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[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 21 April 2022

विषयसूची

सामान्य अध्ययन-I

  1. गुरु तेग बहादुर
  2. एकीकृत कमांड और नियंत्रण केंद्र

 

सामान्य अध्ययन-II

  1. प्रत्यर्पण

 

सामान्य अध्ययन-III

  1. डिजिटल बैंकिंग इकाइयां
  2. ध्वनि प्रदूषण

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

  1. स्कॉर्पीन पनडुब्बी ‘वागशीर’
  2. सरमट इंटरकांटिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल
  3. भारत का पहला शुद्ध हरित हाइड्रोजन संयंत्र
  4. महारानी जिन्द कौर

 


सामान्य अध्ययनI


 

विषय: 18वीं सदी के लगभग मध्य से लेकर वर्तमान समय तक का आधुनिक भारतीय इतिहास- महत्त्वपूर्ण घटनाएँ, व्यक्तित्व, विषय।

गुरु तेग बहादुर


संदर्भ:

21 अप्रैल, 2022 को गुरु तेग बहादुर (Guru Tegh Bahadur) की 401वीं जयंती मनाई गई।

Current Affairs

गुरु तेग बहादुर के बारे में:

  1. ‘गुरु तेग बहादुर’ का जन्म 21 अप्रैल, 1621 को अमृतसर में माता नानकी और सिखों के छठे गुरु, ‘गुरु हरगोबिंद’ के यहाँ हुआ था।
  2. वह मुगलों द्वारा जबरन धर्मांतरण कराए जाने के खिलाफ उठ खड़े होने वाले नौवें सिख गुरु थे।
  3. उन्होंने 1665 में वर्तमान आनंदपुर साहिब में अपना ‘मुख्य केंद्र’ स्थापित किया।
  4. उन्होंने ‘राजा राम सिंह’ को अहोम राजा के साथ समझौता करने में मदद की। असम में ब्रह्मपुत्र नदी के तट पर स्थित ‘गुरुद्वारा धुबरी साहिब’ इस शांति समझौते की याद दिलाता है।
  5. औरंगजेब ने 11 नवंबर, 1675 को ‘गुरु तेग बहादुर’ द्वारा इस्लाम को अपनाने से इनकार किए जाने के बाद सार्वजनिक रूप से फांसी देने का आदेश दिया।

उनको फांसी दिए जाने का प्रभाव:

  • ‘गुरु तेग बहादुर’ को फांसी दिए जाने की कार्रवाई ने धार्मिक उत्पीड़न और अत्याचार के खिलाफ सिखों के दृढ़संकल्प को मजबूत कर दिया। उनकी शहादत ने सभी सिख पंथों को ‘मानवाधिकारों की सुरक्षा’ अपनी सिख पहचान का मुख्य बिंदु बनाने में मदद की।
  • उनसे प्रेरित होकर उनके नौ वर्षीय बेटे, गुरु गोबिंद सिंह जी ने अंततः सिख समूह को एक अलग, औपचारिक, प्रतीक-धारण करने वाले समुदाय में संगठित किया, जिसे खालसा (मार्शल) के रूप में जाना जाने लगा।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं कि सिखों के चौथे गुरु, ‘गुरु राम दास’ के बाद ‘गुरु’ का पद वंशानुगत हो गया?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. सिख गुरु
  2. गुरु तेग बहादुर
  3. योगदान
  4. औरंगजेब

मेंस लिंक:

सिख धर्म में ‘गुरु तेग बहादुर’ के प्रमुख योगदानों के बारे में चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 

विषय: महिलाओं की भूमिका और महिला संगठन, जनसंख्या एवं संबद्ध मुद्दे, गरीबी और विकासात्मक विषय, शहरीकरण, उनकी समस्याएँ और उनके रक्षोपाय।

एकीकृत कमान और नियंत्रण केंद्र


(Integrated Command and Control Centres)

संदर्भ:

हाल ही में, सरकार द्वारा दी गयी जानकारी के अनुसार, योजनाबद्ध 100 ‘एकीकृत कमान और नियंत्रण केंद्रों’ (Integrated Command and Control Centres ICCCs) में से 80 स्थापित किए जा चुके हैं, बाकी को 15 अगस्त तक पूरा कर लिया जाएगा।

‘एकीकृत कमान और नियंत्रण केंद्र’ के बारे में:

‘स्मार्ट सिटीज मिशन’ (Smart Cities Mission – SCM) के अंतर्गत, एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में प्रत्येक शहर के लिए एक ‘एकीकृत कमान और नियंत्रण केंद्र’ (ICCC) स्थापित करना शामिल किया गया है।

  • इन केंद्रों को, वास्तविक समय में विभिन्न सुविधाओं की स्थिति की निगरानी करने में अधिकारियों को सक्षम करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
  • इनका उद्देश्य पानी और बिजली की आपूर्ति, स्वच्छता, यातायात आंदोलन, एकीकृत भवन प्रबंधन, शहर की कनेक्टिविटी और इंटरनेट अवसंरचनाओं को नियंत्रित और निगरानी करना है।
  • ‘एकीकृत कमान और नियंत्रण केंद्र’, अब विभिन्न अन्य मापदंडों की निगरानी भी करेंगे और इन्हें गृह मंत्रालय (MHA) के तहत ‘अपराध और आपराधिक ट्रैकिंग नेटवर्क और सिस्टम / सीसीटीएनएस (Crime and Criminal Tracking Networks and Systems – CCTNS) नेटवर्क से भी जोड़ दिया गया है।

महत्व:

किसी स्मार्ट सिटी का ‘एकीकृत कमान और नियंत्रण केंद्र’, शहर के संचालन प्रबंधन के लिए एक “तंत्रिका केंद्र” के रूप में कार्य करता है। यह समेकित स्तर पर, डेटा सेट के एक जटिल और बड़े पूल को संसाधित करता है। उदाहरण के लिए, यह अब एकीकृत यातायात प्रबंधन निगरानी के लिए प्रमुख स्रोत है।

 

स्मार्ट सिटी मिशन:

  • स्मार्ट सिटीज मिशन (Smart Cities Mission), भारत सरकार ने 2015 में शुरू किया था।
  • मिशन के तहत परियोजनाओं को पूरा करने के लिए चयनित शहरों को पांच साल का समय दिया गया था, जिसमें स्मार्ट सिटी का पहला सेट 2021 में पूरा होने की उम्मीद है।
  • इस मिशन में 100 शहरों को शामिल किया जाएगा और इसकी अवधि पांच साल (वित्तीय वर्ष 2015-16 से वित्तीय वर्ष 2019-20) की होगी।
  • इस मिशन का उद्देश्य, शहरी कार्यों को एकीकृत करना, दुर्लभ संसाधनों का अधिक कुशलता से उपयोग करना और नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना है।
  • यह, आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के तहत एक अभिनव पहल है।
  • यह एक ‘केंद्र प्रायोजित योजना’ है।

‘स्मार्ट सिटी’ में परिकल्पित ‘चार स्तंभ’:

  1. सामाजिक अवसंरचना (Social Infrastructure)
  2. भौतिक अवसंरचना (Physical Infrastructure)
  3. प्रशासन सहित संस्थागत अवसंरचना (Institutional Infrastructure)
  4. आर्थिक अवसंरचना (Economic Infrastructure)

इस योजना के तहत की गई प्रगति (जून 2021 तक):

  • इस मिशन के तहत कुल प्रस्तावित परियोजनाओं में से 5,924 परियोजनाओं के टेंडर जारी हो चुके हैं, 5,236 परियोजनाओं के लिए कार्य आदेश जारी किए जा चुके हैं और 2,665 परियोजनाएं पूरी तरह से चालू हैं।
  • 24,964 करोड़ रुपए की 212 निजी-सार्वजनिक परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं।
  • 70 स्मार्ट शहर विकसित किए जा चुके हैं और इनमे एकीकृत कमांड और नियंत्रण केंद्रों (Integrated Command and Control Centres – ICCCs) का संचालन शुरू हो गया है।

आगे की चुनौतियां:

  1. ऊर्जा दक्ष और हरित भवनों के निर्माण में अभी काफी प्रगति अपेक्षित है।
  2. शहरी निकायों को आत्मनिर्भर बनाना।
  3. सार्वजनिक परिवहन की हिस्सेदारी घटती जा रही है। बढ़ते शहरीकरण की जरूरतों को पूरा करने के लिए इसमें वृद्धि किए जाने की जरूरत है।
  4. शहरीकरण में वृद्धि के कारण, बढ़ता वायु प्रदूषण और सड़कों पर भीड़भाड़ में वृद्धि।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘स्मार्ट सिटीज मिशन’ के बारे में
  2. इंडिया स्मार्ट सिटी अवार्ड्स (ISCA)- नवीनतम संस्करण
  3. रैंकिंग के लिए उपयोग किए जाने वाले पैरामीटर
  1. AMRUT मिशन के बारे में

मेंस लिंक:

‘स्मार्ट सिटीज मिशन’ के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 


सामान्य अध्ययनII


 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

प्रत्यर्पण


(Extradition)

संदर्भ:

सुप्रीम कोर्ट ने 1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले में अपनी भूमिका के लिए आजीवन कारावास की सजा काट रहे ‘अबू सलेम’ द्वारा दायर एक याचिका पर 2 फरवरी 2022 को  केंद्र सरकार से जवाब मांगा था। याचिका में ‘अबू सलेम’ ने कहा है, कि भारत और पुर्तगाल के बीच प्रत्यर्पण संधि की शर्तों के अनुसार उसकी कारावास अवधि 25 साल से अधिक नहीं हो सकती है।

हाल ही में, केंद्रीय गृह सचिव ने सर्वोच्च न्यायालय को सूचित करते हुए बताया था, कि केंद्र सरकार 2002 में पुर्तगाल को दी गई वचनबद्धता से बाध्य है।

पृष्ठभूमि:

दिसंबर 2002 में, तत्कालीन उप प्रधान मंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने तत्कालीन पुर्तगाली सरकार को वचन दिया था कि गैंगस्टर अबू सलेम को दी जाने वाली अधिकतम सजा 25 साल से अधिक नहीं होगी।

‘प्रत्यर्पण’ क्या होता है?

भारत के उच्चतम न्यायालय द्वारा दी गयी परिभाषा के अनुसार-  ‘प्रत्यर्पण (Extradition), एक देश द्वारा दूसरे देश में किये गए किसी अपराध में अभियुक्त अथवा दोषी ठहराए गए व्यक्तियो को संबंधित देश के लिए सौपना है, वशर्ते वह अपराध उस देश की अदालत द्वारा न्यायोचित हो।

प्रत्यर्पण कार्यवाही की प्रक्रिया:

किसी अभियुक्त के लिए प्रत्यर्पण संबंधी कार्यवाही को जांच अथवा सुनवाई के दौरान तथा सजायाफ्ता अपराधियों के मामले में शुरू किया जा सकता है।

  • मामले में जांच के दौरान अभियुक्त के प्रत्यर्पण के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों को अत्याधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है।
  • कानून प्रवर्तन एजेंसियों के पास विदेशी अदालत में अभियुक्त के खिलाफ आरोपों को साबित करने वाले प्रथम दृष्टया अकाट्य सबूत होना आवश्यक हैं।

भारत में प्रत्यर्पण के लिए विधायी आधार:

‘प्रत्यर्पण अधिनियम’, 1962 (Extradition Act, 1962),  भारत में प्रत्यर्पण हेतु विधायी आधार प्रदान करता है। इस अधिनियम में भारत से विदेशी राज्यों में आपराधिक भगोड़ों के प्रत्यर्पण से संबंधित कानूनों को समेकित किया गया है। भारतीय प्रत्यर्पण अधिनियम, 1962 को वर्ष 1993 में ‘अधिनियम 66’ द्वारा संशोधित किया गया था।

भारत में प्रत्यर्पण का नोडल प्राधिकरण:

कॉन्सुलर, पासपोर्ट और वीज़ा (CPV) प्रभाग, विदेश मंत्रालय, भारत सरकार, प्रत्यर्पण अधिनियम का प्रवर्तन करने के लिए केंद्रीय / नोडल प्राधिकरण है। यह प्रभाग निवर्तमान प्रत्यर्पण अनुरोधों को संसाधित करता है।

प्रत्यर्पण के लिए शर्ते:

निम्नलिखित मामलों में किसी अभियुक्त को अनुरोध करने वाले राष्‍ट्र को प्रत्यर्पित नहीं किया जा सकता है:

  1. कोई संधि नहीं होने पर (No treaty) – संधि के अभाव में, देश, एलियंस/नागरिकों के प्रत्यर्पण के लिए बाध्य नहीं होते हैं।
  2. संधि में शामिल अपराध नहीं होने पर (No treaty crime) – आम तौर पर, प्रत्यर्पण संधि में चिह्नित अपराधों तक ही सीमित होते है, तथा यह संधि में भागीदार देशों के परस्पर संबंधो के अनुसार भिन्न हो सकते हैं।
  3. सैन्य और राजनीतिक अपराध – विशुद्ध रूप से सैन्य और राजनीतिक अपराधों के संबंध में प्रत्यर्पण से इंकार किया जा सकता है। आतंकवादी अपराधों और हिंसक अपराधों को प्रत्यर्पण संधियों के प्रयोजनों हेतु राजनीतिक अपराधों की परिभाषा से बाहर रखा गया है।
  4. दोहरी आपराधिकता का अभियुक्त होने पर (Want of Dual Criminality) – जब कोई अभियुक्त किसी अपराध के भारत और अन्य देश, दोनों में वांछित होता है।
  5. प्रक्रियात्मक विचार (Procedural considerations) – प्रत्यर्पण अधिनियम, 1962 द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किए जाने पर प्रत्यर्पण से इंकार किया जा सकता है।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. क्या भारत अपने नागरिकों का प्रत्यर्पण करता है?
  2. यदि कोई भगोड़ा अपराधी भारत में पाया जाता है तो गिरफ्तारी का वारंट प्राप्त करने की क्या प्रक्रिया है?
  3. क्या प्रत्यर्पित किए जाने के फैसले के खिलाफ कथित अपराधी की अपील की जा सकती है?
  4. प्रत्यर्पण के लिए प्रतिबंध क्या हैं??
  5. क्या भारत को अनंतिम गिरफ्तारी अनुरोध करने के लिए किसी विदेशी देश के साथ संधि की आवश्यकता है?
  6. भारत की ओर से प्रत्यर्पण अनुरोध कौन कर सकता है?

मेंस लिंक:

प्रत्यर्पण क्या होता है? भारत में प्रत्यर्पण के लिए विधायी आधार पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 


सामान्य अध्ययनIII


 

विषय: समावेशी विकास तथा इससे उत्पन्न विषय।

डिजिटल बैंकिंग इकाइयां


(Digital Banking Units)

संदर्भ:

हाल ही में, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस साल देश के 75 जिलों में ‘75 डिजिटल बैंकिंग इकाइयां’ (Digital Banking Units) स्थापित करने की अपनी बजट घोषणा को फिर से दोहराया है।

सरकार के इस कदम का उद्देश्य, अपने ‘डिजिटल वित्तीय समावेशन’ के एजेंडे को आगे बढ़ाना है।

‘डिजिटल बैंकिंग’ के बारे में:

आसान शब्दों में कहें तो ‘डिजिटल बैंकिंग’ (Digital Banking) में – चेक, जमा-पर्ची (Pay-In Slips), डिमांड ड्राफ्ट आदि जैसी कागजी कार्रवाई को दूर करते हुए- ‘सभी पारंपरिक बैंकिंग गतिविधियों को ऑनलाइन करना’ शामिल होता है।

‘डिजिटल बैंकिंग इकाइयों’ के बारे में:

एक ‘डिजिटल बैंकिंग इकाई’ (Digital Banking Unit), एक विशेष निश्चित बिंदु कार्य इकाई या हब होती है, जिसमे डिजिटल बैंकिंग उत्पादों और सेवाओं को प्रदान करने के साथ-साथ, मौजूदा वित्तीय उत्पादों और सेवाओं को किसी भी समय ‘स्वयं-सेवा मोड’ में डिजिटल रूप से उपलब्ध कराने के लिए कुछ न्यूनतम डिजिटल आधारभूत अवसंरचनाएं मौजूद होती हैं।

‘डिजिटल बैंकिंग इकाइयों’ की स्थापना:

जब तक रिज़र्व बैंक द्वारा विशेष रूप से प्रतिबंधित न किया गया हो, डिजिटल बैंकिंग में पूर्व अनुभव रखने वाले वाणिज्यिक बैंकों (क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, भुगतान बैंकों और स्थानीय क्षेत्र के बैंकों के अलावा) को टियर 1 से टियर 6 केंद्रों में ‘डिजिटल बैंकिंग इकाईयां’ (Digital Banking Units – DBUs) खोलने की अनुमति है। इसके अलावा निर्धारित शर्तों के अधीन, निर्दिष्ट बैंकों के लिए ‘डिजिटल बैंकिंग इकाईयां’ खोलने के लिए आरबीआई से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है।

इन इकाइयों द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाएं:

  1. आरबीआई के अनुसार, प्रत्येक ‘डिजिटल बैंकिंग इकाई’ (DBU) को कुछ न्यूनतम डिजिटल बैंकिंग उत्पादों और सेवाओं को प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। ऐसे उत्पाद ‘डिजिटल बैंकिंग सेगमेंट’ की बैलेंस शीट की देनदारियों और परिसंपत्ति, दोनों पक्षों से संबंधित होने चाहिए।
  2. ‘डिजिटल बैंकिंग इकाईयों’ द्वारा दी जाने वाली सेवाओं में, विभिन्न योजनाओं के तहत बचत बैंक खाते, चालू खाते, सावधि जमा और आवर्ती जमा खाते, ग्राहकों के लिए डिजिटल किट, मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट बैंकिंग, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड और मास ट्रांजिट सिस्टम कार्ड आदि शामिल हैं।

‘डिजिटल बैंकिंग इकाईयों’ के लाभ:

  1. डिजिटल बैंकिंग इकाइयाँ, ‘हल्के’ बैंकिंग दृष्टिकोण के साथ कम संख्या में छोटी-छोटी बैंक शाखाओं के माध्यम से ‘भौतिक मौजूदगी’/ भीड़भाड़ को कम करने का इरादा रखने वाली बैंकों की स्वतः मदद करेंगी।
  2. इस कदम से ऋण प्रवाह को बढ़ावा देने के अलावा, सेवा प्रदाताओं के लिए ग्रामीण बाजार खुल जाएगा।
  3. ऐसी इकाइयाँ, स्थापित करने में बैंक की नई शाखा की तुलना में सस्ती भी होंगी, और प्रौद्योगिकी के माध्यम से बेहतर ग्राहक अनुभव प्रदान कर सकती हैं।
  4. इन इकाइयों को नए जमाने के बैंकों के रूप में भी ‘ब्रांडेड’ किया जा सकता है, और यह नए उपभोक्ताओं को बेहतर तरीके से ब्रांडेड व्यक्तिगत ‘वित्त प्रबंधन उपकरण’ प्रदान करने में मदद कर सकती हैं।
  5. डिजिटल बैंकिंग इकाइयों को तकनीकी उपकरणों के कारण सस्ते रखरखाव हेतु कम कर्मचारियों की आवश्यकता होती है, और इसलिए ये मूल बैंक के लिए ‘उच्च-लाभ प्रदान करने वाली इकाइयां हो सकती हैं।
  6. यदि कुछ नहीं तो ऐसी और इकाइयाँ, समय की मांग के अनुरूप अधिक वित्तीय साक्षरता और डिजिटल बैंकिंग के प्रति अनुकूल दृष्टिकोण को प्रोत्साहित कर सकती हैं।

महत्व:

सरकार के इस कदम से ऋण प्रवाह को बढ़ावा देने के अलावा, सेवा प्रदाताओं के लिए ग्रामीण बाजार खुल जाएगा।

आवश्यकता:

डिजिटल बैंकिंग, डिजिटल भुगतान और ‘फिनटेक इनोवेशन’ में तेजी से वृद्धि को देखते हुए, डिजिटल बैंकिंग – जिसमें बहुत अधिक संभावनाएं हैं- की सहायता करने हेतु डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करना महत्वपूर्ण है।

‘डिजिटल बैंकिंग इकाईयों’ के लिए आरबीआई के दिशानिर्देश:

  1. भारतीय रिज़र्व बैंक के दिशानिर्देशों के अनुसार, ‘डिजिटल बैंकिंग इकाई’ (DBU) खोलने की अनुमति ‘डिजिटल बैंकिंग’ का पिछला अनुभव रखने वाली अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (Scheduled Commercial Banks – SCB) को दी गई है।
  2. ये अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की अनुमति के बिना टियर 1 से टियर 6 केंद्रों में डिजिटल बैंकिंग इकाई’ खोल सकते हैं।
  3. अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों द्वारा खोले जाने वाले DBU को बैंकिंग आउटलेट माना जाएगा।
  4. प्रत्येक DBU में, बाहर निकलने और प्रवेश करने के लिए, अलग-अलग स्पष्ट प्रावधान होने चाहिए।
  5. दिशानिर्देशों में कहा गया है, कि DBU को उचित प्रारूपों के साथ मौजूदा बैंकिंग आउटलेट से भिन्न होना चाहिए, बशर्ते इसके प्रारूप डिजिटल बैंकिंग उपयोगकर्ताओं के लिए उपयुक्त होने चाहिए।
  6. प्रत्येक DBU का नेतृत्व बैंक के एक वरिष्ठ और अनुभवी कार्यकारी द्वारा किया जाना चाहिए, जिसे DBU के मुख्य परिचालन अधिकारी (Chief Operating Officer – COO) के रूप में नामित किया जा सकता है।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. डिजिटल बैंकिंग इकाइयाँ
  2. स्थापित करने हेतु पात्रता
  3. सेवाएं
  4. डिजिटल बैंकिंग

मेंस लिंक:

डिजिटल बैंकिंग इकाइयों के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

ध्वनि प्रदूषण


(Noise Pollution)

संदर्भ:

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे द्वारा मस्जिदों में लाउडस्पीकर का मुद्दा उठाए जाने के बाद महाराष्ट्र में नए विवाद सामने आये हैं। राज ठाकरे ने चेतावनी दी है कि यदि 3 मई तक लाउडस्पीकरों को नहीं हटाया गया, तो उनकी पार्टी तेज आवाज में हनुमान चालीसा बजाएगी।

‘महाराष्ट्र सरकार’ इस विवाद का समाधान करने के लिए ‘ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम’, 2000 (Noise Pollution (Regulation and Control) Rules, 2000) के प्रावधानों का सहारा ले सकती है।

भारतीय कानूनों के अनुसार ‘ध्वनि प्रदूषण’:

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, ‘शोर’ (Noise) एक अवांछित ध्वनि है। कोई भी अवांछित ध्वनि जो मनुष्य में झुंझलाहट, चिड़चिड़ाहट और कान में दर्द का कारण बनती है उसे ‘शोर’ कहा जाता है।

शोर का स्वीकार्य स्तर:

  1. क़ानून के तहत नियमों में, दिन और रात के दौरान सभी क्षेत्रों में शोर के स्वीकार्य स्तरों को परिभाषित किया गया है। दिन का समय में ‘प्रातः 6 बजे से रात्रि 10 बजे तक’ और रात का समय ‘रात्रि 10 बजे से प्रातः 6 बजे तक’ की अवधि से अभिप्रेत है।
  2. वाणिज्यिक क्षेत्रों में, दिन और रात के समय शोर की अधिकतम सीमा क्रमशः 65 डेसीबल (dB) और 55 डेसीबल निर्धारित की गई है। रिहायशी इलाकों में ये सीमा दिन और रात में क्रमश: 55 डेसीबल और 45 डेसीबल हैं।
  3. औद्योगिक क्षेत्रों में, दिन और रात के समय शोर की अधिकतम सीमा 75 डेसीबल और 70 डेसीबल निर्धारित की गई है, जबकि शांत क्षेत्रों में, यह सीमा 50 डेसीबल और 40 डेसीबल है।

ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 (Noise Pollution (Regulation and Control) Rules, 2000):

वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 (Air (Prevention and Control of Pollution) Act, 1981) की धारा 2 (a) के अंतर्गत ‘ध्वनि’ को ‘वायु प्रदूषक’ माना गया है। रिपोर्टों के अनुसार, वायुमंडल में मौजूद किसी ऐसी मात्रा में विद्यमान कोई ठोस, द्रव या गैसीय पदार्थ (जिसके अंतर्गत शोर भी है), जिससे मानव, अन्य जीवित प्राणी या वनस्पति या संपत्ति या पर्यावरण के लिए क्षति हो सकती है या जिसका क्षतिकर होना संभाव्य है, “वायु प्रदूषक” (Air Pollutant) होता है।

  • ध्वनि प्रदूषण और इसके स्रोतों पर ‘पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम’, 1986 के तहत ‘ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 लागू होते हैं।
  • अधिनियम के अंतर्गत, परिभाषित परिवेश स्वीकार्य शोर स्तर, लाउडस्पीकरों के उपयोग पर प्रतिबंध, ध्वनि उत्सर्जक निर्माण उपकरण, हॉर्न, पटाखे फोड़ना आदि शामिल हैं।

लाउडस्पीकर से संबंधित कानून:

  • केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने लाउडस्पीकर के उपयोग या सार्वजनिक भाषण के दौरान अथवा किसी अन्य तरीके से ‘ध्वनि प्रदूषण’ मानदंडों का उल्लंघन करने पर ‘जुर्माना’ सूचीबद्ध किया है, जिसके परिणामस्वरूप 10,000 रुपये का जुर्माना हो सकता है।
  • किसी सार्वजनिक जगह की सीमा पर, जहां लाउडस्पीकर या ध्वनि प्रवर्धक तंत्र (Public Address System) या किसी अन्य माध्यम उपयोग किया जा रहा है, उस क्षेत्र के लिए शोर का स्तर, ‘परिवेशी शोर मानकों’ से 10 dB (A) या 75 dB (A) – जो भी कम हो- से अधिक नहीं होना चाहिए।
  • नियमों में यह भी कहा गया है, कि लाउडस्पीकर या ध्वनि प्रवर्धक तंत्र का उपयोग ‘निर्दिष्ट प्राधिकारी’ से लिखित अनुमति प्राप्त किए बगैर नहीं किया जाएगा।
  • अपवाद: राज्य सरकार, किसी भी सांस्कृतिक या धार्मिक उत्सव के अवसर पर एक सीमित अवधि के लिए इन नियमों से छूट प्रदान कर सकती है, जोकि एक कैलेंडर वर्ष के दौरान कुल मिलाकर 15 दिनों से अधिक की नहीं होगी।

‘ध्वनि प्रदूषण’ का स्वास्थ्य पर असर:

  • यद्यपि, ‘ध्वनि प्रदूषण’ पर वायु और जल प्रदूषण जितना ध्यान नहीं दिया जाता है, किंतु इसको लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित करने के लिए जाना जाता है।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, लगभग 1.1 बिलियन युवाओं (12-35 वर्ष की आयु के बीच) को ‘शोर’ के संपर्क में आने के कारण ‘श्रवण हानि’ का खतरा है।
  • WHO के अनुसार, इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि रात में शोर के संपर्क में आने से नींद में खलल पड़ता है और शोर की वजह से ‘नींद की गड़बड़ी’ को स्वास्थ्य समस्या के रूप में देखा जाता है।
  • WHO ने यह भी कहा है कि इस बात के भी प्रमाण है- हालंकि ये सीमित मात्रा में हैं- कि नींद में खलल से थकान, दुर्घटनाएं और व्यक्ति के प्रदर्शन में भी कमी आती है।
  • अधिक शोर के कारण होने वाले विभिन्न शारीरिक विकारों में, अस्थायी बहरापन, सिरदर्द और रक्तचाप में वृद्धि आदि शामिल है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


 स्कॉर्पीन पनडुब्बी वागशीर

  • हाल ही में, मुंबई के मझगांव डॉक लिमिटेड (एमडीएल) में छठी स्कॉर्पीन पनडुब्बी ‘वागशीर’ (VAGSHEER) को समुद्र में उतारा गया।
  • यह प्रोजेक्ट- 75 के तहत कलवरी श्रेणी से आने वाली पनडुब्बियों की छठी और आखिरी है।
  • प्रोजेक्ट- 75 (P75) के तहत, आईएनएस कल्वारी, आईएनएस खंदेरी, आईएनएस करंज और आईएनएस वेला को कमीशन किया जा चुका है। और ‘वागशीर’ के लिए समुद्री परीक्षण जारी हैं।

‘वागशीर’ (VAGSHEER) का नामकरण, हिंद महासागर के एक गहरे जल में पायी जानी एक समुद्री शिकारी मछली ‘सैंड फिश’ के नाम पर किया गया है। रूस से आने वाले पहली पनडुब्बी ‘वागशीर’ को 26 दिसंबर, 1974 को भारतीय नौसेना में कमीशन किया गया था, और 30 अप्रैल, 1997 को नौसेना से हटा दिया गया था।

Current Affairs

 

सरमट इंटरकांटिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल

(Sarmat intercontinental ballistic missile)

  • यह एक इंटरकांटिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल है, हाल ही में रूस द्वारा इसका सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया है।
  • इस नई मिसाइल प्रणाली उच्चतम सामरिक और तकनीकी विशेषताओं से लैस हैं और यह सभी आधुनिक मिसाइल रोधी उपकरणों को भेदने में सक्षम है।

 

भारत का पहला शुद्ध हरित हाइड्रोजन संयंत्र

हाल ही में, असम के जोरहाट में भारत का भारत का पहला शुद्ध हरित हाइड्रोजन संयंत्र शुरू किया गया है।

  • इसे भारत का पहला शुद्ध हरित हाइड्रोजन संयंत्र द्वारा स्थापित किया गया है।
  • यह संयंत्र मौजूदा 500 किलोवॉट सौर संयंत्र द्वारा 100 किलोवॉट ‘एनआयन एक्सचेंज मेम्ब्रेन’ (Anion Exchange Membrane) इलेक्ट्रोलाइजर सरणी का उपयोग करके उत्पन्न बिजली से ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन करता है।

 

महारानी जिन्द कौर

महारानी जिंदान कौर / जिन्द कौर (Maharani Jindan Kaur)  महाराजा रणजीत सिंह की सबसे छोटी पत्नी थीं।

  • महारानी जिन्द कौर, सिख साम्राज्य के अंतिम शासक महाराजा दलीप सिंह की मां थीं। दलीप सिंह का पालन-पोषण अंग्रेजों द्वारा किया गया था।
  • उसने पंजाब में अंग्रेजों के विरुद्ध एक जोशीले विद्रोह का नेतृत्व किया, लेकिन अंततः उन्हें आत्मसमर्पण करने के लिए विवश होना पड़ा।

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