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[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 28 March 2022

विषयसूची

 

सामान्य अध्ययन-II

  1. कुछ राज्यों में हिंदुओं को अल्पसंख्यक का दर्जा दिया जा सकता है: केंद्र सरकार
  2. ‘राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण’ द्वारा 800 जरूरी दवाओं के दाम में वृद्धि
  3. प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना
  4. बुखारेस्ट नाइन
  5. बिम्सटेक

सामान्य अध्ययन-III

  1. ध्रुवीय विज्ञान और क्रायोस्फीयर (PACER) योजना
  2. अर्थ आवर

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

  1. ओलिव रिडले कछुए
  2. मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल 
  3. ‘स्टेबलकॉइन’ क्या है?
  4. पेनसिलुंगपा हिमनद

 


सामान्य अध्ययनII


 

विषय: भारतीय संविधान- ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और बुनियादी संरचना।

कुछ राज्यों में हिंदुओं को अल्पसंख्यक का दर्जा दिया जा सकता है: केंद्र सरकार

संदर्भ:

हाल ही में, मिजोरम, नागालैंड, मणिपुर, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, पंजाब, लक्षद्वीप, लद्दाख, कश्मीर आदि में हिंदुओं को अल्पसंख्यक का दर्जा प्रदान किए जाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है।

याचिका में की गयी मांगे:

  1. हिंदुओं के लिए अल्पसंख्यक का दर्जा: 2011 की जनगणना के अनुसार, देश के 10 राज्यों में हिंदू अल्पसंख्यक थे। इसलिए हिंदू समुदाय के लोग अल्पसंख्यकों के लिए बनी योजनाओं का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं।
  2. राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शिक्षा संस्थान अधिनियम, 2004 का निरसन: ‘राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शिक्षा संस्थान अधिनियम’, 2004 (National Commission for Minority Education Institution Act, 2004) अर्थात NCMEI अधिनियम की धारा 2(f)  के तहत केंद्र सरकार के लिए भारत में अल्पसंख्यक समुदायों की पहचान करने और उन्हें अधिसूचित करने की शक्ति प्रदान की गयी है। अतः यह धारा, केंद्र सरकार को इस संबंध में अनियंत्रित शक्ति प्रदान करती है और यह “स्पष्ट रूप से एकपक्षीय, तर्कहीन और अपमानजनक” है।
  3. मौलिक अधिकारों का उल्लंघन: यह क़ानून “वास्तविक” अल्पसंख्यकों को लाभों से वंचित करता है और अल्पसंख्यकों को योजनाओं के तहत “मनमाने ढंग से और अनुचित” लाभों का संवितरण का अर्थ बहुसंख्यक आबादी के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करना है (अनुच्छेद 14 और 21)
  4. संविधान के अनुच्छेद 30 का हवाला देते हुए याचिका में कहा गया है, कि धर्म या भाषा के आधार पर अल्पसंख्यकों को अपनी पसंद के शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना-प्रशासन का अधिकार दिया गया है।

इस विषय पर केंद्र का जबाव:

  1. राज्यों के लिए भी, हिंदुओं सहित किसी भी धार्मिक या भाषाई समुदाय को अल्पसंख्यकघोषित करने की शक्ति प्राप्त है।
  2. हिंदू धर्म, यहूदी, बहावाद के अनुयायी, उक्त राज्यों में अपनी पसंद के शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना और प्रशासन कर सकते हैं अथवा नहीं, और राज्य के भीतर अल्पसंख्यक के रूप में उनकी पहचान से संबंधित मामलों पर, राज्य स्तर पर विचार किया जा सकता है।
  3. ‘अल्पसंख्यक कल्याण योजनाएं’ अल्पसंख्यक समुदाय के वंचित छात्रों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए लागू की जाती हैं और ये योजनाएं अल्पसंख्यक समुदाय के सभी लोगों के लिए नहीं होती हैं। ये योजनाएँ केवल प्रावधानों को लागू करती हैं ताकि ‘समावेशिता’ का लक्ष्य हासिल किया जा सके और इसलिए इनको किसी भी अशक्तता या कमजोरी के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है।

कई राज्य सरकारों द्वारा कुछ समुदायों को अल्पसंख्यक का दर्जा प्रदान किया गया है। इसमें शामिल है:

  • महाराष्ट्र सरकार द्वारा राज्य के भीतर यहूदियोंको अल्पसंख्यक समुदाय के रूप में अधिसूचित किया गया है।
  • कर्नाटक सरकार ने, कर्नाटक राज्य के भीतर उर्दू, तेलुगु, तमिल, मलयालम, मराठी, तुलु, लमानी, हिंदी, कोंकणी और गुजराती भाषाओं को अल्पसंख्यक भाषाओं के रूप में अधिसूचित किया है।

अनुच्छेद 29:

  • अनुच्छेद 29 (Article 29) में प्रावधान है, कि भारत के राज्यक्षेत्र या उसके किसी भाग के निवासी नागरिकों के किसी अनुभाग को, जिसकी अपनी विशेष भाषा, लिपि या संस्कृति है, उसे बनाए रखने और संरक्षित करने का का अधिकार होगा।
  • यह अनुच्छेद, धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ-साथ भाषाई अल्पसंख्यकों, दोनों को सुरक्षा प्रदान करता है।
  • हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि इस अनुच्छेद का दायरा केवल अल्पसंख्यकों तक ही सीमित नहीं है, क्योंकि अनुच्छेद में ‘नागरिकों के किसी अनुभाग’ (Any Section of the Citizens) वाक्यांश के इस्तेमाल में अल्पसंख्यकों के साथ-साथ बहुसंख्यक भी शामिल हैं।

अनुच्छेद 30:

अनुच्छेद 30 (Article 30) में कहा गया है कि धर्म या भाषा पर आधारित सभी अल्पसंख्यक-वर्गों को अपनी रुचि की शिक्षा संस्थाओं की स्थापना और प्रशासन का अधिकार होगा

धार्मिक अल्पसंख्यक संस्थानों को प्राप्त विशेष अधिकार:

  1. अनुच्छेद 30(1)(a), के तहत, अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों (MEI) को ‘शिक्षा का अधिकार’ मौलिक अधिकार के रूप में प्राप्त है। यदि किसी कारणवश, किसी अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान की परिसंपत्तियों का राज्य द्वारा अधिग्रहण किया जाता है, तो संस्था को अन्यत्र स्थापित करने के लिए उचित मुआवजा प्रदान किया जाना चाहिए।
  2. अनुच्छेद 15(5) के तहत, अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों (MEI) में आरक्षण संबंधी प्रावधान लागू नहीं होते हैं। 
  3. ‘शिक्षा का अधिकार अधिनियम’ के तहत, ‘अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों’ को समाज के आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षित 25% नामांकन के तहत 6-14 वर्ष की आयु के बच्चों को प्रवेश देने की आवश्यकता नहीं होती है।
  4. ‘सेंट स्टीफंस’ बनाम ‘दिल्ली विश्वविद्यालय’ मामले, 1992 में,  सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार, ‘अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों’ में अल्पसंख्यकों के लिए 50% सीटें आरक्षित हो सकती हैं।

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं, कि वर्ष 2002 के ‘टीएमए पई फाउंडेशन मामले’ में, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार, राज्य अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों’ को शिक्षा में उत्कृष्टता हासिल करने के लिए योग्य शिक्षकों हेतु, राष्ट्रीय हित में एक ‘नियामक व्यवस्था’ का आरंभ कर सकते हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. क्या राज्य को ‘अल्पसंख्यक संस्थाओं’ को विनियमित करने की शक्ति प्राप्त है।
  2. अनुच्छेद 30
  3. अनुच्छेद 14
  4. अनुच्छेद 21
  5. अल्पसंख्यक दर्जा

मेंस लिंक:

देश में किसी धर्म को ‘अल्पसंख्यक दर्जा’ दिए जाने के महत्व की विवेचना कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

‘राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण’ द्वारा 800 जरूरी दवाओं के दाम में वृद्धि

संदर्भ:

हाल ही में, ‘राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण’ (National Pharmaceutical Pricing Authority- NPPA) द्वारा 1 अप्रैल से लगभग 800 जरूरी दवाओं (Essential Drugs) की कीमतों में बढ़ोतरी किए जाने की घोषणा की गयी है। ये दवाएं ‘आवश्यक औषधियों की राष्ट्रीय सूची’ (National List of Essential Medicines- NLEM) में शामिल हैं।

दवाओं की कीमतों में लगभग 10.76% वृद्धि ‘थोक मूल्य सूचकांक’ (WPI) के आंकड़ों के आधार पर की गयी है।

आधार:

‘औषधि मूल्य नियंत्रण आदेश’ 2013 के उपबंध 16 में, ‘राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण’ (NPPA)  को हर साल 1 अप्रैल को या इससे पहले, पिछले कैलेंडर वर्ष के ‘वार्षिक थोक मूल्य सूचकांक’ (WPI)  के आधार पर अनुसूचित दवा-मिश्रणों अर्थात ‘अनुसूचित फॉर्मूलेशन’ (Scheduled Formulations) की अधिकतम कीमतों को संशोधित करने की अनुमति दी गयी है, और NPPA द्वारा इन संशोधित कीमतों को हर साल 1 अप्रैल को अधिसूचित किया जाता है।

Current Affairs

आवश्यक औषधियों की राष्ट्रीय सूची (NLEM) के बारे में:

औषधि मूल्य नियंत्रण आदेश, 2013 के प्रावधानों के अंतर्गत, ‘राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण’ (NPPA) द्वारा केवल आवश्यक औषधियों की राष्ट्रीय सूची (NLEM) में दर्ज दवाओं की कीमतों पर निगरानी और नियंत्रण किया जाता है। 

  • आवश्यक दवाएं (Essential medicines) वे होती हैं, जो आबादी के अधिकांश लोगों की स्वास्थ्य संबंधी प्राथमिकता से संबंधित आवश्यकताओं को पूरा करती हैं। 
  • NLEM का मुख्य उद्देश्य तीन महत्वपूर्ण पहलुओं, अर्थात लागत, सुरक्षा और प्रभावकारिता पर विचार करते हुए दवाओं के तर्कसंगत उपयोग को बढ़ावा देना है।

NPPA के बारे में:

दवाओं के मूल्य निर्धारण और सस्ती कीमत पर दवाओं की उपलब्धता और पहुंच सुनिश्चित करने के लिए के लिए NPPA की स्थापना 29 अगस्त, 1997 को एक स्वतंत्र नियामक के रूप में की गयी थी। 

  • राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण’ (NPPA), औषधि विभाग (डीओपी), रसायन और उर्वरक मंत्रालय के एक संलग्न कार्यालय के रूप कार्य करता है, जिसे भारत सरकार के प्रस्ताव के तहत गठित किया गया था। 
  • इसका गठन, औषधि (मूल्य नियंत्रण) आदेश (DPCO), 1995-2013 के तहत नियंत्रित थोक दवाओं और फॉर्मूलेशन की कीमतों को तय / संशोधित करने, और देश में दवाओं की कीमत और उपलब्धता को प्रवर्तित करने के लिए किया गया था।
  • NPPA के कार्यों में समय-समय पर जारी दवा (मूल्य नियंत्रण) आदेशों के तहत अनुसूचित दवाओं की कीमतों का निर्धारण और संशोधन शामिल है, साथ ही यह कीमतों की निगरानी और प्रवर्तन और गैर-अनुसूचित दवाओं सहित सभी दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता और पहुंच सुनिश्चित करता है। 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. PMRU कौन स्थापित कर सकता है?
  2. PMRU की स्थापना में राज्यों की भूमिका।
  3. DPCO विनियमन के संदर्भ में NPPA के कार्य।
  4. NPPA के कार्य
  5. NLEM क्या है? इस सूची का रखरखाव कौन करता है?
  6. औषधि मूल्य निर्धारण आदेश क्या है?
  7. आपदा प्रबंधन अधिनियम’, 2005 की धारा 10 (2) (L)

मेंस लिंक:

मूल्य निगरानी और संसाधन इकाई (PMRU) की भूमिका और कार्यों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: केन्द्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन; इन अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय।

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना


(Pradhan Mantri Garib Kalyan Anna Yojana)

संदर्भ:

समाज के गरीब और कमजोर वर्गों के प्रति चिंता एवं संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए, केंद्र सरकार द्वारा ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना’ (PM-GKAY) की अवधि छह माह और यानी सितंबर 2022 (चरण VI) तक बढ़ा दी गयी है। 

  • PM-GKAY का पांचवा चरण, मार्च 2022 में समाप्त होने वाला था। 
  • उल्‍लेखनीय है कि PM-GKAY को अप्रैल 2020 से ही दुनिया के सबसे बड़े खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम के रूप में लागू किया जा रहा है। 

PM-GKAY के बारे में:

कोविड -19 महामारी के कारण जारी संकट के दौरान, केंद्र सरकार द्वारा प्रभावित आबादी को मुफ्त खाद्यान्न प्रदान करने हेतु ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना’ (PM-GKAY) की घोषणा की गयी थी।

  • यह योजना, गरीबों को कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई लड़ने में सहायता करने हेतु जारी किए गए ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज’ (PMGKP) का एक हिस्सा है।
  • इस योजना के कार्यान्वयन हेतु नोडल मंत्रालय ‘वित्त मंत्रालय’ है।
  • शुरुआत में यह योजना, तीन महीने की अवधि (अप्रैल, मई और जून 2020) के लिए घोषित की गयी थी, और इसमें 80 करोड़ राशन कार्डधारकों को शामिल किया गया था। बाद में, इसे समय समय पर आगे की अवधि के लिए बढाया जाता रहा है।

योजना के प्रमुख बिंदु:

  • आरंभ में, इस योजना के तहत 80 करोड़ व्यक्ति, यानी भारत की लगभग दो-तिहाई आबादी को कवर किया गया था।
  • बीमा योजना के तहत COVID-19 से लड़ने वाले प्रति स्वास्थ्य कार्यकर्ता को 50 लाख रुपये का बीमा कवर प्रदान किया जाएगा।
  • 80 करोड़ गरीब लोगों को अगले तीन महीने तक हर महीने 5 किलो गेहूं या चावल और 1 किलो पसंदीदा दाल मुफ्त प्रदान की जाती है।
  • विस्तारित पीएम-जीकेएवाई के अंतर्गत, प्रत्येक लाभार्थी को एनएफएसए के तहत मिल रहे खाद्यान्न के अपने सामान्य कोटे के अलावा प्रति-व्यक्ति प्रति-माह, अतिरिक्त 5 किलो निःशुल्क राशन मिलेगा। इसका मतलब है कि प्रत्येक गरीब परिवार को सामान्य मात्रा से लगभग दोगुना राशन मिलेगा।     
  • 20 करोड़ महिला जन धन खाताधारकों को अगले तीन महीनों के लिए 500 रुपये प्रति माह दिए जाएंगे।
  • 13.62 करोड़ परिवारों को लाभ पहुंचाने के लिए मनरेगा मजदूरी को 182 रुपये से बढ़ाकर 202 रुपये प्रतिदिन किया जाएगा।
  • 8.7 करोड़ किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए सरकार मौजूदा पीएम किसान योजना के तहत अप्रैल के पहले सप्ताह में किसानों को 2,000 रुपये का भुगतान करेगी।

व्यय:

भारत सरकार द्वारा इस योजना के तहत, खाद्य सब्सिडी और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को अंतर-राज्य परिवहन आदि के लिए केंद्रीय सहायता के रूप में अनुमानित 26,000 करोड़ रुपये से अधिक के सभी खर्च वहन किए जाएंगे। 

चुनौतियाँ:

  • इस योजना को लागू करने में, एक प्रमुख मुद्दा यह है कि ‘राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम’ के लाभार्थियों की संख्या पिछली जनगणना (2011) पर आधारित हैं।
  • पिछली जनगणना के बाद से, खाद्य-सुरक्षा से बाहर लोगों की संख्या में वृद्धि हुई है और इन्हें ‘राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम’ के अंतर्गत प्रदान किए जाने वाले लाभ नहीं मिल पाते हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. बफर स्टॉक और खाद्य सुरक्षा
  2. सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS)
  3. PM-GKAY
  4. ‘राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम’ (NFSA)

मेंस लिंक:

‘राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम’ के महत्व की विवेचना कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार।

बुखारेस्ट नाइन


(Bucharest Nine)

संदर्भ:

भारत में पूर्वी यूरोपीय नौ देशों के राजदूतों ने संयुक्त रूप से, भारतीय जनता को “यूक्रेन में पूर्व नियोजित, अकारण और अनुचित रूसी आक्रमण” के बारे में बुनियादी तथ्यों से परिचित कराने के लिए एक लेख लिखा है। पूर्वी यूरोप के इन नौ देशों को ‘बुखारेस्ट नाइन’ (Bucharest Nine – B9) कहा जाता है

‘बुखारेस्ट नाइन’( B9) देश, डोनबास में युद्ध शुरू होने और वर्ष 2014 में रूस द्वारा क्रीमिया प्रायद्वीप पर कब्जा करने के बाद से, यूक्रेन के खिलाफ रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की आक्रामकता के आलोचक रहे हैं।

‘बुखारेस्ट नाइन’ के बारे में:

‘बुखारेस्ट नाइन’ (Bucharest Nine)  पूर्वी यूरोप में नाटो गठबंधन में शामिल नौ देशों का एक समूह है। ये देश शीत युद्ध की समाप्ति के बाद अमेरिका के नेतृत्व वाले ‘सैन्य गठबंधन’ का हिस्सा बन गए थे।

  • B9 की स्थापना 4 नवंबर, 2015 को हुई थी और इसका नामकारण ‘रोमानिया की राजधानी बुखारेस्ट’ के नाम पर किया गया है।
  • इस समूह का गठन 2014 से रोमानिया के राष्ट्रपति ‘क्लॉस इओहानिस’ तथा अगस्त 2015 में पोलैंड के राष्ट्रपति बने ‘आंद्रेज डूडा’ की पहल पर किया गया था।

सदस्य:

‘बुखारेस्ट नाइन’ में रोमानिया, पोलैंड, हंगरी, बुल्गारिया, चेक गणराज्य, स्लोवाकिया और तीन बाल्टिक गणराज्य – एस्टोनिया, लातविया और लिथुआनिया – शामिल हैं।

  • B9 के सभी सदस्य ‘यूरोपीय संघ’ (EU) और ‘उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन’ (NATO) का हिस्सा हैं।
  • ये सभी नौ देश, पहले पूर्ववर्ती सोवियत संघ के साथ घनिष्ठ रूप से जुड़े हुए थे, लेकिन बाद में इन देशों लोकतंत्र के मार्ग का चुनाव कर लिया।

B9 के कार्य:

  • ‘उत्तर-अटलांटिक गठबंधन’ में चल रही प्रक्रियाओं में अपने विशिष्ट योगदान को स्पष्ट करने के लिए ‘बुखारेस्ट नाइन’( B9), प्रतिभागी संबद्ध देशों के बीच संवाद और परामर्श को गहरा करने के लिए एक मंच प्रदान करता है।
  • यह समूह, नाटो सदस्य देशों की सुरक्षा की एकजुटता और अविभाज्यता के सिद्धांतों का पूर्ण अनुपालन करते हुए कार्य करता है।

इंस्टा जिज्ञासु:

रोमानिया, पोलैंड, हंगरी और बुल्गारिया, पूर्ववर्ती सोवियत संघ के नेतृत्व में ‘वारसॉ संधि सैन्य गठबंधन’ पर पूर्व हस्ताक्षरकर्ता देश हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. बुखारेस्ट नाइन
  2. शीत युद्ध
  3. यूरोपीय संघ
  4. उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन
  5. थ्री सीज़ इनिशिएटिव
  6. बुखारेस्ट नाइन देशों की अवस्थिति

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार।

बिम्सटेक


(BIMSTEC)

संदर्भ:

बंगाल की खाड़ी बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग पहल अर्थात ‘बिम्सटेक’ (Bay of Bengal Multi-Sectoral Technical and Economic Cooperation – BIMSTEC) इस वर्ष अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूरे कर रहा है। इसका गठन जून 1997 में बैंकॉक में शुरू हुआ था।

‘बिम्सटेक’ का पांचवां शिखर सम्मेलन 30 मार्च को कोलंबो में आयोजित होगा।

बिम्सटेक (BIMSTEC) क्या है?

बिम्सटेक (BIMSTEC), दक्षिण एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया के सात देशों का एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है। वर्ष 1997 में, बंगाल की खाड़ी क्षेत्र को एकीकृत करने के प्रयास में इस समूह की स्थापना की गई थी। मूल रूप से इस समूह में बांग्लादेश, भारत, श्रीलंका और थाईलैंड शामिल थे, बाद में म्यांमार, नेपाल और भूटान भी इसके सदस्य बन गए।  

बिम्सटेक में, अब दक्षिण एशिया के पांच देश और आसियान के दो देश शामिल हैं तथा यह दक्षिण एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया के मध्य एक सेतु की भूमिका भी निभाता है। इस समूह में मालदीव, अफगानिस्तान और पाकिस्तान को छोड़कर दक्षिण एशिया के सभी प्रमुख देश शामिल हैं।

बिम्सटेक क्षेत्र का महत्व:

  • बिम्सटेक के सात देशों और इसके आसपास में विश्व की कुल आबादी का लगभग पांचवा भाग (22%) निवास करता है, और इनका संयुक्त रूप से सकल घरेलू उत्पाद $ 2.7 ट्रिलियन के करीब है।
  • बंगाल की खाड़ी, प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर है, जिसका अभी तक दोहन नहीं किया गया है। विश्व में व्यापार की जाने वाली कुल सामग्री का लगभग एक-चौथाई भाग, प्रतिवर्ष बंगाल की खाड़ी से होकर गुजरता है।   

भारत के लिए बिम्सटेक का महत्व:

  • इस क्षेत्र की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में भारत के लिए यह क्षेत्र काफी महत्वपूर्ण है।
  • बिम्सटेक, न केवल दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया के लोगों को जोड़ता है, बल्कि महान हिमालय और बंगाल की खाड़ी की पारिस्थितिकी को परस्पर संबद्ध करता है।
  • भारत के लिए, यह नेबरहुड फर्स्टऔर एक्ट ईस्ट‘ की प्रमुख विदेश नीति प्राथमिकताओं को कार्यान्वित करने के लिए एक प्राकृतिक मंच है।
  • नई दिल्ली के लिए, बिम्सटेक से सम्बद्धता का एक प्रमुख कारण इस क्षेत्र की विशाल संभावनाएं हैं, जो दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया के देशों के साथ महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग खोलती हैं।
  • लगभग 300 मिलियन लोग या भारत की लगभग एक-चौथाई आबादी, बंगाल की खाड़ी से सटे चार तटीय राज्यों (आंध्र प्रदेश, उड़ीसा, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल) में निवास करती है।
  • रणनीतिक दृष्टिकोण से, बंगाल की खाड़ी, जोकि मलक्का जलडमरूमध्य के लिए एक कीप (funnel) की भांति है, लगातार प्रभावशाली होते जा रहे चीन के लिए हिंद महासागर तक अपनी पहुँच बनाए रखने के लिए, एक प्रमुख थिएटर के रूप में उभरा है। 
  • चूंकि चीन द्वारा हिंद महासागर में पनडुब्बियों तथा जहाजों की आवाजाही में बढ़ोत्तरी सहित बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में प्रभुत्व जमाने वाली गतिविधियाँ की जा रही हैं, ऐसे में बिम्सटेक देशों के साथ अपने संबंधों को मजबूत करना भारत के हित में होगा।

    प्रीलिम्स लिंक:

  1. बिमस्टेक के बारे में।
  2. सदस्य देश।
  3. उद्देश्य।

मेंस लिंक:

भारत के लिए बिमस्टेक के महत्व पर चर्चा कीजिए।

https://www.google.com/amp/s/www.thehindu.com/news/international/with-invite-to-myanmar-fm-bimstec-steps-out-of-shadows-out-of-line-with-asean/article65264517.ece/amp/

स्रोत: द हिंदू।

 


सामान्य अध्ययनIII


 

विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास। 

ध्रुवीय विज्ञान और क्रायोस्फीयर (PACER) योजना

संदर्भ:

हाल ही में, सरकार द्वारा ‘ध्रुवीय विज्ञान और क्रायोस्फीयर (पेसर) योजना (Polar Science and Cryosphere (PACER) scheme) को 2021-2026 तक जारी रखने के लिए अनुमोदित किया गया है।

PACER योजना के बारे में:

ध्रुवीय विज्ञान और क्रायोस्फीयर अनुसंधान (PACER) योजना में, अंटार्कटिक कार्यक्रम, भारतीय आर्कटिक कार्यक्रम, दक्षिणी महासागर कार्यक्रम और क्रायोस्फीयर और जलवायु कार्यक्रम शामिल हैं।

इस योजना को ‘पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय’ के अधीन एक स्वायत्त संस्थान, ‘राष्ट्रीय ध्रुवीय और महासागर अनुसंधान केंद्र’ (National Centre for Polar and Ocean Research – NCPOR) के माध्यम से सफलतापूर्वक कार्यान्वित किया जा रहा है।

‘क्रायोस्फीयर’ क्या है?

‘क्रायोस्फीयर’ (Cryosphere) पृथ्वी तंत्र में जमा हुआ जल-भाग होता है। पृथ्वी पर कुछ स्थान इतने ठंडे होते हैं कि वहां पानी जम जाता है। साल में कुछ समय के लिए इन हिम या बर्फ क्षेत्रों में तापमान 0°C (32°F) से नीचे पहुँच जाता है, और तब ये क्रायोस्फीयर का निर्माण करते हैं।

“क्रायोस्फीयर” शब्द मूलतः ग्रीक शब्द “क्रिओस” (Krios) से लिया गया है, जिसका अर्थ ‘ठंडा’ होता है।

‘क्रायोस्फीयर’ का एक हिस्सा पृथ्वी के स्थलीय भाग में पायी जाने वाली हिम और बर्फ होती है।

  • इसमें क्रायोस्फीयर के सबसे बड़े भाग, जैसेकि ग्रीनलैंड और अंटार्कटिका में पाई जाने वाली महाद्वीपीय हिम चादरें, हिम टोपी (ICE CAPS), ग्लेशियर और हिमावरण एवं पर्माफ्रॉस्ट क्षेत्र शामिल होते हैं।
  • जब महाद्वीपीय हिम, स्थलीय क्षेत्र से समुद्र की ओर बहती हुए सतह पर तैरती है, तो इसे ‘हिम शेल्फ’ (shelf ice) कहा जाता है।

क्रायोस्फीयर का दूसरा भाग, पानी में पाया जाने वाला हिम या बर्फ होता है। 

  • इसमें समुद्र के जमे हुए हिस्से, जैसेकि – अंटार्कटिका और आर्कटिक के आसपास का जमा हुआ जल शामिल होता है। 
  • इस भाग में, मुख्य रूप से ध्रुवीय क्षेत्रों में पाई जाने वाली जमी हुई नदियाँ और झीलें भी शामिल होती हैं।Current Affairs

     

क्रायोस्फीयर का महत्व:

क्रायोस्फीयर के घटक (components of the cryosphere) पृथ्वी की जलवायु में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

  • हिम और बर्फ, सूर्य से निकलने वाली ऊष्मा को परावर्तित करते हैं, जिससे हमारे ग्रह के तापमान को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
  • चूंकि, ध्रुवीय क्षेत्र जलवायु परिवर्तन के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील हैं, अतः क्रायोस्फीयर उन पहले स्थानों में से एक हो सकता है जहां वैज्ञानिकों द्वारा ‘जलवायु में होने वाले वैश्विक परिवर्तनों’ की पहचान आसानी से की जा सकती है।

ध्रुवीय विज्ञान और क्रायोस्फीयर अनुसंधान (PACER) योजना में निम्नलिखित छह घटक शामिल हैं।

  1. ध्रुवीय अनुसंधान पोत का निर्माण
  2. अंटार्कटिका में तीसरे शोध-केंद्र का निर्माण
  3. आर्कटिक में भारतीय वैज्ञानिक अभियान
  4. अंटार्कटिका – ध्रुवीय अभियान
  5. मैत्री स्टेशन का प्रतिस्थापन
  6. दक्षिणी महासागर

PACER योजना का उद्देश्य: 

ध्रुवीय विज्ञान और क्रायोस्फीयर प्रणाली के बारे में हमारी जानकारी में सुधार करना।

Current Affairs

हाल के तीन वर्षों में PACER योजना की प्रमुख उपलब्धियां:

  1. अंटार्कटिका के लिए 39वें और 40वें भारतीय वैज्ञानिक अभियान को अंजाम दिया।
  2. अंटार्कटिका में 41वां भारतीय वैज्ञानिक अभियान जारी है।
  3. मैत्री और भारती स्टेशनों पर स्वचालित मौसम स्टेशनों, एयरोसोल और ग्रीनहाउस गैस सांद्रता को मापने के लिए सेंसर का एक सूट युक्त साफ-हवा वायुमंडलीय वेधशालाएं स्थापित की गई हैं।
  4. वर्ष 2019-20 आर्कटिक अभियान के दौरान हिमनद विज्ञान, समुद्री विज्ञान, ध्रुवीय जीव विज्ञान और वायुमंडलीय विज्ञान से संबंधित तेईस अनुसंधान परियोजनाओं को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया।
  5. हाइड्रोफोन प्रणाली के साथ ‘IndARC मूरिंग सिस्टम’ (IndARC mooring system) को सफलतापूर्वक पुनः प्राप्त किया गया और कोंग्सफजॉर्डन, स्वालबार्ड में तैनात किया गया।
  6. पश्चिमी हिमालय के लाहौल-स्पीति क्षेत्र के ‘चंद्रा बेसिन’ में छह बेंचमार्क ग्लेशियरों में ग्लेशियोलॉजिकल फील्ड अभियान चलाए गए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

 

अर्थ ऑवर 


(Earth Hour)

संदर्भ:

हर साल मार्च के आखिरी शनिवार को रात 8:30 बजे ‘अर्थ ऑवर’ (Earth Hour) मनाया जाता है। और पहले हर साल इसे मनाने के लिए जनता सड़कों पर आ जाती थी, किंतु कई देशों में अभी लॉकडाउन की स्थिति है, इसीलिये, इस साल ‘प्रसिद्ध पर्यावरण पहल’ को डिजिटल प्रारूप में परिवर्तित कर दिया गया है।

अर्थ ऑवर 2022 की थीम: “हमारे भविष्य को आकार दें” (Shape Our Future) होगी। यह हम सभी और हमारी दुनिया के लिए एक महत्वपूर्ण वर्ष है। हमारी दुनिया को प्रभावित करने वाले गंभीर मुद्दों के बारे में आज जागरूकता बढ़ाकर #ShapeOurFuture करना, हम पर निर्भर करता है।

‘अर्थ ऑवर’ के बारे में:

‘अर्थ ऑवर’ (Earth Hour), संरक्षण और स्थायी ऊर्जा को बढ़ावा देने में अग्रणी संगठन ‘विश्व वन्यजीव कोष’ (World Wildlife Fund) द्वारा 2007 से हर साल आयोजित किया जाने वाला एक वार्षिक कार्यक्रम है।

‘अर्थ ऑवर’ के दौरान, ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव को कम करने और जलवायु परिवर्तन और वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में मदद करने के लिए नागरिकों को एक घंटे के लिए अपनी लाइट बंद करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

पृष्ठभूमि:

यह 2007 में आस्ट्रेलिया के सिडनी शहर में एक ‘लाइट-आफ इवेंट’ के रूप में शुरू हुआ था। तब से इस पहल को दुनिया भर के 7000 से अधिक शहरों और कस्बों में मनाया जाता है। आज, ‘अर्थ ऑवर’ पर्यावरणीय मुद्दों की एक विस्तृत श्रृंखला पर, मुख्यधारा के व्यापक समुदायों को शामिल करता है। एक घंटे का यह कार्यक्रम, एक बड़े आंदोलन का प्रमुख चालक बना हुआ है।

अर्थ ऑवर और अर्थ डे अंतर:

‘अर्थ ऑवर’ एक जलवायु परिवर्तन पहल है, जहां लोग अपने बिजली के उपयोग को कम करते हैं, जबकि  22 अप्रैल को मनाया जाने वाला ‘पृथ्वी दिवस’ (Earth Day) लोगों को पेड़ लगाने, नियमित रूप से पुनर्चक्रण करने और ग्रह को स्वच्छ रखने के लिए प्रेरित करके हमारे प्राकृतिक पर्यावरण का जश्न मनाता है।

‘अर्थ ऑवर’ की आवश्यकता:

  • ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन ने, पिछले एक दशक से भी अधिक समय में वैज्ञानिक विमर्श पर अपना वर्चस्व कायम किया हुआ है। दुनिया की लगातार बढ़ती आबादी और जलवायु परिवर्तन ने अन्य प्रजातियों के साथ-साथ मानव जाति को भी एक बड़े जोखिम में डाल दिया है।
  • ग्लोबल वार्मिंग, लगातार बढ़ते औद्योगीकरण के कारण प्रदूषण का बढ़ता स्तर, घटते वन क्षेत्र और समुद्र का बढ़ता स्तर कुछ ऐसे खतरे हैं जो पृथ्वी पर जीवन के कामकाज को काफी प्रभावित करते हैं।
  • हालांकि पृथ्वी पर सबसे बड़े प्रदूषक, बड़े उद्योग हैं, फिर भी WWF जनता को प्रतिकूल जलवायु के आसन्न खतरों के बारे में अधिक से अधिक जागरूक करने की कोशिश करता है ताकि वे संबंधित सरकारों पर पर्यावरण के अनुकूल नीतियों और कानूनों को बनाने के लिए दबाव डाल सकें।
  • अर्थ ऑवर के माध्यम से, WWF का लक्ष्य दुनिया भर के लोगों को अधिक संवहनीय जीवन शैली अपनाने के लिए वचनबद्ध करना है। एक घंटे के लिए लाइट बंद करना मात्र एक वार्षिक याद दिलाने वाला कार्यक्रम है, कि अगर दुनिया ने अपने तरीके नहीं बदले, तो हम सब सचमुच एक अंधेरे युग की ओर बढ़ जायंगे।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


 

ओलिव रिडले कछुए

ओलिव रिडले कछुए (Olive ridley turtles) विश्व में पाए जाने वाले सभी समुद्री कछुओं में सबसे छोटे और सर्वाधिक संख्या में हैं।

  • ये प्रशांत, अटलांटिक और भारतीय महासागरों के उष्ण जल में निवास करते हैं।
  • ओलिव रिडले कछुए, तथा इसी प्रजाति के केमप्स रिडले कछुए (Kemps ridley turtle), अपने विशिष्ट सामूहिक घोसलों के लिए जाने जाते हैं , इन घोसलों को अरिबाड़ा (Arribada) कहा जाता है। 
  • समुद्र तट पर इन घोसलों में मादा ओलिव रिडले कछुए हजारों की संख्या में एक साथ अंडे देने के लिए हर साला आती हैं।
  • ओडिशा के गंजम जिले में रुशिकुल्या नदी तट, गहिरमाथा तट और देबी नदी का मुहाना, ओडिशा में ओलिव रिडले कछुओं द्वारा अंडे देने के प्रमुख स्थल हैं।

संरक्षण स्थिति:

  • वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972: अनुसूची- 1
  • IUCN रेड लिस्ट: संवेदनशील (Vulnerable)
  • CITES: परिशिष्ट- I

हर साल, 1980 के दशक की शुरुआत से भारतीय तटरक्षक बल द्वारा “ऑपरेशन ओलिविया” (Operation Olivia) चलाया जाता है, जिसके दौरान नवंबर से दिसंबर तक ‘घोसला बनाने और प्रजनन करने’ हेतु ओडिशा तट पर एकत्र होने वाले ‘ओलिव रिडले कछुओं’ की रक्षा करने में मदद की जाती है।

 

मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल 

मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (Medium Range Surface to Air Missile – MRSAM) एक उच्च प्रतिक्रिया, त्वरित प्रतिक्रिया, लंबवत रूप से लॉन्च की जाने वाली सुपरसोनिक मिसाइल है, जिसे दुश्मन के हवाई खतरों – मिसाइल, विमान, निर्देशित बम, हेलीकॉप्टर – को बेअसर करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

यह MRSAM संस्करण भारतीय सेना द्वारा उपयोग के लिए डीआरडीओ और इज़राइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (IAI), इज़राइल द्वारा संयुक्त रूप से विकसित एक सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल है।

 

‘स्टेबलकॉइन’ क्या है?

  • स्टेबलकॉइन (Stablecoin) एक प्रकार की क्रिप्टोकरेंसी है, जो आम तौर पर सरकार द्वारा समर्थित मुद्रा से विशिष्ट रूप से जुड़ी होती है।
  • वर्तमान में मौजूद दर्जनों स्टेबलकॉइन में से अधिकांश के द्वारा डॉलर को अपनी बेंचमार्क संपत्ति के रूप में उपयोग किया जाता है, लेकिन कई स्टेबलकॉइन, सरकारों द्वारा जारी की गई यूरो और येन जैसी अन्य वैध मुद्राओं से भी जुड़े हुए हैं।
  • नतीजतन, बिटकॉइन और एथेरियम जैसी हाई-प्रोफाइल क्रिप्टोकरेंसी के विपरीत, स्टेबलकॉइन की कीमत में बहुत कम उतार-चढ़ाव होता है।
  • स्टेबलकॉइन काफी उपयोगी होते हैं, क्योंकि इनके माध्यम से लोगों को बिटकॉइन जैसे निवेश के रूप में कार्य करने वाली क्रिप्टोकरेंसी में अधिक निर्बाध रूप से लेन-देन करने की सुविधा प्राप्त होती है। स्टेबलकॉइन, पुरानी दुनिया के मुद्रा और नई दुनिया के क्रिप्टो के बीच एक सेतु का निर्माण करते हैं।
  • 2014 में बनाया गया पहला स्टेबलकॉइन ‘टीथर’ (Tether) था, जिसके बाद कई अन्य स्टेबलकॉइन बनाई जा चुकी हैं। 

पेनसिलुंगपा हिमनद

(Pensilungpa Glacier)

  • पेनसिलुंगपा ग्लेशियर‘ (Pensilungpa Glacier) ज़ांस्कर, लद्दाख में स्थित है।
  • तापमान में वृद्धि और सर्दियों के दौरान वर्षा में कमी के कारण यह पीछे हटता जा रहा है।
  • ज़ांस्कर रेंज, लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेश में अवस्थित एक पर्वत श्रृंखला है जो ज़ांस्कर को लद्दाख से अलग करती है।
  • भूवैज्ञानिक रूप से, ज़ांस्कर रेंज ‘टेथिस हिमालय’ का हिस्सा है।
  • लद्दाख को कश्मीर से जोड़ने वाले ‘मार्बल दर्रा’ और कई अन्य दर्रे इस क्षेत्र में स्थित हैं।
  • 13000 फीट ऊंचा जोजिला दर्रा, ज़ांस्कर रेंज के चरम उत्तर-पश्चिम में अवस्थित है।