विषयसूची
सामान्य अध्ययन-I
- शिमला समझौता
सामान्य अध्ययन-II
- क्षय रोग को नियंत्रित करने का तरीका
- सदन की समितियों के कार्यकाल को बढ़ाने का सुझाव
- जजों की संख्या कम होने से लंबित मामलों की संख्या में वृद्धि: भारत के मुख्य न्यायाधीश
सामान्य अध्ययन-III
- भारत की सुपरकंप्यूटिंग क्षमताएं
- पेंटाक्वार्क
मुख्य परीक्षा संवर्धन हेतु पाठ्य सामग्री (नैतिकता/निबंध)
- सीमा का ‘टेटर टोटर’ (सी-सॉ) में रूपांतरण
- बिजनेस ब्लास्टर्स प्रोग्राम
प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य
- डॉ राजेंद्र प्रसाद स्मृति पुरस्कार
- फील्ड्स मेडल
- क्रय प्रबंधक सूचकांक
- InvITs और ReITs
- सेवा शुल्क
- हुरुन इंडिया फ्यूचर यूनिकॉर्न इंडेक्स 2022
- रेत बैटरी / सैंड बैटरी
- “केमो-फसल” परीक्षण
- को-लोकेशन
- केरल में एंथ्रेक्स का प्रकोप
- सीधे बोए जाने वाला धान
- नैरोबी मक्खियों
- बन्नी के घास-मैदान
सामान्य अध्ययन–I
विषय: स्वतंत्रता के पश्चात् देश के अंदर एकीकरण और पुनर्गठन।
शिमला समझौता
संदर्भ:
भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद हस्ताक्षरित ‘शिमला समझौता’ (Shimla Agreement) को 50 साल पूरे हो चुके हैं। बांग्लादेश की मुक्ति के बाद भारत-पाकिस्तान युद्ध 16 दिसंबर, 1971 को समाप्त हुआ था। शिमला समझौता’ को ऐतिहासिक समझौता माना जाता है क्योंकि इसने भारत और पाकिस्तान के बीच अच्छे पड़ोसी संबंधों की एक रूपरेखा तैयार की थी।
शिमला समझौते के प्रमुख सिद्धांत:
- दोनों देशों के मध्य संबंधों को ‘संयुक्त राष्ट्र चार्टर’ के सिद्धांतों और उद्देश्यों द्वारा नियंत्रित किया जाना था।
- लोगों से लोगों के बीच संपर्कों पर विशेष ध्यान देने के साथ सहयोगी संबंध।
- जम्मू और कश्मीर में ‘नियंत्रण रेखा’ की अनुल्लंघनीयता / पवित्रता को बनाए रखना।
- एक दूसरे के खिलाफ शत्रुतापूर्ण प्रचार को रोकना और शांतिपूर्ण तरीकों और द्विपक्षीय वार्ता के माध्यम से मुद्दों का समाधान करना।
- एक दूसरे की क्षेत्रीय अखंडता या राजनीतिक स्वतंत्रता के खिलाफ खतरा या बल प्रयोग से बचना।
- शांतिपूर्वक, एक-दूसरे की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना, और एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करना।
इंस्टा लिंक्स: शिमला समझौता
अभ्यास प्रश्न:
1971 के युद्ध में अपनी जीत को 1972 के शिमला समझौते के माध्यम से क्षेत्र में दीर्घकालिक शांति में बदलने के लिए भारत की असफलता एक ‘चूके हुए अवसर’ का मामला है। परीक्षण कीजिए। (250 शब्द)
स्रोत: द हिंदुस्तान टाइम्स
सामान्य अध्ययन–II
विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।
क्षय रोग को नियंत्रित करने संबंधी उपाय
संदर्भ:
हाल ही में, ‘इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च-नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च इन ट्यूबरकुलोसिस’ (ICMR-NIRT) के शोधकर्ताओं ने पशुओं (मवेशी) में टीबी (तपेदिक या क्षय रोग) के ‘मानव-से-पशु’ संचरण का पता लगाया है।
- डब्ल्यूएचओ के अनुसार, तपेदिक सबसे खराब स्थानिक बीमारी है। विश्व में तपेदिक राजधानी कहे जाने वाले भारत में यह बीमारी हर दिन करीब 1,400 लोगों की जान लेती है।
- मनुष्यों में ‘बेसिलस माइकोबैक्टीरियम ट्यूबर्क्युलोसिस’ (Bacillus Mycobacterium tuberculosis) जैसे जीवाणु टीबी और कुष्ठ जैसी बीमारियों का कारण बनते हैं और अन्य जानवरों को संक्रमित करते हैं। मनुष्यों में तपेदिक (Tuberculosis), सबसे अधिक फेफड़ों (फुफ्फुसीय टीबी – pulmonary TB) को प्रभावित करता है, लेकिन यह अन्य अंगों को भी प्रभावित कर सकता है।
- टीबी एक इलाज योग्य और इलाज योग्य बीमारी है।
पृष्ठभूमि:
टीबी-उन्मूलन रणनीति: भारत, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा टीबी-उन्मूलन के लिए निर्धारित वैश्विक लक्ष्य यानी 2030 से पांच साल पहले 2025 तक देश से तपेदिक को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है।
संशोधित राष्ट्रीय क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम:
(कुछ समय पूर्व ‘संशोधित राष्ट्रीय क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम’ (Revised National Tuberculosis Control Programme – RNTCP) का नाम परिवर्तित करके ‘राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम’ (National Tuberculosis Elimination Programme – NTEP) कर दिया गया था।)
- यह भारत सरकार की ‘राज्य द्वारा संचालित’ तपेदिक नियंत्रण पहल है।
- RNTCP में ‘प्रत्यक्ष रूप से देखे गए उपचार-लघु कोर्स’ अर्थात ‘डॉट्स’ (Directly Observed Treatment-Short Course – DOTS) के सिद्धांतों को शामिल किया गया है।
- डॉट्स, क्षय रोग उन्मूलन हेतु एक व्यवस्थित रणनीति है जिसके पांच घटक होते हैं (आरेख देखें)
‘संशोधित राष्ट्रीय क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम’ (RNTCP) में खामियां:
- निगरानी के कोई निर्धारित तरीके नहीं: सबसे पहले, सरकार द्वारा भारी वित्त पोषित कार्यक्रम के लिए, टीबी नियंत्रण के प्रक्षेपपथ की निगरानी का कोई निर्धारित तरीका नहीं है।
- मान्यताओं पर आधारित कार्यक्रम: यह धारणा, कि केवल ‘फुफ्फुसीय टीबी’ के रोगियों का इलाज करने से ही टीबी पर नियंत्रण हो जाएगा- भारत में महामारी विज्ञान की दृष्टि से गलत है।
- लोगों की भागीदारी हासिल करने में विफलता: RNTCP, टीबी नियंत्रण में लोगों की भागीदारी हासिल करने में विफल रहा है। जबकि, भारत के एड्स नियंत्रण कार्यक्रम में सार्वजनिक शिक्षा को उच्च प्राथमिकता दी गई। स्कूलों और कॉलेजों में ‘रेड रिबन क्लब’ इसकी विरासत हैं। किंतु टीबी नियंत्रण के लिए ऐसा कुछ नहीं किया गया है।
क्षय रोग को नियंत्रित करने के उपाय:
- बेहतर बुनियादी सुविधाएं: बेहतर आवास, पोषण, शिक्षा और आय के साथ ‘सामाजिक निर्धारक’ (Social Determinants) रोगों में समय के साथ गिरावट आती है। विश्व स्तर पर टीबी का बोझ प्रति वर्ष 1% या 1.5% गिर रहा था।
- उन्मूलन के बजाय नियंत्रण पर ध्यान दें: चूंकि भारत में ‘गुप्त टीबी’ (latent TB) का एक बड़ा बैकलॉग है, यह टीबी को खत्म नहीं कर सकता है, लेकिन इसका लक्ष्य ‘उच्च स्तर का नियंत्रण’ (प्रति वर्ष 200 प्रति लाख मामलों से कम करके 50 प्रति लाख प्रति वर्ष) होना चाहिए और इसकी माप करते हुए इसका दस्तावेजीकरण किया जाना चाहिए।
टीबी को नियंत्रित करने संबंधी पहलें:
इंस्टा लिंक्स:
यक्ष्मा (तपेदिक या क्षय रोग या टीबी)
अभ्यास प्रश्न:
भारत में “सभी के लिए स्वास्थ्य” प्राप्त करने के लिए उपयुक्त ‘स्थानीय समुदाय-स्तरीय स्वास्थ्य देखभाल हस्तक्षेप’ एक पूर्वापेक्षा है। समझाइए। (यूपीएससी 2018)
स्रोत: द हिंदू
विषय: संसद और राज्य विधायिका- संरचना, कार्य, कार्य-संचालन, शक्तियाँ एवं विशेषाधिकार और इनसे उत्पन्न होने वाले विषय।
सदन की समितियों का कार्यकाल बढ़ाने का सुझाव
संदर्भ:
हाल ही में, पूर्व महासचिव और सलाहकार पी.पी.के. रामाचार्युलु की अध्यक्षता में गठित एक पैनल ने – ‘राज्यसभा की कार्यवाही के दौरान ‘संसदीय स्थायी समितियों’ (Parliamentary Standing Committees) द्वारा अंतिम रूप दी गयी रिपोर्टों के महत्व एवं निहितार्थ पर चर्चा करने के लिए’, एक समर्पित घंटा (dedicated hour) निर्धारित किए जाने की अनुशंसा की है।
- इस पैनल ने राज्य सभा सचिवालय के कामकाज और अन्य प्रक्रियात्मक मुद्दों का अध्ययन करने के पश्चात् 130 सिफारिशें कीं हैं।
- यह ‘राज्य सभा सचिवालय’ का अब तक का पहला व्यापक अध्ययन है।
- राज्य सभा सचिवालय की शुरुआत 1952 में 200 अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ हुई थी, और वर्तमान में इसमें 1700 कर्मचारी कार्यरत हैं।
पैनल द्वारा दिए गए प्रमुख सुझाव:
- संसदीय समितियों का कार्यकाल बढ़ाना: पैनल ने संसदीय समितियों का कार्यकाल वर्तमान एक वर्ष से बढ़ाकर दो वर्ष किए जाने का सुझाव दिया है।
- क्षेत्र के दौरों में वृद्धि: क्षेत्र के दौरों (Field visits) को भी वर्तमान एक वर्ष में अधिकतम 10 दिनों की दो यात्राओं से बढ़ाकर 15 दिनों की तीन यात्राएँ किया जाना चाहिए।
- समिति-घंटा (Committee hour) का गठन: DRSC द्वारा रिपोर्ट तैयार करने के प्रयासों, और इनके महत्व और निहितार्थों को देखते हुए, रिपोर्ट की सामग्री के व्यापक विस्तार के लिए संसद में चुनिंदा प्रमुख रिपोर्टों पर चर्चा करने के लिए एक ‘समिति घंटे’ (Committee hour) की सिफारिश की गई है।
- रिपोर्ट की सुलभता: पैनल ने कहा कि इन रिपोर्टों को हितधारकों और आम जनता के लिए अधिक सुलभ बनाया जाना चाहिए।
- सचिवालय के काम को सुव्यवस्थित करना: अध्ययन में सचिवालय के काम को सुव्यवस्थित करने का सुझाव दिया गया है, जिसमें वर्तमान में सचिवालय में मौजूद 10-लेयर पदानुक्रम में निचले और मध्यम स्तरों पर 75% मुद्दों का निपटान शामिल है।
इंस्टा लिंक्स:
अभ्यास प्रश्न:
समितियां, संसदीय कार्य के लिए उपयोगी मानी जाती हैं इस बारे में आप क्या सोचते हैं? इस संदर्भ में प्राक्कलन समिति की भूमिका की विवेचना कीजिए। (यूपीएससी 2018)
स्रोत: द हिंदू
विषय: कार्यपालिका और न्यायपालिका की संरचना, संगठन और कार्य- सरकार के मंत्रालय एवं विभाग, प्रभावक समूह और औपचारिक/अनौपचारिक संघ तथा शासन प्रणाली में उनकी भूमिका।
जजों की संख्या कम होने से लंबित मामलों की संख्या में वृद्धि: भारत के मुख्य न्यायाधीश
संदर्भ:
पर्याप्त संख्या में न्यायाधीशों की कमी के कारण लंबित मामलों की समस्या “तीव्र” होती जा रही है, भारत के मुख्य न्यायाधीश ने कहा है, कि सरकार ने अभी तक विभिन्न उच्च न्यायालयों के लिए अनुशंसित 23 नामों को मंजूरी नहीं दी है।
न्यायपालिका से संबंधित मुद्दे:
- राजनीतिक दबाव: सत्ता पक्ष चाहता है कि अदालतें उसके कदमों का समर्थन करें और विपक्ष चाहता है कि न्यायाधीश उसकी राजनीतिक लड़ाई लड़ें। लेकिन न्यायपालिका केवल भारतीय संविधान के प्रति जवाबदेह है।
- सोशल मीडिया पर आलोचना: न्यायिक फैसलों की या किसी जज के खिलाफ सोशल मीडिया पर आलोचना होती है।
- कुछ मामलों में अत्यधिक देरी: चुनावी बांड के मामले की सुनवाई, कर्नाटक में हिजाब पहनने के लिए कक्षा से बाहर कर दी गयी लड़कियों याचिका, आदि जैसे मामलों की सुनवाई में देरी।
- अंतर्विरोध: उदाहरण के लिए, ज्ञानवापी मस्जिद मामले से संबंधित एक याचिका पर अदालत का फैसला ‘पूजा स्थल अधिनियम’ के बारे में भूलने की बीमारी को दर्शाता है, कि इस क़ानून को 2019 के अयोध्या फैसले में दृढ़ता से बरकरार रखा गया था।
- राजद्रोह कानून: निचली अदालतें अप्रमाणित आरोपों पर ‘डिफ़ॉल्ट सेटिंग’ के रूप में “जमानत, जेल नहीं” (bail, not jail) पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अनदेखी करना जारी रखती हैं।
- अत्याधिक रिक्तियां: सुप्रीमकोर्ट में 19%, हाईकोर्ट में 44% और निचली अदालतों में 23% रिक्तियां हैं।
भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा दिए गए सुझाव:
- कायापालट और रिक्तियों को भरना: भारत में न्यायिक बुनियादी ढांचे को बदलना और उन्नत करना, साथ ही न्यायिक रिक्तियों को भरना और संख्या बढ़ाना।
- सरकार की प्रतिक्रिया अवधि में कमी: सरकार को इस प्रक्रिया में तेजी लानी चाहिए ताकि शेष रिक्तियों को काफी कम किया जा सके।
- मध्यस्थता का उपयोग: मुख्य न्यायाधीश ने कहा है कि “भारतीय मध्यस्थता परिदृश्य (Indian arbitration scenario) की संवृद्धि वैश्विक प्रवृत्तियों और मांगों के प्रति बहुत प्रतिक्रियाशील रही है।
- वाणिज्यिक जगत को विवादों का त्वरित और प्रभावी समाधान प्रदान करने के लिए देश भर में कई अंतर्राष्ट्रीय विवाद समाधान संस्थान स्थापित किए जा रहे हैं।
- ऐसे ‘अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्रों’ की उपस्थिति न केवल एक निवेशक-अनुकूल राष्ट्र के रूप में भारत की वैश्विक स्थिति को बढ़ावा देगी बल्कि एक मजबूत कानूनी अभ्यास के विकास की सुविधा भी प्रदान करेगी।
- मुख्य न्यायाधीश ने “हैदराबाद में एक अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता और मध्यस्थता केंद्र स्थापित करने की पहल की थी”।
- केंद्र सरकार द्वारा गुजरात में एक अन्य अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव किया गया है।
इंस्टा लिंक्स:
सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति
अभ्यास प्रश्न:
भारत और ब्रिटेन में न्यायिक व्यवस्था हाल के दिनों में अभिसरण के साथ-साथ अलग-अलग होती दिख रही है। दो राष्ट्रों के बीच उनकी न्यायपालिका प्रथाओं के संदर्भ में अभिसरण और विचलन के प्रमुख बिंदुओं पर प्रकाश डालें। (यूपीएससी 2020)
स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस, लाइव मिंट
सामान्य अध्ययन–III
विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास।
भारत की सुपरकंप्यूटिंग क्षमताएं
संदर्भ:
सुपर-कंप्यूटर (शीर्ष 500) की वैश्विक रैंकिंग सेवा के अनुसार,- भारत में शीर्ष 500 सुपर-कंप्यूटर की सूची में केवल शीर्ष क्रम के मात्र 3 सुपर कंप्यूटर हैं और ‘शीर्ष 100’ सुपर-कंप्यूटर की सूची में कोई भी नहीं है।
शीर्ष 500 में शामिल तीन सुपर कंप्यूटर – परम सिद्धि (5.27 पीएफलॉप्स), परम गंगा (1.66 पीएफलॉप्स) और प्रत्यूष सुपरकंप्यूटर (भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान) हैं।
वस्तुस्थिति:
- वर्ष 2020 में भारत के ‘शीर्ष 100’ में दो सुपर कंप्यूटर शामिल थे।
- विश्व: विश्व के शीर्ष 500 सुपर कंप्यूटरों में चीन और अमेरिका की हिस्सेदारी लगभग दो-तिहाई है।
- फ्रंटियर सुपरकंप्यूटर: ‘ओक रिज नेशनल लेबोरेटरी’ में स्थित विश्व का सबसे तेज सुपरकंप्यूटर, फ्रंटियर (Frontier) 1,685 पेटाफ्लॉप (1,685 PFlops) का चरम प्रदर्शन प्रदान करता है।
सुपर कंप्यूटर के लाभ:
- हाई-स्पीड कंप्यूटेशन: उदाहरण के लिए, मई 2020 में, आईबीएम के ‘समिट सुपरकंप्यूटर’ ने शोधकर्ताओं को दवा के यौगिकों को खोजने में मदद की जो कोविड -19 वायरस को केवल 2-3 दिनों में मेजबान कोशिकाओं को संक्रमित करने से रोक सकते हैं।
- अन्य क्षेत्र: केमिस्ट्री फॉर्मूलेशन, प्रोटीन फोल्डिंग, बायोमेडिसिन, स्पेस (सैटेलाइट प्लेसमेंट के लिए) और जलवायु अनुसंधान।
भारत द्वारा इस दिशा में उठाए गए कदम:
- राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (NSM): राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (National Supercomputing Mission) के तहत 2015 से देश में 24 पेटाफ्लॉप की कुल गणना क्षमता वाले पंद्रह सुपर कंप्यूटर स्थापित किए गए हैं।
- राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (2015 में शुरू) का उद्देश्य राष्ट्रीय ज्ञान नेटवर्क (National Knowledge Network – NKN) के साथ शक्तिशाली कंप्यूटरों के विकास और निर्माण को स्वदेशी बनाना है।
इस मिशन की योजना के तीन चरण है:
- पहला चरण: सुपर कंप्यूटरों को असेंबल करना
- दूसरा चरण: देश के भीतर कुछ घटकों के निर्माण पर विचार करना
- तीसरा चरण: इसके तहत, भारत द्वारा एक सुपर कंप्यूटर को डिजाइन करना।
सी-डैक, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) का एक विभाग ‘राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन’ के तहत सुपर कंप्यूटरों को डिजाइन करने, विकसित करने और चालू करने के लिए जिम्मेदार है।
सुपरकंप्यूटर: एक परिचय
- सुपर कंप्यूटर (supercomputer) एक ऐसा कंप्यूटर होता है, जो कंप्यूटर के लिए वर्तमान में उच्चतम परिचालन दर पर या उसके निकट प्रदर्शन करता है।
- भारत का पहला सुपर कंप्यूटर ‘परम 8000’ था।
- देश में ही असेंबल किया जाने वाला पहला सुपर कंप्यूटर ‘परम शिवाय’ था।
पेटाफ्लॉप्स: सुपरकंप्यूटर की कंप्यूटिंग शक्ति को ‘फ्लोटिंग-पॉइंट ऑपरेशंस प्रति सेकेंड’ या ‘फ्लॉप्स’ में मापा जाता है। एक पेटाफ्लॉप्स 1,000,000,000,000,000 (एक क्वाड्रिलियन) फ्लॉप्स या एक हजार टेराफ्लॉप्स के बराबर होता है।
इंस्टा लिंक
राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (NSM)
अभ्यास प्रश्न
हालांकि भारत सूचना प्रौद्योगिकी में एक प्रमुख खिलाड़ी है, लेकिन महत्वपूर्ण कंप्यूटिंग प्रौद्योगिकी के निर्माण में आत्मनिर्भरता का अभाव है। इस कमी को पूरा करने के लिए सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों का उल्लेख कीजिए। (10 अंक)
स्रोत: लाइव मिंट
विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास।
पेंटाक्वार्क
संदर्भ: हाल ही में, ‘लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर (Large Hadron Collider – LHC) द्वारा एक नए प्रकार का “पेंटाक्वार्क” (Pentaquarks) और “टेट्राक्वार्क” (Tetraquarks) का पहला युग्म खोजा गया है।
यह आर्टिकल, पिछले दिन अर्थात 5 जुलाई को ‘लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर’ टॉपिक पर दिए गए आर्टिकल का अगला भाग है।
पृष्ठभूमि:
CERN, ‘यूरोपियन ऑर्गनाइजेशन फॉर न्यूक्लियर रिसर्च’ का मूल नाम है। CERN में ‘कण त्वरक’ (particle accelerator) संबंधी प्रयोग किए जाते हैं और इसमें दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे जटिल ‘लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर (Large Hadron Collider – LHC) स्थापित है।
इसी वर्ष अप्रैल में तीन साल बाद फिर से चालू किए गए LHC ने लगभग प्रकाश की गति से प्रोटॉनों का एक साथ बिखंडन करना शुरू कर दिया है, जो ‘मानक मॉडल’ (Standard Model) से परे “नई” भौतिकी पर प्रकाश दाल सकता है।
क्वार्क: परिचय
क्वार्क (Quarks) प्राथमिक कण हैं जो छह ‘विशिष्ट फ्लेवर्स’- अप (UP), डाउन (down), चार्म (Charm), स्ट्रेंज (Strange), टॉप (Top) और बॉटम (Bottom)। क्वार्क, प्रायः दो और तीन के समूहों में एक साथ मिलकर प्रोटॉन और न्यूट्रॉन जैसे हैड्रॉन (Hadrons) बनाते हैं जिनसे ‘परमाणु नाभिक’ का निर्माण होता है।
- प्रबल बल: क्वार्कों की परस्पर क्रिया, प्रकृति की मूलभूत शक्तियों में से एक से जुडी होती है, जिसे ‘प्रबल बल’ (Strong Force) कहा जाता है। यह बल न केवल परमाणुओं के अंदरूनी हिस्सों को एक साथ रखता है बल्कि अन्य उप-परमाणु कणों की अंतःक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- हैड्रॉन (Hadrons): ये कोई भी उप- परमाण्विक कण (जैसे प्रोटॉन और न्यूट्रॉन) होते है, जो क्वार्क से निर्मित और प्रबल बल के अधीन होते हैं।
हालिया निष्कर्ष:
वैज्ञानिकों द्वारा नए तरीके खोजे गए हैं जिनमें, मानव जाति के लिए ज्ञात सबसे सूक्ष्म कण – क्वार्क- एक साथ समूहित होते हैं।
“विदेशी” पदार्थ (Exotic matter): क्वार्क, चार-क्वार्क और पांच-क्वार्क कणों में भी युग्मित हो सकते हैं, जिन्हें ‘टेट्राक्वार्क’ और ‘पेंटाक्वार्क’ कहा जाता है।
विदेशी पिंड की आवर्त सारणी की ओर: यह, आवर्त सारणी में खोजे गए कुल तत्वों की संख्या को 21 तक ले जाता है। नवीनतम खोजों का मतलब है कि आवर्त सारणी में रासायनिक तत्वों की तरह, इन कणों को एक साथ समूहित करना शुरू करने के लिए अब पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध हैं। विदेशी पिंडो (exotic mass) को नियंत्रित करने वाले सिद्धांत और नियमों का सेट बनाने की दिशा में यह एक पहला आवश्यक कदम है।
इंस्टा लिंक:
अभ्यास प्रश्न:
उप-परमाण्विक कण और ब्रह्मांड की उत्पत्ति को समझने में ‘कण भौतिकी’ के मानक मॉडल के महत्व पर चर्चा कीजिए। यह आइंस्टीन के सापेक्षता के सिद्धांत से किस प्रकार भिन्न है? (15 अंक)
स्रोत: द हिंदू
मुख्य परीक्षा संवर्धन हेतु पाठ्य सामग्री (नैतिकता/निबंध)
सीमा का ‘टेटर टोटर’ (सी-सॉ) में रूपांतरण
संयुक्त राज्य अमेरिका-मेक्सिको की ‘स्टील सीमा दीवार’ पर, आर्किटेक्चर स्टूडियो ‘रायल सैन फ्रेटेलो’ एक ऐसी जगह बनाना चाहता था, जहां सीमा पार के नागरिक एक दूसरे से जुड़ सकें। इसके लिए उन्होंने दीवार में बने अंतराल को भरने के लिए तीन चमकते हुए गुलाबी अस्थायी ‘टीटर-टोटर्स’ (Teeter-Totters) / सी-सॉ (see-saws) तैयार किए हैं।
यह क्या दर्शाता है?
यह दर्शाता है कि, पडोसियों को विभिन्न तरीकों से किस प्रकार जोड़ा जा सकता है। ‘सी-सॉ’ का निहित संदेश यह भी है, कि एक देश पर पड़ने वाले किसी भी प्रभाव का कुछ असर पड़ोसी देशों पर भी पड़ेगा।
- कि, हमारे पड़ोसियों के साथ हमारे संबंध, पिछले राजनीतिक संबंधों को आगे बढ़ाने के साथ-साथ मानवतावादी संबंधों को भी बढ़ा सकते हैं।
- ‘सी-सॉ’ यह दर्शाता है, कि कैसे लोगों के बीच तत्काल संबंध, एक ऐसा वातावरण बना सकते हैं जहां खुशी और खेल भी सीमा पर जीवन के महत्वपूर्ण पहलू हैं।
- लंदन में डिज़ाइन म्यूज़ियम ने ‘टीटर टोटर वॉल’ को ‘बेज़ले डिज़ाइन ऑफ़ द ईयर’ से सम्मानित किया है, जो डिज़ाइन दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों में से एक है। बेज़ले (Beazleys) उन परियोजनाओं और उत्पादों को दिया जाता है जिनमें “परिवर्तन के शक्तिशाली संदेश” निहित होते हैं।
बिजनेस ब्लास्टर्स प्रोग्राम
बिजनेस ब्लास्टर्स प्रोग्राम (Business Blasters programme) दिल्ली के सरकारी स्कूलों में ‘एंटरप्रेन्योरशिप माइंडसेट पाठ्यक्रम’ का हिस्सा है।
- व्यावसायिक विचारों को पेश करने वाले स्कूली छात्रों ने प्रति छात्र 1000 रुपये के मामूली सरकारी अनुदान के साथ-साथ इन विचारों को लागू करने के लिए एक मंच के साथ अपना खुद का व्यवसाय उद्यम शुरू किया।
- इस प्रकार के कार्यक्रम युवा छात्रों के बीच नवाचार और अनुसंधान के मूल्यों को विकसित करने में मदद कर सकते हैं और इस प्रकार उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने, उद्यमिता को प्रोत्साहित करने और देश के समग्र विकास में मदद कर सकते हैं।
- इससे पहले, दिल्ली सरकार ने ‘हैप्पीनेस करिकुलम’ (2018) और ‘देशभक्ति पाठ्यक्रम’ (2020-2021) शुरू किया था।
प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य
डॉ राजेंद्र प्रसाद स्मृति पुरस्कार
हाल ही में, सरकार द्वारा भारत के पहले राष्ट्रपति की स्मृति में अकादमिक उत्कृष्टता के क्षेत्र में लोक प्रशासन में डॉ. राजेंद्र प्रसाद स्मृति पुरस्कार की स्थापना की घोषणा की गयी है।
- डॉ राजेंद्र प्रसाद, स्वतंत्र भारत के पहले राष्ट्रपति थे।
- वह एक भारतीय स्वतंत्रता कार्यकर्ता, वकील और विद्वान भी थे।
- उन्होंने 1946 के चुनावों के बाद केंद्र सरकार में ‘खाद्य और कृषि मंत्री’ के रूप में कार्य किया।
- उन्होंने भारत की संविधान सभा के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया।
साहित्यिक रचनाएँ:
- चंपारण में सत्याग्रह (1922)
- भारत विभाजित (1946)
- आत्मकथा (1946), बांकीपुर जेल में उनकी 3 साल की जेल अवधि के दौरान लिखी गई उनकी आत्मकथा।
- महात्मा गांधी और बिहार, कुछ यादें (1949)
- बापू के कदमों में (1954)
- आजादी के बाद से (1960)
फील्ड्स मेडल
संदर्भ:
अंतर्राष्ट्रीय गणितीय संघ (International Mathematical Union – IMU) ने 8 और 24 आयामों में ‘स्फीयर-पैकिंग समस्या’ पर यूक्रेनी गणितज्ञ ‘मैरीना वियाज़ोवस्का’ (Maryna Viazovska) के कार्य को सम्मानित किया है।
- फील्ड्स मेडल (Fields Medal), क अंतरराष्ट्रीय गैर-सरकारी और गैर-लाभकारी वैज्ञानिक संगठन- अंतर्राष्ट्रीय गणितीय संघ (IMU) द्वारा प्रदान किया जाता है।
- फील्ड्स मेडल, हर चार साल में 40 साल से कम उम्र के एक या एक से अधिक गणितज्ञों को “मौजूदा काम के लिए उत्कृष्ट गणितीय उपलब्धि और भविष्य की उपलब्धि के वादे के लिए” प्रदान किया जाता है।
भारतीय मूल के फील्ड्स मेडल विजेता:
- प्रिंसटन में उन्नत अध्ययन संस्थान के ‘अक्षय वेंकटेश’ (2018)
- प्रिंसटन विश्वविद्यालय में गणित विभाग के ‘मंजुल भार्गव’ (2014)
क्रय प्रबंधक सूचकांक
आरबीआई के अनुसार, भारत का सेवा क्षेत्र का ‘क्रय प्रबंधक सूचकांक’ (Purchasing Managers’ Index – PMI), जून में 59.2 के स्तर पर चढ़ गया था, जोकि 11 वर्षों में इसका उच्चतम स्तर है।
- क्रय प्रबंधक सूचकांक (PMI) निजी क्षेत्र की कंपनियों के मासिक सर्वेक्षण से प्राप्त आर्थिक संकेतक होता है।
- भारत के लिए PMI, ‘आईएचएस मार्किट’ (IHS Markit ) द्वारा तैयार किया जाता है।
- नवीनतम सूचकांक 500 विनिर्माण कंपनियों और 350 सेवा क्षेत्र की कंपनियों के सर्वेक्षण के बाद तैयार किया गया है।
- सूचकांक में 50 से ऊपर का स्तर. गतिविधि में विस्तार को दर्शाता है, जबकि नीचे का स्तर कुछ संकुचन का संकेत देता है।
- महत्व: चूंकि सेवाएं हमारी अर्थव्यवस्था के उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा हैं, इसलिए सर्वेक्षण के निष्कर्ष अच्छी खबर बताते हैं।
InvITs और ReITs
भले ही अभी बाजार नीचे हैं, किंतु आरईआईटी (ReITs) और इनविट (InvITs) से रिटर्न बढ़ने की उम्मीद है।
- इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (InvITs) ऐसे निवेश साधन होते हैं जो म्यूचुअल फंड की तरह काम करते हैं और सेबी द्वारा नियंत्रित होते हैं। आम तौर पर, इस तरह के ‘वाहन’ को कई निवेशकों से आय-सृजन करने वाली संपत्तियों में निवेश करने के लिए धन (छोटी रकम) एकत्र करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (ReITs), एक ऐसी कंपनी होती है जो आम तौर पर आय-उत्पादक अचल संपत्ति या संबंधित संपत्तियों का मालिक होती है और इनको संचालित करती है। इनमें कार्यालय भवन, शॉपिंग मॉल, अपार्टमेंट, होटल, रिसॉर्ट, स्व-भंडारण सुविधाएं, गोदाम, और बंधक या ऋण शामिल हो सकते हैं।
सेवा शुल्क
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के तहत नियामक ‘केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण’ (CCPA) ने होटल और रेस्तरां को खाद्य बिल में स्वचालित रूप से या डिफ़ॉल्ट रूप से ‘सेवा शुल्क’ (Service Charges) जोड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया है।
‘सेवा शुल्क’ के बारे में:
यह प्राथमिक उत्पाद या सेवाओं की खरीद से जुड़ी सेवाओं के भुगतान के लिए वसूला जाने वाला एक प्रकार का शुल्क होता है।
हुरुन इंडिया फ्यूचर यूनिकॉर्न इंडेक्स 2022
हाल ही में, हुरुन रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा ‘हुरुन इंडिया फ्यूचर यूनिकॉर्न इंडेक्स’ 2022 (Hurun India Future Unicorn Index 2022) जारी किया गया है।
- इंडेक्स के अनुसार, ज़ेप्टो, शिपरॉकेट, टर्टलमिंट स्टार्टअप्स संभावित यूनिकॉर्न की शीर्ष सूची में शामिल हैं।
- बेंगलुरु भारत की ‘स्टार्ट-अप राजधानी’ बना हुआ है। और यहाँ 46 संभावित यूनिकॉर्न स्थित है।
रेत बैटरी / सैंड बैटरी
फिनिश शोधकर्ताओं ने दुनिया की पहली पूरी तरह से काम करने वाली “सैंड बैटरी” (Sand Battery) स्थापित की है जो एक बार में महीनों तक के लिए पर्याप्त ‘हरित ऊर्जा’ को स्टोर कर सकती है।
कार्यविधि:
- चार्जिंग: निम्न-श्रेणी की रेत का उपयोग करके, उपकरण को सौर या पवन से सस्ती बिजली से बनाई गई ऊष्मा से चार्ज किया जाता है।
- भंडारण: रेत (साइलो में रखी गई) ऊष्मा को लगभग 500C पर संग्रहीत करती है। रेत, ऊष्मा के भंडारण के लिए एक बहुत ही प्रभावी माध्यम है।
- डिस्चार्ज: जब ऊर्जा की कीमतें अधिक होती हैं या सर्दियों में यह बैटरी गर्म हवा को डिस्चार्ज करती है, जिससे ‘डिस्ट्रिक्ट हीटिंग सिस्टम’ के लिए पानी को गर्म किया जाता है जिसे बाद में घरों, कार्यालयों और यहां तक कि स्थानीय स्विमिंग पूल के आसपास पंप किया जाता है।
“केमो-फसल” परीक्षण
(“Camo-cropping” trial)
- वैज्ञानिकों का अनुमान है, कि विविध फसलों के पैचवर्क, फसलों को ‘कीटनाशकों के प्राकृतिक विकल्प के रूप में’ कीटों की नजर से छिपाने में मदद करेंगे।
- चुकंदर के खेतों को ‘फ़ूड डाई’ से अलग-अलग रंगों में रंगा गया है। रंग और पौधे और मिट्टी के बीच का अंतर, डाई का उपयोग करके एफिड्स जैसे कीटों की नजर से फसलों को प्रभावी रूप से छिपा देगा।”
को-लोकेशन
को-लोकेशन (Co-location), एक डाटा सेंटर सुविधा होती है, जहां कोई तीसरा पक्ष, सर्वर और अन्य कंप्यूटर हार्डवेयर के लिए ‘जगह’ को पट्टे पर दे सकता है। को-लोकेशन, सर्वर स्थापित करने और डेटा के भंडारण के लिए बिजली की आपूर्ति, बैंडविड्थ और कूलिंग जैसी बुनियादी सुविधाएं प्रदान करते हैं।
केरल में एंथ्रेक्स का प्रकोप
त्रिशूर जिले के अथिरापिल्ली में जंगली सूअर के कई शव मिलने के बाद एंथ्रेक्स का प्रकोप घोषित किया गया है।
एंथ्रेक्स, बीजाणुओं से उत्पन्न होने वाले बेसिलस ऐंथरैसिस (Bacillus Anthracis) जीवाणुओं के कारण होने वाला एक जानलेवा संक्रामक रोग है।
- यह मानव की अपेक्षा जानवरों जैसे- घोड़ों, गायों, बकरियों और भेड़ों आदि को अधिक प्रभावित कर सकता है।
- संक्रमित जानवरों, ऊन, मांस, या खाल के संपर्क में आने से एंथ्रेक्स, मानवों में फ़ैल सकता है।
- प्रसरण: एंथ्रेक्स, किसी संक्रमित जानवर या व्यक्ति से दूसरे में सीधे नहीं फैलता है; बल्कि यह बीजाणुओं के माध्यम से फैलता है। एंथ्रेक्स के बीजाणु, कपड़ों या जूते से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचते है।
सीधे बोए जाने वाला धान
- सीधे बोए जाने वाला धान (Direct-Seeded Rice – DSR) को ‘प्रसारण बीज तकनीक‘ (Broadcasting Seed Technique) भी कहा जाता है, यह धान की बुवाई की पानी बचाने वाली विधि है।
- इस विधि से बीजों को सीधे खेतों में ड्रिल किया जाता है। यह पारंपरिक जल-गहन विधि के विपरीत भूजल की बचत करता है। पारंपरिक विधि में धान के पौधों को नर्सरी से जलभराव वाले खेतों में रोपा जाता है।
नैरोबी मक्खियों
पूर्वी सिक्किम के एक इंजीनियरिंग कॉलेज के लगभग 100 छात्रों ने नैरोबी मक्खियों (Nairobi flies) के संपर्क में आने के बाद त्वचा में संक्रमण की सूचना दी है।
- नैरोबी मक्खियाँ (Nairobi flies) को केन्याई मक्खियाँ या ड्रैगन बग (पूर्वी अफ्रीका की स्थानिक) भी कहा जाता है। ये छोटे, भृंग जैसे कीट होते हैं।
- नैरोबी मक्खियाँ, नारंगी और काले रंग की होती हैं, और उच्च वर्षा वाले क्षेत्रों में पनपती हैं, जैसा कि पिछले कुछ हफ्तों में सिक्किम में देखा गया है।
- आमतौर पर, ये कीट फसलों को खाने वाले कीटों पर हमला करते हैं और मनुष्यों के लिए फायदेमंद होते हैं – लेकिन कभी-कभी, वे सीधे मनुष्यों के संपर्क में आ जाते हैं। ये मक्खियाँ काटती नहीं हैं, लेकिन अगर किसी की त्वचा पर बैठकर परेशान होती हैं, तो वे एक शक्तिशाली अम्लीय पदार्थ छोड़ती हैं जो जलन का कारण बनती है।
बन्नी के घास-मैदान
गुजरात वन विभाग आने वाले वर्ष में 10,000 हेक्टेयर बन्नी के घास मैदानों (Banni grasslands) को बहाल करेगा।
यह, बॉन घोषणा के तहत 2030 तक 26 मिलियन हेक्टेयर खराब भूमि को बहाल करने के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए भारत का प्रयास है।
बन्नी घास-मैदानों के बारे में:
- बन्नी घास-मैदान या चारगाह भूमि 2,618 किलोमीटर में विस्तारित है, और यह गुजरात की कुल चारागाह भूमि का लगभग 45 प्रतिशत है।
- इन घास-मैदानों में 19 पंचायतों में संगठित 48 बस्तियां/गांव बसी हुई हैं, जिनकी कुल आबादी लगभग 40,000 है।
- बन्नी क्षेत्र में दो पारिस्थितिक तंत्र, आर्द्रभूमि और घास-मैदान परस्पर जुड़े हुए हैं।
- यह क्षेत्र वनस्पतियों और जीव प्रजातियों से समृद्ध है, और इसमें वनस्पतियों की 192 प्रजातियां, पक्षियों की 262 प्रजातियां, स्तनधारियों की कई प्रजातियां, सरीसृप और उभयचर पाए जाते हैं।
- यह एक आरक्षित वन है (सबसे प्रतिबंधित वन; स्थानीय लोगों को तब तक प्रतिबंधित किया जाता है जब तक कि किसी वन अधिकारी द्वारा बंदोबस्त के दौरान विशेष रूप से अनुमति नहीं दी जाती है।
- मालधारी (Maldharis) गुजरात राज्य के बन्नी क्षेत्र में रहने वाला एक आदिवासी चरवाहा समुदाय है।
- यह क्षेत्र भारत में चीता के अंतिम शेष आवासों में से एक है और प्रजातियों के लिए एक संभावित पुनरुत्पादन स्थल है।
- समस्याएं: भारी अनियंत्रित चराई, प्रोसोपिस जूलीफ्लोरा (एक हानिकारक विदेशी वृक्ष प्रजाति) का व्यापक प्रवेश, बन्नी की ओर बहने वाली नदियों पर बने बांध, सूखे की आवधिक घटना और मिट्टी की लवणता में निरंतर वृद्धि।















