Print Friendly, PDF & Email

[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 23 July 2022

विषयसूची

सामान्य अध्ययन-II

  1. देश में एक साथ चुनाव कराए जाने संबंधी मुद्दे पर विधि आयोग द्वारा विचार

सामान्य अध्ययन-III

  1. समुद्री डकैती रोधी विधेयक
  2. पंजाब में ‘धान की सीधी बीजाई’ तकनीक की घटती लोकप्रियता

सामान्य अध्ययन-IV

  1. व्हिसल ब्लोइंग

मुख्य परीक्षा संवर्धन हेतु पाठ्य सामग्री (नैतिकता/निबंध)

  1. जंगल क्राई
  2. सोरारई पोट्रु

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

  1. फार्मास्यूटिकल्स उद्योग का सशक्तीकरण
  2. निम्न-तापमान तापीय विलवणीकरण (LTTD) तकनीक
  3. मलेशिया और इंडोनेशिया के साथ यूरोपीय संघ का ‘पाम तेल’ पर विवाद
  4. अनुकूलित आपूर्ति श्रृंखला
  5. इलेक्ट्रिक परिवहन को बढ़ावा देने की पहल
  6. खिलौनों के सुरक्षा पहलुओं पर BIS मानक
  7. किसी भी सतह को वायरस, बैक्टीरिया से बचाने हेतु नया स्प्रे कोटिंग
  8. MIST पनडुब्बी केबल सिस्टम
  9. सेन्टॉरस

 


सामान्य अध्ययनII


 

विषय: जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की मुख्य विशेषताएँ।

देश में एक साथ चुनाव कराए जाने संबंधी मुद्दे पर विधि आयोग द्वारा विचार

संदर्भ:

देश में एक साथ संसदीय और विधानसभा चुनाव कराने संबंधी मुद्दा केंद्र सरकार द्वारा विधि आयोग को भेजा गया है, ताकि एक व्यावहारिक रोडमैप और रूपरेखा तैयार की जा सके।

इससे पहले, 21वें विधि आयोग ने अपनी मसौदा रिपोर्ट में कहा था कि वह इस बात को लेकर आश्वस्त है कि “देश में एक ऐसा व्यवहार्य वातावरण मौजूद है, जिसके लिए निचले सदन (लोकसभा) और राज्य विधानमंडलों के लिए ‘एक साथ चुनाव’ (Simultaneous Elections) कराने की आवश्यकता है। देश को लगातार चुनावी मोड में रहने से रोकने के लिए ‘एक साथ चुनावों’ को एक समाधान के रूप में देखा जा सकता है।”

‘एक साथ चुनावों’ के बारे में:

एक साथ चुनाव (Simultaneous Election) ‘लोकतांत्रिक प्रक्रिया’ की एक प्रणाली है जिसमें विभिन्न सदनों (लोकसभा और राज्य विधानसभाओं) और निकायों के चुनावों को अधिक दक्षता और व्यय बचाने के लिए एक साथ संकालित / सिंक्रनाइज़ (synchronized) किया जाता है।

भारत में, वर्ष 1967 तक ‘एक साथ चुनाव’ (Simultaneous Election) एक सामान्य बात थी। हाल ही में नीति आयोग, विधि आयोग की रिपोर्ट, और प्रधान मंत्री द्वारा भारत में चुनाव को एक सार्थक लोकतांत्रिक प्रक्रिया बनाने के लिए ‘एक साथ चुनाव’ पर जोर दिया जा रहा है।

‘एक साथ चुनाव’ होने के लाभ:

  • नीतिगत गतिहीनता में कमी: राज्य में ‘आदर्श आचार संहिता’ (Model Code of Conduct – MCC) को लंबे समय तक लागू करने से ‘विकासात्मक कार्यक्रम’ रुक जाते हैं।
  • चुनावों पर होने वाले भारी खर्च में कमी: ‘सेंटर फॉर मीडिया स्टडीज’ की रिपोर्ट के अनुसार – वर्ष 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान लगभग 55,000 करोड़ रुपये (8 बिलियन डॉलर) खर्च किए गए। ‘एक साथ चुनाव’ एक ही समय में राज्यों और केंद्र के लिए समकालिक चुनाव कराकर इसे कम करने में मदद कर सकते हैं।
  • सार्वजनिक जीवन के व्यवधान को कम करना: लगातार होने वाले चुनाव, नियमित परिवहन, आवश्यक वस्तुओं की कीमतों आदि जैसी आवश्यक सेवाओं के कामकाज को प्रभावित करते हैं।
  • सामाजिक ताने-बाने पर प्रभाव में कमी: देश में होने वाले चुनाव, धर्म, जाति, भ्रष्टाचार और सांप्रदायिक तनाव को कायम रखने के लिए जाने जाते हैं।
  • लोकलुभावन उपायों के प्रभाव में कमी: ‘लोकलुभावन उपाय’ अक्सर आर्थिक सिद्धांतों के अनुरूप नहीं होते हैं और ‘तत्काल चुनावी लाभ’ की एक संकीर्ण दृष्टि रखते हैं।
  • मतदान प्रतिशत में वृद्धि: बार-बार चुनाव होने से मतदाता थक जाते हैं और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में उनकी भागीदारी कम हो जाती है।

‘एक साथ चुनावों’ की सीमाएं:

लोकतांत्रिक सिद्धांतों की सीमा: चुनावों को संकलित (सिंक्रनाइज़) करने हेतु मौजूदा विधायिका के कार्यकाल को कम करने से लोकतंत्र और संघवाद कमजोर होगा।

मतदाता व्यवहार: कुछ राजनीतिक वैज्ञानिकों का कहना है, कि एक साथ चुनाव कराए जाने पर, मतदाता, राष्ट्रीय मुद्दों पर मतदान करने के लिए प्रभावित हो सकते हैं, जिससे राष्ट्रीय दलों को, लोकसभा और राज्य के चुनावों के लिए भी लाभ होता है। इससे ‘चुनावी तटस्थता’ कमजोर हो जाती है।

जवाबदेही: बार-बार होने वाले चुनाव, सत्ता में पार्टियों की राजनीतिक और विकासात्मक जवाबदेही सुनिश्चित करते हैं। लेकिन ‘एक साथ होने वाले चुनाव’ इस जबावदेही को कमजोर कर सकते हैं।

  • Constitutional limitation: SE would require amendment in the provisions of the constitution, RPA 1951, and ratification by states. It may be hard to get in a multiparty and diverse country like India.

संवैधानिक सीमा: ‘एक साथ चुनाव’ कराए जाने के लिए संविधान के प्रावधानों, ‘जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951’ में संशोधन और राज्यों द्वारा अनुसमर्थन की आवश्यकता होगी। भारत जैसे बहुदलीय और विविधता पूर्ण देश में इन सब शर्तों को पूरा करना मुश्किल हो सकता है।

एक साथ चुनाव सफलतापूर्वक लागू करने वाले कुछ देश:

दक्षिण अफ्रीका (राष्ट्रीय और प्रांतीय), और स्वीडन (स्थानीय चुनाव सहित) में ‘एक साथ चुनाव’ सफलतापूर्वक आयोजित किए जाते हैं।

इंस्टा लिंक

एक देश एक चुनाव

अभ्यास प्रश्न

लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने के विचार के मद्देनजर, इसके कार्यान्वयन से होने वाले लाभों और इससे उठने वाली चिंताओं पर चर्चा कीजिए। (250 शब्द)

स्रोत: दिप्रिंट

 


सामान्य अध्ययनIII


 

विषय: आंतरिक सुरक्षा के लिये चुनौती उत्पन्न करने वाले शासन विरोधी तत्त्वों की भूमिका।

समुद्री डकैती रोधी विधेयक

संदर्भ: हाल ही में, सरकार द्वारा ‘समुद्री डकैती विधेयक’ 2019 (Anti-Maritime Piracy Bill 2019) पेश किया गया है।

  • इस विधेयक के माध्यम से ‘संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि’ (United Nations Convention on the Law of the Sea- UNCLOS) के प्रावधानों को देश के कानून में शामिल किया जाएगा।
  • यह क़ानून भारतीय अधिकारियों को उच्च समुद्रों पर समुद्री डकैती के खिलाफ कार्रवाई करने में सक्षम बनाएगा।

समुद्री डाकू (Pirate), खुले समुद्रों में किसी भी जहाज पर हमला करने और उसको अपने अधिकार में लेने या नष्ट कर देने वाले तथा कभी-कभी तटवर्ती बंदरगाहों पर लूट-पाट करने वाले जहाजी (नाविक) या डाकू (लुटेरे) होते हैं।

वस्तुस्थिति:

  • वर्तमान में, भारत में ‘खुले समुद्रों में जलदस्युता’ (piracy on the high seas) संबंधी मामलों पर कोई कानून नहीं है।
  • भारत द्वारा वर्ष 1995 में ‘संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि’ (UNCLOS) की पुष्टि की जा चुकी है, लेकिन अभी तक इसे विधेयक के माध्यम से अधिनियमित नहीं किया गया है।

विधेयक की आवश्यकता:

  • अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में ‘भारतीय दंड संहिता’ विदेशियों पर लागू नहीं होती है: पहले, भारतीय दंड संहिता, 1860 (Indian Penal Code (IPC), 1860) के तहत समुद्री लुटेरों पर मुकदमा चलाया जाता था। हालाँकि, भारत की संप्रभुता, उसके क्षेत्रीय जल की बाहरी सीमा-तट से 12 समुद्री मील की दूरी पर सीमित है। भारत के क्षेत्रीय जल क्षेत्र के बाहर किसी विदेशी द्वारा किए गए समुद्री डकैती के कार्य आईपीसी के तहत अपराध नहीं माना जा सकता है, और समुद्री डकैती के मामलों के आरोपियों को अधिकार क्षेत्र की अभाव के कारण बरी कर दिया जाता है।
  • समुद्री डकैती की घटनाएं: ‘अदन की खाड़ी’, बड़ी संख्या में समुद्री डकैती की घटनाओं के कारण सभी महासागरों में सबसे खतरनाक क्षेत्रों में से एक है। ‘अदन की खाड़ी’ में बढ़ी हुई नौसैनिक उपस्थिति के कारण, यह देखा गया है कि समुद्री डकैती के संचालन पूर्व और दक्षिण की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे भारत के पश्चिमी तट के निकट इसका खतरा बढ़ जाता है। उदहारण: पिछले साल नाइजीरिया के तट से कच्चे तेल के जहाज में सवार 18 भारतीयों का अपहरण कर लिया गया था।

विधेयक में शामिल प्रावधान:

  • परिभाषा: समुद्री डकैती या जलदस्युता (Piracy) को, खुले सागर (High Seas), में किसी ‘निजी जहाज’ (private vessel) अथवा ‘निजी विमान’ (private aircraft) के चालक दल या इनमे सवार व्यक्तियों द्वारा किसी अन्य जहाज या विमान और/या उसमें सवार लोगों अथवा संपत्ति के खिलाफ हिंसा या हिरासत की कार्रवाई रूप में परिभाषित किया गया है।
  • अतिरिक्त-क्षेत्रीय क्षेत्राधिकार: यह विधेयक ‘विशेष आर्थिक क्षेत्र’ (EEZ) से आगे के समुद्री क्षेत्र – समुद्र तट से 200 समुद्री मील से अधिक- पर लागू होगा।, है।
  • हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि यह विधेयक EEZ पर लागू होगा अथवा नहीं। भारत का ‘विशेष आर्थिक क्षेत्र’, समुद्री तट से 12 से 200 समुद्री मील के बीच विस्तारित है।
  • सजा: यदि समुद्री डकैती के दौरान किसी की मौत होती है, यह किसी किसी की मौत का कारण बनती है, तो समुद्री डकैती के कृत्यों के लिए, दोषियों को आजीवन कारावास या मृत्यु की सजा दी जाएगी।
  • समुद्री डकैती के कृत्यों में भाग लेने या इसमें सहायता करने पर 14 साल तक की कैद और जुर्माना हो सकता है।
  • प्रत्यर्पण योग्य अपराध: इसका मतलब यह है कि आरोपी को किसी भी देश में मुकदमा चलाने के लिए स्थानांतरित किया जा सकता है जिसके साथ भारत ने ‘प्रत्यर्पण संधि’ (Extradition Treaty) पर हस्ताक्षर किए हैं।
  • प्राधिकृत न्यायालय: केंद्र सरकार, संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के परामर्श से, सत्र न्यायालयों को इस विधेयक के तहत ‘प्राधिकृत न्यायालयों’ के रूप में अधिसूचित कर सकती है।

अपराध की प्रकल्पना (Presumption of guilt): निम्नलिखित स्थितियों में आरोपी पर ‘अपराध की प्रकल्पना’ की जाएगी, यदि:

  1. आरोपी के पास हथियार, विस्फोटक और अन्य उपकरण पाए जाते हैं जिनका उपयोग या अपराध करने के लिए किया गया था;
  2. जहाज के चालक दल या यात्रियों के खिलाफ बल का प्रयोग करने के पर्याप्त सबूत मिलते हैं, और
  3. जहाज के चालक दल, यात्रियों या कार्गो के खिलाफ बम और हथियारों का प्रयोग करने के इरादे का सबूत मिलता है।

विधेयक से जुड़े मुद्दे:

  • यह स्पष्ट नहीं है कि 14 साल की अवधि और आजीवन कारावास का ओवरलैप कैसे निर्धारित किया जाएगा क्योंकि ‘समुद्री डकैती’ (Piracy) के कार्य में ‘भागीदारी’ भी अंतर्निहित होगी।
  • मृत्युदंड का मुद्दा: भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने “दुर्लभ से दुर्लभतम” मामलों में अत्यधिक सजा के इस्तेमाल की वकालत की है। शीर्ष अदालत के अनुसार, ‘मौत की सजा’ संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन करती है।

‘संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि, 1982’ (UNCLOS, 1982):

संयुक्त राष्ट्र द्वारा इस कानून को वर्ष 1982 में अपनाया गया था, किंतु यह नवंबर 1994 में प्रभाव में आया।

  • ‘संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि’ (UNCLOS) के द्वारा प्रादेशिक सागर (Territorial Sea) और सन्निहित क्षेत्र (Contiguous Zone), महाद्वीपीय शेल्फ, खुले सागर (High Seas), ‘खुले सागर में मत्स्यन एवं जीवित संसाधनों के संरक्षण’ से संबंधित, अप्रैल, 1958 में हस्ताक्षरित चार ‘जिनेवा संधियों’ को प्रतिस्थापित किया गया था।
  • वर्तमान में, यह संधि, जहाज़ी और समुद्री गतिविधियों के लिए कानूनी ढांचा बन गया है।
  • इसके लिए ‘समुद्री क़ानून’ (Law of the Sea) के रूप में भी जाना जाता है, और यह समुद्री क्षेत्र को पांच मुख्य क्षेत्रों में विभाजित करता है, अर्थात्- आंतरिक जल, प्रादेशिक सागर, सन्निहित क्षेत्र, विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (EEZ) और खुला सागर।
  • UNCLOS, समुद्री क्षेत्रों में किसी देश के अधिकार क्षेत्र हेतु एक रूपरेखा निर्धारित करने वाला एकमात्र अंतरराष्ट्रीय समझौता है। इसके तहत, विभिन्न समुद्री क्षेत्रों के लिए अलग कानूनी-दर्जा प्रदान किया गया है।

‘संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि’ के द्वारा अंतरराष्ट्रीय मामलों पर तीन नए संस्थान गठित किए गए हैं:

  1. समुद्री कानूनों के लिए अंतर्राष्ट्रीय न्यायाधिकरण (International Tribunal for the Law of the Sea)
  2. अंतर्राष्ट्रीय सागर-नितल प्राधिकरण (International Seabed Authority)
  3. महाद्वीपीय शेल्फ सीमा आयोग (Commission on the Limits of the Continental Shelf)

इंस्टा लिंक

समुद्री डकैती रोधी विधेयक

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: मुख्य फसलें- देश के विभिन्न भागों में फसलों का पैटर्न- सिंचाई के विभिन्न प्रकार एवं सिंचाई प्रणाली- कृषि उत्पाद का भंडारण, परिवहन तथा विपणन, संबंधित विषय और बाधाएँ; किसानों की सहायता के लिये ई-प्रौद्योगिकी।

पंजाब में ‘धान की सीधी बीजाई’ तकनीक की घटती लोकप्रियता

संदर्भ: पंजाब सरकार द्वारा ‘धान का सीधे बीजारोपण’/ ‘धान की सीधी बीजाई’ (Direct seeding of rice – DSR) पद्धति को अपनाने के लिए किसानों को 1,500 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन के बावजूद, किसान धान की फसल के अधिकांश क्षेत्र में ‘धान की पोखर रोपाई’ (puddled transplanting of rice) की पारंपरिक विधि की ओर लौट रहे हैं। पिछले वर्ष की तुलना में ‘धान की सीधी बीजाई’ (DSR) में 87 प्रतिशत की कमी आई है।

‘धान की सीधी बीजाई’ या ‘धान के सीधे बीजारोपण’ (DSR) के बारे में:

‘धान की सीधी बीजाई’ (Direct seeding of rice – DSR) में नर्सरी में उगाई गयी पौध को रोपने के बजाय बीज को खेत में बोया जाता है।

 

  • इसका उद्देश्य ‘कम अवधि और अधिक उपज’ देने वाली किस्मों को बोना है।
  • इस तकनीक में पहले से अंकुरित बीजों को ट्रैक्टर से चलने वाली मशीन द्वारा सीधे खेत में गड्ढा करके गाड़ दिया जाता है।
  • इस पद्धति में कोई नर्सरी तैयार नहीं की जाती है और न ही रोपाई की जाती है। किसानों को केवल अपने खेत को समतल करना होता है और एक बुवाई से पहले सिंचाई करनी होती है।

पंजाब में ‘धान की सीधी बीजाई’ पद्धति को बढ़ावा दिए जाने के कारण:

भूजल बचाने के लिए: विशेषज्ञों का कहना है कि ‘धान की सीधी बीजाई’ (DSR) पद्धति को अपनाकर लगभग 15% से 20% भूजल को बचाया जा सकता है।

‘धान की सीधी बीजाई’ में कमी आने के कारण:

  • पर्याप्त बिजली और पानी की कमी: अधिकारियों के अनुसार- इस साल राज्य में अनियमित बिजली कटौती हुई। इसके अलावा ‘धान की सीधी बीजाई’ (DSR) के समय नहर का पानी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं था।
  • विविध परिणाम: विशेषज्ञों और किसानों के अनुसार- DSR के परिणाम ‘किसान से किसान’ और मिट्टी के प्रकार पर निर्भर करते हैं। इस विधि से किसी को अधिक उपज मिल रही है तो किसी को कम।
  • ‘धान की सीधी बीजाई’ के लिए हल्की मिट्टी खराब होती है और भारी मिट्टी अच्छी होती है।
  • तकनीकी जानकारी का अभाव: राज्य के अधिकांश किसान अभी भी इस तकनीक से ज्यादा वाकिफ नहीं हैं और इस साल गेहूं की उपज में भारी नुकसान का सामना करने के बाद, वे प्रायोगिक DSR पद्धति के बजाय सुनिश्चित ‘पारंपरिक पद्धति’ को पसंद कर रहे हैं।
  • खरपतवारनाशी की आवश्यकता: हालांकि DSR पद्धति में अधिक श्रम की आवश्यकता नहीं होती है, लेकिन खरपतवारों को नियंत्रित करने के लिए खरपतवारनाशी के कई छिड़कावों की आवश्यकता होती है। पारंपरिक कृषि में, भरपूर सिंचाई एक खरपतवारनाशी के रूप में कार्य करती है।
  • कम प्रोत्साहन: कई किसानों की शिकायत है कि DSR पद्धति को अपनाने से 6000 प्रति एकड़ से अधिक का नुकसान हुआ है, लेकिन ‘धान की सीधी बीजाई’ के लिए मात्र 1,500 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन दिया जाता है।

आवश्यकता:

विशेषज्ञों का कहना है, कि DSR पद्धति पंजाब में पानी को बचाने में अधिक मदद नहीं कर सकेगी। पारंपरिक तरीकों से 1 किलो चावल उगाने में लगभग 5,000 लीटर पानी लगता हैं, जबकि DSR पद्धति से 15% से 20% पानी की बचत हो सकेगी, और इसमें 1 किलो चावल उगाने के लिए लगभग 4,000 से 4,200 लीटर पानी लगेगा जो कि काफी ज्यादा है।

पानी बचाने के लिए हरियाणा मॉडल: सरकार को भूजल बचाने के लिए ‘हरियाणा सरकार के मॉडल’ को अपनाना चाहिए। हरियाणा सरकार अपनी योजना “मेरा पानी मेरी विरासत” के तहत धान की फसल को नहीं उगाने तथा इसके स्थान पर फल और सब्जियों जैसी अन्य वैकल्पिक फसलों को उगाने वाले किसानों को 7,000 रुपये प्रति एकड़ (बीमा कवर के साथ) की पेशकश कर रही है।

DSR पद्धति के लाभ:

  • पानी की बचत: ‘धान की सीधी बुवाई’ (DSR) के तहत पहली सिंचाई (बुवाई पूर्व रौनी के अलावा), बुवाई के 21 दिन बाद ही जरूरी होती है। जबकि रोपे गए धान में, पहले तीन हफ्तों तक खेत को जलमग्न रखने के लिए व्यावहारिक रूप से लगभग हर दिन पानी देना पड़ता है।
  • श्रम में कमी: लगभग 2400 रुपये प्रति एकड़ की दर से एक एकड़ धान की बुवाई के लिए लगभग तीन मजदूरों की आवश्यकता होती है।
  • डीएसआर के तहत शाकनाशी की लागत 2,000 रुपये प्रति एकड़ से अधिक नहीं होती है।
  • खेत को कम समय तक जलमग्न रखने की वजह से ‘मीथेन उत्सर्जन’ में कमी होती है और धान-रोपण की तुलना में मृदा की संरचना में कम विखंडन होता है।

 

धान की खेती के अन्य तरीके:

  • प्रतिरोपण (Transplantation): बीजों को पहले नर्सरी में बोया जाता है और पौधों को मुख्य खेत में रोपित किया जाता है।
  • ड्रिलिंग विधि (Drilling Method): खेत में मशीन से छोटे-छोटे गड्ढे करके उनमे बीज डाले जाते हैं।
  • धान गहनता की प्रणाली: यह खेती में धान की उपज बढ़ाने के उद्देश्य से एक अपनाई जाने वाली कृषि पद्धति है। यह एक कम पानी और अधिक श्रम की आवश्यकता वाली विधि है जिसमें छोटे पौधों की अलग-अलग दूरी आमतौर पर विशेष उपकरणों के साथ हाथ से निराई-गुड़ाई की जाती है।

 

इंस्टा लिंक्स:

धान की सीधी बिजाई

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

टैग: कृषि

 


सामान्य अध्ययनIV


 

व्हिसल ब्लोइंग

संदर्भ:

हाल ही में, ‘उबर फाइल्स’ (Uber Files) जांच के स्रोत के रूप में, ‘उबर’ के लिए काम कर चुके एक वरिष्ठ पैरवीकार (senior lobbyist) ‘मार्क मैकगैन’ नाम सामने आने के बाद, 2016 के पनामा पेपर्स के व्हिसलब्लोअर (Whistleblower) ने अपना पहला साक्षात्कार दिया है।

‘पनामा पेपर्स’ ने यह उजागर किया था, कि अमीर और शक्तिशाली लोगों ने किस प्रकार अपना पैसा ‘वैश्विक टैक्स हेवन’ में रखा और बाहर निकला।

‘व्हिसलब्लोअर’ के बारे में:

  • व्हिसलब्लोइंग (Whistleblowing) का तात्पर्य, किसी संस्था या संगठन में हो रहे गलत कामों की ओर ध्यान आकर्षित करना है।
  • व्हिसलब्लोइंग का संबंध नैतिकता से होता है, क्योंकि यह किसी व्यक्ति की गहरी स्तर पर समझ का प्रतिनिधित्व करता है- कि उसका संगठन जो कार्रवाई कर रहा है वह हानिकारक है – और यह लोगों के अधिकारों में हस्तक्षेप कर रही है, या अनुचित है, या गलत है।

व्हिसलब्लोइंग के जुड़े नैतिक मुद्दे:

अपनी संस्था या संगठन के प्रति ‘निष्ठाहीन’ या ‘बागी’ होना, बनाम दूसरों के लाभ और समाज के प्रति नैतिक प्रतिबद्धता के लिए ‘गलत काम करने’ की जानकारी को साझा करना।

इस कार्य में व्हिसलब्लोअर को अपने साथी कर्मियों के अविश्वास का सामना करना पड़ सकता है।

व्हिसलब्लोअर द्वारा दिखाए गए मूल्य:

  • साहस – अपने संगठन के खिलाफ खड़े होने और अपने जीवन में स्थिरता खोने के लिए तैयार रहने के लिए नैतिक साहस की आवश्यकता होती है।
  • आत्म-बलिदान – ‘व्हिसलब्लोअर’ अपनी कीमत पर जनहित के लिए काम करते हैं।
  • कर्तव्यबद्ध और कानून का सम्मान – हालांकि, ‘व्हिसलब्लोअर’ के समक्ष संगठन के साथ ‘अनुबंध का उल्लंघन करना’ जैसी ‘नैतिकता’ को भंग करने की दुविधा रहती है।

सरकार ‘व्हिसलब्लोइंग’ को किस प्रकार प्रोत्साहित कर सकती है:

  • अवैध या अनैतिक प्रथाओं की रिपोर्ट करने के बारे में एक नीति बनायी जानी चाहिए।
  • उल्लंघनों की रिपोर्ट करने के लिए हॉटलाइन और मेलबॉक्स जैसे औपचारिक तंत्र स्थापित किए जाने चाहिए।
  • ‘चिंताओं को व्यक्त करने की प्रक्रिया’ के बारे में स्पष्ट संचार व्यवस्था, जैसे कि कमांड की एक विशिष्ट श्रृंखला, या शिकायतों को संभालने के लिए किसी विशिष्ट व्यक्ति का अभिनिर्धारण।
  • शीर्ष अधिकारियों से नीति का अनुमोदन दिया जाना और प्रक्रिया के लिए ‘संगठन की प्रतिबद्धता’ को प्रचारित करना। निर्वाचित और प्रशासनिक नेतृत्व को नैतिक व्यवहार को प्रोत्साहित करना चाहिए और संगठन के भीतर सभी को उच्चतम मानकों पर रखना चाहिए, जिसमें जनता के सरोकारों पर नकारात्मक प्रभाव डालने वाली गतिविधियों का खुलासा शामिल होना चाहिए।
  • कदाचार के सभी आरोपों की जांच और तुरंत कार्रवाई की जानी चाहिए। इन जांचों के संबंध में ‘परिषद’ या ‘बोर्ड’ को रिपोर्ट की जाए।

भारतीय उदाहरण:

एक प्रसिद्ध भारतीय व्हिसलब्लोअर ‘सत्येंद्र दुबे’ थे, जो बिहार में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के स्वर्णिम चतुर्भुज के एक खंड पर काम कर रहे थे। वह आईआईटी से स्नातक थे। ‘सत्येंद्र दुबे’ ने परियोजना में भ्रष्टाचार को उजागर करने के लिए सीधे प्रधान मंत्री कार्यालय को लिखा था। अपनी इस कार्रवाई के लिए उन्हें अपने जीवन से हाथ धोना पड़ा था।

व्हिसलब्लोइंग के संबंध में भारत में क़ानून:

  • सरकार द्वारा किसी सरकारी अधिकारी या विभाग द्वारा कथित भ्रष्टाचार या कार्यालय के दुरुपयोग के खिलाफ शिकायतों को दर्ज करने के लिए ‘जनहित प्रकटीकरण और मुखबिरों की सुरक्षा’ (Public Interest Disclosure and Protection Of Informers – PIDPI) प्रस्ताव पेश किया गया है।
  • केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) को शिकायतों को प्रशासित करने के लिए ‘एजेंसी’ के रूप में नामित किया गया था। CVC, व्हिसलब्लोअर के नाम को छिपाने के बाद नियमित रूप से संबंधित अनुभाग पर नजर रखना जारी रखता है।
  • ‘व्हिसलब्लोअर्स प्रोटेक्शन एक्ट’ का उद्देश्य लोगों को लोक सेवकों द्वारा कथित भ्रष्टाचार और कार्यालय के दुरुपयोग पर शिकायत दर्ज करने के लिए एक विधायी मार्ग प्रदान करना है।
  • चूंकि, इस अधिनियम के नियमों को अंतिम रूप नहीं दिया गया है, अतः अभी यह क़ानून लागू नहीं हुआ है।

अभ्यास प्रश्न:

भ्रष्ट्राचार और कदाचार का पता लगाने और उन्हें रोकने के लिए व्हिसलब्लोइंग सबसे प्रभावी तरीकों में से एक है। विस्तार में चर्चा कीजिए।

स्रोत: द इंडियन एक्सप्रेस

 


मुख्य परीक्षा संवर्धन हेतु पाठ्य सामग्री (नैतिकता/निबंध)


जंगल क्राई

सितंबर 2007 में ‘पॉल वॉल्श’ ने अंडर -14 के लिए टूरएड नेशंस कप (TourAid Nations Cup) में ओडिशा के आदिवासी लड़कों की एक टीम का नेतृत्व किया था। उनकी कहानी पर अब ‘जंगल क्राई’  (Jungle Cry) शीर्षक से फिल्म बनायी गयी है।

  • वॉल्श, ‘जंगल क्रो फाउंडेशन’ (Jungle Crows Foundation) की स्थापना के बारे में बात करते हैं। यह संस्था एक खेल और सामाजिक विकास संगठन है जो बच्चों और युवाओं को बढ़ने और विकसित होने में सहायता करता है।
  • ‘पॉल वॉल्श’ की कहानी यह दिखती है, कि ‘खेल’ किस प्रकार वंचितों के जीवन पर परिवर्तनकारी प्रभाव डाल सकते हैं। ‘खेल’ उन्हें अपना कौशल दिखाने के लिए एक मंच और आवाज प्रदान करते है। ‘पॉल वॉल्श’ की कहानी वंचित वर्गों विशेषकर बच्चों के उत्थान के लिए काम करने की सामाजिक नैतिकता को भी दर्शाती है।

सोरारई पोट्रु

तमिल फिल्म “सूररई पोट्रु” (Soorarai Pottru) ने 68वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म, सर्वश्रेष्ठ अभिनेता, सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री, सर्वश्रेष्ठ गीत और सर्वश्रेष्ठ पटकथा के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार जीते है।

  • यह फिल्म दिखाती है, कि किस प्रकार एक पूर्व भारतीय वायु सेना का पायलट कम लागत वाली एयरलाइन शुरू करने का सपना देखता है और कठोर परिस्थितियों के बावजूद इसे पूरा करने में सफल होता है।
  • मूल्य: समर्पण, कड़ी मेहनत, समाज के निचले वर्गों के प्रति करुणा, अनुनय आदि।

 

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


फार्मास्यूटिकल्स उद्योग का सशक्तीकरण

औषध उद्योग में भारत के मौजूदा विनिर्माण कौशल को और बढ़ाने के उद्देश्य से भारत सरकार के रसायन और उर्वरक मंत्रालय का फार्मास्यूटिकल्स विभाग, ‘औषध उद्योग को मजबूत बनाने के लिए ‘फार्मास्यूटिकल्स उद्योग का सशक्तीकरण’ (Strengthening Pharmaceuticals Industry – SPI) के बैनर तले कई पहलें शुरू करने की योजनाएं बना रहा है।

ये तीन पहलें निम्नवत हैं:

  1. औषध उद्योग प्रौद्योगिकी उन्नयन सहायता योजना (Pharmaceutical Technology Upgradation Assistance Scheme PTUAS): PTUAS फार्मास्युटिकल MSMEs को उनकी तकनीक को अपग्रेड करने के लिए एक सिद्ध ट्रैक रिकॉर्ड प्रदान करेगा। यह 10 करोड़ रुपये तक के ऋण पर 10% की पूंजीगत सब्सिडी प्रदान करेगा। इसके तहत, न्यूनतम चुकौती अवधि तीन महीने निर्धारित की गई है।
  2. सामान्य सुविधाओं के लिए औषध उद्योग को सहायता‘ (Assistance to Pharma Industries for Common Facilities Scheme : API-CF): API-CF के तहत सरकार 20 करोड़ रुपए अधिकतम सीमा की सूरत में 70 प्रतिशत पूंजी अनुदान के रूप में सरकारी सहायता प्रदान करके परीक्षण प्रयोगशालाओं, सामान्य अपशिष्ट उपचार संयंत्रों और ऐसी अन्य सामान्य सुविधाओं के निर्माण का समर्थन करेगी।
  3. फार्मास्युटिकल और मेडिकल डिवाइसेज प्रमोशन एंड डेवलपमेंट स्कीम (PMPDS): इसका उद्देश्य फार्मा और चिकित्सा उपकरण क्षेत्रों का डेटाबेस बनाना है।
  • ये योजनाएं औषध क्षेत्र में MSMEs इकाइयों के प्रौद्योगिकी उन्नयन के लिए क्रेडिट लिंक्ड कैपिटल और ब्याज सब्सिडी प्रदान करती है, साथ ही फार्मा क्लस्टर्स में शोध केंद्र, टेस्टिंग लैब और ईटीपी सहित सामान्य सुविधा केंद्रों के लिए प्रत्येक को 20 करोड़ रुपये तक की सहायता उपलब्ध कराती है।
  • इन योजनाओं से छोटी कंपनियों को अपनी सुविधाओं को अंतरराष्ट्रीय विनिर्माण मानकों के अनुसार अपग्रेड करने में मदद मिलेगी।

निम्न-तापमान तापीय विलवणीकरण (LTTD) तकनीक

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES) ने अपने स्वायत्त संस्थान ‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशन टेक्नोलॉजी’ (NIOT) के माध्यम से समुद्री जल को पीने योग्य पानी में बदलने के लिए निम्न-तापमान तापीय विलवणीकरण (Low-Temperature Thermal Desalination – LTTD) तकनीक विकसित की है।

  • इस तकनीक का लक्षद्वीप समूह के द्वीपों में सफलतापूर्वक प्रदर्शित किया गया है।
  • LTTD तकनीक, लक्षद्वीप समूह द्वीपों के लिए उपयुक्त है, क्योंकि प्रौद्योगिकी के अनुसार समुद्र की सतह के पानी और गहरे समुद्र के पानी के बीच तापमान में 15 डिग्री सेल्सियस का अंतर होता है।

मलेशिया और इंडोनेशिया के साथ यूरोपीय संघ का ‘पाम तेल’ पर विवाद

संदर्भ: यूरोपीय संघ ने पहले 2030 तक ‘असंवहनीय ताड़ के तेल’ (Unsustainable Palm Oil) के आयात को समाप्त करने का फैसला किया था। इंडोनेशिया और मलेशिया का कहना है कि यूरोपीय संघ के ‘ताड़ के तेल’ पर लगाए गए प्रतिबंध अनुचित, “भेदभावपूर्ण”, और “फसल रंगभेद” हैं और इन देशों ने ‘विश्व व्यापार संगठन’ में यूरोपीय संघ को चुनौती दी है।

  • इंडोनेशिया और मलेशिया, दुनिया के दो सबसे बड़े ‘पाम तेल’ उत्पादक हैं, ‘पाम तेल’ के वैश्विक उत्पादन में इन देशों का 90% हिस्सा हैं। हालाँकि, इसकी अधिकांश मात्रा, वर्षावनों को साफ करके ‘वृक्षारोपण’ के माध्यम से उत्पादित की जाती है।
  • ‘री-फ्यूल यूरोपीय संघ’ पहल (ReFuelEU initiative): हाल ही में, यूरोपीय संघ के सांसदों ने ReFuelEU पहल के लिए मसौदा नियमों को अपनाया है, जिसका मतलब होगा कि 2050 तक सभी उपयोग किए गए विमानन ईंधन का 85% “संवहनीय” होना चाहिए।

‘ताड़ के तेल’ के बारे में:

  • ताड़ का तेल (Palm Oil), एक खाद्य वनस्पति तेल है जो ताड़ के तेल के फल के मेसोकार्प (लाल गूदे) से प्राप्त होता है।
  • उपयोग: इसका उपयोग खाना पकाने के तेल के रूप में, सौंदर्य प्रसाधन, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, केक, चॉकलेट, साबुन, स्प्रेड, शैम्पू और जैव ईंधन में किया जाता है। बायोडीजल बनाने में कच्चे पाम तेल के उपयोग को ‘ग्रीन डीजल’ के रूप में ब्रांडेड किया जा रहा है।
  • यह सस्ता है, और सोयाबीन जैसे अन्य विकल्पों की तुलना में प्रति हेक्टेयर अधिक तेल उत्पादित करता है।
  • भारत, ताड़ के तेल का सबसे बड़ा आयातक है, और अपनी आवश्यकता का लगभग 40% आयात करता है।
  • सरकार की पहलें: राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन – पाम तेल (भारत के घरेलू पाम तेल उत्पादन को 3 गुना (2025-26 तक) बढ़ाने के लिए); तिलहन के लिए खरीफ रणनीति 2021; पीली क्रांति।

अनुकूलित आपूर्ति श्रृंखला

संदर्भ: भारत, अमेरिका, यूरोपीय संघ और अन्य देशों ने आपूर्ति से उत्पन्न होने वाले जोखिमों का मुकाबला करने के लिए सामूहिक, दीर्घकालिक ‘अनुकूलित आपूर्ति श्रृंखला’ (resilient supply chains – RSC) के निर्माण के लिए चार सूत्री रोडमैप (अमेरिका में आपूर्ति श्रृंखला शिखर सम्मेलन के दौरान पिछले साल तैयार) को अंतिम रूप दिया है।

  • अर्थ: एक ‘अनुकूलित आपूर्ति श्रृंखला’ का अर्थ है आपूर्ति श्रृंखला व्यवधान के प्रभाव का विरोध करने, या इससे बचने की क्षमता – और किसी व्यवधान से जल्दी से ठीक होने की क्षमता।
  • आपूर्ति श्रृंखला के लिए खतरा: भू-राजनीति (जैसे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर चीन का वर्चस्व), युद्ध (जैसे यूरोपीय संघ के लिए रूसी तेल), महामारी, चरम जलवायु घटनाएं (जैसे हीटवेव), और प्राकृतिक आपदाएं।
  • संबंधित पहलें: इंडो-पैसिफिक में चीन के प्रभुत्व का मुकाबला करने के लिए, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया द्वारा ‘आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन पहल’ (Supply chain resilience initiative – SCRI) की शुरुआत।

इलेक्ट्रिक परिवहन को बढ़ावा देने की पहल

संदर्भ: नीति आयोग द्वारा ‘इलेक्ट्रिक परिवहन’ को बढ़ावा देने दो महत्वपूर्ण पहलें शुरू कीं गयी हैं –

  1. बैटरी चालित वाहनों के प्रति लोगों में जागरूकता पैदा करने हेतु “भारत के परिवहन के लिए त्वरित ई-मोबिलिटी क्रांति” (ई-अमृत) मोबाइल एप्लीकेशन / (Accelerated e-Mobility Revolution for India’s Transportation – E-AMRIT) mobile application।
  2. भारत में उन्नत रसायन सेल बैटरी पुन: उपयोग और पुनर्चक्रण बाजार पर रिपोर्ट। यह पहल ‘यूके के ग्रीन ग्रोथ फंड तकनीकी सहयोग द्वारा समर्थित है।

ग्लासगो ब्रेकथ्रू (Glasgow Breakthroughs): इसे COP26 जलवायु शिखर सम्मेलन में लॉन्च किया गया था। यह, संयुक्त रूप से वैश्विक उत्सर्जन के 50% से अधिक का प्रतिनिधित्व करने वाले पांच प्रमुख आर्थिक क्षेत्रों में कार्रवाइयों की एक श्रृंखला है।

  • भारत, यूके के ग्लासगो ब्रेकथ्रू (ग्लासगो आमूल समाधान) पर हस्ताक्षर करने और उसका समर्थन करने वाले 42 नेतृत्वकारी देशों में शामिल है।
  • यूके और अमेरिका के साथ भारत सड़क यातायात पर भी ग्लासगो ब्रेकथ्रू का सह-संयोजक है।
  • सड़क यातायात सम्बंधी आमूल समाधान का लक्ष्य है: शून्य-उत्सर्जन वाहनों (ZEV) का निर्माण करना, जिनमें दो-तीन पहिया वाहन, कारें, वैन और भारी क्षमता वाले वाहन शामिल हैं।
  • इस लक्ष्य के तहत 2030 तक सभी क्षेत्रों में इन वाहनों को सस्ता, आसानी से उपलब्ध और संवहनीय बनाया जायेगा।
  • भारत, दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा और सबसे तेजी से बढ़ता वाहन बाजार है, यहाँ इलेक्ट्रिक वाहनों को आगे बढ़ाने की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।

 

खिलौनों के सुरक्षा पहलुओं पर BIS मानक

संदर्भ: भारतीय मानक ब्यूरो (Bureau of Indian Standards – BIS) ने भौतिक सुरक्षा, रसायनों से सुरक्षा, ज्वलनशीलता, विद्युत सुरक्षा से संबंधित खिलौनों के सुरक्षा पहलुओं पर 10 भारतीय मानक जारी किए हैं।

  • इन 10 मानकों में से 7 ‘खिलौने की सुरक्षा’ पर ‘गुणवत्ता नियंत्रण आदेश’ (Quality Control Order – QCO) का हिस्सा हैं।
  • यह ‘गुणवत्ता नियंत्रण आदेश’ यह अनिवार्य बनाता है कि 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के खिलौने सुरक्षा के 7 भारतीय मानकों (सूची संलग्न) के अनुरूप हों और बीआईएस से लाइसेंस के तहत उनमें एक मानक चिह्न (आईएसआई का निशान) हो।
  • किसी भी व्‍यक्ति को बीआईएस लाइसेंस के तहत बगैर “आईएसआई मार्क” के खिलौनों का निर्माण, आयात, बिक्री या वितरण, भंडारण, किराया, पट्टे या प्रदर्शनी की अनुमति नहीं है।
  • लाइसेंस दिए जाने से पहले, खिलौनों को विभिन्न भौतिक, रासायनिक और विद्युत सुरक्षा आवश्यकताओं के लिए कड़े परीक्षणों से गुजरना पड़ता है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे बच्चों के लिए सुरक्षित हैं।

भारतीय मानक ब्यूरो (BIS):

  • बीआईएस भारत का राष्ट्रीय मानक निकाय है जिसकी स्था‍पना बीआईएस अधिनियम 2016 के अंतर्गत की गई।
  • बीआईएस की स्था्पना वस्तुओं के मानकीकरण, मुहरांकन और गुणता प्रमाणन गतिविधियों के सुमेलित विकास तथा उससे जुडे़ या उससे प्रसंगवश जुड़े मामलों के लिए की गई।
  • बीआईएस मानकीकरण, प्रमाणन और परीक्षण द्वारा राष्ट्री य अर्थव्यमवस्थात को प्रत्यक्ष एवं वास्तनविक रूप से कई तरह से लाभ पहुंचा रहा है – यह सुरक्षित विश्‍वसनीय गुणता वाले उत्पाद प्रदान करता है; उपभोक्‍ताओं के स्‍वास्‍थ्‍य जोखिम को न्‍यून करता है; निर्यात एवं आयात विकल्‍पों को प्रोत्‍साहित करता है; किस्‍मों के प्रसार को नियंत्रित करता है, इत्‍यादि।

 

किसी भी सतह को वायरस, बैक्टीरिया से बचाने हेतु नया स्प्रे कोटिंग

संदर्भ: हाल ही मे, एक स्प्रे करने योग्य कोटिंग की खोज की गई है जो निरंतर अवधि में कोविड -19 सहित बैक्टीरिया और वायरस से संक्रमण को फैलने से रोक सकती है।

यह स्प्रे दो तरह से काम करता है:

  1. हवा से भरे अवरोधकों के माध्यम से वायरस और बैक्टीरिया को दूर भगाना।
  2. यदि कोई सतह क्षतिग्रस्त हो जाती है या विस्तारित अवधि के लिए जलमग्न हो जाती है तो सूक्ष्म सामग्री के माध्यम से रोगजनकों को मारना।

इस स्प्रे में प्लास्टिक के संयोजन का उपयोग किया जाता है।

अनुप्रयोग:

  • इस कोटिंग को सार्वजनिक अवसंरचनाओं जैसे लिफ्ट बटन, सीढ़ी रेल, और अस्पतालों, नर्सिंग होम, स्कूलों और रेस्तरां में सतहों पर आरोपित किया जा सकता है।
  • यह कोटिंग, बिना किसी हानिकारक दुष्प्रभाव के, कीटाणुनाशक के मौजूदा विकल्पों की तुलना में अधिक सुरक्षित है।

 

MIST पनडुब्बी केबल सिस्टम

संदर्भ: विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय) ने टुआस (सिंगापुर) को मुंबई से जोड़ने वाली 8100 किलोमीटर लंबी ‘म्यांमार/मलेशिया-भारत-सिंगापुर ट्रांजिट’ (Myanmar/Malaysia-India-Singapore Transit – MIST) पनडुब्बी केबल प्रणाली के लिए तटीय नियामक क्षेत्र को मंजूरी दे दी है।

MIST सीधे सिंगापुर, मलेशिया, म्यांमार, थाईलैंड और भारत (मुंबई और चेन्नई) को जोड़ेगा और 216 टेराबिट प्रति सेकंड (टीबीपीएस) से अधिक की डिजाइन क्षमता प्रदान करेगा।

पनडुब्बी केबल:

एक पनडुब्बी केबल प्रणाली (submarine cable system) में समुद्र के विभिन्न हिस्सों में दूरसंचार संकेतों को ले जाने के लिए जमीन पर ‘केबल लैंडिंग स्टेशनों’ (cable landing stations – CLS) के बीच समुद्र तल पर बिछाई गई एक संचार केबल होती है। ‘सबमरीन केबल सिस्टम’ आमतौर पर अंतरराष्ट्रीय यातायात को ले जाने के लिए ‘ऑप्टिकल फाइबर केबल’ का उपयोग करते हैं।

 

सेन्टॉरस

  • हाल ही में यूके, यूएस, भारत, ऑस्ट्रेलिया और जर्मनी सहित कई देशों में एक नए COVID संस्करण का पता चला है।
  • इस वायरस को 2.75 कहा जाता है, यह ओमीक्रोन (Omicron) का एक उपप्रकार है।