विषयसूची
सामान्य अध्ययन-II
- क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2023
- एफडीआई प्रवाह के संदर्भ में भारत का सातवाँ स्थान: अंकटाड
- IAEA बोर्ड द्वारा ईरान की आलोचना संबंधी प्रस्ताव पारित
सामान्य अध्ययन-III
- बॉन्ड यील्ड में वृद्धि के कारण
- पार-तापी-नर्मदा परियोजना
- तीव्र रेडियो प्रस्फोट
- पर्यावरण प्रदर्शन सूचकांक
प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य
- वेल डो जवारी
- हाइपोगोनेडिज्म / अल्पजननग्रंथिता
सामान्य अध्ययन–II
विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।
क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2023
संदर्भ:
हाल ही में, अग्रणी वैश्विक उच्च शिक्षा विश्लेषक ‘क्यूएस (क्वाक्वेरेली साइमंड्स)’ अर्थात (QS – Quacquarelli Symonds) द्वारा विश्व की अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय रैंकिंग का 19 वां संस्करण जारी किया गया है।
‘क्वाक्वेरेली साइमंड्स’ (QS) एकमात्र अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग है जिसे ‘अंतर्राष्ट्रीय रैंकिंग विशेषज्ञ समूह’ (IREG) का अनुमोदन प्राप्त है।
संस्थानों की रैंकिंग किस प्रकार की जाती है?
क्यूएस द्वारा निम्नलिखित छह संकेतकों के आधार पर संस्थानों की रैंकिंग निर्धारित की जाती है:
- शैक्षणिक प्रतिष्ठा (Academic Reputation)
- नियोक्ता की प्रतिष्ठा (Employer Reputation)
- संकाय-छात्र अनुपात (Faculty-Student Ratio)-
- प्रकाशित शोध / संकाय (Citations per faculty)
- अंतर्राष्ट्रीय छात्रों का अनुपात (Proportion of International Students)
- अंतर्राष्ट्रीय संकाय अनुपात (Proportion of International Faculty)
भारतीय संस्थानों का प्रदर्शन:
क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग के नवीनतम संस्करण में 41 भारतीय विश्वविद्यालय शामिल हैं, जिनमें से 12 विश्वविद्यालयों ने अपनी स्थिति में सुधार किया है, 12 विश्वविद्यालयों की स्थिति /रैंकिंग पूर्ववत रही है, 10 विश्वविद्यालयों की रैंकिंग में गिरावट आई और सात नए विश्वविद्यालय रैंकिंग में शामिल हुए हैं।
- भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बेंगलुरु, विश्व स्तर पर 155वें स्थान पर है और इसे ‘उद्धरण प्रति संकाय’ (citations per faculty – CpF) संकेतक में वैश्विक अग्रणी के रूप में जगह दी गयी गई है। QS द्वारा ‘उद्धरण प्रति संकाय’ (CpF) संकेतक का उपयोग विश्वविद्यालयों द्वारा उत्पादित अनुसंधान के प्रभाव का मूल्यांकन करने के लिए किया जाता है।
- भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), क्यूएस रैंकिंग में शीर्ष -200 विश्वविद्यालयों में सबसे तेजी से उभरता हुआ दक्षिण एशियाई विश्वविद्यालय है, जिसने साल दर साल 31 स्थानों की छलांग लगाई है।
- क्यूएस रैंकिंग की इस सूची में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान(आईआईटी)-बॉम्बे ने पांच पायदान की छलांग लगाते हुए 172वां स्थान हासिल किया है। आईआईटी-बॉम्बे को भारत का दूसरा सबसे अच्छा संस्थान बताया गया है। आईआईटी बॉम्बे, क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग के पिछले संस्करण में शीर्ष भारतीय विश्वविद्यालय था।
- सर्वश्रेष्ठ भारतीय विश्वविद्यालयों में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली (IIT-D) को तीसरा स्थान मिला है, इसके बाद IIT मद्रास और IIT कानपुर को सूची में जगह मिली है।
- भारत के निजी संस्थानों में पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी को शीर्ष स्थान दिया गया है।
प्रीलिम्स लिंक:
- भारतीय संस्थानों का प्रदर्शन
- इंस्टिट्यूट ऑफ़ एमिनेंस योजना कब शुरू की गई थी?
- दुनिया भर में शीर्ष 3 संस्थान
- संस्थानों की रैंकिंग करने हेतु प्रयुक्त 6 संकेतक
मेंस लिंक:
इंस्टीट्यूशन ऑफ एमिनेंस योजना के महत्व पर चर्चा कीजिए।
स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।
विषय: महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान।
एफडीआई प्रवाह के संदर्भ में भारत का सातवाँ स्थान: अंकटाड
संदर्भ:
हाल ही में, ‘संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास अभिसमय’ (United Nations Conference on Trade And Development – UNCTAD) या ‘अंकटाड’ (UNCTAD) द्वारा अपनी वार्षिक ‘विश्व निवेश रिपोर्ट’ जारी की गयी है।
रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु:
- देश में ‘प्रत्यक्ष विदेशी निवेश’ (foreign direct investment – FDI) में 30% की गिरावट होने के बावजूद भारत सातवें स्थान पर है।
- संयुक्त राज्य अमेरिका (367 अरब डॉलर) FDI का शीर्ष प्राप्तकर्ता बना रहा है।
- FDI प्राप्तकर्ताओं की सूची में चीन (181 अरब डॉलर) और हांगकांग (141 अरब डॉलर) ने भी क्रमश: दूसरा और तीसरा स्थान बरकरार रखा है।
- शीर्ष 10 एफडीआई प्राप्तकर्ता अर्थव्यवस्थाओं में, केवल भारत के अंतर्वाह में गिरावट देखी गयी है।
- हालांकि, भारत से बाहिर्वाह एफडीआई (outward FDI) 2021 में 43 प्रतिशत से बढ़कर 15.5 अरब डॉलर हो गयी है।
‘एफडीआई’ क्या है?
प्रत्यक्ष विदेशी निवेश या एफडीआई (Foreign direct investment – FDI), दीर्घकालिक लाभ अर्जित करने के इरादे से एक देश की किसी पार्टी द्वारा दूसरे देश में चालू किसी व्यापार या निगम में किया जाने वाला निवेश होता है। एफडीआई के माध्यम से, विदेशी कंपनियां प्रत्यक्ष रूप से दूसरे देश के दिन-प्रतिदिन के कार्यों में शामिल हो जाती हैं।
‘संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास अभिसमय’ (UNCTAD) के बारे में:
- ‘अंकटाड’ (UNCTAD), 1964 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा स्थापित एक स्थायी अंतर सरकारी निकाय है।
- यह संयुक्त राष्ट्र सचिवालय का एक अंग है।
- ‘अंकटाड’ संयुक्त राष्ट्र महासभा और ‘आर्थिक एवं सामाजिक परिषद’ को रिपोर्ट करता है, लेकिन इसका अपना बजट, सदस्य और नेतृत्व होता है।
- यह ‘संयुक्त राष्ट्र विकास समूह’ (United Nations Development Group) का भी एक भाग है।
उद्देश्य और भूमिकाएँ:
- ‘संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास अभिसमय’ (UNCTAD), अन्य संयुक्त राष्ट्र विभागों और एजेंसियों के साथ-साथ विकासशील देशों के लिए ‘वैश्वीकृत अर्थव्यवस्था’ के लाभों को अधिक निष्पक्ष और प्रभावी ढंग से प्राप्त करने में सहायता करता है। ।
- ‘अंकटाड’, एजेंडा 2030 में निर्धारित सतत विकास लक्ष्यों में हुई प्रगति को भी मापता है।
अंकटाड द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट्स:
- व्यापार और विकास रिपोर्ट (Trade and Development Report)
- विश्व निवेश रिपोर्ट (World Investment Report)
- प्रौद्योगिकी और नवाचार रिपोर्ट (Technology and Innovation Report)
- डिजिटल अर्थव्यवस्था रिपोर्ट (Digital Economy Report)
प्रीलिम्स लिंक:
- ‘अंकटाड’ (UNCTAD) के बारे में
- अंकटाड द्वारा प्रकाशित महत्वपूर्ण रिपोर्ट्स
- वार्षिक विश्व निवेश रिपोर्ट 2022 के प्रमुख बिंदु
मेंस लिंक:
भारत के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) अंतर्वाह के महत्व पर चर्चा कीजिए।
स्रोत: टाइम्स ऑफ इंडिया।
विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।
IAEA बोर्ड द्वारा ईरान की आलोचना संबंधी प्रस्ताव पारित
संदर्भ:
‘अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी’ के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स द्वारा हाल ही में पारित एक प्रस्ताव में ईरान से तीन अघोषित स्थानों की संयुक्त राष्ट्र निरीक्षकों द्वारा का जाने वाली जांच में पूरा सहयोग करने की मांग की गयी है।
- इस प्रस्ताव को ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और अमेरिका द्वारा ‘अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी’ (IAEA) के समक्ष प्रस्तुत किया गया था और इसे 30 देशों द्वारा अनुमोदित किया गया था।
- केवल रूस और चीन ने इस प्रस्ताव का विरोध किया था, और ईरान ने इस प्रस्ताव की निंदा की।
इसका महत्व:
यह दो साल में पारित अपनी तरह का पहला प्रस्ताव है और 2015 के परमाणु समझौते को पुनर्जीवित करने को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच जारी अप्रत्यक्ष वार्ता में 10 सप्ताह के गतिरोध के बाद पारित किया गया है।
अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के बारे में:
‘अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी’ की स्थापना, वर्ष 1957 में संयुक्त राष्ट्र संघ भीतर ‘वैश्विक शांति के लिए परमाणु संगठन’ (“Atoms for Peace” organization) के रूप की गयी थी।
- यह एक अंतरराष्ट्रीय स्वायत संगठन है।
- IAEA, संयुक्त राष्ट्र महासभा तथा सुरक्षा परिषद दोनों को रिपोर्ट करती है।
- इसका मुख्यालय वियना, ऑस्ट्रिया में स्थित है।
प्रमुख कार्य:
- IAEA, अपने सदस्य देशों तथा विभिन्न भागीदारों के साथ मिलकर परमाणु प्रौद्योगिकियों के सुरक्षित, सुदृढ़ और शांतिपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देने के लिए कार्य करता है।
- इसका उद्देश्य परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देना तथा परमाणु हथियारों सहित किसी भी सैन्य उद्देश्य के लिए इसके उपयोग को रोकना है।
IAEA द्वारा चलाए जा रहे कार्यक्रम:
- कैंसर थेरेपी हेतु कार्रवाई कार्यक्रम (Program of Action for Cancer Therapy- PACT)
- मानव स्वास्थ्य कार्यक्रम
- जल उपलब्धता संवर्धन परियोजना
- नवोन्मेषी परमाणु रिएक्टरों और ईंधन चक्र पर अंतर्राष्ट्रीय परियोजना, 2000
प्रीलिम्स लिंक:
- IAEA क्या है? संयुक्त राष्ट्र के साथ संबंध
- IAEA के सदस्य
- IAEA के कार्यक्रम।
- बोर्ड ऑफ गवर्नर- रचना, मतदान और कार्य
- यूरेनियम संवर्धन क्या है?
मेंस लिंक:
‘ईरान परमाणु समझौते’ को वापस लागू किए जाने की आवश्यकता पर चर्चा कीजिए।
स्रोत: द हिंदू।
सामान्य अध्ययन–III
विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना से संबंधित मुद्दे, संसाधन जुटाना, विकास, विकास और रोजगार।
बॉन्ड यील्ड में वृद्धि के कारण
संदर्भ:
हाल ही में, भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा मुद्रास्फीति पर लगाम लगाने के लिए दरों में बढ़ोतरी की गयी है। देश में मुद्रास्फीति की दर कम से कम सितंबर तक 7% से ऊपर रहने की उम्मीद है।
यद्यपि, इसके साथ-साथ ‘बांड यील्ड’ या ‘बांड प्रतिफल’ (Bond Yields) भी तीन वर्षों में अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है।
इसका क्या अर्थ है?
- प्रतिफल (यील्ड) में वृद्धि का मतलब है, कि बाजार पहले से ही दरों के सबसे खराब उतार-चढ़ाव में शामिल हो चुके हैं।
- ‘बांड यील्ड’ में वृद्धि इंगित करती है कि वित्तीय प्रणाली में धन की लागत बढ़ रही है और ब्याज दरें भी बढ़ रही हैं।
- इस वृद्धि का मतलब है, कि सरकार को यील्ड / प्रतिफल (या निवेशकों को वापसी) के रूप में अधिक भुगतान करना होगा, जिससे उधार की लागत में वृद्धि होगी।
- इससे बैंकिंग प्रणाली में सामान्य ब्याज दरों पर ऊपर की ओर दबाव पड़ेगा।
निवेशकों पर प्रभाव:
- प्रतिफल में वृद्धि का मतलब है, कि निवेशक उच्च ब्याज दरों की उम्मीद करेंगे और अपने बांड्स की बिक्री करेंगे, क्योंकि उच्च दरों के परिणामस्वरूप मौजूदा बांडों के ‘बांड मूल्य में गिरावट आएगी (और इस तरह परिपक्वता से पहले बिक्री करने पर पूंजीगत हानि होगी)।
- इसका ‘ऋण निवेशकों’ (Debt investors) पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। जब ‘प्रतिफल’ या ‘यील्ड’ में वृद्धि होती है और बांड की कीमतें गिरती हैं, तो ऋण निधियों (Debt Funds) की शुद्ध आस्ति मूल्य में भी गिरावट आएगी। ‘ऋण निधियों’ का अपने पोर्टफोलियो में सरकारी प्रतिभूतियों का एक बड़ा हिस्सा होता है।
- इससे ‘कॉरपोरेट बांड्स’ भी प्रभावित होंगे, जिनकी कीमत आमतौर पर सरकारी बांड्स से अधिक होती है।
- बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी, आम तौर पर इक्विटी निवेशकों के लिए अच्छी खबर नहीं है क्योंकि इससे कंपनियों के लिए फंड की लागत बढ़ती है और उनकी कमाई को नुकसान पहुंचना शुरू हो जाता है।
बॉन्ड यील्ड बनाम इक्विटी:
बॉन्ड यील्ड का इक्विटी (Equity) के साथ विपरीत संबंध होता है, क्योंकि ‘बॉन्ड यील्ड’ में वृद्धि का मतलब है कि ‘इक्विटी’ पर ‘जोखिम प्रीमियम’ (Risk Premium) को अधिक हो जाएगा।
बॉन्ड प्राइस और यील्ड के बीच संबंध:
- एक बांड की कीमत उसके प्रतिफल या ब्याज दर के विपरीत चलती है; बांड की कीमत जितनी अधिक होगी, प्रतिफल उतना ही कम होगा।
- कीमत और प्रतिफल के बीच व्युत्क्रम संबंध का कारण, आंशिक रूप से, बांड्स का ‘नियत दर निवेश’ (fixed-rate investments) के रूप में होना है।
- यदि निवेशक को आने वाले महीनों में ब्याज दरों में वृद्धि की संभावना प्रतीत होती है, तो वह अपने बांड्स बेच सकते है, और बाद में उच्च दर वाले बांड का विकल्प चुनेंगे।
- इसके विपरीत, यदि बांड निवेशकों को लगता है कि मौजूदा नियत-दर बांड की दर या यील्ड अधिक होने वाली है जिससे भविष्य में ब्याज दरों में गिरावट आएगी, तो वे बांड्स की खरीद कर सकते हैं और इनकी कीमतों को अधिक बढ़ा सकते हैं।
प्रीलिम्स लिंक:
- नकारात्मक प्रतिफल बांड क्या हैं?
- बॉन्ड प्राइस और यील्ड के बीच संबंध।
मेंस लिंक:
‘नकारात्मक प्रतिफल बांड’ इन दिनों लोकप्रिय क्यों हो रहे हैं? चर्चा कीजिए।
स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।
विषय: विभिन्न प्रकार की सिंचाई और सिंचाई प्रणाली भंडारण।
पार-तापी-नर्मदा परियोजना
(Par-Tapi-Narmada project)
संदर्भ:
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा, शीघ्र ही, गुजरात में वलसाड जिले की पहाड़ियों पर 174 आदिवासी गांवों और 1,028 बस्तियों में रहने वाले 4.50 लाख लोगों को नल का पानी उपलब्ध कराने वाली ‘एस्टोल परियोजना’ (Astol project) का उद्घाटन किया जाएगा।
‘एस्टोल परियोजना’ का उद्घाटन काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस क्षेत्र की जनजातियां केंद्र सरकार की ‘पर-तापी-नर्मदा नदी लिंक परियोजना’ का विरोध कर रही हैं।
पृष्ठभूमि:
दक्षिण गुजरात में ‘पर-तापी-नर्मदा नदी जोड़ परियोजना’ (Par-Tapi-Narmada river link project) को इस क्षेत्र के तीन जिलों के आदिवासी समुदायों द्वारा कड़ा विरोध किए जाने के बाद रद्द कर दिया गया था।
इस परियोजना के बारे में:
‘पार-तापी-नर्मदा नदी जोड़ परियोजना’ की परिकल्पना 1980 के ‘राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना’ (National Perspective Plan) के तहत की गयी थी।
इस परियोजना में, पश्चिमी घाट के जल-अधिशेष क्षेत्रों से नदियों के पानी को सौराष्ट्र और कच्छ के जल-अभाव वाले क्षेत्रों में स्थानांतरित करने का प्रस्ताव किया गया है।
परियोजना में निम्नलिखित तीन नदियों को जोड़ने का प्रस्ताव है:
- पार नदी (Par river): यह महाराष्ट्र के नासिक से निकलती है और वलसाड से होकर बहती है।
- तापी नदी: सापुतारा (Saputara) से उदगम करने के बाद तापी नदी महाराष्ट्र और गुजरात में सूरत से होकर बहती है।
- नर्मदा नदी: मध्य प्रदेश से निकलकर महाराष्ट्र और गुजरात के भरूच और नर्मदा जिलों से होकर बहती है।
लाभ:
अनुमानित 10,211 करोड़ रुपये की पार-तापी-नर्मदा लिंक परियोजना के माध्यम से प्रस्तावित अधिशेष पानी से 2,32,175 हेक्टेयर क्षेत्र की सिंचाई होने की संभावना है, जिसमें से 61,190 हेक्टेयर क्षेत्र में लिंक नहर के माध्यम से सिंचाई की जाएगी।
इस परियोजना का विरोध का कारण:
- NWDA की एक रिपोर्ट के अनुसार, परियोजना के तहत निर्मित किए जाने वाले प्रस्तावित जलाशयों के कारण लगभग 6065 हेक्टेयर भूमि जलमग्न हो जाएगी।
- कुल 61 गांव प्रभावित होंगे, जिनमें से एक गांव पूरी तरह से जलमग्न हो जाएगा और शेष 60 गांव आंशिक रूप से जलमग्न हो जाएंगे।
- इस परियोजना से कुल 2,509 परिवार प्रभावित होंगे, जिनमें से 98 परिवार, महाराष्ट्र के एकमात्र ‘झेरी जलाशय’ (छह गांवों में विस्तारित) के निर्माण के कारण प्रभावित होंगे।
- गुजरात में इस परियोजना से लगभग 2000 परिवार प्रभावित होंगे। जिन जिलों में इस परियोजना को लागू किया जाएगा, वहां आदिवासियों की बड़ी आबादी रहती है, जिन्हें अपने विस्थापन का डर है।
इंटरलिंकिंग के लाभ:
- जल और खाद्य सुरक्षा में वृद्धि
- जल का समुचित उपयोग
- कृषि को बढ़ावा
- आपदा न्यूनीकरण
- परिवहन को बढ़ावा देना
इंस्टा जिज्ञासु:
क्या आप ‘नदियों को आपस में जोड़ने की राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना’ (National Perspective Plan) के बारे में जानते हैं?
प्रीलिम्स लिंक:
- परियोजना के बारे में
- पार नदी के बारे में
- तापी और नर्मदा – सहायक नदियाँ और बेसिन
मेंस लिंक:
‘पार-तापी-नर्मदा लिंक परियोजना ‘के महत्व पर चर्चा कीजिए।
स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।
विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।
तीव्र रेडियो प्रस्फोट
संदर्भ:
हाल ही में, खगोलविदों द्वारा एक ‘तीव्र रेडियो प्रस्फोट’ (Fast Radio Burst – FRB) की जानकारी दी गयी है, इस प्रस्फोट की विशेषताएं, एक को छोड़कर, पहले से ज्ञात लगभग सभी अन्य FRBs से भिन्न हैं।
नवीनतम ‘तीव्र रेडियो प्रस्फोट’ (FRB), जिसे FRB 20190520B नाम दिया गया है, में कई अन्य FRBs के विपरीत, रेडियो तरंगों के बार-बार प्रस्फोट हो रहे हैं। इस तरह से व्यवहार करने वाला अब तक मात्र एक FRB देखा गया था।
‘तीव्र रेडियो प्रस्फोट’ क्या होते हैं?
(Fast Radio Burst- FRB)
- एफआरबी, विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम के रेडियो बैंड में प्रकट होने वाली प्रकाश की अजीब तरह से चमकीली दीप्ति होती है, जो केवल कुछ मिलीसेकंड के लिए प्रदीप्ति होती है, फिर बिना किसी निशान छोड़े गायब हो जाती है।
- ये संक्षिप्त और रहस्यमयी प्रकाश-दीप्तियाँ, ब्रह्मांड के विभिन्न और दूरस्थ हिस्सों के साथ-साथ हमारी अपनी आकाशगंगा में भी देखी जाती हैं।
- पहला FRB वर्ष 2007 में खोजा गया था। तब से जून 2021 तक 140 अन्य FRB खोजे जा चुके हैं।
इनकी उत्पत्ति:
- इनकी उत्पत्ति के बारे में अभी तक कोई जानकारी नहीं उपलब्ध है और उनका प्रकटन अत्यधिक अप्रत्याशित होता है।
- खगोलविदों के अनुसार, ‘तीव्र रेडियो प्रस्फोट’ (FRB) के स्रोत संभवतः सुपरनोवा के बाद छोड़े गए अतिसघन न्यूट्रॉन तारे या अत्यधिक सशक्त चुंबकीय क्षेत्रों वाले न्यूट्रॉन तारे अर्थात ‘मैग्नेटर्स’ (Magnetars) हो सकते हैं।
‘मैग्नेटर’ के बारे में:
- ‘मैग्नेटर’ (Magnetar), न्यूट्रॉन तारों (Neutron Star) का एक प्रकार होते हैं।
- ये ब्रह्माण्ड में सर्वाधिक शक्तिशाली चुम्बकीय तारे होते हैं।
- इनका चुंबकीय क्षेत्र पृथ्वी की तुलना में 5,000 ट्रिलियन गुना अधिक शक्तिशाली होता हैं।
प्रीलिम्स लिंक:
- रेडियो तरंगें क्या होती हैं?
- विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम क्या होता है?
- ‘मैग्नेटर’ क्या हैं?
- न्यूट्रॉन तारा क्या है?
मेंस लिंक:
‘तीव्र रेडियो प्रस्फोट’ (FRB) क्या हैं? हमारे ब्रह्मांड को समझने में ये किस प्रकार महत्वपूर्ण हैं? चर्चा कीजिए।
स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।
विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।
पर्यावरण प्रदर्शन सूचकांक
संदर्भ:
हाल ही में, ‘पर्यावरण प्रदर्शन सूचकांक’ (Environmental Performance Index – EPI) का नवीनतम संस्करण (2022) जारी किया गया था।
यह रिपोर्ट निम्नलिखित संस्थानों के शोधकर्ताओं द्वारा तैयार की गयी है:
- येल विश्वविद्यालय का ‘पर्यावरण कानून और नीति’ केंद्र (Yale Centre for Environmental Law &Policy)।
- सेंटर फॉर इंटरनेशनल अर्थ साइंस इंफॉर्मेशन नेटवर्क अर्थ इंस्टीट्यूट, कोलंबिया यूनिवर्सिटी।
‘पर्यावरण प्रदर्शन सूचकांक’ के बारे में:
- ‘पर्यावरण प्रदर्शन सूचकांक’ (EPI), दुनिया भर में ‘संवहनीयता’ की स्थिति का डेटा-आधारित संक्षिप्त विवरण प्रदान करता है।
- यह सूचकांक वर्ष 2002 में पहली बार प्रकाशित पायलट पर्यावरण प्रदर्शन सूचकांक से विकसित किया गया था, तथा इसे संयुक्त राष्ट्र सहस्राब्दी विकास लक्ष्यों में निर्धारित पर्यावरण लक्ष्यों को पूरा करने के लिए निर्मित किया गया था।
- यह ‘सूचकांक’ जलवायु परिवर्तन, पर्यावरणीय सार्वजनिक स्वास्थ्य, जैव विविधता आदि सहित 40 प्रदर्शन संकेतकों पर 180 देशों की रैंकिंग करता है।
- यह सूचकांक, देशों की नीतियों के पर्यावरणीय प्रदर्शन का आंकलन करने की एक विधि है, और यह भागीदार देशों का एक स्कोरकार्ड प्रदान करता है जोकि पर्यावरण प्रदर्शन में अग्रणी और पिछड़े देशों के बारे में जानकारी देता है।
- यह संवहनीय भविष्य की ओर बढ़ने की इच्छा रखने वाले देशों के लिए व्यावहारिक मार्गदर्शन भी प्रदान करता है।
भारत एवं अन्य देशों का प्रदर्शन:
- रिपोर्ट में 180 देशों की सूची में भारत को सबसे निचला स्थान दिया गया है।
- सूचकांक में, भारत (18.9), म्यांमार (19.4), वियतनाम (20.1), बांग्लादेश (23.1) और पाकिस्तान (24.6) को सबसे कम अंक दिए गए हैं।
- अमेरिका को 43वें स्थान पर रखा गया है और वर्तमान में सबसे बड़े उत्सर्जक चीन को सूचकांक में 160वें स्थान पर रखा गया है।
- सूचकांक में शीर्ष 5 देश: डेनमार्क, यूनाइटेड किंगडम, फिनलैंड, माल्टा और स्वीडन को उनके बेहतर प्रदर्शन के कारण शीर्ष पांच स्थानों पर रखा गया है।
भारत को सूचकांक में सबसे निचले स्थान पर रखे जाने का कारण:
- रिपोर्ट के अनुसार, भारत के द्वारा पर्यावरण की बजाय आर्थिक विकास को प्राथमिकता दी जा रही है।
- भारत की वायु गुणवत्ता काफी खराब है और ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन तेजी से बढ़ रहा है।
भारत के द्वारा इस रिपोर्ट को खारिज किए जाने के कारण:
- भारतीय सरकार के अनुसार, रिपोर्ट में निराधार मान्यताओं के आधार पर कई संकेतकों का उपयोग किया गया है।
- इसकी कार्यप्रणाली, प्रति व्यक्ति उत्सर्जन और देशों में विभिन्न सामाजिक-आर्थिक स्थितियों पर विचार नहीं करती है।
- जिन संकेतकों में भारत अच्छा प्रदर्शन कर रहा था, उनका भार कम कर दिया गया है।
- प्रति व्यक्ति GHG उत्सर्जन और GHG उत्सर्जन तीव्रता प्रवृत्ति जैसे संकेतकों के रूप में इक्विटी के सिद्धांत को बहुत कम महत्व दिया गया है।
- ‘सामूहिक किंतु भिन्न जिम्मेदारियां और संबंधित क्षमताएं’ (Common but Differentiated Responsibilities and Respective Capabilities : CBDR-RC) सिद्धांत भी इस सूचकांक की संरचना में बमुश्किल ही परिलक्षित होता है।
- वन और आर्द्रभूमि, जो महत्वपूर्ण कार्बन सिंक के रूप में कार्य करते हैं, को पर्यावरण प्रदर्शन सूचकांक’ 2022 (EPI 2022) द्वारा 2050 तक के अनुमानित GHG उत्सर्जन प्रक्षेपवक्र की गणना करते समय शामिल नहीं किया गया है।
स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।
प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य
वेल डो जवारी
ब्रिटिश पत्रकार ‘डोम फिलिप्स’ और ब्राजील के स्वदेशी मामलों के विशेषज्ञ ‘ब्रूनो अरुजो परेरा’ हाल ही में ‘वेल डो जवारी’ (Vale do Javari) में लापता हो गए थे।
- ‘वेल डो जवारी’ अमेज़न वर्षावनों का एक भू-भाग है।
- यह ब्राजीलियाई अमेज़ॅन का पश्चिमी क्षेत्र है और इसका नाम पेरू के साथ ब्राजील की सीमा बनाती हुई ‘जवारी नदी’ के नाम पर रखा गया है।
- यह भू-भाग 85,444 वर्ग किमी में विस्तारित है और यह “अमेज़ॅन और दुनिया में अलग-थलग समूहों की सबसे बड़े संकेन्द्रण” का क्षेत्र है।
- इस क्षेत्र में स्वर्ण के समृद्ध स्रोत पाए जाते हैं।
हाइपोगोनेडिज्म / अल्पजननग्रंथिता
यह पुरुष सेक्स हार्मोन ‘टेस्टोस्टेरोन’ की कमी के कारण होने वाली स्थिति है।
- यह स्थिति यौन रोग, हड्डियों और मांसपेशियों के कमजोर होने और जीवन की गुणवत्ता में कमी का कारण बन सकता है।
- इसके जोखिम कारकों में, उम्र बढ़ना (उम्र के साथ टेस्टोस्टेरोन के स्तर में गिरावट), मोटापा और मधुमेह शामिल हैं।
- हाइपोगोनाडिज्म (Hypogonadism) के ईलाज हेतु ‘टेस्टोस्टेरोन रिप्लेसमेंट थेरेपी’ एक मानक उपचार है।














