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[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 9 May 2022

विषयसूची

सामान्य अध्ययन-II

  1. राष्ट्रपति चुनाव में सांसदों के वोट का मूल्य
  2. चीन-ताइवान संबंध।

सामान्य अध्ययन-III

  1. चंद्र ग्रहण ‘ब्लड मून’
  2. कोयला गैसीकरण
  3. वास्तविक नियंत्रण रेखा

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

  1. डल झील का कायाकल्प
  2. भारत की सकल प्रजनन दर
  3. नेटवर्क प्रचालन एवं नियंत्रण केंद्र
  4. खालिस्तान आंदोलन
  5. स्टेट ऑफ वर्ल्ड्स बर्ड्स रिपोर्ट
  6. राखीगढ़ी
  7. शिगेला बैक्टीरिया
  8. मंकीपॉक्स
  9. सीएपीएफ पुनर्वास

 


सामान्य अध्ययनII


 

विषय: विभिन्न संवैधानिक पदों पर नियुक्ति और विभिन्न संवैधानिक निकायों की शक्तियाँ, कार्य और उत्तरदायित्व।

राष्ट्रपति चुनाव में सांसदों के वोट का मूल्य


(Value of the vote of MPs in presidential elections)

संदर्भ:

जम्मू और कश्मीर में विधानसभा नहीं होने की वजह से, जुलाई में होने वाले ‘राष्ट्रपति चुनावों’ (Presidential Elections) में संसद सदस्य के वोट का मूल्य 708 से घटकर 700 हो जाने की संभावना है।

पृष्ठभूमि:

  • अगस्त 2019 में ‘लद्दाख’ तथा ‘जम्मू एवं कश्मीर’ दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित होने से पहले, तत्कालीन जम्मू-कश्मीर राज्य में 83 विधानसभा सीटें थीं।
  • ‘जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम’ के अनुसार – केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में एक विधान सभा होगी, जबकि लद्दाख पर सीधे केंद्र का शासन होगा।

एक सांसद के वोट का मूल्य:

राष्ट्रपति निर्वाचन में एक सांसद के वोट का मूल्य दिल्ली, पुडुचेरी और जम्मू और कश्मीर सहित राज्यों की विधानसभाओं और केंद्र शासित प्रदेशों में निर्वाचित सदस्यों की संख्या पर आधारित होता है।

वोट का मूल्य – प्रवृत्ति:

  1. वर्ष 1952 में हुए पहले राष्ट्रपति चुनाव के लिए एक संसद सदस्य के वोट का मूल्य 494 था।
  2. वर्ष 1957 के राष्ट्रपति चुनाव में इसमे मामूली रूप से वृद्धि हुई और इसकी कीमत बढ़कर 496 हो गयी, इसके बाद 1962 के राष्ट्रपति चुनाव में एक संसद सदस्य के वोट का मूल्य 493 तथा वर्ष 1967 और वर्ष 1969 के चुनाव में इसका मूल्य 576 रहा।
  3. वर्ष 1974 के राष्ट्रपति चुनाव में एक सांसद के वोट का मूल्य 723 था। वर्ष 1977 से 1992 तक के राष्ट्रपति चुनावों के लिए इसे 702 निर्धारित किया गया था।

राष्ट्रपति का चुनाव:

  • भारत के राष्ट्रपति का चुनाव एक ‘निर्वाचक मंडल प्रणाली’ (Electoral College System) के माध्यम से किया जाता है, जिसमें राष्ट्रीय और राज्य स्तर के विधि-निर्माताओं द्वारा वोट डाले जाते हैं।
  • राष्ट्रपति का चुनाव, भारत के निर्वाचन (Election Commission of India) द्वारा आयोजित और अपनी देखरेख में किया जाता है।

निर्वाचक मंडल:

राष्ट्रपति के चुनाव हेतु ‘निर्वाचक मंडल’ (Electoral College), संसद के ऊपरी और निचले सदनों (राज्य सभा और लोकसभा) के सभी निर्वाचित सदस्यों (सांसदों), तथा राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों (विधायकों) से बना होता है।

राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए चुनावी प्रणाली/प्रक्रिया:

राष्ट्रपति का चुनाव ‘आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली’ (System of Proportional Representation) के अनुसार ‘एकल संक्रमणीय मत’ (Single Transferable Vote) के माध्यम से किया जाता है, और ऐसे चुनाव में मतदान ‘गुप्त मतदान’ द्वारा किया जाता है।

प्रक्रिया:

  • मतदान से पहले, नामांकन चरण आता है, जिसमे चुनाव में खड़े होने का इरादा रखने वाले उम्मीदवार द्वारा 50 प्रस्तावकों और 50 समर्थकों की हस्ताक्षरित सूची के साथ नामांकन दाखिल किया जाता है।
  • ये प्रस्तावक और समर्थक, राज्य और राष्ट्रीय स्तर के निर्वाचक मंडल के कुल सदस्यों में से कोई भी हो सकते हैं।
  • निर्वाचक मंडल में शामिल एक मतदाता, एक से अधिक उम्मीदवारों के नामांकन के लिए प्रस्ताव या समर्थन नहीं कर सकता है।

प्रत्येक वोट का मूल्य और इसकी गणना:

  • प्रत्येक विधानसभा के निर्वाचित सदस्य के मतों की की संख्या की गणना करने के लिए, उस राज्य की जनसँख्या को, उस राज्य की विधानसभा के निर्वाचित सदस्यों की संख्या से विभाजित करके तथा प्राप्त भागफल को 1000 से विभाजित किया जाता है।
  • सभी सांसदों के वोटों का संयुक्त मूल्य, लगभग सभी विधायकों के संयुक्त मूल्य के बराबर होता है।

विजेता का निर्णय:

  1. राष्ट्रपति चुनाव का विजेता, वह व्यक्ति नहीं होता जिसे सबसे अधिक वोट मिलते हैं, बल्कि वह व्यक्ति होता है जिसे एक निश्चित कोटे (आवश्यक न्यूनतम संख्या) से अधिक वोट मिलते हैं।
  2. यह कोटा, प्रत्येक उम्मीदवार के लिए डाले गए कुल मतों के योग को 2 से विभाजित करके और भागफल में ‘1’ जोड़कर निर्धारित किया जाता है।
  3. जिस उम्मीदवार के लिए ‘निर्धारित कोटे’ से अधिक मत प्राप्त होते है वह विजेता होता है। यदि किसी भी उम्मीदवार को ‘कोटे’ से अधिक वोट नहीं मिलते हैं, तो सबसे कम वोट पाने वाले उम्मीदवार को मतगणना से हटा दिया जाता है।
  4. फिर, हटाए गए उम्मीदवारों के मतपत्रों को, दूसरी वरीयता पसंद के आधार पर शेष उम्मीदवारों के बीच वितरित कर दिया जाता है।
  5. इसके बाद प्रत्येक उम्मीदवार के लिए कुल मतों की गिनती की प्रक्रिया फिर दोहराई जाती है, और यह प्रक्रिया तब तक जारी रहती है, जब तक कोई भी प्रत्याशी वांछित मत प्राप्त करके विजेता घोषित नहीं कर दिया जाता।

इंस्टा जिज्ञासु:

भारत के राष्ट्रपति के पद हेतु चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार द्वारा आवश्यक अहर्ताएं क्या हैं? इस बारे में अधिक जानकारी के लिए पढ़िए

प्रीलिम्स लिंक:

  1. राष्ट्रपति का चुनाव।
  2. पात्रता
  3. निर्वाचक मंडल (इलेक्टोरल कॉलेज)
  4. राष्ट्रपति की शक्तियां और कार्य
  5. सांसदों और विधायकों के वोटों का मूल्य

मेंस लिंक:

भारत के राष्ट्रपति का चुनाव किस प्रकार होता है? भारत में राष्ट्रपति के चुनाव में राजनीतिक दलों की प्रकृति और भूमिका पर टिप्पणी कीजिए।

स्रोत: द प्रिंट।

 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

चीन-ताइवान संबंध


(China – Taiwan relations)

संदर्भ:

ताइवान को उम्मीद है, कि जिस तरह से रूस द्वारा यूक्रेन पर हमला किए जाने पर विश्व ने रूस पर प्रतिबंध पर लगा दिए है, वैसे ही यदि बीजिंग ताइवान के द्वीपीय पर हमला करता है तो दुनिया चीन पर भी प्रतिबंध लगा देगी।

ताइवान, यूक्रेन पर आक्रमण करने के लिए रूस पर पश्चिमी देशों लगाए गए प्रतिबंधों का समर्थन करने वाले देशों में शामिल हो गया है।

यूक्रेन पर हमले ने ताइवान को सुर्खियों में क्यों ला दिया है?

  • यूक्रेन की दुर्दशा को ताइवान में व्यापक सार्वजनिक सहानुभूति मिल रही है, क्योंकि कई लोग यूक्रेन में जो कुछ हो रहा है उसमे, और यदि चीन कभी भी ताइवान को अपने नियंत्रण में लाने के लिए बल का उपयोग करता है, तो उस समय की अपनी स्थिति के बीच समानता के रूप में देखते हैं।
  • यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से, चीन द्वारा इसी तरह के कदम उठाने से सावधान रहते हुए ताइवान ने अपने सर्तकता स्तर को बढ़ा दिया है, हालांकि ‘ताइपे’ में सरकार ने आसन्न चीनी हमले के कोई संकेत नहीं दिए हैं।

हालिया झड़पें:

चीन के सशस्त्र बलों द्वारा अपने संयुक्त युद्ध अभियानों में सुधार करने के लिए पिछले सप्ताह ताइवान की सीमा के नजदीक एक और दौर का अभ्यास किया गया।

ताइवान द्वारा पिछले दो वर्षों से अपनी सीमा – अधिकतर द्वीप के ‘वायु रक्षा चिह्नित क्षेत्र’ (air defence identification zone, or ADIZ) – के नजदीक लगातार चीनी सैन्य गतिविधियों के बारे में शिकायत की जा रही है।

चीन- ताइवान संबंध: पृष्ठभूमि

चीन, अपनी ‘वन चाइना’ (One China) नीति के जरिए ताइवान पर अपना दावा करता है। सन् 1949 में चीन में दो दशक तक चले गृहयुद्ध के अंत में जब ‘पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना’ के संस्थापक माओत्से तुंग ने पूरे चीन पर अपना अधिकार जमा लिया तो विरोधी राष्ट्रवादी पार्टी के नेता और समर्थक ताइवान द्वीप पर भाग गए। इसके बाद से ‘पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना’ ने ताइवान को बीजिंग के अधीन लाने, जरूरत पड़ने पर बल-प्रयोग करने का भी प्रण लिया हुआ है।

  • चीन, ताइवान का शीर्ष व्यापार भागीदार है। वर्ष 2018 के दौरान दोनों देशों के मध्य 226 बिलियन डॉलर के कुल व्यापार हुआ था।
  • हालांकि, ताइवान एक स्वशासित देश है और वास्तविक रूप से स्वतंत्र है, लेकिन इसने कभी भी औपचारिक रूप से चीन से स्वतंत्रता की घोषणा नहीं की है।
  • एक देश, दो प्रणाली” (one country, two systems) सूत्र के तहत, ताइवान, अपने मामलों को खुद संचालित करता है; हांगकांग में इसी प्रकार की समान व्यवस्था का उपयोग किया जाता है।

वर्तमान में, चीन, ताइवान पर अपना दावा करता है, और इसे एक राष्ट्र के रूप में मान्यता देने वाले देशों के साथ राजनयिक संबंध नहीं रखने की बात करता है।

 

ताइवान के संबंध में भारत का दृष्टिकोण:

  • ताइवान के संबंध में भारत की नीति स्पष्ट और सुसंगत है, और यह व्यापार, निवेश और पर्यटन के क्षेत्रों में वार्ता को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।
  • सरकार व्यापार, निवेश, पर्यटन, संस्कृति, शिक्षा और इस तरह के अन्य क्षेत्रों में, लोगों के परस्पर संपर्क एवं वार्ताओं को बढ़ावा देती है।
  • हालांकि, भारत के ताइवान के साथ औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं, लेकिन दोनों पक्षों के बीच व्यापार और लोगों से लोगों के बीच संबंध हैं।

भारत-ताइवान संबंध:

  • यद्यपि भारत-ताइवान के मध्य औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं, फिर भी ताइवान और भारत विभिन्न क्षेत्रों में परस्पर सहयोग कर रहे हैं।
  • भारत ने वर्ष 2010 से चीन की ‘वन चाइना’ नीति का समर्थन करने से इनकार कर दिया है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं कि चीन की आपत्तियों के कारण ताइवान आज तक WHO का सदस्य नहीं बन सका है? इस विषय के बारे में और जानने हेतु पढ़ें

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ताइवान की अवस्थिति और इसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि।
  2. वन चाइना नीति के तहत चीन द्वारा प्रशासित क्षेत्र।
  3. क्या ताइवान का WHO और संयुक्त राष्ट्र में प्रतिनिधित्व किया गया है?
  4. दक्षिण चीन सागर में स्थित देश।
  5. कुइंग राजवंश (Qing dynasty)।

मेंस लिंक:

भारत- ताइवान द्विपक्षीय संबंधों पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: द हिंदू।

 


सामान्य अध्ययनIII


 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

चंद्र ग्रहण ‘ब्लड मून’


(Lunar eclipse ‘Blood moon’)

संदर्भ:

दक्षिण अमेरिका, अधिकांश उत्तरी अमेरिका और यूरोप और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में 16 मई 2022 को, ‘पूर्ण चंद्र ग्रहण’ (Total Lunar Eclipse) दिखाई देगा।

  • यह 30 अप्रैल/1 मई को दक्षिणी गोलार्ध के कुछ हिस्सों में देखे गए आंशिक सूर्य ग्रहण के बाद इस वर्ष का दूसरा ग्रहण (Eclipse) होगा।
  • इस दौरान, वर्ष 2022 का पहला ‘ब्लड मून’ (Blood Moon) भी अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।

‘पूर्ण चंद्र ग्रहण’ के बारे में:

  • पूर्ण चंद्रग्रहण के दौरान, चंद्रमा का रंग आमतौर पर गहरे लाल रंग में बदल जाता है, क्योंकि इस घटना के दौरान पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है, और चंद्रमा पर पड़ने वाले सूर्य के प्रकाश के कुछ भाग को अवरुद्ध कर देती है, और जब यह सौर-प्रकाश, पृथ्वी के वातावरण से होकर कर गुजरता है तथा अपवर्तन द्वारा चंद्रमा की मुड़ जाता है तो चंद्रमा का रंग गहरा लाल प्रतीत होता है।
  • जब चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी एक सीधी रेखा में तथा सूर्य और चंद्रमा, पृथ्वी के बिल्कुल विपरीत दिशा में होते हैं, तब ‘पूर्ण चंद्र ग्रहण’ होता है।

‘ब्लड मून’ के बारे में:

चंद्रमा का रंग लाल दिखने का कारण, सौर-प्रकाश द्वारा पृथ्वी के वायुमंडल के माध्यम से गुजरने का तरीका होता है। सौर-प्रकाश कई रंगों से बना होता है और इन सभी की तरंग दैर्ध्य अलग-अलग होती है।

  • ये प्रकाश जिस तरह से हमारे वायुमंडल में यात्रा करता हैं, उसके आधार पर हमें अलग-अलग रंग दिखाई देते हैं। इसी वजह से ही, सूर्योदय और सूर्यास्त के समय सूर्य और आकाश के अलग-अलग रंग दिखाई पड़ते हैं।
  • नीले और बैगनी रंगों की तरंगदैर्घ्य कम होती है और हमारे वायुमंडल में इनके प्रकीर्णन से आकाश का रंग नीला दिकाई देता है। लाल और नारंगी रंग की तरंग दैर्ध्य सबसे अधिक होती है, और पृथ्वी के चारों ओर मुड़ने या अपवर्तित होने से पहले, ये प्रकाशकण हमारे वायुमंडल से होकर गुजरते है और चंद्रमा की सतह से टकराते है, जिससे चंद्रमा का रंग लाल प्रतीत होता है।

‘सुपरमून’ क्या है?

जिस समय चंद्रमा अपनी कक्षा में पृथ्वी के सर्वाधिक नजदीक होता है, और साथ ही अपने पूर्ण आकार में होता है, तब इस स्थिति को ‘सुपर मून’ (Supermoon) कहा जाता है।

  • पृथ्वी के सर्वाधिक नजदीक होने की वजह से, इस स्थिति में चंद्रमा अपने सामान्य आकार से अधिक बड़ा दिखाई देता है।
  • किसी एक विशिष्ट वर्ष में, लगातार दो से चार पूर्ण सुपरमून (Full Supermoons) तथा दो से चार नए सुपरमून (New Supermoons) की घटनाएँ हो सकती हैं।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप ‘उपभू’ और ‘अपभू’ के बारे में जानते हैं?

  • चंद्रमा द्वारा पृथ्वी की परिक्रमा के दौरान, एक ऐसी स्थिति आती है, जिसमे दोनों के मध्य दूरी सबसे कम (औसतन लगभग 360,000 किमी) होती है, अर्थात चंद्रमा और पृथ्वी एक-दूसरे के सर्वाधिक नजदीक होते है। इस स्थिति को ‘उपभू’ अथवा पेरिजी (Perigee) कहा जाता है।
  • तथा, पृथ्वी की परिक्रमा के दौरान चंद्रमा, जब पृथ्वी से सर्वाधिक दूरी (लगभग 405,000 किमी) पर होता है, तो इसे ‘अपभू’ अथवा ऐपोजी (Apogee) कहा जाता है ।

अब आप सुपरमून और ब्लडमून के बारे में जानते हैं – लेकिन क्या आपने कभी ‘हार्वेस्ट मून’ और ‘ब्लू मून’ के बारे में सुना है? इनके बारे में जानकारी के लिए ‘नासा’ का यह आर्टिकल पढ़िए।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. सुपरमून क्या है?
  2. ‘सुपरमून’ और ‘ब्लड मून’ में अंतर?
  3. ‘चंद्र ग्रहण’ क्या है?
  4. सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण के बीच अंतर?
  5. सूर्य और चंद्रमा की उपभू और अपभू स्थितियां।
  6. कुछ खगोलीय घटनाओं के दौरान चंद्रमा लाल रंग का क्यों दिखाई देता है?

मेंस लिंक:

एक ‘सुपरमून’ की घटना, पूरे विश्व और भारत में ‘ज्वार’ को किस प्रकार प्रभावित कर सकती है?

स्रोत: टाइम्स ऑफ इंडिया।

 

विषय: बुनियादी ढाँचाः ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि।

कोयला गैसीकरण


(Coal Gasification)

संदर्भ:

भारत को ऊर्जा के लिहाज से स्वतंत्र बनाने में सहायता के लिए, कोयला मंत्रालय ने कोयला गैसीकरण के लिए राजस्व साझाकरण में 50 प्रतिशत रियायत को स्वीकृति दे दी है।

पात्रता:

कोयला गैसीकरण को समर्थन और रियायती दर पर क्षेत्र को कोयला उपलब्ध कराने के क्रम में, कोयला मंत्रालय ने कोयला ब्लॉकों की वाणिज्यिक नीलामी के लिए राजस्व साझेदारी में 50 प्रतिशत रियायत के लिए एक नीति पेश की है। जिसके अनुसार-

अगर सफल बोलीदाता निकाले गए कोयले का या तो अपने संयंत्र (या संयंत्रों) या अपनी होल्डिंग, सहायक कंपनियों, संबद्ध कंपनियों, एसोसिएट कंपनियों में कोयले के गैसीकरण या द्रवीकरण में उपयोग करती है या सालाना आधार पर कोयले के गैसीकरण या द्रवीकरण के लिए कोयले को बेचती है तो बोलीदाता रियायत का पात्र होगा। हालांकि, यह उस साल के लिए स्वीकृत खनन योजना के तहत निर्धारित कोयला उत्पादन का कम से 10 प्रति गैसीकरण या द्रवीकरण के लिए उपभोग करने या बेचने की शर्तों से बंधा रहेगा।

‘कोयला गैसीकरण’ क्या है?

‘कोयला गैसीकरण’ (Coal Gasification)  को कोयला जलाने की तुलना में स्वच्छ विकल्प माना जाता है। कोयला गैसीकरण, कोयले को संश्लेषित गैस (Synthesis Gas)- सिनगैस (syngas)-  में परिवर्तित करने की प्रक्रिया है।

इस प्रक्रिया में कार्बन मोनोऑक्साइड (CO), हाइड्रोजन (H2), कार्बन डाइऑक्साइड (CO2), प्राकृतिक गैस (CH4), और जल वाष्प (H2O) के मिश्रण से सिनगैस का निर्माण लिया जाता है।

प्रक्रिया:

गैसीकरण से कोयले की रासायनिक विशेषताओं के उपयोग की सहूलियत मिलती है।

  • गैसीकरण के दौरान, कोयले को उच्च दबाव पर गर्म करते हुए ऑक्सीजन तथा भाप के साथ मिश्रित किया जाता है।
  • इस अभिक्रिया के दौरान, ऑक्सीजन और जल के अणु कोयले का ऑक्सीकरण करते हैं और सिनगैस का निर्माण करते हैं।

गैसीकरण के लाभ:

  1. गैस का परिवहन, कोयले के परिवहन की तुलना में बहुत सस्ता होता है।
  2. स्थानीय प्रदूषण समस्याओं का समाधान करने में सहायक होता है।
  3. गैसीकरण, पारंपरिक कोयला दहन की तुलना में अधिक दक्ष होता है क्योंकि इसमें गैसों का प्रभावी ढंग से दो बार उपयोग किया जा सकता है।

चिंताएँ और चुनौतियाँ:

  • कोयला गैसीकरण ऊर्जा उत्पादन के अधिक जल-गहन रूपों में से एक है।
  • कोयला गैसीकरण से जल संदूषण, भूमि-धसान तथा अपशिष्ट जल के सुरक्षित निपटान आदि के बारे मे चिंताएं उत्पन्न होती हैं।

भारत की कोयले पर निर्भरता:

  • भारत वर्तमान में, कोयले का दूसरा सबसे बड़ा आयातक, उपभोक्ता और उत्पादक देश है, और इसके पास दुनिया का चौथा सबसे बड़ा कोयला भंडार है।
  • यह मुख्य रूप से इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका से कोयले का आयात करता है।

कोयला क्षेत्र में किए गए हालिया सुधार:

  1. कोयले के वाणिज्यिक खनन को अनुमति प्रदान की गयी है, जिसके तहत निजी क्षेत्र को 50 ब्लॉक की पेशकश की जाएगी।
  2. बिजली संयंत्रों को ” प्रक्षालित / धुला हुआ” कोयले का उपयोग करने की अनिवार्यता संबंधी विनियमन को हटा कर ‘प्रवेश मानदंडों’ को उदार बनाया जाएगा।
  3. निजी कंपनियों को निश्चित लागत के स्थान पर राजस्व बंटवारे के आधार पर कोयला ब्लॉकों की पेशकश की जाएगी।
  4. कोल इंडिया की कोयला खदानों से ‘कोल बेड मीथेन’ (CBM) निष्कर्षण अधिकार नीलाम किए जाएंगे।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आपने ‘राष्ट्रीय कोयला सूचकांक’ के बारे में सुना है? यह उपयोगी क्यों है? इस बारे में जानकारी हेतु पढ़िए

क्या आप जानते हैं कि कोयले से उत्पादित ‘सिन-गैस’ का उपयोग विभिन्न अन्य गैसीय ईंधनों के उत्पादन के लिए किया जा सकता है?

इसमें हाइड्रोजन, स्थानापन्न प्राकृतिक गैस (SNG अथवा Methane), डी-मिथाइल ईथर (DME), तरल ईंधन जैसे मेथनॉल, इथेनॉल, सिंथेटिक डीजल और मेथनॉल डेरिवेटिव, ओलेफिन, प्रोपलीन, मोनो-एथिलीन ग्लाइकोल (MEG) जैसे रसायन, अमोनिया और डीआरआई सहित नाइट्रोजनयुक्त उर्वरक आदि शामिल हैं।

सिनगैस के बारे में अधिक जानकारी के लिए पढ़िए।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. कोयला गैसीकरण क्या है?
  2. प्रक्रिया
  3. उपोत्पाद (Byproducts)
  4. गैसीकरण के लाभ?
  5. भूमिगत कोयला गैसीकरण क्या है?
  6. कोयला द्रवीकरण क्या है?
  7. द्रवीकरण के लाभ

मेंस लिंक:

कोयला गैसीकरण एवं द्रवीकरण पर एक टिप्पणी लिखिए, तथा इसके महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: लाइवमिंट।

 

विषय: आंतरिक सुरक्षा के लिये चुनौती उत्पन्न करने वाले शासन विरोधी तत्त्वों की भूमिका।

वास्तविक नियंत्रण रेखा


(Line of Actual Control – LAC)

संदर्भ:

भारतीय सेना ने कहा है, कि छोटी घटनाओं को तीव्र होने से रोकने के लिए, भारतीय सेना और चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ‘वास्तविक नियंत्रण रेखा’ (Line of Actual Control – LAC) पर हॉटलाइन के माध्यम से नियमित संपर्क में हैं, और ‘बॉडी पुशिंग’ (Body Pushing) के चलन को रोक दिया गया है। .

वर्तमान स्थिति:

  • मई 2020 में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीन की लामबंदी ने एक संकट पैदा कर दिया, जो दो साल बाद बीत जाने के बाद अभी तक अनसुलझा है।
  • 2020 के संकट ने “चेतावनी” (wake-up call) के रूप में कार्य किया और उत्तरी सीमाओं पर खतरे से निपटने पर “अधिक ध्यान” दिए जाने की ओर धायं आकृष्ट किया।
  • 2017 में, ‘भूटान-चीन-भारत ट्राइजंक्शन’ पर भारत और चीन के बीच ‘डोकलाम’ में 73-दिवसीय सैन्य गतिरोध भी जारी रहा था।

वृहत परिदृश्य:

भारत और चीन, दोनों देशों के बीच वर्ष 1962 में केवल एक युद्ध लड़ा गया है।

  • लेकिन वर्तमान में दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव के तीव्र होने का जोखिम मौजूद है – और यह विनाशकारी हो सकता है, क्योंकि दोनों पक्ष स्थापित परमाणु शक्तियाँ हैं। इससे देश के लिए आर्थिक नुकसान भी हो सकता है, क्योंकि चीन भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक है।
  • इस तरह का ‘सैन्य गतिरोध’ (Military Stand-Off), दोनों देशों के बीच बढ़ते राजनीतिक तनाव से परिलक्षित होता है, और इससे भारत और चीन के बीच संबंधों और तनावपूर्ण बन गए हैं।
  • पर्यवेक्षकों का कहना है, कि रिश्तों में सुधार करने के लिए ‘वार्ता’ ही आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता है क्योंकि दोनों देशों के पास खोने के लिए बहुत कुछ है।

इसके बाद से भारत का दृष्टिकोण:

भारत ने ‘रणनीतिक धैर्य’ विकसित किया है और वह पूर्वी लद्दाख में दो साल के गतिरोध को हल करने के लिए निश्चयात्मकता की स्थिति से वार्ता कर रहा है।

  • भारत चाहता है कि दोनों देशों की सेनाएं पीछे हटें, तथा सीमा पर तनाव कम किया जाए, लेकिन यह कैसे किया जाना चाहिए, इस पर दोनों देशों के बीच समझ का अंतर है।
  • दोनों देशों के बीच ‘हॉटलाइन पर नियमित’ वार्ताएं आयोजित की जाएंगी।
  • सीमा पर सैन्य बलों और उपकरणों की तैनाती प्रकृति में अंशांकित करने वाली है।

भारत-चीन सीमा और LAC का विकास:

  • भारत और चीन परस्पर 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करते हैं। दुर्भाग्य से, यह पूरी सीमा विवादित है। दोनों देशों के मध्य सीमांकन करने वाली रेखा को, सर हेनरी मैकमोहन के नाम पर ‘मैकमोहन रेखा’ (McMahon line) कहा जाता है
  • वर्ष 1913 में, ब्रिटिश-भारत सरकार ने एक त्रिपक्षीय सम्मेलन बुलाया गया था, जिसमें भारतीय और तिब्बतियों के बीच वार्ता के पश्चात् भारत और तिब्बत के बीच की सीमा को औपचारिक रूप दिया गया था। इस सम्मलेन में एक अभिसमय भी लागू किया गया था, जिसके तहत भारत-तिब्बत सीमा का परिसीमन किया गया। हालाँकि, चीन द्वारा इस सीमा को अवैध बताया जाता है, और इसे विवादित करार दिया गया है।
  • वर्ष 1957 में चीन ने ‘अक्साई चिन’ पर कब्जा कर लिया और इस क्षेत्र से होकर एक सड़क का निर्माण किया। इस प्रकरण के बाद से, सीमा पर कई बार झड़पें हुईं, जिसकी परिणति अंततः 1962 के ‘सीमा-युद्ध’ के रूप में हुई।
  • युद्ध के बाद बनी सीमा को ‘वास्तविक नियंत्रण रेखा’ (Line of Actual Control – LAC) के रूप में जाना जाने लगा। इस सीमा-रेखा पर सेना का नियंत्रण रहता है।

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप स्थलीय सीमाओं से संबंधी चीन के नए कानून के बारे में जानते हैं? यह विवादास्पद क्यों है? इस बारे में अधिक जानकारी के लिए पढ़िए

प्रीलिम्स लिंक:

  1. LoC क्या है और इसे किस प्रकार निर्धारित किया गया है? इसका भौगोलिक विस्तार और महत्व?
  2. LAC क्या है?
  3. नाथू ला कहाँ है?
  4. पैंगोंग त्सो कहाँ है?
  5. अक्साई चिन का प्रशासन कौन करता है?
  6. ‘नाकू ला’ कहाँ है?
  7. पैंगोंग त्सो झील क्षेत्र पर किसका नियंत्रण है?

मेंस लिंक:

बुनियादी ढांचे के निर्माण से सीमावर्ती क्षेत्रों को भीतरी इलाकों के साथ एकीकृत करने में मदद मिलेगी, और देश द्वारा देखभाल किए जाने की सकारात्मक धारणा पैदा होगी तथा लोगों को सुरक्षित सीमाओं के नजदीक सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


 डल झील का कायाकल्प

बढ़ते प्रदूषण से निपटने और डल झील (Dal Lake) को फिर से जीवंत करने के लिए, उपराज्यपाल मनोज सिन्हा द्वारा ‘अठवास’ (Athwas) नामक एक अनूठी पहल शुरू की गई है।

  • ‘अठवास’, झील के कायाकल्प के लिए नागरिकों और अधिकारियों के बीच एक अनूठी साझेदारी है। इसमें सामुदायिक भागीदारी शामिल है।
  • इस पहल के तहत, नागरिकों के सहयोग से ‘जलीय घास को बाहर निकलना’/ ‘डी-वीडिंग’ (de-weeding) और ‘पंक / कीचड को बाहर निकलना’, अर्थात ‘पंकोत्सरण’ (Dredging) हेतु कार्य किए जाएंगे।

डल झील के बारे में:

  • डल (Dal) को जम्मू और कश्मीर की ग्रीष्मकालीन राजधानी के रूप में जाना जाता था।
  • इसे “कश्मीर के ताज में जड़ा रत्न” या “श्रीनगर का आभूषण” नाम दिया गया है।
  • यह झील मत्स्यन और जलीय पौधों की फसल के वाणिज्यिक संचालन के लिए भी एक महत्वपूर्ण स्रोत है।
  • डल झील, जबरवन पर्वत घाटी (Zabarwan mountain valley) में शंकराचार्य पहाड़ियों की तलहटी में स्थित है, ये पहाड़ियां इस झील को तीन तरफ से घेरे हुए है।
  • झील में हजरतबल, बोड दाल, गगरीबल और नागिन- चार मुख्य परस्पर जुड़े हुए बेसिन हैं।
  • यहां तैरते हुए बगीचे, जिन्हें कश्मीरी में “राड” (Raad) के नाम से जाना जाता है, जुलाई और अगस्त के दौरान कमल के फूलों के साथ खिलते हैं।

भारत की सकल प्रजनन दर

(India’s total fertility rate)

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) के पांचवें दौर की रिपोर्ट के अनुसार:

  • सकल प्रजनन दर (TFR), प्रति महिला बच्चों की औसत संख्या, 2015-16 में किए गए चौथे राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-4) और पांचवे राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) के बीच राष्ट्रीय स्तर पर 2.2 से 2.0 तक कम हुई है।
  • यह जनसंख्या नियंत्रण उपायों की महत्वपूर्ण प्रगति को दर्शाता है।
  • भारत में केवल पांच राज्य हैं, जो प्रजनन क्षमता के प्रतिस्थापन स्तर से 2.1. ऊपर हैं इनमें बिहार (2.98), मेघालय (2.91), उत्तर प्रदेश (2.35), झारखंड (2.26) और मणिपुर (2.17) शामिल हैं।
  • भारत में संस्थागत जन्म 79 प्रतिशत से बढ़कर 89 प्रतिशत हो गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में भी लगभग 87 प्रतिशत जन्म संस्थानों में होता है और शहरी क्षेत्रों में यह 94 प्रतिशत है।

सकल प्रजनन दर:

सकल प्रजनन दर (Total Fertility Rate – TFR) को प्रति महिला बच्चों की औसत संख्या के रूप में मापा जाता है।

 

‘राष्ट्रीय परिवार और स्वास्थ्य सर्वेक्षण’ (NFHS) के बारे में:

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (National Family Health Survey – NFHS) बड़े पैमाने पर किया जाने वाला एक बहु-चरणीय सर्वेक्षण है, जिसे पूरे भारत में परिवारों के प्रतिनिधि प्रतिदर्शों (नमूनों) में आयोजित किया जाता है।

  • सभी ‘राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण’, भारत सरकार के ‘स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय’ नेतृत्व में किए जाते है, और इसमें, मुंबई स्थित ‘अंतर्राष्ट्रीय जनसंख्या विज्ञान संस्थान’ (International Institute for Population Sciences- IIPS) नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करता है।
  • NFHS-5 में विशेष ध्यान वाले कुछ नए क्षेत्रों को शामिल किया गया है, जैसे मृत्यु पंजीकरण, पूर्व-विद्यालय शिक्षा, बाल टीकाकरण के विस्तारित क्षेत्र, बच्चों के लिए सूक्ष्म पोषक तत्वों के घटक, मासिक धर्म स्वच्छता, शराब एवं तंबाकू के उपयोग की आवृत्ति, गैर-संक्रामक रोगों (एनसीडी) के अतिरिक्त घटक रोग, 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी लोगों में उच्च रक्तचाप और मधुमेह को मापने के लिए विस्तारित आयु सीमा। इन सभी से, मौजूदा कार्यक्रमों को मजबूत करने तथा नीतिगत हस्तक्षेप के लिए नई रणनीति विकसित करने के लिए आवश्यक विवरण प्राप्त होगा।

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) के प्रत्येक क्रमिक चरण के दो विशिष्ट लक्ष्य होते हैं:

  1. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तथा अन्य एजेंसियों द्वारा नीति निर्माण व कार्यक्रम के अन्य उद्देश्यों की पूर्ति हेतु स्वास्थ्य और परिवार कल्याण पर अपेक्षित आवश्यक विवरण प्रदान करना।
  2. स्वास्थ्य और परिवार कल्याण के महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर जानकारी प्रदान करना।

 

नेटवर्क प्रचालन एवं नियंत्रण केंद्र

(Network Operation and Control Centre – NOCC )

चर्चा का कारण:

व्यवसाय करने में आसानी को बढ़ाने के लिए, दूरसंचार विभाग (DoT) ने VSAT, सैटेलाइट टेलीफोन आदि जैसी सभी सेवाओं के लिए अंतरिक्ष अनुभागों के उपयोग के लिए ‘नेटवर्क प्रचालन एवं नियंत्रण केंद्र’ (Network Operation and Control Centre – NOCC )  शुल्क हटा दिया है, इसके लिए विभाग द्वारा परमिट जारी किए जाते हैं।

इससे पहले, दूरसंचार विभाग द्वारा 36 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम के लिए प्रति वर्ष 21 लाख रुपये प्रति ट्रांसपोंडर एनओसीसी NOCC शुल्क निर्धारित किया गया था।

NOCC के बारे में:

कक्षा में उपग्रहों के संचालन का प्रबंधन करने के लिए अंतरिक्ष विभाग के तहत ‘मुख्य नियंत्रण सुविधा’ के साथ-साथ ‘ग्राउंड सेगमेंट’ (सैटेलाइट अर्थ स्टेशनों) से प्रसारण को नियंत्रित करने के लिए ‘दूरसंचार विभाग’ के तहत ‘नेटवर्क प्रचालन एवं नियंत्रण केंद्र’ (NOCC ) का गठन किया गया था।

खालिस्तान आंदोलन

खालिस्तान आंदोलन (Khalistan Movement), एक अलग सिख राज्य बनाने के लिए किया जा रहा आंदोलन है और इसकी उत्पत्ति ‘पंजाबी सूबा’ आंदोलन से हुई है।

  • सबसे पहले अकाली दल – एक सिख बहुल राजनीतिक दल – द्वारा एक अलग सिख सूबा या प्रांत बनाने की मांग की गयी थी।
  • भाषाई समूहों द्वारा अलग राज्यों की मांग का आकलन करने के लिए गठित ‘राज्य पुनर्गठन आयोग’ ने अपनी सिफारिशों में ‘अकाली दल’ की इस मांग को खारिज कर दिया था।
  • बाद में, तत्कालीन पंजाब राज्य को पंजाबी-बहुल पंजाब, हिंदी-बहुल हरियाणा और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ में विभाजित किया गया था। राज्य के कुछ पहाड़ी क्षेत्रों को हिमाचल प्रदेश में मिला दिया गया।

चर्चा का कारण:

हाल ही में, हिमाचल प्रदेश विधान सभा के मुख्य प्रवेश द्वार और दीवारों पर खालिस्तान के झंडे बंधे पाए गए। विधानसभा परिसर की दीवारों पर नारे भी लिखे गए। हालाँकि प्रशासन ने इन झंडों को हटा दिया है।

स्टेट ऑफ वर्ल्ड्स बर्ड्स रिपोर्ट

हाल ही में ‘स्टेट ऑफ वर्ल्ड्स बर्ड्स’ (State of World’s Birds) नामक एक रिपोर्ट जारी की गयी है।

  • यह एक विशेषज्ञ समीक्षित (Peer-Reviewed) पत्रिका है।
  • यह ‘बर्डलाइफ इंटरनेशनल’ का प्रमुख वैज्ञानिक अध्ययन प्रकाशन है, जिसमे हमारे पारिस्थितिक तंत्र की स्थिति का आकलन करने के लिए पक्षियों का उपयोग किया जाता है।

2022 की रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु:

  • दुनिया भर में पक्षियों की लगभग ज्ञात 48% प्रजातियों की आबादी कम हो चुकी है, उनकी संख्या में गिरावट का होने का संदेह है।
  • भारत में, लगभग 80% प्रजातियों की संख्या में कमी हो रही हैं, और लगभग 50% प्रजातियों की संख्या तेजी से घटती जा रही हैं।
  • उत्तर अमेरिकी प्रजातियों में से लगभग 57% में गिरावट की प्रवृत्ति दर्ज की जा रही है, 1970 के बाद से लगभग 3 बिलियन पक्षियों का शुद्ध नुकसान हुआ है।
  • यूरोपीय संघ के देशों में भी समान स्थिति है, इन देशों की 378 प्रजातियों में, 1980 और 2017 के बीच पक्षी प्रजनन में 17-19% की कमी की प्रवृत्ति का संकेत मिलता है।
  • अध्ययन में पाया गया है, कि उष्ण कटिबंध से पक्षियों की प्रजातियों और बहुतायत के आंकड़े दुर्लभ हैं, लेकिन भारत जैसे कई देशों में, नागरिक विज्ञान संचालित डेटा उपलब्ध था।

पक्षी प्रजातियों की आबादी गिरावट के पीछे कारण:

  • रिपोर्ट में, पक्षियों की 10,994 मान्यता प्राप्त मौजूदा प्रजातियों में से लगभग आधे के लिए खतरे के लिए, प्राकृतिक दुनिया और जलवायु परिवर्तन पर ‘मानव पदचिह्न’ के विस्तार को जिम्मेदार ठहराया गया है।
  • प्राकृतिक आवासों का ह्रास तथा नष्ट होने, और साथ ही साथ कई प्रजातियों का प्रत्यक्ष अतिदोहन, पक्षी प्रजाति जैव विविधता के लिए प्रमुख खतरे हैं।

‘बर्डलाइफ इंटरनेशनल’ गैर-सरकारी संगठनों की एक वैश्विक साझेदारी है। यह पक्षियों और उनके आवासों के संरक्षण का प्रयास करती है।

मुख्यालय: यूनाइटेड किंगडम कैम्ब्रिज, यूनाइटेड किंगडम।

राखीगढ़ी

वर्ष 1997 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के पूर्व निदेशक अमरेंद्र नाथ द्वारा इस पुरातात्विक स्थल पर खुदाई किए जाने की बाद से, हरियाणा में ‘राखीगढ़ी’ (Rakhigarhi), एक पुरातात्विक हॉटस्पॉट बन गयी है।

  • इस 5,000 साल पुराने पुरातत्व स्थल में, हड़प्पा युग से वर्तमान समय तक निरंतरता को प्रदर्शित करने के चिह्न मिलते है। इस गांव में दो सौ साल पुरानी हवेलियां अभी भी मौजूद हैं।
  • यह स्थल, मौसमी घग्गर नदी से लगभग 27 किमी दूर- सरस्वती नदी के मैदान में स्थित है।
  • ‘राखीगढ़ी पुरातत्व स्थल’ केंद्रीय बजट 2020-21 में केंद्र सरकार द्वारा घोषित “पांच प्रतिष्ठित स्थलों” में से एक है।

चर्चा का कारण:

हाल ही में, राखीगढ़ी में मिले दो मानव कंकालों से एकत्र किए गए डीएनए नमूने वैज्ञानिक जांच के लिए भेजे गए हैं। इसके परिणाम हजारों साल पहले राखीगढ़ी क्षेत्र में रहने वाले लोगों के वंश और भोजन की आदतों के बारे में बता सकते हैं।

 

शिगेला बैक्टीरिया

हाल ही में, केरल में ‘खाद्य विषाक्तता’ / फूड पॉइज़निंग की घटना से एक 16 वर्षीय लड़की की जान चली गई। इस लडकी ने एक रेस्तरां में चिकन शावरमा (chicken shawarma) खाया था, जिसमे ‘शिगेला कीटाणु’ (Shigella germs) पाए गए थे।

शिगेला (Shigella) के बारे में:

‘शिगेला’, बैक्टीरिया के एंटरोबैक्टर परिवार (Enterobacter Family) द्वारा निर्मित एक ‘जीवाणु संक्रमण’ है और दुनिया भर में ‘अतिसार’ (Diarrhoea) के सबसे आम कारणों में से एक है।

  • इसके कारण ‘शिगेलोसिस संक्रमण’ (Shigellosis infection) होता है।
  • शिगेला के संक्रमण से अधिकांश रोगियों में दस्त (कभी-कभी खूनी), बुखार और पेट में ऐंठन होती है।
  • रोगी के अपशिष्ट के साथ प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संपर्क के माध्यम से यह रोग आसानी से फैलता है।
  • इसके उपचार के लिए, बीमार या अंतर्निहित समस्याओं वाले लोगों को एंटीबायोटिक्स प्रदान की जानी चाहिए।

 

मंकीपॉक्स

मंकीपॉक्स (Monkeypox) वायरस, पॉक्सविरिडे फैमिली (Poxviridae Family) में ऑर्थोपॉक्सवायरस जीनस (Orthopoxvirus Genus) का सदस्य है। इस वायरस को बंदरों में चेचक जैसी बीमारी के रूप में पहचाना जाता है, इसलिये इसे मंकीपॉक्स नाम दिया गया है। यह नाइजीरिया की स्थानिक बीमारी है।

  • ‘मंकीपॉक्स’ एक ज़ूनोटिक रोग (Zoonotic Disease) है अर्थात जानवरों से मनुष्यों में संचरण होने वाला रोग है।
  • गिलहरी, गैम्बियन शिकार चूहों, डॉर्मिस और बंदरों की कुछ प्रजातियों में मंकीपॉक्स वायरस के संक्रमण का पता चला है।
  • मंकीपॉक्स, चेचक के समान लक्षण पैदा करता है, हालांकि वे कम गंभीर होते हैं।
  • 1980 में टीकाकरण से दुनिया भर में चेचक का उन्मूलन हो गया, जबकि मध्य और पश्चिम अफ्रीका के देशों में मंकीपॉक्स का प्रकोप जारी है, और कभी-कभी यह अन्य जगहों पर भी दिखाई देता है।

चर्चा का कारण:

यूनाइटेड किंगडम के स्वास्थ्य अधिकारियों ने मंकीपॉक्स के एक मामले की पुष्टि की है। यूके में मंकीपॉक्स वायरस की पहली घटना 2018 में बार दर्ज की गई थी, और तब से स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा केवल कुछ मामलों की ही पुष्टि की गई है।

 

सीएपीएफ पुनर्वास

हाल ही में, केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा ‘कल्याण और पुनर्वास बोर्ड’ (WARB) के माध्यम से ‘सीआरपीएफ और बीएसएफ’ जैसे केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) से संबंधित कर्मियों के लिए ‘CAPF पुनर्वास’  नामक एक पोर्टल लॉन्च किया गया है।

  • इसका उद्देश्य, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) और ‘असम राइफल’ के सेवानिवृत्त कर्मियों को निजी सुरक्षा एजेंसियों में रोजगार सुरक्षित करने में सुविधा प्रदान करना है।
  • इसके लिए उन्हें कल्याण और पुनर्वास बोर्ड (WARB) पर अपनी विशेषज्ञता के क्षेत्र और पसंदीदा रोजगार स्थल के साथ अपना व्यक्तिगत विवरण अपलोड करना होगा। ‘‘सीएपीएफ पुनर्वास’’ (CAPF Punarvaas) नामक वेबसाइट सेवानिवृत्त कर्मियों को नौकरी ढूंढने में मदद पहुंचाएगी।