[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 13 April 2022

विषयसूची

सामान्य अध्ययन-I

1. ज्योतिराव फुले

 

सामान्य अध्ययन-II

  1. मध्याह्न भोजन और पूरक आहार
  2. भारत में बच्चे को गोद लेने की प्रक्रिया का सरलीकरण
  3. ‘2+2’ वार्ता प्रारूप

 

सामान्य अध्ययन-III

  1. 5G वर्टिकल एंगेजमेंट एंड पार्टनरशिप प्रोग्राम
  2. राज्य ऊर्जा और जलवायु सूचकांक

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

  1. गुजरात का वाघा
  2. CALM प्रणाली
  3. भारत में पेटेंट के लिए फाइलिंग
  4. असम में महापाषाण कालीन पत्थर के मर्तबान

 


सामान्य अध्ययनI


 

विषय: 18वीं सदी के लगभग मध्य से लेकर वर्तमान समय तक का आधुनिक भारतीय इतिहास- महत्त्वपूर्ण घटनाएँ, व्यक्तित्व, विषय।

ज्योतिराव फुले


(Jyotirao Phule)

संदर्भ:

11 अप्रैल को प्रसिद्ध समाज सुधारक ‘ज्योतिराव फुले’ (Jyotirao Phule) की जयंती मनाई गई।

  • ‘ज्योतिराव फुले’ एक बहुआयामी व्यक्तित्व के स्वामी थे, और उन्होंने सामाजिक समानता, महिला सशक्तिकरण और शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए अथक प्रयास किया।
  • फुले को सामाजिक न्याय के हिमायती और अनगिनत लोगों के लिए आशा के स्रोत के रूप में व्यापक रूप से सम्मानित किया जाता है।
  • इनका जन्म वर्ष 1827 में महाराष्ट्र के सतारा जिले में ‘माली’ जाति के परिवार में हुआ था। इनका परिवार जीवन यापन के लिए फल और सब्जियां उगाता था।

समाज के लिए इनके महत्वपूर्ण योगदान:

  • अपनी पत्नी सावित्रीबाई फुले के साथ, ‘ज्योतिराव फुले’ ने हाशिए पर रहने वाले समुदायों में महिलाओं और बच्चों के उत्थान के लिए काफी काम किए।
  • वर्ष 1848 में, उन्होंने पुणे के भिड़ेवाड़ा में लड़कियों के लिए अपना पहला स्कूल शुरू किया।
  • 1873 में, उन्होंने निचली जातियों के लोगों हेतु बुनियादी अधिकारों के लिए लड़ने के लिए अपने अनुयायियों के साथ ‘सत्यशोधक समाज’ (सत्य साधकों का समाज) की स्थापना की।
  • उन्होंने शिशुहत्या को रोकने और ‘विधवा पुनर्विवाह’ को बढ़ावा देने के लिए भी लड़ाई लड़ी।
  • सामाजिक अस्पृश्यता के कलंक को समाप्त करने के लिए उन्होंने निचली जाति के लोगों के लिए अपना घर खोल दिया और उन्हें अपने पानी के कुएं का उपयोग करने की अनुमति दी।
  • फुले दंपत्ति ने गर्भवती विधवाओं और बलात्कार पीड़ितों की सुरक्षा के लिए एक ‘चाइल्डकैअर सेंटर’- ‘बाल्यता प्रतिबंधक गृह’ (Balyata Pratibandak Gruha) की स्थापना की।

“महात्मा” की उपाधि:

वर्ष 1888 में महाराष्ट्र के एक अन्य सामाजिक कार्यकर्ता विट्ठलराव कृष्णजी वांडेकर द्वारा ‘ज्योतिराव फुले’ को ‘महात्मा’ की उपाधि प्रदान की गयी।

उनकी प्रसिद्ध रचनाएँ:

तृतीया रत्न (1855), गुलामगिरि (1873), शेतकरायचा आसूद या कल्टीवेटर्स व्हिपकॉर्ड (1881), सत्यशोधक समाजोक्त मंगलाष्टकश सर्व पूजा-विधि (1887)।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. महात्मा फुले की महत्वपूर्ण साहित्यिक रचनाएँ।
  2. उन्हें फुले की उपाधि किसने दी?
  3. सत्यशोधक समाज के उद्देश्य।
  4. किस राज्य ने ज्योतिराव फुले पर एक योजना शुरू की है और यह किससे संबंधित है?
  5. सावित्रीबाई फुले का उल्लेखनीय योगदान।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 


सामान्य अध्ययनII


 

विषय: केन्द्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन; इन अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय।

मध्याह्न भोजन और पूरक आहार


(Midday Meal And Supplements)

संदर्भ:

अगले शैक्षणिक सत्र से कर्नाटक ‘मध्याह्न भोजन योजना’ (Mid-Day Meal scheme) के तहत अंडे उपलब्ध कराने वाला 13वां राज्य बनने की संभावना है।

  • यह प्रस्ताव, राज्य के कई हिस्सों में बच्चों में कुपोषण, रक्ताल्पता और कम रोग प्रतिरोधक क्षमता के उच्च प्रसार की ओर इशारा करते हुए क्रमिक सर्वेक्षणों के आधार पर प्रस्तुत किया गया है।
  • राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-V के निष्कर्षों के अनुसार, राज्य में पांच वर्ष से कम आयु के 35% बच्चे अविकसित और लगभग 20% बच्चे दुर्बल थे।

 

पीएम पोषण / मध्याह्न भोजन योजना :

वर्ष 2021 में ‘मध्याह्न भोजन योजना’ का नाम बदलकर ‘प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना’ (PM Poshan Shakti Nirman Scheme) / ‘पीएम पोषण’ योजना’ कर दिया गया था।

  • ‘मध्याह्न भोजन योजना’ को केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में 15 अगस्त 1995 को शुरू किया गया था।
  • कवरेज: प्रारंभ में, इस योजना को कक्षा 5 तक के छात्रों के लिए लॉन्च किया गया था। वर्ष 2007 में, यूपीए सरकार द्वारा इसे कक्षा 8 तक विस्तारित कर दिया गया।
  • यह योजना ‘मानव संसाधन विकास मंत्रालय’ के अंतर्गत आती है।

इतिहास:

‘बच्चों को भोजन उपलब्ध कराने की पहल’ पहली बार तत्कालीन ‘मद्रास नगर निगम’ द्वारा वर्ष 1920 के आसपास की गयी थी।

  • स्वतंत्रता के बाद के भारत में ‘तमिलनाडु’ में इस तरह की एक पहल शुरू की गयी। जिसके तहत तत्कालीन मुख्यमंत्री ‘के कामराज’ ने वर्ष 1956 में एक ‘स्कूल फीडिंग योजना’ की शुरुआत की।
  • केरल में 1961 से एक लोकोपकारी एजेंसी द्वारा संचालित ‘स्कूल लंच योजना’ जारी थी।
  • बाद में, राज्य सरकार ने आधिकारिक तौर पर 1 दिसंबर 1984 को इस पहल को अपने अधिकार में ले लिया, जिसके बाद केरल ‘स्कूल लंच कार्यक्रम’ चलाने वाला देश का दूसरा राज्य बन गया।

वर्तमान में योजना का विस्तार:

  • वर्तमान में, इस योजना में 20 लाख सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों और स्थानीय निकायों द्वारा संचालित कक्षा 1 से 8 (6 से 14 आयु वर्ग) के 11.80 करोड़ बच्चे शामिल हैं।
  • 2022-23 के बजट में, केंद्र ने योजना के लिए 10,233 करोड़ रुपये निर्धारित किए हैं, जबकि राज्यों द्वारा 6,277 करोड़ रुपये खर्च करने की अपेक्षित है।

विधिक अधिकार:

  • यह योजना राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 (NFSA) के प्रावधानों के तहत गारंटीकृत है।
  • यह योजना ‘पीपुल्स यूनियन ऑफ सिविल लिबर्टीज’ बनाम ‘यूनियन ऑफ इंडिया एंड अदर्स’ मामले (2001) में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भी आधारित है।

कैलोरी आवश्यकताएँ:

  • प्राथमिक कक्षा के बच्चों के लिए: कम से कम 450 कैलोरी और 12 ग्राम प्रोटीन।
  • उच्च प्राथमिक बच्चों के लिए: 700 कैलोरी और 20 ग्राम प्रोटीन की आवश्यकता होती है।

कार्यान्वयन:

  • नियमों के तहत, प्रति बच्चा 97 रुपये प्रति दिन (प्राथमिक कक्षाएं) और 7.45 रुपये (उच्च प्राथमिक) का आवंटन ‘एक विधायिका वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों’ के साथ 60:40 के अनुपात में, और पूर्वोत्तर राज्यों, जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के साथ 90:10 के अनुपात में साझा किया जाता है। विधायिका रहित केंद्र शासित प्रदेशों में लागत का 100% केंद्र सरकार द्वारा वहन किया जाता है।
  • लेकिन, जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दूध और अंडे जैसी अतिरिक्त पूरक पोषण वस्तुओं को भोजन के साथ प्रदान किया जाता है, उन राज्यों का योजना के तहत कुल व्यय में अधिक योगदान होता है।
  • रसोइयों और श्रमिकों को भुगतान, जैसे घटकों को भी केंद्र और राज्यों के बीच समान अनुपात में विभाजित किया जाता है।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. MDMS योजना कब शुरू हुई?
  2. इसका नाम-परिवर्तन कब किया गया था?
  3. केंद्र प्रायोजित और केंद्रीय क्षेत्र की योजनाओं के बीच अंतर?
  4. MDMS किस प्रकार की योजना है?
  5. योजना के तहत वित्त पोषण
  6. पोषक मानदंड निर्धारित
  7. योजना के तहत कवरेज
  8. योजना के तहत खाद्य सुरक्षा भत्ता देने की जिम्मेदारी

मेंस लिंक:

मध्याह्न भोजन योजना के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 

विषय: विभिन्न घटकों के बीच शक्तियों का पृथक्करण, विवाद निवारण तंत्र तथा संस्थान।

 भारत में बच्चे को गोद लेने की प्रक्रिया का सरलीकरण


संदर्भ:

हाल ही में, सुप्रीम कोर्ट बच्चे को गोद लेने में शामिल कानूनी प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत हो गया है।

आवश्यकता:

भारत में वर्तमान गोद लेने की प्रक्रिया काफी जटिल है। जिसके परिणामस्वरूप हमारे देश में सालाना आधार पर मात्र 4,000 दत्तक ग्रहण होते हैं।

  • इसके अलावा, मौजूदा महामारी की वजह से देश में लगभग तीन करोड़ से अधिक बच्चे अनाथ हो गए हैं।
  • विधायिका की ओर से भी इस विषय पर एक विसंगति (Anomaly) है, क्योंकि ‘दत्तक ग्रहण’ संबंधी प्रक्रियाएं ‘हिंदू दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण अधिनियम’ 1956 के अनुसार निष्पादित की जाती हैं और इसके लिए ‘विधि एवं न्याय मंत्रालय’ नोडल मंत्रालय के रूप में कार्य करता है, जबकि ‘अनाथों’ से संबंधित अन्य पहलुओं को ‘महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा निपटाया जाता है।
  • ‘अंतर्देशीय दत्तक ग्रहण’ से संबंधित प्रावधानों में भी कई चिंताएं और खामियां हैं।

भारत में दत्तक-ग्रहण:

(Adoption in India)

भारत में, कोई भारतीय नागरिक या एक अनिवासी भारतीय (NRI) ‘हिंदू दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण अधिनियम, 1956 (Hindu Adoption and Maintenance Act, 1956) के तहत किसी बच्चे को गोद ले सकते हैं।

भावी दत्तक अभिभावकों के लिए पात्रता मानदंड:

  1. भावी दत्तक माता-पिता (Adoptive Parents) शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से स्थिर, आर्थिक रूप से सक्षम होने चाहिए तथा उनके लिए जीवन को खतरे में डालने वाली कोई चिकित्सीय स्थिति नहीं होनी चाहिए।
  2. कोई भी भावी दत्तक माता-पिता, चाहे उसकी वैवाहिक स्थिति कुछ भी हो और उसका जैविक पुत्र या पुत्री हो अथवा नहीं हो, निम्नलिखित शर्तों के अधीन बच्चे को गोद ले सकता है:
  • विवाहित जोड़े के मामले में, गोद लेने के लिए दोनों पति-पत्नी की सहमति आवश्यक होगी;
  • एक अकेली महिला किसी भी लिंग के बच्चे को गोद ले सकती है;
  • एक अकेला पुरुष एक लड़की को गोद लेने के लिए पात्र नहीं होगा;
  1. किसी दंपत्ति को कोई बच्चा गोद लेने के लिए, उनका न्यूनतम दो साल का स्थिर वैवाहिक संबंध होना आवश्यक होगा।
  2. बच्चे और ‘भावी दत्तक माता-पिता’ में से किसी एक के बीच ‘न्यूनतम आयु’ का अंतर पच्चीस वर्ष से कम नहीं होना चाहिए।
  3. सौतेले माता-पिता अथवा किसी रिश्तेदार द्वारा दत्तक ग्रहण और गोद लेने के मामले में भावी दत्तक माता-पिता के लिए आयु मानदंड लागू नहीं होंगे।
  4. विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को छोड़कर, तीन या अधिक बच्चों वाले दंपत्तियों को गोद लेने के लिए विचार नहीं किया जाएगा।

अनाथ बच्चों के साथ अपनाई जाने वाली प्रक्रिया:

  1. अगर किसी को किसी ऐसे बच्चे की जानकारी है, जिसे देखभाल की जरूरत है, तो उसके लिए चार एजेंसियों – चाइल्डलाइन 1098, जिला बाल कल्याण समिति (CWC), जिला बाल संरक्षण अधिकारी (DCPO) अथवा राज्य की हेल्पलाइन बाल अधिकार संरक्षण आयोग – में से एक से संपर्क करना होगा।
  2. इसके बाद, CWC द्वारा बच्चे का आकलन किया जाएगा और उसे ‘विशेष दत्तक ग्रहण एजेंसी’ की तत्काल देखरेख में रखा जाएगा।
  3. जब किसी बच्चे के पास कोई परिवार नहीं होता है, तो राज्य उस बच्चे का अभिभावक बन जाता है।

केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण’ (CARA) के बारे में:

‘केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण’ (Central Adoption Resource Authority- CARA), महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन एक सांविधिक निकाय है।

  • CARA भारतीय बच्चों को गोद लेने के लिए ‘नोडल निकाय’ के रूप में कार्य करता है और इसके लिए देश में और अंतर-देश में गोद लेने की निगरानी और विनियमन का दायित्व सौंपा गया है।
  • 2003 में भारत सरकार द्वारा अनुसमर्थित ‘अंतर्देशीय दत्तक ग्रहण’, 1993 पर ‘हेग कन्वेंशन’ के प्रावधानों के अनुसार अंतर-देशीय दत्तक ग्रहण संबंधी मामलों से निपटने के लिए केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण’ (CARA) को केंद्रीय प्राधिकरण के रूप में नामित किया गया है।
  • CARA, मुख्य रूप से अपनी संबद्ध/मान्यता प्राप्त दत्तक ग्रहण एजेंसियों के माध्यम से अनाथ, परित्यक्त और आत्मसमर्पण करने वाले बच्चों को गोद लेने से जुड़ा हुआ है।
  • ‘केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण’ (CARA) को ‘किशोर न्याय (बच्चों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम’, 2015 की धारा 68 के अनुसार समय-समय पर गोद लेने से संबंधित मामलों पर नियम बनाने का भी अधिकार है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप भावी दत्तक माता-पिता के लिए आवश्यक ‘पात्रता मानदंडों’ के बारे में जानते हैं? इस बारे में अधिक जानकारी हेतु पढ़िए।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. हेग कन्वेंशन क्या है?
  2. भारत में भावी दत्तक माता-पिता के लिए पात्रता मानदंड
  3. जेजे अधिनियम का अवलोकन
  4. ‘केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण’ (CARA) के बारे में
  5. अधिनियम के अनुसार चाइल्डकेयर संस्थानों का पंजीकरण
  6. नवीनतम संशोधन प्रस्तावित
  7. NCPCR के बारे में

मेंस लिंक:

भारत में बच्चे को गोद लेने की प्रक्रिया को किस प्रकार नियंत्रित किया जाता है? प्रक्रिया को और सरल बनाने के लिए कौन से सुधार आवश्यक हैं।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

2+2 वार्ता प्रारूप


(2+2 Dialogue)

संदर्भ:

भारत और अमेरिका के बीच वाशिंगटन डीसी में चौथी 2+2 वार्ता (2+2 Dialogue) जारी है।

भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, अपने अमेरिकी समकक्षों, विदेश मंत्री एंथनी ब्लिंकन और रक्षा सचिव लॉयड ऑस्टिन के साथ बैठक कर रहे हैं।

2+2 वार्ता:

‘2+2 वार्ता’ (2+2 dialogue), दो देशों के विदेश मंत्रियों और रक्षा मंत्रियों के बीच आयोजित बैठक का एक प्रारूप होता है। आम तौर पर इसका उद्देश्य रक्षा, सुरक्षा और खुफिया तंत्र के अधिक समेकन सहित द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक रूप से प्रगाढ़ करने हेतु एक तंत्र का निर्माण करने के लिए किया जाता है।

महत्व:

एक 2+2 मंत्रिस्तरीय संवाद, भागीदारों को तेजी से बदलते वैश्विक परिवेश में एक मजबूत, अधिक एकीकृत रणनीतिक संबंध बनाने के लिए दोनों पक्षों के राजनीतिक कारकों को ध्यान में रखते हुए एक-दूसरे की रणनीतिक चिंताओं और संवेदनशीलता को बेहतर ढंग से समझने और उनकी सराहना करने में सक्षम बनाता है।

भारत के रणनीतिक 2+2 वार्ता भागीदार:

भारत के चार प्रमुख रणनीतिक साझेदारों – अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान और रूस – के साथ 2+2 वार्ता संबंध हैं। इनमे रूस के अलावा, अन्य तीन देश ‘क्वाड समूह’ में भी भारत के साझेदार हैं।

अमेरिका, भारत का सबसे पुराना और सबसे महत्वपूर्ण 2+2 वार्ता भागीदार है।

2+2′ वार्ताओं के परिणाम:

इन वर्षों में, 2+2 प्रारूप में आयोजित वार्ताओं सहित, अपने भागीदारों के साथ सामरिक द्विपक्षीय संबंधों ने भारत के लिए ठोस और दूरगामी परिणाम दिए हैं।

भारत और अमेरिका ने 2016 में ‘लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट’ (LEMOA) के साथ शुरू होने वाले गहरे सैन्य सहयोग के लिए “फाउंडेशनल पैक्ट्स” की एक तिकड़ी पर हस्ताक्षर किए हैं। पहले 2018 में 2+2 वार्ता के बाद ‘कम्युनिकेशंस कम्पैटिबिलिटी एंड सिक्योरिटी एग्रीमेंट’ (COMCASA) तथा इसके बाद 2020 में बेसिक एक्सचेंज एंड कोऑपरेशन एग्रीमेंट (BECA) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. 2+2 वार्ता
  2. BECA
  3. COMCASA
  4. LEMOA
  5. 2+2 पार्टनर्स

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 


सामान्य अध्ययनIII


 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

5G वर्टिकल एंगेजमेंट एंड पार्टनरशिप प्रोग्राम


(5G Vertical Engagement and Partnership Program)

संदर्भ:

दूरसंचार विभाग (Department of Telecommunications – DoT) ने “5जी वर्टिकल एंगेजमेंट एंड पार्टनरशिप प्रोग्राम (Vertical Engagement and Partnership Program – VEPP)” पहल के लिए ‘अभिरुचि की अभिव्यक्ति’ /‘एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट’ (Expression of Interest – EOI) आमंत्रित किए है।

5G VEPP के बारे में:

  • 5जी वर्टिकल एंगेजमेंट एंड पार्टनरशिप प्रोग्राम (VEPP)” पहल के तहत, 5जी उपयोग के मामले के विकास कार्यक्रम को बढ़ावा देने के लिए, दूरसंचार विभाग अन्य मंत्रालयों और राज्य सरकार के विभागों, स्टार्टअप हब के साथ साझेदारी में आवश्यक अनुमोदन/नियामक मंजूरी की सुविधा प्रदान करेगा ताकि उपयोगकर्ता या ऊर्ध्वाधर (वर्टिकल) उद्योग परिसर को सक्षम बनाया जा सके।
  • इसके तहत, दूरसंचार विभाग (DoT) द्वारा आवश्यक प्रायोगिक स्पेक्ट्रम भी प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराया जाएगा।

उद्देश्य:

इस पहल का उद्देश्य 5जी यूज-केस इकोसिस्टम हितधारकों के बीच मजबूत सहयोग साझेदारी के तेजी से निर्माण करना तथा विशेषकर उपयोगकर्ता / वर्टिकल उद्योग की आवश्यकताओं को विशेष जोर देते हुए पूरा करना है।

महत्व:

“5जी वर्टिकल एंगेजमेंट एंड पार्टनरशिप प्रोग्राम” को ‘उद्योग वर्टिकल’ के लिए प्रस्तुत किया जा रहा है, जिसमें उपयोगकर्ता वर्टिकल और 5जी टेक हितधारकों (सेवा प्रदाताओं, समाधान प्रदाताओं और भागीदार ओईएम) के बीच घनिष्ठ सहयोग को सक्षम करने के लिए ‘रुचि की अभिव्यक्ति’ (एक्सप्रेशन ऑफ़ इंटरेस्ट – EOI) के माध्यम से अभिनव 5जी उपयोग के मामलों के परीक्षण सह उत्पादन आधार (टेस्टिंग –कम- ब्रीडिंग ग्राउंड) के रूप में क्षमता है।

और ये संबंधित आर्थिक कार्यक्षेत्रों में 5जी डिजिटल समाधानों को आज़माने और परिष्कृत करने के लिए एक गुणक प्रभाव को ट्रिगर कर सकते हैं।

5G तकनीक के परीक्षण और शुरुआत संबंधी मामले में भारत:

  • सरकार के अनुसार, 5जी स्पेक्ट्रम की नीलामी मार्च या अप्रैल 2022 में की जाएगी। कुछ विशेषज्ञों का कहना है, कि इसमें कम से कम तीन महीने की और देरी हो सकती है क्योंकि दूरसंचार सेवा प्रदाताओं ने अभी तक इस तकनीक और संबंधित विभिन्न पहलुओं का परीक्षण पूरा नहीं किया है।
  • भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) द्वारा किया जा रहा ‘हितधारक परामर्श’ अंतिम चरण में है, और यह वर्ष 2022 की शुरुआत में दूरसंचार विभाग को अपनी सिफारिशें प्रस्तुत कर सकता है।
  • इस बीच, निजी दूरसंचार कंपनियों ने 5G के रोलआउट के संबंध में विभिन्न स्तरों – जैसेकि परीक्षण करना, परीक्षण गति और स्वदेशी 5G नेटवर्क बनाना- पर काफी प्रगति की है।

5G क्या है?

5G तकनीक, मोबाइल ब्रॉडबैंड की अगली पीढ़ी है। यह तकनीक अंततः 4G LTE कनेक्शन को प्रतिस्थापित करेगी या इसमें महत्वपूर्ण वृद्धि करेगी।

5G तकनीक की विशेषताएं और लाभ:

  1. यह तकनीक, ‘मिलीमीटर वेव स्पेक्ट्रम’ (30-300 गीगाहर्ट्ज़) पर कार्य करती है, जिसके द्वारा काफी बड़ी मात्रा में डेटा को बहुत तेज गति से भेजा जा सकता है।
  2. 5G तकनीक, तीन बैंड्स अर्थात् निम्न, मध्य और उच्च आवृत्ति स्पेक्ट्रम में काम करती है।
  3. मल्टी-जीबीपीएस ट्रान्सफर रेट तथा अत्याधिक कम विलंबता (ultra-low latency), 5G तकनीक, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की ताकत का उपयोग करने वाली एप्लीकेशंस का समर्थन करेगी।
  4. 5G नेटवर्क की बढ़ी हुई क्षमता, लोड स्पाइक्स के प्रभाव को कम कर सकती है, जैसे कि खेल आयोजनों और समाचार कार्यक्रमों के दौरान होती है।

 

प्रौद्योगिकी का महत्व:

भारत की राष्ट्रीय डिजिटल संचार नीति 2018 में 5G के महत्व पर प्रकाश डाला गया है, जिसमें कहा गया है कि एक वृद्धिशील स्टार्ट-अप समुदाय सहित 5G, क्लाउड, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) और डेटा एनालिटिक्स, अवसरों के एक नए क्षितिज को खोलने तथा डिजिटल जुड़ाव को तीव्र एवं गहन करने का वादा करता है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या भारत 5G सेवाओं को शुरू करने (रोल-आउट) के लिए तैयार है?

प्रीलिम्स लिंक:

  1. 5G क्या है?
  2. 3G, 4G और 5G के बीच अंतर।
  3. अनुप्रयोग
  4. ‘स्पेक्ट्रम’ क्या होता है?
  5. EMF परियोजना के बारे में।

मेंस लिंक:

5G तकनीक के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

राज्य ऊर्जा और जलवायु सूचकांक


(State Energy and Climate Index)

संदर्भ:

हाल ही में, नीतू आयोग द्वारा ‘राज्य ऊर्जा और जलवायु सूचकांक’ (State Energy and Climate Index – SECI) का शुभारंभ  किया गया है।

यह देश का पहला सूचकांक है, जिसका उद्देश्य जलवायु और ऊर्जा क्षेत्र में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा किए गए प्रयासों को ट्रैक करना है।

राज्य ऊर्जा और जलवायु सूचकांक:

  • सूचकांक में राज्यों को आकार और भौगोलिक अंतर के आधार पर बड़े और छोटे राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
  • यह सूचकांक 2019-20 के आंकड़ों पर आधारित है।
  • राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को तीन समूहों फ्रंट रनर, अचीवर्स और एस्पिरेंट्स में वर्गीकृत किया गया है।

सूचकांक के उद्देश्य:

  1. राज्यों को, ऊर्जा पहुंच, ऊर्जा खपत, ऊर्जा दक्षता और पर्यावरण की सुरक्षा में सुधार के प्रयासों के आधार पर रैंकिंग देना।
  2. राज्य स्तर पर सस्ती, सुलभ, कुशल और स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण के एजेंडे को चलाने में मदद करना।
  3. ऊर्जा और जलवायु के विभिन्न आयामों पर राज्यों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करना।

सूचकांक में राज्यों के प्रदर्शन को निम्नलिखित 6 मापदंडों के आधार पर रैंक प्रदान की गयी है:

  1. डिस्‍कॉम का प्रदर्शन
  2. ऊर्जा की पहुंच, सामर्थ्य और विश्वसनीयता
  3. स्वच्छ ऊर्जा पहल
  4. ऊर्जा दक्षता
  5. पर्यावरण में स्थिरता और
  6. नई पहल।

इन मापदंडों को आगे 27 संकेतकों में विभाजित किया गया है।

विभिन्न राज्यों का प्रदर्शन:

  1. गुजरात, केरल और पंजाब को बड़े राज्यों की श्रेणी में शीर्ष तीन प्रदर्शनकर्ताओं के रूप में स्थान दिया गया है। जबकि झारखंड, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ सबसे निचले स्थान पर हैं।
  2. गोवा, छोटे राज्यों की श्रेणी में शीर्ष प्रदर्शन करने वाले राज्य के रूप में उभरा है, इसके बाद त्रिपुरा और मणिपुर का स्थान है।
  3. केंद्र शासित प्रदेशों में चंडीगढ़, दिल्ली, दमन और दीव/दादरा और नगर हवेली शीर्ष प्रदर्शनकर्ता हैं।
  4. डिस्कॉम के प्रदर्शन में, पंजाब सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला राज्य रहा, जबकि केरल ऊर्जा की पहुंच, सामर्थ्य और विश्वसनीयता श्रेणी में शीर्ष स्थान पर रहा।
  5. बड़े राज्यों में, हरियाणा ‘ऊर्जा दक्षता श्रेणी’ में और तमिलनाडु के ‘स्वच्छ ऊर्जा पहल’ श्रेणी में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला राज्य रहा।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. वैश्विक जलवायु सूचकांक और भारत की रैंकिंग
  2. राज्य ऊर्जा और जलवायुसूचकांक
  3. नीति आयोग।
  4. शुद्ध शून्य कार्बन उत्सर्जन में भारत का योगदान

स्रोत: द हिंदू।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


 

गुजरात का वाघा

(Wagah of Gujarat)

पंजाब में अमृतसर स्थित लोकप्रिय पर्यटक स्थल ‘वाघा बॉर्डर’ की तर्ज पर गुजरात के बनासकांठा जिले में ‘नडाबेट’ में भारत-पाकिस्तान सीमा पर भव्य गेट बनाकर इसे टूरिस्ट स्पॉट बनाने की तैयारी की जा रही है।

  • यह जगह कच्छ क्षेत्र के रण में अहमदाबाद से लगभग 188 किमी दूर स्थित है।
  • पाकिस्तान, ‘नडाबेट’ में लगे सीमा स्तंभ 960 से लगभग 150 मीटर की दूरी पर है।
  • इसका आरंभ ‘सीमा दर्शन परियोजना’ के हिस्से के रूप में किया गया है।

 

‘सीमा दर्शन परियोजना’ का सबसे बड़ा आकर्षण ‘ज़ीरो पॉइंट’ पर पाकिस्तान के साथ लगी अंतरराष्ट्रीय सीमा को देखने के लिए नागरिकों को प्रदान की गई सुविधा है। यहाँ सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) द्वारा चौबीसों घंटे पहरा दिया जाता है।

 

CALM प्रणाली

CALM: कैनिस्टर लॉन्चड एंटी-आर्मर लोइटर एम्युनिशन (Cannister Launched Anti-Armour Loiter Ammunition – CALM)

  • हाल ही में, सेना ने कैनिस्टर लॉन्चड एंटी-आर्मर लोइटर एम्युनिशन (Cannister Launched Anti-Armour Loiter Ammunition – CALM) सिस्टम की जानकारी के लिए अनुरोध जारी किया है। सेना द्वारा इस प्रकार की 150 प्रणालियों की खरीद का इरादा है।
  • CALM सिस्टम, एक प्री-लोडेड कनस्तर है जिसमें ‘लोइटर गोला बारूद’ (loiter ammunition) या एक ड्रोन होता है, जो एक बार फायर करने के बाद ऑपरेशन के क्षेत्र में कुछ समय के लिए हवा रह सकता है, और किसी लक्ष्य के दिखाई देने पर इसे हमला करने के लिए निर्देशित किया जा सकता है।
  • आमतौर पर, इस प्रणाली में एक कैमरा तथा पुन: उपयोग किए जाने में सक्षम कुछ घटक लगे होते हैं।
  • इसका उपयोग पश्चिमी भारत के मैदानों और रेगिस्तानों के साथ-साथ लद्दाख में उत्तरी सीमाओं में ऊंचाई वाले क्षेत्रों में दुश्मन के टैंकों और अन्य ठिकानों पर किया जा सकता है।

 

भारत में पेटेंट के लिए फाइलिंग

भारत में, पिछले 11 वर्षों में पहली बार, घरेलू ‘पेटेंट फाइलिंग’ (Patent Filing) की संख्या जनवरी-मार्च 2022 तिमाही में, भारतीय पेटेंट कार्यालय में ‘अंतरराष्ट्रीय पेटेंट फाइलिंग’ की संख्या को पार कर गयी है।

  • इसका मतलब है, कि कुल 19796 पेटेंट आवेदन दायर किए गए, जिनमे से 10706 आवेदन भारतीय आवेदकों द्वारा दायर किए गए, जबकि 9090 आवेदन गैर-भारतीय आवेदकों द्वारा दायर किए गए थे।
  • ‘ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स’ में भारत की रैंकिंग 2015-16 में 81वें स्थान की तुलना में 2021 में बढ़कर 46वें (+35 रैंक) हो गई है।

 

असम में महापाषाण कालीन पत्थर के मर्तबान

असम के दीमा हसाओ जिले में कई महापाषाण कालीन पत्थर के मर्तबानों (Megalithic Stone Jars) की खोज ने भारत के पूर्वोत्तर और दक्षिण पूर्व एशिया के बीच संभावित संबंधों पर ध्यान केंद्रित किया है।

  • ये मर्तबान दूसरी सहस्राब्दी ईसा पूर्व के बताए जाते हैं।
  • असम के इन महापाषाण कालीन पत्थर के मर्तबानों को पहली बार ब्रिटिश सिविल सेवकों जेम्स फिलिप मिल्स और जॉन हेनरी हटन द्वारा देखा गया था।
  • यद्यपि इन मर्तबानों / कलशों (Jars) को वैज्ञानिक रूप से दिनांकित किया जाना अभी बाकी है, शोधकर्त्ताओं ने कहा कि लाओस और इंडोनेशिया में पाए जाने वाले पत्थर के ‘मर्तबानों’ के साथ जोड़कर देखा जा सकता है।
  • तीनों स्थलों पर पाए जाने वाले के ‘मर्तबानों’ बीच टाइपोलॉजिकल और रूपात्मक समानताएँ हैं।

 


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