[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 12 July 2022

विषयसूची

सामान्य अध्ययन-I

  1. नए संसद भवन पर राष्ट्रीय प्रतीक का अनावरण 

सामान्य अध्ययन-II

  1. एक साल में सर्वाधिक आबादी वाले देश के रूप में चीन को पीछे छोड़ देगा भारत: संयुक्त राष्ट्र
  2. अनुचित व्यापार कार्य प्रणालियों को रोकने के लिए दिशा-निर्देश
  3. सांसदों के पैनल द्वारा मध्यस्थता विधेयक का विरोध 

सामान्य अध्ययन-III

  1. आरबीआई द्वारा ‘रुपये’ में वैश्विक व्यापार निपटान की अनुमति
  2. डार्क मैटर

मुख्य परीक्षा संवर्धन हेतु पाठ्य सामग्री (नैतिकता/निबंध)

  1. आदिवासियों के उत्थान में गैर सरकारी संगठनों की भूमिका

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

  1. अजोर्स हाई
  2. आचार्य प्रफुल्ल चंद्र राय
  3. जमानत अधिनियम
  4. सुरक्षित और सतत अंतरिक्ष संचालन और प्रबंधन हेतु इसरो की प्रणाली
  5. इंडिया स्टैक नॉलेज एक्सचेंज कार्यक्रम 
  6. संशोधित वितरण क्षेत्रक योजना
  7. भारत का राष्ट्रीय इंटरनेट एक्सचेंज 
  8. कृत्रिम बुद्धिमत्ता-आधारित मंदारिन अनुवाद उपकरण
  9. पॉप-फेम

 


सामान्य अध्ययनI


 

विषय: भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू शामिल होंगे।

नए संसद भवन पर राष्ट्रीय प्रतीक का अनावरण 

संदर्भ:

हाल ही में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद के नए भवन की छत पर लगे राष्ट्रीय चिह्न / राष्ट्रीय प्रतीक (National Emblem) का अनावरण किया।

नए संसद भवन की छत पर राष्ट्रीय प्रतीक के निर्माण की अवधारणा का रेखाचित्र और प्रक्रिया, मिट्टी प्रारूप/ कंप्यूटर ग्राफिक से लेकर कांस्य ढलाई और पॉलिश करने तक की तैयारी सहित आठ विभिन्न चरणों से गुजरी है। 

राष्ट्रीय प्रतीक के बारे में:

  • भारत का राजचिह्न (National Emblem of India), सारनाथ स्थित अशोक के सिंह स्तंभ की अनुकृति है, जो सारनाथ के संग्रहालय में सुरक्षित है। इसे 26 जनवरी, 1950 को भारत के ‘राष्ट्रीय चिन्ह’ के रूप में अपनाया गया था। इसमें देवनागरी लिपि में “सत्यमेव जयते” लिखा है।
  • इसे समकालीन भारत द्वारा विश्व शांति और सद्भावना के प्रति अपनी प्राचीन प्रतिबद्धता की पुन:अभिपुष्टि के प्रतीक के रूप में चुना गया था।

इतिहास:

भारत का राजकीय प्रतीक सारनाथ स्थित अशोक स्तंभ के सिंह-शिखर (Lion Capital) की अनुकृति है।

  • मूल स्तंभ में शीर्ष पर चार सिंह हैं, जो एक-दूसरे की ओर पीठ किए हुए हैं। 
  • इसके नीचे घंटे के आकार के पदम के ऊपर एक चित्र वल्लरी में एक हाथी, चौकड़ी भरता हुआ एक घोड़ा, एक सांड तथा एक सिंह की उभरी हुई मूर्तियां हैं, इसके बीच-बीच में चक्र बने हुए हैं। 
  • एक ही पत्थर को काट कर बनाए गए इस सिंह स्तंभ के ऊपर धर्मचक्ररखा हुआ है। 

महत्व:

बौद्ध व्याख्याओं के अनुसार, अशोक स्तंभ में उत्कीर्ण जानवरों के चित्र बुद्ध के जीवन के विभिन्न चरणों का प्रतिनिधित्व करते हैं। जबकि, गैर-धार्मिक व्याख्याओं के अनुसार- कि मूल स्तंभ में शीर्ष पर चार सिंह, चार भौगोलिक दिशाओं में सम्राट अशोक के शासनकाल को दर्शाते हैं, जबकि ‘पहिया’ या चक्र अशोक के प्रबुद्ध शासन को दर्शाता है।

Current Affairs

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


सामान्य अध्ययनII


विषय: महिलाओं की भूमिका और महिला संगठन, जनसंख्या एवं संबद्ध मुद्दे, गरीबी और विकासात्मक विषय, शहरीकरण, उनकी समस्याएँ और उनके रक्षोपाय। 

एक साल में सर्वाधिक आबादी वाले देश के रूप में चीन को पीछे छोड़ देगा भारत: संयुक्त राष्ट्र

संदर्भ:

विश्व जनसंख्या दिवस (11 जुलाई) पर, संयुक्त राष्ट्र ने एक रिपोर्ट (विश्व जनसंख्या विवरणिका) जारी की है, जिसमें भारत को अगले वर्ष दुनिया के सर्वाधिक आबादी वाले देश के रूप में चीन से आगे निकलने का अनुमान लगाया गया है।

  • रिपोर्ट में आगे कहा गया है, कि विश्व की जनसंख्या नवंबर 2022 के मध्य तक आठ अरब तक पहुंचने का अनुमान है।
  • संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक मामलों के विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार- विश्व की जनसंख्या में 1950 के बाद से सबसे धीमी गति से वृद्धि हो रही है।

 

रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु:

  • विश्व जनसंख्या संभावना, 2019 (World Population Prospects, 2019 – WPP 2019) के अनुसार, चीन और भारत, विश्व की सरव्धिक आबादी वाले दो देश हैं, जिनकी जनसँख्या क्रमशः 1.44 बिलियन और 1.39 बिलियन है। ये दोनों देश, विश्व की आबादी का क्रमशः 19 और 18 प्रतिशत प्रतिनिधित्व करते हैं।
  • लगभग वर्ष 2023 तक, भारत, जनसख्या के मामले चीन को पछाड़कर विश्व में सर्वाधिक आबादी वाला देश बन जाएगा। वर्ष 2019 और 2050 के बीच चीन की आबादी में 31.4 मिलियन या लगभग 2.2 प्रतिशत की कमी होने का अनुमान है। 
  • संयुक्त राष्ट्र के पूर्वानुमान के अनुसार- शीघ्र ही दुनिया की आबादी आठ अरब तक पहुंचने की संभावना है।
  • जन्म दर में शुद्ध गिरावट: रिपोर्ट के अनुसार- कई विकासशील देशों में जन्म दर में शुद्ध गिरावट देखी गई है और आने वाले दशकों में दुनिया की आबादी में ‘आधे से अधिक वृद्धि’ आठ देशों में केंद्रित होगी।
  • इन आठ देशों में- कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, मिस्र, इथियोपिया, भारत, नाइजीरिया, पाकिस्तान, फिलीपींस और तंजानिया शामिल हैं।
  • सतत विकास लक्ष्यों के लिए चुनौती: कई संस्थाओं द्वारा वर्ष 2022 और 2050 के बीच विश्व की आबादी दोगुनी होने का अनुमान व्यक्त किया गया है। जनसख्या की वृद्धि से संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव और संयुक्त राष्ट्र के ‘सतत विकास लक्ष्यों’ (SDGs) को हासिल करने हेतु चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
  • वृद्धावस्था जनसंख्या वृद्धि: वृद्ध व्यक्तियों की आबादी, संख्या और कुल जनसंख्या के हिस्से के रूप में- दोनों तरीके से बढ़ रही है।
  • प्रजनन क्षमता में निरंतर गिरावट: प्रजनन क्षमता में निरंतर गिरावट के कारण कामकाजी उम्र (25 से 64 वर्ष के बीच) में जनसंख्या में वृद्धि हुई है, जिससे ‘प्रति व्यक्ति त्वरित आर्थिक विकास’ का अवसर पैदा हुआ है।
  • प्रवासन: कुछ देशों में जनसंख्या प्रवृत्तियों पर अंतर्राष्ट्रीय प्रवास का महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ रहा है।
  • अगले कुछ दशकों में, ‘प्रवासन’- उच्च आय वाले देशों में जनसंख्या वृद्धि का एकमात्र कारण होगा।
  • कोविड-19: कोविड-19 महामारी का, जनसंख्या परिवर्तन के सभी घटकों- जैसे कि मृत्यु दर, प्रजनन क्षमता और प्रवास – को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण जनसांख्यिकीय परिणाम पड़ा है।
  • 2019 और 2021 के बीच, महामारी से जुड़ी अधिक मृत्यु दर के कारण, ‘वैश्विक जीवन प्रत्याशा’ में 1.8 वर्ष की गिरावट हुई है।
  • महामारी का ‘प्रजनन क्षमता’ पर प्रभाव के बारे में अभी अधिक स्पष्टता नहीं है।

भारत के साथ तुलना:

Current Affairs

भारत में, महापंजीयक (Registrar General) जनगणना के आधार पर जनसंख्या अनुमान प्रस्तुत किए जाते हैं।

  • पिछला जनसंख्या अनुमान वर्ष 2019 में जारी किया गया था और यह 2011 की जनगणना पर आधारित था।
  • भारत द्वारा प्रस्तुत जनसंख्या अनुमान, संयुक्त राष्ट्र के अनुमान से थोड़ा कम है।
  • भारत की प्रजनन दर वर्तमान में 2.01 से घटकर 2050 में 1.78 और 2100 में 1.69 हो जाने की संभावना है। वर्तमान में वैश्विक औसत प्रजनन दर 2.3 है।
  • निष्कर्ष बताते हैं, कि भारत में 15 से 19 वर्ष की आयु की महिलाओं में जन्म की सकारात्मक संख्या 2050 तक, वर्तमान 988,000 से घटकर 282,000 तथा वर्ष 2100 तक 132,000 हो सकती है।Current Affairs

विश्व जनसंख्या संभावनाएं:

संयुक्त राष्ट्र का जनसंख्या प्रभाग द्वारा, वर्ष 1951 से द्विवार्षिक चक्र में ‘विश्व जनसंख्या संभावना’ (WPP) रिपोर्ट जारी की जा रही है।

  • WPP का प्रत्येक संशोधन, 1950 से शुरू होने वाले ‘जनसंख्या संकेतकों की एक ऐतिहासिक समय श्रृंखला’ प्रदान करता है।
  • WPP रिपोर्ट में, प्रजनन, मृत्यु दर या अंतर्राष्ट्रीय प्रवास में पिछले रुझानों के अनुमानों को संशोधित करने हेतु नए जारी किए गए राष्ट्रीय डेटा को ध्यान में रखा जाता है।

संबंधित मुद्दे:

Current Affairs

संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक परिषद:

‘संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक परिषद’ (UN Economic and Social Council – ECOSOC) समन्वय, नीति समीक्षा, नीति संवाद और आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय मुद्दों पर सिफारिशों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहमत विकास लक्ष्यों के कार्यान्वयन के लिए प्रमुख निकाय है।

इसमें 54 सदस्य हैं, जो तीन साल के अतिव्यापी कार्यकाल के लिए महासभा द्वारा चुने जाते हैं।

ECOSOC के दायरे में कुछ महत्वपूर्ण निकाय:

  • अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO)
  • खाद्य और कृषि संगठन (FAO)
  • संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (UNESCO)
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO)
  • ब्रेटन वुड्स ट्विन्स (विश्व बैंक समूह और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष)
  • संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ)

इनके अलावा, विभिन्न कार्यात्मक और क्षेत्रीय आयोग, स्थायी समितियां, और तदर्थ और विशेषज्ञ निकाय भी ECOSOC के दायरे में आते हैं।

अभ्यास प्रश्न:

उच्च विकास के लगातार अनुभव के बावजूद, भारत अभी भी मानव विकास के संकेतकों में निचले स्थानों पर है। संतुलित और समावेशी विकास को दुश्कर बनाने वाले मुद्दों का परीक्षण कीजिए। (यूपीएससी 2021)

स्रोत: लाइवमिंट, द हिंदू

 

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय। 

अनुचित व्यापार कार्य प्रणालियों को रोकने के लिए दिशा-निर्देश 

संदर्भ:

  • 4 जुलाई को, ‘केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण’ (Central Consumer Protection Authority – CCPA) द्वारा होटलों और रेस्तरां में सेवा शुल्क लगाने के संबंध में अनुचित व्यापार कार्य प्रणालियों और उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन को रोकने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए गए।
  • ये दिशानिर्देश केंद्र द्वारा वर्ष 2017 में जारी दिशानिर्देशों के अतिरिक्त हैं, जिनमे होटल और रेस्तरां द्वारा उपभोक्ताओं पर सेवा शुल्क लगाने को प्रतिबंधित किया गया था, और ग्राहक की सपष्ट सहमति के बिना ‘मेनू कार्ड पर प्रदर्शित मूल्य तथा लागू करों के अलावा किसी भी चीज़ के लिए शुल्क लगाने को ‘अनुचित व्यापार कार्य प्रणाली के रूप में बताया गया था।

नए दिशानिर्देश:

  • अतिरिक्त शुल्क लगाने पर रोक: होटल या रेस्तरां भोजन बिल में स्वचालित रूप से या गलती से सेवा शुल्क नहीं जोड़ेंगे। इसके अलावा, किसी अन्य नाम से सेवा शुल्क नहीं लिया जा सकता। 
  • कोई जबरन सेवा शुल्क नहीं: कोई भी होटल या रेस्तरां उपभोक्ता को सेवा शुल्क का भुगतान करने के लिए बाध्य नहीं करेगा और उपभोक्‍‍ता को स्‍‍पष्‍‍ट तौर पर बताएगा कि सेवा शुल्क ऐच्छिक, वैकल्पिक और उपभोक्ता का अधिकार है।
  • सेवा शुल्क के संग्रह के आधार पर सेवाओं के प्रवेश या प्रावधान पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया जाएगा। 
  • सेवा शुल्क को भोजन के बिल के साथ जोड़कर और कुल राशि पर जीएसटी लगाकर एकत्र नहीं किया जाएगा। 
  • टिप्स (Tips) या दान पर रोक: किसी भी टिप, दान, टोकन, ग्रेच्युटी आदि को अब चार्ज करने की अनुमति नहीं है और इसे उपभोक्ता और होटल और रेस्तरां के कर्मचारियों के बीच एक अलग लेनदेन माना जाएगा।
  • टिप देना है या नहीं, यह पूरी तरह से उपभोक्ता पर निर्भर होगा।
  • यदि कोई उपभोक्ता किसी रेस्तरां में प्रवेश करता है या कुछ ऑर्डर करता है, तो रेस्तरां नीति के तहत उन्हें टिप देना अनिवार्य नहीं होगा।
  • अनुचित व्यापार प्रणाली: दिशानिर्देशों में अब ‘उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम’ (Consumer Protection Act CPA) के तहत ग्राहक से ‘खाद्य पदार्थों की कीमत के अलावा किसी भी चीज़ के लिए शुल्क वसूलने को ‘अनुचित व्यापार कार्य प्रणाली’ के रूप में समझा जाएगा।

शिकायत निवारण तंत्र:

  • यदि कोई उपभोक्ता को यह पाता है कि कोई होटल या रेस्तरां दिशा निर्देशों का उल्लंघन करते हुए सेवा शुल्क लगा रहा है, तो:
  • उपभोक्ता, संबंधित होटल या रेस्तरां से सेवा शुल्क को बिल राशि से हटाने का अनुरोध कर सकता है।
  • उपभोक्ता, राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (एनसीएच) 1915 पर कॉल करके या एनसीएच मोबाइल ऐप के माध्यम से शिकायत दर्ज कर सकता है।
  • उपभोक्ता, अनुचित व्यापार कार्य प्रणाली के खिलाफ उपभोक्ता आयोग में शिकायत भी दर्ज करा सकता है।
  • त्वरित और प्रभावी तरीके से निपटाने के लिए ई-दाखिल पोर्टल www.e-daakhil.nic.in के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक तरीके से भी शिकायत दर्ज की जा सकती है।

केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण: 

केंद्र सरकार द्वारा उपभोक्ताओं के अधिकारों को बढ़ावा देने, उनका संरक्षण करने और उन्हें लागू करने के लिए केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (Central Consumer Protection Authority- CCPA) का गठन किया जाता है। 

  • उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 (Consumer Protection Act (CPA), 2019) के तहत, उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन, जनता के हित के लिए हानिकारक अनुचित व्यापार प्रथाओं और झूठे या भ्रामक विज्ञापनों को विनियमित करने के लिए प्राधिकरण की स्थापना की गई थी।
  • महानिदेशक की अध्यक्षता में CCPA की एक अन्वेषण शाखा (Investigation Wing) होगी, जो ऐसे उल्लंघनों की जांच या अन्वेषण कर सकती है।
  • केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 18 के तहत उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा, प्रचार और सबसे महत्वपूर्ण इनके अधिकारों को लागू करने तथा अधिकारों के उल्लंघन को रोकने की शक्ति है।
  • CCPA यह भी सुनिश्चित करना चाहता है कि कोई भी व्यक्ति अनुचित व्यापार प्रथाओं में लिप्त न हो।
  • CCPA को, अधिनियम में निर्धारित उपभोक्ताओं के अधिकारों को लागू करने के लिए दिशा-निर्देश जारी करने का भी अधिकार है।

सेवा शुल्क:

  • सेवा शुल्क (Service charge) ग्राहक और रेस्तरां के कर्मचारियों, विशेष रूप से ‘प्रतीक्षा कर्मचारियों’ के बीच एक टिप या सीधा लेनदेन होता है।
  • यह एक प्राथमिक उत्पाद या सेवा की खरीद से जुड़ी सेवाओं के भुगतान के लिए एकत्र किया जाने वाला शुल्क होता है।
  • यह, आतिथ्य क्षेत्रों और खाद्य और पेय उद्योगों द्वारा ग्राहकों की सेवा के लिए शुल्क के रूप में एकत्र किया जाता है।

इंस्टा लिंक्स:

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: संसद और राज्य विधायिका- संरचना, कार्य, कार्य-संचालन, शक्तियाँ एवं विशेषाधिकार और इनसे उत्पन्न होने वाले विषय।

सांसदों के पैनल द्वारा ‘मध्यस्थता विधेयक’ का विरोध

संदर्भ:

सुशील कुमार मोदी की अध्यक्षता में गठित ‘विधि और न्याय’ पर संसदीय स्थायी समिति ने ‘मध्यस्थता के संस्थानीकरण’ और ‘भारतीय मध्यस्थता परिषद’ की स्थापना के लिए बने ‘मध्यस्थता विधेयक’ में महत्वपूर्ण बदलावों की सिफारिश की है।

समिति ने केंद्र सरकार को ‘पूर्व-मुकदमा मध्यस्थता’ (pre-litigation mediation) को अनिवार्य बनाने के खिलाफ आगाह किया है और उच्च न्यायालयों को ‘मध्यस्थता’ (mediation) के लिए नियम बनाने की शक्ति देने के प्रावधान के खिलाफ चेतावनी दी।

Current Affairs 

महत्वपूर्ण मुद्दे:

  • विधेयक का अनुच्छेद 26: इसमें न्यायालय-संलग्न मध्यस्थता (court-annexed mediation) का प्रावधान किया गया है।
  • यह अनुच्छेद, अदालत को न्यायालय से जुड़ी मध्यस्थताके लिए नियम बनाने की शक्ति प्रदान करता है, जोकि असंवैधानिक है।
  • पूर्व-मुकदमेबाजी मध्यस्थता अनिवार्य: ‘पूर्व-मुकदमेबाजी मध्यस्थता’ (pre-litigation mediation) को अनिवार्य बनाने से वास्तव में मामलों में देरी हो सकती है और यह प्रावधान, मामलों के निपटान में देरी करने वाले वादियों के हाथों में एक ‘अतिरिक्त उपकरण’ साबित हो सकता है।
  • सरकार और उसकी एजेंसियों से जुड़े गैर-व्यावसायिक प्रकृति के विवादों/मामलों पर विधेयक के प्रावधानों का लागू न होना।
  • अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति: ‘भारतीय मध्यस्थता परिषद’ के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति केंद्र द्वारा गठित चयन समिति द्वारा की जानी चाहिए।

इंस्टा लिंक्स:

  1. मध्यस्थता विधेयक, 2021
  2. संसदीय समितियां

अभ्यास प्रश्न:

  1. सरकारी नीतियों के प्रभावी कामकाज और कार्यान्वयन के लिए संसदीय निरीक्षण विनियमन आवश्यक है। विश्लेषण कीजिए। (15 अंक)
  2. क्या विभाग-संबंधित संसदीय स्थायी समितियां प्रशासन को अपने पैर की उंगलियों पर रखती हैं और संसदीय नियंत्रण के प्रति सम्मान को प्रेरित करती हैं? उपयुक्त उदाहरणों के साथ ऐसी समितियों के कार्यकरण का मूल्यांकन कीजिए। (यूपीएससी 2021)

स्रोत: द हिंदू

 

 


सामान्य अध्ययनIII


विषय: उदारीकरण का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव, औद्योगिक नीति में परिवर्तन तथा औद्योगिक विकास पर इनका प्रभाव। 

आरबीआई द्वारा ‘रुपये’ में वैश्विक व्यापार निपटान की अनुमति 

संदर्भ: प्रतिबंधों से प्रभावित रूस के साथ व्यापार को सुविधाजनक बनाने के लिए, भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने घरेलू व्यापारियों के लिए भारतीय रुपये में वैश्विक व्यापार निपटान (Global Trade Settlements) की अनुमति दी है। नई प्रणाली का उपयोग करने के लिए बैंकों को आरबीआई की मंजूरी की आवश्यकता होगी।

लाभ:

  • भारतीय निर्यात और भारतीय मुद्रा को बढ़ावा: यह कदम भारत से निर्यात (जैसे चाय निर्यात) पर जोर देने के साथ वैश्विक व्यापार विकास को बढ़ावा देगा और घरेलू मुद्रा में वैश्विक व्यापारिक समुदाय की बढ़ती रुचि का समर्थन करेगा।
  • प्रतिबंधों से प्रभावित रूस के साथ लेनदेन में तेजी: 2021-22 में रूस के साथ भारत का व्यापार 13.1 अरब डॉलर का था।
  • भारतीय रुपये में अंतिम निपटान: विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम के मौजूदा प्रावधानों के तहत, नेपाल और भूटान को छोड़कर ‘अंतिम निपटान’ मुक्त विदेशी मुद्रा में होना चाहिए। अब, अगर आरबीआई ने मंजूरी दे दी, तो सभी देशों के लिए ‘अंतिम निपटान’ (Final Settlement) भारतीय रुपये में हो सकता है।
  • विदेशी मुद्रा की बचत और व्यापार घाटा में कमी: चूंकि भारत निर्यात से ज्यादा आयात करता है। आरबीआई का यह निर्णय, रुपये को स्थिर करने के एक कदम के रूप में विदेशी मुद्रा प्रवाह को बढ़ाएगा।
  • रूस के साथ बेहतर संबंध बनाने में सहायक: ‘व्यापार भुगतान’ मार्ग के खुलने से पता चलता है कि पश्चिमी देशों द्वारा संबंधों को काटने के बढ़ते दबाव के सामने भारत के व्यापारिक भागीदार के रूप में रूस का महत्व है।
  • अन्य पड़ोसी देशों के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है: ईरान, श्रीलंका और कुछ अफ्रीका और लैटिन अमेरिका सहित कई देश विदेशी मुद्रा की कमी का सामना कर रहे हैं।, नया तंत्र भारत को इन देशों में अपने निर्यात को बढ़ावा देने में मदद करेगा।Current Affairs

यह व्यवस्था किस प्रकार कार्य करेगी?

  • रूसी बैंकों को भारत में वोस्ट्रो खाते (Vostro accounts) खोलने होंगे, और जब भी निर्यात या आयात होगा, संबंधित भुगतान उसी वोस्ट्रो खाते को डेबिट या क्रेडिट किया जाएगा।
  • भारतीय आयातक रुपये में भुगतान करेंगे, जिसे भागीदार देश के ‘संपर्क बैंक’ (correspondent bank) में खोले गए ‘वोस्ट्रो खाते’ में जमा किया जाएगा।Current Affairs

संबंधित मुद्दे:

  • ईरान के साथ व्यापार के उद्देश्य से स्थापित इसी तरह का एक ‘वोस्ट्रो खाता’ व्यर्थ हो गया था क्योंकि भारत को अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच ईरान से तेल प्राप्त करने से रोक दिया गया था।
  • निर्यातकों के अनुसार- ईरान के बाजार में भुगतान की समस्या ने उन्हें श्रीलंका द्वारा रिक्त किए गए स्थान को भरने से प्रतिबंधित कर दिया है। श्रीलंका वर्तमान में एक गंभीर वित्तीय संकट से गुजर रहा है।
  • पश्चिमी देश, भारत पर ऐसे किसी तंत्र को अनुमति न देने का दबाव डाल सकते हैं।

इंस्टा लिंक:

भारत के लिए रूस से सबक

अभ्यास प्रश्न:

यद्यपि, भारत और रूस नए संबंधो की तलाश में लगे हैं, तब भी वे एक-दूसरे के सदाबहार दोस्त बने हुए हैं। टिप्पणी कीजिए। (10 अंक)

स्रोत: लाइव मिंट

 

 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

डार्क मैटर

संदर्भ: संयुक्त राज्य अमेरिका में, सर्वाधिक संवेदनशील डार्क मैटर डिटेक्टर प्रयोगों में से एक ‘LUX-ZEPLIN’ (LZ) का उपयोग ब्रह्मांड में ‘डार्क मैटर’ (Dark Matter) के प्रमाण खोजने के लिए किया जा रहा है।

डार्क मैटर क्या है और यह इतना दुष्प्राप्य क्यों है?

ब्रह्मांड में सभी अंतःक्रियाएं, ‘कणों’ पर कार्य करने वाली चार मूलभूत शक्तियों-  सशक्त परमाणु बल, कमजोर परमाणु बल, विद्युत चुम्बकीय बल और गुरुत्वाकर्षण – का परिणाम हैं।

‘डार्क मैटर’ (Dark Matter), आवेश रहित कण होते हैं – अर्थात ये कण विद्युत चुम्बकीय अंतःक्रियाओं के माध्यम से पारस्परिक क्रिया नहीं करते हैं।

  • “डार्क अर्थात अंधेरा”: क्योंकि ये कण प्रकाश का उत्सर्जन नहीं करते हैं।
  • मैटर अर्थात पदार्थ“: क्योंकि उनके पास सामान्य पदार्थ की तरह द्रव्यमान होता है और इसलिए गुरुत्वाकर्षण के माध्यम से अंतःक्रियाएं करते हैं।

डार्क मैटर काफी ‘दुष्प्राप्य’ (Elusive) होते हैं, क्योंकि- गुरुत्वाकर्षण बल अत्यंत कमजोर होता है। कोई कण जो इतनी कमजोर अंतःक्रिया करता है कि उसका पता लगाना काफी कठिन हो जाता है।

चित्र: ब्रह्मांड की संरचना

Current Affairs 

 

डार्क मैटर के साक्ष्य:

  • आकाशगंगाओं के घूर्णन का अवलोकन: आकाशगंगा केंद्र के चारों ओर तारों के घूर्णन के दौरान इनके वास्तविक पथ और इनके आदर्श पथ में विसंगतिपूर्ण परिवर्तन होते हैं। इसका कारण तारों के घूर्णन पथ के साथ ‘डार्क मैटर’ की उपस्थिति को माना जाता है।
  • आकाशगंगाओं के ‘बुलेट क्लस्टर’ के अवलोकन से: बुलेट क्लस्टर (Bullet cluster) दो आकाशगंगा समूहों के विलय से बनता है। जब अवलोकन योग्य गणना के अनुसार इन आकाशगंगाओं का विलय नहीं होता है, तो यह एक अन्य विशाल पदार्थ कण, ‘डार्क मैटरकी उपस्थिति को दर्शाता है।

डार्क मैटर कणों की संरचना: इस बारे में अभी तक कोई निश्चित उत्तर ज्ञात नहीं है, लेकिन वैज्ञानिकों का मानना हैं, कि:

  • यदि ‘न्यूट्रिनो‘ (neutrino) अपने आकार में अधिक विशाल होता तो यह ‘डार्क मैटर’ के मूल कणों के रूप में एक उत्कृष्ट उम्मीदवार हो सकता था, लेकिन भार में बहुत हल्का होने के कारण यह इस अवधारणा में फिट नहीं बैठता।
  • अन्य अभिधारणाओं में, ‘डार्क मैटर’ के मूल कणों के रूप में ‘Z बोसोन’ का सुपरसिमेट्रिक पार्टनर शामिल है। यह कण दुर्बल विद्युत अंतःक्रिया में मध्यस्थता करता है।

‘डार्क एनर्जी’ क्या है?

  • ‘डार्क एनर्जी’ ऊर्जा का एक काल्पनिक रूप है, जो गुरुत्वाकर्षण के विपरीत व्यवहार करते हुए एक नकारात्मक, प्रतिकारक दबाव को दर्शाती है।
  • यह, हमारे ब्रह्मांड के विस्तार की दर को धीमा करने के बजाय समय के साथ तेज कर रही है, जोकि बिग बैंग से उत्पन्न हुए ब्रह्मांड से जो अपेक्षा की जा सकती है, उसके ठीक विपरीत है।Current Affairs

क्या आप XENON1T प्रयोग के बारे में जानते हैं?

  • यह विश्व का सबसे संवेदनशील ‘डार्क मैटर’ प्रयोग है, और इसे इटली की ‘INFN लेबोरेटोरी नाज़ियोनाली डेल ग्रान सासो’ (INFN Laboratori Nazionali del Gran Sasso) में भूमिगत रूप से काफी गहराई में संचालित किया जा रहा है।
  • इस प्रयोग में, दोहरे चरण (तरल/गैस) वाली ज़ीनान (XENON) तकनीक का उपयोग किया गया है।

इंस्टा लिंक:

डार्क एनर्जी और डार्क मैटर क्या हैं?

स्रोत: द हिंदू

 


मुख्य परीक्षा संवर्धन हेतु पाठ्य सामग्री (नैतिकता/निबंध)


 

आदिवासियों के उत्थान में गैर-सरकारी संगठनों की भूमिका – उदाहरण

ओडिशा के नयागढ़ जिले के बिदापाजू गांव के निवासियों को, 14 साल पहले लागू किए जाने के बाद भी, वर्ष 2020 तक ‘वन अधिकार अधिनियम’ (FRA) के बारे में पता भी नहीं था।

  • वर्ष 2020 में, वन विभाग के अधिकारियों ने गांव के पास जंगल में 84 पेड़ों को काटकर बेचने के लिए चिह्नित किया। इस मामले में बेखबर ग्रामीणों की कोई राय नहीं ली गयी। 
  • जब वन अधिकारों पर काम करने वाले एक गैर-सरकारी संगठन ‘निर्माण’ (Nirman) के स्वयंसेवकों ने स्थानीय निवासियों को अधिनियम के बारे में बताया तो शुरुआत में उन्हें संदेह हुआ। निवासियों को इसके बारे में समझाने के लिए ‘वन अधिकार अधिनियम’ की प्रस्तावना और ‘संपूर्ण पाठ’ को पढ़कर सुनाने के लिए कई बैठकें हुईं।
  • इन कार्यक्रमों से आदिवासियों में स्वामित्व की एक नई भावना पैदा हुई और उन्हें वन संसाधनों के प्रति अधिक जिम्मेदार और सावधान बना दिया।

स्रोत: डाउन टू अर्थ

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


अजोर्स हाई

एक अत्याधिक विशाल ‘अजोर्स हाई‘ (Azores High) के परिणामस्वरूप पश्चिमी भूमध्यसागर में असामान्य रूप से शुष्क स्थिति पैदा हो गई है। ‘अजोर्स हाई‘, एक उपोष्णकटिबंधीय मौसम की घटना है।

अजोर्स हाई एक ‘उपोष्णकटिबंधीय उच्च दबाव प्रणाली’ है जो सर्दियों के दौरान पूर्वी उपोष्णकटिबंधीय उत्तरी अटलांटिक और पश्चिमी यूरोप में विस्तृत हो जाती है। यह उपोष्णकटिबंधीय उत्तरी अटलांटिक में प्रति-चक्र्वातीय हवाओं से जुड़ा है। यह, उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में शुष्क हवा के नीचे उतरने से निर्मित होती है और ‘हैडली सर्कुलेशन’ की नीचे की शाखा के अनुरूप होती है।

Current Affairs

 

आचार्य प्रफुल्ल चंद्र राय

संस्कृति मंत्रालय द्वारा रसायन विज्ञान विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय और विज्ञान भारती के साथ मिलकर एक रसायनज्ञ और स्वतंत्रता सेनानी के रूप में आचार्य प्रफुल्ल चन्द्र रे के योगदान” पर दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया।

पीसी राय (Prafulla Chandra Ray) के बारे में:

आचार्य प्रफुल्ल चन्द्र राय भारत में रसायन विज्ञान के जनक माने जाते हैं। वे एक सादगीपसंद तथा देशभक्त वैज्ञानिक थे जिन्होंने रसायन प्रौद्योगिकी में देश के स्वावलंबन के लिए अप्रतिम प्रयास किए। 

योगदान:

इन्होने कई महत्वपूर्ण रासायनिक यौगिकों की खोज की (उदाहरण: मर्क्यूरस नाइट्राइट), प्रसिद्ध विज्ञान पत्रिकाओं में एक सौ पचास से अधिक शोध पत्र प्रकाशित (उदाहरण: जर्नल ऑफ द केमिकल सोसाइटी ऑफ लंदन); रसायन विज्ञान पर कई पुस्तकें लिखीं (उदाहरण: एक बंगाली रसायनज्ञ का जीवन और अनुभव)।

इन्होने ‘बंगाल केमिकल एंड फार्मास्युटिकल वर्क्स’ स्थापना भी की ।

Current Affairs

जमानत अधिनियम

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को जमानत देने को कारगर बनाने के लिए “जमानत अधिनियम” (Bail Act) की प्रकृति में एक विशेष अधिनियम पेश करने की सिफारिश की है।

  • जमानत: ‘जमानत’ (Bail) एक प्रतिवादी की सशर्त रिहाई होती है, जिसमें प्रतिवादी द्वारा आवश्यकता पड़ने पर अदालत में पेश होने का वादा किया जाता है।
  • आधुनिक कानूनी प्रणालियों में जमानत का मुख्य उपयोग, किसी गिरफ्तार और अपराध के आरोप में लंबित मुकदमे की स्वतंत्रता को सुरक्षित करना है, हालांकि इसका उपयोग कुछ मामलों में सजा की अपील के लंबित रहने तक रिहाई को सुरक्षित करने के लिए भी किया जा सकता है।
  • “जेल नहीं, जमानत” (Bail and not Jail) सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाया गया एक मूल नियम है।
  • जमानत, एक अधिकार है, कोई अहसान नहीं: सीआरपीसी की धारा 436 के अनुसार, यदि आरोपित अपराध जमानती है, तो आरोपी अधिकार के मामले में जमानत का हकदार है। 

सुरक्षित और सतत अंतरिक्ष संचालन और प्रबंधन हेतु इसरो की प्रणाली

  • हाल ही में, इसरो ने अंतरिक्ष मलबे को ट्रैक करने और संपत्तियों की सुरक्षा के लिए दुनिया की पहली सुविधा शुरू की है।
  • सुरक्षित और सतत अंतरिक्ष संचालन और प्रबंधन हेतु इसरो की प्रणाली (ISRO System for Safe and Sustainable Space Operations & Management – IS4OM). अंतरिक्ष संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और राष्ट्रीय विकास के लिए बाहरी अंतरिक्ष के उपयोग को बनाए रखने के लिए इसरो का समग्र दृष्टिकोण है।

आवश्यकता:

  • पृथ्वी की कक्षाओं की बढ़ती भीड़ बड़े मलबों के बीच टकराव का खतरा पैदा करती है, जिससे आगे टकरावों की स्वतः बढ़ती प्रक्रिया देखने को मिल सकती है, जिसे केसलर सिंड्रोम के रूप में जाना जाता है। 
  • संचालित उपग्रहों और कक्षीय कचरे आदि की लगातार तेजी से बढ़ती संख्या और टकराने से जुड़े खतरों से बाह्य अंतरिक्ष के सुरक्षित और टिकाऊ उपयोग के लिए एक गंभीर खतरा पैदा हुआ है। 
  • बाहरी अंतरिक्ष में सुरक्षित और टिकाऊ अभियानों के प्रभावी प्रबंधन के लिए अंतरिक्ष की वस्तुओं के अवलोकन एवं निगरानी, कक्षीय निर्धारण के लिए अवलोकन, वस्तु लक्षण वर्णन और सूचीकरण, अंतरिक्ष पर्यावरण के विकास का विश्लेषण, जोखिम का आकलन और उसे दूर करने, डाटा का आदान प्रदान तथा भागीदारी से संबंधित विविध क्षेत्रों को शामिल करने हेतु IS4OM काफी महत्वपूर्ण है 

इंडिया स्टैक नॉलेज एक्सचेंज कार्यक्रम 

हाल ही में, इंडिया स्टैक नॉलेज एक्सचेंज (India Stack Knowledge Exchange) कार्यक्रम आयोजित किया गया था।

  • इंडिया स्टैक: इंडिया स्टैक, ओपन एपीआई (एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस- दो एप्लिकेशन को एक-दूसरे से परस्पर क्रिया करने की अनुमति देता है) और डिजिटल पब्लिक गुड्स का एक सेट है। इसका उद्देश्य जनसंख्या स्तर पर पहचान, डेटा और भुगतान की आर्थिक प्राथमिकताओं को अनलॉक करना है।
  • इंडिया स्टैक में शामिल हैं- आधार, यूपीआई, को-विन, डिजिलॉकर, आरोग्य सेतु, उमंग, दीक्षा और ई-संजीवनी।

इंडिया स्टैक के लाभ:

यह, ग्लोबल डिजिटल पब्लिक गुड्स (ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर, ओपन एआई मॉडल, ओपन डेटा जो गोपनीयता का पालन करता है और साथ ही सामाजिक-आर्थिक लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करता है) में योगदान देगा।

  • डिजिटल शासन: पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही में वृद्धि करेगा।
  • डिजिटल नवाचारों को बढ़ावा देने में मदद करेगा।
  • सेवा वितरण: उपस्थिति रहित, कागज रहित और कैशलेस सेवा वितरण।

Current Affairs

 

संशोधित वितरण क्षेत्रक योजना

DISCOMs को वित्तीय रूप से टिकाऊ बनाने, AT & C हानि (2024-25 तक 12-15% तक) को कम करने और लागत-राजस्व अंतर को कम करने (2024-25 तक शून्य) हेतु ‘संशोधित वितरण क्षेत्रक योजना’ (Revamped Distribution Sector Scheme – RDSS) के तहत सहायता प्रदान की जाएगी । 

योजना के बारे में:

  • ‘सुधार-आधारित और परिणाम-संबद्ध, संशोधित वितरण क्षेत्रक योजना’ (Reforms-Based and Results-Linked, Revamped Distribution Sector Scheme) 3.03 ट्रिलियन रुपये के मूल्य की योजना है, जिसमे केंद्र की हिस्सेदारी 97,631 करोड़ रु है।
  • इसका उद्देश्य डिस्कॉम (निजी क्षेत्र की डिस्कॉम को छोड़कर) की परिचालन क्षमता और वित्तीय स्थिरता में सुधार करना है।

योजना के प्रमुख बिंदु:

  1. यह एक ‘सुधार-आधारित और परिणाम-संबद्ध’ योजना है।
  2. इस योजना का उद्देश्य निजी क्षेत्र के DISCOMs के अलावा सभी DISCOMs / विद्युत विभागों की परिचालन क्षमता और वित्तीय स्थिरता में सुधार करना है। 
  3. इस योजना के तहत, आपूर्ति बुनियादी ढांचे (Supply Infrastructure) को मजबूत करने के लिए DISCOMs को सशर्त वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।
  4. यह सहायता पूर्व-अर्हता मानदंडों को पूरा करने के साथ-साथ DISCOM द्वारा बुनियादी स्तर पर न्यूनतम मानकों को पूरा करने की उपलब्धि पर आधारित होगी। 
  5. इस योजना के तहत, वितरण क्षेत्र में, बिजली फीडर से लेकर उपभोक्ता स्तर तक एक ‘अनिवार्य स्मार्ट मीटरिंग इकोसिस्टम’ शामिल किया गया है – जिसमें लगभग 250 मिलियन परिवार शामिल होंगे।
  6. यह योजना असंबद्ध फीडरों के लिए फीडर वर्गीकरण हेतु वित्त पोषण पर भी ध्यान केंद्रित करती है।
  7. इस योजना में फीडरों के सौरकरण से सिंचाई के लिए दिन में सस्ती / निःशुल्क बिजली मिलेगी और किसानों को अतिरिक्त आय होगी। 
  8. समयरेखा: 2025-26 तक।

अभिसरण: ‘एकीकृत विद्युत विकास योजना’ (Integrated Power Development Scheme), ‘दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना’ (DDUGJY) और ‘प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना’ जैसी मौजूदा विद्युत क्षेत्र सुधार योजनाओं को इस अम्ब्रेला कार्यक्रम में विलय कर दिया जाएगा।

नोडल निकाय: ग्रामीण विद्युतीकरण निगम (आरईसी) और पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन। 

Current Affairs

 

भारत का राष्ट्रीय इंटरनेट एक्सचेंज 

भारत के राष्ट्रीय इंटरनेट एक्सचेंज (National Internet Exchange of India NIXI) ने पश्चिम बंगाल में दो नए इंटरनेट एक्सचेंज पॉइंट (IXP) स्थापित किए हैं।

‘इंटरनेट एक्सचेंज प्वाइंट’ (IXP) एक भौतिक स्थान होता है जिसके माध्यम से इंटरनेट सेवा प्रदाता (आईएसपी) और सीडीएन जैसी इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियां एक-दूसरे से जुड़ती हैं।

भारत का राष्ट्रीय इंटरनेट एक्सचेंज (National Internet Exchange of India NIXI), कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 8 के अंतर्गत एक गैर-लाभकारी संगठन है।

यह वर्ष 2003 से भारत के नागरिकों को निम्नलिखित गतिविधियों के माध्यम से इंटरनेट के बुनियादी ढांचे को फैलाने के लिए काम कर रहा है:

  1. इंटरनेट एक्सचेंज, जिनके माध्यम से विभिन्न आईएसपी और  डेटा सेंटर के बीच इंटरनेट डेटा का आदान-प्रदान किया जाता है।
  2. IN (डॉट आईएन) रजिस्‍ट्री, आईएन कंट्री कोड डोमेन का प्रबंधन व संचालन और भारत के लिए भारत IDN (आईडीएन) डोमेन।

Current Affairs

 

कृत्रिम बुद्धिमत्ता-आधारित मंदारिन अनुवाद उपकरण

संदर्भ: भारतीय स्टार्ट-अप द्वारा विकसित ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-आधारित उपकरणों’ को LAC के साथ तैनात किया जाएगा। यह एक ऑफलाइन हैंडहेल्ड भाषा अनुवाद प्रणाली है जो ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ पर आधारित है।

  • रक्षा में ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ के उपयोग के लिए परियोजनाएं: तकनीकी विकास कोष परियोजनाएं, ‘डेयर टू ड्रीमप्रतियोगिताएं और रक्षा-उद्योग-अकादमियाउत्कृष्टता केंद्र।
  • निजी क्षेत्र से आने वाले 70% योगदान के साथ, वित्त वर्ष 2021-22 में भारत के हथियारों और रक्षा प्रौद्योगिकियों के निर्यात ने रिकॉर्ड 13,000 करोड़ रुपये को छुआ। निर्यात मुख्य रूप से अमेरिका, फिलीपींस (ब्रह्मोस), अन्य एस-ई एशियाई देशों के साथ-साथ पश्चिम-एशिया और अफ्रीका को होता है। 

पॉप-फेम

अमेरिका में बैक्टीरिया (स्ट्रेप्टोमाइसेस) से POP-FAME नाम का ईंधन विकसित किया गया है। इसका ऊर्जा घनत्व पेट्रोल और अन्य रॉकेट ईंधन से अधिक है, और यह अंतरिक्ष ईंधन के लिए आदर्श है।