विषयसूची
सामान्य अध्ययन-II
- बिहार में जाति आधारित जनगणना
- आधार की सुरक्षा
- प्रधान मंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम
सामान्य अध्ययन-III
- गवर्नमेंट-ई-मार्केटप्लेस
- एनटीपीसी की जैव विविधता नीति
- नागा शांति प्रक्रिया
प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य
- नेपच्यून और यूरेनस के भिन्न-भिन्न रंगों में दिखने का कारण
- HIMARS रॉकेट
- सीआरपीएफ कांस्टेबलों के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता में छूट
- इज़राइल एवं संयुक्त अरब अमीरात के बीच एक मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर
- विश्व दुग्ध दिवस
सामान्य अध्ययन–II
विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।
बिहार में जाति आधारित जनगणना
संदर्भ:
हाल ही में, बिहार में संपन्न हुई सर्वदलीय बैठक में सर्वसम्मति से ‘जाति आधारित जनगणना’ (Caste-based census) अति शीघ्र शुरू करने का फैसला लिया गया है।
पृष्ठभूमि:
बिहार विधानमंडल द्वारा ‘जाति आधारित जनगणना’ की मांग करने वाले दो प्रस्तावों को केंद्र सरकार द्वारा पहले ही खारिज किया जा चुका है। केंद्र सरकार का कहना है, कि ‘जाति आधारित जनगणना’ एक “विभाजनकारी कवायद” होगी।
हालांकि, केंद्र सरकार ने यह भी कहा है, कि “राज्य चाहे तो अपने-आप जातिगत जनगणना कर सकते हैं”।
अब तक ‘जाति-संबंधी’ विवरण किस प्रकार एकत्र किया जाता रहा है?
- प्रचलित पद्धति के अनुसार, गणनाकारों के द्वारा जनगणना के एक भाग के रूप में ‘अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति’ संबंधी विवरण एकत्र किया जाता है, जबकि, अन्य जातियों का विवरण एकत्र नहीं किया जाता है।
- जनगणना की मुख्य पद्धति के अंतर्गत, सभी नागरिक ‘गणनाकार’ के लिए ‘स्व-घोषित’ जानकारी प्रदान करते हैं।
- अब तक, विभिन्न राज्यों में ‘पिछड़ा वर्ग आयोगों’ द्वारा पिछड़ी जातियों की जनसंख्या का पता लगाने हेतु अपनी-अपनी गणना की जाती रही है।
जनगणना में किस प्रकार के जाति संबंधी आंकड़े प्रकाशित किए जाते हैं?
- स्वतंत्र भारत में, 1951 से 2011 के बीच की गई प्रत्येक जनगणना में केवल अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों पर आंकड़े प्रकाशित किए गए हैं। अन्य जातियों के विवरण को जनगणना में प्रकाशित नहीं किया गया है।
- हालांकि, इससे पहले वर्ष 1931 तक की गई प्रत्येक जनगणना में जाति संबंधी आंकड़े प्रकशित किए जाते थे।
‘सामाजिक-आर्थिक और जातिगत जनगणना’ (SECC) 2011 के बारे में:
वर्ष 2011 में आयोजित ‘सामाजिक-आर्थिक और जातिगत जनगणना’ (Socio-Economic and Caste Census- SECC) विभिन्न समुदायों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति के बारे में आंकड़े प्राप्त करने के लिए एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम था।
इसके दो घटक थे:
- पहला, ग्रामीण और शहरी परिवारों का एक सर्वेक्षण तथा पूर्व निर्धारित मापदंडों के आधार पर इन परिवारों की रैंकिंग, और
- दूसरा ‘जातिगत जनगणना’।
हालांकि, सरकार द्वारा केवल ग्रामीण और शहरी परिवारों में लोगों की आर्थिक स्थिति का विवरण जारी किया गया था। जाति संबंधी आंकड़े अभी तक जारी नहीं किए गए हैं।
‘जनगणना’ और ‘सामाजिक-आर्थिक और जातिगत जनगणना’ में अंतर:
- जनगणना, भारत की आबादी की तस्वीर प्रदान करती है, जबकि सामाजिक-आर्थिक और जातिगत जनगणना’ (SECC) राज्य द्वारा सहायता प्राप्त करने वाले लाभार्थियों की पहचान करने का एक उपकरण होती है।
- ‘जनगणना’, ‘जनगणना अधिनियम’ 1948 (Census Act of 1948) के अंतर्गत आती है और इसके सभी आकड़ों को गोपनीय माना जाता है, जबकि SECC के तहत दी गई सभी व्यक्तिगत जानकारी, सरकारी विभागों द्वारा परिवारों को लाभ प्रदान करने और/या रोकने हेतु उपयोग करने के लिए उपलब्ध रहती है।
जातिगत जनगणना के लाभ:
प्रत्येक जाति की आबादी की सटीक संख्या, सभी का समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने हेतु आरक्षण नीति को तैयार करने में मदद करेगी।
संबंधित चिंताएं:
- संभावना है, कि जातिगत जनगणना से कुछ वर्गों में नाराज़गी पैदा होगी और कुछ समुदाय अपने लिए अधिक या अलग कोटा की मांग करेंगे।
- कथित तौर यह माना जाता है, कि मात्र व्यक्तियों को किसी जाति से जुड़े होने का ठप्पा लगाने से, समाज में जाति-व्यवस्था हमेशा बनी रह सकती है।
इंस्टा जिज्ञासु:
क्या आप जानते हैं, कि ‘आईना-ए-अकबरी’ में जनसंख्या, उद्योग, धन और कई अन्य विशेषताओं से संबंधित व्यापक आंकड़े मिलते हैं? इस पुस्तक में अन्य किन विषयों का विवरण दिया गया है?
राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग अधिनियम, 1993 की धारा 11 के अंतर्गत प्रावधान है, कि केंद्र सरकार हर 10 साल में, जो वर्ग पिछड़ेपन से बाहर आ चुके है, उन्हें सूची से बाहर करने तथा नए पिछड़े वर्गों को सूची में शामिल करने के लिए संबंधित सूचियों को संशोधित कर सकती है। लेकिन यह कार्रवाई आज तक की नहीं गयी है।
प्रीलिम्स लिंक:
- ‘जनगणना’ क्या है?
- इस संबंध में वैधानिक प्रावधान
- ‘जनगणना’ की विधि
- जनगणना 2011 की प्रमुख विशेषताएं
- ‘राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग’ के बारे में
मेंस लिंक:
जाति आधारित जनगणना की आवश्यकता और महत्व पर चर्चा कीजिए।
स्रोत: द हिंदू।
विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।
आधार की सुरक्षा
संदर्भ:
हाल ही में, ‘भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण’ (Unique Identification Authority of India – UIDAI) द्वारा एक एडवाइजरी (Advisory) जारी की गयी थी, जिसे प्राधिकरण ने जारी होने के दो दिन बाद ही वापस ले लिया।
- इस एडवाइजरी में, UIDAI ने उपयोगकर्ताओं को अपने आधार कार्ड की फोटोकॉपी वितरित करने से रोकने को प्रोत्साहित किया था।
- ‘एडवाइजरी’ की किसी भी ‘गलत व्याख्या’ से बचने के लिए इस अधिसूचना को वापस ले लिया गया है।
UIDAI की ऐड्वाइज़री के बारे में:
‘भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण’ (UIDAI) द्वारा जारी की गयी ऐड्वाइज़री के अनुसार –
- आधार कार्ड धारकों को अपने कार्ड की पारंपरिक फोटोकॉपी के बजाय एक प्रच्छन्न आधार कार्ड का उपयोग करना चाहिए।
- आधार कार्ड दस्तावेज़ को किसी साइबर कैफे या सार्वजनिक कंप्यूटर से डाउनलोड नहीं किया जाना चाहिए, और यदि ऐसा किया जाए, तो इसे ‘कंप्यूटर सिस्टम’ से स्थायी रूप से मिटा दिया जाना चाहिए।
बारह अंकों के पहचानपत्र के पहले आठ नंबर ‘प्रच्छन्न आधार’ (Masked Aadhaar) में ‘XXXX’ वर्णों के पीछे छिपे होते हैं।
आधार संख्या के उपयोग और उसकी सुरक्षा संबंधी कानून:
- ‘आधार (वित्तीय और अन्य सहायिकियों, प्रसुविधायों और सेवायों का लक्षित परिदान) अधिनियम’, 2016 (Aadhaar (Targeted Delivery of Financial and Other Subsidies Benefits and Services) Act, 2016) में स्पष्ट किया गया है, कि भारत के समेकित कोष से वित्तपोषित सब्सिडी, लाभ और सेवाओं का लाभ उठाने के लिए ‘आधार अधिप्रमाणन’ आवश्यक है।
- आधार संख्या का अनुरोध करने वाली इकाई को, व्यक्ति को पहचान संख्या एकत्र करने से पहले उसकी की सहमति प्राप्त करनी होगी और यह सुनिश्चित करना होगा कि जानकारी का उपयोग केवल ‘केंद्रीय पहचान डेटा संग्रह’ (CIDR) पर प्रमाणीकरण उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।
- अधिनियम में यह स्पष्ट किया गया है, कि व्यक्ति की गोपनीयता बनाए रखना आवश्यक होगा और ‘प्रमाणित जानकारी’ का उपयोग निर्दिष्ट उद्देश्य के अलावा किसी अन्य चीज़ के लिए नहीं किया जा सकता है।
- ‘पहचान संबंधी जानकारी’ या ‘प्रमाणीकरण रिकॉर्ड’ को केवल उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार या राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में सचिव रैंक या उससे ऊपर के किसी व्यक्ति द्वारा प्रस्तुत किया जा सकेगा।
‘आधार’ से जुड़े मुद्दे क्या हैं और ‘भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक’ (CAG) द्वारा ‘आधार’ की नियामक संस्था, ‘भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण’ (UIDAI) की ऑडिट रिपोर्ट के बारे में जानकारी हेतु पढ़िए।
UIDAI के बारे में:
भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) दिनांक 12 जुलाई, 2016 को भारत सरकार द्वारा स्थापित एक सांविधिक प्राधिकरण है।
- इसकी स्थापना “आधार (वित्तीय और अन्य सहायकियों, प्रसुविधाओं और सेवाओं के लक्षित परिदान) अधिनियम”, 2016 (‘आधार अधिनियम 2016’) के उपबंधों के अंतर्गत की गई थी।
- मूल निकाय: ‘इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय’ के अधिकार क्षेत्र में काम करता है।
- प्रारंभ में, UIDAI की स्थापना भारत सरकार द्वारा जनवरी 2009 में योजना आयोग के तत्वावधान में एक संलग्न कार्यालय के रूप में की गई थी।
- अधिदेश: यूआईडीएआई को भारत के सभी निवासियों को ‘आधार’ नामक 12-अंकीय विशिष्ट पहचान संख्या (यूआईडी) जारी करने का कार्य सौंपा गया है।
- प्रदर्शन: 31 अक्टूबर 2021 तक, UIDAI ने 131.68 करोड़ आधार नंबर जारी किए थे।
प्रीलिम्स लिंक:
- UIDAI के बारे में
- आधार (AADHAAR) के बारे में
- UIDAI का पंजीकरण
मेंस लिंक:
क्या ‘आधार’ की अवधारणा भारत की लीक से हटकर कल्याणकारी व्यवस्था के लिए ‘गेम चेंजर’ के रूप में सफल हुई है? विश्लेषण कीजिए।
स्रोत: द हिंदू।
विषय: केन्द्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन; इन अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय।
प्रधान मंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम
संदर्भ:
हाल ही में, ‘सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय’ द्वारा ‘प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम’ (Prime Minister’s Employment Generation Programme – PMEGP) को 2025-26 तक, पांच वर्षों के लिए जारी रखने की अनुमति प्रदान कर दी गयी है।
‘प्रधान मंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम’ के बारे में:
- प्रधान मंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) एक केंद्रीय क्षेत्रक योजना है जिसे सूक्ष्म, लघु और मझौले उद्यम मंत्रालय (MoMSME) द्वारा प्रशासित किया जाता है।
- इसे वर्ष 2008-09 में शुरू किया गया था। यह एक क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी योजना है, जो सूक्ष्म-उद्यमों की स्थापना के माध्यम से स्वरोजगार को बढ़ावा देती है।
- इसके अंतर्गत MSME मंत्रालय के माध्यम से सरकार द्वारा विनिर्माण क्षेत्र में 50 लाख रूपए तक के ऋण तथा सेवा क्षेत्र में 20 लाख रूपए तक के ऋण पर 35% तक की सब्सिडी प्रदान की जाती है।
कार्यान्वयन:
राष्ट्रीय स्तर पर- प्रधान मंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) योजना को राष्ट्रीय स्तर पर कार्यान्वित करने के लिए खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) नोडल एजेंसी है।
राज्य स्तर पर – PMEGP को राज्य स्तर पर, राज्य खादी और ग्रामोद्योग आयोग निदेशालय, राज्य खादी और ग्रामोद्योग बोर्ड (KVIB), जिला उद्योग केंद्र (DIC) तथा बैंकों द्वारा कार्यान्वित किया जाता है।
पात्रता:
- इस योजना के अंतर्गत, 18 वर्ष से अधिक आयु का कोई भी व्यक्ति, स्वयं सहायता समूह, पंजीकरण अधिनियम 1860 के तहत पंजीकृत संस्थाएँ, उत्पादन सहकारी समितियाँ और धर्मार्थ ट्रस्ट लाभ प्राप्त करने के पात्र हैं।
- भारत सरकार अथवा राज्य सरकार की किसी अन्य योजना के तहत सरकारी सब्सिडी का लाभ ले चुकी इकाइयाँ तथा वर्तमान में कार्यशील इकाईयां इस योजना के तहत पात्र नहीं हैं।
- ‘प्रधान मंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम’ के तहत केवल नई स्थापित परियोजनाओं को स्वीकृति के लिए पात्र माना जाता है।
महत्व:
- यह योजना पांच वित्तीय वर्षों में लगभग 40 लाख व्यक्तियों के लिए अनुमानित स्थायी रोजगार के अवसर पैदा करेगी।
- ‘प्रधान मंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम’ योजना, गैर-कृषि क्षेत्र में सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना में सहायता करके देश भर में बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने की सुविधा प्रदान करती है।
प्रीलिम्स लिंक:
- प्रधान मंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP)
- पात्रता
- लाभ
मेंस लिंक:
प्रधान मंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के महत्व पर चर्चा कीजिए।
स्रोत: द हिंदू।
सामान्य अध्ययन–III
विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।
गवर्नमेंट- ई-मार्केटप्लेस
संदर्भ:
हाल ही, केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा ‘सहकारी समितियों’ को ‘गवर्नमेंट-ई-मार्केटप्लेस’ (Government-e-Marketplace – GeM) प्लेटफॉर्म पर उत्पाद बेचने की अनुमति देने संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गयी है।
महत्व:
- इस पहल से 8.54 लाख से अधिक पंजीकृत सहकारी समितियां और उनके 27 करोड़ सदस्य लाभान्वित होंगे।
- सूक्ष्म और मध्यम लघु उद्योगों के लिए अधिक खरीदार मिलेंगे और यह “वोकल फॉर लोकल” और आत्म निर्भर भारत की संभावनाओं को बढ़ावा देगा।
GeM के बारे में:
- ‘सरकारी ई-बाज़ार’ या ‘गवर्नमेंट-ई-मार्केटप्लेस’ (GeM) की शुरुआत ‘एक विशेष प्रयोजन कंपनी’ (एसपीवी) के रूप में 2017 में हुई थी।
- ‘गवर्नमेंट-ई-मार्केटप्लेस’ (GeM), सामान्य उपयोग की वस्तुओं और सेवाओं की ऑनलाइन खरीद की सुविधा के लिए ‘वन स्टॉप पोर्टल’ है।
- यह पोर्टल सभी सरकारी खरीदारों – केंद्र और राज्य मंत्रालय, विभाग, सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम इत्यादि- के लिए खुला है।
- इस प्लेटफॉर्म पर ‘निजी खरीदार’ खरीददारी नहीं कर सकते हैं, लेकिन निजी व्यक्ति पोर्टल के माध्यम से सरकारी निकायों को अपने उत्पाद बेच सकते हैं।
- नोडल मंत्रालय: वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय।
जीईएम का महत्व:
- पारदर्शी और लागत प्रभावी खरीद।
- आत्मनिर्भर भारत का प्रचार।
- छोटे स्थानीय विक्रेताओं का प्रवेश।
प्रीलिम्स लिंक:
- ‘गवर्नमेंट-ई-मार्केटप्लेस’ (GeM)
- पात्रता
- नोडल मंत्रालय
मेंस लिंक:
‘गवर्नमेंट-ई-मार्केटप्लेस’ (GeM) के महत्व पर चर्चा करें।
स्रोत: पीआईबी।
विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।
NTPC की जैव विविधता नीति
संदर्भ:
हाल ही में, ‘राष्ट्रीय ताप विद्युत निगम लिमिटेड’ (एनटीपीसी लिमिटेड) ने एक नवीनीकृत ‘जैव विविधता नीति’ 2022 (Biodiversity Policy 2022) जारी की है।
यह ‘जैव विविधता नीति’, NTPC की पर्यावरण नीति का एक अभिन्न अंग है और इसके उद्देश्य ‘पर्यावरण और संधारणीयता नीतियों’ के अनुरूप हैं।
‘जैव विविधता नीति’ के उद्देश्य:
- एनटीपीसी समूह के सभी पेशेवरों को इस क्षेत्र में निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति में योगदान करने के लिए सहयोग देना।
- वर्तमान में संचालित सभी साइटों पर जैव विविधता का ‘कोई सकल नुकसान नहीं’ होने का लक्ष्य प्राप्त करना और जहां भी उपयुक्त हो, ‘सकल सकारात्मक संतुलन’ सुनिश्चित करना।
- एनटीपीसी की मूल्य श्रृंखला में ‘जैव विविधता की अवधारणा’ को मुख्यधारा में लाना और सभी निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में जैव विविधता के संधारणीय प्रबंधन के लिए एक एहतियाती दृष्टिकोण अपनाना।
नीति के अपेक्षित परिणाम:
- व्यवसाय/फर्म की ओर से भागीदारी किए जाने से ‘समग्र संरक्षण’ में वृद्धि होगी।
- संरक्षण की बेहतर पद्धतियों का पता लगेगा और बेहतर परिणाम प्राप्त होंगे।
- जमीनी स्तर पर भागीदारी, लोगों को इस उद्देश्य से अधिक जुड़ाव महसूस कराएगी।
एनटीपीसी के बारे में:
- ‘राष्ट्रीय ताप विद्युत निगम लिमिटेड’ (National Thermal Power Corporation Limited – NTPC Ltd.) / ‘एनटीपीसी लिमिटेड’, विद्युत मंत्रालय के अधीन एक केंद्रीय ‘सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम’ (Public Sector Undertaking – PSU) है।
- यह भारत का सबसे बड़ा ऊर्जा समूह है जिसकी नींव भारत में विद्युत् विकास में तेजी लाने के लिए 1975 में रखी गई थी।
- वर्ष 2010 में ‘एनटीपीसी लिमिटेड’ ‘महारत्न कंपनी’ का दर्जा प्रदान किया गया था।
प्रीलिम्स लिंक:
- एनटीपीसी लिमिटेड
- जैव विविधता नीति
- ‘कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व’
स्रोत: द हिंदू।
विषय: आंतरिक सुरक्षा के लिये चुनौती उत्पन्न करने वाले शासन विरोधी तत्त्वों की भूमिका।
नागा शांति प्रक्रिया
(Naga Peace Process)
संदर्भ:
नागा विद्रोहियों का एक गुट ‘नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड’ (इसाक-मुइवा) या NSCN (IM), राज्य के लिए एक अलग ध्वज और एक संविधान की अपनी मांगों पर अड़ा हुआ है, जो कि भारत में सबसे पुराने उग्रवाद के मुद्दों के समाधान हेतु केंद्र सरकार के साथ जारी ‘शांति वार्ता’ में गतिरोध का संकेत है, जिससे इस क्षेत्र में उग्रवाद जारी रहने की संभावना है।
पृष्ठभूमि:
पूर्वोत्तर भारत में ‘नागा शांति प्रक्रिया’ (Naga Peace Process) साल 1997 के मध्य में नागा नेशनल काउंसिल (Naga National Council – NNC) द्वारा सशस्त्र बलों के साथ युद्धविराम की घोषणा किए जाने बाद से जारी है। अन्य नागा उग्रवादी समूहों द्वारा 2001 में बातचीत का विकल्प चुनना शुरू किया गया था, किंतु 3 अगस्त, 2015 को एक फ्रेमवर्क समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद, इन वार्ता विकल्पों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।
नागा राजनीतिक मुद्दों का संक्षिप्त इतिहास:
स्वतंत्रता पूर्व:
- अंग्रेजों ने वर्ष 1826 में असम पर कब्जा कर लिया और वर्ष 1881 में नागा हिल्स भी ब्रिटिश भारत का हिस्सा बन गयीं। नागा विद्रोह का पहला संकेत वर्ष 1918 में ‘नागा क्लब’ के गठन में देखा जाता है। इसके सदस्यों ने वर्ष 1929 में साइमन कमीशन को नागा पहाडियों से निकल जाने को कहा था।
- वर्ष 1946 में नागा नेशनल काउंसिल (Naga National Council- NNC) का गठन हुआ, जिसने 14 अगस्त 1947 को नागालैंड को एक स्वतंत्र राज्य घोषित कर दिया।
- ‘नागा नेशनल काउंसिल’ ने “संप्रभु नागा राज्य” स्थापित करने का संकल्प लिया और वर्ष 1951 में एक “जनमत संग्रह” कराया, जिसमें “99 प्रतिशत” ने एक “स्वतंत्र” नागालैंड के पक्ष में मतदान किया।
स्वतंत्रता पश्चात:
22 मार्च, 1952 को एक भूमिगत नागा फ़ेडरल गवर्नमेंट (NFG) और नागा फ़ेडरल आर्मी (NFA) का गठन किया गया। भारत सरकार ने विद्रोह कुचलने के लिए सेना भेजी तथा वर्ष 1958 में सशस्त्र बल (विशेष अधिकार) अधिनियम बनाया गया।
इस संबंध में किए गए समझौते:
- वर्ष 1997 में, नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड-आईएम (NSCN-IM) द्वारा केंद्र सरकार के साथ एक युद्धविराम समझौता किया गया था और उस समय से दोनों के बीच वार्ता जारी है। इसके अलावा, वर्ष 2017 से सात अलग-अलग नागा राष्ट्रीय राजनीतिक समूहों (Naga national political groups- NNPGs) के एक समूह की भी केंद्र के साथ वार्ता चल रही है।
- वर्ष 2015 में केंद्र सरकार और NSCN (IM) के बीच एक ‘फ्रेमवर्क समझौता’ पर हस्ताक्षर किये गए, तथा वर्ष 2017 में केंद्र ने NNPG के साथ एक “सहमत स्थिति” (agreed position) पर हस्ताक्षर किए।
- हालांकि, NSCN (IM) द्वारा अलग नागा ध्वज और संविधान की मांग किए जाने की वजह से, काफी लंबे समय से लंबित नागा राजनीतिक मुद्दों पर अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने में देरी हो रही है।
2015 का समझौता:
क्रमागत सरकारों के साथ वर्षों की बातचीत के बाद, 3 अगस्त 2015 को, भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा ‘नागा विवाद’ को हल करने के लिए ‘नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड’-आईएम (NSCN-IM) के साथ एक समझौते की रूपरेखा / फ्रेमवर्क पर हस्ताक्षर किए गए थे।
- “समझौता” नागाओं के लिए “साझा संप्रभुता” (Shared sovereignty) के विचार पर आधारित था। नागा समुदाय के अंतर्गत 60 से अधिक जनजातियां शामिल हैं (सटीक संख्या स्पष्ट नहीं है) और यह पूर्वोत्तर भारत और पड़ोसी म्यांमार के कुछ हिस्सों में फैली हुई है।
- ‘साझा संप्रभुता’ भारत और ‘नागालिम’ के बीच प्रशासनिक और विधायी शक्ति के बंटवारे को दर्शाती है।
- हालांकि, समझौते में सीमा के संदर्भ में सभी नागा क्षेत्रों का भौतिक एकीकरण शामिल नहीं किया गया है।
- इस व्यवस्था के तहत, सभी नागा जनजातियों का सर्वोच्च निकाय ‘नागा होहो’ (Naga Hoho), सभी नागा-वासी क्षेत्रों – प्रस्तावित ‘नागालिम’ (Nagalim) के साथ जुड़े होने अथवा नहीं जुड़े होने के बावजूद- के कल्याण की देखभाल करेगा।
इंस्टा जिज्ञासु:
नागा समूहों की प्रमुख मांग ‘ग्रेटर नागालैंड’ का गठन किए जाने की रही है। राज्य के किन हिस्सों को ‘ग्रेटर नागालैंड’ में शामिल किया जाता हैं?
प्रीलिम्स लिंक:
- ‘ग्रेटर नागालैंड’ के तहत शामिल राज्यों के हिस्से
- नागा क्लब और ‘नागा नेशनल काउंसिल’ (NNC)
- नागा जनमत संग्रह कब आयोजित किया गया था?
मेंस लिंक:
नागा शांति समझौते से जुड़े मुद्दों और चुनौतियों पर चर्चा कीजिए।
स्रोत: द हिंदू।
प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य
नेपच्यून और यूरेनस के भिन्न-भिन्न रंगों में दिखने का कारण
नेपच्यून और यूरेनस ग्रहों में बहुत कुछ, जैसे कि समान द्रव्यमान, आकार और वायुमंडलीय घटक समान है, लेकिन इनके रंग एक दूसरे से काफी भिन्न हैं।
- नेपच्यून (Neptune) दृश्यमान तरंग दैर्ध्य पर एक गहरा नीले रंग का दिखता है, जबकि यूरेनस (Uranus) विशेष रूप से हलके नीले रंग का प्रतीत होता है।
- खगोलविदों ने अब इसका स्पष्टीकरण खोज लिया है।
- इसका कारण, यूरेनस के चारों ओर फैले बादलों की मोटाई, नेपच्यून के बादलों की तुलना में अधिक होना बताया गया है।
- यूरेनस अपने शिथिल एवं शांत वातावरण के कारण नेपच्यून की तुलना में ‘हल्का’ प्रतीत होता है।
- यदि, नेप्च्यून और यूरेनस के वायुमंडल में कोई ‘धुंध’ नहीं होती, तो उनके वायुमंडल में बिखरी नीली रोशनी की वजह से दोनों ग्रह लगभग समान रूप से नीले दिखाई पड़ते।
HIMARS रॉकेट
संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा युद्धग्रस्त यूक्रेन में ‘M142 हाई मोबिलिटी आर्टिलरी रॉकेट सिस्टम’ भेजा जा रहा है। इस रॉकेट सिस्टम को HIMARS (High Mobility Artillery Rocket Systems) भी कहा जाता है।
- HIMARS मध्यम दूरी का रॉकेट सिस्टम हैं।
- यह एक हाई-टेक, व्हील माउंटेड, हल्का रॉकेट लॉन्चर है, जो इसे युद्ध के मैदान में अधिक चपलता और गतिशीलता प्रदान करता है।
- मारक क्षमता: 80 किमी।
सीआरपीएफ कांस्टेबलों के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता में छूट
- सरकार ने छत्तीसगढ़ के बीजापुर, दंतेवाड़ा और सुकमा जिलों से होने वाली भर्ती में ‘केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल’ (सीआरपीएफ) में कांस्टेबलों की भर्ती के लिए न्यूनतम योग्यता में छूट दी है, ताकि आदिवासी युवाओं को बल में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।
- कांस्टेबल पद के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता को 10वीं कक्षा पास से कम करके 8वीं कक्षा पास तक कर दिया गया है।
आवश्यकता:
- सीआरपीएफ द्वारा 2016-2017 में छत्तीसगढ़ में चार जिलों बीजापुर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर और सुकमा के अनुसूचित जनजाति के लोगों की भर्ती करके एक ‘बस्तरिया बटालियन’ का गठन किया गया था।
- हालांकि, इस भर्ती प्रक्रिया का सर्वोत्तम परिणाम नहीं मिल सका, क्योंकि 10वीं पास की आवश्यक शैक्षिक आवश्यकता की कमी के कारण आंतरिक क्षेत्र के मूल युवा प्रतिस्पर्धा करने में असमर्थ थे।
इज़राइल एवं संयुक्त अरब अमीरात के बीच एक मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर
हाल ही में, इज़राइल और संयुक्त अरब अमीरात ने एक मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह अपनी तरह का पहला मामला है जब इस्राइल ने किसी अरब देश के साथ समझौता किया है।
- इस समझौते के तहत, कारोबार किए गए सभी उत्पादों के 96% पर ‘सीमा शुल्क’ को समाप्त कर दिया गया है।
- संयुक्त अरब अमीरात, इजरायल के साथ संबंधों को सामान्य करने वाला पहला खाड़ी देश, और मिस्र और जॉर्डन के बाद ऐसा करने वाला केवल तीसरा अरब देश है।
विश्व दुग्ध दिवस
प्रतिवर्ष दुनिया भर में, 1 जून को ‘विश्व दुग्ध दिवस’ (World Milk Day) के रूप में मनाया जाता है।
- विश्व दुग्ध दिवस 2022 का विषय: जलवायु परिवर्तन संकट की ओर दुनिया का ध्यान आकर्षित करना और इस बात पर ध्यान डालना है कि डेयरी इंडस्ट्री पृथ्वी पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कैसे कम कर सकता है।
- इसका उद्देश्य अगले 30 वर्षों में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करके और डेयरी क्षेत्र को टिकाऊ बनाने के लिए अपशिष्ट प्रबंधन में सुधार करके ‘डेयरी नेट जीरो’ लक्ष्य प्राप्त करना है।
- संयुक्त राष्ट्र के ‘खाद्य और कृषि संगठन’ द्वारा 1 जून साल 2001 को वैश्विक भोजन के रूप में दूध के महत्व को चिह्नित करने के लिए, ‘वर्ल्ड मिल्क डे’ के रूप में अपनाया गया था
- भारत, दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश है, जिसका वैश्विक उत्पादन 22% है। इसके बाद संयुक्त राज्य अमेरिका का स्थान है।
- भारत के शीर्ष 5 दूध उत्पादक राज्य- उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और आंध्र प्रदेश हैं।










