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[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 17 May 2022

विषयसूची

सामान्य अध्ययन-I

1. बुद्ध पूर्णिमा

सामान्य अध्ययन-II

  1. सिक्किम का भारत में विलय
  2. उपासना स्थल अधिनियम
  3. श्रीलंका का 21वां संविधान संशोधन
  4. दिल्ली में SCO-RATS बैठक की मेजबानी

सामान्य अध्ययन-III

  1. भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट
  2. गगनयान मिशन
  3. वनाग्नि
  4. एंडोसल्फान पीड़ितों का मामला

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

  1. कन्हेरी गुफाएं
  2. पहला अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन समीक्षा फोरम
  3. जमैका की यात्रा करने वाले पहले भारतीय राष्ट्रपति
  4. रामगढ़ विषधारी अभयारण्य
  5. लूना क्रिप्टोकरेंसी
  6. गतिशक्ति संचार पोर्टल
  7. राष्ट्रीय साइबर फोरेंसिक प्रयोगशाला

 


सामान्य अध्ययनI


 

विषय: भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू शामिल होंगे।

बुद्ध पूर्णिमा


संदर्भ:

देश भर में सिद्धार्थ गौतम / गौतम बुद्ध की जयंती के उपलक्ष्य में 16 मई को ‘बुद्ध पूर्णिमा’ (Buddha Purnima) मनाई गई थी।

  • ऐसा भी माना जाता है, कि इसी दिन गौतम बुद्ध को बोधगया में महाबोधि वृक्ष के नीचे मोक्ष या निर्वाण की प्राप्ति हुई थी।
  • ‘बुद्ध पूर्णिमा’ को वेसक (Vesak) के नाम से भी जाना जाता है।
  • समाज में बौद्ध धर्म के योगदान को स्वीकार करते हुए वर्ष 1999 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा ‘बुद्ध पूर्णिमा’ को एक अंतर्राष्ट्रीय दिवस घोषित किया गया था।

‘बुद्ध पूर्णिमा’ के अवसर नरेंद्र मोदी ‘लुंबिनी’ जाने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने। उन्होंने वहां पर एक मठ की नींव का शिलान्यास भी किया।

Current Affairsगौतम बुद्ध के बारे में:

  • बुद्ध के जन्म और मृत्यु की तारीख अज्ञात है। अधिकांश इतिहासकार उनका जन्म 563 और 483 ईसा पूर्व के बीच मानते हैं।
  • वैदिक साहित्य के अनुसार, गौतम बुद्ध को भगवान विष्णु का नौवां अवतार माना जाता है।
  • इनका जन्म लुंबिनी में ‘सिद्धार्थ गौतम’ के रूप में हुआ था और वे शाक्य वंश के थे।

गौतम बुद्ध से संबंधित महत्वपूर्ण स्थान:

  • गौतम बुद्ध ने बोधगया, बिहार में एक पीपल के पेड़ के नीचे बोधि (ज्ञान) प्राप्त किया।
  • बुद्ध ने अपना पहला उपदेश, उत्तर प्रदेश में वाराणसी के समीप स्थित ‘सारनाथ’ नामक गांव में दिया था। इस घटना को ‘धर्म चक्र प्रवर्तन’ के रूप में जाना जाता है।
  • उत्तर प्रदेश के ‘कुशीनगर’ में 80 वर्ष की आयु में 483 ईसा पूर्व में उनका निधन हो गया। इस घटना को ‘महापरिनिर्वाण’ के नाम से जाना जाता है।

 

बौद्ध धर्म के संप्रदाय:

महायान (मूर्ति पूजा), हीनयान, थेरवाद, वज्रयान (तांत्रिक बौद्ध धर्म), ज़ेन।

Current Affairs

 

बौद्ध परिषदों, त्रिपिटकों, भारतीय संस्कृति में बौद्ध धर्म के योगदान के बारे में अधिक जानकारी के लिए पढ़िए

 

इंस्टा जिज्ञासु:

  1. क्या आप जानते हैं कि बुद्ध पूर्णिमा को, तथागत गौतम बुद्ध के जन्म, ज्ञान और महापरिनिर्वाण के रूप में ‘त्रिक-धन्य दिवस’ (Triple-Blessed Day) भी माना जाता है?
  2. पूरे एशिया में बुद्ध की अधिकांश छवियां तीन मुद्राओं- खड़ी अवस्था, बैठे हुए और लेटी हुई अवस्था- में पायी जाती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बुद्ध की एक ‘टहलते हुए बुद्ध’ की मुद्रा भी है, जिसे ‘सुखोथाई वॉकिंग बुद्धा’ (Sukhothai Walking Buddha) के नाम से जाना जाता है।
  3. क्या आप ‘बुद्ध’ की विभिन्न मुद्राओं के बारे में जानते हैं (इस पर प्रीलिम्स में कुछ प्रश्न पूछे गए हैं)। इस बारे में अधिक जानकारी के लिए पढ़िए।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. बौद्ध धर्म- उत्पत्ति और प्रसार
  2. बौद्ध धर्म के तहत विभिन्न संप्रदाय
  3. विभिन्न मुद्राएं
  4. हीनयान और महायान संप्रदायों में अंतर
  5. बोधिसत्व कौन हैं?
  6. बुद्ध के जीवन से जुड़े विभिन्न स्थान
  7. विभिन्न बौद्ध परिषदें

मेंस लिंक:

वर्तमान में ‘बुद्ध’ और उनके विचारों की प्रासंगिकता पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 


सामान्य अध्ययनII


 

विषय: भारतीय संविधान- ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और बुनियादी संरचना।

सिक्किम का भारत में विलय


(How did Sikkim become a part of India?)

संदर्भ:

16 मई, 2022 को सिक्किम राज्य का स्थापना दिवस (Sikkim Statehood Day) मनाया गया। सिक्किम, 16 मई, 1975 को भारत संघ का 22वां राज्य बना था।

इस हिमालयी राज्य के भारतीय संघ में शामिल होने संबंधी घटनाक्रम:

  1. सिक्किम पर 1975 तक ‘नामग्याल राजवंश’ का शासन रहा। इस राजवंश के पहले ‘चोग्याल’ (राजा) फुंत्सोग नामग्याल (Phuntsog Namgyal) थे।
  2. वर्ष 1950 में, भारत की स्वतंत्रता के तीन साल बाद, सिक्किम और भारत गणराज्य के बीच एक संधि पर हस्ताक्षर किए गए थे। समझौते के तहत, सिक्किम ने भारत संघ के भीतर एक ‘संरक्षित’ राज्य (Protectorate State) के रूप में अपनी स्थिति को बनाए रखा।
  3. सितंबर 1974 में चोग्यालों ने सिक्किम में जनमत संग्रह कराए जाने की मांग की। इस जनमत संग्रह में, 97.5 प्रतिशत प्रतिभागियों ने भारत में शामिल होने के पक्ष में मतदान किया, जबकि 45 प्रतिशत ने प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया।
  4. 15 मई, 1975 को, भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति, फखरुद्दीन अली अहमद ने एक संवैधानिक संशोधन पर हस्ताक्षर किए, और इसके एक दिन बाद, सिक्किम भारत का 22 वां राज्य बन गया; और इसके साथ ही चोग्याल का पद भी समाप्त कर दिया गया।

संबंधित तथ्य:

  • आंग्ल-नेपाली युद्ध/गोरखा युद्ध (1814 से 1816) के दौरान, सिक्किम ने ईस्ट इंडिया कंपनी का साथ दिया था। कंपनी ने इस युद्ध में नेपाली सेना को हराकर सिक्किम को जीत लिया, और नेपाल ने 1780 में सिक्किम के जिन क्षेत्रों पर जबरन कब्ज़ा कर लिया था, उन क्षेत्रों को वापस सिक्किम के लिए सौंप दिया।
  • मार्च, 1861 में हस्ताक्षरित ‘तुम्लोंग की संधि’ (Treaty of Tumlong) के तहत सिक्किम, एक ब्रिटिश संरक्षित राज्य बन गया था।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप 1890 के सिक्किम-तिब्बत समझौते के बारे में जानते हैं?

प्रीलिम्स लिंक:

  1. सिक्किम के बारे में
  2. अवस्थिति
  3. नामग्याल राजवंश
  4. एंग्लो-नेपाली युद्ध
  5. तुम्लोंग की संधि

मेंस लिंक:

सिक्किम भारत का भाग किस प्रकार और क्यों बना? चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

उपासना स्थल अधिनियम


(Places of Worship Act)

संदर्भ:

वाराणसी में स्थित ‘ज्ञानवापी मस्जिद’ (Gyanvapi mosque) का वीडियो सर्वेक्षण कराए जाने के खिलाफ दायर की गयी एक अपील पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुनवाई की जाएगी।

एक मुस्लिम संगठन के अनुसार, यह वीडियो सर्वेक्षण, ‘उपासना स्थल अधिनियम’, 1991 (Places of Worship Act. 1991) का उल्लंघन है।

संबंधित प्रकरण:

हाल ही में, वाराणसी में एक ‘म्युनिसिपल कोर्ट’ (Municipal Court) ने ‘ज्ञानवापी मस्जिद’ परिसर का वीडियोग्राफी सर्वेक्षण करने का आदेश दिया था। इस सर्वेक्षण के दौरान एक “शिवलिंग” के समान दिखने वाली संरचना की खोज हुई।

विदित हो, कि ‘ज्ञानवापी मस्जिद’ उत्तर प्रदेश के वाराणसी में प्रतिष्ठित काशी विश्वनाथ मंदिर के समीप स्थित है।

उपासना स्थल अधिनियम, 1991 के बारे में:

  • अधिनियम में यह घोषणा की गयी है, कि किसी भी उपासना स्थल का धार्मिक स्वरूप वैसा ही रहेगा जैसा 15 अगस्त 1947 को था।
  • इसमें कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति किसी भी धार्मिक संप्रदाय के उपासना स्थल को अलग संप्रदाय या वर्ग में नहीं बदलेगा।
  • इस क़ानून के अनुसार, 15 अगस्त 1947 को विद्यमान किसी उपासना स्थल के धार्मिक स्वरूप के संपरिवर्तन के संदर्भ में किसी न्यायालय, अधिकरण या अन्य प्राधिकारी के समक्ष लंबित कोई वाद, अपील या अन्य कार्यवाही इस अधिनियम के प्रारंभ पर उपशमित हो जाएगी और इसं पर आगे कानूनी कार्यवाही नहीं की जा सकती है।

अपवाद:

अधिनियम के प्रावधान निम्नलिखित संदर्भों में लागू नहीं होंगे:

  1. उक्त उपधाराओं में निर्दिष्ट कोई उपासना स्थल, जो प्राचीन संस्मारक तथा पुरातत्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 के अन्तर्गत आने वाला कोई प्राचीन और ऐतिहासिक संस्मारक या कोई पुरातत्वीय स्थल या अवशेष है।
  2. इस अधिनियम के प्रारंभ के पूर्व किसी न्यायालय, अधिकरण या अन्य प्राधिकारी द्वारा, उपरोक्त मामलों से संबंधित कोई वाद, अपील या अन्य कार्यवाही, जिसका अंतिम रूप से विनिश्चय, परिनिर्धारण या निपटारा कर दिया गया है।
  3. इस अधिनियम की कोई बात उत्तर प्रदेश राज्य के अयोध्या में स्थित राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद के रूप में सामन्यतः ज्ञात स्थान या उपासना स्थल से संबंधित किसी वाद, अपील या अन्य कार्यवाही पर लागू नहीं होगी। इस अधिनियम के उपबंध, किसी अन्य लागू क़ानून के ऊपर प्रभावी होंगे ।

इस कानून से संबधित आलोचनाएँ:

इस कानून को इस आधार पर चुनौती दी गई है, कि यह कानून ‘न्यायिक संवीक्षा’ पर रोक लगाता है, जोकि संविधान का मूलभूत लक्षण है। इसके अलावा इस क़ानून में “एक स्वैच्छिक तर्कहीन पूर्वव्यापी निर्दिष्ट तिथि (Cutoff Date)” निर्धारित की गयी है, और यह क़ानून हिंदुओं, जैनियों, बौद्धों और सिखों के धर्म के अधिकारों का संक्षेपण करता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. उपासना स्थल अधिनियम की मुख्य विशेषताएं
  2. उद्देश्य
  3. कानून के तहत अपवाद

मेंस लिंक:

‘उपासना स्थल अधिनियम’ से संबंधित मुद्दों पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 

विषय: भारत एवं इसके पड़ोसी- संबंध।

श्रीलंका का 21वां संविधान संशोधन


(Sri Lanka’s 21st Constitutional Amendment)

संदर्भ:

श्रीलंका सरकार द्वारा 21वें संविधान संशोधन विधेयक (21st Constitutional Amendment Bill) को प्रस्तुत करने पर विचार किया जा रहा है।

21वें संविधान संशोधन के द्वारा 20वें संशोधन को निरस्त कर दिया जाएगा।

संविधान के 21वें संशोधन का अवलोकन:

  1. इस संशोधन के माध्यम से, राष्ट्रपति की शक्तियों को कम करते हुए इसे एक ‘औपचारिक स्थिति’ (Ceremonial Position) प्रदान की जाएगी, हालाँकि तीनों सशस्त्र बलों पर राष्ट्रपति की शक्तियों को बरकरार रखा जाएगा।
  2. शासन से संबंधित लगभग सभी अन्य प्रमुख शक्तियों, और कैबिनेट मंत्रियों को ‘प्रधान मंत्री’ के लिए सौंप दिया जाएगा।
  3. इस संशोधन में, प्रमुख पदों पर नियुक्ति करने की शक्ति राष्ट्रपति से वापस लेकर ‘संवैधानिक परिषद’ को सौंपने का प्रस्ताव भी किया गया है।
  4. राष्ट्रपति को, मंत्रालयों के अधिकार-क्षेत्र और कार्यों को निर्धारित करने, और मंत्रियों, उप मंत्रियों और राज्य मंत्रियों की नियुक्ति के लिए ‘प्रधान मंत्री’ की सलाह पर कार्य करना होगा।

श्रीलंका के संविधान में किए गए पिछले संशोधन:

19वां संशोधन (2015):

  • इस संशोधन का उद्देश्य कार्यकारी राष्ट्रपति को वर्ष 1978 से प्राप्त कई शक्तियों को कम करना था। इसके द्वारा राष्ट्रपति को प्राप्त ‘अपने विवेकानुसार ‘प्रधान मंत्री’ को बर्खास्त करने’ की शक्ति को समाप्त कर दिया गया था।
  • 19वे संविधान संशोधन के द्वारा, कैबिनेट मंत्रियों को बर्खास्त करने की राष्ट्रपति की शक्तियों को प्रतिबंधित कर दिया गया, और उसे प्रधान मंत्री की सलाह पर कार्य करने के लिए बाध्य किया गया था।

संशोधन के अनुसार, कैबिनेट मंत्रियों को निम्नलिखित स्थितियों में बर्खास्त किया जा सकता है:

  1. मृत्यु, इस्तीफे या किसी अन्य कारण से ‘प्रधानमंत्री’ का पद रिक्त होने पर; अथवा
  2. संसद द्वारा सरकार की नीति या बजट-अभिकथन को खारिज कर दिए जाने पर, अथवा,
  3. संसद द्वारा सरकार के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पारित किए जाने पर।

20वां संशोधन (2020):

  • इस संशोधन के माध्यम से राष्ट्रपति की कार्यकारी शक्तियों में वृद्धि की गयी। और,
  • इसके द्वारा राष्ट्रपति को स्वतंत्र संस्थानों में महत्वपूर्ण नियुक्तियां करने का अधिकार दिया गया।

श्रीलंका में हालिया घटनाक्रम:

  • प्रस्तावित संशोधन उस समय आया है जब श्रीलंका, 1948 में ब्रिटिश शासन से मुक्त होने के बाद से अपने सबसे खराब आर्थिक और राजनीतिक संकट का सामना कर रहा है।
  • विदेशी भंडार की गंभीर कमी के कारण ईंधन, रसोई गैस और अन्य आवश्यक वस्तुओं के लिए लंबी कतारें लगी हैं, जबकि बिजली कटौती और खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों से लोग परेशान हो रहे हैं।
  • राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शनकारी पूरे द्वीप राष्ट्र में जमा हो रहे हैं, और उनके भाई महिंदा राजपक्षे ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है।
  • ‘रानिल विक्रमसिंघे’ को नए प्रधान मंत्री के रूप में नियुक्त किया गया है।

इन संशोधनों की आवश्यकता:

  • संविधान संशोधन की संभावना को देश में शांति बहाल करने के साधन के रूप में भी देखा जा रहा है, जिसके तहत, अधिकारीगण मौजूदा मुद्दों को हल करने के लिए ‘पार्टी लाइन’ से बाहर जाकर कार्य कर सकते हैं।
  • इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य देश के शासन संबंधी मुद्दों का समाधान करना है।

 

श्रीलंका के नवीनतम संकट के बारे में जानने के लिए पढ़िए।

भारत-श्रीलंका संबंधों के बारे में जानकारी के लिए पढ़िए।

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप ‘भारत-श्रीलंका समझौते’ के बारे में जानते हैं?

प्रीलिम्स लिंक:

  1. श्रीलंका के संविधान के बारे में
  2. नवीनतम संवैधानिक संशोधन
  3. श्रीलंकाई राजनीतिक व्यवस्था

मेंस लिंक:

भारतीय राष्ट्रपति एवं श्रीलंका के राष्ट्रपति की शक्तियों की तुलना कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

 दिल्ली में SCO-RATS की बठक का आयोजन


(Delhi hosts SCO-RATS meet)

संदर्भ:

हाल ही में, नई दिल्ली द्वारा आयोजित एक सम्मलेन में भारत, पाकिस्तान और ‘शंघाई सहयोग संगठन’ (Shanghai Cooperation Organisation – SCO) के सदस्य देशों द्वारा विभिन्न क्षेत्रीय सुरक्षा समस्याओं का मुकाबला करने में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की गई।

यह सम्मेलन ‘शंघाई सहयोग संगठन’ (SCO)  के ‘क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी विन्यास’ (Regional Anti-Terrorist StructureRATS) के हिस्से के रूप में आयोजित किया गया है।

 

पृष्ठभूमि:

भारत ने पिछले साल 28 अक्टूबर को एक साल की अवधि के लिए ‘शंघाई सहयोग संगठन’ के ‘क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी विन्यास’ (RATS SCO) की परिषद की अध्यक्षता ग्रहण की थी।

RATS के बारे में:

  • ‘क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी विन्यास’ (Regional Anti-Terrorist Structure – RATS) का मुख्यालय ताशकंद, उज्बेकिस्तान में है।
  • यह शंघाई सहयोग संगठन (SCO) का एक स्थायी अंग है, जो आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद- तीन बुराइयों के खिलाफ सदस्य देशों के बीच परस्पर सहयोग को बढ़ावा देने का कार्य करता है।
  • ‘क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी विन्यास’, विशेष रूप से सुरक्षा और रक्षा से संबंधित मुद्दों से संबंधित है।

SCO के बारे में:

‘शंघाई सहयोग संगठन’ (SCO) एक स्थायी अंतर-सरकारी अंतरराष्ट्रीय संगठन है।

  • SCO के गठन की घोषणा 15 जून 2001 को शंघाई (चीन) में की गई थी।
  • जून 2002 में, सेंट पीटर्सबर्ग SCO राष्ट्राध्यक्षों की बैठक के दौरान ‘शंघाई सहयोग संगठन’ के चार्टर पर हस्ताक्षर किए गए थे, और यह चार्टर 19 सितंबर 2003 को प्रभावी हुआ।
  • SCO का पूर्ववर्ती संगठन ‘शंघाई-5’ था, जिसमे ‘कज़ाकिस्तान, चीन, किर्गिस्तान, रूस और ताजिकिस्तान’ पांच सदस्य थे।
  • SCO की आधिकारिक भाषाएँ, रूसी और चीनी हैं।

शंघाई सहयोग संगठन’ के संस्थापक राष्ट्र-

  1. कजाकिस्तान गणराज्य,
  2. पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना,
  3. किर्गिस्तान गणराज्य,
  4. रूसी संघ,
  5. ताजिकिस्तान गणराज्य,
  6. उज्बेकिस्तान गणराज्य।

SCO की पृष्ठभूमि:

‘शंघाई सहयोग संगठन’ (SCO) की स्थापना से पहले, वर्ष 2001 में कजाकिस्तान, चीन, किर्गिस्तान, रूस और ताजिकिस्तान, ‘शंघाई फाइव’ समूह के सदस्य थे।

  • ‘शंघाई फाइव’ (1996) की उत्पत्ति, चार पूर्व सोवियत गणराज्यों और चीन के मध्य, सीमाओं पर स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए आयोजित सीमा सीमांकन और विसैन्यीकरण वार्ता श्रृंखला से हुई थी।
  • वर्ष 2001 में ‘उज्बेकिस्तान’ के ‘शंघाई फाइव’ संगठन में शामिल होने के बाद इसका नाम बदलकर ‘शंघाई सहयोग संगठन’ (SCO) कर दिया गया।
  • वर्ष 2017 में, भारत और पाकिस्तान को ‘शंघाई सहयोग संगठन’ की सदस्यता प्रदान की गयी।

SCO, इसके सदस्य देशों, उद्देश्यों और भारत के लिए महत्व के बारे में अधिक जानकारी के लिए पढ़िए।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. शंघाई फाइव क्या है?
  2. SCO चार्टर कब हस्ताक्षरित किया गया और कब लागू हुआ?
  3. SCO संस्थापक सदस्य।
  4. भारत समूह में कब शामिल हुआ?
  5. SCO के पर्यवेक्षक और वार्ता सहयोगी।
  6. SCO के तहत स्थायी निकाय।
  7. SCO की आधिकारिक भाषाएं।

मेंस लिंक:

शंघाई सहयोग संगठन के उद्देश्यों और महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 


सामान्य अध्ययनIII


 

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।

भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट का कारण


संदर्भ:

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार (India’s forex reserves), 3 सितंबर, 2021 के ‘विदेशी मुद्रा भंडार’ 642 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर से, लगभग 45 अरब डॉलर कम होकर 600 अरब डॉलर से नीचे पहुँच गया है।

भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट के कारण:

  • यह गिरावट भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा ‘रिजर्व’ के रूप में रखी गई परिसंपत्तियों के ‘डॉलर मूल्य’ में कमी होने के कारण हुई है।
  • अमेरिकी डॉलर की कीमत में वृद्धि (Appreciation of the US dollar): रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण तेल और कमोडिटी की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण अमेरिकी डॉलर की मांग में वृद्धि हुई है, जिसकी वजह से इसकी कीमत में भी इजाफा हुआ है।
  • विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों’ द्वारा पूंजी की निकासी: अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने मौद्रिक नीति को कड़ा किए जाने और ब्याज दरों में बढ़ोतरी किए जाने की वजह से ‘विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों’ (FPIs) ने सितंबर 2021 से 21.43 बिलियन डॉलर की निकासी की जा चुकी है।
  • सोने की कीमतों का प्रभाव: सोने की कीमतों में गिरावट ने भी ‘विदेशी मुद्रा भंडार’ में गिरावट में एक भूमिका निभाई है।

इसका रुपये पर प्रभाव:

‘भारतीय रुपया’, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अब तक के सबसे निचले स्तर पर आ गया है, और यह गुरुवार (12 मई) को 77 रुपये प्रति एक डॉलर की सीमा तक गिरकर 77.63 पर कारोबार कर रहा था।

  • यदि रुपये में गिरावट जारी रहती है, तो भारतीय रिजर्व बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार से ‘डॉलर’ बेचकर विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करने के लिए मजबूर हो जाएगा।
  • और, यदि भारतीय रिजर्व बैंक विदेशी मुद्रा भंडार की मात्रा को बनाए रखने को प्राथमिकता देता है, तो रुपये का अवमूल्यन हो सकता है।

 

विदेशी मुद्रा भंडार और इसके महत्व के बारे में जानकारी के लिए पढ़िए।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. विदेशी मुद्रा भंडार के घटक?
  2. इसका प्रबंधन कौन करता है?
  3. क्या आरबीआई द्वारा विदेशी मुद्रा भंडार पर लाभ अर्जित करता है?
  4. पिछले दशक के दौरान विदेशी मुद्रा भंडार की प्रवृत्ति

मेंस लिंक:

विदेशी मुद्रा भंडार भारत की अर्थव्यवस्था के लिए कितना लाभप्रद है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

गगनयान मिशन


संदर्भ:

हाल ही में, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा गगनयान कार्यक्रम के लिए ‘मानव-प्रमाणित ठोस रॉकेट बूस्टर’ / ह्यूमन-रेटेड सॉलिड रॉकेट बूस्टर (HS200) का स्थैतिक परीक्षण पूरा किया गया है।

 

HS200 के बारे में आवश्यक महत्वपूर्ण बिंदु:

  • यह बूस्टर इंजन जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल Mk-III (GSLV Mk-III) रॉकेट का हिस्सा है जो भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में ले जाएगा।
  • HS200, ठोस प्रणोदक का उपयोग करने वाला दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा परचालित बूस्टर है।

गगनयान मिशन (Gaganyaan Mission) के बारे में:

गगनयान कार्यक्रम की औपचारिक घोषणा, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त, 2018 को अपने स्वतंत्रता दिवस के संबोधन के दौरान की थी।

  • पहले इसरो का लक्ष्य, भारत की स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ से पहले, 15 अगस्त, 2022 तक अपने पहले मानव-सहित अंतरिक्ष मिशन, गगनयान को लॉन्च करना था।
  • अब इस मिशन के 2023 में लॉन्च होने की संभावना है।

गगनयान कार्यक्रम के तहत:

  • तीन उड़ानें अंतरिक्षीय कक्षा में भेजी जाएंगी।
  • जिनमे दो उड़ानें मानव रहित और एक मानव-सहित अंतरिक्ष उड़ान होगी।
  • ऑर्बिटल मॉड्यूल में, एक महिला सहित तीन भारतीय अंतरिक्ष यात्री होंगे। यह अंतरिक्ष यान 5-7 दिनों के लिए पृथ्वी से 300-400 किमी की ऊंचाई पर कम-पृथ्वी-कक्षा में पृथ्वी का चक्कर लगाएगा।

इस प्रक्षेपण के बाद, भारत मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन शुरू करने वाला, संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस और चीन के बाद दुनिया का चौथा देश बन जाएगा।

उद्देश्य:

गगनयान कार्यक्रम का उद्देश्य, भारतीय प्रक्षेपण यान पर मानव को पृथ्वी की निचली कक्षा में भेजने और उन्हें सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस लाने की क्षमता प्रदर्शित करना है।

तैयारियां और प्रक्षेपण:

  1. गगनयान कार्यक्रम के एक भाग के रूप में चार भारतीय अंतरिक्ष यात्री-उम्मीदवार पहले ही रूस में सामान्य अंतरिक्ष उड़ान प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं।
  2. इस मिशन के लिए, इसरो के हैवी-लिफ्ट लॉन्चर ‘जी.एस.एल.वी. मार्क III’ (GSLV Mk III) को चिह्नित किया गया है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. गगनयान के बारे में
  2. उद्देश्य
  3. जीएसएलवी के बारे में

मेंस लिंक:

गगनयान मिशन भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

वनाग्नि / जंगल की आग


(Forest Fires)

संदर्भ:

हाल ही में, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में लगी ‘वनाग्नि’ / ‘जंगल की आग’ (Forest Fires) ने कई हेक्टेयर क्षेत्रफल में फ़ैली हरियाली/ वनस्पति को झुलसा दिया है।

वर्तमान स्थिति:

अप्रैल के महीने में, हिमाचल ने ‘वनाग्नि’ की लगभग 750 घटनाएं दर्ज की गयी है, जबकि उत्तराखंड ने जंगलों में आग लगने की 1,500 से अधिक घटनाओं की जानकारी दी है।

उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की ‘वनाग्नि’ के प्रति संवेदनशीलता के कारण:

सर्दियों तथा मानसून के दौरान वर्षा की अवधि को छोड़कर, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के जंगल आमतौर पर ‘वनाग्नि’ की चपेट में रहते हैं।

  • गर्मी के मौसम में, इन पर्वतीय राज्यों की निचली और मध्य ऊँचाइयों पहाड़ियों में, जहाँ सामान्यतः चीड़ के जंगल पाए जाते हैं, अक्सर ‘वनाग्नि’ की घटनाएँ होती रहती हैं।
  • मानसून के बाद के मौसम में और सर्दियों के दौरान, शिमला, कुल्लू, चंबा, कांगड़ा और मंडी जिलों के कुछ हिस्सों सहित, उच्च क्षेत्रों के जंगलों में आग लगने की घटनाएं होती रहती है। इन क्षेत्रों में प्रायः घास के मैदानों का विस्तार पाया जाता है।

अब तक ‘वनाग्नि’ से ग्रस्त अन्य स्थान:

हिमाचल और उत्तराखंड के अलावा, असम, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, त्रिपुरा, मिजोरम और ओडिशा में हर साल लगातार जंगल में आग लगती है।

वन अग्नि के कारण:

आकाशीय बिजली गिरने अथवा बांस के वृक्षों की परस्पर रगड़ जैसे प्राकृतिक कारणों से जंगलों में कभी-कभार आग लग जाती है, लेकिन वन अधिकारियों का कहना है कि जंगल में लगने वाली आग के लिए अधिकाँश रूप से मानवीय कारकों के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।

  • चरवाहों और लघु वनोपज संग्राहकों द्वारा भोजन पकाने के लिए अस्थायी चूल्हा स्थापित किये जाते हैं, इन चूल्हों में सुलगती हुई आग पीछे छूट जाने की संभावना होती है, इससे जंगल की आग में भड़क सकती है।
  • इसके अलावा, जब लोग पराली अथवा सूखी घास जलाने के लिए अपने खेतों में आग लगाते है, तो इससे कभी-कभी बगल के जंगल में आग फैल जाती है।
  • सूखी हुई चीड़ की पत्तियों के बिजली के खंभों पर गिरने से भी चिंगारी भड़क उठती है।

वनाग्नि के अन्य कारण:

  1. मिट्टी में नमी की कमी।
  2. वर्षा की कमी।
  3. प्राकृतिक कारण जैसे बिजली चमकना, उच्च वायुमंडलीय तापमान और कम आर्द्रता।

जंगल में लगने वाली आग को रोकने और नियंत्रित करने हेतु उपाय:

इसके लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं:

  1. मौसम संबंधी आंकड़ों का उपयोग करते हुए आग-प्रवण दिनों का पूर्वानुमान,
  2. शुष्क जैव-भार एकत्रित होने वाली जगहों की सफाई,
  3. जंगल की सतह पर गिये हर शुष्क अपशिष्ट का शीघ्र निपटान,
  4. जंगल के भीतर, मुश्किल से आग पकड़ने वाले वृक्ष-प्रजातियों की पट्टियों में वृद्धि,
  5. जंगलों में अग्नि-रेखाओं का निर्माण, आदि आग को रोकने के कुछ उपाय हैं।

जंगलों को आग से बचाने के लिए क्या प्रयास किए जा रहे हैं?

  1. वर्ष 2004 के बाद से, ‘भारतीय वन सर्वेक्षण’ (FSI) द्वारा वास्तविक समय में वनाग्नि पर निगरानी करने हेतु ‘फॉरेस्ट फायर अलर्ट सिस्टम’ विकसित किया गया है।
  2. जनवरी 2019 में इसका उन्नत संस्करण लॉन्च किया गया था, जिसके तहत, यह सिस्टम अब, नासा और इसरो द्वारा उपग्रह के माध्यम से एकत्रित जानकारी का उपयोग करता है।
  3. वनाग्नि पर राष्ट्रीय कार्य योजना (National Action Plan on Forest Fires- NAPFF): इस कार्ययोजना की शुरुआत वर्ष 2018 में की गयी थी। वन विभागों के साथ काम करने हेतु उन्हें प्रोत्साहित करके वनाग्नि की घटनाओं में कमी लाना था।
  4. वनाग्नि रोकथाम एवं प्रबंधन योजना (Forest Fire Prevention and Management Scheme- FPM), विशेष रूप से वनाग्नि घटनाओं से निपटने में राज्यों की सहायता हेतु समर्पित एकमात्र केंद्र द्वारा वित्तपोषित कार्यक्रम है।

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं कि भारतीय वन सर्वेक्षण के अनुसार, भारत के लगभग 36 प्रतिशत जंगलों में बार-बार आग लगने का खतरा होता है?

प्रीलिम्स लिंक:

  1. हिमाचल प्रदेश में वनावरण
  2. जंगल में आग लगने के कारण
  3. जंगल की आग को रोकने और नियंत्रित करने के उपाय
  4. जंगल की आग से होने वाला नुकसान
  5. हिमाचल प्रदेश में पाए जाने वाली वृक्ष-प्रजातियाँ

मेंस लिंक:

राज्य में, वनों में आग लगना प्रतिवर्ष बारंबार होने वाली घटनाएँ हैं, चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 

विषय: आपदा और आपदा प्रबंधन।

एंडोसल्फान पीड़ितों का मामला


हाल ही में, सुप्रीम कोर्ट ने ‘एंडोसल्फान’ (Endosulfan) कीटनाशक के संपर्क में आने वाले पीड़ितों को राहत प्रदान करने में राज्य की निष्क्रियता के लिए केरल सरकार को फटकार लगाई है।

यह शीर्ष अदालत के 2017 के फैसले का उल्लंघन भी है, जिसमें राज्य को तीन महीने में पीड़ितों को ₹5 लाख का भुगतान करने का आदेश दिया था।

एंडोसल्फान के बारे में:

एंडोसल्फान एक व्यापक रूप से प्रतिबंधित कीटनाशक है, जिसका मानव आनुवंशिक और अंतःस्रावी तंत्र पर खतरनाक प्रभाव पड़ता है।

  • यह वातावरण में प्राकृतिक रूप से नहीं पाया जाता है।
  • एंडोसल्फान, पूर्व सूचित सहमति पर ‘रॉटरडैम कन्वेंशन’ के तहत सूचीबद्ध है।
  • ‘दीर्घस्थायी कार्बनिक प्रदूषकों पर स्टॉकहोम कन्वेंशन’ (Stockholm Convention on POPs) के तहत, एंडोसल्फान के उपयोग पर प्रतिबंध है।

भारत में सर्वोच्च न्यायालय ने 2011 में इसके हानिकारक स्वास्थ्य प्रभावों का हवाला देते हुए पूरे देश में एंडोसल्फान के निर्माण, बिक्री, उपयोग और निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है।

उपयोग:

इसका प्रयोग कपास, काजू, फल, चाय, धान, तंबाकू आदि फसलों पर सफेद मक्खी, एफिड्स, भृंग, कीड़े आदि जैसे कृषि में कीटों के नियंत्रण के लिए छिड़काव किया जाता है।

मनुष्यों पर प्रभाव:

  • यह कीटनाशक, एक ज्ञात कार्सिनोजेन (कैंसर जनक), न्यूरोटॉक्सिन और जीनोटॉक्सिन (डीएनए को नुकसान पहुंचाता है) है।
  • एंडोसल्फान के संपर्क में आने के परिणामस्वरूप शारीरिक विकृति, कैंसर, जन्म संबंधी विकार और मस्तिष्क एवं तंत्रिका तंत्र संबंधी बीमारियाँ हो सकती हैं।

पर्यावरणीय प्रभाव:

  • एंडोसल्फान, पर्यावरण में मौजूद खाद्य शृंखलाओं में समाहित हो जाता है, जिससे व्यापक स्तर पर समस्याएँ पैदा होती है।
  • यदि एंडोसल्फान को पानी में छोड़ा जाता है, तो यह तलछट में अवशोषित हो सकता है और जलीय जीवों को प्रभावित कर सकता है।

केरल संबंधी प्रकरण:

70 के दशक के मध्य से, केरल के गांवों में काजू की खेती के अंतर्गत 4,600-हेक्टेयर पर एंडोसल्फान का हवाई छिड़काव किया गया था। इसके बाद से, स्थानीय लोगों ने कथित तौर पर बीमारियों, पक्षाघात और विकृतियों का अनुभव किया जाने लगा।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. एंडोसल्फान
  2. कीटनाशक
  3. एंडोसल्फान मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला।

मेंस लिंक:

मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण पर एंडोसल्फान के प्रभावों के बारे में चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


 कन्हेरी गुफाएं

कन्हेरी गुफाएं (Kanheri caves), मुंबई के पश्चिमी बाहरी इलाके में ‘पूर्ववर्ती सालसेट द्वीप’ पर संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के जंगलों में स्थित हैं।

  • इन गुफाओं में दूसरी से नौवीं शताब्दी ईस्वी तक की अवधि के बीच की घटनाओं के बारे में जानकारी मिलती हैं।
  • वे बौद्ध वास्तुकला के ‘हीनयान संप्रदाय’ से संबंधित हैं।
  • हालांकि, जब महायान बौद्ध धर्म जोर पकड़ रहा था, तब भी इसमें कुछ निर्माण कार्य किए गए थे। उदाहरण: बुद्ध की 5वीं शताब्दी की छवि।
  • इन गुफाओं की संख्या लगभग 100 है।
  • विदेशी यात्रियों के यात्रा वृतांतों में ‘कन्हेरी’ का उल्लेख मिलता है। कन्हेरी का सबसे पहले उल्लेख करने का श्रेय 399-411 ईस्वी में भारत-यात्रा पर आए चीनी विद्वान् ‘फाहियान’ को दिया जाता है।

चर्चा का कारण:

बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर प्राचीन ‘कन्हेरी गुफाओं’ में विभिन्न सुविधाओं का उद्घाटन किया गया।

पहला अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन समीक्षा फोरम

  • भारत 17 से 20 मई तक न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में महासभा के तत्वावधान में आयोजित होने वाले पहले अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन समीक्षा फोरम (First International Migration Review Forum) में भाग लेगा।
  • यह फोरम सुरक्षित, व्यवस्थित और नियमित प्रवासन हेतु वैश्विक समझौतों (Global Compact for Safe, Orderly and Regular Migration – GCM) को लागू करने में स्थानीय, राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर हुई प्रगति की समीक्षा करने के लिए मुख्य अंतर-सरकारी वैश्विक मंच के रूप में कार्य करेगा।

जमैका की यात्रा करने वाले पहले भारतीय राष्ट्रपति

  • भारत के राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविद जमैका की ऐतिहासिक यात्रा पर गए हैं। जहाँ वह डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर के नाम पर एक सड़क और भारत-जमैका मित्रता को समर्पित एक उद्यान का उद्घाटन करेंगे।
  • वह जमैका की यात्रा करने वाले पहले भारतीय राष्ट्रपति भी बन गए हैं।
  • जमैका, कैरेबियन सागर में अवस्थित एक द्वीप देश है।

रामगढ़ विषधारी अभयारण्य

राजस्थान में स्थित ‘रामगढ़ विषधारी अभयारण्य’ (Ramgarh Vishdhari Sanctuary) को भारत के 52वें बाघ अभयारण्य के रूप में अधिसूचित किया गया है।

  • रणथंभौर, सरिस्का और मुकुंदरा के बाद, यह राजस्थान का चौथा ‘बाघ अभयारण्य’ है।
  • नव अधिसूचित बाघ अभयारण्य में, पूर्वोत्तर में स्थिति रणथंभौर टाइगर रिजर्व और दक्षिणी तरफ मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के बीच बाघ आवास शामिल है, और यह अभ्यारण्य, रणथंभौर टाइगर रिजर्व से बाघों के आवागमन की सुविधा प्रदान करता है।

लूना क्रिप्टोकरेंसी

लूना क्रिप्टोकरेंसी (Luna Cryptocurrency), एल्गोरिथम संबंधी स्टेबलकॉइन टेरा की ‘सिस्टर क्रिप्टोकरेंसी’ है।

  • स्टेबलकॉइन (Stablecoin) एक प्रकार की क्रिप्टोकरेंसी है, जो आम तौर पर सरकार द्वारा समर्थित मुद्रा, अमेरिकी डॉलर या सोने या चांदी जैसी वस्तुओं के मूल्य से विशिष्ट रूप से जुड़ी होती है।
  • टीथर (USDT) और यूएसडी कॉइन (USDC) दो प्रमुख स्टेबलकॉइन हैं।

चर्चा का कारण:

लूना क्रिप्टोकरेंसी के मूल्य में होने वाली अचानक गिरावट ने इसे लगभग बेकार बना दिया है। इसके बाद से क्रिप्टोकरेंसी बाजार सदमे में है। विशेषज्ञों ने इस क्रिप्टो बाजार आपदा की तुलना 2008 के वित्तीय संकट से की है।

गतिशक्ति संचार पोर्टल

हाल ही में, संचार मंत्रालय के अधीन दूरसंचार विभाग ने केंद्रीकृत मार्ग का अधिकार (Centralised Right of Way – RoW) अनुमोदन के लिए “गतिशक्ति संचार” (GatiShakti Sanchar) पोर्टल का शुभारंभ किया है।

  • इस पोर्टल को ‘पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान’ के अनुरूप लॉन्च किया गया है।
  • यह राष्ट्रीय डिजिटल संचार नीति-2 में परिकल्पित “सभी के लिए ब्रॉडबैंड” के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एक मजबूत व्यवस्था प्रदान करेगा।
  • पोर्टल दूरसंचार अवसंरचना कार्यों के लिए “कारोबार करने में आसानी” के उद्देश्य के लिए एक प्रवर्तक के रूप में कार्य करेगा।

पीएम गतिशक्ति के बारे में विस्तार से जानकारी के लिए पढ़िए।

राष्ट्रीय साइबर फोरेंसिक प्रयोगशाला

  • राष्ट्रीय साइबर फोरेंसिक प्रयोगशाला’ (National Cyber Forensic Laboratory – NCFL) का उद्घाटन हैदराबाद में ‘केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला’ (CFSL) के परिसर में किया गया है।
  • NCFL का उद्देश्य, देश में साइबर अपराध के मामलों के समाधान में तेजी लाना है।