विषयसूची
सामान्य अध्ययन-II
- जल जीवन मिशन
- अंतर्राष्ट्रीय संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिक दिवस
- संयुक्त राष्ट्र पर्यावास
- भारत एवं पाकिस्तान पाक के बीच सिंधु जल वार्ता
सामान्य अध्ययन-III
- दक्षिण अफ्रीका और नामीबिया से चीतों को लाए जाने संबंधी समझौता
प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य
- शीर्ष चीनी उत्पादक राज्य
- जनरेशन नेक्स्ट डेमोक्रेसी नेटवर्क
- रक्त चंदन / रेड सैंडर्स
- परम अनंत
- उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता
- ‘यूनिकॉर्न’ क्या होते हैं?
- मृत्यु के कारण का चिकित्सा प्रमाणन
- सेला मकाक
सामान्य अध्ययन–II
विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।
जल जीवन अभियान
संदर्भ:
भारत में अब तक 50% ग्रामीण परिवारों को ‘जल जीवन अभियान / मिशन’ (Jal Jeevan Mission – JJM) के तहत कवर किया जा चुका है।
2019 में जल जीवन मिशन की शुरुआत के समय, केवल 3.23 करोड़ घरों में यानी 17 प्रतिशत ग्रामीण जनसंख्या के पास नल के माध्यम से पीने का पानी उपलब्ध था।
योजना के अंतर्गत प्रदर्शन:
- गोवा, तेलंगाना, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, दादरा एवं नगर हवेली तथा दमन एवं दीव, पुडुचेरी और हरियाणा ने पहले ही शत-प्रतिशत घरों तक नल का पानी पहुंचा कर महत्वपूर्ण उपलब्धि प्राप्त कर ली है।
- पंजाब, गुजरात, हिमाचल प्रदेश और बिहार में 90 प्रतिशत से अधिक का कवरेज है और ‘हर घर जल’ का दर्जा प्राप्त करने की दिशा में तेजी से प्रगति कर रहे हैं।
‘जल जीवन मिशन’ के बारे में:
- ‘जल जीवन मिशन’ (Jal Jeevan Mission) के तहत वर्ष 2024 तक सभी ग्रामीण घरों में, कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन (Functional House Tap Connections- FHTC) के माध्यम से प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 55 लीटर जल की आपूर्ति की परिकल्पना की गई है।
- यह अभियान, जल शक्ति मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है।
- इसे 2019 में लॉन्च किया गया था।
यह मिशन निम्नलिखित उद्देश्यों की प्राप्ति के बारे में सुनिश्चित करता है:
- मौजूदा जल आपूर्ति प्रणालियों और जल कनेक्शनों की कार्यात्मकता।
- जल गुणवत्ता निगरानी और परीक्षण के साथ-साथ संधारणीय कृषि।
- संरक्षित जल का संयुक्त उपयोग।
- पेयजल स्रोतों में वृद्धि।
- पेयजल आपूर्ति प्रणाली, मलिन जल-उपचार (ग्रे वाटर ट्रीटमेंट) और इसका पुन: उपयोग।
इसके अंतर्गत निम्नलिखित कार्यो को शामिल किया गया है:
- गुणवत्ता प्रभावित क्षेत्रों, सूखा प्रवण और रेगिस्तानी क्षेत्रों के गांवों, सांसद आदर्श ग्राम योजना (SAGY) के अंतर्गत आने वाले गांवों, आदि में कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन (FHTC) लगाए जाने को प्राथमिकता देना।
- स्कूलों, आंगनवाड़ी केंद्रों, ग्राम पंचायत भवनों, स्वास्थ्य केंद्रों, कल्याण केंद्रों और सामुदायिक भवनों के लिए कार्यात्मक नल कनेक्शन की सुविधा प्रदान करना।
- जल-गुणवत्ता की समस्या वाले स्थानों को प्रदूषण-मुक्त करने के लिए तकनीकी हस्तक्षेप।
कार्यान्वयन:
- ‘जल जीवन मिशन’, जल के प्रति सामुदायिक दृष्टिकोण पर आधारित है और इसके तहत मिशन के प्रमुख घटक के रूप में व्यापक जानकारी, शिक्षा और संवाद को शामिल किया गया है।
- इस मिशन का उद्देश्य, जल के लिए एक जन-आंदोलन तैयार करना है, जिसके द्वारा यह हर किसी की प्राथमिकता में शामिल हो जाए।
- इस मिशन के लिए, केंद्र और राज्यों द्वारा, हिमालयी और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए 90:10; अन्य राज्यों के लिए 50:50 के अनुपात में; और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए केंद्र सरकार द्वारा 100% वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।
इंस्टा जिज्ञासु:
क्या आप जानते हैं कि गांव की जलापूर्ति प्रणालियों की योजना, क्रियान्वयन, प्रबंधन, संचालन और रखरखाव के लिए ‘जल जीवन मिशन’ का प्रबंधन ‘पानी समितियों’ द्वारा किया जाता है?
प्रीलिम्स लिंक:
- ‘जल जीवन मिशन’ का लक्ष्य
- कार्यान्वयन
- राशि आवंटन
मेंस लिंक:
‘जल जीवन मिशन’ के महत्व पर चर्चा कीजिए।
स्रोत: द हिंदू।
विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।
अंतर्राष्ट्रीय संयुक्त राष्ट्र शांति रक्षक दिवस
(International Day of UN Peacekeepers)
संदर्भ:
29 मई को वैश्विक स्तर पर ‘अंतर्राष्ट्रीय संयुक्त राष्ट्र शांति रक्षक दिवस’ (International Day of UN Peacekeepers) मनाया जाता है।
‘अंतर्राष्ट्रीय संयुक्त राष्ट्र शांति रक्षक दिवस’ 2022 की थीम: “लोग। शांति। प्रगति। भागीदारी की शक्ति।” (People. Peace. Progress. The Power of Partnerships)।
अंतर्राष्ट्रीय संयुक्त राष्ट्र शांति रक्षक दिवस 29 मई को ही क्यों मनाया जाता है?
29 मई 1948 को पहले ‘संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन’ की स्थापना की गयी थी।
- इस दिन ‘सुरक्षा परिषद’ द्वारा ‘संयुक्त राष्ट्र युद्धविराम पर्यवेक्षण संगठन’ (United Nations Truce Supervision Organization – UNTSO) का गठन करने के साथ ही मध्य पूर्व में ‘संयुक्त राष्ट्र सैन्य पर्यवेक्षकों’ की एक छोटी टुकड़ी तैनात की गयी थी।
- इस सैन्य पर्यवेक्षक दल का उद्देश्य इजरायल और इसके पड़ोसी अरब राष्ट्र के बीच युद्धविराम समझौते की निगरानी करना था।
‘शांति अभियान’ क्या होते हैं?
- संयुक्त राष्ट्र शांति अभियान (UN Peacekeeping), संयुक्त राष्ट्र संघ के ‘डिपार्टमेंट ऑफ़ पीस ऑपरेशन’ तथा ‘डिपार्टमेंट ऑफ़ ऑपरेशनल सपोर्ट’ का एक संयुक्त प्रयास है।
- प्रत्येक ‘शांति सुरक्षा अभियान’ को ‘संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद’ द्वारा मंजूरी प्रदान की जाती है।
संरचना:
- संयुक्त राष्ट्र के शांति रक्षकों में सैनिक, पुलिस अधिकारी और नागरिक कर्मी सम्मिलित हो सकते हैं। शांति रक्षकों के हल्के नीले रंग की बेरी या हेलमेट के कारण इनको प्रायः ‘ब्लू बेरेट्स’ या ‘ब्लू हेलमेट’ के रूप में जाना जाता है
- शांति स्थापना बलों में सदस्य देशों द्वारा स्वैच्छिक आधार पर शांति सैनिको का योगदान दिया जाता है।
- शांति अभियानों के नागरिक कर्मचारी, अंतर्राष्ट्रीय सिविल सेवक होते हैं, जिन्हें संयुक्त राष्ट्र सचिवालय द्वारा भर्ती और तैनात किया जाता है।
संयुक्त राष्ट्र शांति अभियान तीन बुनियादी सिद्धांतों द्वारा निर्देशित होते है:
- पक्षकारों की सहमति
- निष्पक्षता
- अधिदेश की सुरक्षा और आत्मरक्षा के अलावा बल प्रयोग नहीं किया जाएगा।
संयुक्त राष्ट्र शांति सुरक्षा अभियानों का वित्त पोषण:
- यद्यपि, शांति सुरक्षा अभियानों को शुरू करने, जारी रखने या विस्तार करने के बारे में निर्णय, सुरक्षा परिषद द्वारा लिए जाते हैं, किंतु इन शांति अभियानों का वित्तपोषण, संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देशों की सामूहिक जिम्मेदारी होती है।
- संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 17 के प्रावधानों के अनुसार, प्रत्येक सदस्य राष्ट्र शांति अभियानों के लिए निर्धारित राशि का भुगतान करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य है।
वर्ष 2020-2021 के लिए संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों हेतु आकलन किए गए योगदान के शीर्ष 5 प्रदाता देश निम्नलिखित हैं:
- संयुक्त राज्य अमेरिका (27.89%)
- चीन (15.21%)
- जापान (8.56%)
- जर्मनी (6.09%)
- यूनाइटेड किंगडम (5.79%)
इंस्टा जिज्ञासु:
क्या आप जानते हैं कि 2007 में, भारत, संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में ‘महिला दल’ को तैनात करने वाला पहला देश था? वर्तमान में जारी 13 शांति अभियानों के बारे में जानिए।
प्रीलिम्स लिंक:
- शांति अभियानों का वित्त पोषण किसके द्वारा किया जाता है?
- UNSC की भूमिका
- शांति रक्षकों की संरचना
मेंस लिंक:
संयुक्त राष्ट्र शांति अभियान और उसके महत्व पर एक टिप्पणी लिखिए।
स्रोत: द हिंदू।
विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।
संयुक्त राष्ट्र-पर्यावास
संदर्भ:
हाल ही में, ‘संयुक्त राष्ट्र-पर्यावास’ (UN Habitat) कार्यक्रम द्वारा जयपुर शहर के शहरी योजनाकारों के समक्ष आने वाली चुनौतियों संबंधी विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों की पहचान की है।
चिह्नाकिंत किए गए मुद्दों में शामिल हैं:
- शहरों का तेजी से विस्तार।
- ख़राब शहरी परिवहन।
- गर्मियों के दौरान सूखे का अत्यधिक स्तर और शहरी बाढ़।
‘यूएन-हैबिटेट’ / ‘संयुक्त राष्ट्र-पर्यावास’ द्वारा की गयी सिफारिशें:
- हरित आवरण को बढ़ाना, शहरी जैव विविधता को सशक्त करना और इस तरह नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता में वृद्धि करना।
- मौजूदा शहरी क्षेत्रों के पुनर्विकास और पुन:घनीभवन (re-densification) के साथ एक संहत शहर के विचार को लागू किया जाना चाहिए।
- शहर के बाहरी इलाके में विकास पर अंकुश लगाने के लिए, मुख्य शहर से दूरी के हिसाब से नागरिकों पर विकास शुल्क लगाया जाना चाहिए।
- शहर में प्राकृतिक जल निकासी चैनलों और रेलवे ट्रैक के साथ वृक्षारोपण के साथ ‘इको-ट्रेल्स’ की सिफारिश की जाती है।
- शहर में 800 सूखे कुओं का उपयोग वर्षा जल संचयन और जल स्तर को ऊपर उठाने, शहरी बाढ़ को कम करने और जल संसाधनों के कुशल उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए किया जा सकता है।
‘संयुक्त राष्ट्र-पर्यावास’ (UN Habitat) के बारे में:
- संयुक्त राष्ट्र मानव बस्ती कार्यक्रम (United Nations Human Settlements Programme) या ‘संयुक्त राष्ट्र-पर्यावास’ (UN Habitat), मानव बस्तियों और सतत शहरी विकास के लिए संयुक्त राष्ट्र की एक शाखा / एजेंसी है।
- यह संस्था, वर्ष 1976 में कनाडा के वैंकूवर में आयोजित ‘मानव बस्ती एवं संधारणीय शहरी विकास’ (पर्यावास- I) अर्थात (Human Settlements and Sustainable Urban Development (Habitat-I)) पर पहले संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के परिणाम के रूप में स्थापित की गयी थी।
- इस संस्था को, संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा सभी के लिए उपयुक्त आवास प्रदान करने के लक्ष्य की दिशा में सामाजिक और पर्यावरण की दृष्टि से संधारणीय कस्बों और शहरों को बढ़ावा देने का दायित्व सौंपा गया है।
- यह संयुक्त राष्ट्र विकास समूह (United Nations Development Group) का सदस्य है।
- संयुक्त राष्ट्र-पर्यावास (UN-Habitat), संयुक्त राष्ट्र महासभा को रिपोर्ट करता है।
- इसका मुख्यालय नैरोबी, केन्या में है।
पर्यावास एजेंडा:
- यूएन-हैबिटेट का अधिदेश, 1996 में इस्तांबुल, तुर्की में ‘मानव बस्तियों पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन’ (हैबिटेट II) द्वारा अपनाए गए ‘पर्यावास एजेंडा’ (Habitat Agenda) के आधार पर तैयार किया गया है।
- ‘पर्यावास एजेंडा’ का दोहरा लक्ष्य, सभी के लिए उपयुक्त आश्रय और एक शहरीकरण दुनिया में संधारणीय मानव बस्तियों का विकास करना है।
प्रीलिम्स लिंक:
- संयुक्त राष्ट्र पर्यावास
- पर्यावास एजेंडा
- मानव बस्तियों पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन।
मेंस लिंक:
यूएन-हैबिटेट प्रोग्राम क्या है? इसके उद्देश्य क्या हैं? इसके संबंध में भारत द्वारा निभाई गई भूमिका पर चर्चा कीजिए।
स्रोत: द हिंदू।
विषय: भारत एवं उसके पड़ोसी- संबंध।
भारत और पाकिस्तान के बीच ‘सिंधु जल वार्ता’ का आरंभ
संदर्भ:
भारत और पाकिस्तान के बीच ‘स्थायी सिंधु आयोग’ (Permanent Indus Commission) की बैठक का एक अन्य दौर शुरू हो गया है।
- वर्ष 1960 की ‘सिंधु जल संधि’ (Indus Water Treaty – IWT) के तहत, ‘स्थायी सिंधु आयोग’ की बैठक प्रतिवर्ष बारी-बारी से भारत और पाकिस्तान में नियमित रूप से आयोजित की जाती है।
- दोनों देशों के बीच संबंधों में आने वाले ठहराव की बाद भी ‘सिंधु वार्ता’ जारी रही है, क्योंकि दोनों देश इसे ‘सिंधु जल संधि’ के तहत अनिवार्य मानते हैं।
- संधि के प्रावधानों के तहत, दोनों पक्षों को हर साल कम से कम एक बार भारत और पाकिस्तान में बारी-बारी से बैठक करना अनिवार्य है।
- ‘स्थायी सिंधु आयोग’ की अंतिम बैठक, 23-24 मार्च, 2021 को नई दिल्ली में आयोजित की गई।
सिंधु जल संधि के बारे में:
यह एक जल-वितरण समझौता है, जिस पर वर्ष 1960 में, विश्व बैंक की मध्यस्थता से भारत के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू तथा पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान ने हस्ताक्षर किए थे।
भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी के जल का बटवारा:
सिंधु जल समझौते (Indus Water Treaty – IWT) के अनुसार, तीन पूर्वी नदियों- रावी, ब्यास और सतलज- के पानी पर भारत को पूरा नियंत्रण प्रदान किया गया।
पाकिस्तान द्वारा पश्चिमी नदियों- सिंधु, चिनाब और झेलम – को नियंत्रित किया जाता है।
- 1960 में भारत और पाकिस्तान के मध्य हस्ताक्षरित ‘सिंधु जल संधि’ के प्रावधानों के तहत, पूर्वी नदियों – सतलुज, ब्यास और रावी – की कुल जल की राशि का लगभग 33 मिलियन एकड़-फीट (MAF) सालाना भारत को बिना रोक टोक के उपयोग करने के लिए आवंटित किया जाता है।
- पश्चिमी नदियों – सिंधु, झेलम और चिनाब – का लगभग 135 MAF जल सालाना, पूरी तरह से पाकिस्तान द्वारा उपयोग किया जाता है।
जलविद्युत उत्पादन का अधिकार:
- सिंधु जल समझौते के तहत, भारत को ‘डिजाइन और संचालन के लिए विशिष्ट मानदंडों के अधीन’ पश्चिमी नदियों पर बहती हुई नदी पर परियोजनाओं (Run of the River Projects) के माध्यम से जलविद्युत उत्पन्न करने का अधिकार दिया गया है।
- समझौते के तहत, पाकिस्तान को पश्चिमी नदियों पर भारतीय जलविद्युत परियोजनाओं के डिजाइन पर चिंता व्यक्त करने का अधिकार भी है।
स्थायी सिंधु आयोग:
स्थायी सिंधु आयोग (Permanent Indus Commission), भारत और पाकिस्तान के अधिकारियों की सदस्यता वाला एक द्विपक्षीय आयोग है, इसका गठन सिंधु जल संधि, 1960 के लक्ष्यों को कार्यान्वित करने तथा इनका प्रबंधन करने के लिए किया गया था।
- ‘सिंधु जल समझौते’ के अनुसार, इस आयोग की, वर्ष में कम से कम एक बार, बारी-बारी से भारत और पाकिस्तान में नियमित रूप से बैठक आयोजित की जानी चाहिए।
आयोग के कार्य:
- नदियों के जल संबंधी किसी भी समस्या का अध्ययन करना तथा दोनो सरकारों को रिपोर्ट करना।
- जल बंटवारे को लेकर उत्पन्न विवादों को हल करना।
- परियोजना स्थलों और नदी के महत्वपूर्ण सिरों पर होने वाले कार्यों के लिए तकनीकी निरीक्षण की व्यवस्था करना।
- प्रत्येक पाँच वर्षों में एक बार, तथ्यों की जांच करने के लिए नदियों के निरीक्षण हेतु एक सामान्य दौरा करना।
- समझौते के प्रावधानों के कार्यान्वयन हेतु आवश्यक कदम उठाना।
प्रीलिम्स लिंक:
- सिंधु और उसकी सहायक नदियाँ।
- सिंधु जल समझौते पर हस्ताक्षर कब किए गए थे?
- समझौते को किसने भंग किया?
- समझौते की मुख्य विशेषताएं?
- स्थायी सिंधु आयोग के कार्य।
- इससे संबंधित चर्चित पनबिजली परियोजनाएं।
मेंस लिंक:
सिंधु जल समझौते के महत्व पर चर्चा कीजिए।
स्रोत: टाइम्स ऑफ इंडिया।
सामान्य अध्ययन–III
विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।
दक्षिण अफ्रीका और नामीबिया से चीतों को लाए जाने संबंधी समझौता
संदर्भ:
हाल ही में, भारत द्वारा दक्षिण अफ्रीका और नामीबिया से चीतों को लाए जाने संबंधी सौदों को अंतिम रूप दिया जा चुका है।
- संभवत: इस साल के अंत तक मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले के ‘कुनो पालपुर’ अभ्यारण्य में दक्षिण अफ्रीका और नामीबिया से लाए गए चीतों को छोड़ दिया जाएगा।
- इसके बाद, देश में दक्षिण अफ्रीका और नामीबिया से लाए गए चीतों की कुल संख्या क्रमशः 12 और 8 हो जाएगी। आगामी वर्षों में और भी चीते लाये जाएंगे।
चीता पुनर्वास परियोजना:
(Cheetah reintroduction project)
- भारत के वन्यजीव संस्थान की मदद से ‘पर्यावरण मंत्रालय’ द्वारा अफ्रीका से भारत में चीतों को स्थानांतरित करने की परियोजना को लागू किया जा रहा है।
- सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एक विशेषज्ञ पैनल द्वारा मध्य प्रदेश के ‘कुनो पालपुर राष्ट्रीय उद्यान’ को ‘चीता पुनर्वास’ के लिए संभावित स्थान के रूप में मंजूरी दी गयी थी।
‘पुनर्वासन’ क्या है और चीतों को दोबारा देश में बसाने की आवश्यकता:
- किसी प्रजाति के ‘पुनर्वासन’ (Reintroduction) का अर्थ है, कि किसी प्रजाति को उस क्षेत्र में छोड़ना जहां वह जीवित रहने में सक्षम है।
- ‘बड़ी मांसाहारी प्रजातियों के पुनर्वासन’ को संकटापन्न प्रजातियों के संरक्षण और पारिस्थितिकी तंत्र को बहाल करने की रणनीति के रूप में मान्यता दी गई है।
- चीता (Cheetah), एकमात्र बड़ा मांसाहारी है, जो मुख्यतः ऐतिहासिक काल से भारत में अत्यधिक शिकार की वजह से विलुप्त हो चुका है।
- भारत, वर्तमान में नैतिक और पारिस्थितिक कारणों से अपनी खोई हुई प्राकृतिक विरासत को बहाल करने पर विचार करने हेतु आर्थिक रूप से सक्षम हो चुका है।
महत्वपूर्ण तथ्य:
- चीता (एसिनोनिक्स जुबेटस – Acinonyx Jubatus), बड़े आकार की बिल्ली प्रजातियों में सबसे पुरानी प्रजातियों में से एक है। इसके पूर्वजों का पता पांच मिलियन साल पहले के ‘मिओसीन युग’ में लगाया जा सकता है।
- चीता दुनिया का सबसे तेज स्थलीय स्तनपायी जीव भी है।
- यह IUCN की रेड लिस्टेड प्रजातियों में ‘संवेदनशील’ के रूप में सूचीबद्ध है।
- देश में बची ‘आखिरी चित्तीदार बिल्ली’ की मृत्यु 1947 में छत्तीसगढ़ में हुई थी। बाद में, चीता को वर्ष 1952 में भारत में विलुप्त घोषित कर दिया गया।
- एशियाई चीता को IUCN रेड लिस्ट द्वारा “गंभीर रूप से लुप्तप्राय” प्रजाति के रूप में वर्गीकृत किया गया है, और माना जाता है कि यह प्रजाति केवल ईरान में ही शेष बची है।
विलुप्त होने के कारण:
- विलुप्त होने के सभी कारणों का स्रोत मानव हस्तक्षेप में खोजा जा सकता है। मानव-वन्यजीव संघर्ष, आवासों का नष्ट होना और भोजन के रूप में शिकार करने हेतु जीवों की कमी, और अवैध तस्करी जैसी समस्याओं की वजह से ने चीतों की संख्या समाप्त चुकी है।
- जलवायु परिवर्तन और बढ़ती मानव आबादी ने इन समस्याओं को और भी बदतर बना दिया है।
- वन्यजीवों के लिए उपलब्ध भूमि में कमी होने से, जिन प्रजातियों को चीतों की भांति अधिक क्षेत्रीय सीमा की आवश्यकता होती है, उन्हें अन्य जानवरों और मनुष्यों के साथ प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती है और जगह को लेकर आपस में संघर्ष होता है।
स्रोत: द हिंदू।
प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य
शीर्ष चीनी उत्पादक राज्य
- 2021-22 में, महाराष्ट्र ने भारत के ‘शीर्ष चीनी उत्पादक’ के रूप में वापस शीर्ष स्थान हासिल करते हुए उत्तर प्रदेश को पीछे छोड़ दिया है।
- भारत, दुनिया में चीनी का सबसे बड़ा उत्पादक देश है, लेकिन उत्पादित अधिकांश चीनी का देश में ही उपभोग हो जाता है।
- ब्राजील, थाईलैंड और भारत दुनिया के शीर्ष चीनी निर्यातक देश हैं।
जनरेशन नेक्स्ट डेमोक्रेसी नेटवर्क
हाल ही में, भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) द्वारा ‘जनरेशन नेक्स्ट डेमोक्रेसी नेटवर्क’ (Gen Next Democracy Network) कार्यक्रम का आयोजन किया गया था।
- इस कार्यक्रम में छह देशों- घाना, बांग्लादेश, पेरू, नेपाल, ब्रुनेई और नॉर्वे – के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
- इस कार्यक्रम के तहत भागीदार लोकतांत्रिक देशों के युवा भारत आते हैं, और भारत की विरासत, संस्कृति और भारतीय लोकतंत्र की कार्यप्रणाली से परिचित होते हैं।
‘भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद’ (ICCR) के बारे में:
- भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद् (भा.सां.सं.प.) भारत सरकार का एक स्वायत्त संगठन है।
- इसकी स्थापना स्वतंत्र भारत के प्रथम शिक्षामंत्री मौलाना अबुल कलाम आज़ाद द्वारा 1950 में की गई थी।
ICCR द्वारा दिए जाने वाले महत्वपूर्ण पुरस्कार:
- विशिष्ट भारतविज्ञ पुरस्कार (Distinguished Indologist Award)।
- विश्व संस्कृत पुरस्कार।
- गिसेला बॉन पुरस्कार।
रक्त चंदन / रेड सैंडर्स
हाल ही में, राजस्व खुफिया निदेशालय (Directorate of Revenue Intelligence – DRI) द्वारा 14.63 मीट्रिक टन रक्त चंदन / रेड सैंडर्स (Red Sanders) बरामद किया गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत 11.70 करोड़ रुपये आंकी गयी है।
- लाल चंदन या रक्त चंदन (Pterocarpus santalinus) अपने गहरे रंग और चिकित्सीय गुणों के लिए जाना जाता है।
- यह वृक्ष, आंध्र प्रदेश के कई जिलों और केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में ‘स्थानिक’ रूप से जाता है।
- इस प्रजाति को 1995 में CITES के परिशिष्ट II में सूचीबद्ध किया गया था, और बाद में 2004 में ‘लाल चंदन’ के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।
- लेकिन, 2019 में, विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने खेती योग्य भूमि से प्राप्त होने वाले ‘लाल चंदन’ के निर्यात को अनुमति देने के लिए अपनी निर्यात नीति में संशोधन किया था।
- ‘रेड सैंडर्स’ आमतौर पर लाल मिट्टी और गर्म और शुष्क जलवायु सहित चट्टानी, नीची और परती भूमि में उगता है।
- अंतरार्ष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) द्वारा जनवरी 2022 में ‘रेड सैंडर्स’ (रेड सैंडलवुड) को फिर से अपनी रेड लिस्ट में ‘लुप्तप्राय’ श्रेणी में सम्मिलित किया गया है।
परम अनंत
परम अनंत (PARAM ANANTA) भारत का नवीनतम सुपर कंप्यूटर है।
- इसकी सुपरकंप्यूटिंग क्षमता 838 टेराफ्लॉप्स है।
- इसे हाल ही में राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (NSM) के तहत IIT गांधीनगर में कमीशन किया गया था।
- इसे सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस कंप्यूटिंग (सी-डैक) और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, गांधीनगर द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया गया है।
कृपया ध्यान दें, ‘परम अनंत’ की रैंक ‘सी-डैक’ के ‘परम सिद्धि-एआई’ सुपर कंप्यूटर से पीछे होगी। ‘परम सिद्धि-एआई’, नवंबर 2021 तक दुनिया का 102वां सबसे शक्तिशाली सुपर कंप्यूटर था।
राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन के तहत, अब तक पूरे देश में 24 पेटाफ्लॉप की कुल गणना क्षमता वाले 15 सुपर कंप्यूटर स्थापित किए जा चुके हैं। इन सभी सुपर कंप्यूटरों का निर्माण भारत में किया गया है और यह स्वदेशी रूप से विकसित सॉफ्टवेयर स्टैक पर काम कर रहे हैं।
उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता
- उत्तराखंड द्वारा ‘समान नागरिक संहिता’ (Uniform Civil Code – UCC) को लागू करने के लिए एक सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया है।
- यह समिति उत्तराखंड में रहने वालों के लिए व्यक्तिगत मामलों को नियंत्रित करने बाले सभी प्रासंगिक कानूनों की भी जांच करेगी।
‘समान नागरिक संहिता’ क्या है? यह वांछनीय क्यों है? चुनौतियां और सुप्रीम कोर्ट के प्रासंगिक फैसलों के बारे में जानकारी के लिए पढ़िए।
‘यूनिकॉर्न’ क्या होते हैं?
- हाल ही में, भारत में यूनिकॉर्न (Unicorns) की संख्या 100 अंक तक पहुंच गई है।
- इन ‘यूनिकॉर्न’ की कुल अनुमानित मूल्य 330 बिलियन अमरीकी डालर है, जो कि 25 लाख करोड़ रुपये से अधिक है।
- भारतीय यूनिकॉर्न की औसत वार्षिक वृद्धि दर अमेरिका, ब्रिटेन और कई अन्य देशों की तुलना में अधिक है।
- अमेरिका और चीन के बाद, भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन गया है।
‘यूनिकॉर्न’ के बारे में:
- ‘यूनिकॉर्न’, निजी स्वामित्व वाली कोई फर्म होती है, जिसका बाजार पूंजीकरण 1 बिलियन अमरीकी डॉलर से अधिक होता है।
- ‘यूनिकॉर्न’ का तात्पर्य, कम से कम 7,500 करोड़ रुपये का टर्नओवर वाला स्टार्टअप होता है।
- इसकी कई श्रेणियां होती हैं जैसे फिनटेक, एडटेक, बी2बी (बिजनेस-टू-बिजनेस) कंपनियां आदि।
मृत्यु के कारण का चिकित्सा प्रमाणन
‘मेडिकल सर्टिफिकेशन ऑफ कॉज ऑफ डेथ’ (Medical Certification of Cause of Death – MCCD) पर 2020 की रिपोर्ट के अनुसार, कोविड -19 लॉकडाउन के पहले वर्ष में, एक दशक के दौरान सांस की बीमारियों से मरने वाले व्यक्तियों की सबसे अधिक घटनाएं देखी गईं।
- रिपोर्ट में, 2020 और 2021 के लिए भारत की अतिरिक्त मृत्यु दर 47.4 लाख आंकी गई है।
- देश में ‘मृत्यु के कारण के चिकित्सा प्रमाणन’ (MCCD) योजना ‘जन्म और मृत्यु पंजीकरण (RBD) अधिनियम’, 1969 के प्रावधानों के तहत शुरू की गई थी।
- इस योजना के तहत, भारत के महापंजीयक का कार्यालय (ORGI), राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के संबंधित मुख्य ‘जन्म एवं मृत्यु रजिस्ट्रार’ के कार्यालयों द्वारा एकत्रित, संकलित और सारणीबद्ध रूप में मृत्यु के चिकित्सकीय प्रमाणित कारणों पर डेटा प्राप्त करता है।
सेला मकाक
- अरुणाचल प्रदेश में पाई गई प्राचीन बंदर की एक नई प्रजाति का नाम ‘सेला मकाक’ (Sela Macaque) रखा गया है।
- इस बंदर प्रजाति का नामकरण ‘सेला दर्रा’ के नाम पर रखा गया है।
- ‘सेला दर्रा’, समुद्र तल से 13,700 फीट की ऊंचाई पर एक रणनीतिक पहाड़ी दर्रा है।
- ‘सेला मकाक’, आनुवंशिक रूप से अरुणाचल प्रदेश में पायी जाने वाली बंदरों की ‘मकाक प्रजाति’ का करीबी बताया गया है।
- हालांकि, सेला मकाक की पूँछ तिब्बती मकाक, असमी मकाक, अरुणाचल मकाक और व्हाइट चिक्ड मकाक से लंबी लेकिन बोनट मकाक और टोक मकाक (Toque Macaque) से छोटी होती है।













