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[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 26 July 2022

विषयसूची

सामान्य अध्ययन-II

  1. अनादर की डिजिटल परतें
  2. बुजुर्गों के लिए आशा
  3. भारत और जापान को अपनी परमाणु नीति पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता

 

सामान्य अध्ययन-III

  1. मानव-पशु संघर्ष

 

मुख्य परीक्षा संवर्धन हेतु पाठ्य सामग्री

  1. चाची की रसोई
  2. सर्वोत्तम पद्धति: “ऑपरेशन हॉक-आई”

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

  1. मोढेरा सूर्य मंदिर
  2. राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू के पहले औपचारिक भाषण में उल्लखित चार आदिवासी विद्रोह
  3. ‘भारतीय ध्वज संहिता’, 2022
  4. स्वदेश दर्शन योजना 2.0
  5. रूस-यूक्रेन अनाज सौदा
  6. हिम तेंदुआ द्वारा अपने शिकारों की आबादी का नियंत्रण
  7. कांगो
  8. धान गहनता प्रणाली
  9. एन-ट्रीट तकनीक
  10. लंपी त्वचा रोग
  11. भारत-जापान समुद्री साझेदारी अभ्यास

 


सामान्य अध्ययनII


 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

अनादर की डिजिटल परतें

संदर्भ: इस आर्टिकल में डिजिटल शासन के लिए कुछ खतरों पर प्रकाश डाला गया है, क्योंकि प्रौद्योगिकी मानवीय पहलुओं को भी अमानवीय बनाती है। प्रौद्योगिकी की नकारात्मकताओं के कुछ उदाहरणों को नोट किया जा सकता है।

शासन में ‘डिजिटल पहलें किस प्रकार मानव अधिकारों और गरिमा पर हावी हो सकती है, इसके उदाहरण:

‘सार्वजनिक वितरण प्रणाली’ में बायोमेट्रिक्स का उपयोग: जैसा कि, कुछ साल पहले झारखंड के अध्ययन में देखा गया था कि  बायोमेट्रिक्स के उपयोग से ‘सार्वजनिक वितरण प्रणाली’ (PDS) सूची में ‘चूक’ के कई मामले सामने आए थे (कई बार बायोमेट्रिक्स काम नहीं करता), जिससे भुखमरी के कारण मौतें हुईं।

एकीकृत बाल विकास योजना (आईसीडीएस):

‘एकीकृत बाल विकास योजना’ (Integrated Child Development Scheme – ICDS) के तहत 0 से 6 वर्ष के आयु वर्ग के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए ‘पूरक पोषण’ प्रदान किया जाता है।

  • पोषण ट्रैकर: (Poshan Tracker) ‘एकीकृत बाल विकास योजना’ (ICDS) सहित सभी पोषण पहलों की निगरानी के लिए एक केंद्रीकृत मंच है। इसमें, लाभार्थियों के ‘आधार डेटा’ को सभी पहलों से जोड़ना अनिवार्य किया गया है।
  • तकनीकी मुद्दे: 0 से 5 वर्ष की आयु के लगभग तीन-चौथाई बच्चों के पास आधार कार्ड नहीं है, और सुप्रीम कोर्ट के आदेश में कहा गया है कि बच्चों को ‘आधार संख्या’ नहीं होने के कारण उनके अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता है।
  • ‘कॉमन सर्विस सेंटर्स’ (CSCs) के संचालकों द्वारा दी गयी जानकारी के अनुसार, 42% उपयोगकर्ताओं के बायोमेट्रिक्स पहले प्रयास में काम नहीं करते हैं।

मनरेगा:

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा / MNREGA) के तहत “एक दिन में कामगारों की “दो बार-मुहरांकित और जियो-टैग्ड तस्वीरें” प्राप्त करने के लिए ‘नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सॉफ्टवेयर’ (NMMS) ऐप का उपयोग किया जाता है।

  • इस एप्लीकेशन को “मनरेगा कार्यक्रम की नागरिक द्वारा निगरानी बढ़ाने के अलावा संभावित रूप से भुगतान की प्रक्रिया को तेजी से सक्षम करने” के लिए लागू किया गया था।
  • मुद्दे: काम करने के बाद कामगारों को तस्वीरें देने के लिए रुकना पड़ता है, कई बार ‘मेट्स’ (पर्यवेक्षकों) के पास स्मार्टफोन नहीं होता है, और तस्वीर अपलोड करने में तकनीकी गड़बड़ियों के कारण उनकी हाजिरी (उपस्थिति) दर्ज नहीं हो पाती है।
  • इस प्रकार, जब ‘शासन के विश्वास’ और ‘मानवीय पहलुओं’ को प्रौद्योगिकियों के माध्यम से आउटसोर्स किया जाता है, तो इसका संभावित परिणाम ‘अमानवीयकरण’ होता है।

समाधान:

पारदर्शिता के तकनीकी समाधान के बजाय ‘सामाजिक अंकेक्षण’ (Social audits) को सुदृढ़ करने की आवश्यकता है। लोकतांत्रिक सिद्धांतों के अनुसार, लोगों को ‘राज्य’ को स्पष्ट रूप से ‘देखने’ में सक्षम होना चाहिए, न कि उनको किसी दूसरे तरह से विश्वास में लिए जाना चाहिए। नहीं तो लोगों की गरिमा और विश्वास दांव पर लग जाते हैं।

इंस्टा लिंक

अभ्यास प्रश्न:

‘डिजिटल शासन और पहलें’ भविष्य हैं लेकिन उन्हें गरीबों और जरूरतमंदों की गरिमा और अधिकारों से समझौता नहीं करना चाहिए। परीक्षण कीजिए। (250 शब्द)

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

बुजुर्गों के लिए ‘ASHA’:

संदर्भ: इस आर्टिकल में पुराने रोगों से पीड़ित बुजुर्गों की देखभाल के लिए कुछ समाधान सुझाए गए हैं। विद्यार्थी ‘बुजुर्गों की देखभाल’ के लिए अपने नोट्स में इससे कुछ बिंदु कॉपी कर सकते हैं।

भारत में बुजुर्गों की स्थिति:

  • संयुक्त राष्ट्र की ‘वर्ल्ड पॉपुलेशन एजिंग रिपोर्ट’ के अनुसार- भारत की बुजुर्ग आबादी (60 वर्ष और उससे अधिक आयु वाले व्यक्ति) 2050 तक वर्तमान लगभग 8% से बढ़कर लगभग 20% हो जाने का अनुमान है।
  • 2050 तक, वृद्ध लोगों का प्रतिशत 326% बढ़ जाएगा, जिसमें 80 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों की संख्या में 700% तक की वृद्धि होगी, जिससे बुजुर्ग आबादी, भारत में सबसे तेजी से बढ़ने वाले आयु वर्ग बन जाएगी।
  • एक अध्ययन के अनुसार, 75 वर्ष से अधिक आयु की 8 प्रतिशत आबादी ‘मनोभ्रंश’ (Dementia) से पीड़ित है।
  • अल्जाइमर एसोसिएशन (Alzheimer’s Association) के अनुसार, देश में पहले से ही 40 लाख लोग ‘मनोभ्रंश’ से ग्रस्त हैं।
  • ‘मनोभ्रंश’, उम्र बढ़ने से जुड़ी एक ऐसी स्थिति होती है और मस्तिष्क के क्रमिक अध:पतन के परिणामस्वरूप होती है।
  • परिवार के सहयोग की कमी: समाज में ‘एकल परिवारों (Nuclear Family) की वृद्धि का मतलब है कि केवल अपने बुजुर्ग पति या पत्नी के साथ या अकेले रहने वाले ‘बुजुर्गों का बढ़ता अनुपात’।

पुरानी बीमारियों से ग्रस्त बुजुर्गों के लिए उपाय:

  • प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल को सुदृढ़ बनाना: इसके लिए विविध स्वास्थ्य स्थितियों, घर-आधारित नर्सिंग, उपशामक देखभाल (palliative care) और पुनर्वास को एकीकृत किया जा सकता है।
  • गैर सरकारी संगठन/सिविल सोसाइटी सहायता: उदाहरण: ‘आशा दीप फाउंडेशन’ हमारे समुदाय के उपेक्षित या बिना बच्चों वाले या अपने परिवारों द्वारा परित्यक्त बुजुर्ग सदस्यों के लिए ‘डे केयर सेंटर’ प्रदान करता है।

बुजुर्गों के लिए समुदाय आधारित देखभाल प्रणाली

  • आशा कार्यक्रम (ASHA program) का उपयोग, बुजुर्गों की विविध स्वास्थ्य और सामाजिक देखभाल आवश्यकताओं में सहयोग करने के लिए ‘समुदाय-आधारित कार्यबल’ का निर्माण करने हेतु किया जा सकता है।

बुजुर्गों को, सबसे बढ़कर, एक देखभाल करने वाले और दयालु व्यक्ति की आवश्यकता होती है, जिसमें आवश्यक कौशल हो, ताकि वे अपने जीवन की अंतिम यात्रा में उनका साथ दे सकें।

आशा कार्यकर्ताओं (मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता) के बारे में:

‘मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता’ अर्थात ‘आशा कार्यकर्ता’ (Accredited Social Health Activists – ASHAs), समुदाय के भीतर काम करने वाली स्वयंसेवक होती हैं, जिन्हें सरकार की विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं के लाभ उठाने हेतु लोगों को जानकारी प्रदान करने और सहायता करने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है।

  • ‘आशा कार्यकर्ता’, न केवल हमारी बढ़ी हुई जीवन प्रत्याशा में योगदान देने वाली मातृ और शिशु मृत्यु दर में नाटकीय कमी के लिए, बल्कि हमारे प्रभावशाली कोविड टीकाकरण कवरेज के लिए भी अकेले जिम्मेदार हैं।
  • इसी वर्ष मई में, 75वीं ‘विश्व स्वास्थ्य सभा’ के आयोजन के दौरान भारत की ‘आशा’ कार्यकर्ताओं अर्थात ‘मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (Accredited Social Health Activist – ASHA) को ‘ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’-2022 (Global Health Leaders Award-2022) प्रदान किया गया है।

इंस्टा लिंक:

वृद्धावस्था देखभाल के लिए एक नई परिकल्पना

अभ्यास प्रश्न:

“देश में बुजुर्गों की देखभाल के लिए मुख्य रूप से एक ऐसे दृष्टिकोण को अपनाने की जरूरत है जो उन्हें भारत के विकास में संपत्ति के रूप में देखने पर जोर देता है, न कि उन्हें केवल आश्रितों की देखभाल के रूप में देखने के लिए”। चर्चा कीजिए। (250 शब्द)

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार।

भारत और जापान को अपनी परमाणु नीति पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता

संदर्भ: इंडियन एक्स्प्रेस में सी. राजा मोहन द्वारा लिखे गए इस आर्टिकल में आक्रामक चीन का मुकाबला करने के लिए कुछ अच्छे सुझाव दिए गए हैं, जिन्हें मुख्य परीक्षा में इस्तेमाल के लिए नोट किया जा सकता है।

चीन का उदय और परमाणु निरोध की आवश्यकता:

चीन की परमाणु सैन्य शक्ति में वृद्धि: कुछ अनुमानों के अनुसार वर्ष 2030 तक चीन का शस्त्रागार बढ़कर 1,000 हथियार हो सकता है। वर्तमान में, चीन के पार लगभग 350 परमाणु हथियार हैं।

  • चीन ने भारत और जापान के साथ अपने क्षेत्रीय विवादों के प्रति ‘कड़ा रुख’ अख्तियार किया है।
  • चीन की ‘सलामी स्लाइसिंग’ (Salami Slicing) और जबरदस्ती कूटनीति की रणनीति, जापान के साथ पूर्वी चीन सागर में और भारत के साथ विशाल हिमालयी सीमा पर स्पष्ट रूप से सामने आई है।
  • ‘सलामी स्लाइसिंग’ का मतलब है, पड़ोसी देशों के खिलाफ छोटे-छोटे सैन्य ऑपरेशन चलाकर धीरे-धीरे किसी बड़े इलाके पर कब्जा कर लेना। ऐसे ऑपरेशन इतने छोटे स्तर पर किए जाते हैं कि इनसे युद्ध की आशंका नहीं होती है, लेकिन पड़ोसी देश के लिए यह समझना मुश्किल हो जाता है कि इसका जवाब कैसे और कितना दिया जाए।
  • रूस-यूक्रेन युद्ध ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यूक्रेन द्वारा अपने परमाणु शस्त्रागार को नष्ट करना एक गलत कदम था।

भारत और जापान के परमाणु रूख से संबंधित मुद्दे:

  • निवारण पर शिथिलता: भारत की ‘न्यूनतम प्रतिरोध मुद्रा’ (minimum deterrence posture) और जापान पर ‘अमेरिकी परमाणु छत्र’ (US nuclear umbrella) के साथ समस्याओं के कारण, चीन को रोकने के लिए भारतीय और जापानी क्षमता लगातार कम हो रही है।
  • 1998 के परमाणु परीक्षणों के मद्देनजर, भारत ने शीघ्र ही ‘न्यूनतम प्रतिरोध की नीति’ और ‘परमाणु हथियारों के पहले प्रयोग न करने’ के सिद्धांत की घोषणा की थी।
  • नैतिक मुद्दे: भारत और जापान, लंबे समय से खुद को परमाणु निरस्त्रीकरण के समर्थक के रूप में प्रस्तुत करते रहे हैं।
  • भारत एक परमाणु हथियार शक्ति है जबकि जापान नहीं है, लेकिन यह अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिकी परमाणु छत्र पर निर्भर है।

आवश्यकता:

अमेरिका को भारत के परमाणु कार्यक्रम के प्रति अपने रवैये की समीक्षा करनी चाहिए। अतीत में, अमेरिका ने भारत के परमाणु हथियार कार्यक्रम को बाधित करने पर जोर दिया था। आज चीन के खिलाफ एक भारत की ‘मजबूत परमाणु निवारक’ स्थिति, एशिया और हिंद-प्रशांत की भू-राजनीतिक स्थिरता और अमेरिका के हित में महत्वपूर्ण है।

  • भारत, फ्रांस और अमेरिका के बीच “INFRUS” समझौते को लागू किया जाना चाहिए। “INFRUS” समझौता AUKUS समझौते की भांति “भारत, फ्रांस और अमेरिका (India, France and the US – INFRUS) के बीच एक समझौता” है।
  • अमेरिका को एक समझौता करना चाहिए जिसके तहत फ्रांस, भारत को बैलिस्टिक मिसाइल युक्त पनडुब्बियों (SSBN) और ‘परमाणु हमला पनडुब्बी’ (SSN) पर आधारित ‘भारतीय अधःसतह निवारक’ (Indian underwater deterrent) के विकास में तेजी लाने में मदद करेगा।
  • जापान की प्राथमिकता अपने पारंपरिक सैन्य बलों का रूपांतरण करना है, जबकि भारत को ‘पारंपरिक और परमाणु आधुनिकीकरण’ दोनों पर विचार करने की आवश्यकता हो सकती है।

इंस्टा लिंक:

भारत-जापान संबंध

अभ्यास प्रश्न:

हाल के वर्षों में जापान, पूर्व या पश्चिम के अन्य देशों की तुलना में अभूतपूर्व तरीके से भारत के करीब आया है। टिप्पणी कीजिए। (10 अंक)

स्रोत: द इंडियन एक्सप्रेस

 


सामान्य अध्ययनIII


 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

मानव-वन्यजीव संघर्ष

(Human Animal Conflict)

संदर्भ: इस आर्टिकल में मानव-पशु संघर्ष (Human-Animal Conflict) पर कुछ जानकारी बिंदु दिए गए हैं। याद रखने की कोई आवश्यकता नहीं है, बस इस तरह के संघर्षों के रुझान और कारणों पर ध्यान दें और इन्हें अपने नोट्स में अद्वितीय समाधान और केस स्टडी के रूप में नोट करें।

वस्तुस्थिति:

  • हाथी: वर्ष 2018-19 और 2020-21 के बीच, देश भर में 222 हाथियों की बिजली के करंट से, और 45 हाथियों ट्रेनों से टकरा कर मौत हुई। 29 हाथियों शिकारियों द्वारा और 11 हाथियों को जहर देकर मार डाला गया।
  • बाघ: बाघों में भी, 2019 और 2021 के बीच अवैध शिकार से 29 मारे गए, जबकि 197 बाघों की मौत की जांच की जा रही है।
  • मानवों के हताहत होने की घटनाएँ: तीन वर्षों के दौरान हाथियों ने 1,579 मनुष्यों को मार डाला – 2019-20 में 585 मनुष्य (ओडिशा में सर्वाधिक)। बाघों ने 2019- 2021 के दौरान 125 मनुष्यों को मार डाला, जिसमे मरने वालों की सर्वाधिक संख्या महाराष्ट्र में थी।

परिभाषा: मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict – HWC), जंगली जानवरों और लोगों के बीच अंतःक्रिया और लोगों या उनके संसाधनों या जंगली जानवरों या उनके आवास पर ‘परिणामी नकारात्मक प्रभाव’ को संदर्भित करता है। यह तब होता है जब बढ़ती मानव/पशु आबादी, स्थापित वन्यजीव/मानव क्षेत्र के साथ ओवरलैप हो जाती है, जिससे लोगों और/या जंगली जानवरों के लिए संसाधनों या जीवन में कमी आती है।

संघर्ष के कारण: मानव-वन्यजीव संघर्ष के मुख्य कारणों में ‘प्राकृतिक वास स्थान में कमी’, जंगली जानवरों की आबादी में वृद्धि, बदलते फसल प्रतिरूप- जो जंगली जानवरों को खेत की ओर आकर्षित करते हैं, वन क्षेत्र से जंगली जानवरों की भोजन और चारे के लिए मानव-प्रधान परिदृश्य में आवाजाही, वन उत्पादों के अवैध संग्रह के लिए मनुष्यों का वनों की ओर आना-जाना, आक्रामक विदेशी प्रजातियों के विकास के कारण निवास स्थान का ह्रास आदि शामिल हैं।

सुझाव और आगे की राह:

हाल ही में, ‘प्रकृति संरक्षण हेतु विश्व वन्यजीव कोष’ (Worldwide Fund for Nature – WWF) और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UN Environment Programme – UNEP) द्वारा जुलाई 2021 में ‘सभी के लिये बेहतर भविष्य- मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व की आवश्यकता’ (A future for all – the need for human-wildlife coexistence) शीर्षक से एक रिपोर्ट जारी की गयी थी।

  • रिपोर्ट में, मानव और वन्यजीवों के बीच सह-अस्तित्व के दृष्टिकोण और स्थानीय समुदायों की भागीदारी का सुझाव दिया गया है, क्योंकि मानव-वन्यजीव संघर्ष को पूरी तरह से दबाना संभव नहीं है।
  • केस स्टडी: दक्षिणी अफ्रीका में ‘कवांगो ज़ाम्बेज़ी ट्रांसफ्रंटियर कंज़र्वेशन एरिया’ (Kavango Zambezi Transfrontier Conservation Area): स्थानीय समुदायों ने जोखिम-संभावित क्षेत्रों में रात के समय सुरक्षा के लिए स्थिर और गतिशील ‘शेर-प्रूफ बाड़े’ (lion-proof corrals) स्थापित किए, जिसके कारण 2016 में पशुओं की हत्याओं में 95% की कमी आई और 2016 में शेरों की प्रतिशोध में शून्य हत्याएं हुईं, जबकि 2012 और 2013 में 17 शेर मारे गए थे।
  • सामुदायिक भागीदारी: स्थानीय समुदायों की पूर्ण भागीदारी से ‘मानव-वन्यजीव संघर्ष’ (HWC) को कम करने और मनुष्यों और वन्यजीवों के बीच सह-अस्तित्व को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है।
  • मीडिया के विभिन्न रूपों के माध्यम से सूचना के प्रसार सहित मानव-पशु संघर्ष पर गाइड को संवेदनशील बनाने और आम जनता को सलाह देने के लिए आवधिक जागरूकता अभियान चलाया जा सकता है।
  • वन्यजीवों के प्रति सकारात्मक अन्तःक्रियाएं, सह-अस्तित्व और सहिष्णुता के दृष्टिकोण को शामिल करना आवश्यक है।
  • जंगल में और उसके आसपास रहने वाले लोगों के लिए कौशल-विकास कार्यक्रम उन्हें स्वरोजगार के बेहतर अवसर प्रदान करने चाहिए, और जिनके फलस्वरूप कृषि भूमि के साथ-साथ वन भूमि पर दबाव कम होगा।
  • सह-अस्तित्व के लिए विशिष्ट लक्ष्य, CBD के ‘वैश्विक जैव विविधता ढांचे’ के भीतर प्रमुख तत्व होने चाहिए।
  • वैश्विक नेताओं को, जैसे CoP में, स्थानीय समुदायों और एशिया और दुनिया भर में अन्य हितधारकों के साथ मिलकर काम करना चाहिए ताकि ऐसे भविष्य को सुरक्षित किया जा सके जिसमें वन्यजीव और लोग सद्भाव में रहते हैं।
  • ‘भारतीय वन्यजीव संस्थान’ के दिशानिर्देशों – “वन्यजीव पर रैखिक बुनियादी ढांचे के प्रभाव को कम करने के लिए पर्यावरण के अनुकूल उपाय” – को लागू करना चाहिए।
  • ये दिशानिर्देश पर्यावरण के अनुकूल संरचना प्रदान करके रैखिक अवसंरचना के डिजाइन में संशोधन का सुझाव देते हैं, जो इन रैखिक अवसंरचनाओं में वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करेंगे।

 

इंस्टा लिंक

मानव-पशु संघर्ष

अभ्यास प्रश्न

लोगों और जानवरों के बीच संघर्ष कई प्रजातियों के निरंतर अस्तित्व के लिए मुख्य खतरों में से एक है। मानव-पशु संघर्ष के बढ़ते मामलों के कारणों का विश्लेषण कीजिए। (15 अंक)

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

 


मुख्य परीक्षा संवर्धन हेतु पाठ्य सामग्री


चाची की रसोई

  • उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के कई गांवों में, दिन में एक बार का भी भोजन करना एक विलासिता माना जाता है, क्योंकि भुखमरी और भोजन की कमी इन गांवों में काफी लंबे समय से व्याप्त है।
  • सोनभद्र जिले के राजपुर गांव में बिपिन देवी और उनके पति कल्लू यादव राशन की दुकान चलाते हैं। वे अपनी कमाई का अधिकांश हिस्सा गरीब परिवारों, विशेषकर गांवों के बच्चों को खिलाने में लगा देते हैं। ये लोग पिछले दो वर्षों से अक्सर भूखे पेट सोते हैं।

इस उदाहरण का उपयोग समाज के प्रति करुणा और मानवता के प्रति सेवा को किसी भी तरह से उजागर करने के लिए किया जा सकता है।

सर्वोत्तम पद्धति: “ऑपरेशन हॉक-आई”

संदर्भ: दिल्ली पुलिस द्वारा अपराधियों के व्यवहार, शरीर के प्रकार, कपड़ों आदि का विश्लेषण करके और सर्वोत्तम पद्धतियों का उपयोग करके सड़क अपराधों, स्नैचिंग और डकैती को रोकने हेतु “ऑपरेशन हॉक-आई” शुरू किया गया है।

  • इसके तहत, स्नैचरों और लुटेरों की पहचान करने के लिए ‘स्पॉटर’ (Spotters) की भर्ती की जाएगी और उन्हें प्रशिक्षित किया जाएगा।
  • स्कॉर्पियन स्क्वाड: यह दो से तीन कर्मियों वाली समर्पित पूछताछ टीम है, जो “अपराधियों द्वारा उपयोग किए गए नवीनतम मोबाइल नंबरों, उनकी सामान्य गतिविधियों और जमानत पर रिहा किए गए लोगों के ठिकाने” का ट्रैक रखती है।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


मोढेरा सूर्य मंदिर

संदर्भ:

अहमदाबाद रेलवे स्टेशन को ‘मोढेरा सूर्य मंदिर’  (Modhera Sun Temple) की थीम पर विकसित किया जाएगा।

  • मोढेरा सूर्य मंदिर, भारत के गुजरात के मेहसाणा जिले के ‘मोढेरा गांव’ में स्थित सूर्य देवता को समर्पित एक हिंदू मंदिर है।
  • यह पुष्पावती नदी के तट पर स्थित है।
  • इसे चालुक्य वंश के भीम प्रथम के शासनकाल के दौरान 1026-27 ईस्वी के बाद बनाया गया था।
  • मंदिर के सामने एक विशाल आयताकार सीढ़ीदार तालाब है, जिसे सूर्य कुंड कहा जाता है, जो शायद भारत का सबसे भव्य मंदिर तालाब है।
  • हर साल, विषुव (Equinoxes) के समय, सूर्य, सीधे मंदिर के इस केंद्रीय कक्ष में चमकता है।

राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू के पहले औपचारिक भाषण में उल्लखित चार आदिवासी विद्रोह

संथाल विद्रोह:

  • संथाल विद्रोह (1855-56): ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी और जमींदारी व्यवस्था के खिलाफ वर्तमान झारखंड में संथाल जनजाति द्वारा किया गया विद्रोह था।
  • चार मुर्मू भाइयों – सिद्धू, कान्हू, चंद और भैरव – ने इस विद्रोह का नेतृत्व किया।

 

पाइका विद्रोह:

  • पाइका विद्रोह (1817): पाइका, ओडिशा के राजाओं द्वारा पारंपरिक रूप से भर्ती किए गए सैन्य अनुचरों का एक वर्ग था। मुख्य रूप से पाइकाओं को उनकी भूमि जोत से बेदखल किए जाने पर इन्होने ब्रिटिश औपनिवेशिक शासकों के खिलाफ विद्रोह किया।
  • खुर्दा के निर्वासित राजा के सर्वोच्च सेनापति बख्शी जगबंधु विद्याधर महापात्र भरमारबार राय ने कोंधों के विद्रोह में शामिल होने के लिए पाइकाओं की एक सेना का नेतृत्व किया।

 

कोल विद्रोह:

  • छोटा नागपुर क्षेत्र के कोल आदिवासियों ने वर्ष 1831 में अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह किया। यहां भी विद्रोह का कारण, गैर-आदिवासी बसने वालों द्वारा आदिवासी भूमि और संपत्ति का क्रमिक अधिग्रहण था, जिन्हें नए भूमि कानूनों द्वारा सहायता मिली थी।
  • इसका नेतृत्व, बुद्ध भगत, जोआ भगत और मदारा महतो सहित अन्य लोगों ने किया था।

भील विद्रोह (1818)

  • महाराष्ट्र के खानदेश क्षेत्र में भील क्षेत्र में अंग्रेजों की घुसपैठ के बाद, वर्ष 1818 में नए शासन के तहत शोषण के डर से आदिवासियों ने विद्रोह कर दिया।
  • विद्रोह का नेतृत्व, उनके नेता सेवाराम ने किया था।
  • ब्रिटिश सैन्य शक्ति का उपयोग करके इस विद्रोह बेरहमी से कुचल दिया गया था।

 

‘भारतीय ध्वज संहिता’, 2022

राष्ट्रीय ध्वज अब दिन-रात फहराया जा सकता है, यदि इसे खुले में या किसी आम नागरिक के घर पर फहराया गया हो। पहले इसे केवल सूर्योदय से सूर्यास्त तक फहराने की अनुमति थी।

ध्वज संहिता में किए गए पिछले संशोधन:

भारत की मूल ‘ध्वज संहिता’, 1947 में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद वर्ष 2002 में संशोधन किया गया था।

  • इस संशोधन के द्वारा, झंडा प्रदर्शित करने या फहराये जाने संबंधी स्थानों की परिभाषा का विस्तार किया गया था। हालाँकि, इस संशोधन में ‘ध्वज संहिता’ के तहत ‘राष्ट्रीय ध्वज’ के विवरण से संबंधित अंश को नहीं छेड़ा गया गया था।
  • सुप्रीम कोर्ट का फैसला: आम नागरिक अपने घरों और कार्यालय स्थानों पर 24 घंटे (दिन और रात) राष्ट्रीय ध्वज फहरा सकते हैं।

हर घर तिरंगा (हर दरवाजे पर तिरंगा) कार्यक्रम:

  • हर घर तिरंगा: यह आजादी का अमृत महोत्सव के तत्वावधान में लोगों को तिरंगा घर लाने और भारत की आजादी के 75 वें वर्ष को चिह्नित करने के लिए इसे फहराने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए एक अभियान है। इसके तहत लोगों को 13 से 15 अगस्त तक अपने घर में झंडा फहराने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
  • ‘हर घर तिरंगा’ (Har Ghar Tiranga) कार्यक्रम में सरकारी भवनों, निजी कार्यालयों और आवासों को कवर करने का प्रस्ताव किया गया है।
  • अनुच्छेद 51A(a) – संविधान का पालन करना और उसके आदर्शों, संस्थाओं, राष्ट्र ध्वज और राष्ट्रगान सम्मान करना।

ध्वज का उपयोग करने के संदर्भ में क़ानून:

  1. संप्रतीक और नाम (अनुचित प्रयोग निवारण) अधिनियम, 1950 (Emblems and Names (Prevention of Improper Use) Act, 1950)
  2. राष्ट्र-गौरव अपमान-निवारण अधिनियम, 1971 (Prevention of Insults to National Honour Act, 1971)

स्वदेश दर्शन योजना 2.0

संदर्भ: पर्यटन मंत्रालय (MOT) ने ‘स्वदेश दर्शन योजना’ में सुधार किया है।

संशोधित योजना के प्रमुख बिंदु:

  • संवहनीय और जिम्मेदार पर्यटन विकसित करना।
  • बेंचमार्क और मानकों का विकास।
  • घरेलू पर्यटन को मुख्य रूप से टियर-II और टियर-III शहरों में बढ़ावा देना।
  • राज्य सरकार परियोजनाओं के लिए कार्यान्वयन एजेंसियों को नामित करेगी। पहले पर्यटन मंत्रालय ऐसा करता था।
  • 100% केंद्र द्वारा वित्त पोषित।

‘स्वदेश दर्शन योजना’ के बारे में:

स्वदेश दर्शन योजना (Swadesh Darshan Scheme) को पर्यटन मंत्रालय द्वारा वर्ष 2014-15 में देश में ‘विषय आधारित पर्यटन परिपथ’ विकसित करने के लिए शुरू किया गया था।

  • यह परियोजना घटकों के लिए 100% केंद्र द्वारा वित्त पोषित योजना है।
  • इसमें केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और कॉर्पोरेट क्षेत्र की ‘कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व’ (CSR) पहल के तहत ‘स्वैच्छिक वित्त पोषण’ का लाभ उठाने का भी प्रावधान है।
  • अलग-अलग परियोजनाओं की फंडिंग अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग होगी और ‘कार्यक्रम प्रबंधन सलाहकार’ (पीएमसी) द्वारा तैयार की गई विस्तृत परियोजना रिपोर्ट के आधार पर इसे अंतिम रूप दिया जाएगा।

पर्यटन क्षेत्र की स्थिति:

  • जीडीपी में योगदान के मामले में विश्व यात्रा और पर्यटन परिषद की 2019 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत का पर्यटन 10वें स्थान पर है। इसने भारत के सकल घरेलू उत्पाद में 6.8% और सृजित कुल रोजगार का 8% योगदान दिया।
  • भारत में विश्व धरोहर सूची में सूचीबद्ध 40 स्थल – 32 सांस्कृतिक, 7 प्राकृतिक और 1 मिश्रित स्थल- शामिल हैं।

भारत द्वारा, हाल ही में हरित और डिजिटल पर्यटन पर ध्यान केंद्रित करते हुए मसौदा राष्ट्रीय पर्यटन नीति पेश की गयी है। इसके मुख्य बिंदु थे-

  • पर्यटन क्षेत्र को उद्योग का दर्जा प्रदान किया जाएगा।
  • MSMEs से संबंधित हरित, डिजिटल, गंतव्य प्रबंधन, कौशल और पर्यटन से संबंधित सहायता पर ध्यान दिया जाएगा।

अन्य पहलें: नमस्ते भारत, अतुल्य भारत, प्रसाद योजना

 

रूस-यूक्रेन अनाज सौदा

संदर्भ: यूक्रेन और रूस ने “मिरर” (Mirror) सौदों पर हस्ताक्षर किए हैं, इसके तहत ‘कीव’ को काला सागर के माध्यम से अनाज के निर्यात को फिर से शुरू करने की अनुमति दी जाएगी।

  • महत्व: इस समझौते से, वर्तमान में युद्ध के कारण यूक्रेन में फंसा हुआ लाखों टन अनाज को निर्यात करने की अनुमति मिलेगी।
  • रूस द्वारा 24 फरवरी को यूक्रेन पर आक्रमण के बाद से, यूक्रेनी अनाज की दुनिया में कमी ने लाखों लोगों को भुखमरी के खतरे में डाल दिया है।

 

हिम तेंदुआ द्वारा अपने शिकारों की आबादी का नियंत्रण

संदर्भ: ‘भारतीय प्राणी सर्वेक्षण’ के अध्ययन के अनुसार, हिम तेंदुआ (Snow leopard) अपने शाकाहारी शिकार प्रजातियों (साइबेरियाई आइबेक्स और नीली भेड़) की आबादी को नियंत्रित करता है।

अध्ययन के निष्कर्ष:

  • यदि ‘शिकार की प्रजातियों’ द्वारा उपयोग किए जाने वाले स्थानों का उपयोग किया जाता है तो हिम तेंदुए का पता लगाने की संभावना अधिक होती है।
  • संकेतक प्रजातियां और प्रमुख प्रजातियां: हिम तेंदुए, खाद्य श्रंखला में ‘शीर्ष शिकारी’ के रूप में अपनी स्थिति के कारण उस पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र के ‘स्वास्थ्य के संकेतक’ के रूप में कार्य करते हैं।
  • खतरा: प्राकृतिक शिकार प्रजातियों की कमी, मनुष्यों के साथ संघर्ष के कारण उनकी जवाबी हत्या और इसके फर और हड्डियों का अवैध व्यापार।
  • पर्यावास: हिम तेंदुए 3200m-5200m के बीच की ऊंचाई वाले ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी क्षेत्रों या गैर-वन क्षेत्रों में पाए जाते हैं।
  • पर्यावास सहसंयोजक, जैसे बंजर क्षेत्र, घास का मैदान, पहलू, ढलान और पानी से दूरी, हिम तेंदुए के साथ-साथ इसकी शिकार प्रजातियों के लिए आवास उपयोग के महत्वपूर्ण चालक होते हैं।

संरक्षण प्रयास: ग्लोबल स्नो लेपर्ड एंड इकोसिस्टम प्रोटेक्शन (GSLEP) प्रोग्राम (2013), हिमल रक्षक (सामुदायिक स्वयंसेवी कार्यक्रम, 2020), सुरक्षित हिमालय (जीईएफ और यूएनडीपी वित्त पोषित कार्यक्रम), प्रोजेक्ट स्नो लेपर्ड (2009), 21 गंभीर रूप से लुप्तप्राय प्रजातियों की वसूली के लिए कार्यक्रम (MoEFCC), हिम तेंदुआ संरक्षण प्रजनन कार्यक्रम (पद्माजा नायडू हिमालयन जूलॉजिकल पार्क, दार्जिलिंग)।

 

कांगो

संदर्भ: पृथ्वी पर सबसे बड़े पुराने वर्षावनों में से एक ‘कांगो’ (Congo) “तेल निवेश के लिए नया गंतव्य” बनने के लिए बड़ी मात्रा में पीटलैंड और वर्षावन की नीलामी कर रहा है।

खतरे: तेल और गैस ब्लॉक, विरुंगा नेशनल पार्क, दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण गोरिल्ला अभयारण्य के साथ-साथ उष्णकटिबंधीय पीटलैंड तक फैले हुए हैं, जो भारी मात्रा में कार्बन का भंडारण करते हैं। ये पीटलैंड कार्बन को वातावरण से बाहर रखते हैं।

जलवायु संकल्पों पर पीछे हटना:

  • जलवायु शिखर सम्मेलन में, कांगो ने अपने वर्षावन – जो विशाल कांगो बेसिन का हिस्सा है- की रक्षा के लिए 10 साल के समझौते का समर्थन किया था। ये वर्षावन, आकार में केवल अमेज़ॅन के बाद दूसरे स्थान पर है।
  • वनों को बचाने का एक प्रमुख समर्थक, नार्वे, अधिक अपतटीय ड्रिलिंग की योजना के साथ तेल उत्पादन बढ़ा रहा है।
  • अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन, जिन्होंने अपने कार्यकाल की शुरुआत में ही दुनिया को जीवाश्म ईंधन से मुक्त करने का संकल्प लिया था, हाल ही में सऊदी अरब गए, जहां उन्होंने अधिक तेल उत्पादन की आवश्यकता के मुद्दे को उठाया है।

धान गहनता प्रणाली

धान गहनता प्रणाली (System of Rice Intensification- SRI) को ‘धान की खेती की मेडागास्कर विधि’ भी कहा जाता है क्योंकि इसे पहली बार वहां विकसित किया गया था। इसमें, 15 से 20 प्रतिशत भूजल की बचत और चावल की उत्पादकता में सुधार की संभावना होती है।

  • विशेषज्ञों का कहना है कि इस पद्धति में कम पानी, कम बीज और कम रसायनों के साथ पारंपरिक चावल की खेती के बराबर या अधिक उत्पादन होता है।
  • धान गहनता प्रणाली (SRI), कम उपजाऊ मिट्टी सहित सभी प्रकार की मिट्टी में उपयुक्त है क्योंकि ऐसी मिट्टी में दोगुनी रोपाई की जा सकती है।

 

एन-ट्रीट तकनीक

संदर्भ:

आईआईटी-बॉम्बे, अपनी नई ‘एन-ट्रीट तकनीक’ (N-Treat technology) से मुंबई के सीवेज के उपचार में मदद करेगा।

‘एन-ट्रीट’ अपशिष्ट उपचार के लिए सात चरणों वाली प्रक्रिया है, जिसमें स्क्रीन, गेट, सिल्ट ट्रैप, छानने के लिए नारियल के रेशों के पर्दे और सोडियम हाइपोक्लोराइट का उपयोग करके कीटाणुशोधन किया जाता है।

  • पहले चरण में प्लास्टिक के कप, कागज के बर्तन, पॉलिथीन बैग, सैनिटरी नैपकिन, या लकड़ी जैसी तैरती हुई वस्तुओं के प्रवेश को रोकने के लिए ‘स्क्रीनिंग’ शामिल है।
  • दूसरे चरण में गाद जाल के निर्माण का प्रस्ताव है, जो अवसादन के लिए नाले के तल पर एक झुकाव और ‘पार्किंग स्पॉट’ बनाता है।
  • अगले तीन चरण ‘नारियल फाइबर पर्दे’ के रूप में ‘बायो जोन’ की स्थापना हैं, जो फिल्टर के रूप में कार्य करेंगे और कार्बनिक पदार्थों के अपघटन में मदद करने के लिए बायोफिल्म के विकास को बढ़ावा देंगे।
  • सीवेज उपचार के अंतिम चरण में पानी में बैक्टीरिया को मारने के लिए सोडियम हाइपोक्लोराइट का उपयोग करके कीटाणुशोधन शामिल होगा।

लंपी त्वचा रोग

गाँठदार त्वचा रोग या ‘लंपी त्वचा रोग’ (Lumpy skin disease – LSD) मवेशियों में होने वाला एक संक्रामक रोग है जो ‘पॉक्सविरिडे परिवार’ (family Poxviridae) के वायरस के कारण होता है, जिसे ‘नीथलिंग वायरस’ भी कहा जाता है।

एक वायरल बीमारी है, जिससे गोवंशीय पशु और भैंस दीर्घकालिक रुग्णता का शिकार हो जाते है।

  • लक्षण: यह पशुओं के पूरे शरीर में विशेष रूप से सिर, गर्दन, अंगों, थन (मादा मवेशी की स्तन ग्रंथि) और जननांगों के आसपास दो से पाँच सेंटीमीटर व्यास की गाँठ के रूप में दिखाई देता है। यह गाँठ बाद में धीरे-धीरे एक बड़े और गहरे घाव का रूप ले लेती है।
  • संचरण: यह बीमारी मच्छरों, मक्खियों और जूँओं के साथ-साथ पशुओं की लार तथा दूषित जल एवं भोजन के माध्यम से फैलती है।
  • लंपी त्वचा रोग’ ( LSD) वायरस, बिना किसी कीट वाहक की आवश्यकता के सीधे संचरण के साथ, संभवतः साँस द्वारा और निश्चित रूप से संक्रमित सामग्री, संक्रमित व्यक्तियों [मनुष्य से मनुष्य], और प्रयोगशाला से प्राप्त संक्रमण के सीधे संपर्क में आने से मनुष्यों को संक्रमित करने में सक्षम है।

 

भारत-जापान समुद्री साझेदारी अभ्यास

संदर्भ: जापान मेरीटाइम सेल्फ डिफेंस फ़ोर्स और भारतीय नौसेना के बीच अंडमान सागर में एक समुद्री साझेदारी अभ्यास (Maritime Partnership Exercise – MPX) आयोजित किया गया ।

  • उद्देश्य: इस अभ्यास का उद्देश्य अंतःक्रियाशीलता और सुव्यवस्थितता और संचार प्रक्रियाओं को बेहतर करना है।
  • विशेषता: आईएनएस सुकन्या (भारतीय महाकाव्यों की उल्लेखनीय महिला के नाम पर), भारतीय नौसेना का एक अपतटीय गश्ती पोत इसमें भाग लेगा।
  • जापान के साथ अन्य युद्धाभ्यास: जापान-भारत समुद्री अभ्यास (JIMEX) और मालाबार अभ्यास (भारत-अमेरिका-जापान-ऑस्ट्रेलिया)
  • अन्य देशों के साथ समुद्री अभ्यास: भारत-थाईलैंड समन्वित गश्ती (इंडो-थाई कॉर्पेट), कोंकण-शक्ति (यूके), समुद्र शक्ति (इंडोनेशिया), सिंगापुर-भारत समुद्री द्विपक्षीय अभ्यास (सिमबेक्स), ज़ैर-अल-बहर (कतर)