[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 30 May 2022

विषयसूची

सामान्य अध्ययन-I

  1. क्वाड सहयोगियों के लिए पीएम मोदी के उपहारों का सांस्कृतिक महत्व

 

सामान्य अध्ययन-II

  1. पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन
  2. वेस्ट नाइल वायरस संक्रमण
  3. ट्रिप्स छूट
  4. म्यांमार के विदेश मंत्री को आसियान बैठक में शामिल होने का निमंत्रण नहीं

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

  1. ‘पाल्मे डी’ओर’ पुरुस्कार
  2. स्वास्थ्य और रोग में जीन प्रकार्यों हेतु राष्ट्रीय सुविधा
  3. हसदेव वन
  4. वित्त वर्ष-22 में अमेरिका बना भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार
  5. जन समर्थ
  6. जम्मू-कश्मीर में उत्तर भारत का पहला बायोटेक पार्क

 


सामान्य अध्ययनI


 

विषय: भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू शामिल होंगे।

क्वाड सहयोगियों के लिए पीएम मोदी के उपहारों का सांस्कृतिक महत्व


संदर्भ:

हाल ही में, टोक्यो में आयोजित ‘क्वाड समिट’ (Quad Summit) में, प्रधानमंत्री मोदी अपने साथ भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और कला रूपों को प्रदर्शित करने के लिए अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के नेताओं के लिए उपहार लेकर गए हैं।

उपहार और इनका सांस्कृतिक महत्व:

सांझी कला रूप

(Sanjhi Art form)

प्रधानमंत्री ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन को उपहार में मथुरा के ठकुरानी घाट (यह गोकुल में यमुना की पवित्र नदी के तट पर सबसे प्रसिद्ध घाटों में से एक है) की थीम पर आधारित एक जटिल ‘सांझी फलक’ (Sanjhi Panel) भेंट में दिया है।

  • ‘सांझी’ कागज पर हाथ से डिजाइन करने की कला है और इस कला रूप की उत्पत्ति ‘कृष्ण पंथ’ से हुई है।
  • इस कला रूप में देवता के जीवन की घटनाओं पर आधारित ‘स्टेंसिल’ बनाए जाते है और इन स्टेंसिल को कैंची या ब्लेड का उपयोग करके हाथ से काटा जाता है और नाजुक सांझी को प्रायः कागज की पतली शीट के साथ रखा जाता है।
  • ‘सांझी’ को 15वीं और 16वीं शताब्दी में वैष्णव मंदिरों द्वारा लोकप्रिय बनाया गया था और ब्राह्मण पुजारियों द्वारा इसका अभ्यास किया जाता था।

 

ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के लिए गोंड कला पेंटिंग:

प्रधानमंत्री मोदी ने ऑस्ट्रेलिया के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज को मध्य प्रदेश मूल की एक गोंड कला पेंटिंग भेंट की।

  • गोंड पेंटिंग सबसे प्रशंसित आदिवासी कला रूपों में से एक है।
  • डॉट्स और लाइनों द्वारा बनाई गई ये पेंटिंग गोंडों की दीवारों और फर्शों पर सचित्र कला का एक हिस्सा रही हैं।
  • यह स्थानीय रूप से उपलब्ध प्राकृतिक रंगों और सामग्री जैसे लकड़ी का कोयला, रंगीन मिट्टी, पौधे का रस, पत्ते, गाय का गोबर और चूना पत्थर पाउडर के साथ हर घर के निर्माण और पुनर्निर्माण में किया जाता है।
  • मध्य प्रदेश में ‘गोंड कला’ का कार्य गोंड समुदाय द्वारा किया जाता है।
  • इस कला की उत्पत्ति का स्रोत ‘जांगढ़ श्याम’ की चित्रकला में मिलता है, जिन्होंने 1970 और 80 के दशक में पाटनगढ़ गांव में घरों की दीवारों पर, जनजातीय मौखिक मिथकों और किंवदंतियों को बड़े पैमाने पर चित्रित करना शुरू किया था।

 

रोगन पेंटिंग:

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने जापानी समकक्ष ‘फुमियो किशिदा’ को हाथ से नक्काशी किया हुआ, हरे रंग के कपड़े पर स्वर्णिम और सफेद रंग की ‘रोगन पेंटिंग’ (Rogan Painting) से चित्रित गहरे भूरे रंग का लकड़ी का बक्सा उपहार में दिया।

  • ‘रोगन’ कपड़े पर की गयी चित्रकारी का एक रूप है जिसे चार शताब्दी से अधिक पुराना माना जाता है और यह मुख्य रूप से गुजरात के कच्छ जिले में प्रचलित है।
  • ‘रोगन’ शब्द की उत्पत्ति फारसी से हुई है, जिसका अर्थ है वार्निश या तेल।
  • इस कला में उबले हुए तेल और वनस्पति रंगों से बने पेंट का उपयोग किया जाता है।
  • आमतौर पर, ‘रोगन पेंटिंग’ में केवल आधे कपड़े को ही रंगा जाता है और फिर इसकी मिरर इमेज बनाने के लिए मोड़ा जाता है।
  • यह चित्रकारी मुख्यतः केवल पुरुषों द्वारा ही की जाती थी। अब गुजरात में कई महिलाएं भी ‘रोगन पेंटिंग’ का कार्य करती हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

निम्नलिखित कला रूपों के बारे में जानिए:

  1. सांझी कला
  2. गोंड पेंटिंग
  3. रोगन पेंटिंग

मेन्स लिंक:

राजस्थानी चित्रकला शैली की मुख्य शैली और विषयों पर चर्चा कीजिए और 17वीं और 18वीं शताब्दी में विकसित होने वाली इस कला के मुख्य केंद्रों की भी चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 


सामान्य अध्ययनIII


 

विषय: केन्द्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन; इन अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय।

पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन


संदर्भ:

हाल ही में, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने, कोविड -19 महामारी के दौरान अपने माता-पिता को खो देने वाले बच्चों के लिए ‘पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन’ (PM Cares for children) योजना के तहत, विभिन्न सुविधाएँ जारी की हैं।

‘पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन’ योजना के बारे में:

  • यह योजना मई 2021 में शुरू की गई थी।
  • उद्देश्य: कोविड से प्रभावित बच्चों की सहायता और सशक्तिकरण करना।
  • पात्रता: कोविड-19 के कारण माता-पिता दोनों या माता-पिता में से किसी जीवित बचे अभिभावक या कानूनी अभिभावक/दत्तक माता-पिता को खोने वाले सभी बच्चों को ‘पीएम-केयर्स फॉर चिल्ड्रन’ योजना के तहत सहायता दी जाएगी।

इस योजना के प्रमुख बिंदु:

  1. बच्चे के नाम पर सावधि जमा (फिक्स्ड डिपॉजिट): 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले प्रत्येक बच्चे के लिए 10 लाख रुपये का एक कोष गठित किया जाएगा।
  2. स्कूली शिक्षा: 10 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए नजदीकी केंद्रीय विद्यालय या निजी स्कूल में डे स्कॉलर के रूप में प्रवेश दिलाया जाएगा।
  3. स्कूली शिक्षा: 11 -18 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए केंद्र सरकार के किसी भी आवासीय विद्यालय जैसेकि सैनिक स्कूल, नवोदय विद्यालय आदि में प्रवेश दिलाया जाएगा।
  4. उच्च शिक्षा के लिए सहायता: मौजूदा शिक्षा ऋण के मानदंडों के अनुसार भारत में व्यावसायिक पाठ्यक्रमों / उच्च शिक्षा के लिए शिक्षा ऋण दिलाने में बच्चे की सहायता की जाएगी।
  5. स्वास्थ्य बीमा: ऐसे सभी बच्चों को ‘आयुष्मान भारत योजना’ (PM-JAY) के तहत लाभार्थी के रूप में नामांकित किया जाएगा, जिसमें 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा कवर होगा।

(नोट: हमने यहां केवल योजना के प्रमुख बिन्दुओं को किया हैं। पूर्ण विवरण के लिए, कृपया देखें)

इन उपायों की आवश्यकता:

  • भारत, वर्तमान में कोविड-19 महामारी की दूसरी प्रचंड लहर से जूझ रहा है और इस महामारी के कारण कई बच्चों के माता-पिता की मृत्यु होने के मामलों में वृद्धि हो रही है।
  • इसके साथ ही, इन बच्चों को गोद लेने की आड़ में बाल तस्करी की आशंका भी बढ़ गई है।
  • कोविड-19 के कारण लागू लॉकडाउन के दौरान ‘बाल विवाह’ संबंधी मामलों में भी वृद्धि हुई है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप ‘समर्थ’ (SAMARTH) पहल के बारे में जानते हैं?

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘सार्वजनिक खाता’ क्या होता है?
  2. PM CARES फंड का संचालन कौन करता है?
  3. किन संगठनों को आरटीआई अधिनियम के दायरे से छूट दी गई है?
  4. भारत की समेकित निधि क्या है?
  5. चैरिटेबल ट्रस्ट क्या है?
  6. पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन- कोविड प्रभावित बच्चों का सशक्तिकरण- पात्रता और लाभ।

मेंस लिंक:

PM CARES फंड को आरटीआई अधिनियम के दायरे में क्यों लाया जाना चाहिए? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

वेस्ट नाइल वायरस संक्रमण


संदर्भ:

केरल के त्रिशूर में ‘वेस्ट नाइल बुखार’ (West Nile fever) का इलाज करा रहे एक व्यक्ति ने हाल ही में दम तोड़ दिया।

‘वेस्ट नाइल वायरस’ के बारे में:

  • ‘वेस्ट नाइल वायरस’ (West Nile Virus), ‘फ्लैविवायरस जीनस’ (flavivirus genus) का सदस्य है और ‘फ्लैविविरिडे प्रजाति’ के ‘जापानी एन्सेफलाइटिस एंटीजेनिक कॉम्प्लेक्स’ से संबंधित है।
  • यह एकल-तंतु वाला (Single-Stranded) आरएनए वायरस है।
  • इस वायरस को पहली बार 1937 में युगांडा के ‘वेस्ट नाइल’ जिले में एक महिला में पाया गया था।
  • यह वायरस आमतौर पर अफ्रीका, यूरोप, मध्य पूर्व, उत्तरी अमेरिका और पश्चिम एशिया में पाया जाता है।
  • वृद्ध लोगों, बच्चों और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों को ‘वेस्ट नाइल वायरस’ के संक्रमण का सबसे अधिक खतरा होता है।

संचरण:

यह वायरस संक्रमित क्यूलेक्स मच्छर (Culex mosquito) के काटने से पक्षियों से मनुष्यों में फैलता है।

 

   प्रीलिम्स लिंक:

  1. वेस्ट नाइल वायरस के बारे में।
  2. लक्षण।
  3. रोकथाम और उपचार।

मेंस लिंक:

COVID-19 महामारी के दौरान वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करने में WHO द्वारा निभाई गई भूमिका का समालोचनात्मक विश्लेषण करें। भविष्य की महामारियों से निपटने में अपनी भूमिका को मजबूत करने के लिए सुधारों का भी प्रस्ताव।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

TRIPS से छूट


संदर्भ:

हाल ही में, गैर-सरकारी संगठनों के एक समूह ने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर, जिनेवा में प्रस्तावित ‘विश्व व्यापार संगठन-ट्रिप्स’ में कोविड -19 से निपटने हेतु टीकों, चिकित्सीय-विधियों और निदानों पर, मुख्य रूप से पश्चिमी देशों के स्वामित्व वाले ‘बौद्धिक संपदा अधिकारों’ (Intellectual Property Rights – IPR) को छूट दिए जाने संबंधी मसौदा प्रस्ताव पर सक्रिय रूप से अपना पक्ष रकने का आग्रह किया है।

संबंधित प्रकरण:

अक्टूबर 2020 में, भारत और दक्षिण अफ्रीका द्वारा संयुक्त रूप से ‘विश्व व्यापार संगठन’ की ‘बौद्धिक संपदा अधिकारों के व्यापार संबंधी पहलू’ (Trade Related Aspects of Intellectual Property Rights – TRIPS) परिषद्  में भारत और दक्षिण अफ्रीका ने एक प्रस्ताव पेश किया था, जिसमे टीकों और दवाओं के उत्पादन हेतु आवश्यक प्रौद्योगिकियों तक पहुंच की सुविधा सुलभ करने के लिए ‘विश्व व्यापार संगठन’ से महामारी की अवधि के दौरान ट्रिप्स समझौते (TRIPS Agreement) के कुछ प्रावधानों को हटाए जाने की मांग की गयी थी।

आगे की चुनौतियां:

  • विश्व व्यापार संगठन के सदस्यों का एक छोटा समूह, विश्व स्तर पर दवाओं के दो प्रमुख आपूर्तिकर्ता देशों – भारत और चीन- के दवा निर्माताओं को ‘संभावित आईपीआर दायित्वों से छूट’ से बाहर करने के लिए “सुझावों पर चर्चा” कर रहा है।
  • इसके अलावा, पश्चिमी देशों के दवा निर्माता, छूट के किसी भी लाभ को केवल अफ्रीकी देशों के लिए “सीमित” करना चाहते हैं, और बड़ी उत्पादन क्षमता वाले भारतीय निर्माताओं के लिए, पश्चिमी प्रतिस्पर्धियों के बाजार को आसानी से कम करने का कोई मार्ग प्रशस्त नहीं करना चाहते हैं।

आईपीआर से छूट’ के विरोध का कारण एवं इसके खिलाफ तर्क:

  • बौद्धिक संपदा अधिकारों (IPR) से छूट दिए जाने से, न तो टीकों के उत्पादन में वृद्धि होगी या न ही इनके वितरण में वृद्धि होगी और चूंकि ‘बौद्धिक संपदा’ (IP) कोई बाधा नहीं है, अतः ‘आईपीआर से छूट’ दिया जाना- कोविड-19 टीकों के – वायरस से लड़ने के लिए व्यावहारिक समाधान नहीं होगा।
  • ‘बौद्धिक संपदा अधिकारों’ से छूट, आपूर्ति श्रृंखला में नकली टीकों के प्रवेश के लिए दरवाजे खोल सकती है, जिससे रोगी की सुरक्षा प्रभावित होगी।

समय की मांग:

वर्तमान में, हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता ‘बौद्धिक संपदा’ (IP) बाधाओं सहित, आपूर्ति संबंधी बाधाओं को दूर करना होना चाहिए, ताकि मौजूदा महामारी के उपचार, रोकथाम और नियंत्रण के लिए आवश्यक टीकों, चिकित्सीय और निदान के निर्माण को बढ़ाया जा सके।

कोविड-19 वैक्सीन हेतु ‘बौद्धिक संपदा’ छूट का तात्पर्य:

  • ‘बौद्धिक संपदा’ छूट (Intellectual Property Waiver- IP waiver), मध्य-आय वर्ग के देशों में बड़े स्तर पर, फाइजर, मॉडर्ना, एस्ट्राजेनेका, नोवावैक्स, जॉनसन एंड जॉनसन और भारत बायोटेक द्वारा विकसित किये गए कोविड टीकों, आपातकालीन उपयोग अधिकार (Emergency Use Authorisations- EUA) सहित, के उत्पादन करने का अवसर मिल सकता है।
  • वर्तमान में, इन टीकों का उत्पादन अधिकांशतः उच्च आय वाले देशों में केंद्रित है; तथा मध्यम आय वाले देशों में लाइसेंसिंग या प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समझौतों के माध्यम से इन टीकों का उत्पादन किया जा रहा है।

‘पेटेंट अधिकार’ और ‘बौद्धिक संपदा अधिकार’ क्या होते हैं?

पेटेंट (patent), एक सशक्त बौद्धिक संपदा अधिकार होता है, तथा किसी देश की सरकार द्वारा आविष्कारक के लिए एक निश्चित तथा पूर्व-निर्दिष्ट समय के लिए दिए जाने वाला विशिष्ट एकाधिकार होता है। यह, किसी दूसरे के द्वारा आविष्कार की नकल करने से रोकने के लिए एक प्रवर्तनीय कानूनी अधिकार प्रदान करता है।

पेटेंट के प्रकार:

पेटेंट, मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं: प्रक्रिया पेटेंट (Process Patents) अथवा उत्पाद पेटेंट (Product Patents)।

  1. उत्पाद पेटेंट (Product Patents), अंतिम उत्पाद के अधिकार की सुरक्षा सुनिश्चित करता है, तथा इसके तहत, निर्दिष्ट अवधि के दौरान पेटेंट धारक के अलावा किसी अन्य के द्वारा ‘पेटेंट की गई वस्तु’ का उत्पादन करने पर रोक लगाई जा सकती है, भले ही दूसरे लोग किसी अलग प्रक्रिया का प्रयोग कर रहे हों।
  2. प्रक्रिया पेटेंट (Process Patents) के तहत, पेटेंट धारक के अलावा किसी भी व्यक्ति को, विनिर्माण प्रक्रिया में कुछ संशोधन करके पेटेंट उत्पाद का निर्माण करने की अनुमति होती है।

भारत में पेटेंट व्यवस्था:

भारत, 1970 के दशक से ‘उत्पाद पेटेंट’ के बजाय ‘प्रक्रिया पेटेंट’ प्रचलित है, जिसकी वजह से, भारत वैश्विक स्तर पर जेनेरिक दवाओं का एक महत्वपूर्ण उत्पादक बन गया, और 1990 के दशक में सिप्ला जैसी कंपनियों के लिए अफ्रीका को एचआईवी-विरोधी दवाएं प्रदान करने की अनुमति दी जा सकी थी।

  • लेकिन TRIPS समझौते के अंतर्गत निर्धारित दायित्वों के कारण, भारत को वर्ष 2005 में पेटेंट अधिनियम में संशोधन करना पड़ा, और फार्मा, रसायन, और बायोटेक क्षेत्रों में ‘उत्पाद पेटेंट’ व्यवस्था लागू करनी पड़ी।

ट्रिप्स (TRIPS) समझौता क्या है?

‘बौद्धिक संपदा अधिकारों के व्यापार संबंधी पहलू’ (Trade Related Aspects of Intellectual Property Rights- TRIPS) समझौते पर 1995 में विश्व व्यापार संगठन में समझौता वार्ता हुई थी। इस समझौते के तहत, सभी हस्ताक्षरकर्ता देशों के लिए इस संबंध में घरेलू कानून बनाना अनिवार्य है।

  • TRIPS समझौता, बौद्धिक सुरक्षा संबंधी न्यूनतम मानकों की गारंटी प्रदान करता है। और इस तरह की कानूनी स्थिरता नवोन्मेषकों को कई देशों में अपनी बौद्धिक संपदा का मुद्रीकरण करने में सक्षम बनाती है।
  • 2001 में, विश्व व्यापार संगठन द्वारा ‘दोहा घोषणा’ पर हस्ताक्षर किए गए, जिसमें स्पष्ट किया गया कि सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल में, सभी सरकारें अपने देश की कंपनियों को निर्माताओं के लिए अपने पेटेंट लाइसेंस देने के लिए मजबूर कर सकती हैं।
  • इस प्रावधान को आमतौर पर “अनिवार्य लाइसेंसिंग” कहा जाता है, और इसे ‘ट्रिप्स समझौते’ शामिल किया गया था, और दोहा घोषणा में इसके उपयोग को स्पष्ट किया गया था।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. TRIPS क्या है?
  2. भारतीय पेटेंट अधिनियम, 2005
  3. भारत में पेटेंट व्यवस्था
  4. अनिवार्य लाइसेंसिंग क्या है?

मेंस लिंक:

अनिवार्य लाइसेंसिंग पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: भारत एवं इसके पड़ोसी- संबंध।

म्यांमार के विदेश मंत्री को आसियान बैठक में शामिल होने का निमंत्रण नहीं


(Myanmar Foreign Minister may not get ASEAN meet call)

संदर्भ:

भारत-आसियान विदेश मंत्रियों की बैठक की मेजबानी जून के मध्य में भारत के विदेश मंत्रालय (ईएएम) द्वारा की जाएगी। इस बैठक में भारत सरकार द्वारा ‘म्यांमार’ के विदेश मंत्री को आमंत्रित करने किए जाने की संभावना नहीं है।

  • इसका कारण, म्यांमार के ‘सैन्य जुंटा’ शासन के साथ संपर्क स्थापित करने के पहलुओं से संबंधित अंतरराष्ट्रीय दबाव समझा जा रहा है।
  • भारत ने ‘आसियान के विदेश मंत्रियों की बैठकों’ (ASEAN Foreign Ministers meetings) और ‘यूएस-आसियान बैठकों’ (US-ASEAN meetings) में केवल “गैर-राजनीतिक” और “गैर-सैन्य” प्रतिनिधियों को आमंत्रित किए जाने संबंधी आसियान देशों के सर्वसम्मति से लिए गए गए फैसले का पालन करने का निर्णय लिया है।

संबंधित प्रकरण:

लगभग एक साल पहले सेना द्वारा देश की सत्ता पर अधिकार जमा लेने के बाद से, म्यांमार में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन, सशस्त्र प्रतिरोध और सामूहिक हत्याएं हुई हैं।

  • निर्वाचित नेता ‘आंग सान सू की’ (Aung San Suu Kyi) को जेल भेज दिया गया है।
  • म्यांमार की सेना ने पिछले साल तख्तापलट करते हुए, 1948 में ब्रिटिश शासन से आजादी के बाद देश के इतिहास में तीसरी बार ‘सत्ता’ हथिया ली थी।

‘तख्तापलट’ पर अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया:

  • संयुक्त राष्ट्र द्वारा म्यांमार में “हिंसा की तीव्रता और गरीबी में तेजी से वृद्धि” तथा गहराते मानवीय संकट उत्पन्न होने की चेतावनी दी गयी।
  • अमेरिकी विदेश मंत्री ‘एंटनी ब्लिंकन’ ने म्यांमार के सुरक्षा बलों पर “आतंक का शासन” करने का आरोप लगाया है।
  • अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ द्वारा म्यांमार के सैन्य अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाए गए हैं।
  • चीन ने तख्तापलट की निंदा करने वाले हुए ‘संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद’ के एक प्रस्ताव को अवरुद्ध कर दिया, हालाँकि म्यांमार से लोकतांत्रिक मानदंडों पर लौटने की मांग का समर्थन किया।

भारत की मांग:

  1. म्यांमार में लोकतंत्र व्यवस्था की जल्द से जल्द वापसी।
  2. हिरासत में लिए गए बंदियों और कैदियों की रिहाई।
  3. वार्ता के जरिए मुद्दों का समाधान।
  4. सभी प्रकार की हिंसा की पूर्ण समाप्ति।

भारत द्वारा ‘म्यांमार के संदर्भ में आसियान समूह की पहल’ तथा ‘पांच सूत्री सहमति’ का समर्थन किया जा रहा है: इसमें शामिल हैं:

  1. हिंसा की तत्काल समाप्ति।
  2. शांतिपूर्ण समाधान के लिए म्यांमार में सभी हितधारकों के बीच संवाद।
  3. मध्यस्थता की सुविधा हेतु आसियान के एक विशेष दूत की नियुक्ति।
  4. म्यांमार को सहायता।
  5. विशेष प्रतिनिधि मंडल द्वारा म्यांमार का दौरा।

म्यांमार का संक्षिप्त इतिहास:

जब ब्रिटिश साम्राज्यवादियों ने 19वीं शताब्दी के दौरान ‘आज के म्यांमार’ पर कब्जा कर लिया, तो इन अंग्रेजो द्वारा इसे वहां के प्रमुख जातीय समूह ‘बर्मन’ / ‘बमार’ (Bamar) के नाम पर ‘बर्मा’ कहा जाने लगा, और इस पर औपनिवेशिक भारत के एक प्रांत के रूप में शासन किया गया।

  • यह व्यवस्था 1937 में बर्मा को ब्रिटिश भारत से अलग कर एक अलग उपनिवेश बनाये जाने तक जारी रही।
  • 1948 में स्वतंत्रता हासिल करने के बाद भी, इसका ‘बर्मा’ नाम बरकरार रखा गया, जो बाद में ‘बर्मा संघ’ (Union of Burma) बन गया।
  • 1962 में, सेना ने पहली बार देश की ‘नागरिक सरकार’ को हटाकर सत्ता संभाली और 1974 में देश के आधिकारिक नाम को संशोधित कर ‘सोशलिस्ट रिपब्लिक ऑफ द यूनियन ऑफ बर्मा’ कर दिया।
  • फिर 1988 में, म्यांमार के सशस्त्र बलों ने जनता के एक विद्रोह, जिसमे हजारों लोग मारे गए थे, को दबाने के बाद देश में फिर से सत्ता संभाली और देश के आधिकारिक नाम को फिर से बदलकर ‘यूनियन ऑफ बर्मा’ कर दिया।
  • इसके एक साल बाद, म्यांमार की संसद ‘जुंटा’ (JUNTA) ने एक कानून पारित कर ‘बर्मा’ का नाम परिवर्तित कर म्यांमार कर दिया, और देश का नाम ‘म्यांमार संघ’ (Union of Myanmar) हो गया।

म्यांमार का सैन्य संविधान:

म्यांमार में सेना द्वारा वर्ष 2008 में एक संविधान का मसौदा तैयार किया गया था, और इसी वर्ष अप्रैल में इस पर संदेहास्पद जनमत संग्रह कराया गया था।

  • यह संविधान, सेना द्वारा तैयार किया गया ‘लोकतंत्र का रोडमैप’ था, जिसे सेना ने पश्चिमी देशों के दबाव के कारण निर्मित किया था।
  • इसके अलावा, सैन्य शासन के लिए यह अहसास भी हो चुका था कि म्यांमार को बाहरी दुनिया के लिए खोलना अब एक विकल्प नहीं बल्कि एक गंभीर जरूरत भी है।
  • लेकिन सेना ने संविधान में अपनी भूमिका और राष्ट्रीय मामलों में वर्चस्व को सुनिश्चित कर लिया था।
  • संविधान के प्रावधानों के तहत, संसद के दोनों सदनों में 25 प्रतिशत सीटें सेना के लिए आरक्षित की गयी है, जिन पर सैन्य अधिकारियों को नामित किया जाता है।
  • साथ ही, एक प्रतिनिधि राजनीतिक दल का गठन किया गया है जो सेना की ओर से चुनावों में भाग लेता है।

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप ‘कलादान मल्टी-मॉडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट’ (Kaladan Multi-Modal Transit Transport Project) के बारे में जानते हैं?

प्रीलिम्स लिंक:

  1. म्यांमार के बारे में।
  2. इसका संविधान।
  3. भारतीय संविधान से तुलना।

मेंस लिंक:

अपने पड़ोसी देशों के प्रति भारत की नीति पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


 ‘पाल्मे डी’ओर’ पुरुस्कार

  • पाल्मे डी’ओर (Palme d’Or) को फिल्म उद्योग में सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों में से एक माना जाता है।
  • पाल्मे डीओर 2022 विजेता: रुबेन ओस्टलंड द्वारा निर्देशित स्वीडिश व्यंग्य ‘ट्राएंगल ऑफ़ सैडनेस’।
  • यह पुरुस्कार, कान्स फिल्म समारोह (Cannes Film Festival) में भाग लेने वाली फिल्मों में ‘सर्वश्रेष्ठ फिल्म’ को प्रदान किया जाता है।
  • कान्स फिल्म समारोह, विश्व में आयोजित किए जाने वाले ‘पांच बड़े अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोहों’ में से एक है। अन्य चार अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह – वेनिस फिल्म महोत्सव, बर्लिन अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव, टोरंटो अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव और सनडांस फिल्म महोत्सव- हैं।

चेतन आनंद की फिल्म ‘नीचा नगर’ पुरस्कार जीतने वाली एकमात्र भारतीय फिल्म है (यह फिल्म भारत में कभी रिलीज नहीं हुई)।

 

स्वास्थ्य और रोग में जीन प्रकार्यों हेतु राष्ट्रीय सुविधा

‘स्वास्थ्य और रोग में जीन प्रकार्यों हेतु राष्ट्रीय सुविधा’ (National Facility for Gene Function in Health & Disease) की स्थापना ‘भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान’ (IISER), पुणे में की गयी है।

  • इस केंद्र का निर्माण ‘आईआईएसईआर’ पुणे द्वारा ‘जैव प्रौद्योगिकी विभाग’ (डीबीटी) के सहयोग से किया जाएगा।
  • उद्देश्य: कैंसर से लेकर मधुमेह तक की कई बीमारियों का अध्ययन करने वाले शोधकर्ताओं को ‘पशु मॉडल’ की समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करना। इस केंद्र पर चूहों और खरगोशों को रखा जाएगा, जिससे इनका आयात करने की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी।
  • आवश्यकता: मानव स्वास्थ्य पर जूनोटिक रोगों के प्रभाव को समझने के लिए केवल मानव परीक्षण अपर्याप्त हैं, अतः प्रायोगिक सेटअप में ‘पशु मॉडल’ का उपयोग आवश्यक हो गया है।

हसदेव वन

छत्तीसगढ़ सरकार, हसदेव वन (Hasdeo forest) में कोयला खनन की अनुमति देने के विवाद में फंस गई है।

  • ‘हसदेव अरंड वन’ छत्तीसगढ़ के उत्तरी भाग में स्थित है।
  • यह वन अपनी जैव विविधता और कोयले के भंडार के लिए भी जाना जाता है।
  • महानदी की सहायक ‘हसदेव नदी’ इस जंगल से होकर बहती है।
  • यह “मध्य भारत में सबसे बड़ा अखंडित वन है जिसमें प्राचीन ‘साल’ (शोरिया रोबस्टा) और ‘सागौन’ के जंगल पाए जाते हैं।”

 

वित्त वर्ष-22 में अमेरिका बना भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार

संयुक्त राज्य अमेरिका, 2021-22 में चीन को पीछे छोड़ते हुए भारत का शीर्ष व्यापारिक भागीदार बन गया है।

  • 2021-22 में, अमेरिका और भारत के बीच द्विपक्षीय व्यापार 119.42 बिलियन डॉलर रहा, जबकि 2020-21 में यह 80.51 बिलियन डॉलर था।
  • अमेरिका उन कुछ देशों में से एक है जिनके साथ भारत का व्यापार अधिशेष है।
  • 2021-22 में, 9 अरब डॉलर के साथ संयुक्त अरब अमीरात, भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार था। इसके बाद सऊदी अरब (42,85 अरब डॉलर), इराक (34.33 अरब डॉलर) और सिंगापुर (30 अरब डॉलर) का स्थान है।

जन समर्थ

आम आदमी के जीवन को आसान बनाने के लिए सरकार ‘जन समर्थ’  (Jan Samarth) पोर्टल शुरू करने की योजना बना रही है।

  • यह विभिन्न मंत्रालयों और विभागों द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के वितरण के लिए एक सामान्य पोर्टल होगा।
  • इस पोर्टल का उद्देश्य, विभिन्न योजनाओं को एक मंच पर लाने का है ताकि लाभार्थी बिना किसी परेशानी के उन तक पहुंच सकें।

 

जम्मू-कश्मीर में उत्तर भारत का पहला बायोटेक पार्क

हाल ही में, जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले के ‘घट्टी’ (Ghatti) में भारत के पहले बायोटेक पार्क का उद्घाटन किया गया था।

  • यह बायोटेक पार्क, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की जैव विविधता, औषधीय और सुगंधित पौधों पर शोध करेगा और हरित श्रेणी के व्यवसायों को भी बढ़ावा देगा।
  • इस परियोजना के कार्यान्वयन की जिम्मेदारी सीएसआईआर-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीग्रेटिव मेडिसिन, (CSIR-IIIM) जम्मू को सौंपी गई है।