HINDI INSIGHTS STATIC QUIZ 2020-2021
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Question 1 of 5
1. Question
अर्ध-शास्त्रीय संगीत रूप ठुमरी के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- ठुमरी भक्ति आंदोलन से प्रेरित प्रेम प्रसंगयुक्त-भक्ति साहित्य पर आधारित है।
- गीत आमतौर पर हिंदी की एक बोली है जिसे बृजभाषा कहा जाता है।
- ठुमरी कर्नाटक संगीत की एक शाखा है।
उपरोक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
Correct
उत्तर: b)
भारतीय हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत में ख्याल, ठुमरी, टप्पा, तराना आदि जैसे विभिन्न भाग हैं। ठुमरी भक्ति आंदोलन से प्रेरित प्रेम प्रसंगयुक्त-भक्ति साहित्य पर आधारित है।
यह आमतौर पर राधा-कृष्ण विषय से प्रेरित है और प्राथमिक महत्व का है। अर्ध-शास्त्रीय संगीत रूप ‘ठुमर’ को इसका नाम थुमकना से लिया गया है। थुमकना शब्द का अर्थ है, “नृत्य जैसी हरकतें”।
यह प्रकृति में रोमांटिक और भक्तिपूर्ण है, और आमतौर पर कृष्ण की प्रेमलीला से संबंधित है। यह भाषा हिन्दी की एक बोली है जिसे बृजभाषा कहा जाता है।
Incorrect
उत्तर: b)
भारतीय हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत में ख्याल, ठुमरी, टप्पा, तराना आदि जैसे विभिन्न भाग हैं। ठुमरी भक्ति आंदोलन से प्रेरित प्रेम प्रसंगयुक्त-भक्ति साहित्य पर आधारित है।
यह आमतौर पर राधा-कृष्ण विषय से प्रेरित है और प्राथमिक महत्व का है। अर्ध-शास्त्रीय संगीत रूप ‘ठुमर’ को इसका नाम थुमकना से लिया गया है। थुमकना शब्द का अर्थ है, “नृत्य जैसी हरकतें”।
यह प्रकृति में रोमांटिक और भक्तिपूर्ण है, और आमतौर पर कृष्ण की प्रेमलीला से संबंधित है। यह भाषा हिन्दी की एक बोली है जिसे बृजभाषा कहा जाता है।
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Question 2 of 5
2. Question
कुचिपुड़ी के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- इसके विकास का पता पारंपरिक नृत्य-नाटक से लगाया जा सकता है, जिसे यक्षगान के सामान्य नाम से जाना जाता है।
- इसमें नृत्त, शब्द और नाट्य शामिल हैं।
- कुचिपुड़ी में प्रदर्शन के दौरान भाषण का कोई उपयोग नहीं किया जाता है
उपरोक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
Correct
उत्तर: a)
कुचिपुड़ी मूल रूप से आंध्र प्रदेश से संबंधित हैं। इसके विकास का पता पारंपरिक नृत्य-नाटक से लगाया जा सकता है, जिसे यक्षगान के सामान्य नाम से जाना जाता है।
इसकी उत्पत्ति सातवीं शताब्दी ई. में हुयी थी। 17वीं शताब्दी में एक प्रतिभाशाली वैष्णव कवि, सिद्धेन्द्र योगी ने यक्षगान की कुचिपुड़ी शैली की का विअक्स किया था। यह भगवान गणेश के आह्वान के साथ शुरू होता है, उसके बाद नृत्त (गैर-कथा और अमूर्त नृत्य) शब्दम (कथा नृत्य) और नाट्य किया जाता है।
नृत्य गीत के साथ किया जाता है जिसमें आमतौर पर कर्नाटक संगीत का उपयोग किया जाता है। अन्य शास्त्रीय नृत्यों की तरह, कुचिपुड़ी में भी शुद्ध नृत्य, माइम और अभिनय शामिल हैं, लेकिन यह वाचन का उपयोग है जो कुचिपुड़ी की प्रस्तुति को नृत्य नाटक के रूप में पृथक करता है।
Incorrect
उत्तर: a)
कुचिपुड़ी मूल रूप से आंध्र प्रदेश से संबंधित हैं। इसके विकास का पता पारंपरिक नृत्य-नाटक से लगाया जा सकता है, जिसे यक्षगान के सामान्य नाम से जाना जाता है।
इसकी उत्पत्ति सातवीं शताब्दी ई. में हुयी थी। 17वीं शताब्दी में एक प्रतिभाशाली वैष्णव कवि, सिद्धेन्द्र योगी ने यक्षगान की कुचिपुड़ी शैली की का विअक्स किया था। यह भगवान गणेश के आह्वान के साथ शुरू होता है, उसके बाद नृत्त (गैर-कथा और अमूर्त नृत्य) शब्दम (कथा नृत्य) और नाट्य किया जाता है।
नृत्य गीत के साथ किया जाता है जिसमें आमतौर पर कर्नाटक संगीत का उपयोग किया जाता है। अन्य शास्त्रीय नृत्यों की तरह, कुचिपुड़ी में भी शुद्ध नृत्य, माइम और अभिनय शामिल हैं, लेकिन यह वाचन का उपयोग है जो कुचिपुड़ी की प्रस्तुति को नृत्य नाटक के रूप में पृथक करता है।
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Question 3 of 5
3. Question
पंडवानी के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- यह उत्तर प्रदेश का लोक संगीत है।
- यह महान महाकाव्य-महाभारत और भीम के नायक रूप पर आधारित है।
- मुख्य गायक पूरे निष्पादन के दौरान सतत रूप से बैठा रहता है और सशक्त गायन व सांकेतिक भंगिभाओं के साथ एक के बाद एक सभी चरित्रों की भाव-भंगिमाओं का अभिनय करता है ।
उपरोक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
Correct
उत्तर: b)
पंडवानी, छत्तीसगढ़:
पंडवानी में, महाभारत से एक या दो घटनाओं को चुन कर कथा के रूप में निष्पादित किया जाता है । मुख्य गायक पूरे निष्पादन के दौरान सतत रूप से बैठा रहता है और सशक्त गायन व सांकेतिक भंगिभाओं के साथ एक के बाद एक सभी चरित्रों की भाव-भंगिमाओं का अभिनय करता है ।
इस प्रकार का लोक संगीत महान महाकाव्य महाभारत और भीम के नायक रूप पर आधारित है। इसमें गायन और वादन (वाद्य यंत्र बजाना) शामिल है। आमतौर पर गाने तंबूरा की लय पर गाये जाते हैं।
Incorrect
उत्तर: b)
पंडवानी, छत्तीसगढ़:
पंडवानी में, महाभारत से एक या दो घटनाओं को चुन कर कथा के रूप में निष्पादित किया जाता है । मुख्य गायक पूरे निष्पादन के दौरान सतत रूप से बैठा रहता है और सशक्त गायन व सांकेतिक भंगिभाओं के साथ एक के बाद एक सभी चरित्रों की भाव-भंगिमाओं का अभिनय करता है ।
इस प्रकार का लोक संगीत महान महाकाव्य महाभारत और भीम के नायक रूप पर आधारित है। इसमें गायन और वादन (वाद्य यंत्र बजाना) शामिल है। आमतौर पर गाने तंबूरा की लय पर गाये जाते हैं।
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Question 4 of 5
4. Question
अजंता की गुफाओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- अजंता की गुफाएं सह्याद्री पहाड़ियों की वन घाटी में दक्कन के ज्वालामुखी लावा में निर्मित हैं।
- इनमें नक्काशी की गई हैं जो बुद्ध के जीवन को दर्शाती है।
- अधिकांश गुफाएं मंदिर हैं और कुछ मठ भी हैं।
उपरोक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
Correct
उत्तर: a)
अजंता शैली ने भारत और अन्य जगहों पर, विशेष रूप से जावा तक, काफी प्रभाव डाला है।
वे सह्याद्री पहाड़ियों के वन घाटियों में दक्कन के ज्वालामुखी लावा में निर्मित हैं और वनीय परिवेश से घिरी हुई हैं। बुद्ध के जीवन को चित्रित करने वाली नक्काशी वाली इन शानदार गुफाओं और उनकी नक्काशी एवं मूर्तियों को शास्त्रीय भारतीय कला की शुरुआत माना जाता है।
29 गुफाओं की खुदाई 200 ईसा पूर्व के आसपास की गई थी। इन गुफाओं में से पांच मंदिर और 24 मठ हैं, माना जाता है कि इनमें लगभग 200 भिक्षु और कारीगर निवास करते थे। अजंता की गुफाओं को धीरे-धीरे भुला दिया गया था, लेकिन 1819 में एक ब्रिटिश बाघ-शिकार दल द्वारा इनकी ‘पुनर्खोज‘ की गई थी।
Incorrect
उत्तर: a)
अजंता शैली ने भारत और अन्य जगहों पर, विशेष रूप से जावा तक, काफी प्रभाव डाला है।
वे सह्याद्री पहाड़ियों के वन घाटियों में दक्कन के ज्वालामुखी लावा में निर्मित हैं और वनीय परिवेश से घिरी हुई हैं। बुद्ध के जीवन को चित्रित करने वाली नक्काशी वाली इन शानदार गुफाओं और उनकी नक्काशी एवं मूर्तियों को शास्त्रीय भारतीय कला की शुरुआत माना जाता है।
29 गुफाओं की खुदाई 200 ईसा पूर्व के आसपास की गई थी। इन गुफाओं में से पांच मंदिर और 24 मठ हैं, माना जाता है कि इनमें लगभग 200 भिक्षु और कारीगर निवास करते थे। अजंता की गुफाओं को धीरे-धीरे भुला दिया गया था, लेकिन 1819 में एक ब्रिटिश बाघ-शिकार दल द्वारा इनकी ‘पुनर्खोज‘ की गई थी।
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Question 5 of 5
5. Question
हिंदुस्तानी संगीत में निम्नलिखित में से कौन सी शैलियाँ मुख्य हैं?
- धमार
- खयाल
- चतुरंग
- टप्पा
सही उत्तर कूट का चयन कीजिए:
Correct
उत्तर: d)
हिंदुस्तानी संगीत: भारत के उत्तरी भागों में प्रचलित है। संगीत की हिंदुस्तानी शाखा संगीत संरचना और उसमें आशुरचना की संभावनाओं पर अधिक ध्यान केंद्रित करती है। हिंदुस्तानी शाखा में शुद्ध स्वर सप्तक या प्राकृतिक स्वरों के सप्टक को अपनाया गया है।
हिंदुस्तानी संगीत में ‘ध्रुपद‘, ‘धमार‘, ‘होरी‘, ‘ख्याल‘, ‘टप्पा‘, ‘चतुरंग‘, ‘रागसागर‘, ‘तराना‘, ‘सरगम‘ और ‘ठुमरी‘ गायन की दस मुख्य शैलियाँ हैं।
Incorrect
उत्तर: d)
हिंदुस्तानी संगीत: भारत के उत्तरी भागों में प्रचलित है। संगीत की हिंदुस्तानी शाखा संगीत संरचना और उसमें आशुरचना की संभावनाओं पर अधिक ध्यान केंद्रित करती है। हिंदुस्तानी शाखा में शुद्ध स्वर सप्तक या प्राकृतिक स्वरों के सप्टक को अपनाया गया है।
हिंदुस्तानी संगीत में ‘ध्रुपद‘, ‘धमार‘, ‘होरी‘, ‘ख्याल‘, ‘टप्पा‘, ‘चतुरंग‘, ‘रागसागर‘, ‘तराना‘, ‘सरगम‘ और ‘ठुमरी‘ गायन की दस मुख्य शैलियाँ हैं।
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