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[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 11 May 2022

विषयसूची

सामान्य अध्ययन-I

  1. गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर

 

सामान्य अध्ययन-II

  1. ‘सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना’ मानदंडों में संशोधन
  2. तीन सामाजिक सुरक्षा (जन सुरक्षा) योजनाओं के सात वर्ष

 

सामान्य अध्ययन-III

  1. पंजाब में हरी खाद को प्रोत्साहन
  2. टिशू कल्चर प्लांट्स

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

  1. ‘पीएम-वाणी’ योजना आधारित “रेलवे स्टेशनों पर वाईफाई देने” की शुरुआत
  2. पुलित्जर पुरस्कार
  3. लुटियंस दिल्ली
  4. एकीकृत युद्ध समूह

 


सामान्य अध्ययनI


 

विषय: भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू शामिल होंगे।

गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर


संदर्भ:

7 मई को पूरे देश में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की 161वीं जयंती मनाई गई।

उनका जन्म 7 मई 1861 को हुआ था।

रवींद्रनाथ टैगोर के बारे में:

प्रारंभिक जीवन:

  • जनसाधारण में ‘गुरुदेव’ के नाम से प्रसिद्ध ‘रवींद्रनाथ टैगोर’ (Rabindranath Tagore) का जन्म एक संपन्न परिवार में हुआ था
  • ‘रवींद्रनाथ टैगोर’, मुख्य रूप से लेखक, कवि, नाटककार, दार्शनिक और सौंदर्यशास्त्री, संगीतकार और कोरियोग्राफर, एक चित्रकार एक अद्वितीय शैक्षणिक संस्थान – विश्व-भारती के संस्थापक के रूप में जाने जाते हैं।
  • टैगोर ने मात्र आठ वर्ष की उम्र में कविता लेखन आरंभ कर दिया था, और मात्र 16 साल की आयु में उन्होंने ‘भानुसिम्हा’ छद्म नाम से अपनी कविताओं का पहला संग्रह प्रकाशित किया था।
  • उन्होंने वर्ष 1929 और 1937 में आयोजित ‘विश्व धर्म संसद’ में व्याख्यान दिया था।

योगदान:

  • रवींद्रनाथ टैगोर ने भारत और बांग्लादेश – दोनों देशों के राष्ट्रगान की रचना की।
  • उन्होंने चित्रकला पर अपनी छाप छोड़ी और इसकी पद्धतियों को बदलने तथा चित्रकला में आधुनिकता की शुरुआत करने में भूमिका निभाई।
  • 1928 और 1940 के बीच, रवीन्द्रनाथ ने 2000 से अधिक चित्रों को चित्रित किया। उन्होंने अपने चित्रों को कभी कोई शीर्षक नहीं दिया।
  • इन्हें यूरोपीय चित्रकला के ‘अभिव्यक्तिवाद’ और प्राचीन संस्कृतियों की ‘आदिम कला’ से प्रेरणा मिली।

पुरस्कार:

वर्ष 1913 में, ‘रवींद्रनाथ टैगोर’ अपने कविता-संग्रह ‘गीतांजलि’ के लिए ‘साहित्य में नोबेल’ पुरस्कार प्राप्त करने वाले पहले भारतीय बने।

स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका:

  • यद्यपि, ‘रवींद्रनाथ टैगोर’ ब्रिटिश साम्राज्यवाद के आलोचक थे और इसकी भर्त्सना करते थे, फिर भी उन्होंने गांधी और उनके असहयोग आंदोलन को पूरी तरह से समर्थन या सहमति नहीं दी।
  • वह ब्रिटिश शासन को जनता की सामाजिक “बीमारियों” की समग्र “रुग्णता” के लक्षण के रूप में देखते थे।
  • अपनी रचनाओं में, उन्होंने भारतीय राष्ट्रवादियों के समर्थन में भी आवाज उठाई।
  • रवींद्रनाथ टैगोर ने 1905 में बंगाल विभाजन के बाद बंगाली आबादी को एकजुट करने के लिए ‘बांग्लार माटी बांग्लार जोल’ (बंगाल की मिट्टी, बंगाल का पानी) गीत लिखा था।
  • उन्होंने प्रसिद्ध गीत ‘आमार सोनार बांग्ला’ की रचना की,  जिसने लोगों में राष्ट्रवाद की भावना को प्रज्वलित करने में मदद की।
  • उन्होंने ‘राखी उत्सव’ की शुरुआत की, जिसमे हिंदू और मुस्लिम समुदायों के लोगों ने एक-दूसरे की कलाई पर रंग-बिरंगे धागे बांधे।
  • टैगोर ने अंग्रेजों द्वारा की जाने वाली हिंसा का विरोध किया, और 1915 में, अमृतसर में हुए हिंसक जलियांवाला नरसंहार के विरोध में लॉर्ड हार्डिंग द्वारा दी गई ‘नाइटहुड’ की उपाधि को वापस लौटा दिया। जलियांवाला नरसंहार में अंग्रेजों द्वारा कम से कम 1526 निहत्थे भारतीय नागरिकों की हत्या कर दी गयी थी।
  • टैगोर के विश्वास और कार्यों की आधारशिला यह विचार है, कि उपनिवेशवाद विरोध- केवल ब्रिटिश सभी चीजों को खारिज करके हासिल नहीं किया जा सकता है, बल्कि इस विरोध में, पश्चिमी संस्कृति के सभी बेहतरीन पहलुओं को भारतीय संस्कृति में शामिल किया जाना भी शामिल होना चाहिए।

टैगोर के लिए स्वतंत्रता का अर्थ:

रवींद्रनाथ टैगोर का मानना था, कि “स्वतंत्रता” का अर्थ केवल अंग्रेजों से राजनीतिक स्वतंत्रता नहीं है; बल्कि सच्ची स्वतंत्रता का अर्थ है स्वयं के प्रति सच्चे और ईमानदार होने की क्षमता हासिल करना अन्यथा ‘स्वायत्तता’ और ‘स्वतंत्रता’ अपनी सारी कीमत खो देती है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. टैगोर के चित्रों का सार
  2. उन्होंने नाइटहुड की उपाधि का त्याग कब और क्यों किया?
  3. साहित्य में उनका योगदान?
  4. विश्वभारती विश्वविद्यालय के बारे में
  5. टैगोर पुरस्कार

मेंस लिंक:

रवींद्रनाथ टैगोर ने असंख्य तरीकों से भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन की गति को किस प्रकार उत्प्रेरित किया? चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी।

 


सामान्य अध्ययनII


 

विषय: संसद और राज्य विधायिका- संरचना, कार्य, कार्य-संचालन, शक्तियाँ एवं विशेषाधिकार और इनसे उत्पन्न होने वाले विषय।

‘सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना’ मानदंडों में संशोधन


संदर्भ:

हाल ही में, वित्त मंत्रालय द्वारा ‘सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना’ (Member of Parliament Local Area Development Scheme – MPLADS)  नियमों में संशोधन किया गया है।

संशोधित मानदंड:

‘सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना’ निधि पर मिलने वाला ब्याज ‘भारत की संचित निधि’ में जमा किया जाएगा।

‘MPLAD योजना’ के बारे में:

संबंधित विषय को हाल में विस्तार से कवर किया जा चुका है। अधिक जानकारी के लिए पढ़िए।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. MPLAD योजना, ‘सांसद आदर्श ग्राम योजना’ से किस प्रकार संबद्ध है?
  2. मनोनीत सांसद द्वारा कार्यों की सिफारिश किन क्षेत्रों में की जा सकती है?
  3. क्या योजना के तहत, एससी और एसटी कल्याण पर कोई विशेष ध्यान दिया जाता है?
  4. अनुदान और ऋण के बीच अंतर?
  5. कार्यान्वयन करने वाली एजेंसियां

मेंस लिंक:

क्या MPLADS द्वारा सार्वजनिक सेवाओं को प्रदान किए जाने वाले प्रावधानों में मौजूदा अंतराल को पाटने में सहायता की गयी है? आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

प्रश्न. संसद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (MPLADS) के तहत निधियों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है? (CSP 2020)।

  1. MPLADS फंड का उपयोग स्वास्थ्य, शिक्षा आदि के लिए भौतिक बुनियादी ढांचे जैसी स्थाई संपत्ति बनाने के लिए किया जाना चाहिए।
  2. प्रत्येक सांसद निधि का एक निर्दिष्ट भाग, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति की आबादी के लिए समर्पित कार्यों में प्रयोग किया जाना चाहिए।
  3. MPLADS निधियां वार्षिक आधार पर स्वीकृत की जाती हैं और अप्रयुक्त निधियों को अगले वर्ष के लिए आगे नहीं ले जाया जा सकता है।
  4. जिला प्राधिकरण के लिए, कार्यान्वित किए जा रहे सभी कार्यों का हर साल कम से कम 10% निरीक्षण करना आवश्यक होता है।

 

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 3 और 4
  3. केवल 1, 2 और 3
  4. केवल 1, 2 और 4

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: केन्द्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन; इन अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय।

तीन सामाजिक सुरक्षा (जन सुरक्षा) योजनाओं के सात वर्ष


संदर्भ:

हाल ही में, तीन सामाजिक सुरक्षा (जन सुरक्षा) योजनाओं –  प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY), प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY) और अटल पेंशन योजना (APY) – ने अपनी शुरुआत के सात साल पूरे कर लिए हैं।

ये योजनाएं कब शुरू की गईं?

इन तीनों योजनाओं को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 9 मई, 2015 को कोलकाता, पश्चिम बंगाल से लॉन्च किया गया था।

इन योजनाओं का मूलभूत विवरण:

प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY):

PMJJBY एक साल की जीवन बीमा योजना है, जिसका नवीकरण प्रत्येक वर्ष होता है और यह किसी भी कारण से होने वाली मौत के लिए कवरेज प्रदान करती है।

  1. पात्रता: 18-50 वर्ष आयु वर्ग के बचत बैंक या डाकघर के खाताधारक व्यक्ति इस योजना के तहत पंजीकरण के पात्र हैं। 50 वर्ष की आयु से पहले योजना में शामिल होने वाले लोग प्रीमियम का भुगतान करने पर जीवन के जोखिम का कवरेज 55 वर्ष की आयु तक प्राप्त कर सकते हैं।
  2. लाभ: 330 रुपये प्रति वर्ष के प्रीमियम भुगतान पर 2 लाख रुपये का जीवन बीमा कवर, चाहे मृत्यु किसी भी कारण से हुई हो।
  3. उपलब्धियां: 04.2022 तक, योजना के तहत 12.76 करोड़ से अधिक पंजीकरण हुए हैं और कुल 5,76,121 दावों के लिए 11,522 करोड़ रुपये की धनराशि का भुगतान किया गया है।

प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY) के बारे में अधिक जानकारी के लिए पढ़िए।

प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY):

PMSBY, एक साल की दुर्घटना बीमा योजना है, जिसका हर साल नवीकरण किया जाता है और यह दुर्घटना के कारण हुई मृत्यु या दिव्यांगता के लिए कवरेज प्रदान करती है।

  1. पात्रता: बचत बैंक या डाकघर में खाता रखने वाले आयु वर्ग 18-70 वर्ष के व्यक्ति इस योजना के तहत पंजीकरण के पात्र हैं।
  2. लाभ: दुर्घटना के कारण हुई मृत्यु या दिव्यांगता के लिए 2 लाख रुपये (आंशिक दिव्यांगता के मामले में 1 लाख रुपये) का दुर्घटना मृत्यु सह दिव्यांगता कवर।
  3. उपलब्धियां: 27 अप्रैल 2022 तक, योजना के तहत कुल 28.37 करोड़ से अधिक पंजीकरण हुए हैं और कुल 97,227 दावों के लिए 1,930 करोड़ रुपये की धनराशि का भुगतान किया गया है।

प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY) के बारे में अधिक जानकारी के लिए पढ़िए।

अटल पेंशन योजना (APY):

यह असंगठित क्षेत्र के लोगों के लिए वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने और भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए सरकार की एक पहल है।

अटल पेंशन योजना (APY) को ‘राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली’ (NPS) के समग्र प्रशासनिक और संस्थागत ढांचे के तहत पेंशन कोष नियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) द्वारा प्रबंधित किया जाता है।

  1. पात्रता: APY, 18 से 40 वर्ष आयु वर्ग के सभी बैंक खाताधारकों के लिए खुली है और चुनी गई पेंशन राशि के आधार पर अंशदान की धनराशि अलग-अलग होती है।
  2. लाभ: योजना में शामिल होने के बाद ग्राहक द्वारा दिए गए अंशदान के आधार पर 60 वर्ष की आयु से ग्राहकों को गारंटीशुदा न्यूनतम मासिक पेंशन के रूप में 1000 रुपये या 2000 रुपये या 3000 रुपये या 4000 रुपये या 5000 रुपये मिलते हैं।
  3. उपलब्धियां: 04.2022 तक, 4 करोड़ से अधिक व्यक्तियों ने इस योजना की सदस्यता प्राप्त की है।

अटल पेंशन योजना (APY) के बारे में अधिक जानकारी के लिए पढ़िए।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. PMJJBY, PMSBY और APY के बारे में
  2. पात्रता
  3. लाभ
  4. इन योजनाओं की शुरुआत
  5. इसी प्रकार की अन्य योजनाएं।

मेंस लिंक:

प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY) के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी।

 


सामान्य अध्ययनIII


 

विषय: प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कृषि सहायता तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य से संबंधित विषय; जन वितरण प्रणाली- उद्देश्य, कार्य, सीमाएँ, सुधार; बफर स्टॉक तथा खाद्य सुरक्षा संबंधी विषय; प्रौद्योगिकी मिशन; पशु पालन संबंधी अर्थशास्त्र।

पंजाब में हरी खाद को प्रोत्साहन


संदर्भ:

पंजाब सरकार इन दिनों ‘हरी खाद’ (Green Manure) की खेती को बढ़ावा दे रही है। इसके लिए, राज्य सरकार द्वारा बीजों के लिए 2,000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से सब्सिडी प्रदान की जा रही है।

‘हरी खाद’ के बारे में:

‘हरी खाद’ (Green Manure), विशेष रूप से मिट्टी की उर्वरता और विन्यास को बनाए रखने के लिए उगाई जाने वाली फसलें होती हैं।

  • ये फसलें, आम तौर पर तैयार होने पर सीधे ही खेत में जोत दी जाती हैं, या इनकी कटाई करके तथा खाद बनाकर खेत की मिट्टी में मिला दिया जाता है।
  • 42-56 दिन की फसल होने पर ‘हरी खाद की किस्मों’ को मिट्टी में मिला दिया जाता है।

उदाहरण:

हरी खाद की मुख्यतः तीन किस्में – ढैंचा (Dhaincha), लोबिया (Cowpea), सनई (Sunhemp)- होती हैं। इसके अलावा, कुछ अन्य फसलें जैसे ग्रीष्मकालीन मूंग, दलहन (mash pulses) और ग्वार (Guar) आदि भी हरी खाद का काम करती हैं।

फ़ायदे:

  1. हरी खाद, मिट्टी में कार्बनिक पदार्थों की मात्रा में वृद्धि करने में सहायक होती है।
  2. सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी को पूरा करती है।
  3. अकार्बनिक उर्वरकों की खपत को कम करती है।
  4. जैविक खाद का एक अच्छा विकल्प होती है।
  5. हरी खाद, पोषक तत्वों का संरक्षण करती है, नाइट्रोजन की मात्रा में वृद्धि करती है और मृदा-विन्यास को स्थिर करती है।
  6. यह शीघ्रता से विघटित होती है और प्रचुर मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड और दुर्बल अम्लों को मुक्त करती है, जो पौधों के विकास के लिए पोषक तत्वों को मुक्त करने हेतु अघुलनशील मृदा खनिजों के साथ अभिक्रिया करते हैं।
  7. हरी खाद में, 15 से 18 क्विंटल प्रति एकड़ शुष्क पदार्थ होता है, जिसमें फास्फोरस, पोटेशियम, जस्ता, तांबा, लोहा और मैंगनीज शामिल होते है, तथा 20 से 40 किलोग्राम प्रति एकड़ नाइट्रोजन होता है।

पंजाब में हरी खाद की बुवाई क्यों महत्वपूर्ण है?

पंजाब की प्रति हेक्टेयर उर्वरक खपत – लगभग 244 किलोग्राम- देश में सबसे अधिक है और राष्ट्रीय औसत से भी अधिक है।

  • हरी खाद, इस खपत को 25 से 30% तक काफी हद तक कम कर सकती है और किसानों के लिए इनपुट लागत में काफी बचत कर सकती है।
  • यूरिया, डायमोनियम फॉस्फेट (DAP) जैसे रासायनिक उर्वरकों के नियमित उपयोग से मृदा में – खासकर चावल की खेती की जाने वाली मृदा में, लौह और जस्ता जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी हो जाती है, जिससे उत्पादकता प्रभावित होती है।
  • पंजाब के कई हिस्सों में मिट्टी का पीएच स्तर 8.5 और 9 प्रतिशत से अधिक है। हरी खाद इसे संतुलित रखने में मदद करती है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. हरी खाद।
  2. संरचना
  3. प्रकार
  4. लाभ
  5. अनुप्रयोग

मेंस लिंक:

हरी खाद के महत्व की विवेचना कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

टिशू कल्चर प्लांट्स


(Tissue culture plants)

संदर्भ:

हाल ही में, ‘कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण’ (APEDA) द्वारा ‘टिशू कल्चर पादपों’ (Tissue culture plants) के निर्यात को प्रोत्साहन देने के क्रम में “वनस्पति, जीवित पौधों, कट फ्लॉवर्स जैसे टिशू कल्चर पौधों और रोपण सामग्री का निर्यात संवर्धन” पर एक वेबिनार का आयोजन किया गया।

इस वेबिनार में जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) से मान्यता प्राप्त भारत भर की ‘टिशू कल्चर लैबोरेटरीज’ ने भाग लिया।

‘पादप ऊतक संवर्धन’ / ‘प्लांट टिशू कल्चर’ के बारे में:

‘पादप ऊतक संवर्धन’ / (Plant Tissue Culture)  प्रकाश, तापमान और आर्द्रता की नियंत्रित एवं जीवाणुरहित स्थितियों में रासायनिक रूप से परिभाषित कृत्रिम पोषक माध्यम में पौधों के बीज, अंगों (Organs), कर्तोतकों (Explants), ऊतकों, कोशिकाओं या मूलतत्वों (Protoplasts) का संवर्धन अथवा खेती होती है।

प्लांट टिशू कल्चर के लाभ:

  • परिपक्व पौधों का शीघ्र उत्पादन।
  • रोगों, कीटों और रोगजनकों के संचारण की बहुत कम संभावना के साथ उन्हें स्थानांतरित करने में आसानी।
  • देशी पौधों की प्रजातियों की सुरक्षा हेतु आनुवंशिक पादप सामग्री का भंडारण।

भारत से टिशू कल्चर पौधों का निर्यात:

  • भारत से टिशू कल्चर पौधों का आयात कर रहे शीर्ष 10 देशों में नीदरलैंड, यूएसए,इटली, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, जापान, केन्या सेनेगल, इथियोपिया और नेपाल शामिल हैं।
  • 2020-21 में, भारत से 1.717 करोड़ डॉलर के टिशू कल्चर पौधों का निर्यात हुआ था, जिसमें अकेले नीदरलैंड की लगभग 50 प्रतिशत हिस्सेदारी थी।

ऊतक संवर्धन संयंत्र प्रयोगशालाओं के सामने आने वाले मुद्दे और चुनौतियाँ:

  1. बिजली की बढ़ती लागत,
  2. लैबोरेटरीज में कुशल कार्यबल की दक्षता का कम स्तर,
  3. लैबोरेटरीज में प्रदूषण का स्तर,
  4. सूक्ष्म पौधारोपण सामग्री की परिवहन की लागत,
  5. दूसरे देशों के साथ ही भारत की पौधारोपण सामग्री के एचएस कोड के सामंजस्य में कमी, और
  6. वन एवं क्वारंटाइन विभागों द्वारा उठाई गई आपत्तियां।

सरकार टिशू कल्चर पौधों के निर्यात को किस प्रकार प्रोत्साहित कर रही है?

  • निर्यात गुणवत्ता वाले टिशू कल्चर रोपण सामग्री का उत्पादन करने हेतु, APEDA द्वारा प्रयोगशालाओं को खुद को उन्नत बनाने में सहायता देने लिए एक वित्तीय सहायता योजना (Financial Assistance Scheme) चलाई जा रही है।
  • ‘कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण’ (APEDA) बाजार विकास, बाजार विश्लेषण और संवर्धन और अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनियों में टिशू कल्चर पौधों के प्रदर्शन एवं विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर बायर-सेलर मीट्स में भागीदारी के माध्यम से विविध देशों को टिशू कल्चर रोपण सामग्री के निर्यात की सुविधा भी प्रदान करता है।

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप विभिन्न प्रकार के ‘टिशू कल्चर’ के बारे में जानते हैं?

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘पादप ऊतक संवर्धन’ / ‘प्लांट टिशू कल्चर’
  2. प्रकार
  3. लाभ
  4. चुनौतियां

मेंस लिंक:

‘पादप ऊतक संवर्धन’ / ‘प्लांट टिशू कल्चर’ से जुड़ी चिंताओं पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


 ‘पीएम-वाणी’ योजना आधारित “रेलवे स्टेशनों पर वाईफाई देने” की शुरुआत

(PM-WANI based “access to its WiFi across railway stations)

इसके बारे में:

वाई-फाई एक्सेस नेटवर्क इंटरफेस (Public Wi-Fi Access Network Interface – PM-WANI)

यह ‘प्रधान मंत्री वाई-फाई एक्सेस नेटवर्क इंटरफेस’ (Public Wi-Fi Access Network Interface – PM-WANI) योजना पर आधारित 22 राज्यों में 2,384 वाईफाई हॉटस्पॉट वाले 100 रेलवे स्टेशनों पर सार्वजनिक वाईफाई सेवाओं तक पहुंच उपलब्ध कराए जाने की पहल है।

शुरुआत:

इस पहल की शुरुआत, एक मिनी रत्न (श्रेणी-I) के सार्वजनिक उद्यम ‘रेलटेल’ (RailTel) द्वारा की गयी है। रेलटेल, देश के सबसे बड़े तटस्थ दूरसंचार अवसंरचना प्रदाताओं में से एक है, और इसके पास रेलवे ट्रैक के साथ लगे विशिष्ट ‘राइट ऑफ वे’ (Right of Way – ROW) पर विछाया गया अखिल भारतीय ऑप्टिक फाइबर नेटवर्क है। रेलटेल, भारतीय रेलवे के स्वामित्व में है।

कार्यविधि:

  • इस वाईफाई नेटवर्क को एक्सेस करने के लिए एंड्रॉयड यूजर्स ‘गूगल प्ले स्टोर’ पर उपलब्ध मोबाइल एप ‘वाई-डॉट’ को डाउनलोड कर सकते हैं। इस ऐप को सी-डॉट के निकट समन्वय में विकसित किया गया है।
  • PM-WANI दूरसंचार विभाग (DoT) का एक महत्वाकांक्षी कार्यक्रम है जो उपयोग में आसानी के लिए सभी वाई-फाई नेटवर्क को आपस में जोड़ता है और जनता के उपयोग हेतु व्यापक ब्रॉडबैंड उपलब्ध करता है।

 

पुलित्जर पुरस्कार

(Pulitzer Prize)

रॉयटर्स समाचार एजेंसी के चार भारतीय फोटोग्राफरों की एक टीम – शहीद फोटो जर्नलिस्ट दानिश सिद्दीकी, अदनान आबिदी, सना इरशाद मट्टू और अमित दवे – ने भारत में कोविड -19 संकट के कवरेज के लिए ‘फीचर फोटोग्राफी’ श्रेणी में 2022 का ‘पुलित्जर पुरस्कार’ (Pulitzer Prize) जीता है।

‘पुलित्जर पुरस्कार’ के बारे में:

पुलित्जर पुरस्कार, पत्रकारिता क्षेत्र में दिया जाने वाला संयुक्त राज्य अमेरिका का एक प्रमुख पुरस्कार है जो समाचार पत्रों की पत्रकारिता, साहित्य एवं संगीत रचना के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वालों को प्रदान किया जाता है।

  • यह पुरुस्कार हंगरी मूल के अमेरिकी पत्रकार एवं प्रकाशक ‘जोसेफ पुलित्जर’ (Joseph Pulitzer) के नाम पर स्थापित किया गया है। ‘जोसेफ पुलित्जर’ ने अपनी वसीयत में, एक पत्रकारिता स्कूल शुरू करने और पुरस्कार स्थापित करने के लिए कोलंबिया विश्वविद्यालय को धनराशि सौपी थी।
  • इस पुरुस्कार की स्थापना वर्ष 1917 में की गयी थी और यह कोलंबिया विश्वविद्यालय और पुलित्जर पुरस्कार बोर्ड द्वारा प्रशासित किया जाता है।
  • प्रत्येक विजेता को एक प्रमाणपत्र और US$15,000 नकद पुरस्कार प्राप्त होता है। सार्वजनिक सेवा श्रेणी में विजेता को स्वर्ण पदक से सम्मानित किया जाता है।

गत वर्षों में भारतीय/भारतीय मूल के पुलित्जर पुरुस्कार विजेता:

  1. गोबिंद बिहारी: वर्ष 1937 में पत्रकारिता के लिए पुलित्जर पुरस्कार जीतने वाले भारत के पहले व्यक्ति।
  2. झुम्पा लाहिड़ी: वर्ष 2000
  3. गीता आनंद: वर्ष 2003
  4. सिद्धार्थ मुखर्जी: वर्ष 2011
  5. संघमित्रा कलिता: वर्ष 2016

 

लुटियंस दिल्ली

(Lutyens Delhi)

कुछ राजनीतिक नेताओं ने लुटियंस दिल्ली (Lutyens Delhi) की सड़कों का नाम परिवर्तित कर देश के बहादुर सपूतों के नाम पर रखे जाने की मांग की है।

  • दिल्ली में इन सड़कों के वर्तमान में प्रचलित नाम: अकबर रोड, हुमायूं रोड, शाहजहां रोड।
  • इन नेताओं ने, इन सड़कों के नाम गुरु गोबिंद सिंह, महाराणा प्रताप और देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत के नाम पर रखे जाने का सुझाव दिया है।
  • दिल्ली के वास्तुकार ‘सर एडविन लुटियंस’ (1869-1944) ने राष्ट्रपति भवन एस्टेट, (वायसराय हाउस एस्टेट) में 4 बंगले डिजाइन किए थे।

 

एकीकृत युद्ध समूह

(Integrated Battle Groups – IBG)

भारतीय सेना द्वारा युद्ध में बेहतर प्रदर्शन और दुश्मन पर त्वरित आक्रमण करने की अपनी क्षमता में वृद्धि करने हेतु ‘चुस्त एकीकृत युद्ध समूहों’ (Integrated Battle Groups – IBG)  में परिवर्तित करने के लिए पश्चिमी मोर्चे पर एक ‘होल्डिंग फॉर्मेशन’ और उत्तरी सीमाओं पर एक ‘स्ट्राइक फॉर्मेशन’ को चिह्नित किया गया है।

‘एकीकृत युद्ध समूहों’ के बारे में:

एकीकृत युद्ध समूह (IBG) का आकार एक ‘ब्रिगेड’ के आकार के समान फुर्तीले, दक्ष और आत्मनिर्भर युद्ध-विन्यास (Combat Formations) होते हैं, जो युद्ध की स्थिति में शत्रु के विरुद्ध त्वरित आक्रमण करने में सक्षम है।

  • प्रत्येक आईबीजी को खतरे, इलाके और कार्य (Threat, Terrain and Task – Three Ts) के आधार पर तैयार किया जाएगा और संसाधनों को ‘थ्री टी’ (Three Ts) के आधार पर आवंटित किया जाएगा।
  • आईबीजी को हल्का रखे जाने की आवश्यकता है ताकि इन पर रसद का भार कम रहे और वे इलाके के आधार पर 12-48 घंटे के भीतर तैनात किए जा सकें।

संरचना:

  • सेना में ‘कमांड’ (Command) एक परिभाषित भू-भाग में विस्तारित सबसे बड़ा ‘स्थैतिक विन्यास’ (Static Formation) होता है, तथा ‘कोर’ (Corps) सबसे बड़ा ‘गतिशील विन्यास’ (Mobile Formation) होता है।
  • आमतौर पर, प्रत्येक कोर में लगभग तीन डिवीजन होते हैं।
  • सेना का विचार इन ‘कोर’ को ‘एकीकृत युद्ध समूहों’ में पुनर्गठित करना है जो ब्रिगेड के आकार की इकाइयाँ होंगी, लेकिन इन IBGs में पैदल सेना, बख्तरबंद, तोपखाने और वायु रक्षा जैसे सभी आवश्यक तत्व एक साथ अंतर्निहित होंगे।