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[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 6 May 2022

विषयसूची

सामान्य अध्ययन-II

  1. नागरिकता (संशोधन) अधिनियम 2019
  2. विश्व खाद्य कार्यक्रम
  3. वेस्ट बैंक की बस्तियों से निष्कासन आदेश

सामान्य अध्ययन-III

  1. FSSAI की स्टार रेटिंग
  2. सागरमाला परियोजना में नॉर्डिक राष्ट्रों की भागीदारी

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

  1. हफ़लौंग हिंदी
  2. विश्व खाद्य पुरस्कार
  3. भारतीय दंड संहिता की धारा 143

 


सामान्य अध्ययनII


 

विषय: संसद और राज्य विधायिका- संरचना, कार्य, कार्य-संचालन, शक्तियाँ एवं विशेषाधिकार और इनसे उत्पन्न होने वाले विषय।

नागरिकता (संशोधन) अधिनियम नियम


(Citizenship (Amendment) Act Rules)

संदर्भ:

हाल ही में, गृह मंत्री अमित शाह ने फिर से दोहराते हुए कहा है कि, कोविड -19 महामारी समाप्त होते ही ‘नागरिकता (संशोधन) अधिनियम’ (Citizenship (Amendment) Act CAA) लागू किया जाएगा।

नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 के बारे में:

नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 (CAA), 11 दिसंबर, 2019 को संसद द्वारा पारित किया गया था, इसके ठीक 24 घंटे के भीतर ही 12 दिसंबर को यह अधिनियम अधिसूचित कर दिया गया था।

  • इस संशोधन का उद्देश्य ‘नागरिकता अधिनियम’, 1955 में संशोधन करना है।
  • ‘नागरिकता अधिनियम, 1955’ में नागरिकता प्राप्त करने हेतु विभिन्न तरीके निर्धारित किये गए हैं।
  • इसके तहत, भारत में जन्म के आधार पर, वंशानुगत, पंजीकरण, प्राकृतिक एवं क्षेत्र समाविष्ट करने के आधार पर नागरिकता हासिल करने का प्रावधान किया गया है।

‘नागरिकता (संशोधन) अधिनियम के बारे में:

नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (CAA), का उद्देश्य पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के उत्पीड़ित अल्पसंख्यकों – हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाईयों – को भारत की नागरिकता प्रदान करना है।

  • अधिनियम के अनुसार, अपने-अपने देशों में धार्मिक आधार पर उत्पीड़न का सामना करने वाले इन समुदायों के जो व्यक्ति 31 दिसंबर 2014 तक भारत में पलायन कर चुके थे, उन्हें अवैध अप्रवासी नहीं माना जाएगा बल्कि उन्हें भारतीय नागरिकता दी जाएगी।
  • अधिनियम के एक अन्य प्रावधान के अनुसार, केंद्र सरकार द्वारा कुछ आधारों पर प्रवासी नागरिकों के ‘ओवरसीज़ सिटीज़न ऑफ इंडिया’ (OCI) पंजीकरण को भी रद्द किया जा सकता है।

अपवाद:

  • संविधान की छठी अनुसूची में शामिल होने के कारण यह अधिनियम त्रिपुरा, मिजोरम, असम और मेघालय के आदिवासी क्षेत्रों पर लागू नहीं होता है।
  • इसके अलावा बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन, 1873 के तहत अधिसूचित ‘इनर लिमिट’ के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों भी इस अधिनियम के दायरे से बाहर होंगे।

इस कानून से संबंधित मुद्दे:

  • यह क़ानून संविधान के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन करता है। इसके अंतर्गत धर्म के आधार पर अवैध प्रवासियों की पहचान की गयी है।
  • यह क़ानून स्थानीय समुदायों के लिए एक जनसांख्यिकीय खतरा समझा जा रहा है।
  • इसमें, धर्म के आधार पर अवैध प्रवासियों को नागरिकता का पात्र निर्धारित किया गया है। साथ ही इससे, समानता के अधिकार की गारंटी प्रदान करने वाले संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन होगा।
  • यह किसी क्षेत्र में बसने वाले अवैध प्रवासियों की नागरिकता को प्राकृतिक बनाने का प्रयास करता है।
  • इसके तहत, सरकार के लिए, किसी भी कानून के उल्लंघन करने पर प्रवासी नागरिकों के ‘ओसीआई’ पंजीकरण को रद्द करने की शक्ति दी गई है। यह काफी व्यापक आधार है जिसमें मामूली अपराधों सहित कई प्रकार के उल्लंघन शामिल हो सकते हैं।

इंस्टा जिज्ञासु:

‘राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर’ (NRC), नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (CAA) से किस प्रकार भिन्न है?  क्या दोनों में कोई समानता है? चर्चा कीजिए।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (CAA) के बारे में
  2. प्रमुख विशेषताएं
  3. अधिनियम में किन धर्मों को शामिल किया गया है?
  4. अधिनियम कवर किए गए देश?
  5. अपवाद

मेंस लिंक:

नागरिकता (संशोधन) अधिनियम के कार्यान्वयन से संबंधित मुद्दों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार।

विश्व खाद्य कार्यक्रम


(World Food Programme – WFP)

संदर्भ:

‘संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम’ (UN World Food Programme – WFP) के अनुसार, रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध जारी होने की वजह से कई देश खाद्य सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, इसे देखते हुए ‘विश्व खाद्य कार्यक्रम’, गेहूं की खरीद करने हेतु भारत के साथ वार्ता कर रहा है।

पृष्ठभूमि:

फरवरी 2022 में, भारत द्वारा अफगानिस्तान में मानवीय सहायता भेजने के लिए की गयी प्रतिबद्धता के तहत, संयुक्त राष्ट्र के ‘विश्व खाद्य कार्यक्रम’ (World Food Programme – WFP) के साथ 50,000 मीट्रिक टन गेहूं के वितरण के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे।

फसल वर्ष 2020-21 (जुलाई-जून) में भारत का गेहूं उत्पादन 109.59 मिलियन टन रहा है।

संयुक्त राष्ट्र का विश्व खाद्य कार्यक्रम:

विश्व खाद्य कार्यक्रम (World Food Programme – WFP) संयुक्त राष्ट्र की ‘खाद्य सहायता शाखा’ है, और यह दुनिया का सबसे बड़ा मानवीय संगठन है जो भुखमरी संबंधी समस्या का समाधान करता है और खाद्य सुरक्षा को बढ़ावा देता है।

  • 1961 में शुरू, ‘विश्व खाद्य कार्यक्रम’ भूख और कुपोषण को मिटाने का प्रयास करता है, और इसका अंतिम लक्ष्य ‘खाद्य सहायता की आवश्यकता को समाप्त करना’ है।
  • यह कर्यक्रम, ‘संयुक्त राष्ट्र विकास समूह’ (United Nations Development Group) का सदस्य है और इसकी कार्यकारी समिति का एक भाग है।
  • WFP खाद्य सहायता, सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी से लड़ने, बाल मृत्यु दर को कम करने, मातृ स्वास्थ्य में सुधार और एचआईवी और एड्स सहित बीमारी से लड़ने के लिए भी प्रदान की जाती है।

‘संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम’, रोम स्थित संयुक्त राष्ट्र की अन्य दो एजेंसियों के साथ मिलकर काम करता है:

  1. खाद्य एवं कृषि संगठन’ (Food and Agriculture Organization – FAO), जो देशों को संवहनीय कृषि हेतु सहयोग करने के लिए नीति निर्माण और कानून बदलने में मदद करता है।
  2. ‘अंतर्राष्ट्रीय कृषि विकास कोष’ (International Fund for Agricultural Development – IFAD), जो गरीब ग्रामीण क्षेत्रों में जारी परियोजनाओं को वित्तपोषित करता है।

वित्त पोषण:

विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) के पास ‘धन’ के लिए कोई स्वतंत्र स्रोत नहीं है, यह पूरी तरह से स्वैच्छिक दान द्वारा वित्त पोषित होता है। इस कार्यक्रम के लिए प्रमुख अनुदानकर्ता सदस्य देशों की सरकारें होती हैं, लेकिन इस संगठन को निजी क्षेत्र और व्यक्तियों से भी अनुदान प्राप्त होता है।

इंस्टा जिज्ञासु:

‘विश्व भुखमरी मानचित्र’ क्या है?

अलीबाबा ग्रुप की क्लाउड कंप्यूटिंग शाखा- अलीबाबा क्लाउड, एक डिजिटल “वर्ल्ड हंगर मैप” (World Hunger Map) विकसित करने के लिए WFP के साथ काम कर रही है।

  • यह मानचित्र वैश्विक भुखमरी और इसे ख़त्म करने हेतु चलाए जा रहे कार्यक्रमों पर नजर रखने में मदद करेगा। वर्ष 2030 तक वैश्विक भुखमरी को समाप्त करना, संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख सतत विकास लक्ष्यों में से एक है।
  • इसका उद्देश्य हस्तक्षेपों की दक्षता को बढ़ावा देना और आपातकालीन प्रतिक्रिया समय को कम करना है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘विश्व खाद्य कार्यक्रम’ की शुरुआत
  2. उद्देश्य?
  3. विश्व भूखमरी मानचित्र
  4. संयुक्त राष्ट्र विकास समूह के सदस्य
  5. नोबेल शांति पुरस्कार के बारे में

मेंस लिंक:

संयुक्त राष्ट्र के विश्व खाद्य कार्यक्रम के उद्देश्यों की विवेचना कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

वेस्ट बैंक की बस्तियों से निष्कासन आदेश


संदर्भ:

इज़राइल के सुप्रीम कोर्ट ने, हाल ही में, इज़राइल के कब्जे वाले ‘वेस्ट बैंक’ में स्थित आठ फिलिस्तीनी बस्तियों के खिलाफ काफी समय से लंबित ‘निष्कासन आदेश’ (Expulsion Order) को बरकरार रखा है, जिससे कम से कम 1,000 लोगों के बेघर हो जाने की संभावना है।

पृष्ठभूमि:

1980 के दशक की शुरुआत में इज़राइली सेना ने इस क्षेत्र को ‘गोलीबारी और प्रशिक्षण क्षेत्र’ घोषित कर दिया था। इज़राइली अधिकारियों ने तर्क दिया है कि, यहाँ के निवासी इस क्षेत्र को केवल मौसमी कृषि के लिए उपयोग करते थे और उस समय यहाँ पर कोई स्थायी संरचना नहीं थी।

नवंबर 1999 में, सुरक्षा बलों ने इस क्षेत्र से लगभग 700 ग्रामीणों को निष्कासित कर दिया और उनके मकानों और पानी के कुंडों को नष्ट कर दिया। इसके अगले वर्ष, ‘वेस्ट बैंक’ क्षेत्र को लेकर कानूनी लड़ाई शुरू हुई थी।

निष्कासित परिवारों का पक्ष:

  • ‘वेस्ट बैंक’ में स्थित फिलिस्तीनी बस्तियों से निष्कासित किए जाने वाले परिवारों का कहना है, कि वे 1967 के मिडिल-ईस्ट युद्ध के दौरान वेस्ट बैंक पर इज़राइल द्वारा कब्जा करने से बहुत पहले, दशकों से यहाँ पर रह रहे हैं।
  • ये लोग, रेगिस्तानी कृषि और पारंपरिक पशुपालन का कार्य करते हैं, और जिसमे से वर्ष में कुछ समय के लिए गुफाओं में रहने के लिए चले जाते हैं। इन लोगों का कहना है, कि इस कठोर और संघर्ष भरे सामुदायिक जीवन में उनके रहने वाले एकमात्र घरों के नष्ट हो जाने का खतरा सामने आ गया है।

Current Affairs

 

‘वेस्ट बैंक’ की अवस्थिति:

‘वेस्ट बैंक’ (West Bank) पश्चिमी एशिया के भूमध्यसागरीय तट के पास एक स्थल-रुद्ध क्षेत्र है। पूर्व में इसकी सीमा जॉर्डन से मिलती है तथा यह दक्षिण, पश्चिम और उत्तर में ‘ग्रीन-लाइन’ द्वारा इज़राइल से पृथक होता है। वेस्ट बैंक के अंतर्गत पश्चिमी मृत सागर तट का काफी हिस्सा भी आता है।

इस क्षेत्र की बस्तियाँ और विवाद:

  1. वर्ष 1948 के अरब-इजरायल युद्ध के पश्चात् वेस्ट बैंक पर जॉर्डन द्वारा कब्जा कर लिया गया था।
  2. इजरायल ने वर्ष 1967 के छह दिवसीय युद्ध के पश्चात इसे वापस छीन लिया, और तब से वेस्ट बैंक पर इसका अधिकार है। इस लड़ाई में इजराइल ने मिस्र, सीरिया और जॉर्डन की संयुक्त सेनाओं को हराया था ।
  3. इजराइल ने वेस्ट बैंक में लगभग 130 औपचारिक बस्तियों का निर्माण किया है, तथा पिछले 20-25 वर्षों के दौरान इस क्षेत्र में इसी तरह की कई छोटी, अनौपचारिक बस्तियां विकसित हो चुकी हैं।
  4. इस क्षेत्र में 4 लाख से अधिक इजरायल उपनिवेशी निवास करते है, उनमें से कई यहूदी धार्मिक लोग, इस भूमि पर बाइबिल के अनुसार अपने पैदाइशी हक़ का दावा करते हैं।
  5. इनके अतिरिक्त्त, इस क्षेत्र में 26 लाख फिलिस्तीनियों इस क्षेत्र में निवास करते है।
  6. जब 1967 में इज़राइल द्वारा इस भूमि पर कब्ज़ा किया गया था, तब इसने यहूदी लोगों को इस स्थान पर बसने की अनुमति दी। लेकिन फिलिस्तीनियों द्वारा ‘वेस्ट बैंक’ फ़िलिस्तीनी भूमि पर अवैध कब्जा माना जाता है।

इन बस्तियों की वैधानिक स्थिति:

  1. संयुक्त राष्ट्र महासभा, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के अनुसार- वेस्ट बैंक में स्थित इजराइली बस्तियां, चतुर्थ जेनेवा अभिसमय (Fourth Geneva Convention) का उल्लंघन करती हैं।
  2. चौथे जिनेवा अभिसमय (1949) के अनुसार- किसी क्षेत्र पर कब्ज़ा करने वाली शक्ति, अपनी नागरिक आबादी के किसी भी हिस्से को अधिकृत क्षेत्र में निर्वासित या स्थानांतरित नहीं करेगी ।
  3. 1998 में अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायालय की स्थापना करने वाले रोम अधिनियम (Rome Statute) के अनुसार- कब्ज़ा करने वाली शक्ति द्वारा इस तरह का कोई भी स्थानांतरण ‘युद्ध अपराध’ के समान होगा, जिसमे सैन्य बलों द्वारा अवैध और निर्दयतापूर्वक संपतियों का नुकसान व उन पर कब्ज़ा किया जाता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. इजरायल-फिलिस्तीन विवाद क्या है?
  2. दोनों के बीच विवादित सीमाएं
  3. वेस्ट बैंक बस्ती विवाद
  4. इस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र, इज़राइल, फिलिस्तीन द्वारा लिया गया स्टैंड
  5. इस मुद्दे से उत्पन्न चुनौतियाँ
  6. भारत का रुख

मेंस लिंक:

मध्य एशिया क्षेत्र पर इज़राइल-फिलिस्तीन विवाद के प्रभाव तथा भारत के हितों पर इसके प्रभाव के बारे में चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 


सामान्य अध्ययनIII


 

विषय: प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कृषि सहायता तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य से संबंधित विषय; जन वितरण प्रणाली- उद्देश्य, कार्य, सीमाएँ, सुधार; बफर स्टॉक तथा खाद्य सुरक्षा संबंधी विषय; प्रौद्योगिकी मिशन; पशु पालन संबंधी अर्थशास्त्र।

FSSAI की स्टार रेटिंग


(FSSAI’s Star Rating)

संदर्भ:

भारतीय खाद्य सुरक्षा मानक प्राधिकरण (Food Safety Standards Authority of India – FSSAI) द्वारा उपभोक्ताओं को अस्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों का सेवन कम करने में मदद करने हेतु “स्वास्थ्य स्टार रेटिंग” (Health Star Rating – HSR) प्रणाली को अपनाने की योजना का एक दर्जन से अधिक उपभोक्ता और स्वास्थ्य- वकालत समूहों द्वारा विरोध किया जा रहा है।

FSSAI की स्टार रेटिंग के बारे में:

फरवरी 2022 में, ‘भारतीय खाद्य सुरक्षा मानक प्राधिकरण’ (FSSAI) द्वारा “हेल्थ-स्टार रेटिंग सिस्टम” अपनाने का फैसला किया गया था। इस प्रणाली में, पैकेज लेबल के अग्र भाग (Front of Package Labelling – FOPL) के लिए निर्धारित मसौदा नियमों में, उत्पाद को 1/2 स्टार से 5 स्टार तक दिए जाने का प्रावधान है।

  • इसका उद्देश्य, उपभोक्ताओं को अस्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों का सेवन कम करने में मदद करना है।
  • “हेल्थ-स्टार रेटिंग” (HSR) प्रारूप में, नमक, चीनी और वसा सामग्री के आधार पर किसी भी पैकेज्ड खाद्य पदार्थ की रैंकिंग की जाती है, और इस रेटिंग को पैकेज के अग्रभाग पर मुद्रित किया जाएगा।
  • “हेल्थ-स्टार रेटिंग” (HSR) का अंतर्निहित आधार यह है, कि फल और मेवा (nuts) जैसे सकारात्मक तत्व, किसी उत्पाद के लिए निर्दिष्ट स्टार्स की गणना करने के लिए, कैलोरी, संतृप्त वसा, कुल चीनी, सोडियम जैसे नकारात्मक पोषक तत्वों की भरपाई कर सकते हैं।

प्रयोज्यता:

सभी डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों या प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों पर HSR लेबल लगाया जाएगा। इन खाद्य पदार्थों में चिप्स, बिस्कुट, नमकीन, मिठाई और चॉकलेट, मीट नगेट्स और कुकीज शामिल हैं।

छूट: हालांकि, दूध और इसके उत्पादों जैसे छेना और घी को, 2019 में अधिसूचित FSSAI ड्राफ्ट के अनुसार इस नियम से छूट दी गई है।

“हेल्थ-स्टार रेटिंगकी आवश्यकता:

  • बहुत से भारतीय उपभोक्ता ‘डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ’ के पीछे दी गयी जानकारी को नहीं पढ़ते हैं।
  • इसके अलावा, भारत में ‘गैर-संचारी रोगों’ (Non-Communicable Diseases) का एक बड़ा बोझ है, जो एक वर्ष में होने वाली सभी मौतों में लगभग 5.87 मिलियन (60%) का योगदान देता है।
  • “हेल्थ-स्टार रेटिंग” (HSR) लोगों को स्वस्थ विकल्प चुनने के लिए प्रोत्साहित करेगा और समाज में परिवर्तनकारी परिवर्तन ला सकता है।

इसका विरोध क्यों किया जा रहा है?

  • कुछ विशेषज्ञों ने भारत में HSR मॉडल के उपयोग का विरोध किया है और यह सुझाव देते हुए कहा है कि उपभोक्ताओं द्वारा इसे दुष्प्रभावों की नकारात्मक चेतावनी के रूप में समझने की बजाय, ‘स्वास्थ्य लाभों की पुष्टि’ के रूप में लिया जा सकता है।
  • बिक्री पर प्रभाव: कुछ संगठनों को डर है कि इससे कुछ खाद्य उत्पादों की बिक्री पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI):

यह ‘खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम’, 2006 (FSSAI अधिनियम) के तहत स्थापित एक स्वायत्त वैधानिक निकाय है।

  1. स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार FSSAI का प्रशासनिक मंत्रालय है।
  2. किसी भी खाद्य संबंधित व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए, व्यवसाय-स्वामी के लिए FSSAI की अनुमति से एक प्रमाण पत्र और लाइसेंस हासिल करना आवश्यक होता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) के बारे में
  2. स्टार रेटिंग
  3. ट्रांसफैट
  4. पैकेज लेबल का अग्र भाग (Front of Package Labelling – FOPL)

मेंस लिंक:

‘भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण’ द्वारा खाद्य पदार्थों की स्टार्ट रेटिंग के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: बुनियादी ढाँचाः ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि।

सागरमाला परियोजना में नॉर्डिक राष्ट्रों की भागीदारी


संदर्भ:

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने नॉर्डिक कंपनियों को सागरमाला परियोजना सहित ब्लू इकोनॉमी क्षेत्र में निवेश करने के लिए आमंत्रित किया है और नॉर्डिक देशों (Nordic countries) के सॉवरेन वेल्थ फंड को भारत में निवेश करने के लिए कहा है।

सागरमाला कार्यक्रम (Sagarmala Programme) के एक भाग के रूप में, लगभग 5.48 लाख करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 800 से अधिक परियोजनाओं को कार्यान्वयन के लिए चिन्हित किया गया है।

सागरमाला प्रोजेक्ट:

सागरमाला एक राष्ट्रीय कार्यक्रम है। 2014 में प्रधानमंत्री ने इसकी घोषणा की थी और 25 मार्च, 2015 को केंद्रीय कैबिनेट ने इसकी मंजूरी दी थी।

  • नोडल मंत्रालय: पत्तन,पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय।
  • उद्देश्य: देश में औद्योगिक बंदरगाह आधारित विकास को बढ़ावा देना।
  • इसका उद्देश्य भारत की 7,500 किलोमीटर लंबी तटरेखा और 14,500 किलोमीटर संभावित नौगम्य जलमार्गों की क्षमता का उपयोग करके देश में आर्थिक विकास को गति देना है।
  • यह सर्वश्रेष्ठ अवसंरचना निवेश के साथ घरेलू और निर्यात- आयात (एक्जिम) कार्गो, दोनों के लिए लॉजिस्टिक्स लागत को कम करने की एक सोच रखता है।
  • परियोजना के तहत, तटीय भारत में कुल 14 ‘तटीय आर्थिक क्षेत्र (Coastal Economic Zone – CEZ) चरणबद्ध तरीके से विकसित करने की योजना है।

राष्ट्रीय सागरमाला शीर्ष समिति:

‘राष्ट्रीय सागरमाला शीर्ष समिति’ (National Sagarmala Apex Committee – NSAC) में भारत के समुद्र तटीय राज्यों में बंदरगाहों के प्रभारी मंत्रालय तथा हितधारक मंत्रालयों के कैबिनेट मंत्री तथा जहाजरानी मंत्री शामिल होते हैं।

‘सागरमाला परियोजना’ में निम्नलिखित छह मेगापोर्ट विकसित किए जाने की योजना है:

  1. सागर द्वीप: पश्चिम बंगाल
  2. पारादीप बाहरी बंदरगाह: ओडिशा
  3. सिरकाज़ी: तमिलनाडु
  4. कन्याकुमारी: तमिलनाडु
  5. बेलिकेरी: कर्नाटक
  6. वधावन: महाराष्ट्र।

आवश्यकता:

भारतीय बंदरगाह, इस तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देने वाली भूमिका निभाते हैं। और वास्तव में, लगभग 95% व्यापारिक व्यापार, भारतीय बंदरगाहों से होकर गुजरता है।

  • हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बंदरगाहों की तुलना में भारतीय बंदरगाह अभी भी कई क्षेत्रों में पिछड़ गए हैं।
  • इसलिए, सभी मुद्दों को दूर करने और इसे और अधिक विकसित करने के लिए, जहाजरानी मंत्रालय द्वारा एक नया कार्यक्रम – ‘सागरमाला परियोजना’ शुरू करने का निर्णय लिया गया है।

नॉर्डिक देशों के बारे में:

  • नॉर्डिक राष्ट्र (Nordic Nations), उत्तरी यूरोप के पांच देशों का एक समूह है।
  • ये पांच नॉर्डिक देश हैं: डेनमार्क, स्वीडन, नॉर्वे, फिनलैंड और आइसलैंड।

Current Affairs

 

नॉर्डिक देशों का भारत के लिए महत्व:

  • नॉर्डिक देश, सामूहिक रूप से 1.6 ट्रिलियन डॉलर से अधिक की अर्थव्यवस्था का प्रतिनिधित्व करते हैं।
  • भारत और नॉर्डिक देशों के बीच माल और सेवाओं में कुल द्विपक्षीय व्यापार 13 अरब डॉलर का है।
  • ये सभी देश मानवीय प्रयासों, विशेष रूप से नवाचार, स्वच्छ ऊर्जा, हरित प्रौद्योगिकी और शिक्षा के कई क्षेत्रों में शीर्ष उपलब्धि हासिल करने वालों में शामिल हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. नॉर्डिक राष्ट्रों के बारे में।
  2. स्कैंडिनेवियाई देश।
  3. सागरमाला परियोजना।
  4. भारत में बुनियादी ढांचे का विकास।
  5. भारत में प्रमुख बंदरगाह।

मेंस लिंक:

सागरमाला परियोजना के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द प्रिंट।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


 हफ़लौंग हिंदी

‘हफ़लौंग हिंदी’ (Haflong Hindi) असम के ‘दीमा हसाओ जिले’ की ‘सेतु भाषा’ (Bridge Language) अर्थात क्षेत्र के सभी लोगों को समझ में आने वाली भाषा है।

  • यह भाषा, हिंदी से उत्पन्न हुई है और इसमें कई अन्य भाषाओं जैसे असमिया, बंगाली, दिमासा और ज़ेमे नागा के शब्द शामिल है।
  • इसका नामकारण दीमा हसाओ जिले के मुख्यालय ‘हफ़लौंग’ के नाम पर किया गया है।
  • ‘हफ़लौंग हिंदी’ में हिंदी व्याकरण की बजाय ‘तिब्बती-बर्मन व्याकरण’ का प्रयोग किया जाता है, और इसमें नेपाली और बंगाली शब्दावली भी शामिल हैं।
  • इसमें एक सामान्य बहुवचन चिह्नक होता है और हिंदी की तरह संख्याओं का उपयोग नहीं किया जाता है।

चर्चा का कारण:

कुछ भाषाविदों का मानना ​​है कि मानकीकृत हिंदी को स्कूल में अनिवार्य विषय के रूप में आगे बढ़ाने से राज्य में ‘हफ़लौंग हिंदी भाषी’ समुदाय प्रभावित हो सकते हैं।

 

विश्व खाद्य पुरस्कार

  • नासा की जलवायु अनुसंधान वैज्ञानिक ‘सिंथिया रोसेनज़वेग’ को विश्व खाद्य पुरस्कार (World Food prize) से सम्मानित किया गया है। इन्होने अपने करियर का अधिकांश समय यह समझाने में बिताया है कि ‘वैश्विक खाद्य उत्पादन’ को किस प्रकार बदलती जलवायु के अनुकूल होना चाहिए।
  • कृषि विज्ञानी और जलवायु विज्ञानी ‘सिंथिया रोसेनज़वेग’ को ‘खाद्य उत्पादन पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव’ पर उनके द्वारा तैयार किए गए अभिनव मॉडल के सम्मान में $ 250,000 का पुरस्कार दिया गया है।

‘विश्व खाद्य पुरस्कार’ के बारे में:

विश्व खाद्य पुरस्कार, विश्व में भोजन-गुणवत्ता, मात्रा या उपलब्धता में सुधार करके मानव विकास करने संबंधी कार्य करने वाले व्यक्तियों की विशिष्ट उपलब्धियों को मान्यता प्रदान करने हेतु दिया जाने वाला सर्वश्रेष्ठ अंतर्राष्ट्रीय सम्मान है।

  • पुरस्कार के अंतर्गत कवर किए जाने वाले क्षेत्र: पादप, पशु और मृदा विज्ञान; खाद्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी; पोषण, ग्रामीण विकास, आदि सहित विश्व खाद्य आपूर्ति से संबंधित सभी क्षेत्र।
  • पात्रता: यह पुरस्कार, सभी नृजातियों, धर्मों, राष्ट्रीयता या राजनीतिक मान्यताओं के किसी भी व्यक्ति को दिया जा सकता है।
  • नकद पुरस्कार: $ 2,50,000।
  • यह पुरस्कार, ‘विश्व खाद्य पुरस्कार फाउंडेशन’ द्वारा प्रदान किया जाता है। इस फाउंडेशन में लगभग 80 से अधिक कंपनियां और निजी व्यक्ति दानकर्ता के रूप में शामिल हैं।
  • इस पुरस्कार की परिकल्पना, वैश्विक कृषि में अपने कार्यों के लिए वर्ष 1970 में नोबेल शांति पुरस्कार विजेता डॉ. नॉर्मन ई बोरलॉग (Norman E. Borlaug) द्वारा की गयी थी। इनके लिए हरित क्रांति के जनक के रूप में भी जाना जाता है।
  • विश्व खाद्य पुरस्कार का गठन वर्ष 1986 में किया गया था, इसके प्रायोजक ‘जनरल फ़ूड कॉर्पोरेशन’ थे।
  • इसे “खाद्य और कृषि क्षेत्र का नोबेल पुरस्कार” के रूप में भी जाना जाता है।
  • यह पुरूस्कार सर्वप्रथम वर्ष 1987 में, भारत में हरित क्रांति के जनक , डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन को दिया गया था।

भारतीय दंड संहिता की धारा 143

गुजरात के मेहसाणा में एक स्थानीय मजिस्ट्रेट अदालत ने पांच साल पुराने एक मामले में- जुलाई 2017 में पुलिस की अनुमति के बिना ‘आजादी मार्च’ निकालने के लिए- प्रमुख कार्यकर्ता और निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवाणी और नौ अन्य को दोषी ठहराया है ।

  • अदालत ने इन व्यक्तियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 143 के तहत दोषी ठहराया गया है।
  • भारतीय दंड संहिता की धारा 143 (Section 143) के अनुसार, जो भी कोई गैरकानूनी जनसमूह का सदस्य होगा, तो उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास की सजा- जिसे छह महीने तक बढ़ाया जा सकता है, या आर्थिक दंड, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।