विषयसूची
सामान्य अध्ययन-II
- स्थानीय निकाय चुनाव हर पांच साल में कराए जाएँ: सुप्रीम कोर्ट
- ‘वैवाहिक बलात्कार’ पर दिल्ली हाई कोर्ट का फैसला
- विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए), 2010
सामान्य अध्ययन-III
- राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस
- डब्ल्यू बोसॉन
- मंगल ग्रह की सतह पर भूकंप की जानकारी
- आंकड़ों में सूखा, 2022 रिपोर्ट
- UNCCD का 15वां ‘कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज’ (CoP15) सम्मेलन
- द्वीप तटीय क्षेत्र विनियमन (आईसीआरजेड), 2019
प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य
- अमृत सरोवर मिशन
- टमाटर फ्लू
- एसोसिएशन ऑफ एशियन इलेक्शन अथॉरिटीज
- खेल आयोजनों को ‘राष्ट्रीय महत्व की घटनाओं’ का दर्जा
- एआईएम प्राइम प्लेबुक
सामान्य अध्ययन–II
विषय: संघ एवं राज्यों के कार्य तथा उत्तरदायित्व, संघीय ढाँचे से संबंधित विषय एवं चुनौतियाँ, स्थानीय स्तर पर शक्तियों और वित्त का हस्तांतरण और उसकी चुनौतियाँ।
स्थानीय निकाय चुनाव हर पांच साल में कराए जाएँ: सुप्रीम कोर्ट
संदर्भ:
हाल ही में, सुप्रीम कोर्ट ने कहा है, कि संवैधानिक अधिदेश के अनुसार प्रत्येक राज्य में ‘पांच साल का कार्यकाल’ समाप्त होने से पहले चुनाव कराए जाने चाहिए।
संबंधित प्रकरण:
अदालत ने मध्य प्रदेश राज्य में 23,000 से अधिक स्थानीय निकायों की चुनाव प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया है। विदित हो कि, राज्य में स्थानीय निकायों के चुनाव 2019 में ही कराए जाने थे। मध्य प्रदेश सरकार, चुनावों में देरी के लिए अब तक ‘ओबीसी आरक्षण’ के मुद्दे का हवाला दे रही थी।
राज्य सरकार का तर्क है, ओबीसी समुदाय की जनसंख्या राज्य की कुल आबादी का लगभग 50% है और इनके लिए स्थानीय निकायों में आरक्षण नहीं देना इनके साथ अन्याय होगा।
आरक्षण प्रदान करने के लिए तिहरी परीक्षण शर्तें:
‘के कृष्ण मूर्ति (डॉ) और अन्य बनाम भारत संघ और अन्य’ (2010) मामले में संविधान पीठ के फैसले का जिक्र करते हुए, अदालत ने कहा है कि ओबीसी के लिए आरक्षण प्रदान करने से पहले ‘तिहरी परीक्षण शर्तों’ (Triple Test Conditions) को पूरा करना होगा।
ये तिहरी (ट्रिपल) शर्ते निम्नलिखित हैं:
- ‘पिछड़ेपन’ संबंधी अनुभवजन्य डेटा एकत्र करने के लिए एक आयोग का गठन किया जाए।
- आयोग की सिफारिशों के आलोक में, हर स्थानीय निकाय में अपेक्षित आरक्षण का अनुपात विनिर्दिष्ट किया जाए।
- यह आरक्षण अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति / अन्य पिछड़ा वर्ग के पक्ष में आरक्षित कुल सीटों के कुल 50% से अधिक नहीं होना चाहिए।
मार्च 2021 में ‘विकास किशनराव गवाली बनाम महाराष्ट्र राज्य और अन्य’ मामले में, अदालत ने कहा कि स्थानीय निकायों में ओबीसी को आरक्षण प्रदान करने के लिए ‘ट्रिपल टेस्ट’ एक आवश्यक पूर्व शर्त है।
इस संबंध में संवैधानिक प्रावधान:
73वां और 74वां संविधान संशोधन अधिनियम:
इन अधिनियमों के तहत, पंचायतों और शहरी स्थानीय निकायों को, क्रमशः, हर स्तर पर पांच साल का कार्यकाल प्रदान किया गया है।
- निर्धारित पांच वर्ष का कार्यकाल समाप्त होने से पहले नए चुनाव कराए कराए जाने होंगे।
- इन निकायों को कार्यकाल पूरा होने से पहले भी भंग किया जा सकता है।
- भंग होने की स्थिति में, उसके विघटन की तारीख से छह महीने की अवधि की समाप्ति से पहले चुनाव कराना आवश्यक होगा।
- तथापि, यदि किसी स्थानीय निकाय को निर्धारित कार्यकाल के समाप्त होने में छह महीने से कम अवधि शेष रहने से पहले भंग कर दिया जाता है, तो इस अनुच्छेद के तहत, ऐसी अवधि के लिए पंचायत का गठन करने हेतु कोई चुनाव कराने की आवश्यकता नहीं होगी।
- किसी पंचायत के कार्यकाल की अवधि समाप्त होने से पहले, उसके भंग होने के बाद गठित पंचायत केवल निर्धारित कार्यकाल की शेष अवधि के लिए जारी रहेगी।
इंस्टा जिज्ञासु:
- क्या आप जानते हैं कि 73वें संविधान संशोधन अधिनियम के तहत कुछ अनिवार्य और स्वैच्छिक प्रावधान किए गए हैं? इस बारे में अधिक जानकारी के लिए पढ़िए।
- क्या आपने ‘नगरपालिका कार्य निष्पादन सूचकांक’ (Municipal Performance Index – MPI) के बारे में सुना है? इस बारे में अधिक जानकारी के लिए पढ़िए।
प्रीलिम्स लिंक:
- राज्य निर्वाचन आयोगों के बारे में
- स्थानीय चुनाव
- स्थानीय चुनावों से संबंधित संवैधानिक प्रावधान
- सुप्रीम कोर्ट का फैसला
मेंस लिंक:
आरक्षण प्रदान करने के लिए ‘ट्रिपल टेस्ट’ शर्तें क्या हैं? चर्चा कीजिए।
स्रोत: द हिंदू।
विषय: विभिन्न घटकों के बीच शक्तियों का पृथक्करण, विवाद निवारण तंत्र तथा संस्थान।
‘वैवाहिक बलात्कार’ पर दिल्ली हाई कोर्ट का फैसला
संदर्भ:
11 मई को दिल्ली उच्च न्यायालय ने ‘भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) – धारा 375’ में शामिल “वैवाहिक बलात्कार अपवाद” (Marital Rape Exception) को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर एक विभाजित फैसला सुनाया है।
भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) में ‘वैवाहिक बलात्कार’ को दी गयी छूट:
आईपीसी की धारा 375 में ‘बलात्कार’ की परिभाषा की गयी है और ‘सहमति के सात भावों’ (seven notions of consent) को सूचीबद्ध किया गया है, जिनका उल्लंघन ‘पुरुष द्वारा बलात्कार का अपराध’ माना जाएगा।
हालांकि, इस क़ानून में एक छूट शामिल है, जिसके अनुसार- “अपनी पत्नी के साथ एक पुरुष द्वारा यौन संबंध या यौन कृत्य, यदि पत्नी की उम्र अठारह वर्ष से कम नहीं है, बलात्कार नहीं माना जाएगा।”
संबंधित विवाद:
“वैवाहिक बलात्कार” (Marital Rape) से छूट, मुख्य रूप से एक पति को ‘वैवाहिक अधिकारों’ का प्रयोग करने की अनुमति देती है जिसके तहत पति, अपनी पत्नी के साथ सहमति या गैर-सहमति से ‘यौन संबंध’ बनाने के अपने अधिकार का प्रयोग कर सकता है।
यह ‘अपवाद’ किसी महिला की वैवाहिक स्थिति के आधार पर, उसकी ‘सहमति’ को अनदेखा या अवमूल्यन करता है।
अदालत द्वारा हाल ही में सुनाया गया फैसला:
उच्च न्यायालय के दो न्यायाधीशों की पीठ द्वारा सुनाया गया विभाजित फैसला (Split Verdict):
- न्यायमूर्ति राजीव शकधर: धारा 375 के तहत शामिल किए गए ‘अपवाद’ असंवैधानिक है।
- न्यायमूर्ति सी हरि शंकर: क़ानून के अंतर्गत शामिल यह प्रावधान ‘वैध’ है।
‘विभाजित फैसला’ सुनाए जाने की स्थिति में क्या होता है?
विभाजित फैसले (Split Verdict) की स्थिति में, मामले की सुनवाई एक बड़ी बेंच / पीठ द्वारा की जाती है। यही कारण है, कि न्यायाधीश आमतौर पर महत्वपूर्ण मामलों पर निर्णय करने के लिए विषम संख्या (तीन, पांच, सात, आदि) की पीठ में बैठते हैं।
वैवाहिक बलात्कार (Marital Rape):
- आईपीसी की धारा 375 के अनुसार, “यदि पत्नी की आयु 15 वर्ष से कम नहीं है तो, अपनी पत्नी के साथ एक पुरुष द्वारा संभोग करना, बलात्कार नहीं है”।
- किसी अन्य क़ानून या विधान में ‘वैवाहिक बलात्कार’ को मान्यता नहीं दी गयी है।
- पीड़ितों के पास ‘घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम’, 2005 (Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005) के तहत प्रदान किए गए नागरिक उपचार का ही सहारा होता है।
क्या वैवाहिक बलात्कार को अपराध की श्रेणी में रखा जा सकता है? इसके लाभ एवं हानियाँ। इस विषय के बारे में अधिक जानकारी के लिए पढ़िए।
इंस्टा जिज्ञासु:
क्या आप जानते हैं कि वर्ष 2019 में गृह मंत्रालय द्वारा ‘देश में आपराधिक कानूनों की समीक्षा’ के लिए एक समिति का गठन किया गया था?
प्रीलिम्स लिंक:
- आईपीसी की धारा 375
- अपवाद
- सुप्रीम कोर्ट का फैसला
- इस संबंध में कानून
मेंस लिंक:
वैवाहिक बलात्कार क्या है? इसका अपराधीकरण क्यों किया जाना चाहिए? चर्चा कीजिए।
स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।
विषय: विकास प्रक्रिया तथा विकास उद्योग- गैर-सरकारी संगठनों, स्वयं सहायता समूहों, विभिन्न समूहों और संघों, दानकर्ताओं, लोकोपकारी संस्थाओं, संस्थागत एवं अन्य पक्षों की भूमिका।
विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम, 2010
(Foreign Contribution (Regulation) Act, 2010)
संदर्भ:
हाल ही में, सीबीआई द्वारा ‘विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम’ (FCRA) प्रावधानों का उल्लंघन करने और रिश्वत के बदले अवैध निकासी की सुविधा प्रदान करने के आरोप में, गैर सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों, मध्यस्थों और गृह मंत्रालय के ‘विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) प्रभाग’ के लोक सेवकों को गिरफ्तार किया गया है।
संबंधित प्रकरण:
FCRA मंजूरी कई वर्षों से एक कठिन मुद्दा रहा है, और सरकार पर अक्सर राजनीतिक या वैचारिक कारणों से गैर सरकारी संगठनों को उनकी FCRA मंजूरी को रद्द करने या नवीनीकृत न करने के लिए लक्षित करने का आरोप लगाया जाता रहता है।
गैर सरकारी संगठनों (NGOs) द्वारा निर्धारित तिथि से पहले पंजीकरण नवीनीकरण के लिए आवेदन नहीं करने, या इनके द्वारा FCRA का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए ‘गृह मंत्रालय’ द्वारा पंजीकरण नवीनीकरण से इंकार किए जाने की वजह से, 31 दिसंबर, 2021 के बाद लगभग 5,900 एनजीओ के पंजीकरण निष्क्रिय हो गए था।
FCRA के माध्यम से NGO के वित्तीयन पर नियंत्रण:
‘विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम’ (Foreign Contribution (Regulation) Act – FCRA) के माध्यम से विदेशों से प्राप्त होने वाले अनुदान को नियमित नियंत्रित किया जाता है, तथा यह अधिनियम सुनिश्चित करता है, कि इस तरह के अनुदान से देश की आंतरिक सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
- इस अधिनियम को पहली बार वर्ष 1976 में अधिनियमित किया गया था, इसके बाद वर्ष 2010 और फिर 2020 में इसे संशोधित किया जा चुका है।
- विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम, 2010 (Foreign Contribution (Regulation) Act, 2010) की धारा 5 में, केंद्र सरकार के लिए किसी संगठन को राजनीतिक प्रकृति के रूप में घोषित करने और विदेशी स्रोतों से प्राप्त होने वाले धन तक पहुंच को रोकने के लिए “अनियंत्रित और बेलगाम शक्तियां” दी गयी हैं।
- FCRA का कार्यान्वयन गृह मंत्रालय द्वारा किया जाता है।
प्रयोज्यता:
- ‘विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम’ के प्रावधान, संपूर्ण भारतीय सीमा पर, देश से बाहर रहने वाले भारतीय नागरिकों तथा भारत में पंजीकृत या निगमित किंतु देश से बाहर कार्यरत कंपनियों अथवा उनकी शाखाओं पर लागू होते हैं।
- इस अधिनियम के अधिकार-क्षेत्र में आने वाली संस्थाओं में, व्यक्ति, अविभाजित हिंदू परिवार, संस्था या पंजीकृत कंपनी आदि शामिल होती हैं।
FCRA पंजीकरण अनुमोदन:
- एक बार अनुमोदन होने के पश्चात्, FCRA पंजीकरण पांच साल के लिए वैध होता है। सभी गैर सरकारी संगठनों के लिए ‘पंजीकरण समाप्त होने की तारीख से छह महीने के भीतर, इसका नवीनीकरण करने हेतु आवेदन करना होता है।
- नवीनीकरण हेतु आवेदन करने में विफल रहने पर, NGO का पंजीकरण रद्द समझा जाता है, और इसके बाद गृह मंत्रालय की अनुमति के बगैर ‘एनजीओ’ को विदेशी धन प्राप्त करने अथवा अपने मौजूदा धन का उपयोग करने का अधिकार नहीं होता है।
अधिनियम के तहत ‘पूर्व संदर्भ श्रेणी’:
विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम’ के तहत ‘पूर्व संदर्भ श्रेणी’ (Prior Reference Category) का तात्पर्य है कि, किसी गैर सरकारी संगठन को दान करने के लिए, विदेशी दाता को गृह मंत्रालय से पूर्व अनुमति लेनी आवश्यक है।
वर्ष 2020 का नवीनतम संशोधन और संबद्ध आलोचनाएँ:
- विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन, 2020 के तहत पंजीकृत गैर सरकारी संगठन (NGO) के लिए भारतीय स्टेट बैंक की नई दिल्ली शाखा में एक निर्दिष्ट FCRA खाता खोलना अनिवार्य किया गया था। गैर सरकारी संगठन (NGO) केवल इस निर्दिष्ट खाते में ही विदेशी अनुदान दान स्वीकार कर सकेंगे।
- इस प्रावधान के खिलाफ, याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया है कि यह नियम ग्रामीण भारत में, और राजधानी से दूर काम कर रहे गैर सरकारी संगठनों के लिए काफी भारी-भरकम और थकाऊ होगा।
प्रीलिम्स लिंक:
- FCRA के बारे में
- गैर सरकारी संगठनों का विदेशी वित्त पोषण के बारे में
- FCRA की प्रयोज्यता
- विदेशी अंशदान प्राप्त करने से प्रतिबंधित व्यक्ति तथा संस्थाएं
- FCRA संशोधन
- FCRA के तहत विदेशी अंशदान की परिभाषा
- पूर्व संदर्भ श्रेणी
मेंस लिंक:
विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) के प्रमुख प्रावधानों और ऐसे कानून की आवश्यकता पर चर्चा कीजिए।
स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।
सामान्य अध्ययन–III
विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास।
राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस
संदर्भ:
वर्ष 1999 से, भारत में देश की तकनीकी प्रगति को चिह्नित करने के लिए 11 मई को ‘राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस’ (National Technology Day) के रूप में मनाया जाता है।
‘राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस’ 2022 का विषय है: “एक संवहनीय भविष्य के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी में एकीकृत दृष्टिकोण” (Integrated Approach in Science and Technology for a Sustainable Future)।
इस दिवस का महत्व:
- 11 मई, 1998 में भारत ने पोखरण में तीन परमाणु बमों का सफलतापूर्वक परीक्षण किया था।
- इस दिन, डॉ एपीजे अब्दुल कलाम के नेतृत्व में भारतीय वैज्ञानिकों की टीम ने राजस्थान के ‘पोखरण परीक्षण रेंज’ में शक्ति -1 परमाणु मिसाइल का सफलतापूर्वक परीक्षण किया था।
- इसके दो दिन बाद, भारत ने ‘पोखरण-द्वितीय’/’ऑपरेशन शक्ति’ पहल के एक भाग के रूप में दो अन्य परमाणु हथियारों का सफलतापूर्वक परीक्षण किया। इन परीक्षणों के बाद प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भारत को एक परमाणु राज्य घोषित कर दिया. और भारत, राष्ट्रों के ‘परमाणु क्लब’ में शामिल होने वाला छठा देश बन गया।
- इसी दिन बैंगलोर में, भारत के पहले स्वदेश निर्मित विमान – ‘हंस- 3’ का परीक्षण किया गया था।
- इसी दिन, भारत की स्वदेश निर्मित त्रिशूल मिसाइल (सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल) का सफल परीक्षण भी किया गया था।
प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड भारत:
‘प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड’ (Technology Development Board – TDB) द्वारा ‘राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस’ के अवसर पर हर साल वैज्ञानिक-प्रौद्योगिकी आधारित वेबिनार आयोजित करता है और विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों के लिए व्यक्तियों को सम्मानित किया जाता है।
- वर्ष 1996 में स्थापित, ‘प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड’ (TDB) एक वैधानिक निकाय है, तथा यह विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार के अधीन कार्य करता है।
- ‘प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड’, स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के व्यावसायीकरण या व्यापक घरेलू अनुप्रयोगों के लिए आयातित प्रौद्योगिकियों को अपनाने के लिए, भारतीय उद्योगों और अन्य संबंधित एजेंसियों के लिए वित्तीय सहायता भी प्रदान करता है।
इंस्टा जिज्ञासु:
- वर्तमान में, भारत, दुनिया के ‘परमाणु हथियार’ संपन्न नौ देशों में शामिल है।
- 1974 में, भारत ने राजस्थान के पोखरण में अपना पहला परमाणु परीक्षण किया, जिसका कोड नाम “स्माइलिंग बुद्धा” था।
प्रीलिम्स लिंक:
- विश्व में ‘परमाणु हथियार’ संपन्न देश।
- ‘त्रिशूल’क्या है?
- ‘ऑपरेशन बुद्धा’
- राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस का महत्व।
मेंस लिंक:
राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के महत्व पर चर्चा कीजिए।
स्रोत: पीआईबी।
विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास।
डब्ल्यू बोसॉन
(W boson)
संदर्भ:
हाल ही में, शोधकर्ताओं ने तथाकथित ‘डब्ल्यू बोसॉन’ (W boson) के द्रव्यमान का सटीक मापन करने की घोषणा की है।
इस उपलब्धि का महत्व:
शोधकर्ताओं के अनुसार- ‘डब्ल्यू बोसॉन’, ‘कण भौतिकी’ (Particle Physics) के तथाकथित मानक मॉडल द्वारा किए गए पूर्वानुमानों की तुलना में थोड़ा भारी है।
यह परिणाम अत्यधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह ‘मानक मॉडल’ द्वारा पेश किए गए विवरण (Standard Model Description) की अपूर्णता को दर्शाते हैं।
‘मानक मॉडल विवरण’ के बारे में:
‘कण भौतिकी मानक मॉडल’ (Standard Model of Particle Physics), ब्रह्मांड के सबसे बुनियादी मूलभूत अंगों (Building Blocks) का वर्णन करने हेतु वैज्ञानिकों का वर्तमान में सर्वोत्तम सिद्धांत है। यह बताता है कि सभी ज्ञात पदार्थ किस प्रकार ‘क्वार्क’ (जिनसे प्रोटॉन और न्यूट्रॉन बनते हैं) और लेप्टान (जिसमें इलेक्ट्रॉन शामिल हैं) नामक कणों से बनते हैं।
‘मानक मॉडल’, ब्रह्मांड को नियंत्रित करने वाली चार मूलभूत शक्तियों में से तीन – विद्युत चुंबकत्व (Electromagnetism), प्रबल बल (Strong Force) और कमजोर बल (The Weak Force) – की व्याख्या करता है।
‘मानक मॉडल’ को अधूरा क्यों माना जाता है?
- ‘मानक मॉडल’ (Standard Model) प्रकृति की चार मूलभूत शक्तियों में से केवल तीन का एक एकीकृत चित्र प्रदान करता है। और यह मॉडल, ‘गुरुत्वाकर्षण’ को पूरी तरह से छोड़ देता है।
- मॉडल में ‘डार्क मैटर कणों’ (Dark Matter Particles) का विवरण भी शामिल नहीं है। अभी तक इन कणों की जानकारी, आसपास के पदार्थ पर इनके गुरुत्वाकर्षण खिंचाव से ही मिलती है।
‘डब्ल्यू बोसॉन’ के बारे में:
- 1983 में खोजा गया ‘डब्ल्यू बोसोन’ (W boson) एक मूलभूत कण (fundamental particle) है।
- ‘ज़ेड बोसोन’ (Z boson) कणों के साथ मिलकर यह कण ‘कमजोर बल’ के लिए जिम्मेदार होते है।
- ‘डब्ल्यू बोसॉन’ कण विद्युत आवेशित होते हैं, और संपर्क में आने पर अन्य कणों की बनावट को परिवर्तित कर देते हैं।
- ‘डब्ल्यू बोसॉन’, प्रोटॉन को न्यूट्रॉन में तथा न्यूट्रॉन को प्रोटॉन में बदल देते है, और ‘कमजोर बल’ के माध्यम से ‘परमाणु संलयन’ की क्रिया को शुरू कर देते हैं जिससे ‘तारों’ में दहन-क्रिया शुरू हो जाती है।
- ‘फोटॉन’- जोकि द्रव्यमान रहित होते है- के विपरीत ‘डब्ल्यू बोसॉन’ काफी भारी होते हैं, इसलिए ये कण जिस ‘कमजोर बल’ के साथ क्रिया करते हैं, वह बहुत कम होता है।
प्रीलिम्स लिंक:
- डब्ल्यू बोसॉन
- कण भौतिकी का मानक मॉडल
- प्रकृति में मौजूद विभिन्न बल
- प्रोटॉन और न्यूट्रॉन
- डार्क मैटर
स्रोत: द हिंदू।
विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।
मंगल ग्रह की सतह पर भूकंप की जानकारी
(Marsquake detected by NASA InSight)
संदर्भ:
नासा द्वारा दी गयी जानकारी के अनुसार- 4 मई को उसके ‘इनसाइट मार्स लैंडर’ (InSight Mars lander) ने किसी अन्य ग्रह पर देखे गए अब तक के सबसे बड़े ‘भूकंप’ का पता लगाया है।
‘इनसाइट मार्स लैंडर’ रोवर पहली बार नवंबर 2018 में मंगल ग्रह की सतह पर उतरा था, और तब से इसके द्वारा ग्रह की सतह पर ‘कंपन’ (Quakes) की 1,313 घटनाओं को दर्ज किया जा चुका है।
‘मार्सक्वेक’ (Marsquakes) अर्थात ‘मंगल की सतह पर होने वाले कंपन’ के बारे में:
- पृथ्वी पर, टेक्टोनिक प्लेटों में होने वाले परिवर्तनों के कारण ‘भूकंप’ आते हैं।
- मंगल ग्रह पर, हालाँकि, कोई टेक्टोनिक प्लेट नहीं है, और इसकी सतही परत एक ‘विशाल प्लेट’ है।
- अतः, ‘मार्सक्वेक’ (Marsquakes) अर्थात ‘मंगल की सतह पर होने वाले कंपन या भूकंप’, इसकी पर्पटी या ऊपरी सतह में दरार पड़ने या चट्टानों के विखंडित होने की वजह से ‘पर्पटी’ में उत्पन्न तनाव के कारण आते हैं।
‘इनसाइट मिशन’ के बारे में:
- इनसाइट (InSight) मिशन, नासा के डिस्कवरी प्रोग्राम का एक भाग है।
- यह मंगल ग्रह की सतह के नीचे गहराई तक पहुँचने वाला पहला मिशन होगा, तथा यह ग्रह के ऊष्मा उत्पादन को मापकर इसकी आंतरिक संरचना का अध्ययन करेगा तथा मंगल पर आने वाले भूकंपों को सुनेगा, जोकि पृथ्वी पर आने वाले भूकंप के समान होते हैं।
- यह, मंगल ग्रह के भूकंपों (marsquakes) से उत्पन्न भूकंपीय तरंगों का उपयोग ग्रह की आंतरिक संरचना का मानचित्र बनाने के लिए करेगा।
मिशन का महत्व:
- मंगल ग्रह की उत्पत्ति से संबंधित निष्कर्ष, पृथ्वी सहित अन्य चट्टानी ग्रहों की उत्पत्ति को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी।
- इनसाइट, मंगल ग्रह की सतह के नीचे गहरे खड्डों में प्रवेश करके स्थलीय ग्रह की निर्माण प्रक्रियाओं के चिह्नों का पता लगाएगा, और साथ ही ग्रह के “महत्वपूर्ण संकेत”: ग्रह का स्पंदन (भूकंपीय), “तापमान” (गर्मी प्रवाह जांच) और प्रतिबिंबों (सटीक ट्रैकिंग) की माप करेगा।
इनसाइट मिशन, विज्ञान के सबसे बुनियादी सवालों में से एक: स्थलीय ग्रह कैसे बने? के जवाब की खोज करेगा।
मंगल ग्रह पर भेजे गए अन्य मिशन:
- नासा का पर्सवेरेंस रोवर।
- होप: संयुक्त अरब अमीरात का पहला मंगल मिशन
- भारत का मार्स ऑर्बिटर मिशन (MOM) या मंगलयान।
- तियानवेन-1: चीन का मार्स मिशन।
प्रीलिम्स लिंक:
- इनसाइट (InSight) बनाम ‘एक्सोमार्स’ बनाम ‘मंगलयान’ मिशन- उद्देश्य
- यूएई के होप मिशन और चीन के तियानवेन-1 अंतरिक्ष यान के बारे में।
- मंगल बनाम पृथ्वी की पर्यावरणीय संरचना
- मंगल पर अब तक भेजे गए ‘सॉफ्ट लैंडिंग मिशन’
- मंगल के भूकंप बनाम पृथ्वी के भूकंप
मेंस लिंक:
एक्सोमार्स मिशन के महत्व और उद्देश्यों पर चर्चा कीजिए।
स्रोत: टाइम्स ऑफ़ इंडिया।
विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।
आंकड़ों में सूखा, 2022 रिपोर्ट
(Drought in Numbers, 2022 Report)
संदर्भ:
11 मई को, ‘संयुक्त राष्ट्र मरुस्थलीकरण रोकथाम अभिसमय’ (United Nations Convention to Combat Desertification – UNCCD) के पक्षकार सदस्यों के 15वें ‘कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज’ (CoP15) में ‘आंकड़ों में सूखा, 2022 रिपोर्ट’ (Drought in Numbers, 2022 Report) जारी की गई थी।
इस नवीनतम आकलन में, 196 देशों को कवर करते हुए अगले 122 वर्षों में सूखे की स्थिति और जीवन तथा आजीविका पर पड़ने वाले इसके प्रभावों का विश्लेषण किया गया है।
रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु:
- 21वीं सदी की शुरुआत के बाद से, दुनिया भर में ‘सूखे’ (Drought) की आवृत्ति और अवधि खतरनाक दर से बढ़ रही है।
- एक पूरी नई पीढ़ी “पानी की दुर्लभता” के साथ बड़ी हो रही है।
- 2000 के बाद से, दुनिया में सूखे की आवृत्ति और अवधि में 29 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
- ‘सूखे’ को ‘धीमी शुरुआत वाली आपदा’ माना जाता है, अतः इससे निपटने की तैयारी के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है। लेकिन हाल के दशकों में, ‘सूखा’ मानव जीवन-हानि और मौसम संबंधी आपदाओं तथा इसके कारण होने वाले ‘आर्थिक नुकसान’ के सबसे बड़े कारकों में से एक के रूप में उभरा है।
रिपोर्ट के अनुसार- भारत में ‘पानी की कमी’ और ‘सूखा’ की स्थिति:
- रिपोर्ट में, भारत को ‘गंभीर रूप से सूखा प्रभावित देशों’ में से एक के रूप में शामिल किया गया है। 2020-2022 के दौरान देश के लगभग दो-तिहाई हिस्से को सूखे का सामना करना पड़ा है।
- भौगोलिक रूप से, भारत में ‘सूखे के प्रति संवेदनशीलता’ की तुलना ‘उप-सहारा अफ्रीका’ क्षेत्र से की जाती है।
- ‘गंभीर सूखे’ (Severe Droughts) के प्रभाव की वजह से, 1998-2017 के दौरान 20 वर्षों में भारत के सकल घरेलू उत्पाद में अनुमानतः 2-5 प्रतिशत की कमी आई है।
भारत के लिए चिंता का विषय:
- वर्ष 1997 से, भारत के सूखा प्रवण क्षेत्र में 57 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
- पिछले एक दशक में, भारत के एक तिहाई जिलों को ‘चार से अधिक सूखे’ का सामना करना पड़ा है, और देश में हर साल 50 मिलियन लोग सूखे से प्रभावित होते हैं।
- 2018-19 के दौरान, लगभग 97.85 मिलियन हेक्टेयर – देश की भूमि का लगभग 30 प्रतिशत – भूमि- क्षरण हुआ है।
- ‘सूखा’, भारत की प्रमुख वर्षा सिंचित कृषि को प्रभावित करता है जोकि औसतन बोए गए क्षेत्र का 60 प्रतिशत है।
क्या आप सूखे, इसके कारणों और प्रभावों के बारे में अधिक जानना चाहते हैं? इस माइंडमैप का अध्ययन कीजिए।
प्रीलिम्स लिंक:
- UNCCD के बारे में
- रिपोर्ट
- भारत में मरुस्थलीकरण
- भारत में सूखा
मेंस लिंक:
लगातार सूखे के भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभावों की चर्चा कीजिए।
स्रोत: डाउन टू अर्थ।
विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।
UNCCD का 15वां ‘कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज’ (CoP15) सम्मेलन
संदर्भ:
भारत, ‘कोटे डी आइवर’ (पश्चिमी अफ्रीका) में जारी ‘संयुक्त राष्ट्र मरुस्थलीकरण रोकथाम अभिसमय’ (United Nations Convention to Combat Desertification – UNCCD) के पक्षकार सदस्यों के ‘कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज’ के पंद्रहवें सत्र (CoP15) में भाग ले रहा है।
UNCCD के COP15 के बारे में:
- सम्मलेन की थीम: COP15 की थीम “भूमि जीवन विरासत: अभाव से समृद्धि की ओर” ( Life. Legacy: From scarcity to prosperity’) है, जोकि इस ग्रह पर जीवन रेखा, वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों को लाभ पहुचाने वाली ‘भूमि’ को सुरक्षित करने के लिए कार्रवाई का आह्वान करती है।
- अधिदेश: UNCCD का COP15 का उद्देश्य, भूमि के भविष्य के स्थायी प्रबंधन में प्रगति को बढ़ावा देना और भूमि एवं संवहनीयता संबंधी अन्य प्रमुख मुद्दों के बीच संबंधों का पता लगाना है।
- UNCCD COP 15 एजेंडा: सूखा, भूमि-बहाली, और भूमि अधिकार, लैंगिक समानता और युवा सशक्तिकरण जैसे संबंधित समर्थक COP 15 सम्मेलन के एजेंडे में शीर्ष विषयों में शामिल हैं।
‘संयुक्त राष्ट्र मरुस्थलीकरण रोकथाम अभिसमय’ (UNCCD) के बारे में:
UNCCD की स्थापना वर्ष 1994 में की गयी थी।
- यह, पर्यावरण और विकास को स्थायी भूमि प्रबंधन से संबद्ध करने वाला, क़ानूनी रूप से बाध्यकारी एकमात्र अंतरराष्ट्रीय समझौता है।
- यह, रियो पृथ्वी सम्मेलन के दौरान एजेंडा 21 के अंतर्गत प्रत्यक्ष सिफारिशों के अंतर्गत स्थापित एकमात्र अभिसमय है।
- फोकस क्षेत्र: UNCCD, सर्वाधिक संवेदनशील पारिस्थितिक तंत्र और मानव आबादी वाले, विशेष रूप से शुष्क, अर्ध-शुष्क और शुष्क उप-आर्द्र क्षेत्रों को संबोधित करता है, जिसे शुष्क भूमि के रूप में जाना जाता है।
इंस्टा जिज्ञासु:
क्या आप जानते हैं कि इस ‘संयुक्त राष्ट्र मरुस्थलीकरण रोकथाम अभिसमय’ को प्रचारित करने में सहयोग करने के लिए, वर्ष 2006 को “रेगिस्तान और मरुस्थलीकरण का अंतर्राष्ट्रीय वर्ष” घोषित किया गया था?
प्रीलिम्स लिंक:
- UNCCD के बारे में
- उद्देश्य
- कार्य
मेंस लिंक:
भूमि-क्षरण और मरुस्थलीकरण में अंतर बताइए? पारिस्थितिकी पर मरुस्थलीकरण के प्रभाव पर चर्चा करें।
स्रोत: पीआईबी।
विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।
द्वीप तटीय क्षेत्र विनियमन (ICRZ), 2019
(Island Coastal Zone Regulation (Icrz), 2019)
संदर्भ:
हाल ही में, ‘पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय’ द्वारा तटीय क्षेत्रों के विनियमन को नियंत्रित करने वाले कानूनों में छूट को मंजूरी दे दी गयी है, और जिससे अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में ‘गैस संचालित संयंत्रों’ की स्थापना का मार्ग प्रशस्त किया है।
विवरण:
- पोर्ट ब्लेयर के ‘होप टाउन’ में 50 मेगावाट की ‘तरल प्राकृतिक गैस’ (Liquefied Natural Gas – LNG) आधारित बिजली परियोजना शुरू की जाएगी। यह दो प्रकार के ईंधन वाला बिजली संयंत्र होगा – जो डीजल और एलएनजी दोनों का उपयोग करेगा।
- इस संयंत्र का विकास ‘राष्ट्रीय ताप विद्युत निगम’ (एनटीपीसी) द्वारा किया जाएगा।
- पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है, कि यह अनुमति ‘आईलैंड कोस्टल ज़ोन रेगुलेशन’ (ICRZ), 2019 का उल्लंघन करती है। ICRZ, 2019 के तहत, संवेदनशील तटीय हिस्सों पर बुनियादी ढांचे के विकास को सीमित किया गया है।
ICRZ के बारे में:
- द्वीप तटीय क्षेत्र विनियमन (ICRZ) को ‘भारत सरकार’ द्वारा वर्ष 2019 में अधिसूचित किया गया था।
- इसके तहत, कुछ तटीय हिस्सों को ‘तटीय विनियमन क्षेत्र’ (Coastal Regulation Zone – CRZ) घोषित किया गया था और इन संरक्षित क्षेत्रों के भीतर उद्योगों, संचालन और प्रक्रियाओं की स्थापना और विस्तार पर प्रतिबंध लगाया गया था।
संशोधन:
2021 में ‘राष्ट्रीय तटीय क्षेत्र प्रबंधन प्राधिकरण’ (NCZMA) द्वारा मात्र 100 वर्ग किमी से अधिक भौगोलिक क्षेत्रों वाले द्वीपों में ‘द्वीप तटीय विनियमन क्षेत्र’ के भीतर ‘गैस आधारित बिजली संयंत्रों’ को अनुमति देने के लिए ICRZ नियमों में संशोधन करने की सिफारिश की गयी थी।
- क्योंकि, पारंपरिक ‘डीजल जेनरेटर सेट’ जैसे अत्यधिक प्रदूषणकारी स्रोतों पर निर्भरता को कम करने तथा द्वीपवासियों की ऊर्जा आवश्यकता को पूरा करने के लिए ‘गैस आधारित बिजली संयंत्रों’ की जरूरत थी।
- भारत सरकार द्वारा, इन अनुशंसाओं को स्वीकार करते हुए ICRZ नियमों में संशोधन किया गया है।
इंस्टा जिज्ञासु:
क्या आप तटीय विनियमन क्षेत्र (CRZ) मानदंडों के बारे में जानते हैं?
प्रीलिम्स लिंक:
- CRZ मानदंड क्या हैं?
- CRZ की परिभाषा
- तटीय विनियमन क्षेत्रों का वर्गीकरण
- CRZ-III (ग्रामीण) क्षेत्रों के अंतर्गत श्रेणियाँ
मेंस लिंक:
पर्यावरणीय न्याय और वितरणात्मक न्याय के दृष्टिकोण से तटीय विनियमन क्षेत्र (CRZ) नियमों का क्या तात्पर्य है? चर्चा कीजिए।
स्रोत: द हिंदू।
प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य
अमृत सरोवर मिशन
इस साल अप्रैल में लॉन्च किया गया।
- ‘मिशन अमृत सरोवर’ (Amrit Sarovar Mission) का उद्देश्य देश के प्रत्येक जिले में कम से कम 75 तालाबों का “निर्माण/विकास” करना है।
- इस पहल के हिस्से के रूप में, प्रत्येक तालाब में कम से कम 1 एकड़ (0.4 हेक्टेयर) का जल-क्षेत्र होगा जिसमें लगभग 10,000 घन मीटर की जल धारण क्षमता होगी।
- सभी ग्रामीण जिलों को, हर जिले में कम से कम 75 तालाब, कुल मिलकर देश भर में लगभग 50,000 अमृत सरोवरों विकसित करने का निर्देश दिया गया है।
- योजना में यह भी उल्लेख किया गया है, कि यदि जिला, नए अमृत सरोवर बनाने में असमर्थ है, तो वे अपनी पारिस्थितिक और उत्पादक उपयोगिता को बहाल करने के लिए मौजूदा तालाबों का कायाकल्प भी कर सकते हैं।
चर्चा का कारण:
गाजियाबाद में 75 तालाब केंद्र की ‘अमृत सरोवर’ योजना के तहत पुनरुद्धार के लिए चिह्नित हो चुके हैं।
टमाटर फ्लू
हाल ही में, केरल में “टमाटर फ्लू” (Tomato flu) संक्रमण के मामलों का पता लगा है।
- इस फ्लू का नाम “टमाटर फ्लू”, संक्रमण के दौरान पीड़ित व्यक्ति के शरीर पर ‘लाल रंग के छाले’ पड़ जाने के कारण पड़ा है।
- यह फ्लू, पांच साल से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित करता है।
- इसके लक्षणों में शरीर पर चकत्ते पड़ना, त्वचा में जलन और पानी की कमी आदि शामिल हैं।
- यह फ्लू ‘स्व-सीमित’ है और इसके लिए कोई विशिष्ट दवा नहीं है। इसका मतलब यह है कि यदि उपयुक्त देखभाल दी जाती है तो समय के साथ इस संक्रमण के लक्षण अपने आप ठीक हो जाएंगे।
- फ्लू के अन्य मामलों की तरह, टमाटर फ्लू भी संक्रामक है। “अगर कोई इस फ्लू से संक्रमित होता है, तो उसे अलग-थलग रखने की जरूरत है क्योंकि यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में तेजी से फैल सकता है।
एसोसिएशन ऑफ एशियन इलेक्शन अथॉरिटीज
फिलीपींस के मनीला में आयोजित कार्यकारी बोर्ड और महासभा की बैठक में 2022-2024 के लिए भारत को सर्वसम्मति से ‘एसोसिएशन ऑफ एशियन इलेक्शन अथॉरिटीज’ (AAEA) के नए अध्यक्ष के रूप में चुना गया है।
- वर्तमान में ‘चुनाव आयोग’, मनीला ‘एसोसिएशन ऑफ एशियन इलेक्शन अथॉरिटीज’ के अध्यक्ष है।
- कार्यकारी बोर्ड के नए सदस्यों में अब रूस, उज्बेकिस्तान, श्रीलंका, मालदीव, ताइवान और फिलीपींस शामिल हैं।
‘एसोसिएशन ऑफ एशियन इलेक्शन अथॉरिटीज’ (AAEA) के बारे में:
एशियाई चुनाव प्राधिकरण संघ (Association of Asian Election Authorities – AAEA) की स्थापना वर्ष 1998 में की गयी थी।
- वर्तमान में, 20 एशियाई चुनाव प्रबंधक निकाय, AAEA के सदस्य हैं।
- भारत निर्वाचन आयोग (ECI), AAEA के EMB का एक संस्थापक सदस्य है और यह 2011-13 के दौरान AAEA के कार्यकारी बोर्ड में उपाध्यक्ष और 2014-16 के दौरान अध्यक्ष के रूप में भी कार्य कर चुका है।
- ‘एसोसिएशन ऑफ एशियन इलेक्शन अथॉरिटीज’ का मिशन, सुशासन और लोकतंत्र में सहयोग करने के उद्देश्य से खुले और पारदर्शी चुनावों को बढ़ावा देने के तरीकों पर चर्चा और कार्रवाई करने के लिए चुनाव अधिकारियों के बीच अनुभव और सर्वोत्तम पद्धतियों को साझा करने के लिए एशियाई क्षेत्र में एक गैर-पक्षपातपूर्ण मंच प्रदान करना है।
खेल आयोजनों को ‘राष्ट्रीय महत्व की घटनाओं’ का दर्जा
सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा ‘खेल प्रसारण सिग्नल (प्रसार भारती के साथ अनिवार्य साझाकरण) अधिनियम’ (Sports Broadcasting Signals (Mandatory Sharing with Prasar Bharati) Act) के तहत कई ‘खेल आयोजनों’ को ‘राष्ट्रीय महत्व’ के रूप में अधिसूचित किया गया है।
- मार्च 2021 में जारी की गई पहली अधिसूचना को हटाते हुए, इस अधिसूचना में, सभी ओलंपिक खेलों, राष्ट्रमंडल खेलों और एशियाई खेलों को राष्ट्रीय महत्व की घटनाओं के रूप में घोषित किया गया है।
- इस सूची में क्रिकेट, टेनिस, हॉकी आदि जैसे खेल शामिल हैं।
एआईएम प्राइम प्लेबुक
हाल ही में, ‘नीति आयोग’ द्वारा ‘एआईएम प्राइम प्लेबुक’ (Program for Researchers in Innovation, Market Readiness, and Entrepreneurship – AIM-PRIME) प्लेबुक लॉन्च की गई।
- एआईएम-प्राइम (नवोन्मेष, बाजार के लिए तैयारी और उद्यमशीलता में शोध के लिए कार्यक्रम) कार्यक्रम का उद्देश्य, शुरुआती स्तर के वैज्ञानिक आधार वाले, तकनीकी विचारों को प्रोत्साहित करना था। यह प्रोत्साहन 12 महीने तक एक मिश्रित पाठ्यक्रम से प्रशिक्षण और दिशा-निर्देश देकर दिया जाना था।
- फोकस क्षेत्र: विज्ञान आधारित, ज्ञान-गहन, गहन प्रौद्योगिकी उद्यमिता।
- कार्यान्वयन एजेंसी: अटल नवाचार मिशन और नीति आयोग द्वारा बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन के सहयोग से एआईएम -प्राइम कार्यक्रम को शुरू किया गया है।











