विषयसूची
सामान्य अध्ययन-II
- ‘किशोर न्याय अधिनियम संशोधन’ के प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका
- ईरान-यू.एस. परमाणु वार्ता जल्द फिर से शुरू होगी: यूरोपीय संघ
सामान्य अध्ययन-III
- ‘चालू खाता घाटे’ के निहितार्थ
सामान्य अध्ययन-IV
- गर्भपात से संबंधित नैतिक मुद्दे
मुख्य परीक्षा संवर्धन हेतु पाठ्य सामग्री (नैतिकता/निबंध)
- हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा ‘सिंगल यूज प्लास्टिक निर्मित वस्तुओं’ की खरीद
- विशेष रूप से विकलांग बच्चों के लिए विशेष पार्क
प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य
- विश्व संगीत दिवस के अवसर पर ज्योतिर्गमय कार्यक्रम
- 6 साल या इसे अधिक की सजा दिए जाने वाले अपराधों की फॉरेंसिक जांच
- ग्लोबल इंफ्रास्ट्रक्चर एंड इन्वेस्टमेंट के लिए साझेदारी (पीजीआईआई) योजना
- पर्यावरण डीएनए
- भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) ने इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरियों के प्रदर्शन संबंधी मानक
- डीएसटी-आईआईएससी ऊर्जा भंडारण प्लेटफ़ॉर्म
- रेडियो एक्सेस नेटवर्क
- हर्मिट
- वायु गुणवत्ता
- उदयपुर के ‘बर्ड विलेज’ को वेटलैंड घोषित किया जाना तय
- केरल में पक्षियों की लाल सूची
- टेक्सटाइल पार्क
सामान्य अध्ययन–II
विषय: केन्द्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन; इन अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय।
‘किशोर न्याय अधिनियम संशोधन’ के प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका
संदर्भ:
तीन राज्यों (बंगाल, राजस्थान और पंजाब) की ‘बाल अधिकार समितियों’ ने ‘दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग’ (Delhi Commission for the Protection of Child Rights – DCPCR) के साथ मिलकर संयुक्त रूप से केंद्र सरकार से ‘किशोर न्याय अधिनियम’ में किए गए एक संशोधन को वापस लेने की अपील की है। इस संसोधन में बच्चों के खिलाफ कुछ अपराधों को ‘गैर- संज्ञेय’ (Non-Cognisable) बनाया गया है।
- 2021 में, ‘किशोर न्याय (बच्चों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम’ 2015 को राष्ट्रपति की सहमति से संशोधित किया गया था।
- इससे पहले, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) द्वारा वर्ष 2020 में ‘बाल देख-रेख संस्थानों’ (Child Care Institutions – CCIs) के किए गए ऑडिट में ‘चाइल्डकैअर संस्थानों’ के संचालन से जुड़े जबरदस्त मुद्दों पर प्रकाश डाला गया था।
नवीनतम संशोधनों के अनुसार:
- अधिनियम के तहत जिलाधिकारियों को ‘किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम के सुचारू कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के साथ-साथ संकट की स्थिति में बच्चों के पक्ष में समन्वित प्रयास करने के लिए और अधिक अधिकार दिए गए हैं।
- अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (ADM) सहित जिला मजिस्ट्रेट (ADM) जेजे अधिनियम के तहत, स्वतंत्र रूप से जिला बाल संरक्षण इकाइयों, बाल कल्याण समितियों, किशोर न्याय बोर्डों, विशेष किशोर पुलिस इकाइयों, बाल देखभाल संस्थानों आदि के कामकाज का मूल्यांकन करेंगे।
- जिलाधिकारी द्वारा ‘बाल कल्याण समितियों’ (Child Welfare Committees – CWC) के सदस्यों, जोकि आम तौर पर सामाजिक कल्याण कार्यकर्ता होते हैं, की शैक्षिक योग्यता सहित पृष्ठभूमि की जांच भी की जाएगी। वर्तमान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।
- विधेयक में, जिलाधिकारी से ‘बाल कल्याण समिति’ के सदस्यों की संभावित आपराधिक पृष्ठभूमि की भी जांच करने को कहा गया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि नियुक्ति से पहले किसी भी सदस्य के खिलाफ बाल शोषण या बाल यौन शोषण संबंधी कोई मामला तों दर्ज नहीं था।
- संशोधनों के अनुसार, गोद लेने के आदेश, अब अदालत के स्थान पर अब जिलाधिकारी (अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट समेत) द्वारा जारी किए जाएंगे।
- ‘बाल कल्याण समितियों’ (Child Welfare Committees – CWC) के लिए संबंधित जिलों में उनकी कार्यक्रमों के बारे में जिलाधिकारी को नियमित रूप से रिपोर्ट करना होगा।
- गंभीर अपराध: नवीनतम संशोधनों के अनुसार, जिन अपराधों में अधिकतम सजा 7 वर्ष से अधिक कारावास है, लेकिन कोई न्यूनतम सजा निर्धारित नहीं की गई है या 7 वर्ष से कम की न्यूनतम सजा प्रदान की गई है, उन्हें इस अधिनियम के तहत गंभीर अपराध माना जाएगा।
- गैर-संज्ञेय अपराध: संशोधन के अनुसार, विशेष कानून के तहत तीन से सात साल की सजा वाले अपराधों को ‘गैर-संज्ञेय’ के रूप में पुनर्वर्गीकृत किया गया है।
इस अखिल भारतीय कानून के साथ समस्याएं:
- रिपोर्टिंग को हतोत्साहित करता है: इस संशोधन के बाद, यदि कोई व्यक्ति शिकायत दर्ज करने के लिए पुलिस स्टेशन जाता है, तो पुलिस उसको पहले अनुमति लेने के लिए मजिस्ट्रेट के पास भेज देगी।
- शिकायतकर्ता की आवश्यकता: कुछ मामलों में, यह देखते हुए कि यदि घटित होने वाला अपराध एक संज्ञेय अपराध हैं (जब तक कि संशोधित जेजे अधिनियम अधिसूचित नहीं हो जाता), तो ‘गैर सरकारी संगठन’ या ‘बाल अधिकार कार्यकर्ता’ ऐसे मामलों की सीधे पुलिस को रिपोर्ट करने का निर्णय लेते हैं। लेकिन, अब पुलिस किसी ऐसे व्यक्ति की तलाश करेगी जिसे शिकायतकर्ता बनाया जाए, भले ही पुलिस शिकायत को सत्यापित कर ले और संज्ञेय अपराध होने पर इसके बाद ही प्राथमिकी दर्ज करेगी।
- मजिस्ट्रेट के निर्देश: ‘दंड प्रक्रिया संहिता’ के अनुसार, एक बार जब अपराध ‘गैर-संज्ञेय’ हो जाते हैं, तो पुलिस मजिस्ट्रेट के निर्देश पर ही प्राथमिकी दर्ज कर सकेगी और शिकायतकर्ता को प्रक्रिया शुरू करने से पहले संबंधित मजिस्ट्रेट से संपर्क करना होगा।
- मजदूरी का नुकसान: ‘बाल देखरेख संस्थानों’ (CCIs) में अधिकांश बच्चे जिनके माता-पिता दिहाड़ी मजदूर हैं, वे कानूनी प्रक्रिया में शामिल नहीं होना चाहते हैं क्योंकि इससे उन्हें काम से समय निकालने के लिए मजबूर होना पड़ेगा, जिसके परिणामस्वरूप मजदूरी का नुकसान होगा।
- ‘बाल देखरेख संस्थानों’ में कर्मचारियों या प्रभारी व्यक्तियों द्वारा दुर्व्यवहार और क्रूरता के मामलों की रिपोर्ट करना आसान नहीं है।
- पीड़ित स्वयं सीधे रिपोर्ट करने में असमर्थ होते हैं, ऐसे में अधिकांश अपराध माता-पिता या बाल अधिकार निकायों और बाल कल्याण समितियों (CWC) द्वारा पुलिस को रिपोर्ट किए जाते हैं।
‘किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015
(Juvenile Justice (Care and Protection of Children) Act)
‘किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम’ 2015, अर्थात ‘जेजे एक्ट’ के द्वारा किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2000 प्रतिस्थापित किया गया है।
उद्देश्य: विधि का अभिकथित उल्लंघन करते पाए जाने वाले बालकों और देखरेख तथा संरक्षण की आवश्यकता वाले बालकों से संबंधित मामलों का व्यापक रूप से समाधान करना।
- अधिनियम के तहत, प्रत्येक जिले में ‘किशोर न्याय बोर्ड’ और ‘बाल कल्याण समितियां’ स्थापित करने का आदेश दिया गया है। इन संस्थाओं में कम से कम एक महिला सदस्य होनी अनिवार्य है।
- इसके अलावा, इसके तहत ‘केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण’ (Central Adoption Resource Authority– CARA) को वैधानिक निकाय का दर्जा दिया गया है, जिससे यह प्राधिकरण अपने कार्यों को प्रभावी ढंग से करने में सक्षम होगा।
- इस अधिनियम में बालकों के खिलाफ होने वाले कई नए अपराधों (जैसे, अवैध रूप से गोद लेना, आतंकवादी समूहों द्वारा बालकों का उपयोग, विकलांग बालकों के खिलाफ अपराध, आदि), जो किसी अन्य कानून के तहत पर्याप्त रूप से आच्छादित नहीं है, को शामिल किया गया है।
- राज्य सरकार द्वारा, स्वैच्छिक या गैर-सरकारी संगठनों द्वारा संचालित होने वाले सभी बाल देखभाल संस्थानों के लिए क़ानून के प्रारंभ होने की तारीख से 6 महीने के भीतर अधिनियम के तहत अनिवार्य रूप से पंजीकृत होना आवश्यक है।
इंस्टा लिंक्स:
किशोर न्याय अधिनियम के बारे में अधिक जानकारी हेतु पढ़िए।
अभ्यास प्रश्न:
‘किशोर न्याय संशोधन अधिनियम’ 2021 के प्रावधानों का आलोचनात्मक विश्लेषण करें। (10M)
विषय: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार।
ईरान-यू.एस. परमाणु वार्ता जल्द फिर से शुरू होगी: यूरोपीय संघ
संदर्भ:
ईरानी विदेश मंत्री के अनुसार- ‘परमाणु समझौता, 2015 या ‘संयुक्त व्यापक कार्य योजना’ (Joint Comprehensive Plan of Action – JCPOA) को पुनर्जीवित करने पर अमेरिका के साथ ईरान की अप्रत्यक्ष वार्ता जल्द ही फिर से शुरू होगी।
इसी वर्ष मार्च में यूरोपीय संघ- जो वार्ता का समन्वय कर रहा है- द्वारा ईरान और अमेरिकी राष्ट्रपति के प्रशासन के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता के बाद समझौते को अंतिम रूप देने के लिए इस समझौते पर हस्ताक्षर-कर्ता देशों का प्रतिनिधित्व करने वाले विदेश मंत्रियों को आमंत्रित किया गया, तब यह ‘परमाणु समझौता’ पुनर्जीवित होने के करीब दिखाई दिया था।
भारत के लिए समझौते का महत्व:
- ईरान पर लगे प्रतिबंध हटने से, चाबहार बंदरगाह, बंदर अब्बास पोर्ट, और क्षेत्रीय संपर्को से जुडी अन्य परियोजनाओं में भारत के हितों को फिर से सजीव किया जा सकता है।
- इससे भारत को, पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह में चीनी उपस्थिति को बेअसर करने में मदद मिलेगी।
- अमेरिका और ईरान के बीच संबंधों की बहाली से भारत को ईरान से सस्ते तेल की खरीद और ऊर्जा सुरक्षा में सहायता मिलेगी।
भारत के लिए JCPOA का महत्व:
इंस्टा लिंक्स:
‘संयुक्त व्यापक कार्य योजना’ (JCPOA) के बारे में अधिक जानकारी हेतु पढ़िए।
सामान्य अध्ययन–III
विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।
‘चालू खाता घाटे’ के निहितार्थ
संदर्भ:
भारत में ‘चालू खाता घाटा’ (Current Account Deficit – CAD) वित्त वर्ष 2021-22 की तीसरी तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (GDP) 2.6% से घटकर 1.5% हो गया है।
‘चालू खाता घाटा’ क्या होता है?
‘चालू खाता घाटा’ (CAD) किसी देश के व्यापार की एक माप होता है, जिसमे देश में आयात की जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य, निर्यात किए जाने वाले उत्पादों के मूल्य से अधिक होता है। ‘चालू खाता’ किसी देश के ‘विदेशी लेनदेन’ के बारे में बताता है और, पूंजी खाते की तरह, देश के ‘भुगतान संतुलन’ (Balance Of Payments – BOP) का एक घटक होता है।
CAD में क्या शामिल होता है?
‘चालू खाता घाटा’ (CAD) में देश के उत्पादों और सेवाओं का शुद्ध व्यापार, ब्याज और लाभांश सहित सीमा पार निवेश से अर्जित शुद्ध आय, प्रेषण (Remittances) एवं विदेशी सहायता जैसे शुद्ध अंतरण भुगतान शामिल होते हैं। सरल शब्दों में, ‘चालू खाता घाटा’ (सीएडी) का मतलब है कि आयातित वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य निर्यात के मूल्य से अधिक है।
भारत के ‘चालू खाता घाटा’ में कमी आने के कारण:
- कंप्यूटर और व्यावसायिक सेवाओं द्वारा मजबूत प्रदर्शन, निवल सेवा प्राप्तियों में वृद्धि।
- विदेशों में भारतीयों द्वारा भेजे जाने वाले धन में भी वृद्धि हुई है।
- उल्लिखित तिमाही में भारत के व्यापार घाटे में कमी।
- व्यापारिक वस्तुओं के निर्यात से उच्च आयात बिलों पर नियंत्रण: भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान के कारण कच्चे तेल और कमोडिटी की कीमतों में तेजी आई। कोयले, प्राकृतिक गैस, उर्वरक और खाद्य तेलों की कीमतों में वृद्धि से ‘व्यापार घाटे’ पर दबाव बढ़ा है।
- हालांकि, वैश्विक मांग में वृद्धि के साथ, व्यापारिक वस्तुओं का निर्यात भी बढ़ रहा है।
उच्च ‘चालू खाता घाटा’ का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव:
- बढ़ता CAD: उच्च ‘चालू खाता घाटा’ (CAD) होने के परिणामस्वरूप विदेशी मुद्रा की मांग बढ़ेगी, जिससे घरेलू मुद्रा का मूल्यह्रास होगा। पूंजी प्रवाह को आकर्षित करके और विदेशी प्रत्यक्ष निवेश में वृद्धि के माध्यम से पूंजी खातों में अधिशेष भेजकर किसी देश द्वारा ‘चालू खाता घाटा’ को संतुलित किया जाता है।
- भारतीय मुद्रा के कमजोर होने से मुद्रास्फीति में वृद्धि होगी, जो पहले से ही वस्तुओं की उच्च कीमतों के कारण एक गंभीर चिंता का विषय है।
- वृद्धिमान ‘चालू खाता घाटा’ हमेशा खराब नहीं होता है: यदि किसी देश में ‘तकनीकी उन्नयन’ के लिए किए जाने वाले आयात के कारण देश के आयात बिल में वृद्धि होती है तो इससे दीर्घकालिक विकास में मदद मिलेगी।
- यदि आयात में वृद्धि के साथ-साथ औद्योगिक उत्पादन में विस्तार होता है, तो यह आर्थिक विकास का संकेत है।
भविष्य के अनुमान:
देश के ‘चालू खाता घाटा’ में यह कमी अस्थायी है: अमेरिका के फेडरल रिज़र्व बैंक (FED) की ब्याज दरों में वृद्धि और भारतीय बाजार से ‘विदेशी संस्थागत निवेश’ (FII) और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के बहिर्वाह के कारण 2022-23 में भारत का ‘चालू खाता घाटा’, सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के लगभग 3-3.5% तक बढ़ने की संभावना है। .
इंस्टा लिंक्स:
मूल बातें: घाटे के प्रकार
भारत की उभरती जुड़वां घाटे की समस्या
अभ्यास प्रश्न:
चालू खाता घाटा से आप क्या समझते हैं? क्या आपको लगता है कि बढ़ता ‘चालू खाता घाटा’ स्वाभाविक रूप से खराब होता है और देश के केंद्रीय बैंक द्वारा इसकी जांच की जानी चाहिए? चर्चा कीजिए। (10 अंक)
स्रोत: लाइव मिंट
सामान्य अध्ययन–IV
विषय: नैतिकता का अनुप्रयोग
गर्भपात से संबंधित नैतिक मुद्दे
संदर्भ:
हाल ही में, अमेरिका की शीर्ष अदालत ने गर्भपात के अधिकार पर 1973 के ‘रो बनाम वेड’ फैसले (Roe v. Wade Judgment) को पलट दिया।
महिलाओं से जुड़े नैतिक मुद्दे:
- स्वास्थ्य: अनचाहे गर्भ के कारण शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों प्रभावित होते हैं।
- अधिकार और स्वतंत्रता: कोई भी महिला जो स्वेच्छा से गर्भवती होने का विकल्प चुनती है, उसके गर्भपात की संभावना तब तक नहीं होगी जब तक कि कुछ गंभीर मजबूरी परिस्थितियां न हों।
- शारीरिक स्वायत्तता: प्रजनन विकल्पों को खोने के अलावा, गर्भपात पर प्रतिबंध से अवैध और असुरक्षित गर्भपात में वृद्धि हो सकती है। यह निजता के अधिकार (‘पुट्टास्वामी बनाम भारत संघ’ फैसले) के खिलाफ है।
परिवार से जुड़े नैतिक मुद्दे:
- पति/ससुराल पक्ष की पसंद: चूंकि माता-पिता दोनों एक बच्चे को गर्भ धारण करते हैं, गर्भपात कराने पर माता-पिता दोनों की सहमति हो सकती है।
- एक परिवार में अपनाई जाने वाले रूढ़िवादी बनाम उदारवादी मूल्यों के, गर्भपात के संबंध में अलग-अलग मत हो सकते है।
भ्रूण से संबंधित नैतिक मुद्दे:
- जीने का अधिकार: गर्भपात एक जीवित प्राणी की हत्या के बराबर है।
- माता सदृश देखभाल: यह दो जीवनों के बीच साझा किया जाने वाला एक अनूठा अनकहा बंधन है, जिस पर कानूनों द्वारा सवाल नहीं उठाया जा सकता है या विनियमित नहीं किया जा सकता है।
आम तौर पर समाज से जुड़े नैतिक मुद्दे
- जीवन को महत्व देना: प्रत्येक जीवन को महत्व देने की जिम्मेदारी राज्य की होती है।
- सभी को शामिल करना: गर्भपात को सामाजिक नियंत्रण का एक तंत्र नहीं बनना चाहिए ताकि मतभेद या अक्षमताओं की उपस्थिति से बचा जा सके।
- मौजूदा बच्चों के लिए बेहतर जीवन: कई बार माता-पिता चाहते हैं कि गर्भपात, अपने कम संसाधनों को अधिक बच्चों में बांटने के बजाय, मौजूदा बच्चों को एक अच्छा जीवन देने में सक्षम हो सकेगा।
गर्भपात पर भारत का रुख:
गर्भ का चिकित्सकीय समापन (संशोधन) अधिनियम, 2021 (The Medical Termination of Pregnancy (Amendment) Act, 2021) यह सुनिश्चित करता है कि गर्भवती माताएं अपने घरों में नए जीवन का स्वागत करने के लिए आत्मनिर्णय का प्रयोग करें।
मां का जीवन सुरक्षित करने हेतु जोखिम, मानसिक पीड़ा, बलात्कार, अनाचार, गर्भनिरोधक विफलता या भ्रूण की असामान्यताओं के निदान के आधार पर गर्भपात 24 गर्भावधि सप्ताह तक किया जा सकता है। यह जिन देशों में गर्भधारण के बाद से, यहां तक कि यौन शोषण या अनाचार की परिस्थितियों की सबसे अधिक दर्दनाक स्थिति के बाद भी गर्भपात की अनुमति नहीं है, वहां एक उदार उपलब्धि है।
इंस्टा लिंक:
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने गर्भपात के अधिकार को पलटा
स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस
मुख्य परीक्षा संवर्धन हेतु पाठ्य सामग्री (नैतिकता/निबंध)
हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा ‘सिंगल यूज प्लास्टिक निर्मित वस्तुओं’ की खरीद
हिमाचल प्रदेश द्वारा स्कूलों और कॉलेजों में ‘युवाओं’ में पर्यावरण संरक्षण की भावना पैदा करने के लिए छात्रों से ‘एकल-उपयोग वाली प्लास्टिक’ (Single-Use Plastic Items) की वस्तुओं को खरीदने के लिए एक ‘वापस खरीद योजना’ (Buy-Back Scheme) शुरू की जाएगी।
योजना:
- मौद्रिक लाभ: छात्रों को अपने घर से एकल उपयोग वाली प्लास्टिक की वस्तुओं को लाने और स्कूल में जमा करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, जिसके लिए उन्हें सरकार द्वारा ₹ 75 प्रति किलोग्राम का भुगतान किया जाएगा। इस योजना का उद्देश्य युवाओं में पर्यावरण संरक्षण की आदत पैदा करना है। ।
- इको-क्लबों का गठन: राज्य भर में, स्कूलों और 100 कॉलेजों में ‘नेशनल ग्रीन कॉर्प्स कार्यक्रम’ के तहत 3,000 इको-क्लब बनाए गए हैं- ये इको-क्लब छात्र-शिक्षकों का एक संघ हैं जो पर्यावरण जागरूकता और संरक्षण के लिए काम करते हैं। .बचपन में ‘पर्यावरण संरक्षण’ की आदत डालने पर यह आजीवन बनी रह सकती है।
- भागीदारी: छात्रों के अलावा, इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण और शहरी दोनों स्कूलों को कवर करते हुए, इको-क्लब स्कूलों के माध्यम से जिला स्तर पर प्लास्टिक कचरे के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूकता पैदा करके शिक्षकों, स्कूल प्रबंधन समितियों और अभिभावकों को शामिल करना है।
- सड़कों के निर्माण के लिए उपयोग: स्कूलों से एकत्र की गई एकल उपयोग वाली प्लास्टिक की वस्तुओं का उपयोग सड़कों के निर्माण के लिए कोलतार में किया जाएगा। प्लास्टिक बिटुमेन से बनी सड़कें टिकाऊ और लंबे समय तक चलने वाली होती हैं, और यह बेकार प्लास्टिक के निपटान में मदद करेगी।
विशेष रूप से विकलांग बच्चों के लिए विशेष पार्क
हाल ही में, कर्नाटक के कब्बन पार्क में स्थित ‘जवाहरलाल बाल भवन’ में राज्य का पहला ‘विकलांग-अनुकूल पार्क’ (Disabled-Friendly Park) का उद्घाटन किया गया था।
प्रदान की गई सुविधाएं:
- कछुए के आकार में निर्मित पार्क में शारीरिक, मानसिक, चिकित्सीय और स्पर्श और अनुभव गतिविधियों की एक विस्तृत श्रृंखला के लिए विभिन्न क्षेत्र हैं।
- पार्क में व्हीलचेयर पर बैठे बच्चों के लिए विशेष रूप से डिजाइन की गई रेत की मेज और एक विशेष झूला है।
- ‘स्पर्शनीय रास्ते’ (Tactile Pathways) दृष्टिबाधित बच्चों के लिए पार्क के चारों ओर अपना रास्ता बनाना आसान बनाते हैं।
- गिरने से लगने वाली चोटों को कम करने के लिए, खेलने की सभी सतहें एक सिंथेटिक, गैर-विषैले और स्किड-प्रूफ रबर से बनाई गयी हैं, जिसे ‘एथिलीन प्रोपलीन डायन मोनोमर’ (EPDM) कहा जाता है।
ऐसे विकलांग अनुकूल मनोरंजन स्थलों की आवश्यकता:
विशेष बच्चे और उनके माता-पिता पहले से ही पूर्ण और सक्षम जीवन जीने के अपने प्रयास में कई बाधाओं, पूर्वाग्रहों और गलत धारणाओं से जूझ रहे होते हैं। उनकी समस्याओं को बढ़ाने के बजाय, पार्क या ऐसे अन्य स्थानों को, विकलांग बच्चों को अन्य बच्चों की तरह ही मुफ्त और असंरचित खेल और सीखने में सक्षम बनाकर समाधान, का एक हिस्सा बनना चाहिए।
प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य
विश्व संगीत दिवस के अवसर पर ज्योतिर्गमय कार्यक्रम
संदर्भ:
भारत की आजादी के 75 वर्ष हो रहे हैं और इसे याद करने तथा मनाने के क्रम में आजादी के अमृत्व महोत्सव का आयोजन हो रहा है।
- इस सिलसिले में संगीत नाटक अकादमी द्वारा विश्व संगीत दिवस के अवसर पर देशभर के संगीत के दुर्लभ वाद्य-यंत्रों के विषय में एक अनोखे उत्सव – ज्योतिर्गमय – का आयोजन किया गया।
- आयोजन में देश भर के दुर्लभ संगीत वाद्ययंत्रों की प्रतिभा को प्रदर्शित करने के लिए नुक्कड़ फनकारों, हुनरमंदों और मंदिरों से जुड़े कलाकारों आदि को शामिल किया गया था।
- आजादी का अमृत महोत्सव आजादी के 75 साल और इसके लोगों, संस्कृति और उपलब्धियों के गौरवशाली इतिहास को मनाने और मनाने के लिए भारत सरकार की एक पहल है।
6 साल या इसे अधिक की सजा दिए जाने वाले अपराधों की फॉरेंसिक जांच
- सरकार उन सभी मामलों में -जहां अपराध में छह साल या उससे अधिक की सजा का प्रावधान हो- फोरेंसिक जांच को अनिवार्य बनाने की योजना बना रही है।
- फोरेंसिक जांच: यह तथ्यों या सबूतों को स्थापित करने के लिए विज्ञान का उपयोग करने की विधि है, जिसका उपयोग अपराध-आधारित परीक्षण या कार्यवाही के लिए किया जाता है।
आवश्यकता:
गृह मंत्रालय ने भारतीय दंड संहिता, आपराधिक प्रक्रिया संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम में प्रस्तावित व्यापक संशोधनों के माध्यम से प्रत्येक राज्य / केंद्र शासित प्रदेश में एक स्वतंत्र अभियोजन निदेशालय और एक स्वतंत्र फोरेंसिक विज्ञान निदेशालय की स्थापना का प्रस्ताव किया है।
ग्लोबल इंफ्रास्ट्रक्चर एंड इन्वेस्टमेंट के लिए साझेदारी (पीजीआईआई) योजना
- अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन और G7 लीडर्स ने औपचारिक रूप से ‘ग्लोबल इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश के लिए साझेदारी’ (Partnership for Global Infrastructure and Investment – PGII) की शुरुआत की है।
- यह, चीन की ‘बेल्ट एंड रोड’ योजना के जबाब के रूप में देखे जाने वाले कदम में विकासशील दुनिया के लिए $600bn का वित्त जुटाने की योजना है।
- इस पहल को जलवायु परिवर्तन से निपटने, वैश्विक स्वास्थ्य में सुधार, लैंगिक समानता प्राप्त करने और डिजिटल बुनियादी ढांचे के निर्माण की दिशा में तैयार किया जाएगा।
पृष्ठभूमि: ‘आधारभूत संरचना योजना’ का पहली बार अनावरण ब्रिटेन में 2021 जी7 शिखर सम्मेलन में किया गया था। उस समय इसे ‘बिल्ड बैक बेटर वर्ल्ड’ (Build Back Better World) कहा जाता था। जोकि, यूएस-संचालित योजना प्रगति की कमी से लड़खड़ा गई, और 2022 के शिखर सम्मेलन में पुनर्जीवित होने से पहले परियोजना का नाम बदलकर ‘पीजीआईआई’ कर दिया गया।
पर्यावरण डीएनए
- हाल ही में, चाय और सूखी जड़ी बूटियों के नमूनों पर अकशेरुकी जीवों की 1200 से अधिक प्रजातियों का डीएनए पाया गया।
- ‘पर्यावरण डीएनए’ (Environmental DNA – eDNA), पर्यावरण में पाए जाने वाले जीवीय डीएनए होते है। पर्यावरणीय डीएनए, जीवों (त्वचा, मल, आदि के माध्यम से) द्वारा जलीय या स्थलीय वातावरण में छोड़े गए कोशकीय सामग्री से उत्पन्न होते है, जिनकी नए आणविक तरीकों का उपयोग करके नमूना-संग्रह और निगरानी की जा सकती है।
भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) ने इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरियों के प्रदर्शन संबंधी मानक
भारतीय मानक ब्यूरो, जोकि भारत की राष्ट्रीय मानक निकाय है, ने विद्युत चालित सड़क वाहनों के लिथियम-आयन (Lithium-ion : Li-ion) ट्रैक्शन बैटरी पैक एवं सिस्टम (प्रदर्शन परीक्षण) के परीक्षण संबंधी विनिर्देशों के लिए मानक प्रकाशित किए हैं।
- इन बैटरी पैक एवं सिस्टम के मानक आईएस 17855:2022 को आईएसओ 12405-4:2018 के अनुरूप रखा गया है।
- इस मानक में बैटरी पैक एवं सिस्टम के उच्च शक्ति या उच्च ऊर्जा वाले अनुप्रयोग के लिए प्रदर्शन, विश्वसनीयता एवं विद्युत कार्यक्षमता की बुनियादी विशेषता से संबंधित परीक्षण प्रक्रिया शामिल है।
- लिथियम-आयन (Li-ion) बैटरियों को उनके उच्च शक्ति-से-भार अनुपात, उच्च ऊर्जा दक्षता, कम स्व-निर्वहन आदि के कारण सबसे अधिक पसंद किया जाता है।
DRDO जांच: इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों में आग लगने की घटनाओं की जांच करते समय, DRDO ने- मुख्य रूप से लागत में कटौती के लिए कंपनियों द्वारा उपयोग की जाने वाली निम्न-श्रेणी की सामग्री के कारण- बैटरी में गंभीर खामियां पाईं हैं।
भारतीय मानक ब्यूरो (BIS)
- बीआईएस भारत का राष्ट्रीय मानक निकाय है जिसकी स्थापना बीआईएस अधिनियम 2016 के अंतर्गत की गई।
- बीआईएस की स्था्पना वस्तुओं के मानकीकरण, मुहरांकन और गुणता प्रमाणन गतिविधियों के सुमेलित विकास तथा उससे जुडे़ या उससे प्रसंगवश जुड़े मामलों के लिए की गई।
- बीआईएस मानकीकरण, प्रमाणन और परीक्षण द्वारा राष्ट्री य अर्थव्यमवस्थात को प्रत्यक्ष एवं वास्तनविक रूप से कई तरह से लाभ पहुंचा रहा है – यह सुरक्षित विश्वसनीय गुणता वाले उत्पाद प्रदान करता है; उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य जोखिम को न्यून करता है; निर्यात एवं आयात विकल्पों को प्रोत्साहित करता है; किस्मों के प्रसार को नियंत्रित करता है, इत्यादि।
डीएसटी-आईआईएससी ऊर्जा भंडारण प्लेटफ़ॉर्म
भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) के शोधकर्ताओं ने पूर्ण ठोस-अवस्था (सॉलिड – स्टेट) लिथियम मेटल बैटरी में फास्ट चार्ज – डिस्चार्ज की दरों को सक्षम करने के लिए एक अभिनव अंतर्सतही अभियांत्रिक प्रविधि (इंटरफेसियल इंजीनियरिंग एप्रोच) के बारे में जानकारी दी है।
- उन्होंने पाया है कि टंगस्टन जैसी नैनोस्कोपिक दुर्दम्य (रिफ्रैक्टरी) धातु की परतें इन बैटरियों के प्रदर्शन में सुधार कर सकती हैं जो विद्युत गतिशीलता जैसे उद्देश्यों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
- पारंपरिक एलआई -आयन (Li-ion) बैटरी में एक ग्रेफाइट एनोड, एक तरल इलेक्ट्रोलाइट और एक संक्रमण धातु कैथोड का उपयोग किया जाता है। हालांकि तरल इलेक्ट्रोलाइट्स ज्वलनशील होते हैं और उच्च तापमान पर खराब हो जाते हैं जिससे बैटरी का जीवनकाल बिगड़ जाता है और बहुत बार स्थिति बिगड़ने पर बैटरी में आग भी लग जाती है।
- परन्तु, एक सिरेमिक ठोस इलेक्ट्रोलाइट के साथ तरल इलेक्ट्रोलाइट को एक पारंपरिक एलआई -आयन बैटरी में बदलने और उसके साथ ही ग्रेफाइट एनोड के स्थान पर एक धात्वीय लिथियम एनोड के प्रयोग से एलआई-आयन बैटरी सुरक्षित और सक्षम हो सकती है तथा एक बार चार्ज करने पर ही लंबे समय तक चलती है।
रेडियो एक्सेस नेटवर्क
‘टेलीमैटिक्स विकास केंद्र’ / सी-डॉट (centre for the development of telematics – C-DOT), गैलोर नेटवर्क्स के सहयोग से एंड-टू-एंड 5जी रैन उत्पाद विकसित करेगा।
- ‘सी-डॉट’ एक स्वायत्त दूरसंचार अनुसंधान एवं विकास केंद्र और ‘सोसायटी पंजीकरण अधिनियम’ 1860 के तहत एक पंजीकृत सोसायटी है।
- रेडियो एक्सेस नेटवर्क (Radio Access Network – RAN) एक वायरलेस दूरसंचार प्रणाली का एक प्रमुख घटक होता है, जो एक रेडियो लिंक के माध्यम से व्यक्तिगत उपकरणों (जैसे सेल फोन और कंप्यूटर) को नेटवर्क के अन्य भागों से जोड़ता है।
हर्मिट
- हर्मिट (Hermit) नया स्पाइवेयर है जिसमें Android और iOS दोनों उपकरणों को प्रभावित करने की क्षमता है।
- ‘स्पाइवेयर’ एक दुर्भावनापूर्ण सॉफ़्टवेयर होते हैं जो उपयोगकर्ता के कंप्यूटर में प्रवेश करके, डिवाइस और उपयोगकर्ता से डेटा एकत्र करते है, और इसे उनकी सहमति के बिना तीसरे पक्ष को भेज देते हैं।
वायु गुणवत्ता
- भारत का राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता संसाधन फ्रेमवर्क (National Air quality Resource Framework of India – NARFI): यह भारत के विभिन्न जलवायु क्षेत्रों में वायु प्रदूषण के मुद्दों को संबोधित करने के लिए सरकारी और निजी क्षेत्रों में निर्णय लेने वालों की मदद करेगा।
- द्वारा विकसित: इसे प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय के सहयोग से ‘राष्ट्रीय उन्नत अध्ययन संस्थान’ (National Institute of Advanced Studies – NIAS), बेंगलुरु द्वारा विकसित किया गया है।
- वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM): यह 2020 में NCR और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए स्थापित एक वैधानिक निकाय है।
सनस्पॉट
- पृथ्वी के सामने सीधा उन्मुख एक विशाल सनस्पॉट (Sunspot) पृथ्वी के आकार का दोगुना हो गया है और इसकी चौड़ाई केवल 24 घंटों में दोगुनी हो गई है।
- ‘सनस्पॉट’ सूर्य की सतह पर काले दिखाई देने वाले ‘धब्बे-नुमा’ क्षेत्र होते हैं। ये क्षेत्र सूर्य की सतह के अन्य भागों की तुलना में ठंडे होते हैं।
- ‘सोलर फ्लेयर्स’ सनस्पॉट के समीप चुंबकीय क्षेत्र की रेखाओं के उलझने, क्रॉसिंग या पुनर्गठित होने के कारण होने वाला ऊर्जा का एक अचानक विस्फोट होता है।
उदयपुर के ‘बर्ड विलेज‘ को वेटलैंड घोषित किया जाना तय
- समुदाय द्वारा संचालित संरक्षण प्रयासों के बाद “पक्षी गांव” के रूप में मान्यता प्राप्त, उदयपुर जिले के मेनार (Menar) को राजस्थान की नई आर्द्रभूमि के रूप में अधिसूचित किया जाना तय है। इससे मेवाड़ क्षेत्र के इस ग्रामीण क्षेत्र को रामसर स्थल का दर्जा मिलने का मार्ग प्रशस्त होगा।
- वर्तमान में, राजस्थान में रामसर स्थलों के रूप में मान्यता प्राप्त दो आर्द्रभूमि- भरतपुर जिले में केवलादेव घाना और जयपुर जिले में सांभर साल्ट लेक- हैं।
केरल में पक्षियों की लाल सूची
केरल में जल्द ही पक्षियों की अपनी लाल सूची (Red list of birds) होगी।
केरल कृषि विश्वविद्यालय और ‘बर्ड काउंट इंडिया’ के नेतृत्व में ‘केरल बर्ड मॉनिटरिंग कलेक्टिव’ क्षेत्रीय ‘रेड लिस्ट’ मूल्यांकन करेगा। एक बार यह तैयार हो जाने के बाद, केरल पक्षियों की क्षेत्र-विशिष्ट लाल सूची वाला पहला राज्य होगा।
- आईयूसीएन सूची से जुड़े मुद्दे: वैश्विक मूल्यांकन की कुछ सीमाएं होती हैं क्योंकि यह एक वैश्विक संदर्भ में तैयार की गई प्रक्रिया है। वैश्विक स्तर पर सामान्य रूप से देखी जाने वाली प्रजाति क्षेत्रीय स्तर पर संकटग्रस्त प्रजाति हो सकती है।
- वैश्विक IUCN लाल सूची के अनुसार, केरल में पक्षियों की 64 संकटग्रस्त प्रजातियां हैं। उसमें लाल सिर वाले गिद्ध और सफेद दुम वाले गिद्ध गंभीर रूप से संकटग्रस्त हैं। स्टेपी ईगल, बाणासुर चिलप्पन और नीलगिरि चिलप्पन लुप्तप्राय हैं और 11 प्रजातियां असुरक्षित हैं।
अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN), 1964 में स्थापित संकटग्रस्त प्रजातियों की लाल सूची, जैविक प्रजातियों की वैश्विक संरक्षण स्थिति की दुनिया की सबसे व्यापक सूची है।
लाल सूची तैयार करने के लिए IUCN दिशानिर्देशों में पांच मुख्य मानदंड हैं।
- 10 वर्षों या तीन पीढ़ियों में मापी गई जनसंख्या आकार में कमी
- घटना की सीमा या अधिभोग के क्षेत्र के आधार पर भौगोलिक सीमा
- छोटी आबादी का आकार और गिरावट
- बहुत कम या प्रतिबंधित आबादी
- जंगल में विलुप्त होने की संभावना
टेक्सटाइल पार्क
केंद्र सरकार द्वारा नौकरियों के सृजन और उच्च कपड़ा निर्यात का सहयोग करने के लिए तिरुपुर की तर्ज पर देश भर में 75 टेक्सटाइल हब बनाए जाने की योजना है।
- तिरुप्पुर मामला: 2021-2022 में तिरुपुर का परिधान निर्यात ₹30,000 करोड़ था। तिरुपुर में कपड़ा उद्योग ने छह लाख लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार और चार लाख लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार प्रदान किया। साथ ही, इन श्रमिकों में लगभग 70% महिलाएं और हाशिए के वर्गों के लोग शामिल थे।
- भारत की स्थिति: देश में कपड़ा मूल्य श्रृंखला में लगभग चार करोड़ लोग कार्यरत है। अध्ययन के अनुसार, कृषि के बाद कपड़ा और वस्त्र क्षेत्र भारत में दूसरा सबसे बड़ा रोजगार पैदा करने वाला क्षेत्र है। भारत परिधान, घरेलू और तकनीकी उत्पादों का दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा निर्यातक है।
- पीएम मित्रा: सरकार सात ‘मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन और अपैरल’ (पीएम मित्रा) पार्क स्थापित करेगी। MITRA पार्क का उद्देश्य कताई, बुनाई, प्रसंस्करण / रंगाई और छपाई से लेकर परिधान निर्माण तक की संपूर्ण कपड़ा मूल्य श्रृंखला को एक स्थान पर एकीकृत करना है।
























