[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 12 April 2022

विषयसूची

सामान्य अध्ययन-II

1. संसद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास योजना

2. तेलंगाना दलित बंधु योजना

3. गिलगित-बाल्टिस्तान

 

सामान्य अध्ययन-III

1. बंगाल के समुद्र तट पर सर्वाधिक कटाव

2. नागा शांति प्रक्रिया।

3. मवेशियों को पकड़ने हेतु 15 किमी तक बीएसएफ का अभियान

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. e-BCAS परियोजना

2. हेलीना

3. उन्नत पिनाका एमके-आई रॉकेट सिस्टम

 


सामान्य अध्ययनII


 

विषय: संसद और राज्य विधायिका- संरचना, कार्य, कार्य-संचालन, शक्तियाँ एवं विशेषाधिकार और इनसे उत्पन्न होने वाले विषय।

संसद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास योजना


संदर्भ:

कोविड -19 महामारी के कारण ‘सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना’ (Member of Parliament Local Area Development Scheme – MPLADS)  के तहत धनराशि जारी करने पर रोक लगा दी गयी थी जिसकी वजह से कई परियोजनाएं प्रभावित हुई है। इसे देखते हुए ‘संसदीय प्राक्‍कलन समिति’ ने सरकार से इस वित्तीय वर्ष में ही 2023-24 के लिए पांच करोड़ रुपये जारी करने को कहा है ताकि अधूरी परियोजनाओं को पूरा किया जा सके। .

पृष्ठभूमि:

सरकार द्वारा अप्रैल, 2020 में वित्तीय वर्ष 2020-21 और 2021-22 के लिए ‘सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना’ (MPLADS) को निलंबित कर दिया गया था, किंतु बाद में वित्तीय वर्ष 2021-22 की शेष अवधि के लिए इस योजना को बहाल कर दिया गया था और जिसमें प्रत्येक सांसद के लिए एक किश्त में 2 करोड़ रुपये जारी किए गए थे।

आवश्यकता:

MPLAD योजना पर रोक लगाए जाने तक कुछ स्वीकृत परियोजनाएं लगभग पूरी हो चुकी थी, और कुछ पूरी होने के अंतिम चरण में थी, लेकिन पिछली धन-राशि किस्तों को जारी नहीं किए जाने की वजह से यह परियोजनाएं “दुर्भाग्य से” बीच में ही छोड़ दी गई हैं।

इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए, सरकार को पिछले वर्षों की लंबित किश्तों को जारी करने के लिए उचित व्यवस्था करनी चाहिए ताकि ‘सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना’ के तहत प्रतिबद्ध देनदारियों का भुगतान किया जा सके और लोगों को MPLADS के तहत पूर्व की मृत / परित्यक्त परियोजनाओं से लाभ हासिल करने में मदद मिल सके।

संसद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास योजना’ (MPLADS) के बारे में:

इस योजना की शुरुआत  दिसंबर, 1993 में की गयी थी।

  • इसका उद्देश्य संसद सदस्यों के लिए, स्थानीय जरूरतों के आधार पर सामुदायिक अवसंरचनाओं सहित मूलभूत सुविधाओं और स्थाई सामुदायिक परिसंपत्तियों का विनिर्माण करने के लिए विकासात्मक प्रकृति के कार्यों की सिफारिश करने हेतु, एक तंत्र प्रदान करना था।
  • MPLAD योजना, पूरी तरह से भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित योजना है।
  • इसके तहत प्रत्येक संसदीय क्षेत्र को वार्षिक रूप से पांच करोड़ रुपए की MPLADS निधि प्रदान की जाती है।

विशेष फोकस:

सांसदों के लिए, वार्षिक रूप से दी जाने वाली MPLADS निधि की न्यूनतम 15 प्रतिशत राशि अनुसूचित जाति की आबादी वाले क्षेत्रों में, तथा 7.5 प्रतिशत राशि अनुसूचित जनजाति की आबादी वाले क्षेत्रों में कराए जाने वाले कार्यों पर व्यय करना अनिवार्य है।

निधियां जारी करना:

इस योजना के तहत, सांसद निधि, सीधे जिला अधिकारियों को सहायता अनुदान (Grants– in-Aid) के रूप में जारी की जाती है।

  • योजना के तहत जारी की गयी निधि गैर-व्यपगत (Non-Lapsable) होती है।
  • यदि किसी विशेष वर्ष में निधि जारी नहीं जाती है तो इसे पात्रता के अनुसार, अगले वर्षो में कराए जाने वालों कार्यों में जोड़ दिया जाएगा। इस योजना के तहत सांसदों की भूमिका अनुसंशा करने की होती है।
  • इस योजना के तहत, सांसदों की भूमिका मात्र सिफ़ारिशी होती है।
  • जिला प्राधिकरण के लिए, कार्यों संबंधी पात्रता की जांच करने, निधि स्वीकृत करने और कार्यान्वयन हेतु एजेंसियों का चयन करने, कार्यों को प्राथमिकता देने, समग्र निष्पादन का निरीक्षण करने और योजना की जमीनी स्तर पर निगरानी करने का अधिकार होता है
  • जिला प्राधिकरण द्वारा, सम्बंधित जिले में कार्यान्वयित की जा रही कम से कम 10% परियोजनाओं का प्रति वर्ष निरीक्षण किया जाएगा।

कार्यों के लिए अनुसंशा:

  1. लोकसभा सदस्य अपने संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों में कराए जाने वाले कार्यों की सिफारिश कर सकते हैं।
  2. राज्यसभा के निर्वाचित सदस्य, संबंधित राज्य में कहीं भी कराए जाने वाले कार्यों की सिफारिश कर सकते हैं।
  3. लोकसभा और राज्यसभा के नामित सदस्य, देश में कहीं भी कराए जाने वाले कार्यों का चयन व सिफारिश कर सकते हैं।

Current Affairs

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. MPLAD योजना, ‘सांसद आदर्श ग्राम योजना’ से किस प्रकार संबद्ध है?
  2. मनोनीत सांसद द्वारा कार्यों की सिफारिश किन क्षेत्रों में की जा सकती है?
  3. क्या योजना के तहत, एससी और एसटी कल्याण पर कोई विशेष ध्यान दिया जाता है?
  4. अनुदान और ऋण के बीच अंतर?
  5. कार्यान्वयन करने वाली एजेंसियां

मेंस लिंक:

क्या MPLADS द्वारा सार्वजनिक सेवाओं को प्रदान किए जाने वाले प्रावधानों में मौजूदा अंतराल को पाटने में सहायता की गयी है? आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: केन्द्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन; इन अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय।

तेलंगाना दलित बंधु योजना


(Telangana Dalit Bandhu scheme)

संदर्भ:

समस्त भारत के ‘दलित कार्यकर्ताओं’ द्वारा तेलंगाना में शुरू की गयी ‘दलित बंधु योजना’ (Dalit Bandhu scheme) की सराहना की जा रही है।

यह सभी मोर्चों पर दलितों के उत्थान के लिए शुरू की गयी एक योजना है, और इसलिए कार्यकर्ताओं द्वारा इस योजना को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तारित करने की मांग की जा रही है।

‘तेलंगाना दलित बंधु योजना’ क्या है?

‘दलित बंधु’ योजना के अंतर्गत, प्रति परिवार 10  लाख रुपये के प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के माध्यम से दलितों में उद्यमिता क्षमता विकसित की जाएगी।

  • यह संभवतः देश की सबसे बड़ी ‘नकदी हस्तांतरण योजना’ होगी।
  • दलित उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए, सरकार द्वारा, लाइसेंस जारी किए जाने वाले क्षेत्रों में दलितों के लिए आरक्षण की व्यवस्था शुरू करने का फैसला किया गया है। इन क्षेत्रों में शराब की दुकानें, मेडिकल शॉप, खाद की दुकान, चावल मिल आदि शामिल हैं।

दलित सुरक्षा कोष:

  • आर्थिक सहायता के अलावा, सरकार द्वारा किसी भी प्रतिकूल स्थिति में लाभार्थी को सहायता प्रदान करने हेतु ‘दलित सुरक्षा कोष’ नामक एक स्थायी कोष बनाने की योजना तैयार की जा रही है।
  • इस निधि का प्रबंधन संबंधित जिला कलेक्टर सहित लाभार्थियों की एक समिति द्वारा किया जाएगा।

‘दलित बंधु योजना’ की आलोचना का कारण:

राज्य में विपक्षी दलों द्वारा इस योजना के पीछे की मंशा और तर्क पर सवाल उठाए जा रहे हैं। दलितों के संरक्षण और सशक्तिकरण के लिए मौजूदा कानून और योजनाओं को पूरी तरह से लागू करने में विफल रहने के लिए भी सरकार को आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं, कि ‘दलित’ शब्द की उत्पत्ति का स्रोत, गांधी-अम्बेडकर पूना पैक्ट में मिलता है?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘दलित बंधु योजना’ की मुख्य विशेषताएं
  2. पात्रता
  3. लाभ

मेंस लिंक:

‘दलित बंधु योजना’ के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 

विषय: भारत एवं इसके पड़ोसी- संबंध।

गिलगित-बाल्टिस्तान


(Gilgit-Baltistan)

संदर्भ:

गिलगित-बाल्टिस्तान (Gilgit-Baltistan) की घाटियां, उनके गावों की जमीनों पर जबरन कब्जा करने और उनकी प्राकृतिक संपदा को लूटने के लिए स्थानीय समुदायों द्वारा पाकिस्तान के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शनों से गूंज रही हैं।

हाल ही में, कीमती पत्थरों / रत्नों (GEMS) का खनन करने के लिए निजी ठेकेदारों को लाइसेंस जारी करने संबंधी पाकिस्तान सरकार के फैसले के विरोध में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए हैं।

गिलगित-बाल्टिस्तान की वर्तमान स्थिति:

  • वर्तमान में ‘गिलगित-बाल्टिस्तान’ एक स्वायत्त क्षेत्र है और इस उन्नयन के पश्चात, यह पकिस्तान का 5वां प्रांत बन जाएगा।
  • वर्तमान में, पाकिस्तान में बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा, पंजाब और सिंध – चार प्रांत हैं।

भारत की स्थिति:

भारत ने पाकिस्तान को स्पष्ट रूप से बता दिया है, कि 1947 के भारत संघ में राज्य-विलय के वैधानिक और अखण्डनीय प्रावधानों के अनुसार, संपूर्ण केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर, लद्दाख तथा गिलगित-बाल्टिस्तान के क्षेत्र,  भारत के अभिन्न अंग हैं।

‘गिलगित-बाल्टिस्तान’ की अवस्थिति:

  • गिलगित-बाल्टिस्तान, उत्तर में चीन, पश्चिम में अफगानिस्तान, और दक्षिण पूर्व में कश्मीर के साथ सीमा बनाता है।
  • यह क्षेत्र, तत्कालीन जम्मू और कश्मीर की रियासत का हिस्सा था, किंतु कश्मीर पर कबायली लड़ाकों और पाकिस्तानी सेना द्वारा आक्रमण के बाद, 4 नवंबर, 1947 से इस क्षेत्र पर पाकिस्तान का नियंत्रण है।
  • यह पाक-अधिकृत कश्मीर के साथ एक भौगोलिक सीमा साझा करता है, तथा भारत इसे अविभाजित जम्मू और कश्मीर का हिस्सा मानता है, जबकि पाकिस्तान इस क्षेत्र को पाक-अधिकृत कश्मीर (PoK) से अलग मानता है।
  • ‘चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारा’ इस क्षेत्र से होकर गुजरता है।

‘गिलगित-बाल्टिस्तान’ पर वर्तमान में नियंत्रण:

  1. ‘संयुक्त राष्ट्र भारत-पाकिस्तान आयोग’ (United Nations Commission for India and Pakistan – UNCIP) द्वारा 28 अप्रैल 1949 को पारित प्रस्ताव का उल्लंघन करते हुए, वर्तमान में यह क्षेत्र पाकिस्तान के कब्जे में है।
  2. पाकिस्तान द्वारा ‘गिलगित-बाल्टिस्तान’ के निवासियों की सहमति के बिना इस क्षेत्र पर कब्ज़ा किया गया है। और ‘संयुक्त राष्ट्र भारत-पाकिस्तान आयोग’ (UNCIP) द्वारा पाकिस्तान को विवादित क्षेत्र से अपनी सेना वापस बुलाने की जरूरत बताए जाने के बाद भी, पाक इस क्षेत्र पर अनाधिकृत कब्ज़ा बनाए हुए है।
  3. पिछले 60 वर्षों से अधिक समय से, गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र को उचित संवैधानिक दर्जा, एक कार्यशील कानूनी प्रणाली और राजनीतिक स्वायत्तता नहीं मिली है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं कि चीन, ‘कोहाला पनबिजली परियोजना’ (Kohala hydropower project) के निर्माण में पाकिस्तान की मदद कर रहा है? यह परियोजना कहां पर स्थित है?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. गिलगिट- बाल्टिस्तान- स्थान, पड़ोसी और महत्वपूर्ण नदियाँ।
  2. कराची समझौता किससे संबंधित है?
  3. 1963 पाक- चीन सीमा समझौता।
  4. 1972 शिमला समझौता।
  5. PoK और CPEC के बारे में।

मेंस लिंक:

गिलगित-बाल्टिस्तान कहां अवस्थित है? इस पर पाकिस्तान का नियंत्रण किस प्रकार हुआ? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 


सामान्य अध्ययनIII


 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

बंगाल के समुद्र तट पर सर्वाधिक कटाव


संदर्भ:

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अनुसार;

  1. भारतीय मुख्य भूमि की 6,907.18 किमी लंबी तटरेखा में से लगभग 34% अपरदन के विभिन्न स्तर का सामना कर रही है।
  2. कुल समुद्रीय तटरेखा का 26% अभिवृद्धीय प्रकृति की अर्थात बढ़ती जा रही है, और शेष 40% तटरेखा स्थिर अवस्था में है।
  3. देश के पूर्वी तट पर स्थित पश्चिम बंगाल – जिसकी तटरेखा 534.35 किमी लंबी है- को वर्ष 1990 से 2018 की अवधि में लगभग अपनी 60.5% तट रेखा (323.07 किमी) के साथ लगे क्षेत्रों में कटाव का सामना करना पड़ा है।
  4. इसके बाद पश्चिमी तट पर अवस्थित ‘केरल’ का स्थान है, जिसकी तटरेखा 592.96 किमी लंबी है और इसकी तटरेखा का 46.4% (275.33 किमी) कटाव का सामना करता है।
  5. तमिलनाडु के साथ लगी 991.47 किमी की लंबी तटरेखा पर, इसके 42.7% (422.94 किमी) क्षेत्र में कटाव दर्ज किया गया है।
  6. गुजरात- जिसकी सबसे लंबी तटरेखा 1,945.60 किमी है- में इसकी तटरेखा से लगे 27.06% (537.5 किमी) में कटाव दर्ज किया गया है।
  7. केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी (41.66 किमी लंबी तटरेखा) के तटीय क्षेत्र के लगभग 56.2% (23.42 किमी) में कटाव दर्ज किया गया है।

15वें वित्त आयोग की सिफारिशें:

  • एक ‘राष्ट्रीय आपदा जोखिम प्रबंधन कोष’ (NDRMF) और ‘राज्य आपदा जोखिम प्रबंधन कोष’ (SDRMF) का गठन किया जाए, जिसमें राष्ट्रीय और राज्य स्तर (NDMF/SDMF) पर एक ‘शमन कोष’ (Mitigation Fund) शामिल भी किया जाना चाहिए।
  • राष्‍ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के लिए राष्ट्रीय और राज्य स्तर (NDRF/SDRF) पर एक ‘प्रतिक्रिया कोष’ (Response Fund) का गठन किया जाए, तथा NDMA कटाव को रोकने के लिए शमन उपायों के लिए उपयुक्त मानदंड विकसित कर सकता है और केंद्र और राज्य सरकार दोनों, तटीय और नदी के कटाव के कारण होने वाले लोगों के व्यापक विस्थापन से निपटने के लिए एक नीति विकसित कर सकते हैं।

तैयारी:

‘इंडियन नेशनल सेंटर फॉर ओशन इंफॉर्मेशन सर्विसेज’ (INCOIS) ने समुद्र के स्तर में वृद्धि, तटीय ढलान, तटरेखा परिवर्तन दर, तटीय ऊंचाई, तटीय भू-आकृति विज्ञान, ज्वार की सीमा और महत्वपूर्ण लहर ऊंचाई  पर डेटा का उपयोग करके 1: 100000 के पैमाने पर भारत की संपूर्ण तटरेखा के लिए तटीय भेद्यता सूचकांक (CVI) मानचित्रों का एक एटलस तैयार और प्रकाशित किया है।

‘तटीय क्षरण’ क्या है?

‘तटीय क्षरण’ (Coastal Erosion) वह प्रक्रिया होती है, जिसके द्वारा स्थानीय समुद्र-स्तर में वृद्धि, सशक्त लहरों संबंधी क्रियाएं, और तटीय बाढ़ के साथ चट्टानों, मिट्टी, रेत को साथ लाने या ले जाने संबंधी क्रियाएं होती हैं।

  • तटीय अपरदन / क्षरण की चार मुख्य प्रक्रियाएं – संक्षारण, अपघर्षण, जलप्रेरित क्रियाएं और सनिघर्षण- हैं।
  • ‘तटीय अपरदन’ संरचनाएं जैसेकि समुद्री बाँध, पुश्ता दीवारी (Revetments), पोतभीत (bulkheads), कच्छ / ग्रोइन्स (Groins) और तरंग-रोध / ब्रेकवाटर (Breakwaters) आदि अल्पावधि में ‘अपरदन’ को कम कर सकते हैं।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. तटीय सुभेद्यता।
  2. सीवीआई (CVI)
  3. समुद्र के स्तर में वृद्धि
  4. INCOIS
  5. तटीय बहु-खतरा सुभेद्यता मानचित्रण
  6. आपदा प्रबंधन
  7. पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण
  8. तटीय सुभेद्यता सूचकांक और इसका महत्व।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: आंतरिक सुरक्षा के लिये चुनौती उत्पन्न करने वाले शासन विरोधी तत्त्वों की भूमिका।

नागा शांति प्रक्रिया


(Naga Peace Process)

संदर्भ:

हाल ही में, ‘नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड’ या NSCN (K) के खापलांग गुट के प्रमुख ने कहा है कि “इंडो-नागा राजनीतिक विवाद” (Indo-Naga Political Issue) का समाधान, सभी नागा राजनीतिक समूहों द्वारा एक ‘सामूहिक मसौदा’ तैयार किए जाने और उस पर सहमत होने के बाद ही संभव होगा।

पृष्ठभूमि:

पूर्वोत्तर भारत में ‘नागा शांति प्रक्रिया’ (Naga Peace Process) साल 1997 के मध्य में नागा नेशनल काउंसिल (Naga National Council – NNC) द्वारा सशस्त्र बलों के साथ युद्धविराम की घोषणा किए जाने बाद से जारी है। अन्य नागा उग्रवादी समूहों द्वारा 2001 में बातचीत का विकल्प चुनना शुरू किया गया था, किंतु 3 अगस्त, 2015 को एक फ्रेमवर्क समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद, इन वार्ता विकल्पों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।

नागा राजनीतिक मुद्दों का संक्षिप्त इतिहास:

स्वतंत्रता पूर्व:

  1. अंग्रेजों ने वर्ष 1826 में असम पर कब्जा कर लिया और वर्ष 1881 में नागा हिल्स भी ब्रिटिश भारत का हिस्सा बन गयीं। नागा विद्रोह का पहला संकेत वर्ष 1918 में ‘नागा क्लब’ के गठन में देखा जाता है। इसके सदस्यों ने वर्ष 1929 में साइमन कमीशन को नागा पहाडियों से निकल जाने को कहा था।
  2. वर्ष 1946 में नागा नेशनल काउंसिल (Naga National Council- NNC) का गठन हुआ, जिसने 14 अगस्त 1947 को नागालैंड को एक स्वतंत्र राज्य घोषित कर दिया।
  3. ‘नागा नेशनल काउंसिल’ ने “संप्रभु नागा राज्य” स्थापित करने का संकल्प लिया और वर्ष 1951 में एक “जनमत संग्रह” कराया, जिसमें “99 प्रतिशत” ने एक “स्वतंत्र” नागालैंड के पक्ष में मतदान किया।

स्वतंत्रता पश्चात:

22 मार्च, 1952 को एक भूमिगत नागा फ़ेडरल गवर्नमेंट (NFG) और नागा फ़ेडरल आर्मी (NFA) का गठन किया गया। भारत सरकार ने विद्रोह कुचलने के लिए सेना भेजी तथा वर्ष 1958 में सशस्त्र बल (विशेष अधिकार) अधिनियम बनाया गया।

इस संबंध में किए गए समझौते:

  • वर्ष 1997 में, नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड-आईएम (NSCN-IM) द्वारा केंद्र सरकार के साथ एक युद्धविराम समझौता किया गया था और उस समय से दोनों के बीच वार्ता जारी है।
  • इसके अलावा, वर्ष 2017 से सात अलग-अलग नागा राष्ट्रीय राजनीतिक समूहों (Naga national political groups- NNPGs) के एक समूह की भी केंद्र के साथ वार्ता चल रही है।
  • वर्ष 2015 में केंद्र सरकार और NSCN (IM) के बीच एक ‘फ्रेमवर्क समझौता’ पर हस्ताक्षर किये गए, तथा वर्ष 2017 में केंद्र ने NNPG के साथ एक “सहमत स्थिति” (agreed position) पर हस्ताक्षर किए।
  • हालांकि, NSCN (IM) द्वारा अलग नागा ध्वज और संविधान की मांग किए जाने की वजह से, काफी लंबे समय से लंबित नागा राजनीतिक मुद्दों पर अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने में देरी हो रही है।

Current Affairs

 

2015 का समझौता फ्रेमवर्क (2015 Framework Agreement):

3 अगस्त 2015 को, केंद्र सरकार द्वारा ‘नागा विवाद’ को हल करने के लिए ‘नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड’-आईएम (NSCN-IM) के साथ एक समझौते की रूपरेखा / फ्रेमवर्क पर हस्ताक्षर किए गए थे।

फ्रेमवर्क के प्रमुख बिंदु:

  • केंद्र सरकार द्वारा भारत के संविधान के अनुच्छेद 371 (ए) के प्रावधानों के तहत नागालैंड को अधिक शक्तियों का हस्तांतरण किया जा सकता है।
  • NSCN-IM के सैन्य दस्ते को होमगार्ड की तर्ज पर गठित की जाने वाली नई सेना में समाहित किया जाएगा।
  • इस समझौता फ्रेमवर्क में, मणिपुर में रहने वाली नागा जनजातियों को अधिक स्वायत्तता दिए जाने का प्रावधान शामिल किया गया है।
  • हालांकि, समझौते में सीमा के संदर्भ में सभी नागा क्षेत्रों का भौतिक एकीकरण शामिल नहीं किया गया है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

नागा समूहों की प्रमुख मांग ‘ग्रेटर नागालैंड’ का गठन किए जाने की रही है। राज्य के किन हिस्सों को ग्रेटर नागालैंड’ में शामिल किया जाता हैं?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘ग्रेटर नागालैंड’ के तहत शामिल राज्यों के हिस्से
  2. नागा क्लब और ‘नागा नेशनल काउंसिल’ (NNC)
  3. नागा जनमत संग्रह कब आयोजित किया गया था?
  4. AFSPA का अवलोकन।
  5. अनुच्छेद 371 का अवलोकन

मेंस लिंक:

नागा शांति समझौते से जुड़े मुद्दों और चुनौतियों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: विभिन्न सुरक्षा बल और संस्थाएँ तथा उनके अधिदेश।

मवेशियों को पकड़ने हेतु 15 किमी तक बीएसएफ का अभियान


संदर्भ:

केंद्र सरकार द्वारा पंजाब, पश्चिम बंगाल और असम में ‘सीमा सुरक्षा बल’ (Border Security Force – BSF) की परिचालन सीमा-क्षेत्र में वृद्धि किए जाने के कुछ महीनों बाद, हाल ही में,  सीमा सुरक्षा बल द्वारा असम में राज्य से अवैध रूप से तस्करी किए जा रहे मवेशियों को पकड़ने के लिए ‘बढ़ी हुई शक्तियों’ के तहत अपना पहला अभियान चलाया गया।

संबंधित विवरण:

  • असम के सिलचर जिले में 21 मार्च को बांग्लादेश सीमा से शुरू किए गए ऑपरेशन में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) ने नौ भैंसों को ले जा रहे एक ट्रक को जब्त कर लिया। मवेशियों से भरा यह ट्रक बालीचेरा में स्थित उनकी चौकी से 15 किमी से अधिक दूर था।
  • बीएसएफ ने कहा कि बढ़े हुए क्षेत्रीय अधिकार-क्षेत्र ने उन्हें बेहतर तरीके से संचालन की योजना बनाने में मदद की और सीमावर्ती क्षेत्रों के करीब आपराधिक तत्वों को संगठित करने की क्षमता को भी कम कर दिया है।

‘सीमा सुरक्षा बल’ के बारे में:

  • ‘सीमा सुरक्षा बल’ (BSF) का गठन भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद 1965 में किया गया था।
  • यह गृह मंत्रालय (MHA) के प्रशासनिक नियंत्रण के अधीन भारत संघ के सात केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में से एक है।

 

क्षेत्राधिकार:

पहले बीएसएफ की क्षेत्राधिकार सीमा गुजरात में अंतरराष्ट्रीय सीमा से 80 किमी और राजस्थान, पंजाब, पश्चिम बंगाल और असम में 15 किमी तक निर्धारित की गई थी।

पिछले 11 अक्टूबर को, गृह मंत्रालय द्वारा भारत के राजपत्र में एक अधिसूचना के माध्यम से, पंजाब, पश्चिम बंगाल और असम में अंतर्राष्ट्रीय सीमा से राज्य में 50 किमी तक बीएसएफ को “गिरफ्तारी, तलाशी और जब्ती” करने की शक्तियों में वृद्धि की गयी थी।

  • अधिसूचना के तहत, गुजरात में, यह क्षेत्राधिकार-सीमा मौजूदा 80 किमी से घटाकर 50 किमी कर दी गई और राजस्थान में, 50-किमी की सीमा अपरिवर्तित बनी हुई है।
  • बीएसएफ को प्रदत्त ये शक्तियां, नशीले पदार्थों की जब्ती, पशु तस्करी, सीमा पार अपराधों की रोकथाम, विदेशियों के अवैध प्रवेश आदि जैसे विशिष्ट अपराधों से संबंधित हैं।
  • अधिसूचना के अनुसार, बीएसएफ द्वारा सभी मामलों और संदिग्धों को 24 घंटे के भीतर स्थानीय पुलिस को सौंपना होगा।

आलोचनाएं:

  • कानून और व्यवस्था राज्य का विषय है और तलाशी, जब्ती और गिरफ्तारी की शक्तियां आमतौर पर राज्य पुलिस अधिकारियों के पास होती हैं।
  • इसलिए, प्रभावित राज्यों ने अपनी शक्तियों पर अतिक्रमण और संघीय ढांचे के खिलाफ, केंद्र सरकार के इस कदम पर सवाल उठाया है।
  • इसे “केंद्रीय एजेंसियों के माध्यम से हस्तक्षेप” करने का प्रयास करार दिया जा रहा है।

केंद्र सरकार द्वारा अपने इस कदम का बचाव:

  • बीएसएफ की बढ़ी हुई शक्तियों का पंजाब और पश्चिम बंगाल की राज्य सरकारों ने विरोध किया है।
  • हालांकि, केंद्र सरकार का कहना है कि, यह प्रावधान किसी भी तरह से स्थानीय पुलिस के अधिकारों को प्रभावित नहीं करता है क्योंकि सभी संदिग्धों को 24 घंटे के भीतर स्थानीय पुलिस को सौंप दिया जाता है।

आवश्यकता और महत्व:

केंद्र सरकार द्वारा यह कदम बीएसएफ की परिचालन दक्षता में सुधार और तस्करी रैकेट पर नकेल कसने के लिए उठाया गया है।

  • पंजाब में, ड्रग्स और हथियारों की तस्करी की समस्या काफी प्रबल है।
  • इसी तरह, असम और पश्चिम बंगाल में मवेशियों और नकली मुद्रा की तस्करी के मुद्दे का सामना करना पड़ता है।
  • ये सीमाएँ अवैध प्रवास के लिए भी संवेदनशील हैं।
  • बीएसएफ को नियमित रूप से भीतरी इलाकों में अवैध गतिविधियों के बारे में जानकारी मिलती है लेकिन उनके हाथ 15 किमी की सीमा के तहत बंधे हुए थे।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

  • क्या आप जानते हैं कि ‘सीमा सुरक्षा बल अधिनियम’, 1968 की धारा 139 के तहत केंद्र सरकार को ‘सीमा बल’ के संचालन के क्षेत्र और सीमा को अधिसूचित करने का अधिकार प्रदान किया गया है?
  • इस अधिनियम की धारा 139 के तहत किए गए प्रत्येक आदेश (अधिसूचना) को बाद में संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखा जाना अनिवार्य होता है।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. बीएसएफ के बारे में
  2. अधिकार क्षेत्र
  3. शक्तियां
  4. कार्य
  5. सीमा सुरक्षा बल अधिनियम, 1968

मेंस लिंक:

बीएसएफ की बढ़ी हुई शक्तियों से जुड़ी चिंताओं पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


 

e-BCAS परियोजना

हाल ही में, ‘नागर विमानन सुरक्षा ब्यूरो’ (Bureau of Civil Aviation Security – BCAS) द्वारा आंतरिक प्रक्रियाओं के स्वचालन के लिए ‘ई-गवर्नेंस’ के तहत ‘ई-बीसीएएस’ (e-BCAS) नामक एक पहल शुरू की गयी है। यह हितधारकों की सुविधा के लिए एक ऑनलाइन मंच होगा।

  • यह संपूर्ण गतिविधियों को पारदर्शी, उपयोगकर्ता के अनुकूल और कुशल बनाने के उद्देश्य से मौजूदा प्रक्रियाओं व संगठन संरचना की मजबूती का लाभ उठाएगा।
  • यह विभिन्न प्रभागों और प्रक्रियाओं में तकनीकी एकीकरण के माध्यम से कार्यालय संबंधित प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण करेगा, तेजी से अनुमोदन की सुविधा प्रदान करेगा और व्यापार करने में आसानी सुनिश्चित करेगा।

 

हेलीना

(HELINA)

‘स्वदेशी रूप से विकसित हेलीकॉप्टर लॉन्च एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल’ ‘हेलीना’ (Helicopter Launched Anti-Tank Guided Missile – HELINA) का हाल ही में सफलतापूर्वक उड़ान परीक्षण किया गया है।

  • यह उड़ान परीक्षण, रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO), भारतीय सेना और भारतीय वायु सेना (IAF) के वैज्ञानिकों की टीमों द्वारा संयुक्त रूप से किया गया था।
  • हेलिना की अधिकतम मारक सीमा सात किलोमीटर है।

 

उन्नत पिनाका एमके-आई रॉकेट सिस्टम

  • उन्नत पिनाका एमके-आई रॉकेट सिस्टम (Enhanced Pinaka MK-I Rocket System – EPRS) का पोखरण फायरिंग रेंज में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और भारतीय सेना द्वारा सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया है।
  • EPRS पिनाका संस्करण का उन्नत संस्करण है जो पिछले एक दशक से भारतीय सेना के साथ सेवा में है। उभरती आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए इस प्रणाली को उच्च श्रेणी की प्रौद्योगिकियों के साथ उन्नत किया गया है।
  • इसका डिजाइन और विकास, पुणे स्थित रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) प्रयोगशालाओं – आयुध अनुसंधान और विकास प्रतिष्ठान (ARDE) और उच्च ऊर्जा सामग्री अनुसंधान प्रयोगशाला (HEMRL) द्वारा किया गया है।

पिनाका रॉकेट सिस्टम एक मल्टी बैरल रॉकेट सिस्टम है, जिसका नाम भगवान शिव के धनुष के नाम पर रखा गया है।


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