विषयसूची
सामान्य अध्ययन-I
- 1921 का मालाबार विद्रोह
सामान्य अध्ययन-II
- केंद्रीय सिविल सेवा नियमों के अधीन होंगे चंडीगढ़ प्रशासन के कर्मचारी
- आपराधिक प्रक्रिया (पहचान) विधेयक
- घर घर राशन योजना
सामान्य अध्ययन-III
- रेलवे ट्रैक पर हाथियों की मौत को रोकने हेतु एक स्थायी निकाय
- ग्रेट बैरियर रीफ में प्रवाल विरंजन का कारण
- मणिपुर-नागालैंड सीमा पर सीमा विवाद
प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य
- अमरनाथ यात्रा
- केरल सरकार द्वारा ‘डिअस-नॉन‘ आदेश जारी
- अलोपेसिया अरीएटा
- यूनेस्को का ‘साहित्य शहर’
- राष्ट्रीय डॉल्फिन दिवस: 5 अक्टूबर
सामान्य अध्ययन–I
विषय: स्वतंत्रता संग्राम- इसके विभिन्न चरण और देश के विभिन्न भागों से इसमें अपना योगदान देने वाले महत्त्वपूर्ण व्यक्ति/उनका योगदान।
1921 का मालाबार विद्रोह
(Malabar rebellion of 1921)
संदर्भ:
हाल ही में, भारतीय ऐतिहासिक अनुसंधान परिषद’ (Indian Council of Historical Research- ICHR) ने भारत के स्वतंत्रता सेनानियों की सूची से ‘वरियामकुननाथ कुंजामहम्मद हाजी’, (Variamkunnaathu Kunhahamad Haji) एवं ‘अली मुसलियार’ (Ali Musliyar) सहित वर्ष 1921 में हुए मालाबार विद्रोह के शहीदों को हटाने हेतु की गयी सिफारिश पर अपना फैसला टाल दिया है।
संबंधित प्रकरण:
ICHR द्वारा गठित समिति का मत था, कि मालाबार में जो विद्रोह हुआ वह हिंदुओं पर एकतरफा हमला था, और इन उपद्रवों के दौरान सिर्फ दो अंग्रेज मारे गए थे और इसलिए विद्रोह को स्वतंत्रता संग्राम का हिस्सा नहीं माना जा सकता था।
- इस समिति ने मालाबार विद्रोही नेताओं- ज्यादातर मुस्लिमों – को स्वतंत्रता सेनानियों की सूची से हटाने की सिफारिश की थी।
- कुछ लोग इसे इतिहास को तोड़ने-मरोड़ने के प्रयास के रूप में देखते हैं।
मोपला विद्रोह क्या था?
वर्ष 1921 का मापिल्ला विद्रोह या मोपला विद्रोह (Moplah Rebellion), 19वीं सदी में तथा 20 वीं शताब्दी की शुरुआत में मालाबार (उत्तरी केरल) में अंग्रेजों और हिंदू जमींदारों के खिलाफ, मोपलाओं (मालाबार के मुसलमानों) द्वारा किये गए विद्रोहों की श्रंखला की परिणति थी।
वर्ष 2021 में इस विद्रोह के 100 वर्ष पूरे हो गए थे।
विद्रोह के कारण और परिणाम:
ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन और सामंती व्यवस्था के खिलाफ आरंभ हुआ विद्रोह अंत में हिंदुओं और मुसलमानों के बीच सांप्रदायिक हिंसा के रूप में बदल गया।
- मलाबार के निवासियों के बीच असहयोग आंदोलन तथा खिलाफत आंदोलन के संयुक्त संदेश को फैलाने के लिए, अगस्त 1920 में, गांधीजी तथा भारत में खिलाफत आंदोलन के नेता शौकत अली ने एक साथ कालीकट का दौरा किया।
- गांधीजी के आह्वान पर, मालाबार में ख़िलाफ़त समिति का गठन किया गया तथा अपने धार्मिक नेता ‘पोंनानी वाले महादुम तंगल’ (Mahadum Tangal of Ponnani) के नेतृत्व में मोपलाओं ने असहयोग आंदोलन में सहयोग करने की शपथ ली।
- अधिकांश बटाईदारों की समस्याएं, काश्तकारी की सुरक्षा, अत्याधिक लगान, नवीकरण शुल्क (Renewal Fees) तथा जमींदारों द्वारा अन्यायपूर्ण वसूली से संबंधित थीं।
- ब्रिटिश सरकार द्वारा इस आंदोलन का कठोरतापूर्वक दमन किया गया तथा इस विद्रोह को कुचलने के लिए गोरखा रेजिमेंटों को लाया गया और मार्शल लॉ लागू कर दिया गया।
मालगाड़ी त्रासदी (Wagon Tragedy):
ब्रिटिश दमन के दौरान कुछ मोपिला कैदियों को मालगाड़ी से जेल ले जाया रहा था, इसमें से एक डिब्बे में बंद लगभग 60 कैदियों की दम घुट जाने से मौत हो गयी।
इंस्टा जिज्ञासु:
क्या आप जानते हैं वरियमकुनाथ कुंजाहमद हाजी कौन थे? उनके शासन का अंत किस प्रकार हुआ?
प्रीलिम्स लिंक:
- वरियामकुननाथ कुंजामहम्मद हाजी कौन थे?
- 1921 का मालाबार विद्रोह क्या था?
- विद्रोह का नेतृत्व किसने किया?
- हाजी ने किस प्रकार स्वतंत्र राज्य स्थापित किया?
- खिलाफत आंदोलन क्या है?
- खिलाफत आंदोलन के परिणाम
- असहयोग आंदोलन और खिलाफत आंदोलन के बीच संबंध।
मेंस लिंक:
वरियामकुननाथ कुंजामहम्मद हाजी कौन थे? वर्ष 1921 में उन्होंने मालाबार क्षेत्र में किस प्रकार अंग्रेजों का सामना किया? यह विद्रोह विवादास्पद क्यों है? चर्चा कीजिए।
स्रोत: द हिंदू।
सामान्य अध्ययन–II
विषय: लोकतंत्र में सिविल सेवाओं की भूमिका।
केंद्रीय सिविल सेवा नियमों के अधीन होंगे चंडीगढ़ प्रशासन के कर्मचारी
संदर्भ:
हाल ही में, केंद्र सरकार द्वारा अब से चंडीगढ़ प्रशासन के कर्मचारियों पर केंद्रीय सिविल सेवा नियम लागू होने की घोषणा की गयी है।
केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा दोनों राज्यों की राजधानी है।
निहितार्थ:
केंद्रीय सिविल सेवा नियम लागू होने के पश्चात्-
- सेवानिवृत्ति की आयु को वर्तमान 58 वर्ष से बढ़कर 60 वर्ष हो जाएगी।
- महिला कर्मचारियों को अब, मौजूदा एक साल की बजाय दो साल की ‘चाइल्ड केयर लीव’ मिलेगी।
- इन नियमों के लागू होने से अन्य लाभ, जैसे बाल शिक्षा भत्ता में वृद्धि आदि प्राप्त होंगे।
- शिक्षा विभाग से जुड़े कर्मियों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़कर 65 हो जाएगी।
इस फैसले का विरोध:
- केंद्र सरकार के इस फैसले पर पंजाब के नेताओं द्वारा तीखी आलोचना की जा रही है, और संभी राजनीतिक दलों के नेताओं ने इसे “पंजाब के अधिकारों का अतिक्रमण” बताया है।
- इनका कहना है, कि यह फैसला, ‘पंजाब पुनर्गठन अधिनियम’ की भावना का उल्लंघन करता है और इस पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।
चंडीगढ़ की स्थिति:
अब तक, संघ शासित प्रदेश चंडीगढ़ के कर्मचारी ‘पंजाब सिविल सेवा नियमों’ के अंतर्गत आते थे।
- 1966 में पंजाब का दो अलग-अलग राज्यों- पंजाब और हरियाणा – में विभाजन हो गया तथा इसका कुछ क्षेत्र हिमाचल प्रदेश में शामिल कर दिया गया, उस समय इन दोनों नवगठित राज्यों ने चंडीगढ़ पर अपनी राजधानी के रूप में दावा किया। इस संबंध में पेश किए गए प्रस्ताव को लंबित रखते हुए, केंद्र सरकार ने चंडीगढ़ को ‘संघ शासित प्रदेश’ (Union Territory) घोषित कर दिया।
- ‘पंजाब पुनर्गठन अधिनियम’, 1966 के अनुसार, चंडीगढ़ का प्रशासन केंद्र द्वारा किया जाना था, किंतु इस संघ शासित प्रदेश में वही क़ानून लागू होंगे जो ‘अविभाजित पंजाब’ में लागू थे।
- 1984 में, जब यह क्षेत्र आतंकवाद से जूझ रहा था, उस समय ‘पंजाब के राज्यपाल’ को चंडीगढ़ शहर का प्रशासक बनाया गया था ।
संघ शासित प्रदेशों का प्रशासन:
- संविधान के भाग VIII में अनुच्छेद 239 से 241 केंद्र / संघ शासित प्रदेशों से संबंधित हैं, और इन संघ शासित प्रदेशों की प्रशासनिक व्यवस्था में एकरूपता नहीं है।
- प्रत्येक केंद्र शासित प्रदेश का प्रशासन, राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त प्रशासक के माध्यम से किया जाता है।
इनके संबंध में संसद की कानून बनाने संबंधी शक्ति:
केंद्र शासित प्रदेशों के लिए संसद, तीनों अनुसूचियों (राज्य सूची सहित) के किसी भी विषय पर कानून बना सकती है।
- राष्ट्रपति, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप, दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव की शांति, प्रगति और अच्छी सरकार के लिए नियम बना सकते हैं।
- राष्ट्रपति द्वारा बनाए गए विनियमों का वही बल और प्रभाव होता है जो संसद के अधिनियम का होता है।
इंस्टा जिज्ञासु:
आप जानते हैं कि, चंडीगढ़ के राजधानी परिसर (Capitol Complex) को जुलाई 2016 में यूनेस्को द्वारा इस्तांबुल में आयोजित विश्व विरासत सम्मेलन के 40वें सत्र में ‘विश्व धरोहर’ घोषित किया गया था।
प्रीलिम्स लिंक:
- चंडीगढ़ सिविल सेवा नियम
- पंजाब पुनर्गठन अधिनियम
- केंद्र शासित प्रदेशों का प्रशासन
- केंद्रीय सेवा नियम
मेंस लिंक:
सेवा नियमों में नवीनतम परिवर्तनों से जुड़ी चिंताओं पर चर्चा कीजिए।
स्रोत: द हिंदू।
विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।
आपराधिक प्रक्रिया (पहचान) विधेयक
(Criminal Procedure (Identification) Bill)
संदर्भ:
हाल ही में, ‘आपराधिक प्रक्रिया (पहचान) विधेयक’ (Criminal Procedure (Identification) Bill) लोकसभा में पेश किया गया है।
विधेयक के पुरःस्थापन के बाद, विपक्ष द्वारा इस पर वोटिंग की मांग की गयी, जिसके परिणामस्वरूप विधेयक के पक्ष में 120 मत और विधेयक के विरुद्ध 58 मत पड़े।
विधेयक के प्रमुख प्रावधान:
- इस विधेयक में, ‘कैदियों की पहचान अधिनियम’ 1920 (Identification of Prisoners Act 1920) को निरस्त करने का प्रस्ताव किया गया है। उक्त अधिनियम, अपने वर्तमान स्वरूप में, सीमित श्रेणी के व्यक्तियों के शरीर का माप लेने की अनुमति देता है।
- प्रस्तावित कानून में, प्रवर्तन एजेंसियों को आपराधिक मामलों में पहचान और जांच के उद्देश्यों के लिए दोषियों और अन्य व्यक्तियों के शारीरिक और जैविक नमूने एकत्र करने, संग्रहीत करने और विश्लेषण करने के लिए अधिकृत किया गया है।
- यह विधेयक, पुलिस को, विश्लेषण के उद्देश्य से दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 53 या धारा 53A में निर्दिष्ट हस्ताक्षर, लिखावट या अन्य व्यवहार संबंधी विशेषताओं को रिकॉर्ड करने के लिए भी अधिकृत करता है।
- विधेयक के अनुसार, किसी भी निवारक निरोध कानून के तहत दोषी ठहराए गए, गिरफ्तार किए गए या पकड़े गए किसी भी व्यक्ति को पुलिस अधिकारी या जेल अधिकारी के लिए ‘शारीरिक माप” प्रदान करना आवश्यक होगा।
- कोई भी केंद्र शासित प्रदेश या राज्य सरकार प्रशासन, अपने संबंधित अधिकार क्षेत्र में किसी मामले से संबंधित व्यक्ति के माप को एकत्र करने, संरक्षित करने और साझा करने हेतु एक उपयुक्त एजेंसी को अधिसूचित कर सकती है।
- इस अधिनियम के तहत ‘माप लेने की अनुमति’ का विरोध या इनकार करना, भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 186 के तहत अपराध माना जाएगा।
विधेयक के उद्देश्य:
- उंगलियों के निशान, हथेली के निशान और पैरों के निशान, फोटोग्राफ, आईरिस और रेटिना स्कैन, शारीरिक तथा जैविक नमूने और उनके विश्लेषण आदि को शामिल करने के लिए “माप” (Measurements) को परिभाषित करना।
- राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) को, माप के रिकॉर्ड को एकत्र करने, संग्रहीत करने और संरक्षित करने और रिकॉर्ड के साझाकरण, प्रसार, नष्ट करने और निपटान करने की शक्ति प्रदान करना।
- मजिस्ट्रेट के लिए किसी भी व्यक्ति को माप देने का निर्देश देने की शक्ति प्रदान करना; मजिस्ट्रेट, कानून प्रवर्तन अधिकारियों को एक निर्दिष्ट श्रेणी के दोषी और गैर-दोषी व्यक्तियों के मामले में उंगलियों के निशान, पैरों के निशान और तस्वीरें एकत्र करने का निर्देश भी दे सकता है।
- पुलिस या जेल अधिकारियों को, किसी भी ऐसे व्यक्ति का माप लेने के लिए सशक्त बनाना जो माप देने का विरोध करता है या मना करता है।
विधेयक की आवश्यकता और महत्व:
- विधेयक में कहा गया है कि “व्यक्तियों के दायरे” का विस्तार करना आवश्यक है, जिनकी माप ली जा सकती है क्योंकि इससे जांच एजेंसियों को पर्याप्त कानूनी रूप से स्वीकार्य सबूत इकट्ठा करने और आरोपी व्यक्ति के अपराध को साबित करने में मदद मिलेगी।
- विधेयक न केवल जांच एजेंसियों की मदद करेगा बल्कि अभियोजन को भी बढ़ाएगा। इसके माध्यम से अदालतों में दोषसिद्धि दर में वृद्धि की भी संभावना है।
विधेयक का विरोध:
संसद में विपक्षी सदस्यों ने इस विधेयक को “कठोर” और “अवैध” करार दिया है।
- इनका कहना है, कि यह विधेयक ‘निजता के अधिकार’ का उल्लंघन करता है।
- यह, नागरिकों के अधिकारों की रक्षा से संबंधित, संविधान के अनुच्छेद 20 (3) का उल्लंघन करता है, जिमसे प्रावधान किया गया है कि “अपराध के आरोपी किसी भी व्यक्ति को अपने खिलाफ गवाह बनने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा”।
- प्रस्तावित कानून, लोगों के माप एवं नमूनों को, संग्रह की तारीख से 75 वर्षों तक बनाए रखने का प्रावधान करता है, जोकि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार में निहित ‘भूल जाने के अधिकार का उल्लंघन’ है।
इंस्टा जिज्ञासु:
क्या आप ‘के.एस. पुट्टस्वामी मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बारे में जानते हैं? संदर्भ: इसे पढ़ें।
स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।
विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।
घर घर राशन योजना
(Ghar Ghar Ration Yojna)
संदर्भ:
हाल ही में, पंजाब सरकार द्वारा ‘घर घर राशन योजना’ (Ghar Ghar Ration Yojna) नामक एक नई योजना की घोषणा की गयी है।
नई योजना के प्रमुख बिंदु:
- इस योजना के तहत, लाभार्थियों को खाद्यान्न की होम डिलीवरी की जाएगी।
- सरकार द्वारा प्रत्येक लाभार्थी को प्रति माह 2 रुपये प्रति किलो के हिसाब से 5 किलो गेहूं दिए जाएंगे।
- केंद्र सरकार द्वार 1.43 लाख लाभार्थियों (36 लाख परिवारों को मिलाकर) के लिए ‘राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम’ (NFSA) 2013 के तहत योजना को वित्त पोषित किया जाएगा।
लाभार्थी:
- इस योजना के तहत, राज्य सरकार की ‘आटा-दाल योजना’ (Atta-Dal Scheme) के लाभार्थियों को उनके घर पर राशन उपलब्ध कराया जाएगा।‘आटा-दाल योजना’, केंद्र सरकार के ‘खाद्य सुरक्षा अधिनियम’ का एक संशोधित प्रारूप है।
- यह योजना वैकल्पिक होगी, और जो लोग उचित मूल्य की दुकानों या राशन डिपो के बाहर कतार में नहीं लगना चाहते हैं, वे इसका विकल्प चुन सकते हैं।
- पंजाब में ‘आटा-दाल योजना’ के 1.54 करोड़ व्यक्तिगत लाभार्थी (43 लाख परिवारों में) हैं।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), 2013:
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (National Food Security Act- NFSA) 2013 का उद्देश्य एक गरिमापूर्ण जीवन जीने के लिए लोगों को वहनीय मूल्यों पर अच्छी गुणवत्ता के खाद्यान्न की पर्याप्त मात्रा उपलब्ध कराते हुए उन्हें मानव जीवन-चक्र दृष्टिकोण में खाद्य और पौषणिक सुरक्षा प्रदान करना है।
अधिनियम की प्रमुख विशेषताऐं:
लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (TPDS) के तहत कवरेज और पात्रता: TPDS के अंतर्गत 5 किलोग्राम प्रति व्यक्ति प्रति माह की एक-समान हकदारी के साथ 75% ग्रामीण आबादी और 50% शहरी आबादी को कवर किया जाएगा। हालांकि, मौजूदा अंत्योदय अन्न योजना (AAY) में सम्मिलित निर्धनतम परिवारों की 35 किलोग्राम प्रति परिवार प्रति माह की हकदारी सुनिश्चित रखी जाएगी।
टीपीडीएस के अंतर्गत राजसहायता प्राप्त मूल्य और उनमें संशोधन: इस अधिनियम के लागू होने की तारीख से 3 वर्ष की अवधि के लिए टीपीडीएस के अंतर्गत खाद्यान्न अर्थात् चावल, गेहूं और मोटा अनाज क्रमश: 3/2/1 रूपए प्रति किलोग्राम के राजसहायता प्राप्त मूल्य पर उपलब्ध कराया जाएगा। तदुपरान्त इन मूल्यों को न्यूनतम समर्थन मूल्य के साथ उचित रूप से जोड़ा जाएगा।
परिवारों की पहचान: टीपीडीएस के अंतर्गत प्रत्येक राज्य के लिए निर्धारित कवरेज के दायरे में पात्र परिवारों की पहचान संबंधी कार्य राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों द्वारा किया जाएगा।
महिलाओं और बच्चों के लिए पोषण सहायता: गर्भवती महिलाएं और स्तनपान कराने वाली माताएं तथा 6 माह से लेकर 14 वर्ष तक की आयु वर्ग के बच्चे एकीकृत बाल विकास सेवाओं (आईसीडीएस) और मध्याह्न भोजन (एमडीएम) स्कीमों के अंतर्गत निर्धारित पौषणिक मानदण्डों के अनुसार भोजन के हकदार होंगे । 6 वर्ष की आयु तक के कुपोषित बच्चों के लिए उच्च स्तर के पोषण संबंधी मानदण्ड निर्धारित किए गए हैं।
महिलाओं और बच्चों को पोषण संबंधी सहायता: 6 महीने से 14 वर्ष की आयु के बच्चों और गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS) और मिड-डे मील (MDM) योजनाओं के तहत निर्धारित पोषण मानदंडों के अनुसार भोजन का अधिकार होगा। 6 वर्ष की आयु तक के कुपोषित बच्चों के लिए उच्च पोषण मानदंड निर्धारित किये गए है।
मातृत्व लाभ: गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को 6,000 रु. का मातृत्व लाभ भी प्रदान किया जाएगा।
महिला सशक्तीकरण: राशन कार्ड जारी करने के उद्देश्य से, परिवार में 18 वर्ष या उससे अधिक आयु की महिला को परिवार का मुखिया माना जाएगा।
शिकायत निवारण तंत्र: जिला और राज्य स्तर पर शिकायत निवारण तंत्र उपलब्ध कराया जाएगा।
खाद्यान्न की रखरखाव व परिवहन लागत तथा उचित मूल्य की दुकान (FPS) व्यापारियों का लाभ: राज्य के भीतर खाद्यान्न के परिवहन पर खर्च, इसके रखरखाव तथा उचित मूल्य की दुकान (FPS) व्यापारियों के लाभ को इस प्रयोजन हेतु तैयार किए गए मानदंडों के अनुसार निर्धारित किया जाएगा, तथा उपरोक्त व्यय को पूरा करने के राज्यों केंद्र सरकार द्वारा सहायता प्रदान की जाएगी।
पारदर्शिता और जवाबदेही: पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने हेतु, पीडीएस, सामाजिक लेखापरीक्षा और सतर्कता समितियों के गठन से संबंधित रिकॉर्ड को दिखाए जाने संबंधी प्रावधान किए गए हैं।
खाद्य सुरक्षा भत्ता: उपयुक्त खाद्यान्न अथवा भोजन की आपूर्ति नहीं होने की स्थिति में, लाभार्थियों के लिए खाद्य सुरक्षा भत्ता का प्रावधान किया गया है।
दंड अथवा जुर्माना: यदि कोई लोक सेवक या प्राधिकरण, जिला शिकायत निवारण अधिकारी द्वारा अनुशंसित राहत सहायता प्रदान करने में विफल रहता है, तो प्रावधान के अनुसार राज्य खाद्य आयोग द्वारा जुर्माना लगाया जाएगा।
इंस्टा जिज्ञासु:
क्या आप ‘सार्वजनिक वितरण प्रणाली’ (PDS) और ‘लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली’ (TPDS) में अंतर जानते हैं?
प्रीलिम्स लिंक:
- ‘लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली’ (TPDS) के बारे में।
- योजना के तहत ‘खाद्य सुरक्षा भत्ता’ किसे प्रदान किया जाता है?
- अधिनियम के तहत दंड का प्रावधान
- मातृत्व लाभ संबंधी प्रावधान
- एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS) योजना का अवलोकन
- मध्याह्न भोजन (MDM) योजना का अवलोकन
- योजना के तहत परिवारों को चिह्नित करने की जिम्मेदारी।
मेंस लिंक:
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), 2013 के महत्व पर चर्चा कीजिए।
स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।
सामान्य अध्ययन–III
विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।
रेलवे ट्रैक पर हाथियों की मौत को रोकने हेतु एक स्थायी निकाय
संदर्भ:
हाल ही में, केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय द्वारा रेलवे पटरियों पर हाथियों की होने वाली मौतों को रोकने के लिए, रेल मंत्रालय और पर्यावरण मंत्रालय को शामिल करते हुए एक “स्थायी” समन्वय समिति का गठन किया गया है।
पृष्ठभूमि:
रेलवे ट्रैक पर देशभर में, वर्ष 2018-19 में 19, वर्ष 2019-20 में 14 और वर्ष 2020-21 में 12 हाथियों की मौत हुई थी।
चिंता का विषय:
हाथियों के आवागमन मार्गों को विशेष रूप से सीमांकित और ‘हाथी मार्ग’ के रूप में अधिसूचित किए जाने के बावजूद, रेलवे से टकराना हाथियों की अप्राकृतिक मौतों का दूसरा सबसे बड़ा कारण है।
किए गए प्रमुख उपाय:
- रेल दुर्घटनाओं में हाथियों की मौत को रोकने के लिए रेल मंत्रालय (रेलवे बोर्ड) और ‘पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय’ (MoEFCC) के बीच एक स्थायी समन्वय समिति का गठन।
- लोको पायलटों के लिए स्पष्ट दृश्य प्रदान करने के लिए रेलवे पटरियों के किनारे वनस्पति की सफाई।
- लोको पायलटों को हाथी की उपस्थिति के बारे में सचेत करने के लिए उपयुक्त स्थानों पर साइनेज बोर्ड का उपयोग करना।
- रेलवे ट्रैक के एलिवेटेड सेक्शन के ढलान को मॉडरेट करना।
- हाथियों के सुरक्षित आवागमन के लिए अंडरपास/ओवरपास की स्थापना।
- संवेदनशील हिस्सों में सूर्यास्त से सूर्योदय तक ट्रेन की गति का नियमन।
- वन विभाग के अग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों और वन्यजीव पर्यवेक्षकों द्वारा रेलवे पटरियों के संवेदनशील हिस्सों की नियमित गश्त।
समाधान के रूप में ‘इको ब्रिज’:
- ‘इको ब्रिज’ (Eco Bridges) वन्यजीव गलियारे होते हैं, जिन्हें ‘वन्यजीव क्रॉसिंग’ के रूप में भी जाना जाता है। यह वन्यजीव आवासों की एक कड़ी होते है, जो ‘समान वन्यजीव आवास’ के दो बड़े क्षेत्रों को परस्पर जोड़ते हैं।
- यह वन्यजीव आबादी को आपस में जोड़े रखते है, अन्यथा ये वन्यजीव, मानव गतिविधियों या मानव-निर्मित अवसंरचनाओं जैसे सड़कों और राजमार्गों, अन्य बुनियादी ढांचे के विकास, या वनों की कटाई और खेती आदि की वजह से अलग हो जाते हैं।
- ‘इको ब्रिज’ का उद्देश्य वन्यजीव कनेक्टिविटी को बढ़ाना है।
- ये ‘इको ब्रिज’ देशी वनस्पतियों से निर्मित होते हैं अर्थात, इनको भू-दृश्य के साथ सन्निहित रूप देने के लिए क्षेत्र में वनस्पति के रोपण के साथ तैयार किया जाता है।
प्रीलिम्स लिंक:
- एशियाई हाथियों की IUCN संरक्षण स्थिति
- भारत में हाथी गलियारे
- हाथियों का प्रजनन काल
- भारत का विरासत पशु
- गज यात्रा के बारे में
- हाथियों के झुंड का नेतृत्व किसके द्वारा किया जाता है?
- भारत में सबसे अधिक हाथियों की आबादी वाला राज्य।
मेंस लिंक:
मानव-हाथी संघर्षों के प्रबंधन के लिए पर्यावरण मंत्रालय द्वारा सुझाए गए उपायों पर चर्चा कीजिए।
स्रोत: द हिंदू।
विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।
ग्रेट बैरियर रीफ में ‘प्रवाल विरंजन’ का कारण
संदर्भ:
वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि आने वाले हफ्तों में ‘ग्रेट बैरियर रीफ’ (Great Barrier Reef) को अत्यधिक गर्मी की एक संकटपूर्ण अवधि का सामना करना पड़ सकता है, जिसके परिणामस्वरूप, प्राकृतिक दुनिया में अब तक का सबसे बड़ा और विस्तारित ‘प्रवाल विरंजन’ (Coral Bleaching) देखने को मिल सकता है।
‘ग्रेट बैरियर रीफ’ के बारे में:
- ‘ग्रेट बैरियर रीफ समुद्री उद्यान’ (Great Barrier Reef Marine Park), क्वींसलैंड (आस्ट्रेलिया) के उत्तरी-पूर्वी तट के समांतर 2,300 किमी से अधिक की लंबाई में फ़ैली हुई, विश्व की यह सबसे बड़ी मूँगे की दीवार है, और मोटे तौर पर ‘इटली’ के आकार के बराबर है।
- इस उद्यान में लगभग 3,000 प्रवाल भित्तियां (coral reefs), 600 महाद्वीपीय द्वीप (continental islands), 1,625 प्रकार की मछलियां, 133 किस्मों की शार्क और रे मछलियाँ और 600 प्रकार के नरम और कठोर मूंगे (प्रवाल) पाए जाते हैं।
- यह यूनेस्को द्वारा घोषित एक ‘विश्व धरोहर स्थल’ है।
‘प्रवाल भित्तियाँ’ क्या हैं?
प्रवाल भित्तियाँ (Coral Reefs) समुद्र में जैव विविधता के महत्वपूर्ण हॉटस्पॉट होती हैं। ‘प्रवाल’ (Corals), जेलीफ़िश और एनीमोन (Anemones) की भांति ‘नाइडेरिया’ (Cnidaria) वर्ग के जीव होते हैं। ये अलग-अलग पॉलीप्स से मिलकर बने होते हैं और एक साथ मिलकर ‘प्रवाल भित्ति’ का निर्माण करते हैं।
महत्व:
प्रवाल भित्तियाँ, प्रजातियों की एक विस्तृत श्रृंखला का भरण पोषण करती हैं और तटीय जीवमंडल की गुणवत्ता को बनाए रखती हैं।
प्रवाल (मूंगे), मृत होने बाद ‘चूना पत्थर’ के खोल में परिवर्तित हो जाते हैं, और इस प्रकार पानी में कार्बन डाइऑक्साइड के स्तर को नियंत्रित करते हैं। यदि यह प्रक्रिया नहीं होती है, तो समुद्र के पानी में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा में काफी वृद्धि होगी और परिणामस्वरूप ‘पारिस्थितिक आवासों’ (Ecological Niches) पर इसका प्रभाव पड़ेगा।
संकट:
- जलवायु परिवर्तन से प्रवाल भित्तियों को खतरा है।
- जब समुद्र की सतह का तापमान सहनीय सीमा से अधिक बढ़ जाता है, तो प्रवालों को विरंजन की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता हैं।
‘प्रवाल विरंजन’ क्या है?
जब तापमान, प्रकाश या पोषण में होने वाले किसी भी परिवर्तन के कारण प्रवालों पर तनाव बढ़ता है, तो वे अपने ऊतकों में निवास करने वाले ‘जूजैंथिली’ (Zooxanthellae) नामक सहजीवी शैवाल को निष्कासित कर देते हैं जिस कारण प्रवाल सफेद रंग में परिवर्तित हो जाते हैं। इस घटना को ‘कोरल ब्लीचिंग’ या ‘प्रवाल विरंजन’ (Coral bleaching) कहते हैं।
- प्रवालों को अपनी लगभग 90% ऊर्जा, क्लोरोफिल और अन्य वर्णकों से भरपूर ‘जूजैंथिली’ शैवाल से प्राप्त होती है।
- ये शैवाल, अपने पोषक प्रवालों के पीले या लाल भूरे रंग के लिए भी जिम्मेदार होते हैं। इसके अलावा, ‘जूजैंथिली’ जेलीफ़िश के साथ भी ‘अंतः सहजीवी’ / एंडोसिम्बियन्ट्स के रूप में भी रह सकते हैं।
- किसी प्रवाल का विरंजन होने पर यह तत्काल नहीं मरता है, बल्कि मरने के काफी करीब आ जाता है। समुद्र की सतह का तापमान सामान्य स्तर पर लौटने के बाद कुछ प्रवाल इस अवस्था से बचे रह सकते हैं और पुनः स्वस्थ हो सकते हैं।
प्रीलिम्स लिंक:
- ग्रेट बैरियर रीफ, अवस्थिति एवं महत्व।
- विश्व धरोहर स्थल के बारे में
- प्रवाल (मूंगा)
- प्रवाल विरंजन
मेंस लिंक:
प्रवाल विरंजन क्या है? यह दुनिया भर में प्रवाल भित्तियों को किस प्रकार प्रभावित करता है। चर्चा कीजिए।
स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।
विषय: आंतरिक सुरक्षा के लिये चुनौती उत्पन्न करने वाले शासन विरोधी तत्त्वों की भूमिका।
मणिपुर-नागालैंड सीमा पर सीमा विवाद
संदर्भ:
हाल ही में, नागालैंड के एक आदिवासी संगठन ‘दक्षिणी अंगामी पब्लिक ऑर्गनाइजेशन’ (Southern Angami Public Organisation – SAPO) ने विवादित ‘केज़ोल्त्सा क्षेत्र’ (Kezoltsa area) से सशस्त्र कर्मियों और स्थायी अवसंरचनाओं को हटाने में मणिपुर की विफलता को लेकर 24 मार्च से बंद की घोषणा की है।
बंद का असर:
- मणिपुर और नागालैंड दोनों को जोड़ने वाला ‘राष्ट्रीय राजमार्ग -2’, मणिपुर के लिए एक जीवन रेखा है, इस विवादित क्षेत्र से होकर गुजरता है।
- बंद से मणिपुर जाने वाले यात्रियों को असुविधा होने और राज्य में आवश्यक वस्तुओं के पहुचने में दिक्कत होने की संभावना है।
संबंधित विवाद के बारे में:
इस विवाद की जड़ में, तीन नागा जनजातियों – नागालैंड के अंगमी (Angamis) और मणिपुर के माओ (Maos) और मर्मां (Marams) – के बीच एक पुराना भूमि स्वामित्व विवाद है।
- ‘केज़ोल्त्सा’, नागालैंड और मणिपुर की सीमा से लगी सुरम्य ज़ुकोऊ घाटी (Dzukou Valley) की परिधि पर फैला हुआ एक घना जंगल है।
- दो राज्यों में फैली ज़ुकोउ घाटी, सेनापति जिले (मणिपुर) के माओ नागाओं, और कोहिमा (नागालैंड) के दक्षिणी अंगामी नागाओं के बीच पारंपरिक रूप से विवाद का विषय रही है।
विवाद: वर्तमान संदर्भ
- केज़ोल्त्सा (जिसे कोज़ुरु/काज़िंग भी कहा जाता है) ज़ुकोऊ घाटी का हिस्सा नहीं है, लेकिन हाल के दिनों में यह एक चर्चा के केंद्र बन गया है। मर्मा और माओ दोनों जनजातीय समुदाय केज़ोल्त्सा क्षेत्र पर मणिपुर के सेनापति जिले से संबंधित होने का दावा करते है।
- दूसरी ओर, अंगमियों का कहना है कि यह क्षेत्र, अंगामी आदिवासी पैतृक भूमि का हिस्सा है और औपनिवेशिक युग में अंग्रेजों द्वारा “गलत तरीके से” मणिपुर का एक हिस्सा बनाया गया था।
आगे की कार्रवाई:
- पूरी ‘ज़ुकोउ घाटी’ नागालैंड से संबंधित है, यह दावा ‘दक्षिणी अंगामी सार्वजनिक संगठन’ द्वारा किया जाता है, नागालैंड राज्य द्वारा ऐसा कोई दावा नहीं किया जा रहा है।
- अगर जरूरत पड़ी तो केंद्र इस मुद्दे को सुलझाने में मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है।
स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।
प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य
अमरनाथ यात्रा
‘अमरनाथ गुफा’ भारत के जम्मू और कश्मीर में स्थित एक प्रसिद्ध हिंदू तीर्थस्थल है।
- हर साल, हजारों की संख्या में तीर्थयात्री, इस तीर्थस्थान की यात्रा करते हैं।
- अवस्थिति: यह गुफा जम्मू और कश्मीर में, श्रीनगर से लगभग 141 किमी की दूरी पर, 3,888 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।
- अमरनाथ गुफा के अंदर, पानी की बूंदों के जमने के कारण एक ‘स्टैलेग्माइट’ का निर्माण होता है जो गुफा की छत से फर्श पर गिरती है और गुफा के तल से लंबवत रूप से बढ़ती है। इसे हिंदुओं द्वारा शिव लिंग माना जाता है।
हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार:
- यह वह स्थान है जहां शिव ने अपनी दिव्य पत्नी पार्वती को जीवन और अनंत काल का रहस्य समझाया था।
- अमरनाथ मंदिर 18 महा शक्ति पीठों में से एक है, जो हिंदू देवी सती के शरीर के अंग गिरने वाले स्थान की याद दिलाता है।

केरल सरकार द्वारा ‘डिअस-नॉन‘ का आदेश जारी
केरल उच्च न्यायालय द्वारा राज्य में वामपंथी प्रशासन को दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल के दौरान अपने कर्मचारियों को ड्यूटी से दूर रहने से रोकने के लिए कदम उठाने का निर्देश दिए जाने के कुछ घंटों बाद, सरकार ने एक ‘कारोबार-बंदी’ अर्थात ‘डिअस-नॉन‘ (Dies-Non) आदेश जारी किया है।
केरल सेवा नियमों के भाग 1 के नियम 14 ए के तहत, “हड़ताल में भाग लेने वाले कर्मचारियों की अनधिकृत अनुपस्थिति को ‘डिअस-नॉन‘ माना जाएगा”।
‘डिअस-नॉन‘ क्या है?
केरल सेवा नियमों के भाग I के नियम 14 (ए) के अनुसार, हड़ताल में भाग लेने के कारण किसी अधिकारी की अनधिकृत अनुपस्थिति की अवधि को ‘डिअस-नॉन‘ (कोई काम नहीं, कोई वेतन नहीं) के रूप में माना जाएगा।
पृष्ठभूमि:
केंद्र सरकार की “मजदूर विरोधी, किसान विरोधी, जनविरोधी और राष्ट्र विरोधी नीतियों” के खिलाफ केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच द्वारा – 28 और 29 मार्च को हड़ताल का आह्वान किया गया है।
अलोपेसिया अरीएटा
(Alopecia Areata)
‘अलोपेसिया अरीएटा’ (Alopecia Areata) एक ऐसी स्थिति है, जो शरीर में, चकत्तों के रूप में बालों के अचानक झड़ने का कारण बनती है। यह स्थिति तब विकसित होती है जब प्रतिरक्षा प्रणाली बालों के रोम पर हमला करती है, जिसके परिणामस्वरूप बालों का झड़ना शुरू हो जाता है, जिसे आसानी से नहीं देखा जा सकता है।
यह ज्यादातर उन लोगों में होता है जिनके परिवार में ‘ऑटो-इम्यून’ स्थितियों- जैसे कि मधुमेह और थायराइड- का इतिहास रहा है।
यूनेस्को का ‘साहित्य शहर’
(UNESCO’s City of Literature)
कोझीकोड को ‘केरल स्थानीय प्रशासन संस्थान’ (KILA) द्वारा यूनेस्को की मदद से ‘साहित्य के शहर‘ के रूप में ब्रांडेड करने का प्रस्ताव दिया गया था।
यूनेस्को का ‘सिटी ऑफ़ लिटरेचर प्रोग्राम’ व्यापक ‘रचनात्मक शहर नेटवर्क’ अर्थात ‘क्रिएटिव सिटीज़ नेटवर्क’ का एक भाग है।
- ‘क्रिएटिव सिटीज़ नेटवर्क’ की शुरुआत 2004 में की गयी थी, और इसके तहत ‘सात रचनात्मक क्षेत्रों’ में सदस्य शहरों को शामिल किया गया है।
- नेटवर्क में सात रचनात्मक क्षेत्रों में- शिल्प एवं लोक कला, मीडिया कला, फिल्म, डिजाइन, गैस्ट्रोनॉमी, साहित्य और संगीत- शामिल हैं।
- ‘साहित्य के रचनात्मक शहर‘ के रूप में नामित शहर में, उसके साहित्यिक जीवन की देखभाल करने वाले संस्थानों की पर्याप्त संख्या होनी चाहिए।
राष्ट्रीय डॉल्फिन दिवस: 5 अक्टूबर
- भारत सरकार द्वारा 5 अक्टूबर को ‘राष्ट्रीय डॉल्फिन दिवस’ (National Dolphin Day) के रूप में नामित किया गया है।
- इस दिवस को हर साल डॉल्फ़िन के संरक्षण के लिए जागरूकता पैदा करने के लिए एक ऐतिहासिक कदम के रूप में मनाया जाएगा।
- राष्ट्रीय डॉल्फिन दिवस को नामित करने का निर्णय ‘राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड’ (NBWL) की स्थायी समिति द्वारा लिया गया है।












