विषयसूची
सामान्य अध्ययन-II
- सामूहिक विनाश के हथियारों के वित्तपोषण पर प्रतिबंध लगाने वाला विधेयक पारित
- अमेरिकी हाउस स्पीकर की ताइवान यात्रा और बीजिंग की प्रतिक्रिया
- राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत बजट आवंटन और निधियों का उपयोग
सामान्य अध्ययन-III
- भारत की अंटार्कटिका में गतिविधियां
- स्वास्थ्य देखभाल में निजी-सार्वजानिक भागीदारी
मुख्य परीक्षा संवर्धन हेतु पाठ्य सामग्री (निबंध/नैतिकता)
- गति शक्ति विश्वविद्यालय
- प्रेसिडेंटस कलर (राष्ट्रपति निशान) पुरुस्कार
प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य
- स्थानीय लोगों के लिए 100% कोटा
- क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक
- जीएसटी संग्रह में वृद्धि
- भारत में कोयला भंडार की स्थिति
- मानक उपचार कार्यप्रवाह
- किसानों के लिए सरकारी योजनायें
- पशु स्वास्थ्य
- नगर वन योजना
- ‘पिच ब्लैक’ युद्धाभ्यास
- हेलफायर R9X मिसाइल
- एस्ट्रोबी
सामान्य अध्ययन–II
विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।
सामूहिक विनाश के हथियारों के वित्तपोषण पर प्रतिबंध लगाने वाला विधेयक पारित
संदर्भ:
हाल ही में, संसद द्वारा ‘सामूहिक संहार के आयुध और उनकी परिदान प्रणाली (विधिविरूद्ध क्रियाकलापों का प्रतिषेध) संशोधन विधेयक, 2022’ (The Weapons of Mass Destruction and their Delivery Systems (Prohibition of Unlawful Activities) Amendment Bill, 2022) पारित कर दिया गया है।
- इस विधेयक में ‘सामूहिक विनाश के हथियारों’ (weapons of mass destruction) के वित्त पोषण पर प्रतिबंध लगाने का प्रावधान किया गया है। साथ ही, केंद्र सरकार को इस प्रकार की गतिविधियों से जुड़े लोगों के आर्थिक संसाधन और वित्तीय संपत्तियों को फ्रीज करने, जब्त या कुर्क करने की शक्ति प्रदान की गयी है।
- इससे पूर्व, वर्ष 2005 में पारित ‘सामूहिक संहार के आयुध और उनकी परिदान प्रणाली (विधिविरूद्ध क्रियाकलापों का प्रतिषेध) अधिनियम’ (The Weapons of Mass Destruction and their Delivery Systems (Prohibition of Unlawful Activities) Act) में केवल सामूहिक विनाश के हथियारों के निर्माण पर प्रतिबंध लगाने का प्रावधान किया गया था।
प्रमुख संशोधन:
- धारा 12A: संशोधन विधेयक के द्वारा मौजूदा कानून में एक नई धारा 12A (Section 12A) जोड़ी गयी है, जिसमें कहा गया है कि “कोई भी व्यक्ति इस अधिनियम के तहत, या संयुक्त राष्ट्र (सुरक्षा परिषद) अधिनियम, 1947 या किसी अन्य क़ानून के तहत या सामूहिक विनाश के हथियारों और उनके वितरण प्रणालियों के संबंध में ऐसे किसी भी अधिनियम के तहत जारी आदेश के अनुसार प्रासंगिक नियम के तहत निषिद्ध किसी भी गतिविधि को वित्तपोषित नहीं करेगा।”
- कुछ गतिविधियों को वित्त पोषित करने पर प्रतिबंध: यह विधेयक, व्यक्तियों को सामूहिक विनाश के हथियारों और उनकी वितरण प्रणाली से संबंधित किसी भी निषिद्ध गतिविधि को वित्तपोषित करने पर प्रतिबंध लगाता है। ऐसा करने के लिए केंद्र सरकार किसी व्यक्ति के धन, वित्तीय संपत्ति, या आर्थिक संसाधनों (चाहे उसके स्वामित्व वाले, उसके द्वारा धारित यानी हेल्ड, या प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से नियंत्रित हों) को फ्रीज, जब्त या कुर्क कर सकती है।
- अगर कोई व्यक्ति ऐसी गतिविधियों में संलग्न है जो प्रतिबंधित हैं, तो किसी दूसरे व्यक्ति द्वारा उस व्यक्ति को वित्त या संबंधित सेवाएं उपलब्ध कराने पर भी बिल रोक लगा सकता है।
‘सामूहिक संहार के आयुध / हथियार’ क्या हैं?
सामूहिक संहार के आयुध / हथियार (Weapons of Mass Destruction – WMDs), व्यापक पैमाने पर और इतने अंधाधुंध तरीके से मौत और विनाश करने की क्षमता वाले हथियार होते हैं, कि एक दुश्मन शक्ति के हाथों में इसकी मौजूदगी को एक गंभीर खतरा माना जा सकता है।
- भारत में ‘सामूहिक संहार के आयुध (WMDs) अधिनियम, 2005 में ‘सामूहिक विनाश के हथियारों को जैविक, रासायनिक या परमाणु हथियारों’ के रूप में परिभाषित किया गया है।
- संयुक्त राज्य अमेरिका में, WMD के अंतर्गत परमाणु, रेडियोलॉजिकल, रासायनिक, जैविक, या बड़ी संख्या में लोगों को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य वाले अन्य उपकरण शामिल है।
- सामूहिक संहार के हथियार: उदाहरण- जापान में हिरोशिमा और नागासाकी हमले में प्रयुक्त परमाणु बम।
निम्नलिखित अंतर्राष्ट्रीय समझौतों में WMD के प्रसार को नियंत्रित करने के प्रयास अंतर्निहित हैं जैसे:
इंस्टा लिंक:
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अभ्यास प्रश्न:
वर्तमान में जारी यू.एस.-ईरान परमाणु संधि विवाद किस तरह से भारत के राष्ट्रीय हित को प्रभावित करेगा? भारत को इस स्थिति पर कैसी प्रतिक्रिया देनी चाहिए? (यूपीएससी 2019)
स्रोत: इकोनॉमिक टाइम्स, द प्रिंट
विषय: भारत एवं इसके पड़ोसी- संबंध।
अमेरिकी हाउस स्पीकर की ताइवान यात्रा और बीजिंग की प्रतिक्रिया
संदर्भ:
हाल ही में, अमेरिकी सदन की अध्यक्ष नैंसी पेलोसी (Nancy Pelosi) ने बिडेन प्रशासन द्वारा जारी निजी चेतावनियों को खारिज करते ‘ताइवान’ का दौरा किया। बिडेन प्रशासन के अनुसार, उनकी हाई-प्रोफाइल राजनयिक यात्रा ‘एशिया’ में एक नया संकट पैदा कर सकती है और चीनी सरकार की ओर से तत्काल तीखी प्रतिक्रिया दी जा सकती है।
- नैंसी पेलोसी पिछले 25 वर्षों में ताइवान की यात्रा करने वाली ‘अमेरिकी प्रतिनिधि सभा’ की पहली अध्यक्ष हैं।
- इसकी प्रतिक्रिया में, ताइवान को अपना क्षेत्र बताने वाले चीन ने ‘द्वीप’ के चारों ओर कई सैन्य अभ्यासों की घोषणा की और कई कड़े बयान भी जारी किए हैं।
चीन- ताइवान संबंध: पृष्ठभूमि
चीन, अपनी ‘वन चाइना’ (One China) नीति के जरिए ताइवान पर अपना दावा करता है। सन् 1949 में चीन में दो दशक तक चले गृहयुद्ध के अंत में जब ‘पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना’ के संस्थापक माओत्से तुंग ने पूरे चीन पर अपना अधिकार जमा लिया तो विरोधी राष्ट्रवादी पार्टी के नेता और समर्थक ताइवान द्वीप पर भाग गए। इसके बाद से ‘पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना’ ने ताइवान को बीजिंग के अधीन लाने, जरूरत पड़ने पर बल-प्रयोग करने का भी प्रण लिया हुआ है।
- चीन, ताइवान का शीर्ष व्यापार भागीदार है। वर्ष 2018 के दौरान दोनों देशों के मध्य 226 बिलियन डॉलर के कुल व्यापार हुआ था।
- हालांकि, ताइवान एक स्वशासित देश है और वास्तविक रूप से स्वतंत्र है, लेकिन इसने कभी भी औपचारिक रूप से चीन से स्वतंत्रता की घोषणा नहीं की है।
- “एक देश, दो प्रणाली” (one country, two systems) सूत्र के तहत, ताइवान, अपने मामलों को खुद संचालित करता है; हांगकांग में इसी प्रकार की समान व्यवस्था का उपयोग किया जाता है।
वर्तमान में, चीन, ताइवान पर अपना दावा करता है, और इसे एक राष्ट्र के रूप में मान्यता देने वाले देशों के साथ राजनयिक संबंध नहीं रखने की बात करता है।
एक-चीन सिद्धांत:
‘एक-चीन सिद्धांत’ (One-China Principle) का मतलब यह है, कि जो राष्ट्र ‘चीन जनवादी गणराज्य’ (People’s Republic of China – PRC) के साथ राजनयिक संबंध रखना चाहते हैं, उन्हें चीन को ‘चीन गणराज्य’ (Republic of China – ROC) की बजाय ‘चीन जनवादी गणराज्य’ (PRC) को मान्यता देनी होगी, और उन्हें ROC के साथ संबंधों को तोड़ना होगा।
- चीन के ‘जनवादी गणराज्य’ (PRC) को आमतौर पर ‘चीन’ के रूप में जाना जाता है और ‘चीन गणराज्य’ (ROC) को आमतौर पर ‘ताइवान’ के रूप में जाना जाता है। साझा इतिहास के साथ ये अलग राज्य हैं; चीन ताइवान पर संप्रभुता का दावा करता है।
- साथ ही, चीन अपनी आर्थिक व्यवस्था में सुधार के साथ-साथ एक ‘बहुदलीय लोकतंत्र’ के रूप में विकसित हुआ है।
- तब से, दोनों देश आर्थिक रूप से उलझे हुए हैं और परस्पर लगातार प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं।
इंस्टा लिंक्स:
अभ्यास प्रश्न:
चीन अपने आर्थिक संबंधों और सकारात्मक व्यापार अधिशेष को, एशिया में ताकतवर सैन्य शक्ति स्थिति विकसित करने के लिए उपकरण के रूप में उपयोग कर रहा है। इस कथन के आलोक में, भारत पर उसके पड़ोसी देश के रूप में इसके प्रभाव की चर्चा कीजिए। (यूपीएससी 2017)
स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस
विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।
राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत बजट आवंटन और निधियों का उपयोग
संदर्भ: राज्य क्षेत्रों को केंद्रीय हिस्से के रूप में 3119.46 करोड़ रुपये आवंटित/जारी किए गए हैं, जिसमे से इ
केंद्र प्रायोजित योजना ‘राष्ट्रीय आयुष मिशन’ के तहत, योजना की शुरुआत के बाद से राज्यों/संघ न राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों द्वारा 2290.20 करोड़ रुपये के व्यय की सूचना दी है।
पृष्ठभूमि:
आयुष सुविधाओं की सह-अवस्थिति (Co-location of AYUSH facilities): भारत सरकार द्वारा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (Primary Health Centers – PHCs), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (Community Health Centers – CHCs) और जिला अस्पतालों में आयुष सुविधाओं के लिए ‘सह-अवस्थिति’ (Co-location) की रणनीति अपनाई गयी है। इस प्रकार रोगियों को, एक ही खिड़की के नीचे दवाओं की विभिन्न प्रणालियों को चुनने में सक्षम बनाया गया है।
- स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा समर्थित: आयुष डॉक्टरों / पैरामेडिक्स की नियुक्ति और उनके प्रशिक्षण को ‘राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन’ (National Health Mission – NAM) के तहत स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा सहयोग प्रदान किया जाता है, जबकि आयुष बुनियादी ढांचे, उपकरण / फर्नीचर और दवाओं के लिए सहयोग ‘आयुष मंत्रालय’ द्वारा ‘राष्ट्रीय आयुष मिशन’ (NAM) के तहत साझा जिम्मेदारियों के रूप में प्रदान किया जाता है।
- जन स्वास्थ्य राज्य का विषय है: ‘आयुष शिक्षण संस्थान’ संबंधित राज्य/संघ राज्य क्षेत्र की सरकारों के दायरे में आते हैं।
- हालांकि, NAM के तहत, राज्य वार्षिक कार्य योजनाओं (State Annual Action Plans – SAAPs) के माध्यम से राज्य सरकारों से प्राप्त प्रस्तावों के अनुसार, राज्यों को योजना की शुरुआत के बाद से 9 नए आयुष शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना के लिए सहयोग दिया जा चुका है।
राष्ट्रीय आयुष मिशन:
- ‘राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन’ (National Health Mission – NAM) को 12वीं योजना के दौरान स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन ‘आयुष विभाग’ द्वारा राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के माध्यम से कार्यान्वयन के लिए सितंबर 2014 में शुरू किया गया।
- वर्तमान में, इसे आयुष मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है।
- इस योजना में, भारतीयों के समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए ‘आयुष क्षेत्र’ का विस्तार करना शामिल है।
मिशन के घटक:
अनिवार्य घटक (Obligatory Component):
- आयुष (AYUSH) सेवाएँ
- आयुष शैक्षणिक संस्थान
- आयुर्वेद, सिद्ध एवं यूनानी तथा होमियोपैथी (ASU&H) औषधों का गुणवत्ता नियंत्रण
- औषधीय पादप/पौधे
अनुनेय घटक (Flexible Component):
- योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा सहित आयुष स्वास्थ्य केंद्र
- टेली-मेडिसिन
- सार्वजनिक निजी भागीदारी सहित आयुष में नवाचार
- सूचना, शिक्षा तथा संचार (Information, Education and Communication- IEC) कार्यकलाप
- स्वैच्छिक प्रमाणन स्कीम: परियोजना आधारित, इत्यादि
अभ्यास प्रश्न:
भारत सरकार दवाओं के पारंपरिक ज्ञान को, दवा कंपनियों द्वारा पेटेंट कराने से कैसे बचा रही है? (यूपीएससी 2019)
स्रोत: पीआईबी
सामान्य अध्ययन–III
विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास।
भारत की अंटार्कटिका में गतिविधियां
संदर्भ: अंटार्कटिका विधेयक 2022 भारत की संसद में पारित।
- वर्ष 1959 में हस्ताक्षरित और 1961 में लागू ‘अंटार्कटिक संधि’ के तहत, 54 हस्ताक्षरकर्ता देशों को, जिन क्षेत्रों में उनके ‘स्टेशन’ स्थित हैं, उन क्षेत्रों को नियंत्रित करने वाले कानूनों को निर्दिष्ट करना अनिवार्य किया गया है।
- भारत 1983 से ‘अंटार्कटिका संधि’ (Antarctica Treaty) का एक हस्ताक्षरकर्ता देश है। इसलिए अंटार्कटिक के आरंभिक पर्यावरण और इसके आसपास के महासागर को संरक्षित करने के लिए एक कानून की आवश्यकता थी।
प्रारंभ में, भारत, ‘अंटार्कटिका संधि’, 1959 से बाहर रह गया था, लेकिन भारत ने ‘ऑपरेशन गंगोत्री’ के तहत 1982 में अपनी पहली यात्रा शुरू की।
(नोट: इस विषय पर पिछले आर्टिकल में पहले ही चर्चा की जा चुकी है, प्रस्तुत आर्टिकल में ‘जय राम रमेश’ द्वारा लिखित आर्टिकल से अतिरिक्त 1-2 बिंदु जोड़े गए हैं।)
विधेयक के प्रमुख बिंदु:
- प्रयोज्यता: यह विधेयक सभी भारतीयों, विदेशी नागरिकों, निगमों, फर्मों और भारत में काम कर रहे संयुक्त उद्यमों और किसी भी जहाज या विमान पर लागू होगा जो या तो भारतीय है या भारतीय अभियान का हिस्सा है।
- केंद्रीय समिति: केंद्र सरकार अंटार्कटिका शासन और पर्यावरणीय संरक्षण समिति बनाएगी। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव इस समिति के अध्यक्ष होंगे। रक्षा, विदेशी मामलों जैसे विभिन्न मंत्रालयों तथा राष्ट्रीय ध्रुवीय और महासागरीय अनुसंधान केंद्र और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय जैसे संगठनों से 10 सदस्यों को नामित किया जाएगा।
- यह समिति, विभिन्न गतिविधियों के लिए अनुमति प्रदान करेगी तथा अंटार्कटिका के वातावरण के संरक्षण के लिए प्रासंगिक अंतरराष्ट्रीय कानूनों का कार्यान्वयन और उनके अनुपालन को सुनिश्चित करेगी।
- यह विधेयक, बिना परमिट के अथवा प्रोटोकॉल से संबंधित किसी अन्य पार्टी की लिखित अनुमति के बिना, अंटार्कटिका के लिए किसी भारतीय अभियान या अंटार्कटिका में कुछ निश्चित क्रियाकलापों को प्रतिबंधित करता है।
- ‘पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन’ और ‘अपशिष्ट प्रबंधन योजना’ तैयार होने के बाद ही परमिट दिया जा सकता है।
प्रतिबंधित गतिविधियां:
विधेयक में अंटार्कटिका में कुछ गतिविधियों को प्रतिबंधित किया गया है। इसमें निम्नलिखित शामिल हैं:
- परमाणु विस्फोट या रेडियोएक्टिव कचरे का निस्तारण,
- उपजाऊ मिट्टी को ले जाना, और
- समुद्र में कचरा, प्लास्टिक या समुद्री वातावरण के लिए नुकसानदेह पदार्थों को निस्तारित करना।
अपराध और सजा: विधेयक, प्रावधानों के उल्लंघन पर सजा भी निर्दिष्ट करता है। जैसेकि;
- अंटार्कटिका में परमाणु विस्फोट करने पर 20 वर्ष की कैद की सजा हो सकती है, जोकि उम्रकैद तक बढ़ाई जा सकती है, और कम से कम 50 करोड़ रुपए का जुर्माना।
- बिना परमिट के अंटार्कटिका में खनिज संसाधनों के लिए ड्रिलिंग करना या गैर-देशीय जानवरों या पौधों को ले जाने पर सात वर्ष तक की कैद और 10 लाख रुपए से 50 लाख रुपए तक का जुर्माना हो सकता है।
विशिष्ट न्यायालय:
- केंद्र सरकार विधेयक के तहत एक या एक से अधिक सत्र न्यायालयों को नामित न्यायालय के रूप में अधिसूचित कर सकती है और विधेयक के तहत दंडनीय अपराधों की सुनवाई के लिए अपने क्षेत्राधिकार को निर्दिष्ट कर सकती है।
अंटार्कटिक कोष:
- विधेयक में ‘अंटार्कटिक फंड’ के नाम से एक कोष के गठन का प्रावधान किया गया है, जिसे अंटार्कटिक अनुसंधान कार्य के कल्याण और अंटार्कटिक पर्यावरण की सुरक्षा के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।
शेष मुद्दे:
एक ‘ध्रुवीय अनुसंधान पोत’ (Polar Research Vessel) के मुद्दे को अभी भी तुरंत संबोधित करने की आवश्यकता है। अब तक, भारत रूस और नॉर्वे जैसे देशों से ‘ध्रुवीय अनुसंधान पोतों’ को किराए पर लेता रहा है, जबकि चीन इस संदर्भ में आगे बढ़ चुका है और उसके पास अपने दो अनुसंधान पोत हैं।
आवश्यकता:
- स्थायी आधार पर, बर्फ तोड़ने और अन्य तकनीकी क्षमताओं वाले पोत का अधिग्रहण, विधेयक के पारित होने का एक तार्किक अगला कदम होना चाहिए।
- पुराने मैत्री अनुसंधान केंद्र का पुनरुद्धार।
- इसके अलावा, ‘ध्रुवीय अनुसंधान पोत’ की भी आवश्यकता है, क्योंकि भारत आर्कटिक में अपने सहयोग और भागीदारी का भी विस्तार कर रहा है।
भारत का अंटार्कटिक कार्यक्रम:
भारत का अंटार्कटिक कार्यक्रम
- दक्षिण गंगोत्री: यह पहला भारतीय वैज्ञानिक अनुसंधान बेस स्टेशन था। अब सिर्फ एक आपूर्ति बेस के रूप में कार्य करता है।
- मैत्री (1989 में समाप्त): शिरमाकर ओएसिस के पास स्थित। भारत ने इसके चारों ओर एक मीठे पानी की झील भी बनाई है जिसे प्रियदर्शिनी झील कहा जाता है।
- भारती (2012): अनुसंधान केंद्र।
- सागर निधि (2008) : यह अंटार्कटिक जल को नेविगेट करने वाला पहला भारतीय पोत है।
इंस्टा लिंक:
मेंस लिंक
अंटार्कटिक क्षेत्र में भारतीय हितों पर प्रकाश डालिए। भारतीय अंटार्कटिक विधेयक, 2022, द्वारा अंटार्कटिक पर्यावरण की रक्षा और क्षेत्र में गतिविधियों को विनियमित करने में निभाने वाली भूमिका का विश्लेषण कीजिए। (250 शब्द)
स्रोत: द हिंदू
विषय: निवेश मॉडल।
स्वास्थ्य देखभाल में निजी-सार्वजानिक भागीदारी
संदर्भ: ‘द लाइव मिंट’ के संपादकीय में “सार्वजनिक-निजी प्रयासों से प्रमुख सबक से टीबी-उन्मूलन में सहायता” शीर्षक से प्रकाशित आर्टिकल पर आधारित।
(नोट: इस आर्टिकल से कुछ उदाहरण/केस स्टडी लिए जा सकते हैं। और यह आर्टिकल पूरी तरह से मुख्य परीक्षा के नजरिए से महत्वपूर्ण है।
निजी क्षेत्र में, भारत में केंद्र और राज्य सरकारों के सार्वजनिक स्वास्थ्य लक्ष्यों की पूर्ति के लिए क्रांतिकारी नवाचार प्रदान करने की क्षमता है। ‘राष्ट्रीय व्यापकता सर्वेक्षण’ के अनुसार, टीबी के लक्षणों वाले लगभग आधे रोगी ‘निजी क्षेत्र’ में अपने ईलाज को प्राथमिकता देते हैं।
टीबी-उन्मूलन से जुड़े निजी क्षेत्र के कुछ कार्यक्रम:
निजी प्रदाता इंटरफेस एजेंसी (Private-Provider Interface Agency – PPIA): महाराष्ट्र में मुंबई, बिहार में पटना और गुजरात में मेहसाणा में कार्यरत।
- यह इंटरफ़ेस, ‘टीबी उपचार के मानक’ सुनिश्चित करने के लिए निजी डॉक्टरों, रसायनज्ञों, प्रयोगशालाओं और अस्पतालों के नेटवर्क के साथ काम करता है।
- परिणाम: ‘निजी प्रदाता इंटरफेस एजेंसी’ (PPIA) कार्यक्रम के कार्यान्वयन के परिणामस्वरूप, 2014 और 2018 के बीच, टीबी मामलों की सूचनाओं में, मुंबई और पटना में 351% और निजी क्षेत्र में 532% की वृद्धि हुई थी। मामलों की वास्तविक रिपोर्टिंग के परिणामस्वरूप यथार्थ में टीबी के भार की अधिक समझ हुई है।
चिरंजीवी योजना कार्यक्रम (गुजरात): राज्य सरकार, संस्थागत प्रसव बढ़ाने के लिए निजी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के साथ काम कर रही है।
हौसला साझीदारी पहल (उत्तर प्रदेश): सरकार, परिवार नियोजन के लिए निजी स्वास्थ्य सुविधाओं को शामिल कर रही है। यह योजना सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-Private Partnership – PPP) मॉडल के तहत प्रतिपूर्ति के आधार पर काम करती है।
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM), सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज, सभी के लिए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्राप्त करने और ‘तपेदिक’ (टीबी) को समाप्त करने में मदद कर सकता है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य, देश के स्वास्थ्य सेवा पारिस्थितिकी तंत्र को डिजिटलीकरण करना और सार्वजनिक-निजी सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक सक्षम पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण करना है।
इंस्टा लिंक:
स्वास्थ्य देखभाल से संबंधित मुद्दे
मेंस लिंक:
स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल, सार्वजनिक क्षेत्र की पहुंच और सब्सिडी के साथ निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता और वित्त में सहयोग करेगा। क्या स्वास्थ्य सेवा में पीपीपी मॉडल भारत की स्वास्थ्य समस्याओं का रामबाण इलाज है? समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। (250 शब्द)
मुख्य परीक्षा संवर्धन हेतु पाठ्य सामग्री (निबंध/नैतिकता)
गति शक्ति विश्वविद्यालय
- परिवहन क्षेत्र में प्रतिभा की आवश्यकता को पूरा करने के लिए, शिक्षा मंत्रालय द्वारा ‘राष्ट्रीय रेल और परिवहन संस्थान’ (NRTU) को ‘गति शक्ति विश्वविद्यालय’ (GATI Shakti University) में परिवर्तित किया जाएगा’। यह ‘क्षेत्र-विशिष्ट प्रशिक्षण’ का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।
- अन्य उपाय– राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय (गांधीनगर); राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय (इंफाल, मणिपुर)।
प्रेसिडेंटस कलर (राष्ट्रपति निशान) पुरुस्कार
- हाल ही में, तमिलनाडु पुलिस को उनके सराहनीय कार्य (उदाहरण के लिए, 2018 में हिरासत में होने वाली मौतों में 17 से 2021 में 4 तक की गिरावट) के लिए ‘प्रेसिडेंटस कलर’ (राष्ट्रपति निशान) पुरुस्कार (President’s Colours Award) प्रदान किया गया है।
- यह पुरस्कार, किसी भी सैन्य/राज्य पुलिस को, राष्ट्र के लिए कम से कम 25 वर्षों की असाधारण सेवा के लिए दिया जाता है।
प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य
स्थानीय लोगों के लिए 100% कोटा
संदर्भ: हाल ही में, सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी नौकरियों में स्थानीय लोगों को 100% कोटा देने संबंधी झारखंड सरकार के फैसले को रद्द कर दिया।
- सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी:”सभी नागरिकों को समान अधिकार प्राप्त हैं, और एक वर्ग के लिए अवसर पैदा करके अन्य नागरिकों के पूर्ण बहिष्कार पर भारत के संविधान के संस्थापकों द्वारा विचार नहीं किया गया था।”
- संबंधित विवाद: झारखंड सरकार ने 2016 में सार्वजनिक नौकरियों में 13 अनुसूचित क्षेत्रों के स्थानीय लोगों को 100% आरक्षण का प्रावधान किया था। पहले राज्य के उच्च न्यायालय ने सरकार के इस निर्णय को भेदभावपूर्ण और अनुचित करार दिया था।
- अधिकारों का उल्लंघन: झारखंड सरकार का यह कदम असंवैधानिक है और भारत के संविधान के अनुच्छेद 14, 16 (2), 16 (3) और 35 का उल्लंघन है।
- आरक्षण के लिए अधिकतम सीमा 50% निर्धारित की गयी है, जैसा कि इंद्रा साहनी मामले, 1992 में निर्दिष्ट है।
- पिछला मामला: इन मामले में, शीर्ष अदालत ने आंध्र प्रदेश में नौकरियों में 100% कोटा से संबंधित 2020 के संविधान पीठ के फैसले का हवाला दिया था।
- अधिसूचित क्षेत्रों के संबंध में राज्यपाल की शक्ति: इस संदर्भ में राज्यपाल की शक्ति, संसद और राज्य की विधायी शक्ति के समान है। राज्यपाल की यह शक्ति, संविधान के भाग III के तहत गारंटीकृत मौलिक अधिकारों का अधिक्रमण नहीं करती है।
क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक
संदर्भ: सरकार ने हाल ही में ‘क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों’ (Regional Rural Banks – RRBs) के लिए वित्तीय और परिचालन सुधारों की समीक्षा की है।
- उद्देश्य: इन सुधारों का उद्देश्य ‘क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों’ को वित्तीय रूप से टिकाऊ, अधिक डिजीटल बनाना और बिशेश्कर MSME क्षेत्रों के लिए उनके क्रेडिट आधार को बढ़ाना है।
- महत्व: ‘क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक’ (RRB), ग्रामीण जनता को बैंकिंग सेवाएं प्रदान करते हैं, कमजोर वर्गों (ऋण के माध्यम से) की सहायता करते हैं, सहकारी समितियों और स्वयं सहायता समूहों को प्रत्यक्ष वित्त प्रदान करते हैं, क्षेत्रीय असंतुलन को कम करते हैं और ग्रामीण रोजगार सृजन में वृद्धि करते हैं।
- समस्याएं: अधिकांश RRB नुकसान में हैं, खराब प्रबंधन पद्धतियों की वजह से NPA बढ़ रहा है और इनके कमांड के समन्वय की कमी है। ‘क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों’ को सरकार द्वारा और साथ ही प्रायोजक बैंक जैसे नाबार्ड, आरबीआई द्वारा नियंत्रित किया जाता है।
आरआरबी के बारे में:
क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) की स्थापना 1975 में 26 सितंबर, 1975 को प्रख्यापित अध्यादेश और ‘क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक अधिनियम, 1976’ (RRB Act 1976) (नरसिम्हा वर्किंग ग्रुप (1975) द्वारा अनुशंसित) के प्रावधानों के तहत की आयी थी।
इनका उद्देश्य, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को विकसित करने उद्देश्य से ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि, व्यापार, वाणिज्य, उद्योग और अन्य उत्पादक गतिविधियाँ के विकास हेतु ऋण और अन्य सुविधाएँ प्रदान करने, विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों, खेतिहर मजदूरों, कारीगरों और छोटे उद्यमियों को, और उससे जुड़े और उसके आनुषंगिक मामलों का समाधान करना है।
- स्वामित्व: केंद्र सरकार (50%), संबंधित राज्य सरकार (15%), प्रायोजक बैंक (35%)।
- इसे वाणिज्यिक बैंक के समान स्तर पर ‘प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र ऋण’ (75%) का पालन करना होता है।
- पहला क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक “प्रथमा ग्रामीण बैंक” 2 अक्टूबर 1975 को स्थापित किया गया था।
- विशिष्टता: क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों में, ग्रामीण समस्याओं से परिचित होने के संदर्भ में एक सहकारी बैंक की विशेषताओं, और व्यावसायिकता और वित्तीय संसाधनों को जुटाने की क्षमता के संदर्भ में एक वाणिज्यिक बैंक की विशेषताएं शामिल होती है।
- आरआरबी को वाणिज्यिक बैंकों के बराबर ‘न्यूनतम 9%’ ‘पूंजी-जोखिम-भारित परिसंपत्ति अनुपात’ (Capital-to risk-weighted asset ratio – CRAR) बनाए रखना आवश्यक होता है।
- CRAR, एक बैंक की पूंजी का उसकी जोखिम-भारित आस्तियों और वर्तमान देनदारियों के बीच का अनुपात होता है।
जीएसटी संग्रह में वृद्धि
संदर्भ: जीएसटी संग्रह हर साल 28% की दर से बढ़ रहा है। इस साल जुलाई में, यह लगभग 1.5 लाख करोड़ तक पहुंच गया।
कारण:
- उच्च मुद्रास्फीति दर
- आर्थिक सुधार का अर्थ है ‘उच्च खपत पैटर्न’
- कर चोरी के खिलाफ सख्त कार्रवाई
- नियमों का बेहतर अनुपालन
जीएसटी के बारे में:
101वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा लागू ‘वस्तु एवं सेवा कर’ (Goods and Services Tax – GST), घरेलू उपभोग के लिए बेची जाने वाली अधिकांश वस्तुओं और सेवाओं पर लगाया जाने वाला ‘मूल्य वर्धित कर’ है। यह ‘मूल-आधारित कराधान’ के पिछले सिद्धांत के विपरीत ‘गंतव्य-आधारित उपभोग कराधान’ के सिद्धांत पर आधारित है।
भारत में कोयला भंडार की स्थिति
संदर्भ: ‘भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण’ द्वारा प्रकाशित ‘भारत की भंडारण सूची’ के अनुसार, देश में कुल ‘भूवैज्ञानिक कोयला संसाधनों’ की अनुमानित मात्रा 352 बिलियन टन है, जो इसे उच्चतम भंडार (वर्तमान में 5 वें स्थान पर) वाले देशों की सूची में शामिल करता है।
इसका अधिकांश भाग, अपेक्षाकृत कम उष्मीय मान वाला ‘तापीय’ या ‘गैर-कोकिंग कोयला’ है, और इसका उपयोग ज्यादातर ताप विद्युत संयंत्रों में किया जाता है।
उच्च भंडार के बावजूद, उत्पादन से अधिक मांग; DICOMS की खराब वित्तीय व्यवस्था; खराब प्रचालन-तंत्र, और वर्तमान में निजी क्षेत्र की सीमांत भूमिका के कारण भारत को कोयले का आयात करना पड़ता है है।
सुझाव: कोयले से संबंधित योजना बनाएं जाने की आवश्यकता है, क्योंकि यह तापीय विद्युत उत्पादन का मुख्य आधार बना रहेगा, देश भर में मौजूद घरेलू कोयला भंडार का उपयोग जारी रहेगा, और कोयला द्रवीकरण और कार्बन कैप्चर, भंडारण और उपयोग प्रौद्योगिकियों जैसी प्रौद्योगिकियों का उपयोग किया जाएगा।
मानक उपचार कार्यप्रवाह
संदर्भ: हाल ही में, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) द्वारा दवाओं के तर्कहीन उपयोग, अधिक और कम निदान और खराब रेफरल प्रथाओं से जुड़ी समस्याओं का समाधान करने हेतु एक ‘नियमावली’ / ‘मैनुअल’ (मानक उपचार कार्यप्रवाह – Standard Treatment Workflow : STW) जारी किया गया है।
- मानक उपचार कार्यप्रवाह (STW) का विकास, स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों के सभी स्तरों पर इलाज करने वाले चिकित्सकों द्वारा सामना की जाने वाली आम और गंभीर बीमारियों के लिए भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद की एक मिशन मोड परियोजना है।
- इसका उद्देश्य प्रबंधन के लिए उनका मार्गदर्शन करना और दवाओं, निदान और अन्य स्वास्थ्य सेवाओं के तर्कसंगत उपयोग को प्रोत्साहित करना है। .
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च
- भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) जैव चिकित्सा अनुसंधान के निर्माण, समन्वय और प्रचार के लिए भारत में शीर्ष निकाय है।
- यह भारत सरकार द्वारा स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के माध्यम से वित्त पोषित संस्थान है।
किसानों के लिए सरकारी योजनायें
वस्तुस्थिति:
कृषि के लिए बजट में वृद्धि: 2013-14 में 27662.67 करोड़ रुपये से वर्ष 2022-23 में 1,32,513.62 करोड़ रुपये।
विकास: वर्तमान आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में 2020-21 के दौरान 3.6 प्रतिशत की सकारात्मक वृद्धि दर से वृद्धि हुई है।
- मासिक आय: राष्ट्रीय पतिदर्श सर्वेक्षण (National Sample Survey – NSS) के 70वें दौर (2012-13) और 77वें दौर (2018-19) से प्राप्त प्रति कृषि परिवार की अनुमानित औसत मासिक आय की गणना क्रमश: 6426/- रुपये और 10,218/- रुपये की गई।
- योजनाओं का उद्देश्य: किसानों के लिए लागत में कमी, फसल उत्पादन में वृद्धि, लाभकारी रिटर्न और आय सहयोग।
- ‘कृषि’, राज्य का विषय है।
- इन योजनाओं में पीएम-किसान, पीएम किसान मान धन योजना, पीएम फसल बीमा योजना, एमएसपी में वृद्धि, अतिरिक्त आय के लिए ‘हर मोड़ पर पेड़’ के माध्यम से कृषि वानिकी, राष्ट्रीय बांस मिशन, प्रधान मंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा) आदि शामिल हैं।
पशु स्वास्थ्य
वस्तुस्थिति: भारत में पशुधन की आबादी 1.6 बिलियन है और लगभग 280 मिलियन किसान आजीविका के लिए पशुधन और संबंधित उद्योगों पर निर्भर हैं।
महत्व: पशुपालन, किसानों के लिए विश्वसनीय वैकल्पिक आय का स्रोत है। डेयरी उद्योग ($160 बिलियन अर्थव्यवस्था), मांस उद्योग ($50 बिलियन अर्थव्यवस्था)।
संबंधित समस्याएं:
- जूनोटिक रोगों का जोखिम। इससे, भारतीय अर्थव्यवस्था को $12 बिलियन का अनुमानित वार्षिक नुकसान हो सकता है।
- 2000 से 2010 तक जूनोटिक रोग के प्रकोप के लगभग 9,580 मामले सामने आए।
- स्वास्थ्य नीतियां, काफी हद तक मानव केंद्रित रही हैं।
‘जूनोटिक रोग’, एक बीमारी या संक्रमण होता है जो प्राकृतिक रूप से कशेरुकी जानवरों से मनुष्यों में या मनुष्यों से कशेरुक जानवरों में फैल सकता है। मानव रोगजनकों में से, 60% से अधिक मूल रूप से जूनोटिक हैं।
उठाए गए कदम:
- पशुपालन और डेयरी विभाग (डीएएचडी) ने गेट्स फाउंडेशन के सहयोग से एक समर्पित ‘वन हेल्थ यूनिट’ की स्थापना की है।
- वन हेल्थ एक ऐसा दृष्टिकोण है जो यह मानता है कि लोगों का स्वास्थ्य जानवरों के स्वास्थ्य और हमारे साझा पर्यावरण से निकटता से जुड़ा हुआ है।
- राष्ट्रीय डिजिटल पशुधन मिशन (एनडीएलएम) “पशु महामारी की तैयारी” बनाने में मदद कर रहा है
- देश में पशु स्वास्थ्य नियामक पारिस्थितिकी तंत्र को सुव्यवस्थित करने के लिए पशु स्वास्थ्य के लिए अधिकार प्राप्त समिति का गठन किया गया है।
नगर वन योजना
संदर्भ: हाल ही में, नगर वन योजना (Nagar Van Yojana) पर संसद में चर्चा हुई थी।
उद्देश्य: अगले पांच वर्षों (2020-2025) में शहरी क्षेत्रों -शहरी स्थानीय निकायों द्वारा मौजूदा वन भूमि या किसी अन्य खाली भूमि पर- में कम से कम 20 हेक्टेयर भूमि में 400 शहरी वन और 200 नगर वाटिका का निर्माण करना।
विवरण:
- 2020 में लॉन्च की गयी।
- वन का रखरखाव राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा।
- वित्त पोषण: प्रतिपूरक वनीकरण कोष अधिनियम 2016 के तहत ‘कैम्पा फंड’ द्वारा।
- पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री।
- पुणे (महाराष्ट्र) में ‘वारजे शहरी वन’ को योजना के लिए एक आदर्श माना जाएगा।
‘पिच ब्लैक’ युद्धाभ्यास
- संदर्भ: भारत (वायु सेना) ऑस्ट्रेलिया में एक हवाई युद्धाभ्यास में भाग लेगा।
- ‘पिच ब्लैक’ युद्धाभ्यास, ऑस्ट्रेलियाई वायु सेना द्वारा एक द्विवार्षिक बहु-राष्ट्रीय (17 देशों) युद्धाभ्यास है।
अन्य युद्धाभ्यास:
- AUSINDEX (एक द्विपक्षीय नौसेना अभ्यास)
- मालाबार (भारत, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, जापान)
हेलफायर R9X मिसाइल
संदर्भ: अमेरिकी सेना ने काबुल में एक सेफ हाउस की बालकनी पर अल कायदा प्रमुख अयमान अल-जवाहिरी को मारने के लिए अपने ‘गुप्त हथियार’ – हेलफायर R9X मिसाइल / ‘निंजा मिसाइल’ (Hellfire R9X missile) का इस्तेमाल किया।
- AGM-114 R9X के रूप में सैन्य हलकों में प्रसिद्ध Hellfire R9X एक अमेरिकी-मूल की मिसाइल है जिसे व्यक्तिगत लक्ष्यों को शामिल करते हुए ‘न्यूनतम संपार्श्विक क्षति’ पहुचाने के कारण जाना जाता है।
- इसका वजन करीब 45 किलो है और मिसाइल को हेलिकॉप्टर, एयरक्राफ्ट और ह्यूमवेस से भी लॉन्च किया जा सकता है. इन मिसाइलों की रेंज 500 मीटर से 11 किमी तक होती है।
- ‘हेलफायर’ का मतलब हेलीबोर्न, लेजर, फायर एंड फॉरगेट मिसाइल है।
- मिस्र के एक सर्जन ‘अल-जवाहिरी’, जिसके सिर पर $25 मिलियन का इनाम था, ने 11 सितंबर, 2001 को उन हमलों को समन्वित करने में मदद की थी, जिनमें लगभग 3,000 लोग मारे गए थे।
एस्ट्रोबी
संदर्भ: एस्ट्रोबी (Astrobee) नासा का नया फ्री-फ्लाइंग रोबोटिक सिस्टम है।
- एस्ट्रोबी में एक ऐसी प्रणाली शामिल है जो एक शोध मंच के रूप में कार्य करती है जिसे माइक्रोग्रैविटी प्रयोगों के संचालन के लिए तैयार और प्रोग्राम किया जा सकता है। इस प्रकार, इससे यह जानकारी मिलने में मदद मिलेगी कि ‘रोबोटिक्स’ अंतरिक्ष में अंतरिक्ष यात्रियों को किस प्रकार लाभ पहुंचा सकता है।
- एस्ट्रोबी सिस्टम के तीन फ्री-फ्लाइंग रोबोटों, का नाम हनी, क्वीन और बम्बल है। ये रोबोट 12.5 इंच चौड़े क्यूब्स के आकार के हैं।
- एस्ट्रोबी सिस्टम में, तीन क्यूब के आकार के रोबोट, कुछ सॉफ्टवेयर और रिचार्जिंग के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला डॉकिंग चार्जिंग स्टेशन है।
- तीनों रोबोट, बिजली के पंखे का उपयोग करके खुद को आगे बढ़ाते हैं, जिससे उन्हें अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के माइक्रोग्रैविटी वातावरण से उड़ान भरने में सुगमता होती है।
- एस्ट्रोबी रोबोट्स, को ‘सिंक्रनाइज़्ड पोज़िशन होल्ड, एंगेज, रियोरिएंट, एक्सपेरिमेंटल सैटेलाइट’ (SPHERES) रोबोट से प्राप्त ज्ञान पर बनाया गया है, जोकि एक दशक से अधिक समय से अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर कार्यरत है।



















