[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 27 May 2022

विषयसूची

सामान्य अध्ययन-I

  1. तोमर राजा अनंगपाल द्वितीय

 

सामान्य अध्ययन-II

  1. उच्चत्तम न्यायालय द्वारा ‘यौन कर्म’ को ‘पेशे’ के रूप में मान्यता

 

सामान्य अध्ययन-III

  1. चीनी निर्यात प्रतिबंध और उनका प्रभाव
  2. परम पोरुल सुपर कंप्यूटर
  3. हरी हाइड्रोजन क्षमता
  4. पृथक भील प्रदेश की मांग

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

  1. बोंगोसागर युद्धाभ्यास
  2. अभिलाषा बराक
  3. रेस्तरां द्वारा ग्राहकों से लिया जाने वाला ‘सेवा शुल्क’
  4. भद्रवाह में भारत का ‘पहला लैवेंडर महोत्सव’
  5. प्रोजेक्ट निगाह
  6. ऑपरेशन नमकीन
  7. निर्देशक पोत

 


सामान्य अध्ययनI


 

विषय: भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू शामिल होंगे।

तोमर राजा अनंगपाल द्वितीय

संदर्भ:

पुरातात्विक स्मारकों और स्‍थलों के संरक्षण और परिरक्षण हेतु संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के अन्तर्गत स्थापित ‘राष्ट्रीय संस्मारक प्राधिकरण’ (National Monuments Authority – NMA) ने मध्य दिल्ली में किसी जगह ‘अनंगपाल तोमर द्वितीय’ की एक मूर्ति स्थापित करने और इसे एक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना बनाई है।

कई लोगों द्वारा ‘अनंगपाल तोमर द्वितीय’ को दिल्ली का संस्थापक-राजा माना जाता है।

‘अनंगपाल द्वितीय’ (Anangpal II) के बारे में:

  1. ‘अनंगपाल द्वितीय’ तोमर वंश के एक राजा थे जिन्होंने 8वीं और 12वीं शताब्दी के बीच वर्तमान दिल्ली और हरियाणा के कुछ हिस्सों पर शासन किया था।
  2. ‘अनंगपाल द्वितीय’ के बाद उनके पोते ‘पृथ्वीराज चौहान’ राजा बने। तराइन (वर्तमान हरियाणा) की लड़ाई में ‘पृथ्वीराज चौहान’, ग़ोरी की सेना (Ghurids forces) से पराजित हो गए थे, और इस युद्ध के बाद 1192 में दिल्ली सल्तनत की स्थापना हुई थी।
  3. तोमर वंश ने 8 वीं शताब्दी में, अनंगपाल तोमर द्वितीय के शासनकाल के दौरान अपनी राजधानी ढिल्लिकापुरी (Dhillikapuri) (दिल्ली) स्थानांतरित की थी।
  4. उन्होंने दिल्ली को इसका वर्तमान नाम दिया और इसे फिर से बसाया था।
  5. उन्होंने लाल कोट दुर्ग और अनंगताल बावली का निर्माण कराया।
  6. राजा अनंगपाल तोमर द्वितीय द्वारा ‘कुतुब परिसर’ में ‘विष्णु गरुड़ ध्वज’ (लौह स्तंभ) भी स्थापित करवाया गया था।

Current Affairs

 

‘तोमर राजवंश’ के बारे में:

  • तोमर राजवंश (Tomara dynasty), उत्तरी भारत के शुरुआती मध्ययुगीन छोटे शासक राजवंशों में से एक है।
  • वैदिक परंपरा के अनुसार- तोमर राजवंश, 36 राजपूत जनजातियों में से एक था।
  • इस वंश का इतिहास, 11वीं शताब्दी ईस्वी में दिल्ली शहर की स्थापना करने वाले राजा अनंगपाल के शासनकाल से लेकर 1164 में दिल्ली को ‘चौहान’ (चहमना) साम्राज्य में शामिल करने तक माना जाता है।
  • हालांकि, दिल्ली बाद में निर्णायक रूप से चौहान साम्राज्य का हिस्सा बन बन गयी थी, किंतु प्राप्त सिक्के और तुलनात्मक रूप से अंतिम दौर के साहित्यिक साक्ष्य इंगित करते हैं कि संभवतः 1192-93 में मुसलमानों द्वारा दिल्ली पर अंतिम विजय हासिल करने तक, अनंगपाल और मदनपाल जैसे तोमर राजाओं का सामंतों के रूप में शासन जारी रहा था।

Current Affairs

प्रीलिम्स लिंक:

  1. तोमर साम्राज्य के बारे में
  2. तोमर वंश के महत्वपूर्ण शासक और उनके योगदान
  3. तोमर वंश की राजधानियाँ
  4. महत्वपूर्ण युद्ध और उनके परिणाम

मेंस लिंक:

दिल्ली सल्तनत के विभिन्न राजवंशों के तहत वास्तुकला में परिवर्तन और निरंतरता के तत्वों का आकलन कीजिए।

स्रोत: द प्रिंट।

 


सामान्य अध्ययनII


 

विषय: केन्द्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन; इन अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय।

उच्चत्तम न्यायालय द्वारा ‘यौन कर्म’ को ‘पेशे’ के रूप में मान्यता


(Supreme Court recognises sex work as a ‘profession’)

संदर्भ:

एक महत्वपूर्ण आदेश में, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने ‘यौन कर्म’ / ‘सेक्स वर्क’ (Sex Work) को एक ‘पेशे’ / ‘व्यापार’ (Profession) के रूप में मान्यता प्रदान की है।

  • शीर्ष अदालत ने यह आदेश कोविड-19 महामारी के कारण यौनकर्मियों की समस्याओं को उठाते हुए दायर की गयी याचिका पर सुनवाई करने के दौरान जारी किया था।
  • इस याचिका में, कोविड -19 के कारण यौनकर्मियों (Sex Workers) की बदहाली को उजागर किया गया है और पूरे भारत में नौ लाख से अधिक महिलाओं और ट्रांसजेंडर यौनकर्मियों के लिए राहत उपायों की मांग की गई है।

उच्चत्तम न्यायालय फैसला – दिशानिर्देश:

  1. सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पुलिस बलों को यौनकर्मियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करना चाहिए और उनके साथ मौखिक या शारीरिक रूप से दुर्व्यवहार नहीं करना चाहिए।
  2. अधिकारियों का यह कर्तव्य है कि वे ‘अनैतिक व्यापार (रोकथाम) अधिनियम’, 1956 (Immoral Traffic (Prevention) Act, 1956) के तहत यौनकर्मियों को सुरक्षा प्रदान करें।
  3. पुलिस और अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों को यौनकर्मियों के अधिकारों के प्रति संवेदनशील बनाया जाना चाहिए।
  4. हाल ही में लागू की गई आईपीसी की धारा 354C को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के खिलाफ सख्ती से लागू किया जाना चाहिए, जिससे कि बचाव अभियानों की रिपोर्टिंग करने की आड़ में अपने ग्राहकों के साथ यौनकर्मियों की तस्वीरें प्रसारित करने पर रोक लगाई जा सके। आईपीसी की धारा 354C में ‘दृश्यरतिकता’ (Voyeurism) को एक आपराधिक कृत्य घोषित किया गया है।
  5. इच्छा के विरुद्ध हिरासत में रखी गयी वयस्क महिलाओं से संबंधित मामलों की समीक्षा करने तथा उन्हें समयबद्ध तरीके से रिहा करने के लिए कार्रवाई करने हेतु, राज्य सरकारों को आश्रय गृहों का सर्वेक्षण करना चाहिए।
  6. केंद्र सरकार और राज्य सरकारों द्वारा ‘राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण’, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से यौनकर्मियों को उनके अधिकारों के बारे में शिक्षित करने के लिए कार्यशालाएं आयोजित की जानी चाहिए।

इन दिशानिर्देशों की आवश्यकता:

यौनकर्मियों के प्रति पुलिस का रवैया अक्सर क्रूर और हिंसक होता है।

फैसले का महत्व:

अदालत ने कहा, कि इस देश में प्रत्येक व्यक्ति को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत सम्मानजनक जीवन का अधिकार है।

आगे की चुनौतियां:

  1. यौनकर्मियों को शारीरिक से लेकर मानसिक हमलों तक कई तरह के दुर्व्यवहारों का सामना करना पड़ता है।
  2. अधिकांश यौनकर्मियों के पास स्वच्छ और सुरक्षित आवास नहीं होता है, क्योंकि उन्हें मकान मालिकों या समाज द्वारा सीधे तौर पर मकान देने से मना कर दिया जाता है।
  3. आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं तक इनकी पहुंच काफी सीमित होती है।

Current Affairs

 

न्यायालय के प्रासंगिक निर्णय:

  1. काजल मुकेश सिंह बनाम महाराष्ट्र राज्य (2021) में, बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा, “वेश्यावृत्ति कोई अपराध नहीं है, एक महिला को अपना व्यवसाय चुनने का अधिकार है”।
  2. मनोज शॉ बनाम पश्चिम बंगाल राज्य (2003) में, कलकत्ता उच्च न्यायालय ने कहा कि यौनकर्मियों को आरोपी के बजाय अपराध का शिकार माना जाना चाहिए।
  3. बुद्धदेव कर्मस्कार बनाम पश्चिम बंगाल राज्य (2011) में, उच्च न्यायालय ने कहा कि यौनकर्मी भी संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गारंटीकृत गरिमापूर्ण जीवन जीने के हकदार हैं।

वेश्यावृत्ति को वैध बनाने के पक्ष और विपक्ष से संबंधित पहलुओं के बारे में जानकारी के लिए पढ़िए।

Current Affairs

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप संयुक्त राष्ट्र के ब्लू हार्ट अभियान के बारे में जानते हैं?

प्रीलिम्स लिंक:

  1. आईपीसी की धारा 370 और 370A किससे संबंधित है?
  2. संविधान का अनुच्छेद 23(1)
  3. ‘व्यक्तियों की तस्करी के खिलाफ विश्व दिवस’ के बारे में

मेंस लिंक:

भारत में अवैध व्यापार से संबंधित संवैधानिक और विधायी प्रावधानों के बारे में विचार-विमर्श कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 


सामान्य अध्ययनIII


 

विषय: प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कृषि सहायता तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य से संबंधित विषय; जन वितरण प्रणाली- उद्देश्य, कार्य, सीमाएँ, सुधार; बफर स्टॉक तथा खाद्य सुरक्षा संबंधी विषय; प्रौद्योगिकी मिशन; पशु पालन संबंधी अर्थशास्त्र।

चीनी निर्यात प्रतिबंध और इसका प्रभाव


संदर्भ:

हाल ही में, सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार- देश में चीनी का निर्यात प्रतिबंधित होगा या केवल पूर्व-मंजूरी के साथ ही इसके निर्यात की अनुमति दी जाएगी।

ये नए प्रतिबंध 1 जून से लागू होंगे और 31 अक्टूबर तक या अगले आदेश तक जारी रहेंगे।

नवीनतम परिवर्तन:

  1. प्रतिबंधित श्रेणी: चीनी को निर्यात के लिए ‘मुक्त श्रेणी’ (Open Category) से हटाकर ‘प्रतिबंधित’ श्रेणी (Restricted Category) में शामिल कर दिया गया है। विदित हो कि, ‘मुक्त श्रेणी’ में शामिल वस्तुओं के निर्यात के लिए किसी सरकारी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं होती है।
  2. विशिष्ट अनुमति: चीनी के निर्यात की अनुमति, केवल चीनी निदेशालय, ‘खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग’ (DFPD), ‘उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय’ से विशिष्ट अनुमति हासिल करने बाद ही दी जाएगी।
  3. ‘अग्रिम अनुज्ञप्ति योजना’ (Advance Authorisation Scheme) के तहत आयातित कच्ची चीनी से निर्मित ‘रिफाइंड चीनी’ के पुन: निर्यात के लिए पूर्व अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी।

Current Affairs

 

इन प्रतिबंधों का कारण:

  1. “चीनी की घरेलू उपलब्धता और मूल्य स्थिरता” बनाए रखने के लिए ये प्रतिबंध लागू किए गए हैं।
  2. यदि चीनी के निर्यात की अनुमति दी जाती है, तो अगले सत्र में लगभग तीन महीनों के लिए आपूर्ति में बाधा उत्पन्न हो सकती है।
  3. अगर, इस दौरान चीनी के अतिरिक्त भंडार (बैकअप स्टॉक) की कमी रहती है तो घरेलू बाजार में इसकी कीमतें बढ़ सकती हैं।
  4. मुद्रास्फीति पर अंकुश लगाने के लिए: भारत की खुदरा मुद्रास्फीति अप्रैल में लगातार चौथे महीने आरबीआई के ‘गुंजाइश स्तर’ (Tolerance Band) से ऊपर रही है, और आने वाले महीनों में भी यही स्थिति बने रहने की संभावना है।

Current Affairs

 

प्रभाव:

  • निर्यात पर अंकुश लगाने से वैश्विक खाद्य कीमतों में और वृद्धि हो सकती है।
  • निर्यात प्रतिबधों की वजह से, घरेलू ‘इथेनॉल उत्पादन’ के लिए अधिक अधिशेष स्वीटनर (चीनी) उपलब्ध होगी, जोकि ‘राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति’ के अनुसार सरकार एक प्राथमिक लक्ष्य है।

चीनी- उत्पादन, आयात और निर्यात:

भारत, विश्व में चीनी का सबसे बड़ा उत्पादक और ब्राजील के बाद दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक देश है।

Current Affairs

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप ‘कृषि अवसंरचना विकास उपकर’ (Agriculture Infrastructure Development Cess) के बारे में जानते हैं?

इसका उपयोग, एक निर्दिष्ट उद्देश्य अर्थात, भारत में कृषि के बुनियादी ढांचे में सुधार करने के लिए उत्पादन बढ़ाकर, तथा इस क्षेत्र को अनुचित प्रतिस्पर्धा से बचाने के लिए और इसके उत्पादन को कुशलतापूर्वक बढ़ाने के लिए किया जाएगा ।

इसके बारे में अधिक जानकारी के लिए पढ़िए।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘न्यूनतम विक्रय मूल्य’ क्या है?
  2. इसे किस प्रकार निर्धारित किया जाता है?
  3. ‘न्यूनतम समर्थन मूल्य’ और ‘न्यूनतम बिक्री मूल्य’ के बीच अंतर।
  4. उचित और लाभकारी मूल्य (Fair and Remunerative Price – FRP) क्या है?

मेंस लिंक:

चीनी के लिए न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP) के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

परम पोरुल सुपरकंप्यूटर


संदर्भ:

हाल ही में, एक अत्याधुनिक सुपरकंप्यूटर ‘परम पोरुल’ (Param Porul Super Computer) का एनआईटी तिरुचिरापल्ली में उद्घाटन किया गया।

यह सुपरकंप्यूटर, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) की एक संयुक्त पहल – ‘राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन’ (National Supercomputing Mission – NSM)- द्वितीय चरण के तहत स्थापित किया गया है।

देश में अब तक स्थापित किए जा चुके सुपर कंप्यूटर:

विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय की वार्षिक वार्षिक समीक्षा के अनुसार-

राष्ट्रीय सुपर-कंप्यूटर मिशन (NSM) के तहत, जुलाई 2021 से आईआईटी-हैदराबाद, ‘राष्ट्रीय कृषि-खाद्य जैव प्रौद्योगिकी संस्थान’- मोहाली, CDAC-बेंगलुरु और आईआईटी कानपुर में चार नए सुपर कंप्यूटर स्थापित किए जा चुके हैं।

‘राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन’ के बारे में:

  • राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (National Supercomputing Mission- NSM) इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (MeitY) और विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) द्वारा संयुक्त रूप से संचालित किया जा रहा है।
  • इसे उन्नत कम्प्यूटिंग विकास केंद्र (Centre for Development of Advanced Computing: C-DAC), पुणे और भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बेंगलुरु द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है।

मिशन का लक्ष्य:

  • राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन का उद्देश्य 70 से अधिक उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग सुविधाओं से लैस एक विशाल सुपरकंप्यूटिंग ग्रिड की स्थापना करना तथा देश के राष्ट्रीय शैक्षणिक और R&D संस्थानों को सशक्त बनाना है।
  • इन सुपर कंप्यूटरों को राष्ट्रीय ज्ञान नेटवर्क (National Knowledge – NKN) पर राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग ग्रिड से जोड़ा जाएगा।
  • इस मिशन में इन अनुप्रयोगों के विकास संबंधी चुनौतियों का सामना करने के लिए उच्च पेशेवर उच्च प्रदर्शन कम्प्यूटिंग (High Performance Computing- HPC) की जानकारी रखने वाले कार्यबल का विकास सम्मिलित किया गया है।

‘राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन’ की उपलब्धियां:

  • स्‍वदेशी तौर पर असेंबल किए गए पहले सुपर कंप्‍यूटर ‘परम शिवाय’ को आईआईटी (बीएचयू) में स्थापित किया गया है।
  • उसके बाद ‘परम शक्ति’ को आईआईटी खड़गपुर में और ‘परम ब्रह्म’ को आईआईएसईआर पुणे में स्थापित किया गया था। ये सुपर कंप्‍यूटर, मौसम एवं जलवायु, कम्प्यूटेशनल फ्लूड डायनामिक्स, बायोइनफॉरमैटिक्स और मटेरियल साइंस जैसे क्षेत्रों से संबंधित अनुप्रयोगों से लैस हैं।

इंस्टा जिज्ञासु:

भारत ने एक स्वदेशी सर्वर ‘रुद्र’ (RUDRA) विकसित किया है जो सरकार और सार्वजनिक उपक्रमों की उच्च प्रदर्शन कम्प्यूटिंग (HPC)  संबंधी सभी आवश्यकताओं को पूरा कर सकता है। यह पहला अवसर है जब C-DAC द्वारा विकसित सॉफ्टवेयर स्टैक के साथ देश में कोई सर्वर सिस्‍टम बनाया गया है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. भारत और विश्व में सुपर कंप्यूटर
  2. ये तीव्रता से किस प्रकार गणना करते हैं?
  3. राष्ट्रीय ज्ञान नेटवर्क (NKN) के बारे में
  4. राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (NSM) के तहत लक्ष्य

मेंस लिंक:

राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (NSM) पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: पीआईबी।

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

ग्रीन हाइड्रोजन क्षमता


(Green Hydrogen Potential)

संदर्भ:

भारत, एक उष्णकटिबंधीय देश होने और अनुकूल भौगोलिक परिस्थितियों तथा प्रचुर मात्रा में प्राकृतिक संसाधनों के कारण, ‘हरित हाइड्रोजन’ (Green Hydrogen) उत्पादन में एक महत्वपूर्ण लाभप्रद स्थित रखता है।

इन सब तथ्यों की वजह से, हाल ही में, स्विट्जरलैंड के ‘दावोस’ में आयोजित ‘विश्व आर्थिक मंच’ की बैठक में भारत ने विश्व भर में मौजूदा ऊर्जा संकट का लाभ उठाकर, देश के ‘हरित हाइड्रोजन’ के नेतृत्व-कर्ता के रूप में उभरने की बात कही।

इस संबंध में भारत द्वारा किए जा रहे प्रयास:

  1. केंद्र सरकार द्वारा ‘राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन’ पर मसौदा दिशानिर्देश जारी किए गए हैं, जिसका लक्ष्य घरेलू आवश्यकताओं के लगभग 40 प्रतिशत को पूरा करने के लिए वर्ष 2030 तक हाइड्रोजन उत्पादन को 5 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) तक बढ़ाना है।
  2. केंद्र सरकार द्वारा ‘इलेक्ट्रोलाइजर्स’ (Electrolysers) के लिए 15,000 करोड़ रुपये की ‘प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटि’व (PLI) योजना शुरू करने के प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है।
  3. फरवरी में, केंद्र सरकार द्वारा ‘हरित हाइड्रोजन और हरित अमोनिया नीति’ को अधिसूचित किया गया था, जिसके तहत, जुलाई 2025 से पहले ‘हरित हाइड्रोजन’ उत्पादन के लिए स्थापित किसी भी नए अक्षय ऊर्जा संयंत्रों के लिए 25 साल की मुफ्त बिजली प्रदान करने का प्रावधान किया गया है।
  4. सरकार द्वारा तेल शोधन, उर्वरक और इस्पात क्षेत्रों को अपनी आवश्यकताओं के एक निश्चित अनुपात के लिए ‘हरित हाइड्रोजन’ की खरीद अनिवार्य करने के लिए अधिदेश लागू करने की भी योजना बनाई जा रही है।

हरित हाइड्रोजन / ग्रीन हाइड्रोजन क्या है?

नवीकरणीय / अक्षय ऊर्जा का उपयोग करके ‘विद्युत अपघटन’ (Electrolysis) द्वारा उत्पादित हाइड्रोजन को ‘हरित हाइड्रोजन’ (Green Hydrogen) के रूप में जाना जाता है। इसमें कार्बन का कोई अंश नहीं होता है।

ग्रीन हाइड्रोजन का महत्व:

  • भारत के लिए अपने ‘राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान’ (Nationally Determined Contribution- INDC) लक्ष्यों को पूरा करने तथा क्षेत्रीय और राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा, पहुंच और उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु ‘ग्रीन हाइड्रोजन’ ऊर्जा काफी महत्वपूर्ण है।
  • ग्रीन हाइड्रोजन, ऊर्जा भंडारण विकल्प के रूप में कार्य कर सकता है, जो भविष्य में नवीकरणीय ऊर्जा के अंतराल को पूरा करने के लिए महत्वपूर्ण होगा।
  • परिवहन के संदर्भ में, शहरों के भीतर या राज्यों के मध्य लंबी दूरी की यात्रा या माल ढुलाई के लिए, रेलवे, बड़े जहाजों, बसों या ट्रकों आदि में ग्रीन हाइड्रोजन का उपयोग किया जा सकता है।

ग्रीन हाइड्रोजन के अनुप्रयोग:

  1. अमोनिया और मेथनॉल जैसे हरित रसायनों का उपयोग सीधे ही उर्वरक, परिवहन, बिजली, रसायन, शिपिंग आदि, जैसी मौजूदा ज़रूरतों में किया जा सकता है।
  2. व्यापक स्तर पर अपनाए जाने के लिए CGD नेटवर्क में 10 प्रतिशत तक ग्रीन हाइड्रोजन मिश्रण को लागू जा सकता है।

लाभ:

  • ग्रीन हाइड्रोजन ऊर्जा भंडारण के लिए खनिजों और दुर्लभ-पृथ्वी तत्व-आधारित बैटरी पर निर्भरता को कम करने में मदद करेगा।
  • जिस अक्षय ऊर्जा को ग्रिड द्वारा संग्रहीत या उपयोग नहीं किया जा सकता है, उसका हाइड्रोजन-उत्पादन करने के लिए उपयोग किया जा सकता है।

इंस्टा जिज्ञासु:

हाइड्रोजन एक अदृश्य गैस है। लेकिन, फिर इसे हरा, गुलाबी आदि नाम किस प्रकार दिए जाते हैं?

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ग्रीन हाइड्रोजन के बारे में
  2. इसका उत्पादन किस प्रकार किया जाता है?
  3. अनुप्रयोग
  4. लाभ
  5. हाइड्रोजन ऊर्जा मिशन के बारे में

मेंस लिंक:

ग्रीन हाइड्रोजन के लाभों की विवेचना कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: आंतरिक सुरक्षा के लिये चुनौती उत्पन्न करने वाले शासन विरोधी तत्त्वों की भूमिका।

एक पृथक ‘भील प्रदेश’ की मांग


संदर्भ:

हाल ही में, एक पृथक “भील प्रदेश” (Bhil Pradesh) गठित किए जाने की मांग फिर से उठाई जाने लगी है।

‘भील प्रदेश’ के बारे में:

  • यह पश्चिमी भारत में आदिवासी आबादी के लिए एक अलग राज्य गठित किए जाने की मांग है।
  • इसके तहत, चार राज्यों में विस्तारित 39 जिलों – गुजरात के 16, राजस्थान के 10, मध्य प्रदेश के सात और महाराष्ट्र के छह – को मिलाकर एक अलग राज्य बनाने की मांग की जा रही है।
  • वर्ष 1913 में हुए मानगढ़ नरसंहार के बाद, भील समाज सुधारक और आध्यात्मिक नेता गोविंद गुरु ने सबसे पहले आदिवासियों के लिए अलग राज्य की मांग उठाई थी।

आवश्यकता:

स्थानीय लोगों का कहना है, कि राज्यों के बंटवारे के बाद इस क्षेत्र की आदिवासी आबादी कई राज्यों में बिखर गयी। जिसकी वजह से उनकी सामूहिक आवाजें दब गयी। नतीजतन, उनके विकास से जुड़ी अधिकांश योजनाओं का लाभ उन्हें नहीं मिल पाया है।

मानगढ़ नरसंहार:

मानगढ़ नरसंहार (Mangarh massacre), ‘जलियांवाला बाग हत्याकांड’ से छह साल पहले हुआ था और इसके प्रायः “आदिवासी जलियांवाला” भी कहा जाता है। इस हत्याकांड या नरसंहार में 17 नवंबर, 1913 को राजस्थान और गुजरात की सीमा पर अवस्थित ‘मानगढ़ की पहाड़ियों’ में सैकड़ों भील आदिवासियों को ब्रिटिश सेना द्वारा मार डाला गया था। .

‘भील’ कौन हैं?

भील (Bhils or Bheels) भील मुख्यतः पश्चिम भारत में बसने वाला एक आदिवासी जातीय समूह हैं। गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और राजस्थान राज्यों में भीलों को ‘आदिवासी’ के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।

‘भील’ भारत के सबसे बड़े जनजातीय समूहों में से एक हैं, और ये ‘भील भाषा’ बोलते हैं।

Current Affairs

 

विभिन्न अलगाववादी आंदोलनों के बारे में अधिक जानकारी के लिए पढ़िए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


 बोंगोसागर युद्धाभ्यास

बोंगोसागर युद्धाभ्यास (Bongosagar Exercise), भारत और बांग्लादेश के बीच किया जाने वाला एक द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास है।

  • इस युद्धाभ्यास का तीसरा संस्करण हाल ही में बांग्लादेश के ‘पोर्ट मोंगला’ में आयोजित किया गया था।
  • उद्देश्य: बोंगोसागर अभ्यास का उद्देश्य दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच समुद्री अभ्यासों और जंगी कार्रवाई के व्यापक स्पेक्ट्रम में संचालन के माध्यम से उच्च स्तर की पारस्परिकता तथा संयुक्त परिचालन कौशल को विकसित करना है।

Current Affairs

अभिलाषा बराक

  • कैप्टन अभिलाषा बराक (Abhilasha Barak), छह महीने का कॉम्बैट आर्मी एविएशन कोर्स पूरा करने के बाद कॉम्बैट एविएटर के रूप में ‘आर्मी एविएशन कॉर्प्स’ में शामिल होने वाली पहली महिला बन गई हैं।
  • आर्मी एविएशन कॉर्प्स थलसेना की सबसे युवा कोर है, इसका गठन 1 नवंबर, 1986 को किया गया था।

Current Affairs

 

रेस्तरां द्वारा ग्राहकों से लिया जाने वाला ‘सेवा शुल्क’

सरकार ने रेस्टोरेंट मालिकों द्वारा ग्राहकों पर लगाए जाने वाले ‘सेवा शुल्क’ / ‘सर्विस चार्ज’ को लेकर बैठक बुलाई है।

‘सर्विस चार्ज’ क्या है?

होटलों द्वारा ‘सेवा शुल्क’ लिया जाना स्वैच्छिक होता है और इसका भुगतान करना अथवा नहीं करना उपभोक्ताओं की इच्छा पर निर्भर करता है। इस प्रकार का ‘सेवा शुल्क’ कानून के अनुसार अनिवार्य नहीं है।

Current Affairs

 

भद्रवाह में भारत का ‘पहला लैवेंडर महोत्सव’

लैवेंडर (Lavender), लैमियासी (Lamiaceae) नामक मिंट वर्ग के पुष्पीय पौधों की 47 ज्ञात प्रजातियों की एक प्रजाति है।

  • ये फूल, नीले, बैंगनी या बकाइन (lilac) तथा कभी-कभी काले बैंगनी या पीले रंग के होते हैं।
  • लैवेंडर का उपयोग सदियों से पारंपरिक चिकित्सा और सौंदर्य प्रसाधनों में किया जाता रहा है।
  • भद्रवाह, जम्मू के डोडा जिले का एक कस्बा है।
  • भारत का पहला ‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाई एल्टीट्यूड मेडिसिन’ भी भद्रवाह में बनाया जा रहा है।
  • भद्रवाह को भारत की ‘बैंगनी क्रांति का जन्मस्थान’ बताया जाता है।

 

प्रोजेक्ट निगाह

प्रोजेक्ट निगाह (Project NIGAH), इनलैंड कंटेनर डिपो कंटेनर ट्रैकिंग मॉड्यूल (ICTM) का उपयोग करके कंटेनरों को ट्रैक करने की एक पहल है। यह मॉड्यूल ICD के अंदर ‘कंटेनर मूवमेंट’ की बेहतर दृश्यता में मदद करेगा।

  • यह सीमा शुल्क को लंबे समय से खड़े कंटेनरों में तेजी लाने और समय पर मंजूरी की निगरानी करने में मदद करेगा, जिससे निवारक जांच सुनिश्चित करने के साथ-साथ व्यापार करने में आसानी होगी।
  • प्रोजेक्ट निगाह, हाल ही में ‘दिल्ली सीमा शुल्क’ क्षेत्र द्वारा शुरू किया गया था। ‘दिल्ली सीमा शुल्क’, केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड के तहत एक फील्ड बॉडी (क्षेत्र ) है।

 

ऑपरेशन नमकीन

हाल ही में, राजस्व खुफिया निदेशालय (Directorate of Revenue Intelligence – DRI) द्वारा ‘ऑपरेशन नमकीन’ (Operation Namkeen) के तहत 52 किलोग्राम कोकीन बरामद की गयी है, जिसकी कीमत अंतरराष्ट्रीय अवैध बाजार में 500 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है।

  • मादक पदार्थों पर रोक लगाने के लिए ‘राजस्व खुफिया निदेशालय’ (DRI) द्वारा “ऑपरेशन नमकीन” शुरू किया गया था।
  • केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी), राजस्व विभाग, वित्त मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन ‘राजस्व खुफिया निदेशालय’ भारत में तस्करी-रोधी क्षेत्र में ‘भारतीय सीमा शुल्क’ की शीर्ष एजेंसी है।
  • ‘राजस्व खुफिया निदेशालय’ (DRI), सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के प्रावधानों और ‘शस्त्र अधिनियम’, NDPS अधिनियम, COFEPOSA, वन्यजीव अधिनियम, पुरावशेष अधिनियम आदि सहित पचास से अधिक अन्य संबद्ध अधिनियमों को लागू करता है।

 

निर्देशक पोत

हाल ही में, भारतीय नौसेना के लिए जीआरएसई द्वारा निर्माणाधीन चार ‘सर्वेक्षण पोत परियोजना’ में से दूसरे जहाज ‘निर्देशक’ (Nirdeshak) को चेन्नई के कट्टूपल्ली में लॉन्च किया गया।

  • यह भारतीय नौसेना के लिए बनाए जा रहे ‘चार सर्वेक्षण पोतों’ (बृहद्) / (four Survey Vessels (Large)) में से दूसरा है।
  • इस जहाज (पोत) का नामकरण पूर्ववर्ती ‘निर्देशक पोत’ के नाम पर किया गया है, जो कि एक भारतीय नौसेना सर्वेक्षण पोत था और दिसंबर, 2014 में 32 साल की शानदार सेवा के बाद इसे हटा दिया गया।

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