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[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 27 April 2022

विषयसूची

सामान्य अध्ययन-II

  1. नए आईटी अधिनियम का मसौदा
  2. अंतर्राष्ट्रीय वित्त निगम

 

सामान्य अध्ययन-III

  1. भारतनेट परियोजना
  2. नदीय जीवपालन कार्यक्रम
  3. गुरुत्वाकर्षण लेंसिंग
  4. नासा का लुसी मिशन

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

  1. अमेरिका द्वारा ‘यूक्रेन के लिए हथियार शिखर सम्मेलन’ की मेजबानी

 


सामान्य अध्ययनII


 

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

नए आईटी अधिनियम का मसौदा

संदर्भ:

सरकार ने दो दशक पुराने आईटी कानून (Information Technology Act – IT Act) में बदलाव की दिशा में पहला कदम उठाते हुए कहा है, कि प्रस्तावित नए विधायी ढांचे का मसौदा सार्वजनिक परामर्श के लिए अगले महीने जल्द से जल्द पेश किया जाएगा।

सरकार द्वारा नए नियम बनाने में सक्षम एक नवीन विधायी ढांचे पर विचार किया जा रहा है। यह नया क़ानून डिजिटल स्पेस से संबंधित विभिन्न मुद्दों को बहुत ही आधुनिक, समकालीन और सामंजस्यपूर्ण तरीके से निपटने में सक्षम होगा।

सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000:

  • सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (Information Technology Act, 2000) या आईटी अधिनियम 2000, भारत में साइबर अपराध और ई-कॉमर्स से संबंधित मामलों से निपटने के लिए प्रमुख कानून है।
  • यह अधिनियम इलेक्ट्रॉनिक कॉमर्स और इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन को कानूनी मंजूरी देने, ई-गवर्नेंस को सक्षम बनाने और साइबर अपराध को रोकने के लिए बनाया गया था।
  • इस कानून के तहत, कंप्यूटर या भारत में स्थापित नेटवर्क से जुड़े किसी भी अपराध के लिए विदेशी नागरिकों को भी आरोपित किया जा सकता है।
  • इस कानून में डिजिटल/इलेक्ट्रॉनिक प्रारूप के माध्यम से विभिन्न साइबर अपराधों और धोखाधड़ी के लिए दंड निर्धारित करने का प्रावधान है।
  • यह अधिनियम, ‘डिजिटल सिग्नेचर’ को कानूनी मान्यता भी प्रदान करता है।

आईटी अधिनियम 2000 की खामियां:

  • निजता संबंधी मुद्दे: मौजूदा आईटी अधिनियम ‘निजता’ संबंधी मुद्दों को का समाधान नहीं करता है – ‘निजता’, अब एक मौलिक अधिकार है और कानून के तहत विशेष रूप से निजता संबंधी की चिंताओं को दूर किए जाने की आवश्यकता है, किंतु इसमें ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।
  • साइबर सुरक्षा के सबंध में खराब व्यवस्था: भारतीय ‘आईटी अधिनियम’ साइबर सुरक्षा कानून नहीं है और इसलिए साइबर सुरक्षा की बारीकियों से संबंधित नहीं है।
  • विशेषज्ञता की कमी: नियमित पुलिस कर्मी, विशेष रूप से इंस्पेक्टर के पद पर आसीन किसी भी अधिकारी को, आपराधिक ऑनलाइन गतिविधियों की जांच के लिए जिम्मेदार बना दिया जाता है।
  • आईटी अधिनियम की धारा 66A: श्रेया सिंघल बनाम भारत संघ (2015) मामले में, सुप्रीम कोर्ट ने आईटी अधिनियम की धारा 66A को रद्द कर दिया था।

समय की मांग :

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप ‘पुन:प्रवर्तन का सिद्धांत’  (Doctrine of Revival) के बारे में जानते हैं?

प्रीलिम्स लिंक:

  1. आईटी अधिनियम की धारा 66ए के बारे में।
  2. संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 के बारे में।
  3. श्रेया सिंघल मामला किससे संबंधित है?
  4. नया आईटी अधिनियम।

मेंस लिंक:

आईटी अधिनियम की धारा 66ए को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा क्यों निरसित कर दिया गया था? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

अंतर्राष्ट्रीय वित्त निगम


(International Finance Corporation – IFC)

संदर्भ:

हाल ही में, महाराष्ट्र के ‘चिकित्सा शिक्षण और औषधि विभाग’ (Medical Education and Drugs Department) और ‘अंतर्राष्ट्रीय वित्त निगम’ (International Finance Corporation – IFC) द्वारा, महाराष्ट्र में ‘सार्वजनिक-निजी भागीदारी’ (PPP) मॉडल के तहत ‘चिकित्सा शिक्षा’ पर जोर देने तथा स्वास्थ्य देखभाल परियोजनाओं को प्राथमिकता देने के लिए एक समझौता किया गया है।

‘अंतर्राष्ट्रीय वित्त निगम’ (आईएफसी) राज्य भर में सुपर-स्पेशियलिटी अस्पतालों और चिकित्सा शिक्षण सुविधाओं को विकसित करने हेतु ‘सार्वजनिक-निजी भागीदारी’ के लिए कार्य-सम्पादन सलाहकार होगा।

अंतर्राष्ट्रीय वित्त निगम (IFC) के बारे में:

  • यह एक अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थान है जो विकासशील देशों में निजी क्षेत्र के विकास को प्रोत्साहित करने के लिए निवेश, सलाहकार और संपत्ति प्रबंधन सेवाएं प्रदान करता है।
  • यह विश्व बैंक समूह का सदस्य है और इसका मुख्यालय संयुक्त राज्य अमेरिका के वाशिंगटन, डी.सी. में अवस्थित है।
  • इसकी स्थापना वर्ष 1956 में विश्व बैंक समूह की निजी क्षेत्रक शाखा के रूप में की गयी थी, तथा इसका उद्देश्य गरीबी को कम करने तथा विकास को बढ़ावा देने हेतु केवल लाभ-कारी तथा व्यावसायिक परियोजनाओं में निवेश करके आर्थिक विकास को आगे बढ़ाना है।
  • अंतर्राष्ट्रीय वित्त निगम का स्वामित्व तथा प्रशासन सदस्य देशों द्वारा किया जाता है, किंतु इसके कार्य-संचालन के लिए इसका निजी कार्यकारी कार्यालय तथा कर्मचारी हैं।
  • यह एक ‘निगम’ है जिसमें सदस्य देशों की सरकारें इसकी शेयरधारक होती हैं। ये सदस्य देश निवेश हेतु राशि प्रदान करते है, तथा इन्हें अंतर्राष्ट्रीय वित्त निगम से संबंधित विषयों पर मतदान का अधिकार होता है।

भूमिकाएं और कार्य:

  1. वर्ष 2009 के बाद से, ‘अंतर्राष्ट्रीय वित्त निगम’ नए विकास लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, जिनको इसकी विभिन्न परियोजनाओं के माध्यम से पूरा किया जायेगा। इसका लक्ष्य संवहनीय कृषि के अवसरों को बढ़ाना, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा में सुधार, माइक्रोफाइनेंस, अवसंरचना निर्माण, छोटे व्यवसायों की राजस्व वृद्धि तथा जलवायु स्वास्थ्य में निवेश करने में सहायता करना है।
  2. यह विभिन्न प्रकार के ऋण तथा इक्विटी फाइनेंसिंग सेवायें प्रदान करता है और कंपनियों को, उनके प्रबंधन में भाग लेने से बचते करते हुए, ऋण जोखिम का सामना करने में सहायता करता है।
  3. यह सरकारों के लिए निजी क्षेत्र के विकास और सहयोग देने के लिए बुनियादी ढांचे के निर्माण और भागीदारी पर सलाह देता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. विश्व बैंक समूह के तहत संस्थाएँ
  2. IDA और IBRD के मध्य अंतर
  3. IDA द्वारा ऋण के प्रकार
  4. IFC के बारे में
  5. विश्व बैंक के महत्वपूर्ण संस्थानों का मुख्यालय
  6. ओपन डेटा पहल क्या है?

स्रोत: डाउन टू अर्थ।

 


सामान्य अध्ययनIII


 

विषय: बुनियादी ढाँचाः ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि।

भारतनेट परियोजना


संदर्भ:

ग्राम पंचायतों को ब्रॉडबैंड के माध्यम से जोड़ने के उद्देश्य से शुरू की गयी ‘भारतनेट परियोजना’ (BharatNet project) के कार्यान्वयन में देरी के परिणामस्वरूप इसकी लागत 20,100 करोड़ रुपये से बढ़कर 61,109 करोड़ रुपये हो गई है।

  • इसके लिए, आंशिक रूप से ‘भारत ब्रॉडबैंड नेटवर्क’ (BBNL) की प्रभावहीनता जिम्मेदार है। ‘भारत ब्रॉडबैंड नेटवर्क’, उच्च गति ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी के लिए 250,000 ग्राम पंचायतों को ऑप्टिक फाइबर से जोड़ने के लिए परियोजना को लागू करने के लिए गठित इकाई है।
  • BBNL द्वारा वांछित परिणाम नहीं दिए जाने के कारण, सरकार अब बीबीएनएल का बीएसएनएल में विलय करने की योजना बना रही है। इस विलय से बेहतर तालमेल और समन्वय होने की उम्मीद है।

आवश्यकता:

  • ‘भारत ब्रॉडबैंड नेटवर्क’ (BBNL) को फरवरी 2012 में ‘राष्ट्रीय ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क’ (जिसे अब भारतनेट नाम दिया गया है) को लागू करने के लिए एक ‘विशेष प्रयोजन वाहन’ / ‘विशेष उद्देश्य संवाहक’ (Special Purpose Vehicle- SPV) के रूप में शामिल किया गया था। लेकिन प्रतीत होता है कि कई एजेंसियों के बीच खराब समन्वय के कारण, बीबीएनएल अपने लक्ष्यों को पूरा करने में विफल रही है।
  • केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 25 अक्टूबर 2011 को इस परियोजना को मंजूरी दी थी और इसे तीन साल में पूरा किया जाना था। लेकिन इसके 11 साल बाद भी करीब 172,000 ग्राम पंचायतों में ही सेवा के लिए आधारिक ढांचा तैयार किया जा सका है।

‘भारतनेट परियोजना’ के बारे में:

मूल रूप से इस परियोजना को, अक्तूबर 2011 में ‘नेशनल ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क’ (National Optical Fiber Network- NOFN) के रूप में शुरू किया गया था और वर्ष 2015 में इसका नाम बदलकर ‘भारतनेट’ (BharatNet) कर दिया गया।

  1. इसका उद्देश्य, ऑप्टिकल फाइबर के माध्यम से 5 लाख ग्राम पंचायतों को इंटरनेट कनेक्टिविटी प्रदान करना है।
  2. इस परियोजना का लक्ष्य, ग्रामीण भारत में ई-गवर्नेंस, ई-स्वास्थ्य, ई-शिक्षा, ई-बैंकिंग, इंटरनेट और अन्य सेवाओं के वितरण को सुगम बनाना है।
  3. यह ‘भारत ब्रॉडबैंड नेटवर्क लिमिटेड’ (BBNL) द्वारा कार्यान्वित एक प्रमुख मिशन है।

परियोजना के तहत व्यापक परिकल्पनाएँ:

  • गैर-भेदभावपूर्ण आधार पर सुलभ उच्च मापनीय नेटवर्क अवसंरचना स्थापित करना।
  • सभी घरों के लिये 2 Mbps से 20 Mbps तथा सभी संस्थानों को उनकी मांग क्षमता के अनुसार सस्ती ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी प्रदान करना।
  • राज्यों और निजी क्षेत्र की साझेदारी में डिजिटल इंडिया के विज़न को साकार करना।

कार्यान्वयन:

  • यह परियोजना, ‘केंद्र-राज्य सहयोग परियोजना’ (Centre-State collaborative project) है, जिसमें ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क की स्थापना के लिए राज्यों को अपने अनुसार कार्य करने का अधिकार दिया गया है।
  • संपूर्ण परियोजना को, देश के ग्रामीण और दूरदराज़ क्षेत्रों में दूरसंचार सेवाओं में सुधार के उद्देश्य से स्थापित किए गए, ‘यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन फंड’ (Universal Service Obligation Fund- USOF) द्वारा वित्तपोषित किया जा रहा है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप ‘डार्क फाइबर’ के बारे में जानते हैं? इसके बारे में अधिक जानकारी हेतु पढ़िए

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. भारतनेट के बारे में
  2. उद्देश्य और कार्यान्वयन
  3. USOF के बारे में
  4. BBNL के बारे में

मेंस लिंक:

भारतनेट परियोजना के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कृषि सहायता तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य से संबंधित विषय; जन वितरण प्रणाली- उद्देश्य, कार्य, सीमाएँ, सुधार; बफर स्टॉक तथा खाद्य सुरक्षा संबंधी विषय; प्रौद्योगिकी मिशन; पशु पालन संबंधी अर्थशास्त्र।

नदीय जीवपालन कार्यक्रम


(River Ranching Programme)

संदर्भ:

हाल ही में, ‘भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद’ (ICAR) के अधीन ‘केंद्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान’ (CIFRI), प्रयागराज द्वारा आयोजित ‘जीवपालन कार्यक्रम’ (Ranching Programme) के तहत संगम के समीप गंगा नदी में भारत में पायी जाने वाली प्रमुख मछली प्रजातियों – कतला, रोहू और मृगल – की 10,000 से अधिक मछलियों के बच्चों को छोड़ा गया है।

यह कार्यक्रम, गंगा में विलुप्त हो रही मछलियों की प्रजातियों के संरक्षण और संवर्धन के लिए शुरू किया गया है।

 

‘नदीय जीवपालन’ या ‘रिवर रैंचिंग’ क्या होती है?

‘राष्ट्रव्यापी नदीय जीवपालन कार्यक्रम’ वर्ष 2021 में उत्तर प्रदेश में शुरू किया गया था।

  • नदीय जीवपालन (River Ranching) जलीय कृषि / मत्स्यपालन (aquaculture) का एक रूप होता है, जिसमें मछली प्रजातियों, जैसे ‘सामन’ (salmon), को उनके जीवन के पहले चरण में किसी कृत्रिम या प्राकृतिक जलीय स्थल पर सुरक्षित अर्थात, कैद में रखा जाता है।
  • इसके बाद, इन मछली के बच्चों को थोड़ा बड़ा हो जाने पर समुद्र या नदी के स्वतन्त्र जल में छोड़ दिया जाता है। जब ये मछलियाँ वयस्क होने पर, समुद्र से मीठे पानी के अपने मूल स्थान पर अंडे देने के लिए वापस आती है, तो इन्हें पकड़ लिया जाता है।

‘नदीय जीवपालन कार्यक्रम’ के बारे में:

इस कार्यक्रम को ‘प्रधान मंत्री मत्स्य संपदा योजना’ (PMMSY) योजना के तहत, स्थलीय एवं जलीय क्षेत्रों की उत्पादिता में विस्तार, गहन, विविधीकरण के माध्यम से मत्स्य-उत्पादन और उत्पादकता को बढाने के उद्देश्य से  एक विशेष गतिविधि के रूप में शुरू किया गया था।

कार्यान्वयन एजेंसी:

‘प्रधान मंत्री मत्स्य संपदा योजना’ के केंद्रीय घटक के रूप में ‘राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड’, हैदराबाद, इस कार्यक्रम के किए नोडल एजेंसी है।

कार्यक्रम की आवश्यकता:

मानवीय आबादी में वृद्धि होने के साथ-साथ उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन की आवश्यकता के कारण मछली की मांग में धीरे-धीरे बढ़ोत्तरी हो रही है।

इस प्रकार, किफायती और पर्यावरण के दृष्टिकोण से उपयुक्तरूप से, मत्स्य संसाधनों का सतत उपयोग और संरक्षण को बढ़ावा देना समय की मांग बन चुकी है, और इसी को ध्यान में रखते हुए ‘नदीय जीवपालन कार्यक्रम’ की शुरुआत की गयी है।

  • यह कार्यक्रम, संवहनीय मत्स्य पालन, आवास क्षरण में कमी, जैव विविधता का संरक्षण, सामाजिक-आर्थिक लाभों को अधिकतम और पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं का आकलन करने में सहायक होगा।
  • इसके अलावा नदीय जीवपालन कार्यक्रम’ पारंपरिक मत्स्यपालन, पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता और अंतर्देशीय समुदायों का व्यापार और सामाजिक सुरक्षा के उन्नयन को भी सुनिश्चित करेगा।

प्रधान मंत्री मत्स्य सम्पदा योजना (PMMSY) के बारे में:

यह देश में मत्स्य पालन क्षेत्र पर केंद्रित और एक इसके सतत विकास के लिए एक योजना है।

  • इस योजना को आत्मनिर्भर भारत पैकेज के अंतर्गत वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 तक पांच साल की अवधि के दौरान सभी राज्यों/ संघ शासित प्रदेशों में कार्यान्वित किया जायेगा एवं इस पर अनुमानित रूप से 20,050 करोड़ रुपये का निवेश किया जायेगा।
  • यह योजना समुद्री, अंतर्देशीय मत्स्य पालन और जलीय कृषि में लाभार्थी उन्मुख गतिविधियों पर केंद्रित है।
  • इस योजना में ‘क्लस्टर अथवा क्षेत्र आधारित दृष्टिकोण’ अपनाते हुए मत्स्य समूहों और क्षेत्रों का निमार्ण किया जायेगा।

योजना के उद्देश्य और लक्ष्य:

  1. वर्ष 2024-25 तक अतिरिक्त 70 लाख टन मछली उत्पादन वृद्धि।
  2. वर्ष 2024-25 तक मत्स्य निर्यात आय को बढ़ाकर 1,00,000 करोड़ रुपये करना।
  3. मछुआरों और मछली किसानों की दोगुनी आय करना।
  4. पैदावार के बाद नुकसान 20-25 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत करना।
  5. मत्स्य पालन क्षेत्र और सहायक गतिविधियों में 55 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा करना ।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप ‘इंद्रधनुष क्रांति’ (Rainbow Revolution) के बारे में जानते हैं?

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘नदीय जीवपालन कार्यक्रम’ के बारे में।
  2. प्रधान मंत्री मत्स्य सम्पदा योजना (PMMSY) के बारे में।
  3. योजना की अवधि।
  4. योजना के तहत लक्ष्य।
  5. नीली क्रांति योजना क्या है?
  6. जलीय रोग रेफरल प्रयोगशाला कहाँ स्थापित की गई है?

मेंस लिंक:

प्रधान मंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास।

गुरुत्वाकर्षण लेंसिंग


(Gravitational Lensing)

संदर्भ:

यह आर्टिकल ‘द हिंदू’ समाचारपत्र के, बिना किसी शब्दजाल के विज्ञान से जुड़े विषयों की व्याख्या करने वाले ‘साइंस फॉर ऑल न्यूजलेटर’ से लिया गया है।

गुरुत्वाकर्षण लेंसिंग एवं इसकी कार्यविधि:

‘गुरुत्वाकर्षण लेंसिंग’ / ‘ग्रेविटेशनल लेंसिंग’ (Gravitational lensing),  आइंस्टीन के ‘सामान्य सापेक्षता सिद्धांत’ (Theory of General Relativity)  का एक प्रभाव है – आसान शब्दों में कहें तो, ‘द्रव्यमान’ प्रकाश की दिशा को मोड़ देता है।

  • किसी विशालकाय पिंड का गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र अंतरिक्ष में काफी दूर तक विस्तारित होता है, और उस पिंड के करीब से (और अपने गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र के माध्यम से) गुजरने वाली प्रकाश किरणों को किसी अन्य दिशा में मोड़ने और दोबारा से किसी अन्य दिशा में केंद्रित करने का कारण बनता है।
  • पिंड, जितनी अधिक विशालकाय होता है, उसका गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र उतना ही सशक्त होता है और इसलिए प्रकाश किरणों का झुकाव भी अधिक होता है। जिस प्रकार ‘ऑप्टिकल लेंस’ बनाने के लिए सघन सामग्री का उपयोग करने से ‘अपवर्तन’ की मात्रा अधिक होती है।

 

इसके लाभ:

‘गुरुत्वाकर्षण लेंसिंग’ (Gravitational lensing) डार्क मैटर की मात्रा और वितरण के प्रति प्रत्यक्ष रूप से संवेदनशील होती है, अतः यह ‘ब्रह्मांड विज्ञानियों’ के लिए काफी उपयोगी होती है।

  • लेंसिंग से खगोलविदों को यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि संपूर्ण ब्रह्मांड में डार्क मैटर की कितनी मात्रा मौजूद है और यह किस प्रकार वितरित है।
  • ‘गुरुत्वाकर्षण लेंसिंग’ का उपयोग ‘डार्क मैटर’ के अस्तित्व को सत्यापित करने में मदद के लिए भी किया गया है।

इंस्टा जिज्ञासु:

इलेक्ट्रॉन जैसे आवेशित चुंबकीय कणों पर कार्य करने वाले विद्युत चुम्बकीय बल की शक्ति पर या परमाणु नाभिक के घटकों, जैसेकि प्रोटॉन और न्यूट्रॉन, के बीच कार्य करने वाले सशक्त परमाणु बल के बीच कार्य करने वाले विद्युत चुम्बकीय बल की शक्ति पर विचार करते हैं, तो गुरुत्वाकर्षण प्रकृति में मौजूद सबसे दुर्बल बलों में से एक है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. गुरुत्वाकर्षण लेंसिंग
  2. गुरुत्वाकर्षण
  3. आकाशगंगा
  4. विद्युत चुम्बकीय बल
  5. प्रकाश तरंगें
  6. प्रकाश वर्ष

मेंस लिंक:

गुरुत्वाकर्षण लेंसिंग के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

नासा का लूसी मिशन


(NASA’s Lucy mission)

संदर्भ:

हाल ही में, नासा का लुसी मिशन (NASA’s Lucy mission), एक उपकरण को खोलने में विफल रहने के बाद, अंतरिक्ष में फैले एक छोटे रोड़े से टकरा गया। ‘लुसी मिशन’ बृहस्पति ग्रह की कक्षा के आगे और पीछे अनुसरण कर रहे क्षुद्रग्रहों के एक समूह का पता लगाने के लिए भेजा गया है।

नासा अगले कुछ महीनों में, खुले हुए और कार्यरत सौर उपकरणों का दो चरणों में प्रदर्शन करेगा।

 

‘लूसी मिशन’ के बारे में:

यह, बृहस्पति ग्रह के ‘ट्रोजन क्षुद्रग्रहों’ (Trojan asteroids) का अन्वेषण करने हेतु नासा द्वारा भेजा जाने वाला पहला मिशन है।

  • यह मिशन, सौर ऊर्जा से संचालित है।
  • इस मिशन के पूरा होने में 12 साल से अधिक लंबा समय लगने का अनुमान है। इस दौरान, अंतरिक्ष यान “युवा सौर मंडल” के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए लगभग 3 बिलियन किमी की यात्रा करते हुए ‘आठ क्षुद्रग्रहों’ का दौरा करेगा।

मिशन का उद्देश्य:

‘लूसी मिशन’ को ‘ट्रोजन क्षुद्रग्रहों’ के समूह में शामिल विविध क्षुद्रग्रहों की संरचना को समझने, क्षुद्रग्रहों के द्रव्यमान और घनत्व को निर्धारित करने तथा ट्रोजन क्षुद्रग्रहों की परिक्रमा करने वाले उपग्रहों और रिंगों को देखने और उनका अध्ययन करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

 

‘ट्रोजन क्षुद्रग्रह’ क्या हैं?

‘ट्रोजन क्षुद्रग्रहों’ (Trojan asteroids) को प्रारंभिक सौर मंडल का अवशेष माना जाता है, और इनका अध्ययन करने से वैज्ञानिकों को इनकी उत्पत्ति, विकास और इनके वर्त्तमान स्वरूप को समझने में मदद मिलेगी।

माना जाता है, कि इन ‘क्षुद्रग्रहों’ की उत्पत्ति, लगभग 4 अरब साल पहले सौर मंडल का निर्माण होने के साथ ही हुई थी, और ट्रोजन क्षुद्रग्रहों का निर्माण, उन्ही पदार्थों से हुआ है, जिनसे सौर मंडल के अन्य ग्रह बने थे।

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं, कि नासा ने इस मिशन का नाम 3.2 मिलियन वर्ष पुरानी, ‘होमिनिन’ प्रजाति (जिसमें मानव और इसके पूर्वज) के पूर्वज ‘लूसी’ के नाम पर रखा है?

क्या आप जानते हैं कि क्षुद्रग्रहों को ‘तीन श्रेणियों’ में बांटा गया है?

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


 अमेरिका द्वारा ‘यूक्रेन के लिए हथियार शिखर सम्मेलन’ की मेजबानी

शीर्ष अमेरिकी अधिकारियों ने हाल ही में रूस के हमले को रोकने के लिए ‘कीव’ को अधिक हथियारों की आपूर्ति के मामले पर जर्मनी में सहयोगी देशों साथ आपातकालीन वार्ता आयोजित की।

मास्को द्वारा अपने पड़ोसी देश पर आक्रमण, जोकि अब आठवें सप्ताह में पहुँच गया है, पश्चिमी देशों में व्यापक आक्रोश पैदा हो गया है। इन देशों ने संकटग्रस्त यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की को हथियार और अन्य सहायता प्रदान की जा रही है।