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[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 04 August 2022

विषयसूची

सामान्य अध्ययन-II

  1. केंद्र सरकार ने ‘डेटा संरक्षण विधेयक’ वापस लिया
  2. राज्यसभा में डोपिंग रोधी विधेयक पारित
  3. राज्य सरकार के मंत्रियों की विदेश यात्राओं संबंधी प्रावधान
  4. भारत द्वारा आतंकवाद-रोध पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् की बैठक की मेजबानी

सामान्य अध्ययन-III

  1. राज्यों को DIN को डिजिटल रूप से जारी करने की सलाह

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

  1. केंद्र सरकार द्वारा गन्ने की फसल के ‘उचित एवं लाभकारी मूल्य’ में वृद्धि
  2. जलवायु परिवर्तन संबंधी ‘राष्ट्रीय स्तर पर अद्यतन निर्धारित योगदान’ को मंजूरी
  3. भारत के मुख्य नयायाधीश से उनके उत्तराधिकारी के संबंध में सिफारिश की मांग
  4. ‘किसान उत्पादक संगठनों’ का गठन

 


सामान्य अध्ययनII


 

विषय: संसद और राज्य विधायिका- संरचना, कार्य, कार्य-संचालन, शक्तियाँ एवं विशेषाधिकार और इनसे उत्पन्न होने वाले विषय।

केंद्र सरकार ने ‘डेटा संरक्षण विधेयक’ वापस लिया

नोट: यूपीएससी ‘डेटा संरक्षण बिल’ और ‘आईटी अधिनियम 2000’ आदि के प्रावधानों के बारे में पूछ सकता है।

संदर्भ:

हाल ही में, केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री ने लोकसभा में ‘निजी डेटा संरक्षण विधेयक’, 2019 (Personal Data Protection Bill, 2019) को वापस लेने की घोषणा की है।

  • केंद्रीय मंत्री ने कहा है, कि सरकार ने विधेयक पर गठित ‘संयुक्त संसदीय समिति’ (Joint Committee of Parliament – JCP) द्वारा दिए गए सुझावों के संदर्भ में व्यापक कानूनी ढांचे के उपयुक्त एक नया विधेयक लाने का फैसला किया है।
  • निजी डेटा संरक्षण विधेयक पर गठित ‘संयुक्त संसदीय समिति’ ने दिसंबर 2021 में विधेयक में कुल 93 सिफारिशों और 81 संशोधनों के साथ 542-पृष्ठ की रिपोर्ट प्रस्तुत की थी।
  • इसके अलावा, पूर्व केंद्रीय मंत्री की अध्यक्षता वाले पैनल ने इस विधेयक में लगभग 97 सुधारों की सिफारिश की थी।
  • सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति बी एन श्रीकृष्ण की अध्यक्षता में वर्ष 2018 में गठित एक पैनल द्वारा ‘डेटा संरक्षण विधेयक’ तैयार किया गया है।

संयुक्त संसदीय समिति (JCP) की सिफारिशें:

‘संयुक्त संसदीय समिति’ ने श्रीकृष्ण पैनल द्वारा अंतिम रूप दिए गए विधेयक में 81 संशोधनों का प्रस्ताव रखा है और 12 सिफारिशें की हैं:

  • व्यापक डेटा सुरक्षा: ‘गैर-निजी डेटा’ (non-personal data) पर चर्चा को शामिल करने के लिए, विधेयक के अधिदेश में विस्तार करके इसके अधिदेश को ‘निजी डेटा सुरक्षा’ (Personal Data Protection) से ‘व्यापक डेटा सुरक्षा’ (Broader Data Protection) में परिवर्तित किया जाए।
  • सोशल मीडिया का विनियमन: सोशल मीडिया कंपनियों के विनियमन जैसे मुद्दों पर परिवर्तन।
  • विश्वसनीय हार्डवेयर: अन्य बातों के अलावा, स्मार्टफ़ोन में केवल “विश्वसनीय हार्डवेयर” का उपयोग किया जाना चाहिए।
  • सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुरूप डेटा सुरक्षा: नया विधेयक ‘संयुक्त संसदीय समिति’ द्वारा अनुशंसित डेटा सुरक्षा के व्यापक विचारों को शामिल करेगा, और 2017 के सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले के अनुरूप होगा जिसमें अदालत ने ‘निजता’ को मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता दी थी।
  • कंटेंट पब्लिशर्स के रूप में सोशल मीडिया: ‘संयुक्त संसदीय समिति’ की रिपोर्ट में यह भी प्रस्ताव किया गया है कि सोशल मीडिया कंपनियां जो मध्यस्थों के रूप में काम नहीं करती हैं, उन्हें ‘कंटेंट पब्लिशर्स’ के रूप में माना जाना चाहिए, और उन्हें अपने प्लेटफ़ॉर्म पर होस्ट किए किए गयी सामग्री के लिए उत्तरदायी समझा जायेगा।
  • गैर-निजी डेटा: ‘संयुक्त संसदीय समिति’ (जेसीपी) ने विधेयक में ‘गैर-निजी डेटा’ (Non-Personal Data) को शामिल करने की भी सिफारिश की थी। अपने सबसे बुनियादी रूप में, ‘गैर-निजी डेटा’ एक ऐसे डेटा का सेट होता है जिसमें व्यक्तिगत रूप से पहचान योग्य जानकारी नहीं होती है।

डेटा संरक्षण विधेयक में ‘संयुक्त संसदीय समिति’ की निम्नलिखित कुछ सिफारिशों को रद्द कर दिया जाएगा:

  • भारत की सीमाओं के भीतर “विश्वसनीय हार्डवेयर” और कुछ प्रकार के निजी डेटा का स्थानीय भंडारण शामिल करना। इसके बजाय, इसमें इन विचारों को ‘इंटरनेट पारिस्थितिकी तंत्र’ के बड़े ढांचे में शामिल किया जाएगा, जो सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की जगह लेगा।
  • डेटा स्थानीयकरण के दृष्टिकोण से निजी डेटा के वर्गीकरण को समाप्त किया जाएगा: नया विधेयक, डेटा स्थानीयकरण के दृष्टिकोण से निजी डेटा के वर्गीकरण को भी समाप्त कर सकता है, और इस वर्गीकरण का उपयोग केवल किसी इकाई द्वारा व्यक्ति के निजी डेटा से छेड़छाड़ की भरपाई के लिए किया जा सकता है।

इंस्टा लिंक्स:

डेटा सुरक्षा विधेयक

अभ्यास प्रश्न:

डेटा संरक्षण विधेयक के प्रावधानों का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। डेटा संरक्षण विधेयक पर न्यायमूर्ति बी एन श्रीकृष्ण समिति द्वारा सुझाए गए परिवर्तनों का उल्लेख कीजिए।

स्रोत: द हिंदू, इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: संसद और राज्य विधायिका- संरचना, कार्य, कार्य-संचालन, शक्तियाँ एवं विशेषाधिकार और इनसे उत्पन्न होने वाले विषय।

राज्यसभा में ‘डोपिंग रोधी विधेयक’ पारित

(नोट: यूपीएससी ‘डोपिंग रोधी बिल’ के प्रावधानों और ‘एथलीटों आदि के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों’ के बारे में पूछ सकता है।)

संदर्भ:

हाल ही में, संसद ने ‘राष्ट्रीय डोपिंग रोधी विधेयक’ (National Anti-Doping Bill) को ध्वनिमत से सर्वसम्मति से पारित कर दिया।

  • इस विधेयक का उद्देश्य, खेल में ‘राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी’ (National Anti-Doping Agency – NADA) और ‘राष्ट्रीय डोप परीक्षण प्रयोगशाला’ के कामकाज हेतु एक वैधानिक ढांचा प्रदान करना है।
  • युवा कार्य और खेल मंत्री के अनुसार, भारत अब ‘कानून’ और ‘डोप परीक्षण प्रयोगशाला’ रखने वाले अमेरिका, चीन, फ्रांस या ऑस्ट्रेलिया, जापान, दक्षिण कोरिया जैसे देशों के समूह में शामिल हो जाएगा।

प्रमुख प्रावधान:

डोपिंग पर प्रतिबंध: यह विधेयक एथलीट्स, एथलीट्स के सपोर्ट कर्मचारियों और अन्य लोगों को खेलों में डोपिंग से प्रतिबंधित करता है।

राष्ट्रीय एंटी-डोपिंग एजेंसी (NADA): विधेयक में ‘नाडा’ (NADA) को अपनाई जाने वाली अनुशासनात्मक प्रक्रियाओं और निरीक्षण, नमूना संग्रह और साझा करने और सूचना के मुक्त प्रवाह की शक्तियां प्रदान की गयी हैं।

उल्लंघन करने का परिणाम: अगर कोई एथलीट या एथलीट का सपोर्ट कर्मचारी एंटी-डोपिंग नियमों का उल्लंघन करता है तो उसके निम्नलिखित परिणाम हो सकते हैं:

  • परिणाम डिस्क्वालिफाई हो सकते हैं जिसमें मेडल, प्वाइंट्स और पुरस्कार को जब्त करना शामिल है,
  • एक निर्दिष्ट अवधि तक किसी प्रतिस्पर्धा या आयोजन में भाग नहीं ले पाना,
  • वित्तीय प्रतिबंध, और
  • अन्य परिणाम, जिन्हें निर्दिष्ट किया जा सकता है।

डोपिंग रोधी नियमों की योजना बनाना, निगरानी करना और उन्हें लागू करना: विधेयक में ‘नाडा’ को एंटी-डोपिंग गतिविधियों की योजना बनाने, उन्हें लागू करने और उनकी निगरानी करने, तथा एंटी-डोपिंग के नियमों के उल्लंघन की जांच करने, और एंटी-डोपिंग संबंधी शोध को बढ़ावा देने का दायित्व सौंपा गया है।

‘डोपिंग पर यूनेस्को कन्वेंशन’ के अनुरूप: इस विधेयक में,  खेलों में ‘संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक तथा सांस्कृतिक संगठन’ / यूनेस्को (UNESCO) के अंतर्राष्ट्रीय अभिसमय को प्रभावी बनाने और ऐसे अन्य दायित्वों और प्रतिबद्धताओं के अनुपालन का भी प्रयास किया गया है।

विधेयक से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दे:

  • नाडा (NADA) के महानिदेशक: महानिदेशक की योग्यताएं विधेयक में निर्दिष्ट नहीं की गयी हैं और इन्हें नियमों के माध्यम से अधिसूचित होने के लिए छोड़ दिया गया है।
  • केंद्र सरकार दुर्व्यवहार या अक्षमता या “ऐसे किसी अन्य आधार” के आधार पर महानिदेशक को पद से हटा सकती है।
  • इन प्रावधानों को केंद्र सरकार के विवेक पर छोड़ने से महानिदेशक की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है।
  • पद से हटाने की शक्ति: विधेयक के तहत, बोर्ड के पास अनुशासन पैनल और अपील पैनल के सदस्यों को उन आधारों पर हटाने का अधिकार है जो विनियमों द्वारा निर्दिष्ट किए जाएंगे और विधेयक में निर्दिष्ट नहीं हैं।
  • इसके अलावा, उन्हें सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया। यह इन पैनलों के स्वतंत्र कामकाज को प्रभावित कर सकता है।
  • WADA के अधिदेश के विरुद्ध: यह ‘विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी’ (WADA) के इस आदेश के भी खिलाफ है कि ऐसे निकायों को अपने संचालन में स्वतंत्र होना चाहिए।

राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी:

  • ‘राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी’ (National Anti-Doping Agency – NADA) भारत में डोप मुक्त खेलों के लिए एक अधिदेश के साथ, 24 नवंबर, 2005 को ‘सोसायटी पंजीकरण अधिनियम’, 1860 के तहत एक पंजीकृत सोसायटी के रूप में स्थापित किया गया था।
  • इसका मुख्य उद्देश्य ‘विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी’ (वाडा) कोड के अनुसार, डोपिंग रोधी नियमों को लागू करना, डोप नियंत्रण कार्यक्रमों को विनियमित करना, शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा देना और डोपिंग और इसके दुष्प्रभावों के बारे में जागरूकता पैदा करना है।

NADA के पास निम्नलिखित आवश्यक अधिकार और जिम्मेदारी है:

  • डोपिंग नियंत्रण में योजना, समन्वय, कार्यान्वयन, निगरानी और सुधार की वकालत करना।
  • अन्य प्रासंगिक राष्ट्रीय संगठनों, एजेंसियों और अन्य डोपिंग रोधी संगठनों आदि के साथ सहयोग करना।

विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी (WADA):

नवंबर 1999 में ‘अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति’ के अधीन ‘’विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी’ (World Anti-Doping Agency – WADA) की स्थापना की गई थी।

  • वाडा (WADA) को खेल में डोपिंग के खिलाफ यूनेस्को अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन (2005) द्वारा मान्यता प्राप्त है।
  • वाडा की प्राथमिक भूमिका, सभी खेलों और देशों में डोपिंग रोधी नियमों का विकास, सामंजस्य और समन्वय करना है।
  • वाडा, ‘विश्व डोपिंग रोधी संहिता’ (WADA Code) और उसके मानकों के उचित कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने, डोपिंग की घटनाओं की जांच करने, डोपिंग पर शोध करने और खिलाड़ियों और संबंधित कर्मियों को डोपिंग रोधी नियमों के बारे में शिक्षित करने के द्वारा अपने कार्य निष्पादित करती है।

अभ्यास प्रश्न:

खेल उपलब्धि के मामले में भारत का स्थान बहुत ऊंचा नहीं है, लेकिन डोपिंग के आरोपी एथलीटों की संख्या विषम रूप से अधिक है। परीक्षण कीजिए और डोपिंग खतरे से निपटने के लिए संभावित समाधानों पर चर्चा कीजिए। (250 शब्द)

स्रोत: लाइव मिंट

 

विषय: संसद और राज्य विधायिका- संरचना, कार्य, कार्य-संचालन, शक्तियाँ एवं विशेषाधिकार और इनसे उत्पन्न होने वाले विषय।

राज्य सरकार के मंत्रियों की विदेश यात्राओं संबंधी प्रावधान

(नोट: यूपीएससी राज्यपाल की शक्तियों, मंत्रियों द्वारा विदेश यात्रा के लिए अनुमोदन के तरीके आदि के बारे में पूछ सकता है।)

संदर्भ:

दिल्ली के उपराज्यपाल ने, हाल ही में, मुख्यमंत्री को सिंगापुर में ‘विश्व शहरों के शिखर सम्मेलन’ में भाग नहीं लेने की सलाह दी, क्योंकि यह ‘शिखर सम्मेलन’ विशेष रूप से “शहरों के महापौरों” के लिए आयोजित किया गया था।

  • अब, राज्य के परिवहन मंत्री, जिन्होंने लंदन की आधिकारिक यात्रा के लिए राजनीतिक मंजूरी मांगी थी, ने राज्य सरकार के मंत्रियों की निजी विदेश यात्राओं के लिए केंद्र द्वारा यात्रा मंजूरी की आवश्यकता को रद्द करने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया है।
  • उन्होंने मुख्यमंत्रियों और अन्य राज्य सरकार के सदस्यों के आधिकारिक विदेश दौरों के लिए मंजूरी के संबंध में उचित दिशा-निर्देश तैयार करने की मांग भी की है।

अनुमोदन की आवश्यकता से संबंधित प्रावधान:

  • विदेश मंत्रालय गृह मंत्रालय, वित्त मंत्रालय और केंद्रीय प्रशासनिक मंत्रालय से मंजूरी: 16 अगस्त, 1982 को कैबिनेट सचिवालय द्वारा “राज्य सरकार और केंद्र शासित प्रदेशों के मंत्रियों और राज्य सरकार के अधिकारियों की विदेश यात्रा के संबंध में दिशानिर्देश” शीर्षक से एक ‘कार्यालय ज्ञापन’ जारी किया गया था। इसमे कहा गया था कि, राज्य सरकारों के सदस्यों को अपनी आधिकारिक क्षमता में विदेश यात्राओं के लिए विदेश मंत्रालय (MEA), गृह मंत्रालय, वित्त मंत्रालय और केंद्रीय प्रशासनिक मंत्रालय से मंजूरी लेना आवश्यक होगा।
  • वित्त मंत्रालय द्वारा जारी किए जाने वाले अंतिम आदेश: कैबिनेट सचिवालय ने 3 सितंबर, 2004 को एक और आदेश जारी किया, जिसमें इस प्रावधान को संशोधित किया गया था और इसके लिए ‘अंतिम आदेश’ वित्त मंत्रालय द्वारा जारी किए जाने को अनिवार्य कर दिया गया।
  • 2 नवंबर 2004 के निम्नलिखित निर्देश में यह निर्धारित किया गया था कि मुख्यमंत्रियों को आधिकारिक यात्रा से पहले प्रधान मंत्री कार्यालय से और अनुमोदन लेना आवश्यक होगा।
  • राजनीतिक मंजूरी की अनिवार्यता: 26 अगस्त, 2010 को, एक और कार्यालय ज्ञापन में, राज्य सरकारों के मंत्रियों की निजी यात्राओं से पहले राजनीतिक मंजूरी अनिवार्य कर दी गयी, जिसे 6 मई, 2015 को एक अन्य आदेश के माध्यम से पुनः दोहराया गया।

याचिका दायर करने का आधार:

  • निजता का अधिकार: याचिका में तर्क दिया गया है कि राज्य सरकार के मंत्रियों की व्यक्तिगत विदेश यात्राओं के लिए विदेश मंत्रालय से राजनीतिक मंजूरी की आवश्यकता उनके संवैधानिक पद की निजता और गरिमा के अधिकार का उल्लंघन करती है।
  • उपराज्यपाल के अधिकार क्षेत्र से बाहर: प्रस्तावित सिंगापुर यात्रा के खिलाफ सलाह देने वाला उपराज्यपाल का “अदिनांकित” पत्र (Undated letter), उपराज्यपाल के पद के क्षेत्राधिकार से बाहर है।
  • सत्ता का मनमाने ढंग से गैर-प्रयोग (Arbitrary non-exercise of power): मुख्यमंत्री की सिंगापुर यात्रा सहित आधिकारिक विदेश यात्राओं के लिए मंजूरी को प्रभावी ढंग से रद्द करने के लिए “सकल बिलंब” का उपयोग, ” सत्ता का मनमाने ढंग से गैर-प्रयोग” है।
  • मनमानापन और अनियंत्रित विवेक के दोष से पीड़ित: आधिकारिक यात्राओं के लिए मंजूरी पर संबंधित कार्यालय ज्ञापन के कार्यान्वयन का तरीका “मनमानापन और अनियंत्रित विवेक के दोष से ग्रस्त है”।
  • राष्ट्रीय हित और सुशासन के खिलाफ: इसमें यह भी कहा गया है कि यात्रा मंजूरी कार्यालय ज्ञापन का “मनमाना और मनमाना कार्यान्वयन” राष्ट्रीय हित और सुशासन के खिलाफ है, और अनुच्छेद 21 के तहत गारंटी के अनुसार विदेश यात्रा करने के अधिकार को प्रभावित करता है।

इंस्टा लिंक्स:

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सरकार (GNCTD) संशोधन अधिनियम, 2021

अभ्यास प्रश्न:

क्या आपको लगता है कि भारत का संविधान शक्तियों के कठोर पृथक्करण के सिद्धांत को स्वीकार नहीं करता है बल्कि यह ‘चेक एंड बैलेंस’ के सिद्धांत पर आधारित है? समझाएं। (यूपीएससी 2019)

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

भारत द्वारा आतंकवाद-रोध पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् की बैठक की मेजबानी

नोट: यूपीएससी ‘संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद्’ के स्थायी सदस्यों, अस्थाई सदस्यता के वितरण आदि के संबंध में प्रश्न पूछ सकता है।

संदर्भ:

भारत, पहली बार, अक्टूबर में दिल्ली और मुंबई में आतंकवाद पर एक विशेष बैठक के लिए चीन, रूस और संयुक्त राज्य अमेरिका सहित ‘संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद’ (UNSC) के सभी 15 देशों के राजनयिकों और अधिकारियों की मेजबानी करेगा।

अधिकारियों के अनुसार- 2022 में ‘आतंकवाद विरोधी समिति’ (Counter-Terrorism Committee – CTC) की बैठक की अध्यक्षता भारत यूएनएससी के सदस्य के रूप में कर रहा है। इस बैठक में विशेष रूप से आतंकवाद के वित्तपोषण, साइबर खतरों और ड्रोन के उपयोग जैसी चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

 

महत्वपूर्ण बिंदु:

  • पाकिस्तान और अफगानिस्तान से सीमा पार खतरे: भारत द्वारा बैठक में पाकिस्तान और अफगानिस्तान से सीमा पार खतरों को उठाए जाने की उम्मीद है। यह बैठक, भारत द्वारा UNSC (2021-22) के निर्वाचित सदस्य के रूप में अपना कार्यकाल पूरा करने से दो महीने पहले आयोजित की जाएगी।
  • अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक अभिसमय: इसके अलावा, भारत संयुक्त राष्ट्र के सदस्यों पर ‘अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद पर एक व्यापक अभिसमय’ (पहली बार 1996 में प्रस्तावित) को अपनाने के लिए जोर दे रहा है, इनको भी बैठक के दौरान उठाए जाने की संभावना है।
  • आतंकवाद का शिकार: यह कार्यक्रम, आतंकवाद के शिकार तथा वैश्विक आतंकवाद विरोधी प्रयासों में सबसे अग्रणी देश के रूप में भारत की भूमिका को प्रदर्शित करेगा।
  • UNSC के अध्यक्ष के रूप में भारत: भारत में आयोजित होने वाली ‘आतंकवाद विरोधी समिति’ (CTC) की बैठक, दिसंबर में प्रधान मंत्री द्वारा न्यूयॉर्क की संभावित यात्रा का मार्ग प्रशस्त कर सकती है, जहाँ भारत पूरे महीने UNSC का अध्यक्ष रहेगा।

महत्वपूर्ण क्षेत्र: इस विशेष बैठक में विशेष रूप से निम्नलिखित तीन महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा:

  1. उभरती हुई प्रौद्योगिकियों में तीव्र विकास;
  2. सदस्य राज्यों द्वारा प्रौद्योगिकियों का बढ़ता उपयोग (सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी उद्देश्यों सहित);
  3. आतंकवाद के उद्देश्यों के लिए प्रौद्योगिकियों के दुरुपयोग का बढ़ता खतरा, अर्थात्: इंटरनेट और सोशल मीडिया; आतंकवाद वित्तपोषण, और मानवरहित हवाई प्रणाली।

इंस्टा लिंक्स:

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद

अभ्यास प्रश्न:

उत्पीड़ित और हाशिए पर पड़े राष्ट्रों के नेता के रूप में भारत की लंबे समय से चली आ रही छवि, उभरती वैश्विक व्यवस्था में अपनी नई भूमिका के कारण गायब हो गई है। चर्चा कीजिए।(यूपीएससी 2019)

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।

राज्यों को DIN को डिजिटल रूप से जारी करने की सलाह

संदर्भ:

उच्चतम न्यायालय ने भारत संघ/जीएसटी परिषद को ‘अप्रत्यक्ष कर प्रशासन’ में ‘दस्तावेज़ पहचान संख्या’ (Document Identification Number – DIN) के इलेक्ट्रॉनिक (डिजिटल) रूप से जारी करने संबंधी प्रणाली के कार्यान्वयन के संबंध में राज्यों को ‘सलाह’ (एडवाइजरी) जारी करने का निर्देश दिया है।

  • केरल और कर्नाटक राज्यों में यह पहले ही लागू है।
  • अदालत ने कहा है, कि केंद्र सरकार के एक निर्णय के मुताबिक ‘केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड’ (CBDT) की दस्तावेज़ पहचान संख्या’ (DIN) प्रणाली को लागू किया गया था और इसके अनुसार, 1 अक्टूबर, 2019 से CBDT के प्रत्येक पत्र-व्यवहार में एक DIN होना आवश्यक है।

 

महत्वपूर्ण बिंदु:

  • न्यायमूर्ति एमआर शाह की अध्यक्षता में अदालत की एक पीठ ने राज्यों को “राज्य कर अधिकारियों करदाताओं और अन्य संबंधित व्यक्तियों को भेजे जाने वाले सभी पत्रकों के लिए ‘इलेक्ट्रॉनिक (डिजिटल) रूप से ‘दस्तावेज़ पहचान संख्या’ (DIN) को जारी करने संबंधी प्रणाली’ लागू करने पर विचार करने के लिए कहा है, ताकि ‘अप्रत्यक्ष कर प्रशासन’ में जल्द से जल्द पारदर्शिता और जवाबदेही लायी जा सके।
  • जीएसटी परिषद के लिए निर्देश: शीर्ष अदालत में दायर याचिका में राज्यों को डीआईएन प्रणाली के कार्यान्वयन के संबंध में नीतिगत निर्णय पर विचार करने और जीएसटी परिषद को निर्देश देने की मांग की गई थी।
  • जीएसटी के कार्यान्वयन के मद्देनजर और संविधान के अनुच्छेद 279ए के अनुसार, जीएसटी परिषद को जीएसटी से संबंधित किसी भी मामले पर राज्यों को सिफारिशें करने का अधिकार है।
  • विभागीय अधिकारियों द्वारा किसी भी प्रकार के दुरुपयोग पर रोक: डीआईएन के इलेक्ट्रॉनिक (डिजिटल) उत्पादन के लिए एक प्रणाली को लागू करने से विभागीय अधिकारियों द्वारा पूर्व-दिनांकित पत्रकों के किसी भी दुरुपयोग को रोका जा सकेगा, और बाद में फाइलों में प्राधिकारियों द्वारा की गयी कार्रवाई की पुष्टि की जा सकेगी।

इंस्टा लिंक:

जीएसटी

अभ्यास प्रश्न:

2017 के ‘वस्तु एवं सेवा कर (राज्यों को क्षतिपूर्ति) अधिनियम’ के पीछे तर्क बताएं। कोविड-19 ने GST क्षतिपूर्ति कोष को कैसे प्रभावित किया है और नए संघीय तनाव पैदा किए हैं? (UPSC 2020)

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


केंद्र सरकार द्वारा गन्ने की फसल के ‘उचित एवं लाभकारी मूल्य’ में वृद्धि

संदर्भ:

प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने गन्ना उत्पादक किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए, चीनी सत्र 2022-23 (अक्टूबर-सितंबर) के लिए गन्ने के ‘उचित और लाभकारी मूल्य’ (Fair and Remunerative Price – FRP) 305 रुपये प्रति क्विंटल को मंजूरी दे दी है।

 

  • फसल की यह कीमत, 10.25 प्रतिशत की मूल रिकवरी दर के लिए है।
  • इससे 10.25 प्रतिशत से अधिक की रिकवरी में प्रत्येक 0.1 प्रतिशत की वृद्धि के लिए 3.05 रुपये/ क्विंटल का प्रीमियम मिलेगा और रिकवरी में प्रत्येक 0.1 प्रतिशत की कमी के लिए 3.05 रुपये प्रति/क्विंटल की दर से उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) में कमी होगी।

 

उचित और लाभकारी मूल्य (FRP) क्या है?

  • उचित एवं लाभकारी मूल्य’ (Fair And Remunerative Price – FRP) सरकार द्वारा घोषित ‘कीमत’ होती है। चीनी मिलें, इसी ‘कीमत’ पर किसानों से खरीदे गए ‘गन्ने’ के लिए कानूनी रूप से भुगतान करने के लिए बाध्य होती हैं।
  • देश भर में FRP का भुगतान ‘गन्ना नियंत्रण आदेश, 1966’ द्वारा नियंत्रित होता है। इस आदेश के अनुसार, गन्ने की डिलीवरी की तारीख के 14 दिनों के भीतर भुगतान करना अनिवार्य है।

FRP का निर्धारण:

‘उचित एवं लाभकारी मूल्य’ (FRP), गन्ने से चीनी की रिकवरी पर आधारित होता है। 2021-22 के चीनी सत्र हेतु ‘उचित एवं लाभकारी मूल्य’, 10 फीसदी की बेस रिकवरी के आधार पर 2,900 रुपये प्रति टन निर्धारित किया गया है।

  • चीनी की रिकवरी, ‘गन्ने की पेराई’ तथा ‘उत्पादित चीनी’ के बीच का अनुपात होता है, जिसे प्रतिशत के रूप में व्यक्त किया जाता है।
  • रिकवरी जितनी अधिक होगी, FRP उतना ही अधिक होगा और चीनी का उत्पादन भी अधिक होगा।

FRP की घोषणा:

  • ‘उचित एवं लाभकारी मूल्य’ की घोषणा केंद्र सरकार द्वारा की जाती है। इसका निर्धारण ‘कृषि लागत एवं मूल्य आयोग’ (Commission on Agricultural Costs and Prices – CACP) की सिफारिशों के आधार पर ‘आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति’ (Cabinet Committee on Economic Affairs – CCEA) द्वारा किया जाता है।
  • CCEA की अध्यक्षता भारत के प्रधान मंत्री करते हैं।
  • ‘उचित एवं लाभकारी मूल्य’ (FRP), ‘गन्ना उद्योग के पुनर्गठन’ पर रंगराजन समिति की रिपोर्ट पर आधारित है।

 

जलवायु परिवर्तन संबंधी ‘राष्ट्रीय स्तर पर अद्यतन निर्धारित योगदान’ को मंजूरी

 

संदर्भ:

केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क सम्मलेन (UNFCCC) को सूचना दिए जाने के लिए भारत के ‘राष्ट्रीय स्तर पर अद्यतन निर्धारित योगदान’ (NDC) को मंजूरी दे दी है।

  • अद्यतन NDC, पेरिस समझौते के तहत आपसी सहमति के अनुरूप जलवायु परिवर्तन के खतरे का मुकाबले करने के लिए वैश्विक कार्रवाई को मजबूत करने की दिशा में भारत के योगदान में वृद्धि करने का प्रयास करता है।
  • यूनाइटेड किंगडम के ग्लासगो में आयोजित संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क सम्मलेन (यूएनएफसीसीसी) के पार्टियों के सम्मेलन (सीओपी26) के 26वें सत्र में भारत ने दुनिया के समक्ष पांच अमृततत्व (पंचामृत) पेश किए तथा जलवायु कार्रवाई को तेज करने का आग्रह किया।
  • भारत के मौजूदा एनडीसी का यह अद्यतन स्वरूप, सीओपी 26 में घोषित ‘पंचामृत’ को उन्नत जलवायु लक्ष्यों में परिवर्तित करता है।
  • यह अद्यतन स्वरूप, भारत के 2070 तक नेट-जीरो के दीर्घकालिक लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा।

 

 

भारत के मुख्य नयायाधीश से उनके उत्तराधिकारी के संबंध में सिफारिश की मांग

संदर्भ: हाल ही में, केंद्रीय कानून मंत्री ने भारत के मुख्य न्यायाधीश एन.वी. रमण को अगले शीर्ष न्यायाधीश की नियुक्ति पर उनकी सिफारिश के लिए एक पत्र भेजा।

  • मुख्य न्यायाधीश रमण 26 अगस्त, 2022 को सेवानिवृत्त हो रहे हैं।
  • अब यह मुख्य न्यायाधीश रमण पर निर्भर है कि वह अपने उत्तराधिकारी के बारे में कानून मंत्री को अपनी सिफारिश दें। वैसे, न्यायमूर्ति यू.यू. ललित अब सुप्रीम कोर्ट में सबसे वरिष्ठ जज हैं।
  • ‘सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया का ज्ञापन’ के अनुसार- “भारत के मुख्य न्यायाधीश के पद पर सर्वोच्च न्यायालय के उस वरिष्ठतम न्यायाधीश की नियुक्ति होनी चाहिए जिसे पद धारण करने के लिए उपयुक्त समझा जाए”।
  • ज्ञापन के अनुसार यह नियुक्ति प्रक्रिया, केंद्रीय कानून मंत्री द्वारा अगली नियुक्ति के बारे में निवर्तमान CJI की सिफारिश मांगने के साथ शुरू होती है।
  • मंत्री को “उचित समय पर” भारत के मुख्य नयायाधीश (CJI) की सिफारिश लेनी होती है।
  • इसके लिए ज्ञापन में विस्तृत या समयरेखा निर्दिष्ट नहीं की गयी है।
  • हालांकि, यदि शीर्ष न्यायाधीश पद पर पिछली नियुक्तियों को देखा जाए, तो कानून मंत्री द्वारा सिफारिश मांगने के बाद, निवर्तमान सीजेआई द्वारा अपने सेवानिवृत्ति दिवस से एक महीने पहले अपना जवाब भेजा गया था।
  • ज्ञापन में कहा गया है कि “भारत के मुख्य न्यायाधीश की सिफारिश प्राप्त होने के बाद, केंद्रीय कानून, न्याय और कंपनी मामलों के मंत्री, प्रधान मंत्री को अपनी सिफारिश देंगे जो नियुक्ति के मामले में राष्ट्रपति को सलाह देंगे”।

‘किसान उत्पादक संगठनों’ का गठन

संदर्भ:

भारत सरकार द्वारा 6865 करोड़ रुपये के कुल बजटीय परिव्यय के साथ वर्ष 2020 में केंद्रीय क्षेत्रक योजना ‘10,000 किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के गठन एवं संवर्द्धन’ (Formation & Promotion of 10,000 Farmer Producer Organizations- FPOs) की शुरुआत की गयी थी।

  • इस योजना के तहत, इन संगठनों को ‘बड़े पैमाने पर बचत का लाभ, उत्पादन लागत में कमी और किसानों की आय में वृद्धि, हेतु सहायता दी जाएगी।
  • इस प्रकार यह योजना, किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक प्रमुख भूमिका निभा रही है।

 

 

किसान उत्पादक संगठन (FPOs):

किसान उत्पादक संगठन (FPOs), कृषक-सदस्यों द्वारा नियंत्रित स्वैच्छिक संगठन होते हैं, जो FPO की नीतियों के निर्माण और निर्णयन में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं।

  • FPOs की सदस्यता, इसकी सेवाओं का उपयोग करने में सक्षम हैं और सदस्यता की ज़िम्मेदारी को स्वीकार करने के लिये तैयार रहने वाले सभी लोगों के लिए खुली होती है, और बगैर किसी लैंगिक, सामाजिक, नस्लीय, राजनीतिक या धार्मिक भेदभाव के कोई भी FPOs का सदस्य बन सकता है।
  • FPOs के संचालक अपने किसान-सदस्यों, निर्वाचित प्रतिनिधियों, प्रबंधकों एवं कर्मचारियों को शिक्षा और प्रशिक्षण प्रदान करते हैं ताकि वे अपने FPOs के विकास में प्रभावी योगदान दे सकें।
  • गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान और कुछ अन्य राज्यों में FPOs ने उत्साहजनक परिणाम दिखाए हैं और इनके माध्यम से किसान अपनी उपज से बेहतर आय प्राप्त करने में सफल रहे हैं।
  • उदाहरण के लिए, राजस्थान के पाली जिले में आदिवासी महिलाओं द्वारा एक ‘उत्पादक कंपनी’ बनायी गयी है, और इसके माध्यम से इन महिलाओं को शरीफा (कस्टर्ड एप्पल) के उच्च मूल्य प्राप्त हो रहे हैं।