[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 28 May 2022

विषयसूची

सामान्य अध्ययन-I

  1. श्री नारायण गुरु

 

सामान्य अध्ययन-II

  1. संसदीय विशेषाधिकार
  2. भारत का विधि आयोग
  3. सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन

 

सामान्य अध्ययन-III

  1. सामुदायिक वन अधिकार

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

  1. नेचिफू सुरंग
  2. कागज आयात निगरानी प्रणाली
  3. फर्स्ट मूवर्स कोअलिशन
  4. WEF का सीईओ क्लाइमेट एक्शन लीडर्स गठबंधन- भारत
  5. जन जैव विविधता पंजी
  6. विश्व आर्थिक मंच का ‘यात्रा एवं पर्यटन विकास सूचकांक’
  7. अंतर्राष्ट्रीय बुकर पुरस्कार

 


सामान्य अध्ययनI


 

विषय: 18वीं सदी के लगभग मध्य से लेकर वर्तमान समय तक का आधुनिक भारतीय इतिहास- महत्त्वपूर्ण घटनाएँ, व्यक्तित्व, विषय।

श्री नारायण गुरु


संदर्भ:

कर्नाटक सरकार 10वीं कक्षा की नई सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में प्रसिद्ध समाज सुधारक ‘श्री नारायण गुरु’ (Sree Narayan Guru) से संबंधित अध्याय को शामिल न करने को लेकर विवाद में फंस गई है।

हालांकि, पाठ्यपुस्तक के पुराने संस्करण के अध्याय में ‘नारायण गुरु’ का संदर्भ मौजूद था।

श्री नारायण गुरु के बारे में:

श्री नारायण गुरु (1856 – 1928) भारत के महान संत, समाजसुधारक, एक उत्प्रेरक और नेता थे जिन्होंने तत्कालीन समाज में प्रचलित दमनकारी जाति व्यवस्था में सुधार करने के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए।

  • उन्हें तत्कालीन केरल के सामाजिक ताने-बाने को बदलने तथा केरलवासियों की मान्यताओं को बदलने का श्रेय दिया जाता है।
  • उनका जन्म 1856 में केरल के तिरुवनंतपुरम के निकट एक गांव चेम्पाझांथी में हुआ था।
  • उनका जन्म एक एझावा परिवार हुआ था, उस समय इस समुदाय के लोगों को अवर्ण माना जाता था तथा जातिवाद से ग्रसित केरल के समाज में इन्हें सामाजिक अन्याय का अत्याधिक सामना करना पड़ा।
  • उनके दर्शन में हमेशा सामाजिक समानता, सभी के लिए शिक्षा और आध्यात्मिक ज्ञान पर जोर दिया जाता है।

Current Affairs

 

महत्वपूर्ण सामाजिक योगदान:

  1. उन्होंने ‘एक जाति, एक धर्म, सभी के लिए एक भगवान” (ओरु जाति, ओरु मथम, ओरु दैवम, मनुश्यानु) का प्रसिद्ध नारा दिया।
  2. वर्ष 1888 में, श्री नारायण गुरु ने केरल के अरुविप्पुरम गांव में भगवान शिव के पहले मंदिर की स्थापना की, जहां पहली बार किसी गैर-ब्राह्मण द्वारा देव-प्रतिमा स्थापित की गई।
  3. उनके इस कदम ने उच्च जाति के ब्राह्मण समुदायों के खिलाफ जाति-विरोधी क्रांति को जन्म दिया।
  4. उन्होंने एक मंदिर में कलावनकोड (Kalavancode) की प्रतिष्ठापना की, जिसमे उन्होंने मूर्तियों के स्थान पर दर्पण को रखा। इससे उन्होंने संदेश दिया कि परमात्मा प्रत्येक व्यक्ति के भीतर निवास करता है।
  5. वर्ष 1903 में, उन्होंने संस्थापक और अध्यक्ष के रूप में ‘श्री नारायण धर्म परिपालन योगम’ (SNDP) की स्थापना की।
  6. उन्होंने निचली जाति के लोगों के मंदिरों में प्रवेश-निषेध के विरोध स्वरूप राज्य भर में 40 से अधिक मंदिरों की स्थापना की थी।

राष्ट्रीय आंदोलन में योगदान:

  • वे सार्वभौमिक मंदिर प्रवेश और अछूतों के सामाजिक भेदभाव जैसी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ आंदोलन के अग्रणी नेता थे।
  • उन्होंने त्रावणकोर में निचली जातियों को मंदिरों में प्रवेश की अनुमति देने के लिए चलाए जा रहे वायकॉम आंदोलन को गति प्रदान की।
  • उन्होंने अपनी कविताओं में भारतीयता के सार को समाहित किया, जिसके माध्यम से विश्व की स्पष्ट विविधता में अंतर्निहित एकता पर प्रकाश डाला।

श्री नारायण गुरु का दर्शन:

  1. श्री नारायण गुरु, आदि शंकराचार्य द्वारा प्रतिपादित अद्वैत सिद्धांत ‘अद्वैत वेदांत’ के सबसे बड़े समर्थकों और पुनर्मूल्यांकनकर्ताओं (re-evaluators) में से एक थे।
  2. वर्ष 1913 में, उन्होंने केरल के अलुवा नामक स्थान पर ‘अद्वैत आश्रम’ की स्थापना की।
  3. यह आश्रम ‘ओम सहोदर्यं सर्वत्र’ (भगवान की दृष्टि में सभी पुरुष समान हैं), के महान सिद्धांत को समर्पित था।

साहित्यिक रचनाएँ:

उन्होंने विभिन्न भाषाओं में कई पुस्तकों की रचना की। उनमें से कुछ रचनाएं, अद्वैत दीपिका, आश्रम, थेवरप्पाथिंकंगल, ब्रह्मविद्या पंचकम आदि हैं।

उनके दर्शन की प्रासंगिकता:

जहां कई देशों और समुदायों के सामाजिक ताने-बाने में घृणा, हिंसा, कट्टरता, संप्रदायवाद और अन्य विभाजनकारी प्रवृत्तियों का क्षरण हो रहा है, ऐसे में श्री नारायण गुरु के ‘सार्वभौमिक एकता’ दर्शन की समकालीन वैश्विक संदर्भ में विशेष प्रासंगिकता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. श्री नारायण गुरु किस राज्य के थे?
  2. अरविप्पुरम आंदोलन किससे संबंधित है?
  3. कलादी में अद्वैत आश्रम की स्थापना किसने की?
  4. वायकोम सत्याग्रह किसने शुरू किया था? उद्देश्य क्या थे?

मेंस लिंक:

भारत में हुए सामाजिक सुधारों में श्री नारायण गुरु की भूमिका पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 


सामान्य अध्ययनII


 

विषय: संसद और राज्य विधायिका- संरचना, कार्य, कार्य-संचालन, शक्तियाँ एवं विशेषाधिकार और इनसे उत्पन्न होने वाले विषय।

संसदीय विशेषाधिकार


संदर्भ:

हाल ही में, संसद की ‘विशेषाधिकार एवं नैतिकता समिति’ (Privileges and Ethics Committee) ने नवनीत राणा की गिरफ्तारी के मामले में महाराष्ट्र के मुख्य सचिव, डीजीपी महाराष्ट्र, मुंबई पुलिस आयुक्त और महिला जिला जेल अधीक्षक, भायखला (मुंबई) को मौखिक रूप से गवाही देने के लिए उनके सामने पेश होने को कहा है।

पृष्ठभूमि:

अमरावती संसदीय क्षेत्र से सांसद नवनीत कौर राणा ने कई लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गयी है और आरोप लगाया है कि ‘मातोश्री-हनुमान चालीसा विवाद’ के दौरान मुंबई के एक पुलिस स्टेशन में उन्हें गैर-कानूनी तरीके से गिरफ्तार किया गया और उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया।

‘संसदीय विशेषाधिकार’ क्या होते हैं?

संसदीय विशेषाधिकार (Parliamentary Privileges), संसद सदस्यों को, व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से, प्राप्त कुछ अधिकार और उन्मुक्तियां होते हैं, ताकि वे “अपने कार्यों का प्रभावी ढंग से निर्वहन” कर सकें।

संविधान के अनुच्छेद 105 में स्पष्ट रूप से दो विशेषाधिकारों का उल्लेख किया गया है। ये हैं: संसद में वाक्-स्वतंत्रता और इसकी कार्यवाही के प्रकाशन का अधिकार।

संसदीय विशेषाधिकारों के स्रोत:

  1. संविधान
  2. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908

संसदीय विशेषाधिकारों के तहत, सदन या उसकी समिति की बैठक के दौरान तथा इसके आरंभ होने से चालीस दिन पूर्व और इसकी समाप्ति के चालीस दिन पश्चात सिविल प्रक्रिया के अंतर्गत सदस्यों की गिरफ्तारी और उन्हें निरुद्ध किए जाने से स्वतंत्रता का उपबंध किया गया है।

विशेषाधिकार उल्लंघन के खिलाफ प्रस्ताव:

  • सांसदों को प्राप्त किसी भी अधिकार और उन्मुक्ति की अवहेलना करने पर, इस अपराध को विशेषाधिकार हनन कहा जाता है, और यह संसद के कानून के तहत दंडनीय होता है।
  • किसी भी सदन के किसी भी सदस्य द्वारा ‘विशेषाधिकार हनन’ (Breach of Privilege) के दोषी पाए जाने वाले सदस्य के खिलाफ एक प्रस्ताव के रूप में एक सूचना (नोटिस) प्रस्तुत की जा सकती है।

लोकसभा अध्यक्ष / राज्य सभा सभापति की भूमिका:

विशेषाधिकार प्रस्ताव की जांच के लिए, लोकसभा अध्यक्ष / राज्य सभा सभापति, पहला स्तर होता है।

  • लोकसभा अध्यक्ष / राज्यसभा सभापति, विशेषाधिकार प्रस्ताव पर स्वयं निर्णय ले सकते हैं या इसे संसद की विशेषाधिकार समिति के लिए संदर्भित कर सकते हैं।
  • यदि लोकसभा अध्यक्ष / राज्यसभा सभापति, संगत नियमों के तहत प्रस्ताव पर सहमति देते हैं, तो संबंधित सदस्य को प्रस्ताव के संदर्भ में एक संक्षिप्त वक्तव्य देने का अवसर दिया जाता है।

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं, कि संविधान में, उन सभी व्यक्तियों को भी संसदीय विशेषाधिकार प्रदान किए गए है, जो संसद के किसी सदन या उसकी किसी समिति की कार्यवाही में बोलने और भाग लेने के हकदार हैं। इन सदस्यों में भारत के महान्यायवादी भी शामिल होते हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. संविधान के कौन से प्रावधान विधायिका के विशेषाधिकारों की रक्षा करते हैं?
  2. विधायिका के विशेषाधिकार के कथित उल्लंघन के मामलों में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया क्या है?
  3. संसद और राज्य विधानमंडलों में विशेषाधिकार समितियों की संरचना और कार्य

मेंस लिंक:

विधायिका के विशेषाधिकारों से आप क्या समझते हैं? भारत में समय-समय पर देखी जाने वाली विधायिका विशेषाधिकारों की समस्या पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 

विषय: सांविधिक, विनियामक और विभिन्न अर्द्ध-न्यायिक निकाय।

भारत का विधि आयोग


संदर्भ:

भारत का विधि आयोग (Law Commission) वर्तमान में बिना अध्यक्ष के कार्य कर रहा है।

तीन वर्ष के कार्यकाल हेतु गठित विधि आयोग ने, अपने पिछले अध्यक्ष न्यायमूर्ति बी.एस. चौहान के अगस्त 2018 में समाप्त हो जाने के बाद से कोई रिपोर्ट जारी नहीं की है।

संबंधित प्रकरण:

सरकार द्वारा 22वें विधि आयोग का गठन 21 फरवरी, 2020 को किया गया था। हालांकि, आयोग के सदस्यों की नियुक्तियों को लेकर आज तक कोई प्रगति नहीं हुई है।

‘भारत के विधि आयोग’ के बारे में:

भारत का विधि आयोग (Law Commission of India), भारत सरकार के एक आदेश द्वारा गठित एक कार्यकारी निकाय है।

  • मूल रूप से 1955 में गठित, ‘विधि आयोग’ का हर तीन साल में पुनर्गठन किया जाता है, और यह आयोग सरकार को अब तक 277 रिपोर्टें सौंप चुका है।
  • न्यायमूर्ति बी.एस. चौहान (सेवानिवृत्त) की अध्यक्षता में पिछले विधि आयोग द्वारा लोकसभा और विधानसभाओं में एक साथ चुनाव और ‘समान नागरिक संहिता’ जैसे प्रमुख मुद्दों पर रिपोर्ट और कार्य-पत्र प्रस्तुत किए गए थे।

विधि आयोग की संरचना:

  • 22 वें विधि आयोग में एक पूर्णकालिक अध्यक्ष के अतिरिक्त, एक सदस्य-सचिव सहित चार पूर्णकालिक सदस्य होते होंगे।
  • विधि मंत्रालय के ‘कानूनी मामलों के विभाग’ के सचिव एवं ‘विधायी विभाग’ के सचिव पदेन सदस्य के रूप में सम्मिलित होंगे
  • आयोग में अधिकतम पांच अंशकालिक सदस्य शामिल होंगे।
  • सर्वोच्च न्यायालय का सेवानिवृत्त न्यायाधीश या उच्च न्यायालय का सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश, विधि आयोग का अध्यक्ष होगा।

भूमिकाएं और कार्य:

  • विधि आयोग, केंद्र सरकार द्वारा सौंपे गए संदर्भों या स्वप्रेरणा से, कानूनों की जांच करेगा तथा नए कानून बनाने, और भारत में मौजूदा कानूनों में सुधार करने हेतु उनकी समीक्षा करेगा।
  • आयोग, प्रक्रियाओं में होने वाली देरी को समाप्त करने, मामलों के त्वरित निपटान, मुकदमेबाजी की लागत में कमी आदि के लिए ‘न्याय वितरण प्रणाली’ में सुधार लाने हेतु अध्ययन और अन्वेषण भी करेगा।

सुधारों की आवश्यकता:

विधि आयोग को एक क़ानून के तहत लाया जाना चाहिए, जिसमे आयोग से संबंधित नियुक्तियों, कार्यों और शक्तियों के बारे में स्पष्ट प्रावधान किए गए हों।

शक्तियों के पृथक्करण’ का सिद्धांत:

‘शक्तियों के पृथक्करण’ का सिद्धांत, शासन के एक मॉडल को संदर्भित करता है, जिसमे कार्यकारी, विधायी और न्यायिक शक्तियां किसी एक निकाय में केंद्रित नहीं होती हैं, बल्कि विभिन्न शाखाओं में विभाजित होती हैं।

यह भारतीय संविधान की मूल संरचना का एक भाग है, किंतु, इसका संविधान में स्पष्ट रूप से उल्लेख नहीं किया गया है।

संविधान में ‘शक्तियों के पृथक्करण’ को अभिव्यक्त करने संबंधी अनुच्छेद:

  1. अनुच्छेद 50: राज्य, न्यायपालिका को कार्यपालिका से पृथक्‌ करने के लिए कदम उठाएगा। इसका उद्देश्य न्यायपालिका की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना है।
  2. अनुच्छेद 122 और 212: संसद‌ एवं विधानसभाओं की किसी कार्यवाही की विधिमान्यता को प्रक्रिया की किसी ‍अभिकथित अनियमितता के आधार पर प्रश्नगत नहीं किया जाएगा। साथ ही, इन अनुच्छेदों के तहत सांसदों / विधायकों के लिए अभिव्यक्ति के संदर्भ में कुछ विशेषाधिकार प्रदान किये गए है, और सदन के पटल पर कही गई कोई भी बात उनके खिलाफ इस्तेमाल नहीं की जा सकती।
  3. संविधान के अनुच्छेद 121 और 211 के अनुसार; सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के न्यायिक आचरण पर संसद और राज्य विधानमंडल में चर्चा नहीं की जा सकती है।
  4. अनुच्छेद 53 और 154 में प्रावधान है, कि संघ और राज्य की कार्यकारी शक्ति राष्ट्रपति और राज्यपाल में निहित होगी और इनके लिए नागरिक और आपराधिक दायित्व से प्रतिरक्षा प्राप्त होगी।
  5. अनुच्छेद 361: राष्ट्रपति या राज्यपाल अपने पद की शक्तियों और कर्त्तव्यों के निर्वहन और उसके तहत किये जाने वाले किसी भी कार्य के लिये किसी न्यायालय में उत्तरदायी नहीं होंगे।

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं कि आजादी से पहले, प्रथम आयोग का गठन वर्ष 1834 में ब्रिटिश सरकार ने द्वारा  चार्टर एक्ट- 1833 के तहत लॉर्ड मैकाले की अध्यक्षता में किया गया था।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘जनहित याचिका’ क्या है?
  2. ‘जनहित याचिका’ किसके द्वारा दाखिल की जा सकती है?
  3. जनहित याचिका के संदर्भ में सर्वोच्च न्यायालय तथा उच्च न्यायालय की शक्तियां।
  4. संविधान में शक्तियों के पृथक्करण संबंधी अनुच्छेद।

मेंस लिंक:

‘शक्तियों के पृथक्करण’ का सिद्धांत क्या है? क्या है? भारतीय संविधान के अंतर्गत इसका पालन किस प्रकार किया जाता है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार।

सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन


संदर्भ:

हाल ही में ‘सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन’ (Collective Security Treaty Organization – CSTO) द्वारा मास्को में आयोजित शिखर सम्मेलन में अपनी 30वीं वर्षगांठ मनायी गयी।

‘सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन’ (CSTO) के बारे में:

  • यह छह देशों का एक अंतर-सरकारी सैन्य गठबंधन है, इसका गठन वर्ष 2002 में हुआ था।
  • इसकी उत्पत्ति का स्रोत, ‘सामूहिक सुरक्षा संधि’, 1992 (ताशकंद संधि) में खोजा जा सकता है।
  • इसका मुख्यालय, रूस की राजधानी मास्को में स्थित है।
  • CSTO का उद्देश्य, स्वतंत्रता, क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता के सामूहिक आधार पर सदस्य देशों की साइबर सुरक्षा और स्थिरता सहित शांति, अंतर्राष्ट्रीय और क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करना है।

संरचना:

  • वर्तमान में, आर्मेनिया, बेलारूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, रूसी संघ और ताजिकिस्तान ‘सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन’ (CSTO) के सदस्य हैं।
  • ‘अफगानिस्तान’ और ‘सर्बिया’ को CSTO में पर्यवेक्षक का दर्जा प्राप्त है।

Current Affairs

 

संगठन की सदस्यता के लिए शर्ते:

  1. ‘सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन’ की सदस्यता का अर्थ है, कि सदस्य देश, NATO जैसे अन्य सैन्य गठबंधनों में शामिल नहीं हो सकते हैं और ऐसे गठबंधनों के साथ अपने संबंधों को सीमित करना भी अनिवार्य होगा।
  2. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है, कि CSTO की सदस्यता के तहत कुछ प्रमुख सुरक्षा आश्वासनों प्रदान किए जाते है – जिनमें से सबसे महत्वपूर्ण, सदस्य देशों पर किसी बाह्य देश के सैन्य आक्रमण को रोकना है।
  3. CSTO में, किसी एक सदस्य देश के खिलाफ हमले को सभी सदस्यों के खिलाफ आक्रामकण के रूप में माना जाता है।
  4. हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि यह प्रावधान, अभी व्यवहार में लागू है अथवा नहीं।

इंस्टा जिज्ञासु:

वर्ष 2020 में भारत, ‘फाइव आईज’ नामक राष्ट्रों के एक समूह में सातवें सदस्य के रूप में शामिल हो गया। यह समूह किससे संबंधित है?

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन’ (CSTO) के बारे में
  2. संरचना
  3. उद्देश्य

मेंस लिंक:

‘सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन’ (CSTO) के महत्व के बारे में चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 


सामान्य अध्ययनIII


 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

 सामुदायिक वन अधिकार


(Community Forest Rights)

संदर्भ:

छत्तीसगढ़ सरकार

छत्तीसगढ़, एक राष्ट्रीय उद्यान के भीतर किसी गांव के ‘सामुदायिक वन संसाधन’ (Community Forest Resource – CFR) अधिकारों को मान्यता देने वाला देश का दूसरा राज्य बन गया है।

हाल ही में, बस्तर जिले के ‘कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान’ के भीतर एक गांव ‘गुड़ियापदर’ (Gudiyapadar) में रहने वाले आदिवासियों को, वन उपयोग के लिए नियम बनाने की शक्ति प्रदान करते हुए ‘सामुदायिक वन संसाधन अधिकारों’ (CFR rights) अधिकारों को मान्यता दी गई है।

‘सामुदायिक वन संसाधन’ क्या होते है?

  • यह वह सामूहिक वन भूमि होती है, जिसे किसी विशेष समुदाय द्वारा संधारणीय उपयोग के लिए पारंपरिक रूप से संरक्षित और परिरक्षित किया जाता है।
  • समुदाय द्वारा इस वन भूमि का उपयोग, गाँव की पारंपरिक और प्रथागत सीमाओं के भीतर उपलब्ध संसाधनों तक पहुँचने और चारागाह समुदायों के मामले में इस भू-परिदृश्य के मौसमी उपयोग के लिए किया जाता है।

सामुदायिक वन संसाधन अधिकार:

  • सामुदायिक वन संसाधन अधिकारों (Community Forest Resource rights) को ‘अनुसूचित जाति एवं अन्य पारंपरिक वनवासी (वन अधिकार मान्यता) अधिनियम’ की धारा 3(1)(i) के तहत मान्यता प्राप्त है। इस क़ानून को आमतौर पर ‘वन अधिकार अधिनियम’ या ‘एफआरए’ के रूप में संदर्भित किया जाता है।
  • यह कानून सामुदायिक वन संसाधनों को “संरक्षित, पुनर्जीवित या संरक्षित या प्रबंधित” करने के अधिकार की मान्यता प्रदान करता है।
  • ये अधिकार, समुदाय को स्वयं और दूसरों के द्वारा वन उपयोग के लिए नियम बनाने की अनुमति देते हैं और इस तरह ‘वन अधिकार अधिनियम’ (FRA) की धारा 5 के तहत अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हैं।

इन अधिकारों और उनकी मान्यता का महत्व:

  • सामुदायिक अधिकारों (Community Rights) के साथ ‘सामुदायिक वन संसाधन अधिकार’ (CFR rights) आदिवासी समुदायों की स्थायी आजीविका सुनिश्चित करते हैं। CFR अधिकारों के तहत ‘निस्तार अधिकार’ और ‘गैर-लकड़ी वन उत्पादों पर अधिकार’ आदि भी शामिल होते हैं।
  • ये अधिकार, ग्राम सभा को सामुदायिक वन संसाधन सीमा के भीतर ‘वन संरक्षण और प्रबंधन’ की स्थानीय पारंपरिक प्रथाओं को अपनाने का अधिकार प्रदान करते हैं।
  • यह वनों की संवहनीयता और जैव विविधता के संरक्षण में वनवासियों की अभिन्न भूमिका को भी रेखांकित करते है।

वन अधिकार अधिनियम के बारे में अधिक जानकारी के लिए पढ़िए।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं कि 2016 में, ओडिशा सरकार द्वारा ‘सिम्पलीपाल राष्ट्रीय उद्यान’ के अंदर सामुदायिक वन संसाधनों (सीएफआर) को पहली बार मान्यता प्रदान की गयी थी?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. पांचवी अनुसूची के तहत क्षेत्रों को सम्मिलित करने अथवा बहिष्कृत करने की शक्ति
  2. अनुसूचित क्षेत्र क्या होते हैं?
  3. वन अधिकार अधिनियम- प्रमुख प्रावधान

मेंस लिंक:

वन अधिकार अधिनियम के तहत अधिवास संबंधी दावों को वनवासियों के साथ-साथ पर्यावरण की जरूरतों को पूरा करना चाहिए। समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


 नेचिफू सुरंग

हाल ही में, सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा ‘नेचिफू सुरंग’ (Nechiphu Tunnel) का उत्खनन कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है।

  • यह सुरंग अरुणाचल प्रदेश में निर्माणाधीन है।
  • नेचिफू सुरंग, 5,700 फीट की ऊंचाई पर, पश्चिम कामेंग जिले में बालीपारा-चारदुआर-तवांग (Balipara-Charduar-Tawang – BCT) रोड पर 500 मीटर लंबी “डी-आकार, सिंगल ट्यूब डबल लेन सुरंग” है।

Current Affairs

 

कागज आयात निगरानी प्रणाली

(Paper Import Monitoring System – PIMS)

हाल ही में, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा प्रमुख कागज उत्पादों की आयात नीति को संशोधित कर “मुक्‍त” के स्थान पर “कागज आयात निगरानी प्रणाली के तहत अनिवार्य पंजीकरण के अधीन मुक्‍त” कर दिया गया है।

  • यह आदेश 201 प्रकार के विभिन्‍न कागज उत्पादों, जैसे समाचार पत्र छपाई वाले कागज, हैंडमेड पेपर, वॉलपेपर बेस, लिफाफा, टॉयलेट पेपर, कार्टन, बहीखाते, लेबल, बॉबिन आदि पर लागू होगा।
  • इसमें करेंसी पेपर, बैंक बॉन्ड एवं चेक पेपर, सिक्योरिटी प्रिंटिंग पेपर आदि कागज उत्पादों को इस नीतिगत बदलाव से बाहर रखा गया है।

Current Affairs

 

फर्स्ट मूवर्स कोअलिशन

भारत, हाल ही में, ‘फर्स्ट मूवर्स कोअलिशन’ (First Movers Coalition) नामक एक वैश्विक सार्वजनिक-निजी भागीदारी पहल में शामिल हुआ है।

  • इस पहल की शुरुआत COP26 में अमेरिका के राष्ट्रपति जो बिडेन और विश्व आर्थिक मंच (WEF) द्वारा की गई थी।
  • इस गठबंधन या कोअलिशन का उद्देश्य, भारी उद्योग और लंबी दूरी के परिवहन क्षेत्रों, जोकि वैश्विक उत्सर्जन के 30 प्रतिशत के लिए जिम्मेदार है, को डीकार्बोनाइज करना है।

Current Affairs

 

WEF का सीईओ क्लाइमेट एक्शन लीडर्स गठबंधन- भारत

हाल ही में, ‘वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम’ (WEF) ने एक नए ‘एलायंस ऑफ सीईओ क्लाइमेट एक्शन लीडर्स इंडिया’ (Alliance of CEO Climate Action Leaders India) बनाए जाने की घोषणा की है। यह गठबंधन (एलायंस) भारत की नेट-जीरो लक्ष्य हासिल करने के प्रयासों के साथ-साथ डीकार्बोनाइजेशन करने को तेजी से ट्रैक करने की दिशा में काम करेगा।

  • यह पहल ‘विश्व आर्थिक मंच’ (WEF) के ‘क्लाइमेट एक्शन प्लेटफॉर्म’ का एक हिस्सा है।
  • उद्देश्य: भारत की जलवायु कार्रवाई और डीकार्बोनाइजेशन प्रयासों को तेजी से ट्रैक करना।
  • प्रतिभागी: यह एलायंस भारतीय थिंक-टैंक ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (Observer Research Foundation) और मैनेजमेंट कंसल्टेंसी किर्नी (Kearney) के बीच एक सहयोग है, और भारत के प्रमुख व्यवसायों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को एक साथ लाता है।

Current Affairs

 

जन जैव विविधता पंजी

  • कोलकाता, ‘जैव विविधता की विस्तृत पंजी’ (रजिस्टर) अर्थात ‘जन जैव विविधता पंजी’ या पीपल्स बायोडायवर्सिटी रजिस्टर (People’s Biodiversity Register – PBR) तैयार करने वाला पहला बड़ा महानगर बन गया है।
  • ‘जन जैव विविधता पंजी’ (PBR) में किसी विशिष्ट क्षेत्र या गांव के परिदृश्य और जनसांख्यिकी सहित स्थानीय रूप से उपलब्ध जैव-संसाधनों पर व्यापक जानकारी शामिल की जाती है।

आवश्यकता:

  • जैव विविधता अधिनियम 2002 के अंतर्गत, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में प्रत्येक स्थानीय स्वशासी संस्थान के लिए अपने क्षेत्राधिकार के भीतर ‘जैव विविधता प्रबंधन समितियों’ (Biodiversity Management Committees – BMC) का गठन करना अनिवार्य किया गया है।
  • गठित होने के बाद, ‘जैव विविधता प्रबंधन समिति’ (BMC) को स्थानीय लोगों के परामर्श से एक ‘जन जैव विविधता पंजी’ (PBR) तैयार किए जाने का प्रावधान है।

 

विश्व आर्थिक मंच का ‘यात्रा एवं पर्यटन विकास सूचकांक’

वैश्विक ‘यात्रा एवं पर्यटन विकास सूचकांक’ (Travel and Tourism Development Index), विश्व आर्थिक मंच द्वारा जारी किया जाता है।

  • यह सूचकांक, पिछले 15 वर्षों से द्विवार्षिक रूप से प्रकाशित होने वाले ‘यात्रा एवं पर्यटन प्रतिस्पर्धात्मकता सूचकांक’ का प्रत्यक्ष क्रमिक विकास है।
  • इस सूचकांक के नवीनतम संस्करण में भारत को 54वें स्थान पर रखा गया है। 2019 में भारत सूचकांक में 46वें स्थान पर था।
  • भारत, दक्षिण एशियाई देशों में अब भी शीर्ष पर है। वैश्विक सूची में जापान शीर्ष पर है। उसके बाद क्रमश: अमेरिका, स्पेन, फ्रांस, स्विट्जरलैंड, आस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, सिंगापुर और इटली का स्थान है।

Current Affairs

अंतर्राष्ट्रीय बुकर पुरस्कार

टूम ऑफ़ सैंड (Tomb of Sand), अंतर्राष्ट्रीय बुकर पुरस्कार से सम्मानित होने वाली भारतीय भाषा में लिखी जाने वाली पहली पुस्तक बन गई है।

  • यह पुस्तक मूल रूप से हिंदी में ‘रेत समाधि’ के रूप में प्रकाशित हुई थी।
  • ‘रेत समाधि’ की लेखक ‘गीतांजलि श्री’ है और डेज़ी रॉकवेल द्वारा ‘टूम ऑफ़ सैंड’ के नाम से इसका अंग्रेजी में अनुवाद किया गया है।

अंतर्राष्ट्रीय बुकर पुरस्कार (International Booker Prize) के बारे में:

  • यह पुरस्कार अंग्रेजी में अनुवादित और यूनाइटेड किंगडम या आयरलैंड में प्रकाशित किसी एक पुस्तक के लिए प्रतिवर्ष प्रदान किया जाता है।
  • इस पुरस्कार का उद्देश्य विश्व भर के उच्च-गुणवत्ता वाले उपन्यासों को अधिक से अधिक पढ़ने को प्रोत्साहित करना है। हालाँकि इसका यूनाइटेड किंगडम में पहले से ही काफी प्रभाव पड़ा है।
  • इस पुरुस्कार के माध्यम से अनुवादकों के महत्त्वपूर्ण काम को सम्मानित किया जाता है, और पुरुस्कार में 50,000 पाउंड की पुरस्कार राशि लेखक और अनुवादक के बीच समान रूप से विभाजित होती है।