[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 28 July 2022

विषयसूची

सामान्य अध्ययन-II

  1. राष्ट्रीय डोपिंग रोधी विधेयक, 2021 पारित
  2. भारत के नागरिक समाज को नष्ट करने की कोशिश

 

सामान्य अध्ययन-III

  1. वेयरहाउसिंग एक्ट में संशोधन

 

मुख्य परीक्षा संवर्धन हेतु पाठ्य सामग्री (नैतिकता/निबंध)

  1. ‘वन’ (ऑर्गेनिक नॉर्थ ईस्ट) और ‘नॉर्थ ईस्ट फ्रेश’
  2. तमिलनाडु में ‘मुख्यमंत्री नाश्ता योजना’

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

  1. कॉफी (संवर्धन और विकास) विधेयक, 2022
  2. MAGIFAC
  3. संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी
  4. विद्युत् उत्पादन क्षमता
  5. फाइबरीकरण
  6. मंकीपॉक्स वायरस का टीका
  7. भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद
  8. लाइट-माल्टेड अल्बाट्रोस
  9. एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी
  10. क्रिप्टो-जैकिंग

 


सामान्य अध्ययनII


 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

 राष्ट्रीय डोपिंग रोधी विधेयक, 2021 पारित

संदर्भ:

हाल ही में, लोकसभा में ‘राष्ट्रीय डोपिंग रोधी विधेयक’, 2021 (National Anti-Doping Bill, 2021) को मंजूरी दे दी गई। इस विधेयक का उद्देश्य “राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (NADA), राष्ट्रीय डोप परीक्षण प्रयोगशाला (NDTL) और अन्य डोप परीक्षण प्रयोगशालाओं के संचालन के लिए एक वैधानिक ढाँचे का प्रावधान करना है।

इस विधेयक में,  खेलों में ‘संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक तथा सांस्कृतिक संगठन’ / यूनेस्को (UNESCO) के अंतर्राष्ट्रीय अभिसमय को प्रभावी बनाने और ऐसे अन्य दायित्वों और प्रतिबद्धताओं के अनुपालन का भी प्रयास किया गया है।

(नोट: यह आर्टिकल मुख्य परीक्षा के नजरिए से बहुत महत्वपूर्ण नहीं है। प्रीलिम्स के लिए, केवल एक बार प्रावधानों को देखें। याद करने की जरूरत नहीं है।)

विधेयक का उद्देश्य: इसका मुख्य उद्देश्य, एथलीटों, एथलीट-सहायक कर्मियों और अन्य व्यक्तियों को खेलों में ‘डोपिंग’ (Doping) संबधी गतिविधियों में शामिल होने से रोकना है।

डोपिंग की परिभाषा: एथलीट्स खेल प्रदर्शन में सुधार करने के लिए कुछ प्रतिबंधित पदार्थों का उपभोग करते हैं। इसे ‘डोपिंग’ (Doping) कहा जाता है।

पारित विधेयक के प्रमुख बिंदु:

डोपिंग पर प्रतिबंध: यह विधेयक एथलीट्स, एथलीट्स के सपोर्ट कर्मचारियों और अन्य लोगों को खेलों में डोपिंग से प्रतिबंधित करता है।

सपोर्ट कर्मचारियों में कोच, ट्रेनर, मैनेजर, टीम स्टाफ, मेडिकल कर्मचारी और एथलीट्स के साथ काम करने, उनका उपचार और सहयोग करने वाले अन्य लोग शामिल हैं।

इन लोगों को यह सुनिश्चित करना होगा कि एंटी-डोपिंग नियमों का उल्लंघन नहीं हो रहा, जिनमें निम्नलिखित शामिल है:

  1. एथलीट के शरीर में प्रतिबंधित पदार्थों या उनके मार्कर्स की मौजूदगी, (ii)
  2. किसी प्रतिबंधित पदार्थ या पद्धतियों का इस्तेमाल, इस्तेमाल की कोशिश या उनका कब्जे में होना,
  3. सैंपल देने से इनकार करना,
  4. प्रतिबंधित पदार्थ या पद्धतियों की तस्करी या तस्करी की कोशिश, और
  5. ऐसे उल्लंघन करने में मदद करना या उसे छिपाना।

अगर किसी एथलीट को अपनी मेडिकल जरूरत के लिए प्रतिबंधित पदार्थ या पद्धति का उपयोग करना हो तो वह नेशनल एंटी-डोपिंग एजेंसी में थेराप्यूटिक यूज के लिए छूट का आवेदन कर सकता है।

उल्लंघन करने का परिणाम: अगर कोई एथलीट या एथलीट का सपोर्ट कर्मचारी एंटी-डोपिंग नियमों का उल्लंघन करता है तो उसके निम्नलिखित परिणाम हो सकते हैं:

  • परिणाम डिस्क्वालिफाई हो सकते हैं जिसमें मेडल, प्वाइंट्स और पुरस्कार को जब्त करना शामिल है,
  • एक निर्दिष्ट अवधि तक किसी प्रतिस्पर्धा या आयोजन में भाग नहीं ले पाना,
  • वित्तीय प्रतिबंध, और
  • अन्य परिणाम, जिन्हें निर्दिष्ट किया जा सकता है।

राष्ट्रीय एंटी-डोपिंग एजेंसी:

  • वर्तमान में राष्ट्रीय एंटी-डोपिंग एजेंसी, एंटी डोपिंग नियमों को लागू करती है। इस एजेंसी को ‘सोसायटी’ के तौर पर स्थापित किया गया है।
  • विधेयक में ‘राष्ट्रीय एंटी-डोपिंग एजेंसी’ को ‘वैधानिक निकाय’ के तौर पर स्थापित किया गया है। केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त महानिदेशक एजेंसी के प्रमुख होंगे।

एथलीट्स और डोपिंग से संबंधित डेटा:

एजेंसी के पास एथलीट्स के कुछ व्यक्तिगत डेटा जमा करने की शक्ति भी होगी, जैसे

  • सेक्स और जेंडर,
  • मेडिकल हिस्ट्री,
  • एथलीट्स के पते-ठिकाने की जानकारी (आउट ऑफ कंपीटीशन टेस्टिंग और सैंपल कलेक्शन के लिए)।

खेलों में राष्ट्रीय एंटी-डोपिंग बोर्ड:

विधेयक में, ‘एंटी-डोपिंग रेगुलेशंस’ पर सरकार को सुझाव देने और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं का पालन करने के लिए खेलों में ‘राष्ट्रीय एंटी डोपिंग बोर्ड’ की स्थापना का प्रावधान करता है। यह बोर्ड, एजेंसी की गतिविधियों का निरीक्षण करेगा और उन्हें निर्देश जारी करेगा।

डिसिप्लिनरी और अपील पैनल: एंटी-डोपिंग नियमों के उल्लंघन के नतीजों को निर्धारित करने के लिए बोर्ड एक राष्ट्रीय एंटी-डोपिंग डिसिप्लिनरी पैनल बनाएगा। पैनल में एक चेयरपर्सन और चार वाइस चेयरपर्सन्स (सभी कानूनी विशेषज्ञ) और 10 सदस्य (मेडिकल प्रैक्टीशनर और रिटायर हो चुके प्रसिद्ध एथलीट्स) होंगे।

डोप टेस्टिंग लेबोरेट्रीज़: मौजूदा राष्ट्रीय डोप टेस्टिंग लेबोरेट्री को मुख्य डोप टेस्टिंग लेबोरेट्री माना जाएगा। केंद्र सरकार डोप टेस्टिंग के लिए अन्य राष्ट्रीय लेबोरेट्रीज़ भी बना सकती है।

विधेयक से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दे:

  • नाडा (NADA) के महानिदेशक: महानिदेशक की योग्यताएं विधेयक में निर्दिष्ट नहीं की गयी हैं और इन्हें नियमों के माध्यम से अधिसूचित होने के लिए छोड़ दिया गया है।
  • केंद्र सरकार दुर्व्यवहार या अक्षमता या “ऐसे किसी अन्य आधार” के आधार पर महानिदेशक को पद से हटा सकती है।
  • इन प्रावधानों को केंद्र सरकार के विवेक पर छोड़ने से महानिदेशक की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है।
  • पद से हटाने की शक्ति: विधेयक के तहत, बोर्ड के पास अनुशासन पैनल और अपील पैनल के सदस्यों को उन आधारों पर हटाने का अधिकार है जो विनियमों द्वारा निर्दिष्ट किए जाएंगे और विधेयक में निर्दिष्ट नहीं हैं।
  • इसके अलावा, उन्हें सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया। यह इन पैनलों के स्वतंत्र कामकाज को प्रभावित कर सकता है।

इंस्टा जिज्ञासु:

अंतर्राष्ट्रीय संस्था: WADA

  • नवंबर 1999 में ‘अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति’ के अधीन ‘’विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी’ (World Anti-Doping Agency – WADA) की स्थापना की गई थी।
  • वाडा (WADA) को खेल में डोपिंग के खिलाफ यूनेस्को अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन (2005) द्वारा मान्यता प्राप्त है।
  • वाडा की प्राथमिक भूमिका, सभी खेलों और देशों में डोपिंग रोधी नियमों का विकास, सामंजस्य और समन्वय करना है।
  • वाडा, ‘विश्व डोपिंग रोधी संहिता’ (WADA Code) और उसके मानकों के उचित कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने, डोपिंग की घटनाओं की जांच करने, डोपिंग पर शोध करने और खिलाड़ियों और संबंधित कर्मियों को डोपिंग रोधी नियमों के बारे में शिक्षित करने के द्वारा अपने कार्य निष्पादित करती है।
  • वाडा, साल में कम से कम एक बार प्रतिबंधित पदार्थों की सूची प्रकाशित करता है और सभी हस्ताक्षरकर्ताओं को वितरित करता है।
  • चिकित्सीय उपयोग के लिए यदि आवश्यक हो तो निषिद्ध पदार्थों के उपयोग से छूट दी गई है।
  • WADA के अनुसार, 2019 में, डोपिंग नियमों का अधिकांश उल्लंघन, शरीर सौष्ठव (22%), उसके बाद एथलेटिक्स (18%), साइकिलिंग (14%), और भारोत्तोलन (13%) खेलों में हुआ।

इंस्टा लिंक

राष्ट्रीय डोपिंग रोधी विधेयक

मेन्स लिंक (अभ्यास प्रश्न)

खेल उपलब्धि के मामले में भारत का स्थान बहुत ऊंचा नहीं है, लेकिन डोपिंग के आरोपी एथलीटों की संख्या विषम रूप से अधिक है। परीक्षण कीजिए और डोपिंग खतरे से निपटने के लिए संभावित समाधानों पर चर्चा कीजिए। (250 शब्द)

स्रोत: बिज़नेस स्टैण्डर्ड

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

भारत के ‘नागरिक समाज’ को नष्ट करने की कोशिश

संदर्भ: यह आर्टिकल ‘नागरिक समाजों’ / ‘सिविल सोसाइटीज’ (Civil Societies) के महत्व और हालिया संशोधनों ने उनकी कार्य प्रकृति को किस प्रकार प्रभावित किया है, इस पर प्रकाश डालता है।

(नोट: सिविल सोसाइटी/एनजीओ पर एक नोट तैयार रखें। मुख्य परीक्षा की उत्तर लेखन में एक उदाहरण के रूप में उपयोग करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाली कुछ सिविल सोसाइटी के नाम संभाल कर रखें। यह वह विषय है जिसमें आप अच्छे अंक प्राप्त करने से नहीं चूक सकते।

‘नागरिक समाज’ क्या हैं?

यूरोपीय संघ के अनुसार, सभी प्रकार की सामाजिक कार्रवाईयां- जो राज्य से संबंधित या प्रबंधित नहीं होती हैं- करने वाले व्यक्तियों या समूहों को ‘नागरिक समाज’ (civil society) की परिभाषा में शामिल किया जा सकता है। भारत में विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाले 3.4 मिलियन से अधिक ‘गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) मौजूद हैं।

नागरिक समाजों की भूमिका:

  • कार्यान्वयन अंतराल को पाटना: एनजीओ (NGOs) महत्वपूर्ण अधिकार-आधारित कानूनों जैसे कि सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI), वन अधिकार अधिनियम 2006 (FRA 2006), शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2010 (RTE 2010) और मनरेगा के प्रचार और कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  • राज्य से अछूते क्षेत्रों के लिए सहायता: उदाहरण: प्रवासियों को सहायता प्रदान करना, मानव और श्रम अधिकार, आदिवासी कल्याण (नीलगिरी वायनाड ट्राइबल वेलफेयर सोसाइटी (NWTWS)), महिला वकालत (एक्शनएड इंडिया, सेवा, एकलव्य, साथिन, महिला सशक्तिकरण के लिए दिशा कार्य)।
  • स्वयं सहायता समूह (SHG) और किसान संगठनों जैसे समुदाय आधारित संगठनों को बढ़ावा देना: ‘सिविल सोसाइटीज’ जमीनी स्तर पर बदलाव लाने में महत्वपूर्ण हैं।
  • दबाव समूह के रूप में काम करना: गैर सरकारी संगठन, लोगों को उनके अधिकारों के लिए संगठित करते हैं और साथ ही सरकार की हानिकारक नीतियों के खिलाफ समुदायों को शिक्षित करते हैं। जैसेकि, ‘नर्मदा बचाओ आंदोलन’ विस्थापितों के अधिकारों के लिए काम करता है
  • व्यवहार में बदलाव लाना: गैर सरकारी संगठन अंधविश्वास, झूठे विश्वास, विश्वासों और रीति-रिवाजों के खिलाफ काम करते हैं, उदाहरण के लिए: महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति (MANS); या अंध विश्वास के उन्मूलन के लिए समिति, CEBF)
  • पर्यावरणवाद को बढ़ावा देना: उदाहरण ग्रीन पीस, वनशक्ति एनजीओ, आदि।
  • सरकार की सभी नई पहलों में लोगों की भागीदारी और जागरूकता की आवश्यकता होती है और इस उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए ‘नागरिक समाज’ से बेहतर कोई संगठन नहीं होता है।
  • ‘स्वच्छ भारत मिशन’ में नागरिक समाज की भागीदारी ने इसे एक बड़ी सफलता बना दिया है।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में ‘खुले में शौ’च की प्रथा को रोकने के लिए लोगों के व्यवहार को बदलने में स्वच्छाग्रहियों की भूमिका का स्पष्ट प्रभाव पड़ता है।

 

भारत में गैर सरकारी संगठनों के सामने चुनौतियां:

  • निधियों तक पहुँच पर प्रतिबंध: सरकारी विनियमन, छोटे गैर सरकारी संगठनों को निधियों के पुनः अनुदानपर प्रतिबंध लगाते है, जिससे ये संगठन सरकारी निधियों पर अधिक निर्भर हो जाएंगे।
  • सरकारी निधियों पर निर्भरता, गैर सरकारी संगठनों की स्वतंत्रता और सरकारी नीतियों के खिलाफ आवाज उठाने की उनकी क्षमता को नकारात्मक रूप से प्रभावित करेगा।
  • गैर सरकारी संगठनों का राजनीतिकरण: राजनीतिक रूप से प्रेरित ऐसे ‘गैर सरकारी संगठनों’ की अल्प अवधि में तेजी से वृद्धि, जो राजनीतिक धन, धन शोधन और वकालत के लिए एक माध्यम के रूप में कार्य करते हैं, भारतीय राजनीति के लिए एक चुनौती है।
  • राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में शामिल होना: उदाहरण; कुछ गैर सरकारी संगठन जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के वित्तपोषण और रेड कॉरिडोर क्षेत्रोंमें वामपंथी उग्रवाद गतिविधि को बढ़ावा देने में शामिल थे।
  • गैर सरकारी संगठनों में पारदर्शिता और जवाबदेही का अभाव: गैर सरकारी संगठनों के केवल एक छोटे से भाग ने आयकर को अपना खाता विवरण प्रस्तुत किया है और केवल कुछ के पास ही एक ‘बोर्ड ऑफ गवर्नेंस’ है।
  • भारत के विकास को कमजोर करने में भूमिका: 2014 में आईबी की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि ग्रीनपीस, कॉर्डऐड (Cordaid) और एमनेस्टी जैसे गैर सरकारी संगठनों के काम करने से भारत की जीडीपी में 2-3% की कमी आई है।
  • पंजीकरण का नुकसान: आंकड़े बताते हैं कि 20,679 नागरिक समाज संगठनों का 2011 और मई 2022 के बीच अपना पंजीकरण रद्द कर दिया गया है।
  • लक्षित उद्देश्य के लिए जारी निधि का उपयोग न करना: वर्ष 2010 और 2019 के बीच विदेशी योगदान दोगुना हो गया, हालांकि कई प्राप्तकर्ताओं ने उस उद्देश्य के लिए निधि का उपयोग नहीं किया है जिसके लिए उन्हें FCRA अधिनियम के तहत पंजीकृत या प्रदान किया गया था।
  • ग्रामीण विकास विभाग की ‘लोक कार्यक्रम और ग्रामीण प्रौद्योगिकी विकास परिषद’ (CAPART) ने सरकार द्वारा प्रदान की गई धनराशि के दुरुपयोग के लिए 833 गैर सरकारी संगठनों को काली सूची में डाल दिया।
  • ‘नागरिक समाज’ पर गहरा संदेह: नवंबर 2021 में भारतीय पुलिस अकादमी के 73वें स्नातक समारोह में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने नवोदित पुलिस अधिकारियों को चेतावनी दी थी कि “नागरिक समाज युद्ध की नई सीमा है”।
  • 2017 में गृह मंत्रालय ने तंबाकू नियंत्रण गतिविधियों के पक्ष में संसद सदस्यों की पैरवी करने के लिए विदेशी धन का दुरुपयोग करने के आधार पर ‘पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया’ के FCRA लाइसेंस को निलंबित कर दिया।

सरकार द्वारा उठाए गए कदम:

विदेशी अंशदान विनियमन (संशोधन) अधिनियम (FCRA), 2020

विनियम

 

प्रभाव
अन्य संगठनों को विदेशी योगदान राशि के हस्तांतरण पर प्रतिबंध। ·         यह संगठनों के बीच सहयोग को गंभीरता से प्रतिबंधित करेगा और इसके परिणामस्वरूप छोटे जमीनी स्तर पर काम करने वाले एनजीओ को धन की कमी हो सकती है।

·         यह विदेशी फंडिंग और विकास सहायता के प्रवाह को भी कमजोर करेगा।

 

एनजीओ के प्रशासनिक खर्चों को इसके बजट के 20% तक सीमित किया गया है। ·         यह कर्मचारियों के वेतन और विभिन्न विशेषज्ञों को आकर्षित करने के लिए गैर सरकारी संगठनों की क्षमता को प्रभावित करेगा।

 

प्रत्येक संगठन का दिल्ली में केवल एक ‘SBI शाखा’ में अपना FCRA खाता होना चाहिए। ·         यह ऑनलाइन कनेक्टिविटी और डिजिटल मौद्रिक लेनदेन के युग में एक प्रतिगामी कदम हो सकता है।

·         इसका असर दूरदराज के इलाकों में फंड ट्रांसफर पर भी पड़ेगा।

 

उल्लंघनों की जांच के लिए सरकारी अधिकारियों की शक्ति में वृद्धि।

 

·         सरकार का हस्तक्षेप वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में जनजातीय कल्याण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में काम करने में बाधा उत्पन्न कर सकता है।

 

सामाजिक कार्य शिक्षा को नियंत्रित करने हेतु प्रस्तावित राष्ट्रीय सामाजिक कार्य परिषद (शिक्षा और अभ्यास) विधेयक। ·         इस परिषद का कार्य, सामाजिक कार्य पेशेवरों के बीच नैतिक व्यवहार को बढ़ावा देना है, लेकिन यह बिना डिग्री के ‘गैर सरकारी संगठन क्षेत्र’ में नौकरी पाना और अधिक कठिन बना सकती है।

 

ये परिवर्तन मानव अधिकारों, पर्यावरणवाद और नागरिक स्वतंत्रता (भारत की सॉफ्ट पावर के महत्वपूर्ण स्तंभ) के आदर्शों के अनुरूप नहीं हैं, क्योंकि ‘गैर सरकारी संगठन’क्षेत्रों को अधिकांश विदेशी योगदान प्राप्त होता है।

संशोधन के बाद प्रभाव:

  • ऑक्सफैम (Oxfam) के लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं किया गया था, जो कि 2010 के FCRA संशोधन के तहत अनुमत एक तंत्र है।
  • ऑक्सफैम प्रवासी मजदूरों की दुर्दशा और महामारी के दौरान गरीबों की स्थिति के बारे में व्यापक रूप से प्रचारित रिपोर्ट तैयार कर रहा था।
  • ‘कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव’ की FCRA मंजूरी को कुछ समय के लिए निलंबित कर दिया गया था, जिसके बाद इसका लाइसेंस रद्द कर दिया गया था।
  • प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का इस्तेमाल ‘एमनेस्टी इंटरनेशनल’ और ‘सेंटर फॉर इक्विटी स्टडीज’ जैसे गैर सरकारी संगठनों पर हमला करने के लिए किया गया था, जिन्होंने अल्पसंख्यक अधिकारों के लिए लगातार काम किया है।

निष्कर्ष:

नागरिक समाज, लोकतंत्र का एक अनिवार्य पहलू हैं; वे सरकार और शासित के बीच की खाई को पाटते हैं। इस संदर्भ में उचित दिशा-निर्देश जारी किए जाने चाहिए, उनकी मान्यता और खातों के रखरखाव के संबंध में नियम स्पष्ट रूप से बताए जाने चाहिए और राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं और एक जीवंत नागरिक समाज की आवश्यकता के बीच संतुलन बनाने का प्रयास किया जाना चाहिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययनIII


 

विषय: भारत में खाद्य प्रसंस्करण एवं संबंधित उद्योग- कार्यक्षेत्र एवं महत्त्व, स्थान, ऊपरी और नीचे की अपेक्षाएँ, आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन।

वेयरहाउसिंग एक्ट में संशोधन

संदर्भ: केंद्रीय खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा ‘भाण्डागारण (विकास और विनियमन) अधिनियम, 2007 (Warehousing (Development and Regulation) Act, 2007) / ‘वेयरहाउसिंग एक्ट’ में महत्वपूर्ण संशोधन करने का सुझाव दिया गया है।

(नोट: मुख्य परीक्षा के दृष्टिकोण से यह बहुत महत्वपूर्ण आर्टिकल नहीं है लेकिन 2-3 बिंदु याद रखें। इसके अलावा, भविष्य में इस अधिनियम में और अधिक बदलाव किए जाने की संभावना है।)

संशोधन का उद्देश्य: परिवर्तन का उद्देश्य किसानों को गुणवत्तापूर्ण गोदामों की सेवा प्राप्त करने में मदद करना है।

परिभाषा: भाण्डागार या गोदाम (Warehouses) वैज्ञानिक भंडारण संरचनाएं हैं जो विशेष रूप से ‘संग्रहीत उत्पादों’ की मात्रा और गुणवत्ता की सुरक्षा के लिए बनाई गई हैं।

प्रावधान:

  • गोदामों का पंजीकरण अनिवार्य करना। वर्तमान में, ‘भाण्डागारण विकास और विनियमन प्राधिकरण’ (Warehousing Development and Regulation Authority – WDRA) के साथ पंजीकरण कराना वैकल्पिक है।
  • प्राधिकरण के समक्ष पंजीकरण से किसी भी वर्ग के गोदामों को छूट देने की शक्ति केवल केंद्र सरकार के पास होगी। यह प्रावधान एक विनियमित वेयरहाउसिंग सिस्टम में क्रमिक और गैर-विघटनकारी परिवर्तन सुनिश्चित करेगा।
  • वस्तुस्थितिः इस समय देश में करीब 60,000 गोदाम हैं। जिनमें से 4,700 गोदाम ‘नियामक’ के पास पंजीकृत हैं लेकिन केवल 2,910 गोदाम ही सक्रिय हैं।
  • विभिन्न अपराधों के लिए सजा में वृद्धि: विभिन्न अपराधों के लिए दंड को मौजूदा ₹1 लाख से अधिक किया जाएगा।
  • संशोधन विभिन्न अपराधों के लिए सजा के रूप में तीन साल तक के कारावास को समाप्त कर देगा।
  • कैप्टिव वेयरहाउस के लिए अपवाद: ‘कैप्टिव वेयरहाउस’ जैसे कि भारतीय खाद्य निगम को अधिनियम के दायरे से बाहर रखा गया है।
  • परक्राम्य और गैर-परक्राम्य गोदाम रसीदों (non-negotiable warehouse receipts – NWR) की एक प्रणाली स्थापित करना, जो वर्तमान में इलेक्ट्रॉनिक रूप में मौजूद है। यह प्रावधान NWR को, नेगोशिएबल वेयरहाउस रिसीप्ट सिस्टम में जमाकर्ताओं और बैंकों के भरोसेमंद ट्रस्ट को बेहतर बनाने के लिए, व्यापार के एक उपकरण के रूप में सक्षम करेगा।
  • WDRA में परिवर्तन: वर्तमान में, ‘भाण्डागारण विकास और विनियमन प्राधिकरण’ (WDRA) में एक अध्यक्ष और दो पूर्णकालिक सदस्य शामिल हैं। संशोधन के बाद प्राधिकरण में तीन पदेन अंशकालिक सदस्य जोड़े जाएंगे जिनमें खाद्य और आर्थिक मामलों के विभागों में संयुक्त सचिव और सेबी के कार्यकारी निदेशक शामिल होंगे।
  • WDRA की शक्तियों में वृद्धि: प्रस्तावित संशोधन में WDRA को जांच करने, प्रवर्तन कार्रवाई करने, मौद्रिक दंड लगाने, मौद्रिक दंड वसूलने और न्यायनिर्णयन की शक्तियां प्रदान की गई थीं।
  • प्रत्यायन एजेंसियों को हटाना: चूंकि प्रत्यायन प्रक्रिया में समय लगता था, कदाचार की संभावना थी और शिकायतों का कारण बना।
  • गोदामों के पंजीकरण के लिए आवेदन सीधे WDRA को प्रस्तुत किया जाएगा और ऑनलाइन आवेदनों की एक नई प्रणाली, जो संपर्क रहित और फेसलेस होगी, लागू की जाएगी और इससे पंजीकरण में लगने वाला औसत समय कम हो जाएगा।

संबंधित मुद्दे:

एक किसान संगठन ‘संयुक्त किसान मोर्चा’ (SKM) को डर है कि यह संशोधन, निरस्त किए जा चुके ‘किसान उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) अधिनियम’ के कुछ प्रावधानों को पिछले दरवाजे से वापस लागू करने के लिए लाया जा रहा हैं।

वेयरहाउसिंग डेवलपमेंट एंड रेगुलेटरी अथॉरिटी (WDRA):

‘भाण्डागारण विकास और विनियमन प्राधिकरण’ (Warehousing Development and Regulation Authority – WDRA) का गठन 2010 में ‘वेयरहाउसिंग (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट, 2007’ के तहत खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग के अधीन ढांचागत और प्रक्रियात्मक मानकों को निर्धारित करके वैज्ञानिक भंडारण सुनिश्चित करने के लिए किया गया था।

परक्राम्य गोदाम रसीद प्रणाली

यह प्रणाली वर्ष 2011 में शुरू की गयी थी, इसके माध्यम से किसान अपने भंडारण के लिए जारी किए गए गोदाम रसीदों के खिलाफ बैंकों से ऋण ले सकते हैं। ‘इलेक्ट्रॉनिक नेगोशिएबल वेयरहाउस रसीद’ (e-NWR) सिस्टम 2017 में लॉन्च किया गया था।

इंस्टा लिंक

कृषि विपणन और भंडारण

स्रोत: द हिंदू

 


मुख्य परीक्षा संवर्धन हेतु पाठ्य सामग्री


वन’ (ऑर्गेनिक नॉर्थ ईस्ट) और ‘नॉर्थ ईस्ट फ्रेश’

  • ‘वन’ (ऑर्गेनिक नॉर्थ ईस्ट) अर्थात ‘ONE’ (Organic North East) और ‘नॉर्थ ईस्ट फ्रेश’ (NE Fresh) राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पूर्वोत्तर क्षेत्र (North Eastern Region – NER) की विशिष्ट संस्कृति से संबंधित खाद्य पदार्थों को प्रदर्शित करने वाले ब्रांड हैं।
  • इन ब्रांड्स को NER के कृषि-बागवानी उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए उत्तर पूर्वी क्षेत्रीय कृषि विपणन निगम लिमिटेड (NERAMAC) द्वारा लांच किया गया है।

 

तमिलनाडु में ‘मुख्यमंत्री नाश्ता योजना’

तमिलनाडु सरकार ने 2022-23 के दौरान राज्य भर में कक्षा I-V में 1.14 लाख से अधिक बच्चों को लाभान्वित करने के लिए 1,545 सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में ‘मुख्यमंत्री नाश्ता योजना’ के पहले चरण को लागू करने का आदेश जारी किया है।

  • इसके तहत, जहां तक संभव हो, क्षेत्र में उपलब्ध बाजरे से बना नाश्ता छात्रों को सप्ताह में कम से कम दो दिन उपलब्ध कराया जा सकता है।
  • प्रत्येक छात्र को सब्जियों के सांबर के साथ 150-500 ग्राम नाश्ते का पका हुआ भोजन उपलब्ध कराया जाएगा।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


कॉफी (संवर्धन और विकास) विधेयक, 2022

संदर्भ: कॉफी (संवर्धन और विकास) विधेयक, 2022 (Coffee (promotion and Development) Bill, 2022) वर्ष 1942 के कॉफी अधिनियम की जगह लेगा।

नोडल मंत्रालय: वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय।

उद्देश्य: कॉफी बोर्ड का आधुनिकीकरण करना, निर्यात को बढ़ावा देना और घरेलू बाजार का समर्थन करना।

प्रमुख प्रावधान:

  • कॉफी बोर्ड के अधिदेश का विस्तार: इसमें अब नियंत्रण, विपणन और बिक्री के नियमित कार्य के अलावा उत्पादन, अनुसंधान, विस्तार और गुणवत्ता सुधार के लिए सहयोग शामिल होगा।
  • श्रमिकों के हितों का संरक्षण।
  • संसाधक इकाइयों की प्रक्रियाओं और पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाना।
  • योजना: केंद्र ने निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कॉफी क्षेत्र के लिए ‘निर्यात उत्पादों पर शुल्क और करों की वापसी’ (RoDTEP) योजना का विस्तार किया।

 

MAGIFAC

‘विदेशी संपत्तियों संबंधी मामलों की जांच हेतु बहु-एजेंसी समूह’ (Multi-Agency Group for investigation of Foreign Asset Cases – MAGIFAC), विदेशी संपत्ति मामलों की विभिन्न श्रेणियों की समन्वित जांच के लिए प्रवर्तन एजेंसियों का एक अंतर-एजेंसी समूह है। जैसे; पनामा पेपर, पेंडोरा पेपर, पैराडाइज पेपर आदि।

संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी

संदर्भ: भारत द्वारा फिलिस्तीन शरणार्थियों के लिए ‘संयुक्त राष्ट्र राहत और कार्य एजेंसी’ (United Nations Relief and Works Agency – UNRWA) को $2.5 मिलियन का योगदान दिया गया है।

विवरण:

  • ‘संयुक्त राष्ट्र राहत और कार्य एजेंसी’ (UNRWA) को वर्ष 1949 में लगभग 6 मिलियन फिलिस्तीनी शरणार्थियों (वेस्ट बैंक, गाजा पट्टी, लेबनान, सीरिया और जॉर्डन में) को सहायता और सुरक्षा प्रदान करने के अधिदेश के साथ स्थापित किया गया था।
  • अनुदान: केवल स्वैच्छिक योगदान के माध्यम से
  • भारत: ‘लिंक वेस्ट पॉलिसी’ के एक हिस्से के रूप में, भारत ने 2018 में दोनों देशों को परस्पर स्वतंत्र और अलग मानते हुए ‘इज़राइल और फिलिस्तीन’ के साथ अपने संबंधों को ‘डी-हाइफ़न’ (De-Hyphenated) कर दिया है।

 

विद्युत् उत्पादन क्षमता

संदर्भ: विद्युत और नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने अनुमान लगाया है कि भारत की विद्युत उत्पादन क्षमता 2030 तक 820GW तक पहुंच जाएगी। (इसमें से 500 GW विद्युत अक्षय संसाधनों से उत्पादित की जाएगी।

  • हाल ही में, TERI ने “डीकार्बोनाइजेशन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए व्यवहार्य मार्गों के लिए रोडमैप” जारी किया था। (इस रिपोर्ट को कल के कर्रेंट अफेयर्स में विस्तार से कवर किया जाएगा।)
  • COP26 में, भारत ने ऊर्जा को 50% तक कार्बन मुक्त करने और 2030 तक 500 GW जीवाश्म ईंधन मुक्त उत्पादन क्षमता प्राप्त करने के अत्यधिक महत्वाकांक्षी लक्ष्य की घोषणा की थी।

 

फाइबरीकरण

संदर्भ: 5G स्पेक्ट्रम नीलामी ने फाइबरीकरण / फाइबराइजेशन (Fiberisation) के संदर्भ में अपेक्षित बुनियादी ढांचे की आवश्यकता को उजागर किया है।

परिभाषा: फाइबरीकरण (Fiberisation) ऑप्टिकल फाइबर केबल के माध्यम से रेडियो टावरों को जोड़ने की एक प्रक्रिया है। फाइबरीकरण, 5G सेवाओं में उपयोग किए जाने वाले डेटा की बड़ी मात्रा के प्रवाह को सुविधाजनक बनाता है।

संबंधित मुद्दे:

कम फाइबरीकरण: अमेरिका, ब्रिटेन और जापान (80-90% फाइबराइजेशन) की तुलना में, भारत में केवल 33% टावर फाइबरयुक्त हैं, जोकि भारत में 5जी नेटवर्क के ‘संक्रमण’ में एक बाधा बन रहा है।

कम फंडिंग: भारत को 70% टावरों को फाइबराइज करने के लिए भारी मात्रा में फंडिंग (2.2 लाख करोड़ से अधिक) की आवश्यकता है।

समाधान: सैटेलाइट-आधारित नेटवर्क (ऑन-ग्राउंड ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क के साथ), फाइबराइजेशन पर निर्भरता को कम करने और कारों, जहाजों, हवाई जहाज और हाई-स्पीड ट्रेनों सहित चलती जहाजों पर उपयोगकर्ताओं को 5G ब्रॉडबैंड सुविधा वितरित करने में मदद कर सकते हैं।

सरकार की पहलें:

  • हवाई ऑप्टिकल फाइबर केबल (aerial optical fibre cable) को स्थापित करना आसान बनाने के लिए ‘इंडियन टेलीग्राफ राइट ऑफ वे’ नियम 2016 (Indian Telegraph Right of Way (RoW) Rules 2016) में संशोधन किया जा रहा है। हालांकि, कई राज्य और स्थानीय निकाय RoW नियमों से सहमत नहीं हैं।
  • गतिशक्ति संचार ऑनलाइन पोर्टल (DoTs): यह RoW की मंजूरी और मुआवजे की मंजूरी को आसान बनाएगा।
  • भारतनेट: 1000 दिनों में हर गांव को ऑप्टिकल फाइबर केबल से जोड़ने की परिकल्पना।

 

मंकीपॉक्स वायरस का टीका

संदर्भ: ICMR- नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी ने देश में पहली बार ‘मंकीपॉक्स’ के वायरस स्ट्रेन को पृथक करने में सफलता हासिल की है।

वैक्सीन के चरण:

  • ‘वायरस स्ट्रेन का पृथकीकरण’, देश में दवाओं, टीकों और रैपिड डायग्नोस्टिक किट के विकास में तेजी लाने की दिशा में पहला कदम है। वायरस के भारतीय उपभेदों (Indian strains) के जीनोमिक अनुक्रम में, विश्व स्तर पर परिसंचारी पश्चिम अफ्रीकी उपभेदों के साथ 85% तक समानता देखी गयी है।
  • वायरस के दो प्रकार: मंकीपॉक्स वायरस के दो ज्ञात ‘प्रकार’ (clades) हैं – एक जो मध्य अफ्रीका में उत्पन्न हुआ और एक जो पश्चिम अफ्रीका में उत्पन्न हुआ। वर्तमान विश्व प्रकोप (2022), कम गंभीर पश्चिम अफ्रीकी क्लैड के कारण फैला है।

 

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद

‘भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद’ (Indian Council of Medical Research – ICMR) जैव चिकित्सा अनुसंधान के निर्माण, समन्वय और प्रचार के लिए भारत में सर्वोच्च निकाय है।

  • यह भारत सरकार द्वारा स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के माध्यम से वित्त पोषित है।
  • ICMR के EOI दस्तावेज़ में कहा गया है कि यह मंकीपॉक्स वायरस आइसोलेट्स और शुद्धिकरण, प्रसार और लक्षण वर्णन के लिए इसकी विधि/प्रोटोकॉल पर सभी बौद्धिक संपदा अधिकार और व्यावसायीकरण अधिकार सुरक्षित रखता है।
  • ICMR, अनुसंधान एवं विकास के साथ-साथ विनिर्माण गतिविधियों के लिए परिभाषित समझौते के माध्यम से अनुभवी दवा/फार्मा/वैक्सीन/आईवीडी निर्माताओं के साथ किसी भी प्रकार के गैर-अनन्य समझौते करने का कानूनी रूप से हकदार है।

 

लाइट-माल्टेड अल्बाट्रोस

लाइट-माल्टेड अल्बाट्रोस (Light-malted Albatross) अंटार्कटिक समुद्रों का मूल निवासी एक समुद्री पक्षी है, लेकिन एशिया में पहली बार देखा गया है। इसे रामेश्वरम और आदम के पुल (राम सेतु) पर मन्नार समुद्री राष्ट्रीय उद्यान की खाड़ी के आसपास के द्वीपों में देखा गया है।

संकेत: यह प्रसिद्ध और स्थापित मार्गों और स्थलों से दूर पक्षियों के प्रवास के प्रतिरूप (पैटर्न) को दर्शाता है। ‘ग्लोबल वार्मिंग’ के कारण हवा के पैटर्न में होने वाला बदलाव, गैर-देशी पक्षियों को अन्य क्षेत्रों में ला रहा है।

IUCN: संकट-निकट (Near Threatened)

 

एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी

संदर्भ: भारत, HIV पॉजिटिव रोगियों के लिए ‘एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी’ (Anti-retroviral Therapy – ART) में उपयोग की जाने वाली डोलटेग्रेविर (वयस्कों और बच्चों को दी जाने वाली) और नेविरापीन दवाओं (केवल शिशुओं के लिए) की कमी का सामना कर रहा है।

  • ये दवाएं CD4 कोशिकाओं की रक्षा करने में मदद करती हैं और रोग से लड़ने के लिए प्रतिरक्षा प्रणाली को पर्याप्त मजबूत रखती हैं।
  • एचआईवी वायरस, CD4 (एक प्रकार की श्वेत रक्त कोशिका (टी कोशिकाएं) पर हमला करता है। एचआईवी के रोगी की सीडी4 की संख्या 200 तक कम हो सकती है। जबकि, एक सामान्य व्यक्ति में सीडी4 कोशिकाओं की संख्या 500-1600 होती है।
  • ‘भारत एचआईवी आकलन 2019’ (India HIV Estimation 2019) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में वर्ष 2000 से एचआईवी के मामलों में कमी आ रही है।
  • हाल ही में ल्यूकेमिया से पीड़ित एक अमेरिकी रोगी, एक डोनर से स्टेम सेल ट्रांसप्लांट प्राप्त करने के बाद एचआईवी से ठीक होने वाली पहली महिला और तीसरी व्यक्ति बन गई है।

 

क्रिप्टो-जैकिंग

क्रिप्टो-जैकिंग (Crypto-jacking) एक साइबर-हमला है जिसमें एक कंप्यूटिंग डिवाइस को हमलावर द्वारा अपहृत और नियंत्रित किया जाता है, और इसके संसाधनों का उपयोग अवैध रूप से क्रिप्टोकरेंसी का खनन (माइन) करने के लिए किया जाता है।