विषयसूची
सामान्य अध्ययन-II
- भारत की परमाणु नीति इसकी पिछली विचारधारा को दर्शाती है: NHRC प्रमुख
- G7 शिखर सम्मेलन की उपलब्धियां
- शी जिनपिंग की दुर्लभ हांगकांग यात्रा
सामान्य अध्ययन-III
- वित्तीय सेवा संस्थान ब्यूरो
- डंपिंग
- वन (संरक्षण) नियम, 2022 अधिसूचित
मुख्य परीक्षा संवर्धन के लिए सामग्री (नैतिकता/निबंध)
- तमिलनाडु के वन पुरुष
प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य
- आषाढ़ी बीज
- हड़प्पा नृजाति के आनुवंशिक लिंक का पता लगाने हेतु अध्ययन
- अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता दिवस
- इडियट सिंड्रोम:
- भारत की सबसे बड़ी तैरती 100 मेगावाट की सौर ऊर्जा परियोजना
- मामलों की क्लबिंग
- हाइव-किलिंग माइट (कुटकी): वर्रोया
- विंडफॉल टैक्स
- सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के लिए योजनाएं
- DRDO का मानवरहित विमान
सामान्य अध्ययन–II
विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।
भारत की परमाणु नीति इसकी पिछली विचारधारा को दर्शाती है: NHRC प्रमुख
संदर्भ:
हाल ही में, ‘राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग’ (National Human Rights Commission – NHRC) के अध्यक्ष ने कहा है, कि परमाणु हथियारों पर भारत की नीति उसकी पिछली विचारधारा की अभिव्यक्ति है।
- उन्होंने कहा, कि भारतीय सभ्यतागत लोकाचार “विचारों और विश्वासों की विभिन्न धाराओं को आत्मसात करने की शक्ति से समृद्ध है, क्योंकि हम अपनी संस्कृति को सुधारना चाहते हैं और दूसरों पर नहीं थोपना चाहते हैं, जोकि मानव अधिकारों का उल्लंघन हो सकता है।
- भारत की परमाणु नीति का सिद्धांत उसकी पिछली विचारधारा का प्रकटीकरण है, जिसमे मानवता को नुकसान पहुचाने वाले सामूहिक विनाश के हथियारों के उपयोग को प्रतिबंधित किया गया है।
- यह सिद्धांत रामायण और महाभारत दोनों में परिलक्षित हुआ है, जिनमे सामूहिक विनाश के हथियारों के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।
भारत का परमाणु सिद्धांत:
- 2003 में, भारत ने आधिकारिक तौर पर ‘नो फर्स्ट यूज’ (No First Use – NFU) नीति के आधार पर ‘परमाणु सिद्धांत’ को स्वीकार किया था।
- इसके अनुसार, परमाणु हथियारों को केवल परमाणु हमलों के खिलाफ एक विश्वसनीय न्यूनतम प्रतिरोध के रूप में रखा जाएगा।
- भारत ‘नो फर्स्ट यूज’ (NFU) नीति का पालन करेगा और परमाणु हमले का उपयोग केवल भारत पर या भारतीय बलों पर कहीं भी परमाणु हमले के प्रतिशोध के रूप में करेगा।
- भारत, किसी भी गैर-परमाणु राज्य के खिलाफ परमाणु हथियार हमला नहीं करेगा।
- हालांकि, भारत पर या भारतीय सेना पर कहीं भी रासायनिक या जैविक हथियार से बड़े हमले की स्थिति में, भारत के पास परमाणु हथियारों से जवाबी कार्रवाई करने का विकल्प होगा।
- पहले परमाणु हमले का जवाबी दूसरा हमला बड़े पैमाने पर होगा और प्रतिद्वंद्वी को अस्वीकार्य क्षति पहुंचाएगा।
वर्तमान में भारत ‘2003 के परमाणु सिद्धांत’ का पालन करता है।
इंस्टा लिंक्स:
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC)
स्रोत: द हिंदू
विषय: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार।
G7 शिखर सम्मेलन की उपलब्धियां
संदर्भ:
अपनी 12,000 शब्दों की आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, G7 समूह ने अतिथि देशों के साथ चार अन्य विषयों – लोकतंत्र, यूक्रेन, वैश्विक खाद्य सुरक्षा और एक जलवायु क्लब के निर्माण पर – भी बयान जारी किए हैं।
- समग्र रूप से, इस शिखर सम्मेलन के परिणाम वजनदार और प्रभावशाली प्रतीत होते हैं।
- G7 समूह द्वारा वैश्विक दक्षिण (Global South) पर सुविचारित सहमति के बाद पांच मेहमान देशों – अर्जेंटीना, भारत, इंडोनेशिया, सेनेगल और दक्षिण अफ्रीका – के शीर्ष नेताओं को शिखर सम्मेलन में आमंत्रित किया गया था।
- G7 समूह के विरोधी और प्रतिस्पर्धी देश – रूस और चीन – इस सम्मलेन में मौजूद नहीं थे।
G7 नेताओं की आधिकारिक विज्ञप्ति: प्रमुख बिंदु
- यूक्रेन के खिलाफ रूस का आक्रामक युद्ध: बयान में यूक्रेन के खिलाफ रूस के अवैध और अनुचित युद्ध की निंदा की गई।
- समूह ने, यूक्रेन की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की साहसी प्रतिरक्षक अभियान में आवश्यक वित्तीय, मानवीय, सैन्य और राजनयिक सहयोग प्रदान करते हुए, यूक्रेन के साथ ‘जब तक जरूरी होगा’ खड़े रहने का संकल्प लिया।
- रूस पर कठोर और स्थायी मौद्रिक प्रतिबंध: G7 सदस्य इस युद्ध को समाप्त करने में मदद करने के लिए रूस पर कठोर और स्थायी प्रतिबंध लगाना जारी रखेंगे।
- इस संबंध में, आधिकारिक विज्ञप्ति में रूसी तेल पर मूल्य-सीमा निर्धारित करने की मांग करने वाली महत्वाकांक्षी और अब तक बिना अजमायी हुई अवधारणा का समर्थन किया गया।
- समूह के नेता रूसी सोने के आयात पर प्रतिबंध लगाए जाने पर भी सहमत हुए।
- विश्व भर में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना: भाग लेने वाले नेताओं ने दुनिया भर में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद करने हेतु इस वर्ष $4.5 बिलियन खर्च करने का वचन दिया।
- लोगों को भूख और कुपोषण से बचाने के लिए, और रूस द्वारा अपने अनाज के हथियारीकरण के प्रत्युत्तर में, G7 नेताओं ने ‘खाद्य सुरक्षा पर वैश्विक गठबंधन’ के माध्यम से वैश्विक खाद्य और पोषण सुरक्षा बढ़ाने का फैसला किया।
- चीन की ‘बाजार-विरूपण’ पद्धतियों के संदर्भ में: G7 नेताओं ने चीन की गैर-पारदर्शी और बाजार- विरूपण करने वाली अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पद्धतियों की निंदा की।
- G7 नेताओं ने संकेत दिया कि वे चीन पर आर्थिक निर्भरता से खुद को मुक्त करने का प्रयास करेंगे।
- वैश्विक बुनियादी ढांचे और निवेश के लिए साझेदारी: ग्लोबल इन्फ्रास्ट्रक्चर और निवेश के लिए अपनी साझेदारी के माध्यम से, G7 देशों का लक्ष्य वैश्विक निवेश अंतर को कम करने के लिए अगले पांच वर्षों में 600 बिलियन अमरीकी डालर जुटाना है।
- वैश्विक सहयोग: G7 के सदस्यों ने विश्व स्तर पर अपने सहयोग को बढ़ाने का फैसला किया, जिसमें इंडोनेशिया, भारत, सेनेगल और वियतनाम के साथ नई ‘जस्ट एनर्जी ट्रांजिशन पार्टनरशिप’ की दिशा में काम करना, दक्षिण अफ्रीका के साथ मौजूदा साझेदारी पर निर्माण करना शामिल है।
- कोविड–19: वर्तमान कोविड -19 महामारी पर काबू पाने के लिए, G7 समूह द्वारा 2021 में पिछली बैठक के बाद से 1.175 बिलियन से अधिक वैक्सीन खुराक के अपने प्रावधान पर कार्य करेगा।
- जी7 देशों ने भी भविष्य की महामारियों और स्वास्थ्य चुनौतियों को रोकने, तैयार करने और प्रतिक्रिया देने का फैसला किया, जिसमें महामारी की तैयारी के लिए जी7 पैक्ट भी शामिल है।
G7 शिखर सम्मेलन में भारत:
- हालांकि भारत G7 समूह का सदस्य नहीं है, फिर भी इसे शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए अतिथि के रूप में बुलाया गया था।
- जर्मनी में आयोजित जी -7 शिखर सम्मेलन में, प्रधान मंत्री मोदी ने दो सत्रों- बेहतर भविष्य में निवेश: जलवायु, ऊर्जा, स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा – में भाग लिया था।
‘अनुकूलित लोकतंत्र दस्तावेज़’ पर हस्ताक्षर:
- ‘अनुकूलित लोकतंत्र दस्तावेज़’ (Resilient Democracies document) बयान के माध्यम से, भागीदार देशों ने नागरिक समाज के अभिकर्ताओं की स्वतंत्रता और विविधता की रक्षा करने और ऑनलाइन तथा ऑफलाइन अभिव्यक्ति और विचारों की स्वतंत्रता की रक्षा करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
मुख्य बिंदु:
इंस्टा लिंक्स:
अभ्यास प्रश्न:
G7 क्या है? वर्तमान भू-राजनीति में इसके महत्व पर चर्चा कीजिए। (15अंक)
स्रोत: द इंडियन एक्सप्रेस
विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।
शी जिनपिंग की दुर्लभ हांगकांग यात्रा
संदर्भ:
चीनी राष्ट्रपति ने ‘विशेष प्रशासनिक क्षेत्र’ (Special Administrative Region – SAR) की दुर्लभ यात्रा पर कहा कि हांगकांग “अराजकता से सुव्यवस्था में संक्रमण के एक नए चरण में” है।
- 1 जुलाई, 2022 को इस पूर्व ब्रिटिश उपनिवेश के चीन को सौंपे जाने तथा मुख्य कार्यकारी जॉन ली और उनकी सरकार के शपथ ग्रहण की 25वीं वर्षगांठ के रूप में मनाया गया।
- 2020 में लगाए गए ‘राष्ट्रीय सुरक्षा कानून’ के तहत कड़े नियंत्रण ने हांगकांग वासियों को ताइवान, ब्रिटेन और अन्य देशों के लिए पलायन करने के लिए प्रेरित किया है।
पृष्ठभूमि: हांगकांग, एशिया के सबसे अमीर शहरों में से एक और संपन्न फिल्म, प्रकाशन और अन्य रचनात्मक उद्योगों के लिय विख्यात और एक वैश्विक व्यापार केंद्र है। 1 जुलाई, 1997 को एक समझौते के तहत इस पूर्व ब्रिटिश उपनिवेश को वापस चीन को सौप दिया गया। इस समझौते में हांगकांग को 50 वर्षों के लिए “उच्च स्तर की स्वायत्तता” दिए जाने का वादा किया गया था।
प्रमुख बिंदु:
- राष्ट्रीय सुरक्षा कानून 2020: बीजिंग ने प्रस्तावित प्रत्यर्पण कानून और अधिक लोकतंत्र की मांगों को शामिल करने के लिए भड़के विरोध प्रदर्शनों के बाद 2020 में ‘राष्ट्रीय सुरक्षा कानून’ लागू किया।
- लोकतंत्र-समर्थक आंदोलनों पर प्रतिबंध: इस क्षेत्र ने ‘तियानमेन स्क्वायर लोकतंत्र समर्थक आंदोलन’ (Tiananmen Square pro-democracy movement) पर सत्ताधारी पार्टी द्वारा वर्ष 1989 की हिंसक कार्रवाई की सालगिरह मनाने पर प्रतिबंध लगा दिया है।
- विशेष प्रशासनिक क्षेत्रों (SARs) की क्षमता का लाभ उठाना: चीन की रणनीति मुख्य भूमि के विकास को बढ़ाने के लिए दो ‘विशेष प्रशासनिक क्षेत्रों’ – हांगकांग और मकाऊ – की अंतर्निहित आर्थिक, व्यापार और तकनीकी क्षमता का लाभ उठाने की है।
- सहयोग का विस्तार: बीजिंग ने इन क्षेत्रों के बीच सहयोग का विस्तार करने के लिए एक उच्च गुणवत्ता वाला ‘गुआंगडोंग-हांगकांग-मकाऊ ग्रेटर बे एरिया’ (Guangdong-Hong Kong-Macau Greater Bay Area) बनाने की योजना बनाई है।
- बिल्डिंग प्लेटफॉर्म: इसमें शेनझेन में कियानहाई, झुहाई में हेंगकिन, ग्वांगझू में नांशा और शेनझेन-हांगकांग ‘साइंस एंड टेक्नोलॉजी इनोवेशन कोऑपरेशन जोन’ जैसे बिल्डिंग प्लेटफॉर्म भी शामिल हैं।
- राष्ट्रीय जागरूकता और देशभक्ति बढ़ाना: कम्युनिस्ट नेतृत्व हांगकांग के नागरिकों के बीच राष्ट्रीय जागरूकता और देशभक्ति बढ़ाने के लिए सीमा पार आदान-प्रदान और सहयोग को व्यवस्थित रूप से बढ़ाने का प्रयास करता है।
- राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा करना: चीनी नेतृत्व राष्ट्रीय सुरक्षा और अखंडता की रक्षा के लिए हांगकांग को नियंत्रित करने के लिए आर्थिक साधनों, कानूनी प्रणाली प्रवर्तन तंत्र और जबरदस्ती पुलिस उपायों सहित उपकरणों के संयोजन को प्रभावी ढंग से नियोजित करेगा।
- पार्लियामेंट केवल वफादारों के लिए: चीन ने ‘देशभक्त’ राजनीतिक सुधार पेश किए हैं जो यह सुनिश्चित करते हैं कि केवल वफादार ही संसद और शीर्ष कार्यकारी पदों के लिए चुनाव में भाग ले सकते हैं।
इंस्टा लिंक्स:
अभ्यास प्रश्न:
2020 में हांगकांग में एक राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कड़े नियंत्रण ने कुछ लोगों को दूसरे देशों में जाने के लिए प्रेरित किया है। समालोचनात्मक विश्लेषण करें। (15 अंक)
स्रोत: द हिंदू, द इंडियन एक्सप्रेस
सामान्य अध्ययन–III
विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।
वित्तीय सेवा संस्थान ब्यूरो
संदर्भ: सरकार ने कुछ संशोधन करके ‘बैंक बोर्ड ब्यूरो’ (Bank Board Bureau – BBB) को ‘वित्तीय सेवा संस्थान ब्यूरो’ (Financial Services Institutions Bureau – FSIB) में परिवर्तित कर दिया है।
वित्तीय सेवा संस्थान ब्यूरो:
उद्देश्य:
- यह पूर्णकालिक निदेशकों के साथ-साथ बैंकों और वित्तीय संस्थानों के गैर-कार्यकारी अध्यक्ष की नियुक्ति के लिए सिफारिशें करेगा।
- सार्वजनिक क्षेत्र की साधारण बीमा कंपनियों के महाप्रबंधकों और निदेशकों का चयन करने के लिए दिशानिर्देश जारी करेगा।
आवश्यक संशोधन:
केंद्रीय मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति (Appointments Committee of the Cabinet – ACC) ने वित्तीय सेवा विभाग को वित्त मंत्री के अनुमोदन से ‘राष्ट्रीयकृत बैंक (प्रबंधन और विविध प्रावधान) योजना’ 1970/1980 में आवश्यक संशोधन करने और फिर ‘वित्तीय सेवा संस्थान ब्यूरो’ (FSIB) को एकल इकाई के रूप में स्थापित करने का सरकारी प्रस्ताव अधिसूचित करने के लिए कहा है।
सुधार की आवश्यकता:
- दिल्ली उच्च न्यायालय का आदेश: दिल्ली उच्च न्यायालय ने पिछले साल देखा कि ‘बैंक बोर्ड ब्यूरो’ सार्वजनिक क्षेत्र के सामान्य बीमाकर्ताओं में नियुक्तियों की सिफारिश करने के लिए एक सक्षम निकाय नहीं है, और अदालत ने यह माना कि ‘बैंक बोर्ड ब्यूरो’ को PSU बीमाकर्ताओं के महाप्रबंधकों और निदेशकों का चयन करने में सक्षम बनाने वाले ‘परिपत्र’ कानूनी रूप से मान्य नहीं थे। ऐसे में इस निकाय में एक ‘ओवरहाल’ की जरूरत है।
- धीमी भर्ती प्रक्रिया: ‘बैंक बोर्ड ब्यूरो’ के अच्छे काम के बावजूद, उच्च स्तर पर भर्ती प्रक्रिया धीमी रही है। साथ ही, ‘बैंक बोर्ड ब्यूरो’ का विस्तारित दो साल का कार्यकाल समाप्त हो गया है, और नई भर्तियां तभी फिर से शुरू हो सकती हैं जब कोई नया निकाय गठित हो।
बैंक बोर्ड ब्यूरो (BBB) के बारे में:
फरवरी 2016 में स्थापित ‘बैंक बोर्ड ब्यूरो’ एक स्वायत्त निकाय है। इसकी स्थापना आरबीआई द्वारा नियुक्त नायक समिति की सिफारिशों के आधार पर की गयी थी।
- यह ‘इन्द्रधनुष योजना’ का एक भाग था।
- इसका कार्य सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) तथा सरकारी स्वामित्व वाले वित्तीय संस्थानों के पूर्णकालिक निदेशकों तथा गैर-कार्यकारी अध्यक्षों की नियुक्ति के लिए सिफारिश करना है।
- प्रधान मंत्री कार्यालय के परामर्श से, वित्त मंत्रालय द्वारा इन नियुक्तियों पर अंतिम निर्णय लिया जाता है।
सरचना:
- ‘बैंक बोर्ड ब्यूरो’ में एक अध्यक्ष तथा तीन पदेन सदस्य, अर्थात सार्वजनिक उद्यम विभाग के सचिव, वित्तीय सेवा विभाग के सचिव और भारतीय रिज़र्व बैंक के उप-गवर्नर होते हैं।
- इनके अतिरिक्त, बोर्ड में पाँच विशेषज्ञ सदस्य भी होते हैं, जिनमें से दो निजी क्षेत्र से चुने जाते हैं।
स्रोत: द हिंदू
विषय: उदारीकरण का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव, औद्योगिक नीति में परिवर्तन तथा औद्योगिक विकास पर इनका प्रभाव।
डंपिंग
संदर्भ:
हाल के दिनों में, भारत के ऑप्टिकल फाइबर उद्योग द्वारा चीन, इंडोनेशिया और दक्षिण कोरिया से सस्ते आयात से अनुचित प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ा है। ये देश अपने उत्पादों को भारत में बाजार मूल्य से कम दरों पर डंप (Dumping ) कर रहे हैं।
‘डंपिंग’ क्या होती है?
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पद्धति में, जब कोई देश अथवा फर्म अपने घरेलू बाजार में किसी उत्पाद की कीमत से कम कीमत पर उस उत्पाद का निर्यात करती है, तो इसे ‘डंपिंग’ कहा जाता है।
- डंपिंग (Dumping ), किसी उत्पाद को आयात करने वाले देश में भी उस उत्पाद की कीमत को प्रभावित करती है, जिससे स्थानीय विनिर्माण फर्मों के लाभ पर चोट पहुँचती है।
- डंपिंग अंतरराष्ट्रीय मूल्य भेदभाव की स्थिति है इस अनुचित व्यापार व्यवहार का अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
डंपिंग की विधिक स्थिति:
- विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों के तहत, डंपिंग केवल तभी अवैध है जब बाह्य देशनिर्यात करने वाली फर्म ने अपने घरेलू उत्पादकों को नुकसान पहुचाने के नकारात्मक प्रभाव को विश्वसनीय रूप से दिखा सकता है।
- घरेलू उत्पादकों को डंपिंग से बचाने के लिए, देश ‘टैरिफ’ और ‘कोटा’ का उपयोग करते हैं।
‘एंटी-डंपिंग’ क्या है?
एंटी-डंपिंग (Anti-dumping), घरेलू सरकार द्वारा विदेशी आयातों पर लगाया जाने वाला एक संरक्षणवादी शुल्क (टैरिफ) होता है, जो आमतौर पर किसी उत्पाद के लिए अपने घरेलू बाजार में वसूली जाने वाली कीमत से विदेशी उत्पाद की ‘कम कीमत’ पर लगाया जाता है।
सरल शब्दों में, उत्पादों की डंपिंग और इसके द्वारा व्यापार पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव से उत्पन्न स्थिति को सुधारने के लिए ‘एंटी-डंपिंग शुल्क’ लगाया जाता है।
- विश्व व्यापार संगठन (WTO) व्यवस्था सहित वैश्विक व्यापार मानदंडों के अनुसार, किसी देश के लिए घरेलू निर्माताओं को बराबर का अवसर प्रदान करने के लिए ऐसे डंप किए जाने वाले उत्पादों पर ‘शुल्क’ लगाने की अनुमति है।
- दीर्घावधि दृष्टिकोण से, डंपिंग रोधी शुल्क, समान वस्तुओं का उत्पादन करने वाली घरेलू कंपनियों की अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा को कम कर सकते हैं।
‘एंटी-डंपिंग शुल्क’ तथा ‘प्रतिकारी शुल्क’ में भिन्नता:
- एंटी-डंपिंग ड्यूटी, ‘प्रतिकारी शुल्क’ (Countervailing Duties- CVDs) से भिन्न होती है। घरेलू उत्पादकों की सुरक्षा हेतु आयात सब्सिडी के नकारात्मक प्रभाव को संतुलित करने के लिए ‘प्रतिकारी शुल्क’ (CVDs) लगाया जाता है।
- ‘प्रतिकारी शुल्क’ (CVD) आयातित सामानों पर लगाए जाने वाला शुल्क होता हैं। यह शुल्क निर्यातक देश में इन सामानों के उत्पादकों को दी जाने वाली सब्सिडी को संतुलित करने के लिए लगाया जाता है।
- ‘प्रतिकारी शुल्क’ का उद्देश्य किसी उत्पाद के घरेलू उत्पादकों और उसी उत्पाद के विदेशी उत्पादकों के बीच बराबर का अवसर प्रदान करना होता है। विदेशी उत्पादक, आयातक देश की सरकार से मिलने वाली सब्सिडी के कारण समान उत्पादों कम कीमत पर बेच सकते हैं।
‘एंटी-डंपिंग शुल्क’ के लिए सूर्यास्त उपबंध:
(Sunset clause for Anti-Dumping Duty)
जब तक पहले रद्द नहीं किया जाता, डंपिंग रोधी शुल्क की वैधता लागू होने की तारीख से पांच साल के लिए होती है। इसे सूर्यास्त (sunset) या ‘समाप्ति समीक्षा जांच’ (expiry review investigation) के माध्यम से पांच साल की और अवधि के लिए बढ़ाया जा सकता है।
भारत में कौन सा प्राधिकरण डंपिंग रोधी जैसे व्यापार उपचारात्मक उपायों का प्रशासन करता है?
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अधीन ‘व्यापार उपचार महानिदेशालय’, सर्वोच्च राष्ट्रीय प्राधिकरण है जो सभी व्यापार उपचारात्मक उपायों का प्रशासन करता है।
- व्यापार उपचारात्मक उपायों में डंपिंग रोधी, प्रतिकारी शुल्क और सुरक्षा उपाय शामिल हैं।
- इसका कार्य घरेलू उद्योग को व्यापार रक्षा सहायता प्रदान करना है।
- यह निर्यातकों को अन्य देशों द्वारा उनके खिलाफ स्थापित व्यापार उपचार जांच के बढ़ते मामलों से निपटने के लिए सुरक्षा उपाय प्रदान करता है।
इंस्टा लिंक:
चीनी सामानों पर एंटी-डंपिंग शुल्क
स्रोत: द इंडियन एक्सप्रेस
विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।
वन (संरक्षण) नियम, 2022 अधिसूचित
संदर्भ:
हाल ही में, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा ‘वन (संरक्षण) अधिनियम’, 1980 के तहत ‘वन (संरक्षण) नियम’ 2022 (Forest (conservation) Rules 2022) को अधिसूचित किया गया है।
नए नियमों के अनुसार:
- निगरानी के संदर्भ में: राज्य/संघ राज्य क्षेत्र में एक सलाहकार समिति, एक क्षेत्रीय अधिकार प्राप्त समिति और एक स्क्रीनिंग समिति का गठन किया जाए।
- एकीकृत क्षेत्रीय कार्यालय: यह सभी रैखिक परियोजनाओं (जैसे सड़क, राजमार्ग, आदि), जिसमें 40 हेक्टेयर तक की भूमि और 7 चंदवा घनत्व तक वन भूमि का उपयोग शामिल है, की जांच करेगा।
- समय सीमा: प्रत्येक परियोजना की त्वरित समीक्षा के लिए एक निश्चित समय।
- राज्यों को जिम्मेदारी: राज्यों को वनवासियों के वन अधिकारों के निपटारे (वन अधिकार अधिनियम, 2006) और वन भूमि के ‘डायवर्जन’ की अनुमति देने की जिम्मेदारी दी गई है।
- अन्य राज्यों में प्रतिपूरक वनरोपण (Compensatory Afforestation) की अनुमति: यदि राज्य में पहले से ही हरित क्षेत्र के तहत दो-तिहाई से अधिक क्षेत्र या वनाच्छादन के तहत एक तिहाई से अधिक क्षेत्र है, तो अन्य राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों- जहां वनाच्छादन 20% से कम है- में ‘प्रतिपूरक वनरोपण’ किया जा सकता है।
इससे पहले, सरकार ने प्रस्तावों को मंजूरी देने और परियोजनाओं के लिए पर्यावरण मंजूरी प्रदान करने की गति के आधार पर ‘राज्य पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन प्राधिकरण’ (State Environment Impact Assessment Authorities (SEIAA) को रैंक करना शुरू कर दिया है।
‘पर्यावरण एवं वन मंत्रालय’ द्वारा ‘पर्यावरण संरक्षण अधिनियम’ 1986 में संशोधन का प्रस्ताव:
गैर-अपराधीकरण प्रावधान (Decriminalize provisions): मंत्रालय ने “कम गंभीर’ उल्लंघनों के लिए दंड के रूप में कारावास को हटाने और इसे मौद्रिक दंड के साथ बदलने का प्रस्ताव किया है।
- हालांकि, ‘पर्यावरण संरक्षण अधिनियम’ (EPA) के गंभीर उल्लंघन- जिसके कारण गंभीर चोट या जीवन की हानि होती है- को भारतीय दंड संहिता के प्रावधान के तहत कवर किया जाएगा।
- EPA प्रावधान, ‘एकल उपयोग प्लास्टिक’ प्रतिबंध के दंडात्मक प्रावधानों के लिए लागू होंगे जो आज से लागू हो गए हैं।
- वर्तमान प्रावधान: EPA के मौजूदा प्रावधानों के तहत, उल्लंघनकर्ता को पांच साल तक की कैद या 1,00,000 रुपये तक के जुर्माने या दोनों से दंडित किया जा सकता है।
- “पर्यावरण संरक्षण कोष” का निर्माण: जुर्माने की राशि का भुगतान करने हेतु।
‘पर्यावरण संरक्षण अधिनियम’ (EPA) के बारे में: संविधान के अनुच्छेद 253 के तहत अधिनियमित, ‘पर्यावरण संरक्षण अधिनियम’ 1986 में लागू हुआ था। यह अधिनियम “पर्यावरण सुरक्षा की दीर्घकालिक आवश्यकताओं के अध्ययन, योजना और कार्यान्वयन के लिए ढांचा स्थापित करता है और पर्यावरण के लिए खतरा पैदा करने वाली स्थितियों हेतु त्वरित और उपयुक्त प्रतिक्रिया की प्रणाली तैयार करता है।“
भारत में पर्यावरण कानूनों के लिए जिम्मेदार तीन मुख्य संस्थाएं:
- पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
- राष्ट्रीय स्तर पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
- राज्य स्तर पर राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
भारत में मुख्य पर्यावरण कानून:
- पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम 1986
- जल (प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण) अधिनियम 1974
- वायु (प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण) अधिनियम 1981
- उपरोक्त अधिनियमों के तहत बनाए गए नियम
इंस्टा लिंक
भारतीय संदर्भ में ‘पर्यावरण प्रभाव आकलन’ (Environment Impact Assessment – EIA) प्रक्रिया के महत्व की व्याख्या करें। साथ ही इससे जुड़ी चिंताओं पर प्रकाश डालें। (15 अंक)
स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस
मुख्य परीक्षा संवर्धन हेतु पाठ्य सामग्री (नैतिकता/निबंध)
तमिलनाडु के वन पुरुष
पर्यावरणविद् डी सरवनन के प्रयासों ने 40 हेक्टेयर से अधिक बंजर भूमि को एक हरे-भरे, स्वदेशी वन में बदल दिया है जिसे ‘अरण्य वन’ कहा जाता है।
- कभी मात्र कुछ पेड़ों वाली बंजर भूमि से लेकर आज यह जंगल 700 से अधिक देशी पौधों की प्रजातियों का घर है।
- पिछले तीन दशकों में जंगल के विकास का इस क्षेत्र पर भारी पारिस्थितिक प्रभाव पड़ा है, वर्षा की दर में वृद्धि हुई है और वायु प्रदूषण में कमी आई है।
डी सरवनन की कार्य पद्धति:
- जिस भूमि पर अब अरण्य स्थित है, वह मिट्टी और कुड्डालोर बलुआ पत्थर की संरचनाओं की एक अनूठी स्थलाकृति थी, जिस पर कोई ऊपरी मृदा-सतह नहीं थी। पहला कदम इस भूमि तक पानी लाना और अपवाह को रोकना था। इसके लिए सरवनन ने पानी को रोकने और भूजल पुनर्भरण को बनाए रखने के लिए समोच्च बांध (Contour Bunds) बनाए। उन्होंने मिट्टी को स्थिर करने और नमी की मात्रा को बहाल करने के लिए घास भी लगाई।
- इसके बाद, आक्रामक प्रजातियों के प्रसार को रोकने और स्वदेशी किस्मों को संरक्षित करने के लिए, सरवनन ने चेन्नई से कन्याकुमारी तक तमिलनाडु के पूर्वी तट की यात्रा की। उन्होंने भूमि के लिए उपयुक्त स्वदेशी बीज एकत्र करने के लिए ‘पवित्र उपवनों’ (Sacred Groves) का दौरा किया।
- उन्होंने पेड़ लगाना और स्थानीय समुदाय और छात्रों को स्वदेशी जंगलों के महत्व पर शिक्षित करना जारी रखा है। वह वानिकी और वन्यजीव प्रबंधन पर स्थानीय और क्षेत्रीय अधिकारियों के साथ भी काम करते हैं।
प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य
आषाढ़ी बीज
गुजरात का कच्छी समुदाय इस दिन अपना नया साल मनाता है।
- आषाढ़ी बीज (Ashadhi Bij) हिन्दू पंचांग के आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को पड़ता है।
- यह त्यौहार गुजरात के कच्छ क्षेत्र में बारिश की शुरुआत के साथ जुड़ा हुआ है।
- आषाढ़ी बिज के दौरान, आने वाले मानसून में कौन सी फसल सबसे अच्छा करेगी, इसका अनुमान लगाने के लिए वातावरण में नमी की जाँच की जाती है।
हड़प्पा नृजाति के आनुवंशिक लिंक का पता लगाने हेतु अध्ययन
संदर्भ: CSIR-CCMB में डीएनए का विश्लेषण करने के लिए के शीर्ष पुरातत्वविद् हड़प्पा सभ्यता के एक प्रमुख स्थल – राखीगढ़ी पर कार्य कार्य कर रहे हैं।
- प्राचीन डीएनए के नमूने और आधुनिक समय के नमूने संग्रह, जनसंख्या संरचना को समझने के लिए तुलनात्मक विश्लेषण में मदद करेंगे।
- राखीगढ़ी हड़प्पा स्थल 550 हेक्टेयर में फैला हुआ है, जिसमें से केवल 50 हेक्टेयर शेष क्षेत्र के साथ या तो आधुनिक संरचनाओं या कृषि क्षेत्रों के साथ संरक्षित है। यह मोहनजो-दारो से भी बहुत बड़ा स्थल है जिसका आकार लगभग 300 हेक्टेयर है।
अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता दिवस
जुलाई के पहले शनिवार को सहकारिता दिवस (Cooperatives Day) के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष दुनिया भर की सहकारिताएं ‘सहकारिता का 100वां अंतर्राष्ट्रीय दिवस’ (#CoopsDay) मनाएंगी।
‘संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष’ के एक दशक बाद- जिसने दुनिया को एक बेहतर जगह बनाने के लिए सहकारी समितियों के अद्वितीय योगदान को प्रदर्शित किया- इस वर्ष का #CoopsDay नारा “सहकारिता एक बेहतर दुनिया बनाएँ” अंतर्राष्ट्रीय वर्ष की थीम को प्रतिध्वनित करता है।
इडियट सिंड्रोम:
‘इंटरनेट व्युत्पन्न सूचना अवरोधक उपचार’ (Internet Derived Information Obstructing Treatment – IDIOT) सिंड्रोम को चिकित्सकीय रूप से साइबरकॉन्ड्रिया कहा जाता है। इससे ग्रस्त लोग ऑनलाइन उपलब्ध चिकित्सा जानकारी पर आंख मूंदकर भरोसा करते हैं और अपना इलाज अचानक बंद कर देते हैं, जिससे डॉक्टरों के लिए किसी भी बीमारी का इलाज मुश्किल हो जाता है।
टेक्नोलॉजी में इनोवेशन के चलते लोगों और मरीजों की डॉक्टरों पर उम्मीदें बढ़ती जा रही हैं।
भारत की सबसे बड़ी तैरती 100 मेगावाट की सौर ऊर्जा परियोजना
भारत की सबसे बड़ी तैरती 100 मेगावाट की सौर ऊर्जा परियोजना अब तेलंगाना में पूरी तरह से चालू है। यह उन्नत तकनीक और पर्यावरण के अनुकूल सुविधाओं के साथ संचालित है। परियोजना अपने जलाशय के 500 एकड़ में फैली हुई है, तैरते सौर पैनलों की उपस्थिति के साथ, जल निकायों से वाष्पीकरण दर कम हो जाती है, इस प्रकार जल संरक्षण में मदद मिलती है।
मामलों की क्लबिंग
(Clubbing of Cases)
एक ही अपराध के लिए एक व्यक्ति पर एक से अधिक बार अभियोग नहीं चलाया जा सकता है।
- संविधान का अनुच्छेद 20(2) दोहरे संकट के खिलाफ अधिकार की गारंटी देता है।
- एक ही घटना पर एकाधिक प्राथमिकी का अर्थ वस्तुतः एकाधिक परीक्षण होगा। ऐसी स्थितियों में सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना अत्यधिक मुकदमेबाजी के खिलाफ एक प्रक्रियात्मक सुरक्षा है।
अन्य निर्णय:
- टीटी एंथोनी बनाम केरल राज्य, 2001 के एक फैसले में, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक ही मुद्दे पर “दूसरी प्राथमिकी” नहीं हो सकती है।
- 2020 में, सुप्रीम कोर्ट ने अर्नब गोस्वामी बनाम भारत संघ के मामले में इस फैसले का विस्तार किया और कहा कि विभिन्न न्यायालयों में इसी तरह की FIRs भी मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती हैं।
हाइव-किलिंग माइट (कुटकी): वर्रोया
संदर्भ: दुनिया भर में छत्तों को तबाह करने वाली ‘कुटकी’ (Mite) की खोज के बाद, ऑस्ट्रेलिया मधुमक्खियों की रक्षा के लिए प्रयास कर रहा है।
- वर्रोया (Varroa) के बारे में: वर्रोया डिस्ट्रक्टर (Varroa destructor) एक बाहरी परजीवी कुटकी है, जो मधुमक्खी ‘एपिस सेराना’ और ‘एपिस मेलिफेरा’ पर हमला करता है और इनको खा जाता है। कुटकी या घुन से होने वाले रोग को ‘वेरोसिस’ कहते हैं। वर्रोया घुन, केवल मधुमक्खी कॉलोनी में ही प्रजनन कर सकता है। यह मधुमक्खी के शरीर से जुड़ जाता है और वसायुक्त शरीर को चूसकर मधुमक्खी को कमजोर कर देता है।
- वर्रोया माइट का भारी संक्रमण यूरोपीय मधुमक्खियों के बीच कई प्रकार की विकृतियों का कारण बनता है जो आबादी को कमजोर और कम करते हैं, जिससे कॉलोनी की मृत्यु हो जाती है। यह परजीवी छोटी, डंक रहित देशी मधुमक्खियों को प्रभावित नहीं करता है।
मधुमक्खियां सबसे महत्वपूर्ण परागणकों में से कुछ हैं, जो खाद्य और खाद्य सुरक्षा, स्थाई कृषि और जैव विविधता सुनिश्चित करती हैं।
विंडफॉल टैक्स
हाल ही में, सरकार ने घरेलू कच्चे तेल उत्पादकों पर अप्रत्याशित कर (windfall tax) लगाया है, पेट्रोल, डीजल और विमानन टर्बाइन ईंधन (एटीएफ) पर निर्यात शुल्क लगाया, और रुपये पर दबाव कम करने, ‘चालू खाते के घाटे’ पर लगाम लगाने और पेट्रोलियम उत्पादों की घरेलू आपूर्ति में वृद्धि करने के प्रयासों में सोने पर आयात शुल्क में वृद्धि की।
‘विंडफॉल टैक्स’ क्या है?
विंडफॉल टैक्स (windfall tax), किसी विशेष कंपनी या उद्योग पर लगाए गए अचानक बड़े मुनाफे पर एक उच्च कर दर है।
- घरेलू उत्पादक घरेलू रिफाइनरियों को अंतरराष्ट्रीय समता कीमतों पर कच्चा तेल बेचते हैं, जिससे अप्रत्याशित लाभ होता है।
- उदाहरण: ओएनजीसी ने मार्च तिमाही में बंपर मुनाफा दर्ज किया (जब अंतरराष्ट्रीय कीमतें 14 साल के उच्च स्तर 139 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गईं)।
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के लिए योजनाएं
संदर्भ: प्रधानमंत्री ने ‘उद्यमी भारत’ कार्यक्रम में भाग लिया और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) के लिए कई प्रमुख पहलों का शुभारंभ किया।
- MSME प्रदर्शन में सुधार तथा तेजी (RAMP) योजना: यह क्षमता निर्माण और MSME योजनाओं के कवरेज को बढ़ाने में मदद करेगी।
- ‘पहली बार के एमएसएमई निर्यातकों का क्षमता निर्माण‘ (सीबीएफटीई) योजना: MSME क्षेत्र से निर्यात में वृद्धि।
- प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP:): PMEGP के तहत गैर-कृषि क्षेत्र में सूक्ष्म उद्यम स्थापित करने में सहायता करके बेरोजगार युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान किए जाते हैं।
- अब, आवेदक आकांक्षी जिलों से आवेदन कर सकते हैं इसके लिए ट्रांसजेंडर भी आवेदन कर सकते हैं। साथ ही अधिकतम परियोजना लागत 25 लाख से बढ़ाकर 50 लाख (विनिर्माण के लिए) और 10 लाख से 20 लाख (सेवा क्षेत्र के लिए) कर दी गई है।
- MSME क्षेत्र: यह भारत के सकल घरेलू उत्पाद का 30%, लगभग 50% निर्यात में योगदान देता है और 10 करोड़ से अधिक रोजगार पैदा करता है।
- MSME के लिए अन्य योजनाएं: मुद्रा योजना, आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (ECLGS), पारंपरिक उद्योगों के उत्थान के लिए निधि की योजना (SFURTI) आदि।
DRDO का मानवरहित विमान
संदर्भ: DRDO ने कर्नाटक के चित्रदुर्ग में एरोनॉटिकल टेस्ट रेंज से ऑटोनॉमस फ्लाइंग विंग टेक्नोलॉजी डिमॉन्स्ट्रेटर की पहली उड़ान को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।
महत्व: यह उड़ान भविष्य के मानव रहित विमानों के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों को साबित करने के मामले में एक प्रमुख मील का पत्थर है और ऐसी सामरिक रक्षा प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
विशेषताएँ:
मानवरहित विमान (UAV) को वैमानिकी विकास प्रतिष्ठान (Aeronautical Development Establishment), बेंगलुरु (डीआरडीओ की एक प्रयोगशाला) द्वारा डिजाइन और विकसित किया गया है।
- यह एक छोटे टर्बोफैन इंजन द्वारा संचालित है।
- वाहन का एयरफ्रेम, अंडर कैरिज और संपूर्ण उड़ान नियंत्रण, साथ ही विमान के लिए उपयोग किए जाने वाले एवियोनिक्स सिस्टम को स्वदेशी रूप से विकसित किया गया है।
वर्तमान में उपयोग किए जा रहे यूएवी: घातक (भारत), रीपर (यूएसए), प्रीडेटर (यूएसए)।























