विषयसूची
सामान्य अध्ययन-I
- मणिपुर में भारी भूस्खलन के कारण जिरीबाम-इंफाल नई लाइन परियोजना को नुकसान
सामान्य अध्ययन-II
- भारत के उपराष्ट्रपति का चुनाव, 2022 (16वां उप-राष्ट्रपति चुनाव)
- निजी क्षेत्र में कुष्ठ रोग की दवाओं की कमी पर चिंता
- नीति आयोग और विश्व खाद्य कार्यक्रम की ‘घर ले जाएं राशन’ रिपोर्ट
सामान्य अध्ययन-III
- आरबीआई की वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट
- इसरो का ‘पीओईएम’ प्लेटफॉर्म
- नीति आयोग की रिपोर्ट ”हरित हाइड्रोजन का दोहन – भारत में डीप डीकार्बोनाइजेशन के अवसर”
मुख्य परीक्षा संवर्धन हेतु पाठ्य सामग्री (नैतिकता/निबंध)
- सिग्नल स्कूल
प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य
- औरंगाबाद
- उस्मानाबाद
- वाई की लड़ाई
- सीडीआरआई: एक ‘अंतर्राष्ट्रीय संगठन’ के रूप में
- वर्ल्ड ड्रग रिपोर्ट 2022
सामान्य अध्ययन–I
विषय: भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखीय हलचल, चक्रवात आदि जैसी महत्त्वपूर्ण भू-भौतिकीय घटनाएँ, भौगोलिक विशेषताएँ और उनके स्थान- अति महत्त्वपूर्ण भौगोलिक विशेषताओं (जल-स्रोत और हिमावरण सहित) और वनस्पति एवं प्राणिजगत में परिवर्तन और इस प्रकार के परिवर्तनों के प्रभाव।
मणिपुर में भारी भूस्खलन के कारण जिरीबाम-इंफाल नई लाइन परियोजना को नुकसान
संदर्भ:
लगातार बारिश के कारण मणिपुर में बड़े पैमाने पर भूस्खलन हुआ जिससे ‘जिरिबम-इम्फाल नई लाइन’ (Jiribam-Imphal New Line) परियोजना के ‘तुपुल स्टेशन’ की इमारत को नुकसान पहुंचा है और सात लोगों की मौत तथा 45 लोग लापता हो चुके हैं।
- विशाल मलबे ने ‘इजेई नदी’ (Ijei River) को अवरुद्ध कर दिया है, जिससे एक जलाशय निर्मित हो गया है जो निचले इलाकों में जलमग्न कर सकता है।
‘भूस्खलन’ के बारे में:
- भूस्खलन (Landslides) को, गुरुत्वाकर्षण के प्रत्यक्ष प्रभाव में किसी ढलान के नीचे की ओर चट्टानों और मलबे के ढेर या जमीन की गति के रूप में परिभाषित किया जाता है।
- गिरना, लुढ़कना, फिसलना, प्रसार और प्रवाह, ढलवां गति के विभिन्न तरीके हैं।
स्रोत: द हिंदू
सामान्य अध्ययन–II
विषय: विभिन्न संवैधानिक पदों पर नियुक्ति और विभिन्न संवैधानिक निकायों की शक्तियाँ, कार्य और उत्तरदायित्व।
भारत के उपराष्ट्रपति पद हेतु चुनाव, 2022 (16वां उप-राष्ट्रपति चुनाव)
संदर्भ:
उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु के कार्यालय का कार्यकाल 10 अगस्त, 2022 को समाप्त हो रहा है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 68 के अनुसार, पद की अवधि की समाप्ति के कारण हुई रिक्ति को भरने के लिए चुनाव, निवर्तमान उपराष्ट्रपति का कार्यकाल समाप्त होने से पहले पूरा किया जाना आवश्यक है।
संबंधित प्रावधान:
- ‘राष्ट्रपति एवं उप-राष्ट्रपति चुनाव अधिनियम’, 1952 और ‘राष्ट्रपति एवं उप-राष्ट्रपति चुनाव नियम’, 1974 के साथ संविधान के अनुच्छेद 324 ने उपराष्ट्रपति के कार्यालय के चुनाव के संचालन का अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण भारत निर्वाचन आयोग में निहित किया है।
- राष्ट्रपति और उप-राष्ट्रपति चुनाव अधिनियम, 1952 की धारा 4 (3) में प्रावधान है कि चुनाव के लिए अधिसूचना निवर्तमान उपराष्ट्रपति के कार्यकाल की समाप्ति के साठ दिन पूर्व या उसके बाद जारी की जाएगी।
- भारतीय संविधान के अनुच्छेद 66 के अनुसार, उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों के सदस्यों से मिलकर बने निर्वाचक मंडल के सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के अनुसार एकल संक्रमणीय मत के माध्यम से किया जाता है।
16 वें उप-राष्ट्रपति चुनाव, 2022 के लिएनिर्वाचक मंडल में निम्न शामिल हैं:
- राज्यसभा के 233 निर्वाचित सदस्य,
- राज्यसभा के 12 मनोनीत सदस्य, और
- लोकसभा के 543 निर्वाचित सदस्य।
अन्य संबंधित प्रमुख तथ्य:
- चूंकि निर्वाचक मंडल के सभी सदस्य संसद के दोनों सदनों के सदस्य होते हैं, इसलिए प्रत्येक संसद सदस्य के मत का मूल्य समान अर्थात 1 (एक) होता है।
- निर्वाचन आयोग, केंद्र सरकार के परामर्श से, लोकसभा और राज्य सभा के महासचिव को बारी-बारी से निर्वाचन अधिकारी (रिटर्निंग ऑफिसर) के रूप में नियुक्त करता है।
- तदनुसार, महासचिव, लोकसभा को भारत के उपराष्ट्रपति के कार्यालय के वर्तमान चुनाव के लिए निर्वाचन अधिकारी के रूप में नियुक्त किया जाएगा।
- निर्वाचन आयोग ने निर्वाचन अधिकारी की सहायता के लिए संसद भवन (लोकसभा) में सहायक निर्वाचन अधिकारी नियुक्त करने का भी निर्णय लिया है।
- राष्ट्रपति और उप-राष्ट्रपति चुनाव नियम, 1974 के नियम 8 के अनुसार, चुनाव के लिए मतदान संसद भवन में किया जाएगा।
- उपराष्ट्रपति चुनाव में मतदान के मामले में राजनीतिक दल अपने-अपने सांसदों को कोई व्हिप जारी नहीं कर सकते हैं।
निर्वाचन-विधि:
- संविधान के अनुच्छेद 66(1) में प्रावधान है कि चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के अनुसार एकल संक्रमणीय मत के माध्यम से होगा और ऐसे चुनाव में मतदान गुप्त मतदान द्वारा होगा।
- इस प्रणाली में, निर्वाचक को उम्मीदवारों के नामों के सामने वरीयताएँ अंकित करनी होती हैं।
- मतदाता उम्मीदवारों की संख्या के आधार पर उतनी ही वरीयताओं को चिह्नित कर सकता है। मतपत्र के वैध होने के लिए पहली वरीयता का अंकन अनिवार्य है, अन्य वरीयताएँ वैकल्पिक हैं।
- वोट पर निशान लगाने के लिए आयोग विशेष कलम की आपूर्ति करेगा। मतदाताओं को केवल इस विशेष कलम से ही, न कि किसी अन्य कलम से मतपत्र को अंकित करना होता है। किसी अन्य कलम का उपयोग करके मतदान करने पर मतगणना के समय मत अमान्य माना जाएगा।
इंस्टा लिंक्स:
अभ्यास प्रश्न:
उपराष्ट्रपति के पद का चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के अनुसार एकल संक्रमणीय मत के माध्यम से होता है। चर्चा कीजिए।
स्रोत: पीआईबी
विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।
निजी क्षेत्र में कुष्ठ रोग की दवाओं की कमी पर चिंता
संदर्भ:
कुष्ठ रोग के इलाज हेतु एक प्रमुख दवा ‘क्लोफ़ाज़िमाइन’ (Clofazimine) भारतीय बाज़ार में अब “उपलब्ध नहीं है। विदित हो कि, इस दवा की भारतीय बाज़ार में कई महीनों से कमी चल रही थी।
यद्यपि, यह दवा सरकारी क्षेत्र (सरकारी अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों) में उपलब्ध है। किंतु निजी क्षेत्र में इसकी कमी देखी जा रही है।
क्लोफ़ाज़िमाइन:
- क्लोफ़ाज़िमाइन (Clofazimine), मल्टीबैसिलरी लेप्रोसी (Multibacillary Leprosy – MBMDT)) मामलों के मल्टीड्रग ट्रीटमेंट में रिफैम्पिसिन (Rifampicin) और डैप्सोन (Dapsone) के साथ तीन आवश्यक दवाओं में से एक है।
- यह दवा न केवल कुष्ठ रोग के उपचार/उपचार के लिए, बल्कि इस रोग की तीव्र तीव्रता को नियंत्रित करने के लिए भी आवश्यक है।
- क्लोफ़ाज़िमाइन ने ‘मल्टीड्रग रेजिस्टेंस ट्यूबरकुलोसिस’ के खिलाफ गतिविधि दिखाई है और WHO द्वारा ‘दवा प्रतिरोध’ के इलाज के लिए इसके उपयोग की सिफारिश की गई है।
- ‘राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम’ (National Leprosy Eradication Programme – NLEP) के तहत, सरकार इन तीनों दवाओं से युक्त सभी ‘मल्टीबैसिलरी कुष्ठ मामलों’ में 12 महीने के लिए ‘मासिक ब्लिस्टर पैक’ की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित कर रही है।
कुष्ठ रोग:परिचय
- कुष्ठ रोग (Leprosy) को ‘हैनसेन रोग’ (Hansen’s Disease) के नाम से भी जाना जाता है।
- कुष्ठ रोग एक पुराना, तेजी से फैलने वाला जीवाणु संक्रमण है जो एक एसिड-फास्ट रॉड के आकार के रोग-कीट (Bacillus), ‘माइकोबैक्टीरियम लेप्राई’ (Mycobacterium Leprae) नामक जीवाणु के कारण होता है।
- ‘कुष्ठ रोग’ इतिहास में सबसे पुरानी बीमारियों में से एक है, जो अनादि काल से मानवता को पीड़ित करती रही है। कुष्ठ रोग का एक लिखित विवरण 600 ई.पू. तक मिलता है।
- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, भारत के कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कुष्ठ रोग स्थानिक है, जिसमें प्रति 10,000 जनसंख्या पर 4.56 की वार्षिक दर से इस बीमारी के मामले का पता लगता है।
- देश में कुष्ठ रोग की व्यापकता दर 0.4 प्रति 10,000 जनसंख्या है।
- संक्रमण क्षेत्र: त्वचा, परिधीय तंत्रिकाएं, ऊपरी श्वसन मार्ग और नाक की परत।
- संचरण का तरीका: मुख्य रूप से प्रभावित व्यक्तियों की सांस के साथ छोड़ी गए बूंदों से। किसी भी उम्र में व्यक्ति इस बीमारी से संक्रमित हो सकता है।
- लक्षण: त्वचा पर लाल धब्बे, त्वचा पर घाव, हाथ और पैरों में सुन्नता, पैरों के तलवों पर छाले, मांसपेशियों में कमजोरी और अत्यधिक वजन कम होना।
- कुष्ठ रोग पैदा करने वाले बैक्टीरिया के संपर्क में आने के बाद लक्षण दिखने में आमतौर पर लगभग 3-5 साल लगते हैं।
- लंबा रोगोद्भवन काल (Incubation Period) डॉक्टरों के लिए यह निर्धारित करना मुश्किल बना देता है कि व्यक्ति कब और कहां संक्रमित हुआ।
- यदि समय पर इलाज नहीं किया जाता है, तो कुष्ठ रोग महत्वपूर्ण अक्षमता, विकृति, हाथों और पैरों में स्थायी तंत्रिका क्षति और यहां तक कि शरीर में संवेदना की हानि का कारण बन सकता है।
- इलाज: कुष्ठ रोग ‘मल्टी ड्रग थेरेपी’ (एमडीटी) नामक दवाओं के संयोजन से इलाज योग्य है।
स्रोत: द हिंदू
विषय: केन्द्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन; इन अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय।
नीति आयोग और विश्व खाद्य कार्यक्रम की ‘टेक होम राशन’ रिपोर्ट
संदर्भ:
हाल ही में, नीति आयोग और विश्व खाद्य कार्यक्रम द्वारा ‘राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों में राशन घर ले जाएं -अच्छे पद्धति’ (Take Home Ration-Good Practices Across The State/Union Territories) शीर्षक से एक रिपोर्ट लॉन्च की।
इस रिपोर्ट में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा ‘टेक होम राशन’ मूल्य श्रृंखला के कार्यान्वयन में अपनाई गई अच्छी और नवीन पद्धतियों’ का एक सेट पेश किया गया है।
प्रमुख बिंदु:
- भारत सरकार, बच्चों के साथ-साथ गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं (Pregnant And Lactating Women – PLW) के बीच पोषण में अंतर को भरने के लिए ‘एकीकृत बाल विकास सेवाओं’ (Integrated Child Development Services – ICDS) के ‘पूरक पोषण घटक’ के तहत ‘टेक होम राशन’ (Take Home Ration) प्रदान करती है।
- नवाचारों का संकलन: यह दस्तावेज़, विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ‘टेक होम राशन’ (THR) कार्यक्रमों में अच्छी पद्धतियों और नवाचारों का संकलन करता है।
- अच्छी पद्धतियों की सूची तैयार करना: उत्पादन, निर्माण, वितरण, लेबलिंग, पैकेजिंग, निगरानी, गुणवत्ता आश्वासन, और सामाजिक और व्यवहारिक परिवर्तन से संबंधित पहलुओं की समीक्षा की गई है ताकि अच्छी प्रथाओं की सूची तैयार की जा सके।
- अच्छी पद्धतियों को अपनाना: यह दस्तावेज़ राज्य सरकारों / केंद्र शासित प्रदेशों को अपने ‘टेक होम राशन’ कार्यक्रमों में अच्छी पद्धतियों को अपनाने में मदद करेगा।
रिपोर्ट में दिए गए सुझाव:
- ‘टेक होम राशन’ (THR) की पूरी क्षमता का एहसास करने के लिए, इस मूल्य श्रृंखला के सभी घटकों को सर्वोत्कृष्ट रूप से कार्य करने की आवश्यकता है।
- खरीद, आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन और निगरानी के लिए एक मजबूत प्रणाली का निर्माण- जो पूर्ण पारदर्शिता, मानकीकृत प्रक्रिया, स्थिरता, पूर्ण कवरेज सुनिश्चित करे, स्थानीय संबंधों का लाभ उठाए, सहयोग की संस्कृति को बढ़ावा दे और एक समुदाय के भीतर विश्वास का निर्माण करे।
राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों द्वारा जारी अच्छी पद्धतियां:
संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम:
विश्व खाद्य कार्यक्रम (World Food Programme – WFP) संयुक्त राष्ट्र की खाद्य-सहायता शाखा है और भुखमरी का समाधान करने तथा खाद्य सुरक्षा को बढ़ावा देने वाला दुनिया का सबसे बड़ा मानवीय संगठन है।
- 1961 में स्थापित WFP भूख और कुपोषण को मिटाने का प्रयास करता है, जिसका अंतिम लक्ष्य ‘खाद्य सहायता की आवश्यकता’ को समाप्त करना है।
- यह ‘संयुक्त राष्ट्र विकास समूह’ का सदस्य है और इसकी कार्यकारी समिति का हिस्सा है।
- WFP खाद्य सहायता को सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी से लड़ने, बाल मृत्यु दर को कम करने, मातृ स्वास्थ्य में सुधार और एचआईवी और एड्स सहित बीमारियों से लड़ने के लिए भी निर्देशित किया जाता है।
इंस्टा लिंक्स:
एकीकृत बाल विकास सेवाएं (ICDS)
स्रोत: पीआईबी
सामान्य अध्ययन–III
विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।
भारतीय रिज़र्व बैंक की वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट
संदर्भ: हाल ही में, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी द्विवार्षिक वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (Financial Stability Report – FSR) जारी की है।
रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु:
गैर-निष्पादित आस्तियां (non-performing assets – NPA): सकल गैर-निष्पादित आस्तियों (GNPA) के अनुपात के साथ बैंकिंग प्रणाली की परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार हुआ है, जो मार्च 2021 में 7.4 प्रतिशत से गिरकर मार्च 2022 में छह साल के निचले स्तर 5.9 प्रतिशत पर आ गया है।
कारण: बैंकों ने रिकवरी, ‘राइट-ऑफ’ (write-offs) और ‘स्लिपेज’ (Slippages) में कमी के माध्यम से GNPA अनुपात को कम किया है।
- प्रावधान कवरेज अनुपात (Provisioning coverage ratio – PCR): मार्च 2022 में यह बढ़कर 70.9 प्रतिशत हो गया, जो एक साल पहले 67.6 प्रतिशत था।
- प्रावधान कवरेज अनुपात (PCR), उस फंड का प्रतिशत होता है जिसे बैंक खराब कर्ज के कारण होने वाले नुकसान के लिए अलग रखता है। यदि गैर-निष्पादित आस्तियां (NPA) तेजी से बढ़ने लगे तो एक उच्च PCR बैंकों के लिए नुकसान के खिलाफ खुद को ‘बफर’ (Buffer) करने के लिए फायदेमंद हो सकता है।
- आघात झेलने के लिए बफर: आरबीआई की रिपोर्ट के अनुसार, बैंकों के साथ-साथ गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थानों के पास झटके झेलने के लिए ‘पूंजी बफर’ पर्याप्त हैं, और कोविड के दौरान इसके सहयोग से बैंकों को अपने GNPA अनुपात को कम करने में मदद मिली।
उठाई गई चिंताएं:
- वैश्विक स्पिलओवर (Global spillover) से चुनौतियों के बावजूद, भारतीय अर्थव्यवस्था बहाली के पथ पर बनी हुई है, हालांकि मुद्रास्फीति के दबाव, बाहरी स्पिलओवर और भू-राजनीतिक जोखिम से यह परिलक्षित होता है कि इसके सावधानीपूर्वक संचालन और बारीकी से निगरानी की आवश्यकता है।
- वैश्विक स्पिलओवर के उदाहरण: अमेरिकी दर में वृद्धि और मंदी का खतरा; यूक्रेन संकट; तेल की कीमत में वृद्धि।
- फिनटेक के जोखिम (Risks of Fintech): रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि फिनटेक के आगमन ने बैंकिंग प्रणाली को डेटा गोपनीयता, साइबर सुरक्षा, उपभोक्ता संरक्षण, प्रतिस्पर्धा और एएमएल (धन-शोधन विरोधी) नीतियों के अनुपालन जैसे नए जोखिमों से अवगत कराया है।
- भारतीय फिनटेक, उद्योग-दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ते फिनटेक बाजारों में से एक है। भारत में फिनटेक अपनाने की दर विश्व स्तर पर सबसे अधिक (87 प्रतिशत) है, जिसे 2021-22 के दौरान $8.53 बिलियन का वित्तीयन प्राप्त हुआ।
- बिगटेक (बड़ी प्रौद्योगिकी फर्म) से जोखिम: बिगटेक (BigTechs) तेजी से बढ़ सकते हैं और वित्तीय स्थिरता के लिए जोखिम पैदा कर सकते हैं, जो मौजूदा संस्थानों के बढ़ते हस्तक्षेप से उत्पन्न हो सकता है।
- इसके अलावा, बिगटेक फर्मों और वित्तीय संस्थानों के बीच जटिल अंतःस्थापित परिचालन संबंध एकाग्रता और संक्रामक जोखिम और संभावित प्रतिस्पर्धा-विरोधी व्यवहार से संबंधित मुद्दों को जन्म दे सकते हैं।
- क्रिप्टोस एक ‘स्पष्ट खतरा‘: आरबीआई गवर्नर ने क्रिप्टोकरेंसीज़ को “स्पष्ट खतरा” कहा और बिना किसी बुनियादी आधार पर मूल्य प्राप्त करने वाली कोई भी चीज़ केवल “एक परिष्कृत नाम के अंतर्गत अटकल” है।
इंस्टा लिंक:
बिगटेक और फिनटेक को विनियमित करेगा आरबीआई
अभ्यास प्रश्न
“क्रिप्टोकरेंसी डिजिटल क्रांति के अगले चरण का नेतृत्व करेगी। भारत को यह मौका चूकना नहीं चाहिए।” समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15अंक)
विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।
इसरो का POEM प्लेटफॉर्म
संदर्भ:
हाल ही में, इसरो ने सफलतापूर्वक ‘पीएसएलवी कक्षीय प्रायोगिक मॉड्यूल’ (PSLV Orbital Experimental Module – POEM) लॉन्च किया है।
POEM: परिचय
‘पीएसएलवी कक्षीय प्रायोगिक मॉड्यूल (POEM) एक प्लेटफॉर्म या मंच है जो वैज्ञानिकों को कक्षा में ही प्रयोग करने के अवसर प्रदान करेगा। इसके लिए इसरो के ‘पोलर सैटलाइट लॉन्च व्हीकल’ के अंतिम या चौथे चरण के हिस्से का उपयोग किया जाएगा जो समान्य तौर पर प्रक्षेपण की भूमिका खत्म होने के बाद अलग हो जाता है।
PSLV: ‘ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान’ / ’पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल’ (PSLV) एक चार चरणों वाला रॉकेट है जहां उपयोग किए जाने वाले पहले तीन चरण वापस समुद्र में गिरते हैं, और अंतिम चरण (पीएस 4) – उपग्रह को कक्षा में लॉन्च करने के बाद – अंतरिक्ष कबाड़ के रूप में अलग हो जाता है।
हालांकि PSLV-C53 मिशन में, प्रयुक्त किए गए अंतिम चरण को ‘प्रयोग-कार्य’ करने के लिए “स्थिर मंच” के रूप में उपयोग किया जाएगा।
पेलोड (Payloads): POEM द्वारा अंतरिक्ष में छह पेलोड भेजे जा रहे हैं, जिसमें दो भारतीय अंतरिक्ष स्टार्ट-अप ‘दिगंतारा’ (अंतरिक्ष विकिरण, मलबे और कक्षाओं का नक्शा बनाने के लिए) और ‘ध्रुव स्पेस’ (पूर्ण-स्टैक उपग्रह विकास, प्रक्षेपण, तैनाती, संचालन और रखरखाव सेवाओं के लिए) शामिल हैं।)
महत्व: यह ‘भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र’ (IN-SPACe) द्वारा अधिक सार्वजनिक-निजी भागीदारी के लिए आधार तैयार करेगा।
IN-SPACe अंतरिक्ष विभाग द्वारा नियुक्त एक नोडल एजेंसी है, जो इसरो की लॉन्च सुविधाओं सहित इसरो के बुनियादी ढांचे और संसाधनों का उपयोग करने के लिए एक गैर-सरकारी संस्था को अधिकृत कर सकती है।
क्या इसरो ने पहले PS4 रॉकेट कबाड़ का पुन: उपयोग किया है?
भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ने पहली बार 2019 में PSLV-C44 मिशन के साथ PS4 को कक्षीय मंच के रूप में उपयोग करने की क्षमता का प्रदर्शन किया था।
इंस्टा लिंक
अभ्यास प्रश्न:
इसरो के भविष्य के कुछ नियोजित मिशनों तथा इनकी उपयोगिता, जो राष्ट्रीय विकास के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के दोहन में मदद करेगी, पर प्रकाश डालें। (15 अंक)
स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस, लाइव मिंट
विषय: बुनियादी ढाँचाः ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि।
”हरित हाइड्रोजन का दोहन – भारत में डीप डीकार्बोनाइजेशन के अवसर”: नीति आयोग की रिपोर्ट
संदर्भ:
हाल ही में, नीति आयोग द्वारा ”हरित हाइड्रोजन का दोहन – भारत में डीप डीकार्बोनाइजेशन के अवसर” (Harnessing Green Hydrogen: Opportunities for Deep Decarbonisation in India) शीर्षक से जारी रिपोर्ट में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि आने वाले दशकों में ग्रीन हाइड्रोजन भारत के आर्थिक विकास और औद्योगिक कार्बन उत्सर्जन के नियंत्रण को काफी हद तक बढ़ावा दे सकता है।
यह रिपोर्ट ग्रीन हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था के विकास में तेजी लाने के लिए एक मार्ग प्रस्तुत करती है जो 2070 तक नेट-जीरो के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए भारत के लिए महत्वपूर्ण है।
रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु:
- स्थिति: वर्ष 2050 तक भारत में हाइड्रोजन की मांग चौगुनी हो सकती है (वैश्विक मांग का लगभग 10%)।
- डीकार्बोनाइजेशन: हरित हाइड्रोजन उर्वरक, शोधन, मेथनॉल, समुद्री नौवहन आदि क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है।
- भारत को ग्रीन हाइड्रोजन कॉरिडोर बनाने की जरूरत है: राज्य की बड़ी चुनौतियों के आधार पर देश भर में तीन हाइड्रोजन कॉरिडोर विकसित किए जाने चाहिए।
- सरकारें हरित हाइड्रोजन को बढ़ावा देने के लिए स्टार्टअप्स के साथ-साथ उद्यमियों को सहायता प्रदान करती हैं।
- हरित हाइड्रोजन के लिए मांग एकत्रीकरण और डॉलर आधारित बोली के माध्यम से निवेश को सुगम बनाना।
- एक ‘वैश्विक हाइड्रोजन गठबंध’न के माध्यम से हरित हाइड्रोजन और हरित हाइड्रोजन-एम्बेडेड उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देना।
- ग्रीन हाइड्रोजन को ‘ग्रे हाइड्रोजन’ की तुलना में प्रतिस्पर्धी बनाया जाए।
- बाजार के विकास को प्रोत्साहित किया जाए। उदाहरण: इंडस्ट्रियल क्लस्टर और वायबिलिटी गैप फंडिंग का उपयोग करना।
- हरित हाइड्रोजन मानक और एक लेबलिंग कार्यक्रम आरंभ किया जाए।
सरकारी उपाय:
- राष्ट्रीय हाइड्रोजन ऊर्जा बोर्ड (2003): यह ‘राष्ट्रीय हाइड्रोजन ऊर्जा रोड मैप’ और ‘राष्ट्रीय हाइड्रोजन ऊर्जा और ईंधन सेल कार्यक्रम’ का कार्यान्वयन और निगरानी करता है।
- राष्ट्रीय हाइड्रोजन ऊर्जा रोडमैप (2006): देश में हाइड्रोजन ऊर्जा विकास के लिए एक खाका प्रदान करता है।
- उच्च स्तरीय संचालन समिति: हाइड्रोजन और ईंधन कोशिकाओं के लिए डॉ के कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में गठित।
- मिशन इनोवेशन: यह वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा नवाचार में तेजी लाने के लिए एक वैश्विक पहल है।
- विद्युत मंत्रालय की (हरित हाइड्रोजन नीति (GHP): नीति ने 2030 तक 5 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) हरित हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य रखा है, जो देश में वर्तमान हाइड्रोजन मांग का 80% से अधिक है।
ग्रीन हाइड्रोजन / हरित हाइड्रोजन
परिभाषा: ‘ग्रीन हाइड्रोजन’/’ग्रीन अमोनिया’ को अक्षय ऊर्जा का उपयोग करके पानी के ‘विद्युत अपघटन’ (Electrolysis) के माध्यम से उत्पादित हाइड्रोजन/अमोनिया के रूप में परिभाषित किया जाता है। इसमें कार्बन का कोई अंश नहीं होता है।
भारत के लिए अवसर:
- एनटीपीसी लिमिटेड, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, एक्मे सोलर, रिलायंस इंडस्ट्रीज और अदानी ग्रुप और ग्रीनको जैसी भारतीय कंपनियां हाइड्रोजन को ऊर्जा निकालने के लिए एक नए व्यावसायिक अवसर के रूप में देख रही हैं।
- भारत की अनुकूल भौगोलिक परिस्थितियों और प्रचुर मात्रा में प्राकृतिक तत्वों की उपस्थिति के कारण हरित हाइड्रोजन उत्पादन में भारी बढ़त प्राप्त है।
- सस्ते नवीकरणीय ऊर्जा शुल्क: भारत अपने सस्ते नवीकरणीय ऊर्जा शुल्कों के कारण 2030 तक हरित हाइड्रोजन का शुद्ध निर्यातक बन जाएगा।
- हाइड्रोजन ईंधन सेल इलेक्ट्रिक वाहन (Fuel Cell electric vehicles – FCEV) बैटरी इलेक्ट्रिक वाहनों से तुलनात्मक रूप से बेहतर हैं, इससे इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बैटरी बनाने के लिए उपयोग की जाने वाली दुर्लभ पृथ्वी धातुओं की भारत की मांग कम हो जाएगी।
- जीवाश्म ईंधन पर आयात निर्भरता को कम करके भारत के चालू खाते के घाटे को कम करने में मदद कर सकता है।
- वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अनिश्चितता से निपटने में मदद करता है। उदहारण के लिए, हाल ही में कोयला संकट से बिजली उत्पादन में बाधा।
- ऑटोमोटिव और घरेलू खाना पकाने के अनुप्रयोगों दोनों के लिए बड़े पैमाने पर H-CNG को एक आंतरायिक तकनीक के रूप में पेश करना।
अभ्यास प्रश्न:
हरित हाइड्रोजन की क्षमता का दोहन, महत्वपूर्ण ऊर्जा चुनौतियों से निपटने और गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। चर्चा कीजिए। (250 शब्द)
स्रोत: बिज़नेस स्टैण्डर्ड
प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य
सिग्नल स्कूल
संदर्भ:
अहमदाबाद नगर निगम द्वारा ‘सिग्नल स्कूल परियोजना’ (Signal School project) के तहत ‘भीक्षा नहीं शिक्षा’ के मंत्र से शिक्षा से वंचित गरीब बच्चों – जो भीख मांग रहे हैं या बीच में स्कूल छोड़ चुके हैं – उन्हें शिक्षा की सुविधा प्रदान की जाएगी।
सुविधाएँ:
सिग्नल स्कूल बस में एक ब्लैकबोर्ड, शिक्षकों के लिए मेज और कुर्सी, एलसीडी टीवी, वाईफाई, सीसीटीवी, पीने का पानी और एक मिनी पंखा लगा हुआ है। बच्चों को ‘स्कूल स्वास्थ्य कार्यक्रम’ के तहत नगर निगम के स्कूलों में दी जाने वाली अन्य सुविधाएं, दोपहर का भोजन और स्वास्थ्य जांच भी दी जाएगी और एक साल बाद उन्हें नजदीकी स्कूल में मुख्यधारा में लाया जाएगा।
महत्व:
इस तरह की पहल सामाजिक रूप से उन्मुख दृष्टिकोण की दिशा में काम करती है और वंचित बच्चों में शिक्षा की संस्कृति को विकसित करती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि समाज में कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे और जरूरतमंद और गरीब परिवार के बच्चे को प्रतिकूल परिस्थितियों में भी शिक्षा छोड़ना न पड़े। .
ऐसी अन्य पहल:
मुंबई के ठाणे में ट्रैफिक सिग्नल फ्लाईओवर के नीचे एक शिपिंग कंटेनर से बनाई गई एक आकर्षक कक्षा जारी है, जोकि भारत का पहला सिग्नल स्कूल है।
प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य
औरंगाबाद
महाराष्ट्र सरकार ने औरंगाबाद का नाम बदलकर संभाजीनगर कर दिया है।
- औरंगाबाद की स्थापना 1610 में अहमदनगर के निजामशाही वंश के सिद्दी सेनापति मलिक अंबर ने की थी।
- छत्रपति शिवाजी महाराज के पुत्र और उत्तराधिकारी छत्रपति संभाजी महाराज को 1689 में औरंगजेब के आदेश पर क्रूर तरीके से प्रताड़ित और मार डाला गया था।
उस्मानाबाद
इस क्षेत्र में स्थित प्राचीन बौद्ध और जैन गुफाओं के अनुसार, ‘उस्मानाबाद’ को पहले ‘धाराशिव’ के नाम से जाना जाता था और 19वीं शताब्दी में इसका नाम बदल दिया गया था।
कहा जाता है कि इस शहर का नामकरण ‘उस्मानाबाद’ या तो 7वें नवाब मीर उस्मान अली, हैदराबाद के अंतिम निज़ाम के नाम से लिया गया है, क्योंकि यह क्षेत्र निज़ाम के क्षेत्र का हिस्सा था, या इस्लाम के तीसरे खलीफा उस्मान को श्रद्धांजलि के रूप में किया गया था।
वाई की लड़ाई
वर्ष 1687 में हुई ‘वाई की लड़ाई’ (Battle of Wai ), मुगल-मराठा युद्धों के एक भाग के रूप में लड़ी गई थी। छत्रपति संभाजी महाराज ने सरजा खान के नेतृत्व वाली मुगल सेना का विरोध करने के लिए अपनी सेना को भेजा। मुगलों को ‘वाई’ और ‘महाबलेश्वर’ के पास घने जंगलों में खींच कर लाया गया जहां युद्ध हुआ और मराठा अंततः विजयी हुए।
सीडीआरआई: एक ‘अंतर्राष्ट्रीय संगठन‘ के रूप में
सरकार ने आपदा प्रबंधन अवसंरचना गठबंधन (Coalition for Disaster Resilient Infrastructure – CDRI) को एक ‘अंतर्राष्ट्रीय संगठन’ के रूप में वर्गीकृत करने और इसे संयुक्त राष्ट्र (विशेषाधिकार और प्रतिरक्षा) अधिनियम, 1947 के तहत छूट, उन्मुक्ति और विशेषाधिकार प्रदान करने हेतु CDRI के साथ ‘मुख्यालय समझौते’ (Headquarters Agreement – HQA) पर हस्ताक्षर करने की घोषणा की है।
महत्व: यह सीडीआरआई को एक स्वतंत्र और अंतरराष्ट्रीय कानूनी व्यक्तित्व प्रदान करेगा ताकि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने कार्यों को कुशलतापूर्वक और प्रभावी ढंग से कर सके।
फ़ायदे:
- अन्य देशों में विशेषज्ञों की प्रतिनियुक्ति।
- विश्व स्तर पर धनराशि की उपयोग।
- देशों की सहायता के लिए तकनीकी विशेषज्ञता उपलब्ध कराना।
- आपदा-अनुकूलित बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने के लिए अंतरराष्ट्रीय जुड़ाव का लाभ उठाना।
वर्ल्ड ड्रग रिपोर्ट 2022
संदर्भ: हाल ही में, नशीली दवाओं और अपराध पर संयुक्त राष्ट्र कार्यालय (UNODC) द्वारा ‘वर्ल्ड ड्रग रिपोर्ट’ 2022 (World Drug Report, 2022) जारी की गयी है।
रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु:
- भारत के संदर्भ में: भारत दुनिया का सबसे बड़ा अफीम बाजार है। अफगानिस्तान से आने वाले मादक द्रव्यों में वृद्धि हुई है जिससे तस्करी और संबद्ध संगठित अपराध बढ़ रहे हैं।
- विश्व के संदर्भ में: नशीली दवाओं की खपत की दर में वृद्धि हुई है। पिछले दशक की तुलना में 26% की वृद्धि हुई है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में नशीली दवाओं के उपभोग अधिक तेजी से वृद्धि हुई है।
- नशीली दवाओं के उत्पादन और तस्करी में वृद्धि हुई है।
- मध्य पूर्व और दक्षिण-पूर्व एशिया सिंथेटिक दवाओं के निर्माण के लिए उभर रहे आधार हैं।
- पर्यावरणीय प्रभाव: वनों की कटाई (कोको की खेती के कारण), अपशिष्ट उत्पादन (सिंथेटिक दवा निर्माण में)।

















