंपियाड 2022 के महिला वर्ग में शीर्ष खिलाड़ी थे। हरिका द्रोणावल्ली ने 9 महीने की गर्भवती होने के दौरान शतरंज ओलंपियाड पदक जीता।

इन्होंने ओलंपियाड में पदक जीतने वाली ‘पहली भारतीय महिला टीम’ के रूप में इतिहास रच दिया।

सतत विकास के लिए ‘जापान’ से सीखे जाने वाले सबक

जापान में ‘ईदो काल’ (Edo Period: 1603-1867) के लोग समय के साथ जीवन जीते थे। इस काल के लोग समय के साथ बदलते मौसम, सहेज कर राखी गयी सामग्री, और पदार्थो के पुनरुपयोग करने की जानकारी का इस्तेमाल तथा सालों तक पुनरुपयोग- उन्मुख जीवन शैली को अपनाते हुए खुशहाल जीवन यापन करते थे।

1600 के दशक की शुरुआत में, जापान के शासकों को देश में ‘ईसाई धर्म’ फ़ैल जाने का भय था, क्योंकि इसी समय में यूरोपीय मिशनरियों द्वारा देश के दक्षिणी हिस्सों में इसका प्रसार किया जा रहा था।

  • इसकी प्रतिक्रिया में, जापानी शासकों ने 1603 में जापानी द्वीपों को बाहरी दुनिया के लिए प्रभावी ढंग से बंद कर दिया, जिसके तहत जापानी लोगों को बाहर जाने की अनुमति नहीं थी और बहुत कम विदेशियों को अंदर जाने की अनुमति थी। इसे जापान की ‘ईदो काल’ के रूप में जाना जाने लगा और 1868 तक, लगभग तीन शताब्दियों तक, जापान की सीमाएं बंद रहीं।
  • इसके परिणामस्वरूप देश की अनूठी संस्कृति, रीति-रिवाज और जीवन के तरीके विकसित हुए। ‘ईदो काल’ के जीवन को अब “मंद जीवन”- जितना संभव हो उतना कम बर्बाद करने के आधार पर जीवनशैली प्रथाओं का एक संवहनीय सेट- के रूप में जाना जाता है। इस काल में, यहाँ तक कि सूर्य प्रकाश भी व्यर्थ नहीं जाता था – दैनिक गतिविधियाँ सूर्योदय से शुरू होती थीं और सूर्यास्त पर समाप्त होती थीं।

अधिक संवहनीय संस्कृति प्राप्त करने के लिए आधुनिक युग में कुछ आधुनिक गतिविधियों के साथ-साथ इन पद्धितियों को पुनः अपनाए जाने की आवश्यकता है।

उदाहरण के लिए, ज़ज़ेन (zazen), या “बैठने की स्थिति में ध्यान”, बौद्ध धर्म की प्रक्रिया है, जो लोगों को प्रकृति की संवेदनाओं का अनुभव करने के लिए शांति और शांत-स्थल बनाने में मदद कर सकती है। इन दिनों, कई शहरी मंदिरों ‘ज़ज़ेन सत्र’ प्रस्तुत किए जाते हैं।

तकनीकी-राष्ट्रवाद

संदर्भ: इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (IAMAI) की रिपोर्ट “इंटरनेट इन इंडिया” ने हाल ही में ‘तकनीकी-राष्ट्रवाद’ (Techno-Nationalism) शब्द पर प्रकाश डाला है।

परिभाषा: ‘तकनीकी-राष्ट्रवाद’ यह समझने का एक तरीका है कि प्रौद्योगिकी किसी राष्ट्र के समाज और संस्कृति को कैसे प्रभावित करती है।

उद्देश्य: इसका उद्देश्य राष्ट्रवादी एजेंडा को आगे बढ़ाने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करना है, जिसका लक्ष्य जुड़ाव की भावना और एक मजबूत राष्ट्रीय पहचान को बढ़ावा देना है।

उदाहरण:

  • चुनाव प्रचार में सोशल मीडिया का उपयोग: 2014 के चुनाव में पहली बार इंटरनेट स्ट्रीमिंग ने प्रसारण मीडिया को बाधित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 2019 के चुनावों को फेसबुक और व्हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म द्वारा निभाई गई व्यापक भूमिका द्वारा चिह्नित किया गया था।
  • इंडोनेशिया में न केवल ऑनलाइन गेमिंग ऐप्स और सेवाओं को नियंत्रित किया जा रहा है बल्कि स्वदेशी रूप से विकसित गे ‘मिंग ऐप्स’ को भी सक्रिय रूप से बढ़ावा दिया जा रहा है।
  • केन्या से लेकर ब्राजील तक सभी देश अपने-अपने लोकतंत्र की चुनावी प्रक्रियाओं को व्हाट्सएप पर वायरल फेक न्यूज और दुष्प्रचार के प्रसार से बचाने के लिए पहले से कार्रवाईयां कर रहे हैं।
  • चीन: डिजिटल निगरानी लागू की गयी है; बच्चों के लिए प्रतिबंधित ऑनलाइन गेमिंग की अनुमति दी गयी है।
  • सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित करने से लेकर डेटा प्रवाह को विनियमित करने तक, ‘तकनीकी-राष्ट्रवाद’ पश्चिमी लोकतंत्रों और पूर्वी देशों के राजनीतिक एजेंडे में समान रूप से शामिल है।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


केंद्र सरकार द्वारा राज्यों के लिए 1.16 लाख करोड़ जारी 

संदर्भ: केंद्र सरकार ने इस वित्तीय वर्ष में राज्यों को सुनिश्चित माल और सेवा कर (GST) मुआवजे की अवधि समाप्त होने के बाद, इस वित्तीय वर्ष में राज्य सरकारों की पूंजीगत व्यय क्षमताओं को आगे बढ़ाने में मदद करने के लिए धनराशि (सामान्य राशि से दोगुना) जारी की है।

केंद्र द्वारा फ्रंट-लोडेड दृष्टिकोण: राज्यों को अपने पूंजीगत व्यय को बढ़ाने के लिए, खर्च और विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए केंद्र द्वारा ‘फ्रंट-लोडेड दृष्टिकोण’ (Front-loaded approach) अपनाया गया है।

राज्यों को केंद्र से प्राप्त होने वाले राजस्व:

  • हस्तांतरण (करों में राज्यों का हिस्सा): सकल कर राजस्व (अतिरिक्त-बजटीय) से करों के राज्य के हिस्से के रूप में।
  • योजना से संबंधित अंतरण: योजना व्यय से, बजट आवंटन के आधार पर, केंद्र प्रायोजित योजनाओं के लिए।
  • वित्त आयोग अनुदान: बजट आवंटन के आधार पर अंतरण, व्यय और अन्य व्यय से राज्यों को हस्तांतरण के रूप में।
  • अन्य अंतरण: बजट आवंटन के आधार पर अन्य अनुदान या ऋण।

15वें वित्त आयोग की सिफारिश:

  • उर्ध्वाधर अंतरण (केंद्र से राज्यों के लिए): 2021-22 से शुरू होने वाली पांच साल की अवधि के लिए करों के ‘विभाज्य पूल’ में राज्यों की हिस्सेदारी 41% है।
  • क्षैतिज हस्तांतरण (राज्यों के बीच आवंटन): आयोग ने जनसांख्यिकीय प्रदर्शन के लिए 12.5%, आय के लिए 45%, जनसंख्या और क्षेत्र में प्रत्येक को 15%, वन और पारिस्थितिकी के लिए 10% और कर और वित्तीय प्रयासों के लिए 2.5% भारांकों का सुझाव दिया है।

जिला स्तर पर अल्पसंख्यकों की शिनाख़्त

संदर्भ: हाल ही में, सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जिला स्तर पर ‘अल्पसंख्यकों की शिनाख़्त’ (Recognition of Minorities) करना कानून के विपरीत है।

  • केरला शिक्षा विधेयक मामले, 1958 में सुप्रीम कोर्ट ने ब्लॉक या जिला स्तर पर ‘अल्पसंख्यकों की शिनाख़्त’ करने को खारिज कर दिया था।
  • टीएमए पाई केस, 2008 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था, कि भाषाई और धार्मिक अल्पसंख्यक, राज्य को एक इकाई मानते हुए निर्धारित किए जाते हैं, न कि राष्ट्रीय स्तर पर।

भारत में अल्पसंख्यक:

  • मान्यता: वर्तमान में, केवल केंद्र सरकार द्वारा ‘राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम’, 1992 (NCM Act, 1992) की धारा 2(c) के तहत अधिसूचित समुदायों को अल्पसंख्यक माना जाता है।
  • 2014 में मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, पारसी और जैन को अल्पसंख्यक समुदायों के रूप में अधिसूचित किया गया था।

संवैधानिक स्थिति:

  • संविधान ‘अल्पसंख्यक’ शब्द को परिभाषित नहीं करता है
  • अनुच्छेद 29 (विशिष्ट भाषा, लिपि और संस्कृति के संरक्षण का अधिकार): यह धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों, दोनों को सुरक्षा प्रदान करता है। जरूरी नहीं कि इसका दायरा केवल अल्पसंख्यकों तक ही सीमित हो।
  • अनुच्छेद 30 (अपनी पसंद के शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना और प्रशासन का अधिकार): इसके तहत सुरक्षा केवल अल्पसंख्यकों (धार्मिक या भाषाई) तक ही सीमित है।
  • अनुच्छेद 350- B: इसके तहत, भारत के राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त भाषाई अल्पसंख्यकों के लिए एक विशेष अधिकारी का प्रावधान करते हैं।

नियम 267

संदर्भ: उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने अपने विदाई भाषण में, सदस्यों से नियम 267 (Rule 267) को लागू करने की अंधाधुंध मांग के खिलाफ वकालत की। यह नियम, संसद में अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करने के लिए दिन के कामकाज को निलंबित करने की अनुमति देता है।

संबंधित मुद्दा: सदन के अन्य नियमों के निलंबन को न्यायोचित ठहराने वाले दुर्लभतम मामलों में राज्यसभा के ‘नियम 267’ का सहारा लेना चाहिए।

सदन में व्यवधान की स्थिति: 1978 के बाद से पहले 17 वर्षों में, राज्य सभा की वार्षिक उत्पादकता 100% से अधिक रही है। इसके बाद, वर्ष 2018 में सबसे कम वार्षिक उत्पादकता 40% दर्ज की गई है।

सांसदों के सामने चुनौतियां:

  • व्यवधान, सदस्यों को सदन में बोलने की अनुमति नहीं देते है, जिससे उनका बोलने का उत्साह कम हो जाता है।
  • स्थायी समितियों की बैठकों में भाग लेने वाले सदस्यों का कम प्रतिशत।
  • सही तरीके से अच्छा भाषण – अच्छी तरह से तर्क और आंकड़ों, उदाहरणों या केस स्टडी द्वारा समर्थित – देने वाले वक्ता पर शायद ही कभी पर्याप्त ध्यान दिया जाता है।
  • खबरों में सिर्फ हंगामा (अराजकता) की राजनीति सुर्खियां बटोरती है।

आवश्यकता:

पीठासीन अधिकारी अपने कक्षों में, विशेष रूप से शून्यकाल और प्रश्नकाल के लिए, बंद कमरे में कार्यवाही कर सकते हैं।

 

एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय

संदर्भ: जनजातीय मामलों के मंत्रालय द्वारा ‘एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय’ (Eklavya Model Residential Schools – EMRS) के छात्रों के साथ ‘संवाद’ (एक वर्चुअल बातचीत) का आयोजन किया गया था

‘एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों’ के बारे में:

  • ‘एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों’ की शुरुआत वर्ष 1997-98 में आवासीय विद्यालयों के रूप में दूरस्थ क्षेत्रों (उच्च आदिवासी आबादी वाले) में अनुसूचित जनजाति के छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा (मध्यम और उच्च स्तर की शिक्षा) प्रदान करने के लिए की गयी थी।
  • 50% से अधिक अनुसूचित जनजाति आबादी वाले प्रत्येक ब्लॉक और न्यूनतम 20,000 जनजातीय आबादी पर एक ‘एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय’ (EMRS) होगा।
  • प्रावधान: संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत प्रदान किए गए अनुदानों द्वारा स्थापित।
  • EMRS का परिचालन करने हेतु, नवोदय विद्यालय समिति के समान, जनजातीय कार्य मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त सोसाइटी की स्थापना की जाती है।
  • देश की कुल आबादी का 8.6% (11 करोड़) अनुसूचित जनजाति हैं।

भारत निर्वाचन आयोग द्वारा समावेशी चुनावों पर ‘वर्चुअल रीजनल फोरम’ की बैठक का आयोजन

संदर्भ:

भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) द्वारा “हमारे चुनावों को समावेशी, सुलभ और सहभागी बनाना” विषय पर ‘एशियाई क्षेत्रीय मंच’ की एक वर्चुअल बैठक की मेजबानी की गयी। क्षेत्रीय मंच की बैठक, आने वाले महीने में मेक्सिको के नेशनल इलेक्टोरल इंस्टीट्यूट द्वारा आयोजित होने वाले “चुनावी लोकतंत्र के लिए शिखर सम्मेलन” से पहले आयोजित किया गया है।

उद्देश्य: इसका उद्देश्य दुनिया भर के अंतरराष्ट्रीय संगठनों और चुनावी निकायों के बीच तालमेल पैदा करना और दुनिया में चुनावी लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए बौद्धिक और संस्थागत लामबंदी को बढ़ावा देना है।

पिछले साल, ‘लोकतंत्र के लिए पहला शिखर सम्मेलन’ संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा “देश में लोकतंत्र को नवीनीकृत करने और विदेशों में निरंकुशता का सामना करने के लिए” विषय पर आयोजित किया गया था।

लोकतंत्र के संबंध में भारत की स्थिति:

  • फ्रीडम हाउस 2021 की रिपोर्ट ने भारत को केवल “आंशिक रूप से स्वतन्त्र” (Partly Free) देश के रूप में रखा है।
  • ‘वी-डेम रिपोर्ट’ ने भारत को “चुनावी निरंकुशता” (Electoral Autocracy) बताया है।
  • ‘ग्लोबल स्टेट ऑफ डेमोक्रेसी 2021’ रिपोर्ट: भारत को 10 सबसे पीछे खिसकने -एक अधिक गंभीर और जानबूझकर लोकतांत्रिक क्षरण- वाले लोकतंत्रों में से एक की श्रेणी में शामिल किया गया था।

 

शहरी आवास योजना को 2024 तक जारी रखने की मंजूरी

संदर्भ: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी’ (PMAY -U) को 31 दिसंबर 2024 तक जारी रखने के आवास और शहरी कार्य मंत्रालय के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

‘प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी के बारे में:

सभी के लिए आवास’ भारत सरकार द्वारा राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों/केंद्रीय नोडल एजेंसियों के माध्यम से देश के शहरी क्षेत्रों में सभी पात्र लाभार्थियों को बारहमासी पक्के मकान उपलब्ध कराने के लिए कार्यान्वित किए जा रहे प्रमुख कार्यक्रमों में से एक अहम कार्यक्रम है।

  • 2015 में शुरू की गई, प्रोत्साहन के साथ किफायती आवास प्रदान करने के उद्देश्य से ‘प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी’ की मूल समय सीमा मार्च 2022 थी।
  • इसका उद्देश्य, वर्ष 2022 तक सभी के लिए आवास उपलब्ध करना था।

वस्तुस्थिति:

  • ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ की वेबसाइट के आंकड़ों के अनुसार, अब तक कुल 12.26 मिलियन घरों को मंजूरी दी गई है, जिनमें से 61.77 लाख घरों को पूरा किया जा चुका है।
  • दिसंबर 2021 में, कैबिनेट ने ग्रामीण आवास योजना, PMAY-ग्रामीण (ग्रामीण) को मार्च 2024 तक बढ़ाने को मंजूरी दी थी।

शहरी योजना चार कार्यक्षेत्रों के माध्यम से कार्यान्वित की जा रही है:

  1. संसाधन के रूप में भूमि का उपयोग करते हुए निजी विकासकर्ताओं (developers) की भागीदारी से झुग्गी-झोपड़ी में रहने वालों निवासियों का ‘स्लम पुनर्वास’।
  2. ‘क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी’ के माध्यम से दुर्बल वर्ग के लिए किफायती आवासों को बढ़ावा देना।
  3. सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों के साथ साझेदारी में किफायती आवासों का निर्माण।
  4. लाभार्थी द्वारा बनवाए जाने वाले निजी आवास के निर्माण/विस्तार के लिए सब्सिडी।

‘क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी’ घटक को ‘केंद्रीय क्षेत्र की योजना’ के रूप में लागू किया जाएगा, जबकि अन्य तीन घटकों को केंद्र प्रायोजित योजना (CSS) के रूप में लागू किया जाएगा।

 

सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) पर सहकारी समितियां

संदर्भ: सहकारी समितियों को GeM पोर्टल पर जोड़ा गया है, इससे इन समितियों को अन्य सरकारी एजेंसियों की तरह GeM पोर्टल पर खरीदारी करने की अनुमति मिल गयी है। अब तक सहकारी समितियां खुले बाजार से खरीदारी कर रही थीं।

सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM), वस्तुओं और सेवाओं की ऑनलाइन खरीद के लिए वन-स्टॉप पोर्टल है। इसे आपूर्ति और निपटान महानिदेशालय (इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्रालय) द्वारा विकसित किया गया है।

सहकारी समितियों के बारे में:

‘सहकारी समितियां’ क्या होती हैं?

  • सहकारी समिति (Cooperative Societies), संयुक्त-स्वामित्व और लोकतांत्रिक रूप से नियंत्रण के माध्यम से, अपने सामूहिक आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक आवश्यकताओं और आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए, स्वेच्छा से एकजुट हुए व्यक्तियों का एक स्वायत्त संघ होती है।
  • इन समितियों में, लाभकारिता की आवश्यकता, समिति के सदस्यों की आवश्यकताओं और समुदाय के व्यापक हितों से संतुलित होती है।

सहकारी समितियों से संबंधित संवैधानिक प्रावधान:

  • संविधान (97वां संशोधन) अधिनियम, 2011 के माध्यम से, भारत में कार्यरत सहकारी समितियों के संबंध में संविधान के भाग IXA (नगरपालिका) के ठीक बाद एक नया भाग IXB जोड़ा गया।
  • इसी संशोधन द्वारा, संविधान के भाग III के अंतर्गत अनुच्छेद 19(1)(c) में भारत के सभी नागरिकों को ‘संगम या संघ’ के साथ-साथ ‘सहकारी समिति’ बनाने का मूल अधिकार अंतःस्थापित किया गया है।
  • सहकारी समिति के ऐच्छिक गठन, स्वायत्त कार्यवाही, लोकत्रांत्रिक नियंत्रण और व्यावसायिक प्रबन्धन में वृद्धि करने हेतु, संविधान में ‘राज्य के नीति निदेशक तत्वों’ (भाग IV) के अंतर्गत एक नया अनुच्छेद 43B जोड़ा गया है।

भारत सरकार द्वारा वर्ष 2002 में ‘बहु-राज्य सहकारी समिति अधिनियम’ (Multi-State Co-operative Societies Act) लागू किया गया और सहकारी समितियों को ‘स्वायत्त, स्वतंत्र और लोकतांत्रिक संगठनों’ के रूप में प्रोत्साहित करने और इनके विकास के लिए सहयोग करने हेतु वर्ष 2002 में ‘राष्ट्रीय सहकारिता नीति भी तैयार की गई। जिससे ये सहकारी समितियां, देश के सामाजिक-आर्थिक विकास में अपनी उचित भूमिका निभा सकें।

 

संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध शासन व्यवस्था

संदर्भ: भारत ने संयुक्त राष्ट्र से कहा है कि ‘संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंध शासन व्यवस्था’ (United Nations’ sanctions regime) की विश्वसनीयता “अब तक के सबसे निम्न स्तर पर पहुंच चुकी” है। दोहरे मानकों और निरंतर राजनीतिकरण ने ‘प्रतिबंध व्यवस्था’ की विश्वसनीयता को सर्वकालिक निचले स्तर पर पहुंचा दिया है।

प्रतिबंध व्यवस्था के साथ समस्याएं:

  • दोहरे मापदंड: चीन, पाकिस्तान, अफगानिस्तान जैसे कुछ देशों और संयुक्त राष्ट्र सचिवालय द्वारा आतंकवाद के खिलाफ “चयनात्मकता” और “दोहरे मानकों” को अपनाया जा रहा है।
  • चीन: आतंकी-सूचीकरण (terror listings) पर रोक लगाने का चीन का निर्णय, पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान में तालिबान शासन के आतंकवादी कृत्यों का “महिमामंडन”। पाकिस्तान द्वारा काबुल में एक गुरुद्वारे पर हमलों के आरोपी ‘आईएसआईएल-खोरासन’ (ISIL-Khorasan) सहित अन्य आतंकवादी समूहों को आश्रय प्रदान किया जा रहा है।
  • पाकिस्तान और अफगानिस्तान आधारित ‘लश्कर-ए-तैयबा’ और ‘जैश-ए-मोहम्मद’ के शीर्ष नेतृत्व सहित UNSC द्वारा निर्दिष्ट आतंकवादी सूची में कई आतंकवादियों को जोड़ने के अपने प्रयासों पर चीन द्वारा बार-बार अवरोध और ‘तकनीकी रोक’ लगायी गयी है।
  • उदाहरण के लिए, चीन ने लश्कर-ए-तैयबा के उप प्रमुख ‘अब्दुल रहमान मक्की’ को सूचीबद्ध करने के भारत और अमेरिका के हालिया संयुक्त प्रस्ताव को विफल कर दिया।
  • आतंकवाद पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव की रिपोर्ट: मध्य और दक्षिण एशिया में खतरों पर रिपोर्ट के भाग में, केवल ISIL-K का उल्लेख किया गया है, जबकि भारत को लक्षित करने वाले संबद्ध आतंकवादी समूहों के का कोई जिक्र नहीं है।
  • पाकिस्तान: UNSC द्वारा सूचीबद्ध होने के बावजूद ‘दाऊद इब्राहिम’, आतंकवाद की ओर मुड़ने वाले ‘अपराध सिंडिकेट’ को “पड़ोसी देश” में “राज्य आतिथ्य” प्राप्त है।

पृष्ठभूमि:

  • अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट (ISIL) के खिलाफ UNSC की ‘प्रतिबंध व्यवस्था’, जिसे पहली बार 1990 के दशक के अंत में लागू किया गया था, और फिर आतंकवाद पर वैश्विक युद्ध के एक भाग के रूप में अद्यतन किया गया था।
  • UNSC 1267 समिति: इसकी स्थापना तालिबान-नियंत्रित अफगानिस्तान पर लगाए गए प्रतिबंधों के उपायों के कार्यान्वयन की निगरानी के उद्देश्य से की गई थी, किंतु बाद में व्यक्तियों के साथ-साथ संगठनों को शामिल करने के लिए इसका दायरा बढ़ा दिया गया है।

आवश्यकता:

बिना कोई कारण बताए ‘लिस्टिंग अनुरोधों’ पर रोक लगाने और ब्लॉक करने की परंपरा होनी चाहिए। जब अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के खिलाफ इस सामूहिक लड़ाई की बात आती है तो UNSC के सभी सदस्यों को जल्द से जल्द एक स्वर में एक साथ आवाज उठानी चाहिए।

प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्र

संदर्भ: संयुक्त भारत-अमेरिका अनुसंधान परियोजनाओं को ‘प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्रों’ (Technology Innovation Hubs – TIH)  के माध्यम से लागू किया जाएगा।

‘प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्रों’ के बारे में:

  • ‘प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्र’ ‘राष्ट्रीय अंतर्विषयक साइबर-भौतिक प्रणाली मिशन’ (National Mission on Interdisciplinary Cyber-Physical Systems: NM-ICPS) के अंतर्गत आते है, और इनका उद्देश्य अपेक्षित बुनियादी ढांचा (टेस्टबेड और डेटा सेट) प्रदान करना, सहयोग को सक्षम करना (जैसेकि एआई और वायरलेस पर) और विनिमय कार्यक्रमों को प्रोत्साहित करना है।
  • NM-ICPS को 2018 में 5 साल की अवधि के लिए अकादमिक-उद्योग-सरकार सहयोग को सक्षम करने और CPS कार्यान्वयन के लिए तकनीकी सहायता प्रदान करने के लिए लॉन्च किया गया था।
  • NM-ICPS के अंतर्गत- प्रौद्योगिकी विकास; मानव संसाधन और कौशल विकास; उद्यमिता; नवाचार और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग- गतिविधियां शामिल हैं।

 डिजिटल कॉमर्स के लिए ओपन नेटवर्क

संदर्भ: माइक्रोसॉफ्ट सरकार के नेतृत्व वाले ‘डिजिटल कॉमर्स के लिए ओपन नेटवर्क’ (Open Network for Digital Commerce – ONDC) में शामिल होगा।

  • उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) द्वारा लॉन्च किए गए ONDC का उद्देश्य डिजिटल कॉमर्स का विकेंद्रीकरण और लोकतंत्रीकरण करना है। यह देश के किसी भी हिस्से में, अमेज़ॅन और फ्लिपकार्ट की भांति, छोटे व्यापारियों और ‘मॉम-एंड-पॉप’ स्टोर को उपभोक्ताओं तक पहुंचने की अनुमति देगा।
  • यह एक ओपन-सोर्स प्लेटफॉर्म है और ‘डिजिटल पेमेंट में यूपीआई’ की तरह ही ‘ई-कॉमर्स’ में काम करेगा। इस प्लेटफॉर्म का समन्वय ‘भारतीय गुणवत्ता परिषद’ द्वारा प्रदान किया जाएगा।
  • ONDC की आवश्यकता: भारत के ई-कॉमर्स में वैश्विक कारोबारियों का दबदबा बढ़ रहा है, जिससे छोटे कारोबारियों का प्रवेश मुश्किल हो गया है। ओएनडीसी की नजर एक ऑपरेटर-संचालित प्लेटफॉर्म-केंद्रित मॉडल से एक सुविधा-संचालित ‘इंटरऑपरेबल ओपन नेटवर्क मॉडल’ में बदलने पर है।

 ब्लू बॉन्ड

संदर्भ: हाल ही में, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने ‘संधारणीय वित्त’ के लिए ‘ब्लू बॉन्ड’ (Blue Bonds) प्रस्तावित किए हैं।

‘ब्लू बॉन्ड’ के बारे में

‘ब्लू बॉन्ड’ (Blue Bonds), समुद्र और संबंधित पारिस्थितिक तंत्र की रक्षा हेतु परियोजनाओं को वित्तपोषित करने के लिए जारी किए जाने वाले ‘संधारणीयता बांड’ होते हैं।

  • यह बांड, संवहनीय मत्स्य पालन, प्रवाल भित्तियों और अन्य संवेदनशील पारिस्थितिक तंत्रों की सुरक्षा, अथवा प्रदूषण और अम्लीकरण को कम करने वाली परियोजनाओं के लिए जारी किए जा सकते हैं।
  • यह एसडीजी 14 (जल के नीचे जीवन) की दिशा में प्रगति को उत्प्रेरित करेगा।
  • सतत विकास के लिए संयुक्त राष्ट्र महासागर विज्ञान दशक (2021-2030) घोषित।
  • पहला ब्लू बॉन्ड: 2018 में सेशेल्स गणराज्य, ‘सॉवरेन ब्लू बॉन्ड’ जारी किया गया था।

इसी तरह अन्य समान प्रकार के बांड: ग्रीन बॉन्ड (सकारात्मक पर्यावरणीय और/या जलवायु लाभ वाली परियोजनाओं को निधि देने के लिए उपयोग किया जाता है)।

 

ईकोस्ट्रेस

संदर्भ: नासा का इको सिस्टम (ECOsystem) और स्पेस स्टेशन पर ‘स्पेसबोर्न थर्मल रेडियोमीटर एक्सपेरिमेंट’ / ईकोस्ट्रेस (Spaceborne Thermal Radiometer Experiment on Space Station – ECOSTRESS) वनाग्नि के पीछे के पैटर्न और कारणों को समझने में मदद कर रहा है।

विवरण:

  • ईकोस्ट्रेस (ECOSTRESS), वनस्पति द्वारा पानी के उपयोग की प्रभावशीलता, पानी के तनाव और गर्म जलवायु के अनुकूल होने की उसकी क्षमता का अध्ययन करने के लिए एक ‘बहु तरंगदैर्ध्य इमेजिंग स्पेक्ट्रोमीटर’ है। पौधों द्वारा पानी छोड़ने की दर को मापकर, आने वाली वनाग्नि की तीव्रता को मापा जा सकता है।
  • स्पेक्ट्रोमीटर, एक ऑप्टिकल उपकरण होता है जिसका उपयोग विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम के एक विशिष्ट हिस्से पर प्रकाश के गुणों को मापने के लिए किया जाता है।

 

विश्व शेर दिवस

संदर्भ: प्रतिवर्ष 10 अगस्त को ‘विश्व शेर दिवस’ (World Lion’s Day) के रूप में मनाया जाता है।

महत्व: पांच दशकों के दौरान, वैश्विक शेरों की आबादी में लगभग 95% की कमी आई है, जिससे इसके संरक्षण की दिशा में काम करने की आवश्यकता है। ‘विश्व शेर दिवस’ शेरों के संरक्षण पर जोर देता है।

यह दिवस शेरों के सामने आने वाले खतरों के बारे में जन जागरूकता बढ़ाने, उनके प्राकृतिक आवास की रक्षा करने और अधिक आवासों का निर्माण करने पर बल देता है।

शेर के बारे में:

वैज्ञानिक नाम: पैंथेरा लियो (Panthera Leo)

  • बाघों के बाद ‘शेर’ दूसरी सबसे बड़ी बिल्लियाँ हैं। वे समूहों में रहते हैं।
  • शेर को दो उप-प्रजातियों-अफ्रीकी शेर (पैंथेरा लियो) और एशियाई शेर (पैंथेरा लियो पर्सिका)- में विभाजित किया गया है।
  • ‘शेर’ एक शीर्ष और कीस्टोन शिकारी है।
  • आईयूसीएन स्थिति: एशियाई शेर: लुप्तप्राय, अफ्रीकी शेर: संवेदनशील।
  • भारत: गिर वन (गुजरात) अफ्रीका के बाहर शेरों की एकमात्र जंगली आबादी का घर है। भारत में शेरों की आबादी लगातार बढ़ रही है, 2015 और 2020 के बीच इनकी संख्या 523 से बढ़कर 674 हो गयी थी।
  • नर और मादा में अंतर: नर के सिर के चारों ओर घने बाल होते हैं जबकि मादा के पास नहीं होते हैं।
  • एशियाई और अफ्रीकी शेर के बीच अंतर: नर एशियाई शेर का ‘अयाल’ (mane) अर्थात शेर आदि जानवरों के गले पर बाल, अफ्रीकी शेर के पूर्ण अयाल की तुलना में अपेक्षाकृत छोटा, विरल और गहरा होता है।

 

बटरफ्लाई माइंस

  • यूनाइटेड किंगडम के रक्षा मंत्रालय ने यूक्रेन में चल रहे युद्ध के अपने खुफिया आकलन में, डोनेट्स्क और क्रामाटोर्स्क में रूसी सेना द्वारा पीएफएम -1 श्रृंखला ‘बटरफ्लाई माइन्स’ (Butterfly Mines) के संभावित उपयोग पर चेतावनी दी है।
  • PFM-1 और PFM-1S दो प्रकार की ‘सैनिक-रोधी’ बारूदी सुरंगें हैं जिन्हें आमतौर पर ‘बटरफ्लाई माइंस’ या ‘ग्रीन पैरट’ कहा जाता है। ये नामकारण ‘सुरंगों के आकार और रंग के आधार पर किए गए हैं। PFM-1 और PFM-1S सुरंगों के बीच मुख्य अंतर यह है कि PFM-1S एक स्वं-विस्फोटक तंत्र के साथ आता है जो एक से 40 घंटों के भीतर सक्रिय हो जाता है।

लंपी त्वचा रोग के लिए स्वदेशी टीका

संदर्भ:

केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री ने पशुओं को गाँठदार त्वचा रोग या ‘लंपी त्वचा रोग’ (Lumpy skin disease – LSD) से बचाने के लिए स्वदेशी वैक्सीन लम्पी- प्रो वैक-इंड (Lumpi-ProVacInd) को लांच किया है।

इस वैक्सीन को राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र, हिसार (हरियाणा) द्वारा ‘भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान’, इज्जतनगर (बरेली) के सहयोग से विकसित किया गया है।

लंपी त्वचा रोग:

गाँठदार त्वचा रोग या ‘लंपी त्वचा रोग’ (Lumpy skin disease – LSD) मवेशियों में होने वाला एक संक्रामक रोग है जो ‘पॉक्सविरिडे परिवार’ (family Poxviridae) के वायरस के कारण होता है, जिसे ‘नीथलिंग वायरस’ भी कहा जाता है।

एक वायरल बीमारी है, जिससे गोवंशीय पशु और भैंस दीर्घकालिक रुग्णता का शिकार हो जाते है।

  • लक्षण: यह पशुओं के पूरे शरीर में विशेष रूप से सिर, गर्दन, अंगों, थन (मादा मवेशी की स्तन ग्रंथि) और जननांगों के आसपास दो से पाँच सेंटीमीटर व्यास की गाँठ के रूप में दिखाई देता है। यह गाँठ बाद में धीरे-धीरे एक बड़े और गहरे घाव का रूप ले लेती है।
  • संचरण: यह बीमारी मच्छरों, मक्खियों और जूँओं के साथ-साथ पशुओं की लार तथा दूषित जल एवं भोजन के माध्यम से फैलती है।
  • लंपी त्वचा रोग’ ( LSD) वायरस, बिना किसी कीट वाहक की आवश्यकता के सीधे संचरण के साथ, संभवतः साँस द्वारा और निश्चित रूप से संक्रमित सामग्री, संक्रमित व्यक्तियों [मनुष्य से मनुष्य], और प्रयोगशाला से प्राप्त संक्रमण के सीधे संपर्क में आने से मनुष्यों को संक्रमित करने में सक्षम है।