[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 31 March 2022

विषयसूची

 

सामान्य अध्ययन-II

  1. भुलाए जाने का अधिकार
  2. पीएम-युवा योजना
  3. मासिक धर्म लाभ विधेयक 2017
  4. श्रम संहिताएं
  5. यूएई का गोल्डन वीजा
  6. दक्षिण चीन सागर विवाद

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

  1. इक्वाडोर में जंगली जानवरों के लिए कानूनी अधिकार
  2. वाचाघात 
  3. बामियान बुद्ध
  4. हरिचंद ठाकुर
  5. श्रिंकफ्लेशन

 


सामान्य अध्ययनII


विषय: भारतीय संविधान- ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और बुनियादी संरचना।

भुलाए जाने का अधिकार 

संदर्भ:

एक केंद्रीय कानून की अनुपस्थिति में, हाल ही में,  कई स्थानीय अदालतों द्वारा फैसला सुनाया गया है, कि ‘भुलाए जाने का अधिकार’ (Right to be Forgotten), या ‘अकेला छोड़ दिए जाने का अधिकार (Right to be left alone), ‘निजता के अधिकार’ में निहित है, जिसे 2017 में भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा (‘पुत्तास्वामी निर्णय’ में) मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता दी गई थी।

  • सोशल मीडिया और अन्य ऑनलाइन प्लेटफार्मों में विस्फोटक वृद्धि के साथ ही, यह ‘अधिकार’ दुनिया भर में एक संवेदनशील मुद्दा (Hot-Button Issue) बन गया है, किंतु मात्र कुछ देशों में ही इस ‘अधिकार के संबंध में कानून बनाए गए हैं।
  • भारत में, लंबे समय से प्रतीक्षित ‘डेटा संरक्षण विधेयक’, ‘भुलाए जाने के अधिकार’ का समाधान करता है।

पृष्ठभूमि:

दिसंबर 2021 में, केंद्र सरकार ने दिल्ली उच्च न्यायालय को सूचित करते हुए कहा कि ‘भुलाए जाने का अधिकार’ (Right to be Forgotten) ‘निजता के मौलिक अधिकार’ का हिस्सा है, लेकिन इस मामले में इसकी कोई महत्वपूर्ण भूमिका नहीं है।

विभिन्न अदालतों में दायर याचिकाओं में इस “अधिकार” को लागू करने की मांग की गयी है। ‘भुलाए जाने का अधिकार’ – एक कानूनी सिद्धांत है, जिसे अभी तक भारत में क़ानून द्वारा समर्थन नहीं है।

‘भुलाए जाने का अधिकार’ क्या है?

‘भुलाए जाने का अधिकार’ के तहत किसी व्यक्ति को इंटरनेट से उसकी निजी जानकारी को हटाने का अधिकार प्राप्त होता है। इस अवधारणा को विदेशों में कुछ न्यायालयों, विशेष रूप से यूरोपीय संघ में मान्यता मिली हुई है।

भारतीय संदर्भ में ‘भुलाए जाने का अधिकार

  • ‘भुलाए जाने का अधिकार’ (Right to be Forgotten), व्यक्ति के ‘निजता के अधिकार’ के दायरे में आता है।
  • वर्ष 2017 में, सुप्रीम कोर्ट द्वारा अपने एक ऐतिहासिक फैसले (पुत्तुस्वामी मामले) में ‘निजता के अधिकार’ को एक ‘मौलिक अधिकार’ (अनुच्छेद 21 के तहत) घोषित कर दिया गया था।
  • अदालत ने उस समय कहा था कि “निजता का अधिकार ‘अनुच्छेद 21’ के तहत ‘जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार’ के अंतर्भूत हिस्से के रूप में, और संविधान के भाग III द्वारा गारंटीकृत ‘स्वतंत्रता’ के एक भाग के रूप में रक्षित है।”

इसको मान्यता दिए जाने की आवश्यकता:

इंटरनेट से निजी जानकारी, पिछले दोषसिद्धि और कार्यवाही के अदालती रिकॉर्ड और पिछली घटनाओं की समाचार रिपोर्ट को हटाने की मांग से संबंधित कम से कम आठ याचिकाएं दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष लंबित हैं। और इस संदर्भ में, अदालतों से अब तक कुछ ही लोगों को ही राहत मिल पाई है।

इस प्रकार के कानून किन देशों में लागू हैं?

  • यूरोपीय संघ में ‘सामान्य डेटा संरक्षण विनियमन’ (General Data Protection Regulation- GDPR) 
  • 2015 में रूस ने एक कानून बनाया गया, जिसके तहत, उपयोगकर्ताओं को अप्रासंगिकता, अशुद्धि और ‘कानून के उल्लंघन’ के आधार पर व्यक्तिगत जानकारी के लिंक को हटाने के लिए एक सर्च इंजन को विवश करने की अनुमति दी गयी है।
  • ‘भुलाए जाने के अधिकार’ को कुछ हद तक तुर्की और साइबेरिया में भी मान्यता प्राप्त है, जबकि स्पेन और इंग्लैंड की अदालतों ने इस विषय पर कुछ निर्णय दिए गए है।

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं, कि ‘भुलाए जाने के अधिकार’ को 2014 से यूरोप में मान्यता दी गई थी, और यह यूरोपीय संघ के ‘सामान्य डेटा संरक्षण विनियमन’ (GDPR) का एक भाग भी है?

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘भुलाए जाने का अधिकार’ के बारे में।
  2. ‘निजता का अधिकार’ क्या है?
  3. ‘निजी डेटा संरक्षण विधेयक’ की मुख्य विशेषताएं।

मेंस लिंक:

‘भुलाए जाने के अधिकार’ के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

 

 

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

प्रधानमंत्री युवा योजना 


(PM-YUVA Scheme)

संदर्भ:

हाल ही में, सरकार ने एक भारत श्रेष्ठ भारतको बढ़ावा देने के लिए भारतीय संस्कृति और साहित्य के आदान-प्रदान को सुनिश्चित करने के लिए ‘पीएम-युवा योजना’ (PM-YUVA Scheme) के तहत चयनित पुस्तकों का विभिन्न भारतीय भाषाओं में अनुवाद कराए जाने का निर्णय लिया है।

‘पीएम-युवा योजना’ के बारे में:

30 वर्ष की आयु तक के युवा लेखकों के लिए 29 मई 2021 को शिक्षा मंत्रालय द्वारा ‘युवा लेखकों के लिए प्रधानमंत्री- परामर्शदाता योजना’ (Pradhan Mantri – Mentorships’s Scheme for Young writers – PM-YUVA) शुरू की गई थी।

  • इस योजना का उद्देश्य, इच्छुक युवा लेखकों को भारत की समृद्ध विरासत का प्रतिनिधित्व करने वाले कुशल लेखकों के रूप में तैयार करना है। 
  • योजना के माध्यम से, नए लेखकों को एक ‘परामर्श कार्यक्रम’ (Mentorship Program) में भाग लेने और भविष्य के लेखक बनने का अवसर प्रदान किया जाएगा।

योजना के प्रमुख उद्देश्य:

  • देश के युवाओं को समृद्ध भारतीय इतिहास और संस्कृति से जोड़ना।
  • देश में युवा लेखकों का एक ‘समूह (पूल) का निर्माण करना जो हमारे भारतीय साहित्य के आधुनिक/युवा राजदूत होंगे।
  • अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए भविष्य की नेतृत्व भूमिकाओं के लिए युवा शिक्षार्थियों का निर्माण करना।
  • युवा लेखकों को अपने विचारों को एक अंतरराष्ट्रीय मंच पर पेश करने में सहयोग करना, जिससे उन्हें विश्व स्तर पर भारतीय साहित्य और संस्कृति को बढ़ावा देने का अवसर मिलेगा।
  • विशेषज्ञ परामर्श प्रदान करके विभिन्न विधाओं में नवोदित इच्छुक लेखकों का कुशल लेखकों में निर्माण करना।

कार्यान्वयन:

यह योजना, शिक्षा मंत्रालय के अधीन ‘नेशनल बुक ट्रस्ट’ (NBT) द्वारा लागू की जाएगी। और इस योजना को चरणबद्ध ढांचे में लागू किया जाएगा।

  • चरण I- प्रशिक्षण: चयनित उम्मीदवारों को NBT द्वारा तीन महीने के लिए प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।
  • चरण II में- चयनित उम्मीदवार अपनी समझ का विस्तार करेंगे और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों जैसे पुस्तक मेलों आदि में एक इंटरैक्टिव प्रक्रिया के माध्यम से अपने कौशल को भी सुधारेंगे।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. योजना के प्रमुख बिंदु
  2. लाभ
  3. नेशनल बुक ट्रस्ट के बारे में

मेंस लिंक:

‘पीएम-युवा योजना’ के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी।

 

 

 

 

 

विषय: केन्द्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन; इन अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय।

मासिक धर्म लाभ विधेयक 2017


(Menstruation Benefit Bill 2017)

संदर्भ:

अरुणाचल प्रदेश के पासीघाट पश्चिम से कांग्रेस विधायक ‘निनॉन्ग एरिंग’ (Ninong Ering), गत पांच वर्षों से ‘मासिक धर्म छुट्टी’ (Menstrual Leave) को कानून में परिवर्तित करने का समर्थन कर रहे है।

  • लोकसभा सांसद के तौर पर ‘निनॉन्ग एरिंग’ ने नवंबर 2017 मेंमासिक धर्म लाभ विधेयक 2017  (Menstruation Benefit Bill 2017)  एक ‘निजी सदस्य विधेयक’ (Private Member’s Bill) के रूप में  लोकसभा में पेश किया था।
  • अब फिर से, विधायक के रूप में एरिंग ने अरुणाचल प्रदेश विधान सभा में वर्ष 2022 के बजट सत्र के पहले दिन, उसी निजी सदस्य विधेयक को पेश किया है।

विधेयक के प्रमुख बिंदु:

मासिक धर्म लाभ विधेयक’ में, रजोधर्म / मासिक धर्म (Menstruating) से गुजरने वाली स्कूल और कॉलेज जाने वाली लड़कियों, नौकरियों में महिलाओं के लिए छुट्टी, मासिक धर्म के दौरान कार्यस्थल पर आराम की बेहतर सुविधा तथा महिलाओं और किशोर लड़कियों के लिए बेहतर स्वच्छता का प्रावधान किए जाने का प्रस्ताव किया गया है।

सवैतनिक अवकाश की आवश्यकता:

मासिक धर्म, खासकर पहले दिन महिलाओं के लिए थकाऊ और परेशान करने वाला हो सकता है। बिहार और केरल जैसे भारतीय राज्यों में मासिक धर्म’ के दौरान पहले से ही ‘सवैतनिक अवकाश’ / ‘पेड लीव’ (Paid leave) की सुविधा का प्रावधान है।

महत्व:

यह देखते हुए कि स्वच्छता और मासिक धर्म स्वास्थ्य हर महिला के जीवन के आवश्यक घटक हैं, यथोचित रूप से यह अनुमान लगाया जा सकता है कि ये विषय भी अनुच्छेद 21 के अंतर्गत आते हैं। विदित हो कि, अनुच्छेद 21 में महिलाओं के लिए गरिमा के साथ काम करने के लिए आवश्यक परिस्थितियों का प्रावधान किए जाने का अधिदेश दिया गया है। इस प्रकार, ‘मासिक धर्म की छुट्टी’ देने का मामला मौलिक अधिकारों का मुद्दा है और इस पर उचित ध्यान दिया जाना चाहिए।

‘प्राइवेट मेंबर’ या ‘निजी सदस्य’ कौन होते हैं?

सरकार में शामिल ‘मंत्रियों’ के अलावा अन्य संसद सदस्यों को ‘निजी सदस्य’ या ‘प्राइवेट मेंबर’ (Private Member) के रूप में संदर्भित किया जाता है।

निजी सदस्य विधेयक (Private Member’s Bill) का उद्देश्य सरकार का ध्यान उस ओर आकर्षित करना है, जो कि सांसद (मंत्रियों के अतिरिक्त) के मुताबिक, एक महत्त्वपूर्ण मुद्दा है और जिस पर विधायी हस्तक्षेप की आवश्यकता है।

निजी सदस्य विधेयक की स्वीकार्यता:

  • किसी ‘प्राइवेट मेंबर बिल’ को विचार करने हेतु स्वीकार किया जाए अथवा नहीं, इसका निर्णय राज्य सभा के सभापति अथवा लोकसभा अध्यक्ष द्वारा किया जाता है।
  • सदन द्वारा ‘निजी सदस्य विधेयक’ के खारिज किए जाने अथवा इसकी अस्वीकृति का ‘सरकार में संसदीय विश्वास’ अथवा उसके इस्तीफे पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।

निजी सदस्य विधेयक संबंधी प्रक्रिया दोनों सदनों में लगभग एक समान होती है:

  • विधेयक को पुरःस्थापित करने के लिए, सूचीबद्ध किए जाने से पहले सदस्य को कम से कम एक महीने का नोटिस देना होता है।
  • सदन के सचिवालय द्वारा, इस प्रकार के विधेयक को सूचीबद्ध करने से पहले, संवैधानिक प्रावधानों और कानून पर नियमों के अनुपालन संबंधी परीक्षण किया जाता है।

अपवाद:

सरकारी विधेयकों को किसी भी दिन पेश किया जा सकता है और उन पर चर्चा की जा सकती है, परन्तु निजी सदस्य विधेयक / गैर-सरकारी विधेयकों को केवल शुक्रवार को ही पेश किया जा सकता है और उसी दिन उन पर चर्चा हो सकती है।

क्या अभी तक कोई ‘प्राइवेट मेंबर बिल’ कभी कानून बन सका है?

‘पीआरएस लेजिस्लेटिव’ के अनुसार, 1970 के बाद से संसद द्वारा कोई भी ‘निजी सदस्य विधेयक’ पारित नहीं किया गया है। 

आज तक, संसद द्वारा 14 ‘निजी सदस्य विधेयकों’ को पारित किया जा चुका है, जिनमें से छह विधेयक 1956 में पारित किए गए थे। 14वीं लोकसभा में, 300 से अधिक निजी सदस्य विधेयक पेश किए गए, जिनमें से लगभग ‘चार प्रतिशत’ पर चर्चा हुई, शेष 96 प्रतिशत बगैर किसी विमर्श के व्यपगत हो गए।

स्रोत: द हिंदू।

 

 

 

 

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

श्रम संहिता / लेबर कोड


(labour codes) 

संदर्भ:

मूल रूप से चालू वित्त वर्ष की शुरुआत में होने वाले ‘चार श्रम संहिताओं’ की 

लंबे समय से प्रतीक्षित ‘चार श्रम संहिताओं’ को लागू किए जाने में कम से कम तीन महीने का समय और लग सकता है, क्योंकि अभी तक सभी राज्यों ने इन कानूनों पर नियम नहीं बनाए हैं। मूल रूप से इन ‘चारो श्रम संहिताओं’ को चालू वित्त वर्ष की शुरुआत में ही लागू किया जाना था।  

संबंधित प्रकरण:

‘श्रम’ (labour) संविधान की समवर्ती सूची का विषय है। अभी तक 23 राज्यों ने इन ‘श्रम संहिताओं’ पर नियम बनाए हैं, जबकि सात राज्यों द्वारा इन पर नियम बनाया जाना अभी बाकी है।

पृष्ठभूमि:

संसद द्वारा ‘मजदूरी, सामाजिक सुरक्षा, व्यावसायिक सुरक्षा और औद्योगिक संबंधों’ पर चार श्रम संहिताओं (labour codes on wages, social security, occupational safety and industrial relations) को पारित किए हुए एक साल से अधिक समय बीत चुका है, किंतु केंद्र सरकार अभी तक इन कानूनों को लागू करने के लिए नियमों को अधिसूचित करने की प्रक्रिया में है, और इनके लागू किए जाने संबंधी कोई तारीख निर्धारित नहीं की गयी है।

इन नए कोड के तहत, सामान्य रूप से रोजगार और कार्य संस्कृति से संबंधित कई पहलूओं में बदलाव हो सकता है – जिसमें कर्मचारियों के लिए हाथ में मिलने वाला वेतन, काम के घंटे और सप्ताह में कार्य-दिनों की संख्या आदि शामिल है।

इन संहिताओं का विरोध:

तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने संबंधी सरकार के फैसले के मद्देनजर, ट्रेड यूनियनों द्वारा इन श्रम संहिता के खिलाफ अपने आंदोलन को तेज करने की योजना बनाई जा रही है।

ट्रेड यूनियनों की मांगें:

ट्रेड यूनियनों का कहना है कि, मजदूरी और सामाजिक सुरक्षा पर बनाए गई सहिंताओं (Codes) को हम स्वीकार करते है, और इन्हें तत्काल लागू किया जाए। 

ट्रेड यूनियनों द्वारा ‘औद्योगिक संबंध’ (Industrial Relations) और ‘व्यावसायिक सुरक्षा’ (Occupational Safety) पर बनाए गई सहिंताओं पर आपत्ति वयक्त करते हुए इनकी समीक्षा किए जाने की मांग की जा रही है। 

‘श्रम संहिताओं’ (Labour Codes) के बारे में:

कानूनों के इस नवीन सेट में 44 श्रम कानूनों को ‘चार संहिताओं’ में समेकित किया गया है: मजदूरी संहिता (Wage Code), सामाजिक सुरक्षा संहिता (Social Security Code), ‘व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य दशाएं संहिता’ (Occupational Safety, Health & Working Conditions Code) और औद्योगिक संबंध संहिता (Industrial Relations Code)।

संसद द्वारा पहले ही इन चारों संहिताओं को पारित किया जा चुका है और, इनके लिए राष्ट्रपति की सहमति भी मिल चुकी है।

ये चार संहिताएँ हैं:

  1. मजदूरी संहिता, 2019 (The Code on Wages, 2019): यह संहिता संगठित और असंगठित क्षेत्र के सभी कर्मचारियों पर लागू होती है। इसका उद्देश्य सभी रोजगारों में ‘वेतन’ / ‘मजदूरी’ और बोनस भुगतान को विनियमित करना है, तथा हर उद्योग, पेशे, व्यवसाय या विनिर्माण में समान प्रकृति के काम करने वाले कर्मचारियों को समान पारिश्रमिक प्रदान करना है।
  2. ‘व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य दशाएं संहिता’ 2020 (Occupational Safety, Health & Working Conditions Code, 2020): इसका उद्देश्य 10 या अधिक श्रमिकों वाले प्रतिष्ठानों और सभी खदानों और बंदरगाहों / गोदी (Docks) में कम करने वाले श्रमिकों के स्वास्थ्य और सुरक्षा की स्थिति को विनियमित करना है।
  3. सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 (Social Security Code, 2020): इसके अंतर्गत सामाजिक सुरक्षा और मातृत्व लाभ से संबंधित नौ कानूनों को समेकित किया गया है।
  4. औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 (Industrial Relations Code, 2020): इसके तहत, तीन श्रम कानूनों अर्थात; ट्रेड यूनियन अधिनियम, 1926, औद्योगिक नियोजन (स्थायी आदेश) अधिनियम, 1946 और औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 को समेकित किया गया है। इसका उद्देश्य, उद्योगों पर श्रम कानूनों के अनुपालन बोझ को काफी हद तक कम करके, देश में कारोबारी माहौल में सुधार करना है।

इन संहिताओं के साथ समस्याएं:

  • नियमित कामगारों के लिए कार्य-घंटा प्रावधानों में ‘दिन में आठ घंटे से अधिक काम के घंटे तय करने संबंधी’ कोई प्रावधान नहीं किया गया है।
  • इन संहिताओं में अंशकालिक कर्मचारियों के लिए समान प्रावधान निर्धारित नहीं किए गए हैं।
  • कर्मचारियों के वेतन को प्रभावित करने वाले प्रावधान भी शामिल किए गए हैं।
  • श्रम संहिताओं में, प्रावधानों का पालन न करने और दूसरी बार अपराध करने पर, व्यवसायों पर जुर्माना लगाए जाने का प्रावधान किया गया है। वर्तमान महामारी की स्थिति में, अधिकांश छोटे व्यवसाय, श्रम संहिताओं में किए गए परिवर्तनों को अपनाने और लागू करने की स्थिति में नहीं हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. श्रम संहिता के बारे में
  2. प्रमुख प्रावधान
  3. समवर्ती सूची के एक विषय के रूप में श्रम।

मेंस लिंक:

चारो श्रम संहिताओं से जुड़ी चिंताओं पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

 

 

 

 

 

 

 

विषय: भारत एवं इसके पड़ोसी- संबंध। 

संयुक्त अरब अमीरात का गोल्डन वीजा


(UAE’s Golden Visa)

संदर्भ:

बॉलीवुड के प्रसिद्ध अभिनेता रणवीर सिंह को 29 मार्च को अबू धाबी में ‘संयुक्त अरब अमीरात का गोल्डन वीजा’ (UAE’s Golden Visa) प्रदान किया गया है। वह संयुक्त अरब अमीरात में रहने हेतु ‘दस साल का परमिट’ पाने वाले बॉलीवुड की नवीनतम शख्सियत हैं।

अब तक 10 से अधिक बॉलीवुड अभिनेताओं को यूएई का गोल्डन वीजा मिल चुका है।

‘गोल्डन वीजा’ के बारे में:

वर्ष 2019 में, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) द्वारा ‘दीर्घकालिक निवास वीजा’ जारी करने के लिए एक नई प्रणाली लागू की गयी थी, जिसके तहत विदेशी नागरिकों को, बिना किसी स्थानीय प्रायोजक के ‘संयुक्त अरब अमीरात’ में रहने, काम करने और अध्ययन करने की सुविधा प्रदान की जाती है। इसके अलावा, इस नई व्यवस्था के तहत विदेशी नागरिकों को 100 प्रतिशत स्वामित्व के साथ अपना व्यवसाय करने की भी सुविधा उपलब्ध होती है।

 ‘गोल्डन वीज़ा’ के तहत प्रस्तावित सुविधाएँ:

गोल्डन वीज़ा प्रणाली, मुख्यतः निम्नलिखित समूहों से संबंधित व्यक्तियों को दीर्घकालिक निवास (5 और 10 वर्ष) के लिए अवसर प्रदान करती है:

निवेशक, उद्यमी, उत्कृष्ट प्रतिभा वाले व्यक्ति जैसे शोधकर्ता, चिकित्सा पेशेवर, विज्ञान एवं अन्य ज्ञान-क्षेत्रों से संबंधित व्यक्ति तथा असाधारण छात्र।

पात्रता हेतु आवश्यकताएँ: (संक्षिप्त अवलोकन करें; रटने की आवश्यकता नहीं है)

निवेशकों के लिए:

  • न्यूनतम 10 मिलियन AED (संयुक्त अरब अमीरात दिरहम) के सार्वजनिक निवेश के बराबर, किसी निवेश कोष या कंपनी के रूप में पूंजी जमा।
  • किए जाने वाले कुल निवेश का 60% गैर-अचल संपत्तियों के रूप में होना चाहिए।
  • निवेश की जाने वाली राशि, ऋण के रूप में नहीं दी जानी चाहिए, अन्यथा संपत्ति संबंधी मामलों में सारी जिम्मेवारी निवेशकों की होगी।
  • निवेशक के लिए, न्यूनतम तीन साल तक निवेश को प्रतिधारित करने में सक्षम होना चाहिए।
  • व्यापार में भागीदारों को शामिल करने के लिए ‘गोल्डन वीजा’ का विस्तार किया जा सकता है, बशर्ते कि प्रत्येक भागीदार 10 मिलियन AED का योगदान करे।
  • ‘गोल्डन वीजा’ धारक के पति या पत्नी और बच्चों के साथ-साथ एक कार्यकारी निदेशक और एक सलाहकार भी इस वीजा सुविधा में शामिल हो सकते हैं।

विशिष्ट प्रतिभा वाले व्यक्तियों के लिए:

इस श्रेणी में डॉक्टर, शोधकर्ता, वैज्ञानिक, निवेशक और कलाकारों को शामिल किया गया है। इन व्यक्तियों को उनके संबंधित विभागों और क्षेत्रों द्वारा दी गई मान्यता के बाद, 10 साल का वीजा प्रदान किया जा सकता है। इस वीजा में उनके जीवनसाथी और बच्चों भी शामिल होंगे।

5 साल के वीजा के लिए पात्रता:

  • निवेशक को न्यूनतम 5 मिलियन AED  के सकल मूल्य की संपत्ति में निवेश करना होगा।
  • अचल संपत्ति में निवेश की गई राशि ऋण के आधार पर नहीं होनी चाहिए।
  • संपत्ति को कम से कम तीन साल के लिए बरकरार रखा जाना चाहिए।

उत्कृष्ट छत्रों के लिए:

  • सरकारी और निजी माध्यमिक विद्यालयों में न्यूनतम 95%  ग्रेड हासिल करने वाले उत्कृष्ट छात्र।
  • देश के और विदेशी विश्वविद्यालयों के छात्रों का स्नातक स्तर पर कम से कम 3.75 का GPA होना चाहिए। 

इस कदम के पीछे कारण:

  • संयुक्त अरब अमीरात की अर्थव्यवस्था को कोविड –19 महामारी और तेल की गिरती कीमतों की वजह से बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिसकी वजह से कई प्रवासियों को देश छोड़ना पड़ा है।
  • UAE सरकार के कदम का उद्देश्य, इन प्रवासियों को वापस लाना और खाड़ी देश में ‘प्रतिभाशाली लोगों और उत्कृष्ट मष्तिष्क वाले व्यक्तियों’ को रखने और राष्ट्र निर्माण में मदद करना है।
  • सरकार द्वारा दी जा रही ये छूटें, विभिन्न विशेषज्ञता वाले क्षेत्रों के प्रतिभाशाली पेशेवरों को आकर्षित करेंगी और दुनिया के सबसे प्रतिभाशाली दिमागों के लिए संयुक्त अरब अमीरात में करियर बनाने की अपील के साथ नवाचार, रचनात्मकता और अनुप्रयुक्त अनुसंधान को प्रोत्साहित करेंगी।

भारत के लिए महत्व:

  • यह नए नियम, खाड़ी देशों में अधिक भारतीय पेशेवरों और व्यापारियों को आकर्षित करेंगे और इससे भारत-यूएई संबंधों को मजबूत होंगे।
  • यह नियम, कोविड-19 से संबंधित प्रतिबंधों में ढील दिए जाने के बाद फिर से काम शुरू इच्छुक भारतीयों की खाड़ी देश में वापस जाने की सुविधा भी प्रदान करेंगे। ज्ञातव्य है, कि भारत ने नवंबर 2020 की शुरुआत में ‘खाड़ी सहयोग परिषद’ (GCC) के सदस्य देशों से इसके लिए अनुरोध भी किया था।

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप भारत और पाकिस्तान के मध्य ‘संयुक्त अरब अमीरात’ द्वारा मध्यस्थता के प्रस्ताव के बारे में जानते हैं? इस बारे में अधिक जानने हेतु पढ़िए।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. मध्य पूर्व के महत्वपूर्ण देश और उनकी अवस्थिति
  2. भारत और संयुक्त अरब अमीरात- द्विपक्षीय व्यापार और कच्चे तेल की आपूर्ति
  3. संयुक्त अरब अमीरात में भारतीय प्रावासी- संख्या और महत्व
  4. गोल्डन वीजा क्या है?
  5. पात्रता
  6. लाभ

मेंस लिंक:

यूएई गोल्डन वीजा योजना के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

 

 

 

 

 

 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

दक्षिण चीन सागर विवाद


(South China Sea Dispute)

संदर्भ:

‘दक्षिणी चीन सागर’ (South China Sea) के विवादित जल में अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन के साथ-साथ चीन द्वारा विदेशी हस्तक्षेप किए जाने ने, कई दक्षिण-पूर्व एशियाई देश इस क्षेत्र में बीजिंग की सैन्य गतिविधियों का विरोध करने के लिए प्रेरित किया है।

  • मलेशिया, वियतनाम, फिलीपींस, ब्रुनेई, इंडोनेशिया और ताइवान जैसे, दक्षिण चीन सागर को साझा करने वाले देशों को लगता है कि चीन की “आधिपत्य” ज़माने वाली कार्रवाइयां उनकी आर्थिक संभावनाओं को प्रभावित करती हैं और साथ ही साथ उनके संप्रभु अधिकारों को भी खतरे में डालती हैं।
  • इस क्षेत्र में अनिश्चित सीमाओं पर विवाद के कारण यह संघर्ष बढ़ने की संभावना है।

मुठभेड़ की हालिया घटनाएँ:

  • वियतनाम ने चीनी बलों द्वारा किए जा रहे सैन्य अभ्यास पर अपना मजबूत विरोध दर्ज कराया है, क्योंकि ये युद्धाभ्यास एक ऐसे क्षेत्र में किए गए थे, जो वियतनाम के ‘विशेष आर्थिक क्षेत्र’ (EEZ) और महाद्वीपीय शेल्फ के साथ ओवरलैप करता है।
  • देश में की जा रही प्रतिशोध की मांग के दबाव के बाद, फिलीपींस ने अपने ‘विशेष आर्थिक क्षेत्र’ में घुसपैठ को लेकर चीन का कड़ा विरोध कर चुका है।

समग्र प्रकरण:

दक्षिणी चीन सागर में, बीजिंग द्वारा कई दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्रों के साथ अतिव्यापी क्षेत्रीय दावा किया जाता रहा है।

  • दक्षिणी चीन सागर पर ब्रुनेई, मलेशिया, फिलीपींस, ताइवान और वियतनाम अपना दावा करते हैं, जबकि चीन, संसाधन-समृद्ध लगभग पूरे समुद्रीय क्षेत्र पर अपना प्रतिस्पर्धी दावा करता है। विदित हो कि, अरबों डॉलर सालाना का व्यापार करने वाले जहाज इस क्षेत्र से होकर गुजरते हैं। 
  • बीजिंग पर जहाज-रोधी मिसाइलों और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों सहित सैन्य उपकरण तैनात करने का भी आरोप लगाया गया है। इसके अलावा, चीन द्वारा वर्ष 2016 में अंतर्राष्ट्रीय न्यायाधिकरण द्वारा दिए गए के एक फैसले को भी अनदेखा किया गया है, जिसमे चीन द्वारा अधिकांश जल-क्षेत्र पर किए जा रहे ऐतिहासिक दावे को बिना आधार के घोषित किया गया था।

‘दक्षिण चीन सागर’ की अवस्थिति:

दक्षिण चीन सागर, दक्षिण पूर्व एशिया में पश्चिमी प्रशांत महासागर की एक शाखा है।

  • यह, चीन के दक्षिण, वियतनाम के पूर्व और दक्षिण, फिलीपींस के पश्चिम और बोर्नियो द्वीप के उत्तर में अवस्थित है।
  • यह, ताइवान जलडमरूमध्य द्वारा ‘पूर्वी चीन सागर’ और ‘लूजॉन स्ट्रेट’ के माध्यम से ‘फिलीपीन सागर’ से जुड़ा हुआ है।
  • सीमावर्ती देश और भू-भाग: जनवादी चीन गणराज्य, चीन गणराज्य (ताइवान), फिलीपींस, मलेशिया, ब्रुनेई, इंडोनेशिया, सिंगापुर और वियतनाम।

सामरिक महत्व:

  • ‘दक्षिणी चीन सागर’ अपनी अवस्थिति के कारण सामरिक रूप से अत्यधिक महत्वपूर्ण है, यह हिंद महासागर और प्रशांत महासागर (मलक्का जलसन्धि) के बीच संपर्क-कड़ी है।
  • ‘संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास अभिसमय’ (United Nations Conference on Trade And DevelopmentUNCTAD) के अनुसार, वैश्विक नौपरिवहन का एक-तिहाई भाग ‘दक्षिणी चीन सागर’ से होकर गुजरता है, जिसके द्वारा अरबों का व्यापार होता है। इस कारण भी यह एक महत्वपूर्ण भूराजनीतिक जल निकाय है।

दक्षिणी चीन सागर में अवस्थित द्वीपों पर विभिन्न देशों के दावे:

  • पारसेल द्वीप समूह’ (Paracels Islands) पर चीन, ताइवान और वियतनाम द्वारा दावा किया जाता है।
  • स्प्रैटली द्वीप समूह’ (Spratley Islands) पर चीन, ताइवान, वियतनाम, ब्रुनेई और फिलीपींस द्वारा दावा किया जाता है।
  • स्कारबोरो शोल (Scarborough Shoal) पर फिलीपींस, चीन और ताइवान द्वारा दावा किया जाता है।
  • वर्ष  2010 से, चीन द्वारा निर्जन टापुओं को, यूनाइटेड नेशंस कन्वेंशन ऑफ द लॉ ऑफ द सी’ (United Nations Convention on the Law of the Sea- UNCLOS) के अंतर्गत लाने के लिए, कृत्रिम टापुओं में परिवर्तित किया जा रहा है। (उदाहरण के लिए, हेवन रीफ, जॉनसन साउथ रीफ और फेरी क्रॉस रीफ)।

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2016 का फैसला:

  • 2016 में हेग में अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण ने फैसला सुनाया कि उक्त ‘नाइन-डैश-लाइन’ का कोई कानूनी आधार नहीं है।
  • हालाँकि, इस फैसले को मानने से इनकार करने के बाद, चीन ने कृत्रिम द्वीपों के निर्माण सहित अपनी गतिविधियों को जारी रखा हुआ है।

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप सात सागर‘ (The Seven Seas) वाक्यांश का अर्थ जानते हैं

क्या आपने समुद्रों के नामकरण और उनसे जुड़ी समस्याएं के बारे में सोचा है? इस बारे में जानकारी हेतु संक्षेप में पढ़िए

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘दक्षिणी चीन सागर’ में संबंधित पक्षकारों के आचरण पर घोषणा के बारे में। 
  2. विवाद में शामिल देश
  3. नाइन-डैश लाइन क्या है?
  4. इस क्षेत्र में स्थित महत्वपूर्ण खाड़ियाँ, मार्ग एवं सागर
  5. विवादित द्वीप और उनकी अवस्थिति
  6. UNCLOS क्या है?
  7. ताइवान स्ट्रेट और लूजॉन स्ट्रेट की अवस्थिति

मेंस लिंक:

दक्षिण चीन सागर विवाद पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 

 

 

 

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


 

इक्वाडोर में जंगली जानवरों के लिए कानूनी अधिकार

दक्षिण अमेरिकी देश ‘इक्वाडोर’ जंगली जानवरों को कानूनी अधिकार देने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है।

 

 

वाचाघात 

(Aphasia)

वाचाघात (Aphasia) अर्थात ‘बोली बंद होना’ एक मस्तिष्क विकार है जिसके कारण बोलने, पढ़ने और लिखने में समस्या होती है।

  • स्ट्रोक, ट्यूमर, सिर में चोट या ‘मस्तिष्क के भाषा केंद्रों को अन्य कोई क्षति’ वाचाघात का कारण बन सकती है। 
  • मस्तिष्क का संक्रमण या अल्जाइमर रोग भी इस बीमारी का कारण बन सकता है।

 

 

बामियान बुद्ध

(Bamiyan Buddhas)

अफगानिस्तान के तालिबान शासन ने हाल ही में कहा है, कि शासन द्वारा ‘मेस अयनक’ या ‘मेस ऐनाकी’ (Mes Aynak) में प्राचीन बुद्ध की मूर्तियों की रक्षा की जायगी। ‘मेस ऐनाकी’ में एक तांबे की खदान भी है और तालिबान यहाँ पर चीनी निवेश की उम्मीद कर रहे हैं।

  • पहले, तालिबान ने बामियान में सदियों पुरानी बुद्ध की मूर्तियों को तोपखाने, विस्फोटक और रॉकेट का उपयोग करके नष्ट कर दिया था।
  • ‘मेस अयनक’ की प्रतिमाओं के प्रति तालिबान का हृदय परिवर्तन, आर्थिक हितों से प्रेरित प्रतीत होता है, क्योंकि, तालिबान शासन को तांबे की खदानों में चीनी निवेश से होने वाली आय की सख्त जरूरत है।

प्राचीन बामियान बुद्ध:

हिंदू-कुश पर्वतों में और बामियान नदी के किनारे अवस्थित ‘बामियान घाटी’ (Bamiyan valley), शुरुआती रेशम मार्गों के बीच पड़ने वाली एक प्रमुख केंद्र थी, जो वाणिज्यिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान दोनों के केंद्र के रूप में उभर रहा थी।

  • बामियान बुद्ध प्रतिमाएं, गुप्त कालीन, ससैनियन और हेलेनिस्टिक कलात्मक शैलियों के संगम के महान उदाहरण थी।
  • ये प्रतिमाएं 5वीं शताब्दी ईस्वी पूर्व के बतायी जाती हैं।
  • ये प्रतिमाएं, एक समय विश्व में बुद्ध की सबसे ऊँची खडी प्रतिमाएं थी।
  • इन प्रतिमाओं को ‘सालसल’ (Salsal) और ‘शामामा’ (Shamama) कहा जाता था।
  • सालसल का अर्थ है “प्रकाश ब्रह्मांड के माध्यम से चमकता है”; शामामा’ का अर्थ “क्वीन मदर” हैं।
  • यूनेस्को ने 2003 में इन अवशेषों को विश्व धरोहर स्थलों की अपनी सूची में शामिल किया था।Current Affairs

     

हरिचंद ठाकुर

(Harichand Thakur) 

श्री श्री हरिचंद ठाकुर (Harichand Thakur)  की 211वीं जयंती के अवसर पर, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने “मटुआ धर्म महा मेला 2022” के उद्घाटन के दौरान मटुआ समुदाय को आभासी प्रारूप में संबोधित किया।

  • ‘हरिचंद ठाकुर’ ने बंगाल प्रेसीडेंसी के अछूत लोगों के बीच महत्वपूर्ण काम किया था।
  • उनका जन्म 1812 में बांग्लादेश के ओरकंडी (Orakandi) में हुआ था।
  • ठाकुर का परिवार वैष्णव हिंदू था, और उन्होंने वैष्णव हिंदू धर्म के एक संप्रदाय की स्थापना की जिसे मटुआ के नाम से जाना जाता है।
  • नामशूद्र समुदाय (Namasudra) के सदस्यों ने इस संप्रदाय को अपनाया। तत्कालीन बंगाल में इस समुदाय के सदस्यों को ‘चांडाल’ कहकर अपमानजनक तरीके से बुलाया जाता था और उन्हें अछूत माना जाता था।
  • इस संप्रदाय ने जाति उत्पीड़न का विरोध किया और बाद में उच्च जातियों द्वारा हाशिए पर रखे गए अन्य समुदायों -जैसे कि माली और तेली- के अनुयायियों को आकर्षित।
  • ‘हरिचंद ठाकुर’ के अनुयायी उन्हें भगवान मानते हैं और उन्हें ठाकुर, विष्णु या कृष्ण का अवतार भी कहते हैं। इसलिए, उन्हें श्री श्री हरिचंद ठाकुर के नाम से जाना जाने लगा। 

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श्रिंकफ्लेशन

(Shrinkflation)

श्रिंकफ्लेशन (Shrinkflation), किसी उत्पाद के मुद्रित मूल्य को बनाए रखते हुए, उसके आकार को कम करने की प्रक्रिया होती है।

  • यह छिपी हुई मुद्रास्फीति (Inflation) का ही एक रूप है।
  • ‘श्रिंकफ्लेशन’, लाभांश को चुपके से बढ़ाने या इनपुट लागत में वृद्धि के सापेक्ष लाभ को बनाए रखने के लिये प्रति दी गई मात्रा के अनुसार, मुख्य रूप से खाद्य और पेय उद्योग में, कीमतों में वृद्धि करने की कंपनियों द्वारा नियोजित एक रणनीति है। 
  • श्रिंकफ्लेशन को व्यवसाय एवं शैक्षणिक अनुसंधान में पैकेज डाउनसाइज़िंग अर्थात पैकेज के आकार को छोटा करना के रूप में भी जाना जाता है।Current Affairs