[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 1 June 2022

विषयसूची

सामान्य अध्ययन-II

  1. जीएसटी क्षतिपूर्ति
  2. हर घर तिरंगा

 

सामान्य अध्ययन-III

  1. पीएम-किसान योजना
  2. तरल नैनो यूरिया
  3. धन शोधन निवारण अधिनियम

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

  1. अस्त्र मार्क -1
  2. सूचना समाज फोरम विश्व शिखर सम्मेलन, 2022
  3. ‘फूलों की घाटी’

 


सामान्य अध्ययनII


 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

जीएसटी क्षतिपूर्ति


(GST compensation)

संदर्भ:

केंद्र सरकार द्वारा 31 मई, 2022 तक राज्यों को देय ‘वस्तु और सेवा कर’ (जीएसटी) क्षतिपूर्ति की पूरी राशि- ₹86,912 करोड़ जारी कर दी गयी है।

यह कदम, राज्यों को उनके संसाधनों के प्रबंधन में सहायता करने और वित्तीय वर्ष के दौरान उनके कार्यक्रमों, विशेष रूप से पूंजीगत व्यय, को सफलतापूर्वक पूरा किए जाने को सुनिश्चित करने के लिए उठाया जा रहा है।

‘जीएसटी क्षतिपूर्ति’ क्या है?

एक समान राष्ट्रव्यापी ‘वस्तु एवं सेवा कर’ (जीएसटी) लागू करने हेतु, ‘संविधान (101वां संशोधन) अधिनियम’, 2016 (Constitution (One Hundred and First Amendment) Act, 2016) के अंतर्गत एक ‘तंत्र’ का निर्माण किया गया था।

इसके तहत, राज्यों को ‘जीएसटी का SGST घटक अर्थात ‘राज्य जीएसटी’ और IGST अर्थात समन्वित जीएसटी (Integrated GST) का एक भाग दिया जाना निर्धारित किया गया। इसके अतिरिक्त, इस नई अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था अपनाए जाने से राज्यों को होने वाली ‘राजस्व क्षति’ को, पांच साल की अवधि के लिए, एक समेकित ‘जीएसटी क्षतिपूर्ति कोष’ से पूरा किए जाने पर सहमति हुई थी।

‘जीएसटी क्षतिपूर्ति कोष’ का वित्तीयन:

  • इस कोष को एक ‘क्षतिपूर्ति उपकर’ (Compensation Cess) के माध्यम से वित्त पोषित किया जाता है। यह उपकर तथाकथित ‘अवगुण’ समझी जाने वाली वस्तुओं (Demerit Goods) पर लगाया जाता है।
  • इन वस्तुओं में पान मसाला, सिगरेट और तम्बाकू उत्पाद, वायवीय पानी, कैफीनयुक्त पेय पदार्थ, कोयला और कुछ यात्री मोटर वाहन शामिल हैं।

 

राजस्व क्षतिपूर्ति की गणना:

राजस्व क्षतिपूर्ति की गणना, आधार वर्ष (2015-2016) के सकल राजस्व में प्रतिवर्ष 14% चक्रवृद्धि दर के हिसाब से वृद्धि के आधार पर ‘अनुमानित राजस्व’, तथा गणना वर्ष के आंकलित आंकड़े और वास्तविक जीएसटी संग्रह के मध्य अंतर की गणना करके प्रतिवर्ष की जाती है।

क्षतिपूर्ति समयसीमा में वृद्धि:

जीएसटी क्षतिपूर्ति के लिए समय सीमा, मूल-कानून में निर्धारित की गई थी, और इसलिए इसमें वृद्धि करने हेतु, ‘जीएसटी परिषद’ को पहले इस संदर्भ में केंद्र सरकार के लिए सिफारिश करनी होगी।

इसके बाद केंद्र सरकार द्वारा जीएसटी क्षतिपूर्ति योजना की समाप्ति तारीख को आगे बढाए जाने हेतु जीएसटी कानून में एक संशोधन प्रस्ताव पारित करना होगा।

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं, कि अब भी क्षतिपूर्ति उपकर, चालू वित्त वर्ष के बाद भी लागू रहेगा, क्योंकि क्षतिपूर्ति कोष में कमी की भरपाई हेतु लिए गए ऋण को चुकाने हेतु इसकी आवश्यकता रहेगी?

प्रीलिम्स लिंक:

  1. जीएसटी क्या है?
  2. SGST और IGST क्या हैं?
  3. संबंधित संवैधानिक प्रावधान।
  4. GST के दायरे से बाहर वस्तुएं।

मेंस लिंक:

जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर की आवश्यकता पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

हर घर तिरंगा


संदर्भ:

पूरे देश में ‘संशोधित भारतीय ध्वज संहिता’ (Revised Flag Code of India) में लागू हो गयी है। केंद्र सरकार ने द्वारा दिसंबर 2021 में धवज संहिता (फ्लैग कोड) में संशोधन किया गया था।

संशोधित नियमों के तहत:

भारतीय राष्ट्रीय ध्वज या तिरंगा को अब ‘पॉलिएस्टर’ कपडे से और मशीनों की मदद से बनाया जा सकता है।

पृष्ठभूमि:

इससे पहले ‘भारतीय ध्वज संहिता’, 2002 के अनुसार, राष्ट्रीय धवज के निर्माण में केवल खादी या हाथ से काता हुआ कपड़ा की प्रयोग करने की अनुमति थी।

हर घर तिरंगा (हर दरवाजे पर तिरंगा) कार्यक्रम:

‘हर घर तिरंगा’ (Har Ghar Tiranga) कार्यक्रम में सरकारी भवनों, निजी कार्यालयों और आवासों को कवर करने का प्रस्ताव किया गया है।

राष्ट्रीय ध्वज का प्रयोग करने संबंधी क़ानून:

‘राष्ट्रीय ध्वज के फहराने’ तथा ध्वज के उपयोग और प्रदर्शन के संबंध में ‘राष्ट्र-गौरव अपमान-निवारण अधिनियम’, 1971 (Prevention of Insults to National Honour Act, 1971) तथा ‘भारतीय ध्वज संहिता’, 2002 के तहत प्रावधान किए गए हैं।

ध्वज संहिता में किए गए पिछले संशोधन:

  • ध्वज संहिता में पहले भी संशोधन किया जा चुका है। भारत की मूल ‘ध्वज संहिता’, 1947 में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद वर्ष 2002 में संशोधन किया गया था।
  • इस संशोधन के द्वारा, झंडा प्रदर्शित करने या फहराये जाने संबंधी स्थानों की परिभाषा का विस्तार किया गया था। हालाँकि, इस संशोधन में ‘ध्वज संहिता’ के तहत ‘राष्ट्रीय ध्वज’ के विवरण से संबंधित अंश को नहीं छेड़ा गया गया था।

‘राष्ट्रीय ध्वज’ का विकास:

Current Affairs

 

  • वर्तमान राष्ट्रीय ध्वज, ‘पिंगली वेंकय्या’ द्वारा अधिकल्पित किए गए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के स्वराज ध्वज पर आधारित है।
  • ध्वज में कई बार परिवर्तन किए जाने के बाद, वर्ष 1931 में कराची में आयोजित कांग्रेस कमेटी की बैठक में तिरंगे को हमारे राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाया गया था।

भारत के राष्ट्रीय ध्वज के संबंध में संवैधानिक और वैधानिक प्रावधान:

अनुच्छेद 51A(a) – संविधान का पालन करना और उसके आदर्शों, संस्थाओं, राष्ट्र ध्वज और राष्ट्रगान सम्मान करना।

ध्वज का उपयोग करने के संदर्भ में क़ानून:

  1. संप्रतीक और नाम (अनुचित प्रयोग निवारण) अधिनियम, 1950 (Emblems and Names (Prevention of Improper Use) Act, 1950)
  2. राष्ट्र-गौरव अपमान-निवारण अधिनियम, 1971 (Prevention of Insults to National Honour Act, 1971)

Current Affairs

 

सर्वपल्ली राधाकृष्णन द्वारा राष्ट्रीय ध्वज का महत्व निम्नलिखित तरीके से बताया गया है:

  1. “अशोक चक्र” धर्म के विधान का पहिया है। चक्र यह प्रदर्शित करता है, कि गति में जीवन है और ठहराव में मृत्यु है।
  2. भगवा रंग, अनासक्ति के परित्याग को दर्शाता है।
  3. ध्वज के केंद्र में सफेद रंग की पट्टिका है, जो प्रकाश एवं हमारे आचरण का मार्गदर्शन करने के लिए सत्य के मार्ग को को दर्शाती है।
  4. हरा रंग, यहां की मिट्टी और वनस्पति से हमारे संबंध को दर्शाता है, जिस पर अन्य सभी जीवन का निर्भर होता है।

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप वर्ष 1923 में, मध्य प्रदेश के जबलपुर और महाराष्ट्र के नागपुर में आयोजित में ‘ध्वज सत्याग्रह’ / ‘झंडा सत्याग्रह’ के बारे में जानते हैं?

प्रीलिम्स लिंक:

  1. वेंकैया द्वारा डिज़ाइन किया गया झंडा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा आधिकारिक तौर पर कब स्वीकार किया गया था?
  2. संविधान सभा द्वारा राष्ट्रीय ध्वज को कब अपनाया गया।
  3. भारतीय धवज संहिता- अवलोकन।

मेंस लिंक:

भारतीय धवज संहिता, 2002 के प्रमुख प्रावधानों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 


सामान्य अध्ययनIII


 

विषय: प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कृषि सहायता तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य से संबंधित विषय; जन वितरण प्रणाली- उद्देश्य, कार्य, सीमाएँ, सुधार; बफर स्टॉक तथा खाद्य सुरक्षा संबंधी विषय; प्रौद्योगिकी मिशन; पशु पालन संबंधी अर्थशास्त्र।

पीएम-किसान योजना


संदर्भ:

हाल ही में, ‘प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (Pradhan Mantri Kisan Samman Nidhi) या ‘पीएम-किसान’  (PM-KISAN) की 11वीं किस्त के रूप में 20,000 करोड़  रुपये से अधिक राशि, 10 करोड़ से अधिक किसानों को अंतरित की गयी।

‘पीएम-किसान योजना’ के बारे में:

  • यह भारत सरकार द्वारा 100 प्रतिशत वित्त-पोषित, एक केंद्रीय क्षेत्रक योजना (central sector scheme) है। इस योजना को दिसंबर 2018 में शुरू किया गया था।
  • इस योजना के तहत, पात्र लाभार्थी किसान परिवारों को 6,000 रुपए प्रति वर्ष का वित्तीय लाभ प्रदान किया जाता है, जो चार-चार महीने की अवधि में 2000 रुपए की तीन समान किश्तों में दिया जाता है।
  • राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन द्वारा योजना के लिए पात्र किसानों को चिह्नित किया जाता है, और चिह्नित किसानों की इस सूची को केंद्र के साथ साझा किया जाता है।

योजना का विस्तार:

इस योजना के अंतर्गत, शुरुआत में, दो हेक्टेयर तक की कृषि योग्य भूमि पर खेती करने वाले पूरे देश के सभी छोटे और सीमांत किसान परिवारों के लिए आय-सहायता प्रदान की गई थी। बाद में, 01 जून, 2019 से इस योजना का विस्तार करते हुए देश के किसान परिवारों को इसके दायरे में लाया गया तथा पूर्व निर्धारित कृषि योग्य भूमि-जोत की सीमा को हटा लिया गया।

अपवाद:

पिछले आकलन वर्ष में, आयकर दाता, डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, चार्टर्ड अकाउंटेंट आदि जैसे पेशेवर और प्रति माह न्यूनतम 10,000 रुपए प्राप्त करने वाले (एमटीएस / चतुर्थ-वर्ग / ग्रुप डी कर्मचारी को छोड़कर) संपन्न किसानों को इस योजना से बाहर रखा गया है।

राज्यों द्वारा चलाए जा रहे इसी प्रकार के कार्यक्रम:

  1. भावांतर भुगतान योजना- म.प्र.
  2. रायथु बंधु योजना- तेलंगाना
  3. आजीविका और आय वृद्धि हेतु कृषक सहायता (Krushak Assistance for Livelihood and Income augmentation KALIA)- ओडिशा।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. पीएम किसान- पात्रता।
  2. भावांतर भुगतान योजना के बारे में।
  3. रायथु बंधु योजना के बारे में।
  4. KALIA योजना के बारे में।

मेंस लिंक:

प्रधान मंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान), भारत में किसानों को सरकारी सहायता की प्रकृति में एक विवर्तनिक बदलाव है। इस योजना के प्रदर्शन का मूल्यांकन कीजिए।

स्रोत: पीआईबी।

 

विषय: प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कृषि सहायता तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य से संबंधित विषय; जन वितरण प्रणाली- उद्देश्य, कार्य, सीमाएँ, सुधार; बफर स्टॉक तथा खाद्य सुरक्षा संबंधी विषय; प्रौद्योगिकी मिशन; पशु पालन संबंधी अर्थशास्त्र।

नैनो यूरिया (तरल)


संदर्भ:

हाल ही में, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के ‘कलोल’ में देश के पहले ‘तरल नैनो यूरिया’ (Liquid Nano Urea) संयंत्र का उद्घाटन किया।

‘तरल नैनो यूरिया’ का उत्पादन ‘भारतीय किसान उर्वरक सहकारी’ लिमिटेड (IFFCO) द्वारा किया जाएगा।

 

‘नैनो यूरिया’ (तरल) के बारे में:

यूरिया, सफेद रंग का एक रासायनिक नाइट्रोजन उर्वरक है, जो कृत्रिम रूप से पौधों के लिए आवश्यक एक प्रमुख पोषक तत्व ‘नाइट्रोजन’ प्रदान करता है।

तरल नैनो यूरिया (Liquid nano urea), मुख्यतः यूरिया का ‘नैनो कणों’ में परिवर्तित रूप होती है।

‘तरल नैनो यूरिया’ एवं ‘आयातित यूरिया’ में अंतर:

  • लागत: ‘तरल नैनो यूरिया’ अपेक्षाकृत सस्ती होती है। बगैर सब्सिडी के इसके आधा लीटर का मूल्य 240 रुपये तक होता है, जबकि ‘यूरिया’ के एक बैग (बोरी) की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में 3,500 रुपये से 4,000 रुपये के बीच होती है। ‘नैनो यूरिया’ की एक बोतल, प्रभावी ढंग से ‘यूरिया’ के कम से कम एक बैग के बराबर कार्य कर सकती है।
  • सरकार के लिए लाभ: ‘तरल नैनो यूरिया’ सरकार के उर्वरक सब्सिडी भार को कम करेगी। भारत में, देश में उपयोग किए जाने वाले उर्वरकों का व्यापक रूप से आयात किया जाता है अर्थात उर्वरकों के आयात पर निर्भर है।
  • ‘तरल नैनो यूरिया’ की दक्षता 85-90 प्रतिशत तक हो सकती है, जबकि पारंपरिक यूरिया की दक्षता मात्र लगभग 25 प्रतिशत होती है।
  • ‘तरल नैनो यूरिया’ के भंडारण और उपयोग करने तक की अवधि अर्थात ‘शेल्फ लाइफ’ (Shelf Life) एक साल होती है, यानि कि इसे एक साल की अवधि तक रखा और उपयोग किया जा सकता है, और किसानों को ‘तरल नैनो यूरिया’ के ‘नमी’ के संपर्क में आने पर जम जाने (केकिंग) के बारे में चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है।

‘तरल नैनो यूरिया’ के अन्य लाभ:

  1. ‘नैनो रूप’ में उपलब्ध उर्वरक, फसलों को पोषक तत्वों की लक्षित आपूर्ति प्रदान करते हैं, क्योंकि अति सूक्ष्म (नैनो) रूप में बोए जाने वाले उर्वरक, पत्तियों की बाह्य-त्वचा पर पाए जाने वाले रंध्रों द्वारा अवशोषित कर लिए जाते हैं।
  2. इसके प्रयोग से, पारंपरिक यूरिया का असंतुलित और अंधाधुंध उपयोग कम हो जाता है।
  3. इससे फसल उत्पादकता में वृद्धि होती है।
  4. ‘तरल नैनो यूरिया’ से मिट्टी, पानी और वायु प्रदूषण कम होता है।

Current Affairs

Current Affairs

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप ‘नीम लेपित यूरिया’ (Neem Coated Urea) के बारे में जानते हैं? इसके क्या फायदे हैं?

प्रीलिम्स लिंक:

  1. नैनो तरल यूरिया।
  2. यूरिया।
  3. NPK उर्वरक।
  4. यूरिया सब्सिडी।

मेंस लिंक:

भारतीय कृषि में उर्वरक संकटों की विवेचना कीजिए। क्या आपको लगता है कि 2024 तक भारतीय किसान यूरिया का उपयोग आधा कर सकते हैं?

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 

विषय: संचार नेटवर्क के माध्यम से आंतरिक सुरक्षा को चुनौती, आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों में मीडिया और सामाजिक नेटवर्किंग साइटों की भूमिका, साइबर सुरक्षा की बुनियादी बातें, धन-शोधन और इसे रोकना।

 धन शोधन निवारण अधिनियम


(Prevention of Money Laundering Act)

संदर्भ:

हाल ही में, प्रवर्तन निदेशालय ने दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री और ‘आम आदमी पार्टी’ (आप) के वरिष्ठ नेता सत्येंद्र जैन को ‘हवाला लेनदेन’ मामले में उनकी कथित संलिप्तता के संबंध में ‘धन शोधन निवारण अधिनियम’ (Prevention of Money Laundering Act – PMLA) के आपराधिक प्रावधानों के तहत गिरफ्तार कर लिया है।

‘धन शोधन निवारण अधिनियम’ के बारे में:

‘धन शोधन निवारण अधिनियम’ (Prevention of Money Laundering Act – PMLA), मनी लॉन्ड्रिंग के खतरे को रोकने हेतु भारत की वैश्विक प्रतिबद्धता (वियना कन्वेंशन सहित) की प्रतिक्रिया के रूप में अधिनियमित किया गया था।

अधिनियम के उद्देश्य: ‘धन शोधन निवारण अधिनियम’ (PMLA) को वर्ष 2002 में अधिनियमित किया गया था और यह मनी लॉन्ड्रिंग (काले धन को सफेद में बदलने की प्रक्रिया) पर अंकुश लगाने और मनी-लॉन्ड्रिंग से प्राप्त संपत्ति की जब्ती का प्रावधान करने हेतु वर्ष 2005 में लागू किया गया था।

PMLA के मुख्य रूप से तीन उद्देश्य हैं:

  1. मनी लॉन्ड्रिंग को रोकना एवं नियंत्रित करना।
  2. शोधित धन से प्राप्त संपत्ति को जब्त करना।
  3. भारत में मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े किसी अन्य मुद्दे से निपटना।

विवाद निवारण:

  • अधिनियम के तहत, ‘निर्णायक प्राधिकारी’ (Adjudicating Authority) की नियुक्ति केंद्र सरकार द्वारा की जाती है। यह प्राधिकरण इस बात का निर्णय करता है कि कुर्क की गई या जब्त की गई संपत्ति ‘मनी लॉन्ड्रिंग’ से संबंधित है अथवा नहीं।
  • निर्णायक प्राधिकारी, ‘नागरिक प्रक्रिया संहिता, 1908’ द्वारा निर्धारित प्रक्रिया से बाध्य नहीं होगा, लेकिन प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों द्वारा निर्देशित होगा और PMLA के अन्य प्रावधानों के अधीन कार्य करेगा।

अपीलीय अधिकरण:

सरकार द्वारा नियुक्त एक ‘अपीलीय अधिकरण’ (Appellate Tribunal) को ‘निर्णायक प्राधिकारी’ के आदेशों के खिलाफ अपील सुनने की शक्ति प्रदान की गयी है। ट्रिब्यूनल के आदेशों के खिलाफ उपयुक्त उच्च न्यायालय में भी अपील की जा सकती है।

विशेष न्यायालय:

धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (PMLA) के तहत केंद्र सरकार द्वारा विशेष अदालत की स्थापना का प्रावधान किया गया है।

धन शोधन निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2012:

  • संशोधन अधिनियम के तहत, ‘रिपोर्टिंग इकाई’ की अवधारणा को शामिल किया गया है जिसमें एक बैंकिंग कंपनी, वित्तीय संस्थान, मध्यस्थ आदि शामिल होंगे।
  • PMLA, 2002 के तहत 5 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाए जाने का प्रावधान था, लेकिन संशोधन अधिनियम द्वारा इस ऊपरी सीमा को हटा दिया गया है।
  • संशोधन अधिनियम के तहत, मनी लॉन्ड्रिंग की गतिविधियों में शामिल किसी भी व्यक्ति की संपत्ति की अस्थायी कुर्की और जब्ती का भी प्रावधान किया गया है।

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप ‘वित्तीय खुफिया इकाई – भारत’ (FIU-IND) के बारे में जानते हैं?

  • ‘वित्तीय खुफिया इकाई – भारत’ (Financial Intelligence Unit – India अर्थात FIU-IND), वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के अधीन एक स्वतंत्र निकाय है जो सीधे वित्त मंत्री की अध्यक्षता वाली ‘आर्थिक खुफिया परिषद’ (Economic Intelligence Council – EIC) को रिपोर्ट करता है।
  • FIU-IND केंद्रीय राष्ट्रीय एजेंसी है जो संदिग्ध वित्तीय लेनदेन से संबंधित जानकारी प्राप्त करने, संसाधित करने, विश्लेषण करने और प्रसारित करने के लिए जिम्मेदार है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘धन शोधन निवारण अधिनियम’ (PMLA) के बारे में
  2. अधिनियम के तहत विवाद निवारण तंत्र
  3. अधिनियम के तहत अपीलीय न्यायाधिकरण

मेंस लिंक:

मनी लॉन्ड्रिंग क्या है? मनी लॉन्ड्रिंग कैसे काम करता है? मनी लॉन्ड्रिंग को रोकने के लिए भारत सरकार द्वारा उठाए गए विभिन्न कदमों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


 

अस्त्र मार्क -1

हाल ही में, रक्षा मंत्रालय द्वारा ‘अस्त्र मार्क -1’ (Astra Mark-1) की आपूर्ति के लिए हैदराबाद स्थित सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी ‘भारत डायनेमिक्स लिमिटेड’ (बीडीएल) के साथ एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

  • ‘अस्त्र मार्क -1’ एक ‘दृश्य सीमा से परे’ (Beyond Visual Range – BVR), हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल (Air-To-Air Missile – AAM) है।
  • इस मिसाइल को रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा भारतीय वायुसेना के सुखोई -30 एमकेआई और तेजस और नौसेना के मिग-29 के जैसे लड़ाकू विमानों पर तैनाती के लिए डिजाइन और विकसित किया गया है।
  • मारक क्षमता: 110 किमी।

 

 

सूचना समाज फोरम विश्व शिखर सम्मेलन, 2022

हाल ही में, स्विट्जरलैंड के जिनेवा में ‘सूचना समाज विश्व शिखर सम्मेलन’ (World Summit on the Information Society – WSIS) फोरम आयोजित किया गया था।

  • सूचना समाज विश्व शिखर सम्मेलन (WSIS) फोरम 2022, ‘डेवलपमेंट समुदाय’ के लिए ‘संचार प्रौद्योगिकी संबंधी संयुक्त राष्ट्र की पहली और सबसे बड़ी वार्षिक सभा’ का प्रतिनिधित्व करता है।
  • इस शिखर सम्मेलन का आयोजन, अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ (आईटीयू), यूनेस्को, यूएनडीपी और अंकटाड द्वारा सह-संगठित सभी WSIS एक्शन लाइन फैसिलिटेटर्स के निकट सहयोग से किया गया था।
  • WSIS 2022 के लिए थीम: “लोक-कल्याण, समावेशन और अनुकूलन के लिए आईसीटी: एसडीजी पर प्रगति को गति देने के लिए डब्ल्यूएसआईएस सहयोग” (ICTs for Well-Being, Inclusion and Resilience: WSIS Cooperation for Accelerating Progress on the SDGs)।

उद्देश्य: यह दो-चरण में आयोजित किया जाने वाला संयुक्त राष्ट्र (यूएन) का एक अद्वितीय शिखर सम्मेलन है जिसे राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक संरचित और समावेशी दृष्टिकोण के माध्यम से सूचना और संचार प्रौद्योगिकियों (आईसीटी) द्वारा उठाए गए मुद्दों को संबोधित करने के उद्देश्य से एक विकसित बहु-हितधारक मंच बनाने के लिए शुरू किया गया है।

 

फूलों की घाटी’

फूलों की घाटी (Valley of Flowers), हाल ही में पर्यटकों के लिए खोलदी गयी है।

  • यह उत्तराखंड में स्थित है।
  • 1982 में एक ‘राष्ट्रीय उद्यान’ के रूप में घोषित ‘फूलों की घाटी’ 87.50 वर्ग किमी के विस्तार में फैली हुई है।
  • इसे 2005 में यूनेस्को की ‘विश्व धरोहर स्थल’ घोषित किया गया था।
  • इस घाटी की खोज एक उत्साही ब्रिटिश पर्वतारोही और वनस्पतिशास्त्री, ‘फ्रैंक एस स्माइथ’ द्वारा 1931 में की गई थी।
  • ‘फूलों की घाटी’ में आज 600 से अधिक फूलों की प्रजातियां पायी जाती है, जिसमें ब्रह्मकमल (Brahmkamal) जैसी कुछ विदेशज किस्में भी शामिल हैं। ‘ब्रह्मकमल’ उत्तराखंड का राजकीय पुष्प भी है।
  • फूलों की रानी के रूप में वर्णित ‘ब्लू पोस्ता’ भी इस घाटी में पाया जा सकता है।
  • यह क्षेत्र तेंदुआ, कस्तूरी मृग और नीली भेड़ जैसी प्रजातियों सहित जीव विविधता से समृद्ध है।
  • यह घाटी ज़ांस्कर श्रेणी और महान हिमालय की पर्वत श्रृंखलाओं के बीच एक अद्वितीय ‘संक्रमण क्षेत्र’ में स्थित है।
  • यह राष्ट्रीय उद्यान पूरी तरह से ‘समशीतोष्ण अल्पाइन क्षेत्र’ में स्थित है।