[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 02 August 2022

विषयसूची

सामान्य अध्ययन-II

  1. सभी स्तरों पर प्रतिनिधित्व
  2. केरल द्वारा MMDR अधिनियम में बदलाव का विरोध
  3. द्विपक्षीय हवाई सेवा समझौता
  4. निजी कारोबारी एवं ड्रोन नियम, 2021

 

सामान्य अध्ययन-III

  1. सरकार के अपने ‘गिग वर्कर्स’
  2. कुशल खेती हेतु ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता’ का बीजारोपण

 

मुख्य परीक्षा संवर्धन हेतु पाठ्य सामग्री (नैतिकता/निबंध)

  1. ऑस्ट्रेलिया में मूलनिवासी शिनाख्त जनमत संग्रह प्रश्न मसौदा जारी
  2. मंगलसूत्र हटाना एक मानसिक क्रूरता का उदहारण

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

  1. जिला विधिक सेवा प्राधिकरण
  2. संशोधित वितरण क्षेत्रक योजना
  3. केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली
  4. वैश्विक जुड़ाव योजना
  5. पाइरीन उपचार के लिए कवक की पहचान

 


सामान्य अध्ययनII


 

विषय: केन्द्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन; इन अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय।

सभी स्तरों पर प्रतिनिधित्व


संदर्भ: हाल ही में, एक बहुत ही साधारण पृष्ठभूमि से आने वाली एक आदिवासी महिला द्रौपदी मुर्मू ने भारत के 15वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली, जोकि स्थानीय स्तर पर सुधारों से संभव हुआ है।

लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण की दिशा में 73वें और 74वें संशोधन ने, राजनीति में प्रतिनिधित्व में विविधता लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

नोट: बस एक बार ठीक से पढ़ लीजिए। आर्टिकल में नोट करने के लिए अधिक सामग्री नहीं है।

‘स्थानीय स्व-शासन’ में महिलाओं के लिए संवैधानिक सुधार

  • अंतरवर्गीय आरक्षण का प्रावधान: अंतरावर्गीय आरक्षण (Intersectional reservation) का तात्पर्य पंचायतों और नगर पालिकाओं की निर्वाचित परिषदों में अनुसूचित जाति महिलाओं, अनुसूचित जनजाति महिलाओं और ओबीसी समूह की महिलाओं के लिए आरक्षण से है।
  • इन संस्थाओं में कम से कम एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होनी चाहिए।
  • 33% से अधिक आरक्षण: बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों ने महिलाओं के आरक्षण को 33% से बढ़ाकर 50% करके संवैधानिक अधिदेश से आगे बढ़कर ‘ओबीसी के लिए आरक्षण’ की शुरुआत की है।

लाभ:

निर्वाचित प्रतिनिधियों की कुल संख्या में वृद्धि करके और इसके घटकों में विविधता लाकर भारतीय राज्य के प्रतिनिधि स्वरूप को व्यापक बनाना।

संबंधित मुद्दे:

इन संवैधानिक सुधारों के 30 वर्षों के बावजूद, स्थानीय सरकारें अभी भी शक्तिशाली “स्व-शासन की इकाइयाँ” नहीं बन पाई हैं; क्योंकि-

  • कोई इन इकाईयों को वास्तविक वित्तीय और प्रशासनिक शक्ति हस्तांतरित नहीं की गई है। राज्य, अभी भी ‘स्थानीय स्व-शासन’ (Local Self-Government) पर महत्वपूर्ण पकड़ रखता है।
  • अन्य सामाजिक आधारों पर आरक्षण के विस्तार की अपेक्षाकृत उपेक्षा की गई है।
  • स्थानीय सरकार के चुनावों में ओबीसी आरक्षण जैसे ‘स्थानीय सरकारों में प्रतिनिधित्व’ में विविधता लाने के बारे में न्यायपालिका काफी संशय में रही है।
  • ‘पंचायत पति’ का मुद्दा: आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों में महिलाएं कभी-कभी अपने पतियों के लिए मात्र प्रॉक्सी बन कर रह जाती हैं।

निष्कर्ष:

अनुभवजन्य अध्ययनों से पता चला है कि महिलाओं के नेतृत्व वाली पंचायतें सार्वजनिक वस्तुओं में अधिक निवेश करती हैं, बुनियादी ढांचे को महिलाओं के लिए अधिक प्रासंगिक बनाती हैं, और ग्रामीण मामलों में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाती हैं। सुप्रीमकोर्ट के निर्देशानुसार, पिछड़ेपन के “अनुभवजन्य निष्कर्षों” द्वारा ‘ओबीसी को आरक्षण’ को विविधता लाने के लिए उचित ठहराया जाना चाहिए।

न्यायपालिका में महिलाएं:

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय में 4 और उच्च न्यायालयों में 96 महिलाएं हैं।

इंस्टा लिंक:

स्थानीय स्तर पर शक्तियों का हस्तांतरण

मेंस लिंक

क्या स्थानीय सरकार में महिलाओं के लिए ‘कोटा नीति’ महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण की दिशा में लागू हुई है? आलोचनात्मक टिप्पणी कीजिए। (10 अंक)

स्रोत: द हिंदू, द इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

केरल द्वारा MMDR अधिनियम में बदलाव का विरोध

संदर्भ:

केरल सरकार ने खदान एवं खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम (Mines and Minerals (Development and Regulation) Act – MMDR Act) में प्रस्तावित संशोधनों के नए सेट का विरोध किया है।

  • राज्य के उद्योग मंत्री ने केंद्रीय कोयला और खान मंत्री से मुलाकात की और उन्हें अवगत कराया कि ये संशोधन, राज्यों के अधिकारों का उल्लंघन है क्योंकि खनिज राज्यों के दायरे में आते हैं।
  • केंद्र ने MMDR अधिनियम में संशोधन के मसौदे पर जनता से सुझाव आमंत्रित किए थे।

प्रमुख बिंदु:

  • परमाणु खनिजों की सूची में शामिल कुछ खनिजों की केंद्र सरकार द्वारा नीलामी: राज्य सरकारों को परामर्श के लिए भेजे गए नोट में शामिल ‘छठी मद’ के खिलाफ मुख्य आपत्ति दर्ज की गयी है, जिसमे केंद्र सरकार परमाणु खनिजों की सूची में शामिल कुछ खनिजों की नीलामी करने का अधिकार देने का प्रावधान किया गया है।
  • संविधान की सूची II की प्रविष्टि 23 और अनुच्छेद 246(3): राज्य सरकारें, संबंधित राज्य के क्षेत्र में स्थित खदानों और खनिजों के मालिक होगीं, और संविधान की सूची II की प्रविष्टि 23 और अनुच्छेद 246 (3) के तहत राज्य को प्रदत्त संवैधानिक अधिकार के अंतर्गत राज्य विधानसभाएं ऐसे खनिजों पर कानून बना सकती हैं।

अनुच्छेद 246(3):

इसके अनुसार, किसी राज्य के विधान-मंडल को, सातवीं अनुसूची की सूची 2 में (जिसे इस संविधान में राज्य सूची कहा गया है) प्रगणित किसी भी विषय के संबंध में उस राज्य या उसके किसी भाग के लिए विधि बनाने की अनन्य शक्ति है।

मोनाज़ाइट:

मोनाज़ाइट (Monazite), समुद्र तट की रेत पर पाए जाने वाले खनिजों में से एक है। इस रेत में लैंथेनम, सेरियम, प्रेजोडायमियम, नियोडिमियम आदि जैसे दुर्लभ पृथ्वी तत्व पाए जाते हैं।

  • इस रेत में ‘थोरियम’ भी पाया जाता है जोकि एक “नियत पदार्थ” (Prescribed Substance) है। नियत पदार्थों की सूची 2006 में परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962 के तहत संशोधित की गई थी।
  • मोनाज़ाइट, एक दुर्लभ फॉस्फेट खनिज है जो आमतौर पर ग्रेनाइट, पेग्माटाइट, शिस्ट और नीस जैसे आग्नेय और मेटामॉर्फिक चट्टानों में छोटे पृथक कणों में पाया जाता है।
  • यह पारभासी और अपक्षय के लिए सबसे प्रतिरोधी खनिजों में से एक है।
  • यह एक रेडियोधर्मी परमाणु खनिज है जिसका उपयोग थोरियम (500 पीपीएम तक) के उत्पादन के लिए किया जाता है और इसमें, परमाणु ऊर्जा प्रणाली में ईंधन के रूप में उपयोग किए जाने की क्षमता होती है।

मोनाजाइट वितरण:

इंस्टा लिंक्स:

खदान एवं खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम

7वीं अनुसूची

अभ्यास प्रश्न:

आपको क्या लगता है कि सहयोग, प्रतिस्पर्धा और टकराव ने भारत में संघ की प्रकृति को किस हद तक आकार दिया है? अपने उत्तर की पुष्टि के लिए कुछ हालिया उदाहरण दें। (यूपीएससी 2020)

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार।

भारत द्वारा 116 देशों के साथ द्विपक्षीय हवाई सेवा समझौते पर हस्ताक्षर

संदर्भ:

भारत द्वारा अमेरिका, ब्रिटेन, संयुक्त अरब अमीरात आदि देशों सहित पड़ोसी बांग्लादेश, अफगानिस्तान और पाकिस्तान सहित 116 देशों के साथ ‘द्विपक्षीय हवाई सेवा समझौतों’ (Bilateral Air Service Agreement) पर हस्ताक्षर किए जा चुके हैं।

  • इन देशों की कोई भी नामित विदेशी एयरलाइन भारत में एक स्थान से दूसरे स्थान संचालित की जा सकती है यदि इसे भारत और इन देशों के बीच हस्ताक्षरित द्विपक्षीय हवाई सेवा समझौते (Air Services Agreement – ASA) में ‘पॉइंट ऑफ़ कॉल’ के रूप में नामित किया गया है।
  • भारत द्वारा नामित वाहक विमान, भारत द्वारा विदेशों के साथ संपन्न द्विपक्षीय हवाई सेवा समझौते के दायरे में ‘कन्नूर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे’ सहित किसी भी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से/के लिए अधिसूचित संचालन करने के लिए स्वतंत्र हैं।
  • वर्तमान में, विदेशी वाहक विमानों के पक्ष में ‘पॉइंट ऑफ़ कॉल’ की संख्या में एक महत्वपूर्ण असंतुलन के कारण, भारत सरकार किसी भी गैर-मेट्रो हवाई अड्डे को, इस उद्देश्य के लिए किसी भी विदेशी वाहक को यात्री सेवाओं के संचालन के संबंध में नए ‘पॉइंट ऑफ़ कॉल’ के रूप में अनुमति नहीं दे रही है।

भारत की ओपन स्काई नीति:

राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन नीति, 2016 (National Civil Aviation Policy, 2016) के तहत भारत सरकार तहत सरकार SAARC देशों के साथ-साथ नई दिल्ली से 5,000 किलोमीटर की अधिक दूरी वाले देशों के साथ पारस्परिक आधार (Reciprocal Basis) पर ‘ओपन स्काई’ हवाई सेवा समझौते कर सकती है।

  • इसका तात्पर्य है कि 5,000 किलोमीटर से कम दूरी पर स्थित देशों के साथ वायु-यातायात हेतु द्विपक्षीय समझौता किया जायेगा तथा दोनों देशो के मध्य उड़ानों की संख्या को पारस्परिक रूप से तय किया जायेगा।
  • भारत का ग्रीस, जमैका, गुयाना, फिनलैंड, अमेरिका, जापान आदि देशों के साथ ‘खुल आसमान समझौता’ (Open Sky Agreements) हैं।

हवाई फ्रीडमस् (Freedoms of air):

अंतर्राष्ट्रीय वायु यातायात विभिन्न ‘हवाई फ्रीडम’ से संचालित होता है।

किसी देश द्वारा विदेशी एयरलाइनों को देश में उड़ान भरने के लिए दी गयी अनुमति ‘फ्रीडम ऑफ़ एयर’ (हवाई फ्रीडम) पर निर्भर करती है। अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन समझौता (Convention on International Civil Aviation),1944 के अनुसार नौ हवाई फ्रीडम निर्धारित की गयी हैं।

महत्वपूर्ण हवाई फ्रीडमस्:

  1. पहली हवाई फ्रीडम (First freedom of air): किसी वायुयान को अपने गृह राज्य से उड़ान भरने की अनुमति देती है।
  2. दूसरी हवाई फ्रीडम (Second freedom of air): वायुयान को किसी दूसरे देश में उतरने की अनुमति देती है।
  3. तीसरी और चौथी हवाई फ्रीडम (Third and fourth freedoms of air): किसी वायुयान को दूसरे देश में उतरने के पश्चात् वापस अपने देश के लिए उड़ान भरने तथा अपने देश में उतरने की अनुमति देती है।
  4. पांचवी और छठी हवाई फ्रीडमस् (The fifth and sixth freedoms): इसके अंतर्गत एयरलाइंस को किसी देश से यात्री लेने तथा अपने (एयरलाइंस के) मूल देश के अलावा किसी तीसरे देश के लिए ले जाने की अनुमति होती है।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

निजी कारोबारी एवं ड्रोन नियम, 2021

संदर्भ:

‘ड्रोन नियमावली, 2021’ (Drone Rules 2021) के अनुसार, निजी कारोबारी भी डिलीवरी उद्देश्यों के लिए ड्रोन का उपयोग कर सकते हैं।

  • सरकार द्वारा वैक्सीन वितरण, तेल पाइपलाइनों और बिजली पारेषण लाइनों के निरीक्षण, कृषि छिड़काव आदि के लिए ड्रोन प्रदाताओं की सेवाओं का उपयोग किया जा रहा है। निजी कारोबारी भी अब ऐसा कर सकते हैं।
  • 2021 में, सरकार ने निजी कंपनियों द्वारा ड्रोन निर्माण के विकास को बढ़ावा देने के लिए ‘प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव’ (PLI) योजना को अधिसूचित किया गया था।
  • पीएलआई दर, तीन वित्तीय वर्षों में मूल्यवर्धन का 20 प्रतिशत निर्धारित की गयी है। एक निर्माता के लिए ‘प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव’ कुल वार्षिक परिव्यय का 25 प्रतिशत होगा।
  • इस योजना के लाभार्थियों में ड्रोन के 12 निर्माता और ड्रोन घटकों (Drone Components) के 11 निर्माता शामिल हैं।

ड्रोन नियम, 2021 के तहत नियामक ढांचे के प्रमुख पहलू:

  • पंजीकरण और एक विशिष्ट पहचान संख्या (UIN): अनुसंधान, विकास और परीक्षण उद्देश्यों को छोड़कर प्रत्येक ड्रोन को पंजीकृत होना आवश्यक है और उसके पास एक ‘विशिष्ट पहचान संख्या’ (Unique Identification Number – UIN) होनी चाहिए।
  • पूरे हवाई क्षेत्र का पृथक्करण: पूरे हवाई क्षेत्र को लाल (रेड), पीले (येलो) और हरे (ग्रीन) जोन में विभाजित करते हुए देश के हवाई क्षेत्र का नक्शा ‘डिजिटल स्काई प्लेटफॉर्म’ पर उपलब्ध है।
  • लाल और पीले क्षेत्रों में ड्रोन का संचालन क्रमशः केंद्र सरकार और संबंधित हवाई यातायात नियंत्रण (ATC) प्राधिकरण के अनुमोदन के अधीन है।
  • ‘ग्रीन जोन’ में ड्रोन के संचालन के लिए किसी अनुमोदन की आवश्यकता नहीं है।
  • राज्य और केंद्र शासित प्रदेश की सरकारों को सशक्त बनाना: नियमों के तहत राज्य सरकार, केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को एक निर्दिष्ट अवधि के लिए ‘अस्थायी रेड जोन’ घोषित करने का अधिकार दिया गया है।
  • आवश्यक प्रकार का प्रमाणन: ड्रोन के पास नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) द्वारा जारी ‘आवश्यक प्रमाणन’ (necessary certification) होना जरूरी है।
  • हालांकि नैनो ड्रोन (250 ग्राम तक का वजन) और अनुसंधान और मनोरंजन उद्देश्यों के लिए बनाए गए मॉडल ड्रोन के मामले में ‘किसी प्रकार के प्रमाणीकरण’ की आवश्यकता नहीं है।
  • आवश्यक व्यक्तिगत विवरण: ड्रोन के मालिक और ऑपरेटरों को किसी भी पंजीकरण या लाइसेंस को जारी करने के लिए अपने भारतीय पासपोर्ट नंबर आदि सहित आवश्यक व्यक्तिगत विवरण प्रस्तुत करना आवश्यक है।
  • ड्रोन नियमवली, 2021 का नियम 17: यह नियम, लागू शुल्क के साथ डिजिटल स्काई प्लेटफॉर्म पर ड्रोन हस्तांतरणकर्ता, हस्तांतरणकर्ता और विशिष्ट पहचान संख्या के आवश्यक विवरण प्रदान करने के बाद ही बिक्री, पट्टे, उपहार या किसी अन्य माध्यम से ड्रोन को किसी अन्य व्यक्ति को हस्तांतरित करने के प्रावधान करता है।
  • रिमोट पायलट ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन (RPTO) का अधिकार: यह DGCA द्वारा निर्दिष्ट समय सीमा के भीतर किया जाएगा।
  • उल्लंघन के लिए सजा: ड्रोन संचालन, जो ड्रोन नियम, 2021 के प्रावधानों का उल्लंघन करते हैं, ड्रोन नियम, 2021 के नियम 49 के साथ-साथ किसी भी अन्य कानून के प्रावधानों के तहत दंडनीय हैं।

कृषि में ड्रोन का उपयोग:

 

इंस्टा लिंक्स:

स्वामित्व योजना

अभ्यास प्रश्न:

सरकार कई उद्देश्यों के लिए ड्रोन प्रदाताओं की सेवाओं का उपयोग कर रही है। इस कथन के आलोक में, ड्रोन नियम, 2021 का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 


सामान्य अध्ययनIII


 

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।

सरकार के अपने ‘गिग वर्कर्स’


संदर्भ: ‘अग्निपथ योजना’ ने काम के लिए ‘अस्थायी श्रमिकों’ को आउटसोर्स करने संबंधी सरकार के दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला है।

(नोट: बस एक बार इसे पढ़ लीजिए। यह इतना महत्वपूर्ण विषय नहीं है।)

‘अस्थायी नौकरियों’ (Temporary jobs) में काफी समय से उपलब्ध सरकारी रोजगारों की विशाल संख्या शामिल है। सरकारी रोजगार को तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा सकता है:

  1. स्थायी (Permanent)
  2. संविदात्मक (Contractual)
  3. दैनिक मजदूर (Daily wagers)

वस्तुस्थिति:

अत्यधिक विशिष्ट कार्यों से लेकर सबसे नियमित कार्यों- जैसेकि सफाई कर्मचारी (स्वच्छता कार्यकर्ता), आपकी सिटी बस सेवा का ड्राइवर/कंडक्टर, कनिष्ठ अभियंता या उच्च वेतन पाने वाला सलाहकार- तक आउटसोर्सिंग (बाहरी स्रोत से सेवाएँ प्राप्त करना) सरकार के काम करने का प्रमुख तरीका बन गया है।

एक सर्वेक्षण के अनुसार, केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों में संविदा कर्मियों (Contract Workers) की संख्या मार्च 2020 में बढ़कर 4,98,807 हो गई, जो मार्च 2016 में 2,67,929 थी।

संविदा कर्मियों के लाभ:

सरकार के लिए: एक “स्थायी” कर्मी की नियुक्ति की तुलना में, सरकारी इकाई की लागत और देनदारियां काफी कम हो जाती हैं।

  • जिम्मेदारी का भार ‘ठेकेदार’ पर स्थानांतरित कर दिया जाता है।
  • ‘नियमन’ की मांग करने वाले मुकदमे की कोई संभावना नहीं होती है।

संबंधित मुद्दे: लंबी अवधि तक वेतन का भुगतान न करना, ठेकेदार द्वारा श्रमिक के कल्याण के लिए वैधानिक सुविधाओं जैसे कि भविष्य निधि (पीएफ), कर्मचारी राज्य बीमा (ईएसआई), आदि में हेरफेर करना, और “स्थायी” कर्मचारी की तुलना में काम का असमान वितरण।

दीर्घकालीन प्रभाव: सार्वजनिक सेवाओं, जिसमें स्वच्छता, सार्वजनिक परिवहन, स्वास्थ्य आदि शामिल हैं, की गुणवत्ता में कमी आती है।

आवश्यकता:

  • सरकार की क्षमता, विशेष रूप से राज्य के उन अंगो जो लोगों को विभिन्न सेवाएं प्रदान करते हैं, में वृद्धि करने की आवश्यकता है। साथ ही साथ भारत की बढ़ती कामकाजी उम्र की आबादी के लिए रोजगार के व्यवहारिक अवसर पैदा करने की आवश्यकता है।
  • प्रभावी प्रक्रिया का पालन करना: यदि संविदात्मक अनुबंधों के तौर-तरीकों पर परिश्रमपूर्वक काम किया जाता है, तो स्थानीय निकायों, पैरास्टेटल्स (Parastatals), विशेष प्रयोजन वाहनों और अन्य सार्वजनिक उपयोगिताओं को काफी लाभ होता है ।
  • जैसेकि, आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय का ‘शहरी शिक्षण इंटर्नशिप कार्यक्रम’ (ट्यूलिप), शहर के अधिकारियों को एक निश्चित अवधि के लिए सीधे एक युवा कार्यबल को संलग्न करने में सक्षम बनाता है।

निष्कर्ष:

भले ही एक स्थायी सरकारी नौकरी अत्यधिक प्रतिष्ठित हो, फिर भी यह पहचानना महत्वपूर्ण हो सकता है कि हर कोई विभिन्न कारणों से ‘स्थायी’ होने की आकांक्षा नहीं रख सकता है।

सरासर शोषण के खिलाफ सुरक्षा उपायों के साथ सरकार के साथ निश्चित अवधि के अनुबंध रोजगार का एक प्रमुख स्रोत हो सकता है। हालांकि, भर्ती के ऐसे तरीकों को हमारे संविधान में निहित सामाजिक न्याय के दृष्टिकोण के अनुरूप सकारात्मक कार्रवाई के सिद्धांतों को आत्मसात करना होगा। आरक्षण के प्रावधानों को दरकिनार करने वाला तंत्र बनने से बचने के लिए यह काफी महत्वपूर्ण है।

इंस्टा लिंक:

भारत के ‘गिग कार्यबल’ (अस्थायी कार्यबल) पर नीति आयोग की रिपोर्ट

मेंस लिंक:

सरकारी सार्वजनिक सेवा में ‘संविदाकरण’ तथा श्रम शक्ति के बारे में तथ्यों और आशंकाओं पर चर्चा कीजिए। (15अंक)

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: मुख्य फसलें- देश के विभिन्न भागों में फसलों का पैटर्न- सिंचाई के विभिन्न प्रकार एवं सिंचाई प्रणाली- कृषि उत्पाद का भंडारण, परिवहन तथा विपणन, संबंधित विषय और बाधाएँ; किसानों की सहायता के लिये ई-प्रौद्योगिकी।

कुशल खेती हेतु ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता का बीजारोपण

संदर्भ: ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता’ (Artificial Intelligence – AI) विषय के बारे में अलग-अलग अखबारों में 2-3 अलग-अलग लेख आए है, हमने उन सभी को एक साथ जोड़ दिया है।

(नोट: ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता’ (AI) मेन्स और प्रीलिम्स दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। चर्चा किए गए विषय को समझें।)

अमेरिकी कंप्यूटर वैज्ञानिक जॉन मैकार्थी (John McCarthy) ने पहली बार 1955 के ‘डार्टमाउथ सम्मेलन’ में दुनिया को “कृत्रिम बुद्धिमत्ता” (Artificial Intelligence) शब्द से परिचित कराया था।

वस्तुस्थिति:

नीति आयोग के अनुसार, ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ में 2035 तक भारत की अर्थव्यवस्था में $1 ट्रिलियन जोड़ने की क्षमता है और, कुछ विशेषज्ञों और शिक्षाविदों के अनुसार, आर्टफिशल इन्टेलिजन्स’ एक महत्वपूर्ण हिस्सा कृषि क्षेत्र में होगा।

कृषि में ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता’ (AI) का अनुप्रयोग:

  • कृषि क्षेत्र में कुशल और लागत प्रभावी संसाधन और उपज प्रबंधन हेतु।
  • स्मार्ट कृषि: यह आपके फार्म पर इंटरनेट ऑफ थिंग्स, सेंसर, लोकेशन सिस्टम, रोबोट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीकों के उपयोग को संदर्भित करता है।
  • AI, क्लाउड कंप्यूटिंग, सैटेलाइट इमेजरी और उन्नत एनालिटिक्स, संयोजन में, स्मार्ट कृषि के लिए एक पारिस्थितिकी तंत्र बना सकते हैं।
  • पूर्वानुमान विश्लेषण: ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता’, मौसमी पूर्वानुमान मॉडल के आधार पर उच्चतम संभव पैदावार सुनिश्चित करेगी।
  • आपूर्ति-मांग असंतुलन की रियल टाइम जानकारी। उदाहरण के लिए, आपूर्ति और मांग को मैप करने में सक्षम एक आपूर्ति-मांग इंजन या भविष्यवक्ता, इस समस्या को काफी हद तक कम कर सकता है।
  • निर्धारित बफर जोन में खरपतवारों का पता लगाकर और उन्हें लक्षित करके कीटनाशकों और खरपतवारनाशी का उपयोग किया जाना चाहिए या नहीं, इसका सटीक निर्धारण।
  • इससे पैदावार में वृद्धि हो सकती है और कीटनाशकों और खरपतवारनाशी का उपयोग कम हो सकता है।
  • अन्य विस्तारित सेवाएं: AI-आधारित प्राकृतिक भाषा अनुवाद- कृषि-सलाह, मौसम पूर्वानुमान, और कई स्थानीय भाषाओं में सूखे के लिए प्रारंभिक चेतावनी जारी करने और फैलाने की सुविधा प्रदान करता है।

चुनौतियां:

  • उचित बुनियादी ढांचे और जानकारी की कमी, कामकाज की पारंपरिक शैली में विश्वास, जागरूकता की कमी और किसान पूंजी की कमी।
  • भूमि का विखंडन भी नई प्रौद्योगिकियों के बड़े पैमाने पर कार्यान्वयन के लिए एक बाधा साबित हो सकता है।

किए गए उपाय:

  • भारतीय खेती को एक व्यवहार्य, आत्मनिर्भर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी उद्यम बनाने के लिए साइबर कृषि-भौतिक प्रणालियों के लिए ICAR द्वारा कई पहलें शुरू की गयी हैं।
  • नीति आयोग ने, ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता’ (AI) को अपनी राष्ट्रीय रणनीति के हिस्से के रूप में ‘कृषि पर फोकस क्षेत्रों’ में से एक के रूप में चिह्नित किया है।

राज्य:

  • कर्नाटक ने ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता’ का उपयोग करते हुए पूर्वानुमान बताने वाले मॉडल, कृषि उपज, और कीमत-संबंधी जानकारी के लिए एक प्रमुख बहुराष्ट्रीय कंपनी के साथ भागीदारी की है।
  • उत्तर प्रदेश, आईआईटी-कानपुर में भारतीय एग्रीटेक इन्क्यूबेशन नेटवर्क स्थापित करने के लिए बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन (बीएमजीएफ) और टाटा ट्रस्ट के साथ सहयोग कर रहा है।
  • महाराष्ट्र ने ‘महा एग्रीटेक परियोजना’ शुरू की है जिसका उद्देश्य विभिन्न कृषि समस्याओं को हल करने के लिए उपग्रहों और ड्रोन के उपयोग और उपयोग को बढ़ावा देना है।

निष्कर्ष:

यह उचित समय है कि सहयोगी कृषि-डेटा स्टैक बनाए जाएं और MSME और बड़े निगम इस स्थान में निवेश करें। सार्वजनिक और निजी संस्थानों से भागीदारी के सही मेल की आवश्यकता है।

जीव विज्ञान में ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता:

संदर्भ: अल्फाबेट की ‘डीपमाइंड टेक्नोलॉजीज’ ने हाल ही में 200 मिलियन से अधिक प्रोटीन की 3D संरचनाओं की भविष्यवाणी की है। इसके ‘एआई सिस्टम अल्फाफोल्ड’ (AlphaFold) द्वारा उत्पन्न, इसका उद्देश्य शोधकर्ताओं को यह समझने में मदद करना है कि प्रोटीन – जीवन के निर्माण खंड – कैसे गुणित कर सकते हैं।

  • प्रोटीन: मानव शरीर में एक कोशिका के भीतर 20,000 से 100,000 से अधिक अद्वितीय प्रकार के प्रोटीन होने का अनुमान है, जिनमें से प्रत्येक का एक विशिष्ट कार्य होता है। ये प्रोटीन पेप्टाइड (अमीनो एसिड की छोटी श्रृंखला) बॉन्ड से जुड़े विभिन्न प्रकार के 20-22 अमीनो एसिड की लंबी श्रृंखलाओं से बने होते हैं। इनका क्रम यह निर्धारित करता है कि प्रोटीन श्रृंखला अपने आप को एक 3D संरचना में किस प्रकार परिवर्तित (fold) करेगी।
  • फोल्डिंग का महत्व: फोल्डिंग (Folding), प्रोटीन को एक कार्यात्मक आकार या संरचना में परिवर्तित करती है। यदि शोधकर्ता यह पूर्वानुमान कर सकते हैं कि प्रोटीन किस प्रकार गुणित होता है, तो वे कोशिकाओं की कार्य-पद्धति को बेहतर तरीके से सीख सकते हैं और किस प्रकार ‘मिसफोल्डड प्रोटीन’, बीमारियों का कारण बन सकते हैं। ‘अल्फाफोल्ड’ अपनी अमीनो एसिड श्रृंखला से प्रोटीन की 3डी संरचना का पूर्वानुमान करने के लिए ‘एआई’ का उपयोग करता है, जिससे कोशिकाओं की कार्य-पद्धति जानने और संबंधित रोग और दवाओं की खोज में तेजी लाने में मदद मिलती है।

 

युवाओं के लिए उत्तरदायी कृत्रिम बुद्धिमत्ता 2022

संदर्भ: इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के ‘राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस डिवीजन’ और इंटेल इंडिया द्वारा लॉन्च किया गया।

उद्देश्य: स्कूली छात्रों (कक्षा 8-12) को ‘एआई’ कौशल के साथ समावेशी तरीके से सीखने और सलाह के अवसरों पर विशेष रूप से सक्षम बनाना।

अन्य पहलें:

  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर राष्ट्रीय कार्यक्रम
  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रिसर्च, एनालिटिक्स और नॉलेज एसिमिलेशन प्लेटफॉर्म (AIRAWAT) – क्लाउड कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए राष्ट्रीय रणनीति
  • कामकोटि समिति: क्रॉस-इंडस्ट्री सूचना की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल डेटा बैंक, मार्केटप्लेस और एक्सचेंज की स्थापना
  • राष्ट्रीय कृत्रिम बुद्धिमत्ता मिशन

इंस्टा लिंक:

कृषि में रोबोटिक्स

मेंस लिंक

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भारत में कृषि क्षेत्र में क्रांति लायेगी। आलोचनात्मक टिप्पणी कीजिए। (15अंक)

स्रोत: टाइम्स ऑफ इंडिया, लाइव मिंट

 


मुख्य परीक्षा संवर्धन हेतु पाठ्य सामग्री (नैतिकता/निबंध)


ऑस्ट्रेलिया में मूलनिवासी शिनाख्त जनमत संग्रह प्रश्न मसौदा जारी

हाल ही में, ऑस्ट्रेलिया के प्रधान मंत्री ने ‘मूलनिवासी शिनाख्त जनमत संग्रह प्रश्न’ (Indigenous Recognition Referendum Question) के मसौदे का अनावरण किया है।

ऑस्ट्रेलिया सरकार द्वारा एक जनमत संग्रह कराए जाने की तैयारी की जा रही है। संविधान में देशी (मूलनिवासी) अल्पसंख्यकों को मान्यता देने और उनके जीवन को प्रभावित करने वाले फैसलों पर सरकारों द्वारा आदिवासी लोगों से परामर्श करने का प्रावधान शामिल करने के लिए, संविधान में बदलाव करने हेतु यह जनमत संग्रह आवश्यक है।

(नोट: इस उदाहरण का उपयोग उन उत्तरों में किया जा सकता है जहाँ हम आदिवासियों को समावेशित करने की बात करते हैं।)

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मंगलसूत्र हटाना एक मानसिक क्रूरता का उदहारण

तमिलनाडु में एक महिला पर अपनी थाली (मंगलसूत्र) को हटाकर अपने पति की मानसिक प्रताड़ना देने का आरोप लगाया गया है।

  • भले ही, महिलाओं को मंगलसूत्र को हर समय पहनना अनिवार्य करने वाला कोई कानून नहीं है।
  • इस तरह की घटनाएं इस बात को उजागर करती हैं, कि कैसे 21वीं सदी में भी महिलाएं अभी भी असमानता और पूर्वाग्रह की शिकार हैं।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


जिला विधिक सेवा प्राधिकरण

संदर्भ: प्रधानमंत्री ने ‘जिला विधिक सेवा प्राधिकरण’ (District Legal Services Authorities – DLSA) की पहली बैठक के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया।

‘जिला विधिक सेवा प्राधिकरण’ (DLSA) की स्थापना गरीबों के लिए मुफ्त कानूनी सहायता, लोक अदालत का आयोजन, कानूनी साक्षरता प्रदान करने के लिए की गई है।

विवरण:

  • विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम (Legal Services Authorities Act, 1987 – LSA 1987) के तहत स्थापित।
  • जिले में कानूनी सहायता कार्यक्रमों और योजनाओं को लागू करने के लिए प्रत्येक जिले में ‘जिला विधिक सेवा प्राधिकरण’ का गठन किया जाता है।
  • भारत में 676 DLSA कार्यरत हैं, जिनकी अध्यक्षता एक जिला न्यायाधीश करता है।

पृष्ठभूमि:

विभिन्न स्तरों पर विधिक सेवा संस्थान स्थापित किए गए हैं, जैसे,

  • राष्ट्रीय स्तर पर ‘राष्‍ट्रीय विधि सेवा प्राधिकरण’ (National Legal Services Authority – NALSA)। भारत के मुख्य न्यायाधीश इसके संरक्षक होते हैं।
  • राज्य स्तर पर ‘राज्य विधि सेवा प्राधिकरण’ (State Legal Services Authority – SLSA)। इसकी अध्यक्षता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश करते हैं।
  • जिला स्तर पर ‘जिला विधिक सेवा प्राधिकरण’ (District Legal Services Authorities – DLSA) ।
  • तालुका/उप-मंडल स्तर पर ‘तालुका स्तर विधिक सेवा प्राधिकरण’ (Taluka Legal Services Authorities – TLSC) इसकी अध्यक्षता उच्च न्यायालय के सिविल जज करते हैं।

पात्रता: महिलाएं और बच्चे, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के सदस्य, औद्योगिक कामगार, सामूहिक आपदा/हिंसा के शिकार, विकलांग व्यक्ति, हिरासत में लिए गए व्यक्ति आदि।

पहल: सरकार ने ‘दिशा योजना’ के तहत न्याय कार्यक्रमों तक सभी पहुंच को समन्वित कर दिया है।

 

संशोधित वितरण क्षेत्रक योजना

संदर्भ: DISCOMs को सहायता प्रदान करने हेतु ‘संशोधित वितरण क्षेत्रक योजना’ (Revamped Distribution Sector Scheme – RDSS) शुरू की गयी है।

उद्देश्य: ‘संशोधित वितरण क्षेत्रक योजना’ (RDSS), DISCOMs की वित्तीय स्थिरता और परिचालन क्षमता में सुधार के लिए एक सुधार-आधारित और परिणाम से जुड़ी योजना है। इसके तहत, ‘वितरण बुनियादी ढांचे’ जैसे स्मार्ट प्रीपेड मीटर के आधुनिकीकरण के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। इसके निम्नलिखित उद्देश्य है:

  • AT & C हानि को 2024-25 तक 12-15% तक कम करना।
  • DISCOMs का वित्तीय घाटा (आपूर्ति-औसत राजस्व प्राप्त की औसत लागत) को शून्य पर लाना।
  • स्मार्ट मीटर की अनिवार्य स्थापना (2025 तक 250 मिलियन स्मार्ट मीटर स्थापित करने का लक्ष्य)।

समयावधि: 2021-22 से 2025-26

नोडल एजेंसी: विद्युत मंत्रालय के अधीन ग्रामीण विद्युतीकरण निगम और विद्युत वित्त निगम।

पात्रता: राज्य के स्वामित्व वाली सभी DISCOMs

इस योजना के तहत किए जाने वाले अन्य कार्यक्रम हैं: भाग ए (प्रीपेड स्मार्ट मीटर, कृषि फीडरों का सौर-करण, फीडरों का पृथक्करण, एआई का उपयोग आदि) और भाग बी (प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण)।

अम्ब्रेला कार्यक्रम: इस योजना में, अन्य मौजूदा बिजली क्षेत्र सुधार योजनाओं – एकीकृत बिजली विकास योजना, डीडीयू ग्राम ज्योति योजना, और प्रधान मंत्री सहज बिजली हर घर योजना (सौभाग्य) का विलय किया गया है।

केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली

संदर्भ: शिकायतों के निवारण की समय-सीमा को 45 दिन से घटाकर 30 दिन कर दिया गया है।

विवरण:

केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली (Centralized Public Grievances Redress and Monitoring System – CPGRAM), राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (MeitY) द्वारा लोक शिकायत निदेशालय (DPG) और प्रशासनिक सुधार विभाग के सहयोग से विकसित एक ऑनलाइन वेब-सक्षम प्रणाली है।

CPGRAM, जनता की शिकायतों को एक कुशल तरीके से प्राप्त करने, उनका निवारण करने और उनकी निगरानी करने में मदद करती है।

 

 

वैश्विक जुड़ाव योजना

संदर्भ: संस्कृति मंत्रालय द्वारा एक ‘वैश्विक जुड़ाव योजना’ (Global Engagement Scheme) का कार्यान्वयन किया जाता है।

  • इस योजना के तहत अन्य देशों में भारत के त्योहारों का आयोजन लोक कला और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों जैसे प्रदर्शनियों, नृत्य, संगीत, रंगमंच, भोजन उत्सव, साहित्यिक उत्सव, फिल्म उत्सव, योग आदि को प्रदर्शित किया जाता है।
  • इसके अलावा संस्कृति मंत्रालय, विदेश मंत्रालय के साथ समन्वित तरीके से भी काम करता है। इस योजना के तहत, संस्कृति मंत्रालय भारत-विदेश मैत्री सांस्कृतिक समितियों को विदेशों में उनके प्रचार के लिए लोक कला और अन्य सांस्कृतिक गतिविधियों सहित कार्यक्रमों और गतिविधियों के आयोजन के लिए अनुदान सहायता भी देता है।

पाइरीन उपचार के लिए कवक की पहचान

काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम (CSIR-IIP), देहरादून के शोधकर्ताओं ने पर्यावरण से जहरीले, जिद्दी और कैंसर-जनक ‘’पॉलीसाइक्लिक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन’ (polycyclic aromatic hydrocarbons – PAHs) को हटाने में सक्षम एक कवक की पहचान की है।

  • पाइरीन (Pyrene), जिसमें चार बेंजीन रिंग होते हैं, PAH के अत्यधिक विषैले वर्ग के अंतर्गत आता है, जिसमें कार्सिनोजेनिक और म्यूटाजेनिक गुण होते हैं।
  • यह मिट्टी, पानी और वातावरण जैसे पर्यावरणीय तंत्र में जमा हो जाता है, जिसके परिणामस्वरूप व्यापक पर्यावरण प्रदूषण होता है, जिससे दूषित पर्यावरणीय मैट्रिक्स का पर्याप्त उपचार करने की आवश्यकता होती है।
  • अधिकांश पीएएच की तरह, पाइरीन का उपयोग रंग, प्लास्टिक और कीटनाशक बनाने के लिए किया जाता है। इसका उपयोग बेंजो (ए) पाइरीन नामक एक अन्य पीएएच बनाने के लिए भी किया जाता है।