[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 16 June 2022

विषयसूची

सामान्य अध्ययन-I

  1. भूगोल एवं ज्वालामुखी घटनाओं की बेहतर समझ हेतु पृथ्वी की विवर्तनिक प्लेटों का नया मानचित्र

 

सामान्य अध्ययन-II

  1. राष्ट्रपति चुनाव के लिए 17 विपक्षी दलों का संयुक्त उम्मीदवार
  2. चीन द्वारा आयोजित बैठक में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की भागीदारी
  3. तोड़फोड़ अभियान एवं विधि के शासन को चुनौती

 

सामान्य अध्ययन-III

  1. विश्व व्यापार संगठन में प्रस्तावित सुधार विकासशील देशों के लिए हानिकारक: भारत
  2. 5G से ‘महत्वपूर्ण’ प्रगति

 

सामान्य अध्ययन-IV

  1. राजनीति प्लस या माइनस नैतिकता

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

  1. क्रांति गाथा
  2. कोडवा
  3. सुपर मून
  4. LaMDA

 


सामान्य अध्ययनI


 

विषय: भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखीय हलचल, चक्रवात आदि जैसी महत्त्वपूर्ण भू-भौतिकीय घटनाएँ, भौगोलिक विशेषताएँ और उनके स्थान- अति महत्त्वपूर्ण भौगोलिक विशेषताओं (जल-स्रोत और हिमावरण सहित) और वनस्पति एवं प्राणिजगत में परिवर्तन और इस प्रकार के परिवर्तनों के प्रभाव।

भूगोल एवं ज्वालामुखी घटनाओं की बेहतर समझ हेतु पृथ्वी की विवर्तनिक प्लेटों का नया मानचित्र


संदर्भ: ऑस्ट्रेलिया के ‘एडिलेड विश्वविद्यालय’ के शोधकर्ताओं द्वारा एक नवीन अध्ययन किया गया है, जिसमें पृथ्वी की विवर्तनिक / टेक्टोनिक प्लेटों (Tectonic Plates) का एक अद्यतन मानचित्र शामिल है।

प्लेट टेक्टोनिक: ‘यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे’ के अनुसार, एक टेक्टोनिक प्लेट, “ठोस चट्टानों का एक विशाल, अनियमित आकार का, ‘लिथोस्फीयर’ या पृथ्वी की ऊपरी परत से निर्मित ‘खंड’ या ‘स्लैब’ होती है”। ‘विवर्तनिक प्लेटों’ की गति प्रायः भूकंप और ज्वालामुखी घटनाओं का कारण बनती है।

Current Affairs

 

आवश्यकता:

  • विवर्तनिक प्लेटों यह नया मानचित्र, भूकंप और ज्वालामुखियों जैसे प्राकृतिक खतरों की बेहतर समझ बनाने में मदद करेगा।
  • भू-खतरों संबंधी जोखिम मॉडलों में सुधार के लिए ‘प्लेट मॉडल’ का उपयोग किया जा सकता है; पर्वत-निर्माणक मॉडल / ऑरोजेनी मॉडल (Orogeny Model) भू-गतिकी प्रणालियों को समझने में मदद करता है और बेहतर मॉडल का पृथ्वी के विकास तथा क्षेत्रीय मॉडल का उपयोग खनिजों के लिए पूर्वेक्षण में सुधार के लिए किया जा सकता है

नए मानचित्र निर्माण हेतु उपयोग की जाने वाली तकनीकें:

विवर्तनिक मानचित्र बनाने के लिए, टीम ने तीन ‘भूवैज्ञानिक मॉडलों’- पहले से ज्ञात प्लेट सीमाओं के आधार पर एक ‘प्लेट मॉडल’ (Plate Model), पृथ्वी की सतह के भूविज्ञान पर आधारित एक ‘क्षेत्रीय मॉडल’ (Province Model) तथा पर्वत-निर्माण प्रक्रियाओं द्वारा विरूपित क्षेत्रों पर आधारित ‘ऑरोजेनी मॉडल’ – का संयुक्त रूप से इस्तेमाल किया।

परिवर्तन:

नए ‘प्लेट मॉडल’ में तस्मानिया के दक्षिण में स्थित ‘मेक्वैर माइक्रोप्लेट’ (Macquarie microplate) और भारतीय और ऑस्ट्रेलियाई प्लेटों को अलग करने वाली ‘कैप्रकॉर्न माइक्रोप्लेट’ (Capricorn microplate) सहित कई नए माइक्रोप्लेट शामिल हैं।

 


सामान्य अध्ययनII


 

विषय: विभिन्न संवैधानिक पदों पर नियुक्ति और विभिन्न संवैधानिक निकायों की शक्तियाँ, कार्य और उत्तरदायित्व।

राष्ट्रपति चुनाव के लिए 17 विपक्षी दलों का संयुक्त उम्मीदवार


संदर्भ:

राष्ट्रपति चुनाव के लिए संयुक्त उम्मीदवार खड़ा करने पर विचार-विमर्श हेतु पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री द्वारा आयोजित बैठक में 17 विपक्षी दलों ने भाग लिया।

राष्ट्रपति के संबंध में संवैधानिक प्रावधान:

  • संविधान के भाग V (संघ) के अध्याय I (कार्यकारिणी) के अंतर्गत, भारत के राष्ट्रपति की योग्यता, निर्वाचन और महाभियोग संबंधी प्रावधानों को सूचीबद्ध किया गया है।
  • भारत का राष्ट्रपति ‘भारत गणराज्य’ का प्रमुख होता है।
  • राष्ट्रपति, भारत की कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका का औपचारिक प्रमुख होता है और भारतीय सशस्त्र बलों का ‘कमांडर-इन-चीफ’ भी होता है।
  • अनुच्छेद 54: राष्ट्रपति का निर्वाचन।
  • अनुच्छेद 55: राष्ट्रपति के निर्वाचन की रीति।
  • अनुच्छेद 56: राष्ट्रपति के पद का कार्यकाल।
  • अनुच्छेद 57: पुनर्निर्वाचन के लिए पात्रता।
  • अनुच्छेद 58: राष्ट्रपति के रूप में निर्वाचन के लिए योग्यता।

राष्ट्रपति का निर्वाचन किस प्रकार होता है?

  • भारत के राष्ट्रपति का चुनाव एक ‘निर्वाचक मंडल प्रणाली’ के माध्यम से किया जाता है, जिसमें राष्ट्रीय और राज्य स्तर के विधि-निर्माताओं द्वारा मतदान किया जाता है।
  • राष्ट्रपति चुनाव, भारत के निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) द्वारा आयोजित और निगरानी में किए जाते हैं।

निर्वाचक मंडल में निम्नलिखित मतदाता शामिल होते हैं:

  • संसद के ऊपरी और निचले सदनों के सभी निर्वाचित सदस्य (राज्य सभा और लोकसभा सांसद)
  • राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य।

निर्वाचन प्रक्रिया:

  • मतदान से पहले, नामांकन चरण में चुनाव में खड़े होने के इच्छुक उम्मीदवार द्वारा, 50 प्रस्तावकों और 50 अनुमोदकों की हस्ताक्षरित सूची के साथ नामांकन दाखिल किया जाता है।
  • राज्य और राष्ट्रीय स्तर के निर्वाचक मंडल के कुल सदस्यों में से कोई भी ‘प्रस्तावक और अनुमोदक’ हो सकते हैं।
  • निर्वाचन आयोग द्वारा 50 प्रस्तावकों और अनुमोदकों की आवश्यकता संबंधी नियम वर्ष 1974 में लागू किया गया था। इससे पहले कई उम्मीदवार, जिनमें से कई के जीतने की संभावना भी कम होती थी, वे भी चुनाव लड़ने के लिए अपना नामांकन दाखिल कर देते थे।
  • एक निर्वाचक, एक से अधिक उम्मीदवारों के नामांकन का प्रस्ताव या अनुमोदन नहीं कर सकता है।

प्रत्येक मत का मूल्य एवं इसकी गणना:

Current Affairs

 

  • प्रत्येक सांसद या विधायक द्वारा डाले गए वोट की गणना ‘एक वोट’ के रूप में नहीं की जाती है।
  • राज्यसभा और लोकसभा के सदस्य के मत का मूल्य 708 निर्धारित किया गया है।
  • जबकि, प्रत्येक विधायक के वोट का मूल्य, गणना के आधार पर एक राज्य से दूसरे राज्य में भिन्न होता है, जोकि विधानसभा में सदस्यों की संख्या एवं राज्य की जनसंख्या के अनुपात में होता है।
  • प्रत्येक विधायक के वोट का मूल्य, राज्य की जनसँख्या को विधानसभा में विधायकों की संख्या से विभाजित करके, और प्राप्त भागफल को 1000 से विभाजित करके निर्धारित किया जाता है।
  • उत्तर प्रदेश राज्य के प्रत्येक विधायक का वोट मूल्य सबसे अधिक अर्थात 208 है।
  • महाराष्ट्र में एक विधायक के वोट का मूल्य 175 है, जबकि अरुणाचल प्रदेश में विधायक के वोट का मूल्य सिर्फ 8 है।

राष्ट्रपति चुनाव में जीत सुनिश्चित करने के लिए आवश्यकताएँ:

  • राष्ट्रपति चुनाव में, एक उम्मीदवार साधारण बहुमत के आधार पर जीत हासिल नहीं करता है बल्कि ‘वोटों का एक विशिष्ट कोटा हासिल करने’ की प्रणाली के माध्यम से जीत हासिल करता है।
  • मतगणना के दौरान, चुनाव आयोग, निर्वाचक मंडल द्वारा मतपत्रों के माध्यम से डाले गए सभी वैध मतों का योग करता है और जीतने के लिए उम्मीदवार को डाले गए कुल मतों का 50% + 1 प्राप्त करना अनिवार्य होता है।
  • आम चुनावों के विपरीत, जहां मतदाता एक पार्टी के उम्मीदवार को वोट देते हैं, निर्वाचक मंडल के मतदाता मतपत्र पर उम्मीदवारों के नाम वरीयता क्रम में लिखते हैं।
  • राष्ट्रपति का चुनाव ‘आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली’ के अनुसार ‘एकल संक्रमणीय मत’ के माध्यम से होता है और मतदान ‘गुप्त मतदान’ पद्धति से होता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. राष्ट्रपति की शक्तियां
  2. राष्ट्रपति का चुनाव
  3. राष्ट्रपति के चुनाव से संबंधित अनुच्छेद
  4. इलेक्टोरल कॉलेज / निर्वाचक मंडल
  5. राष्ट्रपति चुनाव में एक वोट के मूल्य की गणना

मेंस लिंक:

भारत में राष्ट्रपति का चुनाव किस प्रकार होता है? क्या इस प्रक्रिया में सुधार की आवश्यकता है? विश्लेषण कीजिए।

 

विषय: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार।

चीन द्वारा आयोजित बैठक में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की भागीदारी


संदर्भ:

हाल ही में चीनी ‘राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार’ द्वारा आयोजित एक वर्चुअल ‘ब्रिक्स बैठक’ में ‘भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार’ (National Security Adviser – NSA) ‘अजीत डोभाल’ ने भाग लिया। इस बैठक का उद्देश्य ‘ब्रिक्स’ (BRICS) सदस्यों के बीच “राजनीतिक और सुरक्षा सहयोग” को मजबूत करना था।

बैठक के दौरान भारत द्वारा की गयी सिफारिशें:

  • बिना किसी शर्त के आतंकवाद संबंधी मामलो पर सहयोग।
  • आतंकवादियों द्वारा सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) के उपयोग पर रोक।
  • बहुपक्षीय प्रणाली में तत्काल सुधार की आवश्यकता।
  • अनुकूलित आपूर्ति श्रृंखलाओं का महत्व।

ब्रिक्स: सहयोग क्षेत्र

  • आर्थिक सहयोग
  • लोगों से लोगों का आदान-प्रदान
  • राजनीतिक और सुरक्षा सहयोग
  • सहयोग तंत्र

न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB):

  • मुख्यालय: शंघाई, चीन।
  • स्थापना: वर्ष 2014 में, ब्राजील के फोर्टालेजा में आयोजित 6 वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान की गई थी।
  • न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB), ब्रिक्स सदस्यों के बीच एक परामर्शी तंत्र पर कार्य करता है जिसमें सभी सदस्य देश समान अधिकार रखते हैं।

भारत और चीन के बीच विवाद: गलवान घाटी

गलवान घाटी क्षेत्र, लद्दाख़ और अक्साई चीन के मध्य भारत-चीन सीमा के निकट है। इसी क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा अक्साई चीन को भारत से विभाजित करती है।

  • गलवान नदी (Galwan River) का स्रोत नियंत्रण सीमा पार चीन की ओर स्थित अक्साई चिन में है, और यह पूर्व से लद्दाख की ओर बहती है, जहां यह नियंत्रण सीमा के पार भारत की ओर श्योक नदी से मिलती है।
  • गलवान घाटी, पश्चिम में लद्दाख और पूर्व में अक्साई चिन (वर्तमान में चीन द्वारा नियंत्रित) के बीच रणनीतिक रूप से स्थित है।

Current Affairs

प्रीलिम्स लिंक:

  1. BRICS क्या है?
  2. न्यू डेवलपमेंट बैंक
  3. फोर्टालेजा घोषणा
  4. आकस्मिक आरक्षित व्यवस्था (Contingent reserve arrangement)
  5. LAC का मानचित्र (गलवान वैली, हॉट स्प्रिंग)

ब्रिक्स के बारे में अधिक जानने के लिए पढ़िए।

मेंस लिंक:

क्या आपको लगता है कि ब्रिक्स अपने सदस्यों की सुरक्षा और विकास हितों को बनाए रखने में अब तक सक्षम रहा है और विश्व शांति और स्थिरता में योगदान देता है? समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

 

विषय: शासन व्यवस्था, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्त्वपूर्ण पक्ष, ई-गवर्नेंस- अनुप्रयोग, मॉडल, सफलताएँ, सीमाएँ और संभावनाएँ; नागरिक चार्टर, पारदर्शिता एवं जवाबदेही और संस्थागत तथा अन्य उपाय।

 तोड़फोड़ अभियान एवं विधि के शासन को चुनौती


संदर्भ:

हाल ही में पैगम्बर मुहम्मद पर टिप्पणी को लेकर हुए विवाद के बाद शुरू किए गया ‘तोड़फोड़ अभियान’ (Demolition Drives), विधि (कानून) के कुछ बुनियादी सिद्धांतों को चुनौती दे सकता है, जिसमें किसी व्यक्ति को ‘पहले उसका पक्ष सुने जाने का अधिकार’ भी शामिल है।

राज्य, किसी व्यक्ति को उसकी संपत्ति से केवल उचित प्रक्रिया का पालन करने के बाद और संविधान के अनुच्छेद 300A के तहत अधिदेशित वैध कानूनी प्राधिकार के तहत ही वंचित कर सकता है।

विधि का शासन:

विधि या कानून का शासन (Rule of law) एक कानूनी सिद्धांत है, जिसके अनुसार- राष्ट्र का शासन, किसी वैयक्तिक या अकेले सरकारी अधिकारियों के मनमाने निर्णयों के बजाय, ‘कानून’ (विधि) के अनुसार होना चाहिए।

यह सिद्धांत, मुख्य रूप से समाज के भीतर ‘कानून’ के प्रभाव और अधिकार – विशेष रूप से सरकारी अधिकारियों के व्यवहार पर नियंत्रण- को संदर्भित करता है।

‘विधि के शासन’ सिद्धांत की उत्पत्ति इंग्लैंड में हुई है, और इसे ए.वी. डाइसी ने प्रतिपादित किया था। इसके 3 मूलभूत सिद्धांत हैं:

  1. मनमानी शक्ति का अभाव (Absence of arbitrary power): अर्थात किसी भी व्यक्ति को केवल ‘कानून का उल्लंघन’ करने पर ही दंडित किया जा सकता है, इसके अलावा किसी भी व्यक्ति को दंडित नहीं किया जा सकता है।
  2. विधि के समक्ष समानता (Equality before the law): सभी नागरिकों (अमीर या गरीब, उच्च या निम्न, आधिकारिक या गैर-सरकारी) पर सामान्य कानून अदालतों द्वारा प्रशासित ‘भूमि के सामान्य कानून’ समान रूप से लागू होंगे।
  3. व्यक्तियों के अधिकारों की प्रधानता: अर्थात्, व्यक्तिगत अधिकारों का स्रोत होने के बजाय, संविधान ‘कानून की अदालतों’ द्वारा परिभाषित और लागू किए जाने वाले ‘व्यक्ति के अधिकारों’ का परिणाम है।

Current Affairs

 

अनुच्छेद 300A:

  • इसमें कहा गया है कि “किसी व्यक्ति को उसकी संपत्ति से विधि के प्राधिकार से ही वंचित किया जाएगा, अन्यथा नहीं।“
  • यह प्रावधान, किसी व्यक्ति को राज्य के हस्तक्षेप से बचाता है और कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुरूप नहीं होने पर, किसी व्यक्ति को उसकी संपत्ति से बेदखल करता है।
  • ‘संपत्ति का अधिकार’ अब मौलिक अधिकार नहीं है, बल्कि यह एक संवैधानिक अधिकार है और यह अनुच्छेद 300A में मौजूद है।
  • संविधान के 44वें संशोधन अधिनियम 1978 के माध्यम से आपातकाल के तुरंत बाद ‘अनुच्छेद 300A’ को शामिल किया गया था।
  • ‘के.टी. प्लांटेशन प्रा. लिमिटेड बनाम कर्नाटक राज्य’, 2011 मामले में, शीर्ष अदालत ने माना कि संविधान के अनुच्छेद 300A के तहत किसी व्यक्ति को उसकी संपत्ति से वंचित करने के लिए ‘सार्वजनिक उद्देश्य’ एक पूर्व शर्त है, और ‘मुआवजे का दावा करने का अधिकार’ भी उस अनुच्छेद में अंतर्निहित है।
  • अनुच्छेद 300A के तहत ‘संपत्ति का अधिकार’ एक मानव अधिकार है (सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश)

प्रीलिम्स लिंक:

  1. विधि का शासन
  2. अनुच्छेद 14
  3. अनुच्छेद 300A
  4. इस्लाम में पैगंबर मोहम्मद

मेंस लिंक

‘विधि के शासन’ से आप क्या समझते हैं? भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में ‘विधि के शासन’ को बनाए रखने में आने वाली कुछ चुनौतियों पर चर्चा कीजिए।

 


सामान्य अध्ययनIII


 

विषय: उदारीकरण का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव, औद्योगिक नीति में परिवर्तन तथा औद्योगिक विकास पर इनका प्रभाव।

विश्व व्यापार संगठन में प्रस्तावित सुधार विकासशील देशों के लिए हानिकारक: भारत


संदर्भ:

भारत ने चिंता व्यक्त की है, कि ‘विश्व व्यापार संगठन’ (WTO) में सुधार संबंधी कुछ सुझाव अंततः विकासशील देशों को अधिक नुकसान पहुंचा सकते हैं।

विश्व व्यापार संगठन में भारत द्वारा उठाई गई चिंताएं:

  • मत्स्य पालन और ई-कॉमर्स के मुद्दों पर: सब्सिडी को हटाने से मछुआरों को नुकसान होगा। इसलिए, भारत ने हानिकारक सरकारी ‘मत्स्य सब्सिडी’ पर रोक लगाने के लिए 20 साल की बातचीत पर व्यापक छूट दिए जाने की मांग की है।
  • भारत, अपने मत्स्यन उद्योग के लिए ‘व्यापक छूट’ दिए जाने की मांग कर रहा है, जिसमें 25 साल की चरणीय-अवधि और अपने मछुआरों के लिए 200-नॉटिकल-मील तक छूट दिए जाने की मांग शामिल है।
  • ई-कॉमर्स: भारत को डर है कि, नए नियम विदेशी कंपनियों को अनुचित रूप से बाजार तक अनिवार्य पहुंच का बहाना दे सकते हैं। इससे तेजी से बढ़ते घरेलू ई-कॉमर्स क्षेत्र को नुकसान होगा, जोकि अभी भी भारत में विकसित हो रहा है।
  • खाद्य-पदार्थ संबंधी: विश्व व्यापार संगठन को विकासशील और गरीब देशों में गरीब नागरिकों को भोजन प्रदान करने के उद्देश्य से सरकार समर्थित खाद्य खरीद कार्यक्रमों के लिए सब्सिडी नियमों पर फिर से बातचीत करनी चाहिए।
  • भारत आश्वासन चाहता है कि उसका सार्वजनिक ‘स्टॉक-होल्डिंग कार्यक्रम’ – जिसके तहत विशेष रूप से देश के किसानों से खरीद की जाती है और अतीत में निर्यात भी किया जाता था- को विश्व व्यापार संगठन में ‘अवैध’ के रूप में चुनौती नहीं दी जा सकती है।
  • टीकाकरण संबंधी: भारत, टीकों (vaccines) के लिए ‘आईपी अधिकारों’ को स्थगित करना चाहता है और ‘डिजिटल शुल्कों’ पर ‘विश्व व्यापार संगठन’ द्वारा लगाए गए प्रतिबंध का विस्तार करना चाहता है।
  • विशेष और विभेदक व्यवहार (Special and differential treatment) को जारी रखना: ऐसा व्यवहार सभी विकासशील सदस्यों के लिए एक ‘संधि-अंतर्निहित’ और ‘गैर-परक्राम्य’ (Non-Negotiable) अधिकार रहा है।
  • अलंघनीय सिद्धांत: यह सुनिश्चित किया जाए कि बहुपक्षीय नियम बनाने की प्रक्रियाओं को न तो दरकिनार किया जाए और न ही कमजोर किया जाए। गैर-भेदभाव, पूर्वानुमेयता, पारदर्शिता के सिद्धांत और सबसे महत्वपूर्ण बात, सर्वसम्मति से निर्णय लेने की परंपरा को अलंघनीय (sacrosanct) रहने की आवश्यकता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. विश्व व्यापार संगठन के बारे में अधिक जानने हेतु पढ़िए।

मेंस लिंक:

  1. विश्व व्यापार संगठन के सामने आने वाले मुद्दे और सुझाए गए सुधार
  2. विश्व व्यापार संगठन आज अपनी ही सफलता का शिकार हो गया है. आलोचनात्मक चर्चा करें।

स्रोत: इकोनॉमिक टाइम्स

 

विषय: बुनियादी ढाँचाः ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि।

 5G से ‘महत्वपूर्ण’ प्रगति


संदर्भ:

हाल ही में, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 5G स्पेक्ट्रम की नीलामी का रास्ता साफ कर दिया है।

स्पेक्ट्रम नीलामी से लाभ:

  • नए मार्ग: नीलामी और बोली लगाने के लिए निर्धारित नियमों से, गहरी पैठ, पहुंच और समृद्ध उपयोगकर्ता अनुभव के नए रास्ते खुलेंगे।
  • सौंप देने का विकल्प (Option of surrender): ऑपरेटरों को, बिना किसी देनदारी के 10 साल बाद ‘स्पेक्ट्रम सरेंडर’ करने की छूट होगी।
  • व्यापक विकल्प: सभी बैंडों में स्पेक्ट्रम की व्यापक उपलब्धता से संभावित बोली प्रदाताओं को अपनी रणनीति के अनुसार ‘स्पेक्ट्रम बैंड’ और ‘क्वांटम’ चुनने में मदद मिलेगी।
  • कैप्टिव 5G नेटवर्क से लाभ: कैप्टिव नेटवर्क डिजिटल परिवर्तन को बढ़ावा देगा और उद्योग की क्षमता में वृद्धि करेगा तथा अधिक आर्थिक लाभ की ओर अग्रसर करेगा।
  • मिलीमीटर-वेवबैंड: मिलीमीटर-वेवबैंड (Millimetre-waveband) की नीलामी, न केवल 5जी की ‘वास्तविक’ क्षमता को अनलॉक करने में मदद करेगी, बल्कि ऑपरेटरों के लिए रणनीतिक रूप से लागत का प्रबंधन करने में भी मदद करेगी।

Current Affairs

 

‘स्पेक्ट्रम नीलामी’ क्या है?

स्पेक्ट्रम नीलामी (Spectrum Auction) प्रक्रिया के तहत, सरकार विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम के विशिष्ट बैंडो पर सिग्नलों को प्रसारित करने के अधिकार बेचने और दुर्लभ स्पेक्ट्रम संसाधनों व्यावसायिक समूहों को सौपनें के लिए नीलामी पद्धति का उपयोग करती है।

भारत में स्पेक्ट्रम की नीलामी

सेलफोन और तार की लाइन वाले टेलीफोन जैसे उपकरणों को परस्पर एक दूसरे से जुड़ने के लिए संकेतों (Signals) की आवश्यकता होती है। ये सिग्नल वायु-तरंगो (Airwaves) पर कार्य करते हैं तथा बाधा-रहित संचरण के लिए इन संकेतों को निर्दिष्ट आवृत्तियों पर भेजा जाता है।

  • देश की भौगोलिक सीमाओं के भीतर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सभी परिसंपत्तियों पर केंद्र सरकार का स्वामित्व होता है, इसमें वायुतरंगे एयरवेव भी शामिल होती हैं।
  • सेलफोन, वायरलाइन टेलीफोन और इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या में वृद्धि होने के साथ ही समय-समय पर इन संकेतों को अधिक स्थान दिए जाने की आवश्यकता होती है।
  • इन संकेतो के प्रसारण हेतु अवसंरचना निर्माण करने की इच्छुक कंपनियों के लिए इन परिसंपत्तियों को बेचने हेतु केंद्र सरकार दूरसंचार विभाग (DoT) के माध्यम से समय-समय पर वायुतरंगों की नीलामी करती है।
  • इन वायुतरंगों को स्पेक्ट्रम कहा जाता है। ये स्पेक्ट्रम अलग-अलग आवृत्तियों वाले बैंड्स में उप-विभाजित होते हैं।
  • इन सभी वायुतरंगों को एक निश्चित अवधि के लिए बेचा जाता है। आम तौर पर यह अवधि 20 वर्ष निर्धारित की जाती है, तथा अवधि पूरी होने के बाद इनकी वैधता समाप्त हो जाती है।

प्रीलिम्स लिंक:

5G तकनीक के बारे में अधिक जानने के लिए पढ़िए।

मेंस लिंक:

पिछली मोबाइल तकनीक की तुलना में 5G तकनीक के लाभों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: बुनियादी अर्थशास्त्र

मुद्रास्फीति पर काबू पाने के लिए अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा 75 बीपीएस की वृद्धि


संदर्भ:

अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा, हाल ही में, लगभग 30 वर्षों में सबसे अधिक आक्रामक ब्याज दर वृद्धि की घोषणा की गयी है, जिससे ‘बेंचमार्क उधार दर’ में 0.75 प्रतिशत अंकों की वृद्धि हुई है।

मूल बातें:

  • ब्याज दर बढ़ने से अमेरिकी बांड अधिक आकर्षक बनेंगे और निवेशक/नागरिक खर्च करने के बजाय उनमें निवेश करेंगे।
  • साथ ही उधारी महंगी हो जाएगी, इससे महंगाई पर लगाम लगेगी।
  • साथ ही ‘इमर्जिंग मार्केट’ से विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) पना पैसा निकालकर यूएस बॉन्ड में निवेश कर सकते हैं। इससे अमेरिकी मुद्रा, दूसरों के मुकाबले मजबूत होगी।

भारत पर प्रभाव:

इसका भारत पर त्रिस्तरीय प्रभाव हो सकता है।

  1. जब फेडरल रिजर्व द्वारा अपनी नीतिगत दरों में वृद्धि की जाती है, तो भारत और अमेरिका, दोनों देशों की ब्याज दरों के बीच का अंतर कम हो जाता है, इस प्रकार, भारत जैसे देशों के लिए मुद्रा-व्यापार जारी रखना कम आकर्षक बना देता है।
  2. अमेरिकी ऋण बाजारों में ‘अधिक रिटर्न’ मिलने से, भारत से विदेशी निवेशकों का पलायन भी हो सकता है।
  3. यह अमेरिकी डॉलर की तुलना में भारतीय मुद्रा को कमजोर कर सकता है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


सामान्य अध्ययनIV


 

विषय: राजनीतिक नैतिकता

राजनीति प्लस या माइनस नैतिकता


(Politics plus or minus ethics)

संदर्भ:

विश्व भर में हाल की घटनाओं जैसे- रूस-यूक्रेन युद्ध, नूपुर शर्मा मामला आदि ने राजनीति में नैतिकता के अभाव के मुद्दे को उजागर कर दिया है।

परिभाषा: ‘राजनीतिक नैतिकता’ (Political Ethics) का तात्पर्य, जनता की भलाई के लिए कार्य करना और निर्णय लेने के तरीकों के मार्गदर्शन हेतु ‘नैतिक निर्णय’ लेने से है।

राजनीतिक नैतिकता के संबंध में विभिन्न दृष्टिकोण:

  1. राजनीति और नैतिकता पूरी तरह से भिन्न हैं।

राजनीति को ‘सत्ता के लिए निरंतर संघर्ष’ की स्थिति माना जाता है और इस प्रकार राजनेता, इस लक्ष्य में बाधा डालने वाले कुछ अमूर्त नैतिक सिद्धांतों से बंधे नहीं हो सकते।

उदाहरण: दक्षिण भारतीय फिल्म “जन गण मन” में इस मुद्दे को स्पष्ट रूप से उजागर किया गया है कि कैसे राजनेता नैतिकता से अलग होकर और सार्वजनिक भावनाओं के साथ खेलकर सत्ता हासिल करते हैं।

  1. ‘नैतिकता’, ‘राजनीति’ का अभिन्न अंग है

‘अरस्तू’ का मानना ​​​​था कि नैतिकता और राजनीति का गहरा संबंध है। नैतिकता व्यक्ति की भलाई की जांच करती है, जबकि राजनीति राज्य की भलाई की जांच करती है।

उदाहरण: भारतीय संविधान इस बात का एक प्रमुख उदाहरण है कि किस प्रकार नैतिकता, राजनीति का अभिन्न अंग है।

  1. नैतिकता के बिना ‘राजनीति’ विनाशकारी है।

हाल की विभिन्न घटनाओं के परिणाम, देश और जनता पर व्यापक रूप से प्रभाव डालते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, ‘राजनेता’ भी लोक सेवक होते हैं – उनके कार्य जनता की भलाई के लिए होने चाहिए और उनकी राय किसी समुदाय के प्रति असंवेदनशील नहीं होनी चाहिए।

उदाहरण: रूस-यूक्रेन युद्ध, नूपुर शर्मा केस।

जैसा कि, महात्मा गांधी ने ठीक ही कहा था, सिद्धांतों और नैतिकता के बिना राजनीति विनाशकारी होगी।

Current Affairs

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


 क्रांति गाथा

हाल ही में, राजभवन के नीचे वर्ष 2016 में खोजे गए बंकर में ‘भारतीय क्रांतिकारी दीर्घा’ (Gallery of Indian Revolutionaries) का निर्माण किया गया है। यह ‘दीर्घा’ (गैलरी) भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के ज्ञात और अज्ञात क्रांतिकारियों के लिए एक श्रद्धांजलि है।

  • राजभवन के बंकर की खोज 2016 में महाराष्ट्र के तत्कालीन राज्यपाल ‘एन विद्यासागर राव’ ने की थी।
  • प्रथम विश्व युद्ध से पहले निर्मित, इस बंकर का उपयोग अंग्रेजों द्वारा हथियारों और गोला-बारूद को स्टोर करने के लिए किया जाता था।
  • इस बंकर में विभिन्न आकारों के 13 कमरे हैं और इन विभिन्न प्रकोष्ठों को ‘शेल स्टोर’, ‘गन शेल’, कार्ट्रिज स्टोर, शेल लिफ्ट, सेंट्रल आर्टिलरी रूम, वर्कशॉप आदि के नाम से जाना जाता था।

Current Affairs

 

कोडवा

  • कोडावा (Kodava), कर्नाटक में कोडागु (कूर्ग, जैसा कि ब्रिटिश इसे कहते हैं) में रहने वाले लोगों की एक अनूठी जाति है। पश्चिमी घाट की ढलानों पर रहने वाले योद्धाओं के इस समुदाय की उत्पत्ति के बारे में बहुत कम जानकारी है।
  • कोडावा समुदाय के लोग अद्वितीय, खेल के साथ-साथ सशस्त्र बलों में उत्कृष्ट होते हैं। कई वर्षों से, कोडवा खेतों में खेती कर रहे हैं, मवेशियों को पाल रहे हैं और युद्ध के लिए हथियारों को ढोते रहे हैं।

सुपर मून

जिस समय चंद्रमा अपनी कक्षा में पृथ्वी के सर्वाधिक नजदीक होता है, और साथ ही अपने पूर्ण आकार में होता है, तब इस स्थिति को ‘सुपर मून’ (Supermoon) कहा जाता है।

पृथ्वी के सर्वाधिक नजदीक होने की वजह से, इस स्थिति में चंद्रमा अपने सामान्य आकार से अधिक बड़ा दिखाई देता है। किसी एक विशिष्ट वर्ष में, लगातार दो से चार पूर्ण सुपरमून (Full Supermoons) तथा दो से चार नए सुपरमून (New Supermoons) की घटनाएँ हो सकती हैं।

LaMDA

गूगल के ‘डायलॉग एप्लिकेशन के लिए भाषा मॉडल’ (Language Model for Dialogue Applications – LaMDA) – गूगल की आर्टिफीसियल इंटेलिजेंसी द्वारा बनाया गया एक भाषा मॉडल – ने एक मुक्त-प्रवाह वाली बातचीत में संलग्न होने की क्षमता हासिल कर ली है।

गूगल का मानना ​​है कि LaMDA एक संवेदनशील कार्यक्रम बन गया है जिसका अर्थ है कि उसने एक इंसान की तरह तर्क करना शुरू कर दिया है।